व्यापार
सेंसेक्स-निफ्टी में कमजोरी, निवेशकों की चिंता बढ़ी
23 Jun, 2026 10:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत दबाव के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में मुनाफावसूली के चलते प्रमुख सूचकांक लाल निशान में आ गए। हालिया रिकॉर्ड तेजी के बाद निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार में सुस्ती देखी गई। इसके अलावा, एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और विदेशी फंडों की लगातार बिकवाली ने भी घरेलू सेंटीमेंट पर असर डाला।
शुरुआती दौर में 30 शेयरों वाला बीएसई (BSE) सेंसेक्स 57.43 अंक गिरकर 77,061.94 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी (NSE Nifty) 31.6 अंक की गिरावट के साथ 24,071.30 पर ट्रेड करता दिखा। हालांकि, बाद में निचले स्तरों पर आई खरीदारी से दोनों सूचकांकों ने मामूली रिकवरी की और सेंसेक्स 29.75 अंक सुधरकर 77,123.82 तथा निफ्टी 20.80 अंक बढ़कर 24,123.65 के स्तर पर पहुंच गया।
दिग्गज आईटी शेयरों में बिकवाली, बैंकिंग सेक्टर ने संभाला
बाजार खुलते ही चौतरफा दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स की टॉप 30 कंपनियों में से आईटी सेक्टर के बड़े शेयरों जैसे इंफोसिस, टीसीएस (TCS), टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक में गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा टाटा स्टील और हिंदुस्तान यूनिलीवर भी घाटे में रहे। दूसरी तरफ, सन फार्मा, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और एनटीपीसी के शेयरों में तेजी ने बाजार को सहारा दिया। संस्थागत आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बाजार से 635.91 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
बड़ी ब्लॉक डील से वेदांता के शेयरों में भारी गिरावट
आज के कारोबार में वेदांता लिमिटेड के शेयरों में भारी हलचल रही। कंपनी में एक बड़ी ब्लॉक डील होने की खबर से इसके शेयर 6% तक टूट गए। इस सौदे के तहत करीब 2,149 करोड़ रुपये की वैल्यू वाले 7.3 करोड़ शेयरों का ट्रांसफर 292 रुपये प्रति शेयर के भाव पर किया गया। इस बड़े एग्रीमेंट के सामने आने के बाद निवेशकों ने वेदांता के शेयरों में बिकवाली तेज कर दी।
कमजोर वैश्विक संकेत और कच्चे तेल में नरमी
अंतरराष्ट्रीय बाजारों की बात करें तो आज एशियाई बाजारों में मंदी का माहौल रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 6% तक लुढ़क गया। इसके साथ ही जापान का निक्केई, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। वहीं, कमोडिटी मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी राहत रही। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.49% की गिरावट के साथ 77.53 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक है।
डॉलर के मुकाबले रुपया मामूली कमजोर
विदेशी मुद्रा बाजार में आज भारतीय रुपये की शुरुआत हल्की कमजोरी के साथ हुई। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 2 पैसे टूटकर 94.69 के स्तर पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.6775 पर बंद हुआ था।
पूर्व नागरिक उड्डयन सचिव खरोला को एअर इंडिया में अहम जिम्मेदारी
23 Jun, 2026 09:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: एअर इंडिया ने अपने उच्च स्तरीय प्रबंधन में एक बहुत बड़ा फेरबदल किया है। देश के पूर्व नागरिक उड्डयन सचिव प्रदीप सिंह खरोला की कंपनी में 'कार्यकारी सलाहकार' के पद पर वापसी हुई है। वे सीधे एअर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को रिपोर्ट करेंगे और मैनेजमेंट कमेटी के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में काम संभालेंगे।
कंपनी के एक आंतरिक पत्र से यह जानकारी सामने आई है कि खरोला तत्काल प्रभाव से एक्टिव हो गए हैं। यह बदलाव ऐसे समय पर हो रहा है जब एअर इंडिया के मौजूदा सीईओ और एमडी कैंपबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और वे आने वाले कुछ महीनों में कंपनी छोड़ देंगे। बता दें कि जनवरी 2022 में टाटा समूह द्वारा कमान संभालने के बाद से एयरलाइन लगातार भारी घाटे और अन्य समस्याओं से जूझ रही है।
प्रदीप सिंह खरोला की वापसी क्यों है बेहद अहम?
प्रदीप सिंह खरोला के पास एअर इंडिया को संभालने का पुराना और बेहतरीन अनुभव है। उन्होंने साल 2017 से 2019 तक एयरलाइन के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (CMD) के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। इसके बाद, नागरिक उड्डयन सचिव के तौर पर उन्होंने एअर इंडिया के निजीकरण की पूरी प्रक्रिया में एक मुख्य भूमिका निभाई थी। जाने वाले सीईओ कैंपबेल विल्सन ने भी माना है कि खरोला का यह अनुभव नए सीईओ के आने तक कंपनी में लीडरशिप के बदलाव को आसान और मजबूत बनाएगा।
एअर इंडिया के सामने खड़ीं बड़ी चुनौतियाँ
टाटा ग्रुप के हाथों में आने के बाद भी एअर इंडिया की राह आसान नहीं रही है। एयरलाइन इस वक्त भारी वित्तीय नुकसान से गुजर रही है। ऐसे नाजुक समय पर सीईओ कैंपबेल विल्सन का इस्तीफा कंपनी के लिए एक बड़ा झटका है। एयरलाइन को अब एक ऐसे नए नेतृत्व की तलाश है जो इसे इस संकट से बाहर निकाल सके, और यही वजह है कि खरोला के अनुभवों पर टाटा समूह ने इतना बड़ा भरोसा जताया है।
घाटे से उबरने के लिए उठाए जा रहे हैं कड़े कदम
वित्तीय संकट और भारी नुकसान को देखते हुए एअर इंडिया ने पिछले कुछ हफ्तों में कई कड़े फैसले लिए हैं। खर्चों में कटौती करने के लिए कंपनी ने 'बिना भोजन वाले किराए' (Unbundled Fares) की शुरुआत की है, जिससे यात्रियों को बिना खाने के टिकट सस्ते में मिल सकें। इसके अलावा, अस्थाई रूप से कुछ फ्लाइट रूट्स में भी कटौती की गई है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन खुद शुरुआत से ही एयरलाइन के बोर्ड की कमान संभाले हुए हैं ताकि कंपनी को जल्द से जल्द पटरी पर लाया जा सके।
₹36,000 करोड़ और 33% महिला आरक्षण—बंगाल बजट में बड़ा सामाजिक एजेंडा
22 Jun, 2026 04:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की नई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने सोमवार, 22 जून को विधानसभा में अपना पहला ऐतिहासिक बजट पेश किया। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता द्वारा पेश किए गए इस बजट में राज्य के विकास, सरकारी कर्मचारियों, युवाओं और महिलाओं के लिए कई बड़े और लोक-कल्याणकारी वादे किए गए हैं। बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने बताया कि उन्हें पिछली सरकार से विरासत में 8.15 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज मिला है। उन्होंने साफ किया कि नई सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में राजकोषीय अनुशासन को वापस पटरी पर लाना और प्रशासनिक व्यवस्था में आम जनता का खोया हुआ विश्वास बहाल करना शामिल है। बजट पेश करने से पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और वित्त मंत्री ने विधानसभा परिसर में एक संक्षिप्त प्रार्थना सभा में भी हिस्सा लिया।
कर्मचारियों को तोहफा और बंपर सरकारी नौकरियां
राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए इस बजट में एक बड़ी राहत दी गई है। वित्त मंत्री ने लंबे समय से चले आ रहे आंदोलन को शांत करते हुए महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (DR) में 20 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। आगामी 1 अक्टूबर से प्रभावी होने वाली इस वृद्धि के बाद अब कुल डीए बढ़कर 38 प्रतिशत हो जाएगा, जिससे केंद्र और राज्य के भत्ते का अंतर घटकर 22 फीसदी रह गया है। इसके साथ ही, युवाओं के रोजगार के लिए पुलिस में 20,000 और शिक्षा क्षेत्र में 50,000 पदों समेत कुल एक लाख खाली पड़े सरकारी पदों को चरणबद्ध तरीके से भरने की घोषणा की गई है। इन सरकारी भर्तियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत और पात्र क्षेत्रों में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत का आरक्षण लागू किया जाएगा, जबकि सरकारी नौकरियों के लिए बढ़ाई गई अधिकतम आयु सीमा की छूट अगले दो वर्षों तक जारी रहेगी।
महिलाओं, बेरोजगारों और बुजुर्गों के लिए बड़ी योजनाएं
बजट में सामाजिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने के लिए 'अन्नपूर्णा योजना' की शुरुआत की गई है, जिसके लिए 36,000 करोड़ रुपये का भारी बजट आवंटित किया गया है। इसके तहत 25 से 60 वर्ष की महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की सीधी आर्थिक सहायता उनके बैंक खातों में दी जाएगी, जबकि महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा के लिए अलग से 550 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। युवाओं की मदद के लिए 'भरोसा' योजना का ऐलान हुआ है, जिसमें एक लाख रुपये से कम सालाना आय वाले परिवारों के बेरोजगार स्नातकों (ग्रेजुएट) को 3,000 रुपये मासिक और अन्य पात्र बेरोजगारों को 2,000 रुपये महीना दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन में 500 रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी की गई है, तथा आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में 5,000 रुपये मासिक की वृद्धि की गई है। वहीं, सिविक वालंटियर और ग्रीन पुलिस जैसे कर्मियों को अगस्त से हर महीने 2,000 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे।
शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर का आधुनिक रोडमैप
शिक्षा के क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए उत्तर बंगाल में एक आईआईटी (IIT) और एक आईआईएम (IIM) की स्थापना को सुगम बनाने, झारग्राम में एक जनजातीय विश्वविद्यालय और तीन नए महिला विश्वविद्यालय खोलने का प्रस्ताव है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कॉलेज छात्रों को 25,000 रुपये का एकमुश्त अनुदान दिया जाएगा, जबकि स्वास्थ्य क्षेत्र में 3,100 करोड़ रुपये के बजट के साथ 'आयुष्मान भारत योजना' को लागू किया जाएगा, जिससे राज्य के 7 करोड़ लोग लाभान्वित होंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर कोलकाता में चिंगरीघाटा से न्यू टाउन के बीच एलिवेटेड कॉरिडोर, दादनपात्राबर में गहरा समुद्री बंदरगाह और दुर्गापुर, आसनसोल व सिलीगुड़ी में मेट्रो रेल परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता अध्ययन का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में सस्ते भोजन के लिए 'मां आहार' केंद्रों का विस्तार होगा, रिटायर्ड पत्रकारों को 5,000 रुपये मासिक पेंशन दी जाएगी और राज्य में तकनीकी विकास के लिए एक विशेष एआई (AI) मिशन की शुरुआत की जाएगी।
रुपये में गिरावट जारी, अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?
22 Jun, 2026 04:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार और विदेशी मुद्रा बाजार में जारी हलचल के बीच सोमवार, 22 जून को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली रूप से 4 पैसे टूटकर 94.36 के स्तर पर खुला। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता में सकारात्मक प्रगति के संकेतों से भारतीय मुद्रा को लगातार सहारा मिल रहा है। गौरतलब है कि पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान रुपया 0.8% की मजबूती के साथ 94.32 पर बंद हुआ था, जो बीते तीन महीनों में इसकी सबसे शानदार साप्ताहिक बढ़त रही। लगातार छह सत्रों की इस तेजी के दौरान रुपये ने कई महीनों के उच्चतम स्तर 94.18 को भी छुआ, जिससे पिछले महीने 97 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचने के बाद इसमें एक बेहतरीन रिकवरी दर्ज की गई है।
कच्चे तेल में गिरावट और जियोपॉलिटिकल राहत
विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, कच्चे तेल के दामों में आई नरमी और वाशिंगटन व तेहरान के बीच चल रही राजनयिक बातचीत के सकारात्मक नतीजों से रुपये की मजबूती को और बल मिल सकता है। वैश्विक बाजार में अगस्त डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड वायदा 1.7% फिसलकर $79.24 प्रति बैरल पर आ गया है। यह गिरावट तब देखने को मिली जब ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ हुई वार्ता में अच्छी प्रगति होने के संकेत दिए। यह बातचीत ईरानी अधिकारियों और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद आगे बढ़ी है। ईरान के इस सकारात्मक रुख से निवेशकों की वह चिंताएं दूर हुई हैं, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की चेतावनी और तेहरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रैट) को बंद करने की धमकी के बाद पैदा हुई थीं।
ग्लोबल रिस्क और घरेलू फ्लो के बीच फंसा रुपया
करेंसी रणनीतिकारों का मानना है कि भारतीय रुपया इस समय दो विपरीत ताकतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ जहां देश में लगातार हो रहा विदेशी निवेश (डेट इनफ्लो) और विदेशी मुद्रा जमा (फॉरेन करेंसी डिपॉजिट) रुपये को मजबूती दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना भारतीय मुद्रा के लिए चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि रुपया आने वाले समय में एक सीमित दायरे में कारोबार करता नजर आएगा। बाजार की अगली दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि घरेलू स्तर पर आने वाला पूंजी प्रवाह बाहरी भू-राजनीतिक दबावों और डॉलर की मजबूती पर कितना हावी हो पाता है।
तकनीकी स्तर और रुपये का भविष्य का रुख
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, तकनीकी नजरिए से देखें तो डॉलर के मुकाबले रुपये के लिए 94.00 से 94.20 का स्तर एक बेहद मजबूत सपोर्ट जोन के रूप में काम करेगा। इसके विपरीत, ऊपरी स्तरों पर 94.80 से 95.00 का दायरा इसके लिए तत्काल कड़े रेजिस्टेंस बैंड की तरह देखा जा रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से बढ़ते निवेश और कच्चे तेल की कीमतों के नियंत्रण में रहने के कारण फिलहाल रुझान रुपये की बढ़त की तरफ ही झुका हुआ है। यदि बाजार के फंडामेंटल्स इसी तरह मजबूत बने रहते हैं, तो आने वाले दिनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 94.00 से 93.80 के स्तर की तरफ भी कदम बढ़ा सकता है।
फुटबॉल से अरबों की कमाई: FIFA का ‘नॉन-प्रॉफिट’ मॉडल कैसे काम करता है?
