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अमेरिका में ‘डंकी रूट’ से प्रवेश करने वाले भारतीयों की संख्या में भारी कमी
26 Jul, 2026 11:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी सीमा सुरक्षा एजेंसी (यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन - सीपीबी) द्वारा जारी किए गए हालिया आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में अवैध तरीके से प्रवेश करने की कोशिश करने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या में पिछले तीन वर्षों के दौरान अभूतपूर्व कमी दर्ज की गई है। जारी आंकडों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 के पहले आठ महीनों (अक्टूबर 2023 से मई 2024 तक) में भारतीय नागरिकों से जुड़े कुल 20,614 मामले दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2023 की समान अवधि की तुलना में लगभग 69 प्रतिशत कम है, जब ऐसे मामलों की संख्या 67,212 तक पहुंच गई थी। यह गिरावट एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है, खासकर उन अवैध मार्गों पर जिन्हें डंकी रूट के नाम से जाना जाता है। इस गिरावट का सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर देखने को मिला है, जिसे कभी अवैध प्रवासियों के लिए एक प्रमुख और खतरनाक रास्ता माना जाता था। अक्टूबर 2023 से मई 2024 के बीच इस दक्षिणी सीमा पर भारतीयों से जुड़े सिर्फ 417 मामले दर्ज हुए, जो वित्त वर्ष 2023 में इसी अवधि के 30 हजार से अधिक मामलों के मुकाबले लगभग 99 प्रतिशत की चौंकाने वाली और ऐतिहासिक गिरावट है। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि इस मार्ग पर प्रवासियों को रोकने के प्रयासों में भारी सफलता मिली है।
अमेरिका-कनाडा सीमा पर भी भारतीयों के अवैध प्रवेश से जुड़े मामलों में भारी कमी आई है। मई 2024 तक यहां भारतीय नागरिकों से जुड़े 2,250 मामले दर्ज किए गए, जो वित्त वर्ष 2023 की समान अवधि की तुलना में लगभग 91 प्रतिशत कम हैं। अगर पूरे अमेरिका में भारतीय नागरिकों से जुड़े कुल अवैध प्रवेश मामलों की बात करें तो मई 2024 तक यह संख्या 20,614 रही, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह संख्या लगभग 29 हजार थी, और वित्त वर्ष 2023 में यह 67 हजार से अधिक पहुंच गई थी। इस भारी गिरावट की मुख्य वजहों पर विशेषज्ञों की राय है कि अमेरिका की सख्त होती आव्रजन (इमिग्रेशन) और शरण (असाइलम) नीतियों का सीधा असर दिखाई दे रहा है।
अमेरिका स्थित निस्केनन सेंटर के विशेषज्ञ गिल्बर्ट गुएरा का मानना है कि जब लोगों को यह महसूस होने लगता है कि अवैध रास्ते से अमेरिका पहुंचने पर कामयाबी की संभावना बेहद कम है, और पकड़े जाने पर न केवल तत्काल निर्वासन का सामना करना पड़ता है, बल्कि भविष्य में वैध प्रवेश के अवसर भी धूमिल हो जाते हैं, तो वे ऐसा जोखिम नहीं उठाते। इसके अलावा, भारत से अवैध तरीके से अमेरिका जाना बेहद खर्चीला होता है, जिसमें बड़ी रकम (अक्सर लाखों रुपये) खर्च होती है और फिर भी सफलता या सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होती। कई बार प्रवासियों को रास्ते में अमानवीय परिस्थितियों और खतरों का सामना करना पड़ता है।
सऊदी अरब के यमन हूती ठिकानों पर हमले से नई जंग का खतरा बढ़ा!
26 Jul, 2026 11:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सना। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के हुदैदाह में हूतियों के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। ये हमले लाल सागर में सऊदी से जुड़े जहाजों पर हूतियों के हमलों के जवाब में किए गए। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल मल्की ने एक्स पर कहा कि होदैदाह प्रांत में आतंकवादी हूती मिलिशिया के वैध सैन्य ठिकानों के खिलाफ उचित सैन्य जवाबी कार्रवाई की।
ये हमले तब हुए हैं, जब यमन के हूतियों ने इस हफ्ते लाल सागर से गुजर रहे सऊदी अरब के 2 तेल टैंकरों पर हमला किया था। सऊदी अरब ने इनमें से एक हमले की पुष्टि की है। हूतियों ने इसी हफ्ते कहा था कि वह लाल सागर में सऊदी अरब के खिलाफ नाकेबंदी करेंगे। इसके बाद सऊदी अरब ने सख्त जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
वहीं, हूती संचालित टीवी ने बताया है कि सऊदी हमलों ने लाल सागर के इलाके वाले बंदरगाह शहर होदैदाह को निशाना बनाया है। सऊदी हमलों में होदैदाह शहर में सरकारी टेलीकॉम कंपनी की सुविधाओं को निशाना बनाया गया। इसने यह भी बताया कि सऊदी सेना ने यमन के पश्चिमी तट के पास स्थित कामरान द्वीप को निशाना बनाया।
रिपोर्ट के मुताबिक यह भी कहा गया है कि हवाई यातायात को खुला रखने के लिए किसी भी एयरपोर्ट को निशाना नहीं बनाया। हालांकि, उन्होंने हूती विद्रोहियों पर सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर फ्लाइट ऑपरेसन की इजाजत न देने का आरोप लगाया। इसके साथ ही चेतावनी दी कि सऊदी अरब अपने जहाजों और हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाना जारी रखेगा। इन हमलों के बाद सऊदी अरब और यमन के हूतियों के बीच एक बार फिर से जंग शुरू होने का खतरा बढ़ गया है। साल 2022 में हूतियों और सऊदी अरब के बीच समझौते के बाद ज्यादातर बड़ी लड़ाई रुक गई थी। ताजा हमलें पिछले सालों में सऊदी गठबंधन सेना और हूतियों के बीच पहली घटना है।
सीरिया में बड़ा सड़क हादसा, बस पलटने से 35 लोगों की गई जान
25 Jul, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दमिश्क: सीरिया की राजधानी दमिश्क को देश के पूर्वी प्रांत डेर अल-जोर से जोड़ने वाले मुख्य राजमार्ग पर शनिवार को एक भीषण सड़क दुर्घटना घटित हुई। दो यात्रियों से भरी बसों के बीच हुई आमने-सामने की टक्कर में कम से कम 35 लोगों ने अपनी जान गंवा दी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
रेगिस्तानी हाईवे पर हुआ दर्दनाक हादसा
स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा रेगिस्तानी इलाके से गुजरने वाले हाईवे पर हुआ। एक सामान्य यात्री बस और गृह मंत्रालय से जुड़ी बस के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहनों के परखच्चे उड़ गए और मौके पर ही चीख-पुकार मच गई।
दर्जनों लोग घायल और आपातकालीन राहत कार्य
इस दुखद हादसे में लगभग 30 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। दुर्घटना की भयावहता को देखते हुए तत्काल बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। घटना की सूचना मिलते ही आपातकालीन सेवाएं और राहत दल मौके पर पहुंच गए।
