व्यापार
इबोला के खतरे को देखते हुए सख्ती, यात्रियों के लिए नए नियम लागू
25 Jun, 2026 01:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मध्य और पूर्वी अफ्रीका में पैर पसार रहे घातक 'इबोला वायरस' (Ebola Virus) के प्रकोप को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। इबोला प्रभावित देशों से आने वाले या वहां से होकर गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की कड़ी निगरानी के लिए 'एयर सुविधा पोर्टल' को फिर से एक्टिव कर दिया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है। अब प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों को भारत में उतरने से पहले ऑनलाइन 'सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म' (SDF) भरना अनिवार्य होगा, जिससे हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर स्क्रीनिंग की प्रक्रिया को डिजिटल और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
फ्रांस में फ्लाइट के भीतर डॉक्टर मिला पॉजिटिव, संपर्क में आए 5 लोग आइसोलेट
अफ्रीका के बाद अब इस वायरस ने यूरोप में भी दस्तक दे दी है। फ्रांस में एक अनुभवी भारतीय या विदेशी डॉक्टर के इबोला संक्रमित मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। फ्रांस की स्वास्थ्य मंत्री स्टेफनी रिस्ट के मुताबिक, यह डॉक्टर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में एक चिकित्सा मिशन से लौटे थे। फ्लाइट में बैठते समय उनमें कोई लक्षण नहीं थे, लेकिन सफर के दौरान तेज सिरदर्द होने पर उन्होंने खुद ही अलर्ट जारी किया। पेरिस एयरपोर्ट पर लैंड करते ही डॉक्टर को तुरंत अस्पताल के विशेष आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। वहीं, फ्लाइट में उनके संपर्क में आए 5 अन्य संदिग्ध यात्रियों की पहचान कर उन्हें भी 21 दिनों (इन्क्यूबेशन पीरियड) के लिए क्वारंटाइन कर दिया गया है।
यूरोप में खतरे का अनुमान कम, लेकिन कांगो में मौतों का आंकड़ा 290 के पार
यूरोपीय सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ECDC) का मानना है कि यूरोपीय देशों के आम नागरिकों के लिए इस संक्रमण का खतरा फिलहाल बेहद कम है। इसके बावजूद सुरक्षात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। दूसरी ओर, संक्रमण के मुख्य केंद्र डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। कांगो सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में अब तक इबोला के 1,118 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 291 मरीजों की मौत हो चुकी है। वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां संक्रमण की इस चेन को तोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
इनकम ₹12 लाख से थोड़ी बढ़ी, क्या टैक्स का बड़ा झटका लगेगा?
25 Jun, 2026 12:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पहली बार देखने पर न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) थोड़ा सख्त लग सकता है। कई टैक्सपेयर्स को अक्सर यह डर सताता है कि यदि उनकी सालाना टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख की तय सीमा से महज एक रुपया भी ऊपर निकल गई, तो वे धारा 87A के तहत मिलने वाले पूरे टैक्स रिबेट (Tax Rebate) से हाथ धो बैठेंगे और उन पर भारी-भरकम टैक्स का बोझ आ गिरेगा। लेकिन इनकम टैक्स कानून में इस डर का एक बेहद शानदार इन-बिल्ट समाधान मौजूद है, जिसे 'मार्जिनल रिलीफ' (Marginal Relief) कहा जाता है। यह प्रावधान आपकी थोड़ी सी बढ़ी हुई कमाई पर आपको बहुत बड़े टैक्स के झटके से बचाता है।
₹1500 एक्स्ट्रा आमदनी पर कितना देना होगा टैक्स? समझिए पूरा गणित
मान लीजिए फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (कैलेंडर वर्ष 2026) में आपकी कुल टैक्सेबल इनकम $1,201,500$ रुपये है। चूंकि यह आय रिबेट की ₹12 लाख की सीमा को पार कर चुकी है, तो स्लैब रेट के हिसाब से तकनीकी रूप से आपका टैक्स ₹60,225 बनता है। किसी को भी यह बात गलत लग सकती है कि सिर्फ ₹1500 ज्यादा कमाने की वजह से ₹60,000 से ऊपर का टैक्स चुकाना पड़े।
यहीं पर काम आता है मार्जिनल रिलीफ का नियम। न्यू टैक्स रिजीम के तहत नियम यह है कि यदि आपकी आय ₹12 लाख से थोड़ी ऊपर जाती है, तो आपका कुल देय टैक्स केवल उसी बढ़ी हुई रकम तक सीमित कर दिया जाएगा जो सीमा से ऊपर है।
आपकी आय: $1,201,500$ रुपये (₹12 लाख की सीमा से ₹1500 अधिक)।
मार्जिनल रिलीफ के बाद टैक्स: ₹60,225 के बजाय सिर्फ ₹1500।
टैक्स विभाग से मिली राहत: कुल ₹58,725 की पूरी छूट।
ओल्ड टैक्स रिजीम चुनने वालों को नहीं मिलता यह फायदा, न्यू रिजीम है बेहतर
करदाताओं के लिए यहाँ ध्यान देना जरूरी है कि मार्जिनल रिलीफ का यह बेहतरीन फायदा केवल न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) चुनने वालों को ही मिलता है। ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) में ऐसी कोई राहत व्यवस्था नहीं है; वहाँ जैसे ही आपकी टैक्सेबल आय ₹5 लाख की सीमा को पार करती है, आपको बिना किसी मार्जिनल रिलीफ के शुरुआती स्लैब रेट से पूरा टैक्स भरना पड़ता है। इसलिए, सीमा के बिल्कुल नजदीक रहने वाले मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स के लिए न्यू टैक्स रिजीम एक सुरक्षित और ज्यादा फायदेमंद सौदा साबित हो रहा है।
तेल बाजार में बड़ी गिरावट, अप्रैल के शिखर से 42% नीचे आया क्रूड
25 Jun, 2026 12:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के बाजार से बड़ी राहत की खबर आ रही है। किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि इसकी कीमतें इतनी तेजी से गिरकर 72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ जाएंगी। विश्लेषकों (एनालिस्ट्स) का मानना था कि अमेरिका-ईरान तनाव खत्म होने के बाद भी कीमतों को पुराने स्तर पर लौटने में कई महीने लगेंगे। हालांकि, 25 जून को सितंबर ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स गिरकर 72.89 डॉलर और डब्लूटीआई (WTI) अगस्त क्रूड ऑयल फ्यूचर्स 69.36 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। यह गिरावट क्रूड को ठीक उसी स्तर पर ले आई है, जहां वह इस विवाद की शुरुआत से पहले था।
उच्चतम स्तर से 42% लुढ़का कच्चा तेल
अमेरिका और ईरान के बीच इस साल 28 फरवरी को टकराव शुरू हुआ था, जिसके बाद तेल की कीमतों में भारी उछाल आया और 30 अप्रैल को यह 126 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। मौजूदा कीमतों की तुलना करें तो यह अपने उच्चतम स्तर से करीब 42 फीसदी नीचे आ चुका है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह बड़ी गिरावट भारत के लिए बहुत ही राहत भरी खबर है, क्योंकि कीमतें बढ़ने के बाद घरेलू ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम कई बार बढ़ाए थे।
होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने और सप्लाई बढ़ने का असर
इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच हुई डील है। इस समझौते के बाद 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) का अहम समुद्री रास्ता दोबारा खुल गया है, जिससे ऑयल टैंकर्स की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि आने वाले हफ्तों में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई और बढ़ेगी, जबकि दूसरी तरफ मांग में थोड़ी नरमी के संकेत हैं। यदि सप्लाई इसी तरह बढ़ती रही और डिमांड कमजोर रही, तो क्रूड का भाव 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल तक भी गिर सकता है।
ईरान की तेल बाजार में वापसी और भारत-चीन पर प्रभाव
अमेरिका ने कई दशकों के बाद अब ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना तेल बेचने की अनुमति दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध के बाद ईरान को अपने पुनर्निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर फंड की जरूरत है, जिसे वह ज्यादा से ज्यादा तेल बेचकर पूरा करने की कोशिश करेगा। चूंकि ईरान दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक है और भौगोलिक रूप से भारत व चीन के काफी करीब है (जो कच्चे तेल के दुनिया के सबसे बड़े खरीदार हैं), इसलिए उसकी इस वापसी का सीधा असर वैश्विक कीमतों में नरमी के रूप में दिख रहा है।
भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपए को मिलेगी मजबूती
कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेज गिरावट से भारत सरकार ने बड़ी राहत की सांस ली है। लंबे समय तक क्रूड के 100 डॉलर से ऊपर रहने के कारण देश का आयात बिल (इंपोर्ट बिल) काफी बढ़ गया था, जिससे डॉलर की मांग बढ़ने के कारण भारतीय रुपया भारी दबाव में आ गया था। अब तेल सस्ता होने से रुपए में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। चूंकि भारत अपनी कुल जरूरत का 90 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए क्रूड में यह नरमी सरकारी खजाने पर दबाव कम करेगी और देश की अर्थव्यवस्था को सहारा देगी।
विदेशी सोने पर निर्भरता घटेगी, देश में शुरू हुई पहली प्राइवेट गोल्ड माइन
25 Jun, 2026 11:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमरावती। भारत के खनिज क्षेत्र (माइनिंग सेक्टर) में एक नया इतिहास रच गया है। आजादी के बाद देश के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी प्राइवेट कंपनी के मालिकाना हक वाली सोने की खदान में कमर्शियल (व्यावसायिक) तौर पर कामकाज पूरी तरह शुरू कर दिया गया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कुरनूल जिले के जोंनागिरी इलाके में इस बड़े गोल्ड माइनिंग और प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन किया।
इस खास मौके पर मुख्यमंत्री ने न केवल इसकी पहली यूनिट को देश को समर्पित किया, बल्कि इसके अगले चरण (सेकंड फेज) की नींव भी रखी। आइए जानते हैं कि इस प्रोजेक्ट पर कितना खर्च आया है और इससे देश को कितना सोना मिलेगा।
405 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश
इस ऐतिहासिक सोने की खदान को चालू करने के लिए बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। पूरे प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने में 405 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसे जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (GMSI) द्वारा डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड के साथ मिलकर संचालित किया जा रहा है।
इस बड़े कदम को देखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने उद्घाटन से ठीक पहले 'जोंनागिरी' गांव का नाम बदलकर सम्मानपूर्वक 'स्वर्णगिरी' करने का फैसला किया, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
इस प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार की ओर से कुल 1500 एकड़ जमीन दी गई है, जिसमें से शुरुआती चरण में 600 एकड़ पर खुदाई का काम शुरू हो चुका है। खदान में पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए 'हंद्री नीवा सुजला स्रवंती' परियोजना के तहत 18 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है।
हर साल कितना निकलेगा सोना? समझिए इसका पूरा समीकरण
इस खदान से सोने के उत्पादन को लेकर समय के साथ बड़े लक्ष्य तय किए गए हैं:
पहले साल की उम्मीद (2026-27): व्यावसायिक कामकाज के पहले पूरे साल में यहाँ से करीब 400 किलोग्राम सोना निकालने का लक्ष्य है।
भविष्य की योजना: इसके बाद आने वाले वर्षों में सालाना प्रोडक्शन को बढ़ाकर 1000 किलोग्राम तक पहुँचाया जाएगा।
पूरी क्षमता पर उत्पादन: जब इसकी दूसरी प्रोसेसिंग यूनिट (जिसका शिलान्यास हुआ है) पूरी तरह काम करने लगेगी, तब यहाँ से हर साल लगभग 2000 किलो सोना निकाला जा सकेगा।
स्थानीय लोगों को रोजगार और सरकार को बंपर राजस्व
इस प्राइवेट गोल्ड माइन के चालू होने से स्थानीय समाज और सरकार दोनों को सीधे तौर पर बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा:
स्थानीय युवाओं को काम: इस प्रोजेक्ट से सीधे तौर पर करीब 700 लोगों को रोजगार मिलेगा। सबसे बेहतरीन बात यह है कि इस वर्कफोर्स का तकरीबन 80 फीसदी हिस्सा इसी क्षेत्र के स्थानीय लोगों से लिया जाएगा।
सरकारी खजाने में करोड़ों की रॉयल्टी: सोने के उत्पादन से आंध्र प्रदेश सरकार को रॉयल्टी और अन्य टैक्स के रूप में बड़ा राजस्व मिलेगा। जब सालाना 400 किलो उत्पादन होगा, तब सरकार को करीब 57 करोड़ रुपये की आय होगी। वहीं, उत्पादन बढ़कर 900 किलो पहुंचने पर यह सालाना कमाई 144 करोड़ रुपये हो जाएगी।
क्या होती है प्राइमरी गोल्ड माइन? यह वर्तमान में देश की एकमात्र चालू निजी 'प्राइमरी गोल्ड माइन' (प्राथमिक सोने की खदान) है। प्राइमरी गोल्ड माइनिंग एक जटिल 'हार्ड-रॉक' प्रक्रिया है, जहाँ सोना किसी दूसरी धातु के साथ उप-उत्पाद के रूप में नहीं मिलता, बल्कि सीधे जमीन के नीचे मौजूद कठोर चट्टानों और क्वार्ट्ज की परतों से निकाला जाता है। इसमें पहले चट्टानों में ब्लास्टिंग की जाती है, फिर पत्थरों को बाहर निकालकर विभिन्न केमिकल और फिजिकल प्रक्रियाओं के जरिए शुद्ध सोना अलग किया जाता है।
क्या आंध्र प्रदेश बनेगा नया 'KGF'?
