उत्तर प्रदेश
बिहार की सियासत में तीखा वार, लालू ने नीतीश सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
17 Jun, 2026 01:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था में कटौती और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को खाली कराने के नोटिस को लेकर सूबे में मचे सियासी घमासान के बीच एक बेहद बड़ा और तीखा बयान दिया है। उन्होंने वर्तमान राज्य सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनके खिलाफ की जा रही यह तमाम दंडात्मक और प्रशासनिक कार्रवाइयां पूरी तरह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इशारे और मर्जी पर ही अमल में लाई जा रही हैं। राजधानी पटना में मीडिया कर्मियों से औपचारिक अनौपचारिक बातचीत के दौरान राजद प्रमुख ने अपनी सुरक्षा में की गई कटौती और सरकारी बंगले से जुड़े विवादों पर खुलकर अपनी बात रखी और खुलकर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप मढ़ा कि उनके पूरे परिवार और पार्टी के शीर्ष नेताओं को इस तरह की सरकारी कार्रवाइयों के जरिए राजनीतिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की एक गहरी साजिश रची जा रही है। हालांकि, इस दौरान उन्होंने किसी अन्य मुद्दे पर विस्तार से कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके बयानों की पूरी सुई सीधे तौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की घेराबंदी करने पर ही टिकी रही।
सुरक्षा में कटौती को लेकर लालू खेमे में भारी असंतोष
राजद सुप्रीमों के इस बयान के बाद पार्टी के भीतर और बाहर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छिड़ गई है। लालू प्रसाद यादव के करीबियों का मानना है कि उनकी जनप्रियता और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए उनके सुरक्षा घेरे में किसी भी तरह का बदलाव करना व्यावहारिक रूप से सही नहीं है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार राजनीतिक प्रतिशोध के चलते जानबूझकर लालू परिवार की सुरक्षा को कमजोर करने का प्रयास कर रही है, जो कि लोकतंत्र की स्वस्थ परंपराओं के बिल्कुल विपरीत है।
राबड़ी आवास को खाली कराने के नोटिस पर सियासी रार
सुरक्षा के साथ-साथ राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को खाली कराने के प्रशासनिक नोटिस ने भी इस आग में घी डालने का काम किया है। लालू यादव ने संकेत दिया कि जिस आवास से उनकी पार्टी की तमाम बड़ी राजनीतिक गतिविधियां और फैसले संचालित होते हैं, उसे निशाना बनाकर वास्तव में राजद की रीढ़ पर वार करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने साफ किया कि इस तरह के सरकारी दबावों के आगे उनका परिवार और संगठन झुकने वाला नहीं है और वे इसका राजनीतिक मुकाबला करेंगे।
नीतीश कुमार और लालू यादव के बीच बढ़ी राजनीतिक तल्खी
इस ताजा बयानबाजी से साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव के बीच की तल्खी और ज्यादा बढ़ने वाली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालू यादव द्वारा सीधे मुख्यमंत्री को कटघरे में खड़ा करने से दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच जमीनी स्तर पर टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। फिलहाल, विपक्षी खेमे ने इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और वे इसे जनता के बीच ले जाने की रणनीति बना रहे हैं।
रांची में RSS कार्यालय पर हमला, पेट्रोल बम फेंककर आरोपी फरार
17 Jun, 2026 10:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची। झारखंड की राजधानी के निवारणपुर इलाके में स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रांतीय कार्यालय पर मंगलवार की देर रात कथित तौर पर पेट्रोल बम से हमला किए जाने की एक बेहद संवेदनशील घटना प्रकाश में आई है। इस दुस्साहसिक वारदात की खबर जंगल में आग की तरह फैलते ही राजनीतिक गलियारों और सामाजिक संगठनों में हड़कंप मच गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए बाबूलाल मरांडी, सीपी सिंह और संजय सेठ जैसे कई वरिष्ठ नेता और गणमान्य लोग तुरंत स्थिति का जायजा लेने आरएसएस दफ्तर पहुंचे। इसके साथ ही, स्थानीय पुलिस और प्रशासन की आला टीमें भी भारी बल के साथ मौके पर पहुंच चुकी हैं और मामले की बारीकी से जांच-पड़ताल की जा रही है।
सीसीटीवी फुटेज में कैद हुई हमलावरों की करतूत
घटनास्थल के आस-पास और संघ कार्यालय परिसर में लगे तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरों की जब सघनता से जांच की गई, तो उसमें चौंकाने वाले दृश्य सामने आए हैं। फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि मोटरसाइकिल या पैदल आए दो नकाबपोश हमलावर ज्वलनशील पदार्थ से भरा पेट्रोल बम संघ कार्यालय की इमारत पर फेंकने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, मुस्तैदी या किसी अन्य तकनीकी वजह से यह विस्फोटक पूरी तरह अपने निशाने पर नहीं लगा, लेकिन इस हरकत ने सुरक्षा व्यवस्था को बड़ी चुनौती दी है। पुलिस ने इस फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है और आरोपियों के हुलिये के आधार पर उनकी धरपकड़ के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
आरएसएस जैसे बड़े संगठन के मुख्य दफ्तर को निशाना बनाए जाने की सूचना मिलते ही देर रात ही प्रमुख राजनेताओं का वहां जमावड़ा शुरू हो गया। नेताओं ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे शहर की शांति और आपसी सौहार्द को बिगाड़ने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। मौके पर पहुंचे जनप्रतिनिधियों ने पुलिस के आला अफसरों से बात कर अपराधियों को अविलंब गिरफ्तार करने और संगठन के कार्यालयों की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने की मांग उठाई है। इस घटना के बाद से मुख्य मार्ग और संवेदनशील चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
पुलिसिया तफ्तीश और इलाके में एहतियातन गश्त तेज
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फॉरेंसिक विशेषज्ञों और खोजी कुत्तों (डॉग स्क्वॉड) की मदद भी ली जा रही है ताकि घटनास्थल से बारूद या पेट्रोल के अवशेष और अन्य अहम सबूत जुटाए जा सकें। थाना प्रभारी और वरीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शहर के माहौल को किसी भी सूरत में खराब नहीं होने दिया जाएगा। पुलिस अपराधियों के भागने के रूट को खंगालने के लिए शहर के अन्य प्रमुख रास्तों पर लगे कैमरों की भी जांच कर रही है। एहतियात के तौर पर पूरे निवारणपुर और आस-पास के इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है और संदिग्धों से पूछताछ जारी है।
