उत्तर प्रदेश
जिस बंगाल में आज सियासी जंग, वहां कभी आगरा किला से होता था शासन
5 May, 2026 11:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आगरा: वर्तमान समय में पश्चिम बंगाल के चुनावी परिणामों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है, लेकिन इतिहास के पन्नों को पलटें तो एक दौर ऐसा भी था जब बंगाल की नियति का फैसला ताजनगरी आगरा से होता था। मुगल काल के दौरान लगभग डेढ़ सौ वर्षों तक बंगाल की सत्ता की बागडोर आगरा किले के भीतर से ही संभाली जाती थी। वर्ष 1576 में जब सम्राट अकबर ने बंगाल पर विजय प्राप्त की थी, तब से लेकर औरंगजेब के शासनकाल तक इस समृद्ध प्रांत के सूबेदारों की नियुक्ति और महत्वपूर्ण प्रशासनिक आदेश आगरा किले के दीवान-ए-खास से ही जारी किए जाते थे।
मुगल साम्राज्य के लिए 'स्वर्ग' था बंगाल प्रांत
मुगल शासकों की नजर में बंगाल केवल एक साधारण भूभाग नहीं था, बल्कि वे इसे अपनी अपार धन-संपदा और सामरिक महत्व के कारण 'जन्नत-उल-बिलाद' यानी देशों का स्वर्ग कहकर पुकारते थे। अकबर द्वारा दाऊद खान कर्रानी को पराजित करने के बाद बंगाल सीधे तौर पर केंद्रीय शासन के अधीन आ गया था। इतिहासकार बताते हैं कि उस दौर में बंगाल की उर्वर भूमि और व्यापारिक मार्ग मुगलों के खजाने को भरने का मुख्य जरिया थे, यही कारण था कि वहां उठने वाले किसी भी विद्रोह को कुचलने के लिए शाही फौजें आगरा से ही कूच करती थीं और हर छोटी-बड़ी हलचल पर सीधे बादशाह की नजर रहती थी।
आगरा किले से तय होते थे सूबेदार और शाही फरमान
आगरा किले का दीवान-ए-खास वह ऐतिहासिक स्थान बना जहां से बंगाल के गवर्नर तय करने के शाही फरमान जारी होते थे। जहांगीर के काल में जहां समुद्री लुटेरों पर लगाम लगाने की रणनीति बनी, वहीं शाहजहां के समय हुगली से पुर्तगालियों को खदेड़ने का सख्त आदेश भी इसी किले की दीवारों के बीच से निकला था। राजा मान सिंह से लेकर शाइस्ता खान और शहजादा शुजा जैसे दिग्गजों ने बंगाल के सूबेदार के रूप में आगरा के प्रतिनिधि बनकर शासन किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उस समय बंगाल का पूरा प्रशासनिक ढांचा आगरा से संचालित होने वाली केंद्रीकृत व्यवस्था पर टिका हुआ था।
व्यापारिक नियंत्रण से लेकर स्वतंत्र नवाबी तक का सफर
बंगाल पर मुगलों का यह सीधा नियंत्रण वर्ष 1717 तक निरंतर चलता रहा, जब मुगल बादशाह फर्रुखसियर ने मुर्शिद कुली खान को वहां का सूबेदार नियुक्त किया था। यहीं से बंगाल के इतिहास में एक नया मोड़ आया और मुर्शिद कुली खान वहां के पहले नवाब बने, जिसके बाद धीरे-धीरे बंगाल अपनी स्वायत्तता की ओर बढ़ने लगा। पुरातत्वविदों और इतिहासकारों के अनुसार, आगरा और बंगाल के बीच का यह अटूट संबंध न केवल राजनीतिक था बल्कि व्यापारिक और सांस्कृतिक भी था, जिसने मध्यकालीन भारत की आर्थिक मजबूती में एक मील का पत्थर साबित होने वाली भूमिका निभाई थी।
लीची के पेड़ों के बीच छिपाकर रखी गई थी शराब की खेप
5 May, 2026 10:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुजफ्फरपुर: जिले में अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत उत्पाद विभाग की टीम को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में अहियापुर थाना क्षेत्र के राघोपुर स्थित एक लीची बागान से विदेशी शराब की बड़ी खेप बरामद की गई है। इस छापेमारी ने इलाके में सक्रिय पिता-पुत्र के एक बड़े शराब सिंडिकेट का पर्दाफाश कर दिया है, जो लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में धूल झोंककर तस्करी के काले कारोबार को अंजाम दे रहे थे।
लाखों की शराब के साथ तस्करी में प्रयुक्त वाहन जब्त
उत्पाद विभाग की टीम ने जब लीची के बागान में अचानक दबिश दी, तो वहां तस्करी के लिए तैयार खड़ी एक पिकअप वैन और एक कार को अपने कब्जे में लिया। इन दोनों वाहनों में भारी मात्रा में विदेशी शराब लदी हुई थी, जिसकी बाजार में अनुमानित कीमत करीब दस लाख रुपये से अधिक आंकी जा रही है। मौके पर मौजूद दो धंधेबाजों को पुलिस ने घेराबंदी कर दबोच लिया, जिनसे फिलहाल गहन पूछताछ की जा रही है ताकि इस अवैध नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचा जा सके।
पिता-पुत्र की शातिर जोड़ी का तस्करी नेटवर्क
इस पूरे अवैध कारोबार का संचालन चंदेश्वर राय और उसका पुत्र रौशन कुमार मिलकर कर रहे थे, जिनका नाम इस धंधे के मुख्य मास्टरमाइंड के रूप में उभरकर सामने आया है। जांच में यह भी पता चला है कि इन दोनों आरोपियों का आपराधिक इतिहास पुराना है और उनके खिलाफ पहले से ही कई गंभीर मामले दर्ज हैं। हालांकि, छापेमारी के दौरान अपनी गिरफ्तारी की भनक लगते ही पिता-पुत्र की यह जोड़ी अंधेरे और बागान का फायदा उठाकर भागने में सफल रही, जिनकी तलाश में अब पुलिस की विशेष टीमें जुटी हुई हैं।
फरार मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए सघन छापेमारी
