बिहार-झारखण्ड
सपना था मंजिल तक पहुंचने का, लेकिन एक साइन ने रोक दी वीणा मानवी की राह
15 Jul, 2026 04:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: बिहार की राजधानी पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव से पहले एक बेहद चौंकाने वाला राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। यहाँ जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) की मुख्य उम्मीदवार वीणा मानवी उर्फ वीणा मांडवी का नामांकन पत्र आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया गया है।
इस निरस्तीकरण (रिजेक्शन) की सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि प्रत्याशी के पास न तो किसी जरूरी दस्तावेज की कमी थी और ना ही वे किसी कानूनी विवाद में फंसी थीं। इसके बावजूद, महज एक छोटी सी तकनीकी और प्रक्रियात्मक चूक के कारण चुनावी मैदान में उतरने से पहले ही उनकी उम्मीदवारी पर पूरी तरह से पूर्णविराम लग गया। स्क्रूटनी (नामांकन पत्रों की जांच) के दौरान निर्वाचन अधिकारियों ने आवेदन में एक बड़ी संवैधानिक त्रुटि पकड़ी, जिसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए उनका पर्चा तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया।
सख्त चुनावी नियमावली: 10 समर्थकों की अनिवार्यता के सामने अधूरे रह गए वीणा मानवी के दस्तावेज
भारत निर्वाचन आयोग की नियमावली के अनुसार, किसी भी चुनाव में गैर-मान्यता प्राप्त या छोटे राजनीतिक दलों की ओर से मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों के लिए नामांकन पत्र में न्यूनतम 10 प्रस्तावकों (समर्थकों) का हस्ताक्षर होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। यह नियम निर्दलीय उम्मीदवारों पर भी समान रूप से लागू होता है।
समीक्षा के दौरान जब बांकीपुर के निर्वाचन अधिकारियों ने वीणा मानवी के आवेदन पत्र की गहन जांच की, तो उसमें केवल 9 प्रस्तावकों के ही दस्तखत पाए गए। नियमों के मुताबिक, एक भी प्रस्तावक के हस्ताक्षर की यह कमी एक गंभीर प्रक्रियात्मक दोष मानी जाती है। निर्वाचन अधिकारियों ने इसे तय चुनावी गाइडलाइंस का खुला उल्लंघन मानते हुए आवेदन को खारिज करने का फैसला सुनाया। इस एक छोटी सी चूक ने बांकीपुर के पूरे चुनावी समीकरण को रातों-रात बदल कर रख दिया है।
बांकीपुर: जांच के दौरान निर्वाचन अधिकारी का सख्त एक्शन, 6 निर्दलीय समेत 14 उम्मीदवारों के पर्चे रद्द
इस उपचुनाव के लिए दाखिल किए गए सभी नामांकनों की समीक्षा के दौरान प्रशासनिक सख्ती का व्यापक असर देखने को मिला। कड़ी कानूनी पड़ताल के बाद चुनाव अधिकारियों ने कुल 14 प्रत्याशियों के आवेदनों को खारिज कर दिया है।
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पर्चा गंवाने वाले इन उम्मीदवारों में 6 निर्दलीय प्रत्याशी शामिल हैं, जबकि शेष 8 उम्मीदवार विभिन्न छोटे और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के बैनर तले अपनी किस्मत आजमाने उतरे थे। अलग-अलग तकनीकी कमियों, शपथ पत्रों में अधूरी जानकारियों और दस्तावेजों के सत्यापन में विफल रहने के कारण इन सभी की चुनावी महत्वाकांक्षाओं को गहरा झटका लगा है और वे इस रेस से बाहर हो गए हैं।
नामांकन प्रक्रिया में बरते अतिरिक्त सावधानी: चुनाव आयोग ने स्पष्ट कीं निरस्तीकरण की मुख्य वजहें
निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में जरा सी भी लापरवाही या शॉर्टकट उम्मीदवारों को भारी पड़ सकता है। आयोग ने नामांकन रद्द होने के कुछ सबसे प्रमुख और आम कारणों को रेखांकित किया है, जो इस प्रकार हैं:
अधूरे दस्तावेज: हलफनामे (एफिडेविट) में मांगी गई संपत्तियों, देनदारियों या आपराधिक मामलों की जानकारी को पूरी तरह से स्पष्ट न करना या छिपाना।
प्रारूप का उल्लंघन: चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित किए गए आधिकारिक फॉर्म और फॉर्मेट का पालन न करते हुए त्रुटिपूर्ण आवेदन जमा करना।
प्रस्तावकों की कमी: छोटे दलों या निर्दलीयों के मामले में अनिवार्य 10 स्थानीय मतदाताओं के वैध हस्ताक्षर न होना।
आयोग ने सभी राजनीतिक दलों और भावी उम्मीदवारों को सख्त हिदायत दी है कि वे भविष्य में दस्तावेजी औपचारिकताएं पूरी करते समय कानूनी विशेषज्ञों की सलाह लें और अतिरिक्त सावधानी बरतें।
जनशक्ति जनता दल की चुनावी रणनीति ध्वस्त: उपचुनाव की सीधी टक्कर से बाहर हुई पार्टी
वीणा मानवी का पर्चा खारिज होना जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है। पार्टी ने बांकीपुर के इस चुनावी समर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए वीणा मानवी को एक बड़े चेहरे के रूप में पेश किया था। महिला विंग की प्रमुख और एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता होने के कारण जमीनी स्तर पर उनके पक्ष में माहौल भी बनने लगा था और कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह था।
लेकिन केवल एक हस्ताक्षर की तकनीकी चूक ने पूरी पार्टी की महीनों की रणनीतिक तैयारियों और प्रचार अभियानों पर पानी फेर दिया है। इस तकनीकी विफलता के कारण जेजेडी अब सीधे तौर पर बांकीपुर उपचुनाव की मुख्य लड़ाई से पूरी तरह बेदखल हो गई है। अब इस सीट पर मुख्य मुकाबला बड़े दलों के बीच नए राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के साथ आगे बढ़ेगा।
रांची में SSP की सख्ती, निरीक्षण में खुली थानों की व्यवस्था की पोल
15 Jul, 2026 01:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची। झारखंड की राजधानी में कानून-व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरुस्त तथा अभेद्य बनाने के उद्देश्य से पुलिस के आला अधिकारियों ने एक बड़ी जमीनी मुहिम शुरू की है। इसके तहत रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने मंगलवार की देर रात नगर पुलिस अधीक्षक (सिटी एसपी) के साथ मिलकर विभिन्न संवेदनशील थाना क्षेत्रों, रात्रि गश्ती दलों (नाइट पेट्रोलिंग) तथा शहर के अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रतिष्ठानों का अचानक औचक निरीक्षण किया। इस औचक कार्रवाई से देर रात ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों और थाना प्रभारियों के बीच हड़कंप मच गया।
थानों की कार्यप्रणाली और मुस्तैदी का जमीनी स्तर पर लिया जायजा
