उत्तर प्रदेश
डिप्टी सीएम की चर्चा के बीच अब मंत्री पद की संभावना, निशांत कुमार पर नजर
6 May, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: बिहार मंत्रिमंडल विस्तार के बीच निशांत कुमार के नाम पर अटकलें तेज, जदयू के भीतर मंत्री पद को लेकर छिड़ी बहस
जनता दल यूनाइटेड की सदस्यता ग्रहण करने के बाद से ही निशांत कुमार बिहार की राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं। हाल ही में जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री का पद छोड़ा और सम्राट चौधरी को नया मुख्यमंत्री घोषित किया गया, तब कयास लगाए जा रहे थे कि निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री जैसी बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि, पार्टी ने अपने अनुभवी नेताओं को वरीयता दी। अब जब राज्य में मंत्रिमंडल के विस्तार की प्रक्रिया चल रही है, तो एक बार फिर सियासी गलियारों में निशांत कुमार को मंत्री बनाए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। इन चर्चाओं के बीच पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और रणनीतिकार इस संभावना को खारिज कर रहे हैं। उनका मानना है कि निशांत वर्तमान में बिहार की यात्रा पर हैं और वे जल्दबाजी में कोई भी प्रशासनिक पद स्वीकार करने के बजाय जमीनी स्तर पर राजनीतिक समझ विकसित करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री की दौड़ के बाद मंत्री पद स्वीकार करने पर पार्टी नेताओं की राय
निशांत कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर जदयू के भीतर अलग-अलग मत उभरकर सामने आ रहे हैं। कुछ वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि जब कुछ समय पहले तक निशांत कुमार का नाम उपमुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए चल रहा था, तो अब उनके लिए मंत्रिमंडल में एक साधारण मंत्री का पद स्वीकार करना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, पद के पदानुक्रम में यह एक कदम पीछे हटने जैसा होगा। नेताओं का कहना है कि निशांत कुमार ने स्वयं स्पष्ट किया था कि वह अगले कुछ समय तक पूरे बिहार का भ्रमण करेंगे ताकि वे जनता की समस्याओं को करीब से जान सकें और लोग भी उनके विचारों से अवगत हो सकें। ऐसी स्थिति में, सम्राट चौधरी की सरकार में फिलहाल शामिल होने के बजाय संगठन के लिए काम करना उनके लंबे राजनीतिक करियर के लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है।
पार्टी के आधिकारिक रुख और मीडिया की खबरों के बीच का अंतर
भले ही सोशल मीडिया और मीडिया के विभिन्न वर्गों में निशांत कुमार को मंत्री बनाए जाने की खबरें प्रमुखता से चल रही हों, लेकिन पार्टी के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई चर्चा फिलहाल नहीं है। जदयू के पदाधिकारियों का मानना है कि इस तरह की खबरें केवल अटकलों पर आधारित हैं। पार्टी के भीतर यह स्पष्ट संदेश है कि इस संबंध में कोई भी अंतिम निर्णय केवल राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ही लेंगे और अब तक उनकी ओर से ऐसा कोई संकेत या निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। पार्टी कार्यकर्ताओं का एक बड़ा हिस्सा यह भी मानता है कि निशांत को किसी पद पर बैठाने के बजाय उन्हें स्वतंत्र रूप से बिहार के दौरे पर रहने देना चाहिए ताकि वे भविष्य के लिए एक मजबूत और लोकप्रिय नेता के रूप में उभर सकें।
निशांत कुमार की आगामी रणनीति और संगठन में उनकी भूमिका पर नजर
निशांत कुमार फिलहाल किसी भी पद की दौड़ से दूर रहकर खुद को एक गंभीर छात्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं जो बिहार की जटिल राजनीति को करीब से देख रहा है। उनकी बिहार यात्रा को उनके राजनीतिक भविष्य की नींव माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि नीतीश कुमार के विश्वसनीय सहयोगियों ने भी फिलहाल उन्हें किसी भी सरकारी जिम्मेदारी से दूर रखने की सलाह दी है ताकि उनके ऊपर सत्ता विरोधी लहर या शासन की विफलताओं का कोई दाग न लगे। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या निशांत कुमार अपनी यात्रा जारी रखते हैं या पार्टी की रणनीतियों के तहत उन्हें सरकार में कोई विशेष जिम्मेदारी सौंपी जाती है। फिलहाल, जदयू के अंदरूनी खेमे में शांति बनी हुई है और सभी की नजरें राष्ट्रीय अध्यक्ष के अगले कदम पर टिकी हैं।
कथित आय से अधिक संपत्ति मामले में राहुल गांधी को लेकर अदालत में सुनवाई
6 May, 2026 11:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ: राहुल गांधी के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई जांच की मांग, इलाहाबाद हाईकोर्ट की विशेष सुनवाई पर टिकी नजरें
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में बुधवार को उस समय सरगर्मी बढ़ गई जब लोकसभा में विपक्ष के नेता और रायबरेली से सांसद राहुल गांधी के खिलाफ एक नई आपराधिक याचिका दायर की गई। इस याचिका में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत राहुल गांधी पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को इस प्रकरण में नियमित मामला दर्ज कर विस्तृत छानबीन के निर्देश दिए जाएं। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बुधवार दोपहर को चैम्बर में इस पर विशेष सुनवाई का समय निर्धारित किया है।
अत्यधिक महत्वपूर्ण और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला करार
न्यायालय के समक्ष याचिकाकर्ता ने इस मामले को जनहित और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत गंभीर बताया है। कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर इस याचिका में केवल राहुल गांधी ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के कुछ सदस्यों पर भी आय के मुकाबले कहीं अधिक संपत्ति रखने के कथित आरोप मढ़े गए हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस मामले की गहराई से जांच होना लोकतांत्रिक पारदर्शिता के लिए अनिवार्य है। यही कारण है कि सुबह के सत्र में कोर्ट से इस पर तत्काल और गोपनीय सुनवाई का विशेष आग्रह किया गया था, जिसे पीठ ने स्वीकार करते हुए दोपहर बाद का समय मुकर्रर किया।
सीबीआई सहित कई प्रमुख केंद्रीय एजेंसियों को बनाया गया प्रतिवादी
