उत्तर प्रदेश
ऊर्जा मंत्री के आरोपों के बाद सरकार सतर्क, बिजली विभाग के साथ होगी चर्चा
13 Jun, 2026 08:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष आशीष कुमार गोयल के बीच उपजा अंदरूनी विवाद अब खुलकर सामने आ गया है, जिससे शक्ति भवन के गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। आगामी 15 जून को मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक को देखते हुए बिजली विभाग के आला अधिकारी ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) और संविदा कर्मचारियों की छंटनी से जुड़ी फाइलों को आनन-फानन में दुरुस्त करने में जुट गए हैं।
ऊर्जा मंत्री ने बिना प्रशासनिक अनुमति के उपभोक्ताओं पर 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार थपने को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने लिखित तौर पर आपत्ति जताई है कि इस संवेदनशील मामले में उनसे किसी भी प्रकार का परामर्श नहीं लिया गया। वहीं, नियामक आयोग ने भी इस मनमानी बढ़ोतरी को नियमों के पूरी तरह खिलाफ बताया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस बड़ी बैठक के बाद जनता के भारी विरोध को देखते हुए इस बढ़े हुए सरचार्ज को वापस लेने का निर्णय लिया जा सकता है।
ऊर्जा मंत्री और पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष के बीच छिड़ा शीतयुद्ध
गुरुवार को ऊर्जा विभाग के भीतर चल रही खींचतान उस वक्त सार्वजनिक हो गई जब ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने विभाग के अपर मुख्य सचिव और पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल को एक कड़ा पत्र भेजा। इस पत्र में उन्होंने चेयरमैन पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग में जाति, धर्म और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देकर अनुभवी व कुशल संविदा कर्मियों को निकाला जा रहा है और अकुशल लोगों की भर्तियां की जा रही हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए लिखा कि बिजली उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ डालने से पहले सरकार को भरोसे में नहीं लिया गया, जिसे दोबारा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस पत्र को शासन का अंतिम निर्देश समझा जाए।
राहत: उपभोक्ताओं को बिजली सिक्योरिटी राशि पर मिलेगा 6.50% ब्याज
इस गहमागहमी के बीच सूबे के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। अब उपभोक्ताओं द्वारा विभाग के पास जमा की गई सिक्योरिटी राशि पर 6.50 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलना शुरू हो गया है। पावर कॉरपोरेशन ने अपने मुख्य बिलिंग सॉफ्टवेयर को अपडेट कर दिया है, जिसके तहत ब्याज के पैसों को सीधे उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिलों में घटाकर (समायोजित कर) दिया जा रहा है।
लाभार्थी संख्या: इस नई व्यवस्था से प्रदेश के लगभग 3.73 लाख बिजली उपभोक्ताओं को सीधा फायदा पहुंचेगा।
ब्याज की रकम: उपभोक्ताओं की कुल जमा प्रतिभूति (सिक्योरिटी) राशि लगभग 4,616 करोड़ रुपये है, जिस पर विभाग की ओर से करीब 300 करोड़ रुपये का ब्याज वितरित किया जा रहा है।
सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद शुरू हुआ समायोजन
नियमों के मुताबिक, यह ब्याज राशि हर तीन महीने में बिजली बिल में जुड़ जानी चाहिए थी, लेकिन जून महीने के बिलों में यह छूट दिखाई नहीं दी। इस लापरवाही पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी और तुरंत कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद शुक्रवार को तकनीकी खामियों को दूर कर सॉफ्टवेयर अपडेट किया गया। उपभोक्ता परिषद ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने मौजूदा बिजली बिलों की जांच अवश्य कर लें। जिन उपभोक्ताओं ने जून का बिल पहले ही भर दिया है, उन्हें इस ब्याज का लाभ जुलाई के आगामी बिल में एडजस्ट होकर मिल जाएगा।
प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर अर्जुन मुंडा गंभीर, श्रमायुक्त को भेजा विस्तृत पत्र
12 Jun, 2026 01:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने दूसरे राज्यों में काम करने वाले झारखंड के प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, अधिकारों और संकट के समय फौरन मदद पहुंचाने की लचर प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने राज्य के श्रमायुक्त (लेबर कमिश्नर) को एक विस्तृत और आधिकारिक पत्र लिखकर कई तीखे सवाल पूछे हैं और इस दिशा में एक कारगर नीति बनाने का अनुरोध किया है। 6 जून 2026 को भेजे गए इस पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री ने हाल ही में हुई दो झारखंडी श्रमिकों की असामयिक मौतों का हवाला देते हुए कहा कि इन घटनाओं ने न केवल उनके परिवारों को तबाह कर दिया, बल्कि अन्य राज्यों में पसीना बहा रहे झारखंड के लाखों मजदूरों की सुरक्षा को लेकर चल रहे सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है।
प्रवासी श्रमिकों की मृत्यु और पार्थिव शरीर लाने में हुई फजीहत
अर्जुन मुंडा ने पत्र में विशेष रूप से खरसावां क्षेत्र के हलुदबनी के रहने वाले विशाल महतो की घटना का जिक्र किया, जो कर्नाटक के बेंगलुरु में एक निजी तकनीक कंपनी में कार्यरत थे और झारखंड वापस आते समय आंध्र प्रदेश के तिरुपति में ट्रेन के भीतर अचानक तबीयत खराब होने से दम तोड़ बैठे। इसी तरह बहरागोड़ा के आसनबनी निवासी कार्तिक मुंडा की भी आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में काम के दौरान असमय मृत्यु हो गई। वरिष्ठ नेता ने आक्रोश जताते हुए कहा कि दुख की इस घड़ी में दोनों मृत श्रमिकों के शवों को उनके पैतृक गांवों तक वापस लाने में परिजनों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं। पीड़ित परिवारों की गुहार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यालय ने व्यक्तिगत स्तर पर दोनों राज्यों के जिला कप्तानों और प्रशासनिक अमले से संपर्क साधा, तब जाकर शवों की ससम्मान वापसी मुमकिन हो सकी। उन्होंने कहा कि यह स्थिति स्पष्ट करती है कि संकटकाल में अपने ही नागरिकों की मदद करने वाला सरकारी तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय साबित हो रहा है।
श्रम विभाग के पास डिजिटल डेटाबेस और हेल्पलाइन का अभाव
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सीधे तौर पर झारखंड के श्रम विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जवाब मांगा है। उन्होंने पूछा है कि क्या राज्य सरकार के पास वर्तमान में अन्य प्रदेशों में काम कर रहे झारखंड के प्रवासी कामगारों का कोई प्रामाणिक और अद्यतन (अपडेटेड) डिजिटल डेटाबेस मौजूद है, जिससे यह सटीक जानकारी मिल सके कि कितने श्रमिक किस राज्य की किस कंपनी या ठेकेदार के अधीन कार्यरत हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना के समय संबंधित नियोक्ताओं से तुरंत संपर्क साधा जा सके। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विभाग द्वारा मजदूरों और उनके आश्रितों के लिए कोई 24 घंटे चलने वाली आपातकालीन टोल-फ्री हेल्पलाइन संचालित की जा रही है, क्योंकि ठोस आंकड़ों और प्रभावी हेल्पलाइन के अभाव में दुर्घटना, बीमारी या मृत्यु के समय पीड़ितों तक त्वरित सहायता पहुंचाना नामुमकिन हो जाता है।