देर रात किए गए इस औचक निरीक्षण के दौरान दोनों आला अधिकारियों ने विभिन्न पुलिस थानों की वास्तविक कार्यप्रणाली, वहां तैनात पुलिसकर्मियों की सतर्कता और आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तैयारियों को बारीकी से परखा। इसके साथ ही अधिकारियों ने इस बात का भी विशेष जायजा लिया कि रात के समय आपात स्थिति में थानों या गश्ती दल तक पहुंचने वाले आम नागरिकों और पीड़ितों की मदद के लिए पुलिस बल कितनी तत्परता और संवेदनशीलता के साथ उपलब्ध रहता है।
महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी की जांच
अभियान के अगले चरण में अधिकारियों ने शहर के अति-संवेदनशील और महत्वपूर्ण सरकारी व सार्वजनिक सुरक्षा प्रतिष्ठानों का रुख किया। वहां तैनात सुरक्षा प्रहरियों और पुलिस बल के जवानों की मुस्तैदी की व्यक्तिगत रूप से जांच की गई। वरीय पुलिस अधीक्षक ने मौके पर मौजूद प्रभारियों को दो-टूक शब्दों में हिदायत दी कि राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर पर और किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अपराध नियंत्रण और रात्रि गश्ती को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश
निरीक्षण के अंत में एसएसपी ने सभी थाना प्रभारियों और गश्ती दलों को रात के समय गश्त बढ़ाने तथा संदिग्ध वाहनों व व्यक्तियों की सघन चेकिंग करने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की सक्रियता ऐसी होनी चाहिए जिससे अपराधियों में भय और आम जनता के मन में सुरक्षा का भाव पैदा हो। इसके साथ ही उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों को विषम परिस्थितियों में भी अलर्ट मोड पर रहने और रिस्पॉन्स टाइम को न्यूनतम करने की हिदायत दी।
बिहार बीएड में दाखिले का दूसरा मौका, मेरिट लिस्ट जारी; 18 जुलाई तक एडमिशन
15 Jul, 2026 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुजफ्फरपुर। बिहार के बीएड कॉलेजों में सत्र 2026-28 के तहत नामांकन की प्रक्रिया अब अपने दूसरे चरण में पहुंच गई है। इसके तहत राज्य के बीएड संस्थानों में प्रवेश के लिए बहुप्रतीक्षित दूसरी मेरिट सूची मंगलवार को आधिकारिक तौर पर जारी कर दी गई है। राज्य स्तरीय नोडल केंद्र बीआरए बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) ने इस दूसरे चरण की काउंसिलिंग के अंतर्गत 16,400 रिक्त सीटों के लिए योग्य अभ्यर्थियों को कॉलेज आवंटित कर दिए हैं। इस सूची में चयनित होने वाले सभी अभ्यर्थियों को आगामी 15 से 18 जुलाई के बीच अपने आवंटित कॉलेजों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर नामांकन प्रक्रिया को पूरा करना होगा।
आवंटन पत्र डाउनलोड और सीट सुरक्षित करने की अनिवार्य प्रक्रिया
राज्य नोडल पदाधिकारी प्रो. संजय कुमार ने नामांकन प्रक्रिया को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि दूसरी मेरिट सूची में जगह बनाने वाले अभ्यर्थियों को सबसे पहले बीएड प्रवेश परीक्षा की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने क्रेडेंशियल्स के माध्यम से लॉगिन करना होगा। लॉगिन करने के बाद अभ्यर्थी अपना कॉलेज आवंटन पत्र (अलॉटमेंट लेटर) डाउनलोड कर सकेंगे। इसके पश्चात, अभ्यर्थियों को सीट सुरक्षित करने के लिए ₹3,000 का ऑनलाइन भुगतान करना अनिवार्य होगा, जो कि बाद में उनके संबंधित कॉलेज के कुल नामांकन शुल्क में समायोजित (एडजस्ट) कर दिया जाएगा।
पहली सूची के बाद खाली रही सीटों को भरने की कवायद
इस बार बीएड कॉलेजों में खाली सीटों को भरने के लिए यह दूसरी सूची जारी करना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। इससे पहले जारी की गई प्रथम मेरिट सूची में कुल 36,872 अभ्यर्थियों का चयन किया गया था, जिनमें से केवल 19,369 अभ्यर्थियों ने ही निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित कॉलेजों में जाकर अपनी प्रवेश प्रक्रिया पूरी की थी। इसके बाद बची हुई बड़ी संख्या में सीटों को भरने और सत्र को समय पर शुरू करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इस दूसरी सूची को तैयार कर जारी किया गया है।
चुनावी प्रक्रिया में डिजिटल कदम तेज, आठ जिलों में आधे प्रपत्र ऑनलाइन
15 Jul, 2026 11:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची। झारखंड राज्य में इन दिनों मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम बड़े पैमाने पर चल रहा है। निर्वाचन विभाग से प्राप्त ताजा जानकारी के अनुसार, सूबे के आठ जिलों ने इस अभियान में बेहद शानदार प्रदर्शन किया है। इन अग्रणी जिलों के 50 फीसदी से भी अधिक मतदाताओं ने न केवल अपना गणना प्रपत्र भरकर संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को जमा करा दिया है, बल्कि विभाग द्वारा उन सभी प्रपत्रों का डिजिटलाइजेशन कार्य भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस पूरे अभियान में सिमडेगा जिला राज्यभर में सबसे आगे चल रहा है, जहां के 65.2 प्रतिशत मतदाताओं के प्रपत्रों को पूरी तरह ऑनलाइन यानी डिजिटलाइज्ड किया जा चुका है।
विभिन्न जिलों में डिजिटलाइजेशन कार्य की मौजूदा प्रगति
मतदाता सूची पुनरीक्षण के इस महाभियान में सिमडेगा के बाद कोडरमा और पश्चिमी सिंहभूम का प्रदर्शन भी काफी सराहनीय रहा है, जहां यह महत्वपूर्ण कार्य 60 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर गया है। आंकड़ों के मुताबिक, लोहरदगा में 59.14 प्रतिशत, पलामू में 54.98 प्रतिशत, गढ़वा में 54.94 प्रतिशत, रामगढ़ में 54.25 प्रतिशत और दुमका में 52.92 प्रतिशत मतदाताओं का प्रपत्र डिजिटलाइज्ड हो चुका है। इसके विपरीत, कुछ जिलों की रफ्तार बेहद धीमी देखी जा रही है। पूर्वी सिंहभूम और गोड्डा जिला इस सूची में सबसे निचले पायदान पर हैं, जहां अभी तक 30 फीसदी मतदाताओं का डेटा भी डिजिटल नहीं हो सका है। पूर्वी सिंहभूम में केवल 26.85 प्रतिशत और गोड्डा में 27.45 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है। पूरे झारखंड की बात करें तो समूचे राज्य में अब तक औसतन 41.27 प्रतिशत मतदाताओं के प्रपत्रों का डिजिटलाइजेशन हो चुका है, जबकि लगभग 95 प्रतिशत लोगों तक ये फॉर्म पहले ही पहुंचाए जा चुके हैं।
मध्यम श्रेणी वाले जिलों की कार्य स्थिति पर एक नजर
