उत्तर प्रदेश
‘लो पावर नहीं चलेगा!’—ग्रामीणों ने घेरा, 63 KVA ट्रांसफार्मर की मांग
25 Apr, 2026 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंदौली: ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाने को लेकर बिजली विभाग का घेराव, महिलाओं ने रुकवाया काम
चंदौली| चंदौली जिले के बिलारीडीह बिजली उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाले नियामताबाद गांव की दलित बस्ती में वोल्टेज और ट्रांसफार्मर की समस्या को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। पांच दिनों से अंधेरे में डूबे ग्रामीणों ने उस समय बिजली विभाग के कर्मचारियों का विरोध किया, जब वे पुराने जल चुके ट्रांसफार्मर की जगह उतनी ही कम क्षमता का नया उपकरण लगाने पहुंचे।
25 केवीए के खिलाफ महिलाओं का मोर्चा
बस्ती में लगा 25 केवीए का ट्रांसफार्मर पिछले पांच दिनों से खराब पड़ा था। शुक्रवार को जब विभाग की टीम इसे बदलने पहुंची, तो ग्रामीण यह देखकर भड़क गए कि विभाग फिर से वही कम क्षमता वाला ट्रांसफार्मर लगा रहा है।
मुख्य मांग: ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने काम रुकवाते हुए मांग की कि बस्ती की बढ़ती आबादी और बिजली के लोड को देखते हुए यहाँ 63 केवीए का ट्रांसफार्मर लगाया जाए।
तर्क: लोगों का कहना है कि कम क्षमता के कारण ट्रांसफार्मर बार-बार जल जाता है, जिससे उन्हें हफ़्तों बिना बिजली के रहना पड़ता है।
मौके पर पहुंची पुलिस
विभागीय कर्मचारियों और ग्रामीणों के बीच बढ़ती बहस को देखते हुए डायल 112 की टीम को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को शांत कराने का प्रयास किया। ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे और विभागीय कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की।
विभाग का आश्वासन और वर्तमान स्थिति
हंगामे की जानकारी मिलने पर अवर अभियंता मुहम्मद शाहिद मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि:
क्षमता वृद्धि (Upgradation) के लिए 63 केवीए का प्रस्ताव चार महीने पहले ही भेजा जा चुका है।
उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर को मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही इसे स्थापित कर दिया जाएगा।
रात में मांगा सहारा, सुबह घर में मिली लाश—दिल दहला देने वाला मामला
25 Apr, 2026 10:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैशाली: ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला विवाहिता का शव, पिता ने लगाया दामाद पर हत्या का आरोप
वैशाली (बिहार): जिले के काजीपुर थाना अंतर्गत असाधरपुर गांव में एक महिला की संदिग्ध मौत से सनसनी फैल गई है। विवाहिता का शव उसके ससुराल से बरामद हुआ है, जिसके बाद इलाके में तनावपूर्ण माहौल है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। मृतका की पहचान सुमन कुमार की पत्नी गुंजन कुमारी के रूप में हुई है।
विवाद की वजह: पति पर लगा दूसरी युवती को घर लाने का आरोप
मृतका के पिता, रामेश्वर पासवान ने दामाद और उसके परिजनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार:
गुंजन और सुमन का विवाह वर्ष 2020 में हुआ था, लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही उनके बीच अनबन रहने लगी थी।
घटना की रात का घटनाक्रम: गुरुवार रात गुंजन ने अपने पिता को फोन कर जानकारी दी थी कि उसका पति सुमन किसी अन्य लड़की को घर लेकर आया है, जिसका उसने विरोध किया।
पिता और परिजन अपनी बेटी की मदद के लिए घर से निकलने ही वाले थे कि उन्हें गुंजन की मृत्यु की खबर मिली।
घटनास्थल का दृश्य और साक्ष्य
जब परिजन असाधरपुर पहुंचे, तो गुंजन का शव घर के भीतर संदिग्ध अवस्था में मिला। परिजनों का दावा है कि उसकी गर्दन पर गहरे निशान थे, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि गला दबाकर उसकी जान ली गई है। घटना के बाद से ही पति और ससुराल के अन्य सदस्य घर छोड़कर फरार हैं।
पुलिस और एफएसएल (FSL) की कार्रवाई
काजीपुर थाना प्रभारी विजय कुमार ने पुलिस बल के साथ घटनास्थल का जायजा लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक (FSL) टीम को भी बुलाया गया।
एफएसएल टीम ने मौके से वैज्ञानिक साक्ष्य और नमूने एकत्रित किए हैं।
पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है।
पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।
अधिकारियों का बयान
काजीपुर थाना प्रभारी ने बताया कि महिला की मौत संदिग्ध है और पुलिस सभी संभावित पहलुओं से मामले की तफ्तीश कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असल वजह (दम घुटना या गला दबाना) साफ हो पाएगी। फिलहाल फरार ससुराल पक्ष की तलाश जारी है।
यूपी में पंचायतों पर नई तैयारी: प्रशासक समिति बनाने पर मंथन
25 Apr, 2026 08:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश: ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने पर विचार, 'प्रशासक समिति' संभाल सकती है कमान
लखनऊ |उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का पांच साल का कार्यकाल 26 मई को पूरा होने जा रहा है। हालांकि, तय समय पर पंचायत चुनाव होने के आसार कम नजर आ रहे हैं। इसी को देखते हुए योगी सरकार पंचायतों के संचालन के लिए प्रशासक समिति की नियुक्ति पर बड़ा फैसला ले सकती है।
चुनाव में देरी के मुख्य कारण
पंचायत चुनावों के टलने के पीछे दो प्रमुख तकनीकी और कानूनी वजहें मानी जा रही हैं:
पिछड़ा वर्ग आयोग: समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की प्रक्रिया अभी पूर्ण नहीं हुई है।
वोटर लिस्ट: मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तारीख को बढ़ाकर 10 जून कर दिया गया है, जिससे मई-जून में चुनाव कराना असंभव हो गया है।
कौन संभालेगा पंचायत की जिम्मेदारी?
