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60 दिनों में ईरान से समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका वसूलेगा जहाजों से टोल
21 Jun, 2026 02:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया दांव चल दिया है। अब ट्रंप ने कहा है कि अगर अगले 60 दिनों में ईरान के साथ अंतिम समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका खुद होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूल सकता है। हैरानी वाली बात है कि ट्रंप पहले कहते थे कि होर्मुज फ्री रहेगा। वह ईरान की तरफ से टोल वसूलने के भी खिलाफ थे, लेकिन अब ट्रंप ही कह रहे हैं कि वह टोल वसूलेंगे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने कहा कि फिलहाल 60 दिनों तक जहाजों से कोई फीस नहीं ली जाएगी, लेकिन अगर इस समय में स्थायी समझौता नहीं हो पाया तो अमेरिका समुद्री सुरक्षा पर हुए अपने खर्च की भरपाई के लिए खुद फीस लगाने पर विचार करेगा। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना पश्चिम एशिया के देशों के लिए ‘गार्जियन एंजेल’ की तरह काम कर रही है और उसकी कीमत भी चुकानी होगी।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका और ईरान के बीच टेक्निकल लेवल की बातचीत होने वाली है। इन बातचीतों में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के वरिष्ठ नेता मोहम्मद बागेर कालीबाफ समेत कई बड़े प्रतिनिधि वहां पहुंच रहे हैं। इस बैठक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, होर्मुज और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अगले दो महीनों के रोडमैप पर चर्चा होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक बातचीत से पहले ईरान ने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की घोषणा कर दी। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका और इजराइल ने हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन की शर्तों का उल्लंघन किया है। खासतौर पर लेबनान में इजराइल की सैन्य कार्रवाई को ईरान समझौते का उल्लंघन बता रहा है। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है और अमेरिकी नौसेना पूरे इलाके में सुरक्षा बनाए हुए है।
ब्रिटने में बने पाकिस्तान जैसे हालात, देश में पांच साल में पांच पीएम!
21 Jun, 2026 02:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। ब्रिटेन की राजनीति में कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको हैरान कर दिया है। पिछले पांच सालों में देश चार पीएम देख चुका है और अब ऐसी अटकलें हैं कि सोमवार को ब्रिटेन पांचवां पीएम भी देख सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीएम कीर स्टारमर सोमवार को अपने इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं और डाउनिंग स्ट्रीट छोड़ने का औपचारिक कार्यक्रम भी पेश करेंगे।
क्योंकि अक्सर देखा गया है कि ऐसे हालात पाकिस्तान की राजनीति में पैदा होते हैं यहां 5 साल का कार्यकाल कोई भी पीएम पूरा नहीं कर पाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ हफ्तों से सरकार के अंदर लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव और आंतरिक मतभेदों के बाद स्टार्मर ने यह फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि पिछले 48 घंटों के दौरान उन्होंने कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों, राजनीतिक सलाहकारों, लेबर पार्टी के प्रमुख डोनर्स और प्रभावशाली ट्रेड यूनियन नेताओं के साथ बैठकें कीं। इन चर्चाओं के बाद उन्हें लगा कि मौजूदा परिस्थितियों में उनके लिए नेतृत्व जारी रखना संभव नहीं है।
हालांकि, डाउनिंग स्ट्रीट की ओर से अब तक इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि लेबर पार्टी के अंदर सत्ता हस्तांतरण की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, ताकि राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता से बचा जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक कीर के करीबी सहयोगियों ने उन्हें संकेत दिया कि अब उनके पास बड़े विधायी सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त समर्थन नहीं है। वहीं पार्टी के बड़े डोनर्स और ट्रेड यूनियन नेताओं ने भी सरकार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और गिरती लोकप्रियता पर चिंता जताई है।
