राजनीति
कांग्रेस ने संविधान की बुनियाद पर भारत की सफलता का निर्माण किया: राहुल गांधी
16 Jan, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी ने भारतीय राज्यों से लड़ने के बयान पर भाजपा नेता राम कदम द्वारा अपने टिप्पणियों का जवाब देते हुए कहा कि भाजपा का लक्ष्य उनकी जान छोड़ने के बजाय देश के विकास में है। गांधी ने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई न केवल पार्टी विरोधियों से है, बल्कि भारतीय राज्यों की मशीनरी के खिलाफ भी है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने संविधान की बुनियाद पर भारत की सफलता का निर्माण किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करके लोगों को संविधान के महत्व पर ध्यान आ रहा है। गांधी ने कहा कि कांग्रेस ने लोगों के अधिकारों के कवच, संविधान की रचना से लेकर रक्षा तक का दायित्व निभाया है।
राहुल गांधी की इन बातों पर भाजपा विरोधी राम कदम ने उनके तीखे कमेंट किए हैं और उन्हें उनके बयान के लिए आलोचना की है। राम कदम ने कहा कि राहुल गांधी को समझ नहीं आ रहा है कि उनका असली लक्ष्य क्या है। उनके अनुसार, गांधी का काम भारत में रहकर पाकिस्तान और चीन के प्रवक्ता बनना है। इस बहस से सटे हुए हैं भारत के राजनीतिक मंच, और जनता के बीच बेमिशाल विचारों का उपयोग कर देश के सटीक दिशा-निर्देशन हेतु। यह गहरी विचारधारा मुद्दों का विश्वसनीय निराकरण करने और समाधान के लिए जुट रहा है। इसी तरह देश की दिवार अपनी पहचान और मार्गदर्शन के सुनहरे सिलसिले में साकार है।
दिल्ली चुनाव: 11 उम्मीदवारों को लेकर फंस रहा बीजेपी में पेंच, मंथन जारी
16 Jan, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी अपने 11 उम्मीदवारों को लेकर असमंजस की स्थिति में है। पार्टी के कुछ लोग नीतीश कुमार और चिराग पासवान को खुश करने का प्रयास कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि नीतीश कुमार की जेडीयू और चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) को सीटें दी जानी चाहिए, लेकिन पार्टी का एक धड़ा जिसमें राज्य इकाई के पदाधिकारी भी शामिल हैं, उसका मनना है कि इन पार्टियों को टिकट देने से बीजेपी के जीतने के चांस कम हो जाएंगे।
इस वजह से नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख से दो दिन पहले, बुधवार तक बीजेपी की अंतिम 11 उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं हो पाई है। सूत्रों का कहना है कि गुरुवार को अंतिम सूची जारी हो सकती है, जिसमें एक या दो सीटें जेडीयू को मिल सकती हैं। बीजेपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि जेडीयू को दो सीटें बुराड़ी और देवली मिल सकती हैं, जहां पूर्वांचली मतदाता बहुतायत में हैं। संगम विहार पर भी चर्चा की गई थी। एलजेपी भी यहां से एक सीट चाहती है, लेकिन उसे सीट मिलने की संभावना कम है। बीजेपी ने अभी 11 सीटों पर उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। दिल्ली की राजनीति में पूर्वांचल का मतलब पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के कुछ हिस्सों के लोगों से है। ये लोग दिल्ली की आबादी का करीब 30 फीसदी हैं, और 70 में से 20 सीटों पर इनकी अच्छी संख्या है, जिन विधानसभा क्षेत्रों में इस क्षेत्र के लोगों की अच्छी खासी संख्या है, वे हैं बुराड़ी, किराड़ी, करावल नगर, संगम विहार, राजेंद्र नगर, विकासपुरी, उत्तम नगर, लक्ष्मी नगर, बदरपुर, पटपड़गंज, देवली और द्वारका। पिछले दिल्ली चुनावों में जेडीयू ने गठबंधन के तहत संगम विहार और बुराड़ी से चुनाव लड़ा था। बुराड़ी से चुनाव लड़ने वाले उनके उम्मीदवार शैलेंद्र कुमार, आप के संजीव झा से हार गए थे। संगम विहार से आप के दिनेश मोहनिया ने जेडीयू के शिवचरण गुप्ता को हराया था। एलजेपी को भी एक टिकट मिला था सीमापुरी से जो एक एससी आरक्षित सीट है। आप के राजेंद्र पाल गौतम ने एलजेपी के संतलाल को हराया था।
