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बजट 2025-26: इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा में बढ़ोतरी, वित्त मंत्री ने दी राहत
1 Feb, 2025 03:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को किसी भी असेसमेंट ईयर के लिए अपडेटिड इनकम टैक्स रिटर्न को लेकर बड़ी राहत दी है. बजट में सरकार ने आईटीआर दाखिल करने की डेडलाइन बढ़ाने का ऐलान किया है. पहले आपको दो साल तक का समय दिया जाता था. अब इसे बढ़ाकर चार तक कर दिया गया है. आपको बता दें कि सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम के तहत 12 लाख रुपए तक की सालाना कमाई पर कोई टैक्स ना वसूलने का ऐलान किया है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर रिटर्न फाइलिंग के अलावा और कौन कौन से ऐलान किए हैं.
ये किए अहम ऐलान
देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आईटीआर दाखिल करने की समयसीमा को मौजूदा दो साल से बढ़ाकर चार साल करने का प्रस्ताव वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में रखा है.
सीतारमण ने अपने बजट भाषण में उन मामलों में शिक्षा के उद्देश्यों के लिए भेजे गए धन के लिए टीसीएस (स्रोत पर एकत्रित कर) की छूट का भी प्रस्ताव रखा, जहां शिक्षा ऋण कुछ निर्दिष्ट वित्तीय संस्थानों से लिया गया हो.
उन्होंने कहा कि डायरेक्टर कर विवादों को निपटाने के लिए लाई गई विवाद से विश्वास 2.0 योजना का 33,000 टैक्सपेयर्स ने लाभ उठाया है.
इसके साथ ही सीनियर सिटीजंस को ब्याज से हुई आय पर कर कटौती की सीमा दोगुनी करके एक लाख रुपए करने की घोषणा भी बजट में की गई.
वित्त मंत्री ने किराए पर टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) की सीमा को भी बढ़ाकर छह लाख रुपए करने का प्रस्ताव किया है.
इसके अलावा, बजट में स्टार्टअप कंपनियों को अब कंपनी के गठन से पांच साल की अवधि तक कर लाभ मिलता रहेगा.
12 लाख की कमाई को टैक्स नहीं
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उम्मीदों के अनुरूप मिडिल क्लास को बड़ी राहत देते हुए 12 लाख रुपए तक की सालाना आय को पूरी तरह से कर मुक्त किये जाने की घोषणा की. यह छूट नई आयकर व्यवस्था में दी गयी है. स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपए के साथ नौकरीपेशा लोगों को अब 12.75 लाख रुपए तक की सालाना आय पर कोई कर नहीं देना होगा. वित्त मंत्री ने कहा कि कर छूट से मध्यम वर्ग के लोगों के पास खपत के लिए अधिक पैसे बचेंगे. साथ ही निवेश और बचत भी बढ़ेगी. वित्त मंत्री ने इसके साथ अलग-अलग कर स्लैब में भी बदलाव का प्रस्ताव किया.
इसके तहत, अब चार लाख रुपए सालाना आय पर कोई कर नहीं लगेगा. चार से आठ लाख रुपए पर पांच प्रतिशत, आठ से 12 लाख रुपए पर 10 प्रतिशत, 12 लाख से 16 लाख रुपए पर 15 प्रतिशत, 16 से 20 लाख रुपए पर 20 प्रतिशत, 20 लाख रुपए से 24 लाख रुपए पर 25 प्रतिशत तथा 24 लाख रुपए से ऊपर की सालाना आय पर 30 प्रतिशत कर लगेगा. प्रत्यक्ष कर छूट से सरकारी खजाने पर एक लाख करोड़ रुपए का बोझ आएगा.
वित्त मंत्री ने की घोषणा; किराए से आय पर टीडीएस छूट सीमा 2.4 लाख से बढ़ाकर 6 लाख रुपये की गई
1 Feb, 2025 03:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025-26 में टैक्सपेयर्स को कई मामलों में बड़ी राहत दी है. साथ ही मकान मालिकों को भी सरकार ने बंपर तौहफा दिया है. सरकार ने घोषणा की है कि किराए से आने वाली इनकम पर टीडीएस छूट की सीमा को 2.4 लाख रुपये से बढ़ाकर 6 लाख रुपये तक कर दी गई है. इससे छोटे टैक्सपेयर्स को बड़ा फायदा मिलेगा होगा और साथ ही अनुपालन की प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी. वहीं, अब दो घरों में भी टैक्स छूट की शर्तों पर ढील होगी.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बजट में टैक्स व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण सुधारों का प्रस्ताव रखा, जिनमें खासतौर पर दूसरे घर पर टैक्स छूट की शर्तों में ढील दी गई है. इससे अब दूसरे घर में भी रहने वालों को टैक्स बेनिफिट्स का लाभ मिलेगा. पहले केवल पहले घर पर ही टैक्स छूट दी जाती थी, लेकिन अब अगर किसी के पास दो घर हैं और वह दोनों में रहते हैं, तो वह दोनों पर टैक्स बेनिफिट्स का दावा कर सकते हैं. इससे घर मालिकों को बड़ा फायदा मलेगा.
छोटे टैक्सपेयर्स को बड़ा फायदा
बजट में टीडीएस और टीसीएस की प्रणाली को सरल बनाने पर भी जोर दिया गया. वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार टीडीएस दरों और कटौती की सीमाओं को आसान बनाने के लिए काम कर रही है. वहीं, किराए पर मिलने वाली इनकम के लिए टीडीएस की सीमा बढ़ाकर 6 लाख रुपये करने से छोटे टैक्सपेयर्स को बड़ा फायदा होगा, क्योंकि 6 लाख से कम लेन-देन टीडीएस के दायरे में आएंगे और इससे अनुपालन की कठिनई भी कम होगी.
अर्थव्यवस्था में आएगी तेजी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य छह प्रमुख क्षेत्रों में सुधार लागू करना है, जिनमें टैक्सेशन, बिजली, शहरी विकास, खनन, वित्तीय क्षेत्र और नियामक सुधार शामिल हैं. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनाना है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि मोदी सरकार के तहत यह 14वां बजट है, और यह भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व में सबसे समृद्ध बनाने के लिए एक अहम कदम है.
