उत्तर प्रदेश
गांधी मैदान से पटना सिटी जाने वालों के लिए जरूरी खबर, 26-27 जून को बदलेगा रूट
25 Jun, 2026 08:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की राजधानी पटना में अगले दो दिनों, यानी शुक्रवार और शनिवार को यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मुहर्रम की 10वीं तारीख (यौमे आशूरा) और उसके अगले दिन होने वाले पहलाम के मद्देनजर शहर के कई प्रमुख रास्तों पर आम गाड़ियों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की एंट्री बंद रहेगी। अलग-अलग इलाकों से निकलने वाले पारंपरिक ताजिया जुलूसों और उनमें उमड़ने वाली अकीदतमंदों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। इसके तहत गांधी मैदान से लेकर पटना सिटी तक जाने वाले अशोक राजपथ पर वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया गया है। इसके अलावा, शहर में भारी वाहनों (ट्रक आदि) के प्रवेश के लिए भी सख्त रूट डायवर्जन लागू किया गया है।
अशोक राजपथ बंद रहने पर इस वैकल्पिक रास्ते से गुजरेंगी गाड़ियां
गांधी मैदान के कारगिल चौक से पटना सिटी की तरफ जाने वाले अशोक राजपथ के हिस्से पर आम गाड़ियां नहीं चल सकेंगी। शुक्रवार और शनिवार को वाहनों को कारगिल चौक से उद्योग भवन के बगल से होते हुए बाकरगंज मोड़ और फिर राम गुलाम चौक की तरफ डायवर्ट किया जाएगा। यहाँ से गाड़ियां एग्जीबिशन रोड फ्लाईओवर के रास्ते कंकड़बाग ओल्ड बाइपास पकड़कर पटना सिटी की ओर जा सकेंगी।
आमतौर पर वन-वे रहने वाले बाकरगंज वाले रास्ते पर इन दो दिनों के लिए नियम बदल दिए गए हैं। अब अशोक राजपथ से इस ओर एंट्री नहीं मिलेगी। वहीं, पटना सिटी की तरफ से आने वाली सभी गाड़ियां सिटी चौक मोड़ से अगमकुआं होते हुए कंकड़बाग ओल्ड बाइपास या गायघाट के रास्ते मुख्य शहर में आ सकेंगी। इस दौरान महेंद्रू से बाकरगंज के बीच कदमकुआं और आर्यकुमार रोड जैसी लिंक रोड से निकलने वाली छोटी गाड़ियां ही निचली सड़क का इस्तेमाल कर पाएंगी। बारीपथ से सब्जीबाग, जीएम रोड, खजांची रोड और रमना रोड होकर अशोक राजपथ पर जाने वाले रास्तों को भी बंद रखा जाएगा।
एम्स और फुलवारीशरीफ रूट पर कमर्शियल गाड़ियों की एंट्री बैन
चूंकि पटना एम्स और इमारत-ए-शरिया की तरफ जाने वाला फुलवारीशरीफ का रास्ता बेहद व्यस्त रहता है, इसलिए मुहर्रम के जुलूसों के दौरान यहाँ जाम लगने की सबसे ज्यादा आशंका है। इसे देखते हुए प्रशासन ने नौबतपुर से एम्स, फुलवारीशरीफ होते हुए अनीसाबाद गोलंबर तक सभी प्रकार के भारी और कमर्शियल वाहनों के चलने पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
इसी तरह, पटना जीरो माइल से बेउर मोड़ होते हुए अनीसाबाद या फुलवारीशरीफ की तरफ भी भारी वाहन नहीं जा सकेंगे। इन दो दिनों के लिए जीरो माइल से आने वाले ट्रकों और भारी वाहनों को बेलदारीचक, बिहटा-सरमेरा रोड, नौबतपुर, बिहटा और बिक्रम के रास्ते से आगे के लिए रवाना किया जाएगा। आम जनता को सलाह दी गई है कि वे असुविधा से बचने के लिए इन दो दिनों में निर्धारित रूटों का ही इस्तेमाल करें।
रोजगार सृजन पर फोकस, हजारों युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर
24 Jun, 2026 05:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: बिहार को औद्योगिक निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को विकास आयुक्त-सह-अध्यक्ष, राज्य निवेश प्रोत्साहन परिषद् मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (SIPB) की 68वीं उच्च स्तरीय बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के भीतर नए उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देने, व्यापारिक माहौल को सुगम बनाने और बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए विभिन्न औद्योगिक प्रस्तावों पर गहन मंथन किया गया।
36 बड़े प्रोजेक्ट्स को मिली स्टेज-1 क्लीयरेंस; करोड़ों के फंड मंजूर
बिहार में औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बोर्ड ने इस बैठक में कई बड़े फैसलों पर मुहर लगाई। इसके तहत:
स्टेज-1 क्लीयरेंस: राज्य में कुल 1,628.60 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 36 महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को स्टेज-1 क्लीयरेंस (शुरुआती मंजूरी) दे दी गई है।
वित्तीय स्वीकृति: इसके अतिरिक्त, 07 अन्य चालू परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए 44.89 करोड़ रुपये की अंतिम वित्तीय स्वीकृति भी प्रदान की गई।
बोर्ड का मानना है कि इन प्रोजेक्ट्स के शुरू होने से न केवल बिहार में औद्योगिक गतिविधियों को रफ्तार मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
निवेशकों के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम और पारदर्शिता पर जोर
बैठक के दौरान राज्य में निवेश की प्रक्रियाओं को और अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध (टाइम-बाउंड) बनाने पर विशेष रणनीति तैयार की गई। वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात पर चर्चा की कि उद्योगपतियों और निवेशकों को जमीन आवंटन या अन्य सरकारी स्वीकृतियों के दौरान आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को कैसे तुरंत दूर किया जाए। इसके लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और डिजिटल मॉनिटरिंग को और मजबूत करने का निर्णय लिया गया है।
उद्योग-अनुकूल नीतियां और मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर देने की प्रतिबद्धता
समीक्षा बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि बिहार को देश के अन्य विकसित राज्यों की तरह एक प्रतिस्पर्धी और उद्योग-अनुकूल (इन्वेस्टर-फ्रेंडली) राज्य के रूप में स्थापित करने के लिए नीतियां बदली जा रही हैं। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य निवेशकों को विश्वस्तरीय आधारभूत सुविधाएं (इन्फ्रास्ट्रक्चर), बिजली की निर्बाध आपूर्ति और सुगम प्रशासनिक प्रक्रियाएं उपलब्ध कराना है, ताकि देश-विदेश की बड़ी कंपनियां बिहार का रुख कर सकें।
राज्य की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती
इन स्वीकृत परियोजनाओं के धरातल पर आने से बिहार के आर्थिक और औद्योगिक आधार को एक नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई गई है। बुनियादी ढांचा मजबूत होने से न केवल पलायन रुकेगा, बल्कि राज्य के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी होगी। सरकार का अंतिम लक्ष्य बिहार को पूर्वी भारत के एक प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में विकसित करना है, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति को दीर्घकालिक मजबूती मिल सके।
जमुई में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन, दिग्विजय सिंह को सीएम सम्राट चौधरी ने किया नमन
24 Jun, 2026 02:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जमुई: बिहार के कद्दावर नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और बांका के पूर्व सांसद स्वर्गीय दिग्विजय सिंह की 16वीं पुण्यतिथि बुधवार को जमुई जिले के गिद्धौर प्रखंड अंतर्गत नयागांव स्थित नागी-नकटी कटहरा नदी तट पर अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस मौके पर आयोजित विशेष स्मृति सभा में बिहार सरकार के कई कैबिनेट मंत्रियों, शीर्ष जनप्रतिनिधियों, उनके प्रशंसकों और हजारों की संख्या में स्थानीय नागरिकों ने हिस्सा लिया।