जेडीयू, एसपी और आरजेडी जैसी पार्टियां दिल्ली के चुनावों में अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रही हैं। बीएसपी को 2008 में कुछ सफलता मिली थी, जब उसने 14 फीसदी वोट शेयर हासिल किया था, लेकिन हाल के दिनों में वह कुछ खास नहीं कर पाई और पिछले तीन विधानसभा चुनावों में सभी सीटें हार गई। बीजेपी के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने कहा कि दिल्ली में पूर्वांचलियों की संख्या 30 फीसदी से ज्यादा है, लेकिन दिल्ली में रहते हुए उनकी मतदान की पसंद बदल जाती है। अगर उनकी पकड़ मजबूत होती, तो उन्होंने हालिया चुनावों में कुछ सफलता मिली, लेकिन एमसीडी चुनावों में भी उनका सूपड़ा साफ हो गया है।
दिल्ली चुनाव: कांग्रेस ने जारी की आखिरी सूची, लिस्ट में दो नाम
16 Jan, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अपनी अंतिम सूची भी जारी कर दी है। कांग्रेस ने आखिरी लिस्ट में बचे हुए दो दोनों प्रत्याशियों की घोषणा की है। इससे पहले कांग्रेस ने बुधवसार को पांच प्रत्याशियों की सूची जारी की थी। अब कांग्रेस सभी 70 सीटों पर प्रत्याशियों उतार चुकी है। बता दें कि आम आदमी पार्टी भी अपने सभी 70 प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतार चुकी है, जबकि बीजेपी अभी तक 59 प्रत्याशियों ही घोषित कर सकी है।
छठी लिस्ट के प्रत्याशियों में तिमारपुर-लोकेंद्र चौधरी, रोहताश नगर-सुरेश वती चौहान, पांचवीं लिस्ट के प्रत्याशी में बवाना (एससी) -सुरेंद्र कुमार, रोहिणी- सुमेश गुप्ता, करोल बाग (एससी)- राहुल धानक, तुगलकाबाद- वीरेंद्र बिधूड़ी, बदरपुर- अर्जुन भड़ानी। वहीं चौथी सूची के प्रत्याशी में मुंडका- धर्मपाल लकड़ा, किराड़ी-राजेश गुप्ता, मॉडल टाउन- कुंवर करण सिंह, पटेल नगर (एससी)- श्रीमती कृष्णा तीरथ, हरि नगर- प्रेम शर्मा, जनकपुरी- श्रीमती हरबनी कौर, विकासपुरी- एडवोकेट जितेंद्र सोलंकी, नजफगढ़- सुषमा यादव पालम- मंगे राम, आरकेपुरम- विशेष टोकस खला- अरीबा खान, विश्वास नगर- राजीव चौधरी, गांधी नगर- कमल अरोड़ा, शाहदरा- जगत सिंह, घोंडा- भीष्म शर्मा, गोकलपुर (एससी)- ईश्वर बागड़ी। तीसरी लिस्ट के प्रत्याशियों में कालकाजी-अलका लांबा
दूसरी लिस्ट में रिठाला- सुशांत मिश्रा, मंगोल पुरी (एससी)- हनुमान चौहान, शकूर बस्ती- सतीश लूथरा, त्रिनगर सतेंद्र- शर्मा, मटिया महल- आसिम अहमद खान, मोती नगर- राजेंद्र नामधारी, मादीपुर (एससी)- जेपी पंवार, राजौरी गार्डन- धर्मपाल चंदेला, उत्तम नगर- मुकेश शर्मा, मटियाला- रघुविंदर शौकीन, बिजवासन- देवेन्द्र सहरावत, दिल्ली कैंट- प्रदीप कुमार उपमन्यु, राजिंदर नगर- विनीत यादव, जंगपुरा- फरहाद सूरी, मालवीय नगर- जितेंद्र कुमार कोचर, महरौली- पुष्पा सिंह, देवली- एससी राजेश चौहान, संगम विहार- हर्ष चौधरी, त्रिलोकपुरी (एससी)- अमरदीप, कोंडली (एससी)- अक्षय कुमार, लक्ष्मी नगर- सुमित शर्मा, कृष्णा नगर- गुरचरण सिंह राजू, सीमापुरी (एससी)- राजेश लिलोठिया, बाबरपुर- हाजी मोहम्मद इशराक खान, गोकलपुर (एससी)- प्रमोद कुमार जयंत, करावल नगर- डॉ. पीके मिश्रा शामिल हैं। वहीं पहली लिस्ट के प्रत्याशी में संदीप दीक्षित- नई दिल्ली, देवेंद्र यादव – बादली, रोहित चौधरी – नांगलोई, रागिनी नायक – वजीरपुर, अभिषेक दत्त – कस्तूरबा नगर, अनिल चौधरी – पटपड़गंज, मुदित अग्रवाल – चांदनी चौक, हारून यूसुफ – बल्लीमारान, अली मेहंदी – मुस्तफाबाद, अब्दुल रहमान – सीलमपुर (मौजूदा विधायक) आदर्श शास्त्री- द्वारका, अरुणा कुमारी- नरेला, मंगेश त्यागी- बुराड़ी, शिवांक सिंघल- आदर्श नगर, जयकिशन- सुल्तानपर माजरी (एससी), प्रवीण जैन- शालीमार बाग, अनिल भारद्वाज- सदर बाजार, पीएस बावा- तिलक नगर, राजेंद्र तंवर- छतरपुर, जय प्रकाश- अंबेदकर नगर (एससी), गर्वित सिंघवी- ग्रेटर कैलाश शामिल हैं।
कर्नाटक में फिर शुरु हुई तकरार
16 Jan, 2025 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नए सीएम का इंतजार: ढाई साल पूरे हुए अब सिद्धारमैया को छोड़ना होगी सीएम की कुर्सी?