कार्यकाल समाप्त होने के बाद पंचायतों का काम बाधित न हो, इसके लिए सरकार दो विकल्पों पर गौर कर रही है:
ADOs को कमान: सामान्य नियमों के तहत चुनाव होने तक सहायक विकास अधिकारी (ADO पंचायत) को प्रशासक नियुक्त किया जाता है।
प्रशासक समिति (नया विकल्प): सरकार इस बार एक 'प्रशासक समिति' बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस समिति में मौजूदा ग्राम प्रधान को अध्यक्ष बनाया जा सकता है और पंचायत सदस्यों को इसमें शामिल किया जा सकता है। इससे जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बनी रहेगी।
मंत्री का बयान और कानूनी पहलू
पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने संकेत दिए हैं कि सरकार का अगला कदम पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों और न्यायालय के निर्देशों के अधीन होगा। वर्तमान में मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी लंबित है, जिससे स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है।
गोली चली, लेकिन न हथियार मिला न खोखा—पुलिस उलझन में
25 Apr, 2026 07:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैशाली। बिहार के वैशाली जिले से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहाँ प्रेम-प्रसंग और शादी टूटने के विवाद में एक युवक ने कथित तौर पर अपनी प्रेमिका को गोली मारने के बाद खुदकुशी कर ली। इस खूनी खेल में युवक पंकज सहनी (24) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल युवती का इलाज पटना के पीएमसीएच (PMCH) में चल रहा है।
सोशल मीडिया से शुरू हुई थी प्रेम कहानी
पुलिस जांच के अनुसार, इमादपुर गांव के रहने वाले पंकज और युवती के बीच पिछले 5 सालों से प्रेम संबंध थे। दोनों के घर एक-दूसरे से महज कुछ ही दूरी पर स्थित हैं। उनकी पहली मुलाकात सोशल मीडिया के जरिए हुई थी, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। शुरुआती दो वर्षों तक यह रिश्ता दोनों परिवारों की नजरों से छिपा रहा, लेकिन जानकारी होने पर परिजनों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया।
शादी कहीं और तय होने से बढ़ा विवाद
ग्रामीणों के मुताबिक, युवती के परिजनों ने पंकज के साथ उसकी शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। इसके बाद फरवरी 2026 में युवती का रिश्ता किसी अन्य व्यक्ति से तय कर दिया गया और मई में शादी होनी थी। इस बात से पंकज बेहद नाराज था। परिजनों का आरोप है कि वह अक्सर घर में घुसकर शादी रोकने की धमकी देता था और कहता था कि वह युवती को किसी और का नहीं होने देगा।
घटनाक्रम: घर में घुसकर मारी गोली
पीड़ित युवती के अनुसार, गुरुवार शाम जब वह घर में अपनी छोटी बहन के साथ अकेली थी, तब पंकज वहाँ पहुँचा। युवती का दावा है कि पंकज ने पहले पैसों की मांग की और इनकार करने पर फायरिंग कर दी। एक गोली उसकी पीठ में लगी, जिससे वह बेहोश होकर गिर गई।
बयानों में विरोधाभास:
युवती के पिता का पक्ष: मृतका के पिता ने प्रेम प्रसंग की बात से साफ इनकार किया है। उनका आरोप है कि पंकज आपराधिक छवि का व्यक्ति था और वह घर में रखे 4 लाख रुपये लूटने के इरादे से घुसा था।
मृतक के पिता का आरोप: वहीं, पंकज के पिता ने युवती के परिवार पर ही हत्या का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनके बेटे को साजिश के तहत घर बुलाकर मारा गया है।
गायब हथियार ने उलझाई गुत्थी
इस पूरे मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सबूतों का अभाव है। यदि पंकज ने खुद को गोली मारी, तो घटनास्थल से हथियार और कारतूस के खोखे गायब कैसे हो गए? पुलिस को मौके से कोई पिस्तौल नहीं मिली है, जिससे मामला संदिग्ध हो गया है। हालांकि, जांच टीम को एक जिंदा कारतूस मिला है।
प्रशासनिक रुख
वैशाली एसपी विक्रम सिंह ने बताया कि प्राथमिक जांच में यह मामला प्रेम प्रसंग से उपजा विवाद लग रहा है। एफएसएल (FSL) की टीम ने मौके से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि क्या युवक का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड इस घटना से जुड़ा है। सभी पहलुओं की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
