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शिवमोग्गा जेल में छापे के दौरान कैदी ने निगल लिया मोबाइल, सर्जरी कर निकाला गया
13 Jul, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शिवमोग्गा। शिवमोग्गा केंद्रीय कारागार में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें छापेमारी के दौरान एक कैदी ने मोबाइल फोन निगल लिया। इस घटना ने जेल परिसर की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।जानकारी के अनुसार, जेल में अचानक हुई छापेमारी के दौरान दौलत उर्फ गुंडू (30 वर्ष) नामक एक कैदी, जो एक आपराधिक मामले में 10 साल की सजा काट रहा है, ने मोबाइल फोन को छिपाने के इरादे से उसे निगल लिया। इसके बाद उसने पेट में तेज दर्द की शिकायत की, जिसे गंभीरता से लेते हुए जेल प्रशासन ने उसे 24 जून को मैकगैन सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया।
एक्स-रे में खुलासा, ऑपरेशन कर निकाला गया मोबाइल
अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा किए गए एक्स-रे में साफ दिखाई दिया कि उसके पेट में मोबाइल फोन फंसा हुआ है। दो दिन बाद, 26 जून को सर्जनों ने सर्जरी कर सफलतापूर्वक फोन निकाल लिया। डॉक्टरों ने बताया कि निगला गया डिवाइस ‘केचाओडा’ ब्रांड का मोबाइल फोन था।
सुरक्षा में चूक या मिलीभगत?
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि कैदी ने पुलिस छापेमारी के दौरान पकड़े जाने के डर से मोबाइल निगल लिया था। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कड़ी निगरानी के बावजूद मोबाइल फोन जैसे प्रतिबंधित वस्तुएं जेल के भीतर कैसे पहुंच रही हैं? सूत्रों के अनुसार, कुछ जेल कर्मचारियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है। जेल अधीक्षक रंगनाथ पी. ने इस संबंध में तुंगानगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है और अब इस मामले की जांच पुलिस के साथ-साथ जेल विभाग द्वारा भी की जा रही है। हालांकि यह घटना 24 जून की है, लेकिन अब सार्वजनिक होने के बाद शिवमोग्गा सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लग रहे हैं।
क्या भारत पर परमाणु हमला करने वाला था पाकिस्तान? शहबाज शरीफ ने तोड़ी चुप्पी
13 Jul, 2025 02:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Operation Sindoor: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के साथ हालिया सैन्य टकराव के दौरान परमाणु युद्ध की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया। इस्लामाबाद में छात्रों को संबोधित करते हुए शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम किसी हमले के लिए नहीं बल्कि देश की सुरक्षा और आत्मरक्षा के लिए है। शरीफ ने कहा, हमारा परमाणु कार्यक्रम देश की सुरक्षा के लिए है, न कि आक्रामकता के लिए। इसे हमले का जरिया समझना गलत है।
4 दिन के सैन्य तनाव का किया जिक्र
शरीफ ने चार दिनों तक चले हालिया सैन्य तनाव का भी जिक्र किया और दावा किया कि भारतीय हमलों में 55 पाकिस्तानी नागरिकों की मौत हुई। हालांकि, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने इसका पूरी ताकत से जवाब दिया और अपनी संप्रभुता की रक्षा की।
भारत ने किया था 'ऑपरेशन सिंदूर'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत बड़ी सैन्य कार्रवाई की थी। उस आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत हुई थी, जिसकी जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी।
भारत ने नौ आतंकी ठिकानों को किया ध्वस्त
7 मई को भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें जैश-ए-मोहम्मद का गढ़ बहावलपुर और कई अन्य ठिकाने शामिल थे। इसके बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ गया था।
सेना प्रमुख आसिम मुनीर को राष्ट्रपति बनाने की अटकलों पर भी जवाब
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन खबरों को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को हटाकर सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को राष्ट्रपति बनाए जाने की योजना है।
शरीफ ने पाकिस्तानी अखबार The News से बातचीत में कहा, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने कभी राष्ट्रपति बनने की इच्छा व्यक्त नहीं की है और न ही ऐसी कोई योजना है। ये सिर्फ अटकलें हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके, राष्ट्रपति जरदारी और सेना प्रमुख मुनीर के बीच संबंध सम्मान और भरोसे पर आधारित हैं और कोई राजनीतिक संकट नहीं है।
दुष्प्रचार के पीछे विदेशी हाथ: गृह मंत्री नकवी
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोसिन नकवी ने भी सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा कि इस तरह की अफवाहें विदेशी दुश्मन एजेंसियों द्वारा फैलाई जा रही हैं। नकवी ने लिखा, जो लोग इस झूठे नैरेटिव को हवा दे रहे हैं, वे विदेशी दुश्मन एजेंसियों के साथ मिलकर पाकिस्तान को अस्थिर करना चाहते हैं। लेकिन हम पाकिस्तान को मजबूत करने के लिए जरूरी कदम उठाते रहेंगे।
