उत्तर प्रदेश
नीतीश-RCP मुलाकात के क्या हैं मायने? सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर
27 Jun, 2026 01:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना:बिहार की सियासत में शनिवार को उस समय एक बड़ा मोड़ देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कभी 'राम' कहे जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री रामचंद्र प्रसाद (आरसीपी) सिंह अचानक उनसे मिलने पटना स्थित सर्कुलर रोड आवास पर पहुंचे। लंबे समय के बाद दोनों बड़े नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात की तस्वीरें जैसे ही सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में सामने आईं, राज्य की राजनीति में अटकलों का बाजार बेहद गर्म हो गया। राजनीतिक पंडित इस मुलाकात को आरसीपी सिंह की जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में दोबारा घर वापसी के एक बड़े और पुख्ता संकेत के रूप में देख रहे हैं।
चार साल बाद हुई सकारात्मक मुलाकात, आरसीपी सिंह ने नीतीश को बताया मजबूत
मुलाकात के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत करते हुए आरसीपी सिंह ने बेहद सधे हुए अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लगभग चार साल के लंबे अंतराल के बाद उनकी यह मुलाकात बेहद आत्मीय और सकारात्मक माहौल में हुई है। उन्होंने उन विरोधियों को भी कड़ा संदेश दिया जो मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में मुख्यमंत्री को कमजोर मान रहे हैं। आरसीपी सिंह ने साफ कहा कि कुछ लोग नीतीश कुमार को कम आंकने की भूल कर रहे हैं, जबकि वह कल भी राजनीतिक रूप से बेहद मजबूत थे और आज भी पूरी तरह सशक्त हैं। जदयू में दोबारा शामिल होने के सीधे सवाल पर उन्होंने पत्ता न खोलते हुए बस इतना कहा कि सही समय का इंतजार किया जाना चाहिए।
नीतीश के आवास के बाहर समर्थकों का जोरदार हंगामा
इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री आवास के बाहर एक समय हाई-वोल्टेज ड्रामा भी देखने को मिला। आरसीपी सिंह के साथ आए समर्थकों ने गेट के बाहर जमकर नारेबाजी और हंगामा किया। समर्थकों का सीधा आरोप था कि जदयू के कुछ अंदरूनी नेता, जिनमें संजय गांधी और ललन सर्राफ शामिल हैं, आरसीपी सिंह को मुख्यमंत्री से मिलने से रोकने का प्रयास कर रहे थे। समर्थकों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि इन नेताओं के मन में आरसीपी सिंह का डर है, जिसकी वजह से वे दोनों पुराने सहयोगियों को दूर रखना चाहते हैं। हालांकि, बाहर हो रहे हंगामे को देखते हुए थोड़ी ही देर बाद आरसीपी सिंह को अंदर बुला लिया गया, जिसके बाद बाहर मौजूद समर्थक शांत हुए। समर्थकों के इस गुस्से पर आरसीपी सिंह ने कहा कि नेता से मिलने की चाहत में कभी-कभी ऐसी भावनाएं सामने आ जाती हैं, लेकिन अब सब कुछ पूरी तरह ठीक है।
जदयू के भीतर बदले सुर, घर वापसी का रास्ता लगभग साफ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार रहे आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी अब महज एक औपचारिकता रह गई है। हाल के दिनों में आरसीपी सिंह द्वारा मुख्यमंत्री की लगातार की जा रही तारीफों ने इस बात की जमीन पहले ही तैयार कर दी थी। पार्टी के भीतर भी अब उनके खिलाफ चल रहा पुराना गतिरोध लगभग खत्म हो चुका है और वरिष्ठ नेताओं के बीच उनके स्वागत के लिए सकारात्मक माहौल बन रहा है। जदयू के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने भी सार्वजनिक तौर पर बयान देकर इसका समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि जदयू आरसीपी सिंह का अपना पुराना घर है और अपने घर लौटने वाले का हमेशा स्वागत होता है। वरिष्ठ नेताओं की इस हरी झंडी के बाद माना जा रहा है कि बिहार के सत्ताधारी दल में जल्द ही संगठनात्मक स्तर पर कोई बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
पेड़ से भिड़ी कार, शराब की बोतलें देख मौके पर मची लूट
27 Jun, 2026 01:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गोपालगंज:बिहार के गोपालगंज जिले में भोरे-कटेया मुख्य मार्ग पर शनिवार के तड़के सुबह एक बेहद अजीबोगरीब सड़क हादसा सामने आया है। यहाँ उत्तर प्रदेश के रजिस्ट्रेशन नंबर वाली एक बेहद तेज़ रफ़्तार कार अचानक अनियंत्रित हो गई और भोरे थाना इलाके में हीरो एजेंसी के समीप सड़क किनारे एक बड़े पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी ज़ोरदार और भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। हालांकि, इस पूरे वाकये में सबसे गनीमत की बात यह रही कि दुर्घटना में किसी भी व्यक्ति के हताहत होने या गंभीर रूप से घायल होने की कोई खबर नहीं मिली है।
कार के भीतर दिखा 'मधुशाला' का नज़ारा, ग्रामीणों में मची लूटने की होड़
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, सुबह-सुबह जब लोग अपने घरों से बाहर निकले तो उन्होंने सड़क किनारे क्षतिग्रस्त हालत में इस लग्जरी कार को देखा। जब कुछ लोग मदद के इरादे से गाड़ी के करीब पहुंचे, तो कार के अंदर का नजारा देखकर दंग रह गए। कार के भीतर भारी मात्रा में विदेशी शराब की बोतलें ठंस-ठंस कर भरी हुई थीं। जैसे ही यह बात गांव में फैली, मौके पर देखते ही देखते लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि स्थानीय पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही वहां अफरा-तफरी मच गई और कई लोग कार के शीशे तोड़कर शराब की बोतलें निकाल-निकाल कर अपने घरों की तरफ भागने लगे।
पुलिस ने क्षतिग्रस्त गाड़ी को किया ज़ब्त, यूपी से जुड़े तस्करों के नेटवर्क की जांच शुरू
हादसे और उसके बाद मची लूटपाट की भनक लगते ही भोरे थाना पुलिस तुरंत दलबल के साथ मौके पर पहुंच गई। हालांकि, पुलिस की भनक लगते ही कार सवार कथित तस्कर और शराब लूट रहे अधिकांश लोग वहां से नौ दो ग्यारह हो चुके थे। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दुर्घटनाग्रस्त कार को अपने कब्जे में लेकर थाने पहुंचा दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए उसके असली मालिक का पता लगाया जा रहा है। साथ ही पुलिस इस बात की भी गहनता से तफ्तीश कर रही है कि शराब की यह बड़ी खेप उत्तर प्रदेश के किस इलाके से लाई जा रही थी और बिहार के भीतर इसे किस सिंडिकेट तक पहुंचाया जाना था।
सद्गुरु के आगमन पर बढ़ी सियासी गर्मी, स्वागत करते हुए कसा गया तंज
27 Jun, 2026 01:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना:बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की नेता रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया के जरिए सूबे की एनडीए सरकार, मुख्यमंत्री और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव पर बेहद तीखा हमला बोला है। रोहिणी आचार्या ने राजधानी पटना में बने एशिया के सबसे बड़े श्मशान घाट के प्रबंधन को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया और आरोप लगाया कि सरकार अब मोक्ष धामों का भी 'आध्यात्मिक आउटसोर्सिंग' यानी निजीकरण करने में जुट गई है।
'आइए ना हमरा बिहार में'— महंगे अंतिम संस्कार को लेकर कसा तंज
रोहिणी आचार्या ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर सरकार की नीतियों को घेरते हुए लिखा कि "आइए ना हमरा बिहार में! करवाइए महंगा अंतिम संस्कार जग्गी के प्यार में!" उन्होंने आरोप लगाया कि महज 1 रुपये के टोकन अमाउंट पर देश के सबसे घनी आबादी वाले राज्य बिहार में करोड़ों की सरकारी ज़मीन उद्योगपतियों और चहेतों में बांटी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस तरह की नीतियों का आधार बिहार का विकास करना है या फिर परदे के पीछे अधिकारियों और मंत्रियों को मिलने वाले उपहार हैं। रोहिणी ने इस पूरी व्यवस्था को 'जमीन बंदरबांट योजना' करार दिया।
क्या मोक्ष धाम भी अब सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं?
