उत्तर प्रदेश
राम मंदिर मामले में बढ़ा शक का दायरा, SIT ने जमीन सौदों की फाइलें खंगालीं
19 Jun, 2026 10:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित दानराशि में कथित हेराफेरी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की कार्रवाई अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जांच दल ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा साल 2021 से लेकर वर्तमान समय तक अधिग्रहित की गई तमाम जमीनों के दस्तावेजों, बैनामों और फाइलों की गहन समीक्षा शुरू कर दी है। एसआईटी इस बात का सुराग लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के पैसों का भूमि सौदों में किसी प्रकार का गलत इस्तेमाल हुआ है। इसी सिलसिले में जमीन की कीमतों, भुगतान के तरीकों और बिचौलियों की भूमिका को लेकर तीन संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ किए जाने की भी खबर है।
बाजार भाव और खरीद मूल्य में भारी अंतर की समीक्षा
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि एसआईटी मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा जमीनों के बाजार मूल्य और ट्रस्ट द्वारा चुकाई गई रकम के बीच दिख रहे बड़े अंतर पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़ी फाइलों, ट्रस्ट के आधिकारिक अनुमोदनों, बैंक ट्रांजैक्शन के विवरणों और सरकारी राजस्व रिकॉर्ड का आपस में मिलान किया जा रहा है। हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर अभी तक एसआईटी या जिला प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान अथवा वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि नहीं की गई है, जबकि ट्रस्ट पहले ही अपने सभी लेन-देन को पूरी तरह पारदर्शी और नियमानुसार बता चुका है।
करोड़ों रुपये के विवादित भूमि सौदे के दावों की पड़ताल
इस जांच के दायरे में सोशल मीडिया पर राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए वे सवाल भी शामिल हैं, जिनमें मंदिर ट्रस्ट पर बाजार दर से कई गुना अधिक कीमत चुकाकर जमीन खरीदने के आरोप लगाए गए थे। इन दावों के अनुसार, करीब तीन करोड़ रुपये की वास्तविक कीमत वाली एक जमीन का सौदा कथित तौर पर लगभग 24 करोड़ रुपये में किया गया था। एसआईटी अब इन विशिष्ट आरोपों से संबंधित कागजात, सरकारी मूल्यांकन रिपोर्ट और वास्तविक भुगतान रिकॉर्ड का बारीकी से परीक्षण कर रही है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी किया जा सके।
हाल ही में खरीदी गई 71 एकड़ जमीन के दस्तावेजों की जांच
ट्रस्ट की एक हालिया बैठक में साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच मंदिर परिसर के विस्तार के लिए कुल 71 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इस पूरी जमीन को खरीदने में कुल 5 करोड़ 69 लाख 48 हजार 650 रुपये खर्च होने की बात कही गई है, जिसमें अलग-अलग आकार के भूखंडों के लिए लाखों और करोड़ों रुपये के भुगतान का ब्योरा दिया गया था। एसआईटी अब इस समयावधि के दौरान तैयार की गई सभी पत्रावलियों और रजिस्ट्री के कागजातों को अपने कब्जे में लेकर यह जांच रही है कि इन सौदों में तय नियमों का पूरी तरह पालन हुआ था या नहीं।
कम बारिश की चेतावनी! अलनीनो से बढ़ा सूखे का खतरा, कई फसलें होंगी प्रभावित
19 Jun, 2026 08:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अमूमन 18 जून तक दस्तक देने वाला मानसून इस बार अलनीनो के बढ़ते प्रभाव के कारण पिछड़ता नजर आ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के ताजा अनुमान के मुताबिक, सूबे में मानसून के आगमन में कम से कम एक सप्ताह या उससे अधिक का विलंब हो सकता है। इसके साथ ही, इस साल जून से सितंबर के मानसूनी सीजन के दौरान सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका जताई जा रही है। मौसम विभाग का आकलन है कि इस बार प्रदेश में कुल बारिश औसत के 90 फीसदी से भी कम रह सकती है, जबकि अकेले जून के महीने में सामान्य के मुकाबले 50 प्रतिशत से भी कम पानी बरसने के आसार हैं।
खेती-किसानी और फसलों पर मंडराया संकट
जून के शुरुआती हफ्तों में होने वाली बारिश खरीफ की फसलों के लिए बेहद जीवनदायी मानी जाती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में हो रही इस देरी और जून में कम वर्षा की संभावना से लौकी, करेला, तोरई, भिंडी और ग्वार फली जैसी मौसमी हरी सब्जियों के साथ-साथ अरहर, मक्का और बाजरा जैसी प्रमुख फसलों की बुआई और उनके उत्पादन पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ सकता है। केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के 703 जिलों में से महज 103 जिलों में ही 15 जून तक सामान्य बारिश दर्ज की गई है, जिससे देश की कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था की चिंताएं बढ़ गई हैं।
साल 2015 जैसा दिख सकता है अलनीनो का गंभीर रूप
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस वर्ष उत्तर प्रदेश में अलनीनो का असर साल 2015 में उपजे हालातों की याद दिला सकता है। उस दौरान जून से सितंबर के बीच देश भर में सामान्य से केवल 86 से 91 प्रतिशत ही वर्षा रिकॉर्ड हुई थी, जिसके चलते धान और मक्का जैसी मुख्य खरीफ फसलों को भारी नुकसान पहुंचा था और खाद्य महंगाई में बड़ा उछाल देखने को मिला था। भारत में आज भी 50 से 60 प्रतिशत सिंचाई पूरी तरह वर्षा जल पर ही निर्भर है, ऐसे में अलनीनो का यह रुख आने वाले दिनों में खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ी चुनौती खड़ी कर सकता है।
भीषण गर्मी का सितम जारी और 27 जिलों में लू का अलर्ट
प्रदेशवासियों को फिलहाल अगले एक हफ्ते तक इस झुलसाने वाली गर्मी से कोई खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को राज्य के तराई और दक्षिणी अंचल के 27 जिलों में लू (हीटवेव) का येलो अलर्ट जारी किया है, जिनमें प्रयागराज, वाराणसी, मिर्जापुर, जौनपुर, गाजीपुर, गोंडा, बहराइच, लखीमपुर खीरी, बाराबंकी, अयोध्या, मेरठ और बरेली समेत आस-पास के क्षेत्र शामिल हैं। बीते दिन बांदा 43.2 डिग्री सेल्सियस के साथ राज्य का सबसे तप्त शहर रहा, वहीं झांसी, प्रयागराज और वाराणसी में भी पारा 41 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया। फिलहाल यूपी में कोई मजबूत वेदर सिस्टम एक्टिव न होने से तपिश का यह दौर अगले तीन-चार दिनों तक यूं ही बरकरार रह सकता है।
राजनीति का चाणक्य या कारोबारी दिग्गज? निर्दलीय होकर भी बना प्रभावशाली खिलाड़ी