बजट से पहले सरकार ने घटाई एलपीजी कमर्शियल सिलेंडर की कीमत
1 Feb, 2025 11:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज 11 बजे बजट पेश करेंगी। इससे पहले एलपीजी गैस सिलेंडर को लेकर राहत की खबर सामने आई है। LPG गैस सिलेंडर आज से सस्ता हो गया है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में संशोधन किया है। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम आज से 7 रुपये कम हो गए हैं।
दिल्ली में आज से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की खुदरा बिक्री कीमत 1797 रुपये है। हालांकि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत को लेकर ऐसा कोई अपडेट सामने नहीं आया है, उसकी कीमत में अभी कोई बदलाव नहीं होगा।
घरेलू गैस सिलेंडर के दाम स्थिर
घरेलू गैस सिलेंडर यानी 14 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर के दाम में 1 अगस्त 2024 से कोई बदलाव नहीं हुआ है।
दिल्ली में इसकी कीमत 803 रुपये, कोलकाता में 829 रुपये, मुंबई में 802.50 रुपये और चेन्नई में 818.50 रुपये बनी हुई है।
2025 में ये दूसरी कटौती
बता दें कि 2025 में LPG सिलेंडर के दाम में यह दूसरी कटौती है। साल के पहले दिन एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में दिल्ली से मुंबई तक और कोलकाता से चेन्नई तक कटौती की गई थी। दिल्ली में 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1804 रुपए कर दी गई थी। बीते 1 दिसंबर को इसकी कीमत 1818.50 रुपए थी।
वहीं मुंबई में एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 15 रुपये की कटौती हुई थी। 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर 1771 रुपये की जगह 1756 रुपये हो गया था।
केंद्रीय बजट 2025 से पहले आर्थिक सर्वे में पेश किया गया 2047 तक का विकास रोडमैप
1 Feb, 2025 11:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Budget 2025 सरकार की दिशा विकसित भारत है और बजट से पूर्व शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने भी अपने संक्षिप्त संदेश में इस पर जोर दिया। लेकिन इसकी एक बड़ी शर्त है यह है कि कम से कम एक दशक तक आठ फीसद की ग्रोथ रेट बनी रहे। वित्त वर्ष 2024-25 और वर्ष 2025-26 में आर्थिक विकास दर के घटने की आशंकाओं के बीच इसपर ज्यादा ध्यान दिया जाना जरूरी हो गया है।
भारत में कारोबार की प्रक्रिया को आसान बनाना प्राथमिकता
सदन में शुक्रवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025 में 2047 तक भारत को किस तरह से विकसित देश बनाया जाए, इसका एक संपूर्ण रोडमैप दिया गया है। रोडमैप में मौजूदा नियमों व कानूनों में बहुत ही व्यापक स्तर के संशोधन व बदलावों की जरूरत बताते हुए भारत में कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान बनाने को प्राथमिकता के तौर पर गिनाया है। लेकिन सुधारों की आगामी प्रक्रिया में केंद्र से ज्यादा राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई है।
10 ऐसे सेक्टर, जहां राज्यों करना होंगे सुधार
वैसे सुधारों को लेकर आर्थिक सर्वेक्षण पहले ही सरकार को सुझाव देता रहा है और उनमें से कई सुझावों पर कभी अमल नहीं हो पाता। इस बार देखना होगा कि एक दिन बाद पेश होने वाले आम बजट 2025-26 में वित्त मंत्रालय के प्रमुख आर्थिक सलाहकार अनंत नागेश्वरन के सुझावों की बानगी दिखती है या नहीं। आर्थिक सर्वेक्षण में दस ऐसे सेक्टर बताये गये हैं जहां राज्यों को नियमों व प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।
ये क्षेत्र हैं प्रशासन, भूमि, बिल्डिंग व कंस्ट्रक्शन, श्रम, बिजली-पानी जैसी सुविधाएं, ट्रांसपोर्ट, वेयरहाउस जैसे लॉजिस्टिक्स क्षेत्र, कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री, पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्र। इन क्षेत्रों में राज्यों के पास इतने अधिकार हैं कि कारोबार की शुरुआत करने, उसे बंद करने की प्रक्रिया को दुरूह बनाते हैं और इससे आर्थिक गतिविधियों की राह में अड़चनें आती हैं।
सुधारवादी नीतियों को दोहराएं राज्य
राज्यों को सुझाव दिया गया है वो जिन क्षेत्रों में दूसरे राज्य बेहतर कर रहे हैं या दूसरे देशों में सुधार हो रहे हैं, उनसे सीखें और उन सुधारवादी नीतियों को दोहरायें। उदाहरण के तौर पर कुछ राज्यों ने आईटी सेक्टर में महिला कर्मचारियों को लेकर पारंपरिक नीतियों को बदला है, अन्य सभी राज्य इसका अनुसरण कर सकते हैं। जापान, दक्षिण कोरिया ने शहरी विकास व औद्योगिकीकरण को लेकर जो नीतियां लागू की हैं, राज्य उनसे भी सीख सकते हैं।
नियम आसान होंगे तभी होगा विकसित भारत के सपना साकर
विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए नियमों को आसान बनाने का काम में अब क्षणिक भी विलंब नहीं करना होगा। बिना इसके आर्थिक विकास को तेज करने के दूसरे उपायों का खास असर नहीं होगा। सर्वेक्षण ने यहां तक कहा है कि भारत विकास की जिस स्तर पर अभी है वहां पारंपरिक आर्थिक नीतियों को ही आगे बढ़ाना प्रासंगिक नहीं रहेगा।
निवेश के स्तर को बढ़ाना होगा
पूरी दुनिया में नीतियों को लेकर सोच बदला चुका है। खुले कारोबार, पूंजी व प्रौद्योगिकी के आसानी से एक देश से दूसरे देश में हस्तांतरण और वैश्विककरण वाली नीतियां अब पुराने दिनों की बात रह गई हैं। निवेश के स्तर को मौजूदा 31 फीसद (जीडीपी के अनुपात में) से बढ़ा कर 35 फीसद करने को ना सिर्फ विकसित राष्ट्र बनाने के लिए बल्कि देशवासियों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए भी जरूरी बताया गया है। सर्वेक्षण के मुताबिक दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान के संदर्भ में, चीन के संदर्भ में और दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संदर्भ में यह साबित हो चुका है।
Rail Budget 2025: रेलवे में सुधार की दिशा में बड़े बदलाव, यात्रियों को मिल सकती है राहत
1 Feb, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बजट 2025 में भारतीय रेलवे के पूंजीगत व्यय आवंटन में 15-20% का इजाफा किया जा सकता है। यह उम्मीद इसलिए की जा रही है क्योंकि चालू वर्ष का आवंटन समय पर खर्च हो रहा है। देश के सबसे बड़े ट्रांसपोर्टर के लिए बजट 2025-26 में कुल पूंजीगत व्यय आवंटन (कैपेक्स) का चालू वित्त वर्ष के ₹2.65 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹3 लाख करोड़ से अधिक किया जा सकता है। आने वाले बजट में सरकार का जोर आधुनिक रेलवे स्टेशन बनाने, नए दौर की ट्रेनें शुरू करने और ट्रैक नेटवर्क पर भार कम करने पर रह सकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट 01 फरवरी 2026 को लोकसभा में पेश करेंगी।
20% तक बढ़ाया जा सकता है रेलवे में कैपेक्स पर आवंटन
रेलवे से जुड़े एक सूत्र के अनुसार आने वाले बजट में रेलवे के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) पर आवंटन 20 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है। रेलवे के अनुमानों के अनुसार पिछले बजट में इस मद में मिले 2.65 लाख करोड़ रुपये में से रेलवे ने अब तक करीब 80 फीसदी खर्च कर लिए हैं। एक वरीय अधिकारी के अनुसार रेलवे बोर्ड ने चालू वित्तीय वर्ष में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। उनके अनुसार वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले कैपेक्स का लक्ष्य पूरी तरह से हासिल कर लिया जाएगा।
रेल बजट में आम लोगों के खास अनुभव के लिए क्या होगा एलान?
