राजनीति
भाजपा पर बरसे केजरीवाल, बोले- हमने पंजाब को शिक्षा में 27वें से पहले स्थान पर पहुंचाया
27 Jul, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़: पंजाब की राजनीतिक गलियारों में इन दिनों स्कूली परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और कथित पेपर लीक के गंभीर मुद्दों को लेकर जबरदस्त सियासी घमासान मचा हुआ है। विपक्षी दलों और खास तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा राज्य सरकार पर लगातार लगाए जा रहे पेपर लीक के तमाम गंभीर आरोपों का जवाब देने के लिए अब आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और वरिष्ठ नेता अरविंद केजरीवाल खुद मैदान में उतर आए हैं। एक तीखे पलटवार में केजरीवाल ने भाजपा के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी राजनीतिक हताशा और विफलता का प्रत्यक्ष परिणाम बताया है।
'पंजाब को शिक्षा के क्षेत्र में नंबर वन बनाया, विरोधियों से यह सफलता पच नहीं रही'
प्रेस कॉन्फ्रेंस और सार्वजनिक मंचों के जरिए अपनी बात रखते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जब पंजाब में हमारी पार्टी की सरकार सत्ता में आई थी, तब देश के अन्य राज्यों के मुकाबले शिक्षा के मामले में पंजाब काफी पिछड़कर 27वें पायदान पर खड़ा था।
हमारी सरकार ने सत्ता संभालते ही शिक्षा व्यवस्था को सुधारने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया।
दिन-रात कड़ी मेहनत करके, प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक सुधार लाकर और सरकारी स्कूलों का कायाकल्प करके आज हमने पंजाब को शिक्षा के मामले में देश में नंबर वन की स्थिति पर ला खड़ा किया है।
केजरीवाल ने भाजपा पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि विपक्षी दलों और खासकर भाजपा से आम आदमी पार्टी सरकार के ये शानदार और ऐतिहासिक काम बिल्कुल पच नहीं रहे हैं। यही वजह है कि वे जानबूझकर हमारी सरकार की इस बेहतरीन उपलब्धि और साफ-सुथरे रिकॉर्ड पर झूठे आरोप लगाकर कलंक लगाने की घटिया कोशिश कर रहे हैं।
विपक्ष का आक्रामक रुख और सियासी घेराबंदी
दूसरी ओर, पंजाब में विपक्षी दलों का दावा है कि हालिया परीक्षाओं के दौरान व्यवस्था में खामियों के चलते छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। भाजपा और अन्य विरोधी पार्टियों का आरोप है कि पंजाब में प्रशासनिक लापरवाही के कारण शिक्षा प्रणाली चरमरा गई है और पेपर लीक की घटनाओं से युवाओं में भारी निराशा है। विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय और आगामी चुनौतियां
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंजाब में आने वाले दिनों में शिक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता का मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है। एक तरफ जहां आम आदमी पार्टी अपनी शिक्षा क्रांति के मॉडल को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती है, वहीं विपक्ष इसी मोर्चे पर सरकार को घेरकर सियासी जमीन मजबूत करने की फिराक में है। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या सरकार विपक्ष के इन तीखे हमलों का जवाब जमीनी आंकड़ों के साथ मजबूती से दे पाती है या फिर यह विवाद पंजाब की राजनीति का एक बड़ा केंद्र बिंदु बनकर और अधिक गहराता है।
धर्मेंद्र प्रधान का कांग्रेस को संदेश, 'मैं एक स्ट्रीट फाइटर हूं, दबने वाला नहीं'
27 Jul, 2026 04:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पद छोड़ने के पश्चात् पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को पहली बार संसद परिसर पहुंचे। गाड़ी से उतरते ही उन्होंने प्रसन्नचित्त होकर हाथ जोड़कर उपस्थित लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने 'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद' के गगनभेदी नारे लगाकर उनका भव्य स्वागत किया और उन्हें सम्मानपूर्वक संसद भवन के अंदर ले गए।
सांसदों ने जताया अटूट समर्थन
