उत्तर प्रदेश
क्या मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कड़ी था पीएमसीएच छात्र?
23 Jun, 2026 12:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। नीट (NEET) परीक्षा में सॉल्वर गैंग की सेंधमारी की जांच के बीच एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) के 47 एमबीबीएस और पीजी छात्र नीट पुनर्परीक्षा वाले दिन कॉलेज से नदारद पाए गए। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के कड़े निर्देशों के बावजूद, जिसमें छात्रों की शत-प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य की गई थी, इतनी बड़ी संख्या में छात्रों का गायब होना कॉलेज प्रशासन के गले नहीं उतर रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से 37 छात्रों ने छुट्टी के लिए कोई सूचना भी नहीं दी थी।
24 घंटे में मांगा जवाब, होगी सख्त कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीएमसीएच प्रशासन ने तुरंत एक्शन लिया है। कॉलेज प्रबंधन ने इन सभी गायब छात्रों की गतिविधियों और अनुपस्थिति के कारणों की बारीकी से जांच शुरू कर दी है। सभी संबंधित छात्रों को अल्टीमेटम देते हुए 24 घंटे के भीतर अपनी गैर-हाजिरी का पुख्ता कारण और दस्तावेज जमा करने का आदेश दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि अगर तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो बिना जानकारी गायब रहने वाले छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गिरफ्तार छात्र को लेकर बड़ा खुलासा, बायोमेट्रिक में की थी हेराफेरी
इस बीच, लखीसराय से गिरफ्तार किए गए पीएमसीएच के छात्र को लेकर भी स्थिति साफ हुई है। जांच में सामने आया है कि उसका नाम मयंक कश्यप नहीं, बल्कि अश्विनी कुमार है। आरोप है कि उसने कॉलेज के अटेंडेंस रजिस्टर और बायोमेट्रिक सिस्टम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए अपने एक दोस्त की मदद ली थी, ताकि रिकॉर्ड में वह प्रेजेंट दिखे। जबकि असलियत में वह परीक्षा से जुड़े संदिग्ध कामों के लिए लखीसराय पहुंच गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अश्विनी इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड सम्राट का बेहद करीबी है और पटना में लगातार उसके संपर्क में था।
कौन है मास्टरमाइंड सम्राट और क्या थी उसकी साजिश?
इस पूरे सॉल्वर गैंग का मुख्य आरोपी रविशंकर उर्फ सम्राट बताया जा रहा है, जो नालंदा के भगवान महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में एमबीबीएस फोर्थ ईयर का छात्र है। सम्राट फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है। शुरुआती जांच के अनुसार, सम्राट ने ही लखीसराय के तीन परीक्षा केंद्रों पर असली अभ्यर्थियों की जगह 9 मेडिकल छात्रों को बैठाकर परीक्षा दिलाने का पूरा ताना-बाना बुना था। मामले की कड़ियों को देखते हुए अब इसकी जांच बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को सौंप दी गई है, जो इस गिरोह के बैंक खातों, पैसों के लेन-देन और नेटवर्क की जांच कर रही है।
6 राज्यों तक फैले हैं तार, अब तक 30 आरोपी गिरफ्तार
21 जून को देशभर में आयोजित हुई नीट पुनर्परीक्षा में कड़े सुरक्षा इंतजामों के बावजूद इस गैंग ने एक बड़ी साजिश रची थी, जिसे पुलिस ने नाकाम कर दिया। जांच में खुलासा हुआ है कि इस सॉल्वर गैंग का नेटवर्क सिर्फ बिहार (गया, पटना, लखीसराय) तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल से भी जुड़े हैं। इन राज्यों के मेडिकल कॉलेजों के छात्र इस गैंग का हिस्सा थे, जो बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारियों की मिलीभगत से असली कैंडिडेट की जगह परीक्षा में बैठने वाले थे। इस फर्जीवाड़े के लिए प्रति अभ्यर्थी 38 से 40 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। बिहार पुलिस इस मामले में अब तक 30 लोगों को दबोच चुकी है।
लखनऊ अग्निकांड की तह तक जाएगी जांच, फोरेंसिक टीम ने संभाला मोर्चा
23 Jun, 2026 12:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज पुरनिया इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद शासन और प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। इस दर्दनाक हादसे की जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीमों ने मंगलवार सुबह घटनास्थल का मुआयना किया। फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य और सबूत जुटाने के लिए पूरी तीन मंजिला इमारत को कड़े पहरे के बीच सील कर दिया है। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजहों की अभी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है, लेकिन शुरुआती तकनीकी जांच में यही सामने आया है कि पहली मंजिल के वेयरहाउस में पहले शॉर्ट सर्किट हुआ और फिर एसी (एयर कंडीशनर) का कंप्रेसर फटने से आग ने विकराल रूप धारण कर लिया।
मुख्यमंत्री की हाई-लेवल मीटिंग के बाद 4 अफसर निलंबित, 7 दिन में मांगी रिपोर्ट
हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात लखनऊ में एक उच्च स्तरीय आपातकालीन बैठक बुलाई। सीएम ने इस लापरवाही के जिम्मेदार दोषियों को कड़ा सबक सिखाने के लिए तत्काल एसआईटी (SIT) के गठन का हुक्म दिया। इस विशेष जांच दल में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ के एडीजी जोन प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है, जो अगले 7 दिनों में अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेंगे।
प्रथम दृष्ट्या घोर लापरवाही बरतने के आरोप में मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। गाज गिरने वाले अफसरों में शामिल हैं:
गौरव कुमार (अधिशासी अभियंता - एक्सईएन कलेक्शन, बिजली विभाग, जानकीपुरम)
कमलेंद्र कुमार सिंह (फायर स्टेशन सेकंड ऑफिसर - एफएसएसओ, फायर विभाग, इंदिरा नगर)
अनिल कुमार (सहायक अभियंता - एई, लखनऊ विकास प्राधिकरण)
प्रमोद पांडे (अवर अभियंता - जेई, लखनऊ विकास प्राधिकरण)
इसके अलावा, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने भी अपने स्तर पर एक पांच सदस्यीय आंतरिक जांच समिति बनाई है। माना जा रहा है कि इस समिति की रिपोर्ट आने के बाद कुछ और बड़े अधिकारियों पर निलंबन और विभागीय कार्रवाई की गाज गिर सकती है।
बिल्डिंग मालिक और संचालक समेत 4 नामजद आरोपी गिरफ्तार, 2 फरार
प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ पुलिसिया कार्रवाई भी बेहद तेजी से आगे बढ़ रही है। पुरनिया पुलिस चौकी के प्रभारी शुभम तिवारी की लिखित शिकायत (तहरीर) पर अलीगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं और उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धारा 6/10 के तहत 6 नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।
सोमवार देर रात पुलिस की विशेष टीमों ने छापेमारी कर 4 मुख्य आरोपियों को दबोच लिया, जिनमें शामिल हैं:
वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (मदेयगंज निवासी, बहुमंजिला इमारत का मुख्य मालिक)
रामकृष्ण उपाध्याय (अलीगंज निवासी, ग्राउंड फ्लोर पर संचालित पेट शॉप का संचालक)
तूशॉक कृष्णा जायसवाल (बालागंज निवासी, अवैध रूप से चल रहे थ्री-डी एनीमेशन सेंटर का संचालक)