पटना के श्मशान घाट के आधुनिक प्रबंधन को बाहरी हाथों में सौंपने पर आपत्ति जताते हुए आरजेडी नेता ने कहा कि अब बिहार के श्मशान घाट भी निजी हाथों में जाने के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसा लगता है कि मौजूदा सरकार को अपने खुद के विभागों और व्यवस्थाओं से ज्यादा भरोसा बाहरी बाबाओं और कॉर्पोरेट तंत्र पर है। उन्होंने जनता की तरफ से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या सरकार द्वारा दी जाने वाली बुनियादी जन-सुविधाएं अब सिर्फ निजी हाथों में ट्रांसफर करने के लिए ही बची हैं और क्या अब अंतिम संस्कार के स्थल भी इस राजनीति का हिस्सा बन चुके हैं।
'जिम्मेदारी कम करो, हस्तांतरण ज़्यादा करो' के नए मॉडल पर उठाए सवाल
रोहिणी आचार्या ने सरकार की इस कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करते हुए तंज कसा कि सरकार को आधिकारिक तौर पर अपना नया मंत्र घोषित कर देना चाहिए, जो है— 'जिम्मेदारी कम करो, हस्तांतरण ज़्यादा करो'। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को हलफनामे के माध्यम से जनता को बताना चाहिए कि यह शासन का कौन सा नया मॉडल है, जिसमें श्मशान घाट का प्रबंधन भी ब्रांडेड बाबाओं के भरोसे छोड़ दिया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार अपनी मूल जिम्मेदारियों का अंतिम संस्कार करके धीरे-धीरे सब कुछ दूसरों के हवाले सौंप रही है।
गोमिया में रिश्तों का कत्ल, डांट से नाराज बेटे ने पिता पर किया जानलेवा हमला
27 Jun, 2026 11:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बोकारो (गोमिया):झारखंड के बोकारो जिले से रिश्तों को कलंकित कर देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। गोमिया प्रखंड के तिलैया पंचायत स्थित कारीपानी गांव (लुगू पहाड़ की तलहटी) में शुक्रवार देर रात एक कलयुगी बेटे ने मामूली विवाद के बाद कुल्हाड़ी (टांगी) से हमला कर अपने ही पिता की बेरहमी से हत्या कर दी। इस खौफनाक वारदात के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
शराब की लत पर पिता ने लगाई थी डांट, गुस्से में खोया आपा
मृतक की पहचान 63 वर्षीय जयलाल करमाली के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, उनका 30 वर्षीय बेटा अर्जुन करमाली अपने ननिहाल में एक कार्यक्रम से देर रात घर लौटा था। वह शराब के नशे में पूरी तरह धुत था। बेटे की इस हरकत से परेशान पिता जयलाल ने उसे डांटते हुए कहा कि उसकी शराब की लत के कारण घर में रोज क्लेश होता है और इसी मारपीट से तंग आकर उसकी पत्नी भी मायके चली गई है। पिता की यही नसीहत अर्जुन को नागवार गुजरी। बहस इतनी बढ़ी कि अर्जुन ने तैश में आकर घर में रखी टांगी से पिता के सिर पर जोरदार वार कर दिया। चोट इतनी गंभीर थी कि जयलाल ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
ग्रामीणों ने दिखाई बहादुरी, हत्यारे बेटे को बांधकर पुलिस को सौंपा
वारदात को अंजाम देकर भागने की कोशिश कर रहे आरोपी अर्जुन करमाली को ग्रामीणों ने मुस्तैदी दिखाते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। गांव वालों ने उसे रस्सी से घर में ही बांधकर रखा और तुरंत स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी। खबर मिलते ही जगेश्वर बिहार थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और हत्या में इस्तेमाल की गई टांगी को भी जब्त कर लिया है। थाना प्रभारी प्रकाश यादव ने बताया कि पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
नशे की लत पर मुखिया ने जताई गहरी चिंता
शनिवार सुबह घटना की जानकारी मिलते ही तिलैया पंचायत की मुखिया चिंता देवी भी पीड़ित परिवार के घर पहुंचीं। उन्होंने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे समाज को शर्मसार करने वाली वारदात बताया। मुखिया ने कहा कि युवाओं में बढ़ती नशे की लत आज के समय में हंसते-खेलते परिवारों और पूरे समाज को तबाह कर रही है, जो बेहद चिंताजनक है।
10 साल की उम्र में अपराध की शुरुआत, अब एनकाउंटर में खत्म हुई महताब की कहानी
27 Jun, 2026 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शामली: उत्तर प्रदेश के पश्चिमी छोर पर स्थित शामली जिले में पुलिस प्रशासन को अपराध नियंत्रण की दिशा में एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। आदर्श मंडी और कांधला थाना पुलिस की संयुक्त टीम के साथ हुई एक भीषण मुठभेड़ में कुख्यात मुकीम काला गिरोह का बेहद शातिर और 50 हजार रुपये का इनामी हिस्ट्रीशीटर बदमाश महताब उर्फ बेचैन मारा गया है। यह मुठभेड़ उस वक्त हुई जब आरोपी अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर दो सगे किसान भाइयों से असलहे के बल पर लूटपाट कर भाग रहा था। इस क्रास फायरिंग के दौरान अदम्य साहस का परिचय देने वाले आदर्श मंडी थाने के उपनिरीक्षक (दरोगा) दीपचंद भी हाथ में गोली लगने से गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं।
मुजफ्फरनगर हाईवे पर आधी रात को किसान भाइयों से हुई थी लूट
पुलिस अधीक्षक (एसपी) एनपी सिंह द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वारदात 26 जून की देर रात करीब तीन बजे की है। बाबरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम हाथी करौदा के निवासी नरेंद्र अपने सगे भाई नरेशपाल के साथ मोटरसाइकिल से आदर्श मंडी क्षेत्र के ग्राम जलाल स्थित अपने खेतों में सिंचाई (पानी लगाने) के लिए जा रहे थे। जैसे ही दोनों भाई मुजफ्फरनगर हाईवे पर जलालपुर कट के पास पहुंचे, तभी घात लगाकर बैठे दो अज्ञात बाइक सवार अपराधियों ने उन्हें रोक लिया।
बदमाशों ने किसानों की कनपटी पर तमंचा सटाकर जान से मारने की धमकी दी और उनसे बाइक की चाबी, मोबाइल फोन और जेब में रखे करीब 200 रुपये नकद लूट लिए। जब किसानों ने इसका विरोध करने का प्रयास किया, तो बदमाश दहशत फैलाने के लिए हवा में गोलियां बरसाते हुए वहां से रफूचक्कर हो गए। पीड़ितों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत इस डकैती की सूचना आदर्श मंडी पुलिस को दी, जिसके बाद समूचे जिले में नाकेबंदी कर सघन चेकिंग अभियान शुरू किया गया।
12 किलोमीटर दूर खंदरावली पुलिया के पास घिरे बदमाश, दरोगा को लगी गोली
लूट की वारदात के ठीक एक घंटे बाद, घटना स्थल से लगभग 12 किलोमीटर दूर कांधला थाना क्षेत्र में खंदरावली पुलिया के पास नलकूप के निकट पुलिस की घेराबंदी देखकर बदमाशों ने खुद को फंसता पाया। पुलिस को देखते ही अपराधियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। बदमाशों की ओर से करीब 12 से अधिक राउंड गोलियां चलाई गईं, जिसमें से एक गोली सीधे दरोगा दीपचंद के हाथ को चीरती हुई निकल गई।
पुलिस टीम ने भी आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई करते हुए मोर्चा संभाला और पलटवार किया। दोनों ओर से हुई इस भीषण गोलीबारी में कैराना के मोहल्ला आलकला का रहने वाला हिस्ट्रीशीटर महताब गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा, जबकि उसका दूसरा साथी अंधेरे और खेतों की आड़ का फायदा उठाकर मौके से भागने में सफल रहा। पुलिस ने तत्काल दोनों घायलों को इलाज के लिए जिला चिकित्सालय भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद बदमाश महताब को मृत घोषित कर दिया, वहीं घायल दरोगा का उपचार जारी है।