इस कार्रवाई के संबंध में जिला उत्पाद विभाग के इंस्पेक्टर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि पकड़े गए आरोपी चंदन कुमार और रोहित कुमार से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर फरार पिता-पुत्र की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। विभाग का मुख्य उद्देश्य इस पूरे सिंडिकेट को जड़ से खत्म करना है ताकि जिले में अवैध शराब की आपूर्ति पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके। प्रशासन ने दावा किया है कि मुख्य अभियुक्तों की पहचान सुनिश्चित कर ली गई है और वे बहुत जल्द कानून की गिरफ्त में होंगे।
अब अपने जिले में पोस्टिंग पर रोक, नई ट्रांसफर पॉलिसी को मंजूरी
5 May, 2026 10:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए नई स्थानांतरण नीति को अपनी आधिकारिक स्वीकृति दे दी है, जिससे प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान वर्ष 2026-27 की तबादला नीति पर मुहर लगाई गई, जिसके दायरे में राज्य के लगभग नौ लाख से अधिक कर्मचारी आएंगे। इस नई नीति के माध्यम से सरकार ने न केवल प्रशासनिक कार्यकुशलता को बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, बल्कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए पटल और क्षेत्र परिवर्तन को भी अनिवार्य बना दिया है।
श्रेणीवार तैनाती के लिए तय किए गए कड़े मानक
नई नीति के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अलग-अलग भौगोलिक प्रतिबंध निर्धारित किए गए हैं ताकि निष्पक्षता बनी रहे। समूह 'क' के वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति अब उनके गृह जनपद में नहीं की जा सकेगी, साथ ही जिन अधिकारियों के पद केवल मंडल स्तर के हैं, उन्हें उनके गृह मंडल से बाहर तैनात किया जाएगा। इसी प्रकार समूह 'ख' के अधिकारियों पर भी अपने गृह मंडल में तैनाती को लेकर पाबंदी रहेगी, जो मुख्य रूप से जिला स्तरीय कार्यालयों पर प्रभावी होगी। इसके अतिरिक्त समूह 'ग' के सभी कर्मचारियों के लिए कार्यक्षेत्र और पटल का बदलाव अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि एक ही स्थान पर लंबे समय तक जमे रहने की प्रवृत्ति को खत्म किया जा सके।
स्थानांतरण की समयसीमा और पात्रता की शर्तें
सरकार ने तबादलों की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए 31 मार्च को कटऑफ तिथि घोषित किया है, जिसके आधार पर सेवा के तीन और सात साल की अवधि की गणना की जाएगी। संबंधित विभागों के अध्यक्ष अपने विभागीय मंत्रियों के परामर्श और सहमति से 31 मई तक स्थानांतरण की कार्यवाही पूरी कर सकेंगे। विशेष परिस्थितियों जैसे सीधी भर्ती से हुई नई नियुक्तियों या ऐसे मामले जिनमें पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हों, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर मनचाहे स्थान पर विकल्प देने की सुविधा प्रदान की जाएगी। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि तबादला नीति के ये नए नियम सचिवालय के कार्मिकों पर प्रभावी नहीं होंगे और उनके लिए पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी।
सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे कर्मियों को राहत का प्रावधान
मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए नई नीति में उन कर्मचारियों के लिए विशेष रियायत दी गई है जो अपनी सेवानिवृत्ति के अंतिम पड़ाव पर हैं। जिन कार्मिकों की सरकारी सेवा के केवल दो वर्ष शेष बचे हैं, उन्हें उनकी इच्छा के अनुरूप तैनाती देने पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी। समूह 'ग' और 'घ' के ऐसे कर्मचारी अपने गृह जनपद में कार्य करने का विकल्प चुन सकेंगे, जबकि समूह 'क' और 'ख' के अधिकारियों को उनके गृह जिले को छोड़कर पड़ोस के किसी मनचाहे जिले में नियुक्त किया जा सकेगा। इस विशेष प्रावधान के तहत उनकी पूर्व में उस जिले या मंडल में रही तैनाती की अवधि को भी बाधा नहीं माना जाएगा ताकि वे अपने करियर के अंतिम समय में परिवार के करीब रह सकें।
टक्कर के बाद चीख-पुकार, मौके पर मचा हड़कंप
5 May, 2026 09:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
संभल: उत्तर प्रदेश के गंगा एक्सप्रेसवे पर सोमवार की अल सुबह एक भीषण सड़क दुर्घटना घटित हुई, जिसने एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस्लामनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत सिठोली गांव के समीप एक निजी यात्री बस और ट्रक के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई, जिसके परिणामस्वरूप बस में सवार दो दर्जन के करीब लोग जख्मी हो गए। यह हादसा उस वक्त हुआ जब यात्री गहरी नींद में थे और अचानक हुई इस टक्कर के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई।
