व्यापार
प्रयागराज की एयर कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए सरकार का अहम कदम
30 Jan, 2025 01:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रयागराज महाकुंभ जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी ज्यादा बढ़ गई है। इनमें से बहुत-से श्रद्धालु हवाई रास्ते से जा रहे हैं। इस बढ़ी डिमांड का फायदा उठाने के लिए विमानन कंपनियों ने हवाई किराये में इजाफा कर दिया है। इस पर सरकार ने चिंता जताई है। प्रयागराज में 26 फरवरी तक महाकुंभ मेला रहेगा ,दिल्ली-प्रयागराज उड़ानों में हवाई किराए में 21% तक बढ़ोतरी।
नागरिक विमानन मंत्रालय ने किराए में वृद्धि पर प्रतिक्रिया दी
मंत्रालय ने हवाई किराए को तर्कसंगत बनाने के लिए कदम उठाने की बात की
अधिकारियों ने एयरलाइंस से कीमतें कम करने की अपील की
महाकुंभ के दौरान प्रयागराज के लिए उड़ानों की बढ़ती मांग पर मंत्रालय की प्रतिक्रिया
मंत्रालय ने एयरलाइंस से अधिक उड़ानें जोड़ने की सिफारिश की
सरकार ने कहा- हवाई किराए की वृद्धि पर निगरानी रखी जाएगी
घटाता-बढ़ाता है हवाई किराया?
हवाई किराया तय करने का अधिकार विमानन कंपनियों के पास होता है। मौजूदा नियमों के तहत, एयरलाइंस अपनी इच्छा से हवाई किराया तय करती हैं। सरकार एयरलाइंस को किराए में बढ़ोतरी या कमी के लिए सलाह दे सकती है। एयरलाइंस से किराया बढ़ाने पर चर्चा करता है। सरकार सिर्फ सुझाव दे सकती है, एयरलाइंस को नियमों का पालन करना जरूरी नहीं।
एयरलाइंस के किराए में वृद्धि के दौरान सरकार हस्तक्षेप करती है। एयरलाइंस आमतौर पर डिमांड और आपूर्ति के आधार पर किराए में बदलाव करती हैं। प्रतियोगिता भी किराए को प्रभावित करती है। सरकार, विशेष परिस्थितियों में, यात्रियों की सुविधा के लिए एयरलाइंस से किराया घटाने की अपील करती है।
प्रयागराज के लिए उड़ानों की संख्या में और वृद्धि की संभावना है
प्रयागराज के लिए फिलहाल लगभग 80,000 मासिक सीटों के साथ 132 उड़ानें संचालित हो रही हैं। यह पिछले महीने आठ की तुलना में अब 17 शहरों से सीधे जुड़ा हुआ है। हालांकि, प्रयागराज के लिए हवाई टिकटों की मांग काफी ज्यादा बढ़ गई है, क्योंकि अधिक से अधिक श्रद्धालु महाकुंभ का हिस्सा बनना चाहते हैं। हालांकि, अभी एयरलाइंस के पास डिमांड के मुकाबले काफी कम फ्लाइट और सीटें उपलब्ध हैं।
EMI पर असर: क्या घटेगा लोन का ब्याज दर
30 Jan, 2025 12:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को रोकने के बाद, भारत के केंद्रीय बैंक (RBI) की नीतिगत फैसलों पर इसका क्या असर पड़ेगा, खासकर जब बजट के बाद 7 फरवरी को RBI अपनी मौद्रिक नीति की घोषणा करेगा।
यदि हम इस सवाल को विस्तार से समझें, तो:
अमेरिकी फेडरल रिजर्व का निर्णय: अमेरिका में ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने का निर्णय विश्वभर के आर्थिक हालात पर असर डाल सकता है, क्योंकि फेड की नीतियों का प्रभाव भारतीय बाजारों और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
RBI का रुख: भारतीय रिजर्व बैंक का प्राथमिक लक्ष्य महंगाई को नियंत्रण में रखना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। अगर अमेरिकी फेड के फैसले के बाद वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं, तो यह संभावना बनती है कि RBI अपनी मौद्रिक नीति में स्थिरता बनाए रखेगा और ब्याज दरों में कोई खास बदलाव नहीं करेगा।
EMI पर असर: अगर RBI अपनी ब्याज दरें घटाता है, तो इसका सीधा असर आपके लोन और ईएमआई पर पड़ेगा। लेकिन, फिलहाल ऐसे कोई संकेत नहीं दिखते कि RBI ब्याज दरों में कटौती करेगा, खासकर अगर अमेरिका की आर्थिक नीति में कोई बड़े बदलाव न हों।
बजट का प्रभाव: 1 फरवरी को पेश होने वाला बजट भी आरबीआई की मौद्रिक नीति पर असर डाल सकता है। अगर बजट में आर्थिक सुधार के कदम उठाए जाते हैं, तो RBI अधिक लचीला रुख अपना सकता है।
इसलिए, यह कहना मुश्किल है कि RBI निश्चित रूप से अपनी नीतियों में बदलाव करेगा, लेकिन दुनिया भर की मौद्रिक नीतियों का भारतीय ईएमआई पर असर जरूर होगा।