18 Jun, 2026 01:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची। रिलायंस इंडस्ट्रीज में कॉरपोरेट मामलों के निदेशक परिमल नाथवानी के बहुआयामी व्यक्तित्व के कई विशिष्ट पहलू हैं। अहमदाबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से प्रबंधन में पीएचडी की उपाधि प्राप्त नाथवानी ने करीब 9 वर्षों तक गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली और अहमदाबाद में निर्मित विश्व के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम के आधुनिक स्वरूप की रूपरेखा तैयार करने में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा जय शाह के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त वर्ष 2019 में वे गुजरात फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष भी निर्वाचित हुए। कॉरपोरेट जगत में शीर्ष पायदान पर पहुंचने के बाद जब उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने का मन बनाया, तो उन्होंने सीधे झारखंड का रुख किया। मार्च 2008 में झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर हुए द्विवार्षिक चुनाव में वे बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी समर में उतरे थे।
2008 का ऐतिहासिक राज्यसभा चुनाव और क्रॉस वोटिंग का समीकरण
वर्ष 2008 के इस बेहद दिलचस्प राज्यसभा चुनाव में परिमल नाथवानी ने "झारखंड को गुजरात में बदलना है" का एक प्रभावी नारा दिया था। अपने कुशल रणनीतिक और राजनीतिक प्रबंधन के बल पर उन्होंने तत्कालीन सत्तारूढ़ यूपीए (UPA) खेमे के समीकरणों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। उस चुनाव में उन्हें प्रथम वरीयता के 16 मत तथा द्वितीय वरीयता के 5 मतों सहित कुल 21 विधायकों का समर्थन प्राप्त हुआ। अलग-अलग राजनीतिक दलों के विधायकों द्वारा अपने अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ जाकर एक निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में किया गया यह मतदान राज्य की सियासत में क्रॉस वोटिंग का एक बड़ा उदाहरण बना, जिसने नाथवानी की जीत का मार्ग प्रशस्त किया। दूसरी तरफ, भाजपा के जयप्रकाश नारायण सिंह को प्रथम वरीयता के 35 मत (भाजपा के 29 और जदयू के 5 मत) मिले थे और वे भी विजयी रहे थे, जबकि तत्कालीन मुख्यमंत्री मधु कोड़ा सहित तीन विधायकों के मतदान से अनुपस्थित रहने के कारण जीत के लिए जरूरी मतों का कोटा कम हो गया, जिसका सीधा लाभ नाथवानी को मिला।
दिग्गज कानूनी सलाहकार की शिकस्त और राजनीतिक दलों में बड़ी सेंधमारी
इस त्रिकोणीय और कड़े मुकाबले में देश के विख्यात अधिवक्ता आर के आनंद ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर दांव खेला था, जिन्हें ऐन वक्त पर कांग्रेस के 9 और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के 7 विधायकों का समर्थन प्राप्त हुआ था। आर के आनंद को पहली वरीयता के 17 मत हासिल हुए थे जो कि नाथवानी को मिले 16 मतों से एक अधिक था, परंतु आनंद द्वितीय वरीयता का एक भी अतिरिक्त वोट प्राप्त करने में असफल रहे। इसके विपरीत नाथवानी ने दूसरी वरीयता के 5 मतों की बदौलत बाजी मार ली और आनंद 17 मतों पर ही सिमटकर चुनाव हार गए। इसी चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के पास कुल 17 विधायक होने के बावजूद उनके अधिकृत प्रत्याशी किशोरी लाल को मात्र 8 वोट मिले और उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा क्योंकि झामुमो के 9 विधायकों ने दलीय अनुशासन तोड़कर क्रॉस वोटिंग की थी।
सामाजिक सरोकार, आदिवासियों का कल्याण और तीसरी बार का चुनावी रण
संसदीय इतिहास में ऐसा बहुत कम देखा जाता है जब कोई निर्दलीय प्रत्याशी लगातार दूसरी बार भी उच्च सदन का चुनाव जीतने में सफल रहा हो, लेकिन परिमल नाथवानी ने वर्ष 2014 के चुनाव में पुनः निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया था। इस सफलता के पीछे उनकी धरातलीय राजनीतिक सक्रियता और सामाजिक कार्यों को मुख्य वजह माना जाता है। सांसद बनने के बाद उन्होंने गुमला जिले के एक पूर्व नक्सली थिंबू उरांव को जेल से रिहाई के बाद आर्थिक सहायता प्रदान कर समाज की मुख्यधारा में लौटने में मदद की, जिसने बाद में अपने गांव में एक विद्यालय स्थापित किया। इसके साथ ही उन्होंने रांची के करमटोली में आदिवासी छात्रों के लिए एक आधुनिक छात्रावास का निर्माण करवाया, जिसमें अंग्रेजी प्रशिक्षण के लिए विशेष शिक्षक और पुस्तकालय की व्यवस्था की गई, तथा खेल के प्रति अपने लगाव के चलते कावली नामक आदिवासी बाहुल्य गांव में एक फुटबॉल स्टेडियम भी बनवाया। अब यही परिमल नाथवानी एक बार फिर झारखंड से तीसरी बार राज्यसभा पहुंचने के लिए चुनाव मैदान में डटे हैं।
राज्यसभा की दूसरी सीट पर किसका कब्जा? आज साफ होगी तस्वीर
18 Jun, 2026 11:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर निर्वाचन के लिए आज सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान की प्रक्रिया चलेगी। इस चुनावी मुकाबले को लेकर प्रांतीय राजधानी में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। राज्य के सत्तारूढ़ 'इंडिया' गठबंधन और विपक्षी एनडीए (NDA) दोनों ही खेमों ने अपनी-अपनी चुनावी व्यूहरचना को अंतिम रूप देने के लिए शहर के अलग-अलग होटलों में बैठकों का दौर चलाया। झारखंड की इन दो सीटों के लिए कुल तीन प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिसमें 'इंडिया' गठबंधन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बैद्यनाथ राम और कांग्रेस ने प्रणव झा को चुनाव मैदान में उतारा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी भी मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं।
विधायकों की एकजुटता और जीत के दावों का दौर
मतदान से पहले दोनों ही प्रमुख गठबंधनों द्वारा अपने-अपने विधायकों के पूरी तरह एकजुट होने के बड़े दावे किए जा रहे हैं। भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने विश्वास जताया है कि एनडीए के सभी घटक दल साथ हैं और विपक्षी खेमे के भी कई जनप्रतिनिधि देशहित में अपनी अंतरात्मा की आवाज पर उनके पक्ष में मतदान करेंगे, जिसे रेखांकित करने के लिए सोशल मीडिया पर एनडीए विधायकों की एकजुटता दर्शाती तस्वीरें भी साझा की गईं। दूसरी तरफ, कांग्रेस और झामुमो के रणनीतिकारों ने दावा किया है कि 'इंडिया' गठबंधन के सभी 56 विधायक पूरी तरह लामबंद हैं और दोनों ही सीटों पर उनके उम्मीदवारों की फतह तय है। इसी कड़ी में कांग्रेस विधायकों को एक होटल में वोटिंग प्रक्रिया का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया, जहां वामपंथी और राजद नेताओं ने भी पहुंचकर एकजुटता का संदेश दिया।
संख्या बल का गणित और झामुमो की रणनीति
मौजूदा विधानसभा की दलीय स्थिति के अनुसार, झामुमो के पास अपनी एक सीट आसानी से निकालने के लिए पर्याप्त विधायक मौजूद हैं, जबकि दूसरी सीट के लिए कांग्रेस और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के बीच कांटे की टक्कर होने के आसार हैं। राज्य के संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने रणनीतिक रुख स्पष्ट करते हुए बताया कि झामुमो ने सुरक्षा के लिहाज से अपने कोटे के 30 वोट सुरक्षित रखे हैं, जबकि जीत के लिए केवल 28 वोटों की दरकार है। झामुमो के पास मौजूद अतिरिक्त दो वोट कांग्रेस प्रत्याशी के खाते में स्थानांतरित किए जाएंगे। चूंकि कांग्रेस और सहयोगियों के पास पहले से 26 वोट हैं, इसलिए इन अतिरिक्त मतों के मिलने के बाद 'इंडिया' गठबंधन की दूसरी सीट पर भी राह आसान हो जाएगी और किसी भी तरह के असमंजस की स्थिति नहीं है।