भूवैज्ञानिकों (Geologists) का मानना है कि कुरनूल का यह इलाका तो बस एक शुरुआत है। यह पूरा क्षेत्र एक समृद्ध खनिज बेल्ट का हिस्सा है, जहाँ जमीन के नीचे सोने का विशाल भंडार छुपा हुआ है। इसके अलावा अनंतपुर जिले के बोक्समपल्ली, रामागिरी और जवकूला जैसी जगहों पर भी नए भंडारों की तलाश का काम तेजी से चल रहा है।
एक्सपर्ट्स इन प्राचीन चट्टानी संरचनाओं की तुलना कर्नाटक की प्रसिद्ध 'कोलार' (KGF) और 'हुट्टी' गोल्ड फील्ड्स से कर रहे हैं, जो कभी दुनिया में सबसे ज्यादा सोना देने के लिए जानी जाती थीं। अगर इन क्षेत्रों में भी वैसी ही कामयाबी मिलती है, तो यह प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश को आर्थिक रूप से बेहद मजबूत बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
गिरावट से उबरकर दौड़ा बाजार, सेंसेक्स में 400 अंकों की छलांग
25 Jun, 2026 09:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। पिछले कारोबारी सत्र की तेजी को बरकरार रखते हुए भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार की सुबह एक बार फिर जबरदस्त लिवाली (खरीदारी) देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में आई कमी ने निवेशकों के हौसले बुलंद कर दिए हैं, जिससे बाजार के माहौल में एक नया जोश साफ महसूस किया जा रहा है।
शुरुआती आंकड़ों में बढ़त, IT और एविएशन शेयरों का जलवा
सुबह 09:16 बजे जैसे ही बाजार खुला, चारों तरफ मजबूती का रुख नजर आया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 367.18 अंक यानी 0.47% की मजबूती के साथ 77,358.40 के स्तर पर ओपन हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 104.75 अंक (0.44%) की बढ़त दर्ज करते हुए 24,126.40 के स्तर पर पहुंच गया। ट्रेडिंग शुरू होने के कुछ ही मिनटों के भीतर सेंसेक्स में 400 अंकों से ज्यादा का उछाल आ गया। शुरुआती मिनटों में ही प्रमुख आईटी कंपनी एचसीएल टेक और देश की बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो के शेयरों में 2-2 फीसदी की शानदार तेजी देखी गई।
बाजार में अचानक आई इस तेजी की दो बड़ी वजहें
पिछले सत्र में निफ्टी 24,021 के स्तर पर बंद हुआ था। आज बाजार को ऊपर ले जाने में दो मुख्य कारकों ने बड़ी भूमिका निभाई है:
क्रूड ऑयल के दामों में बड़ी कमी: ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड फिसलकर करीब 76 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो कि बीते चार महीनों का इसका सबसे कम स्तर है। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए तेल का सस्ता होना अर्थव्यवस्था और कंपनियों के मार्जिन के लिए बहुत अच्छी खबर है।
वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था में सुधार: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते जहाजों का आवागमन अब बेहतर हो रहा है। इससे दुनिया भर में तेल की सप्लाई रुकने की आशंकाएं काफी कम हो गई हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।
विदेशी बाजारों का मिला-जुला रुख
घरेलू बाजार में तेजी के बीच दुनिया के बाकी बाजारों से मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं:
यहाँ रही तेजी: जापान के निक्केई/टोपिक्स इंडेक्स में 1.3% की बेहतरीन तेजी देखी गई। इसके साथ ही अमेरिकी बाजार में एसएंडपी 500 फ्यूचर्स भी 0.5% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं।
यहाँ दिखा दबाव: दूसरी तरफ कुछ एशियाई बाजारों में सुस्ती रही। हांगकांग का हैंग सेंग 1.2% टूट गया, जबकि शंघाई कंपोजिट में 0.2% और ऑस्ट्रेलिया के एसएंडपी/एएसएक्स 200 में 0.3% की गिरावट रही। यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया।
आगे के लिए क्या है अनुमान?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि सस्ते कच्चे तेल ने भारतीय बाजार को एक मजबूत सहारा (कुशन) दे दिया है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ी नकारात्मक खबर या घटनाक्रम सामने नहीं आता, तब तक निवेशकों का यह सकारात्मक रुख बाजार को आगे भी नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।
डिजिटल भुगतान में 'भीम' का दम, जानिए तेजी के पीछे क्या है वजह
24 Jun, 2026 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत में कैशलेस इकोनॉमी (नकद-रहित अर्थव्यवस्था) अब आम नागरिकों की जीवनशैली का अभिन्न अंग बन चुकी है। जेब में कैश रखने के बजाय मोबाइल से स्कैन कर भुगतान करने के बढ़ते चलन के बीच एनपीसीआई भीम सर्विसेज लिमिटेड (NBSL) के 'भीम (BHIM) ऐप' ने सफलता का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले महज 11 महीनों के भीतर इस स्वदेशी भुगतान प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाले ट्रांजैक्शंस की तादाद में तीन गुना से भी ज्यादा की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
जून 2025 से मई 2026 के बीच आंकड़ों में भारी उछाल
बुधवार को जारी किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक, जून 2025 से लेकर मई 2026 के बीच भीम ऐप के उपयोग में अभूतपूर्व तेजी आई है। अगर आंकड़ों की तुलना करें तो:
वॉल्यूम में बढ़त: जून 2025 में जहां इस ऐप के माध्यम से 7.96 करोड़ (79.64 मिलियन) ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए थे, वहीं मई 2026 में यह ग्राफ तेजी से चढ़कर 24.4 करोड़ (244 मिलियन) पर जा पहुंचा।
लेन-देन की कुल कीमत: सिर्फ संख्या ही नहीं, बल्कि पैसों के लेनदेन के मामले में भी नया रिकॉर्ड बना है। अकेले मई 2026 के महीने में उपभोक्ताओं ने भीम ऐप के जरिए कुल 26,952 करोड़ रुपये की धनराशि का डिजिटल ट्रांसफर किया।
रोजमर्रा की किन चीजों पर सबसे ज्यादा खर्च कर रहे हैं लोग?