मौके से अत्याधुनिक हथियार और कारतूसों का जखीरा बरामद
एनकाउंटर के बाद फॉरेंसिक और पुलिस टीम ने जब घटना स्थल की बारीकी से पड़ताल की, तो मारे गए अपराधी के पास से भारी मात्रा में अवैध हथियार और लूटी गई सामग्री बरामद हुई। पुलिस ने मौके से:
एक 9 एमएम (9mm) की आधुनिक पिस्टल और एक स्वचालित कार्बाइन।
13 जिंदा कारतूस और 8 खाली खोखे।
किसानों से लूटा गया मोबाइल फोन, नकदी और उनकी मोटरसाइकिल की चाबी।
वारदात में इस्तेमाल की गई बिना नंबर की एक संदिग्ध बाइक बरामद की है।
सिर्फ 10 साल की उम्र में की थी पहली हत्या, तीन राज्यों में था आतंक का पर्याय
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मुठभेड़ में ढेर हुआ महताब उर्फ बेचैन बचपन से ही बेहद क्रूर और शातिर दिमाग का अपराधी था। उसने अपराध की दुनिया में अपना पहला कदम महज 10 साल की उम्र में रखा था, जब उसने वर्ष 2000 में कैराना के मोहल्ला शेखबद्दा निवासी रहीसुद्दीन पहलवान के 12 वर्षीय मासूम बेटे आरिफ को घर से बुलाकर उसकी बेरहमी से गला घोंटकर हत्या कर दी थी। इस खौफनाक वारदात का मुकदमा आज भी जुवेनाइल (बाल) कोर्ट में लंबित था।
समय के साथ महताब जेब कतरी और नकबजनी से आगे बढ़ते हुए कुख्यात मुकीम काला गैंग का मुख्य शूटर बन गया। उस पर शामली, सहारनपुर और हरियाणा के पानीपत में हत्या, डकैती, रंगदारी, लूट और जानलेवा हमले के करीब 47 संगीन आपराधिक मामले दर्ज थे। वह कैराना थाने का घोषित हिस्ट्रीशीटर (एचएस नंबर 349 ए) था। हाल ही में वह थानाभवन शुगर मिल के सहायक प्रबंधक अरविंद कुमार से लूटपाट करने और हरियाणा पुलिस की एक महिला आरक्षी ज्योति मलिक से सोने के आभूषण लूटने के मामले में वांछित चल रहा था। इसी के चलते डीआईजी रेंज की ओर से उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। 2017 के बाद से वह अपनी पहचान छिपाकर सहारनपुर में ठिकाना बदले हुए था।
कड़े सुरक्षा घेरे में पैतृक कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक
मुठभेड़ में मारे जाने के बाद महताब के शव का डॉक्टरों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम कराया गया। शाम के वक्त कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पुलिस ने शव उसके परिजनों को सौंप दिया। देर शाम भारी सुरक्षा बंदोबस्त और पुलिस बल की मौजूदगी के बीच महताब के शव को कैराना की टीचर्स कॉलोनी स्थित उसके पैतृक कब्रिस्तान ले जाया गया, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उसे सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। एसपी एनपी सिंह ने बताया कि मौके से फरार हुए दूसरे डकैत की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की स्वाट (SWAT) और सर्विलांस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं, और उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
मायावती ने आकाश आनंद को क्यों किया साइडलाइन? ब्राह्मण समीकरण से जुड़ रहे हैं तार
27 Jun, 2026 11:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अपनी सांगठनिक और चुनावी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में विभिन्न विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों के चयन और स्क्रीनिंग की प्रक्रिया भी युद्ध स्तर पर चल रही है। हालांकि, इस पूरे चुनावी घटनाक्रम के बीच पार्टी के भीतर एक बड़ा सस्पेंस भी गहरा गया है। बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद की चुनावी और संगठनात्मक निर्णयों में किसी भी तरह की सक्रिय भूमिका दिखाई न देने से कैडर और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। खुद बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा भी अब तक आकाश आनंद की भावी भूमिका को लेकर पार्टी स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है, जिससे असमंजस और बढ़ गया है।
पार्टी के रणनीतिकारों और आंतरिक सूत्रों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की मौजूदा जमीनी राजनीति में आकाश आनंद की अनुपस्थिति या निष्क्रियता से बसपा को चुनावी मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। भले ही आकाश आनंद के पास प्रत्यक्ष रूप से चुनाव लड़ने का अनुभव न हो, लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के मुखिया और सांसद चंद्रशेखर आजाद के बढ़ते सियासी प्रभाव का मुकाबला करने के लिए बसपा को एक मजबूत और आक्रामक युवा चेहरे की सख्त जरूरत है।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के दौरान एक नाटकीय घटनाक्रम में जब आकाश आनंद की पार्टी पदों पर वापसी हुई थी, तब उन्हें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की प्रत्यक्ष राजनीति से दूर रखने की आंतरिक रूप से सहमति बनी थी। हिंदी पट्टी के इन दो सबसे प्रमुख राज्यों में, जहां कभी बहुजन समाज पार्टी का सबसे मजबूत कोर जनाधार रहा है, वहां आकाश को किसी बड़ी जिम्मेदारी से महरूम रखना पार्टी के भविष्य और चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।
सोशल इंजीनियरिंग के लिए कद्दावर ब्राह्मण चेहरों की तलाश
दूसरी तरफ, साल 2007 के अपने ऐतिहासिक 'सोशल इंजीनियरिंग' (ब्राह्मण-दलित गठजोड़) के फॉर्मूले को दोबारा जीवित कर उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी का ख्वाब देख रही बसपा के सामने इस समय बड़े ब्राह्मण नेताओं का संकट खड़ा है। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में अब तक किसी भी अन्य प्रमुख दल के बड़े या कद्दावर ब्राह्मण चेहरे ने बसपा का दामन नहीं थामा है। फिलहाल पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने वाले नए चेहरों में सबसे बड़ी संख्या मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के नेताओं की ही है।
2007 की तुलना में बिखरा सतीश चंद्र मिश्रा का कुनबा, माधोगढ़ से नई शुरुआत
संसदीय इतिहास गवाह है कि वर्ष 2007 में जब मायावती ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी, तब बसपा खेमे में ब्राह्मण नेताओं की एक लंबी कतार मौजूद थी। उस दौर में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के परिवार और सगे-संबंधियों के ही करीब एक दर्जन से ज्यादा रसूखदार चेहरे सीधे बसपा से जुड़े हुए थे और संगठन में मजबूत पकड़ रखते थे। हालांकि, समय बदलने के साथ अब इस कुनबे से केवल सतीश चंद्र मिश्रा ही पार्टी में सक्रिय बचे हैं।
इस कमी को पाटने और ब्राह्मण समाज के बीच अपनी गंभीर पैठ साबित करने के लिए बहुजन समाज पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जालौन जिले की माधोगढ़ सीट से आशीष पांडेय को अपना पहला आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इस टिकट वितरण के जरिए बसपा ने एक बार फिर ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की बड़ी कवायद शुरू की है। पार्टी आलाकमान की ओर से यह संकेत भी दिए गए हैं कि आने वाले दिनों में सामान्य सीटों पर बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के उम्मीदवारों को तरजीह दी जाएगी।