समीकरण और चुनाव की पृष्ठभूमि
झारखंड की इस राज्यसभा परीक्षा में किसी भी उम्मीदवार को विजयी होने के लिए न्यूनतम 28 प्रथम वरीयता वाले मतों की आवश्यकता होगी। वर्तमान सदन में भाजपा नीत एनडीए गठबंधन के पास 24 विधायकों का बल है, जबकि सत्ताधारी 'इंडिया' गठबंधन के पास कुल 56 सदस्यों का भारी बहुमत है, वहीं झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का भी एक विधायक सदन में मौजूद है। गौरतलब है कि राज्य में राज्यसभा की ये दोनों सीटें दो अलग-अलग कारणों से रिक्त हुई हैं, जिसमें पहली सीट झामुमो के सह-संस्थापक शिबू सोरेन के देहावसान के बाद खाली हुई थी, जबकि दूसरी सीट पर भाजपा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल 21 जून को समाप्त होने की वजह से मतदान कराया जा रहा है।
पर्यटन और शहरी विकास को बढ़ावा, बिहार में बनेंगे सैटेलाइट टाउनशिप
18 Jun, 2026 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में विकास योजनाओं को रफ्तार देने के लिए कुल 29 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई है। इस बैठक में प्रदेश के बुनियादी ढांचे, भूमि प्रबंधन और पर्यटन क्षेत्र के कायाकल्प से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए, जिन्हें सरकार की एक दूरगामी पहल के रूप में देखा जा रहा है।
सैटेलाइट टाउनशिप में भूमि हस्तांतरण से पाबंदी समाप्त
राज्य सरकार ने एक बड़ा राहत भरा निर्णय लेते हुए ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्रों में जमीनों की खरीद-बिक्री और उनके स्थानांतरण पर पूर्व में लागू किए गए प्रतिबंध को पूरी तरह हटा दिया है। इस फैसले से उन भू-स्वामियों को विशेष रूप से बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें अपनी निजी या पारिवारिक जरूरतों के लिए तत्काल धन की आवश्यकता थी। नई व्यवस्था के तहत अब बिहार राज्य आवास बोर्ड को भी विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से सीधे तौर पर जमीन खरीदने का अधिकार दे दिया गया है। यह महत्वपूर्ण कदम 'बिहार रैयती भूमि क्रय नीति 2026' के प्रावधानों के अंतर्गत उठाया गया है, जिससे विभिन्न सरकारी एजेंसियों को लोक कल्याणकारी और ढांचागत परियोजनाओं के लिए भूमि का अर्जन करने में आसानी होगी, साथ ही निवेशक भी अब औद्योगिक व व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स के लिए आसानी से जमीन क्रय या लीज पर ले सकेंगे।
मुख्यमंत्री हेली-टूरिज्म और हवाई यात्रा योजना को हरी झंडी
बिहार में पर्यटन उद्योग को एक नए मुकाम पर ले जाने और प्रमुख पर्यटन स्थलों के बीच हवाई संपर्क मजबूत करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने 'मुख्यमंत्री बिहार हेली-टूरिज्म और एयर टूरिज्म सेवा योजना 2026' को अपनी स्वीकृति दे दी है। इस अनूठी हवाई सेवा योजना का पहला चरण 15 जुलाई 2026 से शुरू होकर 15 जनवरी 2027 तक संचालित किया जाएगा। प्रथम चरण के अंतर्गत राज्य के सुप्रसिद्ध पर्यटन और धार्मिक स्थलों जैसे वाल्मीकिनगर, राजगीर और मां मुंडेश्वरी मंदिर को इस हवाई नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, जहां सैलानी विमानों और हेलीकॉप्टरों के जरिए सुगम यात्रा कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, राजधानी के निवासियों और पर्यटकों के लिए पटना में वीकेंड (शनिवार-रविवार) 'जॉय राइड' की भी शुरुआत की जाएगी, जो लोगों को आसमान से शहर का दीदार कराने का एक नया रोमांचक अनुभव प्रदान करेगी।
11 नए ग्रीनफील्ड शहरों के निर्माण को प्रशासनिक मंजूरी
शहरीकरण को बढ़ावा देने और महानगरों पर आबादी के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सरकार ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कुल 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने का खाका तैयार किया है। कैबिनेट की बैठक में जिन 11 टाउनशिप के गठन को मंजूरी दी गई है, उनमें पाटलिपुत्र, हरिहरनाथपुर, मगध, मिथिला, कोशी, पूर्णिया, अंग, सीतापुरम्, विक्रमशिला, तिरहुत और सारण शामिल हैं। इन नए आधुनिक शहरों के निर्माण से न केवल क्षेत्रीय असंतुलन दूर होगा, बल्कि रियल एस्टेट, बुनियादी ढांचे के विकास और नए निवेश को एक अभूतपूर्व गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं पर फोकस, बढ़ेंगे ट्रामा सेंटर; मंत्री करेंगे अचानक जांच
18 Jun, 2026 10:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार के सरकारी चिकित्सालयों में आने वाले मरीजों के साथ होने वाली बदसलूकी और उपचार में कोताही की खबरों पर स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि बीमार लोगों के अधिकारों और उनकी सहूलियत से किसी भी कीमत पर खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि जमीनी हकीकत परखने के लिए वे स्वयं किसी भी समय अस्पतालों का औचक निरीक्षण (सरप्राइज विजिट) करने निकल सकते हैं। उन्होंने डॉक्टरों और समस्त पैरामेडिकल स्टाफ को हिदायत दी है कि वे अस्पताल आने वाले प्रत्येक मरीज की तकलीफ को संवेदनशीलता से सुनें और उनके साथ सम्मानजनक आचरण करें, क्योंकि लापरवाही की शिकायत मिलने पर दोषी कर्मियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।
सड़क हादसों के लिए बढ़ेंगे ट्रामा सेंटर और एंबुलेंस
राज्य में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य मंत्री ने ट्रामा सेंटरों के नेटवर्क को और व्यापक बनाने का ऐलान किया है। उन्होंने जानकारी दी कि जिन क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं की आशंका अधिक रहती है, वहां प्राथमिकता के आधार पर नए ट्रामा सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जिसके तहत वर्तमान में नौ विभिन्न ट्रामा सेंटर परियोजनाओं के निर्माण कार्य में तेजी लाई जा रही है। इसके अतिरिक्त, दुर्घटना के शिकार लोगों को 'गोल्डन ऑवर' (मदद के शुरुआती महत्वपूर्ण समय) में तुरंत इलाज मिल सके, इसके लिए राज्य के सभी टोल प्लाजा पर एंबुलेंस की तैनाती अनिवार्य की जाएगी ताकि घायलों को अविलंब नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जा सके।
पीएमसीएच में चौबीस घंटे आपातकालीन सेवा