संसद आगमन पर पूर्व मंत्री की अगवानी के लिए पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और सांसद द्वार पर मौजूद थे। जैसे ही वे परिसर में दाखिल हुए, सांसदों के उत्साह और गर्मजोशी भरे नारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। सहयोगियों के इस समर्थन और आत्मीयता ने संसद परिसर के माहौल में खास सरगर्मी ला दी।
प्रधान के इस्तीफे के बाद उद्धव ठाकरे की हुंकार, तिरंगा विजय रैली से सरकार पर निशाना
27 Jul, 2026 03:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के उपरांत मुंबई स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क में शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उत्सव मनाया। इस दौरान आयोजित 'तिरंगा विजय रैली' को संबोधित करते हुए शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने विवादित बयान दे डाला। उन्होंने नीट प्रश्नपत्र लीक के विरुद्ध आवाज उठाने वाले विद्यार्थियों की प्रशंसा करते हुए उनकी तुलना 'विष्णु के अवतार' से कर दी। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं ने सरकार को आईना दिखाया है, वे अवतारी स्वरूप हैं और यह आंदोलन अंधभक्तों के विरुद्ध देशभक्तों की निर्णायक विजय है। ठाकरे ने दावा किया कि छात्रों का यह राष्ट्रव्यापी विरोध सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध एक विस्तृत राजनीतिक संघर्ष का आरंभ है।
चुनावी प्रक्रिया पर प्रहार और श्रद्धांजलि सभा
अपने संबोधन में ठाकरे ने चुनावी व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि इस प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मतों की चोरी तो संभव है, परंतु जनभावनाओं को नहीं चुराया जा सकता। वहीं दूसरी ओर, उनके चचेरे भाई एवं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने परीक्षा विवाद के कारण कथित रूप से आत्महत्या करने वाले 21 अभ्यर्थियों की स्मृति में एक मिनट का मौन रखकर अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं।
युवाओं से आंदोलन निरंतर जारी रखने का आह्वान
उद्धव ठाकरे ने विद्यार्थियों की एकजुटता की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं ने देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है। आंदोलन के व्यापक स्वरूप का उल्लेख करते हुए उन्होंने उपस्थित जनसमूह और युवाओं से अपील की कि वे इस चेतना को धीमा न पड़ने दें। उन्होंने कहा कि सत्ता के अहंकार को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए और युवाओं को अपने हक की यह लड़ाई लगातार जारी रखनी होगी।
इस्तीफे के बाद अर्जुन राय BJP में शामिल, सियासी हलचल तेज
27 Jul, 2026 02:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना:बिहार के राजनीतिक गलियारों में सोमवार को एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। राष्ट्रीय जनता दल को अलविदा कहने के बाद सूबे के जाने-माने कद्दावर नेता, पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद अर्जुन राय ने आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। राजधानी पटना स्थित भाजपा के प्रदेश कार्यालय में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर बिहार सरकार के मंत्री नीतीश मिश्रा समेत कई दिग्गज नेता भी मौजूद रहे।
डबल इंजन सरकार से सीतामढ़ी के विकास का संकल्प
भाजपा में शामिल होने के बाद अपने संबोधन में अर्जुन राय ने कहा कि बतौर सांसद उन्होंने अपने गृह क्षेत्र सीतामढ़ी के विकास को लेकर जो सपने देखे थे, वे अब तक अधूरे हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि केंद्र और राज्य में सक्रिय एनडीए की डबल इंजन सरकार के साथ मिलकर ही क्षेत्र के रुके हुए विकास कार्यों को पूरी गति दी जा सकती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व की खुलकर प्रशंसा करते हुए कहा कि बिहार में इस समय सुशासन यानी गुड गवर्नेंस की सरकार पूरी मजबूती से काम कर रही है।
छात्र राजनीति से शुरू होकर मंत्री पद तक का सफर