रफ्तार बनी काल, कंटेनर की टक्कर में 13 महीने की बच्ची और पिता की मौत
27 Jun, 2026 10:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैशाली (भगवानपुर):बिहार के वैशाली जिले में शुक्रवार देर रात एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया है। भगवानपुर थाना क्षेत्र में एक तेज रफ्तार अनियंत्रित कंटेनर ने बाइक सवार परिवार को अपनी चपेट में ले लिया। इस दर्दनाक टक्कर में एक शख्स और उनकी महज 13 महीने की मासूम बेटी की मौत हो गई, जबकि पत्नी की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। हादसे के बाद आरोपी कंटेनर चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया।
हाजीपुर जाने के दौरान हुआ हादसा, पटना रेफर
मृतकों की पहचान भगवानपुर के बानथू गांव के रहने वाले 30 वर्षीय ज्ञानेंद्र कुमार (उर्फ नेपाली) और उनकी 13 माह की बेटी के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, ज्ञानेंद्र अपनी पत्नी सविता देवी और बच्ची के साथ बाइक से हाजीपुर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में तेज रफ्तार कंटेनर ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।
मासूम ने मौके पर तोड़ा दम, अस्पताल ले जाते समय पिता की मौत
टक्कर इतनी भयानक थी कि 13 महीने की बच्ची की मौके पर ही सांसें थम गईं। हादसे के बाद जुटे स्थानीय लोगों और राहगीरों की मदद से तीनों को तुरंत हाजीपुर सदर अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने ज्ञानेंद्र और उनकी पत्नी की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें पटना रेफर कर दिया। लेकिन बदकिस्मती से, पटना पहुंचने से पहले ही रास्ते में ज्ञानेंद्र ने भी दम तोड़ दिया। घायल सविता देवी का पटना में इलाज चल रहा है।
कंटेनर जब्त, फरार चालक की तलाश में पुलिस की छापेमारी
घटना की भनक लगते ही भगवानपुर के थानाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार सत्यार्थी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद उन्हें शोकाकुल परिजनों को सौंप दिया है। थानाध्यक्ष ने बताया कि दुर्घटना को अंजाम देने वाले कंटेनर को पुलिस ने जब्त कर लिया है। ड्राइवर मौके का फायदा उठाकर भागने में कामयाब रहा, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। मामले में केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
20 करोड़ के टैक्स नोटिस से हड़कंप, मजदूर की बेटी के नाम पर करोड़ों का कारोबार कैसे?
27 Jun, 2026 09:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उन्नाव: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से जालसाजी और डेटा चोरी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां के एक अत्यंत गरीब परिवार की शिक्षित बेटी उस समय गहरे सदमे में आ गई, जब उसे चंडीगढ़ स्थित इनकम टैक्स (आयकर) विभाग के कार्यालय से एक नोटिस प्राप्त हुआ। इस नोटिस के जरिए विभाग ने युवती से कबाड़ (स्क्रैप) के कारोबार से हुई करीब 20 करोड़ रुपये की मोटी कमाई का पूरा ब्योरा और टैक्स हिसाब मांगा है। इतनी बड़ी रकम का नोटिस देखकर पीड़िता और उसका परिवार बुरी तरह खौफजदा है। पीड़िता ने इस मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) और जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) को लिखित शिकायती पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
दो कमरों के घर में तिरपाल के साये में रहता है परिवार
विभागीय सूत्रों के अनुसार, सदर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गिरजाबाग मोहल्ले की रहने वाली रश्मि सविता ने बताया कि उसने हाल ही में स्नातक (बीए) की पढ़ाई पूरी की है और फिलहाल वह नौकरी की तलाश में घर पर ही रहती है। उसके पिता अजय शंकर पेशे से दिहाड़ी मजदूर हैं, जो कड़ी मेहनत कर किसी तरह परिवार का पेट पालते हैं। दो कमरों के जर्जर मकान में पूरा परिवार गुजर-बसर करने को मजबूर है, जिसकी छत को धूप और पानी से बचाने के लिए ऊपर तिरपाल बांधा गया है।
रश्मि ने बताया कि बीते 9 मई को उसके नाम पर चंडीगढ़ आयकर विभाग का एक आधिकारिक पत्र (नोटिस) आया। जब उसने नोटिस खोला, तो उसके होश उड़ गए, क्योंकि उसमें दर्ज था कि रश्मि के नाम पर रजिस्टर्ड फर्म ने कबाड़ के व्यापार के जरिए 20 करोड़ रुपये का टर्नओवर किया है। पीड़िता ने किसी तरह हिम्मत जुटाकर कानूनी जानकारों की मदद से उक्त नोटिस का अपनी ओर से प्राथमिक जवाब डाक द्वारा भेज दिया है।
कंप्यूटर कैफे संचालक पर दस्तावेज चोरी करने का गहरा संदेह
इस पूरे घालमेल को लेकर पीड़िता ने अपनी शिकायत में एक बड़ा सुराग भी पुलिस को दिया है। रश्मि ने बताया कि कुछ साल पहले उसने इंडियन ओवरसीज बैंक में अपना एक नया सेविंग अकाउंट खुलवाने के लिए आवेदन किया था। उस दौरान फॉर्म के साथ संलग्न करने के लिए उसने मोतीनगर मोहल्ले में स्थित जीजीआईसी स्कूल के पास संचालित एक कंप्यूटर कैफे में अपने पहचान पत्र और पैन कार्ड की फोटोकॉपी कराने के लिए मूल दस्तावेज दिए थे। पीड़िता का आरोप है कि इसके अलावा उसने कभी भी, कहीं भी अपने इन सरकारी दस्तावेजों की प्रतियां किसी को नहीं सौंपी। उसे पूरा अंदेशा है कि इसी कैफे संचालक ने उसके अभिलेखों (डॉक्यूमेंट्स) का गलत इस्तेमाल कर उसके नाम पर फर्जी फर्म बनाई और करोड़ों का ट्रांजेक्शन कर डाला।
पूरा परिवार दहशत में, साइबर पुलिस ने दी सफाई
घर में अचानक केंद्रीय एजेंसी का नोटिस पहुंचने के बाद से रश्मि के माता-पिता और भाई गहरे मानसिक तनाव में हैं। मजदूर पिता और बेरोजगार भाई को समझ नहीं आ रहा है कि वे इस भारी-भरकम कानूनी उलझन से कैसे बाहर निकलेंगे। पीड़िता ने जिला प्रशासन और साइबर विशेषज्ञों से मांग की है कि इस पूरे सिंडिकेट और जालसाजी की गहराई से उच्च स्तरीय जांच की जाए, ताकि असली अपराधी पकड़े जा सकें।
दूसरी तरफ, इस पूरे घटनाक्रम पर जिले के साइबर अपराध थाना प्रभारी राजेश मिश्र ने बताया कि फिलहाल उनके कार्यालय को इस संबंध में कोई आधिकारिक लिखित तहरीर या शिकायत सीधे प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि जैसे ही पीड़ित पक्ष का आवेदन उनके पास पहुंचेगा, साइबर सेल की तकनीकी टीम तुरंत मामले की जांच शुरू कर देगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फैजल खान केस में नया मोड़, 30 जून तक गिरफ्तारी पर रोक जारी
27 Jun, 2026 08:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना:बिहार के चर्चित कोचिंग विवाद मामले में मशहूर यूट्यूबर और शिक्षक फैजल खान उर्फ 'खान सर' की अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को सस्पेंस बरकरार रहा। इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय (डिस्ट्रिक्ट कोर्ट) में सुनवाई पूरी नहीं हो सकी, जिसके बाद अदालत ने अगली तारीख 30 जून तय की है। राहत की बात यह है कि तब तक खान सर की गिरफ्तारी या उनके खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर लगी अंतरिम रोक जारी रहेगी।