सुरेश कुमार शाहू (केशवनगर निवासी, पहली मंजिल पर स्थित वेयरहाउस का किरायेदार)
इस मामले में नामजद दो अन्य आरोपी धीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला फिलहाल फरार चल रहे हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) बबलू कुमार के मुताबिक, इस घटना में शामिल अन्य संदिग्धों और बैक-एंड पर मदद करने वाले लोगों की भूमिका की भी बारिकी से पड़ताल की जा रही है।
भीषण आग की चपेट में आने से 15 मासूमों ने गंवाई जान
उल्लेखनीय है कि सोमवार दोपहर करीब ढाई बजे अलीगंज के पुरनिया स्थित इस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में अचानक आग लग गई थी। ग्राउंड फ्लोर पर पालतू जानवरों की दुकान थी और पहली मंजिल पर उसका गोदाम था, जहां से आग भड़की। ऊपरी मंजिलों यानी दूसरी और तीसरी मंजिल पर एक एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर, गेमिंग जोन और 12वीं तक के बच्चों का कोचिंग सेंटर चल रहा था।
आग इतनी तेजी से फैली कि ऊपर पढ़ाई कर रहे छात्रों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस, दमकल विभाग और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने करीब दो घंटे तक चले कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद 15 छात्रों के झुलसे हुए शव बाहर निकाले। जान बचाने के लिए खिड़की से नीचे कूदे 9 छात्र गंभीर रूप से चोटिल हैं, जबकि कई अन्य झुलसे हुए बच्चों का इलाज अस्पताल के आईसीयू में चल रहा है, जहां कई की हालत नाजुक बनी हुई है।
बिना कॉलेज जाए मिलेगी डिग्री! आगरा विश्वविद्यालय शुरू करेगा ऑनलाइन पढ़ाई
23 Jun, 2026 11:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आगरा। यदि आप वर्तमान में कहीं नौकरी कर रहे हैं या किसी व्यवसाय से जुड़े हैं और अपने करियर को नई ऊंचाई देने के लिए घर बैठे मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) या मास्टर ऑफ सोशल वर्क (MSW) जैसी उच्च डिग्रियां हासिल करना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (DBRAU) ने विद्यार्थियों और कामकाजी प्रोफेशनल्स की सुविधा के लिए 9 महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों को पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने की एक विशेष कार्ययोजना तैयार की है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इसका विस्तृत प्रस्ताव नई दिल्ली स्थित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को भेजा जा चुका है। यूजीसी से अंतिम हरी झंडी मिलते ही इन सभी 9 कोर्सों में ऑनलाइन दाखिले और पढ़ाई की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
समय की कमी के कारण पढ़ाई छोड़ने वालों को मिलेगा दूसरा मौका
अक्सर देखा जाता है कि बहुत से युवा और कामकाजी लोग अपनी उच्च शिक्षा पूरी करना चाहते हैं और कोई बड़ी डिग्री हासिल करने की इच्छा रखते हैं, लेकिन अपनी नौकरी, पारिवारिक जिम्मेदारियों या व्यापारिक व्यस्तताओं के चलते वे नियमित रूप से कॉलेज या संस्थान नहीं जा पाते। समय के इसी अभाव को देखते हुए विश्वविद्यालय ने डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने का फैसला किया है। विवि द्वारा पहले चरण में जिन 9 मुख्य कोर्सों को ऑनलाइन मोड में बदलने की तैयारी की गई है, उनकी सूची इस प्रकार है:
अंडरग्रेजुएट (UG) कोर्स: बीकॉम (B.Com), बीबीए (BBA), और बीसीए (BCA)
पोस्टग्रेजुएट (PG) कोर्स: एमकॉम (M.Com), एमबीए (MBA), एमसीए (MCA), एमएसडब्ल्यू (MSW), समाजशास्त्र (एमए सोशियोलॉजी) और एमबीए इन ट्रैवल एंड टूरिज्म मैनेजमेंट।
अगले महीने तक यूजीसी से मंजूरी मिलने की उम्मीद, इसी सत्र से शुरू होगी पढ़ाई
विश्वविद्यालय के अधिकारियों और प्रबंधन को पूरी उम्मीद है कि इन सभी पाठ्यक्रमों को इसी चालू शैक्षणिक वर्ष से ही ऑनलाइन मोड में शुरू कर दिया जाएगा। 'सेंटर फॉर डिस्टेंस लर्निंग एंड ऑनलाइन एजुकेशन' के निदेशक डॉ. शरद कुमार उपाध्याय ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रथम चरण के अंतर्गत इन 9 विशिष्ट पाठ्यक्रमों को ऑनलाइन चलाने की वैधानिक अनुमति यूजीसी से मांगी गई है।
प्रशासनिक स्तर पर चल रही तैयारियों को देखते हुए संभावना है कि अगले माह तक आयोग से इसकी आधिकारिक स्वीकृति प्राप्त हो जाएगी। गौरतलब है कि ये सभी 9 कोर्स वर्तमान में विवि के मुख्य परिसर (आवासीय संस्थानों) में नियमित रूप से सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं।
यूजीसी की हरी झंडी के बाद तय होंगी सीटें और फीस का ढांचा
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के लिए कुल कितनी सीटें निर्धारित की जाएंगी और इनका फीस स्ट्रक्चर (शुल्क) क्या होगा, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि, शुरुआत में व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए विश्वविद्यालय अपने अनुभवी और पुराने एसोसिएट प्रोफेसरों व शिक्षकों के माध्यम से ही ऑनलाइन कक्षाएं और व्याख्यान आयोजित करवाएगा।
इसके बाद, छात्र-संख्या और आवश्यकता के आधार पर नए गेस्ट फैकल्टी या विशेष ऑनलाइन ट्यूटर्स की तैनाती पर विचार किया जाएगा। यूजीसी से औपचारिक गाइडलाइन और अनुमति पत्र मिलने के तत्काल बाद विवि की अकादमिक काउंसिल सीटों की संख्या और फीस का पूरा मानक तय कर वेबसाइट पर सार्वजनिक कर देगी।
UP में कुख्यात ललन सिंह का अंत, 700 किमी दूर से आई टीम ने किया एनकाउंटर
23 Jun, 2026 11:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के सरसावा थाना क्षेत्र में सोमवार तड़के लखनऊ से आई स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़ी मुठभेड़ में ₹1.25 लाख के इनामी कुख्यात अपराधी ललन सिंह को मार गिराया। इस हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर ने एक बार फिर स्थानीय जिला पुलिस की खुफिया कार्यप्रणाली और मुखबिर तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 700 किलोमीटर दूर राजधानी लखनऊ से पहुंची एसटीएफ की टीम ने इस बेहद गोपनीय ऑपरेशन को अपने स्तर पर अंजाम दिया, जबकि स्थानीय सरसावा पुलिस को इसकी कानोंकान भनक तक नहीं लगी। जब मुठभेड़ लगभग खत्म हो चुकी थी, तब जाकर स्थानीय पुलिस को मामले की जानकारी हुई।
तड़के 3 बजे सरसावा-नकुड़ मार्ग पर गूंजी गोलियां
यूपी एसटीएफ को खुफिया जानकारी मिली थी कि साल 2022 में बिहार के पटना में पुलिस हिरासत से अपने दो भाइयों के साथ फरार हुआ कुख्यात अपराधी ललन सिंह अपने एक साथी के साथ सहारनपुर में किसी बड़ी डकैती या जघन्य वारदात को अंजाम देने की फिराक में घूम रहा है। इस इनपुट के आधार पर सोमवार तड़के करीब तीन बजे एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक लाल प्रताप सिंह के नेतृत्व में निरीक्षक अंजनी कुमार पांडेय, आदित्य कुमार सिंह और उप निरीक्षक मनोज कुमार की विशेष टीम ने सरसावा-नकुड़ रोड पर नाकेबंदी कर वाहनों की चेकिंग शुरू की।