अर्जुन राय का राजनीतिक सफर बेहद लंबा और संघर्षपूर्ण रहा है, जिसकी शुरुआत छात्र जीवन से हुई थी। साल 1994 में उन्होंने बिहार विश्वविद्यालय के जरिए छात्र राजनीति में सक्रिय कदम रखा था। इसके बाद वर्ष 2000 में उन्होंने राजद के टिकट पर मुजफ्फरपुर की औराई विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। वर्ष 2005 में उन्होंने जदयू का दामन थामा और उसी वर्ष औराई से विधायक चुने गए, जिसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में उन्हें सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री बनाया गया।
सांसद बनने से लेकर राजद तक का राजनीतिक सफर
साल 2009 के आम चुनावों में उन्होंने जदयू के टिकट पर सीतामढ़ी लोकसभा सीट से शानदार जीत दर्ज कर संसद पहुंचे, हालांकि 2014 के चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2015 में वरिष्ठ नेता शरद यादव के साथ मिलकर राजद का हाथ थाम लिया था। राजद के बैनर तले उन्होंने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव भी लड़े, लेकिन सफलता न मिलने के बाद अब उन्होंने भाजपा का रुख किया है, जिससे क्षेत्र के सियासी समीकरणों में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
धर्मेंद्र प्रधान पहुंचे संसद तो बीजेपी सांसदों ने संभाला मोर्चा, लगाए समर्थन के नारे
27 Jul, 2026 02:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। प्रश्नपत्र लीक विवाद से जुड़े बड़े प्रदर्शनों के पश्चात् पद छोड़ने वाले पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को संसद भवन पहुंचे। वाहन से बाहर आते ही उन्होंने चेहरे पर मुस्कान के साथ हाथ जोड़कर वहां मौजूद सभी लोगों का सादर नमस्ते किया। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी के साथी सांसदों ने उनका अभिनंदन 'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद' के नारों के साथ उत्साहपूर्वक किया।
गर्मजोशी से हुआ भव्य स्वागत
हालिया राजनीतिक हलचलों और अपने इस्तीफे के बाद सार्वजनिक मंच पर दिखे पूर्व मंत्री की आगवानी के लिए कई नेता पहले से ही मुस्तैद थे। परिसर में प्रवेश करते वक्त हुए ज़ोरदार स्वागत ने वहां मौजूद सभी का ध्यान आकर्षित किया। समर्थकों के इस तरह खुलकर सामने आने से संसद के प्रवेश द्वार पर कुछ देर के लिए काफी सरगर्मी देखने को मिली।
पुलिस कार्रवाई के खिलाफ संसद में कांग्रेस का प्रदर्शन, अमित शाह से सार्वजनिक माफी की मांग
27 Jul, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिसिया कार्रवाई और बर्बरता के विरोध में कांग्रेस पार्टी के सांसदों ने सोमवार को संसद परिसर में जोरदार हंगामा और प्रदर्शन किया। पार्टी की वरिष्ठ नेता और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार के सामने इकट्ठा होकर कड़ा विरोध जताया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
तख्तियों और बैनरों के साथ सांसदों का अनोखा विरोध
संसद परिसर में हुए इस प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद अपने हाथों में विभिन्न नारे लिखी हुई तख्तियां और बड़े बैनर लेकर शामिल हुए।
इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि देश का भविष्य कहे जाने वाले छात्र जब शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे थे, तब पुलिस ने उनके साथ अमानवीय और बर्बर व्यवहार किया।
विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री से इस गंभीर मामले पर संसद के पटल पर जवाब देने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
राहुल गांधी का गृह मंत्री को कड़ा पत्र
इस पूरे घटनाक्रम के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखकर इस मामले में सीधी जवाबदेही तय करने की मांग की है।
पत्र के मुख्य बिंदु: राहुल गांधी ने अपने पत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर हुए कथित बर्बर हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने तीखा सवाल पूछते हुए पूछा है कि क्या देश के प्रदर्शनकारी युवाओं पर पैलेट गन जैसे घातक हथियारों के इस्तेमाल की आधिकारिक अनुमति गृह मंत्री द्वारा दी गई थी?
लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात: राहुल गांधी ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना किसी भी जीवंत लोकतंत्र का एक मौलिक और महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। सरकार की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे तथा उनकी समस्याओं का समाधान बल प्रयोग के बजाय संवाद के माध्यम से निकाले। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हुई इस कथित हिंसा ने लोकतांत्रिक मूल्यों को गहरी ठेस पहुंचाई है, जिससे पूरे देश के युवाओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। देश के युवाओं और छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता, और सरकार को हर हाल में इन जायज सवालों का जवाब देना होगा।
कांग्रेस सांसदों ने सरकार को घेरा
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के अन्य प्रमुख नेताओं ने भी सरकार पर तीखे हमले किए:
केसी वेणुगोपाल ने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा, "गृह मंत्री इस समय कहां हैं और वे कहां छिपे हुए हैं? उन्हें लोकसभा के भीतर आकर इस बात का स्पष्ट जवाब देना होगा कि आखिर बिहार में एके-47 (AK-47) और दिल्ली में पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था? देश की जनता को ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इन सभी अत्याचारों के पीछे सीधे तौर पर उन्हीं का आदेश था।"
वहीं, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "क्या निहत्थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पैलेट गन और एके-47 का इस्तेमाल करना किसी भी प्रकार से न्यायसंगत है? इसका सीधा और स्पष्ट जवाब है कि यह पूरी तरह से गलत है।" उन्होंने कानून-व्यवस्था की प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि सामान्यतः किसी भी विरोध-प्रदर्शन के दौरान धारा 144 लागू होने पर पहले लाठीचार्ज या वॉटर कैनन का उपयोग होता है, लेकिन निहत्थे छात्रों पर सीधे इस तरह के घातक हथियारों का प्रयोग अत्यंत अमानवीय है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर मजबूती से उठाते रहेंगे।
पेपर लीक मामले में बढ़ी राजनीतिक गर्मी, शिवकुमार के बयान पर बीजेपी ने साधा निशाना
27 Jul, 2026 12:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। दिल्ली में छात्र आंदोलन और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करने को लेकर कर्नाटक की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के उस बयान पर विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि राज्य में भविष्य में किसी भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होता है तो संबंधित जिले के डिप्टी कमिश्नर को जिम्मेदार माना जाएगा। भाजपा ने इस बयान को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है।
भाजपा का आरोप और दोहरे मानदंड का मुद्दा
भाजपा का आरोप है कि राज्य सरकार भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय पहले से ही अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने की तैयारी कर रही है। पार्टी का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही अंततः सरकार और मुख्यमंत्री की होती है, इसलिए भविष्य में किसी भी पेपर लीक की स्थिति में मुख्यमंत्री को ही जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष का हमला और राजनीतिक जवाबदेही
कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में कांग्रेस राजनीतिक जवाबदेही की मांग करती है, जबकि कांग्रेस शासित राज्यों में वही जिम्मेदारी अधिकारियों पर डालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे कांग्रेस का दोहरे मानदंड वाला रवैया बताते हुए कहा कि राजनीतिक नेतृत्व अपनी जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रहा है। भाजपा ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में कर्नाटक में किसी भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होता है तो उसकी राजनीतिक जिम्मेदारी मुख्यमंत्री और राज्य सरकार की होगी।
एंटी पेपर लीक कानून पर बहस के बीच राहुल गांधी का बड़ा दांव, सरकार को घेरने की तैयारी
27 Jul, 2026 12:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर होने वाली चर्चा को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। केंद्र सरकार जहां इस संशोधन विधेयक को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम बता रही है, वहीं सत्ता पक्ष (एनडीए) ने बहस की कमान अपने युवा सांसदों के हाथों में सौंपी है। संसद में भाजपा की ओर से सांसद बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या प्रमुख वक्ता के रूप में मोर्चा संभालेंगे। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इस विधेयक को लोकसभा के पटल पर रखेंगे, जबकि नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी विपक्ष के सवालों का जवाब देंगे।