इस कानूनी लड़ाई को व्यापक आधार देने के लिए याचिका में देश की कई शक्तिशाली जांच एजेंसियों को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने सीबीआई निदेशक के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), आयकर विभाग, केंद्रीय गृह मंत्रालय और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) को भी प्रतिवादी के रूप में शामिल किया है। इन सभी संस्थाओं की भूमिका और उनके पास मौजूद संभावित साक्ष्यों के आधार पर नियमित मामला दर्ज करने की पुरजोर वकालत की गई है। इस बहुआयामी कानूनी घेराबंदी के कारण राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं क्योंकि इसमें कई शीर्ष जांच एजेंसियां एक साथ निशाने पर हैं।
चैम्बर में सुनवाई की अनुमति और भविष्य की कानूनी रणनीति
अदालत में बुधवार सुबह जब नए मामलों की सूची पेश की गई, तो याचिकाकर्ता ने विषय की गंभीरता और गोपनीयता बनाए रखने के लिए खुली अदालत के बजाय चैम्बर में सुनवाई की प्रार्थना की। खंडपीठ ने इस दलील को स्वीकार करते हुए दोपहर 2:25 बजे का समय निर्धारित किया। इस सुनवाई के दौरान प्रारंभिक साक्ष्यों की समीक्षा की जाएगी और यह तय होगा कि क्या लगाए गए आरोपों में इतनी शक्ति है कि सीबीआई जांच के आदेश दिए जा सकें। कानूनी विशेषज्ञों की मानें तो इस याचिका का परिणाम न केवल राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य बल्कि आने वाले दिनों में विपक्ष की रणनीतियों पर भी बड़ा असर डाल सकता है।
विपक्ष के नेता पर कानूनी दबाव और राजनीतिक हलचल
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे राहुल गांधी के खिलाफ इस तरह की याचिका दायर होना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। रायबरेली से सांसद चुने जाने के बाद उनके विरुद्ध यह एक बड़ी कानूनी चुनौती के रूप में उभरा है। याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि यह उनके द्वारा दायर की गई एक नई और विस्तृत याचिका है जिसमें पुराने तथ्यों के साथ-साथ कुछ नए पहलुओं को भी जोड़ा गया है। फिलहाल सभी की निगाहें हाईकोर्ट के रुख पर टिकी हैं क्योंकि न्यायालय की टिप्पणी या आदेश इस मामले की दिशा तय करेंगे कि क्या वाकई केंद्रीय एजेंसियां इस प्रकरण में नियमित जांच शुरू करेंगी।
दिल दहला देने वाली वारदात, मासूम से सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने
6 May, 2026 10:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: मदद के बहाने नाबालिग से दरिंदगी, चलती कार और सूने मकान में सामूहिक दुष्कर्म के बाद दो आरोपी गिरफ्तार
बिहार की राजधानी में मानवता को कलंकित करने वाला एक जघन्य मामला प्रकाश में आया है, जहाँ एक नाबालिग लड़की की लाचारी का फायदा उठाकर तीन युवकों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। पीड़िता विजयवाड़ा से ट्रेन के जरिए पटना जंक्शन पहुंची थी, जहाँ उसका मोबाइल चोरी हो जाने के कारण वह काफी परेशान थी। इसी बेबसी का लाभ उठाते हुए विकास नामक युवक ने उसे सहायता का भरोसा दिया और ऑटो में बैठाकर गांधी मैदान ले गया। वहां उसने अपने साथी अरविंद को कार के साथ बुला लिया और फिर दोनों ने जान से मारने का डर दिखाकर किशोरी को वाहन में खींच लिया। आरोपियों ने चलती कार में लड़की के साथ हैवानियत की और उसके बाद उसे एक सुनसान स्थान पर ले गए।
निर्माणाधीन भवन में रात भर हैवानियत और पीड़िता की चीखें
अपराधी शाम के समय नाबालिग को सरिस्ताबाद इलाके के एक निर्माणाधीन मकान में ले गए, जहाँ उन्होंने अपने तीसरे साथी पवन को भी मौके पर बुला लिया। उस वीरान मकान के एक कमरे में तीनों आरोपियों ने पूरी रात पीड़िता के साथ बारी-बारी से दरिंदगी की। किशोरी अपनी जान की भीख मांगती रही और दर्द से तड़पती रही, लेकिन उन दरिंदों का दिल नहीं पसीजा। रात भर चली इस बर्बरता के बाद आरोपियों ने अगले दिन पीड़िता को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। इस पूरी घटना ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था और अपराधियों के बेखौफ हौसलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जागरूक यात्रियों की सतर्कता से दबोचे गए अपराधी और पुलिस की कार्रवाई
वारदात के बाद आरोपी विकास ने पीड़िता को डराने-धमकाने के उद्देश्य से दानापुर स्टेशन पर छोड़ दिया, लेकिन वह यह सुनिश्चित करने के लिए वापस आया कि लड़की पुलिस के पास न जाए। स्टेशन पर जब वह दोबारा किशोरी को धमका रहा था, तब वहां मौजूद रेल यात्रियों को उनकी बहस देखकर संदेह हुआ। यात्रियों ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए दानापुर रेल पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर विकास को हिरासत में ले लिया और उसकी निशानदेही पर पवन को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि, कार का मालिक अरविंद अभी भी कानून की गिरफ्त से बाहर है, जिसकी तलाश में पुलिस की विशेष टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं।
पीड़िता का मेडिकल परीक्षण और फरार आरोपी की तलाश तेज
पुलिस ने घटना के संबंध में मामला दर्ज कर पीड़िता को चिकित्सीय जांच और उचित उपचार के लिए अस्पताल भेजा है। पकड़े गए दोनों आरोपियों से कड़ी पूछताछ की जा रही है ताकि मामले की तह तक पहुँचा जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में स्पीडी ट्रायल चलाकर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। फिलहाल, फरार तीसरे आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस के लिए प्राथमिकता बनी हुई है। शहर के लोगों ने इस घटना पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
दूसरे राज्यों में कम डिमांड का असर, आलू उत्पादकों की बढ़ी मुश्किलें
6 May, 2026 10:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कन्नौज: आलू की बंपर पैदावार बनी किसानों के लिए मुसीबत, लागत न निकलने से टूट रहे मकान और पढ़ाई के सपने
उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध आलू बेल्ट में इन दिनों 'सब्जी का राजा' किसानों की आंखों में आंसू ला रहा है। रामगंगा के कछार से लेकर फर्रुखाबाद और कन्नौज के गांवों तक आलू की बेकद्री का आलम यह है कि फसल या तो खेतों में खुले आसमान के नीचे सड़ रही है या कोल्ड स्टोरों के बाहर धूप में खराब हो रही है। बंपर पैदावार के बावजूद मंडियों में सही दाम न मिलने के कारण किसानों की उम्मीदें पूरी तरह चकनाचूर हो गई हैं। जैनापुर और मोहम्मदाबाद जैसे क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि जिस आलू को वे 'खरा सोना' मानकर अपने बच्चों की शिक्षा और घर के निर्माण की योजना बना रहे थे, वही अब उनके लिए कर्ज का बोझ बन गया है। आलम यह है कि कोल्ड स्टोर पूरी तरह भर चुके हैं और जो आलू बाहर रह गया है, उसे मंडी तक ले जाने का भाड़ा और मजदूरी भी उसकी कीमत से अधिक बैठ रही है।
कोल्ड स्टोरों की क्षमता हुई पूरी और मंडी में कौड़ियों के भाव बिक रही फसल