तड़के हुआ दर्दनाक हादसा और मची अफरा-तफरी
लुधियाना से चलकर हरदोई की ओर जा रही यह निजी बस जैसे ही सिठोली गांव के पास पहुंची, सुबह करीब सवा पांच बजे इसकी टक्कर सामने चल रहे ट्रक से हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और भीतर बैठे यात्री सीटों के बीच फंस गए। स्थानीय ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए तुरंत मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस व स्वास्थ्य विभाग को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद राहत दल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला।
अस्पताल में घायलों का उपचार और गंभीर स्थिति
हादसे की सूचना मिलते ही कई एम्बुलेंस मौके पर पहुंचीं और सभी घायल यात्रियों को तत्काल बहजोई स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार घायलों में से कुछ की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई थी, जिसके कारण उन्हें प्राथमिक उपचार देने के बाद बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। घायलों में अधिकांश श्रमिक और अपने घरों को लौट रहे प्रवासी शामिल हैं, जो इस अचानक आई विपदा से पूरी तरह सहम गए हैं।
तेज रफ्तार बनी दुर्घटना का संभावित कारण
पुलिस प्रशासन ने दोनों क्षतिग्रस्त वाहनों को अपने कब्जे में लेकर विधिक कार्यवाही और जांच शुरू कर दी है ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी कुछ स्पष्ट नहीं कहा गया है, लेकिन प्रारंभिक जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से यह अंदेशा जताया जा रहा है कि एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अनियंत्रित गति इस हादसे की मुख्य वजह हो सकती है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या यह हादसा चालक को झपकी आने की वजह से हुआ या फिर खराब दृश्यता और तेज रफ्तार के कारण बस अनियंत्रित हुई थी।
पति के आरोपों के बाद पुलिस ने घटनाक्रम की पूरी कहानी बताई
5 May, 2026 09:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबेडकरनगर: जिले के अकबरपुर में घटित रोंगटे खड़े कर देने वाले हत्याकांड में पुलिस ने मुख्य आरोपी आमिर को एनकाउंटर में ढेर कर मामले को सुलझाने का दावा तो कर दिया है, लेकिन मृतका के पति की असहमति और कई अनसुलझे सवालों ने इस कार्रवाई पर संदेह की स्थिति पैदा कर दी है। सऊदी अरब में कार्यरत नियाज अहमद ने पुलिस की इस पूरी थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है और अपने आने तक पत्नी के शव को सुपुर्द न करने की बात कही है।
पुलिस की कार्रवाई पर पति ने उठाए गंभीर सवाल
सऊदी अरब के यांबू शहर से अपनी व्यथा सुनाते हुए नियाज अहमद ने बताया कि घटना से महज कुछ घंटों पहले उनकी अपनी पत्नी और चारों बच्चों से लंबी बात हुई थी और पूरा परिवार बेहद खुश नजर आ रहा था। नियाज का मानना है कि केवल तीन महीने पुराने एक मामूली विवाद के चलते कोई व्यक्ति इतनी बड़ी और जघन्य वारदात को अंजाम नहीं दे सकता है। उनका सबसे बड़ा आरोप पुलिस के उस शुरुआती बयान पर है जिसमें बिना किसी पुख्ता सबूत के उनकी पत्नी गासिया को ही अपने बच्चों का कातिल करार दे दिया गया था और अब एनकाउंटर के बाद पुलिस जो कहानी सुना रही है, वह उनके गले नहीं उतर रही है।
मुठभेड़ की कहानी और पुलिस का अपना तर्क
पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह के अनुसार जांच के दौरान नाजिया और सोनू नामक व्यक्तियों के बयानों के आधार पर आमिर का नाम सामने आया था जो कथित तौर पर गांजे के नशे में मृतका के घर निकाह का प्रस्ताव लेकर पहुंचा था। पुलिस का दावा है कि जब सोमवार सुबह घेराबंदी की गई तो आमिर ने पिस्टल से फायरिंग शुरू कर दी जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए और जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने गासिया की हत्या करने के बाद उसके शव को ठिकाने लगाया और फिर मासूम बच्चों को मौत के घाट उतार दिया, हालांकि नियाज इन सभी कड़ियों को काल्पनिक बता रहे हैं।
जांच के घेरे में कई रहस्यमयी और अनसुलझे बिंदु
इस पूरे हत्याकांड के बाद कई ऐसे पहलू हैं जिनका जवाब मिलना अभी बाकी है और जो पुलिसिया दावों पर सवालिया निशान खड़े करते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर आमिर और गासिया के बीच विवाद था तो उसने आधी रात को दरवाजा क्यों खोला और आरोपी ने बच्चों के शवों को वहीं छोड़कर सिर्फ महिला के शव को ही नाले में क्यों फेंका। इसके अलावा यह भी संदेह पैदा होता है कि इतना बड़ा अपराध करने के बाद भी आरोपी बारह घंटे तक शहर में ही क्यों घूमता रहा। इन तमाम बिंदुओं और परिवार की आशंकाओं ने इस एनकाउंटर को चर्चा और विवादों के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है।
सड़कें बनीं तालाब, बारिश ने खोली व्यवस्था की पोल