बचाव अभियान में सेना के हेलीकॉप्टर तैनात
हादसे की गंभीरता को देखते हुए राहत एवं बचाव अभियान में सीरियाई सेना के हेलीकॉप्टरों को भी शामिल किया गया। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण हेलीकॉप्टरों की मदद से गंभीर रूप से घायल पीड़ितों को तेजी से इलाज के लिए सैन्य और मुख्य चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाया गया।
हादसे के कारणों की जांच शुरू
फिलहाल दुर्घटना के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस और संबंधित अधिकारियों ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक तेज रफ्तार या दृश्यता में कमी हादसे की वजह हो सकती है, लेकिन अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी।
₹6,221 करोड़ की कीमत पर टूटा रिश्ता! जानिए क्यों बना देश का सबसे महंगा तलाक
25 Jul, 2026 05:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सियोल| दक्षिण कोरिया की एक अपीलीय अदालत ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए देश के दिग्गज टेक समूह एसके ग्रुप के चेयरमैन चे ताए-वोन को उनकी पूर्व पत्नी रो सोह-योंग को तलाक के संपत्ति बंटवारे के रूप में 944 अरब वॉन (भारतीय मुद्रा के अनुसार लगभग 6221 करोड़ रुपये) नकद चुकाने का सख्त निर्देश दिया है। अदालत ने अपने फैसले में इस बात को फिर से दोहराया कि चेयरमैन चे ताए-वोन के स्वामित्व वाले एसके ग्रुप के शेयर उनकी वैवाहिक संपत्ति का एक अहम हिस्सा हैं।
संपत्ति के बंटवारे और फैसले से जुड़े मुख्य बिंदु
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सियोल हाईकोर्ट ने पूर्व में सुनाए गए 1.38 ट्रिलियन वॉन के अपने ही फैसले को संशोधित करते हुए अब इसे घटाकर 944 अरब वॉन कर दिया है।
देश के सुप्रीम कोर्ट द्वारा संपत्ति के बंटवारे के अनुपात की फिर से सटीक गणना करने के निर्देश दिए जाने के बाद यह नया फैसला आया है।
इसके बावजूद तय की गई यह भारी-भरकम राशि निचली अदालत द्वारा शुरुआती दौर में तय किए गए 66.5 अरब वॉन से लगभग 14 गुना अधिक है।
'दोनों ने मिलकर बढ़ाई संपत्ति': अदालत की टिप्पणी
अदालत ने अपने विस्तृत फैसले में स्पष्ट किया कि विवाह की अवधि के दौरान चेयरमैन चे ताए-वोन के नाम पर अर्जित किए गए तमाम शेयर वैध रूप से वैवाहिक संपत्ति हैं, क्योंकि इस परिवार के निर्माण, संरक्षण और उनके मूल्य में भारी वृद्धि करने में दोनों पति-पत्नी ने अपना बहुमूल्य योगदान दिया था।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, "चेयरमैन चे के पास मौजूद शेयर शादी के दौरान उनके नाम पर अर्जित की गई संपत्ति हैं। चेयरमैन चे और निदेशक रो, दोनों ने ही इन संपत्तियों के निर्माण के साथ-साथ इनकी देखरेख और व्यावसायिक मूल्य को बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाई है।"
अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि जहां एक ओर चे ताए-वोन के दूरदर्शी कारोबारी और व्यावसायिक फैसलों से कंपनी का कुल मूल्य काफी ऊंचाइयों पर पहुंचा, वहीं दूसरी ओर रो सोह-योंग ने घर-गृहस्थी संभालने, बच्चों की बेहतरीन परवरिश करने और एसके ग्रुप से जुड़ी विभिन्न सामाजिक व बाहरी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेकर अपना योगदान दिया।
शेयर सुरक्षित रहेंगे, पूरी राशि नकद दी जाएगी
अीलीय अदालत ने अपने निर्देश में यह भी साफ किया कि रो सोह-योंग को उनके हिस्से की पूरी राशि सिर्फ नकद (Cash) के रूप में ही दी जाएगी। इससे चेयरमैन चे ताए-वोन अपने एसके ग्रुप के शेयर अपने पास ही सुरक्षित रख सकेंगे और उनके मालिकाना हक पर कोई आंच नहीं आएगी।
फैसले में कहा गया, "चेयरमैन चे अपने एसके शेयरों के एकमात्र मालिक बने रहेंगे और निदेशक रो के हिस्से की संपूर्ण शेष राशि उन्हें नकद के रूप में अदा की जाएगी।"
अदालत का मानना था कि यदि कंपनी के शेयर जबरन हस्तांतरित किए गए, तो इससे दक्षिण कोरिया के सबसे बड़े और प्रभावशाली व्यावसायिक समूहों में शुमार एसके ग्रुप के प्रबंधन और नियंत्रण पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
कानूनी लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं
इस हाई-प्रोटिफ़ाइल तलाक और संपत्ति विवाद मामले में कानूनी खींचतान अभी पूरी तरह थमी नहीं है।
इस दंपती के तलाक और लगभग 2 अरब वॉन की गुजारा भत्ता (Alimony) राशि को दक्षिण कोरिया का सुप्रीम कोर्ट पहले ही पिछले साल अंतिम रूप दे चुका था, और केवल संपत्ति के सही बंटवारे का मामला ही दोबारा सुनवाई के लिए नीचे भेजा गया था।
वर्तमान नियमों के अनुसार, चे ताए-वोन और रो सोह-योंग दोनों पक्षों के पास इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में चुनौती देने का कानूनी अधिकार सुरक्षित है। यदि इनमें से किसी भी पक्ष ने इस फैसले पर आपत्ति जताई, तो यह मामला एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंच सकता है।
फैसले के तुरंत बाद चेयरमैन चे ताए-वोन की कानूनी टीम ने मीडिया से कहा कि वे इस विस्तृत लिखित आदेश का बारीकी से अध्ययन करने के बाद ही अपनी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देंगे, जबकि रो सोह-योंग के वकील अदालत परिसर से बिना किसी प्रकार की मीडिया टिप्पणी के रवाना हो गए।
कैथल स्कूल कांड: छात्राओं के वीडियो बनाने के आरोप में कर्मचारी गिरफ्तार, जांच शुरू
25 Jul, 2026 02:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैथल: शहर के एक प्रतिष्ठित निजी शैक्षणिक संस्थान से छात्राओं की सुरक्षा और गोपनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करने वाली अत्यंत शर्मनाक घटना सामने आई है। विद्यालय परिसर स्थित स्विमिंग पूल के चेंजिंग रूम में वस्त्र बदल रही छात्राओं का गुप्त रूप से मोबाइल से वीडियो बनाने के आरोप में स्कूल के ही एक कर्मचारी को रंगे हाथों पकड़ा गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जिसकी पहचान कलायत क्षेत्र निवासी गौरव के रूप में हुई है जो विद्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर कार्यरत था।
छात्राओं की सूझबूझ और तत्परता से बेनकाब हुआ आरोपी
यह दुखद घटनाक्रम उस समय घटित हुआ जब तैराकी का अभ्यास पूर्ण करने के पश्चात छात्राएं कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम में गई हुई थीं। वस्त्र बदलने के दौरान सतर्क छात्राओं की दृष्टि एक संदिग्ध कर्मचारी पर पड़ी, जो छिपकर अपने मोबाइल फोन से उनकी अश्लील वीडियो बना रहा था। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए छात्राओं ने बिना डरे असीम सूझबूझ का परिचय दिया और तत्काल इसकी सूचना स्कूल प्रबंधन तथा अपने-अपने परिजनों को प्रदान की।