मुजफ्फरपुर में सिपाही भर्ती परीक्षा का दूसरा चरण, सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
17 Jun, 2026 10:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुजफ्फरपुर। केंद्रीय चयन परिषद की ओर से आज बुधवार को बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा के द्वितीय चरण का संचालन किया जा रहा है। गौरतलब है कि इस लिखित परीक्षा के जरिए मद्य निषेध सिपाही, जेल वार्डर (कक्षपाल) और चलंत दस्ता सिपाही के रिक्त पदों को भरा जाना है। भर्ती परीक्षा का यह सिलसिला बीते शनिवार यानी 14 जून से प्रारंभ हुआ था, जो आज 17 जून को भी जारी है। इस परीक्षा के सफल संचालन के लिए अकेले मुजफ्फरपुर जिले के भीतर 22 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां दो अलग-अलग शिफ्टों में परीक्षा ली जा रही है। परीक्षा स्थलों पर कानून व्यवस्था और सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। केंद्रों के बाहर जमा होने वाली भीड़ को संभालने के लिए स्थानीय पुलिस बल के अतिरिक्त निजी सुरक्षा कंपनियों के सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों को भी मुस्तैद किया गया है। वहीं, संपूर्ण परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी, शांतिपूर्ण और नकलविहीन बनाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से पहले ही पुख्ता ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया गया था।
कमांडो चेकिंग और केंद्रों पर मजिस्ट्रेटों की तैनाती
सिपाही बहाली परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के संयुक्त आदेश पर सभी केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारियों (मजिस्ट्रेट), पुलिस अफसरों और सशस्त्र बलों को तैनात किया गया है। परीक्षा देने आने वाले युवाओं की सहूलियत और सुरक्षा को देखते हुए सभी ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों को समय से पहले अपने निर्धारित पॉइंट पर रिपोर्ट करने तथा हर गतिविधि पर पैनी नजर रखने की हिदायत दी गई है। इसके साथ ही, उम्मीदवारों को परीक्षा हॉल में बैठाने से पहले मुख्य गेट से लेकर क्लासरूम के प्रवेश द्वार तक बेहद बारीकी से जांचने के आदेश दिए गए हैं।
उम्मीदवारों के लिए रिपोर्टिंग टाइम और एंट्री के सख्त नियम
प्रशासनिक नियमावली के मुताबिक, सुबह की पहली पाली में बैठने वाले परीक्षार्थियों के लिए केंद्र पर पहुंचने का आखिरी समय सुबह 8 बजे तय किया गया है, जिसके बाद मुख्य द्वार को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा और किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं होगी। इसी तरह, दोपहर की दूसरी पाली के अभ्यर्थियों के लिए रिपोर्टिंग का समय दिन में 1 बजे मुकर्रर किया गया है। जिला अधिकारियों ने साफ लफ्जों में कहा है कि समय सीमा समाप्त होने के बाद पहुंचने वाले उम्मीदवारों को किसी भी सूरत में भीतर प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। तलाशी के वक्त अभ्यर्थियों के पास केवल उनका आधिकारिक प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) और लिखने के लिए पेन ही होना चाहिए, इसके अलावा अन्य कोई भी वस्तु अंदर ले जाना वर्जित है।
डिजिटल गैजेट्स पर पूर्ण पाबंदी और कंट्रोल रूम से निगरानी
पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि परीक्षा भवन के भीतर किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे—मोबाइल फोन, स्मार्ट घड़ियां, ब्लूटूथ इयरफोन, कैलकुलेटर या अन्य कोई डिजिटल डिवाइस ले जाना पूरी तरह गैर-कानूनी होगा। इन नियमों का कड़ाई से पालन करवाने के लिए मुख्य द्वार पर ही अभ्यर्थियों की गहन फ्रिस्किंग (शारीरिक जांच) की जा रही है। परीक्षा की सत्यनिष्ठा सुनिश्चित करने के लिए हर केंद्र पर लाइव वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी का बंदोबस्त भी किया गया है। इसके अलावा, पूरी परीक्षा प्रक्रिया की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए एक सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल रूम (नियंत्रण कक्ष) भी चालू किया गया है, जहां से जिले के सभी केंद्रों पर पल-पल की नजर रखी जा रही है।
मोबाइल बचाने की कोशिश में युवक को गोली, बदमाश वारदात के बाद फरार
17 Jun, 2026 10:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पूर्णिया। जिले में बेखौफ अपराधियों का तांडव एक बार फिर देखने को मिला है। मधुबनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए बदमाशों ने एक सैलून संचालक को गोली मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, बेखौफ अपराधी उक्त युवक का कीमती मोबाइल फोन लूटने की कोशिश कर रहे थे, और जब पीड़ित ने इस बात का विरोध जताया तो बदमाशों ने उस पर सीधे गोली चला दी और मोबाइल छीनकर चंपत हो गए। यह पूरी वारदात मंगलवार की देर रात डीएवी चौक के पास स्थित सौंदर्य विहार इलाके में घटित हुई। जख्मी व्यक्ति की पहचान चूनापुर के रहने वाले धनीराम ठाकुर के 35 वर्षीय बेटे मुकेश कुमार ठाकुर के रूप में की गई है, जो इसी क्षेत्र में अपनी नाई की दुकान चलाते हैं।
रोजमर्रा की तरह घर वापसी के दौरान घात लगाकर हमला
अस्पताल में उपचाराधीन मुकेश कुमार ठाकुर ने आपबीती बताते हुए कहा कि वह हर दिन की तरह देर रात अपनी दुकान के शटर गिराकर साइकिल से वापस अपने घर की ओर जा रहा था। जैसे ही वह डीएवी चौक पार कर थोड़ा आगे बढ़ा, वैसे ही सुनसान रास्ते का फायदा उठाकर पहले से ही इंतजार कर रहे बाइक सवार दो लुटेरों ने उसे जबरन बीच रास्ते में रोक लिया। बदमाशों ने तुरंत उसकी जेब से मोबाइल फोन निकालने का प्रयास किया। मुकेश ने जब अपनी संपत्ति को बचाने के लिए अपराधियों से हाथापाई की और शोर मचाया, तो बदमाशों ने तैश में आकर पिस्तौल से फायरिंग कर दी।
जांघ में धंसी गोली और लहूलुहान हालत में अस्पताल में भर्ती
अपराधियों द्वारा चलाई गई गोली सीधे मुकेश के बाएं पैर की जांघ में जा धंसी, जिसके कारण वह लहूलुहान होकर तड़पते हुए बीच सड़क पर ही गिर पड़ा। सन्नाटे को चीरती हुई गोली की आवाज सुनकर आस-पास के रहवासी और राहगीर तुरंत मदद के लिए घटना स्थल की तरफ दौड़े। लोगों को अपनी तरफ आता देख शातिर अपराधी अंधेरे का लाभ उठाते हुए लूटा हुआ मोबाइल लेकर रफूचक्कर हो गए। वहां मौजूद स्थानीय नागरिकों ने बिना वक्त गंवाए तड़प रहे मुकेश को इलाज के लिए तुरंत पूर्णिया जीएमसीएच पहुंचाया। अत्यधिक खून बह जाने की वजह से युवक की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और चिकित्सकों की एक विशेष टीम की देखरेख में उसका सघन उपचार किया जा रहा है।
