व्यापार
गोल्ड मार्केट में नई चमक, केंद्रीय बैंकों की मांग से कीमतों में उछाल संभव
17 Jun, 2026 10:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। वैश्विक स्तर पर छाई आर्थिक अस्थिरता के इस दौर में दुनिया के तमाम केंद्रीय बैंकों का विश्वास कागजी नोटों की तुलना में एक बार फिर बहुमूल्य धातु सोने पर और अधिक मजबूत होने लगा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के सालाना सर्वेक्षण ने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि रिजर्व मैनेजरों (आरक्षित निधि प्रबंधकों) के बीच अपने निवेश पोर्टफोलियो में सोने की मात्रा को बढ़ाने को लेकर एक लंबा और मजबूत रुझान बना हुआ है। इस सर्वे में दुनिया भर के रिकॉर्ड 76 केंद्रीय बैंकों ने अपनी राय साझा की है, जिनमें से 84 प्रतिशत बैंकों का यह साफ तौर पर मानना है कि आगामी पांच वर्षों के भीतर कुल वैश्विक भंडार में सोने की हिस्सेदारी का ग्राफ काफी ऊंचा चला जाएगा।
घट रही अमेरिकी डॉलर की चमक और सोने का भविष्य
इस सर्वेक्षण में सबसे खास बात यह सामने आई कि विकसित देशों से लेकर उभरते और विकासशील बाजारों की अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक इस मुद्दे पर पूरी तरह एकमत नजर आ रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा जारी आंकड़ों से संकेत मिलते हैं कि वैश्विक सुरक्षित भंडार के रूप में अमेरिकी डॉलर की पैठ अब धीरे-धीरे कमजोर हो रही है। सर्वे में शामिल लगभग 74 फीसदी आरक्षित प्रबंधकों का आकलन है कि आज से पांच साल बाद वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी मौजूदा स्तर के मुकाबले बहुत नीचे आ जाएगी। बाजार विश्लेषकों का भी मानना है कि भले ही कच्चे तेल की वजह से बढ़ी महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी के चलते अल्पावधि में तीन-चार महीने सोने पर थोड़ा दबाव दिखे, लेकिन लंबी अवधि में इसका भविष्य बेहद चमकदार है और अगले एक साल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 6100 से 6500 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छू सकता है।
केंद्रीय बैंक की नई गाइडलाइन और ग्राहकों की सुरक्षा
एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आम ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए एक बेहद कड़ा कदम उठाया है। अब देश के बैंक और वित्तीय संस्थान भ्रामक जानकारियां देकर या ग्राहकों को अंधेरे में रखकर अपने लोन, क्रेडिट कार्ड या अन्य निवेश संबंधी उत्पाद नहीं बेच सकेंगे। यदि कोई संस्थान ऐसा करते हुए पाया जाता है, तो उसे न केवल उस उत्पाद की पूरी कीमत लौटानी होगी बल्कि ग्राहक को हुए आर्थिक नुकसान का हर्जाना भी भुगतना पड़ेगा। केंद्रीय बैंक ने 'वाणिज्यिक बैंक-उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण द्वितीय संशोधन निर्देश, 2026' जारी करते हुए गलत तरीके से उत्पादों की बिक्री (मिस-सेलिंग) के नियमों को और अधिक कड़ा व स्पष्ट कर दिया है, जो कि 1 जनवरी 2027 से पूरी तरह प्रभावी हो जाएंगे।
मिस-सेलिंग की नई परिभाषा और लिखित सहमति के सख्त नियम
इस नए नियम के तहत, यदि कोई वित्तीय उत्पाद किसी ग्राहक की जरूरत और प्रोफाइल से मेल नहीं खाता है, तो उसे बेचना पूरी तरह से 'मिस-सेलिंग' माना जाएगा, भले ही इसके लिए संस्थान ने ग्राहक की रजामंदी ही क्यों न ले रखी हो। इसके साथ ही, किसी एक मुख्य सेवा (जैसे होम लोन) को देने के बदले ग्राहक पर कोई दूसरी अनचाही सेवा (जैसे बीमा पॉलिसी) लेने का दबाव बनाना भी अब पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। आरबीआई ने साफ किया है कि अब बैंक किसी उत्पाद को तभी सक्रिय कर सकेंगे जब ग्राहक ने उसके लिए अलग से और बिल्कुल स्पष्ट शब्दों में लिखित सहमति दी हो। बैंकों को अब अपने आवेदन या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को 'सहमत नहीं' या 'अभी नहीं' के स्पष्ट विकल्प देने होंगे और किसी एक उत्पाद के फॉर्म पर दस्तखत कराने को दूसरे उत्पाद के लिए स्वतः मिली मंजूरी कतई नहीं माना जाएगा।
सरकारी खरीद और अच्छी फसल का असर, गेहूं-चावल से लबालब हुए गोदाम
17 Jun, 2026 10:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। देश की राजधानी में अप्रैल महीने के दौरान जो गेहूं 2550 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर बिक रहा था, उसकी कीमत 16 जून को बढ़कर 2700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। अनाज के दामों में आई इस उछाल के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण माने जा रहे हैं। पहला कारण विदेशों में होने वाले निर्यात में आई भारी तेजी है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 में देश से मात्र 6,448 टन गेहूं बाहर भेजा गया था, लेकिन अप्रैल 2026 में यह निर्यात लगभग सात गुना बढ़कर 45,162 टन के पार हो गया। विदेशों से आई इस मजबूत मांग ने स्थानीय मंडियों में कीमतों को ऊपर बनाए रखा है। इसके अतिरिक्त, दामों में बढ़त की दूसरी बड़ी वजह विभिन्न राज्यों से मंडियों में गेहूं की आवक कम होना और थोक खरीदारों की बढ़ती दिलचस्पी भी है।
सरकारी गोदामों में रिकॉर्ड खरीद और पांच साल का उच्चतम स्टॉक
गेहूं की महंगाई का दूसरा प्रमुख कारण न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बड़े पैमाने पर की गई सरकारी खरीद है। फसल वर्ष 2025-26 के दौरान अनुकूल मानसूनी बारिश की बदौलत देश में 12.06 करोड़ टन गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार हुई। बंपर उत्पादन को देखते हुए सरकार ने इस सीजन में करीब 3.5 करोड़ टन गेहूं सीधे किसानों से खरीदा है, जिसके चलते एक जून तक केंद्रीय पूल में गेहूं का कुल भंडार 5.34 करोड़ टन के स्तर को छू गया। यह स्टॉक वर्ष 2021 के बाद पिछले पांच सालों में सबसे अधिक है। तुलनात्मक रूप से देखें तो दो महीनों के भीतर देश की बड़ी मंडियों में गेहूं करीब 6 फीसदी तक महंगा हुआ है। जहां दिल्ली में भाव 2700 रुपये है, वहीं कानपुर मंडी में यह 2515 रुपये और इंदौर में 2490 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।
चावल का सर्वकालिक रिकॉर्ड भंडार और वैश्विक बाजार में धाक
दूसरी तरफ, देश में चावल के स्टॉक ने एक नया इतिहास रच दिया है। चालू फसल वर्ष में देश के भीतर 15.4 करोड़ टन चावल का बंपर उत्पादन हुआ, जिसके दम पर एक जून तक सरकारी अन्नागारों में धान और चावल का कुल संचय 6.84 करोड़ टन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर जा पहुंचा। विशेष बात यह है कि सरकार ने एक जुलाई तक आरक्षित भंडार (बफर स्टॉक) के लिए केवल 1.35 करोड़ टन का लक्ष्य निर्धारित किया था, यानी इस समय गोदामों में तय सीमा से पांच गुना से भी ज्यादा चावल मौजूद है। दुनिया के कुल चावल व्यापार में अकेले 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाले भारत के लिए यह स्टॉक बेहद अहम है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले समय में अल नीनो के प्रभाव से मानसून कमजोर भी रहता है, तो भी भारत इस महा-स्टॉक के सहारे वैश्विक बाजार में बिना किसी रुकावट के आक्रामक तरीके से आपूर्ति जारी रख सकेगा।