परिजनों के आक्रोश के बीच पुलिस ने आरोपी को लिया कस्टडी में
घटना की जानकारी मिलते ही आक्रोशित परिजन और विद्यालय का स्टाफ तुरंत मौके पर इकट्ठा हो गया और आरोपी कर्मचारी को भागने से रोककर वहीं बंधक बना लिया। सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस टीम ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए आरोपी को अपनी हिरासत में ले लिया तथा उसके पास से प्रयुक्त मोबाइल फोन को भी साक्ष्य के रूप में जब्त कर लिया।
पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत कड़ी प्राथमिकी दर्ज
पीड़ित छात्राओं के परिजनों द्वारा दी गई लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कानूनी कदम उठाए हैं। पुलिस विभाग ने आरोपी गौरव के विरुद्ध यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून तथा भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न सुसंगत और कठोर धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण पंजीकृत कर लिया है। इस घटना के बाद से ही अन्य अभिभावकों में भी स्कूल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भारी चिंता देखी जा रही है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गहनता से जांच में जुटी पुलिस
मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए डीएसपी रमेश चंद्र ने बताया कि पुलिस ने सूचना मिलते ही अविलंब कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए हर पहलू से गहनता से तफ्तीश की जा रही है। आरोपी के मोबाइल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है तथा पूछताछ एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषी के खिलाफ अदालत में सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
₹5 करोड़ की फिरौती मांगने का मामला, गोदारा गैंग के नाम से फैलाई दहशत
25 Jul, 2026 02:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैथल: शहर की गुरुद्वारा कॉलोनी के निवासी तथा पोल्ट्री फीड फैक्ट्री के मालिक संजय शर्मा से 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का अत्यंत गंभीर मामला सामने आया है। मांग पूरी न करने पर उद्योगपति को जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। लगातार मिल रही कॉल और मानसिक दबाव के बाद पीड़ित कारोबारी ने स्थानीय पुलिस में शरण ली। पुलिस प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित धाराओं में मामला पंजीकृत कर त्वरित पड़ताल आरंभ कर दी है।
अज्ञात विदेशी नंबर से आई कॉल और कुख्यात गिरोह का दावा
पीड़ित व्यवसायी संजय शर्मा द्वारा दी गई आधिकारिक शिकायत के अनुसार, उनके मोबाइल पर 27 जून और 17 जुलाई को विदेशी नंबरों से व्हाट्सएप के जरिए संपर्क किया गया। फोन करने वाले अज्ञात व्यक्ति ने अपनी पहचान 'गीली राणा' के रूप में बताई और खुद को कुख्यात रोहित गोदारा गिरोह से संबद्ध बताया। फोन पर बातचीत करते हुए आरोपी ने बेखौफ अंदाज में 5 करोड़ रुपये की रंगदारी देने की शर्त रखी।
मांग पूरी न होने पर परिवार सहित समाप्त करने की चेतावनी
कारोबारी ने बताया कि रकम न देने पर आरोपी ने उन्हें तथा उनके परिजनों को जान से मारने की सीधी धमकी दी। लगातार आती कॉल्स और धमकियों से भयभीत होकर पीड़ित ने कानून की मदद लेने का फैसला किया। परिजनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने शहर थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने त्वरित कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्राथमिकी दर्ज कर विशेष जांच दस्ते का गठन
मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए जांच अधिकारी दीपक कुमार ने स्पष्ट किया कि पीड़ित के बयानों के आधार पर नामजद आरोपी गीली राणा और गिरोह के अन्य संदिग्धों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। रंगदारी और जानलेवा धमकियों की धाराओं के तहत मामला कायम कर एक विशेष साइबर एवं क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन टीम को इस केस की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
डिजिटल सर्विलांस और कॉल ट्रैकिंग से की जा रही छानबीन
पुलिस विभाग की तकनीकी टीम विदेशी व्हाट्सएप नंबर, कॉल डिटेल्स और इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस (IP Address) को खंगालने में जुटी हुई है। जांच अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कॉल के स्रोत का पता लगाया जा रहा है। पुलिस ने पीड़ित व्यवसायी को पूर्ण सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए दावा किया है कि इस गिरोह के नेटवर्क को जल्द ध्वस्त कर आरोपियों को कानून के शिकंजे में लाया जाएगा।
11 यूरोपीय पर्यटकों के साथ नाव लापता, इंडोनेशिया में युद्धस्तर पर तलाश अभियान
25 Jul, 2026 01:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पालू: इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप के नजदीक एक तेज रफ्तार स्पीडबोट के अचानक लापता हो जाने के बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा युद्धस्तर पर खोज एवं बचाव (सर्च एंड रेस्क्यू) अभियान चलाया जा रहा है। इस दुर्घटनाग्रस्त स्पीडबोट में कुल 11 यूरोपीय पर्यटक और दो स्थानीय चालक दल (क्रू) के सदस्य सवार थे। अधिकारियों ने शनिवार को मीडिया को जानकारी दी कि तलाशी के इतने बड़े अभियान के बावजूद अब तक न तो लापता नाव का और न ही उसमें सवार किसी भी व्यक्ति का कोई सुराग हाथ लग पाया है।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह स्पीडबोट शुक्रवार की सुबह टंजुंग उनाउना रीजेंसी से चलकर गोरोंटालो प्रांत के मारिसा बंदरगाह की तरफ रवाना हुई थी।
लापता होने की सूचना: तय समय बीत जाने के बाद भी जब नाव अपने निर्धारित गंतव्य पर नहीं पहुंची, तो हड़कंप मच गया।
गोरोंटालो प्रांत के खोज एवं बचाव कार्यालय के प्रमुख हेरियांतो ने बताया कि शुक्रवार दोपहर करीब 3:40 बजे एक स्थानीय टूर गाइड ने बोट के लापता होने की आधिकारिक सूचना दी, जिसके तुरंत बाद शुक्रवार की रात से ही व्यापक स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया।
अधिकारियों ने कहा, 'जब दोपहर के समय तक भी स्पीडबोट अपने डेस्टिनेशन पर नहीं पहुंची, तो हमारी चिंताएं काफी बढ़ गईं। हमने फौरन तलाश अभियान शुरू किया, लेकिन वर्तमान समय तक नाव या उसमें यात्रा कर रहे किसी भी इंसान का कोई पता नहीं चल पाया है।'
किन-किन देशों के नागरिक थे सवार?