समाधि स्थल पर पहुंचे बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्री और कई मंत्री
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान जुटे गणमान्य लोगों और नेताओं ने स्वर्गीय दिग्विजय सिंह के समाधि स्थल पर जाकर पुष्प चक्र अर्पित किए और उनकी स्मृतियों को नमन किया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने उनके अद्वितीय राजनीतिक सफर, लोक-कल्याणकारी कार्यों और क्षेत्र के विकास के प्रति उनके समर्पण को याद किया।
इस राजकीय गरिमा वाले कार्यक्रम में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल, परिवहन मंत्री दामोदर रावत और जमुई के वर्तमान सांसद अरुण भारती समेत कई दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की।
पुतुल कुमारी और मंत्री श्रेयसी सिंह ने जताया आभार
इस भावुक क्षण पर स्वर्गीय दिग्विजय सिंह की धर्मपत्नी व पूर्व सांसद पुतुल कुमारी और उनकी पुत्री व बिहार सरकार की खेल एवं उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। दोनों ने कार्यक्रम में पहुंचे सभी आगंतुकों और जनता का आभार व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने स्वर्गीय दिग्विजय सिंह के सिद्धांतों, आदर्शों और जनसेवा के अधूरे सपनों को निरंतर आगे बढ़ाने का अपना दृढ़ संकल्प दोहराया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम; चप्पे-चप्पे पर तैनात रही पुलिस
हाई-प्रोफाइल नेताओं के आगमन को देखते हुए जमुई जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा और साजो-सामान के व्यापक प्रबंध किए गए थे। कार्यक्रम स्थल के मुख्य प्रवेश द्वार पर सुरक्षा जांच के लिए मेटल डिटेक्टर लगाए गए थे, जबकि पूरे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था बेहद चाक-चौबंद रखी गई थी। सुबह से ही लोगों का समाधि स्थल पर तांता लगना शुरू हो गया था। व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी नवीन और पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल खुद कार्यक्रम के अंत तक मुस्तैद रहकर हर गतिविधि की निगरानी कर रहे थे।
भरत तिवारी मामले पर मौन रहे सम्राट चौधरी
समारोह के दौरान जब मीडिया कर्मियों ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से हालिया चर्चा में रहे भरत तिवारी मामले को लेकर सवाल पूछने का प्रयास किया, तो उन्होंने इस विषय पर पूरी तरह से चुप्पी साधे रखी और बिना कोई टिप्पणी किए जमुई से प्रस्थान कर गए। पूरा आयोजन बेहद शांतिपूर्ण और गरिमामयी माहौल में संपन्न हुआ, जहां हर किसी ने नम आंखों से अपने जनप्रिय नेता को याद किया।
बिहार में बड़ा प्रशासनिक फैसला, जगदीशपुर SDPO पद से हटे राजेश शर्मा
24 Jun, 2026 12:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आरा: भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हुए बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में राज्य सरकार ने एक और बड़ा और कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। इस घटना के बाद से लगातार आम जनता के भारी विरोध और चौतरफा दबाव का सामना कर रहे जगदीशपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) राजेश कुमार शर्मा को तत्काल प्रभाव से उनके पद से मुक्त कर दिया गया है। गृह विभाग द्वारा जारी ताजा आदेश के अनुसार, अब उन्हें अगले आदेश तक के लिए बिहार पुलिस मुख्यालय, पटना में अटैच (संबद्ध) कर दिया गया है। इस कदम को महकमे के भीतर एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
पंकज कुमार मिश्रा बने जगदीशपुर के नए एसडीपीओ
राजेश कुमार शर्मा को पद से हटाए जाने के बाद सरकार ने जगदीशपुर अनुमंडल की कमान एक तेज-तर्रार अधिकारी को सौंपने का फैसला किया है। मद्यनिषेध एवं उत्पाद विभाग के साथ-साथ राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, बिहार) में पुलिस उपाधीक्षक के पद पर तैनात पंकज कुमार मिश्रा को तत्काल प्रभाव से जगदीशपुर का नया अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) नियुक्त किया गया है। प्रशासन को उम्मीद है कि उनकी तैनाती से क्षेत्र की कानून-व्यवस्था में सुधार होगा।
पुलिस मुख्यालय का सख्त रुख: 'बिना वक्त गंवाए संभालें कार्यभार'
पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में दोनों अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है। हटाए गए एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को बिना किसी देरी के फौरन पटना मुख्यालय में रिपोर्ट करने का आदेश दिया गया है। वहीं, नए अधिकारी पंकज कुमार मिश्रा को अविलंब जगदीशपुर पहुंचकर अपनी नई जिम्मेदारी संभालने और इसकी अनुपालन रिपोर्ट जल्द से जल्द मुख्यालय को भेजने को कहा गया है।
हत्या की एफआईआर में नामजद थे तत्कालीन एसडीपीओ
गौरतलब है कि कथित एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी की मां ने स्थानीय थाने में हत्या की एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी। इस एफआईआर में तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को सीधे तौर पर नामजद आरोपी बनाया गया था। केस दर्ज होने के बाद से ही उन पर गाज गिरना तय माना जा रहा था। सरकार के इस ताजा फैसले से यह साफ संकेत गया है कि इस संवेदनशील मामले में अब पुलिस के शीर्ष अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाने लगी है।
गंगा स्नान बना काल: तेज धारा में बह गईं पांच बच्चियां, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
24 Jun, 2026 11:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंगेर: बिहार के मुंगेर जिले के श्यामपुर गंगा घाट से एक बेहद ही हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ बुधवार को गंगा नदी में स्नान करने गईं पांच बच्चियां अचानक गहरे पानी और तेज बहाव की चपेट में आ गईं। इस दर्दनाक हादसे के बाद से पूरे इलाके में कोहराम मच गया है और घाट पर मौजूद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। देर शाम तक चले सर्च ऑपरेशन में एक बच्ची का शव पानी से बाहर निकाल लिया गया है, जबकि अन्य लापता बच्चियों की खोजबीन लगातार की जा रही है।
तेज धारा में बह गईं सगी बहनें और सहेली
प्राप्त विवरण के अनुसार, वासुदेवपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले क्रांति पासवान की चार बेटियां—संगीता कुमारी, विनीता कुमारी, संध्या कुमारी और सोनाली कुमारी, अपनी सहेली हीना कुमारी (पुत्री चानो पासवान) के साथ श्यामपुर गंगा घाट पर नहाने गई थीं। नदी में उतरने के बाद बच्चियों को पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लगा और वे अचानक तेज धारा में समा गईं। घाट पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि देखते ही देखते सभी बच्चियां आंखों से ओझल हो गईं। इसके तुरंत बाद ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना दी।
NDRF और SDRF की टीमें मुस्तैद, युद्धस्तर पर सर्च ऑपरेशन