तिलहन की तरफ बढ़ा किसानों का रुझान, सोयाबीन के रकबे में उछाल के आसार
मोटे अनाजों और पारंपरिक फसलों के अलावा इस बार तिलहन क्षेत्र से भी अच्छे संकेत मिल रहे हैं, जहां सोयाबीन की बुवाई के क्षेत्र में भारी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। बाजार के जानकारों और उद्योग जगत के मुताबिक, सोयाबीन की कीमतों में आया चार साल का उच्चतम उछाल और कम बारिश की आशंकाओं ने किसानों की सोच बदल दी है। किसान अब गन्ना और मक्का जैसी अत्यधिक पानी की खपत वाली फसलों से दूरी बनाकर सोयाबीन की तरफ रुख कर रहे हैं। भारतीय कृषकों ने वर्ष 2025 में लगभग 1.2 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन बोया था, जिसमें इस साल 10 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की जा सकती है। पिछले महीने मंडियों में सोयाबीन के दाम 7,587 रुपये प्रति क्विंटल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए, जो सरकार द्वारा तय किए गए समर्थन मूल्य से कहीं ज्यादा हैं और यही मुनाफा किसानों को आकर्षित कर रहा है।
ईंधन कीमतें बढ़ीं तो सुधरी तेल कंपनियों की वित्तीय सेहत
16 Jun, 2026 03:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में ईंधन का वितरण करने वाली सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के लिए राहत भरी खबर आई है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के चलते पेट्रोल की बिक्री पर होने वाले वित्तीय घाटे में 83 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही डीजल पर होने वाला नुकसान भी 75 फीसदी तक कम हो गया है। इस बात की आधिकारिक जानकारी केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा साझा की गई है। मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को विवरण देते हुए बताया कि पेट्रोल और डीजल पर होने वाली अंडर-रिकवरी (लागत के मुकाबले कम वसूली) में पहले की तुलना में भारी सुधार हुआ है। हालांकि, राहत के इन दावों के बीच उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर की बिक्री पर तेल कंपनियों को अब भी एक बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, इन कंपनियों को प्रत्येक लीटर पेट्रोल बेचने पर 30 रुपये और हर लीटर डीजल की बिक्री पर 27 रुपये का घाटा सहना पड़ रहा है, जबकि इसी साल 1 अप्रैल 2026 को यह घाटा पेट्रोल पर 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 105 रुपये प्रति लीटर के ऊंचे स्तर पर बना हुआ था।
चार बार की मूल्य वृद्धि से संभले हालात
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घटने और घरेलू मोर्चे पर पेट्रोल व डीजल की कीमतों में हाल ही में की गई चार दौर की बढ़ोतरी की बदौलत इंडियन ऑयल (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) जैसी दिग्गज सार्वजनिक कंपनियों के नुकसान के ग्राफ में गिरावट आई है। इस सुधार के बावजूद तेल कंपनियों की वित्तीय सेहत पूरी तरह पटरी पर नहीं लौटी है और उन्हें वर्तमान में भी प्रतिदिन लगभग 600 करोड़ रुपये का भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। हालांकि, यह स्थिति बीते 18 मई के आंकड़ों से बेहतर है, जब कंपनियों का दैनिक घाटा 750 करोड़ रुपये के स्तर को छू रहा था।
चालू वित्तीय वर्ष में घाटे का ग्राफ गिरा
यदि चालू वर्ष में 1 अप्रैल के शुरुआती आंकड़ों से वर्तमान स्थिति की तुलना की जाए, तो तीनों प्रमुख तेल विपणन कंपनियों के कुल घाटे में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, इस निर्धारित समय सीमा के भीतर पेट्रोल के व्यापार में होने वाले नुकसान को 83 फीसदी तक समेटने में सफलता मिली है। ठीक इसी तरह, डीजल के कारोबार में कंपनियों को मिलने वाले वित्तीय झटके में भी 75 प्रतिशत तक की बड़ी राहत देखने को मिली है, जिससे सरकारी खजाने और कंपनियों दोनों ने थोड़ी राहत की सांस ली है।
समझें क्या होती है अंडर-रिकवरी
आर्थिक और पेट्रोलियम क्षेत्र में 'अंडर-रिकवरी' एक तकनीकी शब्दावली है, जिसका सीधा संबंध कंपनियों की लागत और मुनाफे से होता है। सरल शब्दों में कहें तो जब तेल कंपनियां रिफाइनरी से पेट्रोल या डीजल तैयार करती हैं, तो उसकी एक कुल वास्तविक लागत तय होती है। इसके बाद जब इस ईंधन को खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को बेचा जाता है, तो उससे मिलने वाली राशि और वास्तविक लागत के बीच जो अंतर (कमी) रह जाता है, उसे ही तकनीकी भाषा में अंडर-रिकवरी या साधारण शब्दों में कंपनियों का घाटा कहा जाता है।
सोने की रफ्तार थमी, चांदी फिसली; खरीदारी से पहले चेक करें आज का रेट
16 Jun, 2026 02:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कीमती धातुओं के बाजारों में पिछले तीन दिनों से जारी लगातार उछाल पर आज आखिरकार ब्रेक लग गया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुरुआती कारोबारी सत्र के दौरान सोने के भाव में स्थिरता (फ्लैट ट्रेंड) देखी गई, जबकि चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। वहीं, हाजिर सर्राफा बाजार में सोने के दाम थोड़े नीचे खिसके हैं, जबकि चांदी के भाव कल के स्तर पर ही टिके रहे। दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और शांति की बहाली की उम्मीदों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी आंशिक नरमी देखने को मिली है। वायदा बाजार (MCX) की बात करें तो आगामी 5 अगस्त की मैच्योरिटी वाला सोना पिछले कारोबारी दिन 1,52,916 रुपये प्रति 10 ग्राम पर थमा था, जो आज सुबह मामूली कमजोरी के साथ 1,52,891 रुपये पर खुला। बाजार खुलने के बाद शुरुआती दौर में इसने 1,52,825 रुपये का निचला स्तर और 1,53,161 रुपये का उच्च स्तर छुआ। सुबह करीब सवा दस बजे यह महज 6 रुपये की नाममात्र गिरावट के साथ 1,52,910 रुपये के आसपास घूमता नजर आया।
चांदी के वायदा भाव में भारी गिरावट
सोने के विपरीत, आज चांदी के वायदा कारोबार में शुरुआत से ही तगड़ी बिकवाली देखने को मिली और इसके दाम करीब 1,800 रुपये तक टूट गए। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,51,458 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुई थी, जबकि आज के सत्र की शुरुआत यह 2,50,457 रुपये पर करने उतरी। शुरुआती कारोबार के दौरान मुनाफावसूली के दबाव में यह 1,767 रुपये लुढ़ककर 2,49,691 रुपये के निचले स्तर तक चली गई। सुबह लगभग 10:20 बजे यह 1,674 रुपये की शुद्ध गिरावट के साथ 2,49,784 रुपये प्रति किलो के भाव पर ट्रेड कर रही थी।
महानगरों और प्रमुख शहरों में सोने के दाम