22 Jun, 2026 04:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में फुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा फीफा विश्व कप खेला जा रहा है। एक गैर-लाभकारी (नॉन-प्रॉफिट) संस्था होने के बावजूद फीफा इस 48 टीमों वाले महाकुंभ के जरिए साल 2023 से 2026 के व्यावसायिक चक्र में लगभग 13 अरब डॉलर (करीब ₹122734 करोड़) का रिकॉर्ड राजस्व बटोरने की तैयारी में है। 'फेडरेशन इंटरनेशनेल डी फुटबॉल एसोसिएशन' (फीफा) दुनिया भर में फुटबॉल की सर्वोच्च शासी संस्था है, जिसकी स्थापना 1904 में पेरिस में हुई थी और वर्तमान में इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में है। 211 राष्ट्रीय संघों की सदस्यता वाले इस संगठन का काम सिर्फ वर्ल्ड कप कराना नहीं, बल्कि खेल के नियम बनाना, ट्रांसफर की निगरानी और कोचिंग मानकों को तय करना भी है।
कमाई में ऐतिहासिक उछाल और बिजनेस मॉडल
फीफा की कमाई मुख्य रूप से चार साल के चक्र पर आधारित होती है। पिछले कतर विश्व कप (2019-2022) के 7.6 अरब डॉलर के मुकाबले इस बार राजस्व में 72% की भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है। इस अप्रत्याशित मुनाफे के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं: टीमों की संख्या का 32 से बढ़कर 48 होना जिससे मैचों की संख्या बढ़ी, अमेरिका जैसे समृद्ध मीडिया बाजार में टूर्नामेंट का आयोजन और वहां एक नए 'क्लब वर्ल्ड कप' की शुरुआत करना। फीफा के खजाने में सबसे बड़ा हिस्सा टीवी ब्रॉडकास्टिंग राइट्स (40% यानी 5.3 अरब डॉलर) से आता है। इसके बाद हॉस्पिटैलिटी व टिकटिंग से 28% (3.6 अरब डॉलर), कोका-कोला व वीज़ा जैसे बड़े ब्रांड्स की स्पॉन्सरशिप से 25% (3.3 अरब डॉलर) और मर्चेंडाइजिंग व वीडियो गेम्स के लाइसेंसिंग से 3% (0.4 अरब डॉलर) की आय होती है।
बेशुमार दौलत का खर्च और राजनीतिक समीकरण
एक नॉन-प्रॉफिट संस्था होने के नाते फीफा इस भारी-भरकम राशि को वापस फुटबॉल के विकास में लगाने का दावा करती है। इस बार कतर की तरह नए स्टेडियमों पर खर्च नहीं हो रहा है, बल्कि अमेरिका के मौजूदा एनएफएल स्टेडियमों का उपयोग किया जा रहा है। बजट का 58% (7.6 अरब डॉलर) प्रतियोगिताओं और इनामी राशि पर खर्च होगा, जिसमें से विजेता टीम को 50 मिलियन डॉलर मिलेंगे। वहीं, 30% (3.9 अरब डॉलर) सभी 211 सदस्य देशों को फुटबॉल विकास के लिए ग्रांट के रूप में दिया जाता है और 7% (0.9 अरब डॉलर) प्रशासनिक कार्यों व अधिकारियों के वेतन में जाता है। हालांकि, समीक्षक इस फंडिंग व्यवस्था को एक राजनीतिक 'संरक्षण तंत्र' (पैट्रोनेज मशीन) के रूप में देखते हैं, क्योंकि फंड पाने वाले प्रत्येक देश के पास फीफा अध्यक्ष के चुनाव में एक वोट होता है। कागजों पर मुनाफा न दिखाने के बावजूद फीफा का रिजर्व फंड आज 2.7 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है।
महंगे टिकट, स्थानीय अर्थव्यवस्था और भविष्य की रणनीति
इस बार विश्व कप में पहली बार विमान किराए की तरह मांग के आधार पर तय होने वाली 'डायनेमिक प्राइसिंग' प्रणाली लागू की गई है। इसके चलते टिकटों की कीमतें 60 डॉलर से शुरू होकर प्रीमियम कैटेगरी में 32,000 डॉलर तक पहुंच गई हैं, जो 1994 के अमेरिकी विश्व कप की तुलना में करीब 1000% अधिक है। जहां फीफा का दावा है कि मेजबान शहरों को पर्यटन से करोड़ों डॉलर का फायदा होगा, वहीं खेल अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए जीडीपी के 0.1% से भी कम है, जबकि सुरक्षा और परिवहन का खर्च स्थानीय प्रशासन को उठाना पड़ रहा है। इस बीच, भारत जैसे देशों में फुटबॉल की बढ़ती डिजिटल व्यूअरशिप फीफा के लिए एक नया ग्रोथ मार्केट बन रही है। भविष्य को सुरक्षित करने के लिए फीफा अब महिला विश्व कप और क्लब वर्ल्ड कप जैसे आयोजनों का एक बड़ा पोर्टफोलियो तैयार कर रही है, ताकि किसी एक टूर्नामेंट पर निर्भरता कम की जा सके। हालांकि, अत्यधिक व्यावसायीकरण और आसमान छूते दामों के कारण खेल की साख पर भी सवाल उठने लगे हैं।
पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा या नहीं? मंत्री के खुलासे के बीच जानिए ताजा रेट
22 Jun, 2026 02:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यह संकेत दिए हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से रियायती दरों पर खरीदे गए कच्चे तेल की आपूर्ति शुरू होते ही आम जनता को पेट्रोल और डीजल की महंगाई से राहत मिल सकती है। हालांकि, इस प्रक्रिया में अभी कुछ समय लगने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में तेल विपणन कंपनियों के पास ऊंचे दामों पर आयात किए गए क्रूड ऑयल का पुराना स्टॉक मौजूद है। जैसे ही यह स्टॉक समाप्त होगा और कम लागत वाला नया कच्चा तेल रिफाइनरियों तक पहुंचेगा, वैसे ही खुदरा कीमतों में कटौती की राह साफ हो जाएगी। वैश्विक स्तर पर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण खड़े हुए ऊर्जा संकट के बावजूद, भारत में ईंधन की दरें दुनिया के अन्य विकसित देशों की तुलना में काफी हद तक नियंत्रित और स्थिर बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि कीमतों को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने नवंबर 2021, मई 2022 और फिर 2026 में उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) को घटाया है, जिसके चलते सरकार ने प्रति लीटर करीब 10 रुपये के वित्तीय घाटे का बोझ खुद वहन किया है। इसी का परिणाम है कि देश में ईंधन की कीमतों में वृद्धि केवल 7.60 रुपये प्रति लीटर तक ही सीमित रह सकी।
प्रमुख महानगरों और राज्यों में ईंधन के मौजूदा दाम
देश के विभिन्न हिस्सों में टैक्स और स्थानीय वैट (VAT) की दरों में अंतर होने के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग हैं। वर्तमान में देश के विभिन्न प्रमुख शहरों में तेल की खुदरा दरें इस प्रकार दर्ज की गई हैं: दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.18 रुपये तथा डीजल की कीमत 97.83 रुपये प्रति लीटर है। कोलकाता में उपभोक्ताओं को पेट्रोल 113.47 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा है। चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये एवं डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। बेंगलुरु में पेट्रोल का भाव 110.93 रुपये और डीजल का भाव 98.80 रुपये प्रति लीटर बना हुआ है। हैदराबाद में पेट्रोल 115.69 रुपये तथा डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर की दर पर बिक रहा है। अगरतला में पेट्रोल की कीमत 105.17 रुपये और डीजल की कीमत 94.05 रुपये प्रति लीटर है। गुवाहाटी में पेट्रोल 105.85 रुपये और डीजल 97.33 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। पटना में पेट्रोल का दाम 113.35 रुपये और डीजल का दाम 99.36 रुपये प्रति लीटर है।
वैश्विक बाजार और स्थानीय करों से तय होती है तेल की कीमत