आने वाले साल के लिए पेश होने वाले बजट में वित्त मंत्री आम लोगों को खास अनुभव देने के लिए रेलवे के लिए बड़ा एलान कर सकती हैं। इस बजट में सरकार की ओर से नए ट्रैक बिछाने और पुराने ट्रैकों को अपग्रेड करने के लिए ज्यादा आवंटन का एलान हो सकता है। रोलिंग स्टॉक लोकोमोटिव, वैगन और कोचों की खरीद पर भी खर्च बढ़ाया जा सकता है। सरकार की महत्वाकांक्षी मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर (एमएएचएसआर) पर सरकार अपना खर्च बढ़ाना जारी रख सकती है। परियोजना में गति तेज करने के लिए बुलेट ट्रेन के बजट आवंटन में इजाफा किया जा सकता है। इसके अलावे, कारोबार जगत ने भी सरकार से अपील की है कि वह बड़े पूंजीगत व्ययों पर खर्च बढ़ाना जारी रखे, जिससे निजी निवेश को प्रोत्साहन मिले और नरम पड़ी वृद्धि दर दोबारा ट्रैक पर लौट सके।
पीपीपी मोड के तहत रेलवे पर खर्च बढ़ाने की तैयारी
देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्तीय वर्ष में चार साल के निचले स्तर पर पहुंचकर 6.4% रहने का अनुमान है। पिछले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा 8.2% था। केंद्र सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में पूंजीगत व्यय के लिए 11.1 लाख रुपये मुहैया कराए हैं। यह राशि पिछले वित्त वर्ष (2023-24) की पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित राशि 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इस राशि का बड़ा हिस्सा रेलवे और सड़क जैसी बड़ी परियोजनाओं पर खर्च किया गया है। वित्तीय वर्ष 2026 में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी मोड) के तहत निवेश लक्ष्य बढ़ाने की उम्मीद है। रेलवे ने चालू वित्तीय वर्ष में पीपीपी के तहत पूंजीगत खर्चों पर 10 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है, इसका 90% मध्य जनवरी तक खर्च किया जा चुका है।
बुनियादी ढांचे के विकास और यात्री सुविधाओं पर रहेगा सरकार का जोर
चालू वित्त वर्ष में रोलिंग स्टॉक के लिए 50,903 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय की योजना थी। नई लाइनें, गेज परिवर्तन, ट्रैक दोहरीकरण, यातायात सुविधाएं, रेलवे विद्युतीकरण, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में निवेश और महानगरीय परिवहन सहित क्षमता वृद्धि कार्य के लिए आवंटन 1.2 लाख करोड़ रुपये था। इस वर्ष सुरक्षा संबंधी कार्यों के लिए 34,412 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। वित्तीय वर्ष 2025 में रेलवे ने बुलेट ट्रेन परियोजना को क्रियान्वित करने वाली इकाई नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचआरसीएल) पर 21,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई थी। इस बार के बजट में इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर के काम में तेजी लाने और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। रेलवे नए वित्तीय वर्ष में आधुनिक वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का परिचालन भी शुरू करने वाला है। इससे जुड़े एलान भी बजट में हो सकते हैं। इससे लंबी यात्राओं के दौरान यात्रियों का अनुभव बेहतर होने की उम्मीद है।
बजट 2025: पीएम मोदी ने दिया बड़ा संकेत, मिडिल क्लास को राहत की उम्मीद
31 Jan, 2025 04:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पीएम नरेंद्र मोदी ने बजट सत्र की शुरुआत में मीडिया को संबोधित किया। इसमें उन्होंने संकेत दिया कि 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में मिडिल क्लास को बड़ी राहत मिल सकती है। पीएम मोदी ने इसके लिए धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी का आह्वान भी किया।मैं प्रार्थना करता हूं कि देवी लक्ष्मी गरीब और मध्यम वर्ग पर आशीर्वाद बरसाएं। यह मेरे तीसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट है। मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि 2047 में जब भारत आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तो भारत विकसित भारत के अपने लक्ष्य को पूरा करेगा। यह बजट देश को नई ऊर्जा और उम्मीद देगा।
क्या इनकम टैक्स में मिलेगी राहत?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2024 को केंद्रीय बजट पेश करेंगी। उनके बजट भाषण से ठीक एक दिन पहले पीएम मोदी ने खासतौर पर मिडिल क्लास का जिक्र करके अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या बजट 2025 आम आदमी को इनकम टैक्स में राहत देगा, जिसकी जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।
वेतनभोगी करदाताओं को उम्मीद है कि बजट में इनकम टैक्स में कटौती, दरों में बदलाव और कर के बोझ को कम करने जैसी राहत मिल सकती है। टैक्स एक्सपर्ट और अर्थशास्त्री भी नई आयकर व्यवस्था के तहत आयकर स्लैब को और अधिक युक्तिसंगत बनाने और मध्यम वर्ग के हाथों में अधिक डिस्पोजेबल आय देने के लिए मानक कटौती में बढ़ोतरी की वकालत कर रहे हैं।
किस टैक्स रिजीम में मिल सकती है छूट?
सरकार का पूरा फोकस अब न्यू टैक्स रिजीम पर है। इसलिए अगर कोई राहत मिलती है, तो वो नई टैक्स व्यवस्था में ही मिलेगी। वहीं, सरकार ओल्ड टैक्स रिजीम को खत्म करने पर भी विचार कर सकती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 72 फीसदी टैक्सपेयर्स ने नई आयकर व्यवस्था को अपना लिया है।
क्यों मिल सकती है टैक्स में राहत?