देश के रिटेल सर्राफा बाजारों में आज सुबह सोने की कीमतों में आंशिक बदलाव देखा गया। राजधानी दिल्ली में शुद्ध 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,520 रुपये, 22 कैरेट की 1,38,900 रुपये और 18 कैरेट की 1,13,680 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। आर्थिक राजधानी मुंबई के साथ-साथ कोलकाता में 24 कैरेट सोना 1,51,370 रुपये, 22 कैरेट 1,38,750 रुपये और 18 कैरेट 1,13,530 रुपये पर रहा। चेन्नई में सोने के भाव सबसे ऊंचे रहे, जहां 24 कैरेट का रेट 1,53,380 रुपये और 22 कैरेट का रेट 1,40,600 रुपये दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश के लखनऊ व कानपुर तथा राजस्थान के जयपुर में दिल्ली के समान ही भाव रहे। बिहार के पटना, मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल में 24 कैरेट सोना 1,51,420 रुपये तथा 22 कैरेट सोना 1,38,800 रुपये के भाव पर उपलब्ध था।
हाजिर सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की स्थिति
खुदरा सर्राफा बाजार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमतों में आज मामूली गिरावट का रुख रहा। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, शुद्धता के पैमाने पर सबसे ऊंचे 24 कैरेट सोने का भाव 160 रुपये की नरमी के साथ 1,51,370 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। इसी प्रकार, आभूषणों के लिए सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले 22 कैरेट सोने के दाम भी 150 रुपये टूटकर 1,38,750 रुपये पर आ गए, जबकि 18 कैरेट सोना 120 रुपये की कमी के साथ 1,13,530 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। इस उठापटक के बीच हाजिर बाजार में चांदी की औद्योगिक मांग स्थिर रहने के कारण यह 2,65,000 रुपये प्रति किलोग्राम के पुराने स्तर पर ही टिकी रही।
₹1 लाख करोड़ बढ़ी रिलायंस की वैल्यू, अब कहां तक जाएगा शेयर?
16 Jun, 2026 02:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। देश की सबसे मूल्यवान कॉर्पोरेट इकाई, रिलायंस इंडस्ट्रीज की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) शुक्रवार को आयोजित होने वाली है। इस महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले बाजार में कंपनी के शेयरों के प्रति भारी उत्साह देखा गया और आज के कारोबारी सत्र के दौरान इसमें लगभग दो प्रतिशत का तगड़ा उछाल दर्ज किया गया। गौरतलब है कि रिलायंस का शेयर बीते 11 जून को गिरकर 1,253.20 रुपये के स्तर पर आ गया था, जो कि इसका पिछले 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर (लोएस्ट लेवल) है। हालांकि, इस गिरावट के बाद कंपनी ने शानदार वापसी की और पिछले तीन ट्रेडिंग सत्रों में इसके शेयरों में तकरीबन छह फीसदी की तेजी देखी गई है। शेयरों में आई इस अचानक तेजी की बदौलत रिलायंस के कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में करीब एक लाख करोड़ रुपये की भारी बढ़ोतरी हुई है। इसी बीच, वैश्विक वित्तीय सेवा प्रदाता फर्म मॉर्गन स्टेनली ने एक सकारात्मक रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि रिलायंस के शेयरों में मौजूदा स्तर से अभी भी 38 प्रतिशत तक ऊपर जाने की मजबूत संभावना बनी हुई है।
चालू वर्ष में अब तक रिलायंस के शेयरों के मूल्य में लगभग 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। इसके बावजूद, मॉर्गन स्टेनली ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों पर अपनी पुरानी 'ओवरवेट' रेटिंग को बरकरार रखा है और भविष्य के लिए इसका प्रति शेयर लक्ष्य मूल्य (टारगेट प्राइस) 1,803 रुपये निर्धारित किया है। ब्रोकरेज फर्म ने सोमवार को जारी अपने एक आधिकारिक नोट में विश्लेषण करते हुए कहा कि वर्तमान में ऊर्जा रसद (एनर्जी लॉजिस्टिक्स) की बढ़ी हुई लागत के बावजूद, रिलायंस के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) सेगमेंट से होने वाली मजबूत कमाई कंपनी के मुनाफे को निरंतर सहारा देती रहेगी।
आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) से बाजार को बड़ी उम्मीदें
वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि इस समय निवेशकों और बाजार की नजरें मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मोनेटाइजेशन और एआई डेटा सेंटरों में रिलायंस द्वारा किए जा रहे भारी निवेश के परिणामों पर टिकी हुई हैं। आगामी 19 जून को होने वाली रिलायंस की इस हाई-प्रोफाइल एजीएम में उम्मीद जताई जा रही है कि कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी अपने टेलीकॉम, रिटेल और न्यू एनर्जी (हरित ऊर्जा) जैसे विभिन्न प्रमुख व्यवसायों के भविष्य के रोडमैप और नई योजनाओं के बारे में बड़े अपडेट दे सकते हैं।
मार्केट कैप 18 लाख करोड़ रुपये के पार
इस सकारात्मक माहौल के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर 1.87 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1331.55 रुपये के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। शेयरों की इस खरीदारी के चलते कंपनी का कुल बाजार मूल्यांकन एक बार फिर से 18 लाख करोड़ रुपये की ऐतिहासिक सीमा को पार कर गया है। बाजार विशेषज्ञ इस तेजी को आगामी एजीएम से पहले निवेशकों के बढ़ते भरोसे और बड़ी घोषणाओं की उम्मीद से जोड़कर देख रहे हैं।
चुपचाप बढ़ती कीमतों ने बिगाड़ा बजट, महंगे हुए ये जरूरी सामान
16 Jun, 2026 12:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद आम जनता की जेब पर पहले ही बड़ा बोझ पड़ रहा था। इस चौतरफा मार के बीच, बीते मात्र दो हफ्तों के भीतर रोजमर्रा की कई अन्य आवश्यक वस्तुओं के दामों में भी गुपचुप तरीके से बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे अधिकांश उपभोक्ता अभी तक अनजान हैं। निर्माण लागत और मालभाड़ा बढ़ने की वजह से एफएमसीजी (FMCG) क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों जैसे एचयूएल, डाबर, मैरिको और कोलगेट ने अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ा दी हैं। इसके चलते प्रीमियम श्रेणी के साबुन 4 से 5 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं, जबकि कपड़ों की धुलाई में इस्तेमाल होने वाले डिटर्जेंट के दामों में 5 से 11 प्रतिशत तक का उछाल आया है। इसके साथ ही टूथपेस्ट और ओरल केयर से जुड़े उत्पादों की कीमतें बढ़ने से सुबह की शुरुआत भी महंगी हो गई है।
दूध और डेयरी उत्पादों पर बढ़ी महंगाई
आम जनता के सुबह के बजट को प्रभावित करते हुए प्रमुख डेयरी ब्रांड्स ने दूध की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि की है। अमूल गोल्ड का एक लीटर का पैकेट अब 68 रुपये के बजाय 70 रुपये में मिल रहा है, जबकि अमूल ताजा की कीमत भी 55 रुपये से बढ़कर 57 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इसी तरह, मदर डेयरी ने भी अपने फुल क्रीम दूध के दाम 69 रुपये से बढ़ाकर 72 रुपये प्रति लीटर कर दिए हैं। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी भैंस के दूध (बफेलो मिल्क) पर की गई है, जिसकी कीमत में सीधे 5 रुपये का इजाफा कर इसे 75 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