खुशियों भरा सफर बना अंतिम यात्रा, मऊ में बड़ा सड़क हादसा
25 Apr, 2026 07:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैसे हुआ हादसा?
मऊ| जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर के खोराबार (रानीडीहा) निवासी विनय श्रीवास्तव (60) अपनी बेटी की शादी के लिए रांची गए थे। वैवाहिक कार्यक्रम के बाद वे अपनी पत्नी अर्चना श्रीवास्तव (58) और पुत्र कृतार्थ श्रीवास्तव (27) के साथ स्कॉर्पियो से वापस घर आ रहे थे।
झपकी बनी काल: शनिवार रात करीब 2:30 बजे, जब वाहन नहर कॉलोनी के समीप पहुंचा, तो अनुमान लगाया जा रहा है कि चालक को नींद की झपकी आ गई।
भीषण टक्कर: अनियंत्रित स्कॉर्पियो डिवाइडर फांदकर दूसरी तरफ की सड़क पर चली गई और सामने से आ रहे एक ट्रेलर से सीधे टकरा गई। टक्कर इतनी भयावह थी कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार सभी लोग अंदर ही फंस गए। इस हादसे में परिवार के पालतू कुत्ते की भी मौत हो गई।
राहत और बचाव कार्य
हादसे की सूचना मिलते ही घोसी के क्षेत्राधिकारी (CO) जितेंद्र सिंह और थाना प्रभारी संजय कुमार त्रिपाठी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे।
कड़ी मशक्कत: स्कॉर्पियो का अगला हिस्सा ट्रेलर में बुरी तरह धंस गया था। पुलिस और फॉरेंसिक टीम को शवों को बाहर निकालने के लिए गैस कटर का सहारा लेना पड़ा।
मृतकों की पहचान: मृतकों में श्रीवास्तव परिवार के तीन सदस्यों के अलावा गया (बिहार) निवासी ड्राइवर पुरुषोत्तम और सहायक चालक नितीश शामिल हैं।
पुलिस की कार्रवाई
सीओ जितेंद्र सिंह ने बताया कि सुबह करीब 5 बजे तक सभी शवों को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटाकर यातायात फिर से सुचारू कराया।
तीन दिन बाद मिला युवक का शव, परिवार ने उठाए हत्या के आरोप
24 Apr, 2026 05:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जहानाबाद। बिहार के जहानाबाद जिले में पिछले तीन दिनों से लापता एक युवक का शव बरामद होने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। मृतक की शिनाख्त 30 वर्षीय अरुण कुमार के रूप में हुई है। उनका शव शुक्रवार सुबह परस बीघा थाना क्षेत्र के बदलू बीघा गांव के समीप एक बधार (खेत) से मिला। इस घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
विवाद के बाद से थे लापता
परिजनों के मुताबिक, कुछ दिन पहले गांव के ही एक व्यक्ति के साथ गेहूं की खूंटी (पलारी) जलाने को लेकर अरुण का झगड़ा हुआ था। इस विवाद के बाद ही वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए थे। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिलने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शुक्रवार की सुबह जब ग्रामीण खेतों की ओर निकले, तब उन्होंने शव को देखा और शोर मचाया।
परिजनों ने जताई हत्या की आशंका
मृतक के परिवार ने सीधे तौर पर उस व्यक्ति पर हत्या का आरोप लगाया है, जिससे अरुण का हाल ही में विवाद हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अपराजित लोहान ने स्वयं घटनास्थल का दौरा किया और साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए।
जांच में जुटी पुलिस और डॉग स्क्वायड
पुलिस की शुरुआती जांच में कुछ महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं:
चोट के निशान: प्राथमिक दृष्टि में शरीर पर किसी बड़े जख्म या गंभीर चोट के निशान नहीं पाए गए हैं, जिससे मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है।
फॉरेंसिक मदद: सुराग तलाशने के लिए डॉग स्क्वायड की मदद ली जा रही है।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट: पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह हत्या है या मौत का कोई और कारण।
फिलहाल पुलिस ने संदिग्धों से पूछताछ शुरू कर दी है और गांव में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही मामले की तह तक पहुंचकर सच्चाई सामने लाई जाएगी।
सोशल मीडिया पर वार-पलटवार, रोहिणी आचार्या का CM पर हमला
24 Apr, 2026 04:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की राजनीति में जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तीखा हमला बोला है। यह तल्खी बिहार विधानमंडल के एक दिवसीय सत्र के बाद देखने को मिली, जहाँ सरकार को बहुमत सिद्ध करना था और सदन के भीतर तेजस्वी यादव व सम्राट चौधरी के बीच जोरदार बहस हुई थी।
रोहिणी आचार्या ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
जनता के आशीर्वाद और आंकड़ों पर सवाल
रोहिणी ने सम्राट चौधरी के उस बयान पर तंज कसा जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें बिहार की 14 करोड़ जनता का आशीर्वाद प्राप्त है। उन्होंने सवाल किया:
क्या मुख्यमंत्री के पास ऐसा कोई यंत्र है जिससे उन्होंने यह माप लिया?
क्या बिहार की पूरी 14 करोड़ आबादी मतदाता है या सभी ने उन्हें वोट दिया है?
उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि शायद मुख्यमंत्री की याददाश्त में कोई "केमिकल लोचा" है, क्योंकि एनडीए ने चुनाव उनके चेहरे पर नहीं लड़ा था।
उम्र और शैक्षणिक योग्यता पर घेरा
सदन में मुख्यमंत्री द्वारा अपनी उम्र और डिग्री का जिक्र करने पर रोहिणी ने कहा कि सम्राट चौधरी पहली बार अपने हलफनामे (एफिडेविट) के बारे में सही बोलते दिखे, लेकिन वे अपनी डिग्री और उम्र को तार्किक रूप से सही साबित करने से बचते नजर आए।
लालू यादव और कानूनी प्रक्रिया पर पलटवार
सम्राट चौधरी द्वारा लालू यादव पर लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए रोहिणी ने कहा:
मुख्यमंत्री प्रपंच के सहारे कुर्सी पर बैठे हैं। यदि वे कहते हैं कि उन्हें लालू जी ने जेल भेजा, तो इसका मतलब वे भाजपा के उस दावे को झुठला रहे हैं कि न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष होती है।