बेंगलुरु। कर्नाटक में एक बार फिर सीएम की कुर्सी को लेकर तकरार बढ़ती नजर आ रही है। हालांकि, अब तक पार्टी या किसी नेता ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। इसी बीच खबरें हैं कि राज्य सरकार में मंत्री आरबी टिम्मापुर ने भी सीएम बनने की इच्छा जाहिर कर दी है। खास बात है कि ये घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहे हैं, जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया लगभग आधा कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। 2023 में चुनाव जीतने के बाद राज्य में कथित तौर पर ढाई साल बाद सीएम बदलना तय हुआ था।
टिम्मापुर ने कहा, दलित को क्यों मुख्यमंत्री पद नहीं दिया जाना चाहिए? मुझे सीएम क्यों नहीं बनाया जाना चाहिए? खास बात है कि राज्य सरकार में दलित नेता कई अहम पदों पर रहे, लेकिन अब तक कोई भी सीएम नहीं रहा है। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद की रेस में डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार सबसे प्रबल दावेदार हैं। दरअसल, 2023 विधानसभा चुनाव में जीत के बाद कहा जा रहा था कि शिवकुमार सीएम पद के लिए दावेदारी पेश कर रहे हैं।जानकारों का कहना है कि दलित नेता पर सहमति बनाने के लिए एससी एसटी विधायकों की बैठक बुलाई गई थी, लेकिन कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला के दखल के बाद इसे रद्द कर दिया गया। कथित तौर पर शिवकुमार के कहने पर हस्तक्षेप किया गया था। जी परमेश्वरा का कहना है, जैसा कि दिखाया जा रहा कि इसे कैंसिल कर दिया गया है। ऐसा नहीं है, सिर्फ टाला गया है।
उन्होंने कहा, कोई भी बैठक को नहीं रोक सकता है। अगर कोई भी कहता है कि वे दलित मुद्दों पर बात करने के लिए बैठक बर्दाश्त नहीं कर सकते, तो हम उन्हें करारा जवाबदेंगे। हमारे पास क्षमता और ताकत है। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के नेताओं का कहना है कि अपना उत्तराधिकारी चुनने के लिए सिद्धारमैया रणनीतिक रुख अपना रहे हैं। एक नेता ने कहा, यह खुला राज है कि वह दलित मुख्यमंत्री के आसपास चर्चाएं बढ़ा रहे हैं, ताकि पार्टी के अंदर विरोध को कम किया जा सके। खासतौर से ऐसे समय पर जब उनका आधा कार्यकाल पूरा रहो रहा है। हालांकि, उनकी इस रणनीति का खासतौर से शिवकुमार कैंप विरोध कर रहा है।
कांग्रेस के नए हेड क्वार्टर का नाम इंदिरा गांधी नहीं मनमोहन सिंह के नाम हो
16 Jan, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजेपी प्रवक्ता पूनावाला ने भवन के बाहर लगे पोस्टर पर दी प्रतिक्रिया
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस के नए हेड क्वार्टर और भवन के बाहर पोस्टर लगे हैं। इन पोस्टरों को मीडिया ने दिखाया है। पोस्टर में लिखा है इस भवन का नाम इंदिरा गांधी के नाम पर नहीं, बल्कि डॉ. मनमोहन सिंह के नाम पर होना चाहिए। कांग्रेस पार्टी एक परिवार के आगे नहीं सोच पाती।
कांग्रेस ने स्मारक और स्मृति पर किस प्रकार की ऊंची सियासत की उसे हमने देखा है। लेकिन जब पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की राष्ट्रीय शोक अवधि थी, तब राहुल गांधी पार्टी के लिए चले गए। वह उनके अस्थि विसर्जन और अखंड पाठ में भी शामिल नहीं हुए। जीते जी मनमोहन सिंह का अपमान किया गया। उनको फैसले लेने की आजादी नहीं दी गई। उनके अध्यादेश तक फाड़े गए थे।
शहजाद पूनावाला ने आगे कहा कि कांग्रेस ने मनमोहन सिंह को भारत रत्न से वंचित रखा, जबकि प्रणब मुखर्जी ने इसका प्रस्ताव रखा था और यह पुलक चटर्जी तक पहुंचा था ताकि ये सोनिया गांधी तक पहुंचे और इस पर काम हो लेकिन एक मंशा होती है कि कोई भी गैर परिवार का कांग्रेसी भी हो, प्रधानमंत्री भी बना हो उसको अपमानित और जलील करना है। नरसिम्हा राव के पार्थिव शरीर को कांग्रेस के दफ्तर में घुसने नहीं दिया गया था।
बीजेपी प्रवक्ता पूनावाला ने कहा कि भीमराव अंबेडकर और वल्लभभाई पटेल को भी सालों तक भारत रत्न से वंचित रखा गया। उनका जीते जी अपमान किया गया। भीमराव अंबेडकर को दो बार चुनाव हराने का काम किया। आज इस भवन का नाम अंबेडकर भवन रखते, मनमोहन सिंह के नाम पर रखते, लेकिन इसका नाम इंदिरा गांधी के नाम पर रखा, क्योंकि परिवार पहले है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सिख विरोधी पार्टी है। 1984 के नरसंहार को भी जस्टिफाई किया, जगदीश टाइटलर सज्जन कुमार को बचाया और डॉ. मनमोहन सिंह का अपमान करते रहे। यह उनकी असली फितरत है और असली चेहरा है। पूनावाला के इस बयान पर अभी तक कांग्रेस की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