रसोई का बजट और सब्जियों के दाम बेकाबू
थोक परिवहन और मालभाड़े में हुई बढ़ोतरी के कारण खुदरा बाजारों में खुली दालों और चावल की कीमतों में प्रति किलोग्राम 5 से 7 रुपये तक की तेजी देखी जा रही है। खाद्य तेलों की बात करें तो सफोला ब्रांड के तेलों में 6 से 11 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा हरी सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे हैं। मात्र 15 दिनों के भीतर टमाटर की कीमतें 30-40 रुपये से बढ़कर 60-70 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई हैं। परिवहन लागत बढ़ने से आलू, प्याज, अदरक, नींबू, हरी मिर्च, बैंगन और भिंडी जैसी बुनियादी सब्जियों के भाव भी 5 से 10 रुपये प्रति किलो तक चढ़ गए हैं।
होटल और रेस्टोरेंट में भोजन हुआ महंगा
व्यावसायिक (कमर्शियल) एलपीजी सिलेंडरों की दरों में हुई वृद्धि का सीधा असर अब बाहर खाना खाने वाले शौकीनों पर पड़ रहा है। रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों ने अपनी इनपुट लागत की भरपाई करने के लिए खाद्य पदार्थों की दरों में बढ़ोतरी कर दी है, जिससे इस क्षेत्र की महंगाई दर 5.75 प्रतिशत के स्तर को छू गई है। लागत के बढ़ते दबाव को देखते हुए पिछले एक महीने के दौरान होटल मालिकों ने अपने फूड मेन्यू कार्ड की कीमतों में करीब 1.8 प्रतिशत तक का इजाफा कर दिया है, जिससे अब बाहर जाकर भोजन करना भी आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है।
निर्यात शुल्क में बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतें स्थिर
16 Jun, 2026 09:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए डीजल के निर्यात शुल्क में 14 रुपये प्रति लीटर और हवाई ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात टैक्स में 12.5 रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया है। राहत की बात यह है कि पेट्रोल के निर्यात शुल्क और घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में किसी भी तरह का फेरबदल नहीं किया गया है।
राजस्व विभाग की आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, ये संशोधित दरें मंगलवार से पूरे देश में लागू कर दी गई हैं। दरअसल, पश्चिम एशिया में चल रहे संकट को देखते हुए सरकार ने घरेलू बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों की कमी न होने देने और निर्यात पर लगाम कसने के इरादे से विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) और बुनियादी ढांचा उपकर लगाने का कदम उठाया था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और अन्य ईंधनों की औसत कीमतों के आधार पर इन शुल्कों की हर 15 दिन में समीक्षा की जाती है।
देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार
पेट्रोलियम मंत्रालय ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि भारत में पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस (LPG) और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार की ओर से रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं, इसलिए आपूर्ति को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। मंत्रालय ने केवल उद्योगों और आम नागरिकों से ऊर्जा का सही और जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने का अनुरोध किया है।
थोक खरीदारों के कारण खुदरा पंपों पर बढ़ा दबाव
सप्लाई चेन की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि असल समस्या ईंधन की कमी नहीं, बल्कि उसकी खरीद के तौर-तरीकों में आया बदलाव है। आंकड़ों के अनुसार, बीते महीने करीब 42 करोड़ लीटर डीजल की बिक्री थोक डीलरों के बजाय सीधे खुदरा पेट्रोल पंपों पर शिफ्ट हो गई। इसके चलते आम रिटेल आउटलेट्स पर अचानक भीड़ और दबाव बढ़ गया, जिसे नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को अस्थाई कदम उठाने पड़े हैं।
डीजल की खुदरा बिक्री पर लगी सीमा
आम जनता को कोई परेशानी न हो और उन्हें आसानी से ईंधन मिलता रहे, इसके लिए सरकार ने रिटेल पंपों से प्रति व्यक्ति प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल की बिक्री की सीमा तय कर दी है। सभी बड़े कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपनी जरूरत का डीजल खुदरा पंपों के बजाय थोक उपभोक्ता पंपों से ही खरीदें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह पाबंदी सिर्फ 90 दिनों की अस्थायी व्यवस्था के लिए लगाई गई है।
सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार तेजी, शेयर बाजार में दिखा बुल्स का दम
16 Jun, 2026 09:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में शानदार तेजी देखने को मिली, जिससे निवेशकों में भारी उत्साह है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने और ईरान-अमेरिका के बीच शांति समझौते की उभरती संभावनाओं ने बाजार को मजबूत सहारा दिया। सुबह के शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सूचकांक सेंसेक्स 300.03 अंकों की बढ़त लेकर 76,564.36 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एन NSE) का निफ्टी भी 75.15 अंकों की मजबूती के साथ 23,929.05 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। इसी सकारात्मक माहौल के चलते भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5 पैसे मजबूत होकर 94.53 के स्तर पर पहुंच गया।
ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट और तनाव घटने की उम्मीदों से बाजार के सेंटिमेंट्स को बड़ा बूस्ट मिला है। इस कारोबारी हफ्ते के शुरुआती दो दिनों में ही प्रमुख सूचकांक करीब तीन फीसदी तक की छलांग लगा चुके हैं। आज के बाजार की इस रफ्तार को आगे बढ़ाने में मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और वित्तीय (Finance) क्षेत्र की कंपनियों का अहम योगदान रहा, जहां शुरुआती कारोबार में ही एचसीएल टेक और बजाज फाइनेंस के शेयरों में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की और दोनों कंपनियों के शेयर दो-दो प्रतिशत तक उछल गए।
वेदांता ग्रुप ने अनलॉक की बड़ी वैल्यू
कॉर्पोरेट जगत से आ रही बड़ी खबरों के बीच वेदांता समूह के डिमर्जर (व्यवसाय के पुनर्गठन) की प्रक्रिया चर्चा का विषय बनी रही। अपने अलग-अलग कारोबार को स्वतंत्र कंपनियों में विभाजित करने के बाद, समूह ने अपनी पांच लिस्टेड कंपनियों के माध्यम से निवेशकों के लिए लगभग 20 फीसदी की नई वैल्यू अनलॉक की है। बाजार के विश्लेषक कंपनी के इस बड़े कदम और पुनर्गठन की रणनीति को लेकर काफी सकारात्मक नजर आ रहे हैं।
शुरुआती बढ़त के बाद नई कंपनियां लाल निशान में