रिपोर्ट के मुताबिक पीएम स्टारमर के संभावित इस्तीफे की खबर के साथ ही नए नेता की चर्चा भी तेज हो गई है। माना जा रहा है कि सोमवार को यदि वह औपचारिक घोषणा करते हैं तो उसके तुरंत बाद लेबर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता नेतृत्व की दौड़ में उतर सकते हैं। यह चुनाव सिर्फ नए पीएम का फैसला नहीं करेगा, बल्कि आने वाले समय में लेबर पार्टी की राजनीतिक दिशा भी तय करेगा।
ब्रिटेन की संवैधानिक व्यवस्था के तहत यदि स्टारमर कीर इस्तीफा देते हैं तो नया नेता चुने जाने तक वह कार्यवाहक पीएम बने रहेंगे, ताकि सरकार का कामकाज बिना किसी रुकावट के चलता रहे। इसके बाद लेबर पार्टी की नेशनल एग्जीक्यूटिव कमेटी नेतृत्व चुनाव की प्रक्रिया, नामांकन और मतदान का कार्यक्रम तय करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी जल्द नया नेता चुनने के पक्ष में है, ताकि लंबी राजनीतिक अनिश्चितता से बचा जा सके।
होर्मुज दोबारा बंद होने की आशंकाओं के बीच भारत के तीन तेल टैंकर सुरक्षित निकले
21 Jun, 2026 10:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा बंद होने की आशंकाओं के बीच भारत के तीन बड़े तेल टैंकर सुरक्षित इस समुद्री मार्ग को पार करने में सफल रहे हैं। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की जंग शुरू होने के बाद से यह पहला मौका है, जब एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में भारतीय जहाज होर्मुज पार कर भारत रवाना हुए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय ध्वज वाले टैंकर देश वैभव, देश विभोर और सनमार हेराल्ड शनिवार को सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर गए। इन तीनों जहाजों में कुल 8.6 लाख टन कच्चा तेल लदा है, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के कई देशों तक पहुंचता है। हाल के दिनों में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बाद होर्मुज की नाकेबंदी की वजह से जहाजों की आवाजाही रुक गई थी।
शिपिंग मंत्रालय के मुताबिक अब तक भारत आने वाले कुल 18 जहाज इस मार्ग को सुरक्षित पार कर चुके हैं। इनमें 13 भारतीय ध्वज वाले और 5 विदेशी ध्वज वाले जहाज शामिल हैं। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि सरकार भारतीय समुद्री हितों और नाविकों की सुरक्षा तय करने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ काम कर रही है। उन्होंने बताया कि इन तीन जहाजों पर कुल 94 भारतीय नाविक तैनात हैं।
शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक देश वैभव 24 जून को गुजरात के वडीनार बंदरगाह पहुंच सकता है। वहीं देश विभोर भी 24 जून को गुजरात के सिक्का पोर्ट पहुंचने वाला है। इन जहाजों के पहुंचने से देश की रिफाइनरियों को कच्चे तेल की आपूर्ति में मजबूती मिलेगी और बाजार में संभावित आपूर्ति संकट की आशंकाएं कम होंगी। हालांकि होर्मुज की तस्वीर अभी भी पूरी तरह राहत भरी नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक भारत आने वाले 31 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इनमें 16 जहाज उर्वरक (फर्टिलाइजर) लेकर भारत आने वाले हैं। भारत की ओर आने वाले दो और जहाज एसएसएल कावेरी और देश सुरक्षा अभी होर्मुज के आसपास इंतजार कर रहे हैं. सभी की निगाहें अब इनके सुरक्षित पार होने पर टिकी हैं।
हवाई महल से कम नहीं ट्रंप का नया एयर फोर्स वन, जानिए इसकी अनोखी खूबियां
20 Jun, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। वैश्विक महाशक्ति अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन के समीप स्थित एंड्रयूज एयरफोर्स बेस पर अमेरिकी राष्ट्रपतियों के आधिकारिक उपयोग के लिए तैयार किए गए नए 'एयर फोर्स वन' विमान का अनावरण किया है। यह विमान पहले खाड़ी देश कतर के राजपरिवार के पास बोइंग बिजनेस जेट के रूप में मौजूद था, जिसे बाद में कतर सरकार द्वारा अमेरिका को एक राजकीय सौगात के रूप में भेंट किया गया। अब सभी आवश्यक सुरक्षा जांचों और बदलावों के बाद इसे राष्ट्रपति के मुख्य आधिकारिक विमान के रूप में बेड़े में शामिल करने की अंतिम तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
विमान का प्रदर्शन करते हुए ट्रंप ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे वैश्विक मंच पर अमेरिका के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक और दुनिया का सबसे शानदार विमान बताया। उन्होंने दावा किया कि यह 'उड़ता हुआ व्हाइट हाउस' तकनीकी और सामरिक दृष्टि से अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के विमानों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावशाली है।
कैसा है नया एयर फोर्स वन और क्या हैं इसकी खूबियां?
अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन रिपोर्टों के अनुसार, इस नए विमान में अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा और गरिमा के अनुकूल कई बड़े तकनीकी व संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं:
रंग और रूप में बदलाव: दशकों से एयर फोर्स वन की पहचान रहे पारंपरिक हल्के नीले रंग की जगह अब इस नए विमान को गहरे नीले, चटख लाल और सफेद रंग की आधुनिक थीम दी गई है। विमान के मुख्य हिस्से पर राष्ट्रपति की आधिकारिक मुहर और पिछले हिस्से (पूंछ) पर एक विशाल अमेरिकी ध्वज अंकित किया गया है।
विशाल आकार (बोइंग 747-8आई): यह विमान वर्तमान में उपयोग हो रहे राष्ट्रपति के विमानों से लगभग 18 फीट अधिक लंबा है। इसके विंगस्पैन (पंखों का फैलाव) में भी 30 फीट की बढ़ोतरी की गई है, जिससे इसका केबिन काफी चौड़ा हो गया है। इसी विशालता के कारण विशेषज्ञ इसे 'पैलेस इन द स्काई' (आसमान का महल) कह रहे हैं। सामरिक क्षेत्र में इसे औपचारिक रूप से 'वीसी-25बी ब्रिज विमान' का नाम दिया गया है।
अभेद्य सुरक्षा चक्र: इस विमान के पंखों में अत्याधुनिक 'मिरर-बॉल डिफेंस सिस्टम' लगाया गया है, जो दुश्मन की इन्फ्रारेड गाइडेड मिसाइलों को आसानी से चकमा दे सकता है। इसके अलावा इसमें 'ईसीएम डिफेंस सिस्टम' (इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर) भी मौजूद है, जो दुश्मन के रडार को जाम करने में सक्षम है। यह विमान 1050 किमी/घंटा की तीव्र रफ्तार से उड़ान भर सकता है।
लागत और आलीशान सुविधाएं: कतर से मिले इस विमान को वीवीआईपी सुरक्षा मानकों के अनुरूप अपग्रेड करने में अमेरिकी सरकार को करीब 40 करोड़ डॉलर (लगभग ₹3300 करोड़ से अधिक) की लागत आई है। विमान के भीतर एक अत्याधुनिक मेगा किचन और डाइनिंग रूम बनाया गया है, जहां एक बार में 2,000 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की जा सकती है। साथ ही राष्ट्रपति के लिए एक विशेष सुइट तैयार किया गया है, जिसमें निजी ड्रेसिंग रूम, आधुनिक शौचालय और एक जिम भी शामिल है। इसके अलावा, ट्रंप ने खुलासा किया कि इसमें चौबीसों घंटे हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के लिए स्पेसएक्स की स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा भी जोड़ी गई है।
आखिर क्यों पड़ी नए अस्थायी 'ब्रिज विमान' की जरूरत?