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए वासुदेवपुर थाना पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुँची। जिलाधिकारी के विशेष निर्देश पर एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय जिला गोताखोरों की विशेषज्ञ टीमों को रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए उतारा गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्टि की है कि काफी मशक्कत के बाद देर शाम एक बच्ची का शव बरामद कर लिया गया है, जिसे आवश्यक प्रक्रिया के लिए भेजा गया है। बाकी चार बच्चियों को सुरक्षित ढूंढ निकालने के लिए नदी के अलग-अलग हिस्सों में सर्च लाइट की मदद से रात में भी अभियान चलाया जा रहा है।
गांवों में पसरा सन्नाटा, किनारे पर टकटकी लगाए बैठे हैं परिजन
इस भयानक त्रासदी के बाद श्यामपुर और पीड़ित परिवारों के पैतृक गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है और चूल्हे तक नहीं जले हैं। बदहवास परिजन और ग्रामीण अभी भी इस उम्मीद में गंगा घाट पर डटे हुए हैं कि शायद उनकी बच्चियों का कोई सुराग मिल जाए। मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी लापता बच्चियों को तलाश नहीं लिया जाता, तब तक यह राहत और बचाव अभियान पूरी क्षमता के साथ लगातार जारी रहेगा।
एक पल की चूक और तीन जिंदगियां खत्म, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
24 Jun, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांदा| उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के अतर्रा और बिसंडा थाना क्षेत्र के बीच एक बेहद हृदयविदारक सड़क हादसा सामने आया है। अपनी शादी के कार्ड बांटकर घर लौट रहे एक होने वाले दूल्हे और दूसरी बाइक पर सवार मामा की शादी की खरीदारी कर लौट रहे दो युवकों की बाइकों के बीच आमने-सामने की जोरदार टक्कर हो गई। यह भीषण दुर्घटना रात के वक्त बाइकों की हेडलाइट की तेज रोशनी आंखों पर पड़ने के कारण हुई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों बाइकों के परखच्चे उड़ गए और उन पर सवार तीनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस और राहगीरों ने सभी को तुरंत रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि दोनों ही बाइकों पर सवार किसी भी युवक ने हेलमेट नहीं पहन रखा था।
सात दिन बाद उठनी थी बारात, अब उठेगी अर्थी
बिसंडा थाना क्षेत्र के चौसड़ गांव निवासी पिता रामानंद ने रोते हुए बताया कि उनका 22 वर्षीय पुत्र रामजी उनके चार बेटों में सबसे बड़ा था। वह खेती-किसानी में पिता का हाथ बंटाता था। रामजी की शादी तय हो चुकी थी और ठीक सात दिन बाद यानी पहली जुलाई को बबेरू कोतवाली क्षेत्र के टोलाकला गांव उसकी बारात जानी थी। रामजी खुद अपनी शादी के कार्ड सगे-संबंधियों को बांटने गया था।
सोमवार की देर रात जब वह कार्ड बांटकर बिसंडा-ओरन मार्ग पर चौसड़ गांव के हाऊली बरा के पास पहुंचा, तभी सामने से आ रही तेज रफ्तार बाइक ने उसकी बाइक को सीधी टक्कर मार दी। शादी के ऐन वक्त पर इकलौते कमाऊ बेटे की मौत से मां शोभा देवी और पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। इस दर्दनाक हादसे से चौसड़ और लड़की पक्ष के गांव टोलाकला, दोनों ही गांवों में सन्नाटा पसर गया है।
मामा की शादी में आया था भांजा, बाजार से लौटते समय हुआ काल का ग्रास
दुर्घटना की शिकार हुई दूसरी बाइक पर चौसड़ गांव के ही राजू कुशवाहा (40 वर्ष) और उनके साथ पारा बिहारी निवासी राहुल (16 वर्ष) सवार थे। चौसड़ गांव के निवासी दिलीप कुशवाहा ने बताया कि उनके बड़े भाई सुनील की शादी 24 जून को होनी तय है। इसी शादी के समारोह में शामिल होने के लिए उनका सगा भांजा राहुल करीब 15 दिन पहले ही अपने ननिहाल आया था।
राहुल ने पिछले वर्ष ही हाईस्कूल की परीक्षा पास की थी और वह दो भाइयों में बड़ा था। अभी महज एक साल पहले ही राहुल की मां गिरजा का देहांत हुआ था और अब इस हादसे ने पिता राजकुमार को पूरी तरह तोड़ दिया है। सोमवार की देर रात राहुल गांव के ही राजू के साथ ओरन मार्ग स्थित बाजार की एक दुकान से शादी का कुछ सामान और खरीदारी करने गया था। बाजार से लौटते समय दोनों इस भयावह हादसे का शिकार हो गए।
बुढ़ापे का एकमात्र सहारा भी छिन गया
इस हादसे में जान गंवाने वाले 40 वर्षीय राजू कुशवाहा के वृद्ध पिता बृजलाल ने बदहवास हालत में बताया कि राजू उनका इकलौता बेटा था और उनके बुढ़ापे का एकमात्र लाठी का सहारा था, जो अब इस दुनिया में नहीं रहा। राजू पेशे से किसान था और खेती करके अपने पूरे परिवार का पेट पालता था। उसके पीछे अब उसकी पत्नी शोभा, एक मासूम बेटा और एक बेटी अनाथ हो गए हैं।
बिसंडा थानाध्यक्ष चंद्रप्रकाश तिवारी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि दो मोटरसाइकिलों की आपसी भिड़ंत में तीन लोगों की असमय मौत हुई है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि रात के समय वाहनों की हेडलाइट को डिपर पर रखें और दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें, क्योंकि इस हादसे में किसी भी मृतक ने हेलमेट नहीं पहना था, जिसके कारण सिर पर गंभीर चोटें आईं और उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
युवक का शव पेड़ से लटका मिलने से सनसनी, जांच जारी
24 Jun, 2026 11:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैशाली। बिहार के वैशाली जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ बेलसर थाना अंतर्गत मिश्रौलिया गाँव में बुधवार की सुबह एक युवक का शव आम के पेड़ से लटका हुआ पाया गया। सुबह-सुबह इस खबर के फैलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और घटनास्थल पर ग्रामीणों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। मृतक की शिनाख्त मिश्रौलिया निवासी विनोद मिश्रा के 35 वर्षीय बेटे कुंदन कुमार के तौर पर की गई है। इस घटना के बाद से पूरे गाँव में सन्नाटा और दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुँची पुलिस ने मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।
रात में कुछ लोगों के साथ देखा गया था युवक
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कुंदन कुमार गाँव से थोड़ी दूरी पर एक एकांत जगह में मुर्गी फार्म चलाता था और अक्सर रात के समय वहीं रुकता था। बताया जा रहा है कि मंगलवार की रात को भी उसे कुछ लोगों के साथ पोल्ट्री फार्म पर देखा गया था। लेकिन अगली सुबह उसका शव गाँव के पास ही एक बगीचे में पेड़ से झूलता मिला। कुंदन शादीशुदा था, मगर पारिवारिक विवाद और अनबन के चलते काफी समय से अपनी पत्नी से अलग रह रहा था। घटना की भनक लगते ही रोते-बिलखते परिजन भी मौके पर पहुँच गए, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है।
फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को बुलाया गया, पुलिस जाँच में जुटी
वारदात की जानकारी मिलते ही प्रभारी थाना अध्यक्ष मनीष कुमार दलबल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने फौरन शव को अपने नियंत्रण में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। कानून व्यवस्था बनाए रखने और सुराग तलाशने के लिए पुलिस टीम ने मौके का गहन मुआयना किया। मामले के पेचीदा होने के कारण साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर तलब किया गया है।
हत्या या आत्महत्या? गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस
इस घटना को लेकर गाँव के भीतर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इलाके का एक धड़ा जहाँ इसे सुसाइड मान रहा है, वहीं दूसरी ओर भारी संख्या में ग्रामीण इसे सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या करार दे रहे हैं। फिलहाल, मौत की असली वजह क्या है, इसे लेकर सस्पेंस बना हुआ है।