हालांकि, डिमर्जर के बाद शेयर बाजार में एंट्री करने वाली वेदांता की चार नई कंपनियों के लिए लिस्टिंग का पहला दिन उतार-चढ़ाव से भरा रहा। पहले दिन के शुरुआती कारोबार में तेजी दिखाने के बाद ये कंपनियां अपनी बढ़त को बरकरार रखने में नाकाम रहीं और अंततः गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुईं। इसके बावजूद, ग्रुप द्वारा किए गए ओवरऑल 20% वैल्यू क्रिएशन ने निवेशकों के बड़े नुकसान के जोखिम को संभाल लिया।
रणनीतिक बदलावों से निवेशकों को फायदा
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर शांति की कोशिशों ने न सिर्फ भारतीय बल्कि वैश्विक बाजारों में भी नई जान फूंकने का काम किया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वेदांता समूह का यह घटनाक्रम साफ तौर पर दर्शाता है कि जब भी कोई बड़ा कॉर्पोरेट घराना सही रणनीति के साथ अपने कारोबार का पुनर्गठन करता है, तो बाजार में शुरुआती उठापटक होने के बावजूद लंबी अवधि में निवेशकों के लिए बेहतरीन वैल्यू क्रिएट होने की संभावनाएं हमेशा मजबूत रहती हैं।
वैश्विक तेल बाजार में बदलाव की उम्मीद, भारत में महंगाई पर असर का अनुमान
15 Jun, 2026 04:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते की खबर आते ही वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का दौर शुरू हो गया है। इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का सीधा असर 15 जून को भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिला, जहां अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 95.11 से मजबूत होकर 94.65 के स्तर पर आ गया, जो बीते मई महीने के बाद का इसका सबसे शानदार स्तर है। इस मजबूती के कारण देश के शेयर बाजार में भी जोरदार रौनक रही और सेंसेक्स-निफ्टी में लगभग 2 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया, जिससे तेल, गैस, बैंकिंग और आईटी सेक्टर के शेयरों को बड़ा सहारा मिला है।
पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस की कीमतों में राहत की उम्मीद
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से घटकर अब 84 डॉलर के करीब आ चुकी हैं, जिससे तेल कंपनियों की लैंडेड कॉस्ट में बड़ी कमी आएगी। हालांकि, जून के शुरुआती हफ्ते में ही देश में ईंधन के दामों में बढ़ोतरी की गई थी, इसलिए इस वैश्विक गिरावट का सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलने में कम से कम दो से चार हफ्तों का वक्त लग सकता है। बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि जुलाई के प्रथम सप्ताह में होने वाली मूल्य समीक्षा के दौरान तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दामों में 4 से 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर सकती हैं, जबकि सऊदी सीपी में मंदी आने से घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी 30 से 50 रुपये तक की कमी देखने को मिल सकती है।
सप्लाई चेन की बहाली और नए सामान्य स्तर का आकलन
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल का परिवहन पूरी तरह बहाल होने और अमेरिकी प्रतिबंधों के हटने की प्रक्रिया में एक से तीन महीने का समय लगेगा। हालांकि, भू-राजनीतिक बदलावों और बदली हुई सप्लाई चेन के कारण चालू वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल के 92-95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ही बने रहने के आसार हैं, जिससे फरवरी 2026 के पुराने स्तरों (96 रुपये प्रति लीटर) पर लौटना मुमकिन नहीं होगा और वर्तमान की 102-108 रुपये की रेंज ही नया सामान्य स्तर बन जाएगी। तेल के ऊंचे दामों की वजह से भारत का वार्षिक तेल आयात बिल भी बढ़कर 180 अरब डॉलर तक पहुंचने की आशंका है, जो युद्ध से पहले के दौर में महज 70 अरब डॉलर के आसपास हुआ करता था।
घरेलू बाजार में महंगाई से मुक्ति के तीन चरण और अड़चनें
ईंधन की दरों में नरमी आने से देश की थोक और खुदरा महंगाई पर लगाम कसने की उम्मीद बंधी है, जो मई 2026 में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अनुसार, यदि तेल की कीमतें 80-85 डॉलर के दायरे में स्थिर रहती हैं, तो सालाना औसत खुदरा महंगाई का अनुमान 5.1 फीसदी से घटकर 4.5 से 4.8 प्रतिशत के बीच आ सकता है, जिसका लाभ आम जनता को तीन चरणों में (कमोडिटी के दाम घटने, उत्पादन लागत कम होने और अंततः त्योहारी सीजन तक पैकेज्ड फूड व कपड़ों के सस्ते होने के रूप में) मिलेगा। हालांकि, यह पूरी राहत आगामी 19 जून से शुरू होने वाली 60 दिनों की ईरान परमाणु वार्ता की सफलता, इजरायल-हिजबुल्लाह तनाव के नियंत्रण और सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी न बढ़ाए जाने जैसी नाजुक वैश्विक अड़चनों पर टिकी हुई है।
निर्यात ने पकड़ी रफ्तार, सोना और पेट्रोलियम ने बढ़ाया भारत का व्यापार
15 Jun, 2026 04:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय वाणिज्य क्षेत्र से एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आ रही है, जहां मई के महीने में देश के विदेशी व्यापार ने एक नया मुकाम हासिल किया है। सरकार द्वारा जारी ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष मई में भारत के मर्चेंडाइज (सामान) निर्यात में 18 प्रतिशत का तगड़ा उछाल दर्ज किया गया है, जिसके बाद कुल निर्यात का आंकड़ा बढ़कर 45.2 अरब डॉलर (लगभग 4,30,197.81 करोड़ रुपये) के पार पहुंच गया है। वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता पर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने संतोष व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई है कि चालू वित्तीय वर्ष निर्यात क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक साबित होगा।
पेट्रोलियम निर्यात में बूम और पश्चिम एशियाई बाजार का हाल
इस शानदार व्यापारिक बढ़ोतरी में सबसे प्रमुख भूमिका पेट्रोलियम सेक्टर ने निभाई है, जिसने मई 2026 में अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है। इस अवधि में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में 54.89 प्रतिशत की भारी वृद्धि देखी गई, जिससे यह बढ़कर 8.42 अरब डॉलर (करीब 80,138.62 करोड़ रुपये) का हो गया और इसने देश की कुल निर्यात ग्रोथ को जबरदस्त रफ्तार दी। हालांकि, इस शानदार कामयाबी के बीच पश्चिम एशिया के पारंपरिक बाजार से मामूली मायूसी हाथ लगी है, जहां मई में भारतीय निर्यात पिछले साल के 5.38 अरब डॉलर से आंशिक रूप से घटकर 5.30 अरब डॉलर रह गया।
बढ़ता आयात और सोने की चमक से गहराया व्यापार घाटा
विदेशी बाजारों में सामान भेजने के साथ-साथ देश के भीतर विदेशी सामानों की आमद भी तेजी से बढ़ी है, जिसके तहत मई महीने में भारत का कुल आयात 20.62 फीसदी की बढ़त के साथ 73.41 अरब डॉलर (लगभग 6,98,690.74 करोड़ रुपये) पर जा पहुंचा। निर्यात की तुलना में आयात की रफ्तार अधिक होने के कारण देश का व्यापार घाटा भी बढ़कर 28.21 अरब डॉलर (करीब 2,68,492.93 करोड़ रुपये) दर्ज किया गया। इस आयात को बढ़ाने में सोने की घरेलू मांग का बड़ा हाथ रहा, जिसके कारण चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों (अप्रैल-मई) में स्वर्ण आयात 60 फीसदी की छलांग लगाकर 9.04 अरब डॉलर (लगभग 86,039.56 करोड़ रुपये) पर पहुंच गया।