बिधूड़ी ने दिया विवादित बयान, आतिशी दिल्ली की सड़कों पर हिरनी जैसी घूम रही
16 Jan, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । दिल्ली की कालकाजी सीट से भाजपा उम्मीदवार रमेश बिधूड़ी ने फिर सीएम आतिशी को लेकर आपत्तिजनक बयान दे दिया है। उन्होंने कहा कि आतिशी दिल्ली की सड़कों पर हिरनी के जैसे घूम रही हैं।
भाजपा प्रत्याशी बिधूड़ी ने कहा कि केजरीवाल शीशमहल में रहते हैं। 2 करोड़ की कार चलाते हैं। उन्होंने शीला दीक्षित को जेल नहीं भेजा, बल्कि खुद सोनिया गांधी की गोद में जाकर बैठ गए। केजरीवाल दिल्ली जल बोर्ड के 8 करोड़ हजम कर चुके है। इसके पहले 5 जनवरी को भी बिधूड़ी ने रोहिणी में हुई भाजपा की परिवर्तन रैली में कहा था कि आतिशी ने अपना बाप बदल लिया है। वे मार्लेना से सिंह बन गई हैं। तभी भाजपा नेता ने प्रियंका गांधी वाड्रा पर कहा था कि जैसे ओखला और संगम विहार की सड़कें बना दी हैं, वैसे ही कालकाजी में सारी की सारी सड़कें प्रियंका गांधी के गाल जैसी बना दूंगा। हालांकि, बाद में बिधूड़ी ने बयान को लेकर माफी मांग ली थी।
कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा: भाजपा-संघ के साथ इंडियन स्टेट से लड़ रही कांग्रेस
16 Jan, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस लीडर राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि भाजपा और आरएसएस ने देश की सभी संस्थानों पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस न सिर्फ भाजपा और आरएसएस, बल्कि इंडियन स्टेट (भारत सरकार) से भी लड़ाई लड़ रही है।राहुल ने यह बयान दिल्ली में कांग्रेस के नए मुख्यालय के उद्घाटन के मौके पर कही। इस बयान के बाद भाजपा बोली कि राहुल ने तो खुलेआम जंग छेड़ दी। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया पर लिखा- राहुल गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे भारत से लड़ रहे हैं। ये लोग भारत को और कमजोर करना चाहते हैं।
भागवत का बयान देशद्रोह
कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि मोहन भागवत कह रहे हैं कि 1947 में भारत को सच्ची आजादी नहीं मिली थी। मोहन भागवत का यह कमेंट हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के साथ-साथ हर एक भारतीय नागरिक का अपमान है। भागवत का कमेंट हमारे संविधान पर हमला है। राहुल गांधी ने कांग्रेस के नए मुख्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में कहा कि मोहन भागवत हर दो-तीन दिन में अपने बयानों से देश को यह बताते रहते हैं कि वह स्वतंत्रता आंदोलन और संविधान के बारे में क्या सोचते हैं। उन्होंने हाल ही में जो कहा वह देशद्रोह है, क्योंकि उनके बयान का मतलब है कि संविधान का कोई औचित्य नहीं है। राहुल ने कहा कि भागवत के हिसाब से अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई का कोई महत्व ही नहीं है। मोहन भागवत अगर किसी और देश में ऐसे बयान देते तो गिरफ्तार हो जाते। उनके खिलाफ केस भी चलाया जाता। दरअसल, भागवत ने 13 जनवरी को इंदौर में एक कार्यक्रम में कहा था कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तिथि ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ के रूप में मनाई जानी चाहिए, क्योंकि अनेक सदियों से दुश्मनों का आक्रमण झेलने वाले देश को सच्ची स्वतंत्रता इस दिन मिली थी। राहुल ने कहा कि हमारे पास कृष्ण, नानक, बुद्ध, कबीर, क्या ये सब आरएसएस की विचारधारा हैं।
आरएसएस और कांग्रेस की विचारधारा में बड़ा अंतर
राहुल गांधी ने कहा कि हमारी विचारधारा कल सामने नहीं आई। हमारी विचारधारा हजारों साल पुरानी है। यह हजारों सालों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से लड़ रही है। हमारे अपने प्रतीक हैं। हमारे पास शिव हैं। हमारे पास गुरुनानक हैं। हमारे पास कबीर हैं। हमारे पास महात्मा गांधी हैं। ये सभी हमें यानी देश को सही रास्ता दिखाते हैं। क्या गुरुनानक संघ की विचारधारा हैं? क्या बुद्ध संघ की विचारधारा हैं? क्या भगवान कृष्ण संघ की विचारधारा हैं? इनमें से कोई नहीं। इनमें से सभी ने लोगों की समानता और भाईचारे के लिए लड़ाई लड़ी। राहुल ने कहा कि यह मत सोचिए कि हम निष्पक्ष लड़ाई लड़ रहे हैं। इसमें कोई निष्पक्षता नहीं है। यदि आप मानते हैं कि हम भाजपा या क्रस्स् नामक राजनीतिक संगठन से लड़ रहे हैं, तो आप समझ नहीं पा रहे कि क्या चल रहा है। यह दो विचारों के बीच लड़ाई है। एक हमारा विचार है जो संविधान का विचार है। दूसरी तरफ आरएसएस का विचार है जो इसके उलट है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक में दस विधायक रहे अनुपस्थित