5 May, 2026 09:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हाजीपुर: बिहार के हाजीपुर में सोमवार की शाम हुई मूसलाधार वर्षा ने नगर परिषद के स्वच्छता और ड्रेनेज संबंधी तमाम दावों की कलई खोलकर रख दी है। पहली ही तेज बारिश ने जिला मुख्यालय को पूरी तरह जलमग्न कर दिया, जिससे शहर की रफ्तार थम गई और प्रमुख रास्ते छोटे तालाबों के रूप में नजर आने लगे। इस स्थिति ने न केवल प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए भी भारी मुसीबत पैदा कर दी है।
प्रमुख मार्गों पर जलभराव से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त
नगर के हृदय स्थल कहे जाने वाले गांधी चौक, सिनेमा रोड, अस्पताल रोड और डाक-बंगला रोड पर बारिश के बाद घुटनों तक पानी भर गया है जिससे पैदल चलना भी दूभर हो गया है। सबसे विकट स्थिति अस्पताल रोड पर देखी गई जहां जलजमाव के कारण गंभीर रूप से बीमार मरीजों और उनके परिजनों को चिकित्सा केंद्र तक पहुंचने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। शहर के मुख्य बाजारों में पानी भरने से व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं और लोग घंटों तक कीचड़ व दूषित पानी के बीच फंसे नजर आए।
दशकों से लंबित सीवरेज प्रोजेक्ट ने बढ़ाई शहर की मुश्किलें
हाजीपुर की इस बदहाली के पीछे वर्ष 2010 में स्वीकृत हुआ वह महत्वाकांक्षी सीवरेज ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट है जो आज भी अधूरा पड़ा हुआ है। नेशनल गंगा बेसिन ऑथोरिटी द्वारा आवंटित करोड़ों रुपये की लागत वाली यह योजना कई बार समय सीमा बीतने के बाद भी सफल नहीं हो सकी और काम पूरी तरह ठप पड़ गया। वर्तमान में स्थिति यह है कि करोड़ों खर्च होने के बाद भी शहर की जल निकासी व्यवस्था एक पुरानी और नाकाम मशीनरी पर टिकी है, जिसका खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
प्रशासनिक स्वीकारोक्ति और भविष्य की अधूरी योजनाएं
शहर की मौजूदा अव्यवस्था पर जिला अधिकारी वर्षा सिंह ने स्वीकार किया है कि हाजीपुर में वर्तमान समय में कोई प्रभावी वॉटर ड्रेनेज सिस्टम मौजूद नहीं है। प्रशासन का कहना है कि जल निकासी के लिए नए तंत्र पर कार्य किया जा रहा है और फिलहाल जमा हुए पानी को मशीनों के जरिए बाहर निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, स्थानीय निवासियों का मानना है कि जब तक बुनियादी ढांचे को मजबूत नहीं किया जाता और अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा नहीं किया जाता, तब तक हर बारिश शहर के लिए इसी तरह का संकट लेकर आती रहेगी।
गरजते बादलों ने छीनी मासूमों की सांसें, गांव में पसरा मातम
5 May, 2026 08:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मोतिहारी: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में सोमवार को कुदरत का कहर उस समय देखने को मिला जब मौसम के अचानक करवट लेने से खुशियों भरे आंगन में मातम छा गया। तेज गर्जना और बारिश के बीच आसमान से बरसी बिजली ने अलग-अलग स्थानों पर चार मासूम जिंदगियों को हमेशा के लिए शांत कर दिया। इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने से जहां कई घरों के चिराग बुझ गए, वहीं एक बच्चा जीवन और मौत के बीच अस्पताल में संघर्ष कर रहा है।
खेत में खेलते समय बच्चों पर काल बनकर गिरी बिजली
सुगौली प्रखंड के कैथवलिया गांव में दोपहर के वक्त जब बच्चे घर के पास ही खेतों में खेल रहे थे, तभी अचानक मौसम बदला और तेज चमक के साथ आकाशीय बिजली गिर गई। इस हादसे में आठ वर्षीय अंशू कुमारी और पंद्रह साल के सन्नी देवल कुमार बुरी तरह झुलस गए और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इसी घटना में एक अन्य बालक मंतोष कुमार भी गंभीर रूप से घायल हुआ है जिसका उपचार फिलहाल विशेषज्ञों की देखरेख में किया जा रहा है और उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।
जिले के अन्य हिस्सों में भी हुआ जान-माल का नुकसान
बिजली गिरने की यह त्रासदी केवल एक गांव तक सीमित नहीं रही बल्कि रामगढ़वा और मुफ्फसिल थाना क्षेत्रों से भी हृदयविदारक खबरें सामने आई हैं। इन दोनों क्षेत्रों में भी बारिश के दौरान आसमानी आपदा ने एक-एक बच्चे की जान ले ली जिससे पूरे जिले में भय और दुख का माहौल व्याप्त है। एक ही दिन के भीतर चार मासूमों की मौत ने प्रशासनिक अमले को भी झकझोर कर रख दिया है और प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
प्रशासनिक मुस्तैदी और पीड़ित परिवारों में शोक की लहर
हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और थाना प्रभारी ने घटनास्थलों का दौरा किया और कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शवों को पोस्टमार्टम के लिए मोतिहारी भिजवाया। इस समय पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और मृतकों के परिजनों की चीख-पुकार से वातावरण गमगीन हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि आपदा प्रबंधन के तहत पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता और सरकारी मुआवजा प्रदान किया जाए ताकि उन्हें इस संकट की घड़ी में कुछ संबल मिल सके।