विपक्ष का नया पैंतरा और गृह मंत्री पर निशाने की तैयारी
शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के हालिया इस्तीफे के बाद विपक्ष ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए अब सीधे गृह मंत्रालय और गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लेने की योजना बनाई है। विपक्षी दल 20 जुलाई को जंतर-मंतर और संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग और कथित पेलेट गन के इस्तेमाल के मुद्दे को सदन में जोर-शोर से उठाने की तैयारी में हैं। इस विषय पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा गृह मंत्री को पत्र भेजकर जवाबदेही तय करने और आदेशों के संबंध में स्पष्टीकरण मांगने की भी बात सामने आई है।
एनडीए और अन्य दलों के प्रमुख वक्ता
सदन में विधेयक के समर्थन में एनडीए के कई घटक दलों के वरिष्ठ एवं युवा नेता चर्चा में शामिल होंगे। इनमें टीडीपी के लावु कृष्ण देवरायालु, जेडीयू के राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, अपना दल (एस) की अनुप्र्रिया पटेल और एनसीपी के सुनील तटकरे मुख्य रूप से अपनी बात रखेंगे। वहीं विपक्षी खेमे से तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से सायोनी घोष या मिताली बाग बहस में हिस्सा ले सकती हैं। माना जा रहा है कि विधेयक के पास होने की प्रक्रिया के बीच संसद में तीखी बहस और हंगामा देखने को मिल सकता है।
बीजेपी को घेरते हुए अखिलेश बोले- विकास की गति और तेज हो सकती थी
27 Jul, 2026 11:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने देश की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणालियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद से शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया है। अखिलेश यादव ने युवाओं के मनोबल और उनकी जागरूकता की सराहना करते हुए कहा कि युवा अब अपने अधिकारों को लेकर सजग हैं और यह सरकार उनकी जागरूकता को चुनौती नहीं दे सकती।
टास्क फोर्स के गठन पर उठाए सवाल
परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स पर निशाना साधते हुए अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि सरकार को आज टास्क फोर्स बनाने की याद क्यों आ रही है और यह कदम वर्ष 2014 में ही क्यों नहीं उठाया गया? सपा प्रमुख ने तर्क दिया कि यदि यह प्रयास एक दशक पहले किया गया होता, तो देश विकास के पथ पर और तेजी से आगे बढ़ा होता।
ओवैसी के गठबंधन प्रस्ताव पर सपा का रुख
वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा समाजवादी पार्टी को दिए गए गठबंधन के प्रस्ताव पर अखिलेश यादव ने सीधा जवाब देने से परहेज किया। गठबंधन की संभावनाओं से जुड़े सवाल को टालते हुए उन्होंने कहा कि किसी से लड़ने की आवश्यकता नहीं है और उनकी पार्टी जिस राजनीतिक मार्ग पर अब तक चलती आई है, भविष्य में भी उसी रास्ते पर आगे बढ़ती रहेगी।
विपक्ष के विरोध से संसद में गतिरोध, दोनों सदनों की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित
27 Jul, 2026 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान लगातार हो रहे हंगामे और शोर-शराबे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही मकर द्वार पर विपक्षी नेताओं के विरोध प्रदर्शन और सदन के भीतर जोरदार नारेबाजी के चलते दोनों सदनों को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। आज संसद में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से 'लोक परीक्षा संशोधन विधेयक' पेश किया जाना है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
संसद परिसर में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन
संसद परिसर के मकर द्वार पर प्रियंका गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विपक्ष ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान घटी घटना को लेकर सीधे केंद्रीय गृह मंत्री से जवाबदेही तय करने की मांग की। विपक्षी सांसदों का कहना है कि सरकार को इस संवेदनशील मामले में आगे आकर अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और स्थिति पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का हुआ सम्मान
इस्तीफा देने के पश्चात पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को पहली बार संसद भवन पहुंचे। संसद के मकर द्वार पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसदों ने उनका भव्य और गर्मजोशी से स्वागत किया। समर्थकों और सांसदों ने उन्हें पारंपरिक पगड़ी पहनाकर तथा शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया, जिसके बाद उन्हें ससम्मान सदन के भीतर ले जाया गया।
पेपर लीक पर सरकार का मास्टर प्लान, संसद में विधेयक पेश करेंगे जितेंद्र सिंह