भारत में घरेलू स्तर पर ईंधन के दाम तय करने की प्रक्रिया पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है। इसके अलावा इसमें बेस प्राइस, टैक्स संरचना और डीलरों का लाभांश भी शामिल होता है। तेल कंपनियां वैश्विक क्रूड ऑयल की खरीद लागत में रिफाइनिंग का खर्च, माल ढुलाई का भाड़ा और अपना लाभांश जोड़कर ईंधन का एक आधार मूल्य (बेस प्राइस) निर्धारित करती हैं। इसके बाद इस आधार मूल्य पर केंद्र सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क और राज्य सरकारों द्वारा अपने-अपने नियमों के अनुसार मूल्य वर्धित कर (VAT) वसूला जाता है, जो मिलकर अंतिम खुदरा मूल्य का लगभग 50 से 55 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।
डीलर कमीशन और अंतिम खुदरा मूल्य का निर्धारण
पंपों तक ईंधन पहुंचने के बाद इसमें पेट्रोल पंप संचालकों के खर्च और मुनाफे को ध्यान में रखते हुए प्रति लीटर के हिसाब से एक तय डीलर कमीशन जोड़ा जाता है। इन सभी घटकों यानी बेस प्राइस, केंद्रीय कर, राजकीय कर और डीलर कमीशन को आपस में जोड़ने के बाद ही वह अंतिम खुदरा भाव (रिटेल प्राइस) तैयार होता है, जिस पर आम उपभोक्ता पेट्रोल पंपों से तेल खरीदते हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में मामूली बदलाव होने या किसी राज्य द्वारा वैट की दरों में फेरबदल करने पर उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ता है।
गोल्ड ने किया कमबैक! जानें ₹5000 से ज्यादा टूटने के बाद कितना महंगा हुआ सोना
22 Jun, 2026 11:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पिछले सप्ताह सराफा बाजार में आई भारी मंदी के बाद आज 22 जून को कीमती धातुओं के भाव में आंशिक सुधार दर्ज किया गया है। कमोडिटी बाजार के आंकड़ों के अनुसार, आज 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत में 43 रुपये का इजाफा हुआ है, जिसके बाद यह 14,651 रुपये प्रति ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। इसी तरह 22 कैरेट जेवराती सोने का भाव भी 40 रुपये की तेजी के साथ 13,430 रुपये प्रति ग्राम दर्ज किया गया। दूसरी ओर, आज चांदी के हाजिर भाव में स्थिरता देखी गई और यह 250 रुपये प्रति ग्राम पर टिकी रही, जिसके चलते घरेलू खुदरा बाजार में एक किलोग्राम चांदी की कीमत 2,50,000 रुपये के पुराने स्तर पर ही अपरिवर्तित है।
वायदा बाजार में तेजी का रुख और महानगरों में सोने-चांदी के दाम
हाजिर बाजार के साथ-साथ वायदा कारोबार में भी आज मजबूती का माहौल बना हुआ है। मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने का अनुबंध बढ़त के साथ 1,48,040 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेंड कर रहा है। वहीं, जुलाई डिलीवरी वाली चांदी भी करीब 1.13 प्रतिशत की छलांग लगाकर 2,36,490 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है। देश के प्रमुख महानगरों की बात करें तो दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,46,660 रुपये और 22 कैरेट 1,34,450 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। मुंबई और कोलकाता में 24 कैरेट का भाव 1,46,510 रुपये व 22 कैरेट का 1,34,300 रुपये है, जबकि चेन्नई में यह क्रमश: 1,48,360 रुपये और 1,35,990 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। इन सभी महानगरों में एक किलोग्राम चांदी का भाव 2,50,000 रुपये पर स्थिर बना हुआ है।
पिछले सप्ताह आई ऐतिहासिक मंदी की वजह और अमेरिकी फेड का फैसला
बीते हफ्ते देश के खुदरा बाजारों में सोने के भाव में प्रति 10 ग्राम 5,228 रुपये की बड़ी गिरावट देखी गई थी, जबकि 19 जून को समाप्त हुए कारोबारी सत्र में वायदा बाजार (MCX) पर भी सोना 2,750 रुपये तक टूट गया था। इस दौरान चांदी भी करीब 10,609 रुपये से लेकर 12,000 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो गई थी। इस भारी बिकवाली का मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से नीतिगत ब्याज दरों में कटौती टालने के संकेत देना था। आर्थिक नियमों के मुताबिक जब ब्याज दरें उच्च स्तर पर होती हैं, तो निवेशक सोने जैसे गैर-ब्याज वाले सुरक्षित साधनों से पैसा निकालकर फिक्स्ड डिपॉजिट या सरकारी बॉन्ड्स में निवेश करना पसंद करते हैं, क्योंकि वहां बिना किसी जोखिम के निश्चित रिटर्न मिलता है।
निचले स्तर पर लिवाली बढ़ने से बाजार में फिर लौटी रौनक
पिछले सात दिनों की लगातार गिरावट के चलते सोने की कीमतें काफी आकर्षक और निचले स्तर पर आ गई थीं। कम कीमतों को देखते हुए निवेशकों और आम खरीदारों ने भविष्य में बेहतर रिटर्न की उम्मीद में बाजार में दोबारा खरीदारी शुरू कर दी। जैसे ही बाजार में मांग (डिमांड) ने रफ्तार पकड़ी, अर्थशास्त्र के सिद्धांतों के अनुरूप कीमतों में एक बार फिर उछाल आना शुरू हो गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सराफा बाजार की चाल वैश्विक भू-राजनीतिक हालातों और डॉलर इंडेक्स के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगी, इसलिए खरीदारों को फूंक-फूंक कर कदम रखने की जरूरत है।
निवेशकों की हुई चांदी, सेंसेक्स 400 अंक चढ़ा; निफ्टी 24,100 के पार पहुंचा
22 Jun, 2026 10:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन आई गिरावट के बाद, सोमवार का सवेरा शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। दलाल स्ट्रीट पर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों ने जबरदस्त वापसी करते हुए हरे निशान के साथ कारोबारी हफ्ते की शुरुआत की है। हालांकि, बाजार की इस रफ्तार के बीच एक बड़ी चिंता भी गहरा रही है, जिसने निवेशकों के साथ-साथ आर्थिक नीति-निर्माताओं को भी असमंजस में डाल दिया है—और वह है इस बार मॉनसून की सुस्त रफ्तार।
शुरुआती कारोबार में उछाल और निवेशकों की चांदी
सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने पुराने घावों पर मरहम लगाते हुए एक बार फिर दमदार तेजी का रुख अख्तियार किया। बाजार खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 423.30 अंक यानी 0.55 प्रतिशत की बड़ी बढ़त के साथ 77,226.20 के स्तर पर जा पहुंचा। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी पीछे नहीं रहा और वह 119.11 अंक यानी 0.50 फीसदी की तेजी दर्ज करते हुए 24,132.20 के आंकड़े पर पहुंच गया। बीते शुक्रवार को लगातार पांच दिनों से जारी बाजार की तेजी थम गई थी, लेकिन सोमवार के इस दमदार कमबैक ने दलाल स्ट्रीट में फिर से जान फूंक दी है। शुरुआती ट्रेडिंग सेशन के दौरान एचसीएल टेक और मारुति सुजुकी के शेयरों ने सबसे ज्यादा मुनाफा कमाया और टॉप गेनर्स में शुमार रहे।
कम बारिश और अल नीनो के कारण बाजार पर संकट के बादल