तौसीफ मर्डर केस में नया मोड़, जांच में सामने आई अलग कहानी
5 May, 2026 08:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली में बिहार के एक मौलाना की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। मृतक मौलाना तौसीफ रजा की पत्नी तबस्सुम खातून ने पुलिस के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि उनके पति ट्रेन के गेट से गिरकर हादसे का शिकार हुए। सोमवार को परिजनों और स्थानीय संगठनों के साथ जीआरपी थाने पहुंचीं तबस्सुम ने आरोप लगाया कि उनके पति की मौत कोई दुर्घटना नहीं बल्कि एक सोची-समझी हत्या है, जिसका आधार उनकी मजहबी पहचान और नफरत है।
वीडियो कॉल पर देखी हमले की खौफनाक मंजर
मौलाना की पत्नी ने अत्यंत विचलित करने वाले खुलासे करते हुए बताया कि घटना वाली रात उनके पति का फोन आया था जिसमें उन्होंने कोच के भीतर कुछ लोगों द्वारा बेवजह पीटे जाने की बात कही थी। तबस्सुम के अनुसार, जब उन्होंने वीडियो कॉल की तो स्क्रीन पर साफ दिख रहा था कि कुछ अराजक तत्व उनके पति को घसीट रहे थे और उन पर चोरी का झूठा आरोप लगाकर मारपीट कर रहे थे। इसी दौरान अचानक स्क्रीन पर अंधेरा छा गया और फोन बंद हो गया, जिसके बाद अगले दिन उनका शव पालपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास ट्रैक पर बरामद हुआ।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और शिनाख्त से जुड़े तथ्य
पुलिस जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौलाना तौसीफ के सिर की दो हड्डियां टूटी हुई पाई गई हैं और शरीर पर चोट व रगड़ के पांच निशान मिले हैं। पुलिस को शव के पास मिले बैग से आधार कार्ड, पैनकार्ड, कुछ धार्मिक पुस्तकें और नकदी बरामद हुई थी, जिससे उनकी पहचान किशनगंज निवासी के रूप में की गई। हालांकि रेलवे पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि उनका सिर ट्रैक के पास लगे खंभे से कैसे टकराया, लेकिन परिजनों का दावा है कि उन्हें चलती ट्रेन से धक्का देकर खंभे की तरफ फेंका गया था।
न्याय की मांग और संगठनों का कड़ा विरोध
इस घटना को लेकर मुस्लिम संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में भारी रोष व्याप्त है और उन्होंने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई है। ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस और जमात रजा-ए-मुस्तफा जैसे संगठनों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर दोषियों की 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता व सरकारी नौकरी देने की अपील की है। अपनी शादी की दूसरी सालगिरह से महज कुछ दिन पहले विधवा हुई तबस्सुम ने संकल्प लिया है कि जब तक उनके पति के हत्यारों को सजा नहीं मिल जाती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
बंगाल चुनाव परिणाम का असर बिहार में, नेताओं के बयान सामने
4 May, 2026 02:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। पश्चिम बंगाल समेत चार राज्यों के चुनावी परिणाम सामने आने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं ने इन नतीजों को एक निर्णायक जनादेश करार देते हुए विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार किया है। बीजेपी ने इसे 'तुष्टिकरण की राजनीति' के खात्मे की शुरुआत बताया है।
'वोट बैंक' की राजनीति का अंत: ऋतुराज सिन्हा
भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा ने चुनावी नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय राजनीति अब 'वोट बैंक' और 'तुष्टिकरण' के दौर से आगे निकल चुकी है।
ममता सरकार पर निशाना: उन्होंने कहा कि बंगाल की सत्ता में हुआ बदलाव इस बात का प्रमाण है कि जनता अब अल्पसंख्यकों के नाम पर बहुसंख्यक समाज के साथ किए जाने वाले पक्षपातपूर्ण व्यवहार को स्वीकार नहीं करेगी।
जनता का जवाब: सिन्हा के अनुसार, बंगाल की महिलाओं ने अपनी सुरक्षा और युवाओं ने रोजगार व भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ का बदला मतदान के जरिए लिया है।
दक्षिण भारत और सनातन का मुद्दा
ऋतुराज सिन्हा ने केरल और तमिलनाडु का उल्लेख करते हुए विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जो दल 'सनातन धर्म' और देश की संस्कृति का अपमान कर अपनी राजनीति चमका रहे थे, जनता ने उन्हें आइना दिखा दिया है। उनके मुताबिक, दक्षिण भारत अब परिवारवाद और दिखावे की धर्मनिरपेक्षता को नकार कर राष्ट्रवाद के पथ पर अग्रसर है।
'इंडी गठबंधन' को करारा जवाब