16 Jan, 2025 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुंबई दौरे पर आए थे। अपनी यात्रा के दौरान नौसेना डॉकयार्ड में तीन प्रमुख नौसेना युद्धपोतों आईएनएस सूरत, आईएनएस नीलगिरि और आईएनएस वाघशीर को उन्होंने राष्ट्र को समर्पित किया। इसके बाद नवी मुंबई के खारघर में इस्कॉन मंदिर का भी उन्होंने उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने महायुति विधायकों की बैठक ली। अजित पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के 10 विधायक इस बैठक से अनुपस्थित रहे। अब राजनीतिक गलियारे में विधायकों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बना है। प्रधानमंत्री आपको बता दें कि नरेन्द्र मोदी ने महायुति सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया। इसके बाद अब वे दूसरी बार मुंबई आए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में तीनों युद्धपोतों को राष्ट्र को समर्पित करने के बाद महायुति में तीनों दलों के विधायकों के साथ बैठक की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार उपस्थित थे। बैठक में नरेन्द्र मोदी ने सभी विधायकों को विकास का संदेश दिया। लेकिन एनसीपी विधायक दिलीप वलसे पाटिल, छगन भुजबल, सरोज अहिरे, राजू नवघरे, धनंजय मुंडे, प्रकाश सोलंके और इदरीस नाईकवडी समेत 10 विधायक इस बैठक में मौजूद नहीं थे।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में विधायकों से क्या कहा? शिवसेना विधायक दीपक केसरकर ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने, आपको राजनीतिक जीवन में किस तरह काम करना चाहिए और लोगों की समस्याओं का समाधान किस तरह करना चाहिए? इस पर मार्गदर्शन किया और अपने अनुभव साझा किये। उन्होंने बैठक में कोई कठोर शब्द नहीं बोले। उन्होंने सभी को ज्ञान दिया। उनके साथ गहन चर्चा हुई। केसरकर ने कहा कि उन्होंने विपक्ष के बारे में कुछ नहीं कहा।
वह विधायक क्यों नहीं आये?
एनसीपी के दस विधायक बैठक में क्यों नहीं आये? इस मुद्दे पर बोलते हुए दीपक केसरकर ने कहा कि, अभी कौन आया या नहीं आया, इस पर बात करना उचित नहीं है, और उन्होंने इस मुद्दे पर बात करने से परहेज किया। लेकिन एनसीपी के दस विधायक बैठक में क्यों नहीं आये? छगन भुजबल जैसे वरिष्ठ विधायक क्यों नहीं आये? इसकी चर्चा शुरू हो गई है।
महाराष्ट्र में कुछ पकता जरुर दिख रहा है पीएम मोदी और शरद पवार के बीच
15 Jan, 2025 11:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । एनसीपी-एसपी प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक प्रमुख मराठी साहित्यिक समारोह का उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित कर दिया है। पवार के कदम को मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने के लिए केंद्र की मोदी सरकार के प्रति आभार के रूप में देखा जा रहा है। इस निमंत्रण ने शरद पवार की राजनीतिक रणनीति के बारे में अटकलों को पैदा कर दिया है, क्योंकि पिछले साल महाराष्ट्र चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद उनकी पार्टी चुनौतियों का सामना कर रही है। पीएम मोदी को अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया गया है। इस आयोजन समिति के अध्यक्ष खुद शरद पवार हैं। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय मराठी साहित्य महामंडल के बैनर तले आयोजित किया जाता है।
प्रधानमंत्री को दिए निमंत्रण में पवार ने कहा कि यह पहली बार है कि यह सम्मेलन दिल्ली में (21-23 फरवरी तक) आयोजित हो रहा है और याद दिलाया कि कार्यक्रम के 37वें संस्करण का उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था।
पवार ने सम्मेलन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला, जो 1878 में शुरू हुआ था। तब सम्मेलन को पहली बार न्यायमूर्ति महादेव गोविंद रानाडे ने पुणे में ग्रंथकार सम्मेलन के रूप में आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में लोकमान्य तिलक, नामदार गोखले, वी डी सावरकर और काकासाहेब गाडगिल जैसी प्रमुख हस्तियां शामिल हुई हैं।