रोहिणी ने याद दिलाया कि सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार को हटाने के लिए 'मुरेठा' (पगड़ी) बांधा था, जिसे उन्होंने बिना प्रतिज्ञा पूरी किए ही खोल दिया।
निजी टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री द्वारा खुद पर हो रहे निजी हमलों पर नाराजगी जताने को रोहिणी ने "ओछी राजनीति" करार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि सम्राट चौधरी ने ही एक बेटी (रोहिणी) द्वारा पिता को किडनी दान देने पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। रोहिणी ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में कुछ भी निजी नहीं होता और उनके हलफनामों में मौजूद विरोधाभासों पर सवाल उठना लाजमी है।
सत्ता और अवसरवादिता पर प्रहार
सत्ता को लेकर दिए गए बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा:
वर्तमान मुख्यमंत्री जनता द्वारा चुने हुए चेहरा नहीं हैं, बल्कि वे "बैक-डोर" से इस कुर्सी पर काबिज हुए हैं।
मुख्यमंत्री की 'पाठशाला' पर टिप्पणी करते हुए रोहिणी ने कहा कि उन्होंने किसी एक विचारधारा के बजाय "अवसरवादिता की राजनीति" की पढ़ाई अलग-अलग घाटों पर घूमकर की है, इसलिए उनके एक जगह टिके रहने की कोई गारंटी नहीं है।
10 हजार की रिश्वत लेते अधिकारी गिरफ्तार, रोहतास में बड़ी कार्रवाई
24 Apr, 2026 03:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतास। बिहार के रोहतास जिले में भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए निगरानी विभाग की टीम ने एक प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी (BCPO) को रिश्वत की रकम के साथ रंगे हाथ दबोच लिया। पकड़े गए अधिकारी की पहचान राजपुर प्रखंड के जनार्दन कुमार के रूप में हुई है, जिन्हें 10 हजार रुपये घूस लेते समय गिरफ्तार किया गया।
गोदाम सत्यापन के बदले मांगी थी घूस
जानकारी के अनुसार, प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी जनार्दन कुमार राजपुर प्रखंड के पैक्स प्रबंधक प्रशांत कुमार से पैक्स गोदाम के भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट देने के बदले में 10 हजार रुपये की मांग कर रहे थे। रिश्वत मांगे जाने से परेशान होकर पैक्स प्रबंधक ने इसकी शिकायत निगरानी विभाग से कर दी।
योजनाबद्ध तरीके से हुई गिरफ्तारी
निगरानी विभाग के अधिकारियों ने शिकायत की पुष्टि करने के बाद जाल बिछाया:
रंगे हाथ गिरफ्तारी: जैसे ही पैक्स प्रबंधक ने अधिकारी को रिश्वत के पैसे दिए, पहले से तैयार निगरानी टीम ने उन्हें धर दबोचा।
घर की तलाशी: गिरफ्तारी के बाद टीम आरोपी अधिकारी को सासाराम स्थित उनके निवास पर ले गई और वहां तलाशी ली। हालांकि, घर से कोई आपत्तिजनक दस्तावेज या सामग्री प्राप्त नहीं हुई।
आगे की कार्रवाई: प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद निगरानी विभाग की टीम आरोपी को पूछताछ और कानूनी कार्रवाई के लिए पटना ले गई है।
विभाग में मचा हड़कंप
कार्यवाही के बाद रोहतास के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप का माहौल है। निगरानी डीएसपी ने बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ विभाग की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह कदम उठाया गया है। स्थानीय लोगों और सहकारिता से जुड़े अन्य कर्मियों ने विभाग की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की है।
दिनभर काम, रात में पढ़ाई—ऐसे लिखी सफलता की कहानी
24 Apr, 2026 10:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूपी बोर्ड 2026: संघर्ष और स्वावलंबन की जीत, पढ़ाई के साथ हुनर निखारकर छात्र बने मिसाल
आगरा| उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) द्वारा आयोजित हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के परिणाम बृहस्पतिवार को घोषित कर दिए गए। इस वर्ष के परिणाम केवल अंकों की दौड़ तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन 'साइलेंट हीरोज' की कहानियाँ भी सामने आईं जिन्होंने आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई और रोजगार का अद्भुत संतुलन बिठाया।
इन छात्रों की सफलता यह स्पष्ट करती है कि आज की युवा पीढ़ी केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि कौशल (Skill) और आत्मनिर्भरता की ओर भी तेजी से कदम बढ़ा रही है।
विशेषज्ञों की राय: कौशल आधारित शिक्षा का बढ़ता महत्व
शिक्षाविदों का मानना है कि वर्तमान समय में केवल अंक सफलता का पैमाना नहीं हो सकते। व्यवहारिक ज्ञान और आत्मनिर्भरता आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉ. पूनम तिवारी के अनुसार, जो छात्र कम उम्र में पढ़ाई के साथ-साथ किसी कौशल या रोजगार से जुड़ते हैं, उनमें जिम्मेदारी की भावना और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता अन्य छात्रों की तुलना में कहीं अधिक विकसित होती है। ऐसे छात्र भविष्य की चुनौतियों और पेशेवर जगत के लिए पहले से तैयार रहते हैं।
संघर्ष और सफलता की तीन प्रेरणादायक कहानियाँ
1. यश राजपूत: स्केचिंग और फैक्टरी के काम के बीच हासिल की सफलता
इंटरमीडिएट की परीक्षा में 59% अंक प्राप्त करने वाले यश राजपूत के लिए यह प्रतिशत महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उनके कठिन परिश्रम का प्रमाण है। यश के पिता, अमित राजपूत, स्क्रीन पेंटिंग (छपाई) का काम करते हैं और माँ अंजू राजपूत गृहिणी हैं। यश ने अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने और परिवार की मदद के लिए दोहरे मोर्चे पर काम किया:
कला से रोजगार: यश एक बेहतरीन स्केच आर्टिस्ट हैं। वह लोगों के स्केच बनाकर अपनी पॉकेट मनी और पढ़ाई का खर्च निकालते हैं।