इसी दौरान एक मोटरसाइकिल पर सवार दो संदिग्धों को जब एसटीएफ ने रुकने का इशारा किया, तो उन्होंने पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। एसटीएफ की जवाबी आत्मरक्षार्थ फायरिंग में ₹1.25 लाख का इनामी बदमाश ललन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि उसका दूसरा साथी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से भागने में सफल रहा। घायल बदमाश को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस भीषण गोलीबारी के दौरान बदमाशों की गोलियां अपर पुलिस अधीक्षक लाल प्रताप सिंह और निरीक्षक आदित्य कुमार सिंह की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी लगीं, जिससे वे बाल-बाल बच गए।
दरोगा की हत्या और बैंक डकैती समेत दर्ज थे कई संगीन मामले
एसटीएफ के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, मारा गया बदमाश ललन सिंह मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के आनंदगोलवा गांव का रहने वाला था। वह अपने भाइयों मनीश सिंह और रजनीश सिंह के साथ मिलकर एक अत्यंत क्रूर अंतर्राज्यीय गैंग चलाता था। उसके खिलाफ बिहार और उत्तर प्रदेश में 7 लोगों की हत्या, बैंक डकैती, कैश वैन से लूटपाट और सुरक्षाकर्मियों से सरकारी हथियार छीनने जैसे दर्जनों जघन्य मामले दर्ज थे।
ललन सिंह ने वाराणसी में एक उपनिरीक्षक (दरोगा) अजय यादव को गोली मारकर उनकी सर्विस पिस्टल लूटी थी। इसके अलावा वह पटना और नालंदा में दो अन्य पुलिस अधिकारियों की हत्या व हथियारों की लूट में भी नामजद था। वर्ष 2022 में वह पटना में न्यायिक हिरासत से भाग गया था, जिसके बाद वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने उस पर ₹1 लाख और चंदौली पुलिस अधीक्षक ने ₹25 हजार का नगद इनाम घोषित किया था। उसके दो भाई पहले ही अलग-अलग एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं।
स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे हैं ये 3 बड़े सवाल
इस सफल मुठभेड़ के बाद सहारनपुर के स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों में यह दूसरी बड़ी घटना है जब लखनऊ एसटीएफ ने स्थानीय पुलिस को बिना बताए जिले में घुसकर किसी बड़े अपराधी का काम तमाम किया है। इससे पहले 20 दिसंबर को भी एसटीएफ ने गंगोह क्षेत्र में ₹1 लाख के इनामी बदमाश सिराज को ढेर किया था। इस घटनाक्रम से निम्नलिखित गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
पहला सवाल: बिहार का इतना बड़ा और कुख्यात अपराधी समस्तीपुर से चलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में आकर छिप जाता है या रेकी करता है, इसकी खबर लखनऊ में बैठी एसटीएफ को मिल जाती है, लेकिन स्थानीय पुलिस और खुफिया विभाग (एलआईयू) को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगती?
दूसरा सवाल: ललन सिंह के साथ मौके से फरार हुआ उसका दूसरा साथी कौन है? क्या वह स्थानीय स्तर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कोई अपराधी है जो बिहार के इस गैंग को पनाह और रसद मुहैया करा रहा था?
तीसरा सवाल: पिछले छह महीनों के भीतर सुल्तानपुर के सिराज, इमरान, शहजाद, अहसान और अब बिहार के ललन सिंह के एनकाउंटर से क्या यह साबित होता है कि सहारनपुर और आसपास के इलाके अब पूर्वांचल तथा बिहार के खूंखार गैंग्स की नई शरणस्थली या कार्यक्षेत्र बनते जा रहे हैं?
फिलहाल, एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें फरार बदमाश की तलाश में जंगलों और संभावित ठिकानों पर लगातार कॉम्बिंग व छापेमारी कर रही हैं। मारे गए बदमाश के शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखवाकर बिहार में उसके परिजनों को सूचना भेज दी गई है।
लखनऊ अग्निकांड: मौत से लड़ते बच्चों की मार्मिक कहानियां आईं सामने
23 Jun, 2026 11:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज पुरनिया इलाके में सोमवार दोपहर हुए भीषण अग्निकांड ने न केवल 15 मासूम छात्रों की जिंदगी छीन ली, बल्कि पीछे छोड़ गया है रूह कंपा देने वाले मंजर और अपनों को खोने का कभी न खत्म होने वाला दर्द। शॉर्ट सर्किट और एसी कंप्रेसर फटने से लगी इस आग ने चंद मिनटों में पूरी तीन मंजिला इमारत को श्मशान बना दिया। ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप और पहली मंजिल पर उसके वेयरहाउस में लगी आग जब दूसरी और तीसरी मंजिल पर चल रहे थ्री-डी एनीमेशन सेंटर और कोचिंग इंस्टिट्यूट तक पहुंची, तो वहां मौजूद बच्चों के पास भागने का कोई रास्ता नहीं था। इस भयावह हादसे के दौरान अंदर फंसे छात्रों की आपबीती और चश्मदीदों के बयान किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी हैं।
"पापा शायद आज न बच पाऊं..." — जब मौत के मुंह से जयंत ने किया फोन
एनीमेशन सेंटर की पहली मंजिल की खिड़की से कूदकर अपनी जान बचाने वाले 26 वर्षीय जयंत गुप्ता इस समय अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। खिड़की से छलांग लगाने के दौरान नीचे मुख्य गेट पर लगी लोहे की नुकीली सरिया उनकी कमर में गहरे तक धंस गई। अत्यधिक खून बह जाने के कारण डॉक्टरों की टीम लगातार उन्हें रक्त चढ़ाकर बचाने का प्रयास कर रही है।
ऐशबाग स्थित एलडीए कॉलोनी के रहने वाले उनके पिता प्रदीप कुमार ने रुंधे गले से बताया, "मेरा बेटा अपने सुनहरे करियर का सपना लेकर इस सेंटर में आ रहा था, मुझे नहीं पता था कि यहां उसकी जान पर बन आएगी।" उन्होंने बताया कि हादसे के वक्त जयंत ने अंदर से फोन किया था। वह रोते और चीखते हुए बोला— 'पापा आज शायद मैं न बच पाऊं, चारों तरफ भीषण आग है और मैं फंस गया हूं।' यह सुनते ही पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। गनीमत यह रही कि जयंत को समय रहते ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया, जहां फिलहाल डॉक्टर उन्हें खतरे से बाहर बता रहे हैं।
"मेरी जान तो बच गई, पर मेरा सबसे जिगरी दोस्त 'भविष्य' चला गया"
उत्तराखंड के अल्मोड़ा का रहने वाला छात्र 'भविष्य' इस अग्निकांड की भेंट चढ़ गया। उसका सहपाठी और पक्का दोस्त पंकज इस सदमे से उबर नहीं पा रहा है और बार-बार फफक कर रो पड़ता है। उत्तराखंड से लखनऊ आकर एनीमेशन की दुनिया में कुछ बड़ा करने का सपना देखने वाले पंकज ने रोते हुए कहा, "हम दोनों ने एक साथ बैठकर अपने करियर के सपने बुने थे। हम साथ पढ़ते थे, साथ रहते थे। आज मेरी जान तो बच गई, लेकिन मेरा सबसे करीबी दोस्त हमेशा के लिए मुझसे छिन गया। हमारा वो सपना अब कभी पूरा नहीं होगा।" इस हादसे ने केवल सांसें नहीं छीनीं, बल्कि कई युवा दोस्तों के सपनों के संसार को हमेशा के लिए उजाड़ दिया।
खिड़की से जलते हुए बिजली के तारों के सहारे नीचे उतरे छात्र
गढ़वाल (उत्तराखंड) के रहने वाले छात्र शैलेंद्र ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि आग लगते ही पूरे हॉल में इस कदर जहरीला और गाढ़ा धुआं भर गया कि एक हाथ की दूरी पर भी कुछ देखना असंभव था। मुख्य दरवाजा आग की लपटों से घिर चुका था, इसलिए भागने का कोई रास्ता नहीं बचा था। जान बचाने के लिए छात्रों ने कुर्सियां फेंककर खिड़कियों के कांच के शीशे तोड़े।
शैलेंद्र ने बताया, "कोई रास्ता न देख मैं खिड़की से बाहर लटका और नीचे जा रहे बिजली के तारों को पकड़कर उतरने लगा। वे तार भी आग की गर्मी से पिघल रहे थे और जल रहे थे, जिससे मेरे दोनों हाथ बुरी तरह झुलस गए।" शैलेंद्र ने दमकल विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आग लगते ही तुरंत फोन किया गया था, लेकिन फायर ब्रिगेड की गाड़ियां करीब एक घंटे की देरी से पहुंचीं। अगर गाड़ियां समय पर आ जातीं, तो अंदर फंसे छात्रों का दम न घुटता।