केंद्रीय बजट 2025 ऐसे समय में पेश हो रहा है, जब जीडीपी ग्रोथ दो साल के निचले स्तर 5.4 फीसदी पर आ गई है। यही वजह है कि सरकार अर्थव्यवस्था में खपत को बढ़ावा देने के लिए इनकम टैक्स रेट में कटौती कर सकती है। इससे लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा बचेगा, जिसके खर्च से खपत को बढ़ावा मिलेगा। आर्थिक जानकार भी सरकार को यही रास्ता सुझा रहे हैं।
भारत को 2030 तक हर साल 78.5 लाख जॉब्स की जरूरत, इकोनॉमिक सर्वे में अहम सुझाव
31 Jan, 2025 04:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देश के इकोनॉमिक सर्वे में कई तरह के सुझाव दिए गए हैं. जो देश इकोनॉमी को बढ़ाने में काफी कारगर साजबित हो सकते हैं. जिसमे सबसे अहम सुझाव नौकरी जेनरेट करने को लेकर है. इकोनॉमिक सर्वे में सुझाव दिया गया है कि भारत को 2030 तक सालाना 78.5 लाख नए नॉन फार्म जॉब क्रिएट करने की जरूरत है. साथ ही 100 फीसदी हासिल करने, हमारे शिक्षा संस्थानों की क्वालिटी में सुधार करने और भविष्य के लिए तैयार बुनियादी ढांचे का तैयार करने की जरूरत है. वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है, वर्कफोर्स की महत्वाकांक्षाएं और आकांक्षाएं देश के डेमोग्राफिक डिविडेंड का लाभ उठाने और एग्री से नॉन एग्री जॉब्स तक संरचनात्मक परिवर्तन में तेजी लाने के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की आवश्यकता है.
युवाओं को प्रोडक्टिव बनाना जरूरी
सर्वे के अनुसार विकास और समृद्धि के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में, किसी भी इकोनॉमी में रोजगार की मात्रा और गुणवत्ता यह निर्धारित करती है कि आर्थिक विकास जनता तक कैसे पहुंचता है. 10-24 वर्ष की आयु वर्ग की लगभग 26 फीसदी आबादी के साथ, भारत टॉप पर है. सर्वे में कहा गया है कि भारत ग्लोबल लेवल पर सबसे . युवा देशों में से एक है. भारत की आर्थिक सफलता इस बात निर्भर करेगी कि वह अपने युवा वर्क फोर्स को कितना प्रोडक्टिव बन पाती है. इको सर्वे में कहा गया है कि डेमोग्राफिक डिविडेंड का पूरी तरह से लाभ उठाने के लिए क्वालिटी वाली नौकरियां पैदा करना महत्वपूर्ण है.
इसके अलावा, रीस्किलिंग, अपस्किलिंग और नई-स्किलिंग को प्राथमिकता देकर, सरकार का लक्ष्य वर्कफोर्स को ग्लोबल डिमांड के साथ जोड़ना है, जिससे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी. सर्वे के अनुसार, कंप्लायंस को सरल बनाना, लेबर फ्लेक्सीबिलिटी को बढ़ावा देना और श्रमिकों के कल्याण को मजबूत करना स्थायी नौकरी वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है. सर्वे में कहा गया है कि रेगुलेशन के माध्यम से व्यवसाय करने की निश्चित लागत कम करने से उद्यमों के लिए अधिक नियुक्तियां करने की गुंजाइश बनेगी.
डेमोग्राफिक डिविडेंड ना बन जाए डिजास्टर
बेरोजगारी की संभावित चिंता एशिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी पर भारी पड़ रही है. देश की इकोनॉमिक ग्रोथ चार साल में सबसे कम देखने को मिल सकती है. जिसकी वजह से देश की आर्थिक गति में दरारें उजागर हो सकती हैं. अर्थशास्त्रियों के अनुसार, बेरोजगारी से निपटने के लिए सरकार दीर्घकालिक रणनीतियां ही बनानी होंगी. उसके बिना भारत का ये डेमोग्राफिक डिविडेंड डेमोग्राफिक डिजास्टर में बदल सकता है. यह बजट न केवल 2025 के लिए दिशा तय करेगा बल्कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार के अगले चार वर्षों के लिए इकोनॉमिक ट्रैजेक्ट्री भी निर्धारित करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, कल पेश होने वाले केंद्रीय बजट में नौकरियों पर ज्यादा फोकस देखने को मिलेगा.
कितनी रह सकती है 2025 की जीडीपी
इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार मजबूत बुनियाद, सूझ-बूझ वाली राजकोषीय मजबूती का खाका और निजी खपत बने रहने के साथ देश की आर्थिक वृद्धि दर अगले वित्त वर्ष 2025-26 में 6.3 प्रतिशत से 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है. चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर चार साल के निचले स्तर 6.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है. वैसे भारत की इकोनॉमी दुनिया के कई देशों से आगे है, लेकिन धीमी गति के हालिया संकेतों ने इसकी ट्रैजेक्ट्री को लेकर काफी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
जुलाई-सितंबर तिमाही में विकास दर घटकर 5.4 प्रतिशत रह गई, जो सात तिमाहियों में सबसे कम है, जिससे देश की बेरोजगारी चुनौतियों के समाधान के बारे में संदेह गहरा गया है. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अपने विकास पूर्वानुमान को 7.2 प्रतिशत से संशोधित कर 6.6 प्रतिशत कर दिया. वहीं फ्रेश आंकड़े चिंता में और ज्यादा इजाफा कर रहे हैं. सरकार द्वारा जारी पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, भारत की जीडीपी वित्त वर्ष 2024-25 में 6.4 फीसदी बढ़ने का अनुमान है – जो चार साल का निचला स्तर है, जबकि वित्त वर्ष 24 में देश की ग्रोथ 8.2 फीसदी देखने को मिली थी.
UPI ट्रांजेक्शन्स के लिए NPCI ने नया नियम लागू किया, 1 फरवरी से होगी रोक
31 Jan, 2025 01:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अगर आप भी UPI से पेमेंट करते हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने यूपीआई ट्रांजेक्शन को लेकर नया नियम लागू किया है. इस नियम के तहत अब स्पेशल कैरेक्टर्स (@, #, $, %, & आदि) वाली यूपीआई ट्रांजेक्शन आईडी (UPI Transaction Id) को मान्य नहीं माना जाएगा. केवल अल्फान्यूमेरिक कैरेक्टर्स (अक्षरों और अंकों) के जरिये बनी UPI Transaction Id से ही पेमेंट स्वीकार किया जा सकेगा. इसका पालन नहीं करने वाले लोगों की आईडी को ब्लॉक कर दिया जाएगा. नया नियम 1 फरवरी 2025 से लागू होगा.