औद्योगिक अनुभव: अपनी कला के साथ-साथ वह एक जूता फैक्टरी में भी कार्य करते हैं। यश का मानना है कि काम चाहे छोटा हो या बड़ा, वह इंसान को आत्मनिर्भर बनाता है।
2. दशरथ कुमार: इवेंट मैनेजमेंट और कंप्यूटर एडिटिंग में भी दिखाया दम
दशरथ कुमार ने इंटरमीडिएट में 71% अंक हासिल कर यह साबित किया कि यदि समय का प्रबंधन (Time Management) सही हो, तो नौकरी के साथ भी बेहतर परिणाम लाए जा सकते हैं।
पारिवारिक पृष्ठभूमि: दशरथ के पिता मुन्नालाल रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
करियर और कौशल: दशरथ वर्तमान में एक इवेंट कंपनी में कार्यरत हैं। काम के साथ-साथ उन्होंने कंप्यूटर में एमएस एक्सेल और वीडियो एडिटिंग जैसे आधुनिक कौशल भी सीखे हैं, जिनका उपयोग वह अपने पेशेवर जीवन में कर रहे हैं। भविष्य में वह बीबीए (BBA) कर मैनेजमेंट के क्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल करना चाहते हैं।
3. राजा सागर: पिता की बीमारी के बाद संभाली घर की कमान और लाए 79% अंक
राजा सागर की कहानी अत्यंत भावुक और प्रेरणादायी है। इंटरमीडिएट में 79% अंक लाने वाले राजा के पिता ओमप्रकाश तीन साल पहले पैरालिसिस (लकवा) का शिकार हो गए थे, जिसके बाद से घर की पूरी जिम्मेदारी राजा के कंधों पर आ गई।
जन सेवा केंद्र से सहारा: राजा ने हार मानने के बजाय कंप्यूटर और डिजिटल तकनीक सीखी और एक जन सेवा केंद्र का संचालन शुरू किया। इससे न केवल उनके परिवार का खर्च चल रहा है, बल्कि उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी।
भविष्य का लक्ष्य: राजा अब चिकित्सा के क्षेत्र में जाना चाहते हैं और उनका अगला लक्ष्य नीट (NEET) की परीक्षा उत्तीर्ण कर डॉक्टर बनना है, ताकि वह अपने पिता जैसे मरीजों की सेवा कर सकें।
दुग्ध विक्रेता पिता की बेटी ने मेहनत से बढ़ाया परिवार का मान
24 Apr, 2026 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेधा की चमक: दुग्ध विक्रेता की बेटी मोनिका यादव ने यूपी बोर्ड हाईस्कूल में गाड़ा सफलता का झंडा
बाराबंकी| उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) द्वारा घोषित हाईस्कूल 2026 के परीक्षा परिणामों में बाराबंकी जिले की मेधावी छात्रा मोनिका यादव ने अपनी असाधारण उपलब्धि से प्रदेश भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। किसान उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इस्माइलपुर (ऐडेड स्कूल) की छात्रा मोनिका ने हाईस्कूल में 96.33 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश की शीर्ष मेरिट लिस्ट में नौवां स्थान हासिल किया है।
आर्थिक अभावों को दी मात
देवा क्षेत्र के मामापुर गाँव की रहने वाली मोनिका की सफलता की राह आसान नहीं थी। उनके पिता, उमेश कुमार, दुग्ध विक्रेता हैं और कड़ी मेहनत कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, मोनिका ने अपनी पढ़ाई को कभी प्रभावित नहीं होने दिया। उनकी माँ, मंजू देवी, ने बताया कि मोनिका की लगन और अनुशासन ही उसकी सबसे बड़ी ताकत रही है।
शिक्षक और प्रधानाचार्य का मिला भरपूर सहयोग
मोनिका की प्रतिभा को पहचानते हुए उनके विद्यालय के शिक्षकों और प्रधानाचार्य ने उन्हें हर संभव शैक्षणिक और मानसिक संबल प्रदान किया।
कड़ी मेहनत: मोनिका ने बताया कि वह प्रतिदिन नियमित घंटों तक स्वाध्याय (Self-study) करती थीं और कठिन विषयों पर शिक्षकों से निरंतर मार्गदर्शन लेती थीं।
सम्मान: बृहस्पतिवार को जब परिणाम घोषित हुए, तो मोनिका ने कुल 600 में से 578 अंक प्राप्त कर जिले का गौरव बढ़ाया। इस ऐतिहासिक सफलता पर विद्यालय के प्रधानाचार्य अशोक कुमार त्रिपाठी ने उन्हें मिठाई खिलाकर और सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया।
सफलता का श्रेय और भविष्य का लक्ष्य
मोनिका ने अपनी इस शानदार उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता के त्याग और विद्यालय के शिक्षकों के उचित मार्गदर्शन को दिया है।
"मेरे शिक्षकों ने न केवल मुझे पढ़ाया, बल्कि आर्थिक और मानसिक बाधाओं के समय मेरा हौसला भी बढ़ाया। मेरी सफलता का राज निरंतरता और मेहनत है।" — मोनिका यादव
पूरे जिले में खुशी की लहर
मोनिका की इस उपलब्धि से न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा क्षेत्र गौरवान्वित है। विद्यालय में जश्न का माहौल है और अन्य छात्र-छात्राओं के लिए मोनिका एक रोल मॉडल बनकर उभरी हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी मोनिका की प्रतिभा की सराहना की है और उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।
होटल और आर्केस्ट्रा की ओट में चल रहा था देह व्यापार का धंधा
24 Apr, 2026 09:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेगूसराय। बिहार के बेगूसराय में अनैतिक देह व्यापार और मानव तस्करी के विरुद्ध पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए दो बड़े मामलों का भंडाफोड़ किया है। प्रशासन की इस दोहरी कार्रवाई से शहर में चल रहे संगठित अपराध के सिंडिकेट का खुलासा हुआ है। पहली कार्रवाई एक होटल में छापेमारी के रूप में हुई, वहीं दूसरी कार्रवाई में आर्केस्ट्रा की आड़ में चल रहे तस्करी गिरोह को पकड़ा गया।
होटल में पुलिस की दबिश और गिरफ्तारियां
नगर थाना क्षेत्र के सुभाष चौक स्थित होटल गणपति में चल रहे संदिग्ध गतिविधियों की गुप्त सूचना मिलने पर सदर एसडीओ और डीएसपी के नेतृत्व में विशेष टीम ने छापा मारा। पुलिस ने मौके से एक महिला और पुरुष को आपत्तिजनक अवस्था में पकड़ा। जांच में पाया गया कि होटल के रजिस्टर में इनकी कोई प्रविष्टि (एंट्री) नहीं थी। पुलिस ने मौके से होटल कर्मियों और ग्राहकों को हिरासत में लिया है।