बीजेपी नेता ने 'इंडी गठबंधन' पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह जनादेश उन ताकतों के लिए तमाचा है जो समाज को जाति और मजहब के आधार पर बांटने का प्रयास करती हैं।
सुशासन की जीत: उन्होंने कहा कि जनता ने विभाजनकारी राजनीति के बजाय सुरक्षित वातावरण और सुशासन को चुना है।
सबका विकास: 'वोट जिहाद' जैसे विषयों का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य की राजनीति केवल "सबका साथ, सबका विकास" के मंत्र पर ही टिकी रहेगी।
सम्राट चौधरी का कड़ा संदेश
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी पश्चिम बंगाल के परिणामों पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का स्मरण करते हुए कहा, “जहाँ पैदा हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी, वो बंगाल हमारा है।” उन्होंने बंगाल की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस जीत को ऐतिहासिक बताया और "भारत माता की जय" के नारे के साथ अपनी बात समाप्त की।
परीक्षा ड्यूटी में लापरवाही भारी, 46 शिक्षकों के वेतन पर रोक
4 May, 2026 12:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जहानाबाद। बिहार के जहानाबाद जिले में मैट्रिक और इंटरमीडिएट की कंपार्टमेंटल परीक्षाओं के संचालन में कोताही बरतने वाले शिक्षकों पर गाज गिरी है। शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए 46 शिक्षकों के वेतन पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। इसके साथ ही, इन सभी से तीन दिनों के भीतर जवाब तलब (स्पष्टीकरण) किया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले के शैक्षणिक हलकों में खलबली मच गई है।
ड्यूटी से गायब रहना पड़ा भारी
इन सभी शिक्षकों को जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, केंद्राधीक्षकों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि कई शिक्षक बिना किसी सूचना या अनुमति के ड्यूटी से नदारद रहे।
विभाग का रुख: जिला शिक्षा कार्यालय ने इसे घोर अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचारिता और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का उल्लंघन माना है। विभाग का कहना है कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वेतन रोकने का विवरण
अनुपस्थित रहने की अवधि के आधार पर वेतन रोकने की कार्रवाई दो चरणों में की गई है:
इंटर कंपार्टमेंटल परीक्षा: यहाँ ड्यूटी पर नहीं पहुँचने वाले 27 शिक्षकों का 30 अप्रैल से 11 मई तक का वेतन रोका गया है।
मैट्रिक कंपार्टमेंटल परीक्षा: इस परीक्षा के दौरान अनुपस्थित रहने वाले 19 शिक्षकों का 30 अप्रैल से 6 मई तक का वेतन स्थगित कर दिया गया है।
सख्त कार्रवाई की चेतावनी
शिक्षा विभाग ने सभी आरोपित शिक्षकों को तीन दिन का समय दिया है। यदि वे अपनी अनुपस्थिति का कोई ठोस और संतोषजनक कारण नहीं बता पाते हैं, तो उनके विरुद्ध निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
उनकी सेवा पुस्तिका (Service Book) में इस लापरवाही की प्रविष्टि की जाएगी।
बिहार विद्यालय परीक्षा संचालन अधिनियम-1981 की सुसंगत धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
कार्रवाई की चपेट में प्राथमिक, मध्य और उच्च विद्यालयों के सहायक शिक्षकों से लेकर प्रधानाध्यापक तक शामिल हैं।
पारदर्शिता पर जोर
जिले के शिक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा संबंधी कार्यों में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जा रही है। इस सख्ती का मुख्य उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में पूर्ण अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।
स्वागत समारोह बना विवाद, अनंत सिंह के समर्थकों ने दिखाए हथियार
4 May, 2026 12:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज जिले में कानून की धज्जियां उड़ाने वाला एक मामला प्रकाश में आया है। यहाँ मोकामा विधायक और जदयू नेता अनंत सिंह के स्वागत कार्यक्रम के दौरान उनके समर्थकों ने सरेआम हथियारों का प्रदर्शन किया। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसने स्थानीय पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हथियारों के साथ जश्न और डांस
यह घटना मीरगंज थाना क्षेत्र के सेमराव गांव की बताई जा रही है। विधायक अनंत सिंह यहाँ एक उपनयन संस्कार समारोह में शिरकत करने पहुँचे थे।
बेखौफ प्रदर्शन: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कुछ युवक भोजपुरी गीतों की धुन पर राइफल और अन्य असलहे लहराते हुए नाचते दिख रहे हैं। वीडियो देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इन युवाओं में कानून का कोई भय नहीं है।
पुष्टि का इंतजार: फिलहाल इस वीडियो की सटीक तारीख और इसकी सत्यता की आधिकारिक तौर पर स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद जिला पुलिस हरकत में आ गई है। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