थाना प्रभारी मनीष कुमार ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि पुलिस हर एंगल को खंगाल रही है। केस की जाँच मर्डर और सुसाइड, दोनों ही बिंदुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। पीड़ित परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और फॉरेंसिक लैब की वैज्ञानिक जाँच रिपोर्ट के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कलेजे के टुकड़ों को खोकर बिलख उठे परिवार, दोस्ती की कहानी ने झकझोरा
24 Jun, 2026 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कानपुर| उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण और कलेजा कंपा देने वाले अग्निकांड की तपिश ने कानपुर शहर के दो आशियानों के चिरागों को हमेशा के लिए बुझा दिया। इस हादसे में जान गंवाने वाले गोविंद नगर निवासी संयम और बर्रा के रहने वाले सूरज की वर्षों पुरानी और अटूट दोस्ती थी। दोनों ने रतनलाल नगर के दून स्कूल से एक साथ अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की, अपने सुनहरे भविष्य और करियर के सपने संजोकर एक साथ एनीमेशन स्टूडियो में नौकरी की शुरुआत की, और अफसोस कि इस भयानक हादसे में दोनों ने एक साथ इस दुनिया को भी अलविदा कह दिया।
परिजनों और चश्मदीदों के मुताबिक, दोनों दोस्तों की मौत इमारत के भीतर फैले अत्यधिक जहरीले धुएं के कारण दम घुटने से हुई है। उनके शरीर पूरी तरह काले पड़ चुके थे। आशंका जताई जा रही है कि आग की लपटों और धुएं से खुद को बचाने के लिए दोनों दोस्तों ने खुद को किसी सुरक्षित कमरे या बाथरूम में बंद कर लिया था, जो बाद में उनका काल बन गया। मंगलवार तड़के करीब 5:00 बजे संयम का पार्थिव शरीर गोविंद नगर 11 ब्लॉक स्थित उनके निवास पर पहुंचा और उसके कुछ ही देर बाद सुबह 6:30 बजे सूरज का शव भी बर्रा-7 लाया गया, जिसके बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई।
"एक बार तो बोल बेटा..." मां की करुण पुकार से रो पड़ा पूरा मोहल्ला
मंगलवार की सुबह जब संयम का शव उसके घर के चौखट पर लाया गया, तो उसकी मां सोनिया बेटे के शव से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगीं। उनकी दर्दनाक चीखें वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर रही थीं। वे बार-बार कह रही थीं, "ऐसे कैसे बिना कुछ बताए चला गया बेटा... कुछ तो बोल, तेरी मां तेरी एक आवाज सुनने के लिए तड़प रही है।"
परिजनों ने बताया कि संयम के जीवन को लेकर परिवार के ढेरों अरमान थे। उसके मामा सौरभ दुआ ने रुआंसे गले से कहा कि, "भांजे की बारात निकालने की तैयारियां सोच रखी थीं, क्या पता था कि बारात की जगह उसकी अंतिम यात्रा में शामिल होना पड़ेगा।"
दादी के 17वें संस्कार के दिन ही उठी पोते की अर्थी
संयम के परिवार पर दुखों का यह पहाड़ बेहद अजीब और दर्दनाक समय पर टूटा है। महज 17 दिन पहले ही संयम की दादी ऊषा रानी का स्वर्गवास हुआ था और मंगलवार को ही उनका सत्रहवां संस्कार संपन्न होना था। संयम ने परिवार को वचन दिया था कि वह मंगलवार की सुबह की ट्रेन से इस संस्कार में शामिल होने के लिए कानपुर पहुंचेगा। लेकिन सुबह उसकी जगह जब उसका शव घर आया, तो पूरे मोहल्ले का कलेजा फट गया। बर्रा-2 स्थित स्वर्गाश्रम घाट पर गमगीन माहौल में संयम का अंतिम संस्कार किया गया।
मां से कहा था— 'घर पहुंच गया हूं, ख्याल रखना', कुछ घंटों बाद आया शव
दूसरी तरफ, बर्रा-7 में सोमवार की पूरी रात सूरज की मां मीरा को इस अनहोनी की भनक तक नहीं लगने दी गई थी। परिजनों ने उन्हें ढांढस बंधाने के लिए कह रखा था कि सूरज सिर्फ मामूली रूप से जख्मी है और उसे इलाज के लिए अस्पताल से घर लाया जा रहा है। लेकिन जैसे ही सुबह गाड़ी से सूरज का शव नीचे उतारा गया, मां बदहवास होकर जमीन पर गिर पड़ीं।
वे रोते हुए चिल्लाने लगीं, "तूने तो कल ही फोन पर कहा था कि मैं बस घर पहुंचने वाला हूं, तुम अपना ख्याल रखना... अब तेरे बिना मेरा ख्याल कौन रखेगा।" सूरज के मामा जितेंद्र ने बताया कि सूरज अभी दो दिन पहले ही अपनी शादी के लिए लड़की देखने शहर आया था। तीन साल पहले एक पेट्रोल पंप हादसे में पिता शिवराम सिंह की मौत के बाद पूरे घर, छोटी बहन सौम्या और भाई सम्राट की जिम्मेदारी अकेले सूरज के ही कंधों पर थी। दोपहर में जब उसका छोटा भाई ऋषिकेश से कानपुर पहुंचा, तब भैरव घाट पर सूरज का अंतिम संस्कार किया गया।
शॉर्ट सर्किट और एसी कंप्रेसर फटने से भड़की थी आग, 15 छात्रों की मौत
यह पूरी त्रासदी लखनऊ के अलीगंज स्थित एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में लगी भीषण आग के कारण हुई। इस दर्दनाक हादसे में एनीमेशन और कोचिंग करने वाले कुल 15 छात्र-छात्राओं की जलने और दम घुटने से असमय मौत हो गई, जबकि 9 से अधिक छात्र गंभीर रूप से झुलस गए और खिड़कियों से कूदने के कारण चोटिल हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज जारी है।
अलीगंज बिल्डिंग का लेआउट और घटनाक्रम
विवरण
ग्राउंड फ्लोर (भूतल)
पेट शॉप (पालतू जानवरों की दुकान) संचालित थी।
प्रथम तल (First Floor)
पेट शॉप मालिक का मुख्य वेयरहाउस (गोदाम) था।
द्वितीय व तृतीय तल
3D एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर, गेमिंग जोन और 12वीं की कोचिंग।
आग का कारण और समय
दोपहर करीब 2:30 बजे वेयरहाउस में शॉर्ट सर्किट के बाद एसी का कंप्रेसर फटा।
दमकल और पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, वेयरहाउस में लगी आग ने चंद मिनटों में ही विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी सीढ़ी को धुएं की चपेट में ले लिया। दूसरी और तीसरी मंजिल पर पढ़ रहे छात्रों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिल सका। करीब दो घंटे तक चले एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद खिड़कियां काटकर 15 शवों को बाहर निकाला जा सका।
दौरा छोड़ मौके पर पहुंचे सीएम योगी; मृतकों को 7-7 लाख रुपये का मुआवजा
हादसे की भयावहता की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना अलीगढ़ का वीआईपी दौरा बीच में ही रद्द कर तुरंत लखनऊ वापस लौटे और सीधे घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दिल्ली से तत्काल लखनऊ पहुंचकर अस्पताल में भर्ती घायल बच्चों का हालचाल जाना। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश पर गृह सचिव और डीजीपी सहित तमाम आला अधिकारियों की विशेष टीम आग के तकनीकी कारणों की जांच कर रही है।
इस राष्ट्रीय त्रासदी पर शोक व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार की तरफ से मृतकों के आश्रितों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से प्रत्येक मृतक के शोकाकुल परिवार को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज के साथ 50-50 हजार रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है।
हीटवेव अलर्ट के बीच प्रशासन का निर्णय, 8वीं तक स्कूल बंद
24 Jun, 2026 10:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में आसमान से बरसती आग और चिलचिलाती धूप को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने बच्चों की सेहत की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। जिला मजिस्ट्रेट कुमार गौरव ने बुधवार को एक आधिकारिक निर्देश जारी करते हुए 24 जून से 27 जून 2026 तक जिले के सभी सरकारी, प्राइवेट और प्ले-स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह स्थगित करने का फैसला किया है।