फर्रुखाबाद से लेकर फिरोजाबाद तक के लगभग 2363 कोल्ड स्टोर अपनी पूरी क्षमता के साथ भर चुके हैं, जिनमें करीब 172 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित है। इसके बावजूद भारी मात्रा में आलू अभी भी खेतों और बागों में पड़ा हुआ है क्योंकि स्टोर मालिकों ने अब और जगह न होने की बात कहकर हाथ खड़े कर दिए हैं। सातनपुर मंडी और अन्य स्थानीय बाजारों में आलू की कीमत महज तीन सौ से पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल रह गई है, जिससे किसानों का डीजल और मजदूरी का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है। कई किसान तो इतने निराश हैं कि उन्होंने फसल को छायादार बागों में बोरों में भरकर रख दिया है और इस उम्मीद में बैठे हैं कि शायद कभी भाव सुधरे, हालांकि धूप और गर्मी के कारण आलू के खराब होने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
लागत और मुनाफे का बिगड़ा गणित और औद्योगिक इकाइयों की कमी का असर
एक प्रगतिशील किसान के अनुसार प्रति बीघा आलू उगाने में करीब 12 से 15 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि खुदाई, पैकिंग और परिवहन का खर्च इसमें अलग से जुड़ता है। यदि औसत पैदावार के हिसाब से बिक्री मूल्य को देखा जाए, तो किसानों को प्रति बीघा हजारों रुपये का सीधा घाटा उठाना पड़ रहा है। सरकारी क्रय केंद्रों पर भी मानक इतने कड़े हैं कि आम किसान वहां अपनी फसल बेचने में कठिनाई महसूस कर रहा है। विशेषज्ञों और कोल्ड स्टोर संचालकों का मानना है कि इस संकट का मुख्य कारण अन्य राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल और असम में निर्यात का न होना और स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयों का अभाव है। यदि सरकार आलू पाउडर बनाने की फैक्ट्रियां या अन्य प्रसंस्करण उद्योग लगाए, तो किसानों को इस तरह की बर्बादी से बचाया जा सकता है।
शिक्षा और भविष्य की योजनाओं पर पड़ा गहरा आर्थिक संकट
आलू के इस संकट ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है, जिसका सीधा असर सामाजिक स्तर पर भी दिखने लगा है। कई परिवारों में बच्चों की उच्च शिक्षा की फीस भरने के लिए अब साहूकारों से कर्ज लेने की नौबत आ गई है क्योंकि आलू की बिक्री से कोई आय नहीं हुई। इंजीनियरिंग और अन्य पेशेवर कोर्स कर रहे छात्रों का भविष्य अब अधर में लटका नजर आ रहा है, क्योंकि उनके माता-पिता ने फसल की कमाई के भरोसे ही बड़े सपने देखे थे। इसी तरह जिन किसानों ने अपने कच्चे मकानों को पक्का बनाने के लिए छत की ढलाई की तैयारी की थी, उनके काम बीच में ही रुक गए हैं। उत्तर प्रदेश की यह पूरी बेल्ट इस समय एक गंभीर कृषि संकट के दौर से गुजर रही है, जहां किसान अपनी मेहनत की फसल को बर्बाद होते देखने के लिए मजबूर है।
शाहीन बाग क्षेत्र में छिपाए गए दस्तावेजों की तलाश तेज
6 May, 2026 09:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आगरा: धर्मांतरण सिंडिकेट का भंडाफोड़, शाहीन बाग से लेकर पाकिस्तान तक जुड़े हैं गिरोह के तार
आगरा में सामने आए धर्मांतरण मामले की जांच में पुलिस के हाथ कई चौंकाने वाले सुराग लगे हैं, जिनसे इस पूरे नेटवर्क की गहराई का पता चलता है। मुख्य आरोपी परवेज अख्तर ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया है कि मौलाना कलीम सिद्दीकी के दामाद के दवा केंद्र के माध्यम से धर्मांतरण से जुड़े वित्तीय लेन-देन का प्रबंधन किया जा रहा था। गिरफ्तारी के डर से आरोपियों ने इस काले कारोबार से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजों और रजिस्टरों को दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में छिपा दिया है, जिन्हें बरामद करने के लिए पुलिस की टीमें सक्रिय हो गई हैं। इसके अतिरिक्त, गिरोह के एक अन्य सदस्य तलमीज उर रहमान ने स्वीकार किया कि फंडिंग और हवाई यात्राओं के टिकटों का रिकॉर्ड दिल्ली के बाटला हाउस स्थित एक परिचित के घर पर सुरक्षित रखा गया है।
डिजिटल साक्ष्यों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का हुआ सनसनीखेज खुलासा
इस गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद आधुनिक और संगठित रही है, जिसमें तकनीक का सहारा लेकर हिसाब-किताब रखा जाता था। आरोपी जतिन कपूर ने पूछताछ में बताया कि वह आर्थिक मदद और चंदे के लेन-देन का पूरा विवरण टैबलेट पर एक्सेल फाइलों के जरिए प्रबंधित करता था ताकि पारदर्शिता बनी रहे और कोई हेर-फेर न हो सके। सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया है कि इस गिरोह के तार पड़ोसी देश पाकिस्तान से भी जुड़े हुए हैं और आरोपी लगातार वहां बैठे संदिग्ध आकाओं के संपर्क में थे। पुलिस ने इनके पास से ऐसे कई अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबर भी बरामद किए हैं जिनसे नियमित अंतराल पर बातचीत की जा रही थी।
कश्मीर से भरतपुर तक फैला नेटवर्क और पुलिस की आगामी कार्रवाई
हसन मोहम्मद से हुई पूछताछ ने इस नेटवर्क के विस्तार को और भी स्पष्ट कर दिया है, जिससे पता चलता है कि अब्दुल रहमान के माध्यम से इस गिरोह ने कश्मीर से लेकर कई अन्य राज्यों में अपना जाल फैला रखा था। इस सिंडिकेट के सदस्यों की सूची और उनके संपर्क नंबरों वाला एक गुप्त रजिस्टर राजस्थान के भरतपुर में छिपाया गया है, जिसे पुलिस जल्द ही अपने कब्जे में लेगी। डीसीपी क्राइम आदित्य सिंह के अनुसार, इस पूरे मामले में अब तक 5 से 6 नए संदिग्धों के नाम प्रकाश में आए हैं और फंडिंग के स्रोतों की गहराई से जांच की जा रही है। आरोपियों को जेल भेज दिया गया है, लेकिन मामले की कड़ियों को पूरी तरह जोड़ने के लिए पुलिस बुधवार को अदालत में प्रार्थनापत्र देकर आरोपियों की सात दिनों की रिमांड मांगेगी ताकि इस राष्ट्रविरोधी नेटवर्क का पूरी तरह खात्मा किया जा सके।
जघन्य हत्या केस में बड़ा एक्शन, इनामी बदमाश मुठभेड़ में ढेर
6 May, 2026 08:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरदोई: मासूम की हत्या के आरोपी का पुलिस ने किया एनकाउंटर, मुठभेड़ में इनामी बदमाश ढेर
हरदोई जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना का अंजाम देने वाले अपराधी को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान मार गिराया है। यह आरोपी उस आठ वर्षीय मासूम के अपहरण और हत्या के मामले में वांछित था, जो पिछले शुक्रवार को उर्स का मेला देखने के दौरान लापता हो गया था। पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा के अनुसार, आरोपी की पहचान कन्नौज निवासी मेनूर उर्फ सेनूर के रूप में हुई है, जिसे बुधवार तड़के बाबटमऊ के समीप घेराबंदी के दौरान ढेर कर दिया गया। इस साहसिक कार्रवाई में स्वात टीम (एसओजी) के प्रभारी भी गोली लगने से घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मेले से अपहरण और खेत में शव मिलने की हृदयविदारक घटना