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने बुधवार को प्रदेश जेडीयू मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई शिविर के दौरान आम जनता की समस्याएं सुनते हुए ये अहम घोषणाएं कीं। इस मौके पर उनके साथ आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा भी जन शिकायतों के निस्तारण के लिए मौजूद थे। जनसुनवाई में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राजधानी के प्रतिष्ठित अस्पताल पीएमसीएच (PMCH) में श्वसन तंत्र और सांस से संबंधित गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए अब दिन-रात यानी 24 घंटे इमरजेंसी वॉर्ड सुचारू रूप से कार्य करेगा।
गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का लक्ष्य
प्रशासनिक अमले को निर्देशित करते हुए मंत्रियों ने कहा कि सरकार का मुख्य ध्येय बिहार के आम नागरिकों को उनके अपने ही क्षेत्र में हर समय उच्च स्तरीय और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए अस्पतालों में आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता और आधुनिक उपकरणों के रख-रखाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जनसुनवाई में आए आवेदनों पर त्वरित संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर समस्याओं का समाधान करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं ताकि आम जनता को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भटकना न पड़े।
नियमों का पालन नहीं करने वाले 465 स्कूलों पर कार्रवाई, बोर्ड ने रद्द की मान्यता
18 Jun, 2026 10:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने प्रदेश के शिक्षा ढर्रे को दुरुस्त करने के लिए एक बहुत बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। बोर्ड मुख्यालय प्रयागराज से जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, राज्य के 465 स्ववित्तपोषित (प्राइवेट) विद्यालयों की मान्यता तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई है। इन डिफाल्टर स्कूलों में सबसे ज्यादा गाजीपुर जिले के 47 संस्थान शामिल हैं, जबकि प्रयागराज के 25, कौशाम्बी के 11 और प्रतापगढ़ के 10 स्कूलों समेत राज्य के विभिन्न जिलों के स्कूल इस कार्रवाई की जद में आए हैं। बोर्ड ने यह सख्त कदम इसलिए उठाया क्योंकि इन विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2024-2025 और 2025-2026 के दौरान न तो कोई कक्षाएं लगीं और न ही कोई छात्र बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हुआ। बोर्ड के नियमों के तहत लगातार दो वर्षों तक पूरी तरह निष्क्रिय रहने वाले स्कूलों की मान्यता खुद-ब-खुद निरस्त मानी जाती है।
इस पूरे मामले पर माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने स्थिति साफ करते हुए बताया कि लगातार दो सालों तक पढ़ाई ठप रहने और जीरो छात्र उपस्थिति के चलते इन प्राइवेट स्कूलों की मान्यता स्वतः समाप्त हो गई है। बोर्ड द्वारा इस बड़ी कार्रवाई की पूरी लिस्ट और ब्योरा उत्तर प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को भेज दिया गया है। विभाग का कहना है कि यह कदम शिक्षा के स्तर को सुधारने और फर्जी या सिर्फ कागजों पर चल रहे स्कूलों को बंद करने के लिए बेहद जरूरी था।
क्या कहता है मान्यता समाप्ति का कानूनी प्रावधान?
इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के तहत बनाए गए बोर्ड नियमावली के अध्याय सात में स्कूलों की मान्यता से जुड़े कड़े प्रावधान तय किए गए हैं। इसी नियम के सेक्शन 11 (ढ़) में यह साफ लिखा गया है कि यदि कोई हाईस्कूल या इंटरमीडिएट स्तर का नया मान्यता प्राप्त स्कूल लगातार दो शैक्षणिक कैलेंडर वर्ष तक पूरी तरह बंद रहता है, वहाँ रेगुलर कक्षाएं नहीं लगती हैं या बोर्ड परीक्षा के लिए एक भी परीक्षार्थी पंजीकृत नहीं होता है, तो ऐसे संस्थानों को दी गई सरकारी मान्यता को तत्काल प्रभाव से समाप्त मान लिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के इन जिलों में बंद हुए सबसे ज्यादा स्कूल:
बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक सूची के अनुसार, प्रदेश के लगभग हर हिस्से में ऐसे निष्क्रिय स्कूल पाए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित जिलों के स्कूल शामिल हैं:
प्रयागराज मंडल: प्रयागराज के 25, कौशाम्बी के 11, प्रतापगढ़ के 10 और फतेहपुर के 13 स्कूल।
वाराणसी व आजमगढ़ मंडल: गाजीपुर के रिकॉर्ड 47, आजमगढ़ के 16, जौनपुर के 10, बलिया के 10, मिर्जापुर के 6 और वाराणसी के 4 स्कूल।
कानपुर व लखनऊ मंडल: कानपुर नगर के 19, लखनऊ के 15, हरदोई के 14, कन्नौज के 9, उन्नाव के 2 और रायबरेली के 5 स्कूल।
पश्चिम यूपी व ब्रज क्षेत्र: एटा के 18, अलीगढ़ के 14, आगरा के 12, मथुरा के 11, मैनपुरी के 10, फिरोजाबाद के 9 और गाजियाबाद के 6 स्कूल।
अन्य जिले: संतकबीर नगर के 12, मुरादाबाद के 9, अयोध्या के 8, सुल्तानपुर के 8, गोरखपुर के 8 और सोनभद्र के 15 स्कूलों समेत बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, रामपुर, लखीमपुर खीरी, झांसी तथा ललितपुर जैसे जिलों के भी 1-1 स्कूल इस कार्रवाई की चपेट में आए हैं।
इस बड़ी तालाबंदी के बाद अब शिक्षा विभाग इन क्षेत्रों के पंजीकृत छात्रों को नजदीकी सक्रिय स्कूलों में समायोजित करने की तैयारी कर रहा है ताकि किसी भी बच्चे की पढ़ाई का नुकसान न हो।
खेलते-खेलते हुआ बड़ा हादसा, पानी में डूबने से दो बच्चों की मौत
18 Jun, 2026 10:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतास। जिले के करगहर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बाउर गांव में बुधवार को एक अत्यंत ह्रदय विदारक घटना सामने आई, जहां तालाब में डूबने से सगे भाई-बहन की अकाल मृत्यु हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद से पूरे क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ है और हर कोई स्तब्ध है। मृत मासूम बच्चों की शिनाख्त बाउर गांव के रहने वाले अनिल बैठा के 8 वर्षीय पुत्र सीटू कुमार और 10 वर्षीय पुत्री दिव्या कुमारी के रूप में की गई है।
घर से खेलने निकले और फिर नहीं लौटे
प्राप्त विवरण के अनुसार, बुधवार के दिन बच्चों के पिता अनिल बैठा किसी निजी कार्य के सिलसिले में घर से कहीं बाहर गए हुए थे। इसी बीच दोनों मासूम बच्चे परिजनों की नजरों से बचकर घर के बाहर खेलने के लिए निकल गए। दोपहर के वक्त जब पिता वापस लौटे, तो बच्चों को घर पर न पाकर उन्होंने उनकी खोजबीन शुरू की। परिवार के सदस्यों ने गांव की गलियों और आस-पास के संभावित स्थानों पर काफी देर तक दोनों को ढूंढा, लेकिन उनका कहीं कोई सुराग हाथ नहीं लग सका।
किनारे पर मिली चप्पलों से खुला राज
शाम ढलने के दौरान जब कुछ स्थानीय ग्रामीण गांव के पास बने तालाब की तरफ से गुजर रहे थे, तो उन्हें पानी के किनारे दो जोड़ी छोटे बच्चों की हवाई चप्पलें लावारिस हालत में दिखाई दीं। चप्पलों को देखकर ग्रामीणों को किसी अनहोनी का गहरा अंदेशा हुआ, जिसके बाद यह खबर आग की तरह पूरे गांव में फैल गई। देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और स्थानीय तैराकों व ग्रामीणों ने तुरंत तालाब के गहरे पानी में बच्चों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