सोशल मीडिया के जाल में फंसी महिलाएं
पूछताछ के दौरान पकड़ी गई महिला ने खुलासा किया कि वह मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली है। आर्थिक संकट और विलासी जीवनशैली की चाह में वह सोशल मीडिया के माध्यम से एक नेटवर्क से जुड़ी, जो उसे विभिन्न शहरों में इस अवैध कार्य के लिए भेजता था। वह पिछले एक वर्ष से इस दलदल में फंसी हुई थी।
आर्केस्ट्रा के बहाने मानव तस्करी
दूसरे मामले में पुलिस ने हरियाणा की एक युवती की शिकायत पर बड़ी कार्रवाई की। पीड़िता ने बताया कि उसे डांस प्रोग्राम (आर्केस्ट्रा) में काम दिलाने के नाम पर बेगूसराय बुलाया गया था, लेकिन यहां उसे जबरन देह व्यापार के लिए मजबूर किया जाने लगा।
मुख्य आरोपी: पुलिस ने इस गिरोह की संचालिका संगीता और उसके साथी अमरजीत को गिरफ्तार किया है।
रेस्क्यू: पुलिस ने एक किराए के मकान से छह अन्य लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाला है।
KGMU समेत अन्य अस्पतालों की भूमिका खंगाली जा रही
24 Apr, 2026 09:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केजीएमयू फर्जी डॉक्टर प्रकरण: धर्मांतरण सिंडिकेट की गहरी पैठ और पुलिस की बढ़ती दबिश
लखनऊ| के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में फर्जी डॉक्टर बनकर घूमने वाले हस्साम अहमद की गिरफ्तारी के बाद अब इस मामले में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि हस्साम ने न केवल केजीएमयू, बल्कि राजधानी के कई प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में अपनी पैठ बना रखी थी।
चिकित्सकों के बीच पैठ और 'डॉक्टर' की फर्जी पहचान
सूत्रों के मुताबिक, हस्साम अक्सर विभिन्न मेडिकल संस्थानों के वरिष्ठ और कनिष्ठ चिकित्सकों से मिलने जाता था। उसकी पैठ इतनी गहरी थी कि कई संस्थानों के चिकित्सक अनजाने में (या जानबूझकर) छात्राओं से उसका परिचय एक 'प्रतिष्ठित डॉक्टर' के रूप में कराते थे। पुलिस अब उन सभी संस्थानों की सूची तैयार कर रही है, जहाँ हस्साम ने अपना जाल बिछाया था। इन सभी संस्थानों को जल्द ही नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जा सकता है।
जाली दस्तावेजों का मायाजाल
प्रारंभिक इनपुट के अनुसार, आरोपी हस्साम ने खुद को डॉक्टर सिद्ध करने के लिए कई जाली शैक्षिक दस्तावेज बनवा रखे थे। पुलिस की एक विशेष टीम अब उसके मूल शैक्षिक रिकॉर्ड और इन फर्जी दस्तावेजों की सघन जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन जाली कागजातों को तैयार करने में किन बाहरी तत्वों या प्रिंटिंग प्रेस की भूमिका रही है। फिलहाल, हस्साम ने अपने मददगारों के नाम नहीं उगले हैं, लेकिन पुलिस की रडार पर कई संदिग्ध हैं।
तकनीकी जांच और फरार मददगार
पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और व्हाट्सएप चैट के जरिए हस्साम के नेटवर्क को डिकोड कर रही है। इस खुलासे के बाद हस्साम को 'डॉक्टर' के रूप में स्थापित करने वाले उसके कई करीबी मददगार अपने फोन बंद कर भूमिगत हो गए हैं। पुलिस की एक टीम ने मड़ियांव के अजीजनगर स्थित उसके आवास पर छापेमारी कर परिजनों से पूछताछ की है। परिजनों ने उसकी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी होने से इनकार किया है, हालांकि पुलिस को मौके से कुछ अहम सुराग मिले हैं।
वित्तीय लेन-देन और टेरर फंडिंग की आशंका
धर्मांतरण और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की आशंका को देखते हुए पुलिस ने हस्साम के बैंक खातों का ब्योरा खंगालना शुरू कर दिया है।
पुलिस यह देख रही है कि उसके खातों में मोटी रकम कहाँ से भेजी जा रही थी।
केजीएमयू के पूर्व में जेल भेजे गए रेजिडेंट डॉ. रमीज (जो धर्मांतरण और यौन शोषण के आरोपी हैं) के साथ हस्साम के वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
पुलिस ने हस्साम का पासपोर्ट जब्त कर लिया है ताकि उसकी विदेश यात्राओं और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पता लगाया जा सके।
लॉरी कार्डियोलॉजी के छात्र पर कार्रवाई
इस सिंडिकेट के तार लॉरी कार्डियोलॉजी के टेक्नीशियन छात्र फारूक मसूदी से भी जुड़े मिले हैं। हस्साम की गिरफ्तारी के बाद से ही फारूक संदिग्ध रूप से गायब है। केजीएमयू प्रशासन द्वारा फोन किए जाने पर उसने कॉल तो उठाई, लेकिन पूछताछ शुरू होते ही फोन काट दिया। इस संदिग्ध आचरण के बाद प्रशासन ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
फारूक मसूदी के दूसरे वर्ष का परीक्षा परिणाम रोक दिया गया है।
उसकी शैक्षिक फाइल जब्त कर ली गई है।
उसे दो दिन के भीतर अपना पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया गया है।
कॉन्फ्रेंस और शिविरों के नाम पर धर्मांतरण का जाल
केजीएमयू प्रशासन की आंतरिक जांच में 'कॉर्डियो सेवा फाउंडेशन' का नाम सामने आया है। इस फाउंडेशन के माध्यम से आयोजित शिविरों में शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं की शिनाख्त की जा रही है।
जांच का मुख्य बिंदु: यह आरोप लगाया जा रहा है कि फारूक मसूदी सोशल मीडिया पर एक बड़ा नेटवर्क चलाता था। वह विशेष रूप से हिंदू छात्राओं को करियर, विदेशी अवसरों और मेडिकल कॉन्फ्रेंस का झांसा देकर अपने नेटवर्क से जोड़ता था। इस मिशन में कथित तौर पर कुछ अन्य मुस्लिम छात्र-छात्राएं भी उसका सहयोग कर रहे थे।
प्रशासनिक वक्तव्य
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी हॉस्टल वार्डन और क्लास टीचर्स को शिविरों की तस्वीरें साझा कर दी गई हैं ताकि प्रतिभागियों की पहचान कर उनसे पूछताछ की जा सके। पुलिस का कहना है कि साक्ष्य पर्याप्त होते ही प्राथमिकी (FIR) में गंभीर धाराएं बढ़ाई जाएंगी।
एम्स दरभंगा के पास विकास की रफ्तार तेज, ग्रीनफील्ड सिटी प्लान तैयार