गले तक आ गया धुआं, छात्रों ने सोचा 'आज जिंदगी का आखिरी दिन है'
सेंटर के छात्र आसिफ ने बताया कि दूसरी मंजिल पर हालात बिल्कुल नरक जैसे हो गए थे। गर्मी और ऑक्सीजन की कमी के कारण सांस लेना दूभर था। आसिफ ने कहा, "मैंने सोच लिया था कि आज मेरी जिंदगी का आखिरी दिन है। मेरे साथ मौजूद सिर्फ 3-4 लोग ही किसी तरह खिड़की के रास्ते बाहर आ पाए, अंदर मौजूद मेरे बाकी साथियों का अब तक कुछ पता नहीं चल सका है। मेरी आंखों के सामने कई साथी तड़प-तड़प कर शांत हो गए।"
बचाव के तरकीब भी हुए फेल: खुद को बाथरूम में किया बंद, नल खोलकर बैठे रहे
बिल्डिंग के बाहर खड़ी स्थानीय लोगों की भीड़ अंदर फंसे बच्चों को देखकर पूरी तरह बेबस थी। कुछ युवकों ने बाहर से पत्थर मारकर कांच की खिड़कियां तोड़ने की कोशिश की ताकि धुआं बाहर निकल सके, लेकिन तभी इमारत के ऊपर लगे भारी-भरकम लोहे के विज्ञापन बोर्ड (होर्डिंग्स) जलकर नीचे गिरने लगे, जिससे नीचे खड़े लोग भी पीछे हटने को मजबूर हो गए।
अंदर फंसे कुछ समझदार छात्रों ने खुद को आग और धुएं से बचाने के लिए बाथरूम के भीतर बंद कर लिया। वे लगातार नल खोलकर अपने ऊपर और फर्श पर पानी गिराते रहे ताकि आग की तपिश उन तक न पहुंचे, लेकिन जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के कारण कई छात्र वहीं अचेत हो गए।
दिल दहला देने वाली मौत: छत से कूदा युवक, पेट में आर-पार हो गई रेलिंग
हादसे का सबसे दर्दनाक और विचलित कर देने वाला नजारा तब देखने को मिला जब तीसरी मंजिल की छत पर लपटों से घिरे एक युवक ने जान बचाने की अंतिम कोशिश में नीचे छलांग लगा दी। बदकिस्मती से नीचे कूदते समय वह हवा में ही सीधे हाई-टेंशन बिजली के तारों से टकरा गया। करंट के झटके और असंतुलन के कारण वह सीधे नीचे बाउंड्री वॉल पर बनी लोहे की नुकीली रेलिंग पर जाकर गिरा। लोहे की नुकीली रॉड उसके पेट में पूरी तरह धंस गई। स्थानीय लोगों ने लोहे की जाली को काटकर लहूलुहान युवक को किसी तरह बाहर निकाला और अस्पताल भिजवाया, लेकिन अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव के कारण डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
अग्निकांड की इस विभीषिका ने पूरे लखनऊ शहर को झकझोर कर रख दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर घटना की मजिस्ट्रेट जांच शुरू कर दी गई है और अवैध रूप से बिना फायर एनओसी के चल रहे इस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के मालिकों व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
रात में सांप के काटने से बच्ची घायल, परिजनों में चीख-पुकार
23 Jun, 2026 11:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गोपालगंज। जिले के भोरे थाना इलाके के छठियाव गांव से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहाँ रात में सो रही एक 17 साल की लड़की की सांप के काटने से जान चली गई। तबियत बिगड़ने पर घरवाले उसे आनन-फानन में कई अस्पतालों में लेकर भटके, लेकिन आखिरकार पटना के पीएमसीएच पहुँचने से ठीक पहले रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। मृत किशोरी की पहचान रामपुकार राम की बेटी गायत्री कुमारी के रूप में हुई है। इस हादसे के बाद से पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गाँव में सन्नाटा पसरा हुआ है।
चारपाई पर सोते समय सांप ने काटा
पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, गायत्री रोजाना की तरह रात को अपने घर में चौकी पर सोई हुई थी। इसी बीच एक विषैले सांप ने उसकी गर्दन पर डस लिया। जहर फैलने की वजह से कुछ ही देर में लड़की की हालत बिगड़ने लगी और वह बेहोश हो गई। जैसे ही घरवालों को इस बात का पता चला, घर में चीख-पुकार मच गई और वे तुरंत उसे लेकर अस्पताल की तरफ भागे।
एक से दूसरे अस्पताल रेफर करते रहे डॉक्टर्स
बेहद नाजुक हालत में परिजन सबसे पहले गायत्री को स्थानीय भोरे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लेकर गए। वहाँ के डॉक्टरों ने शुरुआती इलाज तो किया, लेकिन हालत गंभीर देखते हुए उसे सदर अस्पताल भेज दिया। सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने भी काफी कोशिश की, पर स्थिति में सुधार न होता देख उसे बेहतर इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (PMCH) रेफर कर दिया गया।
पटना पहुंचने से पहले ही थम गईं सांसें
परिजन एम्बुलेंस से गायत्री को लेकर पटना के लिए निकले ही थे कि रास्ते में उसकी तबीयत और ज्यादा बिगड़ गई। अस्पताल की दहलीज तक पहुँचने से पहले ही रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। पीएमसीएच के डॉक्टरों ने जाँच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। बेटी की मौत की खबर सुनते ही माता-पिता और परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
गाँव वालों ने की पुख्ता इलाज और एंटी-वेनम की मांग
इस दर्दनाक हादसे से गुस्साए और दुखी ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से ग्रामीण इलाकों में सांप के काटने के इलाज (एंटी-स्नेक वेनम) और इमरजेंसी मेडिकल सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर स्थानीय अस्पतालों में ही समय पर सही इलाज मिल जाए, तो ऐसी असमय मौतों को रोका जा सकता है।
फैक्ट्री में लगी भीषण आग, भारी नुकसान की आशंका
23 Jun, 2026 09:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुजफ्फरपुर। जिला अंतर्गत बेला इंडस्ट्रियल एरिया में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक चालू फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि पूरी फैक्ट्री इसकी जद में आ गई। इस दर्दनाक हादसे में कारखाने के भीतर रखीं कीमती मशीनें और लाखों रुपये का कच्चा व तैयार माल जलकर पूरी तरह बर्बाद हो गया। गनीमत यह रही कि इस दुर्घटना में किसी भी व्यक्ति की जान नहीं गई।
धुएं का गुबार देख मची अफरा-तफरी
मिली जानकारी के मुताबिक, बेला इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में संचालित 'श्री कृष्णा फैक्ट्री' से अचानक धुएं की मोटी परत उठती दिखाई दी। पल भर में ही आग की ऊंची लपटों ने पूरे परिसर को घेर लिया। कारखाने से उठती आग की लपटें देखकर वहां काम कर रहे श्रमिकों और स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लोग तुरंत फैक्ट्री परिसर से बाहर की ओर भागे।
शॉर्ट सर्किट की वजह से हादसे की आशंका
शुरुआती तौर पर कयास लगाए जा रहे हैं कि यह हादसा बिजली के शॉर्ट सर्किट की वजह से हुआ है। हालांकि, प्रशासन द्वारा आग लगने के सटीक कारणों की पड़ताल की जा रही है। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर मौजूद सामान या मशीनों को बाहर निकालने का मौका ही नहीं मिला।
दमकल की गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद बुझाई आग