पुलिसिया तफ्तीश, सीसीटीवी की जांच और स्थानीय लोगों में आक्रोश
इस सनसनीखेज वारदात की भनक लगते ही स्थानीय थाना पुलिस बल के साथ तुरंत अस्पताल परिसर पहुंची और घायल युवक के बयान दर्ज किए। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लुटेरों की तलाश के लिए जाल बिछा दिया है। थाना प्रभारी के मुताबिक, वारदात वाली जगह और उसके आस-पास के रास्तों पर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि अपराधियों के भागने के रूट और उनकी बाइक का नंबर ट्रेस किया जा सके। पुलिस का दावा है कि बहुत जल्द ही इस घटना को अंजाम देने वाले गिरोह के सदस्यों को सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा। दूसरी ओर, इस वारदात के बाद से स्थानीय दुकानदारों और निवासियों में पुलिसिया गश्त और कानून व्यवस्था के ढीले रवैये को लेकर काफी आक्रोश और खौफ देखा जा रहा है।
यूपी की सियासत में नई चर्चा, कांग्रेस-बसपा गठबंधन को लेकर डिप्टी सीएम का बड़ा खुलासा
17 Jun, 2026 10:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों और आगामी सांगठनिक चुनौतियों पर बेबाकी से अपनी राय रखी है। उनका स्पष्ट मानना है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अपने निर्धारित समय पर ही संपन्न होंगे। जनसंख्या की गणना का कार्य चुनाव के पहले या बाद में कभी भी पूरा किया जा सकता है। उन्होंने सूबे में तीसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने का दावा किया। डिप्टी सीएम ने कहा कि यदि बहुजन समाज पार्टी (बसपा), कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) मिलकर भी चुनाव लड़ लें, तो भी जीत भाजपा की ही होगी; क्योंकि प्रदेश की जनता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और नेतृत्व पर अटूट विश्वास है।
विशेष बातचीत के दौरान विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर पूछे गए सवालों के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:
कांग्रेस और बसपा के समीकरणों पर तंज
जब उनसे पूछा गया कि हाल ही में कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं ने मायावती से मुलाकात करने की कोशिश की थी, तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मंशा केवल बसपा के बचे हुए जनाधार के सहारे उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की है। बसपा सुप्रीमो इस चाल को बखूबी समझती हैं, यही वजह है कि उन्होंने कांग्रेस नेताओं को अपनी चौखट से ही वापस लौटा दिया। अब प्रदेश में बसपा का कोई राजनीतिक वजूद नहीं बचा है, क्योंकि सत्ता में रहते हुए उन्होंने जनहित का कोई काम नहीं किया। आज उनका पुराना वोट बैंक पूरी तरह से भाजपा के साथ खड़ा है।
सपा के 'पीडीए' नारे पर पलटवार
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा भाजपा में पिछड़े और दलितों के सम्मान न होने के आरोप पर उप मुख्यमंत्री ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख को वर्ष 2012 से 2017 के बीच रही अपनी सरकार के कारनामों को नहीं भूलना चाहिए। उन्हें तो पिछड़े (OBC) और अनुसूचित जाति (SC) समाज से अपने पुराने काम-काज के लिए माफी मांगनी चाहिए। सपा की राजनीति केवल हिंदू समाज को जातियों में बांटकर सत्ता हासिल करने की रही है।
जीत का अटूट भरोसा और चुनावी चुनौतियां
भाजपा की जीत को लेकर इतने आश्वस्त होने के सवाल पर डिप्टी सीएम ने कहा कि उनकी पार्टी देश के कई अन्य राज्यों में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का कीर्तिमान स्थापित कर चुकी है, इसलिए उत्तर प्रदेश में भी यह इतिहास दोहराया जाएगा। इस सच्चाई को लेकर अब विपक्ष के मन में भी कोई संशय नहीं है।
उन्होंने माना कि हर चुनाव अपने आप में एक चुनौती होता है, लेकिन इस बार भाजपा 2017 के आंकड़ों से भी ज्यादा सीटें जीतने जा रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान सपा प्रमुख में आम जनता का नेतृत्व करने की क्षमता नहीं है। यदि आज सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव जीवित होते, तो शायद उनकी पार्टी जमीनी स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर पाती।
भ्रष्टाचार पर अंकुश और प्रशासनिक व्यवस्था
प्रशासन में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने इस पर काफी हद तक लगाम कसी है। व्यवस्था में अच्छे और खराब, दोनों तरह के अधिकारी होते हैं। लोकतांत्रिक ढांचे का अपना एक नियम है, लेकिन इस व्यवस्था में जनता ही सबसे ऊपर है। यदि कहीं भी कोई विसंगति होती है और जनता अपनी आवाज उठाती है, तो भ्रष्टाचारियों को पीछे हटना ही पड़ता है। पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में आज उत्तर प्रदेश तेजी से भ्रष्टाचार मुक्त शासन की ओर अग्रसर है।
मजदूर आंदोलन और एनकाउंटर पर जवाब
नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिक आंदोलनों को लेकर उन्होंने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि ये 'अर्बन नक्सल' (शहरी नक्सली) हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश का विकास और प्रगति रास नहीं आ रही है। लेकिन देश की जनता का भरोसा पीएम मोदी पर है, इसलिए ऐसी कोई भी साजिश कामयाब नहीं होगी।
वहीं, गाजीपुर में हुए कमलेश बिंद के एनकाउंटर पर उठ रहे सवालों के जवाब में उन्होंने साफ किया कि सरकार किसी भी तरह के फर्जी एनकाउंटर की पैरवी नहीं करती है। यदि पीड़ित परिवार इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करेगा, तो नियमानुसार जांच कराई जाएगी और यदि कोई पुलिस अधिकारी इसमें दोषी पाया गया, तो उस पर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी।
जातिगत राजनीति और सरनेम का विवाद
विहिप (विश्व हिंदू परिषद) से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने और आज एक बड़े पिछड़े वर्ग के नेता के रूप में पहचाने जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि लोग उनके सरनेम के कारण ऐसा आंकलन करते हैं। उन्हें इस पहचान से कोई आपत्ति भी नहीं है, क्योंकि उनकी पार्टी 'सबका साथ, सबका विकास' के सिद्धांत पर काम करते हुए सभी समाजों और वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है।
समय से पहले विधानसभा चुनाव की अटकलें
अंत में, राज्य में समय से पहले चुनाव होने की संभावनाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि जनगणना की वास्तविक प्रक्रिया फरवरी 2027 में प्रस्तावित है, जिसके कारण राजनीतिक गलियारों में इस तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि चुनाव अपने तय समय पर ही होंगे। चुनावी तैयारियों के लिहाज से देखा जाए तो भाजपा हर परिस्थिति के लिए तैयार है। मतदान चाहे समय से पहले हो या अपने तय वक्त पर, उत्तर प्रदेश में कमल का खिलना पूरी तरह सुनिश्चित है।