मजदूरों के अनिवार्य पंजीकरण और नैतिक जिम्मेदारी की मांग
इस संवेदनशील मुद्दे पर जोर देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए राज्य सरकार को प्रवासी श्रमिकों के लिए एक अनिवार्य पंजीकरण नीति लागू करनी चाहिए। इसके तहत ग्राम पंचायत स्तर पर ही पंजीकरण केंद्र खोलकर एक एकीकृत डिजिटल पोर्टल तैयार किया जाना चाहिए, साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एक पूर्णकालिक 24×7 टोल-फ्री सहायता केंद्र स्थापित करना बेहद जरूरी है। अर्जुन मुंडा ने श्रमायुक्त से विभाग की वर्तमान तैयारियों, उपलब्ध आंकड़ों और भविष्य की कार्ययोजना का पूरा ब्योरा साझा करने को कहा है। उन्होंने अंत में याद दिलाया कि ये प्रवासी मजदूर राज्य की आर्थिक रीढ़ हैं, इसलिए विपत्ति के समय उनकी सुरक्षा और गरिमा को अक्षुण्ण रखना केवल एक कागजी प्रशासनिक कर्तव्य नहीं है, बल्कि यह चुनी हुई सरकार की सबसे बड़ी नैतिक जवाबदेही भी है।
स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल: डीडीसी ने किया सीएचसी सरायकेला का निरीक्षण
12 Jun, 2026 01:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सरायकेला। उप विकास आयुक्त (डीडीसी) रीना हांसदा ने गुरुवार को स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का अचानक दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस औचक निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल में मिलने वाली चिकित्सीय सुविधाओं, जीवन रक्षक दवाओं के स्टॉक, सरकारी दस्तावेजों के रखरखाव, साफ-सफाई की स्थिति और भर्ती मरीजों को दी जा रही भोजन व अन्य जरूरी सेवाओं की गहनता से पड़ताल की। प्रशासनिक प्रमुख के इस औचक दौरे से अस्पताल परिसर में दिनभर हड़कंप का माहौल बना रहा।
बायोमेट्रिक हाजिरी और समयबद्धता के कड़े निर्देश
निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त ने अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सहित ड्यूटी पर मौजूद सभी डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को सख्त हिदायत दी कि वे निर्धारित समय पर अस्पताल में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र में स्थापित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का शत-प्रतिशत उपयोग करने का आदेश दिया और साफ कहा कि ड्यूटी से नदारद रहने वाले या लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके साथ ही, उन्होंने मुख्य स्टोर में दवाओं की उपलब्धता की समीक्षा की और निर्देश दिया कि प्रखंड के अंतर्गत आने वाले सभी उप स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों तक जरूरी दवाइयों की सप्लाई समय पर की जाए ताकि ग्रामीण मरीजों को परेशान न होना पड़े। उन्होंने दवा भंडार पंजी (स्टॉक रजिस्टर) सहित सभी आवश्यक अभिलेखों को रोजाना अपडेट रखने पर भी विशेष बल दिया।
मरीजों से बेहतर व्यवहार और स्वच्छता पर जोर
डीडीसी ने डॉक्टरों और नर्सों को निर्देशित करते हुए कहा कि वे अस्पताल आने वाले पीड़ित मरीजों और उनके परिजनों के प्रति अधिक संवेदनशील, विनम्र और सहयोगात्मक रवैया अपनाएं। अस्पताल में आने वाले हर एक मरीज को बिना किसी देरी के उचित परामर्श, जरूरी पैथोलॉजी जांच और बेहतर इलाज मिलना चाहिए। उन्होंने ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग), जनरल वार्ड और पूरे अस्पताल परिसर में नियमित रूप से साफ-सफाई और कीटाणुशोधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, उन्होंने पीने के पानी, शौचालय और मरीजों के बैठने की उत्तम व्यवस्था करने को कहा ताकि तीमारदारों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रशासनिक निरीक्षण के दौरान डीडीसी ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट भी देखी। उन्होंने विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम, संस्थागत प्रसव, नियमित टीकाकरण अभियानों तथा विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशनों के जमीनी क्रियान्वयन की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों से कहा कि इन योजनाओं का सीधा लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े पात्र लाभार्थियों तक पहुंचना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में जनस्वास्थ्य से जुड़ी जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएं, क्योंकि प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता हर नागरिक तक सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।
रेलवे में चोरी का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, 174 मोबाइल के साथ दो आरोपी दबोचे गए
12 Jun, 2026 10:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साहिबगंज। झारखंड के मालदा रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले बरहरवा रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। रांची से भागलपुर की ओर जा रही वनांचल एक्सप्रेस ट्रेन में सघन चेकिंग अभियान चलाकर आरपीएफ ने 174 पीस चोरी के मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इसके साथ ही इस अवैध खेप को ले जा रहे दो तस्करों को भी दबोचा गया है। जब्त किए गए सभी स्मार्टफोन की अनुमानित कीमत करीब 58.95 लाख रुपये बताई जा रही है। पकड़े गए दोनों आरोपी पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक इलाके के रहने वाले हैं। आरपीएफ को खुफिया तंत्र से इनपुट मिला था कि ट्रेन संख्या 13403 अप वनांचल एक्सप्रेस के सामान्य डिब्बे में दो यात्री भारी मात्रा में संदिग्ध मोबाइल लेकर सफर कर रहे हैं, जिसके बाद यह त्वरित कार्रवाई की गई।
चलती ट्रेन में घेराबंदी कर दबोचे गए तस्कर
पुख्ता जानकारी मिलते ही आरपीएफ के इंस्पेक्टर के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें सीपीडीएस और आरपीएफ के जवानों को शामिल किया गया। सुरक्षाबलों ने गुमानी स्टेशन से लेकर बरहरवा रेलवे स्टेशन के बीच ट्रेन के भीतर एक व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। इस सघन जांच के दौरान ट्रेन के जनरल कोच में दो युवक बड़े-बड़े पिट्ठू बैग के साथ बेहद संदेहास्पद स्थिति में दिखाई दिए। पुलिस टीम को अपनी तरफ आता देख दोनों घबरा गए और चलती ट्रेन से कूदकर भागने की कोशिश करने लगे। हालांकि, मुस्तैद जवानों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए घेराबंदी कर दोनों को ट्रेन के भीतर ही दबोच लिया। पूछताछ में उनकी पहचान मोहम्मद नासरुद्दीन शेख (28 वर्ष) और मोहम्मद रहमत शेख (23 वर्ष) के रूप में हुई।
बिना वैध कागजात के मिले 58 लाख के स्मार्टफोन
बरहरवा स्टेशन पर ट्रेन रुकने के बाद सुरक्षाबलों ने जब दोनों आरोपियों के बैगों की बारीकी से तलाशी ली, तो उनके भीतर से कुल 174 पुराने और इस्तेमाल किए जा चुके एंड्रॉइत फोन बरामद हुए। इनमें से 85 मोबाइल नासरुद्दीन के पास से और 89 फोन रहमत के बैग से मिले। बाजार में इन फोन्स की कुल कीमत 58,95,878 रुपये आंकी गई है। जब पुलिस ने इनसे इन मोबाइलों की खरीद या मालिकाना हक से जुड़े वैध कागजात मांगे, तो वे कोई भी दस्तावेज या संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की उचित धाराओं के तहत सभी मोबाइलों को जब्त कर लिया गया और दोनों आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए बरहरवा जीआरपी (रेल थाना) के हवाले कर दिया गया।