राष्ट्रीय स्तर पर दिख रहा यह डिजिटल बदलाव राज्यों में भी समान रूप से प्रभावी है। उदाहरण के लिए, तेलंगाना में भी इसी 11 महीने की अवधि के दौरान ट्रांजैक्शन वॉल्यूम तीन गुना हो चुका है।
मई 2026 में हुए कुल मर्चेंट ट्रांजैक्शंस (व्यापारिक भुगतानों) का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि लोग अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए सबसे ज्यादा ऑनलाइन पेमेंट का सहारा ले रहे हैं:
श्रेणी (Category)
कुल मर्चेंट ट्रांजैक्शन में हिस्सेदारी
किराना और राशन की खरीदारी
23.9%
फूड आउटलेट्स (होटल और रेस्टोरेंट)
18.1%
क्विक कॉमर्स (तत्काल डिलीवरी सेवाएं)
11.6%
एनबीएसएल की एमडी और सीईओ ललिता नटराज के अनुसार, रूटीन खरीदारी के लिए इस ऐप की बढ़ती स्वीकार्यता यह साफ दर्शाती है कि उपभोक्ता अब पारंपरिक नकदी को छोड़कर पूरी तरह डिजिटल विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।
कम इंटरनेट और क्षेत्रीय भाषाएं बनीं ग्रामीण भारत में सफलता की चाबी
भीम ऐप की इस कामयाबी के पीछे इसकी सुलभ और यूजर-फ्रेंडली तकनीक का बहुत बड़ा हाथ है। कंपनी का मुख्य ध्यान ऐसे डिजिटल उत्पाद तैयार करने पर रहा है जो बिना किसी तकनीकी बाधा के हर वर्ग के लिए सुरक्षित और आसान हों।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी (Semi-urban) इलाकों में इस ऐप की पैठ बढ़ने की दो मुख्य वजहें हैं:
15+ क्षेत्रीय भाषाओं का सपोर्ट: यह ऐप तेलुगु सहित देश की 15 से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं में काम करता है, जिससे गैर-अंग्रेजी भाषी लोगों के लिए इसे चलाना बेहद सरल हो जाता है।
लो-कनेक्टिविटी मोड: इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि देश के सुदूर गांवों या कम इंटरनेट स्पीड (Low Internet Connectivity) वाले क्षेत्रों में भी यह ऐप बिना अटके काम कर सके।
भविष्य की मजबूत डिजिटल अर्थव्यवस्था का संकेत
भीम ऐप के ट्रांजैक्शन में आई यह ऐतिहासिक तेजी भारत की जमीनी डिजिटल अर्थव्यवस्था के मजबूत ढांचे को प्रमाणित करती है। छोटे किराना स्टोर से लेकर बड़े फूड चेन तक इसका बढ़ता उपयोग और टियर-2 व टियर-3 शहरों में इसकी मजबूत पकड़ यह साफ इशारा करती है कि आने वाले समय में देश के ग्रामीण अंचलों में भी कैशलेस ट्रांजैक्शन का दायरा और अधिक व्यापक और सुदृढ़ होने वाला है।
तीन दशक का सफर खत्म: नोएल टाटा ट्रेंट के चेयरमैन पद से हटेंगे
24 Jun, 2026 03:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: टाटा ग्रुप की दिग्गज रिटेल कंपनी 'ट्रेंट' (Trent) को भारतीय बाजार में एक नई पहचान दिलाने वाले नोएल टाटा जल्द ही चेयरमैन पद की जिम्मेदारी से मुक्त होने जा रहे हैं। लगभग तीस वर्षों तक कंपनी को अपनी सेवाएं देने के बाद उन्होंने ट्रेंट की 47वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) के दौरान इस बात का आधिकारिक ऐलान किया। शेयरहोल्डर्स को संबोधित करते हुए नोएल टाटा ने भावुक अंदाज में कहा कि बतौर चेयरमैन यह उनकी अंतिम एजीएम है। इस वर्ष नवंबर में 70 वर्ष के होने जा रहे नोएल टाटा टाटा समूह के आंतरिक नियमों के मुताबिक सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिसके तहत नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के लिए अधिकतम उम्र सीमा 70 साल तय है।
सिमोन टाटा के सपने को नोएल ने दिया नया आसमान
ट्रेंट के विशाल साम्राज्य को खड़ा करने में नोएल टाटा और उनके परिवार का योगदान अतुलनीय है। इस कंपनी की शुरुआत उनकी माता सिमोन टाटा ने की थी। नोएल टाटा साल 1998 में कंपनी के बोर्ड में बतौर डायरेक्टर शामिल हुए और ठीक एक साल बाद 1999 में उन्होंने कंपनी के पहले मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) के रूप में कार्यभार संभाला। इसके बाद उन्होंने अपनी दूरगामी सोच से कंपनी की पूरी रिटेल रणनीति को बदलकर रख दिया।
वेस्टसाइड से जूडियो तक; 1,200 स्टोर्स का विशाल नेटवर्क
नोएल टाटा के कुशल नेतृत्व का ही नतीजा है कि जो कंपनी कभी महज एक 'वेस्टसाइड' स्टोर के सहारे चल रही थी, वह आज देश के कोने-कोने में 1,200 से अधिक आउटलेट्स के साथ रिटेल सेक्टर की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बन चुकी है। विशेष रूप से किफायती फैशन ब्रांड 'जूडियो' (Zudio) और ग्रोसरी चेन 'स्टार' (Star) की अभूतपूर्व सफलता ने ट्रेंट के मुनाफे को कई गुना बढ़ा दिया।
वित्त वर्ष 2025-26 में 19,701 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड रेवेन्यू
वित्तीय मजबूती के लिहाज से भी नोएल टाटा का कार्यकाल ऐतिहासिक रहा है। हालिया संपन्न वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, ट्रेंट की कुल सालाना आय रिकॉर्ड 19,701 करोड़ रुपये के स्तर पर जा पहुँची है। यह शानदार आंकड़ा कंपनी की आक्रामक विस्तार नीति और मजबूत कामकाजी मॉडल का सीधा प्रमाण है।
एक स्वर्णिम युग का अंत; अब टाटा ट्रस्ट्स पर रहेगा पूरा ध्यान
अपनी विदाई के पलों को साझा करते हुए नोएल टाटा ने स्पष्ट किया कि ट्रेंट की यह कामयाबी किसी एक दिन की मेहनत नहीं, बल्कि निरंतर नवाचार और सुधारों का एक लंबा सफर है। उन्होंने भविष्य के लिए जूडियो और स्टार ब्रांड्स को कंपनी की रीढ़ बताया।
विदित हो कि दिवंगत दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा वर्तमान में देश के सबसे बड़े चैरिटेबल ट्रस्ट्स में से एक, 'टाटा ट्रस्ट्स' के प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। कॉर्पोरेट जगत ट्रेंट से उनकी इस विदाई को टाटा समूह के रिटेल इतिहास के एक बेहद सफल और स्वर्णिम अध्याय के समापन के रूप में देख रहा है।
फॉर्म 16 नहीं आया तो घबराएं नहीं, इन आसान स्टेप्स से भरें ITR
24 Jun, 2026 03:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन शुरू होते ही नौकरीपेशा कर्मचारियों के बीच फॉर्म 16 (Form 16) को लेकर सुगबुगाहट तेज हो जाती है। यह दस्तावेज टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया को बेहद सरल बना देता है। हालांकि, कई बार बीच में नौकरी बदलने, संस्थान के बंद होने या न्यूनतम वेतन सीमा जैसी वजहों से कर्मचारियों को यह फॉर्म नहीं मिल पाता। ऐसे में परेशान होने की जरूरत नहीं है; क्योंकि आयकर विभाग के नियमों के मुताबिक, फॉर्म 16 के बिना भी आप अपना रिटर्न बेहद आसानी से दाखिल कर सकते हैं।
क्या होता है फॉर्म 16 और क्या यह अनिवार्य है?