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब मल्लावां कोतवाली क्षेत्र के एक गांव का मासूम बच्चा स्थानीय उर्स मेले से अचानक गायब हो गया। पिता की तहरीर पर पुलिस ने तुरंत अपहरण का मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की थी, लेकिन मंगलवार को उस समय सनसनी फैल गई जब बच्चे का शव गांव के ही एक मक्के के खेत में मिट्टी में दबा हुआ पाया गया। पुलिस की तफ्तीश में मुख्य संदिग्ध के रूप में सेनूर का नाम सामने आया, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई थीं। प्रशासन ने आरोपी की आपराधिक पृष्ठभूमि और अपराध की गंभीरता को देखते हुए उस पर पचास हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर दिया था।
तड़के हुई मुठभेड़ और पुलिस की जवाबी कार्रवाई
बुधवार की सुबह पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी बाइक से भागने की फिराक में है। बाबटमऊ के पास जब पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने उसे रोकने का प्रयास किया, तो उसने टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इस गोलाबारी में एसओजी प्रभारी राजेश यादव जख्मी हो गए, जिसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुए अपराधी को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर जिला मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
आपराधिक इतिहास और मौके से बरामदगी का विवरण
मारे गए अपराधी के पास से पुलिस ने एक पिस्टल, एक तमंचा, कारतूस और वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक बरामद की है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी सेनूर के खिलाफ विभिन्न जिलों के अलग-अलग थानों में संगीन धाराओं के तहत कई आपराधिक मामले पहले से ही दर्ज थे। वह एक शातिर किस्म का अपराधी था जो लगातार अपनी पहचान बदलकर कानून को चकमा दे रहा था। इस एनकाउंटर के बाद पुलिस विभाग ने राहत की सांस ली है और पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की बात कही जा रही है, हालांकि इस जघन्य अपराध ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी थी।
मेडिकल एंट्रेंस में सॉल्वर गैंग सक्रिय, चार आरोपी गिरफ्तार
6 May, 2026 07:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहारशरीफ: नीट परीक्षा में सेंधमारी की बड़ी साजिश नाकाम, 60 लाख की डील करने वाले चार नए आरोपी गिरफ्तार
नालंदा पुलिस ने नीट परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी बैठाने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज करते हुए चार और शातिर आरोपियों को धर दबोचा है। पकड़े गए इन आरोपियों ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास करने के लिए गिरोह के सरगनाओं के साथ 50 से 60 लाख रुपये का भारी-भरकम सौदा किया था। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि इस सौदे को पक्का करने के लिए आरोपियों ने गिरोह को करीब दो लाख रुपये एडवांस के तौर पर पहले ही दे दिए थे। पूर्व में गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों के मोबाइल डेटा और उनकी निशानदेही पर पुलिस की विशेष टीमों ने अलग-अलग जिलों के परीक्षा केंद्रों से इन जालसाजों को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद इस पूरे प्रकरण में अब तक कुल सात लोग सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं।
मोबाइल चैट और साक्ष्यों ने खोली अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की पोल
इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब राजगीर पुलिस ने पावापुरी चौक के पास चेकिंग के दौरान एक एमबीबीएस छात्र को उसके साथियों के साथ दबोचा था। पुलिस द्वारा मुख्य सरगना अवधेश कुमार के मोबाइल की गहन जांच करने पर ऐसे कई नंबर और चैट मिले, जिनसे नीट परीक्षा में होने वाली बड़ी धांधली का सुराग मिला। राजगीर डीएसपी सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में की गई इस जांच से पता चला कि यह गिरोह सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर और औरंगाबाद जैसे शहरों में अपना जाल फैला चुका था। पकड़े गए आरोपियों में से कई प्रतिष्ठित परिवारों और मेडिकल पृष्ठभूमि से जुड़े हैं, जिन्होंने शॉर्टकट से डॉक्टर बनने के चक्कर में लाखों रुपये दांव पर लगा दिए थे।
मुख्य सरगना की गिरफ्तारी से फेल हुई सॉल्वर बैठाने की योजना
पुलिस की कड़ी पूछताछ में पकड़े गए चारों अभियुक्तों—हर्षराज, मनोज कुमार, गौरव कुमार और सुभाष कुमार—ने अपना गुनाह स्वीकार करते हुए बताया कि वे उज्जवल राज और अमन कुमार सिंह जैसे सरगनाओं के संपर्क में थे। उनकी योजना के मुताबिक परीक्षा केंद्रों पर उनकी जगह फर्जी सॉल्वर को बैठना था, लेकिन ऐन वक्त पर गिरोह के मुख्य सदस्यों की गिरफ्तारी ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। अभियुक्तों ने कबूला कि मोटी रकम के लालच में उन्होंने परीक्षा से पहले ही डेढ़ से दो लाख रुपये का भुगतान कर दिया था। पुलिस की टीमें अब इस नेक्सस के अन्य फरार सदस्यों और गिरोह को आर्थिक मदद देने वाले अन्य लोगों की तलाश में जमुई और मुजफ्फरपुर सहित कई ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं।
पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी और आगामी कानूनी कार्यवाही
इस हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझाने के लिए पावापुरी, छबीलापुर और कतरीसराय जैसे कई थानों की संयुक्त टीम बनाई गई थी, जिन्होंने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस सिंडिकेट को ध्वस्त किया है। डीएसपी ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तार किए गए सभी सातों आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है और अब पुलिस इनके अन्य बैंक खातों और संपत्तियों की भी जांच कर रही है। विभाग का मानना है कि इस गिरोह के तार बिहार के बाहर अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं, जिसकी गहनता से तफ्तीश की जा रही है ताकि भविष्य में होने वाली परीक्षाओं की शुचिता बरकरार रखी जा सके और मेधावी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को कड़ी सजा मिल सके।
बिहार कैबिनेट में जनहित से जुड़े फैसलों पर रहेगी नजर