अंतरराज्यीय मोबाइल चोर सिंडिकेट की आशंका
आरपीएफ और स्थानीय रेल पुलिस के शुरुआती कयासों के अनुसार, यह मामला किसी बड़े अंतरराज्यीय मोबाइल चोर गिरोह से जुड़ा हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि एक संगठित सिंडिकेट अलग-अलग राज्यों और शहरों से लोगों के कीमती मोबाइल फोन चोरी या छिनैती कर इन्हें ठिकाने लगाने का काम करता है। फिलहाल पुलिस और खुफिया एजेंसियां पकड़े गए दोनों तस्करों से कड़ाई से पूछताछ कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस रैकेट का मुख्य सरगना कौन है, इन्हें यह खेप किसने सौंपी थी और इसे आगे कहां बेचा जाना था। जांच पूरी होने के बाद इस पूरे सिंडिकेट में शामिल अन्य चेहरों का भी पर्दाफाश होने की उम्मीद है।
सड़क पर कहर: बिहार में हाइवा की टक्कर से बुजुर्ग की मौत, तीन की हालत नाजुक
12 Jun, 2026 09:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की राजधानी से सटे नौबतपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत बादीपुर गांव के मुख्य मार्ग पर गुरुवार की देर रात एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना हो गई। एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार हाइवा ने आगे जा रहे ट्रैक्टर को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। यह भिड़ंत इतनी भीषण थी कि ट्रैक्टर के परखच्चे उड़ गए। इस दर्दनाक हादसे में एक बुजुर्ग की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने सड़क जाम कर उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया।
मिली जानकारी के मुताबिक जानीपुर के रहने वाले 65 वर्षीय बुजुर्ग संजीवन राम कुछ अन्य ग्रामीणों के साथ ट्रैक्टर पर सवार होकर नौबतपुर से वापस अपने घर की ओर लौट रहे थे। इसी बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-139 पर बादीपुर गांव के पास पीछे से आ रहे तेज रफ्तार हाइवा ट्रक ने उनके ट्रैक्टर में जोरदार टक्कर मार दी। इस जबरदस्त टक्कर के कारण ट्रैक्टर और उससे जुड़ी ट्रॉली टूटकर अलग-अलग हो गए तथा पूरा वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस हादसे में संजीवन राम ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं ट्रैक्टर पर सवार महंगूपुर निवासी सुरेंद्र प्रसाद, मंटू कुमार और उनका एक अन्य रिश्तेदार गंभीर रूप से जख्मी हो गए। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए सभी घायलों को तुरंत इलाज के लिए एम्स पटना भेजा, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
हादसे के बाद ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
दुर्घटना की खबर मिलते ही आस-पास के गांवों के सैकड़ों लोग रात में ही घटना स्थल पर एकत्र हो गए। इस हादसे से नाराज ग्रामीणों ने बादीपुर के पास टायर-ट्यूब जलाकर पटना-नौबतपुर मुख्य मार्ग को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का गंभीर आरोप था कि इस रूट पर चलने वाले भारी वाहनों की रफ्तार पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस का कोई नियंत्रण नहीं है, जिसकी वजह से इस इलाके में आए दिन इस तरह की जानलेवा सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
सड़क जाम से लगा वाहनों का लंबा जाम
ग्रामीणों के इस उग्र प्रदर्शन और चक्का जाम के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों तरफ गाड़ियों की मीलों लंबी कतारें लग गईं। कई घंटों तक इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप रहा, जिससे आम राहगीरों और मुसाफिरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालात बिगड़ते देख प्रशासन तुरंत हरकत में आया और स्थिति को संभालने के लिए नौबतपुर, जानीपुर तथा पिपलामा थानों की पुलिस फोर्स को मौके पर भेजा गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने काफी देर तक आक्रोशित ग्रामीणों को समझाने-बुझाने और शांत करने का प्रयास किया।
चालक फरार, आश्वासन के बाद खुला मार्ग
स्थानीय पुलिस प्रशासन ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि बादीपुर के पास हाइवा और ट्रैक्टर के बीच हुई इस भिड़ंत में एक वृद्ध की मौत हुई है और तीन लोग घायल हैं। दुर्घटना को अंजाम देने के बाद हाइवा का चालक अपने वाहन को छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार होने में कामयाब रहा। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त हाइवा को अपने कब्जे में ले लिया है और फरार चालक की तलाश शुरू कर दी है। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को नियमानुसार उचित मुआवजा राशि और हर संभव कानूनी मदद जल्द से जल्द दिलाने का भरोसा दिया। प्रशासन के इस ठोस आश्वासन के बाद ही ग्रामीण शांत हुए और कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद हाईवे पर दोबारा यातायात को बहाल कराया जा सका। पुलिस ने मृतक के शव को पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच की जा रही है।
यात्रियों के लिए जरूरी खबर: बिहार के तीन पुलों पर यातायात रहेगा बंद
12 Jun, 2026 09:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में धीरे-धीरे मानसूनी वर्षा की रफ्तार तेज होने लगी है, जिसके मद्देनजर राज्य के तीन प्रमुख पीपा पुलों (फ्लोटिंग ब्रिज) पर वाहनों के परिचालन को पूरी तरह से रोकने की तैयारी कर ली गई है। आगामी 15 जून की आधी रात से इन तीनों अस्थायी पुलों पर गाड़ियों के प्रवेश को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। गंगा नदी के जलस्तर में हो रही लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से यह अहम कदम उठाया गया है। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के पटना-1 कार्य प्रमंडल द्वारा इस संबंध में आधिकारिक नोटिस जारी कर दिया गया है। जिन पीपा पुलों को बंद किया जा रहा है, उनमें पटना और वैशाली को जोड़ने वाला कच्ची दरगाह-रूस्तमपुर पीपा पुल, ग्यासपुर-कालादियारा पीपा पुल और पटना तथा सारण जिले के बीच संपर्क स्थापित करने वाला दानापुर-पानापुर पीपा पुल शामिल हैं। ये तीनों मार्ग स्थानीय लोगों के दैनिक सफर के लिए लाइफलाइन माने जाते हैं।
बाढ़ और तेज बहाव के खतरे से सुरक्षा की कवायद
गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और पानी की तेज धारा के कारण किसी भी प्रकार के जानमाल के नुकसान या अप्रिय घटना को टालने के लिए 15 जून की मध्यरात्रि से ही इन पुलों को खोलने (हटाने) की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। पीपा पुल पूरी तरह से एक अस्थायी ढांचा होते हैं, जिन्हें केवल शुष्क मौसम में नदी का पानी कम होने पर ही इस्तेमाल में लाया जाता है। हर साल मानसून की दस्तक से पहले इन्हें नदी से बाहर निकाल लिया जाता है, क्योंकि वर्षा ऋतु में नदी के उफान पर होने से इनके बहने या पलटने का गंभीर खतरा बना रहता है। बरसात का मौसम पूरी तरह समाप्त होने और जलस्तर के दोबारा सामान्य होने पर इन पुलों को फिर से स्थापित कर दिया जाएगा।
प्रशासन की अपील और वैकल्पिक मार्गों का चयन