पीएम मोदी को लिखे अपने पत्र में उन्होंने हाल ही में मराठी को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता देने के मद्देनजर प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का उद्घाटन किए जाने की उपयुक्तता पर जोर दिया। पवार ने लिखा, हाल ही में आपके कार्यकाल के दौरान मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। इस पृष्ठभूमि में, यह उचित होगा कि वर्ष मराठी भाषा और संस्कृति के प्रभावशाली संगम का उद्घाटन आपके हाथों से किया जाए।
कोई भारतीय कैसे कह सकता है कि उसकी लड़ाई भारत से है? केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने राहुल गांधी पर किया पलटवार
15 Jan, 2025 07:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भाजपा ने एक बार फिर लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को उनके बयानों को लेकर घेरा है। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि कोई भारतीय कैसे कह सकता है कि उसकी लड़ाई भारत से है? राहुल गांधी ने हाल ही में हुए चुनावों में पारदर्शिता का जिक्र करते हुए यह बयान दिया था।
भाजपा-आरएसएस ने हर संस्थान पर कब्जा कर लिया है: राहुल
पार्टी के नए मुख्यालय 'इंदिरा भवन' के उद्घाटन के बाद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि भारत की चुनाव प्रणाली में गंभीर समस्या है। उन्होंने कहा, "यह मत सोचिए कि हम निष्पक्ष लड़ाई लड़ रहे हैं। इसमें कोई निष्पक्षता नहीं है। अगर आप मानते हैं कि हम भाजपा या आरएसएस नामक राजनीतिक संगठन से लड़ रहे हैं, तो आप समझ नहीं पाए हैं कि क्या हो रहा है। भाजपा और आरएसएस ने हमारे देश की हर संस्था पर कब्जा कर लिया है। अब हम भाजपा, आरएसएस और खुद भारतीय राज्य के खिलाफ लड़ रहे हैं।"
भारत की चुनाव प्रणाली में गंभीर समस्या: राहुल
राहुल गांधी ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों का हवाला देते हुए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाए और कहा कि उनकी लड़ाई सिर्फ भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से ही नहीं है, बल्कि 'भारतीय राज्य' से भी है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने पार्टी के नए मुख्यालय के उद्घाटन के बाद यह भी दावा किया कि भारत की चुनाव प्रणाली में गंभीर समस्या है।
उन्होंने दावा किया, "मैंने साफ तौर पर कहा है कि महाराष्ट्र चुनाव में कुछ गड़बड़ हुई है। चुनाव आयोग जिस तरह से काम कर रहा है, उससे हम असहज हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच महाराष्ट्र में अचानक करीब एक करोड़ नए मतदाताओं का सामने आना चिंता का विषय है।"
हरियाणा चुनाव पर भी उठाए सवाल
राहुल गांधी ने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में वोट देने वालों के नाम और पते के साथ मतदाता सूची उपलब्ध कराना चुनाव आयोग का कर्तव्य है, लेकिन उसने यह जानकारी देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने सवाल किया, "चुनाव आयोग मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने से क्यों इनकार करेगा? हमें सूची न देने से क्या उद्देश्य पूरा होगा और वे इसे क्यों रोके हुए हैं?" राहुल गांधी के अनुसार, पारदर्शिता सुनिश्चित करना चुनाव आयोग का कर्तव्य है और यह बताना उनकी पवित्र जिम्मेदारी है कि ऐसा क्यों हुआ। कांग्रेस नेता ने कहा, "यह ऐसी बात है जिसे हर कांग्रेसी और हर विपक्षी सदस्य को ध्यान में रखना चाहिए। हमारी चुनाव प्रणाली में एक गंभीर समस्या है। पारदर्शी होना चुनाव आयोग का कर्तव्य है।"
आतिशी ने कालकाजी सीट से दाखिल किया नामांकन
15 Jan, 2025 01:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) की वरिष्ठ नेता आतिशी ने मंगलवार को दिल्ली के कालकाजी विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। सोमवार को देर होने के कारण नामांकन दाखिल नहीं कर पाईं थीं।
सीएम आतिशी ने लाजपत नगर स्थित जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में अपना नामांकन दाखिल किया है। चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के दौरान उनका समर्थकों के साथ रोडशो और गुरुद्वारे में मत्था टेकने का कार्यक्रम मीडिया में लगातार सुर्खियों में रहा है। यहां बताते चलें कि सीएम आतिशी कालकाजी विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहीं हैं। यह सीट 2020 में भी आप के पाले में ही रही है। नामांकन से पहले उन्होंने गिरि नगर के एक गुरुद्वारे में आशीर्वाद लिया और फिर मनीष सिसोदिया सहित आप के शीर्ष नेताओं के साथ रोडशो किया।