राज्य के कई अन्य जिलों में काम की गति मध्यम स्तर पर बनी हुई है, जहां डिजिटलाइजेशन का आंकड़ा 30 प्रतिशत से अधिक और 50 प्रतिशत के बीच दर्ज किया गया है। इन जिलों में लातेहार 49.8 प्रतिशत और गुमला 47.57 प्रतिशत की उपलब्धि के साथ तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। वहीं, बोकारो में 44.65 प्रतिशत, खूंटी में 43.37 प्रतिशत, हजारीबाग में 42.32 प्रतिशत और सरायकेला खरसावां में 42.08 प्रतिशत कार्य संपन्न हो चुका है। सूची के अन्य हिस्सों में जामताड़ा में 39.11 प्रतिशत, पाकुड़ में 36.49 प्रतिशत, देवघर में 35.09 प्रतिशत, गिरिडीह में 34.33 प्रतिशत और राजधानी रांची में 32.76 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है। इसके अलावा बोकारो के कुछ क्षेत्रों में 30.24 प्रतिशत तथा साहिबगंज में 30.17 प्रतिशत काम पूरा हुआ है, जिन्हें जल्द ही तेजी से काम निपटाने के निर्देश दिए गए हैं।
मतदान कर्मियों के लिए निर्वाचन आयोग का बड़ा फैसला
इस बेहद जटिल और जिम्मेदारी भरे पुनरीक्षण कार्य को समय पर पूरा करने के लिए निर्वाचन आयोग ने जमीनी स्तर पर तैनात कर्मियों को एक बड़ा तोहफा दिया है। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में दिन-रात जुटे सभी बूथ लेवल ऑफिसर्स और बीएलओ सुपरवाइजरों को उनकी कड़ी मेहनत के एवज में प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया गया है। आयोग द्वारा तय किए गए निर्णय के अनुसार, इन सभी कर्मियों को एकमुश्त छह हजार रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। खास बात यह है कि यह अतिरिक्त वित्तीय लाभ बीएलओ को मिलने वाले नियमित वार्षिक मानदेय से पूरी तरह अलग होगा। भारत निर्वाचन आयोग ने यह कदम बीएलओ के कार्यों की जटिलता और उनकी महत्ता को स्वीकार करते हुए उठाया है, ताकि कर्मियों का मनोबल बना रहे।
सभी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी
इस महत्वपूर्ण वित्तीय प्रोत्साहन को लागू करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने झारखंड समेत देश के उन तमाम राज्यों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों को एक आधिकारिक पत्र भेज दिया है, जहां वर्तमान समय में विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य संचालित हो रहा है। इस आदेश के जरिए आयोग ने साफ निर्देश दिए हैं कि प्रोत्साहन राशि से जुड़ी यह जानकारी अविलंब जिला निर्वाचन पदाधिकारियों, अनुमंडल पदाधिकारियों और सभी संबंधित निर्वाचन प्रभारियों तक पहुंचा दी जाए। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मैदानी स्तर पर काम करने वाले किसी भी कर्मचारी के भीतर असमंजस की स्थिति न रहे और वे पूरे समर्पण के साथ मतदाता सूची को शत-प्रतिशत त्रुटिहीन और अपडेटेड बनाने के इस राष्ट्रीय कार्य में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे सकें।
सरकारी आवास योजना का दुरुपयोग! 232 लाभुकों को नगर निगम का नोटिस
15 Jul, 2026 11:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत सब्सिडी पर मिले फ्लैटों के दुरुपयोग पर रांची नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। धुर्वा स्थित लाइट हाउस प्रोजेक्ट के 232 आवंटियों को निगम की ओर से नोटिस जारी किया गया है। इन सभी लाभुकों को 24 घंटे के भीतर यह पुख्ता सबूत पेश करने का निर्देश दिया गया है कि वे खुद ही अपने आवंटित फ्लैट में रह रहे हैं। अगर तय समय सीमा के भीतर किसी भी आवंटी ने संतोषजनक जवाब या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया, तो निगम प्रशासन उनके फ्लैट का आवंट आवंटन रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया तुरंत शुरू कर देगा।
नियमों की अनदेखी पर नगर निगम का सख्त रुख
दरअसल, नगर निगम को लगातार इस बात की शिकायतें मिल रही थीं कि कई लोग सरकारी सब्सिडी का फायदा उठाकर फ्लैट लेने के बाद वहां खुद नहीं रह रहे हैं। इसके बाद जब निगम ने शुरुआती जांच कराई, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। जांच में पाया गया कि कई लाभार्थियों ने नियमों को ताक पर रखकर अपने फ्लैट दूसरों को किराए पर दे दिए हैं।
सरकारी गाइडलाइन का सीधा उल्लंघन
योजना के सख्त दिशा-निर्देशों के मुताबिक, सब्सिडी पर मिले इन फ्लैटों को न तो किसी अन्य व्यक्ति को बेचा जा सकता है और न ही इन्हें किराए पर चढ़ाया जा सकता है। ऐसा करना नियमों का सीधा और गंभीर उल्लंघन माना जाता है। इसी को देखते हुए नगर निगम ने अब शिकंजा कसना शुरू कर दिया है ताकि जरूरतमंदों के लिए बनी इस योजना का दुरुपयोग रोका जा सके।
एक मिनट की देरी पड़ी भारी, परीक्षा केंद्र के बाहर रह गए अभ्यर्थी
15 Jul, 2026 10:24 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की ओर से आयोजित सहायक अभियोजन पदाधिकारी (APO) प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा राज्य के विभिन्न जनपदों में कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हो गई। प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर हजारों अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा में भाग लिया। संपूर्ण राज्य में निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से परीक्षा का संचालन करने के लिए प्रशासन की तरफ से पुख्ता बंदोबस्त किए गए थे। इस विशेष भर्ती अभियान के माध्यम से आयोग कुल 300 रिक्त पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन करने जा रहा है।
दो सत्रों में परीक्षा का विधिवत संचालन
बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा इस प्रारंभिक परीक्षा को सुचारू रूप से चलाने के लिए दो अलग-अलग सत्रों का निर्धारण किया गया था। प्रथम सत्र में सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्र की परीक्षा आयोजित की गई, जबकि द्वितीय सत्र में विधि विषय से संबंधित प्रश्न पत्र के लिए अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। सुरक्षा और समयबद्धता को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने परीक्षा शुरू होने से काफी समय पहले ही अभ्यर्थियों के लिए प्रवेश द्वार खोल दिए थे। आयोग के सख्त नियमों के कारण निर्धारित समय सीमा समाप्त होते ही मुख्य द्वारों को पूरी तरह बंद कर दिया गया ताकि परीक्षा की शुचिता बनी रहे।
कड़े नियमों के कारण छूटी परीक्षा
परीक्षा केंद्रों पर समय पालन को लेकर आयोग का रुख बेहद सख्त दिखाई दिया, जिसके कारण कई अभ्यर्थियों को निराशा हाथ लगी। विभिन्न केंद्रों पर ऐसी स्थितियां देखने को मिलीं जहां नियत समय से मात्र एक मिनट की देरी से पहुंचे परीक्षार्थियों को भी भीतर जाने की अनुमति नहीं दी गई। मुख्य द्वारों पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और केंद्र अधीक्षकों ने आयोग के कड़े दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया। देर से पहुंचे अभ्यर्थियों की तमाम मिन्नतें और गुहार भी अधिकारियों के सख्त रुख के आगे बेअसर साबित हुईं और उन्हें परीक्षा से वंचित होना पड़ा।