इंडोनेशियाई प्रशासनिक और आव्रजन अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक सूची के मुताबिक, लापता हुई इस स्पीडबोट में दुनिया के कई अलग-अलग देशों के नागरिक सवार थे:
चेक गणराज्य का 1 नागरिक
बेल्जियम का 1 नागरिक
नीदरलैंड्स के 5 नागरिक
जर्मनी के 3 नागरिक
फ्रांस की 1 महिला नागरिक
इसके अलावा 2 स्थानीय इंडोनेशियाई क्रू मेंबर भी इस नाव पर मौजूद थे।
300 वर्ग समुद्री मील के दायरे में तलाश और मौसम की बाधा
लापता बोट और पर्यटकों की तलाश के लिए राहत एवं बचाव दलों ने टोमिनी खाड़ी और उसके आसपास के लगभग 300 वर्ग समुद्री मील के विशाल क्षेत्र को अपने रडार पर ले रखा है।
अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल: इस तलाशी अभियान में कई रेस्क्यू बोट, आधुनिक थर्मल इमेजिंग ड्रोन और कुशल गोताखोरों की टीमों को झोंक दिया गया है। यह पूरा सर्च ऑपरेशन उस संभावित रूट को ध्यान में रखकर चलाया जा रहा है जिससे होकर बोट को गुजरना था।
मौसम की बड़ी चुनौती: हालांकि मौसम विभाग ने इस क्षेत्र में आमतौर पर आसमान साफ रहने का अनुमान जताया है, लेकिन समुद्र के भीतर चल रही तेज और ठंडी हवाओं तथा करीब 2.5 मीटर ऊंची खतरनाक लहरों के कारण बचाव दलों को अभियान चलाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद अधिकारियों का संकल्प है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच भी लापता लोगों की तलाश बिना रुके जारी रहेगी।
H-1B वीजा पर नई सियासत, अमेरिकी सीनेट के बिल से भारतीय प्रोफेशनल्स की नजरें टिकीं
25 Jul, 2026 12:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिका की सीनेट में एक सांसद द्वारा एक नया और कड़ा विधेयक पेश किया गया है, जिसमें अगले तीन साल तक नए एच-1बी वीजा जारी करने पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की गई है। इस प्रस्तावित विधेयक में ट्रंप प्रशासन द्वारा पूर्व में लाए गए एक लाख अमेरिकी डॉलर के भारी-भरकम शुल्क को कानूनी रूप देने का भी प्रस्ताव शामिल है, जिसे हालांकि एक संघीय अदालत पहले ही खारिज कर चुकी थी।
किसने पेश किया यह विधेयक?
मोंटाना राज्य से रिपब्लिकन सांसद टिम शीही ने अमेरिकी सीनेट में यह प्रस्ताव पेश किया है।
उनका तर्क है कि अमेरिका को ऐसे विदेशी वीजा जारी नहीं करने चाहिए, जिनके माध्यम से स्थानीय अमेरिकी कर्मचारियों के अधिकारों और रोजगार के अवसरों को नुकसान पहुंचता हो।
भारतीय पेशेवरों पर क्या होगा असर?
एच-1बी वीजा एक ऐसा विशेष कार्य वीजा है जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां विभिन्न तकनीकी और विशिष्ट क्षेत्रों में काम करने के लिए अत्यधिक कुशल विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं।
इन नौकरियों में विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
अमेरिकी टेक कंपनियां हर साल मुख्य रूप से भारत और चीन जैसे देशों से हजारों की संख्या में कुशल पेशेवरों को नियुक्त करने के लिए इसी वीजा कार्यक्रम पर निर्भर रहती हैं।
अमेरिका में एक बहुत बड़ी संख्या में भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर, डेवलपर्स और अन्य तकनीकी विशेषज्ञ इसी एच-1बी वीजा के जरिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
सांसद टिम शीही के तर्क और बयान
सांसद टिम शीही ने अपने एक आधिकारिक बयान में कहा कि एच-1बी कार्यक्रम की मूल शुरुआत केवल दुर्लभ और कठिन पदों के लिए कुशल कर्मचारियों की कमी को दूर करने के वास्ते की गई थी, न कि सस्ते विदेशी श्रमिकों को लाकर योग्य अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीनने के लिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका यह नया कानून एच-1बी के कथित दुरुपयोग को पूरी तरह समाप्त करेगा और इस व्यवस्था को इसके मूल उद्देश्यों के अनुरूप ढालने में मदद करेगा।
उनके अनुसार, यह विधेयक कार्यक्रम में मौजूद उन तमाम खामियों को दूर करेगा जो इसके गलत इस्तेमाल को बढ़ावा देती हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देंगी।
शीही ने इस नए कानून को 'एच-1बी दुरुपयोग रोकने वाला विधेयक, 2026' नाम दिया है। इसे अमेरिकी श्रमिकों के हितों की रक्षा, धोखाधड़ी पर लगाम कसने और कमजोर नियमों के चलते वर्षों से चले आ रहे सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए एक अहम कदम बताया गया है।
विधेयक के मुख्य बिंदु और प्रस्ताव
समर्थन: इस प्रस्तावित विधेयक को 'इमिग्रेशन अकाउंटेबिलिटी प्रोजेक्ट' और 'फेडरेशन फॉर अमेरिकन इमिग्रेशन रिफॉर्म (फेयर)' जैसे संगठनों का समर्थन प्राप्त हुआ है।
तीन साल की रोक: विधेयक में साफ तौर पर मांग की गई है कि अगले तीन वर्षों तक किसी भी नए एच-1बी वीजा को मंजूरी न दी जाए और इसके बाद बेहद कड़े नियमों, सीमाओं और शर्तों के साथ इस कार्यक्रम को दोबारा शुरू किया जाए।
भारी शुल्क: इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रत्येक एच-1बी आवेदन पर लगाए गए 1 लाख अमेरिकी डॉलर के भारी शुल्क को विधिवत कानून का हिस्सा बनाने का भी प्रस्ताव है।
सरकारी स्कूल में बड़ा हादसा टला, टूटी दीवार गिरने से छात्र गंभीर घायल
25 Jul, 2026 12:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार: मिर्जापुर गांव के सरकारी मिडिल स्कूल में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा घटित हो गया, जहां सातवीं कक्षा में अध्ययनरत 13 वर्षीय छात्र संदीप गंभीर रूप से घायल हो गया। स्कूल परिसर में दीवार से गिरने के कारण टूटी हुई टाइल से छात्र की गर्दन में गहरा कट लग गया। हादसे के तुरंत बाद लहूलुहान अवस्था में छात्र को स्थानीय नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उपचार शुरू करते हुए छात्र की गर्दन पर करीब 12 टांके लगाए। चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि समय पर इलाज मिलने से छात्र की हालत अब स्थिर और खतरे से बाहर है।
स्कूल शौचालय के समीप पैर फिसलने से हुआ हादसा