केस डायरी कोर्ट में पेश, 30 जून को आएगा फाइनल फैसला
शनिवार सुबह जब अदालत की कार्यवाही शुरू हुई, तो पुलिस ने जिला जज के आदेश पर अपडेटेड केस डायरी कोर्ट के सामने पेश की। पिछली सुनवाई में अदालत ने इसी डायरी को तलब किया था। अब 30 जून को कोर्ट इसी अपडेटेड डायरी का अध्ययन करने के बाद खान सर की अग्रिम जमानत पर अपना आखिरी फैसला सुनाएगी। सिर्फ खान सर ही नहीं, बल्कि उनके दो पर्सनल सिक्योरिटी गार्ड्स (निजी सुरक्षा कर्मियों) की किस्मत का फैसला भी इसी दिन होगा, क्योंकि उनकी जमानत याचिका पर भी शुक्रवार को कोई निर्णय नहीं हो पाया।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पुलिस को लगाई थी कड़ी फटकार
इससे पहले 25 जून (गुरुवार) को हुई सुनवाई के दौरान अदालत का रुख बेहद सख्त था। कोर्ट ने पुलिस की ढीली कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई थी। जांच एजेंसी द्वारा पेश की गई डायरी को 'अधूरा' बताते हुए जज ने पुलिस को जमकर फटकार लगाई थी और तुरंत पूरी केस डायरी सौंपने का अल्टीमेटम दिया था। इसी बीच, मामले से जुड़े रौशन आनंद पक्ष के अभिषेक और गौरव को कोर्ट से जमानत मिल गई, जिसके बाद उन्हें बेउर जेल से रिहा कर दिया गया।
विरोधी पक्ष का दावा— 'कोचिंग के अंदर ही रची गई पूरी साजिश'
दूसरी ओर, विरोधी पक्ष के वकील निरंजन कुमार ने खान सर की अग्रिम जमानत का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने अदालत में दलील दी कि इस पूरे विवाद का ताना-बाना 'खान ग्लोबल स्टडीज' के भीतर ही बुना गया था। वकील का आरोप है कि रौशन आनंद ने कदमकुआं थाने में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुख्ता सबूत होने के बाद भी अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि पीड़ित रौशन आनंद पर जेल के अंदर हमला करने की कोशिश की गई और उनके भाई प्रिंस के साथ भी वारदात हुई है, इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष और हाई-लेवल जांच होना बेहद जरूरी है।
लखनऊ अग्निकांड: रिपोर्ट ने बढ़ाईं अफसरों की मुश्किलें, 100 से ज्यादा नामों की सूची तैयार
27 Jun, 2026 08:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड मामले की उच्च स्तरीय जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचता जा रहा है। इस संवेदनशील प्रकरण में अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के एक पूर्व उपाध्यक्ष (वीसी), जो कि वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी हैं, को भी सीधे तौर पर घटना के लिए जवाबदेह और जिम्मेदार पाया गया है। जांच टीम द्वारा इस आईएएस अधिकारी के खिलाफ तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट बेहद जल्द अग्रिम दंडात्मक कार्रवाई के लिए राज्य शासन को प्रेषित की जा रही है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक एलडीए के छह वरिष्ठ पीसीएस (PCS) अधिकारियों—अरविंद त्रिपाठी, वीवी मिश्रा, अरुण सिंह, संजय पांडेय, शिरीश वर्मा और डीके सिंह को प्रारंभिक जांच में दोषी करार दिया जा चुका है। एलडीए प्रशासन ने इन सभी के खिलाफ विभागीय जांच और निलंबन की संस्तुति रिपोर्ट शासन को भेज दी है। चूंकि ये सभी अधिकारी अलग-अलग कालखंड में प्राधिकरण के भीतर अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक पदों पर आसीन रहे हैं, इसलिए नियमों के अनुसार इन पर अंतिम दंडात्मक कार्रवाई का अधिकार केवल नियुक्ति विभाग के पास सुरक्षित है, जहां यह फाइल जल्द पहुंचने की उम्मीद है।
विशेष जांच दल (SIT) की सख्ती के बाद 100 से अधिक अधिकारियों पर कसेगा शिकंजा
अलीगंज हादसे की परतें खुलने के साथ ही अब एलडीए के 100 से अधिक छोटे-बड़े अधिकारियों और तकनीकी इंजीनियरों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। शुरुआत में प्राधिकरण द्वारा केवल 18 इंजीनियरों और 6 पीसीएस अफसरों के नामों की सूची ही शासन और विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी गई थी।
परंतु, एसआईटी और शासन की कड़ी रुख के बाद इस लिस्ट को नए सिरे से खंगाला गया, जिसके बाद वर्ष 2016 से लेकर वर्ष 2026 तक अलीगंज क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालने वाले सभी संदेहास्पद अफसरों व इंजीनियरों को इस जांच के दायरे में शामिल कर लिया गया है। इसी सिलसिले में शनिवार को एसआईटी ने संपत्ति, भवन मानचित्र (मैप) और विहित प्राधिकारी के दायित्वों से जुड़े कई अधिकारियों को अपने दफ्तर तलब कर उनके बयान दर्ज किए।
एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार से एसआईटी ने की पूछताछ, सौंपे गए महत्वपूर्ण दस्तावेज
मामले की गंभीरता को देखते हुए एलडीए के वर्तमान उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार और एक अपर सचिव शनिवार को खुद शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और एसआईटी के समक्ष उपस्थित हुए। पूछताछ के दौरान उनसे अलीगंज क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों, कमर्शियल गतिविधियों और उसमें विभागीय स्तर पर बरती गई घोर लापरवाही को लेकर कड़े सवाल पूछे गए।
साथ ही, एसआईटी ने यह भी जवाब मांगा कि भविष्य में राजधानी के भीतर ऐसे जानलेवा हादसों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए एलडीए वर्तमान में क्या ठोस और सुधारात्मक कदम उठा रहा है। इस बैठक के दौरान एलडीए प्रशासन ने पूर्व में किए गए संपत्तियों के आवंटन, स्वीकृत नक्शों और अवैध निर्माणों के खिलाफ जारी ध्वस्तीकरण (बुलडोजर कार्रवाई) के आदेशों को रहस्यमयी ढंग से वापस लिए जाने से जुड़ी बेहद गोपनीय फाइलें और दस्तावेज एसआईटी को सौंप दिए हैं। अब उन 100 से अधिक जूनियर इंजीनियरों (JE) और सहायक अभियंताओं (AE) की सूची भी भेजी जा रही है जो प्रवर्तन और विहित प्राधिकारी विंग का हिस्सा रहे हैं।
सभी को दोषी बनाए जाने की नीति से एलडीए के इंजीनियरों में बढ़ा असंतोष
दूसरी तरफ, जैसे ही यह खबर आम हुई कि वर्ष 2016 से लेकर अब तक यानी पिछले 10 सालों में अलीगंज क्षेत्र में कुछ महीनों के लिए भी तैनात रहे हर छोटे-बड़े कर्मचारी और अधिकारी को इस केस में सह-आरोपी बनाया जा रहा है, एलडीए के भीतर अंदरूनी विरोध और गुस्सा भड़क उठा है।
प्राधिकरण के इंजीनियरों और तकनीकी अधिकारियों का तर्क है कि कार्रवाई का मुख्य फोकस केवल उन लोगों पर होना चाहिए जिन्होंने वास्तव में नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण की अनुमति दी या भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। एसोसिएशन का कहना है कि सिर्फ सूची को लंबी दिखाने के लिए उन अफसरों पर भी कार्रवाई की तलवार लटकाना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है, जिनकी तैनाती उस क्षेत्र में महज दो या तीन महीनों की संक्षिप्त अवधि के लिए रही थी। इस सामूहिक कार्रवाई को लेकर तकनीकी अमले में भारी असंतोष व्याप्त है।
राम मंदिर चढ़ावा केस: FIR की भाषा से गहराया संदेह, आखिर क्या छिपा रहा ट्रस्ट?