हथियारों की जांच: पुलिस अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वीडियो में दिखने वाले हथियार असली हैं या केवल प्रदर्शन के लिए रखे गए थे।
दोषियों की पहचान: वीडियो के आधार पर प्रदर्शन करने वाले युवकों की शिनाख्त की जा रही है, ताकि उन पर उचित कानूनी कार्रवाई की जा सके।
थावे मंदिर में दर्शन
हथियारों के इस विवाद के बीच, विधायक अनंत सिंह रविवार को सुप्रसिद्ध थावे दुर्गा मंदिर पहुँचे। उन्होंने वहां माथा टेका और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की।
भारी भीड़: मंदिर में उनके आगमन के दौरान जदयू कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों का जमावड़ा लगा रहा।
सुरक्षा: मंदिर परिसर में उमड़ी भीड़ को देखते हुए वहां प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षाबलों की तैनाती की गई थी।
छापेमारी से हड़कंप, शहाबुद्दीन परिवार के ठिकानों पर जांच तेज
4 May, 2026 11:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीवान। बिहार के सीवान जिले में सोमवार की सुबह बड़ी हलचल रही, जब पुलिस प्रशासन की टीमों ने एक साथ दो प्रमुख ठिकानों पर दस्तक दी। रघुनाथपुर से राजद विधायक ओसामा शहाब के प्रतापपुर और नई किला स्थित निवासों पर भारी पुलिस बल ने सघन छापेमारी की। इस अचानक हुई कार्रवाई से पूरे जिले के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई।
बड़े अधिकारियों की मौजूदगी में कार्रवाई
छापेमारी की कमान खुद सारण रेंज के डीआईजी नीलेश कुमार और सीवान के एसपी पूरन कुमार झा ने संभाल रखी थी। पुलिस का लंबा काफिला जब विधायक के पैतृक गांव प्रतापपुर और शहर स्थित आवास पर पहुंचा, तो सुरक्षा के कड़े इंतजामों को देखकर स्थानीय लोग दंग रह गए।
छापेमारी की वजह: दर्ज प्राथमिकी और कोर्ट का वारंट
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई गोपालगंज के मांझागढ़ निवासी डॉ. विनय कुमार सिंह की पत्नी डॉ. सुधा सिंह द्वारा सीवान के महादेवा थाने में दर्ज कराए गए एक मामले के आधार पर की गई है।
साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई: डीआईजी नीलेश कुमार ने स्पष्ट किया कि मामले में ठोस सबूत मिलने के बाद न्यायालय से औपचारिक वारंट प्राप्त किया गया। इसके बाद ही पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए घर की तलाशी ली गई।
किले में तब्दील हुए विधायक के आवास
छापेमारी को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने और सुरक्षा के मद्देनजर विधायक के दोनों आवासों को छावनी में बदल दिया गया था। इस अभियान में सीवान के कई थानों की फोर्स शामिल थी:
सदर एसडीपीओ अजय कुमार सिंह और मैरवा एसडीपीओ गौरी कुमारी मौके पर मौजूद रहे।
नगर, मुफ्फसिल, महादेवा और सराय थानों की टीमों ने सुरक्षा घेरा बनाए रखा ताकि जांच में कोई बाधा न आए।
क्षेत्र में मची अफरा-तफरी
अचानक हुई इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी से प्रतापपुर और नई किला इलाकों में सनसनी फैल गई। काफी देर तक स्थानीय लोग इस भारी पुलिस जमावड़े का कारण जानने को उत्सुक दिखे, लेकिन बाद में यह स्पष्ट हुआ कि पुलिस विधायक ओसामा शहाब से जुड़े एक मामले में साक्ष्य जुटाने पहुंची है।
कार सवारों पर टूटा कहर: मऊ एक्सीडेंट में एक की मौत, दो जिंदगी से जूझ रहे
4 May, 2026 10:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मऊ: हाजीपुर में अज्ञात वाहन ने कार को मारी टक्कर, एक युवक की मौत, दो गंभीर रूप से घायल
मऊ: जिले के घोसी कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत हाजीपुर में रविवार की देर रात एक भीषण सड़क हादसा सामने आया है। देर रात करीब 1:30 बजे एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने कार को जोरदार टक्कर मार दी। इस दर्दनाक हादसे में एक युवक की जान चली गई, जबकि दो अन्य दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे का विवरण: मिली जानकारी के अनुसार, करीमुद्दीनपुर के रहने वाले मोहम्मद तौकीब (34), हामिद मुजफ्फर (28) और मोहम्मद सलीम (18) कार से जा रहे थे। हाजीपुर के समीप पीछे से आ रहे एक अनियंत्रित वाहन ने उनकी कार को इतनी जबरदस्त टक्कर मारी कि कार के परखच्चे उड़ गए। चीख-पुकार सुनकर पहुंचे स्थानीय लोगों ने तुरंत तीनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) घोसी पहुंचाया।
हताहतों की स्थिति: अस्पताल में डॉक्टरों ने मोहम्मद तौकीब को मृत घोषित कर दिया। वहीं, हामिद मुजफ्फर और मोहम्मद सलीम की हालत गंभीर बनी हुई है, जिनका उपचार किया जा रहा है। घटना के बाद मृतक के परिवार में मातम छा गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पुलिसिया कार्रवाई: हादसे के बाद अज्ञात वाहन चालक मौके से भागने में सफल रहा। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया और क्षतिग्रस्त कार को थाने भिजवाया। क्षेत्राधिकारी (सीओ) जितेंद्र कुमार ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस फरार चालक और वाहन की तलाश के लिए आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि जल्द ही आरोपी को पकड़ा जा सके।