भले ही आज बाजार में चारों तरफ हरियाली दिख रही हो, लेकिन आने वाले समय में बाजार का भविष्य काफी हद तक इस बात पर तय होगा कि इंद्रदेव कितने मेहरबान होते हैं। अल नीनो के प्रभाव की वजह से चालू महीने में अब तक सामान्य के मुकाबले करीब 38 फीसदी कम वर्षा दर्ज की गई है। जानकारों का मानना है कि अगर मॉनसून ने अपनी रफ्तार नहीं पकड़ी तो खरीफ की फसलों की बुवाई बुरी तरह प्रभावित होगी। कृषि उत्पादन में कमी आने की वजह से देश में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे खाद्य महंगाई दर में उछाल आएगा। इसके साथ ही ग्रामीण भारत की क्रय शक्ति कमजोर होगी, जिससे मांग में बड़ी गिरावट आ सकती है। यह पूरा चक्र सीधे तौर पर देश की जीडीपी और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बुरा असर डाल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख और घरेलू निवेशकों के लिए आगे की राह
एक तरफ जहां भारतीय बाजारों में लिवाली का माहौल बना हुआ है, वहीं विदेशी बाजारों से मिलने वाले संकेत बहुत ज्यादा उत्साहजनक नहीं हैं। वैश्विक स्तर पर मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है, जहां जापान के टॉपिक्स इंडेक्स में 1.3 प्रतिशत और ऑस्ट्रेलिया के शेयर बाजार में 0.1 प्रतिशत का सुधार देखा गया। इसके उलट अमेरिकी बाजारों में मंदी का असर दिखा और एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.4 प्रतिशत टूट गए। एशियाई बाजारों में भी मंदी हावी रही, जिसके चलते हांगकांग का हैंगसेंग 1.3 फीसदी और शंघाई कंपोजिट 0.2 फीसदी की कमजोरी के साथ ट्रेड करते दिखे। यूरोपियन मार्केट के यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में भी 0.3 फीसदी की गिरावट रही। बहरहाल, घरेलू बाजार के लिए यह हफ्ता नई उम्मीदों वाला साबित हुआ है, लेकिन निवेशकों को आगे कोई भी बड़ा दांव लगाने से पहले अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और मॉनसून के आंकड़ों को ध्यान में रखना होगा।
भारतीय रेल का इनोवेटिव कदम, फ्लाई ऐश ढुलाई से बढ़ेगी कमाई
20 Jun, 2026 02:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय रेल ने थर्मल पावर स्टेशनों से निकलने वाली राख (फ्लाई ऐश) के परिवहन के जरिए करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाने की एक व्यापक और पुख्ता कार्ययोजना तैयार की है। जो फ्लाई ऐश कभी ताप बिजली घरों के लिए निस्तारण के लिहाज से एक बड़ा सिरदर्द बनी हुई थी, आज सड़क निर्माण, सीमेंट उत्पादन और ईंट निर्माण में भारी मांग के चलते बेहद मूल्यवान हो चुकी है। अब स्थिति यह है कि इस छाई को हासिल करने के लिए बिजली संयंत्रों के बाहर मालवाहक ट्रकों की लंबी कतारें लगी रहती हैं, जिसे देखते हुए रेल मंत्रालय ने भी इस सेक्टर में व्यावसायिक संभावनाओं को पूरी तरह भुनाने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं।
रेल मंत्री की उच्च स्तरीय बैठक और डेडिकेटेड लॉजिस्टिक नेटवर्क की रूपरेखा
इस परियोजना को लेकर रेल मंत्रालय की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव स्वयं इस पूरी योजना में व्यक्तिगत रूप से गहरी रुचि ले रहे हैं। हाल ही में रेलवे बोर्ड के मुख्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता खुद रेल मंत्री ने की, जिसमें इस छाई के परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाने के विभिन्न व्यावहारिक विकल्पों पर गहन मंथन किया गया। रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, फ्लाई ऐश की सुगम और निर्बाध ढुलाई के लिए भविष्य में एक विशेष 'डेडिकेटेड लॉजिस्टिक नेटवर्क' स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि इसे मालढुलाई का एक प्रमुख और व्यवस्थित जरिया बनाया जा सके।
वर्तमान में सीमित हिस्सेदारी और फ्लाई ऐश की विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती मांग
वर्तमान आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश के विभिन्न ताप बिजली घरों से सालाना लगभग 34 करोड़ टन राख का उत्पादन होता है, परंतु इसमें से रेलवे अभी केवल 130 लाख टन की ही ढुलाई कर पाता है और इसका बड़ा हिस्सा आज भी ट्रकों के माध्यम से ही भेजा जाता है। कोयले को जलाने के बाद सह-उत्पाद (बाय-प्रोडक्ट) के रूप में निकलने वाली इस छाई की मांग बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी से बढ़ी है। राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी) के वित्तीय वर्ष 2024-25 के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस राख का सर्वाधिक 32 प्रतिशत उपयोग सड़क एवं फ्लाईओवर निर्माण में, 27 प्रतिशत सीमेंट फैक्ट्रियों में, 14 प्रतिशत ईंट व टाइल्स बनाने में तथा शेष हिस्सा खदानों को भरने (बैकफिलिंग) और कृषि कार्यों में किया जा रहा है।
सुरक्षित पर्यावरण अनुकूल परिवहन प्रणाली और भावी राजस्व की संभावनाएं
चूंकि फ्लाई ऐश का असुरक्षित परिवहन पर्यावरण और वायु गुणवत्ता के लिए अत्यंत हानिकारक सिद्ध हो सकता है, इसलिए रेलवे इसके सुरक्षित संचलन के लिए विशेष रूप से निर्मित ढके हुए कंटेनरों का उपयोग करने की तैयारी में है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में कोयला ढोने के लिए प्रयुक्त होने वाले बॉक्स-एन वैगनों का उपयोग भी इस कार्य के लिए किया जा सकता है, बशर्ते उन्हें पूरी तरह से कवर किया जाए ताकि राख हवा में न उड़े। रेल प्रशासन को पूरा भरोसा है कि यदि एक बार इस छाई के परिवहन के लिए एक व्यवस्थित और सुरक्षित तंत्र क्रियान्वित कर दिया जाता है, तो यह कोयले की ही भांति भारतीय रेलवे की वित्तीय आय को बढ़ाने वाला एक नया और बेहद लाभकारी जरिया साबित होगा।
फ्यूल प्राइस अपडेट: दिल्ली और मुंबई में पेट्रोल ने पार किया नया स्तर
20 Jun, 2026 01:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश भर में आज 20 जून, शनिवार को भी ईंधन की कीमतों में ठहराव देखा गया है, जिससे उपभोक्ताओं को आंशिक राहत मिली है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने गत 25 मई के बाद से पेट्रोल और डीजल के भाव में कोई नया संशोधन नहीं किया है। गौरतलब है कि पिछले महीने हुई बढ़ोतरी के दौरान तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये और डीजल की कीमतों में 2.71 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था, जिसके बाद से राष्ट्रीय बाजार में तेल की दरें पूरी तरह स्थिर बनी हुई हैं।
देश के विभिन्न शहरों में पेट्रोल और डीजल के वर्तमान दाम
इस समय देश की राजधानी दिल्ली में ईंधन की दरें उच्च स्तर पर बनी हुई हैं, जहां पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। आर्थिक राजधानी मुंबई में कीमतें और भी अधिक हैं, वहां पेट्रोल का भाव 111.18 रुपये तथा डीजल का दाम 97.83 रुपये प्रति लीटर बना हुआ है। कोलकाता में एक लीटर पेट्रोल के लिए उपभोक्ताओं को 113.47 रुपये और डीजल के लिए 99.82 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर पर टिका है। वहीं, बेंगलुरु में पेट्रोल का भाव 110.93 रुपये और डीजल का रेट 98.80 रुपये है। हैदराबाद में ईंधन की दरें सबसे ऊंची श्रेणियों में हैं, जहां पेट्रोल 115.69 रुपये और डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। इसके अलावा, फतेहाबाद में पेट्रोल 104.51 रुपये और डीजल 97.20 रुपये, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल 102.05 रुपये और डीजल 95.55 रुपये तथा बिहार के पटना में पेट्रोल 113.35 रुपये और डीजल 99.36 रुपये प्रति लीटर की दर पर स्थिर है।