गौरतलब है कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को 2022 में पाकिस्तान का सेना प्रमुख नियुक्त किया गया था और उनका कार्यकाल तीन साल से बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया है। वर्तमान में पाकिस्तान में बढ़ते आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता के बीच ऐसी अफवाहें तेजी से फैल रही थीं, जिन्हें शहबाज शरीफ ने अब सिरे से खारिज कर दिया है।
फ्रांस में एलन मस्क के एक्स की कथित डेटा छेड़छाड़ और धोखाधड़ी की जांच
13 Jul, 2025 01:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पेरिस। फ्रांसीसी अभियोजकों ने अरबपति कारोबारी एलन मस्क के सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) से संबंधित कथित डेटा छेड़छाड़ और धोखाधड़ी की पुलिस जांच शुरू कर दी है। पेरिस अभियोजक कार्यालय ने बयान में जांच शुरू करने की जानकारी दी, जिसमें दो कथित अपराधों की जांच की जा रही है। जांच में मंच और इसमें शामिल लोग दोनों शामिल हैं, हालांकि किसी का नाम नहीं लिया गया है।
पेटागन ने माना, ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल अल-उदीद मिलिट्री एयरबेस पर गिरी, नुकसान ना के बराबर
13 Jul, 2025 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि 22 जून को ईरान की एक बैलिस्टिक मिसाइल कतर में स्थित उसके अल-उदीद मिलिट्री एयरबेस पर गिरी थी। पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पर्नेल ने बताया कि ईरानी मिसाइल हमले में बेस पर मौजूद उपकरणों और ढांचे को हल्का नुकसान हुआ है। हालांकि, एयरबेस पूरी तरह चालू है और अमेरिका अपने कतरी सहयोगियों के साथ मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा अभियानों को जारी रखे हुए है। यह हमला ईरान द्वारा अपने परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों के प्रतिशोध में किया गया था। ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने भी हमले की पुष्टि कर कहा था कि उसने कतर में अमेरिकी बेस पर जवाबी मिसाइल हमला किया। कुल 6 मिसाइलें दागी गई थीं।
यह खुलासा जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों के बाद हुआ, जिसमें अमेरिकी एयरबेस पर हमले का असर साफ दिख रहा था। तस्वीरों के मुताबिक, 23 जून की सुबह एयरबेस पर एक जियोडेसिक डोम मौजूद था, जो हमले के बाद पूरी तरह नष्ट हो चुका था। यह डोम एक सैटेलाइट कम्युनिकेशन टर्मिनल को ढंकता था, इस 2015 में 15 मिलियन डालर की लागत से तैयार किया गया था। इसके अंदर एक सैटेलाइट डिश लगी हुई थी, जो अमेरिकी वायुसेना की 379वीं वायु अभियान शाखा के लिए कम्युनिकेशन सिस्टम का हिस्सा थी। हमले के बाद की तस्वीरों में यह डोम गायब दिखा और पास की एक इमारत को भी नुकसान हुआ था। हालांकि, एयरबेस का बाकी हिस्सा काफी हद तक सुरक्षित दिखा।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 22 जून को ही अमेरिका ने ईरान के 3 परमाणु ठिकानों फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर 7 बी-2 बॉम्बर से हमला किया था। ईरानी परमाणु ठिकानों पर मिसाइल गिराने के लगभग 13 घंटे बाद, अमेरिकी रक्षा मंत्री और जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ जनरल डैन केन ने ऑपरेशन मिडनाइट-हैमर नाम के अभियान की जानकारी दी, जिसमें 125 से ज़्यादा जेट शामिल थे। अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के परमाणु ठिकानों की सैटेलाइट तस्वीरें भी सामने आई थीं।
सहकर्मी को धोखे से पिलाया ट्रुथ सीरम, आरोपी ली को तीन साल, तीन माह की सजा
13 Jul, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीन के शंघाई शहर का मामला है, जहाँ ली नाम के एक व्यक्ति को अपने सहकर्मी वांग को धोखे से ट्रुथ सीरम पिलाने के आरोप में तीन साल और तीन महीने जेल की सज़ा सुनाई है और उस पर 10,000 युआन (करीब 1,400 अमेरिकी डॉलर) का जुर्माना भी लगा है।
पूरा मामला क्या है?
शंघाई के ली ने एक सड़क किनारे विक्रेता से ट्रुथ सीरम खरीदा था, जिसके बारे में विक्रेता ने दावा किया था कि यह लोगों को सच बोलने पर मजबूर कर देगा। ली ने सीरम का उपयोग अपने सहकर्मी और दोस्त वांग के वर्क प्लान को जानने के लिए किया, क्योंकि वांग हमेशा उससे आगे रहता था। ली ने 29 अगस्त, 2022 को ज़ुहुई जिले में डिनर के दौरान पहली बार चुपके से वांग के ड्रिंक में ट्रुथ सीरम मिलाया। इसके परिणामस्वरूप, वांग को चक्कर आने लगे और उसकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके लिए वांग को 30 और 31 अगस्त को मेडिकल सहायता लेनी पड़ी। इसके बाद 13 अक्टूबर, 2022 को यांग्पू जिले में एक और डिनर में ली ने फिर से वहीं हरकत की। जिससे वांग को फिर से चक्कर और उल्टी होने लगी।
लेकिन तीसरी और अंतिम घटना 6 नवंबर, 2022 को हुई। जब वांग कुछ देर के लिए कहीं और देख रहा था, ली ने फिर से उसके ड्रिंक में ट्रुथ सीरम मिलाया। इस बार वांग को तुरंत चक्कर आने लगा और वह बेहोश हो गया, जिसके बाद उसे अगले दिन अस्पताल जाना पड़ा। इस तीसरी घटना के बाद ही वांग को शक हुआ और पिछली दो घटनाओं के समान लक्षण याद आए।
मेडिकल जांच के बाद, वांग के यूरीन और बाल के नमूनों में क्लोनाजेपम और जाइलोजिन नाम के दो साइकोट्रोपिक ड्रग्स मिले। ये ड्रग्स केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। क्लोनाजेपम को राष्ट्रीय नियमों के तहत द्वितीय श्रेणी की साइकोट्रोपिक ड्रग्स के रूप में वर्गीकृत किया गया है। जांच से पता चला कि ली द्वारा दिए गए ट्रुथ सीरम में वास्तव में ये दोनों ड्रग्स मौजूद थे। ली ने वांग को ट्रुथ सीरम देने के तीनों मामलों में अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