6 May, 2026 07:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आज होगी कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक, विकास योजनाओं पर लग सकती है मुहर
बिहार की राजनीति और शासन के लिहाज से आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार, छह मई को शाम पांच बजे मुख्य सचिवालय में कैबिनेट की एक विशेष बैठक बुलाई है। मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहटों के बीच आयोजित हो रही इस बैठक को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री राज्य की जनता के लिए कई बड़ी घोषणाएं कर सकते हैं। इस उच्चस्तरीय बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव के साथ-साथ मुख्य सचिव और विभिन्न विभागों के सचिव भी शिरकत करेंगे। माना जा रहा है कि सरकार इस बैठक के माध्यम से बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा के स्तर में सुधार और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को हरी झंडी दे सकती है।
पिछली बैठक के बड़े फैसले और पुलिस महकमे में व्यापक सुधार
इससे पहले 29 अप्रैल को हुई कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री ने विकास की गति को तेज करते हुए कुल 63 प्रस्तावों को अपनी मंजूरी दी थी। उस बैठक के दौरान एक प्रमुख फैसला पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान का नाम बदलकर 'पटना जू' करने का लिया गया था। इसके अतिरिक्त, गृह विभाग के अंतर्गत राज्य की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भागलपुर, मुजफ्फरपुर, नालंदा और गया जैसे प्रमुख शहरों में यातायात पुलिस के लिए 485 नए पदों के सृजन को स्वीकृति दी गई थी। साथ ही पूर्व से मौजूद 1606 पदों के पुनर्गठन को भी हरी झंडी दिखाई गई थी, जिससे शहरी क्षेत्रों में जाम की समस्या से निपटने में मदद मिल सके।
पदोन्नति के अवसरों और बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की तैयारी
पिछली कैबिनेट में पुलिस बल के मनोबल को बढ़ाने के लिए भी एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया गया था, जिसमें बिहार पुलिस अवर निरीक्षक और उसके समकक्ष सृजित 20,937 पदों में से आधे पदों को पदोन्नति के माध्यम से भरने के लिए चिन्हित करने की स्वीकृति प्रदान की गई थी। आज होने वाली बैठक में इसी तरह के बड़े प्रशासनिक और ढांचागत फैसलों की उम्मीद की जा रही है। सचिवालय के गलियारों में चर्चा है कि चुनाव से पहले और मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री कुछ ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे सकते हैं, जिनका सीधा लाभ आम जनता और प्रदेश के विकास को मिले।
रोजगार और जनहित के मुद्दों पर केंद्रित रह सकती है आज की चर्चा
आज शाम होने वाली इस बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य में निवेश बढ़ाना और रोजगार के नए सृजन करना हो सकता है। मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में खाली पड़े पदों को भरने और नई परियोजनाओं के लिए बजट आवंटन पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। सभी विभागों के सचिवों को महत्वपूर्ण प्रस्तावों के साथ तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक फाइलों पर त्वरित निर्णय लिया जा सके। इस बैठक के परिणामों पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि यह बैठक सरकार की भविष्य की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने वाली साबित होगी।
विक्रमशिला सेतु खराब होने से संकट, नावों के भरोसे चल रहा आवागमन
6 May, 2026 07:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भागलपुर: विक्रमशिला सेतु की क्षति से जनजीवन अस्त-व्यस्त, मुख्यमंत्री ने किया हवाई सर्वेक्षण और मरम्मत के दिए सख्त निर्देश
भागलपुर जिले के महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद आम जनता की कठिनाइयां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इस प्रमुख सेतु पर आवागमन बाधित होने के कारण प्रतिदिन हजारों मुसाफिरों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। संकट की इस घड़ी में जिला प्रशासन ने राहत प्रदान करने के उद्देश्य से गंगा घाटों पर नावों के संचालन की वैकल्पिक व्यवस्था शुरू की है। इन घाटों पर सुरक्षा और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए दंडाधिकारियों के साथ भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासन की प्राथमिकता वर्तमान में यात्रियों को सुरक्षित तरीके से नदी पार कराना और सेतु की मरम्मत के काम को गति देना है।
नाव के सफर में भारी भीड़ और अव्यवस्था से जूझ रहे मुसाफिर
यद्यपि प्रशासन ने नावों के जरिए लोगों को पार लगाने का प्रयास किया है, लेकिन धरातल पर स्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। प्रशासन ने नाव चालकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे क्षमता से अधिक सवारी न बैठाएं और निर्धारित दर पर ही किराया वसूलें, फिर भी यात्रियों को लंबी कतारों और अव्यवस्था से दो-चार होना पड़ रहा है। घाटों पर उमड़ती भारी भीड़ के कारण लोगों को नाव पकड़ने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है जिससे उनके दैनिक कार्य और व्यवसाय पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों का मानना है कि नाव का विकल्प केवल तात्कालिक है और इससे बड़ी आबादी की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लिया जायजा और बहाली के लिए दिए निर्देश
पुल की गंभीर स्थिति और जनता की परेशानी को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया। हवाई मार्ग से सेतु की स्थिति का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ बरारी पुल घाट के पास बैठक की। इस दौरान जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी और वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव सहित कई बड़े अधिकारी मौके पर उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पुल निर्माण विभाग की टीम के साथ समन्वय बिठाकर मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किया जाए ताकि प्रदेश के इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग को बिना किसी विलंब के दोबारा चालू किया जा सके।
स्थायी समाधान की प्रतीक्षा और प्रशासन की भविष्य की रणनीति