इससे एक दिन पहले सोमवार को देरी हो जाने के कारण वह नामांकन दाखिल नहीं कर पाईं थीं। मंगलवार को उन्होंने नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी की है। आतिशी का रोडशो पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए ऊर्जा भरने वाला रहा है।
अमृतपाल सिंह की नई पार्टी का गठन: पंजाब की अकाली राजनीति में नई चुनौती
15 Jan, 2025 12:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। असम की डिब्रूगढ़ जेल में रहते हुए अमृतपाल सिंह ने नई पार्टी का ऐलान कर दिया है। नई पार्टी का ऐलान मंगलवार को मुक्तसर के माघी मेले में किया गया है। अमृतपाल सिंह की नई पार्टी का नाम अकाली दल (वारिस पंजाब दे) रखा गया है।
जेल में बंद अमृतपाल सिंह की नई पार्टी का ऐलान जहां माघी मेले में किया गया, वहीं बताया गया कि अमृतपाल को नई पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नामित किया गया है। इस घोषणा को पंजाब की राजनीति, विशेषकर अकाली राजनीति में बड़े बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ ही माघी मेले के दौरान 15 सूत्रीय प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें अस्थायी समिति बनाई गई और पार्टी का संचालन अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह और अन्य वरिष्ठ नेताओं की एक समिति करेगी। सात सदस्यों की एक समिति पार्टी का सदस्यता अभियान चलाएगी।
बताया जा रहा है कि पंजाब में तीन अकाली दल हो गए हैं, इनमें कट्टरपंथ और लिबरल विचारधाराओं का टकराव बराबर बना हुआ है। इसके साथ ही अकाली राजनीति अब तीन दलों में विभाजित हो गई है। शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) है जो पंजाब में लिबरल विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है और कई बार सरकार चला चुका है। वहीं शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) है जो सिमरनजीत सिंह मान के नेतृत्व में कट्टरपंथी विचारधारा का समर्थक है। इन दो के अतिरिक्त अब तीसरा अकाली दल का भी आगाज हो गया है। अकाली दल (वारिस पंजाब दे) असल में अमृतपाल सिंह की नई पार्टी है, जो पंथक विचारधारा को लेकर प्रतिबद्ध है। विचारकों की मानें तो अमृतपाल की नई पार्टी शिरोमणि अकाली दल के परंपरागत पंथक वोटबैंक को चुनौती दे सकती है। दरअसल अकाली दल (वारिस पंजाब दे) ने अपनी विचारधारा को पंजाब और पंथ की रक्षा के रूप में प्रस्तुत किया है। बहरहाल अमृतपाल की पार्टी गठन से पंजाब की राजनीति में एक नया समीकरण उभरा है।
मोहन भागवत के बयान पर कांग्रेस और शिवसेना को आपत्ति
15 Jan, 2025 11:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तिथि प्रतिष्ठा द्वादशी के रूप में मनाई जानी चाहिए, क्योंकि अनेक सदियों से दुश्मन का आक्रमण झेलने वाले देश की सच्ची स्वतंत्रता इस दिन प्रतिष्ठित हुई थी। भागवत के इस बयान पर कांग्रेस और शिवसेना का कहना है कि आरएसएस चीफ रामलला के नाम पर राजनीति रह रहे हैं, उन्होंने महात्मा गांधी और सभी स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किया है। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने भी ये कहा था कि देश को आजादी 2014 में मिली थी। इसके बाद अब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत कह रहे हैं कि राम मंदिर बनने के बाद ही देश को सच्ची स्वतंत्रता मिली, तो फिर 15 अगस्त 1947 को क्या हुआ था, 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) का इतना महत्व क्यों है। अगर यह (रामलला की प्राण प्रतिष्ठा) सच्ची आजादी है तो मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है कि वो महात्मा गांधी और सभी स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान कर रहे हैं।
राशिद अल्वी ने कहा कि राम मंदिर का बनना और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा निश्चित तौर पर एक महत्वपूर्ण दिन है, इसमें कोई शंका नहीं है, लेकिन ये कहना कि प्राण प्रतिष्ठा दिवस के दिन सच्ची आजादी मिली है, ये स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है। वहीं शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत ने कहा कि आरएसएस प्रमुख एक सम्मानित व्यक्ति हैं, लेकिन वे संविधान के निर्माता नहीं हैं। वे इस देश के कानूनों का मसौदा तैयार नहीं करते या उनमें बदलाव नहीं करते। रामलला के विग्रह का प्राण-प्रतिष्ठा वास्तव में देश के लिए गौरव का क्षण है और मंदिर निर्माण में सभी ने अपना योगदान दिया है। लेकिन, यह दावा करना गलत है कि देश अभी आजाद हुआ है। उन्हें रामलला के नाम पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