NPCI ने क्यों लिया यह फैसला?
यूपीआई अब भारत से लेकर विदेशों तक डिजिटल पेमेंट का अहम जरिया बन चुका है. ई-रिक्शा, किराना दुकान, मेट्रो स्टेशन से लेकर श्रीलंका, भूटान, यूएई, मॉरीशस और फ्रांस जैसे देशों में भी इसका इस्तेमाल हो रहा है. ऐसे में यह नया नियम यूपीआई ट्रांजेक्शन को ज्यादा सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए लागू किया जा रहा है.
क्या होगा अगर UPI Transaction ID में स्पेशल कैरेक्टर्स हैं?
अगर आपकी UPI Transaction ID में स्पेशल कैरेक्टर्स शामिल हैं, तो 1 फरवरी के बाद आपका ट्रांजेक्शन ब्लॉक हो सकता है. NPCI ने सभी पेमेंट ऐप्स को निर्देश दिया है कि वे अपनी सेवाओं को नए नियम के अनुसार अपडेट करें. NPCI ने पहले भी UPI यूजर्स से कहा था कि वे अल्फान्यूमेरिक आईडी का उपयोग करें. हालांकि, अब इसे जरूरी कर दिया गया है और नियमों का पालन नहीं करने पर UPI Transaction ID ब्लॉक हो सकती है.
यूपीआई यूजर्स को क्या करना चाहिए?
अगर आपकी UPI Transaction ID में कोई स्पेशल कैरेक्टर है, तो जल्द से जल्द इसे बदल लें. अपने बैंक या पेमेंट ऐप से संपर्क करके नई अल्फान्यूमेरिक आईडी बनवाएं, ताकि 1 फरवरी के बाद भी आपके यूपीआई ट्रांजेक्शन आईडी बिना किसी रुकावट के चलते रहें.
भारत के डिजिटल पेमेंट्स में UPI की हिस्सेदारी 83 प्रतिशत
भारत के डिजिटल पेमेंट्स सिस्टम में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) की हिस्सेदारी 2024 में बढ़कर 83 प्रतिशत हो गई है, जो कि 2019 में 34 प्रतिशत थी. इस दौरान यूपीआई 74 प्रतिशत के चक्रवृद्धि औसत वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ा है.
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की रिपोर्ट में बताया गया कि समीक्षा अवधि में अन्य पेमेंट सिस्टम्स जैसे आरटीजीएस, एनईएफटी, आईएमपीएस, क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत से गिरकर 17 प्रतिशत रह गई है. रिपोर्ट में बताया गया कि यूपीआई देश के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है. इसकी वजह यूपीआई का उपयोग में आसान होना है.
आज से शुरू हो रहा बजट सत्र, राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद वित्त मंत्री पेश करेंगी आर्थिक सर्वेक्षण 2025
31 Jan, 2025 01:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आज से शुरू हो रहे बजट सत्र के काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं। खासकर बजट के बाद सत्र हंगामेदार रहेगा। इसके संकेत गुरुवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में साफ तौर पर देखने को मिले हैं।
महाकुंभ की अव्यवस्थाओं पर चर्चा की मांग
सत्र की शुरुआत से ठीक पहले प्रयाग में आयोजित महाकुंभ में मची भगदड़ को लेकर विपक्षी दलों का साफ तौर पर कहना है कि इस पर सरकार को चर्चा करानी चाहिए। हालांकि सरकार ने बैठक में साफ किया है कि यह राज्य का विषय है और वह इसको देख रही है। बावजूद इसके विपक्ष ने जब बार-बार महाकुंभ की अव्यवस्थाओं पर चर्चा की मांग की, तो सरकार ने कहा कि इसका निर्धारण कार्यमंत्रणा समिति करेगी।
बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण से होगी। इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दोनों सदनों में आर्थिक सर्वेक्षण 2025 पेश करेंगी। देश की अर्थव्यवस्था की दशा व दिशा बताने वाला यह महत्वपूर्ण प्रपत्र होता है।
सीतारमण आम बजट 2025-26 पेश करेंगी
राष्ट्रपति का अभिभाषण और आर्थिक सर्वेक्षण एक दिन बाद पेश किए जाने वाले आम बजट को लेकर कुछ महत्वपूर्ण संकेतक भी देते हैं। शनिवार (एक फरवरी) को वित्त मंत्री सीतारमण आम बजट 2025-26 पेश करेंगी। आम बजट के बारे में माना जा रहा है कि इसमें देश की अर्थव्यवस्था में सुस्ती को दूर करने के साथ ही घरेलू अर्थव्यवस्था में मांग व रोजगार को बढ़ाने वाले उपायों पर खास जोर होगा।
किरण रिजिजू ने विपक्षी दलों के साथ की बैठक
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुआई में हुई इस सर्वदलीय बैठक में सरकार ने बताया कि वह बजट सत्र के दौरान वक्फ, इमिग्रेशन सहित कुल 16 विधेयकों को पेश करेगी। बैठक में 36 राजनीतिक दलों के करीब 52 नेताओं ने हिस्सा लिया था। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्षी दलों के साथ हुई इस बैठक को रचनात्मक बताते हुए सभी से सदन को शांतिपूर्ण चलाने के लिए सहयोग मांगा।
उन्होंने कहा कि बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगी। इस दौरान सबसे अहम कामकाज केंद्रीय बजट को प्रस्तुत करना होगा। सूत्रों की मानें तो विपक्षी दलों ने बैठक में जब महाकुंभ हादसे व उसकी अव्यवस्थाओं पर चर्चा कराने की मांग की तो राजनाथ सिंह ने कहा कि यह राज्य सरकार का विषय है। वह अपने स्तर पर इसे देख रही है। हालांकि इसके बाद भी कांग्रेस व सपा इस पर चर्चा कराने की मांग पर अड़ी रही।
प्रमोद तिवारी ने महाकुंभ के राजनीतिकरण की आलोचना की
बैठक में मौजूद कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने महाकुंभ के राजनीतिकरण की आलोचना की और कहा कि इस आयोजन के दौरान वीआइपी की आवाजाही से आम आदमी की मुश्किलें बढ़ी हैं। वहीं सपा सांसद राम गोपाल यादव ने इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की और कहा कि आम तीर्थयात्रियों को दरकिनार कर वीआइपी को इस भव्य धार्मिक आयोजन में प्रमुखता दी गई, जिससे यह हादसा हुआ है। बैठक में कई विपक्षी नेताओं ने बेरोजगारी और किसानों की स्थिति का भी मुद्दा उठाया और चर्चा की मांग की।
Petrol-Diesel Prices Today: पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने लगाई छलांग, जानें आपके शहर में ईंधन की कीमतें
31 Jan, 2025 08:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Petrol-Diesel Prices Today: इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं और फिलहाल यह 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रही हैं. जहां क्रूड ऑयल की कीमत 72.79 डॉलर प्रति बैरल है, वहीं ब्रेंट क्रूड का भाव 76.69 डॉलर प्रति बैरल है. इन स्थिर कीमतों के बावजूद, देश में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव कर दिया है. कुछ राज्यों में ईंधन के दाम बढ़े हैं, जबकि कुछ स्थानों पर इनकी कीमतों में गिरावट आई है.