शव मिलते ही चीत्कारों से गूंजा गांव
कड़ी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने दोनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। इस दुखद हादसे की सूचना मिलते ही करगहर थाना पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और दोनों मासूमों के शवों को अपने संरक्षण में लेकर अंत्यपरीक्षण (पोस्टमार्टम) के लिए सदर अस्पताल, सासाराम भिजवा दिया। एक साथ दो चिरागों के बुझ जाने से पीड़ित परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और बच्चों के शवों से लिपटकर विलाप करते पिता को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं, वहीं पुलिस ने इस अप्राकृतिक मौत के मामले में वैधानिक जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
ODOP में शामिल होने की राह पर आगरा के तीन प्रमुख उत्पाद, प्रस्ताव पर जल्द फैसला संभव
18 Jun, 2026 10:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आगरा। ताजमहल की नगरी आगरा के तीन और पारंपरिक व्यवसायों को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिलने जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'एक जनपद-एक उत्पाद' (ODOP) योजना के दायरे में अब यहाँ के प्रसिद्ध चांदी के पायल कारोबार, पारंपरिक जरदोजी कला और ब्रश मैन्युफैक्चरिंग उद्योग को भी शामिल करने की तैयारी तेज कर दी गई है। स्थानीय उद्योग विभाग ने इस संबंध में एक विस्तृत और औपचारिक प्रस्ताव राज्य शासन को मंजूरी के लिए प्रेषित कर दिया है।
इन तीन नए सेक्टरों को हरी झंडी मिलते ही आगरा उत्तर प्रदेश का ऐसा पहला जिला बनने का गौरव हासिल कर लेगा, जिसके रिकॉर्ड छह उत्पाद ओडीओपी की सूची में शुमार होंगे। मालूम हो कि इससे पहले चमड़े के फुटवियर (लेदर शूज), विश्वप्रसिद्ध पेठा और संगमरमर (मार्बल) की पच्चीकारी कला को पहले ही इस विशिष्ट सूची में स्थान मिल चुका है।
ओडीओसी में बढ़ेगा जायका, पेठा बनेगा 'डबल स्टार'
एक ओर जहाँ ओडीओपी के जरिए हस्तशिल्प और विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर 'एक जनपद-एक व्यंजन' (ODOC) योजना के तहत आगरा के लजीज पकवानों का दायरा भी विस्तृत किया जा रहा है। इस पूरी योजना में यहाँ का मशहूर पेठा इकलौता ऐसा खास उत्पाद होगा, जो ओडीओपी (उद्योग) और ओडीओसी (व्यंजन) दोनों ही सूचियों में अपनी जगह बनाए रखेगा।
मौजूदा समय में ओडीओसी की सूची में पेठा, गजक और पारंपरिक पराठा शामिल हैं। अब इस जायके की फेहरिस्त में आगरा की खास दालमोठ, विभिन्न प्रकार की नमकीन और सुबह के बेहद लोकप्रिय नाश्ते 'बेड़ई-जलेबी' को भी जोड़ने की कवायद चल रही है। इस प्रस्ताव को कैबिनेट से स्वीकृति मिलते ही इन सभी पारंपरिक व्यवसायों को हाई-टेक आधुनिक तकनीक, आकर्षक पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों (एक्सपो) के माध्यम से ग्लोबल मार्केट तक सीधी पहुंच मिलेगी।
लोन की आसान सुविधा और ग्लोबल ब्रांडिंग का मिलेगा लाभ
सरकारी योजनाओं में इन उत्पादों के शामिल होने के बाद स्थानीय उद्यमियों और कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा विशेष सब्सिडी (अनुदान) और नए स्टार्टअप या मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करने के लिए बेहद कम ब्याज दरों पर आसान लोन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त, इन प्रोडक्ट्स की वैश्विक स्तर पर ब्रांडिंग की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय व्यापारियों को निर्यात के नए अवसर और युवाओं को रोजगार के साधन सुलभ होंगे।
- शैलेंद्र सिंह, उपायुक्त (उद्योग)
लाखों परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार हैं ये उद्योग:
फुटवियर इंडस्ट्री: देश के कुल चमड़े के जूतों के घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अकेले आगरा की हिस्सेदारी लगभग 65 फीसदी है, जबकि देश से होने वाले कुल फुटवियर एक्सपोर्ट में यह शहर 28 प्रतिशत से ज्यादा का योगदान देता है। इस कारोबार से करीब 4 लाख लोग सीधे और परोक्ष रूप से रोजगार पा रहे हैं।
पेठा कारोबार: ताजनगरी में पेठा बनाने की लगभग 1,500 से अधिक पंजीकृत और छोटी इकाइयां काम कर रही हैं। यहाँ हर दिन तकरीबन 700 से 800 टन पेठे का बंपर उत्पादन किया जाता है।
चांदी की पायल का बाजार: शहर का 'चौबेजी का फाटक' इलाका समूचे उत्तर भारत में चांदी के व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहाँ रोजाना कई टन चांदी की बेहद खूबसूरत पायलें और घुंघरू स्थानीय कारीगरों द्वारा गढ़े जाते हैं, जिनकी सप्लाई देश के करीब 80 फीसदी सराफा बाजारों में की जाती है।
तीन साल पुराने रिश्ते का खौफनाक अंत, प्रेमिका के बेटे की हत्या के आरोप में बैंक अधिकारी गिरफ्तार
18 Jun, 2026 10:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिला अंतर्गत बहसूमा क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज और रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ एक निजी बैंक (HDFC) के एरिया मैनेजर अर्पित पाराशर ने अपनी प्रेमिका के 6 साल के मासूम बेटे अंगदवीर की चाकू से गला रेतकर बेरहमी से हत्या कर दी। हत्या की मुख्य वजह यह थी कि मासूम ने अपनी मां और आरोपी को एक साथ देख लिया था, जिससे आरोपी को अपना एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर उजागर होने का डर सता रहा था। आरोपी ने बच्चे का अपहरण रामराज इलाके में स्थित उसके घर के बाहर से मंगलवार को किया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए बुधवार को मीरापुर निवासी हत्यारे मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया है और उसकी प्रेमिका को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। गौरतलब है कि आरोपी अर्पित की शादी महज 6 महीने पहले ही हुई थी।
घर के बाहर से कार में किया था मासूम का अपहरण
रामराज की रहने वाली बलजिंदर कौर ने मंगलवार को स्थानीय थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई थी कि उनका 6 वर्षीय पोता अंगदवीर घर के बाहर खेल रहा था, तभी आरोपी अर्पित पाराशर उसे अपनी कार में जबरन बैठाकर अगवा कर ले गया। आरोपी अर्पित हापुड़ में बैंक का एरिया मैनेजर है। पुलिस ने जब तफ्तीश शुरू की और इलाके के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले, तो उसमें आरोपी साफ तौर पर बच्चे को अपनी कार में ले जाता हुआ दिखाई दिया।
8 घंटे तक पुलिस को गुमराह करता रहा हत्यारा मैनेजर
गिरफ्तारी के बाद पुलिसिया पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि रविवार को वह अपनी प्रेमिका गुरप्रीत से मिलने उसके घर गया था। इस दौरान मासूम अंगदवीर ने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में साथ देख लिया था। अर्पित को डर था कि बच्चा अपने परिजनों के सामने इस गुप्त रिश्ते का भंडाफोड़ कर देगा, इसी खौफ के चलते उसने मासूम को रास्ते से हटाने की साजिश रची।