वैश्विक चुनौतियां और भारतीय निर्यातकों के सामने खड़ी दीवारें
इस चौतरफा तरक्की के बावजूद भविष्य की राह में तीन प्रमुख अड़चनें साफ दिखाई दे रही हैं, जिनमें सबसे पहली और बड़ी समस्या वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव की वजह से कंटेनरों का भाड़ा आसमान छू रहा है, जिससे भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ रही है। दूसरी चुनौती वैश्विक मुद्राओं में जारी उतार-चढ़ाव है; अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अन्य देशों की करेंसी कमजोर होने से उनके लिए भारतीय सामान की खरीदारी महंगी होती जा रही है। वहीं, तीसरी सबसे गंभीर चुनौती यूरोपीय संघ के 'कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म' (CBAM) जैसे कड़े पर्यावरण मानक हैं, जिनके अनुरूप यदि भारतीय इस्पात, इंजीनियरिंग और कपड़ा उद्योगों ने खुद को जल्द नहीं ढाला, तो विकसित देशों के बड़े बाजारों में भारत की पैठ कमजोर हो सकती है।
भारत में FDI कैसे आएगा? सीतारमण ने बताया सरकार का पूरा प्लान
15 Jun, 2026 02:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को यह साफ संकेत दिया है कि देश में विदेशी पूंजी के प्रवाह को गति देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में शुरू किए गए प्रयास महज एक शुरुआत हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में विदेशी निवेश को बड़े पैमाने पर आकर्षित करने के लिए और भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर तेजी से बदलते घटनाक्रमों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर कच्चे माल, पेट्रोलियम उत्पादों और उर्वरकों के आयात का वित्तीय बोझ बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में, भविष्य की किसी भी संभावित आर्थिक चुनौती से निपटने के लिए सरकार को पहले से ही अपनी रणनीतियां तैयार रखनी होंगी।
विदेशी पूंजी को आकर्षित करने का प्रमुख जरिया बनेगा बॉन्ड बाजार
माइंडमाइन समिट 2026 के एक सत्र को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने स्पष्ट किया कि सरकार और केंद्रीय बैंक के संयुक्त आर्थिक विश्लेषण में यह बात उभरकर सामने आई है कि भारतीय बॉन्ड बाजार विदेशी पूंजी को देश में लाने का एक बेहद असरदार और मजबूत माध्यम साबित हो सकता है। इसी रणनीतिक योजना के तहत सरकार ने बीते 5 जून को 'फुली एक्सेसिबल रूट' (एफएआर) के अंतर्गत आने वाली सरकारी प्रतिभूतियों के दायरे को और बढ़ा दिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य सरकारी बॉन्ड के क्षेत्र में विदेशी संस्थागत निवेशकों की पहुंच और भागीदारी को पहले के मुकाबले कहीं अधिक सुगम और सरल बनाना है।
विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स में दी गई बड़ी राहत
वैश्विक निवेशकों को भारतीय बाजार की ओर आकर्षित करने के लिए सरकार ने नीतियों में लचीलापन लाने के साथ-साथ करों में भी बड़ी रियायतें देने की घोषणा की है। नए प्रावधानों के तहत अब विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों (गवर्नमेंट सिक्योरिटीज) में किए गए निवेश से अर्जित होने वाले ब्याज और उससे मिलने वाले पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन्स) पर आयकर से पूरी तरह छूट प्रदान की गई है। सरकार का मानना है कि इस टैक्स छूट से वैश्विक स्तर के बड़े फंड मैनेजर भारत में दीर्घकालिक निवेश के लिए प्रोत्साहित होंगे, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार और राजकोषीय प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कवायद
वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर भी जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाले अवरोधों का असर घरेलू विनिर्माण क्षेत्र पर न पड़े, इसके लिए वित्तीय उपायों को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आयात पर बढ़ती निर्भरता के बीच देश के भीतर विदेशी मुद्रा के प्रवाह को संतुलित रखना बेहद जरूरी है। सरकार की यह नई नीति न केवल भारतीय बाजार में लिक्विडिटी (नकदी प्रवाह) को बढ़ाएगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मंचों पर भारत की साख को और अधिक मजबूत करेगी, जिससे देश का आर्थिक विकास दर निरंतर स्थिर बना रहे।
WPI रिपोर्ट: मई में महंगाई 9.68%, अप्रैल के मुकाबले तेज बढ़ोतरी
15 Jun, 2026 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत में थोक मूल्यों पर आधारित मुद्रास्फीति ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। मई 2026 में देश की थोक महंगाई दर (डब्ल्यूपीआई) छलांग लगाकर 9.68 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा न केवल बाजार के 9.1 प्रतिशत के अनुमान से कहीं ज्यादा है, बल्कि अप्रैल महीने के 8.3 प्रतिशत के मुकाबले भी काफी अधिक है, जो लगातार बढ़ती कीमतों का स्पष्ट संकेत है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी इन आंकड़ों के अनुसार, इस उछाल की सबसे बड़ी वजह ईंधन, ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की कीमतों में आई भारी तेजी है। सरकार ने डब्ल्यूपीआई की गणना के लिए आधार वर्ष को भी 2011-12 से संशोधित कर अब 2022-23 कर दिया है।
पश्चिम एशिया संकट से ईंधन और कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
इस बार थोक महंगाई बढ़ने का सबसे प्रमुख कारण ईंधन और बिजली की दरों में हुआ अप्रत्याशित इजाफा है। मई महीने में ईंधन और बिजली क्षेत्र की थोक महंगाई बढ़कर 30.33 फीसदी पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 24.89 फीसदी के स्तर पर थी। वैश्विक स्तर पर देखें तो कच्चे पेट्रोलियम की महंगाई दर मई में 61.51 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर पर दर्ज की गई। इस विस्फोटक वृद्धि के पीछे पश्चिम एशिया में चल रहा भू-राजनीतिक संकट मुख्य वजह माना जा रहा है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी होने के कारण कच्चे तेल का आयात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसी अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते मई के उत्तरार्ध में घरेलू बाजार में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.50 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई थी, जिसने इनपुट लागत को और बढ़ा दिया।
खाद्य और विनिर्मित उत्पाद भी हुए महंगे, खुदरा बाजार पर भी दिखा असर