हाल ही में, शंघाई जिंगान जिला पीपुल्स कोर्ट ने ली को धोखे से नशीली दवा देने के आरोप में दोषी पाकर तीन साल और तीन महीने की जेल की सजा सुनाई गई, साथ ही 10,000 युआन का जुर्माना लगाया गया।
ईरान ने 16 दिन में 5 लाख अफगानियों को निकाला
13 Jul, 2025 10:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान ने महज 16 दिनों में 5 लाख से ज्यादा अफगान नागरिकों को देश से बाहर निकाल दिया है। यह कार्रवाई 24 जून से 9 जुलाई के बीच हुई है। यानी हर दिन औसतन 30,000 से ज्यादा अफगानों को देश से निकाला गया। संयुक्त राष्ट्र ने इसे दशक की सबसे बड़ी जबरन निकासी में से एक करार दिया है। ईरान इजराइल के साथ तनावपूर्ण संघर्ष के बाद आंतरिक सुरक्षा का हवाला देकर प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है।
ईरान ने मार्च 2025 में ऐलान किया था कि अवैध रूप से रह रहे अफगान प्रवासी 6 जुलाई तक देश छोड़ दें, वरना उन्हें जबरन निकाला जाएगा। जून में ईरान और इजराइल के बीच 12 दिन चले सैन्य संघर्ष के बाद यह अभियान और तेज हो गया। ईरान और पाकिस्तान से मिलाकर 2025 में अब तक 16 लाख अफगान वापस भेजे गए हैं। संयुक्त राष्ट्र को आशंका है कि यह आंकड़ा साल के अंत तक 30 लाख तक जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र अफगानिस्तान प्रतिनिधि आराफात जमाल के मुताबिक, अफगानिस्तान इतने बड़े पलायन को संभालने के लिए तैयार नहीं है। न रहने की जगह है, न रोजगार है, न सुरक्षा।
भूखा रखा गया, पीटा गया, लूटा गया
ईरान से निर्वासित हुए एक अफगान शरणार्थी बशीर ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि अधिकारियों ने उससे 17 हजार रुपए मांगे। फिर दो दिन डिटेंशन सेंटर में रखा। इस दौरान न खाना दिया गया और न ही पानी। बशीर के मुताबिक अधिकारी उसे गालियां देते थे। एक दूसरे युवक ने बताया कि उसके पिता को जासूसी के आरोप में पकडक़र बेडिय़ों में बांधा गया। उन्हें खाना-पानी नहीं दिया गया और बाद में डिटेन करके अफगानिस्तान भेज दिया। एक अफगान महिला ने बताया कि, ईरानी अधिकारी रात में आए। उन्होंने बच्चों के कपड़े तक नहीं लेने दिए। हमें कूड़े की तरह फेंक दिया। रास्ते में बैंक कार्ड से पैसे निकाल लिए। पानी की बोतल के 80 रुपए और सैंडविच के 170 रूपए वसूले। ईरान से निकाले गए लोगों में सैकड़ों नाबालिग बच्चे हैं, जिनमें कई अनाथ और अकेले हैं।
AI टैलेंट वरुण मोहन ने बदला गेम, गूगल और ओपनएआई में छिड़ी होड़
12 Jul, 2025 05:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। AI की दुनिया में हलचल मचाने वाले एक नाम ने आज गूगल और ओपनएआई जैसी टेक दिग्गजों को आमने-सामने ला खड़ा किया है — यह नाम है वरुण मोहन, जो Windsurf कंपनी के सह-संस्थापक और पूर्व सीईओ रहे हैं। उनकी कंपनी की टीम को हाल ही में Google DeepMind ने अपने साथ जोड़ लिया, जिससे ओपनएआई और गूगल के बीच AI टैलेंट को लेकर प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है।
कौन हैं वरुण मोहन?
वरुण मोहन, कैलिफोर्निया के Sunnyvale में भारतीय प्रवासी माता-पिता के घर जन्मे और पले-बढ़े। उन्होंने प्रतिष्ठित Harker School से पढ़ाई की और गणित व कंप्यूटर ओलंपियाड में अव्वल रहे। बाद में उन्होंने MIT से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस में स्नातक और मास्टर डिग्री हासिल की। उनकी विशेषज्ञता ऑपरेटिंग सिस्टम, एल्गोरिद्म, डिस्ट्रीब्यूटेड सिस्टम, मशीन लर्निंग और परफॉर्मेंस इंजीनियरिंग में है।
Windsurf की कहानी
2021 में वरुण ने MIT के अपने मित्र डगलस चेन के साथ मिलकर Codeium की शुरुआत की, जिसे बाद में Windsurf नाम मिला। शुरुआत में कंपनी GPU वर्चुअलाइजेशन पर काम कर रही थी, लेकिन बाद में यह AI-सक्षम IDE और डेवलपर टूल्स बनाने में जुट गई।
लॉन्च के चार महीनों के भीतर Windsurf ने 10 लाख से ज्यादा डेवलपर्स को अपनी ओर आकर्षित किया और $243 मिलियन (लगभग ₹2,000 करोड़) की फंडिंग के साथ कंपनी की वैल्यूएशन $1.25 बिलियन पहुंच गई।
Google vs OpenAI: टैलेंट की जंग
OpenAI, Windsurf को $3 बिलियन में खरीदने की योजना बना रहा था, वहीं Google ने $2.4 बिलियन में Windsurf की तकनीक का नॉन-एक्सक्लूसिव लाइसेंस हासिल किया और पूरी कोर टीम को DeepMind में शामिल कर लिया। DeepMind के CEO Demis Hassabis ने इस टीम का गर्मजोशी से स्वागत किया।
ट्रंप की टैरिफ नीति पर अड़े अमेरिका, देशों को दी सख्त सलाह
12 Jul, 2025 04:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टैरिफ वॉर के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार वार्ता में शामिल देशों को सलाह दी है। ट्रंप ने कहा कि सभी देश टैरिफ की एक अगस्त की समयसीमा से पहले वार्ता के लिए कड़ी मेहनत करते रहें। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से अमेरिका का दोस्त और दुश्मन दोनों देशों ने खूब फायदा उठाया है। दक्षिण कोरिया, जापान समेत कई देश एक अगस्त से लागू होने वाले ट्रंप के जवाबी टैरिफ से बचने के लिए अमेरिका से समझौता करने का प्रयास कर रहे हैं।