क्षेत्र के लोग वर्तमान में की गई वैकल्पिक व्यवस्थाओं को नाकाफी मान रहे हैं और जल्द से जल्द पुल की मरम्मत कर स्थायी समाधान की गुहार लगा रहे हैं। जिलाधिकारी ने इस संबंध में जानकारी दी कि विभाग की तकनीकी टीम निरंतर कार्य कर रही है और विशेषज्ञों की राय के आधार पर बहाली की प्रक्रिया को अंजाम दिया जा रहा है। प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि पुल की सुरक्षा से बिना कोई समझौता किए इसे जल्द से जल्द हल्के वाहनों के लिए खोला जाए। जब तक सेतु का संचालन सामान्य नहीं हो जाता, तब तक गंगा के विभिन्न घाटों पर सुरक्षा प्रबंधों को और अधिक सख्त करने और नावों की संख्या बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
पुल निर्माण विभाग की सक्रियता और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर जोर
सेतु की मरम्मत के लिए पुल निर्माण विभाग के अभियंताओं की विशेष टीम दिन-रात तकनीकी खामियों को दूर करने में जुटी हुई है। मुख्यमंत्री के दौरे के बाद काम की गति में तेजी आई है और आधुनिक मशीनों के जरिए क्षति का आकलन कर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें और सुरक्षा के दृष्टिकोण से लगाए गए प्रतिबंधों का पालन करें। सरकार की कोशिश है कि भविष्य में ऐसी तकनीकी खामियां दोबारा न आएं, इसके लिए पुल के बुनियादी ढांचे की मजबूती की भी गहन जांच की जा रही है ताकि लंबे समय तक सुगम यातायात सुनिश्चित किया जा सके।
यूपी में बिजली सिस्टम में बड़ा बदलाव, उपभोक्ताओं को राहत
5 May, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा प्रीपेड बिजली मीटरों की अनिवार्यता को समाप्त करने के बड़े निर्णय के बाद राजधानी के लगभग दो लाख उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब सभी प्रीपेड मीटर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क या आवेदन के स्वतः ही पोस्टपेड मोड में परिवर्तित हो जाएंगे। उपभोक्ताओं को इस बदलाव के लिए किसी दफ्तर के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि विभाग के सॉफ्टवेयर के माध्यम से यह प्रक्रिया एक क्लिक पर पूरी कर ली जाएगी, जिससे जनता को सीधे तौर पर तकनीकी जटिलताओं से मुक्ति मिलेगी।
डिजिटल बिलिंग व्यवस्था और भुगतान की नई प्रक्रिया
नई व्यवस्था के लागू होते ही अब मीटर रीडिंग लेने के लिए कर्मचारियों को घर-घर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि स्मार्ट मीटर सीधे कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से जुड़े होने के कारण स्वतः ही रीडिंग दर्ज कर लेंगे। प्रत्येक माह की पहली से दसवीं तारीख के बीच उपभोक्ताओं के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर बिजली बिल का संदेश प्राप्त होगा, जिसमें उपभोग की गई यूनिट्स और कुल राशि का विवरण होगा। मई महीने के बिजली बिल का विवरण जून के पहले सप्ताह में प्राप्त होगा, जिसे अगले पंद्रह दिनों के भीतर जमा करना अनिवार्य होगा, जिससे उपभोक्ताओं को भुगतान के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
बकाएदारों पर तकनीकी शिकंजा और कर्मचारियों की सुरक्षा
यद्यपि मीटर पोस्टपेड मोड पर काम करेंगे, लेकिन बिल का भुगतान न करने वाले बड़े बकाएदारों के विरुद्ध विभाग अब अधिक सख्ती दिखा सकेगा क्योंकि बिजली काटने की प्रक्रिया अब मैन्युअल न होकर पूरी तरह डिजिटल होगी। बिल जमा न होने की स्थिति में कंट्रोल रूम से एक क्लिक के माध्यम से बिजली की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी और भुगतान के बाद ही इसे पुनः चालू किया जाएगा। इस तकनीक के उपयोग से मौके पर जाकर लाइन काटने वाले कर्मचारियों को उपभोक्ताओं के आक्रोश और अभद्रता का सामना नहीं करना पड़ेगा, साथ ही कर्मचारियों पर लगने वाले भ्रष्टाचार के आरोपों में भी कमी आएगी।
बकाया बिलों का निपटान और नए कनेक्शनों की सुविधा
पिछले समय के लंबित बिलों को चुकाने के लिए विभाग उपभोक्ताओं को किस्तों में भुगतान करने की सुविधा प्रदान करेगा, जिसके लिए मई और जून माह में विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इन कैंपों के माध्यम से बिल संबंधी शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया जाएगा और विभाग जल्द ही इनका विस्तृत शेड्यूल जारी करेगा। साथ ही राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में लंबित सात हजार से अधिक नए कनेक्शनों के लिए अब केवल पोस्टपेड मीटर ही लगाए जाएंगे, और पुराने प्रीपेड उपभोक्ताओं का बचा हुआ बैलेंस उनके नए पोस्टपेड खातों में स्वतः ही समायोजित कर दिया जाएगा ताकि किसी का आर्थिक नुकसान न हो।
20 वर्षीय बेगम के साथ शादी बनी सुर्खियों का कारण
5 May, 2026 05:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गाजियाबाद: महानगर के कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कैला भट्ठा इलाके में एक पूर्व पार्षद के परिवार में करीब 50 करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर छिड़ा विवाद अब थाने और पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक पहुंच गया है। पूर्व पार्षद हाजी खलील की दूसरी पत्नी नाजरीन ने अपने 70 वर्षीय पति पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उन्होंने एक जूनियर हाईस्कूल के मैनेजर पद पर रहते हुए वहीं की एक 20 वर्षीय छात्रा से अपना चौथा निकाह कर लिया है। नाजरीन का कहना है कि उनके पति ने अपनी करोड़ों की चल-अचल संपत्ति का बड़ा हिस्सा अपनी चौथी पत्नी के नाम कर दिया है और अब वह अपनी दूसरी पत्नी व बच्चों को घर से बेदखल करने की कोशिश कर रहे हैं।
बहुविवाह और करोड़ों की संपत्ति का कानूनी उलझाव
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अपराध जयकरन नैय्यर के अनुसार इस पूरे विवाद की जड़ में भारी भरकम संपत्ति और पारिवारिक मतभेद हैं। नाजरीन ने पुलिस को बताया कि हाजी खलील पूर्व में दो बार पार्षद रह चुके हैं और उन्होंने अपनी पहली पत्नी व आठ बच्चों की जानकारी छिपाकर वर्ष 1991 में उनसे दूसरा निकाह किया था। शिकायतकर्ता के अनुसार हाजी खलील ने वर्ष 2010 में तीसरा निकाह किया और फिर दो साल पहले अपनी चौथी शादी रचा ली। नाजरीन का आरोप है कि पति की करीब 50 करोड़ रुपये की निजी संपत्ति के अलावा नगर निगम की 30 करोड़ की भूमि पर भी उनका कब्जा है और अब वह अपनी नई पत्नी के प्रभाव में आकर पुराने परिवार के अधिकारों का हनन कर रहे हैं।
दुकान पर जबरन कब्जे का प्रयास और पुलिस से अभद्रता