गन्ना उत्पादन में गिरावट से चीनी उद्योग संकट में, उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा असर
29 Jan, 2025 05:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रतिकूल मौसम एवं बीमारी के चलते गन्ने के उत्पादन में गिरावट के साथ-साथ चीनी की रिकवरी दर में भी कमी देखी जा रही है। इससे चीनी उद्योग की चिंता बढ़ गई है। किसानों का नुकसान तय है। उपभोक्ताओं की जेब पर भी असर पड़ सकता है। रिकवरी का आशय गन्ने से चीनी निकलने की दर से है, जो फसल की गुणवत्ता, मौसम की स्थितियों एवं चीनी मिलों के शुरू होने के समय पर निर्भर करता है।
भारत में रिकवरी दर को दस प्रतिशत से ऊपर रहने पर बेहतर माना जाता है, किंतु इस बार कोई राज्य इसके आसपास भी नहीं पहुंचा है। राष्ट्रीय स्तर पर रिकवरी दर 8.81 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी दौरान यह आंकड़ा 9.37 प्रतिशत था। साफ है इस बार अभी तक गन्ने से 0.56 प्रतिशत कम चीनी की प्राप्ति हो रही है।
इसे सामान्य भाषा में ऐसे समझा जा सकता है कि पिछले साल चीनी मिलों तक पहुंचने वाले गन्ने से प्रति क्विंटल 9.37 किलोग्राम चीनी निकलती थी। इस बार उतने ही गन्ने से मात्र 8.81 किलो चीनी निकल रही है। जबकि पिछले वर्ष की तुलना में गन्ने की कीमतें बढ़ी हैं। उत्तर प्रदेश में प्रति क्विंटल 20 रुपये की वृद्धि हो चुकी है।
परिवहन लागत और मजदूरी के साथ अन्य खर्चे भी बढ़े हैं, किंतु गन्ने से चीनी निकलने की मात्रा घट गई है। यह बड़ा संकट है। इसकी सीधी मार किसानों पर पड़ रही है। चीनी मिल संचालक किसानों के गन्ने को कमतर श्रेणी का बताकर मूल्य घटा रहे हैं। किसान लाचार हैं, क्योंकि 11 प्रतिशत तक रिकवरी वाली गन्ने की उन्नत प्रजाति 0238 तेजी से बीमारी की चपेट में आ रही है। इसका कोई विकल्प भी नहीं है।
12 राज्य गन्ने के प्रमुख उत्पादक
नेशनल फेडरेशन ऑफ को-आपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे के अनुसार देश में 12 राज्य प्रमुखता से गन्ने का उत्पादन करते हैं। रिकवरी के मामले में इनमें से आठ राज्यों का हाल बुरा है। उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार और तेलंगाना को छोड़कर किसी राज्य में रिकवरी दर नौ प्रतिशत तक नहीं पहुंच पाई है।
सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश की रिकवरी में 0.85 प्रतिशत की गिरावट है। दूसरा महाराष्ट्र है, जहां 0.15 प्रतिशत की गिरावट है। मध्य प्रदेश और हरियाणा की स्थिति भी अधिक खराब है। यहां रिकवरी दर में लगभग एक प्रतिशत की कमी है।
चीनी का MSP पांच साल से स्थिर
चीनी मिल संगठनों का कहना है कि उत्पादन लागत में करीब 150 रुपये प्रति क्विंटल तक वृद्धि हो गई है, जबकि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) पिछले पांच वर्ष के आंकड़े पर स्थिर है। किसानों के घाटे को देखते हुए अगर गन्ने के परामर्श मूल्य में वृद्धि की गई तो चीनी मिलों का घाटा बढ़ जाएगा।
इसलिए उनकी मांग चीनी की एमएसपी बढ़ाने की है, लेकिन ऐसा होने पर मिलों और किसानों के नुकसान की भरपाई तो की जा सकती है, मगर उपभोक्ताओं की जेब ढीली हो सकती है।
सरकार का बड़ा फैसला, क्रिटिकल मिनरल्स की खोज और प्रोसेसिंग को मिलेगा नया आयाम
29 Jan, 2025 05:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत सरकार ने 34,300 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ नेशनल क्रिटिकल मिशन' को मंजूरी दी है, जिसका मसकद देश में महत्वपूर्ण मिनरलों की खोज, खनन और प्रसंस्करण की कीमतों की रेंज तैयार करना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने इस मिशन के शुभारंभ को मंजूरी दी, जो आत्मनिर्भर भारत पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
इस मिशन का खास मकसद क्लीन एनर्जी, हाई एडवांस इंडस्ट्रिज और डिफेंस में इस्तेमाल आने वाली जरूरी मिनरलों की मौजूदगी को सुनिश्चित करना है. इसमें देश के भीतर और अपतटीय क्षेत्रों में मिनरलों की खोज, खनन, लाभकारी, और प्रोसेसिंग शामिल है.