महंगाई की यह मार केवल ईंधन तक सीमित नहीं रही, बल्कि खाद्य वस्तुओं और विनिर्मित उत्पादों (मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स) पर भी इसका व्यापक असर देखा गया। खाद्य सामग्रियों की थोक महंगाई अप्रैल के 2.43 फीसदी से बढ़कर मई में 3.60 फीसदी हो गई, जिसमें टमाटर और अदरक जैसी जल्द खराब होने वाली वस्तुओं की कीमतों का दबाव सबसे ज्यादा रहा। वहीं विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर भी 6.68 फीसदी से बढ़कर 7.48 फीसदी पर पहुंच गई। थोक बाजार के इस दबाव ने खुदरा बाजार को भी प्रभावित किया, जिसके चलते मई 2026 में खुदरा या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर बढ़कर 3.93 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 3.48 प्रतिशत थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के मुताबिक, खुदरा स्तर पर खाद्य महंगाई 4.78 फीसदी दर्ज की गई है।
आरबीआई ने बढ़ाया महंगाई का अनुमान और विश्लेषकों ने जताई चिंता
बदलते आर्थिक हालातों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने पुराने अनुमानों में बदलाव किया है और महंगाई दर के अनुमान को 4.6 फीसदी से बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई 4.25 फीसदी रही, जबकि राज्यों की बात करें तो तेलंगाना में यह सबसे ज्यादा 6.15 फीसदी और मिजोरम में सबसे कम 1.03 फीसदी दर्ज की गई। इस स्थिति पर बाजार विश्लेषकों का मानना है कि खाद्य और गैर-खाद्य दोनों ही मोर्चों पर मूल्य दबाव काफी बढ़ गया है। जहां कुछ विशेषज्ञ भू-राजनीतिक तनाव और अल नीनो के प्रभाव को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम मान रहे हैं, वहीं कुछ उद्योग निकायों का कहना है कि वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए परिस्थितियां अभी भी प्रशासनिक नियंत्रण में हैं। बहरहाल, सरकार ने गणना पद्धति में हुए बदलावों और नई वस्तुओं को शामिल किए जाने के मद्देनजर सूचकांकों के विश्लेषण में सतर्कता बरतने की बात कही है।
सोने-चांदी की कीमतों में तेज बढ़त, निवेशकों की बढ़ी चिंता और उम्मीदें
15 Jun, 2026 02:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में पिछले करीब 107 दिनों से जारी गतिरोध के बाद आखिरकार शांति बहाली के ठोस संकेत मिलने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव को रोकने पर आपसी सहमति बन गई है, जिसके तहत आगामी शुक्रवार को स्विटजरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधि एक औपचारिक शांति समझौते पर दस्तखत करेंगे। इस बड़े कूटनीतिक बदलाव का सीधा असर सर्राफा बाजार पर भी दिखाई दिया, जहां आज सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार बढ़त दर्ज की गई। मौजूदा व्यापारिक सत्र में 10 ग्राम सोने का भाव बढ़कर 1.53 लाख रुपये के स्तर को पार कर गया है, जबकि चांदी की चमक भी बढ़ी है और इसकी कीमत में प्रति किलोग्राम 4,900 रुपये से अधिक का उछाल आया है।
शांति समझौते की आहट से निवेशकों का भरोसा बढ़ा और सोने में आई तेजी
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने की खबरों के बीच आज सुबह के कारोबार में सोने की कीमतों में 2 फीसदी से ज्यादा का उछाल देखा गया। बाजार के जानकारों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में कीमती धातुओं की मांग अचानक तेज हुई है। इससे पहले बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भी सर्राफा बाजार में जोरदार तेजी का रुख रहा था, जब राष्ट्रीय राजधानी में सोना 3,000 रुपये मजबूत होकर 1.56 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था। वहीं चांदी भी 10,000 रुपये प्रति किलो की छलांग लगाते हुए 2.55 लाख रुपये के स्तर पर बंद हुई थी। स्थानीय स्तर पर शुद्धता वाले सोने और सफेद धातु में आई इस हालिया तेजी ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
सैन्य हमलों के टलने और डॉलर में कमजोरी से सर्राफा बाजार को मिला सहारा
कमोडिटी बाजार के विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को वापस लेने की घोषणा के बाद से ही निवेशकों में सकारात्मक संदेश गया है। बातचीत की मेज पर दोनों देशों के आगे बढ़ने से सर्राफा बाजार का माहौल पूरी तरह बदल गया। वैश्विक बाजार में इस समझौते के स्वागत के तौर पर अमेरिकी डॉलर सूचकांक (डॉलर इंडेक्स) और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट दर्ज की गई, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से सोने और अन्य जोखिम वाली वित्तीय संपत्तियों को ऊपर जाने का मौका मिला। हालांकि पिछले सत्र के अंत में अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना और चांदी मामूली गिरावट के साथ क्रमशः 4,206.88 डॉलर और 67.02 डॉलर प्रति औंस पर आ गए थे, लेकिन घरेलू बाजार में इनकी मजबूत पकड़ अब भी बनी हुई है।
आगामी रणनीतियों और कीमती धातुओं के भविष्य पर जानकारों की राय
सर्राफा कारोबार से जुड़े विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल पूरी तरह से पश्चिम एशिया के राजनायिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। शुक्रवार को होने वाले अंतिम शांति समझौते और उसकी शर्तों के आधार पर ही बुलियन मार्केट की अल्पकालिक दिशा तय होगी। बाजार के पंडितों ने आम निवेशकों को सलाह दी है कि यद्यपि वर्तमान परिस्थितियां कीमती धातुओं के व्यापार के लिए बेहद अनुकूल और उत्साहजनक दिखाई दे रही हैं, फिर भी किसी बड़े निवेश से पहले उन्हें अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक निर्णयों और बाजार की बारीकियों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए तथा पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए।
ग्रीन जोन में बाजार, डॉलर के मुकाबले रुपया 53 पैसे उछला
15 Jun, 2026 10:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर आए सकारात्मक संकेतों के चलते घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत आज शानदार बढ़त के साथ हुई। ईरान और अमेरिका के बीच पिछले 107 दिनों से चला आ रहा संघर्ष समाप्त होने की आधिकारिक घोषणा के बाद न केवल भारत, बल्कि पूरे एशियाई बाजारों में जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है। इस भू-राजनीतिक राहत के बीच शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी 53 पैसे मजबूत हो गया। बाजार खुलने के साथ ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1080 अंकों की भारी उछाल के साथ कुलांचे भरने लगा, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 330 अंकों की तेजी के साथ हरे निशान पर कारोबार करता दिखा। सेंसेक्स की शीर्ष 30 कंपनियों में इंडिगो, इटरनल, बजाज फाइनेंस और एशियन पेंट्स के शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी देखी गई, वहीं निफ्टी के टॉप गेनर्स में श्रीराम फाइनेंस और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (TMPV) भी शामिल रहे।