नए कानून की धारा-163 के तहत प्रतिबंध लागू
डीएम द्वारा जारी किए गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में पारा लगातार बढ़ रहा है, और दोपहर की भीषण लू बच्चों के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती है। छात्रों की भलाई को सर्वोपरि मानते हुए प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा-163 के अंतर्गत इस पाबंदी को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है।
कक्षाओं के संचालन के लिए समय में बदलाव
प्रशासनिक आदेश के मुताबिक, नर्सरी से लेकर सातवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए सभी शैक्षणिक कार्य पूरी तरह बंद रहेंगे। हालांकि, आठवीं और उससे ऊपर की बड़ी कक्षाओं के लिए थोड़ी राहत दी गई है; इन कक्षाओं की पढ़ाई सुबह 10:00 बजे तक ही संचालित की जा सकेगी। स्कूल संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वे इस समयावधि के अनुसार ही अपनी कक्षाओं और अन्य गतिविधियों का शेड्यूल तय करें।
आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए भी कड़े नियम
स्कूली बच्चों के साथ-साथ छोटे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) विभाग को भी सख्त गाइडलाइन दी है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर सुबह 9:00 बजे से पहले ही बच्चों को पोषाहार बांट दिया जाए। इस तय समय के बाद केंद्रों पर होने वाली अन्य सभी रोज़मर्रा की गतिविधियां पूरी तरह बंद रहेंगी।
लापरवाही बरतने पर होगी सख्त कार्रवाई
जिलाधिकारी कुमार गौरव ने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की है कि वे इस मौसम में बच्चों को बिना वजह तेज धूप में बाहर न निकलने दें और उन्हें हाइड्रेटेड रखें। प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों और पुलिस बल को निर्देश दिया है कि इस आदेश का जमीन पर कड़ाई से पालन कराया जाए। यदि कोई भी संस्थान नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह व्यवस्था 27 जून तक प्रभावी रूप से लागू रहेगी।
कंकड़ लगते ही उग्र हुईं मधुमक्खियां, जानलेवा साबित हुई बच्चों की हरकत
24 Jun, 2026 10:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आजमगढ़| उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के निजामाबाद थाना क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां के फरिहा कस्बे के अंतर्गत आने वाले कुरैशी मोहल्ले में रहने वाले इश्तियाक कुरैशी (65 वर्ष) की मधुमक्खियों के भीषण और जानलेवा हमले में मौत हो गई। इस दुखद हादसे के बाद से जहां पीड़ित परिवार में कोहराम मचा हुआ है, वहीं पूरे गांव और आसपास के इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।
बकरियां चराने गए थे बुजुर्ग, लड़कों की नादानी पड़ी भारी
परिजनों और चश्मदीदों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना मंगलवार की शाम को हुई। बुजुर्ग इश्तियाक कुरैशी हमेशा की तरह अपनी बकरियों को चराने के लिए फरिहा कस्बे में स्थित एक सरकारी ट्यूबवेल के पास गए हुए थे। उसी दौरान वहां कुछ स्थानीय लड़के पास में ही मौजूद आम के एक बड़े पेड़ से फल तोड़ने की कोशिश कर रहे थे और इसके लिए वे पेड़ पर लगातार कंकड़ मार रहे थे।
बदकिस्मती से, उसी आम के पेड़ की टहनी पर मधुमक्खियों का एक बहुत बड़ा छत्ता लगा हुआ था। लड़कों द्वारा फेंका गया एक कंकड़ सीधे जाकर मधुमक्खियों के छत्ते पर लग गया। कंकड़ टकराते ही हजारों मधुमक्खियां बुरी तरह भड़क गईं और उन्होंने झुंड बनाकर आसपास मौजूद लोगों पर हमला बोल दिया। पत्थर मारने वाले लड़के तो फुर्ती दिखाते हुए मौके से भागने में सफल रहे, लेकिन उम्रदराज होने के कारण इश्तियाक कुरैशी वहां से समय पर नहीं भाग सके और मधुमक्खियों के जानलेवा झुंड के बीच बुरी तरह फंस गए।
जान बचाने के लिए हौज के पानी में उतरे, फिर भी नहीं छोड़ा पीछा
हजारों मधुमक्खियों ने इश्तियाक के पूरे शरीर पर बेरहमी से डंक मारना शुरू कर दिया। इस अचानक हुए हमले से घबराकर अपनी जान बचाने के लिए वे पास में ही स्थित सरकारी ट्यूबवेल के पानी से लबालब भरे हौज (कुंड) में कूद गए। उन्होंने खुद को बचाने के लिए काफी देर तक पानी के भीतर डुबोकर रखा। इसके बावजूद, शिकारी मधुमक्खियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और वे पानी की सतह के ठीक ऊपर झुंड बनाकर मंडराती रहीं।
काफी देर तक पानी में रहने के कारण जब बुजुर्ग को सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी, तो वे लाचार होकर पानी से बाहर निकले और खेतों की तरफ दौड़ पड़े। लेकिन खूंखार मधुमक्खियों के दल ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और उनके चेहरे, सिर और पूरे शरीर पर लगातार सैकड़ों डंक मारते रहे।
हमले से खेत में ही हुए अचेत; कंबल ओढ़कर युवकों ने बचाया
मधुमक्खियों के लगातार और भीषण हमले के कारण बुजुर्ग का शरीर जहर से नीला पड़ने लगा और वे तड़पते हुए खेत में ही बेहोश होकर गिर पड़े। मैदान में चारों तरफ मधुमक्खियों का भयंकर आतंक फैला हुआ था, जिसके कारण शुरुआती कुछ मिनटों तक कोई भी ग्रामीण या राहगीर उनके पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।
बाद में गांव के कुछ साहसी युवकों ने सूझबूझ दिखाई। उन्होंने अपने शरीर पर मोटे कंबल ओढ़े और धुएं व आग की मदद से बड़ी मशक्कत के बाद मधुमक्खियों को वहां से खदेड़ा। युवकों ने तुरंत अचेत हो चुके इश्तियाक को वहां से बाहर निकाला और इलाज के लिए फरिहा के एक नजदीकी निजी अस्पताल लेकर भागे।
जिला अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम
निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने बुजुर्ग की गंभीर और नाजुक हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें तुरंत जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में डॉक्टरों की विशेष टीम ने रातभर उनके शरीर से जहर निकालने और उन्हें बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन अत्यधिक डंक मारे जाने के कारण देर रात इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इश्तियाक की मौत की खबर जैसे ही गांव में पहुंची, परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया। ग्रामीण और रिश्तेदार बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने उनके घर पहुंच रहे हैं।
मोहन यादव विवाद के बीच राजभर का बड़ा दावा, जमीनों पर घिरे अखिलेश यादव
24 Jun, 2026 10:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार से जुड़े जमीन खरीद विवाद ने अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया और बेहद आक्रामक मोड़ ले लिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा मोहन यादव का खुलकर बचाव किए जाने के बाद यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने उन पर पलटवार किया है। राजभर ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट साझा कर अखिलेश यादव और सैफई परिवार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि इस मामले में अखिलेश यादव की घबराहट और बौखलाहट के पीछे करोड़ों रुपये के बेनामी निवेश का छिपा हुआ राज है।
अखिलेश जी! आप इतना शोर मचाकर क्या छिपाना चाहते हैं?
कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अखिलेश यादव को सीधे संबोधित करते हुए तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने लिखा अखिलेश यादव जी, मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री के संबंध में आप इतना हल्ला क्यों मचा रहे हैं? इतना शोर करके आप आखिर क्या छुपाना चाहते हैं? आप ऐसा क्यों चाहते हैं कि दुनिया सिर्फ वही देखे जो आप दिखाना चाहते हैं? अब मैं उत्तर प्रदेश की जनता को बताता हूं कि आपकी असली पीड़ा क्या है और आप क्यों घबरे हुए हैं।"
राजभर ने आरोप लगाया कि जैसे ही मध्य प्रदेश के इस जमीन मामले की परतें खुलीं, वैसे ही अखिलेश यादव के निवेश पर चोट पहुंच गई और इसी वजह से वे पूरी तरह बौखला गए हैं।
एमपी के आईएएस भरत यादव और सपा कोषाध्यक्ष के रिश्ते का पर्दाफाश
राजभर ने अपनी पोस्ट में एक बेहद चौंकाने वाला प्रशासनिक और पारिवारिक कनेक्शन सामने रखा है। उन्होंने दावा किया कि:
मध्य प्रदेश (एमपी) कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भरत यादव, जो वर्तमान में राज्य सड़क विकास निगम के चेयरमैन हैं, उनसे अखिलेश यादव के बेहद करीबी रिश्ते हैं।
भरत यादव दरअसल समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष चंद्रपाल यादव के सगे दामाद हैं, जिन्हें राजभर ने अखिलेश यादव का "कुबेर" (वित्तीय रणनीतिकार) बताया है।
राजभर का आरोप है कि मध्य प्रदेश में नए हाईवे का रूट कहां से गुजरेगा, इसकी पूरी सटीक जानकारी आईएएस भरत यादव के पास होती है, जो सैफई परिवार के बेहद खास हैं।
राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव की तिलमिलाहट साफ बयां कर रही है कि भरत यादव के जरिए उनके और उनके करीबियों के पैसे मध्य प्रदेश की उन जमीनों में भारी मात्रा में निवेश कराए गए हैं, जहां से हाईवे गुजरने वाला है।
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे का जिक्र: 'जमीन खाने में सैफई परिवार अनुभवी'
अखिलेश यादव पर हमला जारी रखते हुए राजभर ने उत्तर प्रदेश के पुराने कार्यकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन 'खाने' के मामले में सैफई परिवार को पुराना और बड़ा अनुभव है, जिसे पूरा उत्तर प्रदेश अच्छी तरह जानता है।
उन्होंने दावा किया कि लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान भी यही खेल खेला गया था। फिरोजाबाद से लेकर इटावा तक सपा नेताओं ने पहले ही औने-पौने दामों पर किसानों से जमीनें खरीद ली थीं। बाद में निजी और पारिवारिक फायदे के लिए एक्सप्रेसवे के रूट को मनमाने तरीके से सैफई गांव की तरफ घुमा दिया गया, जिससे एक्सप्रेसवे की कुल दूरी बेवजह 30 किलोमीटर और बढ़ गई। बाद में उन जमीनों के बदले सरकार से भारी-भरकम मुआवजा वसूला गया।
'गोमती रिवर फ्रंट' के बाद अब एमपी एक्सप्रेसवे रिपोर्ट का डर
ओपी राजभर ने सपा कार्यकर्ताओं पर निशाना साधते हुए लिखा कि गोमती रिवर फ्रंट घोटाले की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद से अखिलेश यादव के मन में एक गहरा डर बैठ गया है। उन्हें डर है कि यदि मध्य प्रदेश की एक्सप्रेसवे लैंड डील की वास्तविक रिपोर्ट सामने आ गई, तो वहां किया गया उनका सारा बेनामी निवेश पूरी तरह डूब जाएगा। राजभर ने देश की केंद्रीय जांच एजेंसियों से मांग की है कि वे इस बात का पता लगाएं कि मध्य प्रदेश के इस जमीन विवाद में उत्तर प्रदेश के कौन-कौन से बड़े सफेदपोश और राजनेता शामिल हैं।
अखिलेश यादव ने किया था मोहन यादव का बचाव; बताया था बीजेपी की साजिश
गौरतलब है कि इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार पर रियल एस्टेट और जमीन खरीद को लेकर कुछ आरोप लगे थे। इस मामले में अचानक कूदते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मोहन यादव का खुलकर समर्थन किया था।
अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आंतरिक साजिश करार देते हुए कहा था कि मोहन यादव को बदनाम करने के लिए खुद बीजेपी के लोगों ने यह जाल बुना है। अखिलेश ने सवाल उठाया था कि क्या बीजेपी को पहले से पता नहीं था कि मुख्यमंत्री बनने से पहले मोहन यादव रियल एस्टेट का कारोबार करते थे?