पड़ोसी देश पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में बड़ी कटौती
दूसरी तरफ, सीमा पार पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से वहां की जनता के लिए राहत भरी खबर आई है, जहां शुक्रवार को शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार ने पेट्रोल और डीजल की सरकारी कीमतों में भारी कमी करने का ऐलान किया है। इस नए फैसले के तहत वहां पेट्रोल के दामों में 74 रुपये और हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमतों में 67 रुपये प्रति लीटर की बड़ी कटौती घोषित की गई है। इस बड़ी गिरावट के बाद अब पाकिस्तान में पेट्रोल का नया दाम घटकर 299.78 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 311.78 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर आ जाएगी, जो कि इस कटौती से पहले क्रमशः 373.78 रुपये और 378.78 रुपये प्रति लीटर के ऊंचे स्तर पर चल रही थीं।
आम जनजीवन और अर्थव्यवस्था पर ईंधन के दामों का सीधा प्रभाव
पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में होने वाले किसी भी बदलाव का देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर व्यापक असर पड़ता है। पेट्रोल का मुख्य रूप से उपयोग मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के लोग अपने निजी वाहनों, दुपहिया गाड़ियों, ऑटो रिक्शा और छोटी कारों में करते हैं, इसलिए इसके दाम बढ़ने या घटने से उनकी मासिक घरेलू बचत सीधे प्रभावित होती है। इसी प्रकार, डीजल की कीमतों का असर भी परोक्ष रूप से हर नागरिक पर होता है, क्योंकि इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल मालवाहक ट्रकों, भारी परिवहन क्षेत्र, औद्योगिक कारखानों और बड़े बिजली जनरेटरों में होता है, जिससे माल ढुलाई महंगी होने पर रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कीमतें भी बढ़ने लगती हैं।
घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में बदलाव? जानें दिल्ली से मुंबई तक LPG का ताजा रेट
20 Jun, 2026 01:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश के विभिन्न महानगरों और शहरों में आज 20 जून, शनिवार को 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 942 रुपये के स्तर पर बने हुए हैं। चालू जून महीने के दौरान घरेलू रसोई गैस की कीमतों में प्रति सिलेंडर 29 रुपये का इजाफा किया गया था। इसी क्रम में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों जैसे होटलों, रेस्तरां और ढाबों में प्रयुक्त होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल गैस सिलेंडरों के दामों में भी इस महीने 42 रुपये से लेकर 53.50 रुपये तक की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की गई। इससे पूर्व, मई महीने में कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में 993 रुपये की अब तक की सबसे बड़ी ऐतिहासिक बढ़ोतरी देखी गई थी, जिसके चलते देश की राजधानी दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर 3113.50 रुपये प्रति सिलेंडर के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है।
देश के प्रमुख शहरों में रसोई और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों के नए दाम
घरेलू एलपीजी और कमर्शियल गैस सिलेंडरों की नई दरें देश के अलग-अलग शहरों में भिन्न-भिन्न रूप से लागू हो गई हैं। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर 942.0 रुपये और कमर्शियल 3113.5 रुपये में मिल रहा है, जबकि आर्थिक राजधानी मुंबई में घरेलू सिलेंडर की कीमत 941.5 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 3067.5 रुपये तय की गई है। कोलकाता में उपभोक्ताओं को घरेलू गैस के लिए 968.0 रुपये और कमर्शियल के लिए 3256.0 रुपये चुकाने होंगे। दक्षिण के प्रमुख शहर चेन्नई में घरेलू रसोई गैस 957.5 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3283.0 रुपये में उपलब्ध है, तो वहीं बेंगलुरु में घरेलू सिलेंडर का भाव 944.5 रुपये और कमर्शियल का 3198.0 रुपये है। अहमदाबाद में यह दरें क्रमशः 949.0 रुपये और 3133.0 रुपये हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में घरेलू सिलेंडर की कीमत 979.5 रुपये और कमर्शियल की 3236.0 रुपये तक पहुंच गई है। भुवनेश्वर में घरेलू गैस 968.0 रुपये और कमर्शियल 3290.5 रुपये में मिल रही है, जबकि बिहार की राजधानी पटना में कीमतें सबसे अधिक हैं, जहां घरेलू सिलेंडर 1031.5 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3400.5 रुपये के भारी-भरकम दाम पर बिक रहा है।
वैश्विक संकट के बीच भी देश में एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति
कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीते तीन दिनों के भीतर देश भर में करीब 1.47 करोड़ घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की सफल डिलीवरी की गई है। इसी समयावधि के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 1.36 करोड़ नए सिलेंडरों की बुकिंग दर्ज हुई। वर्तमान में मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष की वजह से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में आई रुकावटों के बावजूद, भारत सरकार देश के कोने-कोने में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए खाना पकाने वाली गैस की निर्बाध और सामान्य सप्लाई बनाए रखने में पूरी तरह सफल रही है।
अफवाहों से बचने, पैनिक बाइंग न करने और ऑनलाइन बुकिंग की अपील
गैस और ईंधन की उपलब्धता को लेकर मंत्रालय ने आम जनता को आश्वस्त करते हुए पैनिक बाइंग (घबराहट में अतिरिक्त खरीदारी) न करने की सख्त सलाह दी है। सरकार ने उपभोक्ताओं से आग्रह किया है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर फैलने वाली किसी भी प्रकार की किल्लत की अफवाहों पर कतई ध्यान न दें और केवल प्रामाणिक सरकारी सूचनाओं पर ही विश्वास करें। इसके साथ ही, एलपीजी उपभोक्ताओं से अनुरोध किया गया है कि वे गैस वितरकों (डिस्ट्रीब्यूटर) के दफ्तरों में भीड़ लगाने के बजाय डिजिटल और ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म का अधिक से अधिक उपयोग करें। पेट्रोलियम मंत्रालय के आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, देश की सभी तेल रिफाइनरियां कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के पर्याप्त भंडार के साथ अपनी पूरी क्षमता से क्रियाशील हैं, जिससे घरेलू मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर पर भी एलपीजी का उत्पादन बढ़ा दिया गया है।
देश की सुरक्षा को बड़ा बूस्ट, डिफेंस कंपनी की 425 करोड़ की नई डील