प्रॉपर्टी विवाद ने सोमवार शाम को तब हिंसक रूप ले लिया जब नाजरीन अपने बच्चों के साथ कैला भट्ठा स्थित एक दुकान पर पहुंचीं और वहां मौजूद राशिद नामक व्यक्ति को बाहर निकाल कर ताला लगा दिया। पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया कि हाजी खलील इस दुकान को वर्षों पहले राशिद के नाम बैनामा कर चुके थे। सूचना मिलने पर जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तो नाजरीन और उनके परिजनों पर पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी करने का आरोप लगा। डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि दुकानदार की तहरीर पर मारपीट और अवैध कब्जे के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस घटना की निष्पक्ष जांच कर रही है।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और वर्तमान स्थिति
इस विवाद के बीच समाजवादी पार्टी ने भी अपना रुख स्पष्ट करते हुए हाजी खलील से किसी भी प्रकार के वर्तमान संबंध होने से साफ इनकार कर दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि हाजी खलील बहुत पहले सपा में रहे होंगे, लेकिन वर्तमान में उनका संगठन से कोई लेना-देना नहीं है और उन्होंने पिछला चुनाव भी किसी अन्य दल के टिकट पर लड़ा था। वर्तमान में यह मामला पूरी तरह से एक पारिवारिक और कानूनी लड़ाई में तब्दील हो चुका है, जहां एक ओर चौथी पत्नी के नाम संपत्ति करने के आरोप हैं, तो दूसरी ओर पुलिस और कानूनी प्रक्रिया के उल्लंघन के मामले सामने आ रहे हैं।
बंगाल और असम में मिले जनादेश पर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज
5 May, 2026 03:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: पश्चिम बंगाल और असम के हालिया चुनावी परिणामों ने भारतीय राजनीति के गलियारों में एक नई वैचारिक चर्चा को जन्म दे दिया है। इन नतीजों को केवल सत्ता के समीकरणों के तौर पर न देखते हुए, राजकुमार चौबे ने इसे समाज के भीतर पनप रही एक गहरी सांस्कृतिक और वैचारिक चेतना के प्रतीक के रूप में परिभाषित किया है। उनके अनुसार, यह जनादेश विकास के साथ-साथ अपनी जड़ों और परंपराओं को सुरक्षित रखने की जन-इच्छा को मजबूती से प्रकट करता है।
सांस्कृतिक अस्मिता और सामाजिक एकजुटता का उदय
राजकुमार चौबे ने देश के वर्तमान सामाजिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि अब लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान और विरासतों के संरक्षण को लेकर पहले से कहीं अधिक जागरूक और संवेदनशील हो गए हैं। यह जागरूकता केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनसमर्थन के रूप में भी परिवर्तित हो रही है। उनके दृष्टिकोण में, बंगाल के चुनावी नतीजे किसी एक दल की जीत से बढ़कर उन लोगों की एकजुटता का परिणाम हैं, जिन्होंने अपनी परंपराओं और मूल्यों को केंद्र में रखकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया है।
असम का जनादेश और निरंतरता पर अटूट भरोसा
असम में मिली प्रभावी सफलता को चौबे ने शासन की स्थिरता और ठोस विकास कार्यों के प्रति जनता की सामूहिक स्वीकृति करार दिया है। उनका मानना है कि वहां के मतदाताओं ने कामकाज की राजनीति और सरकार की निरंतरता पर अपना भरोसा जताकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वे भविष्य की प्रगति के लिए एक स्पष्ट विजन चाहते हैं। यह जीत इस बात की पुष्टि करती है कि जनता केवल नारों पर नहीं, बल्कि धरातल पर हुए बदलावों और अपनी पहचान की सुरक्षा के आधार पर अपना नेतृत्व चुन रही है।
भविष्य की राजनीति और वैचारिक परिवर्तन के संकेत
राजकुमार चौबे ने भारतीय जनता पार्टी को इस शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह जीत जनता की उन अपेक्षाओं और अटूट विश्वास का प्रतिबिंब है, जो उन्होंने संगठन की विचारधारा में दिखाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह जनादेश केवल सरकारों के गठन का संकेत नहीं है, बल्कि यह समाज के भीतर चल रहे उस व्यापक वैचारिक बदलाव को भी दर्शाता है जो आने वाले समय में देश की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करेगा। लोग अब अपने मूल्यों और पहचान के प्रति अधिक सजग होकर एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण में सहभागी बन रहे हैं।
इलाज के दौरान बुझ गई विक्रम की जिंदगी, घर में पसरा मातम
5 May, 2026 12:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुजफ्फरपुर: जिले के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र अंतर्गत बीबीगंज रेलवे गुमटी के समीप पिछले दिनों हुई हिंसक झड़प की घटना ने मंगलवार को एक अत्यंत दुखद मोड़ ले लिया। मारपीट में बुरी तरह जख्मी हुए चौदह वर्षीय किशोर ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। जैसे ही अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को मौत की सूचना दी, वहां उपस्थित लोगों का धैर्य जवाब दे गया और अस्पताल परिसर में करुण क्रंदन के साथ तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। स्थानीय निवासियों की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद हो गया है।
बेरहमी से पिटाई के बाद अस्पताल में तोड़ा दम
मृतक किशोर की पहचान रेलवे कॉलोनी निवासी प्रदीप राम के पुत्र विक्रम कुमार के रूप में की गई है, जो महज चौदह वर्ष का था। परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, करीब एक सप्ताह पूर्व मंगलवार की रात कुछ अज्ञात तत्वों ने विक्रम को घेर लिया था और उस पर जानलेवा हमला करते हुए उसे बेरहमी से पीटा था। लहूलुहान हालत में उसे तुरंत एसकेएमसीएच ले जाया गया, परंतु स्वास्थ्य में सुधार न होने और स्थिति और अधिक गंभीर होने के कारण उसे एक निजी चिकित्सा केंद्र में स्थानांतरित किया गया था, जहाँ अंततः वह जीवन की जंग हार गया।
पुलिस की कार्रवाई और फरार आरोपियों की तलाश
मामले की गंभीरता को देखते हुए ब्रह्मपुरा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस हिंसा के संबंध में पहले ही नामजद प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी थी और अब तक एक अभियुक्त को हिरासत में लिया गया है। शेष अपराधियों की धरपकड़ के लिए पुलिस की विशेष टीमें विभिन्न संभावित ठिकानों पर सघन छापेमारी कर रही हैं। प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि इस जघन्य कृत्य में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही सभी सलाखों के पीछे होंगे।
गाँव में पसरा मातम और परिजनों की मांग
विक्रम की असमय मृत्यु के बाद नीलकंठ मंदिर स्थित उसके निवास स्थान पर सन्नाटा पसरा हुआ है और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है ताकि मृत्यु के कारणों की सटीक पुष्टि हो सके। स्थानीय लोगों और परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि फरार चल रहे अन्य आरोपियों को अविलंब गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवार को उचित न्याय दिलाया जाए, क्योंकि इस घटना ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सम्राट चौधरी ने गर्मजोशी से किया स्वागत, मजबूत होंगे द्विपक्षीय संबंध