पुलों को हटाए जाने के कारण इन रूटों पर यात्रा करने वाले हजारों लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने आम जनता से विशेष अपील की है कि वे 15 जून के बाद इन मार्गों से यात्रा करने की कोई योजना न बनाएं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए पहले से ही निर्धारित अन्य स्थायी पुलों और वैकल्पिक रास्तों का चुनाव करें ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
सूबे में मानसून का प्रवेश और आगे का पूर्वानुमान
मौसम के ताजा घटनाक्रम की बात करें तो बिहार में किशनगंज और अररिया के रास्ते मानसून ने बुधवार की देर रात दस्तक दे दी है। गुरुवार की शाम तक इसका प्रभाव सुपौल, पूर्णिया, कटिहार और मधेपुरा जैसे सीमावर्ती जिलों तक विस्तृत हो चुका है। पटना मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, वर्तमान में मौसमी परिस्थितियां आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं, जिससे उम्मीद है कि 14 से 15 जून तक मानसून पूरे बिहार को अपनी आगोश में ले लेगा। इसके बाद राज्य के तमाम हिस्सों में हल्की से लेकर भारी बारिश का दौर शुरू होने की प्रबल संभावना है।
ऊर्जा विभाग में घमासान, मंत्री का बयान- गलत छवि बनाने वालों पर कार्रवाई हो
12 Jun, 2026 09:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बिजली महकमे में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष (चेयरमैन) डॉ. आशीष कुमार गोयल को एक बेहद सख्त पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान जहां एक तरफ कई बिजली कर्मचारियों ने पूरी ईमानदारी से काम किया, वहीं कुछ लापरवाह कर्मियों ने सरकार की छवि धूमिल करने की कोशिश की। उन्होंने ऐसे दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और मौजूदा ट्रांसफर सीजन में उनका उचित तबादला कर पूरी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
संकट के समय मुख्यालय छोड़ने पर मंत्री ने जताई कड़ी आपत्ति
ऊर्जा मंत्री ने पत्र के जरिए चेयरमैन के रवैये पर भी गहरी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने लिखा कि मई के महीने में आए आंधी-तूफान की वजह से राज्य का बिजली ढांचा बुरी तरह चरमरा गया था। इस बेहद चुनौतीपूर्ण समय में 30 मई को बुलाई गई समीक्षा बैठक के दौरान पता चला कि चेयरमैन खुद मुख्यालय से नदारद हैं और आगे भी तीन दिनों तक बाहर रहने वाले हैं। काफी कहने के बाद वे ऑनलाइन बैठक में शामिल हुए। मंत्री ने इसे जनहित के खिलाफ और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार बताते हुए कहा कि भविष्य में मुख्यालय छोड़ने से पहले उन्हें अनिवार्य रूप से सूचित किया जाए।
उपभोक्ता परिषद की मांग: मनमाने फैसलों पर लगे लगाम, सीएम योगी करें हस्तक्षेप
इस पूरे विवाद के बीच राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने जून महीने से लागू की गई 10 फीसदी ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) शुल्क की वसूली पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन खुद विभागीय मंत्री और नियामक आयोग की बातों को नजरअंदाज कर रहा है, तो वह किसकी सुनेगा? वर्मा ने इस गंभीर संकट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तुरंत दखल देने की अपील की है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नियामक आयोग पहले ही जून में इस शुल्क को लगाने को गैरकानूनी घोषित कर चुका है। इसके बावजूद कॉर्पोरेशन ने इसे लागू कर दिया, जिसकी भनक खुद ऊर्जा मंत्री को सोशल मीडिया के जरिए लगी। वर्मा ने आरोप लगाया कि पावर कॉर्पोरेशन में लगातार मनमाने ढंग से फैसले लिए जा रहे हैं, जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।
तीन साल पुराने वादे पूरे न होने से बिजली कर्मचारियों में भारी आक्रोश
इधर, लखनऊ में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने भी अपनी मांगों को लेकर पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल को एक ज्ञापन सौंपा है। समिति ने मार्च 2023 में हुए बिजली आंदोलन के दौरान कर्मचारियों पर की गई सभी दंडात्मक और दमनकारी कार्रवाइयों को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि ऊर्जा मंत्री की ओर से तीन साल पहले दिए गए निर्देशों पर भी कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने अब तक कोई अमल नहीं किया है, जिससे बिजली कर्मियों में भारी असंतोष है। ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद, दीपक चक्रवर्ती, सरजू त्रिवेदी, केएस रावत और आरसी पाल सहित कई पदाधिकारी शामिल रहे।
सीट शेयरिंग पर भाजपा का मास्टर प्लान, पंकज की टीम में दिखेंगे नए चेहरे
12 Jun, 2026 09:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में समय से पूर्व विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जल्द ही अपने सहयोगी दलों के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत शुरू करने जा रही है। पार्टी आलाकमान इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार और केंद्रीय संगठन की नई टीम के ऐलान का इंतजार कर रहा है। इसी सिलसिले में राज्य के दो प्रमुख सहयोगी दलों—सुभासपा और निषाद पार्टी के प्रमुखों ने गुरुवार को दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की। नेताओं ने राज्य के मौजूदा सियासी हालात पर चर्चा करते हुए सीट शेयरिंग पर जल्द बातचीत शुरू करने की मांग रखी।
इसी महीने के अंत तक बातचीत शुरू होने के आसार
केंद्र सरकार के 12 साल के कार्यकाल के उपलक्ष्य में भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने दिल्ली पहुंचे सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा मुख्यालय में पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन से मुलाकात की। इसके बाद राजभर और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने यूपी के पूर्व संगठन मंत्री सुनील बंसल से भी चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व ने दोनों सहयोगियों को आश्वस्त किया है कि इसी महीने के आखिरी हफ्ते तक सीट बंटवारे पर औपचारिक बातचीत शुरू कर दी जाएगी। पार्टी खुद भी चाहती है कि चुनाव की तैयारियां समय रहते तेज कर दी जाएं।
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी इसी हफ्ते घोषित करेंगे नई टीम
उत्तर प्रदेश भाजपा के संगठन को धार देने के लिए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम के गठन पर सहमति बन गई है। पंकज चौधरी और संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह ने इस सिलसिले में राष्ट्रीय अध्यक्ष व संगठन महासचिव से मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि छह क्षेत्रीय अध्यक्षों में से गोरखपुर और वाराणसी को लेकर फंसा पेंच सुलझा लिया गया है। चौधरी इसी सप्ताह अपनी नई टीम का ऐलान कर सकते हैं, जिसमें सभी छह क्षेत्रों और विभिन्न मोर्चों में नए चेहरों को मौका मिलेगा। साथ ही, प्रदेश कार्यकारिणी में भी करीब 50 फीसदी नए चेहरे शामिल किए जाएंगे।
जुलाई तक तैयार होगा चुनाव प्रचार का साझा रोडमैप