गजब हाल: सरकारी स्कूलों में बांटे गए टैबलेट हुए गायब, 613 विद्यालयों पर उठे सवाल
17 Jun, 2026 10:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बलरामपुर। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के परिषदीय (सरकारी) विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को गति देने के लिए बांटे गए 613 टैबलेट अचानक गायब होने से बेसिक शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। तकरीबन एक साल पहले इन टैबलेटों को स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों को ऑनलाइन करने, शिक्षकों के प्रशिक्षण, मॉनिटरिंग और डिजिटल पढ़ाई को सुगम बनाने के उद्देश्य से उपलब्ध कराया गया था। लेकिन हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में इतनी बड़ी संख्या में टैबलेटों की अनुपलब्धता और उनके इस्तेमाल न होने का सच सामने आने के बाद अब प्रशासनिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बांटे गए थे उपकरण
बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पठन-पाठन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए इन उपकरणों का वितरण किया गया था। शासन की योजना थी कि शिक्षक इन टैबलेटों के जरिए ऑनलाइन रिपोर्टिंग करेंगे, शैक्षणिक सामग्री बच्चों को दिखाएंगे और विभागीय एप्लीकेशन व सरकारी योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन करेंगे।
लापरवाही आई सामने, नहीं मिला उपयोग का रिकॉर्ड
इन उपकरणों को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को यह निर्देश भी दिए गए थे कि वे कंपोजिट ग्रांट (विद्यालय विकास कोष) की राशि से इंटरनेट का रिचार्ज करवाएं और अन्य जरूरी खर्च वहन करें। इसके बावजूद, जिले के सैकड़ों स्कूलों में इन टैबलेटों का उपयोग उम्मीद के मुताबिक बेहद कम रहा।
हालिया विभागीय ऑडिट और समीक्षा में यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि 613 टैबलेटों का कोई अता-पता नहीं है। कई जगहों पर ये उपकरण बंद या खराब पाए गए, कई स्कूलों में ये मौके पर मौजूद ही नहीं थे, तो कई स्थानों पर इनके इस्तेमाल का कोई दस्तावेजी रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद उच्चाधिकारियों ने इस घोर लापरवाही को गंभीरता से लिया है।
अपर परियोजना निदेशक ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य मुख्यालय से इन टैबलेटों की वर्तमान स्थिति और उपयोगिता को लेकर कड़ा रुख अपनाया गया है। अपर परियोजना निदेशक ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) से इस पूरे मामले पर बिंदुवार विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। शासन ने साफ तौर पर पूछा है कि वर्तमान में कितने टैबलेट स्कूलों में सही सलामत हैं, कितने उपयोग किए जा रहे हैं, कितने तकनीकी रूप से खराब हैं और कितने पूरी तरह से गायब हैं।
चूंकि इन उपकरणों की खरीद और वितरण में भारी-भरकम सरकारी धन (जनता का पैसा) खर्च हुआ था, इसलिए यह मामला और गंभीर हो गया है। अधिकारियों का साफ कहना है कि अगर टैबलेट स्कूलों में हैं तो उनका उपयोग क्यों नहीं किया गया, और यदि वे गायब हैं तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
खंड शिक्षा अधिकारियों को स्कूलवार जांच के निर्देश
इस पूरे मामले में अब सभी ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों का भौतिक सत्यापन कर सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विकास चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि बुधवार को पूरे मामले की विस्तृत जानकारी जुटाकर वास्तविक रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसके आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
12 लाख से कम आय वालों को ही स्कूटी, UP सरकार की योजना को लेकर सामने आई अहम जानकारी
17 Jun, 2026 09:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में शिक्षा ग्रहण कर रही करीब 50 हजार छात्राओं को 'रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना' का लाभ देने की प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए गए नए प्रस्ताव के मुताबिक, इस योजना का लाभ उन मेधावी छात्राओं को दिया जाएगा, जिनके परिवार की वार्षिक आय 10 से 12 लाख रुपये से कम होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद विभाग ने इस दिशा में तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। इसके तहत सभी राज्य विश्वविद्यालयों से स्नातक (ग्रेजुएशन) प्रथम वर्ष में 80, 85 और 90 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित करने वाली छात्राओं का पूरा विवरण जुटाया गया है।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि स्कूटी वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए विस्तृत नियमावली तैयार की जा रही है। उन्होंने साफ किया कि स्नातक पहले वर्ष में 80 फीसदी या उससे अधिक अंक लाने वाली छात्राएं ही इस रेस में शामिल हो सकेंगी। साथ ही, मध्यम और जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए सालाना 10 से 12 लाख रुपये की आय सीमा का भी नियम जोड़ा जा रहा है। कैबिनेट मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्राओं को इस योजना के तहत पेट्रोल से संचालित होने वाली स्कूटी प्रदान की जाएगी।
प्रदेश के 75 प्रतिशत कॉलेजों में छात्र पहन रहे यूनिफॉर्म
राजधानी लखनऊ में उच्च शिक्षा संस्थानों में ड्रेस कोड (यूनिफॉर्म) लागू करने के सवाल पर उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि शासन स्तर पर इसका पूरा डाटा मंगवाकर गहन अध्ययन किया जा रहा है। शुरुआती समीक्षा में सामने आया है कि सूबे के लगभग 75 फीसदी महाविद्यालयों में छात्र-छात्राएं पहले से ही निर्धारित यूनिफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हालांकि अभी तक इसके लिए कोई औपचारिक शासनादेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन शेष बचे कॉलेजों के लिए भी जल्द ही आधिकारिक गाइडलाइन जारी की जाएगी। सरकार का मानना है कि परिसरों में अनुशासन और समानता बनाए रखने के लिए यूनिफॉर्म बेहद उपयोगी और आवश्यक है।
मुहर्रम को लेकर प्रशासन सख्त, सीएम योगी ने दिए कड़े निर्देश; माहौल खराब करने वालों पर एक्शन