अखिलेश ने दावा किया था कि, "यह आरोप इसलिए लगाए जा रहे हैं क्योंकि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व राज्यों के मुख्यमंत्री बदलने का बहाना ढूंढ रहा है। वे मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को पद से हटाना चाहते हैं, और इन दोनों को इसलिए हटाया जा रहा है ताकि अंततः वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को उनके पद से हटा सकें।" अब अखिलेश के इसी बयान पर यूपी में नया सियासी घमासान छिड़ गया है।
अलीगंज हादसे के पीछे पुरानी लापरवाही? सामने आई चौंकाने वाली जानकारी
24 Jun, 2026 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ| उत्तर प्रदेश की राजधानी के अलीगंज इलाके में स्थित एनीमेशन सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और हैरान कर देने वाला खुलासा सामने आया है। इस भयावह हादसे के दो वर्ष पहले भी इसी संस्थान में मौत की चिंगारियां उठी थीं। उस वक्त भी सेंटर के भीतर भयंकर शॉर्ट सर्किट हुआ था, लेकिन सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार अधिकारी और प्रबंधन गहरी नींद में सोए रहे।
न तो पूर्व की घटना से कोई सबक लिया गया और न ही सेंटर के भीतर सुरक्षा व आग से बचाव के कोई पुख्ता इंतजाम किए गए। अलीगंज अग्निकांड में साक्षात मौत के मुंह से बाल-बाल बचकर बाहर आए आशियाना इलाके के निवासी मोहम्मद आसिफ ने इस पूरे लापरवाही तंत्र का पर्दाफाश किया है। आसिफ ने बताया कि वर्ष 2024 के मई-जून के महीनों में भीषण गर्मी के दौरान दोपहर के वक्त सेंटर में तगड़ा शॉर्ट सर्किट हुआ था। उस समय चिंगारियां निकलने के बाद पूरे सेंटर में काला धुआं फैल गया था और छात्रों में अफरा-तफरी मच गई थी। उस वक्त प्रबंधन ने तुरंत सबकी छुट्टी कर दी थी और दो दिन बाद हालात सामान्य होने पर दोबारा क्लास शुरू की थी।
छत का दरवाजा लोहे के ताले से था बंद; जाने की नहीं थी इजाजत
प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद आसिफ ने बताया कि दो वर्ष पहले हुए हादसे के वक्त भी सेंटर में आने-जाने के लिए केवल एक ही संकरा रास्ता मौजूद था। सबसे बड़ी लापरवाही यह थी कि किसी भी छात्र या कर्मचारी को आपातकालीन स्थिति में भी छत पर जाने की अनुमति नहीं थी। छत के मुख्य रास्ते पर लोहे का एक बेहद मजबूत दरवाजा लगाकर उसमें हमेशा बड़ा ताला जड़कर रखा जाता था।
आसिफ ने भरे गले से कहा कि दो साल पहले हुए शॉर्ट सर्किट में किस्मत अच्छी थी कि कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन वहां पढ़ने वाले छात्रों और कर्मचारियों के जेहन में एक गहरा डर बैठ गया था। अगर उसी वक्त प्रशासन और प्रबंधन जाग जाता और इमारत में एक आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था कर दी गई होती, तो आज उनके 15 बेकसूर साथियों की जान नहीं जाती। इस सामूहिक हत्याकांड के लिए स्थानीय प्रशासन भी बराबर का कसूरवार है, जिसने कभी भी इस कमर्शियल सेंटर की सुरक्षा और फायर एनओसी की जांच करने की जहमत नहीं उठाई।
महज 30 मिनट में बिछ गईं 15 लाशें; फेस डिटेक्शन गेट बना काल
हादसे के उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए आसिफ ने बताया कि अलीगंज अग्निकांड में महज 30 मिनट के भीतर ही उनके 15 साथियों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। आग लगने के बाद अंदर के हालात इतने बदतर और रूह कँपा देने वाले थे कि जिंदा लोगों को बचाना तो दूर, दम टूटने के बाद शवों को बाहर निकालने तक का कोई रास्ता नहीं बचा था।
इसकी सबसे बड़ी और तकनीकी वजह यह थी कि सेंटर का मुख्य प्रवेश द्वार पूरी तरह हाई-टेक और बायोमीट्रिक सिस्टम पर काम करता था। यह गेट केवल 'फेस डिटेक्शन' (चेहरा पहचानने) के बाद ही खुलता या बंद होता था। जैसे ही सेंटर में शॉर्ट सर्किट के बाद आग भड़की, बिजली गुल होते ही वह ऑटोमैटिक बायोमीट्रिक सिस्टम अपने आप पूरी तरह जाम (लॉक) हो गया। इसके कारण अंदर फंसे छात्र चाहकर भी मुख्य द्वार को धक्का देकर बाहर नहीं भाग सके।
इंटरनेट केबल के सहारे खिड़की से कूदे; 2 मिनट में आ गई थी मौत पास
आसिफ कहते हैं कि, "मेरी किस्मत बहुत अच्छी थी कि मैं आज जिंदा यह दास्तां सुना पा रहा हूं। आग लगने के केवल दो मिनट के भीतर ही मौत हमारे सिर पर नाच रही थी। मुख्य दरवाजा लॉक हो चुका था और चारों तरफ से आग की लपटें हमें घेर रही थीं। ऐसे में हमने बिना वक्त गंवाए सूझबूझ दिखाई और कमरे की खिड़की का भारी शीशा तोड़ दिया।"
खिड़की तोड़ने के बाद आसिफ और उनके कुछ दोस्तों ने दीवार के सहारे लटक रहे इंटरनेट और वाई-फाई के मोटे केबलों (तारों) को कसकर पकड़ा और उसके सहारे नीचे कूदने का जानलेवा फैसला किया। उस समय नीचे सड़क पर भारी भीड़ जमा हो चुकी थी और लोग चिल्ला रहे थे कि, "बस नीचे कूद जाओ, हम संभाल लेंगे, जिंदगी बच जाएगी।" केबल के सहारे केवल 5 से 6 साथी ही किसी तरह नीचे कूदकर मौत के चंगुल से सकुशल बाहर निकल पाए, जबकि बाकी अन्य साथी अंदर ही घने धुएं और आग की लपटों के बीच फंस गए और दम तोड़ने के कारण असमय काल के गाल में समा गए।
छापेमारी के दौरान भड़की महिला तस्कर, मौके पर किया हंगामा
23 Jun, 2026 04:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ अवैध शराब के धंधे पर नकेल कसने पहुँची उत्पाद विभाग की टीम को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। छापेमारी के दौरान एक महिला शराब तस्कर ने कार्रवाई का विरोध करते हुए महिला पुलिसकर्मी के साथ नोकझोंक और हाथापाई शुरू कर दी। हालांकि, इस भारी हंगामे और विरोध के बावजूद उत्पाद विभाग की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए महिला को दबोच लिया और मौके से शराब की एक बड़ी खेप भी बरामद की।
गुप्त सूचना पर पहुँची थी टीम, महिला ने काटा हंगामा
उत्पाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि अहियापुर थाना क्षेत्र के भीखनपुर गांव में बड़े पैमाने पर अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। इस इनपुट के आधार पर जब टीम भीखनपुर गाँव पहुँची, तो वहाँ मौजूद एक महिला ने टीम को देखते ही हंगामा करना शुरू कर दिया। महिला ने न सिर्फ छापेमारी रोकने की कोशिश की, बल्कि ड्यूटी पर मौजूद महिला पुलिसकर्मी से भी उलझ गई। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
कड़ी मशक्कत के बाद पूजा कुमारी गिरफ्तार
महिला के आक्रामक रुख और विरोध को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों को उसे नियंत्रित करने में काफी पसीना बहाना पड़ा। काफी जद्दोजहद के बाद आखिरकार टीम ने उसे हिरासत में ले लिया। पकड़ी गई महिला की पहचान भीखनपुर निवासी रितेश कुमार की पत्नी पूजा कुमारी के रूप में हुई है।
पति-पत्नी मिलकर चला रहे थे सिंडिकेट