हादसे की खबर मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम तुरंत एक्शन में आई। आग के रौद्र रूप को देखते हुए फायर स्टेशन से दो बड़ी दमकल गाड़ियों को फौरन मौके पर रवाना किया गया। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत और घंटों की भारी जद्दोजहद के बाद आखिरकार आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया।
कोई जनहानि नहीं, नुकसान का आकलन जारी
अग्निशमन विभाग के अफसरों ने पुष्टि की है कि समय रहते रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू होने के कारण एक बड़ा हादसा टल गया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। फिलहाल विभाग और फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से हुए कुल नुकसान का सटीक आकलन किया जा रहा है, और मामले की गहराई से जांच जारी है।
कोचिंग सेंटर बना मौत का जाल, अग्निशमन इंतजामों पर उठे बड़े सवाल
23 Jun, 2026 08:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को एक बहुमंजिला इमारत में स्थित कोचिंग सेंटर और गेमिंग जोन में भीषण आग लग गई। इस हृदयविदारक हादसे में कोचिंग पढ़ने और एनीमेशन का कोर्स करने वाले 15 निर्दोष छात्रों की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य छात्र गंभीर रूप से झुलस गए। जान बचाने के लिए इमारत की ऊपरी मंजिलों से नीचे कूदे 9 छात्र भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस दर्दनाक हादसे की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना अलीगढ़ का दौरा बीच में ही छोड़कर तुरंत वापस लौटे और सीधे घटनास्थल का मुआयना किया। वहीं, रक्षा मंत्री और स्थानीय सांसद राजनाथ सिंह भी दिल्ली से तुरंत रवाना हो गए हैं। प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट और एसी (एयर कंडीशनर) का कंप्रेसर फटने को आग लगने की मुख्य वजह माना जा रहा है।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
यह पूरी घटना अलीगंज के पुरनिया इलाके की है। यहां स्थित एक तीन मंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर (भूतल) पर एक पेट शॉप (पालतू जानवरों की दुकान) संचालित है। इसके ठीक ऊपर यानी पहली मंजिल पर पेट शॉप के मालिक का बड़ा वेयरहाउस (गोदाम) बना हुआ है। वहीं, इमारत की दूसरी मंजिल पर एक थ्री-डी एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर, गेमिंग जोन और साथ ही 12वीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं का कोचिंग सेंटर चलता था।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, दोपहर करीब ढाई बजे पहली मंजिल पर स्थित वेयरहाउस में अचानक चिंगारी भड़की और आग लग गई। वेयरहाउस में रखे सामान की वजह से आग ने चंद मिनटों में ही बेहद विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया।
भीतर ही फंसे रह गए मासूम छात्र, खिड़कियों से लगाई जान की भीख
देखते ही देखते आग की लपटें और जहरीला काला धुआं दूसरी व तीसरी मंजिल तक पहुंच गया, जिसके कारण वहां मौजूद छात्र और अन्य लोग भीतर ही बंधक बनकर रह गए। बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाने के कारण चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें मौके पर पहुंचीं और संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। हालांकि, जब तक दमकल कर्मी छात्रों तक पहुंच पाते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। करीब दो घंटे से अधिक समय तक चले भारी राहत कार्य के बाद मलबे से 15 छात्रों के शव बाहर निकाले गए। अस्पताल में भर्ती कई झुलसे हुए छात्रों की हालत अब भी बेहद नाजुक बनी हुई है।
दीवार तोड़ने में बीता कीमती समय, दमकल विभाग के दावों की खुली पोल
इस भयावह हादसे ने आपदा प्रबंधन और अग्निशमन विभाग के मुस्तैदी के दावों की पूरी तरह हवा निकाल दी है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के दौरान हर एक सेकंड बेहद कीमती था, लेकिन इमारत में फंसे बच्चों को बाहर निकालने के लिए दमकल कर्मी काफी देर तक साधारण हथौड़ों से कंक्रीट की मजबूत दीवार को तोड़ने की नाकाम कोशिश करते रहे।
यदि अग्निशमन विभाग के पास आधुनिक हैमर ड्रिल मशीन जैसी बुनियादी व्यवस्था मौके पर होती, तो दीवार को कुछ ही मिनटों में ढहाकर कई मासूमों की जान बचाई जा सकती थी। इसके अलावा, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि आग लगने की सूचना देने के काफी देर बाद दमकल की गाड़ियां घटना स्थल पर पहुंचीं, जिससे स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई।
मुख्यमंत्री के निर्देशों को विभाग ने किया हवा में गायब
गौरतलब है कि ठीक 15 दिन पहले दिल्ली के एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड के तत्काल बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग को अत्याधुनिक 'स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप' (एसआरजी) का गठन करने के कड़े निर्देश दिए थे। पहले चरण में लखनऊ सहित 15 प्रमुख जिलों में इस बल को तैनात करने की योजना कागजों पर तैयार भी की गई थी, लेकिन अलीगंज की इस घटना ने जमीनी हकीकत उजागर कर दी है।
सीएम ने पहले ही हिदायत दी थी कि दमकल विभाग का काम अब सिर्फ आग बुझाना नहीं, बल्कि बहुमंजिला इमारतों (हाईराइज बिल्डिंग्स) में जीवन और निवेश की सुरक्षा करना भी है। उन्होंने विशेष रूप से नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे महानगरों में बढ़ रही गगनचुंबी इमारतों के लिए आधुनिक फायर ऑडिट और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए थे, जिसे स्थानीय स्तर पर नजरअंदाज किया गया।
दौरा छोड़ मौके पर पहुंचे सीएम योगी, आला अधिकारियों को लगाई फटकार
हादसे के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में एक महत्वपूर्ण जनसभा को संबोधित कर रहे थे। जैसे ही उन्हें इस बड़े हादसे की सूचना मिली, उन्होंने तुरंत अपना कार्यक्रम रद्द किया और लखनऊ पहुंचे। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश पर गृह प्रमुख सचिव संजय प्रसाद, डीजीपी राजीव कृष्ण, डीजी फायर सुजीत पांडेय और पुलिस आयुक्त अमरेंद्र सेंगर सहित तमाम आला प्रशासनिक अधिकारियों ने सीधे मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। मुख्यमंत्री ने इस गंभीर लापरवाही को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
बिसुनडीह गांव में युवक की मौत, पुलिस जुटी कारणों की पड़ताल में
22 Jun, 2026 12:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सरायकेला। सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिसुनडीह गांव से एक दुखद घटना सामने आई है, जहां एक 26 वर्षीय युवक ने अपने ही घर के भीतर फंदे से लटककर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मृतक की पहचान स्थानीय निवासी सुनील गोप के रूप में की गई है। घटना की भनक लगते ही मृतक के परिवार में कोहराम मच गया और आसपास के ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। परिजनों ने तुरंत इस अप्रत्याशित हादसे की लिखित जानकारी स्थानीय पुलिस प्रशासन को दी, जिसके बाद कानून व्यवस्था के अधिकारी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की छानबीन शुरू की।
पुलिस ने शव को संरक्षण में लिया और अस्पताल भेजा