27 Jul, 2026 11:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देशभर में फैली तीव्र जन-आक्रोश की लहर और व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपनाने जा रही है। पेपर लीक जैसी अनियमितताओं पर लगाम कसने के उद्देश्य से दो वर्ष पुराने कानून में संशोधन हेतु एक नया विधेयक आज लोकसभा के पटल पर रखा जाएगा। इस महत्वपूर्ण विधेयक पर होने वाली चर्चा के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपने युवा सांसदों की टोली को अग्रिम पंक्ति में उतारा है।
कड़े प्रावधानों से कसता शिकंजा
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक प्रस्तुत करेंगे। नए संशोधन के तहत अनुचित साधनों के प्रयोग पर 5 से 10 वर्ष की कठोर कारावास और 50 लाख रुपये तक के आर्थिक दंड का प्रावधान किया जा रहा है, जो कि मौजूदा 3 से 5 वर्ष की सजा से काफी सख्त है। वहीं, संगठित गिरोहों द्वारा किए जाने वाले पेपर लीक मामलों में न्यूनतम 7 वर्ष की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रस्ताव है। न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने हेतु मामलों को फास्ट-ट्रैक अदालतों में भेजा जाएगा, जहां 2 माह के भीतर फैसला सुनाना अनिवार्य होगा। विधेयक में OMR शीट से छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट और नकली एडमिट कार्ड निर्माण सहित कुल 15 तरह के कृत्यों को गंभीर अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है।
संसद में गरमाएगी चर्चा की सरगर्मी
विधेयक पर चर्चा को सुचारू बनाने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से सकारात्मक बहस में हिस्सा लेने का आह्वान किया है। सत्ता पक्ष की ओर से भाजपा, टीडीपी, शिवसेना, जेडीयू और एलजेपी (रामविलास) समेत विभिन्न सहयोगी दलों के 9 युवा सांसद मोर्चा संभालेंगे, जिनमें बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या जैसे प्रमुख चेहरे शामिल हैं। विपक्ष की ओर से भी तृणमूल कांग्रेस की सायनी घोष सहित कई अन्य नेता इस बहस में अपनी बात रखेंगे। सरकार का मानना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस अति-संवेदनशील मुद्दे पर हंगामा करने के बजाय अर्थपूर्ण संवाद होना देश के हित में है।
परीक्षा बिल पर सियासी संग्राम, बांसुरी स्वराज समेत कई युवा नेता करेंगे चर्चा
27 Jul, 2026 10:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर आज संसद में 10 घंटे की मैराथन चर्चा होने जा रही है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने इस महत्वपूर्ण बहस में अपनी बात रखने के लिए युवा सांसदों को मोर्चे पर उतारने का निर्णय लिया है।
सख्त प्रावधानों और फास्ट-ट्रैक कोर्ट की तैयारी
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इस संशोधन विधेयक को सदन के पटल पर प्रस्तुत करेंगे। वर्ष 2024 के मूल कानून में बदलाव करने वाले इस विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है। नए प्रावधानों के तहत दोषियों को 10 वर्ष तक के कारावास, 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने तथा संपत्ति ज़ब्त करने जैसी कठोर सजाओं का प्रस्ताव है। इसके साथ ही मामलों का निपटारा तीन महीने के भीतर करने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन का भी प्रावधान किया गया है।
संसद में बहस का खाका और राजनीतिक घटनाक्रम
इस संशोधन विधेयक पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से नई दिल्ली से सांसद बांसुरी स्वराज और बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या सरकार का पक्ष रखेंगे। इसके अतिरिक्त, टीडीपी से लवु कृष्ण देवरायलू, जेडीयू से ललन सिंह, शिवसेना से श्रीकांत शिंदे, लोजपा (रामविलास) से चिराग पासवान और तृणमूल कांग्रेस से सायोनी घोष सहित कई अन्य प्रमुख सांसद चर्चा में भाग लेंगे। उल्लेखनीय है कि शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद छात्रों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया था, जिसके उपरांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में परीक्षा सुधारों हेतु एक टास्क फोर्स के गठन का ऐलान किया।
भरत तिवारी मामले में बढ़ा विवाद, परिवार ने प्रशांत किशोर की भूमिका पर उठाए सवाल
27 Jul, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आरा: भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत भूषण तिवारी का मामला बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के बीच एक बार फिर राजनीतिक गर्माहट का केंद्र बन गया है। दिवंगत भरत तिवारी के परिजनों ने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि उन्हें पहले 15 दिनों के भीतर न्याय दिलाने का भरोसा दिया गया और बाद में बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज के पक्ष में चुनाव प्रचार करने का प्रस्ताव दिया गया। दूसरी ओर, जन सुराज पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया है।
सोशल मीडिया वीडियो से शुरू हुआ विवाद