किसानों की होगी बल्ले-बल्ले
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री अश्विवी वैष्णव ने कहा, "विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से आने वाली पीढ़ी, अर्थव्यवस्था और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने के लिए कई फैसले लिए गए हैं, इसी श्रृंखला में आज प्रधानमंत्री ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन को मंजूरी दी है. उन्होंने आगे कहा कि गन्ने के खेत में से तीन चीजें निकलती हैं- सी हैवी मोलेसेस, बी हैवी मोलेसेस और गन्ने का रस। इन तीनों की खरीद कीमतों को आज कैबिनेट द्वारा मंजूरी दे दी गई. इसका जितना उपयोग इथेनॉल बनाने में होगा, उतना ही ये देश के लिए, किसानों के लिए, पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, इसलिए इसे प्रमुखता से बढ़ावा दिया जाता है. मंत्रिमंडल ने ‘सी’ श्रेणी के शीरा से बने एथनॉल की कीमत को 56.28 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 57.97 रुपये प्रति लीटर करने को मंजूरी दी.
निवेश और फाइनेंशियल मदद
इस मिशन के लिए 16,300 करोड़ रुपये के सरकारी खर्च और 18,000 करोड़ रुपये के पब्लिक अंडरटेकिंग व निजी क्षेत्र से आने वाले निवेश को लाने की योजना है. यह मिनरल परियोजनाओं के लिए फास्ट ट्रैक रेगुलेरिटी अप्रूवल की प्रक्रिया भी बनाएगा और जांच के लिए फाइनेंशियल मदद पहुंचाएगा.
विदेशी मिनरल प्रॉपर्टी का अधिग्रहण
मिशन भारतीय पब्लिक अंडरटेकिंग और निजी कंपनियों को विदेशों में मिनरल संपत्ति हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करेगा, ताकि भारत के लिए महत्वपूर्ण मिनरल्स की सप्लाई बनाए रखना सुनिश्चित की जा सके. साथ ही, मिनरल प्रोसेसिंग पार्कों की स्थापना और रीसाइक्लिंग को भी बढ़ावा देगा.
भारत-इंडोनेशिया के बीच व्यापार में 30 अरब डॉलर की हो सकती है वृद्धि: बाकरी
29 Jan, 2025 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । इंडोनेशिया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केएडीआईएन) के प्रमुख अनिंद्य बाकरी ने दूसरे देशों के साथ भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार की संभावनाओं के बारे में व्यापक चर्चा की। बाकरी ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार का हो सकता है बड़ा बढ़ता हुआ संबंध जिससे भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापार करीब 30 अरब अमेरिकी डॉलर का हो सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देश एक साथ मिलकर वृद्धि करेंगे और प्रभावी तरीके से विश्व की सेवा करेंगे। इस व्यापार के बड़े मौके को देखते हुए भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक संबंध, व्यापार व निवेश संबंधों को गहरा करने में केंद्रित कंपनी बाकरी एंड ब्रदर्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे पहले भारत और इंडोनेशिया के इस वर्ष व्यापार व निवेश पर कार्य समूह की दूसरी बैठक होगी, जिसमें दोनों देशों के व्यापार मंत्रियों के समाधान के लिए उम्मीद है। इसके साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वक्ताओं ने ब्रिक्स देशों के साथ बातचीत की महत्वता को भी उजागर किया।
फेडरल बैंक का मुनाफा तीसरी तिमाही में पांच प्रतिशत घटा
29 Jan, 2025 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । निजी क्षेत्र के फेडरल बैंक का मुनाफा चालू वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में पांच प्रतिशत घटकर 955 करोड़ रुपये रह गया। एक साल पहले इसी तिमाही में बैंक ने 1,007 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया था। शेयर बाजार को दी जानकारी के मुताबिक समीक्षाधीन तिमाही के दौरान बैंक की कुल आय बढ़कर 7,725 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 5,593 करोड़ रुपये थी। वित्त वर्ष 2024-25 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में ब्याज आय भी बढ़कर 6,809 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 5,730 करोड़ रुपये थी। परिसंपत्ति गुणवत्ता के मोर्चे पर, बैंक का सकल एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) सालाना आधार पर 2.29 प्रतिशत से सुधरकर 1.95 प्रतिशत हो गया। इसी तरह शुद्ध एनपीए 0.64 प्रतिशत से घटकर 0.49 प्रतिशत हो गया।
भारत में क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल में जोरदार बढ़ोतरी