17 Jun, 2026 09:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगामी त्योहारों और कानून-व्यवस्था को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुहर्रम का पर्व मातम और अकीदत का अवसर है, इसे शक्ति प्रदर्शन का जरिया न बनाया जाए। उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि इस दौरान किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र के प्रदर्शन, नई परंपरा की शुरुआत, तेज आवाज वाले डीजे या ढोल-ताशों के अनियंत्रित इस्तेमाल की इजाजत बिल्कुल नहीं होगी। मंगलवार को हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में सीएम ने साफ किया कि शांति व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश करने वाले शरारती तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
ताजियों की ऊंचाई के लिए तय किए मानक
मुख्यमंत्री ने सूबे के सभी जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को निर्देश दिए कि वे मुहर्रम के जुलूस और व्यवस्थाओं को लेकर शांति समितियों व प्रबुद्ध जनों के साथ पहले से ही संवाद कायम कर लें। उन्होंने किसी भी संभावित हादसे को रोकने के लिए ताजियों की ऊंचाई निर्धारित मानकों के तहत ही रखने की बात कही। सीएम ने कहा कि सुरक्षा के लिहाज से 10 से 12 फीट से अधिक ऊंचे ताजियों की अनुमति किसी भी परिस्थिति में न दी जाए। उन्होंने कहा कि सभी की धार्मिक आस्था का पूरा सम्मान किया जाएगा, परंतु नियमों के विरुद्ध कोई भी नई परंपरा स्वीकार नहीं की जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर हर गांव-वार्ड में होंगे कार्यक्रम
आगामी 21 जून को होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों का जायजा लेते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष यह वैश्विक आयोजन 'स्वस्थ आयु के लिए योग' के मूल विषय (थीम) पर मनाया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री के मुख्य कार्यक्रम का पूरे प्रदेश में सजीव (लाइव) प्रसारण सुनिश्चित किया जाए और इसमें सभी स्थानीय जनप्रतिनिधि अनिवार्य रूप से शामिल हों। प्रदेश की सभी 58 हजार ग्राम पंचायतों और 762 नगरीय निकायों में सामूहिक योग सत्र आयोजित किए जाएंगे।
इसके तहत अमृत सरोवरों, ऐतिहासिक स्मारकों और सांस्कृतिक स्थलों पर मुख्य आयोजन होंगे, जबकि शहरी क्षेत्रों के 14 हजार वार्डों में भी कार्यक्रम स्थल तय किए जा रहे हैं। इससे ठीक एक दिन पहले, यानी 20 जून को सभी शिक्षण संस्थानों के सहयोग से विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा। साथ ही सभी पुलिस लाइनों और पीएसी बटालियनों में भी योग कार्यक्रम आयोजित होंगे।
लापरवाह अधिकारियों को चेतावनी, खाली पदों पर तैनाती के आदेश
राजधानी लखनऊ में हुई इस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने जनशिकायतों के निवारण की भी समीक्षा की। कुछ जिलों में शिकायतों के निस्तारण की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि जिन जिलों की स्थिति संतोषजनक नहीं है, वे अपनी कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार लाएं, वरना संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उन पर गाज गिरेगी। इसके साथ ही उन्होंने चिकित्सा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए आदेश दिया कि जिन जनपदों में वर्तमान में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के पद रिक्त हैं, वहां अगले तीन दिनों के भीतर योग्यता (मेरिट) के आधार पर अनिवार्य रूप से अधिकारियों की तैनाती की जाए।
आखिर होटल में क्यों ठहराए गए NDA विधायक? राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ी हलचल
16 Jun, 2026 01:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव की घड़ी नजदीक आते ही राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है। आगामी 18 जून को होने वाले मतदान से ठीक पहले सूबे की राजधानी में सियासी सरगर्मियां अप्रत्याशित रूप से तेज हो गई हैं। चुनाव में किसी भी प्रकार की 'क्रॉस वोटिंग' या विरोधी खेमे द्वारा संभावित सेंधमारी की आशंका को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस रणनीति के तहत गठबंधन के सभी विधायकों को एक साथ रांची के विख्यात पांच सितारा होटल 'रेडिसन ब्लू' में ठहराया जा रहा है। हालांकि एनडीए नेतृत्व अपने समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी की विजय को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है, फिर भी चुनावी बिसात पर किसी भी चूक से बचने के लिए यह एहतियाती कदम उठाया गया है। दरअसल, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस बार जाने-माने उद्योगपति परिमल नाथवानी को बतौर निर्दलीय उम्मीदवार अपना पूर्ण समर्थन दे रही है और पार्टी का दावा है कि नाथवानी को आवश्यक 28 मतों का जादुई आंकड़ा हासिल करने में कोई कठिनाई नहीं होगी।
बीजेपी दफ्तर में एनडीए दिग्गजों का महामंथन
इस बड़े राजनैतिक घटनाक्रम के बीच रांची स्थित भाजपा के प्रदेश कार्यालय में एनडीए के शीर्ष रणनीतिकारों और विधायकों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस हाई-प्रोफाइल मंथन में स्वयं भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी भी उपस्थित रहे। बैठक में भाजपा के अलावा सहयोगी दल आजसू और जदयू के विधायकों ने हिस्सा लिया, जहां बंद कमरे में मतदान की बारीकियों और एक-एक वोट की सुरक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। इसके तुरंत बाद सभी विधायकों को कड़ी सुरक्षा के बीच होटल रेडिसन ब्लू ले जाने का सिलसिला शुरू हो गया। रणनीतिकारों का इरादा साफ है कि 18 जून की सुबह सभी विधायकों को एकजुट होकर सीधे होटल से ही विधानसभा परिसर ले जाया जाएगा ताकि मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके।
दिग्गज चेहरों की मौजूदगी और एकजुटता का प्रदर्शन
इस पूरी चुनावी व्यूहरचना को अमलीजामा पहनाने के लिए गठबंधन के कई बड़े नेता खुद मोर्चे पर डटे हुए हैं। सांगठनिक बैठक में मुख्य रूप से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबू लाल मरांडी, आजसू प्रमुख सुदेश महतो, लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र प्रधान और छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा विशेष पर्यवेक्षक के रूप में रणनीतिक कमान संभालते नजर आए। होटल शिफ्टिंग के इस पूरे घटनाक्रम के दौरान परिमल नाथवानी के साथ मंजू देवी, नीरा यादव, राज सिन्हा, सी पी सिंह, प्रदीप प्रसाद, उज्ज्वल दास, नवीन जयसवाल और सतेंद्र नाथ तिवारी सहित एनडीए कुनबे के तमाम विधायक पूरी तरह एकजुट दिखाई दिए।
28 वोटों का गणित और होटल पॉलिटिक्स