27 Jun, 2026 08:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अयोध्या: भव्य राम मंदिर में रामलला के चढ़ावे और चंदे की राशि में हुए करोड़ों रुपये के गबन के मामले में दर्ज हुई प्राथमिकी (FIR) को लेकर कानूनी और प्रशासनिक हलकों में कई तीखे सवाल उठने लगे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, दर्ज की गई इस बेहद संवेदनशील एफआईआर में नामजद किए गए आरोपियों के पिता के नाम और उनके स्थाई निवास स्थान (पते) का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इस लापरवाही या गोपनीयता ने इस बात पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है कि क्या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास अपने ही परिसर में तैनात सुरक्षा और प्रशासनिक सेवा से जुड़े कारिंदों का कोई आधिकारिक बैकग्राउंड डेटा उपलब्ध नहीं था?
इससे भी बड़ा कानूनी पेंच इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धाराएं जोड़े जाने से फंस गया है। इस विशेष कानून का लागू होना सीधे तौर पर यह प्रमाणित करता है कि इस महा-घोटाले में कोई न कोई बैंकिंग या सरकारी सेवा से जुड़ा लोकसेवक (पब्लिक सर्वेंट) सीधे तौर पर शामिल है। साक्ष्यों में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता पूरी तरह उजागर होने के बावजूद, एफआईआर में किसी भी बैंक कर्मी को नामजद न करके 'अज्ञाताें' की श्रेणी में डाल दिया गया है। एफआईआर की इस बनावट के पीछे की असली मंशा को लेकर अब उंगलियां उठने लगी हैं।
ये हैं नामजद आरोपी, ट्रस्टी की तहरीर पर दर्ज हुआ केस
इस मामले में ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य कृष्ण मोहन की लिखित शिकायत पर कुल आठ लोगों को नामजद करते हुए मुख्य आरोपी बनाया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, इस सूची में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के नाम शामिल हैं। वहीं, नौवें पायदान पर 'अज्ञात बैंक अधिकारियों' को रखा गया है।
चूंकि ये सभी नामजद आरोपी किसी न किसी रूप में मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं से सीधे जुड़े हुए थे, इसलिए सामान्य प्रशासनिक नियमावली के तहत उनके पूरे पते और परिचय पत्र ट्रस्ट के पास होने चाहिए थे। एफआईआर में सभी के पते के कॉलम में 'अज्ञात' दर्ज होना कानूनी विशेषज्ञों को हैरान कर रहा है। हालांकि पुलिस का कहना है कि गहन विवेचना के दौरान इन सभी तकनीकी कमियों को दूर कर लिया जाएगा, लेकिन शुरुआती दस्तावेज में यह चूक ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
सधे हुए शब्दों की तहरीर और पीएमओ की सीधी निगरानी
खोजी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे हाई-प्रोफाइल प्रकरण की पल-पल की रिपोर्ट सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजी जा रही है और वहां के शीर्ष अधिकारी इस पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। चूंकि इस विशेष ट्रस्ट का गठन सीधे केंद्र सरकार के निर्देशों पर हुआ था, इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसियों ने भी अपने स्तर पर आंतरिक जांच की है।
थाने में सौंपी गई तहरीर बेहद संक्षिप्त और नपे-तुले विधिक शब्दों में तैयार की गई है, जिसमें विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट और पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का हवाला देते हुए अमानत में खयानत और वित्तीय गबन का संगीन आरोप लगाया गया है। अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि तहरीर भले ही स्थानीय स्तर पर दी गई हो, लेकिन इसके कानूनी ड्राफ्ट का एक-एक शब्द दिल्ली के शीर्ष कानूनी विशेषज्ञों की राय के बाद ही अंतिम रूप से तय किया गया था, ताकि कानूनी पेंच से कोई बच न सके।
एसआईटी की गिरफ्त में आते ही बढ़ेगा रिकवरी का आंकड़ा
विशेष जांच दल (SIT) के औपचारिक गठन से पहले ही यह चर्चाएं जोरों पर थीं कि आंतरिक सुरक्षा टीम और ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर बंद कमरे में कड़ी पूछताछ की थी। उस दौरान दी गई निशानदेही के आधार पर लगभग तीन करोड़ रुपये की नकद राशि बरामद किए जाने की खबर थी। हालांकि, पुलिस ने ऑन-रिकॉर्ड अपनी शुरुआती गिरफ्तारियों के दौरान अब तक लगभग 70 लाख रुपये की आधिकारिक रिकवरी दिखाई है। जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य सह-आरोपियों की गिरफ्तारियां सुनिश्चित होंगी, गबन की गई शेष धनराशि की बरामदगी का ग्राफ भी काफी ऊपर जाएगा।
डिजिटल साक्ष्य: 40 दिनों के भीतर 70 बार पार की गई चढ़ावे की रकम
इस पूरे स्कैम का सबसे सनसनीखेज पहलू सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज से सामने आया है। डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से पता चला है कि महज 40 दिनों के संक्षिप्त अंतराल में आरोपियों ने करीब 70 बार से अधिक डोनेशन काउंटर और तिजोरी से रकम पार की और यह पूरी करतूत कैमरों में कैद हो गई। एसआईटी और स्थानीय जिला पुलिस ने इन सभी डिजिटल फुटेज को अपने कब्जे में लेकर केस डायरी का मुख्य साक्ष्य बना लिया है।
शुरुआती दौर में जब इस बड़ी चोरी की भनक लगी थी, तब अधिकारियों ने इन फुटेज को बेहद गोपनीय तरीके से सुरक्षित कर लिया था। अब तक की फॉरेंसिक और विजुअल जांच से यह साफ हो गया है कि 40 दिनों के भीतर ही अगर 70 बार वारदात को अंजाम दिया गया, तो कुल चोरी हुई रकम का पैमाना उम्मीद से कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है, क्योंकि यह संगठित खेल पिछले दो से तीन वर्षों से लगातार पर्दे के पीछे चल रहा था।
जांच पूरी होने तक बयानबाजी से किया परहेज
इस पूरे विवाद और वित्तीय अनियमितता के आरोपों के बीच, श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बेहद कड़ा और संयमित रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक इस संवेदनशील चंदा गबन मामले की कमान एसआईटी के हाथों में है और जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे इस विषय पर किसी भी सार्वजनिक मंच या मीडिया के सामने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईटी ने अभी केवल अपनी प्राथमिक (शुरुआती) रिपोर्ट सौंपी है और मुख्य तफ्तीश अभी एडवांस स्टेज में चल रही है। इसके साथ ही उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी तत्व या सोशल मीडिया हैंडल उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर भ्रामक बातें फैला रहे हैं, वे पूरी तरह से गलत और अनैतिक कृत्य कर रहे हैं।