29 Jan, 2025 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक की नवीन रिपोर्ट के मुताबिक क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल में भारत में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले पांच सालों में क्रेडिट कार्ड की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा होकर लगभग 10.80 करोड़ हो गई है। डिजिटल भुगतान में भी भारत में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। कैलेंडर वर्ष 2013 में 222 करोड़ डिजिटल लेन-देन होते थे, जो कैलेंडर वर्ष 2024 में 20,787 करोड़ से अधिक हो गए। भारत में डिजिटल भुगतान की मात्रा में 45.9 प्रतिशत व मूल्य में 10.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़े हुए इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ पेमेंट सिस्टम और छूटी कार्ड में रूपये की वृद्धि बना रहता है। आरबीआई ने यूपीआई को दूसरे देशों की फास्ट पेमेंट सिस्टम से जोड़ने की कई कोशिशें की हैं, जिससे सीमा पार रेमिटेंस पेमेंट को बढ़ाया जा सके। भूटान, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, सिंगापुर, श्रीलंका और यूएई में क्यूआर कोड के माध्यम से भारतीय यूपीआई ऐप का इस्तेमाल करके व्यापारियों को भुगतान सक्षम किया गया है। इनोवेशन और रेगुलेटरी सपोर्ट के साथ भारत का पेमेंट सिस्टम दुनिया भर में सबसे आधुनिक में से एक बन गया है। केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर ने कहा कि भुगतान क्षेत्र में इनोवेशन को प्रोत्साहित करना बैंक की नीति है। भारत में खुदरा डिजिटल भुगतान वित्तीय वर्ष 2012-13 से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2023-24 में 16,416 करोड़ से अधिक हो गया है, यानी 12 वर्षों में लगभग 100 गुना बढ़ोतरी हुई है।
डीपसीक के हमले से विश्व के अमीरों की संपत्ति में भारी गिरावट
29 Jan, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । चीनी एआई डेवलपर डीपसीक ने दुनिया भर के टॉप अमीरों की संपत्ति में भारी नुकसान कर दिया है। डीपसीक के हमले के कारण अमेरिका समेत अन्य देशों की शेयर मार्केट में गिरावट आई है। डीपसीक के हमले के परिणाम स्वरुप दुनिया के टॉप 500 अमीरों की संपत्ति में गिरावट आ गई है। उनकी नेटवर्थ कुल मिलाकर 108 अरब डॉलर कम हो गई है। इस हमले से सबसे ज्यादा नुकसान अमेरिकी शेयर मार्केट को हुआ है। अमेरिकी शेयर मार्केट में 3.1 फीसदी की गिरावट आई है और उसके परिणामस्वरूप अमेरिकी अरबपतियों को भी भारी नुकसान हुआ है। इस गिरावट का सबसे ज्यादा प्रभाव ओरेकल कॉर्प के को-फाउंडर लैरी एलिसन और एनवीडिया कॉर्प के को-फाउंडर जेन्सन हुआंग पर दिखा है। इन दोनों धनकुबेरों की संपत्ति में 20 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। इस गिरावट के बाद भी कुछ टेक कंपनियों के अरबपति अपनी संपत्ति में इजाफा देख रहे हैं। इसके बावजूद यह हमला टेक सेक्टर के दिग्गजों को 94 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचा चुका है। सोमवार को हुई गिरावट के बाद मार्क जुकरबर्ग की संपत्ति में बढ़ोतरी है जबकि जेफ बेजोस और बिल गेट्स भी इजाफा देख रहे हैं।
क्या TikTok को खरीद सकता है Microsoft? ट्रंप के जवाब ने सबको चौंकाया!
28 Jan, 2025 03:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
TikTok Ban: शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म TikTok को अमेरिकी कंपनी Microsoft खरीद सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि Microsoft TikTok को खरीदने के लिए बातचीत कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि TikTok की बिक्री के लिए बोली लगाई जानी चाहिए। आपको बता दें कि TikTok का स्वामित्व चीनी कंपनी ByteDance के पास है। अगर उसे अमेरिका में TikTok का संचालन जारी रखना है तो उसे किसी अमेरिकी कंपनी को बेचना होगा।
कई कंपनियों ने TikTok खरीदने की इच्छा जताई- ट्रंप
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या Microsoft TikTok के लिए बोली लगाने की तैयारी कर रही है तो उन्होंने सकारात्मक जवाब दिया। ट्रंप ने यह भी कहा कि कई कंपनियां इसमें रुचि रखती हैं। ByteDance ने TikTok को बेचने के लिए 2020 में भी Microsoft से संपर्क किया था। तब यह डील फाइनल नहीं हो पाई थी। इसके बाद चीनी कंपनी Oracle के पास भी ऐसा प्रस्ताव लेकर गई थी, लेकिन यहां भी बात नहीं बनी। अब अगर डील होती है तो TikTok की मालिक कंपनी ByteDance की इसमें अल्पमत हिस्सेदारी होगी, जबकि अमेरिकी कंपनी की आधी से ज्यादा हिस्सेदारी होगी।
क्यों मजबूर हुआ TikTok बेचने के लिए?