त्रिस्तरीय सुरक्षा जांच और कड़े प्रशासनिक प्रबंध
भर्ती परीक्षा को पूरी तरह कदाचारमुक्त, शांतिपूर्ण और पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासनों ने सुरक्षा के अभूतपूर्व प्रबंध किए थे। सभी परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को भीतर प्रवेश देने से पहले तीन अलग-अलग स्तरों पर गहन तलाशी अभियान से गुजरना पड़ा। किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या अवांछित सामग्री को रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों पर आधुनिक जैमर और सीसीटीवी कैमरे क्रियाशील रखे गए थे। इसके साथ ही प्रत्येक केंद्र पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की गई थी जो हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रहे थे।
अनिवार्य दस्तावेजों के साथ ही मिला प्रवेश
आयोग ने परीक्षा में सम्मिलित होने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए पहले ही आवश्यक दिशा-निर्देशों की एक सूची जारी कर दी थी। इन नियमों के तहत प्रत्येक परीक्षार्थी को अपने साथ दो प्रवेश पत्र लाना अनिवार्य किया गया था, जिसमें से एक हस्ताक्षरित प्रति परीक्षा कक्ष में तैनात वीक्षक को सौंपनी थी। इसके अतिरिक्त पहचान पत्र और आवश्यक दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल की गई। जिन अभ्यर्थियों के पास निर्धारित मानकों के अनुरूप दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे, उन्हें परीक्षा केंद्र में प्रवेश पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी और नियमों के अभाव में कई उम्मीदवारों को असुविधा का सामना करना पड़ा।
थार से पहुंचे बदमाशों का तांडव, फायरिंग के बाद पुलिस ने दबोचे चार आरोपी
15 Jul, 2026 06:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दरभंगा। बिहार के बहेड़ी थाना क्षेत्र के नौडेगा गांव के समीप देर शाम उस समय सनसनी फैल गई, जब एक तेज रफ्तार थार गाड़ी में सवार बदमाशों ने अचानक ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं। अचानक हुई इस भीषण गोलीबारी की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा और आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए इस जानलेवा घटना की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस प्रशासन को दी, जिसके बाद विभाग में भी हड़कंप मच गया।
पुलिस की त्वरित दबिश और आरोपियों की धरपकड़
वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस उपाधीक्षक और थाना प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ तुरंत घटना स्थल पर पहुंचे। पुलिस की गाड़ियों को आते देख थार सवार युवकों ने भागने का प्रयास किया, लेकिन मुस्तैद जवानों ने घेराबंदी करके मौके से चार आरोपियों को दबोच लिया। इस अफरा-तफरी के बीच अंधेरे और झाड़ियों का लाभ उठाकर दो अन्य संदिग्ध आरोपी पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहे, जिनकी तलाश में पुलिस की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
काले रंग की थार से आपत्तिजनक सामग्री बरामद
पुलिस ने जांच के दौरान घटना स्थल से गोलियों के चार खाली खोखे बरामद किए हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि वहां कई चक्र गोलियां चलाई गई थीं। इसके साथ ही पुलिस ने पटना नंबर की एक काले रंग की थार गाड़ी को अपने कब्जे में ले लिया है, जिसकी सघन तलाशी लेने पर उसके भीतर से प्रतिबंधित शराब की बोतलें और कुछ अन्य संदिग्ध वस्तुएं मिली हैं। पुलिस इन सभी साक्ष्यों को कब्जे में लेकर कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है।
गिरफ्तार छात्र का बेगुनाही का दावा
पकड़े गए आरोपियों में समस्तीपुर और स्थानीय क्षेत्र के युवक शामिल हैं, जिनसे गुप्त स्थान पर कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। इसी बीच हिरासत में लिए गए एक युवक ने खुद को कानून का छात्र बताते हुए अपनी संलिप्तता से साफ इनकार किया है। उसका दावा है कि वह उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहा है और केवल अपने गांव घूमने आया था, तथा उसका किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि या पूर्व के मामलों से कोई लेना-देना नहीं है। पुलिस उसके इन दावों की भी गहराई से तस्दीक कर रही है।
बड़ी साजिश को नाकाम करने में जुटी पुलिस
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच और मौके से मिले हालातों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि ये सभी युवक किसी बहुत बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। ग्रामीणों द्वारा समय पर दी गई सूचना के कारण एक बड़ा अनर्थ होने से टल गया। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस गोलीबारी का मुख्य निशाना कौन था, लेकिन पुलिस फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद पूरी साजिश का पर्दाफाश करने का दावा कर रही है।
मेहनत का मिला इनाम, 27 पुलिसकर्मी प्रमोट; एसपी ने बढ़ाया हौसला
14 Jul, 2026 06:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जहानाबाद। स्थानीय पुलिस केंद्र में मंगलवार को एक गरिमामयी पदोन्नति अलंकरण समारोह का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक कोटा किरण कुमार ने पदोन्नत हुए पुलिस अधिकारियों और जवानों के कंधों पर नए स्टार और फीते लगाकर उन्हें सम्मानित किया। इस सम्मान समारोह से पूरे महकमे के अधिकारी और कर्मियों में उत्साह और खुशी की लहर दौड़ गई।
विभिन्न पदों पर सत्ताईस पुलिसकर्मियों को नई जिम्मेदारी
इस गरिमापूर्ण समारोह में जिले के कुल २७ योग्य पुलिस अधिकारियों और जवानों को विभागीय पदोन्नति देकर उच्च पदों का महत्वपूर्ण प्रभार सौंपा गया। इसके अंतर्गत पुलिस केंद्र के कुल २३ चालक सिपाहियों को चालक हवलदार की जिम्मेदारी दी गई, जबकि एक चालक हवलदार को प्रमोट करके चालक सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) का पद दिया गया। इसके अलावा एक चालक एएसआई को चालक पुलिस अवर निरीक्षक तथा विभागीय पदोन्नति समिति की संस्तुति पर दो अन्य पुलिसकर्मियों को हवलदार के पद की नई कमान सौंपी गई।
कंधे पर चमके सितारे और पुलिस अधीक्षक ने दी बधाई