सरल शब्दों में कहें तो फॉर्म 16 आपकी कंपनी द्वारा जारी किया जाने वाला एक प्रामाणिक टैक्स सर्टिफिकेट है। इसमें आपकी सालाना सैलरी, भत्ते, काटा गया टीडीएस (TDS) और टैक्स सेविंग्स क्लेम की पूरी जानकारी होती है।
आयकर विशेषज्ञों का कहना है कि यह फॉर्म निश्चित रूप से आईटीआर भरने में मददगार है, लेकिन टैक्स डिपार्टमेंट ने रिटर्न फाइल करने के लिए इसे कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं बनाया है। आप कुछ अन्य वित्तीय दस्तावेजों की मदद से भी अपना रिटर्न खुद जमा कर सकते हैं।
बिना फॉर्म 16 के रिटर्न फाइल करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका
यदि आपके पास फॉर्म 16 उपलब्ध नहीं है, तो आप नीचे दिए गए तरीकों से अपनी टैक्स फाइलिंग पूरी कर सकते हैं:
सैलरी स्लिप्स को आधार बनाएं: सबसे पहले संबंधित वित्त वर्ष की अपनी सभी महीनों की सैलरी स्लिप (वेतन पर्ची) इकट्ठा करें। इसमें आपकी बेसिक सैलरी, हाउस रेंट अलाउंस (HRA), स्पेशल अलाउंस और भविष्य निधि (PF) कटौती का पूरा विवरण होता है। अगर आपने साल के बीच में नौकरी बदली है, तो दोनों नियोक्ताओं की सैलरी स्लिप साथ रखें।
AIS और TIS पोर्टल की मदद लें: इनकम टैक्स की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन करके अपना एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) डाउनलोड करें। इस डिजिटल स्टेटमेंट में आपकी सैलरी, बचत खाते का ब्याज, डिविडेंड और शेयर बाजार से होने वाली कमाई का सटीक ब्योरा दर्ज होता है।
फॉर्म 26AS से टैक्स मिलान करें: रिटर्न सबमिट करने से पहले फॉर्म 26AS का बारीकी से अध्ययन करें। यह आपके पैन (PAN) कार्ड से लिंक एक टैक्स पासबुक है, जो यह दर्शाती है कि आपकी कंपनी या बैंक ने आपके नाम पर कुल कितना टीडीएस (TDS) काटा और सरकार को जमा किया है।
अन्य स्रोतों से होने वाली कमाई को न छुपाएं
अक्सर टैक्सपेयर्स केवल अपनी मुख्य सैलरी की जानकारी पोर्टल पर भरते हैं और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज या अन्य निवेशों से होने वाले मुनाफे को छोड़ देते हैं। ऐसी चूक होने पर आयकर विभाग से स्क्रूटनी का नोटिस आ सकता है। इसलिए बैंक स्टेटमेंट और निवेश पोर्टफोलियो को देखकर सभी प्रकार की आदमनी को कुल आय में जोड़ें।
डिडक्शन क्लेम और नौकरी बदलने वाले रखें विशेष ध्यान
अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) के तहत रिटर्न फाइल कर रहे हैं, तो धारा 80C, 80D, होम लोन के ब्याज और एनपीएस (NPS) में किए गए निवेश पर मिलने वाली छूट का पूरा लाभ उठाएं।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार डील पर बनी सहमति, अंतिम दौर की बातचीत जारी
24 Jun, 2026 12:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों की अमेरिकी उप सहायक सचिव, बेथनी पॉलोस मॉरिसन ने संकेत दिए हैं कि दोनों महाशक्तियां इस ऐतिहासिक डील को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुँच चुकी हैं। एक हालिया कार्यक्रम में उन्होंने साझा किया कि फरवरी 2026 में इस डील पर मुहर लगाने का जो लक्ष्य तय किया गया था, दोनों देश अब उसके बेहद नजदीक हैं।
विशाल बाजार और 'मिशन 500' का लक्ष्य
इस रणनीतिक समझौते के लागू होने से अमेरिकी उत्पादों के लिए भारत के 1.4 अरब उपभोक्ताओं का एक विशाल बाजार खुल जाएगा। यह डील किसी एक देश के फायदे के लिए नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच समानता और आपसी लाभ के सिद्धांत पर आधारित है।
फिलहाल अमेरिकी प्रशासन 'मिशन 500' को अमलीजामा पहनाने में जुटा है। इसके तहत साल 2030 तक आपसी व्यापार को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है, जिसे पूरा करने के लिए दोनों ही पक्ष पूरी गंभीरता से प्रयास कर रहे हैं।
व्यापारिक आंकड़ों में ऐतिहासिक उछाल
अगर हालिया आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल 2025 दोनों देशों के व्यापारिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। इस अवधि में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 149 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुँचा, जो कि साल 2024 की तुलना में 20 मिलियन डॉलर से भी अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। विशेष रूप से, भारत को किए जाने वाले अमेरिकी निर्यात में 9.8 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्ज की गई है।
अमेरिकी बाजार में भारतीय निवेश की धमक
आर्थिक संबंधों की यह मजबूती सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश के मोर्चे पर भी भारतीय कंपनियां अमेरिका में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही हैं। 'सिलेक्ट यूएसए' इवेंट के दौरान भारतीय फर्मों की ओर से अमेरिका में 20 अरब डॉलर के नए निवेश की संभावनाएं जताई गईं, जिसमें से 1.1 अरब डॉलर का निवेश तत्काल प्रभाव से जमीन पर उतारा जा चुका है।
नई दिल्ली में हाई-लेवल बैठक और भविष्य का रोडमैप
इसी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बीच नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में उस अंतरिम समझौते की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसकी रूपरेखा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तैयार की थी। इस दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर सहित अमेरिका का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहा।
अमेरिकी दूतावास ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि उनका मुख्य फोकस एक पारदर्शी और निष्पक्ष व्यापार नीति तैयार करना है, जिससे अमेरिकी निर्यातकों को बेहतर अवसर मिल सकें। वाणिज्य भवन में आयोजित इस बैठक में अंतरिम रूपरेखा के साथ-साथ एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर भी गहन मंथन हुआ। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिकी दल का स्वागत करते हुए दोनों देशों के आर्थिक भविष्य को लेकर गहरी उम्मीदें जताई हैं।
Sensex में 500 अंकों की छलांग, बाजार में लौटी रौनक
24 Jun, 2026 11:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: शेयर बाजार में तूफानी तेजी, सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा उछला; निफ्टी 23,900 के पार
घरेलू शेयर बाजार में आज सुबह के कारोबार में शानदार रौनक देखने को मिली। ग्लोबल मार्केट से मिले मजबूत संकेतों और आईटी व प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में आई जोरदार खरीदारी के दम पर मुख्य सूचकांक रिकॉर्ड स्तर पर नजर आए। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स ने 500 अंकों से अधिक की छलांग लगाई, वहीं निफ्टी 50 भी 23,900 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। हालांकि, बीच में सरकारी (PSU) बैंकों में आई बिकवाली और मुनाफावसूली के कारण बाजार कुछ पलों के लिए लाल निशान में भी फिसला, लेकिन निचले स्तरों से आई रिकवरी ने बाजार को दोबारा संभाल लिया।
दूसरी ओर, बड़े बाजार (Broader Market) में थोड़ा दबाव देखा जा रहा है। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में सुस्ती का माहौल है और निफ्टी मिडकैप 100 व निफ्टी स्मॉलकैप 100 गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं।