बता दें कि मोहन भागवत ने सोमवार को एक कार्यक्रम में कहा था कि सदियों तक विदेशी आक्रमणों को झेलने वाले भारत को सच्ची आजादी पिछले साल अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के साथ मिली। उन्होंने अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ के दो दिन बाद कहा कि यह तिथि ‘प्रतिष्ठा द्वादशी के रूप में मनाई जानी चाहिए, क्योंकि अनेक सदियों से ‘‘परचक्र (दुश्मन का आक्रमण) झेलने वाले भारत की सच्ची स्वतंत्रता इस दिन प्रतिष्ठित हुई थी।
शरद पवार ने भी दिए अकेले चुनाव लडऩे के संकेत
15 Jan, 2025 10:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । महाराष्ट्र में आगामी स्थानीय चुनाव से पहले महा विकास अघाड़ी गठबंधन टूट की कगार पर पहुंचता दिख रहा है। दरअसल हाल ही में शिवसेना यूबीटी ने स्थानीय चुनाव अकेले लडऩे का एलान किया था। अब एनसीपी एसपी प्रमुख शरद पवार ने भी ऐसे संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी भी स्थानीय चुनाव अकेले लड़ सकती है। शरद पवार ने कहा कि अगले 8-10 दिनों में बैठक होगी, जिसमें इस पर फैसला होगा कि चुनाव गठबंधन में लड़ा जाए या फिर अकेले।
शरद पवार से जब इंडी गठबंधन को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन में कभी भी राज्य और स्थानीय चुनाव को लेकर चर्चा नहीं हुई। इंडी गठबंधन सिर्फ राष्ट्रीय स्तर के चुनाव के लिए था। महाराष्ट्र के आगामी निकाय चुनाव में हम गठबंधन के साथ चुनाव लड़ेंगे या अकेले, इसका फैसला करने के लिए अगले 8-10 दिनों में बैठक होगी। दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि दिल्ली चुनाव में, मुझे ऐसा लगता है कि हमें अरविंद केजरीवाल की मदद करनी चाहिए।
फडणवीस ने क्षेत्र, जाति और भाषा के आधार पर मतभेदों को एकजुट होने की आवश्यकता पर बल दिया
15 Jan, 2025 09:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत । महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने क्षेत्र, जाति और भाषा के आधार पर मतभेदों को भुलाकर 2047 तक विकसित राष्ट्र के सपने को साकार करने के लिए भारतीय तिरंगे के नीचे एकजुट होने की आवश्यकता पर बल दिया।1761 के पानीपत के युद्ध में मराठों की वीरता को याद करने के लिए यहां शौर्य दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए फडणवीस ने कहा कि मराठा अहमद शाह अब्दाली के खिलाफ जीत की ओर अग्रसर थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा क्योंकि स्थानीय राजा छत्रपति शिवाजी द्वारा स्थापित हिंदवी स्वराज के लिए लड़ने के लिए एकजुट नहीं हो सके।
पिछले साल महाराष्ट्र चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक है तो सुरक्षित है नारे का जिक्र करते हुए फडणवीस ने कहा, अगर हम तब एकजुट होते तो सुरक्षित होते। उन्होंने कहा, लेकिन, हम तब एकजुट नहीं थे और सुरक्षित नहीं थे और बाहरी लोगों द्वारा शासित थे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कहा, जिस तरह छत्रपति शिवाजी महाराज ने हमें भगवा ध्वज के नीचे एक साथ लाया, उसी तरह अब समय की मांग है कि हम भगवा ध्वज और तिरंगे के नीचे एकजुट हों। उन्होंने कहा कि पानीपत की लड़ाई से सबक लेना चाहिए, देश के दुश्मनों की पहचान करनी चाहिए और 2047 तक प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए भारतीयों के रूप में एकजुट होना चाहिए। फडणवीस ने कहा कि 1761 में पानीपत की लड़ाई में मराठों की हार हुई थी, लेकिन महादजी शिंदे एक दशक बाद दिल्ली जीतने और मराठा साम्राज्य की सर्वोच्चता स्थापित करने के लिए वापस लौटे। उन्होंने याद दिलाया कि छत्रपति शिवाजी द्वारा स्थापित हिंदवी स्वराज को उनके बेटे छत्रपति संभाजी ने आगे बढ़ाया। फडणवीस ने कहा कि पेशवाओं के तहत, हिंदवी स्वराज का विस्तार वर्तमान ओडिशा के कटक से लेकर अफगानिस्तान के अटक तक धर्म, राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा के लिए हुआ। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पानीपत में छत्रपति शिवाजी की एक प्रतिमा स्थापित की जाएगी और उस स्थान पर एक भव्य स्मारक बनाया जाएगा जहां युद्ध लड़ा गया था।
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