समारोह के मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक ने एक-एक करके सभी पदोन्नत जवानों और अधिकारियों को मंच पर बुलाया। उन्होंने सभी अधिकारियों के वर्दी पर नए स्टार और फीते सजाए और उन्हें इस बेहतरीन सफलता के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस दौरान पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और पदोन्नत पुलिसकर्मियों के चेहरे पर देश सेवा के लिए नया हौसला और गर्व साफ नजर आया।
पदोन्नति केवल सम्मान ही नहीं बल्कि नया दायित्व भी
इस अवसर पर उपस्थित पुलिस बल को संबोधित करते हुए पुलिस कप्तान ने बेहद महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में मिलने वाली पदोन्नति केवल एक सम्मान का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह अपने साथ कर्तव्यों का एक बड़ा और गंभीर दायित्व भी लाती है। उन्होंने सभी नवनियुक्त अधिकारियों को नसीहत दी कि वे अपनी नई भूमिका में और अधिक ऊर्जा, अटूट अनुशासन तथा संपूर्ण कर्तव्यनिष्ठा के साथ जनता की सेवा में जुट जाएं।
सकारात्मक छवि और संवेदनशीलता पर दिया विशेष जोर
पुलिस अधीक्षक ने अपने संबोधन के अंत में पुलिस विभाग के मूल आदर्शों की याद दिलाई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाज के आम नागरिकों के साथ बेहद संवेदनशील एवं सहयोगात्मक व्यवहार रखना, क्षेत्र में सुदृढ़ कानून-व्यवस्था को बनाए रखना और समाज के बीच पुलिस की एक मददगार व सकारात्मक छवि को पेश करना हर वर्दीधारी की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि आम जनता का भरोसा पुलिस प्रशासन पर हमेशा अटूट बना रहे।
मोबाइल शॉप बनी शराब पार्टी का अड्डा, पुलिस ने कट्टा-कारतूस बरामद कर तीन को दबोचा
14 Jul, 2026 05:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डुमरांव (बक्सर)। बिहार के बक्सर जिला अंतर्गत डुमरांव थाना क्षेत्र में अपराध नियंत्रण और अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत स्थानीय पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने मंगलवार को मुस्तैदी दिखाते हुए शहर के एक व्यस्त इलाके में स्थित मोबाइल मरम्मत की दुकान पर अचानक छापेमारी की। इस गुप्त कार्रवाई के दौरान दुकान के भीतर चल रही एक शराब पार्टी का भंडाफोड़ किया गया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
गुप्त सूचना पर पुलिस ने बिछाया जाल
पुलिस प्रशासन को एक विश्वसनीय मुखबिर के जरिए बेहद पुख्ता और गोपनीय जानकारी मिली थी कि शहर के बीचों-बीच स्थित एक मोबाइल रिपेयरिंग सेंटर की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व जमा हुए हैं। सूचना में यह भी बताया गया था कि ये लोग न केवल वहां बैठकर खुलेआम शराब का सेवन कर रहे हैं, बल्कि इनके पास भारी मात्रा में अवैध हथियार और कारतूस भी मौजूद हैं जो किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए रखे गए हैं।
एएसपी के नेतृत्व में हुई ताबड़तोड़ छापेमारी
अवैध हथियारों और शराब पार्टी की संवेदनशील सूचना मिलते ही पुलिस महकमा तुरंत हरकत में आ गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) पोलस्त कुमार के कुशल नेतृत्व में आनन-फानन में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। इस विशेष टीम ने बिना कोई वक्त गंवाए बताए गए ठिकाने की घेराबंदी की और पूरी योजना के साथ दुकान के अंदर अचानक धावा बोल दिया।
अवैध हथियार और कारतूस के साथ तीन गिरफ्तार
पुलिस की इस अचानक हुई छापेमारी से दुकान के भीतर मौजूद अपराधियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। मौके से पुलिस ने शराब का सेवन कर रहे तीन युवकों को रंगे हाथों धर दबोचा। जब पुलिस टीम द्वारा पकड़े गए आरोपियों की सघन तलाशी ली गई, तो उनमें से एक युवक के पास से एक लोडेड अवैध देसी कट्टा और तीन बेहद खतरनाक जिंदा कारतूस बरामद किए गए, जिसे पुलिस ने तुरंत जब्त कर लिया।
कड़ी पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू
पकड़े गए तीनों आरोपियों को पुलिस अभिरक्षा में लेकर थाने ले आया गया है, जहां मद्यनिषेध कानून और आर्म्स एक्ट के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए इन युवकों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे इस अवैध हथियार को कहां से खरीद कर लाए थे और शहर में किस बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे।
परीक्षा और रिजल्ट में देरी से नाराज अभ्यर्थी सड़क पर, BSSC दफ्तर का घेराव कर जड़ा ताला
14 Jul, 2026 02:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं का धैर्य अब जवाब देने लगा है। लंबित परीक्षाओं का समय पर आयोजन कराने, अटके हुए परीक्षा परिणामों को जल्द से जल्द घोषित करने और संविदा पर कार्यरत कर्मियों को स्थायी नौकरी देने की मांग को लेकर सोमवार को सैकड़ों अभ्यर्थियों ने राजधानी में एक बहुत बड़ा और उग्र प्रदर्शन किया। छात्रों का यह आक्रोश सीधे तौर पर प्रशासन और आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ देखा गया।
कर्मचारी चयन आयोग कार्यालय का घेराव और तालाबंदी
गुस्साए प्रदर्शनकारी छात्र सीधे बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) के दफ्तर पहुंचे और पूरे परिसर को चारों तरफ से घेर लिया। अपनी मांगों को लेकर अड़े युवाओं ने आयोग के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया और गेट के सामने ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने आयोग प्रबंधन और सरकार के रवैये के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रशासनिक व्यवस्था पर पूरी तरह से लापरवाही बरतने का आरोप लगाया।
लंबित परीक्षाओं को जल्द पूरा कराने की पुरजोर मांग
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने साफ किया कि इंटरमीडिएट स्तर की भर्ती, बीएसएससी सीजीएल-4 (BSSC CGL-4) और बीएसओ (BSO) समेत कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं लंबे समय से अधर में लटकी हुई हैं। अभ्यर्थियों का कहना था कि फॉर्म भरने के बाद वे सालों तक सिर्फ परीक्षा की तारीखों का इंतजार करते रहते हैं। उन्होंने मांग की कि जो परीक्षाएं हो चुकी हैं उनके परिणाम तुरंत जारी किए जाएं और बाकी बची परीक्षाओं का शेड्यूल अविलंब घोषित हो।
आर-पार की जंग और छात्र नेता की कड़ी चेतावनी