यूपी में मानसून की दस्तक से पहले गर्मी का प्रकोप, मौसम विभाग ने दी राहत की खबर
27 Jun, 2026 08:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में चिलचिलाती धूप, उमस और जानलेवा लू (हीटवेव) का दौर लगातार बना हुआ है। बीते शुक्रवार को भी राज्य के कई अंचलों में भीषण से अति-भीषण लू का प्रभाव देखा गया। हालांकि, इन सब के बीच राहत की एक बड़ी खबर यह है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून बेहद तेजी से आगे बढ़ रहा है और आगामी तीन से चार दिनों के भीतर उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश कर सकता है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रदेशवासियों को 28 जून तक इस भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा, लेकिन 29 जून से पारे में भारी गिरावट आने की उम्मीद है।
राजधानी लखनऊ के साथ-साथ बांदा, गाजीपुर, बलिया, सुल्तानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, सोनभद्र, अलीगढ़, बरेली, शाहजहांपुर और फर्रुखाबाद जैसे जिले इस समय भयंकर लू की चपेट में हैं। वहीं लखीमपुर खीरी, बाराबंकी और बहराइच में भी तीव्र लू ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में किसी मजबूत मौसमी सिस्टम के सक्रिय न होने के कारण शुष्क और गर्म हवाएं चल रही हैं। 29 जून से प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियों के कारण तापमान में 8 से 9 डिग्री सेल्सियस तक की बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे तपिश से बड़ी राहत मिलेगी। इसके बाद 30 जून से पूरे राज्य में झमाझम और व्यापक वर्षा का दौर शुरू होने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं।
देश भर के सबसे गर्म इलाकों में चमके यूपी के जिले
शुक्रवार को दर्ज किए गए आंकड़ों के अनुसार, थर्मामीटर के पारे ने उत्तर प्रदेश के कई शहरों में रिकॉर्ड बनाए, जिसके चलते देश के सबसे गर्म शहरों की सूची में यूपी के कई जिले शीर्ष पर रहे:
लखीमपुर खीरी: यह जिला 43.2 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ पूरे देश में दूसरे नंबर पर सबसे गर्म स्थान दर्ज किया गया। (देश में सबसे अधिक तापमान हरियाणा के रोहतक में 43.4 डिग्री रहा)।
बांदा और आगरा: ये दोनों शहर 43 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ देश में संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहे।
लखनऊ: प्रदेश की राजधानी 42.4 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ देश भर में पांचवें पायदान पर रही।
कानपुर, फतेहगढ़ और अलीगढ़: इन क्षेत्रों में भी पारा 42.2 डिग्री सेल्सियस के ऊंचे स्तर पर दर्ज किया गया।
राजधानी में सामान्य से 6 डिग्री ऊपर पहुंचा पारा, दिनभर चलीं गर्म हवाएं
नवाबों के शहर लखनऊ में शुक्रवार का दिन इस सीजन के सबसे कष्टदायक दिनों में से एक रहा। यहां का अधिकतम तापमान सामान्य से 6.3 डिग्री ज्यादा यानी 42.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जिसने इसे देश का पांचवां सबसे गर्म शहर बना दिया। दिन के साथ-साथ रातें भी बेहद गर्म रहीं और न्यूनतम तापमान सामान्य से 4 डिग्री अधिक यानी 30.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह से ही शुरू हुए लू के थपेड़ों और चिलचिलाती धूप ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले दो दिनों तक राजधानी का यही हाल रहेगा, लेकिन सोमवार से ठंडी हवाओं के चलने और बादलों की आवाजाही से लू का असर समाप्त हो जाएगा और मंगलवार (30 जून) से बारिश की बूंदें राहत बरसाएंगी।
मौसम विभाग की सख्त हिदायत: दोपहर में निकलने से बचें
तेज धूप और हीटवेव के खतरनाक स्तर को देखते हुए मौसम विज्ञान केंद्र ने नागरिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य एडवायजरी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अगले दो दिनों तक बेहद जरूरी काम न होने पर दोपहर के समय घरों या दफ्तरों से बाहर न निकलें। शरीर में पानी की कमी न होने दें और लगातार पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करते रहें। इसके साथ ही घर के बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से बीमार या संवेदनशील लोगों की सेहत का इस मौसम में विशेष ख्याल रखने की हिदायत दी गई है।
अधिकार की मांग पर डटे बौद्ध भिक्षु, महाबोधि महाविहार आंदोलन के 500 दिन पूरे
26 Jun, 2026 05:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बोधगया (बिहार): विश्व धरोहर और बौद्ध धर्म के सर्वोच्च आस्था केंद्र महाबोधि महाविहार के प्रबंधन से जुड़े 'बोधगया टेंपल एक्ट' (BT Act) 1949 को पूरी तरह समाप्त करने की मांग अब तेज हो गई है। महाविहार का पूरा नियंत्रण और प्रशासनिक अधिकार बौद्ध समाज को सौंपने के लिए चल रहा शांतिपूर्ण आंदोलन शुक्रवार को अपने 500वें दिन में प्रवेश कर गया। इस ऐतिहासिक पड़ाव पर देश-विदेश से बोधगया पहुंचे सैकड़ों बौद्ध भिक्षुओं (लामाश्रणों) और अनुयायियों ने बीटीएमसी गोलंबर पर इकट्ठा होकर एक दिवसीय सामूहिक भूख हड़ताल की। प्रशासन द्वारा धरनास्थल से हटाए जाने के बावजूद आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह संघर्ष थमेगा नहीं।
वैश्विक आस्था का केंद्र है महाबोधि, दुनिया के कई देशों में भी सांकेतिक उपवास
बीटीएमसी गोलंबर पर आयोजित इस प्रदर्शन में भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से आए बौद्ध प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने हिस्सा लिया। आंदोलनकारियों ने एकजुट होकर आवाज उठाई कि यह मुद्दा केवल किसी एक शहर या क्षेत्र का नहीं है, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों बौद्ध अनुयायियों के अधिकारों और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा है। इसी के समर्थन में शुक्रवार को वैश्विक स्तर पर कई अन्य देशों में भी बौद्ध समुदायों द्वारा प्रतीकात्मक उपवास रखकर एकजुटता प्रदर्शित की गई।
"जब मंदिर, मस्जिद और चर्च का प्रबंधन उनके समाज के पास, तो महाविहार का क्यों नहीं?"