भाजपा की योजना अपने सहयोगियों के साथ मिलकर चुनाव प्रचार और चुनावी रणनीति का एक कंबाइंड रोडमैप तैयार करने की है। जुलाई महीने तक सीटों के तालमेल और प्रचार अभियान की रूपरेखा को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा गया है। चूंकि फिलहाल 5 जून से 21 जून तक पार्टी 'सेवा पखवाड़ा' मना रही है और इसी दौरान केंद्रीय संगठन व मंत्रिमंडल में भी बदलाव होने हैं, इसलिए इन तमाम सांगठनिक बदलावों के बाद अगले महीने चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
रालोद की नई रणनीति: बुंदेलखंड और पूर्वांचल में पैठ बनाने के लिए भंग की कार्यकारिणी
उधर, राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने भी आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपने संगठन को नए सिरे से खड़ा करना शुरू कर दिया है। प्रदेश कार्यकारिणी को भंग करने का फैसला महज एक रूटीन बदलाव नहीं, बल्कि एनडीए में अपना राजनीतिक वजन बढ़ाने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद एनडीए में शामिल हुई रालोद का मानना है कि गठबंधन की राजनीति में मजबूत हिस्सेदारी के लिए केवल पुरानी विरासत काफी नहीं है, बल्कि मजबूत संगठन और बड़ा जनाधार जरूरी है।
रालोद के सामने सबसे बड़ी चुनौती पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपने पारंपरिक गढ़ से बाहर निकलकर पूरे सूबे में पहचान बनाने की है। जाट राजनीति और किसान आंदोलनों से आगे बढ़कर पार्टी अब अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक, कई जिलों में संगठन की सुस्ती और सदस्यता अभियान में जमीनी काम के बजाय सिर्फ दिखावे की होड़ से नेतृत्व नाराज था, जिसके बाद चुनाव से पहले संगठन को पूरी तरह एक्टिव करने के लिए यह कड़ा कदम उठाया गया है।
पूर्वांचल हुआ और मजबूत, पश्चिम यूपी में मतदाताओं की संख्या में गिरावट
12 Jun, 2026 09:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायत वोटर लिस्ट (2025-26) के नए आंकड़ों ने ग्रामीण राजनीति की एक बिल्कुल अलग तस्वीर पेश की है। इन आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के ग्रामीण वोट बैंक का संतुलन अब तेजी से बदल रहा है। जहाँ एक तरफ पूर्वांचल और तराई के इलाकों में पंचायत वोटरों की तादाद में भारी इजाफा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पलायन के चलते सूबे के 11 जिलों में पंचायत मतदाता कम हो गए हैं। इनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 5 बड़े जिले शामिल हैं।
गाजीपुर और मैनपुरी में सबसे बड़ा उलटफेर, तेजी से घटे ग्रामीण वोटर
वोटर लिस्ट के आंकड़ों में सबसे हैरान करने वाली गिरावट गाजीपुर और मैनपुरी में देखी गई है। गाजीपुर में इस बार पंचायत मतदाताओं की संख्या में 94,757 की कमी आई है, जबकि मैनपुरी में यह आंकड़ा 93,207 और आजमगढ़ में 60,347 तक कम हुआ है। इसके अलावा वाराणसी में 41,397, एटा में 23,429, आगरा में 23,294, गाजियाबाद में 15,637 और गौतमबुद्धनगर में 12,431 ग्रामीण वोटर कम हुए हैं। जानकारों का मानना है कि जिन इलाकों में शहरों का दायरा बढ़ रहा है या जहाँ से लोग काम की तलाश में बाहर जा रहे हैं, वहाँ यह गिरावट साफ दिख रही है।
एनसीआर के जिलों में सबसे कम पंचायत वोटर, जौनपुर-प्रयागराज सबसे आगे
औद्योगिकीकरण और शहरी पहचान के कारण दिल्ली से सटे एनसीआर के जिले अब पंचायत व्यवस्था से दूर होते जा रहे हैं। गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में पंचायत मतदाताओं की संख्या महज 2.09 लाख रह गई है, जो पूरे उत्तर प्रदेश में सबसे कम है। गाजियाबाद में भी यह संख्या केवल 4.56 लाख है।
इसके विपरीत, पूर्वांचल के जिलों में ग्रामीण राजनीति का दबदबा अब भी कायम है। जौनपुर में सबसे ज्यादा 36.97 लाख पंचायत वोटर हैं। इसके बाद आजमगढ़ में 35.76 लाख, प्रयागराज में 34.95 लाख और गोरखपुर में 29.63 लाख मतदाता हैं, जो यह साबित करता है कि पूर्वांचल आज भी ग्रामीण सियासत का मुख्य केंद्र है।
बलिया और खीरी में नए वोटरों की बहार
सकारात्मक पक्ष की बात करें तो पूर्वांचल और नेपाल सीमा से लगे तराई के जिलों में ग्रामीण मतदाताओं की नई खेप तैयार हुई है। बलिया जिला इस मामले में सबसे आगे रहा, जहाँ रिकॉर्ड 1,60,376 नए पंचायत वोटर जुड़े हैं। इसके अलावा लखीमपुर खीरी में 1,38,223, देवरिया में 1,26,771, सिद्धार्थनगर में 1,23,162, कुशीनगर में 1,20,011 और प्रयागराज में 92,460 नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं। इन बदलावों से साफ है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की पंचायत राजनीति का झुकाव पूर्वांचल की तरफ और मजबूत होने वाला है।
मौसम की मार: आंधी-बारिश से यूपी में भारी तबाही, सात लोगों की दर्दनाक मौत
12 Jun, 2026 09:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बुधवार और बृहस्पतिवार को आए भीषण आंधी-तूफान और झमाझम बारिश ने भारी तबाही मचाई है। सूबे के अलग-अलग हिस्सों में तेज हवाओं के कारण पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए, जिससे कई जिलों में ब्लैकआउट जैसे हालात बन गए। इस प्राकृतिक आपदा के कारण हुए हादसों में कौशाम्बी में दो, जबकि झांसी, बरेली, अलीगढ़, देवरिया और मेरठ में एक-एक व्यक्ति समेत कुल सात लोगों की जान चली गई है। कई लोग घायल भी हुए हैं।
बरेली और मेरठ में ब्लैकआउट जैसे हालात, इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान
तूफान का सबसे ज्यादा असर पश्चिमी यूपी और ब्रज क्षेत्र में देखने को मिला। बरेली में करीब 200 बिजली के खंभे गिरने से पूरी सप्लाई ठप हो गई। यहाँ एक दरोगा समेत 9 लोग जख्मी हुए हैं। अलीगढ़ में सीमेंट फैक्ट्री की चेक पोस्ट गिरने से एक सुरक्षाकर्मी की मलबे में दबकर मौत हो गई। वहीं मुजफ्फरनगर में दीवार गिरने से एक मजदूर ने दम तोड़ दिया।
मेरठ में चक्रवाती हवाओं के कारण लगभग 70 पेड़ और 100 से ज्यादा बिजली के पोल जमींदोज हो गए। बुलंदशहर में एक घर की छत पर मोबाइल टावर गिर गया, जबकि मथुरा में 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आए बवंडर ने दर्जनों गांवों की बिजली गुल कर दी।
पूर्वांचल में आकाशीय बिजली का कहर
पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में भी मौसम ने भारी नुकसान पहुंचाया है। देवरिया के जोगिया गांव में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। मऊ, बलिया, जौनपुर और चंदौली में भी सैकड़ों पेड़ और बिजली के तार टूटने से 100 से अधिक गांवों में अंधेरा छा गया। मऊ में बिजली गिरने से एक युवक गंभीर रूप से झुलस गया।
भारी बारिश से गिरा पारा, आज भी 'ऑरेंज अलर्ट'
राहत की बात यह रही कि इस मानसूनी हलचल से प्रदेशवासियों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है। गोरखपुर में सबसे ज्यादा 75 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि बलिया, बाराबंकी और संतकबीरनगर में भी झमाझम पानी बरसा।
मौसम विभाग (आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ) के अनुसार, शुक्रवार (12 जून) को भी पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने के कारण प्रदेश के 19 जिलों में आंधी-तूफान का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है, जबकि 12 जिलों में ओलावृष्टि की संभावना है। शनिवार (13 जून) से मौसम धीरे-धीरे साफ होने लगेगा और तापमान में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।
36.6°C के साथ तपता रहा सारण, क्या बारिश दिलाएगी गर्मी से राहत?