दरअसल, ByteDance पर TikTok यूजर्स का डेटा चीनी सरकार के साथ शेयर करने का आरोप था। अमेरिकी अदालतों ने भी इस आरोप को सही पाया और TikTok को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित किया। डेडलाइन के बाद भी बिक्री में विफल रही TikTok पर 19 जनवरी को कुछ घंटों के लिए प्रतिबंध भी लगाया गया था, लेकिन नए राष्ट्रपति ट्रंप ने कंपनी को कुछ समय दिया। इसके बाद TikTok का अमेरिका में संचालन फिर से शुरू हो गया।
खरीदारों की लिस्ट में ये बड़े नाम भी शामिल
Microsoft के अलावा कई अन्य बड़े नाम भी TikTok को खरीदने में रुचि रखते हैं। इनमें अमेरिकी अरबपति एलन मस्क, यूट्यूबर MrBeast, Oracle के प्रमुख लैरी एलिसन और अरबपति निवेशक फ्रैंक मैककोर्ट आदि शामिल हैं।
क्या सोने के आयात पर टैक्स घटाना भारतीय बाजार को प्रभावित करेगा
28 Jan, 2025 02:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जुलाई 2024 में जब सरकार ने मोदी 3.0 का पहला पूर्ण बजट पेश किया था, तो सोने पर टैक्स (इंपोर्ट ड्यूटी) को कम करके आम आदमी को बड़ी राहत दी थी. इसके बाद सोने की कीमतें नीचे आईं थी, लेकिन सोने का भाव फिर 80,000 के पार जा चुका है, तो क्या इस बार बजट में सरकार सोने को सस्ता बनाने पर फिर से काम करेगी?
क्या बजट में सस्ता होगा सोना? पिछली बार सरकार ने घटाया था टैक्स
बजट में गोल्ड पर क्या होगी बात?
सोने का भाव एक बार फिर देश में 80,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के पार जा चुका है. जुलाई में जब सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 का पूर्ण बजट पेश किया था, तो गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी कम की गई थी. इसका फायदा बाजार में देखने को मिला था और सोने का भाव 80,000 रुपए के भाव से काफी नीचे चला गया था. ऐसे में क्या 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट 2025 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोने की कीमतों को नीचे लाने पर जोर देंगी, ताकि आम आदमी फिर से इसे खरीद सके.
देश के ज्वैलरी चाहते हैं कि देश की वित्त मंत्री सोने की कीमतों को नीचे लाने पर फोकस करें. ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार इसके लिए ईएमआई पर सोना खरीदने का कोई मैकेनिज्म बना सकती है. इतना ही नहीं एक्सपर्ट के बीच सोने के कारोबार को स्टैंडर्ड बनाने के लिए एक सिंगल रेग्युलेटर की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है.
देश में हो सिंगल गोल्ड रेग्युलेटर
इस समय सोने का अलग-अलग तरीके से कारोबार होता है. इसमें गोल्ड ईटीएफ से लेकर डिजिटल गोल्ड और फिजिकल गोल्ड शामिल है. इसलिए इनको अलग-अलग रेग्युलेटर रेग्युलेट करते हैं. इसमें भारतीय प्रतिभूति विनियामक बोर्ड (सेबी), भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) शामिल हैं. साथ ही वित्त मंत्रालय और वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय भी सोने के कारोबार की निगरानी करते हैं.
मार्जिन सुधारने के लिए कम हो टैक्स
अगर सोने के गहनों और फिजिकल गोल्ड का कारोबार करने वाले रिफाइनर्स को देखें, तो ये लोग पिछले कई सालों से महज 0.65 प्रतिशत के मार्जिन पर काम कर रहे हैं. देश में बुलियन और ज्वैलर्स के सबसे बड़े संगठन IBJA के अध्यक्ष पृथ्वीराज कोठारी का कहना है कि इस मार्जिन को बेहतर करने के लिए सरकार को कच्चे सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी को कम करना चाहिए. इससे सोने की कीमतों में ओवरऑल कमी भी आएगी.
इसके अलावा देश में सोने के गहने बनाने वाले स्किल्ड लेबर की भी जरूरत महसूस की जा रही है. इसलिए सरकार को इनके कौशल विकास पर भी जोर देना चाहिए. ऐसा भी इंडस्ट्री के दिग्गजों का कहना है. भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड इंपोर्टर में से एक है. हर साल भारत का गोल्ड इंपोर्ट बढ़ रहाा है.