इस पूरे आंदोलन की कमान संभाल रहे छात्र नेता सौरव ने आयोग को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अधिकारियों की सुस्ती के कारण हजारों युवाओं का भविष्य पूरी तरह से बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए एलान किया कि यह प्रदर्शन सिर्फ शुरुआत है। जब तक सभी लंबित परीक्षाओं की तारीखें तय नहीं हो जातीं और रुके हुए रिजल्ट जारी नहीं किए जाते, तब तक यह आंदोलन थमेगा नहीं और इसे और तेज किया जाएगा।
मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था
हजारों की संख्या में पहुंचे छात्रों के कारण आयोग कार्यालय के बाहर माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया, जिसकी सूचना मिलते ही एयरपोर्ट थाना पुलिस सहित भारी संख्या में पुलिस बल को मौके पर तैनात कर दिया गया। हालांकि, पुलिस को स्थिति संभालने के लिए किसी भी तरह का बल प्रयोग नहीं करना पड़ा क्योंकि छात्र शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि जब आयोग ने उनके भविष्य पर ताला लगा दिया है, तो उन्होंने भी विरोध स्वरूप कार्यालय के गेट पर प्रतीकात्मक ताला जड़ा है।
सरकार को चुनौती! ट्रेन से खुलेआम उतारी गई शराब की खेप, वीडियो ने मचाई हलचल
14 Jul, 2026 01:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू होने के दावों के बीच राजधानी पटना के ग्रामीण इलाके से एक बेहद हैरान करने वाला और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाला मामला सामने आया है। यहाँ फतुहा-बंकाघाट रेलखंड पर स्थित पुनपुन रेलवे पुल के समीप एक पैसेंजर ट्रेन को रोककर उसमें से शराब की एक बड़ी खेप को बेखौफ अंदाज में उतारे जाने का सनसनीखेज वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। हालांकि, संबंधित विभाग द्वारा अभी इस वीडियो की आधिकारिक सत्यता की पुष्टि की जानी बाकी है, लेकिन इस घटना ने रेल पुलिस प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं।
सूनसान पुल पर पहले से घात लगाकर बैठे थे अवैध शराब तस्कर
सूत्रों से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना सोमवार की शाम घटित हुई जब पुनपुन रेलवे पुल के पास असामाजिक तत्वों और तस्करों का एक बड़ा गिरोह पहले से ही मुस्तैद था। बताया जा रहा है कि तस्करों को ट्रेन के आने और वहां उसकी गति धीमी होने की सटीक समय सारणी पहले से ही मालूम थी। जैसे ही पैसेंजर ट्रेन पुल के पास आकर बेहद धीमी हुई या रुकी, वैसे ही वहां घात लगाए बैठे करीब आधा दर्जन से अधिक संदिग्ध युवक फुर्ती से ट्रेन की बोगियों के पास पहुंच गए और भारी-भरकम बोरियों को नीचे उतारने के काम में जुट गए।
ट्रेन की बोगियों और अंडरकैरेज के गुप्त हिस्सों से निकाली गईं बोरियां
इंटरनेट पर वायरल हुए इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि तस्कर बेहद शातिराना तरीके से ट्रेन की बोगी के अंदरूनी हिस्सों और नीचे बने लोहे के केबिन (अंडरकैरेज) में छिपाई गई बोरियों को एक-एक कर बाहर निकाल रहे हैं। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों का पुरजोर दावा है कि इन सभी बोरियों में भारी मात्रा में विदेशी और देसी शराब की बोतलें भरी हुई थीं, जिन्हें तस्करी के उद्देश्य से यहाँ लाया गया था। वीडियो में सबसे चौंकाने वाली बात यह नजर आती है कि इस पूरी गैर-कानूनी गतिविधि के दौरान वहां दूर-दूर तक उन्हें टोकने या रोकने वाला कोई भी जिम्मेदार रेलकर्मी या सुरक्षा बल का जवान मौजूद नहीं था।
यात्री द्वारा बनाए गए मोबाइल वीडियो से हुआ मामले का भंडाफोड़
अवैध शराब की इस बड़ी री-लोडिंग और तस्करी का भंडाफोड़ तब हुआ जब उसी ट्रेन में सफर कर रहे एक सजग यात्री या किसी स्थानीय प्रत्यक्षदर्शी ने अपनी सूझबूझ दिखाते हुए पूरी वारदात को अपने मोबाइल फोन के कैमरे में चुपके से कैद कर लिया। घटना का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड हुआ, वैसे ही यह आग की तरह फैल गया और इसके बाद सूबे में कानून-व्यवस्था तथा ट्रेनों की सुरक्षा को लेकर एक नई बहस छिड़ गई। सामान को सुरक्षित उतारने के बाद सभी तस्कर बिना किसी डर के माल सहित मौके से नौ दो ग्यारह होने में कामयाब रहे।
चेहरे धुंधले होने के कारण रेल पुलिस ने शुरू की उन्नत तकनीकी जांच
मामले के तूल पकड़ते ही रेल पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। फतुहा रेल थाना प्रभारी राजेश कुमार ने इस संबंध में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आ चुका है और उसकी हर पहलू से बारीकी से तफ्तीश की जा रही है। थाना प्रभारी के मुताबिक, वीडियो में दिख रहे संदिग्ध लोगों के चेहरे और हुलिया पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने के कारण वीडियो फुटेज को उन्नत तकनीकी और फॉरेंसिक जांच के लिए साइबर सेल के पास भेजा गया है, ताकि डिजिटल माध्यम से तस्करों की सटीक पहचान सुनिश्चित कर उनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
सुप्रीम कोर्ट से लालू यादव को बड़ी राहत, चारा घोटाला मामले में नहीं रद्द होगी बेल
14 Jul, 2026 12:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले के देवघर कोषागार से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में देश की सर्वोच्च अदालत से बहुत बड़ी राहत मिली है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल राजद सुप्रीमो की जमानत को रद्द करने से पूरी तरह इनकार कर दिया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में दिए गए जमानत के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की मुख्य याचिका को भी स्वीकार नहीं किया, जिसे लालू प्रसाद यादव के लिए एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो की विशेष याचिका को अदालत ने किया खारिज
दरअसल, देश की शीर्ष जांच एजेंसी सीबीआई ने झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके तहत लालू प्रसाद यादव को देवघर कोषागार से अवैध निकासी के मामले में नियमित जमानत प्रदान की गई थी। केंद्रीय एजेंसी ने अपनी दलील में राजद प्रमुख की जमानत को तुरंत रद्द कर उन्हें वापस न्यायिक हिरासत में भेजने की जोरदार मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले पर विचार करने के बाद स्पष्ट किया कि इस मौजूदा स्तर पर उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने का कोई ठोस या तार्किक आधार नजर नहीं आता है।
झारखंड हाईकोर्ट को छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का अल्टीमेटम