मंगलवार देर रात जब पुलिस ने आरोपी को मीरापुर के भूमा रोड से घेराबंदी कर दबोचा, तो वह करीब 8 घंटे तक मनगढ़ंत कहानियां गढ़कर पुलिस को गुमराह करता रहा। उसने पहले दावा किया कि उसने बच्चे को परीक्षितगढ़ क्षेत्र की एक नहर में फेंक दिया है। बुधवार सुबह से ही पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें नहर में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाती रहीं। आखिरकार, जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने सच उगल दिया कि उसने हस्तिनापुर के भद्रकाली मंदिर के पास ही बच्चे का गला रेत दिया था। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर शाम 5 बजे झाड़ियों से मासूम का शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
बस सफर के दौरान परवान चढ़ा था प्रेम प्रसंग
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि अंगदवीर के पिता गुरसेवक सिंह पिछले 6 सालों से आजीविका के सिलसिले में सऊदी अरब में रह रहे हैं। करीब 3 साल पहले उनकी पत्नी गुरप्रीत ने बहसूमा के एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका के तौर पर पढ़ाना शुरू किया था। वह रोज बस से स्कूल आती-जाती थी। वहीं, आरोपी अर्पित भी हापुड़ स्थित अपने बैंक जाने के लिए मीरापुर से उसी बस में सफर करता था। इसी दौरान दोनों की जान-पहचान हुई, जो धीरे-धीरे गहरे प्रेम प्रसंग में तब्दील हो गई और जिसका अंत इस खौफनाक हत्याकांड के रूप में हुआ।
UP में जलनिकासी व्यवस्था की खुली पोल, डिप्टी सीएम के घर में घुसा नाले का पानी
18 Jun, 2026 10:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मानसून की आमद और मूसलाधार बारिश शुरू होने से पहले ही वीवीआईपी इलाकों की ड्रेनेज व्यवस्था की पोल खुल गई है। वीवीआईपी मार्ग स्थित सूबे के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सरकारी बंगले के भीतर पिछले पांच दिनों में दो बार नाले और सीवर का बदबूदार गंदा पानी भर चुका है। इस गंभीर समस्या की बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद नगर निगम द्वारा कोई ठोस और स्थायी कदम न उठाए जाने पर उपमुख्यमंत्री ने सख्त नाराजगी जाहिर की है। इस ढुलमुल रवैए को लेकर डिप्टी सीएम के कार्यालय ने नगर निगम प्रशासन को एक कड़ा शिकायती पत्र भेजकर अपनी गहरी आपत्ति दर्ज कराई है।
लॉन में भरा बदबूदार पानी, आश्वासन के बाद भी नहीं सुधरे हालात
पूरा मामला लखनऊ के सबसे पॉश इलाके सात कालिदास मार्ग स्थित उपमुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास का है। पिछले एक हफ्ते के दौरान यहाँ ड्रेनेज चोक होने की वजह से सीवर का गंदा पानी बंगले के मुख्य लॉन और परिसर में जमा हो रहा है। इससे पहले बीते 12 जून को भी जब पहली बार जलजमाव हुआ था, तब शिकायत मिलने पर नगर निगम की रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर केवल पंप से पानी बाहर निकाल दिया था। उस वक्त अधिकारियों ने दावा किया था कि वे अगले ही दिन आकर नाले की पूरी सफाई करेंगे और समस्या का हमेशा के लिए खात्मा कर देंगे, लेकिन धरातल पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।
निजी सचिव ने नगर आयुक्त को लिखा कड़ा पत्र, कार्रवाई की मांग
मंगलवार को एक बार फिर डिप्टी सीएम के आवास का लॉन सीवर के गंदे पानी से लबालब हो गया, जिससे परिसर में भारी गंदगी और बदबू फैल गई। इस स्थिति को देख उपमुख्यमंत्री का पारा चढ़ गया। उनके निजी सचिव ने तुरंत एक्शन लेते हुए नगर आयुक्त को एक आधिकारिक पत्र प्रेषित किया है। पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि इस बदइंतजामी को लेकर नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी को पहले ही पूरी स्थिति से रूबरू करा दिया गया था।
इसके बाद जांच के लिए जूनियर इंजीनियर (जेई) प्रतिमा यादव और किशोरी लाल बंगले पर पहुंचे थे और जल्द समाधान का भरोसा दिया था, मगर जमीनी स्तर पर लापरवाही बरती गई। पत्र में मांग की गई है कि जनता और जनप्रतिधि के निवास की व्यवस्था में इतनी बड़ी कोताही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
ग्राउंड जीरो से नदारद रहे बड़े जिम्मेदार अफसर, हर साल का बना रोना
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में लापरवाही का एक बड़ा कारण यह भी रहा कि क्षेत्र के अधिशासी अभियंता अतुल मिश्रा वर्तमान में अवकाश पर चल रहे हैं, जबकि उनकी अनुपस्थिति में कमान संभाल रहे सहायक अभियंता अवधेश सिंह ने मौके पर जाना मुनासिब नहीं समझा। जानकारों का कहना है कि अगर जिम्मेदार राजपत्रित अधिकारी समय रहते खुद ग्राउंड जीरो पर जाकर मॉनिटरिंग करते, तो नाले की चोकिंग को स्थायी रूप से ठीक किया जा सकता था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हर साल मानसूनी सीजन में इस वीवीआईपी बंगले में जलजमाव की स्थिति बनती है, लेकिन निगम प्रशासन अब तक इसका कोई पुख्ता ड्रेनेज प्लान तैयार नहीं कर पाया है।
मुस्तैद की गई टीम, तलाश रहे स्थायी समाधान: प्रभारी नगर आयुक्त
इस पूरे हाई-प्रोफाइल मामले पर प्रभारी नगर आयुक्त अभिनव रंजन श्रीवास्तव ने अपनी सफाई देते हुए बताया कि जैसे ही उपमुख्यमंत्री कार्यालय से शिकायत प्राप्त हुई, तत्काल नगर निगम की विशेष टीम और सक्शन मशीनों को मौके पर रवाना किया गया। फिलहाल लॉन में जमा हुए गंदे पानी को पूरी तरह से साफ करवा दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि ड्रेनेज लाइन में आ रही इस तकनीकी दिक्कत को हमेशा के लिए दूर करने के लिए संबंधित अभियंताओं को कड़े निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि आने वाले बारिश के दिनों में दोबारा ऐसी अप्रिय स्थिति पैदा न हो।
रांची समेत 17 जिलों में भारी बारिश-आंधी का खतरा, मौसम विभाग का अलर्ट
18 Jun, 2026 08:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची। झारखंड में लंबे इंतजार के बाद मौसम का मिजाज एक बार फिर करवट लेने के लिए तैयार है। प्रशांत महासागर में अल नीनो के प्रभाव और अब तक मॉनसून की सुस्ती के बाद, गुरुवार से राज्य में वर्षा तंत्र के दोबारा सक्रिय होने के अनुकूल संकेत मिल रहे हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के ताजा अनुमानों के मुताबिक, गुरुवार और शुक्रवार को प्रदेश के एक बड़े हिस्से में वायुमंडलीय बदलाव देखने को मिलेंगे, जिससे तपिश से राहत मिलने की उम्मीद है।