बाजार की मौजूदा स्थिति: सेंसेक्स और निफ्टी में बढ़त
अगर मुख्य सूचकांकों की बात करें, तो सुबह 10:36 बजे के करीब:
सेंसेक्स (Sensex): 538.77 अंक (0.71%) की मजबूती के साथ 76,739.45 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
निफ्टी 50 (Nifty 50): 125.85 अंक (0.53%) की तेजी लेकर 23,949.95 पर बना हुआ है।
इंट्रा-डे का उतार-चढ़ाव: आज के कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने ₹76,788.88 का ऊपरी स्तर छुआ (588.20 अंकों की बढ़त), जबकि निफ्टी ने 146.20 अंकों की तेजी के साथ ₹23,970.30 का इंट्रा-डे हाई बनाया।
क्रूड ऑयल में नरमी से मिला बड़ा सहारा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भारतीय शेयर बाजार के लिए बूस्टर साबित हुई। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1% टूटकर अपने चार महीने के निचले स्तर पर आ गया है।
क्रूड अपडेट: कुछ समय पहले अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड उछलकर $120 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। लेकिन अब दोनों देशों के बीच शांति समझौते की संभावनाओं और होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई सामान्य होने की उम्मीदों के चलते, यह घटकर $76 प्रति बैरल के पास आ गया है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार को बड़ी राहत मिली है।
आईटी और प्राइवेट बैंकों ने संभाली कमान
आज के कारोबार में सेक्टोरल ट्रेंड मिला-जुला देखने को मिल रहा है:
गिरावट वाले सेक्टर्स: मेटल इंडेक्स में करीब 1% की कमजोरी है, जबकि निफ्टी ऑटो भी आधे फीसदी से ज्यादा टूट चुका है।
तेजी वाले सेक्टर्स: आईटी और प्राइवेट बैंकिंग शेयरों ने आज बाजार की कमान अपने हाथों में ले रखी है। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 1% की बढ़त देखी जा रही है। वहीं, निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स भी 1% से ज्यादा की तेजी के साथ कारोबार कर रहा है। सुबह की गिरावट के बाद सरकारी (PSU) बैंकों में लौटी खरीदारी ने भी बाजार को सहारा दिया है।
विदेशी निवेशकों (FIIs) का बदला रुख
बाजार के सेंटिमेंट को मजबूत करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी ने भी अहम भूमिका निभाई। हालांकि निवेश की रकम बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन बिकवाली के दौर के बीच इसका आना सकारात्मक रहा। बीते मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में ₹17.86 करोड़ की शुद्ध (Net) खरीदारी की, जिससे घरेलू निवेशकों का भरोसा बढ़ा।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की उम्मीदों से उत्साह
बाजार की इस तेजी के पीछे एक बड़ा भू-राजनीतिक (Geopolitical) कारण भी है। अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, भारत और अमेरिका बेहद जल्द एक बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं। इस सकारात्मक खबर ने दलाल स्ट्रीट के सेंटिमेंट को और मजबूत कर दिया है, जिससे निवेशकों में नए निवेश को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार इसी तरह ऊपरी स्तरों को थामे रखता है, तो क्लोजिंग भी रिकॉर्ड स्तर पर देखने को मिल सकती है।
IPO Listing के बाद गिरा Liotech, हर लॉट पर ₹30,740 का नुकसान
24 Jun, 2026 10:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: लियोटेक इंडस्ट्रीज की शेयर बाजार में निराशाजनक शुरुआत, लिस्टिंग के साथ ही निवेशकों को भारी झटका
घरेलू हार्डवेयर और एक्सेसरीज बनाने वाली कंपनी लियोटेक इंडस्ट्रीज के शेयरों की आज शेयर बाजार में बेहद खराब शुरुआत हुई। बीएसई एसएमई (BSE SME) प्लेटफॉर्म पर कंपनी के शेयर भारी डिस्काउंट के साथ लिस्ट हुए। इस आईपीओ को लेकर निवेशकों में मिला-जुला उत्साह देखा गया था, जहाँ रिटेल इनवेस्टर्स के सहारे यह कुल 1.91 गुना सब्सक्राइब हो सका था। कंपनी ने आईपीओ के तहत ₹321 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था, लेकिन आज इसकी शुरुआत ₹257.00 पर हुई। इसका मतलब है कि निवेशकों को कोई मुनाफा नहीं हुआ, बल्कि शुरुआती स्तर पर ही उनकी पूंजी में 19.94% की गिरावट आ गई।
लोअर सर्किट ने बढ़ाई चिंता, प्रति लॉट ₹30 हजार से ज्यादा डूबे
लिस्टिंग के तुरंत बाद बिकवाली के दबाव के कारण शेयर की कीमतें और नीचे गिर गईं। यह शेयर फिसलकर ₹244.15 के लोअर सर्किट पर आ गया, जिसके चलते आईपीओ आवेदकों का नुकसान बढ़कर 23.94% हो गया। कंपनी का लॉट साइज 400 शेयरों का था, जिसका मतलब है कि प्रत्येक लॉट पर निवेशकों को ₹30,740 का तगड़ा नुकसान झेलना पड़ा है।
कहाँ इस्तेमाल होगी आईपीओ से जुटी रकम?
लियोटेक इंडस्ट्रीज का ₹36 करोड़ का आईपीओ 17 से 19 जून तक बोली लगाने के लिए खुला था। इस दौरान गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) का कोटा 0.85 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 2.97 गुना भरा था।
इस पब्लिक इश्यू के जरिए कंपनी ने ₹29 करोड़ मूल्य के फ्रेश शेयर (नए शेयर) जारी किए हैं, जबकि ₹10 की फेस वैल्यू वाले 2.22 लाख शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत बेचे गए हैं। ओएफएस से मिला पैसा मौजूदा शेयरधारकों के पास जाएगा। वहीं, नए शेयरों से मिलने वाली रकम का उपयोग कंपनी इस तरह करेगी:
₹8.00 करोड़: नई मशीनरी की खरीद के लिए
₹4.95 करोड़: पुराना कर्ज चुकाने के लिए
₹7.00 करोड़: वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए
शेष राशि: सामान्य कॉर्पोरेट कामकाज के लिए
कंपनी का बिजनेस प्रोफाइल: राजकोट में है यूनिट
साल 2020 में स्थापित हुई लियोटेक इंडस्ट्रीज मुख्य रूप से हार्डवेयर स्ट्रक्चर्स और उससे जुड़ी एक्सेसरीज के निर्माण में लगी है। कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में डोर किट्स, कब्ज (Hinges), गेट हुक्स, एल्ड्रॉप, ताले, हैंडल, टावर बोल्ट, डोर स्टॉपर्स, बेड लिफ्टर्स और टेबल ब्रैकेट्स शामिल हैं। कंपनी मुख्य रूप से बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) मॉडल पर काम करती है और इसकी मुख्य मैन्युफैक्चरिंग यूनिट गुजरात के राजकोट में स्थित है।
वित्तीय मोर्चे पर प्रदर्शन: मुनाफे में लगातार बढ़त
बाजार में कमजोर शुरुआत के बावजूद कंपनी का वित्तीय रिकॉर्ड मजबूत दिख रहा है। कंपनी के मुनाफे में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है:
वित्त वर्ष 2023: ₹35 लाख का नेट प्रॉफिट
वित्त वर्ष 2024: ₹2.93 करोड़ का नेट प्रॉफिट
वित्त वर्ष 2025: ₹4.16 करोड़ का नेट प्रॉफिट
इस अवधि के दौरान कंपनी की कुल आय 118% से अधिक की सालाना कंपाउंडेड ग्रोथ (CAGR) के साथ ₹40.69 करोड़ हो गई। चालू वित्त वर्ष की बात करें तो अप्रैल-दिसंबर 2025 की अवधि में कंपनी ने ₹51.79 करोड़ की कुल आय पर ₹5.49 करोड़ का शुद्ध मुनाफा कमाया है। दिसंबर 2025 के अंत तक कंपनी पर ₹4.81 करोड़ का कुल कर्ज था, जबकि इसके पास ₹12.93 करोड़ का रिजर्व और सरप्लस मौजूद है।
निफ्टी भी फिसला, पूरे बाजार में लाल निशान Nifty 50