यद्यपि सर्वोच्च अदालत ने सीबीआई की फौरी मांग को ठुकरा दिया है, लेकिन इसके साथ ही झारखंड उच्च न्यायालय को इस पूरे प्रकरण से जुड़ी मुख्य अपीलों पर अपनी कार्रवाई तेज करने का एक कड़ा निर्देश भी जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देवघर कोषागार मामले से जुड़े जितने भी कानूनी विवाद और अपीलें वर्तमान में हाईकोर्ट के समक्ष लंबित हैं, उन पर बेहद तेजी से और प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाए। अदालत ने इसके लिए एक निश्चित समय सीमा तय करते हुए कहा कि यदि संभव हो, तो अगले छह महीनों के भीतर इन सभी लंबित अपीलों का अंतिम रूप से निपटारा कर दिया जाए।
हाईकोर्ट के जमानत आधार पर केंद्रीय एजेंसी ने उठाए गंभीर सवाल
इस बेहद संवेदनशील मामले की अदालती कार्यवाही के दौरान केंद्रीय एजेंसी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने झारखंड हाईकोर्ट के फैसले की वैधानिकता पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। सरकारी वकील ने कोर्ट रूम में दलील दी कि लालू प्रसाद यादव की सजा को निलंबित करने का उच्च न्यायालय का यह आदेश तथ्यात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण और गलत गणना के आधार पर पारित किया गया था। उन्होंने पीठ को अवगत कराया कि इससे पहले इसी आधार पर दोषी की दो अलग-अलग अर्जियां खारिज की जा चुकी थीं, लेकिन तीसरी बार में उन्हें इस तकनीकी आधार पर राहत दे दी गई कि उन्होंने अपनी कुल सजा का ५० प्रतिशत हिस्सा जेल में काट लिया है, जो कि तर्कों के विपरीत है।
कानूनी बारीकियों और मुख्य संवैधानिक मुद्दों पर आगे भी जारी रहेगी बहस
सर्वोच्च न्यायालय ने इस राहत के साथ ही यह भी पूरी तरह साफ कर दिया है कि इस पूरे घोटाले और सजा के निलंबन से जुड़े जो भी बड़े संवैधानिक और कानूनी सवाल उठाए गए हैं, उन पर अभी कोई अंतिम मुहर नहीं लगाई गई है। अदालत का मानना है कि आधी सजा काटने के बाद जमानत मिलने के नियम और सीबीआई द्वारा उठाए गए तकनीकी बिंदुओं पर अभी और अधिक कानूनी विमर्श की आवश्यकता है। इसलिए, इन तमाम महत्वपूर्ण और संवेदनशील नीतिगत मुद्दों पर आने वाले दिनों में निर्धारित की जाने वाली अगली सुनवाइयों के दौरान दोनों पक्षों की मौजूदगी में बेहद विस्तार से और गहराई से विचार किया जाएगा।
घटनास्थल से 100 मीटर दूर तैनात थे जवान, फिर भी अपहरण; 4 पुलिसकर्मी निलंबित
14 Jul, 2026 11:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की राजधानी में बहुचर्चित बंटी यादव अपहरण कांड में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की मुस्तैदी पर बड़े सवाल खड़े होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया है। कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में पटना सेंट्रल एसपी ममता कल्याणी ने त्वरित कार्रवाई की है। इस विभागीय कार्रवाई के तहत दो सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) समेत कुल चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पुलिस प्रशासन द्वारा उठाए गए इस सख्त कदम से पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।
ड्यूटी में बड़ी लापरवाही पर गिरी गाज
निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में सहायक उपनिरीक्षक प्रवीण कुमार पंकज, सहायक उपनिरीक्षक अवधेश कुमार, आरक्षी वीर बहादुर सिंह और होमगार्ड जवान सुदर्शन प्रसाद शामिल हैं। इन चारों पर आरोप है कि जब शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब वे अपनी तय जिम्मेदारी को निभाने में पूरी तरह विफल साबित हुए। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की तरफ से साफ संकेत दिए गए हैं कि आम जनता की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर होने वाली कोताही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
घटनास्थल के बेहद करीब होने के बावजूद नहीं मिली भनक
यह पूरी गाज छह जुलाई की रात को घटित हुए बंटी यादव के अपहरण मामले के बाद गिरी है। विभागीय जांच में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिस वक्त बदमाश बेखौफ होकर अपहरण की इस वारदात को अंजाम दे रहे थे, उस समय ये चारों पुलिसकर्मी घटनास्थल से महज सौ मीटर की दूरी पर तैनात थे। इन पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी इलाके में गश्ती करने और आपातकालीन सेवा डायल-११२ के तहत तुरंत एक्शन लेने की थी, लेकिन इतनी निकटता के बावजूद इन्हें वारदात की खबर तक नहीं लगी और न ही इन्होंने समय रहते अपराधियों को पकड़ने का कोई प्रयास किया।
निलंबन के बाद नए मुख्यालय में उपस्थिति के निर्देश
एसपी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक निलंबन आदेश के अनुसार, इन सभी चारों पुलिसकर्मियों को उनके वर्तमान थाना क्षेत्र और जिम्मेदारियों से तुरंत मुक्त कर दिया गया है। निलंबन की इस पूरी अवधि के दौरान उनका नया प्रशासनिक मुख्यालय नवीन पुलिस लाइन, पटना निर्धारित किया गया है। उन्हें कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना किसी देरी के नए मुख्यालय में अपनी आमद दर्ज कराएं और निलंबन काल के नियमों का पूरी तरह से पालन करें।
तीन दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का अल्टीमेटम
इस निलंबन की कार्रवाई के साथ ही विभाग ने आरोपियों को अपनी सफाई पेश करने का एक मौका भी दिया है। सभी निलंबित पुलिसकर्मियों को लिखित आदेश जारी कर यह निर्देशित किया गया है कि वे अगले तीन दिनों के भीतर इस गंभीर लापरवाही के संबंध में अपना स्पष्टीकरण पुलिस मुख्यालय के समक्ष प्रस्तुत करें। निर्धारित समय सीमा में उचित और संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में उनके खिलाफ विभागीय नियमों के तहत और अधिक कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।
मर्चेंट शिप पर हमला, बिहार के लाल की मौत से गांव में पसरा मातम
14 Jul, 2026 10:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गोपालगंज। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भीषण सैन्य संघर्ष की तपिश अब सात समंदर पार बिहार के घरों तक पहुंचने लगी है। जिले के थावे बाजार निवासी एक होनहार युवक की सुदूर विदेश में चल रहे युद्ध की भेंट चढ़ने की दर्दनाक खबर सामने आई है। इस हृदयविदारक सूचना के मिलते ही पूरे अंचल में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है। मृतक की पहचान स्थानीय व्यवसायी संजय गुप्ता के पुत्र सोनू कुमार गुप्ता के रूप में की गई है, जो दुबई में एक अंतरराष्ट्रीय मर्चेंट शिप (व्यापारिक जहाज) पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। इस अनहोनी के बाद से ही पीड़ित परिवार के घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय युद्ध के दौरान हुए मिसाइल हमले में गई जान