बाढ़ प्रभावित टेक्सास के दौरे में रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा कि मुझे लगता है कि बस कड़ी मेहनत करते रहिए। कई वर्षों से मित्र और शत्रु दोनों ही देशों ने हमारा फायदा उठाया है। सच कहूं तो कई मामलों में मित्र, शत्रुओं से भी बदतर रहे हैं। इसलिए मैं कहूंगा, बस काम करते रहो। सब ठीक हो जाएगा।
ट्रंप ने हाल के दिनों में ट्रेड युद्ध का दायरा बढ़ाते हुए कई देशों पर नए टैरिफ लगाए हैं। कनाडा के अलावा, ट्रंप ने हाल ही में जापान और दक्षिण कोरिया पर भी नए टैरिफ लगाए हैं। इसके साथ ही आयातित तांबे पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। गुरुवार को एक साक्षात्कार में ट्रंप ने संकेत दिया कि जल्द ही दूसरे देशों को भी 15 से 20 प्रतिशत तक के व्यापक टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका ने दक्षिण कोरिया को लिखा पत्र
टैरिफ को लेकर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग को ट्रंप ने पत्र लिखा था। इसमें कहा गया कि अमेरिका एक अगस्त से दक्षिण कोरियाई उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाना शुरू करेगा। इस बीच दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका ने सियोल में वार्ता की। इसमें द्विपक्षीय गठबंधन को लाभकारी, आधुनिक, भविष्योन्मुख और व्यापक रणनीतिक" गठबंधन के रूप में मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की गई।
कनाडा पर भी लगाया था टैरिफ
इससे पहले गुरुवार (10 जुलाई) को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को एक पत्र लिखकर नई टैरिफ दरों की जानकारी दी थी। ट्रंप ने घोषणा की है कि 1 अगस्त से कनाडा से होने वाले सभी आयातों पर 35 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। उन्होंने इसे कनाडा की ओर से फेंटेनाइल ड्रग की सप्लाई कम करने में नाकामी का नतीजा बताया है।
एलन मस्क की मुश्किलें बढ़ीं, पाकिस्तान में स्टारलिंक को मिलेगा लाइसेंस?
12 Jul, 2025 04:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान : पाकिस्तान में सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा की शुरुआत लगातार टल रही है। इसकी बड़ी वजह यह है कि सरकार अब इस क्षेत्र में विदेशी कंपनियों के लिए कड़े नियम बना रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, स्टारलिंक जैसी कंपनियों के लिए नए दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि ज्यादा देरी से मस्क की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. हालांकि सख्त दिशानिर्देशों को लागू करने से पहले सरकार और अंतरिक्ष क्षेत्र की संस्थाएं कंपनियों से सुझाव भी ले रही हैं।
मीडिया के मुताबिक, हाल के भारत-पाकिस्तान और ईरान-इस्राइल विवादों के बाद पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान सैटेलाइट कम्युनिकेशन पर गया है। इसके बाद अब पाकिस्तान स्पेस एक्टिविटीज रेगुलेटरी बोर्ड सैटेलाइट इंटरनेट से जुड़ी कंपनियों के लिए कड़े सुरक्षा नियम ला रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यदि हाल के युद्ध न होते तो शायद इन सुरक्षा पहलुओं पर गौर नहीं किया जाता।
नए नियमों में सुरक्षा और लाइसेंसिंग प्रमुख
स्टारलिंक पाकिस्तान में काम करने के लिए मार्च में मिला अस्थायी एनओसी समाप्त हो चुका है। अब सभी विदेशी सैटेलाइट ऑपरेटरों को नए बनाए गए 'सैटेलाइट कम्युनिकेशन रेगुलेशंस' के तहत फिर से आवेदन करना होगा। इन कंपनियों को पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी (पीटीए) से ऑपरेशनल लाइसेंस भी लेना होगा।
स्टारलिंक के साथ दो और कंपनियां लाइन में
स्टारलिंक के अलावा दो और कंपनियां, वनवेब और शंघाई स्थित शंघाई स्पेसकॉम सैटेलाइट टेक्नोलॉजी भी पाकिस्तान में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करना चाहती हैं। ये तीनों कंपनियां लो अर्थ ऑर्बिट (लिओ) सैटेलाइट आधारित सेवाएं देती हैं, जो दूर-दराज के क्षेत्रों में भी तेज इंटरनेट पहुंचा सकती हैं। इससे पाकिस्तान के ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों को फायदा हो सकता है।
एलन मस्क लॉन्च में हो सकते हैं शामिल
सूत्रों के मुताबिक, स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क भी पाकिस्तान में स्टारलिंक की लॉन्चिंग के कार्यक्रम में हिस्सा ले सकते हैं। स्टारलिंक ने पाकिस्तान में सेवाएं शुरू करने के लिए सबसे पहले औपचारिक आवेदन दिया था। हालांकि, स्पष्ट नियमन के अभाव में इसकी मंजूरी में देरी हो रही है।
वर्ष के अंत तक सेवाएं शुरू होने की उम्मीद
पीटीए के एक अधिकारी ने बताया कि स्टालिंक समेत अन्य कंपनियां इस साल के अंत तक पाकिस्तान में अपनी सेवाएं शुरू कर सकती हैं। इसके लिए उन्हें सभी नए नियमों का पालन करते हुए लाइसेंस लेना होगा। पाकिस्तान सरकार को उम्मीद है कि नए नियमों से देश की डिजिटल सुरक्षा मजबूत होगी और एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी तैयार होगी। इस पूरी प्रक्रिया के बाद पाकिस्तान उन गिने-चुने देशों में शामिल हो सकता है, जो अपनी सीमाओं में विदेशी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को विनियमित करने के लिए स्पष्ट और सख्त नियम लागू कर रहे हैं।
जब पूरी दुनिया कर रही विरोध, म्यांमार जनरल ने कहा- शुक्रिया ट्रंप!