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मुख्य समन्वयक आकाश लामा ने प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार देश में हिंदू मंदिरों का संचालन हिंदू समाज, मस्जिदों का मुस्लिम समुदाय और चर्चों की देखरेख ईसाई समुदाय के हाथों में है; ठीक उसी तर्ज पर महाबोधि महाविहार की कमान भी शत-प्रतिशत बौद्ध समाज को मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 1949 में बने वर्तमान बीटी एक्ट के तहत गठित प्रबंधन समिति में बौद्ध समुदाय को पर्याप्त हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है, जो इस अंतरराष्ट्रीय पवित्र स्थल की गरिमा और भावनाओं के खिलाफ है।
74 साल पुराने बीटी एक्ट को बताया असंवैधानिक, 12 फरवरी 2025 से जारी है मोर्चा
प्रदर्शनकारियों ने बोधगया टेंपल एक्ट 1949 को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पूरी तरह अप्रासंगिक और असंवैधानिक करार दिया। आकाश लामा ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि इस कानूनी विसंगति को दूर करने के लिए वर्ष 2012 में अदालत की शरण भी ली गई थी, लेकिन लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी शासन-प्रशासन के स्तर पर कोई ठोस और न्यायसंगत समाधान नहीं निकल सका। इसी उदासीनता के खिलाफ 12 फरवरी 2025 से यह महा-अभियान लगातार चलाया जा रहा है, जिसे आज पूरे 500 दिन हो चुके हैं।
त्योहार के मद्देनजर प्रशासन ने नहीं दी अनुमति, भिक्षुओं को हटाया पर संकल्प अडिग
स्थानीय प्रशासन ने आगामी मुहर्रम त्योहार की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इस भूख हड़ताल को आधिकारिक अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए धरनास्थल से बौद्ध भिक्षुओं को हटा दिया। हालांकि, इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद भी आंदोलनकारियों का हौसला नहीं डिगा। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि वे कानून का सम्मान करते हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की हिंसा का रास्ता नहीं चुनेंगे। लेकिन अपनी जायज मांगों को लेकर उनका यह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार इस कानून को निरस्त नहीं कर देती।
निदेशक पद से विदाई के बाद डॉ. राजकुमार ने की गृह राज्य वापसी
26 Jun, 2026 12:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। संस्थान के निदेशक डॉ. राजकुमार ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। पद छोड़ने के ठीक अगले ही दिन, यानी शुक्रवार को डॉ. राजकुमार रांची से अपने गृह प्रदेश के लिए रवाना भी हो गए हैं। उनके इस अचानक उठाए गए कदम के बाद से रिम्स और स्वास्थ्य महकमे में हलचल तेज है।
प्रभारी निदेशक को दिया प्रभार, बंगले की चाभी सौंपकर कराई वीडियोग्राफी
शुक्रवार सुबह डॉ. राजकुमार सीधे रिम्स स्थित निदेशक कार्यालय पहुँचे। वहाँ उन्होंने रिम्स के नवनियुक्त प्रभारी निदेशक डॉ. डी. के. सिन्हा को संस्थान से जुड़ी सभी प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियां विधिवत रूप से सौंप दीं। इसके बाद उन्होंने रिम्स परिसर में स्थित सरकारी निदेशक बंगले को भी पूरी तरह खाली कर दिया। मकान खाली करने के बाद उन्होंने बिल्डिंग की चाभियां संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के हवाले कीं। किसी भी तरह के भावी विवाद से बचने के लिए उन्होंने इस पूरी चाभी सौंपने की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी करवाई और फिर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए प्रस्थान कर गए।
विवादों के बीच बेटे को भी ले गए साथ
डॉ. राजकुमार अपने साथ अपने बेटे को भी रांची से ले गए हैं। गौरतलब है कि रिम्स में उनके बेटे की ट्यूटर के पद पर हुई नियुक्ति पिछले कुछ समय से लगातार विवादों के घेरे में बनी हुई थी, जिसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहे थे। गलियारों में यह चर्चा बेहद आम है कि डॉ. राजकुमार अपने गृह प्रदेश पहुँचने के बाद जल्द ही अपने बेटे का भी रिम्स के ट्यूटर पद से इस्तीफा दिलवा सकते हैं।
स्वास्थ्य मंत्री को सौंपा था इस्तीफा, डॉ. सिन्हा बने नए कार्यवाहक निदेशक
इससे पहले गुरुवार को डॉ. राजकुमार ने सुबह-सुबह राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के सरकारी आवास पहुँचकर उन्हें अपना त्यागपत्र सौंपा था। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने तत्परता दिखाते हुए एक तरफ जहाँ डॉ. राजकुमार का इस्तीफा तुरंत स्वीकार कर लिया, वहीं दूसरी तरफ बिना वक्त गंवाए एक नई अधिसूचना भी जारी कर दी। विभाग ने रिम्स के सर्जरी डिपार्टमेंट के प्राध्यापक (प्रोफेसर) डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा को कार्यकारी व्यवस्था के तहत तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक संस्थान का नया कार्यवाहक निदेशक नियुक्त कर दिया है।
मुहर्रम की अकीदत के बीच युवाओं ने दिखाए पारंपरिक लाठी-डंडे के करतब
26 Jun, 2026 12:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रामगढ़: जिले में मुहर्रम के पवित्र अवसर पर शुक्रवार को विभिन्न ग्रामीण अंचलों में भारी उत्साह और धार्मिक आस्था का माहौल देखा गया। सोलिया, उच्चारिंगा, पलानी, जयनगर और पतरातू बस्ती समेत कई गांवों के मुस्लिम समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार छोटी ताजिया के साथ भव्य जुलूस निकाला। इस मातमी जुलूस में बड़ी तादाद में ग्रामीण शामिल हुए, जो हाथों में मजहबी परचम (धार्मिक ध्वज) थामे शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे थे। रास्ते भर लोगों ने आपसी भाईचारे, अमन-चैन और सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश की।
इकनॉमिक्स स्कूल मैदान में युवाओं की युद्ध कला का प्रदर्शन
निर्धारित रास्तों और चौराहों से गुजरते हुए यह जुलूस बिरसा मार्केट स्थित इकनॉमिक्स स्कूल के खेल मैदान में पहुँचा। यहाँ अखाड़ा दल से जुड़े युवाओं और खिलाड़ियों ने अपनी पारंपरिक युद्ध कला का हैरतअंगेज प्रदर्शन किया। अखाड़े में लाठी-डंडे और पारंपरिक हथियारों के साथ किए गए हैरतअंगेज करतबों को देखकर वहां मौजूद दर्शकों ने दांतों तले उंगलियां दबा लीं और खिलाड़ियों की खूब हौसलाअफजाई की। इस मनमोहक प्रदर्शन को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी हजारों की भीड़ जुटी थी, जिससे पूरा मैदान काफी समय तक गुलजार बना रहा।
कड़े सुरक्षा घेरे में व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ आयोजन
मुहर्रम के इस आयोजन को लेकर जिला व पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। संवेदनशील मोड़ों और जुलूस के रास्तों पर भारी संख्या में पुलिस बल के जवानों को तैनात किया गया था। प्रशासनिक सतर्कता, पूजा कमेटियों के समन्वय और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों के सक्रिय सहयोग के चलते पूरा कार्यक्रम बेहद अनुशासित, व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
सामाजिक एकता और आपसी तालमेल की दिखी मिसाल
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि रामगढ़ क्षेत्र में मुहर्रम का त्योहार हमेशा से ही आपसी एकता का प्रतीक रहा है। हर साल की तरह इस बार भी सभी समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर जुलूस का स्वागत किया और व्यवस्था बनाने में अपना अमूल्य सहयोग दिया। पूरे आयोजन के दौरान न सिर्फ धार्मिक निष्ठा देखने को मिली, बल्कि विभिन्न वर्गों के बीच की सामाजिक एकजुटता भी साफ तौर पर उजागर हुई।
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