23 Jun, 2026 05:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार के लिए दिन बेहद निराशाजनक रहा। शुरुआती कारोबार में स्थिरता दिखने के बाद बाजार में अचानक बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। इस चौतरफा गिरावट के कारण सेंसेक्स करीब 900 अंक टूट गया, वहीं निफ्टी ने भी 23,900 का अपना अहम स्तर खो दिया। बाजार को सबसे ज्यादा नुकसान आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) और सरकारी बैंकों के शेयरों में आई भारी गिरावट से हुआ।
बाजार बंद होने तक सूचकांकों का हाल
मंगलवार को बाजार बंद होने तक सेंसेक्स 893.39 अंक (1.15%) की भारी गिरावट के साथ 76,200.68 के स्तर पर आ गया। दूसरी ओर, निफ्टी भी 278.81 अंक (1.16%) फिसलकर 23,824.10 पर बंद हुआ। इस तेज गिरावट की वजह से महज एक ही दिन में निवेशकों के करीब 6 लाख करोड़ रुपये डूब गए। बाजार के जानकारों ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए ट्रेडर्स को फूंक-फूंक कर कदम रखने की सलाह दी है।
आखिर क्यों डूबा बाजार? गिरावट की मुख्य वजहें
बाजार में आए इस बड़े उछाल-पुथल के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण रहे:
आईटी सेक्टर पर मार: सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स 2% से अधिक टूट गया।
वैश्विक बाजारों का दबाव: अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे कमजोर और नकारात्मक संकेतों ने घरेलू निवेशकों का सेंटिमेंट बिगाड़ा।
मुनाफावसूली की होड़: ऊंचे स्तरों पर घरेलू निवेशकों ने जमकर प्रॉफिट बुकिंग (मुनाफावसूली) की, जिससे बाजार संभल नहीं पाया।
बैंकिंग और मेटल में कमजोरी: सरकारी बैंकों और धातु (Metal) क्षेत्र के शेयरों में भी तेज बिकवाली दर्ज की गई, जिसने गिरावट की आग में घी का काम किया।
विपरीत परिस्थितियों में भी चमके ये सेक्टर्स
बाजार में मचे इस हाहाकार के बीच भी कुछ क्षेत्रों में हरियाली देखने को मिली। निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए डिफेंसिव सेक्टर्स का रुख किया:
फार्मा और हेल्थकेयर: फार्मा और स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
स्मॉलकैप और मिडकैप: बड़े शेयरों में गिरावट के बावजूद मझोली और छोटी कंपनियों के सूचकांकों ने बाजार के विपरीत जाकर मजबूती दिखाई।
मुंद्रा से उड़ान तक: भारत में एविएशन नेटवर्क को बदलने की योजना
23 Jun, 2026 03:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत के नागरिक उड्डयन (एविएशन) क्षेत्र में अपनी पकड़ को और मजबूत करते हुए अदाणी समूह ने एक बड़ा दांव खेला है। मुंद्रा हवाई अड्डे से पहली कमर्शियल फ्लाइट के उड़ान भरते ही ग्रुप ने आगामी पांच सालों में एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए 90,000 करोड़ से लेकर 1 लाख करोड़ रुपये के मेगा इन्वेस्टमेंट का बड़ा एलान किया है। सरकार की 'उड़ान' (UDAN) योजना के अंतर्गत शुरू हुई इस हवाई सेवा से न केवल कच्छ संभाग के आर्थिक विकास को रफ्तार मिलेगी, बल्कि देश के लॉजिस्टिक्स और एविएशन सेक्टर की सूरत भी बदलेगी।
₹1 लाख करोड़ का मास्टर प्लान
अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स के डायरेक्टर जीत अदाणी ने मुंद्रा से पहली व्यावसायिक उड़ान शुरू होने के अवसर पर समूह के विजन को सामने रखा। उन्होंने कहा कि ग्रुप अपने एविएशन बिजनेस को लेकर बेहद गंभीर है और अगले पांच सालों के भीतर देश के विभिन्न एयरपोर्ट्स पर करीब 90,000 से 1,00,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
इन शहरों के लिए शुरू हुई सीधी उड़ानें
मुंद्रा एयरपोर्ट ने रीजनल एयरलाइन 'स्टार एयर' के साथ हाथ मिलाकर मुंबई और गोवा के लिए अपनी पहली शेड्यूल्ड फ्लाइट सर्विस लॉन्च कर दी है। इसके अलावा, आने वाले समय में स्टार एयर मुंद्रा से कुल आठ नए रूटों पर विमान सेवा शुरू करेगी, जो इसे हिंडन, सूरत, बेंगलुरु, बेलगावी, कोल्हापुर और नांदेड़ जैसे प्रमुख शहरों से सीधे जोड़ेगी। इससे कारोबारियों और सैलानियों को आवाजाही में काफी सहूलियत होगी।
नए हवाई अड्डों की नीलामी पर नजर
केंद्र सरकार जल्द ही देश के 11 और एयरपोर्ट्स के निजीकरण के लिए बोलियां मंगाने जा रही है। जीत अदाणी ने स्पष्ट किया कि उनका ग्रुप इस अपकमिंग बिडिंग प्रोसेस में पूरी मजबूती और आक्रामकता के साथ उतरेगा। मौजूदा समय में अदाणी ग्रुप के पास मुंबई, नवी मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और मंगलुरु समेत 8 प्रमुख एयरपोर्ट्स के मैनेजमेंट और ऑपरेशन का जिम्मा है।
कच्छ और मुंद्रा के बिजनेस को मिलेगी नई रफ्तार
यह नई हवाई कनेक्टिविटी कच्छ क्षेत्र को एक इंटीग्रेटेड मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स और बड़े बिजनेस हब के रूप में स्थापित करेगी। इससे देश के सबसे बड़े प्राइवेट पोर्ट (मुंद्रा पोर्ट) और मुंद्रा स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) के लिए लास्ट-माइल कनेक्टिविटी का रास्ता साफ होगा, जिससे ग्लोबल और नेशनल सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी।
पर्यटन और आम जनता को सीधे फायदे
अब तक मुंद्रा से मुंबई जाने के लिए यात्रियों को दो जगहों पर रुककर (टू-स्टॉप) लंबा सफर तय करना पड़ता था, लेकिन इस सीधी फ्लाइट से समय की भारी बचत होगी। इसके अलावा, भुज जैसे नजदीकी इलाकों में सीमित हवाई पट्टियां होने के कारण पर्यटकों को दिक्कत होती थी, पर अब इस नई शुरुआत से मांडवी बीच और कच्छ के अन्य सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों पर सैलानियों की संख्या तेजी से बढ़ेगी।
हाईटेक टर्मिनल पर मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं
मुंद्रा एयरपोर्ट के नए टर्मिनल को बेहद कम समय में तैयार किया गया है। यहाँ 1,900 मीटर लंबा रनवे बनाया गया है जो पैसेंजर और कार्गो दोनों तरह के विमानों के लिए उपयुक्त है। इस मॉडर्न टर्मिनल पर यात्रियों के लिए चेक-इन काउंटर, बड़ा पार्किंग एरिया, शानदार फूड कोर्ट, पैसेंजर लाउंज और व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं दी गई हैं। भविष्य में मांग बढ़ने पर इस रनवे को A320 और बोइंग 737 जैसे बड़े नैरो-बॉडी विमानों के संचालन के लिए भी अपग्रेड किया जा सकेगा।
व्हाट्सएप के जरिए ठग कैसे बना रहे फर्जी बॉस का जाल
23 Jun, 2026 01:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: व्हाट्सएप पर 'बॉस' बनकर आ रहा है मैसेज, कंपनियों के खातों से उड़ रहे हैं करोड़ों रुपये; जानें साइबर ठगों की नई चाल
अगर आपको अपने ऑफिस के सीईओ या किसी बड़े अधिकारी के व्हाट्सएप नंबर से अचानक कोई अर्जेंट मैसेज मिले, जिसमें किसी गुप्त प्रोजेक्ट के लिए तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया हो, तो सावधान हो जाइए। भले ही वह आपके बॉस का ही असली नंबर क्यों न हो, लेकिन आप 'बॉस स्कैम' (सीईओ इंपर्सनेशन फ्रॉड) नाम की एक बेहद खतरनाक साइबर धोखाधड़ी के जाल में फंस सकते हैं।
अब हैकर्स फर्जी ईमेल भेजने के बजाय सीधे आपकी कंपनी के बड़े अधिकारियों का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर रहे हैं। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने देश की सभी कंपनियों और उनके कर्मचारियों को इस नए और गंभीर खतरे को लेकर आगाह किया है।
क्या है यह 'बॉस स्कैम' और कैसे काम करता है?