12 Jul, 2025 01:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जब पूरी दुनिया अमेरिकी टैरिफ की मार से परेशान है, म्यांमार का सैन्य शासक मिन आंग ह्लाइंग इसे सम्मान बताकर खुशियां मना रहे हैं. ट्रंप की ओर से मिले एक औपचारिक लेटर को म्यांमार की तानाशाही सरकार ने ऐसे पेश किया जैसे उन्हें वैश्विक मान्यता मिल गई हो.
दरअसल, अमेरिका ने म्यांमार के उत्पादों पर 40 फीसदी का नया टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो 1 अगस्त से लागू होगा. ये वही म्यांमार है जिसे अमेरिका और यूरोप अब तक आधिकारिक सरकार नहीं मानते और जिस पर तमाम प्रतिबंध लगाए गए हैं. लेकिन जनरल ह्लाइंग को इस टैरिफ में नुकसान नहीं, एक अवसर नजर आ रहा है.
कौन है जनरल ह्लाइंग
जनरल ह्लाइंग वही नेता हैं जिन पर रोहिंग्या नरसंहार का आरोप है और जिन्होंने नोबेल विजेता आंग सान सूची की लोकतांत्रिक सरकार को 2021 में तख्तापलट कर गिरा दिया. सू ची अब बंद दरवाजों के पीछे हुई सुनवाई के बाद 27 साल की सजा काट रही हैं.
चिट्ठी को बताया आमंत्रण, मिलने की जताई इच्छा
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप का ये पत्र न सिर्फ ईमानदारी से सराहा गया, बल्कि जनरल ने इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भागीदारी का संकेत बताया. उन्होंने अमेरिका को बातचीत के लिए एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की पेशकश भी कर डाली. ह्लाइंग ने यहां तक कहा कि अमेरिका को म्यांमार पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने पर विचार करना चाहिए क्योंकि ये दोनों देशों के साझा हितों और समृद्धि में बाधा डालते हैं.
ट्रंप की तारीफ, लोकतंत्र पर हमला
चिट्ठी की आड़ में जनरल ह्लाइंग ने ट्रंप की जमकर तारीफ भी की. उन्होंने ट्रंप को सच्चा राष्ट्रभक्त बताया और उनके वैश्विक शांति के प्रयासों की सराहना की. यही नहीं, उन्होंने ट्रंप की उस शिकायत को भी दोहराया जिसमें ट्रंप ने 2020 के अमेरिकी चुनाव में धांधली का आरोप लगाया था.
ह्लाइंग ने कहा कि जैसे ट्रंप को चुनाव में गड़बड़ी का सामना करना पड़ा, म्यांमार में भी कुछ ऐसा ही हुआ. जबकि सच्चाई ये है कि म्यांमार में 2020 का चुनाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निष्पक्ष और स्वतंत्र माना गया था. लेकिन सेना ने धोखाधड़ी का बहाना बनाकर सत्ता पर कब्जा कर लिया.
सीजफायर के बाद ईरान का अफगानों पर एक्शन, हजारों शरणार्थी बाहर निकाले गए
12 Jul, 2025 12:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इजराइल और ईरान के बीच हालिया संघर्ष खत्म होने के कुछ ही दिन बाद ईरान में अफगान नागरिकों पर कार्रवाई तेज हो गई है. महज 16 दिनों में 5 लाख से ज्यादा अफगानों को ईरान से बाहर निकाल दिया गया है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, ये दशक के सबसे बड़े जबरन विस्थापन में से एक माना जा रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक 24 जून से 9 जुलाई के बीच 5 लाख 8 हजार से ज्यादा अफगान नागरिकों ने ईरान-अफगानिस्तान बॉर्डर पार किया है. एक दिन में 51,000 लोगों को बाहर किया गया, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. ईरान ने बीते रविवार तक का अल्टीमेटम दिया था कि बिना कागजों वाले सभी अफगान नागरिक देश छोड़ दें.
लंबे समय से थी तैयारी, अब मिला मौका?
ईरान लंबे समय से ये संकेत देता रहा है कि वो देश में रह रहे अवैध अफगान प्रवासियों को निकालना चाहता है. इन अफगानों में बड़ी संख्या उन लोगों की है जो बेहद कम वेतन में ईरान के शहरों में मजदूरी करते हैं. तेहरान, मशहद और इस्फहान जैसे शहरों में ये मजदूर निर्माण, सफाई और खेतों में काम करते हैं. लेकिन इजराइल के साथ 12 दिन की जंग खत्म होते ही अफगानों पर कार्रवाई अचानक तेज हो गई.
आरोप- अफगान कर रहे थे इजराइल के लिए जासूसी
ईरान की ओर से कहा जा रहा है कि कुछ अफगान नागरिक इजराइल के लिए जासूसी कर रहे थे, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से ये जरूरी है. वहीं ईरानी मीडिया में ऐसा ही दावा किया जा रहा है. एक कथित वीडियो भी दिखाया गया जिसमें एक अफगान युवक 2000 डॉलर के बदले जर्मनी में बैठे किसी हैंडलर को लोकेशन की जानकारी देने की बात कबूल कर रहा है. हालांकि इस वीडियो की पुष्टि नहीं हुई है और आरोप भी सबूतों के बगैर ही हैं.