वारदात की सूचना पाकर घटना स्थल पर पहुंची ईचागढ़ थाना पुलिस ने स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया और आवश्यक साक्ष्य जुटाए। पुलिस कर्मियों ने फंदे से लटक रहे शव को नीचे उतरवाया और उसे अपने संरक्षण में ले लिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कागजी औपचारिकताएं और पंचनामा भरने की प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को सोमवार की सुबह पोस्टमार्टम की कानूनी कार्रवाई के लिए सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया गया है, ताकि मौत के समय और स्थिति का सही आकलन किया जा सके।
मानसिक तनाव और अस्वस्थता बनी आत्मघाती कदम की वजह
ईचागढ़ थाना प्रभारी ने मामले के संदर्भ में प्राथमिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि शुरुआती जांच और घटनास्थल के हालातों को देखते हुए यह पूरी तरह से खुदकुशी (आत्महत्या) का मामला नजर आ रहा है। परिजनों से की गई शुरुआती पूछताछ में यह बात भी निकलकर सामने आई है कि मृतक सुनील गोप पिछले कुछ समय से गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहा था और उसका मानसिक संतुलन पूरी तरह ठीक नहीं था। संभवतः इसी मानसिक अस्वस्थता और अवसाद के चलते उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ेगी कानूनी तफ्तीश
थाना प्रभारी के मुताबिक, हालांकि शुरुआती लक्षण खुदकुशी की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन पुलिस हर संभावित बिंदु को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। मेडिकल एक्सपर्ट्स द्वारा तैयार की जाने वाली पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही मौत के असली और सटीक कारणों का आधिकारिक रूप से खुलासा हो पाएगा। पुलिस ने परिजनों और ग्रामीणों के बयान दर्ज कर लिए हैं और रिपोर्ट आने के इंतजार में आगे की वैधानिक कार्रवाई को रोक रखा है, जिसके बाद ही मामले का अंतिम निस्तारण किया जाएगा।
मंत्री-सांसद ने रखी विकास की नींव, 23 करोड़ की चार सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास
22 Jun, 2026 12:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पलामू। झारखंड के वित्त, योजना एवं विकास मंत्री राधाकृष्ण किशोर और स्थानीय सांसद विष्णु दयाल राम ने रविवार को एक संयुक्त कार्यक्रम के दौरान पलामू जिले के छतरपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए 23 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली चार बड़ी सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इस मौके पर वित्त मंत्री ने क्षेत्र की उन्नति को लेकर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति जाहिर की और कहा कि वे विकास कार्यों में किसी भी तरह की दलगत राजनीति या सियासी भेदभाव को आड़े नहीं आने देंगे। उन्होंने सुदूर ग्रामीण अंचलों की प्रगति के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच मजबूत प्रशासनिक तालमेल को बेहद जरूरी बताया। नेताओं ने यह भी रेखांकित किया कि जो इलाका कभी धुर उग्रवाद की गिरफ्त में था, वहाँ सबसे पहले सुरक्षा चौकियां स्थापित कर अमन-चैन बहाल किया गया और अब बुनियादी ढाँचे को मजबूत कर जनता के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री जन-मन योजना के तहत क्षेत्र में 100 से अधिक नई ग्रामीण सड़कों के जाल बिछाने का खाका खींचा गया है।
दशकों की जर्जरता से मुक्ति दिलाएगा सरईडीह-डगरा मार्ग
इन स्वीकृत परियोजनाओं में सबसे मुख्य और बड़ी सौगात नौडीहा बाजार प्रखंड के निवासियों को सरईडीह-डगरा पथ के रूप में मिली है। योजना एवं विकास विभाग की अनाबद्ध निधि से मंजूर की गई इस विशेष सड़क की कुल लंबाई 8.87 किलोमीटर निर्धारित की गई है, जिसके निर्माण पर सरकार करीब 9 करोड़ 76 लाख रुपये खर्च करने जा रही है। वर्तमान में इस रास्ते की हालत इतनी खस्ताहाल है कि महज 9 किलोमीटर का सफर पूरा करने में राहगीरों को दो घंटे से भी ज्यादा का समय बर्बाद करना पड़ता है। मंत्री राधाकृष्ण किशोर के विशेष प्रयासों से स्वीकृत इस मार्ग के धरातल पर उतरने के बाद हार्वे, सलैया, डागरा, अंतकाल और जमुना सहित दर्जनों गांवों की हजारों की आबादी को आवागमन की इस बड़ी समस्या से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।
उग्रवाद के खात्मे के बाद अब बुनियादी विकास की बारी
सार्वजनिक मंच से जनता को संबोधित करते हुए जनप्रतिनिधियों ने पुराने दौर को याद किया और बताया कि डगरा और उसके आस-पास का क्षेत्र कभी घोर नक्सली और उग्रवादी गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था, जहां खौफ के कारण आम नागरिकों का दिन में भी निकलना दूभर था। सरकार की नीति के तहत पहले इलाके को पूरी तरह उग्रवाद मुक्त कराया गया और अब शांति की स्थापना के बाद यहाँ तीव्र गति से सड़क, बिजली, शिक्षा और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। सांसद ने भरोसा दिलाया कि सुदूरवर्ती इलाकों का सर्वांगीण विकास उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इन सड़कों के बन जाने से आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
शिलान्यास समारोह में उमड़ा जनसैलाब और गणमान्य जनों की मौजूदगी
इस ऐतिहासिक शिलान्यास कार्यक्रम के गवाह बनने के लिए नौडीहा बाजार प्रखंड और छतरपुर क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भारी संख्या में आयोजन स्थल पर पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक और स्थानीय नेतृत्व की भी सक्रिय सहभागिता रही, जिसमें प्रखंड प्रमुख रेशम कुमारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) परितोष प्रियदर्शी और स्थानीय मुखिया विनोद सिंह प्रमुख रूप से मंच पर मौजूद रहे। उनके अलावा सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता संतोष पाठक, मोहन जायसवाल, धर्मदेव यादव, ईश्वरी पांडे और आलोक यादव ने भी इस विकास योजना का स्वागत करते हुए क्षेत्र की जनता को बधाई दी और अधिकारियों से निर्माण कार्य को समय सीमा के भीतर व उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा कराने का आग्रह किया।
रफ्तार बनी काल, ट्रक में जा घुसी कार; हादसे में एक की मौत, तीन घायल
22 Jun, 2026 12:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुजफ्फरपुर। फकुली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रजला स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोमवार की सुबह एक भीषण सड़क हादसा सामने आया है। यहाँ एक तेज रफ्तार स्विफ्ट डिजायर कार आगे चल रहे ट्रक के पिछले हिस्से में अनियंत्रित होकर जा घुसी। इस दर्दनाक भिड़ंत में कार सवार एक व्यक्ति की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि वाहन चालक सहित तीन अन्य लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा ट्रक के नीचे बुरी तरह फंस गया और वाहन के परखच्चे उड़ गए। घटना के बाद हाईवे पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
नियंत्रण खोने से ट्रक के नीचे घुसी तेज रफ्तार कार