चार महानगरों में क्या हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
देश के चार प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अंतर देखा जा रहा है. वर्तमान में इन महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें निम्नलिखित हैं:
दिल्ली: पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर, डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर
मुंबई: पेट्रोल 103.50 रुपये प्रति लीटर, डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर
चेन्नई: पेट्रोल 102.63 रुपये प्रति लीटर, डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर
कोलकाता: पेट्रोल 105.01 रुपये प्रति लीटर, डीजल 91.82 रुपये प्रति लीटर
इन चारों महानगरों में सिर्फ चेन्नई में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जबकि अन्य शहरों में कीमतों में स्थिरता बनी हुई है.
देश के अन्य प्रमुख शहरों में बदलाव
कुछ प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के दामों में बदलाव हुआ है. इनमें से कुछ शहरों में कीमतें बढ़ी हैं, जबकि कुछ में गिरावट देखी गई है. इन शहरों में नवीनतम कीमतें इस प्रकार हैं:
गुरुग्राम: पेट्रोल 94.99 रुपये प्रति लीटर, डीजल 87.84 रुपये प्रति लीटर
पटना: पेट्रोल 105.23 रुपये प्रति लीटर, डीजल 92.09 रुपये प्रति लीटर
जयपुर: पेट्रोल 104.91 रुपये प्रति लीटर, डीजल 90.21 रुपये प्रति लीटर
पेट्रोल-डीजल के दाम हर सुबह अपडेट होते हैं
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव हर दिन सुबह 6 बजे होते हैं. यह बदलाव सरकार द्वारा लागू किए गए नए रेट्स के अनुसार होता है. सुबह 6 बजे से ही ये नए रेट्स लागू हो जाते हैं, और इसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में परिवर्तन होता है. इन दामों में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन, वैट और अन्य शुल्क शामिल होते हैं, जिससे कीमत मूल भाव से लगभग दोगुना हो जाती है. इसीलिए पेट्रोल और डीजल के दाम इतने अधिक नजर आते हैं.
Gold Price Today: बजट से पहले बढ़ गए सोने-चांदी के भाव, चेक करें आज 24 कैरेट गोल्ड के ताजा रेट
31 Jan, 2025 08:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Gold Price Today: भारतीय सर्राफा बाजार में आज, 31 जनवरी 2025 की सुबह सोने और चांदी की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है. आज सोना 81,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच चुका है, जबकि चांदी की कीमत 91,600 रुपये प्रति किलो हो गई है. यह बढ़ोतरी राष्ट्रीय स्तर पर 999 शुद्धता वाले सोने और चांदी के भाव में देखी गई है.
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, बुधवार शाम 24 कैरेट सोने की कीमत 80975 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो आज (शुक्रवार) सुबह बढ़कर 81006 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है. इसी तरह, शुद्धता के आधार पर सोने की कीमत में उछाल आया है.
चांदी की कीमत में उछाल
चांदी की कीमत भी बढ़ी है. 999 शुद्धता वाली चांदी की कीमत आज 91600 रुपये प्रति किलो हो गई है, जो बुधवार शाम 90680 रुपये प्रति किलो थी. यानी, चांदी की कीमत में 920 रुपये का इजाफा हुआ है.
IBJA की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 30 जनवरी को विभिन्न शुद्धताओं वाले सोने के भाव निम्नलिखित हैं:
22 कैरेट सोना (995 शुद्धता): 80682 रुपये प्रति 10 ग्राम
24 कैरेट सोना (999 शुद्धता): 81006 रुपये प्रति 10 ग्राम
18 कैरेट सोना (750 शुद्धता): 60755 रुपये प्रति 10 ग्राम
14 कैरेट सोना (585 शुद्धता): 47389 रुपये प्रति 10 ग्राम
यहां देखा जा सकता है कि 999 शुद्धता वाले सोने की कीमत 81006 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जबकि 22 कैरेट (916 शुद्धता) सोने का भाव 74202 रुपये प्रति 10 ग्राम है. 18 कैरेट सोने का रेट 60755 रुपये प्रति 10 ग्राम है, और 14 कैरेट सोने की कीमत 47389 रुपये प्रति 10 ग्राम है.
सोने और चांदी के दाम चेक करने का तरीका
अगर आप सोने और चांदी के दाम मिस्ड कॉल के जरिए चेक करना चाहते हैं, तो आप 8955664433 पर मिस्ड कॉल दे सकते हैं. कुछ ही देर में आपको एसएमएस के जरिए रेट की जानकारी मिल जाएगी. इसके अलावा, IBJA की आधिकारिक वेबसाइट पर भी आप सुबह और शाम के गोल्ड रेट्स की जानकारी ले सकते हैं.
आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि उपरोक्त दी गई कीमतें सिर्फ सोने और चांदी के स्टैंडर्ड रेट्स हैं और इनमें मेकिंग चार्ज और टैक्स शामिल नहीं हैं. गहनों की खरीदारी के दौरान, सोने और चांदी की कीमत में टैक्स और मेकिंग चार्ज की वजह से अतिरिक्त खर्च होता है.