SP की सख्ती: भ्रष्टाचार के आरोप में दो पुलिसकर्मी सस्पेंड
4 May, 2026 09:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंगेर। बिहार के मुंगेर जिले में पुलिस महकमे की छवि को साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए एसपी सैयद इमरान मसूद ने बड़ी कार्रवाई की है। अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिरे दो पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। इस कड़े फैसले के बाद जिला पुलिस बल में हड़कंप की स्थिति है।
केस 1: अपराधियों से सांठ-गांठ और अनुचित गतिविधियां
पहला मामला कासिम बाजार थाना का है। यहाँ तैनात एएसआई (ASI) अनिकेत कुमार झा पर आरोप था कि वे पुराने अपराधियों और अभियुक्तों के साथ संपर्क बनाए हुए थे। साथ ही, उन पर थाना परिसर के भीतर ही अनुचित तरीके से बाहरी लोगों के साथ बैठकबाजी करने की शिकायत मिली थी।
जांच का नतीजा: एसपी द्वारा कराई गई जांच में ये सभी आरोप पुख्ता पाए गए, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे आचरण से पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
केस 2: सत्यापन के नाम पर अवैध वसूली
दूसरा मामला मुफस्सिल थाना से जुड़ा है। यहाँ तैनात पीटीसी (PTC) अभिषेक कुमार पर आम जनता को परेशान करने का आरोप लगा था।
शिकायत: लोगों ने आरोप लगाया था कि चरित्र सत्यापन (Character Verification) के लिए अभिषेक कुमार अवैध रूप से रुपयों की मांग करते थे। जो लोग पैसे नहीं देते थे, उनके आवेदन जानबूझकर अटका दिए जाते थे।
कार्रवाई: मुफस्सिल इंस्पेक्टर की जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद एसपी ने उन्हें सस्पेंशन का आदेश सुना दिया।
पुलिस कप्तान का कड़ा रुख
एसपी सैयद इमरान मसूद ने इस कार्रवाई के जरिए पूरे महकमे को स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि:
अपराधियों से नजदीकी बढ़ाना या थाने में बैठकबाजी करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जनता के काम के बदले रिश्वत लेना एक गंभीर अपराध है और इसमें लिप्त किसी भी कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस विभाग में पारदर्शिता और ईमानदारी सर्वोपरि है।
यूपी के 35 लाख उपभोक्ताओं को फायदा, घरेलू कनेक्शन पर चल सकेगी दुकान
4 May, 2026 08:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश: छोटे दुकानदारों को बड़ी राहत, अब घर से दुकान चलाने पर नहीं लेना होगा कॉमर्शियल कनेक्शन
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उन लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर है जो अपने घरों में छोटी दुकान संचालित करते हैं। नई बिजली टैरिफ नीति के तहत अब ऐसे उपभोक्ताओं को अलग से कॉमर्शियल (व्यावसायिक) बिजली कनेक्शन लेने की अनिवार्यता से छूट मिल सकती है। राज्य विद्युत नियामक आयोग इस नए प्रावधान पर गंभीरता से विचार कर रहा है, जिससे प्रदेश के लगभग 35 लाख छोटे कारोबारियों को सीधा फायदा होगा।
क्या है वर्तमान समस्या? वर्तमान में यदि कोई व्यक्ति अपने घर के एक हिस्से में छोटी सी किराना दुकान, स्टेशनरी या सब्जी की दुकान खोलता है, तो उसे व्यावसायिक दर पर अलग कनेक्शन लेना पड़ता है। ऐसा न करने पर विभाग द्वारा बिजली चोरी की कार्रवाई की जाती है। अभी घरेलू बिजली की दर करीब 4 से 5 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि कॉमर्शियल दर 8 रुपये प्रति यूनिट तक जाती है। साथ ही भारी फिक्स्ड चार्ज भी देना पड़ता है।
प्रस्तावित नई व्यवस्था की मुख्य बातें:
नई श्रेणी का प्रावधान: घर से छोटे व्यवसाय चलाने वालों के लिए एक विशेष श्रेणी बनाई जा सकती है।
यूनिट की सीमा: संभव है कि 300 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले छोटे दुकानदारों से केवल घरेलू दरों पर ही शुल्क लिया जाए।
आर्थिक बचत: अलग कनेक्शन की जरूरत खत्म होने से छोटे दुकानदार, जो सिर्फ बल्ब या पंखे का उपयोग करते हैं, भारी-भरकम बिल और न्यूनतम अधिभार (सरचार्ज) से बच सकेंगे।
बिजली दरों में बढ़ोतरी के आसार नहीं: प्रदेश के करीब 3.5 करोड़ उपभोक्ताओं के लिए एक और अच्छी खबर यह है कि फिलहाल बिजली दरों में वृद्धि की संभावना कम है। पावर कॉर्पोरेशन के प्रस्तावों और उपलब्ध सरप्लस को देखते हुए माना जा रहा है कि जून में जारी होने वाली नई दरों में कोई इजाफा नहीं किया जाएगा। नियामक आयोग का पूरा ध्यान छोटे उपभोक्ताओं को राहत देने और व्यवस्था को सरल बनाने पर है।
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