घटना के संदर्भ में जानकारी देते हुए स्कूल के प्राचार्य राजकुमार ने बताया कि छात्र संदीप अपने एक सहपाठी के साथ परिसर में स्थित शौचालय गया था। उसी दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और पैर फिसलने से वह नीचे गिर पड़ा। वहीं दूसरी ओर, साथ पढ़ने वाले अन्य विद्यार्थियों ने बताया कि संदीप शौचालय के पास बनी एक जर्जर दीवार पर चढ़ने का प्रयास कर रहा था। दीवार पर लगी टाइल पहले से ही टूटी हुई थी, जिससे गिरते ही वह तीखी टाइल उसकी गर्दन में जा धंसी।
गंभीर घाव के कारण अस्पताल में लगाने पड़े 12 टांके
हादसा इतना भीषण था कि टूटी टाइल लगने से छात्र की गर्दन पर अत्यधिक गहरा घाव बन गया, जिससे खून का रिसाव तेजी से होने लगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्कूल स्टाफ ने बिना समय गंवाए उसे एम्बुलेंस की मदद से नागरिक अस्पताल पहुंचाया। आपातकालीन कक्ष में डॉक्टरों ने घाव को साफ कर तुरंत टांके लगाए। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार घाव काफी गहरा था, लेकिन समय पर प्राथमिक चिकित्सा मिलने से स्थिति नियंत्रण में आ गई।
स्कूल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस अप्रत्याशित घटना के बाद स्कूल परिसर में बनी टूटी दीवारों और जर्जर संरचनाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। सहपाठियों द्वारा दिए गए विवरण से साफ है कि परिसर में टूटी टाइलें और अधूरी बनी दीवारें हादसों को न्योता दे रही हैं। अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि स्कूल प्रशासन को ऐसी असुरक्षित जगहों की तुरंत मरम्मत करानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य बच्चे के साथ ऐसा हादसा न हो।
परिजनों को दी गई सूचना और स्थिति सामान्य
حادثے की जानकारी मिलते ही छात्र के परिजन भी बदहवास हालत में अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों द्वारा बच्चे की हालत खतरे से बाहर बताए जाने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली। फिलहाल छात्र अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में है और उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है, जबकि स्कूल प्रशासन भी मामले की आंतरिक जांच कर आवश्यक सुधार के कदम उठाने की बात कह रहा है।
होर्मुज संकट के बीच LPG टैंकर पर हमला, 28 भारतीय क्रू मेंबर थे सवार
25 Jul, 2026 10:24 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: फारस की खाड़ी के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक बार फिर व्यापारिक पोत को निशाना बनाए जाने की गंभीर घटना सामने आई है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार ईरान की समुद्री सीमा के समीप मोजाम्बिक के झंडे वाले एक एलपीजी टैंकर पर हमला हुआ। इस पोत पर कुल 28 भारतीय क्रू सदस्य तैनात थे। घटना की जानकारी मिलते ही कूटनीतिक स्तर पर त्वरित कदम उठाए गए। भारतीय दूतावास ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि जहाज पर मौजूद सभी 28 भारतीय नागरिक पूरी तरह से सुरक्षित हैं और अधिकारियों द्वारा उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एलपीजी टैंकर पर मिसाइल हमला
भारतीय समुद्री कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया ने इस घटना के संबंध में जानकारी साझा की है। यूनियन के अनुसार 'दिशा' नाम का यह एलपीजी टैंकर जब फारस की खाड़ी की ओर बढ़ रहा था, तभी होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक अज्ञात मिसाइल द्वारा इसे निशाना बनाया गया। अचानक हुए इस हमले के बाद जहाज पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लेकिन समय पर बरती गई सतर्कता के कारण किसी भी भारतीय नाविक को कोई शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा।
भारतीय दूतावास की त्वरित कूटनीतिक पहल और सुरक्षा आश्वासन
तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास ने घटना की जानकारी मिलते ही संबंधित ईरानी अधिकारियों से सीधा संपर्क स्थापित किया। दूतावास द्वारा जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया कि भारतीय क्रू सदस्यों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। दूतावास की टीम जहाज के कप्तान और local प्रशासन के साथ निरंतर संवाद बनाए हुए है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता मुहैया कराई जा सके।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में बढ़ता तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर असर
ईरान और ओमान के मध्य स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील मार्ग माना जाता है। वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने और हालिया अभियानों के कारण वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही जोखिम भरी हो गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों पर अनिश्चितता का संकट गहराने लगा है।
व्यापारिक पोतों पर बढ़ते हमलों से भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर चिंता
कमर्शियल शिपिंग रूट पर लगातार हो रही इस प्रकार की हिंसक घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। पिछले कुछ महीनों में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने के मामलों में वृद्धि हुई है। इसी स्थिति को देखते हुए विभिन्न वैश्विक सुरक्षा तंत्रों और नौसैनिक बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि भविष्य में ऐसी अनहोनी घटनाओं को रोका जा सके और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
न्यूक्लियर डील के बदले ट्रंप की नई शर्त, सऊदी पर अब्राहम समझौते का दबाव क्यों?
25 Jul, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि सऊदी अरब के साथ किसी भी नागरिक परमाणु समझौते को अंतिम रूप देने के लिए रियाद को 'अब्राहम समझौते' (Abraham Accords) में शामिल होना अनिवार्य होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस शर्त को पूरा करना बेहद जरूरी है। ट्रंप के अनुसार, अब मिडिल ईस्ट में ईरान जैसी क्षेत्रीय ताकत का पुराना दबदबा और खतरा नहीं रह गया है, इसलिए सऊदी अरब के पास इस समझौते से पीछे हटने या टालमटोल करने की कोई वजह नहीं बची है।
क्या है अब्राहम समझौता?