20 Jun, 2026 01:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। रक्षा क्षेत्र की प्रमुख स्वदेशी कंपनी भारत फोर्ज लिमिटेड (Bharat Forge Limited) को देश के रक्षा मंत्रालय से 425 करोड़ रुपये का एक बड़ा और महत्वपूर्ण अनुबंध प्राप्त हुआ है। इस नए समझौते के अंतर्गत कंपनी भारतीय नौसेना के जंगी जहाजों के लिए आधुनिक गैस टर्बाइन जनरेटरों का निर्माण और आपूर्ति करेगी। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिहाज से इस डील को बेहद अहम माना जा रहा है, जिसका सीधा सकारात्मक असर आगामी कारोबारी सप्ताह में कंपनी के शेयर बाजार प्रदर्शन पर भी देखने को मिल सकता है।
कोलकाता क्लास युद्धपोतों को मिलेगी स्वदेशी बिजली और 5 साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट
इस 425 करोड़ रुपये के रक्षा सौदे के तहत भारत फोर्ज भारतीय नौसेना को कुल 12 सेट मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर (एमजीटीजी) बनाकर सौंपेगी। इन उच्च क्षमता वाले स्वदेशी जनरेटरों को नौसेना के बेड़े में शामिल शक्तिशाली 'कोलकाता क्लास' युद्धपोतों पर तैनात किया जाएगा, जहां ये जहाजों की संपूर्ण बिजली प्रणालियों को ऊर्जा प्रदान करेंगे। वर्तमान में इन पोतों पर बिजली आपूर्ति और एडवांस्ड सेंसर प्रणालियों को संचालित करने के लिए 1980 के दशक की पुरानी रूसी जनरेटर तकनीक का उपयोग हो रहा है, जिसे अब भारत फोर्ज की 1.25 मेगावाट क्षमता वाली आधुनिक मशीनों से बदला जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट को आगामी पांच वर्षों की समयसीमा के भीतर चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
विदेशी निर्भरता में कमी और 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का कड़ा नियम
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह अनुबंध विशेष रूप से 'बाय (इंडियन)' श्रेणी के तहत हस्ताक्षरित किया गया है, जिसके नियम बेहद कड़े हैं। इस श्रेणी के तहत जनरेटरों के निर्माण में न्यूनतम 60 प्रतिशत तक घरेलू या स्वदेशी कलपुर्जों का उपयोग किया जाना अनिवार्य है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में हुए इस समझौते से 1.25 मेगावाट क्षमता के मरीन गैस टर्बाइन जनरेटरों के लिए विदेशी देशों पर भारत की निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। यह कदम केंद्र सरकार की 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी महत्वाकांक्षी पहलों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के साथ-साथ देश की रक्षा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
युद्धपोतों के कॉम्बैट सिस्टम को मिलेगा पावर बैकअप और शेयरों ने बनाया नया रिकॉर्ड
नौसैनिक युद्धपोतों पर मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर बेहद संवेदनशील और रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करते हैं, क्योंकि इन्हीं के जरिए जहाजों पर मौजूद घातक कॉम्बैट सिस्टम, आधुनिक मिसाइल हथियार प्रणालियों और लंबी दूरी के सेंसरों को निरंतर बिजली मिलती है। इस महासौदे की भनक लगते ही शुक्रवार, 19 जून को शेयर बाजार में भारत फोर्ज के शेयरों में भारी लिवाली देखी गई। कंपनी का शेयर 1.06 प्रतिशत की मजबूती के साथ 2041.40 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। इस तेजी के दौरान शेयर ने 2059.50 रुपये का अपना अब तक का सर्वोच्च ऑल-टाइम हाई और 52-सप्ताह का नया रिकॉर्ड स्तर भी छुआ। करीब 97,597 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली इस दिग्गज डिफेंस कंपनी के शेयरों पर आने वाले दिनों में भी निवेशकों की पैनी नजर बनी रहेगी।
SIP की यह ट्रिक कर सकती है बैकफायर, 25 हजार को 10 हिस्सों में बांटने से पहले जान लें सच
20 Jun, 2026 11:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अधिकांश निवेशक एक बेहद सुव्यवस्थित रणनीति के साथ म्यूचुअल फंड में अपने निवेश का सफर शुरू करते हैं। वे सबसे पहले एक सामान्य सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) चुनते हैं, फिर टैक्स में छूट पाने के लिए एक टैक्स सेवर फंड जोड़ते हैं। इसके बाद स्मॉल-कैप की चर्चा सुनकर एक और स्कीम ले लेते हैं और इंटरनेट पर आकर्षक रिटर्न देखकर सेक्टोरल या मिड-कैप फंड्स में भी पैसा लगा देते हैं। कुछ समय बाद उन्हें पता चलता है कि वे बिना किसी ठोस रणनीति के हर महीने 8 से 15 अलग-अलग फंड्स में निवेश कर रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर में एक ही जैसी कंपनियों के शेयर शामिल होते हैं। यहीं से पोर्टफोलियो में जरूरत से ज्यादा दोहराव (ओवर-डाइवर्सिफिकेशन) की समस्या जन्म लेती है।
संतुलित और फोकस्ड पोर्टफोलियो का महत्व
वित्तीय सलाहकारों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति एसआईपी के माध्यम से हर महीने लगभग 25,000 रुपये का निवेश कर रहा है, तो उसका लक्ष्य केवल फंड्स की संख्या बढ़ाना नहीं होना चाहिए। मुख्य उद्देश्य एक ऐसा केंद्रित और सुगठित पोर्टफोलियो तैयार करना है जो जोखिम को तो कम करे, लेकिन साथ ही जिसे आसानी से ट्रैक और मैनेज भी किया जा सके। एक निश्चित सीमा के बाद पोर्टफोलियो में नई योजनाएं शामिल करने से न तो रिस्क मैनेजमेंट में कोई खास सुधार होता है और न ही मुनाफे में बढ़ोतरी होती है, बल्कि इससे केवल भ्रम और अव्यवस्था पैदा होती है।
अत्यधिक विविधीकरण से घटती है प्रदर्शन की ताकत
पोर्टफोलियो में बहुत ज्यादा फंड्स रखने का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इससे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली स्कीम्स का मुनाफा भी दब जाता है। जब 25,000 रुपये की कुल राशि को 10 या 12 अलग-अलग जगहों पर बांट दिया जाता है, तो प्रत्येक फंड में लगने वाली पूंजी बेहद मामूली रह जाती है। ऐसी स्थिति में यदि कोई एक फंड असाधारण रिटर्न भी कमा कर दे, तो कुल निवेश पर उसका सकारात्मक प्रभाव बहुत कम दिखता है। इसके अलावा, इतने बड़े पोर्टफोलियो की समय-समय पर समीक्षा करना निवेशकों के लिए एक सिरदर्द बन जाता है, जिसके कारण वे बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर बिना सोचे-समझे इमोशनल फैसले लेने लगते हैं।
डाइवर्सिफिकेशन और इसके अतिरेक में बुनियादी अंतर
निवेश में जोखिम को कम करने के लिए डाइवर्सिफिकेशन बेहद जरूरी है ताकि किसी एक क्षेत्र या कंपनी पर निर्भरता न रहे। हालांकि, ओवर-डाइवर्सिफिकेशन की स्थिति तब आती है जब नए फंड्स जोड़ने से पोर्टफोलियो को कोई सुरक्षा नहीं मिलती, बल्कि केवल निवेश का दोहराव होने लगता है। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि बारिश में एक साथ कई छाते लेकर चलने से कोई अतिरिक्त सुरक्षा नहीं मिलती, केवल बोझ बढ़ता है। म्यूचुअल फंड में भी ठीक ऐसा ही होता है; योजनाओं की संख्या बढ़ा देने मात्र से आपका पैसा अधिक सुरक्षित या अधिक लाभदायक नहीं हो जाता।
गोल्ड-सिल्वर हुआ सस्ता! दिल्ली, मुंबई समेत प्रमुख शहरों में क्या है आज का भाव?