वैश्विक शांति समझौते से एशियाई बाजारों में चौतरफा रौनक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का एलान किए जाने के बाद से ही दुनिया भर के निवेशकों का उत्साह सातवें आसमान पर पहुंच गया। इस ऐतिहासिक घोषणा और व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने की खबर से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के बाजारों में तेजी की लहर दौड़ गई। जापान का निक्केई सूचकांक इंट्राडे कारोबार के दौरान 4 फीसदी से अधिक की छलांग लगाकर अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह, दक्षिण कोरिया के कोस्पी (Kospi) सूचकांक में 4.3 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया, जबकि ऑस्ट्रेलियाई शेयर बाजार का बेंचमार्क इंडेक्स एएसएक्स200 (ASX200) भी 125 अंकों की बढ़त के साथ 8928 के स्तर पर ट्रेंड करता नजर आया, जहां 11 में से 7 प्रमुख सेक्टर बढ़त के साथ काम कर रहे थे।
कच्चे तेल के दामों में भारी गिरावट से घरेलू बाजार को राहत
युद्ध विराम की घोषणा का सबसे बड़ा और सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जहां प्रति बैरल दाम में 3 डॉलर से ज्यादा की बड़ी कटौती देखने को मिली। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 3.45 डॉलर टूटकर 83.88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, वहीं अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड (WTI) भी 3.95 डॉलर की गिरावट के साथ 80.93 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के नरम होने से भारतीय बाजार में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की उम्मीदें जाग गई हैं।
बाजार विश्लेषकों का नजरिया और आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियां
हालांकि बाजार इस समय पूरी तरह उत्साह में डूबा है, लेकिन आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी जल्दी सब कुछ सामान्य होना थोड़ा मुश्किल है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक चले इस संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में जो व्यवधान आया था, उसे पूरी तरह ठीक होने और तेल बाजार को स्थिरता की पटरी पर लौटने में अभी कुछ महीनों का समय लग सकता है। युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में जो अप्रत्याशित उछाल आया था, उसने ईंधन और अन्य कई जरूरी उत्पादों की लागत को काफी बढ़ा दिया था, जिससे उबरने में थोड़ा वक्त लगेगा।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक स्थिति पर CEA का बयान
13 Jun, 2026 04:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने भारत की आर्थिक सेहत को लेकर एक बेहद सकारात्मक और मजबूत तस्वीर पेश की है। एक विशेष आर्थिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि देश का बाह्य (एक्सटर्नल) क्षेत्र अब पहले की तुलना में कहीं अधिक सुदृढ़ हो चुका है और भारत की समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकॉनॉमिक) बुनियाद किसी भी प्रकार के वैश्विक झटकों व उतार-चढ़ाव का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। नागेश्वरन ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर आने वाले जोखिम अब काफी हद तक कम हो गए हैं, जिसके चलते भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर घरेलू मुद्रा 'रुपये' की विनिमय दर को नियंत्रित करने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) को झोंकने का दबाव बेहद कम हुआ है। उन्होंने कहा कि बुद्धिमत्तापूर्ण वित्तीय प्रबंधन और सटीक समय पर किए गए नीतिगत सुधारों की बदौलत बाह्य मोर्चे की सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण अवधि अब बीत चुकी है। इसके साथ ही उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा जताए गए 6.6 प्रतिशत के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर के अनुमान पर पूर्ण सहमति व्यक्त की।
आठ फीसदी की विकास दर का लक्ष्य और भू-राजनीतिक संकटों की संभावित चुनौतियां
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने 'विकसित भारत' के दीर्घकालिक संकल्प को साकार करने का रोडमैप साझा करते हुए कहा कि देश को एक लंबी अवधि तक निरंतर लगभग आठ प्रतिशत की वार्षिक आर्थिक विकास दर को बनाए रखना होगा। हालांकि, इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य के रास्ते में आने वाले वैश्विक गतिरोधों के प्रति सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि यदि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहा भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के हालात लंबे समय तक खिंचते हैं, तो इसका सीधा असर भारत की रफ्तार पर पड़ सकता है। उन्होंने आगाह किया कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर जाती हैं, तो देश की विकास दर प्रभावित होकर छह प्रतिशत के दायरे में सिमट सकती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का युग, रोजगार के नए अवसर और तकनीकी कौशल की अनिवार्यता
भविष्य के रोजगार और बदलती हुई तकनीक के विषय पर विमर्श करते हुए अनंत नागेश्वरन ने इस बात पर विशेष बल दिया कि कार्यबल को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती स्वीकार्यता के बीच नए कौशल और हुनर से लैस होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को ऐसे आधुनिक कौशल सीखने होंगे जो एआई तकनीक के पूरक बन सकें, जिससे ऑटोमेशन (स्वचालन) के कारण पैदा होने वाले विस्थापन के खतरे को न्यूनतम किया जा सके। इसी मंच पर नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अमिताभ कांत ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक बुनियादी और सामान्य तकनीक का रूप ले लेगी, इसलिए भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनने के लिए एक विशाल डेटा रिसोर्स और मजबूत टैलेंट पूल तैयार करने की आवश्यकता है।
निजी निवेश में तेजी, मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र से मिलेगी ऊर्जा
आर्थिक मोर्चे पर सकारात्मक बदलावों की कड़ियों को जोड़ते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार ने बताया कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्टेड) कॉर्पोरेट कंपनियों ने नए सिरे से पूंजीगत निवेश (केपेक्स) बढ़ाना शुरू कर दिया है, जो देश में निजी निवेश चक्र के पुनरुद्धार का एक बड़ा और पुख्ता संकेत है। इसके अतिरिक्त, देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी आने वाले समय में विकास को बड़ा सहारा मिलने की पूरी उम्मीद है। नागेश्वरन ने आगामी खरीफ फसल सत्र को लेकर उत्साहजनक रुख प्रकट करते हुए कहा कि देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का बेहतर संचयन और बुवाई के अनुकूल हालात कृषि क्षेत्र के उत्पादन को नई गति देंगे। इस दौरान अमिताभ कांत ने एआई को एक क्रांतिकारी युगांतरकारी शक्ति करार देते हुए कहा कि यह तकनीक औद्योगिक क्रांति में बिजली और कंप्यूटर के आविष्कार से भी कहीं अधिक व्यापक पैमाने पर वैश्विक उत्पादकता में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज कराएगी।
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