24 Apr, 2026 09:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दरभंगा। दरभंगा में प्रस्तावित मिथिला ग्रीनफील्ड टाउनशिप परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। बिहार सरकार की इस बड़ी योजना के अंतर्गत दरभंगा के बहादुरपुर, हनुमाननगर और केवटी प्रखंड के 102 गांवों का चयन किया गया है। लगभग 12 हजार एकड़ में फैलने वाली यह टाउनशिप शहर के विस्तार और अत्याधुनिक सुविधाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
जमीन की रजिस्ट्री पर रोक और प्रतिक्रिया
परियोजना क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री पर 31 मार्च तक लगाए गए प्रतिबंध को लेकर स्थानीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। प्रमंडलीय चेंबर ऑफ कॉमर्स ने इस निर्णय पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि आपात स्थिति में जमीन बेचना लोगों की मजबूरी होती है, ऐसे में पूर्ण प्रतिबंध से आम नागरिकों और व्यापारियों को कठिनाई हो सकती है। हालांकि, संस्था ने टाउनशिप के विकास को शहर के भविष्य के लिए एक सकारात्मक कदम बताया है।
चिन्हित क्षेत्र और सर्वे का कार्य
टाउनशिप के विकास के लिए प्रशासन तेजी से सर्वे और गांवों की पहचान कर रहा है। इसमें शामिल मुख्य क्षेत्र हैं:
बहादुरपुर: यहां के 17 राजस्व गांवों को शामिल किया गया है।
प्रमुख गांव: फूलबरिया, जलबार, महनौली, सोभन, भरोल, चांडी, बलिया और तालपुपरी जैसे क्षेत्र इस योजना के मुख्य केंद्र हैं।
शहरी सीमा: शहर से सटे शुभंकरपुर और रत्नोपट्टी जैसे इलाकों को भी इस मेगा प्रोजेक्ट से जोड़ा गया है।
विकास की नई उम्मीदें
जिला मुखिया संघ ने इस परियोजना का स्वागत किया है। प्रतिनिधियों का मानना है कि यह टाउनशिप दरभंगा को 'ग्रेटर नोएडा' जैसी आधुनिक पहचान दिलाएगी। जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी अस्थायी रोक को लेकर उनका कहना है कि इससे भविष्य में भूमि स्वामियों को उनकी संपत्ति का बेहतर और उचित मूल्य मिल सकेगा।
एम्स के निकट होगा विस्तार
जिलाधिकारी के अनुसार, निर्माणाधीन एम्स (AIIMS) के आसपास के क्षेत्र को टाउनशिप के रूप में विकसित करने की प्राथमिकता है। शोभन, बलिया मौजा और चांडी गांव के आसपास के इलाकों को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है। योजना को व्यवस्थित रूप से लागू करने के लिए फिलहाल इन क्षेत्रों में किसी भी नए निर्माण और जमीन के सौदों पर रोक बरकरार रखी गई है।
बोनस की गणना में बदलाव, कर्मचारियों की आय बढ़ेगी
24 Apr, 2026 08:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश में नई श्रम व्यवस्था: श्रमिकों के वेतन, पीएफ और कार्य संस्कृति में बड़े बदलाव की तैयारी
लखनऊ| उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने और श्रमिकों के हितों को सुरक्षित करने के लिए चार नई श्रम संहिताओं (Labor Codes) के क्रियान्वयन की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य दशकों पुराने और जटिल श्रम कानूनों को सरल बनाकर एक पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करना है।
राज्य स्तर पर नियमों का मसौदा (Draft) अधिसूचित कर दिया गया है और वर्तमान में यह सार्वजनिक डोमेन में है ताकि हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां ली जा सकें। प्राप्त फीडबैक के आधार पर अंतिम नियमों को मई में अधिसूचित किए जाने की प्रबल संभावना है।
29 कानूनों का विलय: चार प्रमुख संहिताएँ
नई व्यवस्था के तहत 29 पुराने और असंगत श्रम कानूनों को समाप्त कर उन्हें चार प्रमुख श्रेणियों में समाहित किया गया है:
वेतन संहिता, 2019 (Code on Wages)
औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (Industrial Relations Code)
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता, 2020 (OSH Code)
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Social Security Code)
वेतन संरचना और टेक-होम सैलरी पर प्रभाव
नए नियमों में 'वेतन' की परिभाषा को पूरी तरह बदल दिया गया है। अब कर्मचारी के कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50 फीसदी हिस्सा मूल वेतन (Basic Salary) होना अनिवार्य होगा।
लाभ: इससे कर्मचारी के पीएफ (PF), ग्रेच्युटी और रिटायरमेंट के समय मिलने वाले बोनस में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
न्यूनतम वेतन: पहली बार सभी क्षेत्रों (संगठित और असंगठित) के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन अनिवार्य किया गया है। केंद्र सरकार एक 'फ्लोर वेज' तय करेगी, जिससे नीचे कोई भी राज्य वेतन निर्धारित नहीं कर सकेगा।
कार्य के घंटे और अवकाश के नियम
नई संहिताओं में कार्यस्थल पर अनुशासन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं:
साप्ताहिक सीमा: एक सप्ताह में कार्य की अधिकतम सीमा 48 घंटे तय की गई है। दैनिक कार्य दिवस 8 घंटे का होगा।
ओवरटाइम: निर्धारित घंटों से अधिक कार्य करने पर नियोक्ता को कर्मचारी को सामान्य वेतन से दोगुना भुगतान करना होगा।
समय पर भुगतान: सभी नियोक्ताओं के लिए हर महीने की 7 तारीख तक वेतन का भुगतान करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।
सामाजिक सुरक्षा का दायरा और 'गिग वर्कर'
पहली बार कानून के दायरे में उन श्रमिकों को भी लाया गया है जो पारंपरिक कार्यालयों से बाहर काम करते हैं।
गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स: जोमैटो, स्विगी और ओला जैसे ऐप-आधारित कामगारों को सामाजिक सुरक्षा फंड का लाभ मिलेगा। कंपनियों को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1-2% इस फंड में योगदान देना होगा।