17 जिलों में ऑरेंज और बाकी हिस्सों में येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने गुरुवार और शुक्रवार को प्रांतीय राजधानी रांची सहित राज्य के 17 संवेदनशील जिलों में दोपहर के बाद मौसम में अचानक बदलाव की चेतावनी जारी की है। इस दायरे में खूंटी, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, बोकारो, गिरिडीह, धनबाद, देवघर, जामताड़ा, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ शामिल हैं, जहां 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने, बादलों की तेज गर्जना और आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने की आशंका को देखते हुए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है। वहीं, प्रदेश के शेष सात जिलों में भी मध्यम गति की हवाओं के साथ आकाशीय बिजली कड़कने और हल्की बौछारें पड़ने की संभावना के मद्देनजर 'येलो अलर्ट' प्रभावी किया गया है। तापमान की बात करें तो इन दो दिनों में रांची का पारा अधिकतम 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा सकता है।
सप्ताहांत में आंशिक बादल और मध्यम बारिश का अनुमान
मौसम के इस बदले रुख का असर सप्ताहांत में भी देखने को मिलेगा, जिसके तहत 20 जून को पूरे राज्य में आंशिक रूप से बादल छाए रहने का पूर्वानुमान है। इस दौरान झारखंड के अनेक इलाकों में हल्की से मध्यम दर्जे की वर्षा होने की प्रबल संभावना जताई गई है। इसके साथ ही कुछ सुदूरवर्ती अंचलों में आकाशीय बिजली चमकने तथा हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की बात कही गई है, जिससे वातावरण में मौजूद उमस भरी गर्मी से लोगों को काफी हद तक निजात मिल जाएगी।
जून महीने में सामान्य से आधी भी नहीं हुई बरसात
मौसमविदों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, चालू सीजन में 1 जून से लेकर 17 जून के मध्य झारखंड को भारी मानसूनी बेरुखी का सामना करना पड़ा है। इस समयावधि में राज्य के भीतर औसत के मुकाबले बेहद कम पानी बरसा है, जो कि सामान्य स्तर से लगभग 56 प्रतिशत कम दर्ज किया गया है। सांख्यिकीय तौर पर इस पखवाड़े में झारखंड में कम से कम 67 मिलीमीटर पारंपरिक वर्षा दर्ज की जानी चाहिए थी, लेकिन अल नीनो की सक्रियता के कारण बादलों की आवाजाही प्रभावित हुई और अब तक उम्मीद के मुताबिक पानी नहीं गिरा है।
TMC-शिवसेना के बाद सपा का नंबर? सांसदों की टूट की खबरों पर पार्टी ने खोला मोर्चा
18 Jun, 2026 08:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में इन दिनों मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर संभावित बिखराव को लेकर अटकलें बेहद तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेता लगातार इस बात का दावा कर रहे हैं कि सपा में एक बड़ी बगावत होने जा रही है। सूबे के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक बड़ा बयान देते हुए दावा किया है कि सपा के लगभग 25 से 27 सांसद उनके संपर्क में हैं और पार्टी छोड़ने के लिए तैयार बैठे हैं। इस बीच, प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी लगातार इस दावे को दोहरा रहे हैं, जिसके बाद प्रांतीय राजधानी लखनऊ सहित पूरे राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
हम तोड़ नहीं रहे, वे खुद बिखर रहे हैं: डिप्टी सीएम केशव मौर्य
केंद्र सरकार के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने संवाददाताओं से मुखातिब होते हुए कहा, "समाजवादी पार्टी के भीतर भारी असंतोष है और उनके 25-26 सांसद पार्टी का साथ छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हम किसी को तोड़ नहीं रहे हैं, बल्कि उनके अपने आंतरिक समीकरणों के चलते 2027 के विधानसभा चुनाव तक वे खुद बिखर जाएंगे।"
उपमुख्यमंत्री ने आगे तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह पश्चिम बंगाल के चुनावों में कुछ दलों का हश्र हुआ था, उत्तर प्रदेश में सपा का उससे भी बुरा हाल होने वाला है और 2027 में वे राजनीतिक रूप से चारों खाने चित हो जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष चाहे मिलकर चुनाव लड़े या अलग-अलग, भाजपा रिकॉर्ड बहुमत के साथ राज्य में तीसरी बार और केंद्र में चौथी बार सरकार बनाने का कीर्तिमान स्थापित करेगी।
एसी रूम से बाहर निकलें अखिलेश यादव: ओम प्रकाश राजभर
दूसरी ओर, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख और पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर और सपा मुखिया अखिलेश यादव के बीच सोशल मीडिया से लेकर बयानों तक सीधी जंग छिड़ी हुई है। राजभर ने पुराना गठबंधन टूटने के कारणों पर तंज कसते हुए कहा, "मैंने तो सिर्फ पूर्व में यही सलाह दी थी कि एयर कंडीशनर (एसी) वाले कमरों से बाहर निकलकर जमीन पर जनता के बीच थोड़ी मेहनत कर लीजिए। मगर वे एसी छोड़ने को तैयार नहीं थे और नाराज होकर नाता तोड़ लिया।" उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी शोषितों, पिछड़ों और वंचितों के हक की आवाज बुलंद करने के लिए एनडीए के साथ आई है।
'लंका में आग लगाने वाला विभीषण आपके साथ ही घूम रहा है'
राजभर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर सपा प्रमुख को घेरते हुए एक बेहद तीखा पोस्ट साझा किया है। उन्होंने लिखा कि अभी तो सिर्फ शुरुआती कड़ियों का जिक्र हुआ है, अगर पूर्व के कुछ बड़े प्रशासनिक और विकास कार्यों से जुड़े घोटालों के दोषियों के नाम सार्वजनिक कर दिए जाएं, तो प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ जाएगा।
राजभर ने अखिलेश यादव को एक पुराने मित्र के नाते सचेत करते हुए लिखा, "अगर आप में क्षमता है तो अपनी पार्टी को बगावत से बचा लीजिए। अपने जनप्रतिनिधियों को पवित्र ग्रंथों की शपथ दिलाकर देख लीजिए, सब सच सामने आ जाएगा। आपकी ही लंका में आग लगाने वाला विभीषण आपके अगल-बगल ही घूम रहा है।"
आलू-प्याज और पार्टी के विलय का दिलचस्प सुझाव
सपा अध्यक्ष द्वारा लगाए गए कुछ पुराने आरोपों का पलटवार करते हुए राजभर ने बेहद देसी अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनके घर पर केवल सामान्य किसानों की तरह दो-चार किलो आलू, प्याज और गेहूं की बोरियां ही मिलेंगी। उन्होंने तंज कसा कि इस भीषण गर्मी में भी अगर विपक्ष के नेता बंद कमरों की ठंडी हवा में ही मशगूल रहे, तो बाहर हो रहे राजनीतिक शॉर्ट सर्किट से उनकी पूरी राजनीतिक जमीन जलकर खाक हो जाएगी। राजभर ने चुटकी लेते हुए यहाँ तक सुझाव दे डाला कि सपा को अपनी पार्टी का विलय सुभासपा में कर लेना चाहिए, जिससे उन्हें राजनीतिक रूप से कोई सम्मानजनक पद दिया जा सके।
महुआ शराब के दौरान शुरू हुआ विवाद, युवक की मौत के बाद जांच तेज
17 Jun, 2026 01:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सरायकेला-खरसावां। जिला अंतर्गत चांडिल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सालगाडीह गांव के खोखरोडीह टोले में महुआ शराब के सेवन को लेकर उपजा मामूली विवाद कुछ ही देर में खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया, जिसमें एक स्थानीय युवक की दर्दनाक मौत हो गई। मृत घोषित किए गए युवक की पहचान सालगाडीह के रहने वाले छूटू लोहार के रूप में की गई है। इस अचानक हुई हिंसक वारदात के बाद से समूचे ग्रामीण इलाके में दहशत और सनसनी का माहौल व्याप्त है। मृतक के शोकाकुल परिजनों और ग्रामवासियों ने भादुडीह निवासी अवैध महुआ शराब के धंधेबाज मानिक मंडल पर डंडों से पीट-पीटकर हत्या को अंजाम देने का सीधा आरोप जड़ा है। हालांकि, पुलिस प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि इस मामले में अभी तक पीड़ित पक्ष की ओर से कोई भी औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