12 Jun, 2026 07:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार के अलग-अलग हिस्सों में मानसून के आगमन से पहले की मौसमी गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं। मौसम विज्ञान केंद्र पटना द्वारा जारी किए गए ताजा बुलेटिन के मुताबिक, प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में बादलों की गड़गड़ाहट, आकाशीय बिजली गिरने की आशंका के साथ ही तेज बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने के आसार बने हुए हैं। इस मौसमी बदलाव के बीच भी गुरुवार को सूबे में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान सारण जिले में 36.6 डिग्री सेल्सियस मापा गया, जो पूरे बिहार में सबसे अधिक रहा। मौसम विभाग ने स्थिति को देखते हुए पटना, गया, नालंदा, नवादा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार, बांका और जमुई सहित कई इलाकों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि सारण समेत पश्चिमी जिलों को येलो अलर्ट पर रखा गया है।
तापमान में गिरावट के बाद भी उमस का असर
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सारण भले ही राज्य का सबसे गर्म जिला रिकॉर्ड किया गया हो, लेकिन बीते 24 घंटों के मुकाबले वहां के पारे में 3.7 डिग्री सेल्सियस की कमी भी देखी गई है। इसके अलावा कैमूर में 36.0 डिग्री, देहरी में 35.0 डिग्री, गया में 34.4 डिग्री, शेखपुरा में 34.6 डिग्री और औरंगाबाद में 33.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। हालांकि, बारिश होने के बावजूद दक्षिण-पश्चिम बिहार और सारण प्रमंडल के क्षेत्रों में लोगों को उमस भरी गर्मी से पूरी तरह राहत नहीं मिली है। हीट इंडेक्स के विश्लेषण से पता चला है कि सारण का हीट इंडेक्स 39.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जिसका सीधा मतलब है कि वातावरण में अत्यधिक नमी होने के कारण लोगों को वास्तविक तापमान से कहीं ज्यादा तपिश महसूस हो रही थी।
अंधड़ और बारिश को लेकर विभिन्न जिलों में चेतावनी
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, सूबे के कई हिस्सों में पिछले एक दिन के दौरान हुई वर्षा और आगामी 24 घंटों में आंधी-पानी की संभावना के चलते अधिकांश क्षेत्रों के पारे में 3 से 9 डिग्री सेल्सियस तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। राजधानी पटना में तापमान गिरकर 29.6 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जो सामान्य से 8.9 डिग्री कम है। इसके साथ ही मुजफ्फरपुर में 28 डिग्री, दरभंगा में 28.6 डिग्री, मधुबनी में 28.3 डिग्री, सुपौल में 28.6 डिग्री और किशनगंज में 28.8 डिग्री सेल्सियस तापमान मापा गया। मौसम केंद्र ने गया, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, जमुई, मुंगेर, लखीसराय, भागलपुर, बांका, वैशाली, बेगूसराय, खगड़िया, अररिया और पूर्णिया जैसे जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि इन जगहों पर मेघगर्जन के साथ तेज हवाएं और वज्रपात की प्रबल आशंका है।
येलो अलर्ट वाले क्षेत्रों के लिए विशेष गाइडलाइन
दूसरी तरफ सारण, सीवान, गोपालगंज, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर और औरंगाबाद के लिए येलो अलर्ट प्रभावी किया गया है। इन जिलों में भी आकाशीय बिजली चमकने और तेज अंधड़ के साथ बौछारें पड़ने की बात कही गई है। मौसम विभाग ने बिगड़ते मौसम को ध्यान में रखकर आम जनता के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें खराब मौसम के वक्त किसी भी खुले मैदान, ऊंचे पेड़ों या बिजली के टावरों के नीचे शरण न लेने को कहा गया है। विशेषकर ग्रामीण इलाकों के किसानों को कृषि कार्य करते समय बेहद सावधान रहने तथा मौसम से जुड़े अपडेट्स पर लगातार नजर रखने की सख्त हिदायत दी गई है।
पशुपालक की दर्दनाक हत्या, जमीन विवाद को लेकर रची गई साजिश का शक
12 Jun, 2026 06:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फतेहपुर। जिले के जाफरगंज थाना क्षेत्र के अंगदपुर गांव में एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहां महज 18 बिस्वा कीमती जमीन के विवाद में एक वृद्ध पशुपालक तक्कीलाल सोनकर (65) की सोते समय धारदार हथियार से निर्मम हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है। पुलिस की शुरुआती जांच में नामजद आरोपियों के अलावा कुछ अन्य बाहरी लोगों पर भी शक गहराता जा रहा है। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि अगर केवल नामजद आरोपियों ने ही इस वारदात को अंजाम दिया होता, तो वे सुबह तक बेखौफ होकर गांव में मौजूद न रहते।
सड़क किनारे की कीमती जमीन को लेकर 2017 से चल रहा था कोर्ट केस
परिजनों के मुताबिक, मृतक तक्कीलाल और उनके चचेरे भाई रामखेलावन के बीच साल 2017 से भूमि विवाद सिविल कोर्ट में विचाराधीन था। जोनिहा-अमौली मार्ग के लिंक रोड पर स्थित होने के कारण यह जमीन बेहद कीमती हो चुकी है, जो खजुहा ब्लॉक को भी जोड़ती है। करीब 40 साल पहले तत्कालीन प्रधान ने इस बंजर भूमि का पट्टा रामखेलावन के पिता के नाम किया था, लेकिन इस पर कब्जा तक्कीलाल का ही था। साल 2015 के बाद से इस जमीन को हथियाने के लिए विवाद काफी बढ़ गया था। छह महीने पहले भी तक्कीलाल के पशुबाड़े के पास बनी कोठरी को ढहा दिया गया था।
वारिस न होने के कारण संपत्ति पर थी कई लोगों की नजर
तक्कीलाल निसंतान थे। उनकी पत्नी गुलाबी देवी पिछले सात सालों से अपनी भतीजी को अपने साथ रख रही थीं और पूरी जायदाद उसके नाम करना चाहती थीं, जबकि तक्कीलाल इसे अपने सगे भतीजों को देने के पक्ष में थे। इस पारिवारिक खींचतान और जमीन की बढ़ती कीमतों के कारण कई अन्य लोग भी इस मामले में सक्रिय थे।
रात में देखी गई संदिग्ध बाइक, हत्या के खौफनाक तरीके से सहमे लोग
ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार की रात करीब 12 से 1 बजे के बीच दो अज्ञात युवक बाइक से मांझेपुर की तरफ से गांव में दाखिल हुए थे और रात करीब 2 बजे वे जोनिहा की तरफ लौट गए। आशंका है कि इन बाइक सवारों का संबंध इस हत्याकांड से हो सकता है।