आलोचना के घेरे में ईरान
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ईरान इन जासूसी के आरोपों को बहाना बनाकर लंबे समय से पलायन की योजना पर काम कर रहा था. अब उस पर अमल शुरू हो चुका है. आलोचकों का कहना है कि सरकार ने आंतरिक असंतोष को दबाने के लिए अफगानों को निशाना बनाया है, जो पहले से ही एक कमजोर और शोषित समुदाय है.
अफगानिस्तान में हालात गंभीर
ईरान से निकाले गए अफगानों के लिए हालात आसान नहीं हैं. तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर है और बॉर्डर पर बनाए गए अस्थायी कैंप्स में सुविधाएं सीमित हैं. इस साल अब तक ईरान और पाकिस्तान से करीब 16 लाख अफगान अपने देश लौट चुके हैं. UNHCR का अनुमान है कि साल के अंत तक यह संख्या 30 लाख तक पहुंच सकती है. जानकारों की मानें तो बिना जांच-पड़ताल और कानूनी प्रक्रिया के इतने बड़े पैमाने पर पलायन, भविष्य में और संकट खड़ा कर सकता है.
तिराह घाटी में धमाका, क्वाडकॉप्टर से बम छोड़ते हुए TTP आतंकी मारा गया
12 Jul, 2025 12:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान के तहरीक-ए-तालिबान (TTP) के एक आतंकवादी कमांडर की हाल ही में मौत हो गई. आतंकवादी की यह मौत तब हुई जब वो बम संभाल रहा था और तभी बम फट गया. सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में क्वाडकॉप्टर लॉन्च करने की कोशिश करते समय, जब आतंकवादी बम संभाल रहा था, तभी उसमें विस्फोट हो गया, तभी टीटीपी के आतंकवादी कमांडर की मौत हो गई.
जिस आतंकवादी की मौत हुई उसका नाम कमांडर यासीन उर्फ अब्दुल्ला था. आतंकवादी अब्दुल्ला की मौत उस समय हुई जब वो अफगानिस्तान की सीमा से लगे खैबर जिले की तिराह घाटी में क्वाडकॉप्टर चलाने की कोशिश कर रहा था, तभी एक बम विस्फोट हो गया.
TTP कमांडर की कैसे हुई मौत
सूत्रों के मुताबिक, कमांडर अब्दुल्ला के दो और साथी बम विस्फोट में बुरी तरह घायल हो गए हैं. उन्होंने बताया कि यासीन और उसका ग्रुप 24 मई को औपचारिक रूप से प्रतिबंधित टीटीपी में शामिल हो गया था. यासीन तिराह क्षेत्र में ग्रुप के अभियानों का नेतृत्व कर रहा था – जो सुरक्षा बलों और टीटीपी, लश्कर-ए-इस्लाम और अंसार-उल-इस्लाम जैसे आतंकवादी गुटों के बीच संघर्ष का केंद्र है.
तिराह घाटी में बढ़ रहा आतंकवाद
इस क्षेत्र में आतंकवाद-रोधी अभियान तेज हो गए हैं, पिछले महीने ही 22 आतंकवादियों को मार गिराया गया है. तिराह घाटी एक ऐसा क्षेत्र है जहां बार-बार हमले हुए हैं, जिनमें नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए आईईडी विस्फोट और आतंकवादी समूहों के बीच ही झड़पें शामिल हैं.
पाकिस्तानी सेना इस क्षेत्र को आतंकवाद मुक्त बनाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है. सेना ने तिराह में खुफिया जानकारी के आधार पर अभियान जारी रखा और आतंकवादी ठिकानों और हथियारों के जखीरे को नष्ट किया जा रहा है.
क्या है टीटीपी?
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का एक आतंकवादी ग्रुप है. यह आतंकवादी ग्रुप साल 2007 में बना था. समूह का संस्थापक नेता बैतुल्लाह महसूद था. इसकी जड़ें अफगानिस्तान/पाकिस्तान सीमा पर हैं. कुछ अनुमान बताते हैं कि टीटीपी के 30,000 से 35,000 सदस्य हैं.
पुतिन ने तेज किए ड्रोन अटैक, यूरोप के दो देश उतरे यूक्रेन के समर्थन में
12 Jul, 2025 11:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूक्रेन के खात्मे के लिए पुतिन ने ऐसा प्लान बनाया है. जो जेलेंस्की के लिए बहुत बड़ी टेंशन बन गया है. कीव पर जीत के लिए पुतिन ने जो फॉर्मूला बनाया है. अगर वो कामयाब रहा तो कुछ हफ्तों में ही यूक्रेन सरेंडर कर सकता है. पुतिन ने यूक्रेन पर हर दिन एक हजार ड्रोन से हमलों का प्लान रेडी किया है. पिछले 72 घंटों से यूक्रेन पर रूस ड्रोन से भीषण हमले भी कर रहा है. रूस के नए हमलों में कीव से लेकर खारकीव तक भारी तबाही हुई है. रूस के हमलों में तेजी को देखते हुए लंदन में उन देशों की बैठक हुई है जो यूक्रेन को समर्थन कर रहे हैं, इनमें ब्रिटेन और फ्रांस ने यूक्रेन की रक्षा का संकल्प लिया है.
यूक्रेन के शहरों पर रूस 72 घंटे से लगातार बारूद बरसा रहा है. कीव से लेकर खारकीव तक रूस की ऐसी ड्रोन-वर्षा हो रही है कि यूक्रेन के शहरों में हर तरफ शोले उठते देखे जा रहे हैं.शुक्रवार को भी कीव, खारकीव, डोनेस्क, ओडेसा, मायकोलेव और निकोलेव में रूस ने विध्वंसक ड्रोन अटैक किए. यूक्रेन के शहरों में रूस के ये घातक हमले क्या पुतिन के उस प्लान का टेस्ट हैं, जिसके बारे में जेलेंस्की ने आशंका जताई थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक यूक्रेन पर ड्रोन प्रहार में रूस एक राउंड में करीब 800 ड्रोन हमले कर रहा है.रूस अब यूक्रेन पर हर दिन 1000 ड्रोन दागने की तैयारी में है.