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त कार और ट्रक दोनों मुजफ्फरपुर से पटना की तरफ जा रहे थे। जैसे ही दोनों वाहन रजला हाईवे के समीप पहुंचे, अचानक कार चालक ने गाड़ी पर से अपना नियंत्रण खो दिया, जिसके चलते कार सीधे ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराई। इस भयानक एक्सीडेंट के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग की एक लेन पूरी तरह बाधित हो गई और देखते ही देखते सड़कों पर गाड़ियों का लंबा जाम लग गया, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पुलिस ने बहाल कराया यातायात और शव को अस्पताल भेजा
सड़क दुर्घटना की भनक लगते ही स्थानीय थाना पुलिस तुरंत दलबल के साथ मौके पर पहुंची और युद्धस्तर पर राहत व बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हाईवे से हटाकर किनारे कराया, जिससे यातायात को दोबारा सामान्य किया जा सका। इसके बाद पुलिस कर्मियों ने कार में फंसे मृतक के शव को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला और उसे अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कानूनी प्रक्रिया के लिए नजदीकी मेडिकल कॉलेज अस्पताल भिजवा दिया।
वैशाली के निवासी के रूप में पहचान और घायलों का इलाज
पुलिस प्रशासन द्वारा की गई शुरुआती तफ्तीश में सामने आया है कि मृतक वैशाली जिले के सेंदुआरी गांव का रहने वाला था। हादसे में घायल हुए अन्य तीनों व्यक्तियों को इलाज के लिए पास के ही एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की देखरेख में उनका उपचार चल रहा है। स्थानीय थाना प्रभारी ने बताया कि कार और ट्रक की इस भिड़ंत में एक व्यक्ति की जान गई है। पुलिस फिलहाल परिजनों को सूचित करने के साथ ही मामले की विस्तृत जांच और अन्य जरूरी तथ्यों का सत्यापन करने में जुटी हुई है।
एक दिन से गायब युवक की नदी में मिली लाश, हत्या और आत्महत्या दोनों पहलुओं पर जांच
22 Jun, 2026 11:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
किशनगंज। कोचाधामन प्रखंड के बिशनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खकुआ नदी घाट पर रविवार की शाम एक युवक का शव बरामद होने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। मृतक की शिनाख्त बिशनपुर हाट के रहने वाले 35 वर्षीय विक्की के रूप में की गई है, जो बीते 24 घंटों से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता था। जानकारी के मुताबिक, रविवार की देर शाम नदी में एक लाश को उतराता देख घाट पर मौजूद ग्रामीणों ने शोर मचाया, जिसके बाद देखते ही देखते वहां भारी संख्या में स्थानीय लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। घटना की भनक लगते ही बिशनपुर थाना पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और स्थानीय गोताखोरों की मदद से शव को पानी से बाहर निकलवाया।
शनिवार से लापता था युवक और परिजनों ने दर्ज कराई थी शिकायत
पुलिसिया तफ्तीश और परिजनों द्वारा की गई पहचान में यह साफ हुआ कि मृतक विक्की बिशनपुर बाजार का ही निवासी था। मृतक के परिवार वालों ने पुलिस को बताया कि वह शनिवार के दिन से ही अचानक घर से गायब था। परिजनों ने अपने स्तर पर सगे-संबंधियों और संभावित ठिकानों पर उसकी काफी खोजबीन की, लेकिन जब उसका कोई अता-पता नहीं चला तो रविवार की सुबह थक-हारकर बिशनपुर थाने में उसकी गुमशुदगी की लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव और विभिन्न एंगल से जांच शुरू
बिशनपुर थाने के सब-इंस्पेक्टर (एसआई) ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि शव को नदी से बरामद करने के बाद इसकी सूचना तुरंत पीड़ित परिवार को दे दी गई थी। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। शुरुआती जांच में शरीर पर किसी स्पष्ट चोट के निशान न होने के कारण मौत की वजह साफ नहीं हो सकी है, जिसके चलते पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने के लिए मर्डर और सुसाइड दोनों ही बिंदुओं को केंद्र में रखकर साक्ष्य खंगाल रही है।
बाजार क्षेत्र में फैला तनाव और पुलिस की संयम बरतने की अपील
मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मौत के असली कारणों का अधिकारिक खुलासा हो पाएगा। इस दर्दनाक घटना के बाद से ही पूरे बिशनपुर बाजार इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग तरह-तरह की आशंकाएं व्यक्त कर रहे हैं, वहीं मृतक के घर में कोहराम मचा हुआ है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने आम जनता से किसी भी तरह की भ्रामक अफवाहों पर यकीन न करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है।
ध्वस्तीकरण के बीच आस्था और चिंता साथ-साथ, सुंदरकांड पाठ में जुटीं महिलाएं
22 Jun, 2026 11:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में आवास एवं विकास परिषद द्वारा अवैध निर्माणों के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक ध्वस्तीकरण (मलबे में तब्दील करने के) अभियान ने सेंट्रल मार्केट और उसके आस-पास के व्यापारिक अंचलों में भारी बेचैनी और हड़कंप मचा दिया है। बीते दो दिनों के भीतर प्रशासन द्वारा 30 से अधिक व्यावसायिक व आवासीय भवनों पर की गई सख्त कानूनी कार्रवाई के बाद हताश दुकानदार और मकान मालिक अब किसी बड़े नुकसान से बचने के लिए स्वयं ही अपने अनाधिकृत निर्माणों को हटाने में जुट गए हैं। दूसरी ओर, इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध कर रही स्थानीय महिलाओं ने रविवार से धरनास्थल पर सात दिवसीय सुंदरकांड पाठ की शुरुआत कर दी है और मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
अवकाश के दिन भी गर्जा सरकारी अमला, व्यापारियों में बढ़ी हलचल
शनिवार से शुरू हुई परिषद की यह बड़ी कार्रवाई रविवार को साप्ताहिक अवकाश होने के बावजूद बिना रुके जारी रही। निर्धारित सेट बैक (सड़क से तय दूरी) के लिए जगह छोड़ने और अवैध रूप से संचालित हो रही दुकानों को जमींदोज करने की इस मुहिम से समूचे व्यापारिक समुदाय में घोर चिंता और अनिश्चितता का माहौल है। दिनभर कई बड़े कारोबारी मौके पर पहुंचकर प्रशासनिक गतिविधियों का जायजा लेते रहे, वहीं राहत की उम्मीद लगाए बैठे प्रभावित लोगों की नजरें अधिकारियों और शासन के अंतिम निर्णयों पर टिकी रहीं।
इस कार्रवाई के सीधे प्रभाव के चलते कई दुकानदारों ने प्रशासनिक टीम के पहुंचने से पहले ही खुद हथौड़े उठा लिए हैं। अनेक प्रमुख स्थानों पर लोग स्वेच्छा से अपनी बाहरी दीवारें ढहा रहे हैं और भविष्य की कार्रवाई से बचने के लिए अब निर्धारित दूरी को ध्यान में रखते हुए भीतर की ओर नया निर्माण कर रहे हैं।
दिन-रात चल रहा अवैध निर्माण हटाने का काम, हटाए जा रहे शटर
आवास एवं विकास परिषद कार्यालय से क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर इस समय अजीब सा नजारा है; यहाँ मकान मालिकों ने स्वयं ही अपने अवैध निर्माणों को ढहाना शुरू कर दिया है। रात-दिन मजदूरों की मदद से ड्रिल मशीन, छेनी और भारी हथौड़ों के जरिए पक्के ढांचों को तोड़ा जा रहा है।
प्रशासनिक सख्ती को देखते हुए कई मकानों के भूतल (ग्राउंड फ्लोर) पर बनी दुकानों के लोहे के शटर रातों-रात हटाकर उनकी जगह दोबारा पक्की दीवारें, खिड़कियां और रिहायशी दरवाजे लगाए जा रहे हैं। जो व्यापारी अब तक इस अभियान को हल्के में ले रहे थे, उन्होंने भी आनन-फानन में अपनी दुकानें बंद कर कीमती सामान सुरक्षित स्थानों पर समेटना शुरू कर दिया है। कई बड़े शोरूम के सामने की शानदार बाहरी सजावट और फ्रंट एलिवेशन को भी हटा लिया गया है।