झारखंड के मौजूदा विधायी समीकरणों के लिहाज से राज्यसभा की इस सीट पर फतह हासिल करने के लिए प्रथम वरीयता के न्यूनतम 28 वोटों की दरकार है। एनडीए के सिपहसालारों का दावा है कि आजसू और जदयू के संख्याबल को मिलाकर निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की स्थिति बेहद सुदृढ़ है। दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन की ओर से भी लगातार शह और मात का खेल जारी है, जिसे देखते हुए ही एनडीए ने अपने विधायकों को एक छत के नीचे रखने के लिए इस 'होटल पॉलिटिक्स' का सहारा लिया है। अब पूरे राज्य की निगाहें 18 जून को होने वाली वोटिंग पर टिक गई हैं, जहां हर एक माननीय का मत सूबे के नए सियासी समीकरण की इबारत लिखेगा।
बंद घर से आई तेज दुर्गंध, अंदर मिला मजदूर का शव
16 Jun, 2026 01:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जामताड़ा । क्षेत्र के पबिया स्थित पुराने शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय परिसर के एक बंद और जर्जर मकान से सोमवार देर शाम एक श्रमिक का सड़ा-गला शव मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक की शिनाख्त पबिया के ही रहने वाले रमा बावरी उर्फ धोना बावरी (27 वर्ष) के तौर पर की गई है। बंद मकान से लाश मिलने की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आई और मौके पर पहुंचकर छानबीन शुरू कर दी।
शनिवार से लापता था श्रमिक
परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, रमा बावरी मजदूरी करके अपने परिवार का गुजारा चलाता था। उसकी शादी को अभी महज एक साल ही हुआ था। वह बीते शनिवार से अचानक रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गया था। परिवार के लोगों ने अपने स्तर पर उसकी काफी खोजबीन की, रिश्तेदारों के यहां भी पता लगाया, लेकिन उसका कहीं कोई अता-पता नहीं चल सका था। सोमवार की शाम को जब बंद पड़े मकान के आसपास से बेहद तेज बदबू आने लगी, तो स्थानीय ग्रामीणों को किसी अनहोनी का शक हुआ। लोग जब हिम्मत जुटाकर मकान के भीतर दाखिल हुए, तो वहां रमा का शव अत्यंत खराब स्थिति में पड़ा हुआ था।
घटनास्थल पर उमड़ी भीड़, पुलिस ने दर्ज किया केस
जैसे ही यह खबर फैली, देखते ही देखते घटनास्थल पर सैकड़ों ग्रामीणों का हुजूम इकट्ठा हो गया। सूचना मिलते ही नारायणपुर थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर वैधानिक औपचारिकताएं शुरू कीं। पुलिस ने इस संबंध में अस्वाभाविक मौत (यूडी केस) का मामला दर्ज कर लिया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाने के इंतजाम किए हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ होगी मौत की वजह
थाना प्रभारी मुराद हसन ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि युवक के गुमशुदा होने की कोई भी लिखित शिकायत पहले थाने में दर्ज नहीं कराई गई थी। शव बरामद होने के बाद पुलिस ने वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सभी कोणों से तफ्तीश शुरू कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौत का असल कारण पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा और उसी रिपोर्ट को आधार मानकर आगे की विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। हालांकि, कुछ ग्रामीणों का दबी जुबान में कहना है कि युवक अत्यधिक मदिरापान का आदी था, लेकिन पुलिस अभी शॉर्ट-पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों का इंतजार कर रही है।
बेटे को घर लाने निकले पिता हादसे का शिकार, ट्रैक्टर की टक्कर से गई जान
16 Jun, 2026 01:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जमुई। बिहार के जमुई-सिकंदरा मुख्य मार्ग पर स्थित बिजली विभाग कार्यालय के नजदीक सोमवार देर रात एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा पेश आया, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां उजाड़ दीं। यहां एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। दिल दहला देने वाली इस घटना के बाद आरोपी चालक अपने वाहन सहित मौके से रफूचक्कर होने में कामयाब रहा। स्थानीय पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।
हादसे का शिकार हुए व्यक्ति की पहचान सिकंदरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बसैया गांव के निवासी बमबम सिंह के तौर पर की गई है। प्राप्त विवरण के मुताबिक, उनका बेटा मोहित कुमार सिंह पटना में अपनी कोई परीक्षा देने गया था और वहां से वापस लौट रहा था। रात काफी अधिक हो जाने की वजह से उसे आगे अपने गांव जाने के लिए कोई बस या अन्य सवारी गाड़ी नहीं मिल पा रही थी। बेटे की इस मजबूरी और परेशानी का पता चलते ही बमबम सिंह अपनी बाइक उठाकर उसे रिसीव करने के लिए महिसौड़ी चौक की तरफ रवाना हुए थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और बीच रास्ते में ही काल ने उन्हें अपना ग्रास बना लिया।
भीषण भिड़ंत में मौके पर ही तोड़ा दम
चश्मदीदों के अनुसार, बमबम सिंह अपनी मोटरसाइकिल से जैसे ही विद्युत विभाग के दफ्तर के पास पहुंचे, तभी सामने की दिशा से आ रहे एक बेहद तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने उनकी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और बमबम सिंह उछलकर सड़क पर दूर जा गिरे। उनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में इतनी गंभीर चोटें आईं कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई, जिसका फायदा उठाकर ट्रैक्टर चालक वाहन सहित अंधेरे का लाभ उठाते हुए भाग निकला।
सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी पुलिस
सड़क दुर्घटना की भयावह खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया और घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भिजवाया। जैसे ही इस अनहोनी की खबर मृतक के घर पहुंची, अस्पताल परिसर में परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी की धरपकड़ के लिए वारदात वाली सड़क और उसके आसपास की दुकानों व इमारतों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगाला जा रहा है ताकि ट्रैक्टर के नंबर और चालक की पहचान की जा सके।
गावं में छाया मातम, परिजनों में भारी आक्रोश
बमबम सिंह की इस अचानक और दर्दनाक मौत की खबर से उनके पैतृक गांव बसैया में सन्नाटा पसर गया है और हर आंख नम है। शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाने के लिए लगातार रिश्तेदारों और ग्रामीणों का हुजूम उनके घर पहुंच रहा है। मृतक के रोते-बिलखते परिजनों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि हत्यारे ट्रैक्टर चालक को अविलंब गिरफ्तार किया जाए और उसके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का सख्त मुकदमा दर्ज कर न्याय दिया जाए। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है और अपराधी को जल्द ही सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।