धुएं से भर गया कीव का आसमान
पिछली रात भी कीव पर रूस ने ड्रोन से भीषण प्रहार किया, जिसके बाद शहर का आसमान आग की लपटों और धुएं से भर गया. यूक्रेन की राजधानी कीव को दहलाने के लिए रूस ने ड्रोन्स के साथ-साथ मिसाइल से भी हमले किए,जिसमें कम से कम दो लोगों की मौत की खबर है. ये हमला यूक्रेन पर अब तक के सबसे बड़े रूसी हवाई हमले के एक दिन बाद हुआ. रूस ने इससे पहले पिछले दो दिनों में यूक्रेन के शहरों पर 700 से ज्यादा कामकाजी ड्रोन से हमले किए थे. रूस ने यूक्रेन के शहरों पर मिसाइलों से भी कहर बरपाया था. इन हमलों में कीव के अलावा यूक्रेन के 10 और शहरों को निशाना बनाया गया था. इन हमलों के अभी 48 घंटे भी नहीं बीते थे तब तक रूस ने कीव से लेकर खारकीव तक ड्रोन हमलों की रफ्तार बढ़ा दी.
खारकीव में मेडिकल सेंटर को बनाया निशाना
रूस ने खारकीव के मध्य क्षेत्र में शाहेद ड्रोन से हमला किया. खारकीव के स्थानीय प्रशासन के मुताबिक खारकीव में एक मेडिकल सेंटर को भी निशाना बनाया गया. खारकीव पर रूस के ड्रोन हमलों का खतरा अभी बरकरार है. खारकीव और और पूरे क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है. रूस अभी तक यूक्रेन के 54 ड्रोन ऑपरेशन सेंटर तबाह कर चुका है. यूक्रेन के 4 स्टारलिंक टर्मिनल स्टेशन भी नष्ट हो चुके हैं.
लंदन में हुई कोएलिशन ऑफ द विलिंग की बैठक
लंदन में हुई कोएलिशन ऑफ द विलिंग की बैठक हुई है. यानी उन देशों के समूह की बैठक जो यूक्रेन को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसी प्रतिबद्धता को निभाने के लिए दो बड़े फैसले किए गए हैं. पहला फैसला है यूक्रेन में यूरोप की सेना को उतारना, जबकि दूसर फैसला है, यूक्रेन को हथियारों से संपन्न बनाना. इस जंग में जो दो देश बड़ी भूमिका निभाएंगे वे ब्रिटेन और फ्रांस हैं. यही दो देश हैं, जो रूस के खिलाफ इस जंग में अब रूस के खिलाफ संयुक्त मोर्चे का नेतृत्व करेंगे.
क्या करेंगे फ्रांस और ब्रिटेन?
इस फैसले के तहत यूक्रेन में सहयोगी देशों के 50 हज़ार सैनिक तैनात होंगे. इनमें सबसे ज्यादा 10 हज़ार सैनिक ब्रिटेन के होंगे और बाकी यूरोपीय देशों की ब्रिगेड मिलाकर एक सैन्य कोर बनाई जाएगी. यही नहीं इस बैठक में हथियार हासिल करने के लिए यूक्रेन के रास्ते भी खोल दिए गए हैं. यानी ब्रिटेन और यूक्रेन ने एक रक्षा समझौता कर लिया है. जिसके तहत कीव की वायु रक्षा जरूरतों के लिए 5 हजार मिसाइलें ब्रिटेन देगा. ये सौदा 2.5 बिलियन पाउंड यानी 2 खरब 90 अरब रुपये से ज्यादा का है. इसके तहत 19 वर्षों तक यूक्रेन को मिसाइलों की आपूर्ति होती रहेगी. तो वहीं दूसरी तरफ फ्रांस ने उन्हीं घातक मिसाइलों का यूक्रेन के लिए 15 वर्ष बाद उत्पादन शुरू कर दिया है. इसके जरिए यूक्रेन ने रूस के अंदर तक प्रहार किए हैं.
फ्रांस बनाएगा स्टॉर्म शैडो मिसाइल
स्टॉर्म शैडो मिसाइल एक बार फिर यूक्रेन की ताकत बनने जा रही है. ये वही मिसाइल है, जिसे रूस और यूरोप के देश घातक स्कैल्प-EG मिसाइल के नाम से जानते हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि, स्टॉर्म शैडो एक क्रूज़ मिसाइल है. जो रूस के रडार की पकड़ से बाहर है. इसे और भी खास बनाता है, इसका एयर लॉन्च प्लेटफार्म और इस मिसाइल की खूबी ये भी है कि, स्टॉर्म शैडो मिसाइल किसी स्थिर टारगेट जैसे बुनियादी ढांचे को तबाह करने में सक्षम है. खूबी सिर्फ यही नहीं है, स्टॉर्म शैडो की विशेषता है इसकी बनावट है. इसका वजन 1,300 किलो ग्राम है, जबकि इसका 450 किलोग्राम का वॉरहेड और टारगेट को पूरी तरह से ध्वस्त कर सकता है. यही नहीं ये मिसाइल 500 किलोमीटर से भी ज्यादा ऑपरेटिव है.
राधिका हत्याकांड: पुलिस को चाहिए गोलियों का सुराग, आरोपी पिता से होगी कड़ी पूछताछ
11 Jul, 2025 07:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुरुग्राम: हरियाणा के गुरुग्राम में एक दिल दहला देने वाली घटना में 25 साल की टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की उनके पिता दीपक यादव ने गोली मारकर हत्या कर दी। इस मामले में शुक्रवार को गुरुग्राम की एक अदालत ने 49 साल के दीपक यादव को एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। पुलिस ने बताया कि राधिका टेनिस अकादमी की कमान संभालना चाहती थी और इसे लेकर ही पिता इतना नाराज हुआ कि गोलियां दाग दीं। राधिका की मां मंजू यादव ने इस घटना के कारणों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।
कहां से बरामद की जानी है गोलियां?