20 Jun, 2026 11:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय सर्राफा बाजार में शनिवार को बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में आंशिक मंदी का रुख देखने को मिल रहा है। बाजार से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, आज घरेलू सर्राफा बाजार में 24 कैरेट वाले शुद्ध सोने की कीमत लगभग 1,46,480 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बनी हुई है, जबकि औद्योगिक मांग कमजोर होने से चांदी का भाव करीब 2,50,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। इसके अतिरिक्त, आभूषण निर्माताओं द्वारा पसंद किए जाने वाले 22 कैरेट सोने की दर आज 1,39,500 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोने का मूल्य 1,12,270 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है।
महानगरों और प्रमुख शहरों में धातुओं के नवीनतम दाम
देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय टैक्स और चुंगी के कारण सोने-चांदी की कीमतों में भिन्नता देखी जा रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और गाजियाबाद में आज 24 कैरेट सोना 1,46,480 रुपये तथा 22 कैरेट सोना 1,39,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। आर्थिक राजधानी मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में इन दोनों श्रेणियों के दाम समान बने हुए हैं, जहां 24 कैरेट के लिए 1,49,500 रुपये और 22 कैरेट के लिए 1,37,040 रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है। दक्षिण भारत के प्रमुख केंद्र चेन्नई में सोने की कीमतें सबसे उच्च स्तर पर हैं, जहां 24 कैरेट का भाव 1,52,170 रुपये और 22 कैरेट का भाव 1,39,490 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है।
घरेलू बाजारों में चांदी की शहरवार स्थिति
सफेद धातु यानी चांदी की कीमतों में भी भौगोलिक स्थिति के आधार पर उतार-चढ़ाव बना हुआ है और देश भर में इसका व्यापक दायरा 2,49,900 रुपये से लेकर 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम के मध्य देखा जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर और गाजियाबाद के बाजारों में चांदी आज 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर स्थिर है, जबकि मुंबई और कोलकाता जैसे तटीय व्यापारिक केंद्रों में इसकी कीमत थोड़ी कम यानी 2,49,900 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है। इस बीच, चेन्नई के बाजारों में चांदी की मांग सबसे तेज होने के कारण वहां की कीमत अन्य शहरों की तुलना में काफी ऊपर 2,70,000 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर चल रही है।
वैश्विक मंदी और अमेरिकी आर्थिक नीतियों का असर
कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर और घरेलू वायदा बाजार (एमसीएक्स) पर कीमती धातुओं में आ रही इस निरंतर गिरावट के पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व (यूएस फेड) के कड़े मौद्रिक रुख को मुख्य कारण माना जा रहा है। फेडरल रिजर्व ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए आगामी समय में ब्याज दरों में और वृद्धि करने के संकेत दिए हैं, जिससे निवेशक सोने जैसी बिना ब्याज वाली सुरक्षित संपत्तियों के बजाय सरकारी बॉन्ड्स में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर के एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से अन्य देशों की मुद्राओं के लिए सोना खरीदना महंगा हो गया है, जिससे इसकी वैश्विक मांग प्रभावित हुई है। साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया शांति समझौते ने भू-राजनीतिक तनाव को कम किया है, जिसके चलते निवेशकों ने सुरक्षित माने जाने वाले सोने से दूरी बनाकर दोबारा शेयर बाजार का रुख करना शुरू कर दिया है।
झूठे दावों पर FSSAI का शिकंजा, 14 कंपनियों को नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू
19 Jun, 2026 02:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शुक्रवार को देश की कई जानी-मानी खाद्य निर्माता कंपनियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन नामचीन ब्रांड्स पर अपने प्रोडक्ट्स को लेकर भ्रामक प्रचार करने, गलत ब्रांडिंग और पैकेजिंग के निर्धारित लेबलिंग नियमों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। नियामक संस्था ने सख्त लहजे में इन सभी कंपनियों को अपनी इन कमियों और अनियमितताओं में तुरंत सुधार करने की हिदायत दी है। FSSAI ने सोशल मीडिया के जरिए स्पष्ट किया कि यह दंडात्मक कार्रवाई खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है, क्योंकि जांच में कंपनियों के दावे वर्ष 2018 के विज्ञापन व लेबलिंग नियमों के पूरी तरह विपरीत और उपभोक्ताओं को भ्रम में डालने वाले पाए गए हैं।
जूस और डेयरी उत्पादों पर भ्रामक दावे करने वाले ब्रांड्स पर शिकंजा
नियामक की रडार पर आई कंपनियों में 'प्लक्क' (Pluckk) प्रमुख है, जिसके मैंगो जूस पैकेट पर 'नो एडेड शुगर' (अतिरिक्त चीनी मुक्त) का दावा किया गया था, मगर लैब जांच में इसमें आम के गूदे के साथ गन्ने का रस मिला हुआ पाया गया, जो कि ग्राहकों को धोखे में रखने जैसा है। इसी प्रकार, एक अन्य डेयरी ब्रांड को अपने पनीर पैकेट पर गैर-कानूनी रूप से 'नेचुरल पनीर' शब्द का उपयोग करने के लिए पकड़ा गया है, क्योंकि नियमों के अनुसार प्रसंस्कृत डेयरी उत्पादों के लिए इस शब्द का इस्तेमाल वर्जित है। इसके अलावा 'मास्टरचाउ फूड्स' को '100% नेचुरल' और 'ऑर्गेनिक आटा' जैसे अप्रामाणिक दावों के लिए, 'फेरेरो इंडिया' को किंडर जॉय पर 'मिल्क सॉलिड्स से भरपूर' लिखने के लिए और 'मैरिको लिमिटेड' को सफोला तेल के विज्ञापनों में स्वास्थ्य संबंधी बढ़ा-चढ़ाकर दावे करने के कारण नोटिस थमाया गया है। 'गौर हेल्दी फूड' भी अपने टोफू उत्पाद को लेकर जांच के दायरे में आई है।
बिना किसी वैज्ञानिक साक्ष्य के सेहत सुधारने का दावा करने वाली कंपनियां नपीं
खाद्य नियामक ने उन ब्रांड्स पर भी कड़ी कार्रवाई की है जो बिना किसी पुख्ता और प्रमाणित वैज्ञानिक आधार के शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य को चमत्कारी रूप से सुधारने का ढिंढोरा पीट रहे थे। इस फेहरिस्त में मेडिजेन लैब्स, नेक्सा इंडस्ट्रीज, रॉ प्रेसेरी और कोरियन जिनसेंग जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य और स्टैमिना बढ़ाने के ऊंचे-ऊंचे दावे तो किए लेकिन विभाग के समक्ष इनके समर्थन में कोई वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। FSSAI का मानना है कि इस तरह के बिना डॉक्टरी जांच या वैज्ञानिक कसौटी पर खरे उतरे दावे सीधे तौर पर आम जनता की सेहत और भरोसे के साथ खिलवाड़ हैं, जिन्हें बाजार में खुलेआम बेचने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
साफ-सफाई में लापरवाही और दूषित भोजन पर नामी आउटलेट्स को फटकार
आम उपभोक्ताओं से सीधे तौर पर मिली गंभीर शिकायतों का संज्ञान लेते हुए FSSAI ने खान-पान के प्रसिद्ध आउटलेट्स पर भी चाबुक चलाया है। मशहूर फूड चेन 'बीकानेरवाला' को स्वच्छता मानकों के उल्लंघन की शिकायत पर नोटिस भेजा गया है, जहां जांच में पाया गया कि उनका एक कर्मचारी किचन के अति-संवेदनशील क्षेत्र में काम के वक्त खुद भोजन कर रहा था; कंपनी से इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। वहीं दूसरी तरफ, 'परम डेयरी लिमिटेड' को आईआरसीटीसी (IRCTC) की कैटरिंग सर्विस के माध्यम से सप्लाई किए गए दही और रबड़ी के सैंपल्स में हानिकारक फंगस (उल्ली) मिलने की डरावनी शिकायत पर तलब किया गया है। परम डेयरी को भविष्य में ऐसी जानलेवा लापरवाही रोकने के ठोस उपायों का खाका पेश करने को कहा गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि नियमों की अनदेखी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
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