परिजनों से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, मंगलवार की सुबह उन्हें एक बेहद खौफनाक फोन कॉल आया, जिसने उनकी दुनिया उजाड़ दी। उन्हें सूचित किया गया कि ईरान और अमेरिका के बीच समुद्र में हुए एक भीषण सैन्य हमले के दौरान सोनू कुमार गुप्ता गंभीर रूप से हताहत हो गए और उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। हालांकि, यह हमला किस तरह हुआ और जहाज को किस हथियार से निशाना बनाया गया, इसके सटीक और आधिकारिक विवरण का परिवार को अभी भी बेसब्री से इंतजार है। इस मनहूस खबर के आते ही परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया है।
बेटे की मौत की खबर से थावे बाजार में पसरा सन्नाटा
मृतक सोनू के पिता संजय गुप्ता थावे बाजार के एक प्रतिष्ठित और सीधे-साधे व्यवसायी हैं, जो वहां जूता-चप्पल की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। इकलौते कमाऊ बेटे की मौत की खबर मिलने के बाद मंगलवार को पूरे सम्मान और शोक में बाजार की दुकानें स्वतः स्फूर्त बंद हो गईं। जैसे ही इस अंतरराष्ट्रीय हादसे की जानकारी स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों को मिली, बड़ी संख्या में रिश्तेदार, पड़ोसी और परिचित परिवार को ढांढस बंधाने उनके पैतृक निवास पर पहुंचने लगे, जिससे हर आंख नम नजर आई।
मासूम बेटे के पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने की कानूनी औपचारिकताएं
गहरे सदमे में डूबा पीड़ित परिवार अब केवल अपने लाडले के पार्थिव शरीर को अंतिम बार देखने और उसे भारत लाने की उम्मीद लगाए बैठा है। परिजनों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मामला होने के कारण उन्हें अभी तक शव को स्वदेश वापस लाने की जटिल कानूनी प्रक्रियाओं और दूतावास संबंधी औपचारिकताओं को लेकर कोई स्पष्ट और आधिकारिक दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। इसके चलते परिवार की व्याकुलता और मानसिक पीड़ा लगातार बढ़ती ही जा रही है।
केंद्र सरकार से जल्द से जल्द शव पैतृक गांव भिजवाने की गुहार
इस बेहद संवेदनशील और दुखद घड़ी में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने एकजुट होकर भारत सरकार से मदद की अपील की है। उन्होंने विदेश मंत्रालय और केंद्र सरकार से मांग की है कि दुबई स्थित भारतीय दूतावास से तुरंत संपर्क साधकर सभी आवश्यक राजनयिक प्रक्रियाएं युद्ध स्तर पर पूरी की जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार सोनू के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द सम्मान सहित उसके पैतृक गांव थावे भिजवाने की व्यवस्था करे, ताकि सनातन परंपरा के अनुसार उसका अंतिम संस्कार किया जा सके।
रांची HEC को बड़ा झटका, EPFO ने डिफॉल्टर घोषित कर शुरू की वसूली
14 Jul, 2026 10:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची। देश के सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख उपक्रमों में शुमार हेवी इंजीनियरिंग कारपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) के ऊपर मंडरा रहा वित्तीय संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ जहां कंपनी के कर्मचारी लंबे समय से अपनी बुनियादी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अब विभिन्न सरकारी विभागों का कानूनी शिकंजा भी संस्थान पर कसता जा रहा है। इसी कड़ी में अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने एचईसी प्रबंधन के खिलाफ एक बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी वित्तीय कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई के तहत विभाग ने हटिया स्थित बैंक शाखा में मौजूद एचईसी के खाते से बकाया राशि वसूलने के आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
ईपीएफओ ने जारी किया रिकवरी का सख्त आदेश
कर्मचारियों के भविष्य सुरक्षित रखने वाले विभाग ईपीएफओ ने लंबे समय से लंबित पड़े बकाए को लेकर यह सख्त कदम उठाया है। विभाग के रिकवरी अफसर ने एचईसी के बैंक खाते से लगभग 12 लाख रुपये की बकाया राशि को तुरंत वसूल करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद से संस्थान की वित्तीय गतिविधियों पर और अधिक दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि पहले से ही नकदी के संकट से जूझ रही कंपनी के लिए यह एक बड़ा झटका साबित हो रहा है।
खाते से सभी प्रकार के लेन-देन पर लगी रोक
ईपीएफओ के रिकवरी अधिकारी ने इस वसूली को सुनिश्चित करने के लिए संबंधित बैंक प्रबंधन को बेहद कड़े और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बैंक को निर्देशित किया गया है कि जब तक एचईसी के खाते से इस पूरी निर्धारित राशि यानी करीब 12 लाख रुपये की रिकवरी पूरी नहीं हो जाती, तब तक उस खाते से किसी भी अन्य तरह का भुगतान या वित्तीय लेन-देन पूरी तरह से रोक दिया जाए। इस प्रतिबंध के कारण एचईसी के दैनिक कामकाज और अन्य तात्कालिक भुगतानों पर बेहद विपरीत असर पड़ने की संभावना है।
ईएसआईसी ने भी एचईसी को घोषित किया डिफाल्टर
संस्थान के लिए मुश्किलें सिर्फ ईपीएफओ की कार्रवाई तक ही सीमित नहीं हैं। इसी समय में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) ने भी एचईसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ईएसआईसी ने कंपनी द्वारा समय पर अंशदान जमा न करने और नियमों की अनदेखी करने के कारण उसे आधिकारिक तौर पर डिफाल्टर घोषित कर दिया है। एक साथ दो बड़े सरकारी सामाजिक सुरक्षा संगठनों द्वारा की जा रही इस चौतरफा कार्रवाई ने एचईसी प्रबंधन की नींद उड़ा दी है।
कर्मचारियों के वेतन और सामाजिक सुरक्षा पर गहराया संकट
इस संपूर्ण विवाद और प्रशासनिक कार्रवाइयों के बीच एचईसी के हजारों कर्मचारी खुद को बेहद लाचार और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कर्मचारियों का न केवल महीनों का वेतन बकाया है, बल्कि उनके पीएफ और ईएसआई जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का पैसा भी समय पर जमा नहीं हो पा रहा है। इस नए वित्तीय प्रतिबंध और बैंक खातों के फ्रीज होने जैसी स्थिति के कारण अब कर्मचारियों को अपने बकाया वेतन की निकासी और भविष्य निधि के दावों को लेकर गहरी चिंता सताने लगी है।
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