5 May, 2026 12:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गया: वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम अपनी तीन दिवसीय भारत यात्रा के क्रम में मंगलवार की सुबह बिहार के गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। हवाई अड्डे पर सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी अगवानी की और उन्हें फूलों का गुलदस्ता भेंट कर गर्मजोशी से स्वागत किया। राष्ट्रपति की सुरक्षा और गरिमा को ध्यान में रखते हुए हवाई अड्डे से लेकर उनके गंतव्य तक कड़े प्रोटोकॉल और विशेष सुरक्षा घेरे के इंतजाम किए गए थे।
महाबोधि मंदिर में आस्था और श्रद्धा का संगम
हवाई अड्डे से निकलने के बाद राष्ट्रपति तो लाम का काफिला सड़क मार्ग से सीधे विश्व प्रसिद्ध बोधगया पहुंचा, जहां उन्होंने ऐतिहासिक महाबोधि मंदिर के दर्शन किए। भगवान बुद्ध की तपोस्थली पर पहुंचकर उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और कुछ समय तक मंदिर परिसर में ध्यान लगाकर शांति का अनुभव किया। वियतनाम के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ आए राष्ट्रपति ने इस दौरान बौद्ध परंपराओं के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की और बोधगया के धार्मिक महत्व को वैश्विक शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और प्रशासनिक मुस्तैदी
विदेशी मेहमान के इस महत्वपूर्ण दौरे को देखते हुए गया जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से सतर्क रहीं। हवाई अड्डे से लेकर मंदिर परिसर तक के पूरे मार्ग पर भारी संख्या में पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई थी ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो सके। राष्ट्रपति के भ्रमण के दौरान मंदिर में आने वाले अन्य श्रद्धालुओं की भी सघन जांच की गई और शहर की सफाई व्यवस्था से लेकर यातायात प्रबंधन तक को विशेष रूप से दुरुस्त किया गया था ताकि विदेशी डेलीगेट को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
भारत और वियतनाम के बीच प्रगाढ़ होंगे सांस्कृतिक संबंध
इस ऐतिहासिक दौरे को लेकर बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे दोनों देशों के बीच मित्रता का नया अध्याय बताया। राजनीतिक गलियारों में इस यात्रा को भारत और वियतनाम के बीच न केवल कूटनीतिक बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक रिश्तों को और अधिक मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के उच्चस्तरीय दौरों से बोधगया जैसे वैश्विक पर्यटन केंद्रों की साख बढ़ती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपसी सौहार्द का संदेश जाता है।
अपहरण केस में जा रही टीम पर टूटा कहर, 4 पुलिसकर्मी और वादी की जान गई
5 May, 2026 12:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उरई: जालौन जिले की उरई कोतवाली पुलिस के लिए मंगलवार की सुबह एक अत्यंत दुखद खबर लेकर आई, जब अपहरण के एक मामले में आरोपियों की तलाश करने हरियाणा गई पुलिस टीम वहां एक भीषण सड़क दुर्घटना का ग्रास बन गई। हरियाणा के नूंह जनपद अंतर्गत तावड़ू सदर थाना क्षेत्र में हुए इस दर्दनाक हादसे में उत्तर प्रदेश पुलिस के चार जांबाज जवानों और मामले के एक वादी की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। इस हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे और पीड़ित परिवारों में कोहराम मच गया है और चारों ओर शोक की लहर व्याप्त है।
दबिश के दौरान हुआ जानलेवा सड़क हादसा
उरई कोतवाली में पंजीकृत अपहरण के एक मुकदमे की जांच और अपहृत व्यक्ति की सकुशल बरामदगी के लिए पुलिस की यह विशेष टीम हरियाणा रवाना हुई थी। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे जब टीम तावड़ू क्षेत्र में आरोपियों के ठिकानों की ओर बढ़ रही थी, तभी उनकी गाड़ी एक अन्य वाहन को ओवरटेक करने के प्रयास में अनियंत्रित होकर सामने से आ रहे वाहन से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि पुलिस वाहन के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार उपनिरीक्षक सत्यभान सिंह, उपनिरीक्षक मोहित कुमार यादव, आरक्षी प्रदीप कुमार और आरक्षी अशोक कुमार सहित पंजाब निवासी वादी अमरीक सिंह की मौके पर ही सांसें थम गईं।
क्षतिग्रस्त वाहन से रेस्क्यू और प्रशासनिक कार्यवाही
दुर्घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वाहन में फंसे शवों को बाहर निकालने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। सूचना पाकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों का जायजा लेते हुए सभी मृतकों के पार्थिव शरीरों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीदों और पुलिस की प्राथमिक जांच के अनुसार, तेज रफ्तार के बीच वाहन पर से नियंत्रण खोना ही इस विनाशकारी हादसे का मुख्य कारण बनकर उभरा है, जिसने पांच परिवारों की खुशियां छीन लीं।
शोक संतप्त पुलिस विभाग और सुरक्षा व्यवस्था की जांच
इस बड़ी क्षति के बाद उरई कोतवाली सहित पूरे जनपद के पुलिस बल में मातम छाया हुआ है और अधिकारियों ने शहीद हुए पुलिसकर्मियों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। क्षतिग्रस्त वाहन को मार्ग से हटाकर यातायात को सुचारू कर दिया गया है, जबकि हरियाणा और उत्तर प्रदेश की पुलिस समन्वय स्थापित कर मामले की गहनता से जांच कर रही हैं। यह घटना कर्तव्य पथ पर तैनात पुलिसकर्मियों के जोखिमों को रेखांकित करती है, जहां अपराधियों को पकड़ने के मिशन पर निकले ये जांबाज अपनी मंजिल तक पहुंचने से पहले ही काल के गाल में समा गए।
ब्रिटेन की राजनीति में नई हलचल, पीएम स्टार्मर की कुर्सी पर खतरा?
पति की हत्या के मामले में महिला दोषी करार, अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा
भीषण गर्मी में आग का तांडव: वडोदरा में कार जलकर खाक
Mamata Banerjee Case: बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 48 घंटे का समय दिया
कारोबारी दुनिया में हलचल, सात जगहों पर जांच एजेंसी की दबिश
हाईकोर्ट में राजनीतिक उथल-पुथल, संजय पाठक की मौजूदगी में सुनवाई स्थगित
चार मंत्रियों को अहम विभाग देकर असम सरकार ने किया बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
जबलपुर EOW टीम का एक्शन, SDM कार्यालय का कर्मचारी गिरफ्तार
महिला सहायता योजना पर तमिलनाडु की राजनीति गरमाई, स्टालिन ने उठाए सवाल