सेंसेक्स और निफ्टी में सकारात्मक समापन, निवेशकों को राहत
30 Jan, 2025 05:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बाजार के आज के समापन में सेंसेक्स 227 अंकों की बढ़त के साथ 52,000 के करीब बंद हुआ, जबकि निफ्टी 23,250 पर स्थिर रहा। इस दौरान बाजार में मिश्रित रुझान देखने को मिला, जहां कुछ सेक्टरों ने अच्छा प्रदर्शन किया और कुछ ने निराश किया।
रियल्टी और फार्मा सेक्टर में मजबूत बढ़त देखने को मिली, जो मुख्य रूप से बाजार की सकारात्मक दिशा में योगदान देने वाले थे। रियल्टी कंपनियों ने अच्छे तिमाही परिणामों की उम्मीदों के चलते निवेशकों का ध्यान खींचा। फार्मा कंपनियों में भी अच्छे प्रदर्शन के संकेत मिले, खासकर कोविड-19 के बाद के रिकवरी दौर में।
दूसरी ओर, आईटी और मीडिया सेक्टर में गिरावट रही, जो बाजार के समग्र प्रदर्शन को थोड़ी सी नकारात्मक दिशा में खींचने का कारण बने। आईटी कंपनियों के लिए तिमाही परिणाम कुछ उम्मीदों से कम रहे, और मीडिया सेक्टर में भी दबाव था।
इस तरह, आज का समापन एक संतुलित प्रदर्शन का संकेत था, जहां कुछ सेक्टरों ने मजबूती दिखाई और कुछ ने बाजार में दबाव डाला।
वित्त मंत्री से उम्मीद: Budget 2025 में टैक्स स्लैब्स में हो सकता है बड़ा बदलाव।
30 Jan, 2025 04:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केंद्रीय बजट 2025 के बारे में कई अहम उम्मीदें और अटकलें लगाई जा रही हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख विषयों पर चर्चा करते हैं:
सोने पर आयात शुल्क: सोने को लेकर काफी चर्चा हो रही है, खासकर सर्राफा बाजार और ज्वेलरी उद्योग में। सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है, जो निवेशकों और ज्वेलरी खरीदारों पर प्रभाव डाल सकता है। आयात शुल्क बढ़ाने से सोने की कीमतों में उछाल आ सकता है, लेकिन यह सरकार की तरफ से सोने के आयात को नियंत्रित करने का एक तरीका भी हो सकता है।
2025 के केंद्रीय बजट के बारे में कई अहम उम्मीदें और अटकलें लगाई जा रही हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख विषयों पर चर्चा करते हैं:
सोने पर आयात शुल्क: सोने को लेकर काफी चर्चा हो रही है, खासकर सर्राफा बाजार और ज्वेलरी उद्योग में। सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है, जो निवेशकों और ज्वेलरी खरीदारों पर प्रभाव डाल सकता है। आयात शुल्क बढ़ाने से सोने की कीमतों में उछाल आ सकता है, लेकिन यह सरकार की तरफ से सोने के आयात को नियंत्रित करने का एक तरीका भी हो सकता है।
सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय: सरकार का ध्यान इंफ्रास्ट्रक्चर पर है और 3 लाख करोड़ रुपये का बजट एनएच-एक्सप्रेसवे के निर्माण पर खर्च किया जाएगा। इससे न केवल सड़क परिवहन की सुविधाएं बेहतर होंगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं और देश के विभिन्न हिस्सों में कनेक्टिविटी सुधार हो सकती है।
पीएम किसान सम्मान निधि योजना: इस योजना के तहत वित्त मंत्री से उम्मीद की जा रही है कि किसानों की मदद के लिए राशि बढ़ाई जा सकती है, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हो सके। 12000 रुपये तक की राशि की उम्मीद है, जिससे किसानों को और अधिक वित्तीय सहायता मिल सकती है।
आयकर रियायतें: सैलरीड पर्सन और टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स में रियायत की संभावना है। यह कदम खास तौर पर मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए हो सकता है, जिससे उनकी खरीदारी क्षमता और निवेश के विकल्प बढ़ सकें।
न्यू टैक्स रिजीम: विशेषज्ञों का सुझाव है कि न्यू टैक्स रिजीम को और आकर्षक बनाने के लिए सरकार घर के मालिकाना हक को प्रोत्साहित कर सकती है। इससे न केवल नागरिकों को घर खरीदने में मदद मिलेगी, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में भी सुधार हो सकता है।
प्राइवेट सेक्टर और निवेश: प्राइवेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने के लिए भी कुछ घोषणाएं होने की उम्मीद है। इससे रोजगार सृजन और उद्योगों के विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
समग्र रूप से, बजट 2025 से आम जनता, किसानों, प्राइवेट सेक्टर, और निवेशकों को कई उम्मीदें हैं, और यह देखा जाएगा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इन प्रमुख मुद्दों पर क्या फैसले लेती हैं।
सरकार का ध्यान इंफ्रास्ट्रक्चर पर है और 3 लाख करोड़ रुपये का बजट एनएच-एक्सप्रेसवे के निर्माण पर खर्च किया जाएगा। इससे न केवल सड़क परिवहन की सुविधाएं बेहतर होंगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं और देश के विभिन्न हिस्सों में कनेक्टिविटी सुधार हो सकती है।
पीएम किसान सम्मान निधि योजना: इस योजना के तहत वित्त मंत्री से उम्मीद की जा रही है कि किसानों की मदद के लिए राशि बढ़ाई जा सकती है, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हो सके। 12000 रुपये तक की राशि की उम्मीद है, जिससे किसानों को और अधिक वित्तीय सहायता मिल सकती है।
आयकर रियायतें: सैलरीड पर्सन और टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स में रियायत की संभावना है। यह कदम खास तौर पर मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए हो सकता है, जिससे उनकी खरीदारी क्षमता और निवेश के विकल्प बढ़ सकें।
न्यू टैक्स रिजीम: विशेषज्ञों का सुझाव है कि न्यू टैक्स रिजीम को और आकर्षक बनाने के लिए सरकार घर के मालिकाना हक को प्रोत्साहित कर सकती है। इससे न केवल नागरिकों को घर खरीदने में मदद मिलेगी, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में भी सुधार हो सकता है।
प्राइवेट सेक्टर और निवेश: प्राइवेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने के लिए भी कुछ घोषणाएं होने की उम्मीद है। इससे रोजगार सृजन और उद्योगों के विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
समग्र रूप से, बजट 2025 से आम जनता, किसानों, प्राइवेट सेक्टर, और निवेशकों को कई उम्मीदें हैं, और यह देखा जाएगा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इन प्रमुख मुद्दों पर क्या फैसले लेती हैं।
बजट 2025 क्या मिडिल क्लास को राहत देने वाला होगा
MSME को मिले 4 फीसद का ब्याज अनुदान
टियर-2 शहरों के विकास को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सुधार
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2025 में वैश्विक आर्थिक बदलावों के कारण अरबपतियों की संपत्ति में नुकसान