हादसे की परिभाषा: यदि कार्यस्थल पर आने या जाने के दौरान कोई दुर्घटना होती है, तो उसे 'कार्य से जुड़ी दुर्घटना' माना जाएगा और कर्मचारी मुआवजे का हकदार होगा।
स्वास्थ्य परीक्षण: 40 वर्ष से अधिक आयु के सभी श्रमिकों का वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण कराना कंपनी की जिम्मेदारी होगी।
नियोक्ताओं और एमएसएमई (MSME) के लिए बदलाव
नई संहिताओं का उद्देश्य 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देना भी है:
छंटनी के नियम: अब 300 या उससे अधिक श्रमिकों वाले संस्थानों को ही छंटनी या इकाई बंद करने के लिए सरकार से पूर्व अनुमति लेनी होगी (पहले यह सीमा 100 थी)।
री-स्किलिंग फंड: छंटनी की स्थिति में नियोक्ता को कर्मचारी के 15 दिन के वेतन के बराबर राशि 'री-स्किलिंग फंड' में जमा करनी होगी, ताकि श्रमिक नया कौशल सीख सके।
हड़ताल पर अंकुश: औद्योगिक शांति बनाए रखने के लिए अब किसी भी हड़ताल से पहले 14 दिन का नोटिस देना अनिवार्य होगा।
महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा
नए कानून महिलाओं को कार्यस्थल पर समान अवसर प्रदान करते हैं। अब महिलाओं को उनकी सहमति से सभी शिफ्टों (नाइट शिफ्ट सहित) में काम करने की अनुमति होगी, बशर्ते नियोक्ता उनकी सुरक्षा और परिवहन के पुख्ता इंतजाम करे। साथ ही, समान कार्य के लिए लिंग, जाति या धर्म के आधार पर वेतन में भेदभाव को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
अनुपालन और जुर्माना
निरीक्षण की पुरानी 'इंस्पेक्टर राज' व्यवस्था को खत्म कर अब 'इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर' प्रणाली लागू की जाएगी।
छोटे तकनीकी उल्लंघनों पर कंपनियों को पहले सुधार का मौका दिया जाएगा।
गंभीर और जानबूझकर किए गए उल्लंघनों के लिए जुर्माने की राशि को बढ़ाकर 20 लाख रुपये तक कर दिया गया है।
आरोपी प्रेमी ने वारदात को अंजाम देकर शव को छिपाने की कोशिश की
24 Apr, 2026 08:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मिंकी शर्मा हत्याकांड: एकतरफा प्यार में कत्ल और सिर विहीन लाश, पुलिस ने दाखिल की पुख्ता चार्जशीट
आगरा |आगरा के चर्चित एचआर मैनेजर मिंकी शर्मा हत्याकांड में पुलिस ने अपनी तफ्तीश पूरी करते हुए आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस पूरे मामले में पुलिस ने वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों को आधार बनाकर अपराधी को कड़ी सजा दिलाने की तैयारी की है।
एकतरफा प्यार और खौफनाक साजिश
पुलिस जांच में यह साफ हो गया है कि हत्या की मुख्य वजह कंप्यूटर ऑपरेटर विनय राजपूत का मिंकी के प्रति एकतरफा प्यार था। आरोपी विनय, मिंकी पर दबाव बना रहा था, लेकिन जब उसकी मंशा पूरी नहीं हुई, तो उसने बेहद बेरहमी से हत्या की साजिश रची।
हत्या का घटनाक्रम और गायब सिर की पहेली
23 जनवरी की रात को हाईवे पर जवाहर पुल के पास एक बोरे में युवती की सिर कटी लाश मिलने से सनसनी फैल गई थी। बाद में इसकी पहचान पार्वती विहार (ट्रांस यमुना) निवासी 25 वर्षीय मिंकी शर्मा के रूप में हुई। मिंकी संजय प्लेस स्थित 'दिविशा टेक्नोलॉजी' में एचआर मैनेजर के पद पर कार्यरत थीं।
घटना का दिन: मिंकी अपने भाई की शादी की खरीदारी करने के लिए घर से स्कूटर लेकर निकली थीं।
दफ्तर में हत्या: विनय ने धोखे से मिंकी को संजय प्लेस स्थित ऑफिस बुलाया। उस दिन ऑफिस बंद था, जिसका फायदा उठाकर उसने ऑफिस के अंदर ही हत्या को अंजाम दिया।
शव को ठिकाने लगाना: हत्या के बाद विनय ने शव को बोरे में भरा और मिंकी के ही स्कूटर पर रखकर भगवान टॉकीज होते हुए जवाहर पुल पहुँचा, जहाँ उसने धड़ फेंक दिया। सिर को उसने 'झरना नाला' में फेंक दिया था।
पुलिस की सघन जांच और साक्ष्य
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास के अनुसार, हालांकि पुलिस को रिमांड और गोताखोरों की मदद के बावजूद मिंकी का सिर बरामद नहीं हो सका, लेकिन आरोपी के खिलाफ वैज्ञानिक साक्ष्य (Scientific Evidence) अत्यंत मजबूत हैं:
फॉरेंसिक रिपोर्ट: ऑफिस के फर्श पर मिले खून के धब्बे मिंकी के ब्लड ग्रुप से मैच कर गए हैं।
सीसीटीवी फुटेज: पुलिस के पास एक दर्जन से अधिक सीसीटीवी फुटेज हैं, जिनमें विनय को स्कूटर पर बोरा ले जाते हुए और बाद में शाहदरा के पास स्कूटर लावारिस छोड़ते हुए देखा जा सकता है।
हथियार की बरामदगी: पुलिस ने वह चाकू बरामद कर लिया है जिससे हत्या की गई थी। विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की रिपोर्ट के अनुसार, चाकू पर मिला खून मृतका का ही है।
डिजिटल लोकेशन: दोपहर 3:30 बजे मिंकी का मोबाइल बंद हुआ था, उस समय विनय और मिंकी दोनों की लोकेशन ऑफिस में ही थी।
डीएनए रिपोर्ट और गवाहों के बयान
मिंकी की पहचान उसके कपड़ों और नेल पॉलिश के आधार पर परिजनों ने की थी। पुख्ता शिनाख्त के लिए पुलिस ने माता-पिता के खून के नमूने लेकर DNA परीक्षण के लिए भेजे हैं, जिसकी रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है। पुलिस ने उन चश्मदीदों के बयान भी दर्ज किए हैं जिन्होंने विनय को संदिग्ध अवस्था में स्कूटर ले जाते हुए देखा था।
न्यायिक प्रक्रिया की तैयारी
पुलिस का दावा है कि चार्जशीट में शामिल डिजिटल साक्ष्य और गवाहों की लंबी सूची आरोपी विनय राजपूत को उम्रकैद या फांसी तक पहुँचाने के लिए पर्याप्त है। पुलिस अब न्यायालय में प्रभावी पैरवी कर मिंकी के परिवार को न्याय दिलाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
मिंकी शर्मा अपने परिवार की जिम्मेदार बेटी थी और उसकी शादी वाले घर में इस घटना ने मातम फैला दिया था। पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि इस जघन्य अपराध के आरोपी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
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