73 दिनों से जारी है धरना, पुलिस ने हटवाया तंबू तो महिलाओं ने शुरू किया सुंदरकांड
सेंट्रल मार्केट में सेट बैक छोड़ने के कड़े नियमों के विरोध में पिछले 73 दिनों से धरने पर बैठी महिलाओं का आंदोलन अब धार्मिक रूप ले चुका है। रविवार को जब पुलिस प्रशासन ने सुबह धरनास्थल पर लगाया जा रहा तंबू जबरन हटवा दिया, तो महिलाओं ने वहीं जमीन पर राम दरबार सजाकर और बजरंग बली का विशेष श्रृंगार कर घरों व आजीविका को बचाने के लिए सुंदरकांड का पाठ शुरू कर दिया। इसके साथ ही सेक्टर-3 और 4 के चौराहे के पास स्थित गोल मंदिर क्षेत्र में महिलाओं ने सामूहिक सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन कर अपना शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।
27 जून तक चलेगा धार्मिक अनुष्ठान, बड़े आंदोलन की चेतावनी
आंदोलन का नेतृत्व कर रही महिलाओं का कहना है कि वे पिछले ढाई महीने से अधिक समय से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को लेकर बैठी हैं, परंतु अब तक किसी भी स्थानीय जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी ने उनकी सुध नहीं ली और न ही कोई ठोस आश्वासन दिया है।
महिलाओं ने दोटूक शब्दों में घोषणा की है कि आगामी 27 जून तक धरनास्थल पर प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ और भजन-कीर्तन किया जाएगा। यदि इस धार्मिक अनुष्ठान की अवधि के भीतर प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक या सहानुभूतिपूर्ण निर्णय नहीं लिया गया, तो इस आंदोलन को और अधिक व्यापक व आक्रामक रूप दिया जाएगा। रविवार को अनुष्ठान की समाप्ति के बाद बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया, जहाँ सभी ने एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
बड़े भाई पर हमले से सदमे में पंकज त्रिपाठी का परिवार, गंभीर हालत में पटना रेफर
22 Jun, 2026 11:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गोपालगंज। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता पंकज त्रिपाठी के पैतृक गांव से एक बेहद दुखद और सनसनीखेज खबर सामने आई है। जिले के माधोपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बेलसंड गांव में अभिनेता के बड़े भाई बिजेंद्र नाथ तिवारी पर कुछ बदमाशों ने धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में वे बुरी तरह लहूलुहान हो गए। वारदात के तुरंत बाद परिजन उन्हें आनन-फानन में गोपालगंज सदर अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद भी उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) रेफर कर दिया। वर्तमान में उनकी स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है और वे डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं।
पुरानी दुश्मनी और आपसी रंजिश के चलते हमले की आशंका
स्थानीय सूत्रों और प्राथमिक इनपुट के अनुसार, इस खूनी वारदात के पीछे किसी पुरानी रंजिश या आपसी दुश्मनी के होने का अंदेशा जताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि गांव के ही कुछ लोगों के साथ उनका काफी समय से कोई विवाद चल रहा था, जिसके नतीजे में इस भयावह घटना को अंजाम दिया गया। हालांकि, जांच एजेंसियां जमीनी स्तर पर सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर साक्ष्य जुटा रही हैं ताकि हमले की असली वजह और इसके पीछे के किरदारों का पूरी तरह पर्दाफाश किया जा सके।
मुख्य आरोपी की पहचान और पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी
वारदात की भनक लगते ही स्थानीय थाना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गई और घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य हमलावर की पहचान स्थापित कर ली है और उसकी धरपकड़ के लिए इलाके में संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बेलसंड गांव और उसके आस-पास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है।
परिजनों के बयान दर्ज और पूरे इलाके में पसरा सन्नाटा
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों से पूछताछ कर बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही इस हिंसक घटना की वास्तविक वजह साफ हो पाएगी। दूसरी ओर, इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद से पूरे गोपालगंज जिले और अभिनेता के पैतृक गांव में गहरी चिंता और तनाव का माहौल है, जहां लोग पीड़ित के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।
21 साल पुराने सपा दफ्तर पर चला बुलडोजर, इलाके में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई
22 Jun, 2026 11:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में सोमवार को प्रशासन ने एक बड़ी और कड़ी कार्रवाई करते हुए टाउन हॉल परिसर में स्थित समाजवादी पार्टी (सपा) के जिला कार्यालय की इमारत को जमींदोज कर दिया। भारी पुलिस बल और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा घेरे के बीच घटना स्थल पर पहुंचे चार बुलडोजरों ने पूरी इमारत को ढहाकर मलबे के ढेर में बदल दिया। इस अचानक हुई बड़ी कार्रवाई के चलते पूरे इलाके में काफी समय तक अफरातफरी और गहमागहमी का माहौल बना रहा। कार्रवाई को देखने के लिए मौके पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी।
21 साल से संचालित हो रहा था दफ्तर, डीएम कोर्ट ने दिया था आदेश
प्रशासनिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल ही में जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) न्यायालय ने टाउन हॉल परिसर की इस विवादित भूमि को नियम विरुद्ध कब्जे से मुक्त कर राज्य सरकार के अधीन (निहितीकरण) करने का अंतिम आदेश जारी किया था। समाजवादी पार्टी का यह जिला कार्यालय पिछले 21 वर्षों से इसी परिसर से संचालित किया जा रहा था।
राजस्व विभाग की जांच रिपोर्ट में यह बात पूरी तरह स्पष्ट हो गई थी कि जिस भूखंड पर इस इमारत का निर्माण किया गया था, वह मूल रूप से सरकारी (नजूल) भूमि थी। इस बेशकीमती और मुख्य बाजार स्थित सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से पूरी तरह मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन द्वारा लंबे समय से वैधानिक और कानूनी प्रक्रियाएं चलाई जा रही थीं।
नोटिस के बाद भी खाली न करने पर लिया गया कड़ा एक्शन
अधिकारियों ने बताया कि इस कार्रवाई से पूर्व संबंधित पक्ष को नियमानुसार कई बार परिसर को स्वेच्छा से खाली करने के लिए आधिकारिक नोटिस और वैधानिक निर्देश जारी किए गए थे। समय सीमा समाप्त होने के बावजूद जब इमारत को खाली नहीं किया गया, तब प्रशासन ने कानून का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए भारी मशीनों और बुलडोजर का सहारा लिया। प्रशासन की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई के बाद करोड़ों रुपये मूल्य की यह सरकारी जमीन अब पूरी तरह से शासन के नियंत्रण में आ गई है। सुरक्षा के मद्देनजर इलाके में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
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