मामले की जानकारी देते हुए उत्पाद विभाग के इंस्पेक्टर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि रितेश कुमार और उसकी पत्नी पूजा कुमारी मिलकर इस अवैध धंधे को ऑपरेट कर रहे थे। शुरुआती जाँच के अनुसार, पति बाहर से शराब की खेप लाकर देता था और आगे ग्राहकों तक इसे पहुँचाने और बेचने का पूरा जिम्मा पूजा कुमारी संभालती थी। टीम ने जब घर के पास छानबीन की, तो वहाँ से भारी मात्रा में विदेशी शराब जब्त की गई।
जेल भेजी गई आरोपी महिला, नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस
शराब की बरामदगी के बाद उत्पाद विभाग ने नियमानुसार जब्ती सूची तैयार की और सरकारी कार्य में बाधा डालने व शराब तस्करी के आरोप में पूजा कुमारी को गिरफ्तार कर लिया। विभाग की महिला गृह रक्षक (होमगार्ड) के साथ हाथापाई करने के बावजूद टीम उसे थाने ले आई, जहाँ पूछताछ के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। उत्पाद विभाग अब इस बात का पता लगा रहा है कि यह दंपत्ति कब से इस धंधे में शामिल था और इस अवैध नेटवर्क के तार कहाँ-कहाँ से जुड़े हैं। फरार पति की तलाश में छापेमारी जारी है।
सड़क पर शव रखकर ग्रामीणों ने किया विरोध प्रदर्शन, आवागमन ठप
23 Jun, 2026 04:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
समस्तीपुर। बिहार के समस्तीपुर में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। यहाँ बेखौफ बदमाशों ने एक और गिट्टी-बालू व्यवसायी को निशाना बनाते हुए उनके सिर में गोली मार दी। गोली लगते ही वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े। फायरिंग की आवाज सुनकर जब तक आस-पास के लोग घटनास्थल पर पहुंचे, तब तक हमलावर मौके से रफूचक्कर हो चुके थे। आनन-फानन में घायल कारोबारी को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया। मृतक की पहचान कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र निवासी धीरेंद्र प्रसाद सिंह के पुत्र सोनू सिंह के रूप में की गई है।
शव को सड़क पर रख किया प्रदर्शन, लगा लंबा जाम
इस दुस्साहसिक हत्याकांड से नाराज ग्रामीणों का गुस्सा मंगलवार को फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने शव को बीच सड़क पर रखकर जाम लगा दिया और जमकर विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर फूंककर आगजनी भी की, जिसके कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्पूरीग्राम, ताजपुर और मुफस्सिल थाने की पुलिस फोर्स तुरंत मौके पर पहुंची।
आक्रोशित जनता के निशाने पर आई पुलिस
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस टीम को स्थानीय लोगों के भारी गुस्से और तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारी हत्यारों की अविलंब गिरफ्तारी और उन्हें फांसी की सजा देने की मांग पर अड़े थे। लोजपा (रा.) के जिलाध्यक्ष अनुपम सिंह उर्फ हीरा सिंह के नेतृत्व में चल रहा यह प्रदर्शन करीब तीन घंटे तक जारी रहा। बाद में प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद लोग शांत हुए और जाम खोला जा सका।
दोस्तों के साथ बैठे थे, तभी मारी गोली
मिली जानकारी के अनुसार, कर्पूरीग्राम के रहने वाले सोनू सिंह सोमवार की शाम अपने कुछ दोस्तों के साथ बैठकर ताश खेल रहे थे। इसी बीच घात लगाए अपराधियों ने उन पर फायरिंग कर दी। परिजन तुरंत उन्हें सदर अस्पताल ले गए, जहाँ नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया।
अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में तोड़ा दम
परिजन उन्हें लेकर एक निजी नर्सिंग होम पहुंचे, लेकिन वहाँ से भी उन्हें पटना के लिए रेफर कर दिया गया। बदकिस्मती से, देर रात पटना पहुंचने से ठीक पहले रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब शव गांव लाया गया, तो ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया।
इकलौते चिराग की बुझी जिंदगी, गांव में दहशत
स्थानीय ग्रामीण हीरा सिंह ने बताया कि सोनू सिंह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और उनके दो छोटे बच्चे हैं। इस वारदात के पीछे गांव के ही एक शख्स पर शक जताया जा रहा है। हालांकि, दोनों के बीच किस बात को लेकर दुश्मनी थी, यह अभी तफ्तीश का विषय है। दिनदहाड़े हुई इस हत्या से पूरे इलाके में दहशत और तनाव का माहौल है।
मुख्य आरोपी की पहचान, धरपकड़ के लिए पुलिसिया दबिश तेज
पुलिस इस पूरे मामले की हर एंगल से बारीकी से जांच कर रही है। सदर डीएसपी संजय कुमार पांडे ने बताया कि गोली चलाने वाले मुख्य आरोपी की पहचान कर ली गई है। उसे दबोचने के लिए पुलिस की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं और बहुत जल्द वह सलाखों के पीछे होगा। गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा कर्मियों की लापरवाही उजागर हुई
23 Jun, 2026 02:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बक्सर। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बक्सर आगमन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में हुई बड़ी लापरवाही को बिहार सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग ने बक्सर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (EO) कुमार ऋत्विक को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। विभाग द्वारा जारी ऑफिशियल लेटर के मुताबिक, 23 मई को मुख्यमंत्री के दौरे के समय सुरक्षा मानकों की अनदेखी और सरकारी आदेशों की अवहेलना करने के आरोप में यह सख्त कदम उठाया गया है।
हेलीकॉप्टर लैंडिंग में हुई थी दिक्कत, बैठाई गई थी जांच
आपको बता दें कि मुख्यमंत्री के बक्सर दौरे के समय उनका हेलीकॉप्टर किला मैदान में तय की गई जगह पर लैंड नहीं हो पाया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने फौरन एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (ADM) की अगुवाई में एक हाई-लेवल इंक्वायरी कमेटी बनाई थी।
जांच रिपोर्ट में खुली लापरवाही की पोल
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कार्यपालक पदाधिकारी कुमार ऋत्विक को सीधे तौर पर सुरक्षा व्यवस्था में लगी इस सेंध के लिए कसूरवार पाया। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि अफसर ने अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभाया, ड्यूटी में भारी लापरवाही की और सीनियर अधिकारियों के गाइडलाइंस को भी नजरअंदाज किया। वीवीआईपी (VVIP) सुरक्षा को लेकर इतनी बड़ी चूक को बेहद गंभीर माना गया।
सरकारी सेवा नियमों के उल्लंघन पर गिरी गाज
बक्सर के जिला अधिकारी (DM) द्वारा भेजी गई रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग ने माना कि कार्यपालक पदाधिकारी का यह बर्ताव 'बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1976' के नियमों के खिलाफ है। इसके बाद 'बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005' के तहत उन्हें आगामी आदेश तक के लिए सस्पेंड कर दिया गया।
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