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो के बाद इस मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। वीडियो में भरत तिवारी की मां आशा देवी यह कहती दिख रही हैं कि उनसे चुनाव में साथ चलकर प्रचार करने का अनुरोध किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री पर पूरा भरोसा है और न्याय मिलने का पूरा विश्वास है। वीडियो में बातचीत के दौरान जब मनोज तिवारी पूछते हैं कि क्या यह बात प्रशांत किशोर ने कही थी, तो भरत तिवारी की भाभी सुमन देवी इसकी पुष्टि करते हुए हां में जवाब देती हैं।
परिजनों ने लगाया राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप
भरत तिवारी की भाभी का आरोप है कि मुलाकात के दौरान प्रशांत किशोर ने 15 दिनों के अंदर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में बांकीपुर उपचुनाव में पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने का आग्रह किया गया। परिवार का कहना है कि न्याय दिलाने का भरोसा देकर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की गई है।
बीजेपी का जन सुराज पर हमला
इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने जन सुराज पर जोरदार हमला बोला है। बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की है और उन्हें पूरी तरह न्याय का भरोसा दिलाया है।
शिक्षा मंत्रालय में बड़ा बदलाव! प्रल्हाद जोशी ने संभाला कार्यभार
26 Jul, 2026 03:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: NEET पर्चा लीक प्रकरण को लेकर विद्यार्थियों के भारी विरोध के बीच धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद रविवार को प्रल्हाद जोशी ने नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पदभार ग्रहण कर लिया। कर्नाटक की धारवाड़ संसदीय सीट से लगातार पांचवीं बार सांसद चुने गए वरिष्ठ भाजपा नेता प्रल्हाद जोशी इससे पहले भी केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की कमान संभाल चुके हैं।
अनुभवी प्रशासनिक यात्रा और प्रशासनिक दक्षता
प्रल्हाद जोशी का राजनीतिक और प्रशासनिक करियर काफी समृद्ध रहा है। वे मोदी सरकार के विभिन्न कार्यकालों के दौरान कई अहम जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर चुके हैं। वर्ष 2019 से 2024 के कार्यकाल में उन्होंने संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्री के रूप में कार्य किया। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
महत्वपूर्ण योजनाओं का सफल संचालन
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान प्रल्हाद जोशी ने देश के हरित ऊर्जा तंत्र को मजबूत करने में मुख्य भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में 'राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन', 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' और 'पीएम-कुसुम' जैसी कई महत्वाकांक्षी सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारा गया। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता का तेजी से विस्तार करना और देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना रहा है।
'न कर्फ्यू-न दंगा, सब चंगा', योगी के बयान से मैनपुरी की सियासत गरमाई
26 Jul, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मैनपुरी: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को मैनपुरी में 682 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने मंच से 19 लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं के प्रमाण पत्र और लाभ भी सौंपे। अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की इस ऐतिहासिक और पौराणिक धरा पर आने का सौभाग्य उन्हें मिला है और वे इस पवित्र भूमि को नमन करते हैं। सीएम योगी ने बताया कि वे मैनपुरी और करहल क्षेत्र की जनता के लिए 111 विकास परियोजनाओं का बड़ा उपहार लेकर आए हैं।
विकास कार्यों की पैरोकारी और क्षेत्र को मिली सौगात
मुख्यमंत्री ने स्थानीय नेता अनुजेश यादव का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि वे करहल और मैनपुरी के विकास कार्यों की पैरवी के लिए लगातार उनसे मिलते रहते हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज इस क्षेत्र को सैकड़ों करोड़ रुपये की जनकल्याणकारी और बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाओं की सौगात मिल पा रही है।
मैनपुरी की बदली छवि पर सीएम का प्रहार
पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि एक समय था जब लोग मैनपुरी का नाम लेने से भी घबराते थे। यहां के नौजवान जब दूसरे जिलों या राज्यों में जाते थे, तो उन्हें होटलों में कमरे तक नहीं मिलते थे। उन्होंने कहा कि मैनपुरी के सामने पहचान का यह संकट उन्हीं लोगों ने खड़ा किया था जिन्होंने बेटियों की सुरक्षा को खतरे में डाला और कानून-व्यवस्था को बदहाल किया। सीएम ने स्पष्ट किया कि आज स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं; मैनपुरी का तेजी से विकास हो रहा है और अब यहां के व्यापारी और युवा देश में जहां भी जाते हैं, उन्हें पूरा सम्मान मिलता है।
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