अब्राहम समझौते वर्ष 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता और पहल पर हुए कूटनीतिक समझौतों का एक प्रमुख समूह है, जिसके तहत इस्राइल और कई प्रमुख अरब देशों के बीच औपचारिक राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंध स्थापित किए गए थे। इस समझौते में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, मोरक्को और सूडान जैसे देश शामिल हैं।
'पश्चिम एशिया के भविष्य के लिए यह समझौता बेहद अहम'
अमेरिकी परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे नए विकास और समझौतों पर बात करते हुए ट्रंप ने प्रस्तावित ऊर्जा साझेदारी के केंद्र में अब्राहम समझौते को रखा।
उन्होंने कहा कि इस्राइल के साथ अपने क्षेत्रीय संबंधों को सामान्य बनाने वाले इस ऐतिहासिक समझौते में शामिल होना 'पश्चिम एशिया के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण' है।
ट्रंप ने कहा, "इस साझेदारी को पूरी तरह से अमलीजामा पहनाने के लिए उन्हें अब्राहम समझौते का सदस्य बनना ही होगा। अब समय आ गया है कि वे ऐसा कदम उठाएं।"
उन्होंने आगे कहा कि पहले देश इसलिए आगे नहीं आ रहे थे क्योंकि उन्हें ईरान से कड़ा खतरा महसूस होता था, लेकिन अब वह स्थिति बदल चुकी है।
यूरेनियम संवर्धन पर प्रतिबंध और ट्रुथ सोशल पर पोस्ट
इससे एक दिन पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट कर जानकारी दी थी कि प्रस्तावित ऊर्जा समझौता केवल शांतिपूर्ण और गैर-सैन्य परमाणु उपयोग तक ही सीमित रहेगा।
इसके तहत सऊदी अरब के भीतर घरेलू स्तर पर यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ट्रंप ने अपने संदेश में स्पष्ट लिखा था कि नागरिक परमाणु समझौते को औपचारिक मंजूरी तभी मिलेगी जब सऊदी अरब पूरी तरह से अब्राहम समझौते की शर्तों को स्वीकार करेगा। अमेरिका ऐसी नागरिक परमाणु सुविधाओं का विरोध नहीं करता जिनमें संवर्धन न किया जाता हो।
यह बयान अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान के बीच संपन्न हुए महत्वपूर्ण नागरिक परमाणु ऊर्जा समझौते पर हस्ताक्षर के बाद सामने आया है। इस द्विपक्षीय समझौते को अमेरिकी संसद के पास समीक्षा के लिए भेज दिया गया है।
सऊदी अरब का रुख और अमेरिका के साथ '123 समझौता'
दूसरी तरफ, सऊदी अरब का आधिकारिक रुख हमेशा से यह रहा है कि इस्राइल को औपचारिक रूप से कूटनीतिक मान्यता देने का कोई भी निर्णय एक स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र की स्थापना के लिए एक स्पष्ट और भरोसेमंद मार्ग पर निर्भर करता है।
सुरक्षा उपाय और प्रोटोकॉल: जो बाइडन प्रशासन के दौरान चली पुरानी वार्ताओं के विपरीत, इस नए मसौदे में सऊदी अरब को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य नहीं किया गया है।
एकीकृत रिएक्टर: व्हाइट House के अनुसार, यह समझौता अमेरिकी परमाणु ऊर्जा कानून के पूर्ण अनुपालन में है और इसमें परमाणु प्रसार को रोकने के लिए पुख्ता सुरक्षा उपाय किए गए हैं। इस '123 समझौते' का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी तकनीक की मदद से सऊदी अरब में एपी1000 (AP1000) परमाणु रिएक्टरों के निर्माण का रास्ता साफ करना है।
अमेरिका में तीन साल के लिए एच-1बी (H-1B) वीजा पर रोक का प्रस्ताव
इसी बीच, अमेरिका से अप्रवासन नीतियों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका के एक रिपब्लिकन सांसद ने नया विधेयक पेश किया है, जिसमें आगामी तीन साल के लिए नए एच-1बी (H-1B) वीजा जारी करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।
इस नए प्रस्ताव में पात्रता के नियमों को बेहद सख्त बनाने तथा विदेशी कर्मचारियों और छात्रों पर कड़े प्रतिबंध लगाने की पैरवी की गई है।
सांसद का तर्क है कि मौजूदा एच-1बी वीजा कार्यक्रम अपने मूल और वास्तविक उद्देश्य से काफी भटक चुका है और वर्तमान में यह अमेरिकी स्थानीय कर्मचारियों के हितों तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचा रहा है।
मोंटाना से रिपब्लिकन सांसद टिम शीही ने 'एच-1बी वीजा दुरुपयोग खत्म करो अधिनियम, 2026' पेश करते हुए कहा कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य उन सभी कानूनी कमियों को दूर करना है, जिनकी वजह से कुशल कर्मियों के लिए बने इस वीजा कार्यक्रम का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने साफ कहा कि यह कदम 'मेहनती अमेरिकी नागरिकों को पहली प्राथमिकता' देने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि सस्ते विदेशी श्रमिकों के जरिए योग्य स्थानीय युवाओं की नौकरियों पर असर न पड़े।
गोलीबारी से नहीं डरे ट्रंप, दोबारा आयोजित किया व्हाइट हाउस डिनर
25 Jul, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार रात व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर (White House Correspondents' Dinner) में हिस्सा लिया। अप्रैल महीने में हुई गोलीबारी की एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम का अब दोबारा आयोजन किया गया है। इस दौरान अपने संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "जैसा मैंने तीन महीने पहले भी कहा था, शो जारी रहना चाहिए।" यह कार्यक्रम राजधानी वाशिंगटन के सुप्रसिद्ध वाल्डॉर्फ एस्टोरिया होटल में संपन्न हुआ, जहां लगभग 700 आमंत्रित मेहमानों के लिए सुरक्षा के अभूतपूर्व और कड़े इंतजाम किए गए थे। सभी मेहमानों को केवल एक ही मुख्य प्रवेश द्वार से अंदर आने की अनुमति दी गई, जहां गहन पहचान जांच, स्निफर डॉग, भारी मात्रा में हथियारबंद सुरक्षाकर्मी और अन्य सख्त चेकिंग प्रोटोकॉल तैनात थे। सुरक्षा कारणों से इस बार न तो कोई रेड कार्पेट बिछाया गया था और न ही पारंपरिक रूप से भव्य स्वागत समारोह आयोजित हुआ।
'हम डरने वाले नहीं हैं'—वेइजिया जियांग का कड़ा संदेश
इस गरिमामयी कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन (WHCA) की अध्यक्ष और सीबीएस न्यूज की वरिष्ठ पत्रकार वेइजिया जियांग के संबोधन के साथ हुई।
उन्होंने अप्रैल माह में घटी डरावनी घटना को याद करते हुए मंच से कहा, 'हम वापस आ लौट आए हैं। हम किसी भी सूरत में डरने वाले नहीं हैं और हिंसा को कभी भी इस लोकतंत्र का आखिरी शब्द नहीं बनने देंगे।'
आपको बता दें कि अप्रैल में आयोजित पिछले डिनर के दौरान एक हमलावर ने सुरक्षा जांच चौकी पर अचानक हमला कर दिया था, जिससे पूरे आयोजन स्थल पर अफरा-तफरी मच गई थी और मेहमानों को तुरंत सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा था।
इस बार के पुनर्आयोजित कार्यक्रम में कुछ नए और सराहनीय बदलाव भी देखने को मिले। आयोजकों द्वारा दो विशेष पुरस्कार जोड़े गए—पहला पुरस्कार सीक्रेट सर्विस के जांबाज एजेंट विक्टर गोंजालेस को दिया गया, जिन्होंने पिछले हमले के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया था, और दूसरा पुरस्कार उस होटल के समर्पित स्टाफ को सम्मानित करने के लिए दिया गया जहां यह कार्यक्रम पहली बार आयोजित हुआ था।