अदालत के बाहर एक पुलिस अधिकारी ने संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने आरोपी की दो दिन की हिरासत मांगी थी। उन्होंने कहा कि हमें उसकी लाइसेंसी रिवॉल्वर (अपराध में इस्तेमाल) की गोलियां बरामद करनी है। हमें यह भी सत्यापित करना है कि उसने कितनी गोलियां खरीदी थी। यह पूछे जाने पर कि गोलियां कहां से बरामद की जानी है? अधिकारी ने कहा कि रेवाड़ी के निकट कसाम गांव में आरोपी की जमीन है। हमें गोलियां वहीं से लानी है।
क्या है मामला?
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे गुरुग्राम में राज्य स्तरीय टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव (25) की बृहस्पतिवार को उसके पिता दीपक यादव (49) ने ही कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने बताया कि घटना गुरुग्राम के सुशांत लोक में स्थित दो मंजिला मकान में हुई। दीपक यादव को कड़ी सुरक्षा में अदालत में पेशी के लिए अदालत परिसर के निकट पुलिस वाहन से बाहर निकाला गया और उस वक्त उसने अपना सिर तौलिए से ढका हुआ था।
घटना के समय खिलाड़ी की मां क्या कर रही थी?
उसे मीडियाकर्मियों के एक समूह के सवालों का सामना करना पड़ा, जो जानना चाहते थे कि उसने अपनी बेटी की हत्या क्यों की। हालांकि, उसे तुरंत अदालत परिसर के अंदर ले जाया गया। सुनवाई के बाद जब वह अदालत से बाहर आया, तो तौलिया उतार दिया गया था। उससे फिर वही सवाल पूछा गया, और पुलिस उसे जल्दी से वाहन तक ले गई। पुलिस ने बताया कि वे हत्या के सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रहे हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि घटना के समय खिलाड़ी की मां क्या कर रही थी।
पिता-बेटी में क्यों हुआ विवाद?
पुलिस ने दावा किया कि राधिका की ओर से संचालित टेनिस अकादमी पिता और पुत्री के बीच विवाद का कारण थी। गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि दीपक ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है और बताया कि उसे अपनी बेटी की ओर से टेनिस अकादमी संचालित करने पर आपत्ति थी, जिसे लेकर दोनों के बीच कई बार झगड़ा भी हुआ था।
पुलिस का दावा
पुलिस ने दावा किया कि आरोपी को लगता था कि वह आर्थिक रूप से संपन्न है और किराये से भी आय होती है, इसलिए उसकी बेटी को अकादमी संचालित करने की कोई जरूरत नहीं है। प्रवक्ता ने कहा कि राधिका की गुरुग्राम में एक टेनिस अकादमी थी और उसके पिता इससे खुश नहीं थे। उसने कई बार राधिका को अकादमी को बंद करने को कहा था, लेकिन वह नहीं मानी। गुस्से में आकर उसने अपनी बेटी को तीन गोलियां मार दीं। (इनपुट एजेंसी)
नशे से रोका तो बन गया दुश्मन, छात्रों ने रची साजिश और कर दिया प्रिंसिपल का कत्ल
11 Jul, 2025 07:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा। हिसार के करतार मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल की गुरुवार को हुई हत्या के मामले में पुलिस ने चार नाबालिग छात्रों को गिरफ्तार किया है। हांसी के एसपी अमित यशवर्धन ने बताया कि इस जघन्य अपराध के पीछे प्रिंसिपल की अनुशासनात्मक सख्ती को रंजिश मानना मुख्य कारण था।
शरीर पर चाकू के तीन घाव पाए गए
एसपी के अनुसार, प्रिंसिपल को गंभीर हालत में एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में उनकी मृत्यु हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर चाकू के तीन घाव पाए गए। घटनास्थल से चार स्कूली छात्रों को भागते हुए देखा गया था।
चारों आरोपी स्कूल यूनिफॉर्म में देखे गए
पुलिस को शुक्रवार सुबह सूचना मिली कि चारों आरोपी मुंढाल बस अड्डे पर स्कूल यूनिफॉर्म में देखे गए। इसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने छापेमारी कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एसपी ने बताया कि चूंकि आरोपी नाबालिग हैं, इसलिए उनकी पहचान उजागर नहीं की जा रही है।
प्रिंसिपल छात्रों को अनुशासित करने के लिए डांटते थे
जांच में खुलासा हुआ कि प्रिंसिपल इन छात्रों को अनुशासित करने के लिए डांटते थे। वे उन्हें नशे से दूर रहने, छोटे बाल रखने और स्कूल में प्रतिबंधित वस्तुएं न लाने की सलाह देते थे। छात्रों ने प्रिंसिपल की इन आपत्तियों को रंजिश मानकर हत्या की साजिश रची।
छात्र सोशल मीडिया पर आपराधिक समूहों से प्रभावित
सीसीटीवी फुटेज में दो छात्र घटनास्थल से भागते दिखाई दिए, लेकिन आगे की जांच में पता चला कि इस अपराध में चार छात्र शामिल थे। दो छात्रों ने घटना को अंजाम दिया, जबकि अन्य दो ने हथियार उपलब्ध कराए। पुलिस ने बताया कि ये छात्र सोशल मीडिया पर आपराधिक समूहों से प्रभावित थे। उनकी उम्र 14 से 15 वर्ष के बीच है। पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में ले लिया है और मामले की गहन जांच जारी है। यह घटना स्कूलों में अनुशासन और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों पर सवाल उठाती है।
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