शराब पीने के दौरान भड़की बहस और खौफनाक हमला
घटनाक्रम के विवरण के मुताबिक, बीते मंगलवार की शाम को छूटू लोहार हमेशा की तरह महुआ शराब का सेवन करने के लिए मानिक मंडल के ठिकाने पर गया हुआ था। वहां शराब पीने के दौरान ही दोनों के मध्य किसी पुरानी या तात्कालिक बात को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों ने बताया कि विवाद इतना बढ़ गया कि आपा खोकर मानिक मंडल ने पहले तो छूटू के ऊपर खौलता हुआ गर्म पानी फेंक दिया और फिर उस पर भारी पत्थरों तथा लाठी-डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर लहूलुहान कर दिया। इस जानलेवा हमले में गंभीर रूप से जख्मी हुए छूटू को आनन-फानन में इलाज के लिए जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस की दबिश और फरार शराब कारोबारी की खोजबीन तेज
अस्पताल से मौत की आधिकारिक सूचना मिलते ही चांडिल थाना पुलिस की टीम तुरंत हरकत में आई और घटनास्थल का जायजा लेने के बाद शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए सुरक्षित भिजवा दिया। इस खूनी वारदात को अंजाम देने के बाद से ही मुख्य आरोपी मानिक मंडल अपने ठिकाने से ताला बंद कर फरार चल रहा है। पुलिस प्रशासन ने आरोपी की जल्द से जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए उसके संभावित छिपने के ठिकानों और रिश्तेदारों के घरों पर लगातार छापेमारी और दबिश देने की कार्रवाई तेज कर दी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी जांच और पुलिसिया तफ्तीश
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चांडिल के थाना प्रभारी संतन तिवारी ने बताया कि शव का पंचनामा कर जांच शुरू कर दी गई है, लेकिन मौत की असली और सटीक वजहों का खुलासा पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही विधिक रूप से हो सकेगा। उन्होंने पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए बताया कि मृतक के माता-पिता इस दुनिया में नहीं हैं और वह लंबे समय से अपने जीजा के घर पर ही आश्रित था तथा अत्यधिक नशा करने का आदी हो चुका था। फिलहाल पुलिस आपसी रंजिश सहित तमाम अन्य कड़ियों को जोड़ते हुए हर संभावित पहलू पर गहराई से जांच-पड़ताल कर रही है।
रेल कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा, गोड्डा-पीरपैंती परियोजना के दूसरे फेज पर काम शुरू होने की तैयारी
17 Jun, 2026 01:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गोड्डा। स्वतंत्रता के एक लंबे समय के बाद भी बिहार और झारखंड के सीमावर्ती प्रक्षेत्र गोड्डा से पीरपैंती के मध्य सीधे रेल संपर्क की अनुपलब्धता के कारण यहां के स्थानीय निवासियों को पूरी तरह से सड़क परिवहन पर ही आश्रित रहना पड़ता था। मगर, अब पूर्व रेलवे के निर्माण विभाग की विशेष मुस्तैदी से इस बड़ी असुविधा को खत्म करने की कवायद बेहद तेज हो चुकी है। कुल 1,393 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार होने वाली इस नई रेल लाइन परियोजना के पहले फेज का जमीनी काम इन दिनों काफी तेज गति पकड़ चुका है। इसी सिलसिले में, पहले चरण का ढांचागत काम मुकम्मल होने से पहले ही दूसरे चरण के निर्माण के लिए जरूरी भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रशासनिक तैयारी भी समानांतर रूप से शुरू कर दी गई है, ताकि आने वाले समय में किसी भी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक रुकावट के बिना इस महत्वाकांक्षी परियोजना को समय पर पूरा किया जा सके।
दो भागों में बंटी पूरी योजना और रेलवे को मिली 150 एकड़ भूमि
इस पूरी रेल परियोजना के भौगोलिक विस्तार को सुचारू ढंग से पूरा करने के लिए इसे दो चरणों में विभाजित किया गया है। कुछ समय पूर्व इस योजना को गति देने के उद्देश्य से झारखंड सरकार ने रेलवे प्रशासन को 150 एकड़ जमीन आधिकारिक रूप से हस्तांतरित कर दी थी। गोड्डा के जिला भू-अर्जन कार्यालय द्वारा पूर्व रेलवे के डिप्टी चीफ कंस्ट्रक्शन कुमार हेमंत को इस भूमि आवंटन का आधिकारिक स्वीकृति पत्र सौंपे जाने के बाद से ही रेलवे की इंजीनियरिंग टीम धरातल पर पूरी मुस्तैदी से डटी हुई है। लगभग 62 किलोमीटर लंबी इस संपूर्ण रेल लाइन के पहले फेज में गोड्डा से महागामा तक पटरी बिछाने की प्रक्रिया युद्धस्तर पर जारी है, जबकि इसके अगले और दूसरे फेज के अंतर्गत महागामा से पीरपैंती तक के हिस्से को आपस में जोड़ा जाएगा।
एनटीपीसी फरक्का को ईंधन ढुलाई में सुगमता और स्टोन चिप्स कारोबार को रफ्तार
इस नए रेलखंड के पूरी तरह से क्रियाशील हो जाने के बाद एनटीपीसी (NTPC) फरक्का को ललमटिया खदानों (माइंस) से कोयले की निर्बाध आपूर्ति के लिए एक वैकल्पिक और काफी छोटा रेल मार्ग उपलब्ध हो जाएगा। इसके चालू होने से वर्तमान में कहलगांव होकर गुजरने वाले पारंपरिक रूट का अतिरिक्त परिचालन दबाव काफी हद तक कम हो सकेगा। इसके साथ ही, मिर्जाचौकी, पाकुड़ और साहेबगंज प्रक्षेत्र से होने वाले स्टोन चिप्स (गिट्टी) के मालवहन के लिए भी यह नया ट्रैक सबसे सुगम और किफायती साबित होगा। इतना ही नहीं, सरकार द्वारा पीरपैंती प्रक्षेत्र में प्रस्तावित नए पावर प्लांट की बुनियादी जरूरतों और इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने की दिशा में भी यह नई रेल परियोजना एक गेम-चेंजर की भूमिका निभाएगी।
समय पर काम पूरा करने को लेकर लाइव मॉनिटरिंग और दूसरे फेज का खाका
पूर्व रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग के तमाम छोटे-बड़े आला अधिकारी इस पूरी परियोजना की लाइव मॉनिटरिंग (सतत निगरानी) कर रहे हैं, ताकि तय समय सीमा के भीतर निर्माण एजेंसियों और कार्यबल को धरातल पर क्रियाशील रखा जा सके। इस रेल मार्ग के शुरू होने से न केवल आम मुसाफिरों को यात्रा का एक सुगम और सस्ता जरिया मिलेगा, बल्कि दोनों राज्यों के सीमावर्ती जिलों के व्यापारिक परिदृश्य को भी एक नई आर्थिक मजबूती मिलेगी। पूर्व रेलवे के डिप्टी चीफ कंस्ट्रक्शन कुमार हेमंत ने इस संबंध में बताया कि झारखंड सरकार से 150 एकड़ जमीन का कब्जा प्राप्त हो चुका है और गोड्डा से महागामा तक पहले चरण का काम सुचारू रूप से चल रहा है। प्रथम चरण के निर्माण को गति देने के साथ-साथ दूसरे फेज के भूमि अधिग्रहण की रूपरेखा भी जल्द ही धरातल पर उतार दी जाएगी ताकि पूरी परियोजना बिना किसी विसंगति के समय पर पूरी हो सके।
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