धार्मिक स्थल के पास शराब बिक्री का विरोध, स्थानीय लोगों ने खोला मोर्चा
16 Jun, 2026 10:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेरठ। शहर के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में स्थित ओडियन नाले की भयावह स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी गुस्सा है। पिछले एक साल के भीतर इस खुले नाले से पांच शव बरामद होने के बाद लोगों ने नाले को ढकने और इसके ठीक सामने स्थित देसी शराब के ठेके को वहां से हटाने की मांग तेज कर दी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि धार्मिक स्थल के समीप और थाने के बिल्कुल सामने चल रहा यह ठेका लगातार दुर्घटनाओं और विवादों का केंद्र बना हुआ है। हाल ही में रविवार को भी इसी नाले से एक अज्ञात युवक का शव मिला था, जिसकी पहचान अब तक नहीं हो सकी है।
धार्मिक स्थल के पास जमावड़ा, सुरक्षा पर सवाल
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, यह शराब का ठेका प्रसिद्ध भूमिया माता मंदिर के बेहद करीब स्थित है। लोगों का गंभीर आरोप है कि दिन-रात सड़क किनारे शराब पीने वालों की भीड़ लगी रहती है। सोमवार को जब क्षेत्र का जायजा लिया गया, तो कई लोग खुलेआम सड़क पर और यहाँ तक कि एटीएम केंद्र के बाहर भी नशा करते नजर आए। नशे में धुत लोगों के लड़खड़ाने से कभी भी बड़ा हादसा होने का डर बना रहता है।
हादसा या साजिश? जांच की मांग
पुलिस का मानना है कि अक्सर लोग नशे की हालत में संतुलन खो देते हैं और इस 15 फुट चौड़े व 10 फुट गहरे खुले नाले में गिर जाते हैं, जिससे उनकी जान चली जाती है। हालांकि, क्षेत्र के लोग इस थ्योरी पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि बार-बार शव मिलना केवल इत्तेफाक नहीं हो सकता, इसकी गहनता से जांच होनी चाहिए कि ये मौतें महज हादसे हैं या इसके पीछे कोई और वजह है।
निवासियों की प्रतिक्रियाएँ
करण कपूर: "थाने के सामने होने के बावजूद यहाँ खुलेआम सड़क पर शराब पी जाती है। प्रशासन को तुरंत ठेका हटाना चाहिए और नाले को कवर करना चाहिए।"
मुकेश शर्मा व प्रशांत कौशिक: "खुला नाला बच्चों और छात्राओं के लिए बड़ा खतरा है। इस मार्ग से स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।"
संध्या: "मंदिर आने वाली महिलाओं के लिए यहाँ का माहौल बहुत असहज और असुरक्षित हो गया है।"
प्रशासनिक कदम: डीएम को भेजा जाएगा प्रस्ताव
पुलिस प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को स्वीकार किया है। एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि ब्रह्मपुरी थाना प्रभारी को इस संबंध में जिलाधिकारी (डीएम) के नाम एक विस्तृत पत्र तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इस पत्र में जनहित और सुरक्षा का हवाला देते हुए शराब के ठेके को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने का कड़ा प्रस्ताव रखा जाएगा। प्रशासन का कहना है कि नागरिक सुरक्षा सर्वोपरि है और इस समस्या का जल्द समाधान निकाला जाएगा।
यूपी 2027 की तैयारी शुरू, ओवैसी ने सपा के मजबूत इलाके में उतारे उम्मीदवार
16 Jun, 2026 10:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ| एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बहराइच के मटेरा में जनसभा कर विधानसभा चुनाव के लिए अपनी भावी रणनीति का संकेत दे दिया है। ओवैसी ने मुस्लिम समाज से बड़ी पार्टियों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी राजनीतिक ताकत मजबूत करने की अपील की। ओवैसी ने कहा कि एआईएमआईएम प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव लाने की क्षमता रखती है। मटेरा विधानसभा सीट से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को उम्मीदवार घोषित कर उन्होंने चुनावी तैयारी का संदेश दे दिया है। यह सीट सपा का गढ़ मानी जाती है, इसलिए यहां से अभियान शुरू करना राजनीतिक लिहाज से अहम माना जा रहा है। यही नहीं, ओवैसी ने यूपी में 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान भी किया है।
रणनीतिक तौर पर किया बहराइच का चयन
ओवैसी की सभा ऐसे समय हुई जब बहराइच में महाराजा सुहेलदेव और सैयद सालार मसूद गाजी की विरासत को लेकर बहस तेज है। भाजपा और उसके सहयोगी दल इस क्षेत्र में महाराजा सुहेलदेव की विरासत को प्रमुखता से उठा रहे हैं, जबकि एआईएमआईएम ने धार्मिक स्थलों और अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा है।
पूर्वांचल में राजनीतिक विस्तार करना चाहती है पार्टी
लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर संजय गुप्ता कहते हैं कि एआईएमआईएम पूर्वांचल के मुस्लिम बहुल और सामाजिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का प्रयास कर रही है। बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, आजमगढ़ और आसपास के जिलों में पार्टी संगठन मजबूत करने पर जोर दे रही है। ओवैसी की रणनीति भाजपा और सपा दोनों के परंपरागत वोट आधार को चुनौती देने की मानी जा रही है।
2027 चुनाव पर संभावित प्रभाव
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि भले ही एआईएमआईएम का संगठन अभी यूपी में कमजोर है, लेकिन ओवैसी की सभाएं मुस्लिम मतदाताओं के बीच राजनीतिक जागरूकता और स्वतंत्र प्रतिनिधित्व की बहस को मजबूत कर रही हैं। इससे विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति और गठबंधन समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। यदि एआईएमआईएम कुछ क्षेत्रों में प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराती है, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर मुकाबले का स्वरूप बदल सकता है। ओवैसी केवल चुनाव लड़ने नहीं, बल्कि यूपी की राजनीतिक बहस को प्रभावित करने की रणनीति के साथ मैदान में हैं। सुहेलदेव-गाजी विवाद, पूर्वांचल में विस्तार की कोशिश और मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
वैचारिक-ऐतिहासिक बहस का केंद्र भी बनी ओवैसी की सभा
इस सभा से पहले और बाद में भाजपा व सहयोगी दलों ने ओवैसी के बयानों का विरोध किया है। सुभासपा के नेताओं ने महाराजा सुहेलदेव की विरासत को लेकर एआईएमआईएम की राजनीति पर सवाल उठाए। इस कारण बहराइच की सभा केवल राजनीतिक कार्यक्रम न रहकर वैचारिक-ऐतिहासिक बहस का केंद्र भी बन गई।
कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राजभर ने ओवैसी को नसीहत दी कि जब वे यूपी आएं तो अपने नेताओं को इतिहास और मर्यादित भाषा का ज्ञान भी दें। दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एआईएमआईएम के एक नेता महाराजा सुहेलदेव के अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए कह रहे हैं कि अगर सुहेलदेव राजा होते तो बहराइच में उनका कोई किला होता।
राजभर ने सोशल मीडिया पर लिखा, ओवैसी साहब, अब जब आप यूपी आ ही रहे हैं तो अपनी हैदराबादी बैरिस्टरी का थोड़ा-बहुत ज्ञान अपने सिपहसालार को भी दे दीजिएगा। उन्होंने कहा कि यही वो भूमि है जहां चक्रवर्ती सम्राट महाराजा सुहेलदेव राजभर ने विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ संघर्ष किया था। महाराजा सुहेलदेव केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल और राजभर समाज के गौरव के प्रतीक हैं।
मैगलगंज नेशनल हाईवे पर दर्दनाक सड़क दुर्घटना, वैगनआर सवार तीन लोगों ने गंवाई जान
16 Jun, 2026 10:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखीमपुर| उत्तर प्रदेश के लखीमपुर और हरदोई की सीमा पर स्थित नेशनल हाईवे पर बीती रात एक रूह कंपा देने वाला हादसा हुआ। मैगलगंज थाना क्षेत्र के पास एक तेज रफ्तार वैगनआर कार अनियंत्रित होकर आगे चल रही ट्रैक्टर-ट्रॉली से जा टकराई। टक्कर इतनी भयावह थी कि कार सीधे ट्रॉली के नीचे जा फंसी।
हादसे के बाद का मंजर बेहद खौफनाक था। कार के फंसने के बावजूद ट्रैक्टर चालक ने गाड़ी नहीं रोकी और वह फंसी हुई कार को करीब दो किलोमीटर तक सड़क पर घसीटता रहा। जहानीखेड़ा इलाके से शुरू हुआ यह मंजर मैगलगंज के चपरतला के पास खत्म हुआ, जब स्थानीय लोगों ने शोर मचाकर ट्रैक्टर को रुकवाया। हालांकि, भीड़ को अपनी ओर आता देख चालक मौका पाकर वहां से फरार हो गया।
हरिद्वार से लौट रहा था परिवार
जानकारी के अनुसार, कार सवार सभी लोग हरिद्वार से दर्शन कर अपने गृह जनपद सुल्तानपुर वापस लौट रहे थे। इस भीषण टक्कर में सुल्तानपुर निवासी विमल सिंह पटेल (50), उनकी पत्नी वंदना सिंह (45) और अलिख्या वर्मा की मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे में तीन लोग गंभीर घायल
इस दुर्घटना में विमल सिंह के दो बच्चे, रूबी पटेल और वीर पटेल सहित उनके साले गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना की सूचना मिलते ही मैगलगंज पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और फरार ट्रैक्टर चालक की तलाश में जुट गई है। इस घटना के बाद से पीड़ितों के परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
छात्र सीखेंगे मिट्टी की सेहत जांचना, विजय सिन्हा ने की बड़ी घोषणा
16 Jun, 2026 10:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि राज्य के 629 सरकारी स्कूलों में मिट्टी जांच (मृदा परीक्षण) प्रयोगशालाएं बनाई जाएंगी। सोमवार को कृषि भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना और मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के तहत चल रहे अलग-अलग कार्यक्रमों के कामकाज का जायजा लिया। इस बैठक में खेती-किसानी में वैज्ञानिक तरीकों को शामिल करने, छात्र-छात्राओं में रिसर्च और प्रैक्टिकल करने की क्षमता बढ़ाने तथा किसानों को अपनी जमीन की सेहत के प्रति जागरूक करने की योजनाओं पर विस्तार से बातचीत हुई।
कृषि मंत्री के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 'स्कूल सॉयल हेल्थ प्रोग्राम' के तहत राज्य के 160 पीएम श्री और अन्य सरकारी स्कूलों में छोटी मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं पहले ही चालू की जा चुकी हैं। इस योजना का मकसद स्कूली बच्चों को मिट्टी की जांच करने के वैज्ञानिक तरीकों से जोड़ना और पर्यावरण के प्रति उनकी समझ को बेहतर करना है। अब इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए साल 2026-27 में इस योजना का बड़ा विस्तार किया जा रहा है, जिसके तहत 629 सरकारी स्कूलों को इस पारदर्शी योजना से जोड़ा जाएगा। इन लैब्स में कक्षा 7वीं, 8वीं, 9वीं और 11वीं के छात्र-छात्राएं खुद मिट्टी के सैंपल जुटाने और उनकी जांच करने का व्यावहारिक अनुभव हासिल करेंगे, जिससे उनमें तकनीकी हुनर और वैज्ञानिक सोच का विकास होगा।
लागत और केंद्र-राज्य की हिस्सेदारी
इस पूरी योजना के खर्च का ब्योरा देते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि हर एक स्कूल में इस मिनी लैब को स्थापित करने में कुल एक लाख रुपये का खर्च आएगा। इस बजट में 60 फीसदी रकम केंद्र सरकार देगी, जबकि बाकी की 40 फीसदी राशि राज्य सरकार द्वारा खर्च की जाएगी। भारत सरकार ने प्रत्येक चिन्हित स्कूल को कम से कम 50 मिट्टी के नमूनों का टेस्ट करने और किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड बांटने का टारगेट दिया है। इस अनूठी पहल से विद्यार्थियों और किसानों के बीच एक सीधा संपर्क बनेगा, जिससे खेतों में जरूरत के हिसाब से सही मात्रा में खाद के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा स्कूलों में मिट्टी जांच और ड्रैगन फ्रूट जैसी महंगी फसलों की खेती से कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता आएगी।
ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा
बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने चौथे कृषि रोड मैप के तहत तैयार किए गए प्रोजेक्ट के आधार पर ड्रैगन फ्रूट विकास योजना की प्रगति को भी परखा। उन्होंने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के अंतर्गत पिछले तीन सालों के लिए कुल तीन करोड़ रुपये के बजट के साथ इस योजना को मंजूरी दी गई है। इसके तहत चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तय 60 लाख रुपये के फंड में से 13.62 लाख रुपये की राशि जारी कर खर्च करने की अनुमति दे दी गई है।
अधिकारियों को समय पर काम पूरा करने के निर्देश
कृषि विभाग की इस समीक्षा बैठक के अंत में मंत्री ने मौजूद सभी अधिकारियों को सख्त लहजे में हिदायत दी कि वे सरकार की इन सभी महत्वाकांक्षी योजनाओं को पूरी ईमानदारी और तय समय सीमा के भीतर जमीन पर उतारें। उन्होंने कहा कि काम में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी, ताकि सूबे के किसानों और छात्र-छात्राओं को इस सरकारी प्रयास का पूरा और सीधा फायदा मिल सके।
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चंदौसी: शिक्षिका की मौत के बाद वकील पर FIR, सुसाइड नोट बना अहम सबूत
जनता को जल्द इंसाफ दिलाने की दिशा में बिहार सरकार का अहम निर्णय
जमीन विवाद में गर्भवती महिला पर हमले से दो अजन्मे बच्चों की मौत, इलाके में आक्रोश