एनवीडिया को डीपसीक के कारण पहला बड़ा आर्थिक झटका, अरबों डॉलर का हुआ नुकसान
28 Jan, 2025 12:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चीन के एआई डेवलपर डीपसीक के वैश्विक शेयर बाजार में एक बड़ा भूचाल आ गया है। इसके असर से, दुनिया के 500 सबसे अमीर लोगों ने सोमवार को कुल 108 अरब डॉलर का नुकसान झेला। इसमें एनवीडिया के को-फाउंडर जेनसन हुआंग का नाम भी शामिल है।
कम लागत वाले चीन के एआई मॉडल ने बढ़ाई दुनिया की चिंता
कम लागत वाले चीन के एआई मॉडल डीपसीक ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस चिंता के कारण दुनिया भर के निवेशकों ने सोमवार को टेक कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली की। इसके असर से टेक शेयरों पर आधारित इंडेक्स नेस्डैक 3.1% गिर गया। चिप बनाने वाली कंपनी एनवीडिया को इसका सबसे बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। कंपनी के शेयर 17% तक टूट गए और कंपनी का मार्केट कैप एक ही दिन में 593 अरब डॉलर कम हो गया।
एनवीडिया के सीईओ की संपत्ति में 20.8 अरब डॉलर का नुकसान
सोमवार के कारोबारी सत्र में एनवीडिया के शेयरों का भाव 141 अमरीकी डॉलर प्रति शेयर से 17 प्रतिशत गिरकर 118.5 अमरीकी डालर प्रति शेयर पर पहुंच गया। इससे कंपनी के सीईओ और सबसे बड़े व्यक्तिगत शेयरधारक जेन्सेन हुआंग की संपत्ति भी करीब 20.8 अरब डॉलर कम हो गई।
जानकार बोले- डीपसीक से प्रतिस्पर्धा की आशंका के कारण टूटे एनवीडिया के शेयर
फोर्ब्स के अनुसार, हुआंग की संपत्ति 124.4 बिलियन अमरीकी डालर से गिरकर 103.7 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गई। इन्वेंचर ग्रोथ एंड सिक्योरिटीज ने इस मंदी के लिए डीपसीक एआई से बढ़ती प्रतिस्पर्धा की आशंका को जिम्मेदार ठहराया है। बाजार के विश्लेषकों को लगता है कि डीपसीक एआई से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के डर से निवेशकों ने बड़ी बिकवाली की है। डीपसेक लागत कुशल और कम परिष्कृत चिप्स का उपयोग कर उन्नत एआई मॉडल बनाने का दावा करता है। डीपसीक के उभरने से एआई के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर पहुंच गई है।
ट्रंप बोले- डीपसीक एआई का बढ़ना हमारे उद्योगों के लिए चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को डीपसीक एआई के कारण होने वाली गड़बड़ी पर टिप्पणी करते हुए कहा, "उम्मीद है कि एक चीनी कंपनी की ओर से डीपसीक एआई को बढ़ावा देना हमारे उद्योगों के लिए एक चेतावनी है। हमें जीतने के लिए प्रतिस्पर्धा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।"
तेजी के साथ खुला घरेलू शेयर बाजार; सेंसेक्स 323 अंक चढ़ा, निफ्टी 22900 के पार
28 Jan, 2025 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
घरेलू शेयर बाजार मंगलवार को हरे निशान पर खुला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 323.76 अंक चढ़कर 75,689.93 अंक पर पहुंचा, जबकि निफ्टी 77.25 अंक चढ़कर 22,906.40 अंक पर पहुंच गया। इसके अलावा शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 24 पैसे गिरकर 86.55 डॉलर पर आ गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) सोमवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 5,015.46 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
ऐसी रही बाजार की चाल
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बैंकिंग प्रणाली में नकदी बढ़ाने के उपायों की घोषणा के बाद बैंकिंग शेयरों में भारी खरीदारी से मंगलवार को घरेलू बाजारों सेंसेक्स और निफ्टी ने सकारात्मक रुख के साथ कारोबार की शुरुआत की। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 382.53 अंक या 0.51 प्रतिशत चढ़कर 75,748.70 अंक पर पहुंच गया। एनएसई निफ्टी 55.90 अंक या 0.24 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,885.05 अंक पर रहा।
किसे फायदा-किसे नुकसान?