30 Jan, 2025 04:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चीन के Deep Seek के बाद दुनिया के अरबपतियों को लगा दूसरा झटका, इतनी घट गई दौलत" यह एक महत्वपूर्ण आर्थिक घटना को दर्शाता है, जिसमें चीन की नई तकनीकी प्रगति और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती नहीं करने के फैसले ने दुनिया भर के अरबपतियों की संपत्ति में गिरावट का कारण बना। इस रिपोर्ट में दो मुख्य घटक हैं जिनसे अरबपतियों को तगड़ा झटका लगा:
1. चीन का Deep Seek एआई प्रौद्योगिकी का प्रभाव
Deep Seek एक एआई तकनीक है जिसे चीन में विकसित किया गया है। एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के क्षेत्र में चीन ने बहुत तेजी से प्रगति की है, और इस प्रौद्योगिकी के विकास से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता आ सकती है। इस बदलाव के कारण चीन की अर्थव्यवस्था और वैश्विक निवेश पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा, जिससे दुनिया भर के अरबपतियों के निवेश मूल्य में कमी आई। एआई और नई तकनीकी प्रगति के चलते निवेशकों ने जोखिम उठाने से परहेज किया और कम रिस्क वाले निवेशों को तरजीह दी, जिसके कारण टेक कंपनियों की शेयर वैल्यू में गिरावट आई।
2.अमेरिकी फेड रिजर्व का फैसला
अमेरिका का फेडरल रिजर्व एक बड़ी वित्तीय संस्था है, जो ब्याज दरों को तय करता है। हाल ही में, फेड ने ब्याज दरों में कटौती नहीं की, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता आई। दरों का स्थिर रहना निवेशकों के लिए संकेत था कि महंगे कर्ज की स्थिति बनी रहेगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों में मंदी आ सकती है। यह अस्थिरता विशेष रूप से उच्च-लाभ वाले क्षेत्रों जैसे लक्ज़री गुड्स और टेक कंपनियों पर भारी पड़ी। इसके कारण निवेशकों ने इन क्षेत्रों में कम निवेश किया, जिससे अरबपतियों की संपत्ति में गिरावट आई।
3. अरबपतियों की संपत्ति में गिरावट
इन दोनों घटनाओं, Deep Seek एआई के प्रभाव और फेड के ब्याज दरों के फैसले, ने दुनिया के प्रमुख अरबपतियों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। Bernard Arnault, एलन मस्क, और Bill Gates जैसे प्रमुख व्यापारिक नेता इस प्रभाव से प्रभावित हुए। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इन अरबपतियों की संपत्ति में महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई।
-Bernard Arnault (LVMH के मालिक) की संपत्ति में गिरावट आई, क्योंकि उनके लक्ज़री ब्रांड्स की मांग में कमी आई।
- एलन मस्क (टेस्ला और स्पेसएक्स के CEO) की संपत्ति भी प्रभावित हुई, क्योंकि टेक स्टॉक्स में गिरावट आई।
4. वैश्विक आर्थिक बदलाव
इन घटनाओं से यह स्पष्ट हुआ कि वैश्विक आर्थिक बदलाव और नीति निर्णय सीधे तौर पर अरबपतियों की संपत्ति और निवेशों पर असर डालते हैं। इन प्रमुख घटनाओं ने निवेशकों के बीच चिंता और अनिश्चितता को बढ़ाया, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव हुआ और अरबपतियों के नेट वर्थ में गिर निष्कर्ष:
Deep Seek एआई और फेड रिजर्व के फैसले के प्रभाव ने दिखाया कि नई प्रौद्योगिकियों और वैश्विक आर्थिक नीतियों का अरबपतियों के निवेश और संपत्ति पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। इन घटनाओं ने साबित किया कि तकनीकी प्रगति और केंद्रीय बैंकों के फैसले वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा कर सकते हैं, और इसका सीधा असर दुनिया भर के उद्योगपतियों की संपत्ति पर पड़ सकता है।
सर्वे के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था 2025-26 में तेज़ी से आगे बढ़ेगी
30 Jan, 2025 02:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उद्योग जगत का मानना है कि सरकार ने अब तक जो सुधार किए हैं, उनका सकारात्मक असर अगले वित्त वर्ष में वृद्धि दर को आगे बढ़ाने में दिखेगा। राजकोषीय नीतियों को इन प्राथमिकताओं के साथ जोड़कर आगामी बजट आर्थिकी में समानता और दक्षता सुनिश्चित करते हुए वृद्धि के लिए उत्प्रेरक का कार्य कर सकता है। यह सर्वे विभिन्न उद्योगों के 155 से अधिक लोगों से बातचीत पर आधारित है। संयुक्त राष्ट्र ने कैलेंडर वर्ष 2025 के लिए वृद्धि अनुमान को 6.6 फीसदी पर बरकरार रखा है।
रुपये की गिरावट और घटते विदेशी निवेश को देखते हुए नीति में संशोधन की आवश्यकता
सुझाव मूडीज एनालिटिक्स ने 2025 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान के संदर्भ में दिया है। इसका मतलब है कि अगर भारत को 2025 में 6.4% की आर्थिक वृद्धि हासिल करनी है, तो सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को अपनी नीतियों में कुछ अहम बदलाव करने होंगे।
रुपये की गिरावट: रुपये की मूल्य में गिरावट से भारतीय व्यापार पर नकारात्मक असर हो सकता है, खासकर अगर विदेशी निवेश में कमी आ रही हो। इस समस्या का समाधान करने के लिए सरकार को अपनी मौद्रिक नीति को समायोजित करने की जरूरत होगी, ताकि रुपये की स्थिति बेहतर हो सके।
घटता विदेशी निवेश: भारत में विदेशी निवेश कम हो रहा है, जो आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकता है। इसके लिए सरकार को ऐसे उपाय करने होंगे, जिससे निवेशकों का विश्वास मजबूत हो और विदेशी निवेश बढ़े।
महंगाई का दबाव: महंगाई और अस्थिरता से घरेलू बाजार में मांग कम हो सकती है, जिससे आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है। इस पर काबू पाने के लिए, सरकार को अपनी राजकोषीय नीति में सुधार करते हुए महंगाई को नियंत्रित करने के उपायों पर ध्यान देना होगा।
ऊंची ब्याज दरें: लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों का असर घरेलू मांग पर पड़ सकता है, क्योंकि लोगों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है। सरकार और RBI को नीति में बदलाव कर ब्याज दरों को संतुलित रखने की आवश्यकता हो सकती है।
निर्यात पर असर: अमेरिका जैसे देशों द्वारा भारतीय आयातों पर शुल्क बढ़ाने से निर्यात क्षेत्र को चुनौती मिल सकती है, जिससे आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ सकता है। इसके लिए निर्यात नीति में बदलाव की जरूरत हो सकती है।
इन समस्याओं को हल करने के लिए राजकोषीय (सरकारी खर्च और कर नीतियां) और मौद्रिक नीति (ब्याज दरें और मुद्रा आपूर्ति नियंत्रण) में बदलाव आवश्यक हैं। इससे भारत की आर्थिक वृद्धि दर को 6.4% तक पहुंचाने के लिए एक स्थिर और संतुलित वातावरण बनेगा।
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