ट्रंप ने मीडिया पर कसा तंज और हल्के-फुल्के अंदाज में रखी बात
अपने संबोधन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माहौल को थोड़ा हल्का रखने की कोशिश की, लेकिन साथ ही मीडिया पर कटाक्ष करने से भी नहीं चूके।
उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि यह कमरा 'ट्रंप डिरेंजमेंट सिंड्रोम से पीड़ित लोगों का सबसे बड़ा जमावड़ा' है।
हालांकि, उन्होंने अपने पहले से तैयार किए गए तीखे और राजनीतिक भाषण को नजरअंदाज करते हुए अपेक्षाकृत हल्के-फुल्के अंदाज में अपनी बात रखी।
इस आयोजन को लेकर कुछ हलकों से आलोचनाएं भी सामने आई हैं। कुछ मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि देश के शीर्ष नेताओं और पत्रकारों का इस प्रकार एक मंच पर साथ आना स्वतंत्र प्रेस की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पॉयन्टर इंस्टीट्यूट की जानी-मानी मीडिया विशेषज्ञ केली मैकब्राइड ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से आम जनता के बीच यह गलत संदेश जाता है कि राजनीतिक नेता और पत्रकार आपस में बहुत करीबी संबंध रखते हैं।
प्रशासन और मीडिया के बीच बरकरार है तनाव
यह हाई-प्रोफाइल डिनर ऐसे संवेदनशील समय में आयोजित किया गया है जब अमेरिकी प्रशासन और मुख्यधारा के मीडिया घरानों के बीच दूरियां और तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
हाल ही में सरकार द्वारा कुछ स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की कोशिशें सामने आई थीं, जिसे देशव्यापी विरोध के बाद बादला भी पड़ा।
इस गंभीर मुद्दे पर देश के कई प्रमुख प्रेस संगठनों ने गहरी चिंता व्यक्त की है और व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन से सरकार के रुख के खिलाफ खुलकर मुखर होने की अपील की है।
दूसरी ओर, व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन ने पूरी तरह स्पष्ट किया है कि इस वार्षिक डिनर का एकमात्र मुख्य उद्देश्य एक स्वतंत्र, निष्डर और निष्पक्ष प्रेस का जश्न मनाना तथा यह रेखांकित करना है कि एक जीवंत लोकतंत्र में पत्रकारिता की भूमिका कितनी अमूल्य और अहम होती है।
नेपाल में न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर संकट? सुप्रीम कोर्ट को लेकर अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में दावा
25 Jul, 2026 07:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू: विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने नेपाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट की न्यायधीशों की नियुक्तियों और उसकी संरचना में किसी भी प्रकार के राजनीतिक हस्तक्षेप से बाज आने के लिए कड़े शब्दों में आगाह किया है, इसे देश के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International), ह्यूमन राइट्स वॉच (Human Rights Watch) और इंटरनेशनल कमीशन ऑफ ज्यूरिस्ट्स (ICJ) द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए एक संयुक्त बयान में यह कहा गया है कि नेपाल सरकार की ओर से हालिया समय में उठाए गए कदम देश की स्वतंत्र न्यायपालिका के अस्तित्व को खतरे में डाल रहे हैं।
क्या जजों पर इस्तीफे और महाभियोग का बनाया जा रहा है दबाव?
संयुक्त बयान में यह गंभीर बात सामने लाई गई है कि नेपाल में मौजूदा न्यायाधीशों से जबरन इस्तीफे लेने अथवा महाभियोग का खौफ दिखाकर सुप्रीम कोर्ट की पूरी संरचना को बदलने के लिए राजनीतिक स्तर पर भारी दबाव डाले जाने की खबरें लगातार आ रही हैं।
मई 2026 के दौरान नेपाल के संविधान और स्थापित कानूनी सिद्धांतों के तहत आवश्यक संसदीय कानूनों को दरकिनार करते हुए, एक कार्यकारी अध्यादेश (Executive Ordinance) के माध्यम से संवैधानिक परिषद अधिनियम में संशोधन किए जाने के कदम को इन अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पूरी तरह से अनुचित और गैर-कानूनी करार दिया है।
इन प्रमुख मानवाधिकार समूहों ने प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि वह जजों पर अनैतिक दबाव बनाना तुरंत बंद करे और देश की न्यायिक स्वतंत्रता के साथ खिलवाड़ करने से बाज आए।
क्या मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में तोड़ी गई वरिष्ठता की परंपरा?
मानवाधिकार संगठनों का यह भी मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में तीन योग्य और वरिष्ठ न्यायाधीशों के पद पर मौजूद होने के बावजूद मनोज कुमार शर्मा को मुख्य न्यायाधीश के पद पर नियुक्त किया गया, जो नेपाल की वर्षों पुरानी और स्थापित वरिष्ठता की परंपरा का खुला उल्लंघन है।
किन-किन न्यायाधीशों को बनाया जा रहा है निशाना?
मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल की न्यायपालिका की वरिष्ठ न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी और हरि फुयाल पर अपने पदों से इस्तीफा देने के लिए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से भारी दबाव बनाया जा रहा है। इन जजों पर यह गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि यदि वे स्वेच्छा से इस्तीफा देने से इनकार करते हैं, तो उन्हें संसद के माध्यम से महाभियोग (Impeachment) चलाए जाने की सीधी धमकियां दी जा रही हैं।
स्पेसएक्स का नया रिकॉर्ड, स्टारशिप की 13वीं उड़ान में छोड़े गए सबसे ज्यादा स्टारलिंक उपग्रह
25 Jul, 2026 07:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बोकाचिका: दुनिया के मशहूर अरबपति बिजनेसमैन एलन मस्क की अंतरिक्ष एजेंसी स्पेसएक्स ने शुक्रवार को अपने अब तक के सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली रॉकेट 'स्टारशिप' की 13वीं परीक्षण उड़ान को पूरी तरह सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस महत्वपूर्ण मिशन के दौरान कंपनी ने पहली बार अपने सबसे उन्नत 20 स्टारलिंक इंटरनेट उपग्रहों को अंतरिक्ष की कक्षा में सफलतापूर्वक तैनात किया है। यह पूरा परीक्षण अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के लिए भी बेहद रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, क्योंकि भविष्य में इसी स्टारशिप का उपयोग बहुप्रतीक्षित 'आर्टेमिस-III' मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को दोबारा चंद्रमा की सतह पर उतारने के लिए किया जाना है।
लॉन्च और रॉकेट के पहले चरण की स्थिति
भव्य उड़ान: लगभग 407 फीट (124 मीटर) ऊंचे इस विशालकाय स्टारशिप ने अमेरिका के टेक्सास राज्य के दक्षिणी छोर पर स्थित स्पेसएक्स के प्रसिद्ध 'स्टारबेस' लॉन्च पैड से आसमान की ओर उड़ान भरी।