सेंसेक्स में सूचीबद्ध 30 कंपनियों में से इंफोसिस, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, जोमैटो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इंडसइंड बैंक और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। वहीं सन फार्मास्यूटिकल्स, एनटीपीसी, पावरग्रिड, अडानी पोर्ट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईटीसी के शेयरों में गिरावट आई।
आरबीआई की घोषणा के बारे में जानिए
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकिंग प्रणाली में तरलता (नकदी) बढ़ाने के लिए तीन किस्तों में 60,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां खरीदने और कई अन्य कदमों की सोमवार को घोषणा की। आरबीआई ने बैंकिंग नकदी की स्थिति के प्रबंधन उपायों के तहत 31 जनवरी 2025 को छह महीने की अवधि के लिए पांच अरब डॉलर के अमेरिकी डॉलर या रुपये की खरीद या बिक्री अदला-बदली नीलामी की भी घोषणा की है।
रुपया शुरुआती कारोबार में गिरा
तेल आयातकों की ओर से डॉलर की निरंतर मांग के बीच रुपया मंगलवार को शुरुआती कारोबार में 26 पैसे कमजोर होकर 86.57 प्रति डॉलर पर आ गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 86.53 पर खुला और फिर फिसलकर 86.57 प्रति डॉलर पर आ गया, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 26 पैसे की गिरावट दर्शाता है। रुपया सोमवार को नौ पैसे कमजोर होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 86.31 पर बंद हुआ था।
क्रॉस ने पेश की एक नई कॉन्सेप्ट साइकिल
27 Jan, 2025 05:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ऑटो एक्सपो समाप्त हो चुका है. इसका हैंगओवर लोगों के अंदर से अभी तक नहीं गया है. सोशल मीडिया पर लोग अभी तक इसके रील्स शेयर कर रहे है. ऐसे में आइए क्रॉस नामक एक कंपनी की एक लाजवाब साइकिल पर एक नजर डालते है. यह साइकिल शानदार गेयर्स से लैस है. इसे चलाना काफी कंफर्टेबल है. क्रॉस ने एक कांसेप्ट बाइक साइकिल लॉन्च किया है. यह साइज में बिल्कुल छोटी सी है. अगर आप इसको देखेंगे तो आप इसको कह सकते हैं कि यह बाबा आदम के जमाने की साइकिल है.
इतनी है कीमत:
जब साइकिल के सबसे शुरुआती डिजाइन बने थे तब इसी तरह की साइकिल बनती थी. इसमें बस एक फर्क था कि उसमें बड़ा टायर आगे होता था. वहीं छोटा टायर पीछे होता था. इसमें कंपनी ने उसे चेंज कर दिया है. कंपनी ने इसमें एक छोटा टायर आगे लगाया और बड़ा टायर पीछे लगाया है. इसमें पीछे 26 इंच का टायर दिया गया है. क्रॉस की यह एक कॉन्सेप्ट बाइक है. इसकी कीमत करीब 7500 है. कंपनी ने इसका डिजाइन लोगों को वापस साइकिल से जोड़ने के लिए किया है.
एक है पर काम अनेक:
इस साइकिल में कंपनी ने पीछे की साइड डिस्क ब्रेक दिए हैं. डिस्क ब्रेक पीछे की तरफ है. इसके अलावा आगे का टायर काफी छोटा रखा गया है. इसमें एक ही हैंडल में ब्रेक दिया गया है. दूसरे हैंडल में ब्रेक नहीं है. हैंडल आपको अच्छे से ग्रिप देता है. यह पकड़ने के लिए और काफी अच्छे है. इसका बैलेंस काफी शानदार है. इस साइकिल की सबसे इंपोर्टेंट चीज यह है कि इसे आप पहाड़ पर आसानी से चला सकते हैं. आप कंपनी से स्पेशली ऑर्डर करके इसे मंगा सकते हैं.
आसानी से नहीं मिलेगी यह कॉन्सेप्ट बाइक:
यह कॉन्सेप्ट बाइक है. यह आपको आसानी से उनके स्टोर पर नहीं मिलेगी. यह साइकिल शानदार गेयर्स से लैस है. इसे चलाना काफी कंफर्टेबल है. क्रॉस ने एक कांसेप्ट बाइक साइकिल लॉन्च किया है. हैंडल आपको अच्छे से ग्रिप देता है. आप कंपनी से स्पेशली ऑर्डर करके इसे मंगा सकते हैं. इसे चलाना काफी कंफर्टेबल है.