यह धोखाधड़ी 'बिजनेस ईमेल कॉम्प्रोमाइज' का ही एक नया और डिजिटल रूप है। पहले साइबर ठग बड़े अधिकारियों जैसी दिखने वाली फर्जी ईमेल आईडी से पैसे मांगते थे। लेकिन अब वे आधुनिक मैलवेयर (सॉफ्टवेयर वायरस) का सहारा लेकर सीधे सीईओ या एमडी के चालू व्हाट्सएप अकाउंट का पूरा एक्सेस अपने हाथों में ले लेते हैं।
इसके लिए हैकर्स को किसी स्मार्टफोन को छूने की भी जरूरत नहीं होती। वे अधिकारियों को आरबीआई (RBI) जैसे बड़े विभागों के नाम पर एक ईमेल या मैसेज भेजते हैं। इस मैसेज में किसी समस्या को सुलझाने के नाम पर एक फाइल (ZIP file) होती है। जैसे ही अधिकारी उस फाइल को अपने कंप्यूटर पर खोलते हैं, एक 'ट्रोजन' वायरस सिस्टम में आ जाता है। यह वायरस कंप्यूटर पर चल रहे 'व्हाट्सएप वेब' के टोकन को चुरा लेता है, जिससे हैकर्स को बिना फोन छुए पूरे व्हाट्सएप का कंट्रोल मिल जाता है।
डर और सम्मान का फायदा उठाते हैं ठग
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह घोटाला तकनीकी से ज्यादा इंसानी मनोविज्ञान पर काम करता है। जब फाइनेंस या अकाउंट्स टीम के कर्मचारियों को अपने असली बॉस के नंबर से "तुरंत और पूरी गोपनीयता के साथ" पैसे भेजने का आदेश मिलता है, तो वे सम्मान और नौकरी के डर से कोई सवाल नहीं पूछते। वे तुरंत बताए गए बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।
ठग अक्सर रिजर्व बैंक या अन्य सरकारी नियामकों का नाम लेते हैं ताकि अधिकारियों के मन में यह डर बैठ जाए कि अगर तुरंत कदम नहीं उठाया गया, तो कंपनी पर भारी जुर्माना लग सकता है। जबकि I4C ने साफ किया है कि कोई भी सरकारी विभाग व्हाट्सएप पर ऐसे सॉफ्टवेयर या अपडेट नहीं भेजता।
किन कर्मचारियों पर है सबसे ज्यादा खतरा?
इस स्कैम के निशाने पर सबसे ज्यादा नीचे दिए गए विभागों के लोग होते हैं:
फाइनेंस और अकाउंट्स टीम: जिनके पास सीधे तौर पर फंड ट्रांसफर करने की पावर होती है।
एचआर प्रोफेशनल्स और एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट: जो सीधे बड़े अधिकारियों से जुड़े होते हैं।
नए कर्मचारी: जिन्हें कंपनी के नियमों और काम करने के तरीकों की पूरी जानकारी नहीं होती।
डीपफेक और एआई (AI) से बढ़ गया है खतरा
भविष्य में यह खतरा और भी ज्यादा खतरनाक रूप लेने वाला है। साइबर अपराधी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वॉयस क्लोनिंग और डीपफेक वीडियो का इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल ही में एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनी के कर्मचारी ने एक डीपफेक वीडियो कॉल (जिसमें हैकर हूबहू अधिकारी जैसा दिख रहा था) के झांसे में आकर लगभग 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ट्रांसफर कर दी थी।
### सुरक्षा के लिए इन बातों का रखें ध्यान
I4C और साइबर एक्सपर्ट्स ने इस धोखाधड़ी से बचने के लिए कुछ जरूरी उपाय बताए हैं:
1. हमेशा री-वेरिफिकेशन करें: व्हाट्सएप पर मिले किसी भी वित्तीय आदेश पर आंख बंद करके भरोसा न करें। पैसे भेजने से पहले सीधे फोन कॉल, वीडियो कॉल या आमने-सामने मिलकर इसकी पुष्टि जरूर करें।
2. दोहरी मंजूरी (Double Approval): कंपनियों को बड़े लेन-देन के लिए कम से कम दो स्तर की मंजूरी का नियम बनाना चाहिए।
3. अज्ञात फाइलों से बचें: किसी भी अनजान सोर्स से आई .exe या .dll जैसी फाइलों को कंप्यूटर पर डाउनलोड या रन न करें।
टैरिफ और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर चर्चा की संभावना
23 Jun, 2026 01:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत तेज, दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों की बैठक
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रयास तेज हो गए हैं। अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर सोमवार को भारत पहुंचे, जहां केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत के वाणिज्य विभाग में उनका, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और पूरे प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया। उम्मीद जताई जा रही है कि इस आगामी चर्चा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बेहद सार्थक बातचीत होगी।
व्यापार समझौते (Trade Deal) को अंतिम रूप देने की कोशिश
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की एक पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए लिखा कि अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि और राजदूत का भारतीय वाणिज्य विभाग में स्वागत है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस बैठक से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा मिलेगी।
दूसरी ओर, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी मुलाकात पर खुशी जताते हुए लिखा कि नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और यूएस ट्रेड प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के साथ बैठक शानदार रही। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका और भारत के बीच इस ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत का सिलसिला लगातार जारी है।
आर्थिक साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती
इससे पहले, राजदूत गोर ने जेमिसन ग्रीर का भारत आगमन पर स्वागत करते हुए उम्मीद जताई थी कि इस महत्वाकांक्षी व्यापार एजेंडे से दोनों देशों के बीच के आर्थिक संबंध एक नए स्तर पर पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि हम एक मजबूत द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बाजारों में नए आर्थिक अवसर पैदा होंगे।
टैरिफ की समयसीमा से पहले बैठकों का दौर
अमेरिकी राजदूत गोर के मुताबिक, ट्रेड प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के साथ कई महत्वपूर्ण दौर की बैठकें करने वाले हैं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य अगले महीने लागू होने वाली जरूरी टैरिफ समयसीमा (Tariff Deadline) से पहले इस अहम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना और चर्चा को आगे बढ़ाना है।
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