आपको बता दें कि बीते सप्ताह इंजन में कुछ तकनीकी खराबी आ जाने के कारण इसके लॉन्च को अंतिम क्षणों में रोकना पड़ा था, लेकिन इस बार परीक्षण पूरी तरह सफल रहा और सभी इंजन नियत समय पर सुचारू रूप से चालू हुए।
हालांकि, रॉकेट के पहले चरण (सुपर हेवी बूस्टर) की वापसी के दौरान तय प्रक्रिया के तहत सभी इंजन दोबारा ठीक से चालू नहीं हो सके, जिसकी वजह से बूस्टर नियंत्रित तरीके से वापस लौटने के बजाय तेज गति से नीचे उतरते हुए मेक्सिको की खाड़ी में जा गिरा। इसके बावजूद मिशन का मुख्य कक्षीय हिस्सा पूरी तरह सफल रहा।
भारतीय महासागर में सुरक्षित उतरा स्टारशिप
बूस्टर से अलग होने के बाद स्टारशिप निरंतर अंतरिक्ष की ओर आगे बढ़ता गया और पृथ्वी से लगभग 200 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंचकर एक-एक करके 20 अत्याधुनिक स्टारलिंक उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया।
अपनी सफल यात्रा के करीब एक घंटे बाद स्टारशिप ने भारतीय महासागर में नियंत्रित 'स्प्लैशडाउन' किया।
यह लैंडिंग इतनी सटीक और सफल रही कि अंतरिक्ष यान पानी की सतह पर उतरने के कुछ समय बाद तक भी सुरक्षित तैरता रहा, जिसे देखकर स्पेसएक्स के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों ने जमकर खुशी मनाई।
लेजर तकनीक और हीट शील्ड का कड़ा परीक्षण
लेजर संपर्क: अंतरिक्ष में हाल ही में लॉन्च किए गए इन नए स्टारलिंक उपग्रहों ने कक्षा में पहले से मौजूद अन्य स्टारलिंक उपग्रहों के साथ लेजर तकनीक के माध्यम से बेहद सफल और मजबूत संपर्क स्थापित किया। वर्तमान में स्पेसएक्स के 10,000 से अधिक स्टारलिंक उपग्रह पूरी दुनिया में हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, जो इसे पृथ्वी का सबसे बड़ा उपग्रह नेटवर्क बनाता है।
हीट शील्ड की जांच: इस परीक्षण उड़ान के दौरान छह नए स्टारलिंक उपग्रहों पर विशेष कैमरे लगाए गए थे, जिन्होंने उड़ान के अंतिम चरण में स्टारशिप की हीट शील्ड की स्पष्ट तस्वीरें भेजीं। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने हीट शील्ड पर विभिन्न सेंसर भी फिट किए थे, ताकि अंतरिक्ष यान के पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश (री-एंट्री) के दौरान पड़ने वाले अत्यधिक दबाव और तापमान का गहराई से अध्ययन किया जा सके। सुरक्षा मानकों की जांच के लिए कुछ टाइलों को जानबूझकर सफेद रंग से रंगा गया था ताकि यह परखा जा सके कि यदि कुछ टाइलें क्षतिग्रस्त हो भी जाएं, तब भी हीट शील्ड कितनी सुरक्षित रह सकती है। स्पेसएक्स की प्रमुख इंजीनियर केट टाइस ने इस ऐतिहासिक सफलता को 'लकी फ्लाइट 13' करार देते हुए कहा कि कंपनी इस मिशन के सकारात्मक परिणामों से बेहद उत्साहित है।
नासा का मून मिशन और एलन मस्क का भविष्य का सपना
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा यह चाहती है कि स्टारशिप जल्द से जल्द अपने सभी परीक्षण चरण पूरे कर ले ताकि यह पृथ्वी की कक्षा में नियमित और सुरक्षित उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार हो सके।
इस परीक्षण के सफल होने के बाद, बहुप्रतीक्षित 'आर्टेमिस-III' मिशन के तहत अमेरिकी और सहयोगी अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की यात्रा के दौरान अपने कैप्सूल की स्टारशिप के साथ डॉकिंग (जुड़ने) का अभ्यास करेंगे।
दूसरी ओर, स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क का यह बहुत बड़ा और दूरदर्शी सपना है कि वे इसी स्टारशिप रॉकेट के जरिए भविष्य में मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती बसा सकें। मस्क पहले ही आने वाले समय में मंगल और चंद्रमा की अंतरिक्ष पर्यटक यात्राओं की महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान कर चुके हैं।
इराक से वेस्ट बैंक तक हिंसा, धमाकों और गोलीबारी से फिर भड़का तनाव
24 Jul, 2026 05:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरूशलम/बगदाद। वेस्ट बैंक में नाबलुस शहर के समीप हुई खूनी गोलीबारी में चार फलस्तीनियों और एक इस्राइली नागरिक की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हिंसा के बाद इलाके में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
नाबलुस में भारी गोलीबारी, घायलों को किया गया एयरलिफ्ट
रामल्ला स्थित फलस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इस्राइली सुरक्षा बलों की कार्रवाई में चार फलस्तीनियों की जान गई है। दूसरी तरफ, इस्राइली आपातकालीन सेवाओं ने दो गंभीर रूप से घायल इस्राइली नागरिकों को इलाज के लिए एयरलिफ्ट किया है। इस्राइली सेना के अनुसार, हवात गिलाद बस्ती के पास नागरिकों पर हुए हमले की खबर मिलने के बाद सैनिकों ने मोर्चा संभाला था। सेना ने फिलहाल नाबलुस और टेल गांव की पूर्ण घेराबंदी कर हमलावरों की तलाश तेज कर दी है।
इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर धमाके, ईरान में गोलाबारी से मौतें
उधर, उत्तरी इराक के इरबिल शहर में अमेरिकी बलों की मौजूदगी वाले सैन्य ठिकाने के पास तड़के एक के बाद एक कई जोरदार धमाके हुए, जिससे आसमान में धुएं का गुबार छा गया। यह घटना अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा ईरान पर 13वीं रात की बमबारी समाप्त करने के कुछ ही घंटों बाद घटी। ईरानी मीडिया का दावा है कि अमेरिकी हमलों में 4 लोगों की मौत हुई है और 9 अन्य घायल हुए हैं। लाल सागर में हूती हमलों के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, वहीं इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने तेहरान पहुंचकर शांति की अपील की है।
बहरीन और जॉर्डन के अमेरिकी ठिकानों को ईरान ने बनाया निशाना
क्षेत्रीय संघर्ष को और बढ़ाते हुए ईरानी सेना ने बहरीन के शेख ईसा एयर बेस और जॉर्डन स्थित मुवफ्फक साल्टी बेस पर ड्रोन हमलों का दावा किया है। मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इन हमलों में ईंधन टैंकों, हैंगर और सैनिकों के क्वार्टरों को निशाना बनाया गया। ईरान ने चेतावनी दी है कि उसके हितों पर आंच आने पर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा को गंभीर नुकसान उठाना पड़ेगा।
गाजा के बिगड़ते हालात पर यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की चिंता
इस पूरे घटनाक्रम पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि युद्धविराम के दावों के बीच गाजा में आम नागरिक हर दिन अपनी जान गंवा रहे हैं। बिखरती स्वास्थ्य सेवाओं और महामारी के खतरे के बीच वहां मानवीय सहायता पहुंचाना बेहद मुश्किल हो गया है। गुटेरेस ने इस अंतहीन मानवीय त्रासदी को तुरंत रोकने की जोरदार अपील की है।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