बृहस्पतिवार को कोर्ट में इस मामले की अंतिम बहस होनी थी। उसकी ठीक एक रात पहले तक्कीलाल रोज की तरह घर से 100 मीटर दूर विवादित जमीन पर बने पशुबाड़े में सोने गए थे। अगली सुबह उनके बड़े भाई प्रहलाद ने उनका लहूलुहान शव देखा। हत्यारों ने तक्कीलाल के सिर, चेहरे और गले पर धारदार हथियार से 10 से अधिक वार किए थे और उनकी दोनों आंखें भी फोड़ दी थीं।
पहले भतीजे को बनाया दिव्यांग, अब चाचा की ले ली जान
मृतक के भतीजे समरलाल ने एक और चौंकाने वाला आरोप लगाया है। समरलाल के अनुसार, पहले वह खुद इस जमीन के मुकदमे की पैरवी कर रहा था। साल 2021 में जब वह बैंक से लौट रहा था, तब खूंटाझाल के पास एक सोची-समझी साजिश के तहत उसकी बाइक का एक्सीडेंट कराया गया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल होकर दिव्यांग हो गया। उसके हटने के बाद चाचा तक्कीलाल ने केस की कमान संभाली थी, जिसके कारण अब उनकी भी जान ले ली गई।
चचेरे भाइयों समेत छह के खिलाफ एफआईआर दर्ज
घटना की जानकारी मिलते ही सीओ बृजमोहन राय, प्रभारी निरीक्षक प्रमोद कुमार शुक्ला और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। आक्रोशित परिजनों ने हत्यारों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग को लेकर करीब 20 मिनट तक शव को उठने नहीं दिया। पुलिस ने पत्नी गुलाबी देवी की तहरीर पर मृतक के चचेरे भाई रामखेलावन, बरमबली, शिवमोहन, अंकित, धीरेंद्र और रानी देवी समेत छह नामजद लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है।
राबड़ी आवास में जन्मदिन की रौनक, लालू समर्थकों के लिए खास दावत का आयोजन
11 Jun, 2026 12:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के जन्मदिवस के अवसर पर बिहार के सियासी गलियारों से लेकर सामाजिक स्तर तक बधाइयों का तांता लगा हुआ है। इस विशेष मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी उन्हें अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। वर्तमान में पटना स्थित राबड़ी आवास पर उत्सव का माहौल बना हुआ है, जहां पार्टी के सांसद, विधायक, पदाधिकारी और आम समर्थक अपने नेता की एक झलक पाने और उन्हें बधाई देने के लिए सुबह से ही पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही देश भर से विभिन्न राजनेताओं और शुभचिंतकों द्वारा दूरभाष के माध्यम से भी उन्हें शुभकामनाएं दी जा रही हैं। काफी लंबे अंतराल के बाद लालू प्रसाद को इस तरह अपने कार्यकर्ताओं के बीच बेहद प्रसन्नचित मुद्रा में देखा गया।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर की दीर्घायु की कामना
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विशेष संदेश साझा करते हुए आरजेडी प्रमुख को बधाई दी। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव जी को जन्मदिवस की अनंत शुभकामनाएं और वे ईश्वर से उनके सदैव स्वस्थ रहने, दीर्घायु होने तथा यशस्वी जीवन की मंगलकामना करते हैं। इधर राबड़ी आवास पर जुटी प्रशंसकों की भारी भीड़ से खुद लालू प्रसाद ने व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और उनके द्वारा लाए गए उपहारों व पुष्पगुच्छ को बेहद आत्मीयता के साथ स्वीकार किया।
पारिवारिक सदस्यों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में कटा भव्य केक
लालू प्रसाद यादव के इस जन्मदिवस को यादगार बनाने के लिए राबड़ी आवास पर एक विशाल केक लाया गया था। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी राबड़ी देवी, पुत्र तेजस्वी यादव, पुत्री मीसा भारती और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में केक काटकर उत्सव की शुरुआत की। इससे पूर्व, बुधवार की मध्यरात्रि को ही लालू प्रसाद ने अपने पूरे परिवार के साथ केक काटकर जन्मदिवस मनाया था, जिसकी तस्वीरें तेजस्वी यादव ने इंटरनेट पर साझा की थीं। इसके साथ ही उनकी पुत्री रोहिणी आचार्य और बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव ने भी सोशल मीडिया पर अपने पिता के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए बेहद भावुक संदेश लिखे।
राबड़ी आवास पर भव्य भोज और तेजस्वी यादव का बयान
इस मांगलिक अवसर पर राबड़ी आवास पर आने वाले सभी मेहमानों और कार्यकर्ताओं के लिए एक भव्य भोज का प्रबंध किया गया है। रसोई में पूड़ी, मौसमी सब्जियां, बुनिया, पुलाव और विशेष दाल सहित कई तरह के पारंपरिक पकवान तैयार कर कार्यकर्ताओं को आदरपूर्वक परोसे जा रहे हैं। मीडिया प्रतिनिधियों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि आज पूरे बिहार की जनता की ओर से आदरणीय लालू जी को स्नेह और शुभकामनाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि उनका पूरा परिवार और पार्टी यही चाहती है कि लालू जी के कुशल मार्गदर्शन में वे सब मिलकर बिहार को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाते रहें।
मुंगेर में भर्ती घोटाले का भंडाफोड़, 15 आरोपी गिरफ्तार; जांच एजेंसियां अलर्ट
11 Jun, 2026 12:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा में हुए कथित फर्जीवाड़े, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सॉल्वर गैंग (दूसरों के स्थान पर परीक्षा देना) के माध्यम से जालसाजी करने के मामले में एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। पटना पुलिस की विशेष टीम ने मुंगेर पुलिस के साथ एक संयुक्त ऑपरेशन चलाते हुए मुंगेर जिले के विभिन्न इलाकों से 15 नामजद आरोपियों को दबोच लिया है। पकड़े गए इन सभी आरोपियों को आगे की पूछताछ और रिमांड की वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए पटना लाया गया है। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि इस सरकारी भर्ती परीक्षा में सेंध लगाने वाले पूरे गिरोह की जड़ों को खंगाला जा रहा है, जिससे आने वाले समय में कुछ और बड़े चेहरों बेनकाब होने की संभावना है।
दो अलग-अलग मुकदमों के आधार पर हुई कार्रवाई