सेबी चेयरपर्सन का कार्यकाल खत्म, सरकार ने नए चेयरपर्सन के लिए आवेदन मांगे
27 Jan, 2025 02:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
SEBI: मार्केट रेगुलेटर सेबी की चेयरपर्सन का कार्यकाल पूरा होने वाला है। सरकार ने उनकी जगह नए चेयरपर्सन के लिए आवेदन मंगाया है। मौजूदा चेयरपर्सन तीन साल का कार्यकाल 28 फरवरी को खत्म हो रहा है। 2 मार्च, 2022 को पदभार संभाला था।
वित्त मंत्रालय के तहत आर्थिक मामलों के विभाग ने एक सार्वजनिक विज्ञापन में 17 फरवरी तक उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। मंत्रालय ने कहा, "नियुक्ति कार्यभार संभालने की तारीख से अधिकतम 5 साल की अवधि के लिए या नियुक्त व्यक्ति की उम्र 65 साल होने तक, जो भी पहले हो, के लिए की जाएगी।"
कितना होगा वेतन
सेबी चेयरपर्सन को भारत सरकार के सचिव के बराबर वेतन मिलेगा। यह फिलहाल 5,62,500 रुपये महीना है। इसमें घर और गाड़ी की सुविधा शामिल नहीं है। वित्त मंत्रालय का यह भी कहना है कि रेगुलेटर के तौर पर सेबी की भूमिका काफी अहम है। ऐसे में चेयरपर्सन के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार को कुछ पैमानों पर खरा उतरना होगा।
भारतीय बैंकों के नॉन-परफॉर्मिंग असेट्स में गिरावट, 2025 तक 0.4 प्रतिशत कम होने की संभावना
27 Jan, 2025 01:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय बैंकों का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग असेट (जीएनपीए) मार्च, 2025 तक 0.4 प्रतिशत घटकर 2.4 प्रतिशत हो सकता है। इसके बाद अगले वित्त वर्ष में इसमें 0.2 प्रतिशत की और गिरावट आएगी। रेटिंग एजेंसी फिच की रिपोर्ट के अनुसार, 'यह बात ठीक है कि असुरक्षित खुदरा ऋणों में जोखिम बढ़ रहा है, लेकिन मजबूत विकास, तेज वसूली और कर्ज को बट्टे खाते में डालने से NPA में होने वाली वृद्धि की भरपाई होने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्तमान में 50 हजार रुपये तक दिए जाने वाले पर्सनल लोन में जोखिम बढ़ रहा है। इस तरह के कर्ज गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और फिनटेक द्वारा कम आय वालों को अधिक दिया जाता है, इसलिए इस वर्ग में बड़े भारतीय बैंकों को जोखिम कम है। आरबीआई को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2024-25 में बिगड़ा हुआ ऋण अनुपात कम हो जाएगा, जिसके बाद यह वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर लगभग तीन प्रतिशत हो जाएगा। वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही में यह 2.6 प्रतिशत था।
वित्त वर्ष 2024 तक के तीन सालों में असुरक्षित पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड उधारी क्रमश: 22 प्रतिशत और 25 प्रतिशत की चक्रवृद्धि दर से बढ़े हैं। असुरक्षित ऋण से जुड़े जोखिम भार में वृद्धि के बाद, सितंबर 2024 को समाप्त पहली छमाही में यह गति क्रमश: 11 प्रतिशत और 18 प्रतिशत साल-दर-साल तक धीमी हो गई। जून, 2024 तक भारत का घरेलू ऋण सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 42.9 प्रतिशत है, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई उभरते बाजारों की तुलना में कम है।
सरकार का सब्सिडी बोझ बढ़ने का अनुमान
बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में सरकार का सब्सिडी बोझ बढ़कर लगभग 4.1-4.2 लाख करोड़ रुपये तक हो जाने की उम्मीद है। यह वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य और उर्वरक सब्सिडी पर अधिक खर्च के कारण है। सरकार ने शुरू में वित्त वर्ष 2025 के लिए खाद्य, उर्वरक और पेट्रोलियम सहित प्रमुख सब्सिडी के लिए 3.8 लाख करोड़ रुपये का बजट अनुमान (बीई) निर्धारित किया था।
हालांकि, रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि विपणन सीजन 2025-26 के लिए रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि के बाद यह आवंटन लगभग 10 प्रतिशत से अधिक होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, भंडारण और परिवहन की उच्च लागत सब्सिडी व्यय को और बढ़ा रही है। रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि अकेले उर्वरक सब्सिडी के चलते ही बजट नौ से दस प्रतिशत अधिक होने की उम्मीद है। इसका प्रमुख कारण यह है कि मजबूत डॉलर ने आयात लागत बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026 में सब्सिडी के बोझ से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि सरकार द्वारा इसे तर्कसंगत बनाए जाने की उम्मीद है। ऐसे में कुल सब्सिडी बोझ घटकर चार लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि खाद्य सब्सिडी में बड़ी गिरावट की उम्मीद है, जिसे 2-2.1 लाख करोड़ रुपये के बीच सीमित रखने का अनुमान है। उधर, आयात लागत के निरंतर दबाव के कारण उर्वरक सब्सिडी 1.7-1.8 लाख करोड़ रुपये पर रहने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 25 के लिए सरकार के सकल उधारी लक्ष्य पर भी प्रकाश डाला गया है, जिसे 14.01 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि शुद्ध उधारी 11.63 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।
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