यह बड़ी छापेमारी पटना के दो अलग-अलग थानों में दर्ज आपराधिक मामलों के आधार पर की गई है, जिसमें सचिवालय थाना कांड संख्या 160/25 और गर्दनीबाग थाना कांड संख्या 76/25 शामिल हैं। पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक तफ्तीश में यह सनसनीखेज सच सामने आया था कि सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान कई असली परीक्षार्थियों की जगह पैसों के दम पर डमी उम्मीदवारों को बैठाकर परीक्षा दिलवाई गई थी। इसके अलावा सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर फर्जी शैक्षणिक व अन्य प्रमाण पत्रों का भी सहारा लिया गया था। इसी मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपियों का सुराग मिलने पर पटना पुलिस की तकनीकी टीम ने मुंगेर में जाल बिछाया था।
मुंगेर और तारापुर के इन क्षेत्रों से दबोचे गए आरोपी
पुलिस की टीमों ने मुंगेर के बरियारपुर थाना क्षेत्र के काजीचक रतनपुर से राजा बाबू को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा शामपुर पुलिस थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर से रौशन कुमार, लोहची से सत्यम कुमार और शिवपुर लौंगाय से गोपाल कुमार को हिरासत में लिया गया। वहीं सफियासराय थाना अंतर्गत महमदपुर फरदा के रहने वाले छोटू कुमार व वरुण कुमार, बांक फरदा निवासी रंजन कुमार तथा कासिम बाजार थाना क्षेत्र के नवटोलिया से सुधीर कुमार को गिरफ्तार किया गया है। इसी तरह तारापुर अनुमंडल क्षेत्र के संग्रामपुर थाना अंतर्गत ददरीजाला से सन्नू कुमार, हरपुर थाना क्षेत्र से बलराम कुमार व मिथुन कुमार, तारापुर थाना के काजीचक मिल्की से राहुल कुमार, मोहंगंज से सुभाष पासवान और महापुर से रामजीवन कुमार तांती को दबोचा गया है।
पूरे सॉल्वर गैंग के नेटवर्क को तोड़ेगी पुलिस
मुंगेर पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों ने इस संयुक्त कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि पटना पुलिस को इन फरार चल रहे आरोपियों की तलाश थी, जिन्हें स्थानीय थानों की मदद से सफलतापूर्वक पकड़ लिया गया। पुलिस का मानना है कि पकड़े गए आरोपी महज इस गिरोह के प्यादे हैं, जबकि इसके पीछे कई बड़े मास्टरमाइंड शामिल हो सकते हैं। पुलिस अब इन आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स को खंगाल रही है ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि इस फर्जीवाड़े में और किन-किन लोगों ने अवैध तरीके से लाभ कमाया है। पुलिस की इस तत्परता से आने वाले दिनों में परीक्षा माफियाओं के खिलाफ और भी कड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
छऊ मुखौटा गुरु सुशांत महापात्र होंगे सम्मानित, संगीत नाटक अकादमी ने किया चयन
11 Jun, 2026 12:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सरायकेला। सरायकेला छऊ मुखौटा निर्माण कला के प्रख्यात साधक गुरु सुशांत महापात्र को प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। भारत सरकार के संगीत नाटक अकादमी द्वारा इस सर्वोच्च सम्मान की घोषणा किए जाने के बाद से ही समूचे कला जगत और छऊ कलाकारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस घोषणा के बाद से ही देश-विदेश के कलाकारों द्वारा उन्हें बधाइयां देने का सिलसिला जारी है और इसे छऊ विधा के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया जा रहा है। इस गौरवमयी पुरस्कार के लिए चुने जाने पर 79 वर्षीय छऊ गुरु सुशांत महापात्र भावुक हो उठे। उन्होंने केंद्र सरकार के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि भले ही विलंब से सही, लेकिन उनकी आजीवन कला साधना और समर्पण को राष्ट्र स्तर पर सम्मान मिला है। उन्होंने संकल्प लिया कि वे अंतिम सांस तक छऊ नृत्य और मुखौटा कला के संवर्धन के लिए कार्य करते रहेंगे। यह गरिमामयी राष्ट्रीय पुरस्कार देश के राष्ट्रपति द्वारा एक विशेष समारोह में प्रदान किया जाता है।
बचपन से ही विरासत में मिली कला को संजोया
गुरु सुशांत महापात्र को इस अद्भुत मुखौटा निर्माण कला का हुनर अपने परिवार से विरासत के रूप में प्राप्त हुआ था। उन्होंने मात्र आठ वर्ष की अल्पायु में ही अपने ताऊजी (बड़े पिताजी) के सानिध्य में इस सूक्ष्म कला की बारीकियों को सीखना और आत्मसात करना शुरू कर दिया था। वे पिछले कई दशकों से मुखौटा बनाने की अत्यंत प्राचीन और पारंपरिक पद्धतियों को अक्षुण्ण रखते हुए इस बहुमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी के युवाओं तक पूरी प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के भगीरथ कार्य में जुटे हुए हैं।
सरायकेला छऊ को मुखौटे से मिली वैश्विक पहचान
महापात्र परिवार की कई पीढ़ियां इस अनूठी मुखौटा निर्माण कला को जीवित रखने के लिए समर्पित रही हैं। इतिहास के पन्नों को पलटें तो वर्ष 1925 में प्रसन्न कुमार महापात्र ने सरायकेला शैली के छऊ नृत्य के लिए पहला आधुनिक और भावपूर्ण मुखौटा तैयार किया था, जिसने इस लोक नृत्य को एक विशिष्ट और बेजोड़ पहचान प्रदान की। सुशांत महापात्र द्वारा तैयार किए गए कलात्मक मुखौटों की गूंज सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न महानगरों के अलावा अमेरिका, जर्मनी के बर्लिन और ऑस्ट्रिया के वियना जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इनके मुखौटों की भव्य प्रदर्शनियां लग चुकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान
सरायकेला छऊ को सात समंदर पार तक लोकप्रिय बनाने वाले गुरु सुशांत महापात्र को पूर्व में भी कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। इसी क्रम में वर्ष 2022 में ओडिशा के पुरी में आयोजित एक भव्य अंतरराष्ट्रीय नृत्य महोत्सव "अप्सरा-2022" के मंच पर उन्हें कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए गौरवशाली ‘गुरु ब्रह्मा अवार्ड’ से नवाजा गया था। इसके अतिरिक्त भी वे कई सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किए जा चुके हैं, और अब संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिलना उनकी कला यात्रा का सबसे स्वर्णिम अध्याय है।
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