वर्तमान में अमेरिकी राष्ट्रपति जिन दो वीसी-25ए विमानों (बोइंग 747-200बी मॉडल) का उपयोग करते हैं, वे 1990 के दशक की शुरुआत से सेवा में हैं। लगभग 35 वर्ष पुराने होने के कारण इन विमानों के रखरखाव और तकनीकी मरम्मत में अब काफी अधिक समय और खर्च होने लगा था। बोइंग कंपनी द्वारा नए स्थायी विमानों की डिलीवरी में हो रही देरी को देखते हुए अमेरिकी वायुसेना ने 'ब्रिज प्रोग्राम' की शुरुआत की।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब तक 2028 तक पूरी तरह से नए वीसी-25बी स्थायी विमान बनकर तैयार नहीं हो जाते, तब तक राष्ट्रपति के पास उड़ान भरने के लिए हमेशा एक सुरक्षित, विश्वसनीय और आधुनिक विमान उपलब्ध रहे। कतर से मिला यह विमान इसी अस्थायी कमी (ब्रिज) को पूरा करने का काम करेगा।
विदेशी उपहार को लेकर अमेरिका में क्यों छिड़ा है विवाद?
ट्रंप द्वारा किसी विदेशी सरकार से मिले विमान को राष्ट्रपति के मुख्य बेड़े में शामिल करने के फैसले पर अमेरिका के राजनीतिक गलियारों और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। कुछ रिपब्लिकन नेताओं और रक्षा विश्लेषकों ने सवाल उठाए हैं कि विदेशी धरती से आया विमान तकनीकी और खुफिया सुरक्षा के लिहाज से देश के राष्ट्राध्यक्ष के लिए कितना सुरक्षित हो सकता है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में विमान के कोने-कोने की तकनीकी जांच और जासूसी उपकरणों (बग्स) की स्क्रूटनी के लिए बेहद कड़े प्रोटोकॉल की आवश्यकता होती है। हालांकि, इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने तर्क दिया कि इतने अत्याधुनिक विमान को मुफ्त में हासिल करना देश के खजाने के हित में है और इससे पुराने विमानों के बेड़े पर पड़ रहा अत्यधिक दबाव कम होगा।
अमेरिकी वायुसेना का क्या है रुख?
अमेरिकी वायुसेना ने 19 जून को जारी अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि यह वीसी-25बी ब्रिज एयरक्राफ्ट अब 'प्रेसिडेंशियल एयरलिफ्ट ग्रुप' को सौंप दिया गया है और इसकी शुरुआती परिचालन उड़ानें शुरू हो चुकी हैं। वायुसेना के सचिव ट्रॉय मिंक और वायुसेना प्रमुख जनरल केन विल्सबैक ने संयुक्त रूप से कहा कि राष्ट्रपति की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों की एक अंतर-एजेंसी टीम ने इस विमान के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल विकसित किए हैं। इन कमीशनिंग उड़ानों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि विमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सेनाध्यक्ष और राष्ट्राध्यक्ष के रूप में राष्ट्रपति की तीनों संवैधानिक भूमिकाओं की कसौटियों पर पूरी तरह खरा उतरे। वायुसेना के प्रवक्ता ने यह भी साफ किया कि पुराने वीसी-25ए विमानों को अभी रिटायर नहीं किया जाएगा; वे भी मिशन की आवश्यकताओं के आधार पर नए विमान के साथ सेवा में बने रहेंगे।
स्वतंत्रता दिवस पर फ्लाईपास्ट और अंतरराष्ट्रीय दौरों की योजना
इस नए एयर फोर्स वन विमान को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की योजनाएं काफी बड़ी हैं। आगामी महीने में तुर्किये में आयोजित होने वाले नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन और नवंबर में चीन में होने वाले एपेक (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति इसी नए विमान से अंतरराष्ट्रीय यात्रा करेंगे। इसके साथ ही, उन्होंने घोषणा की है कि आगामी 4 जुलाई को अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस के भव्य समारोह के दौरान यह अत्याधुनिक विमान वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के ऊपर होने वाले पारंपरिक फ्लाईपास्ट का नेतृत्व करेगा।
पाकिस्तान में सिलसिलेवार विस्फोट, रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच दूसरा ब्लास्ट
20 Jun, 2026 03:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद| पाकिस्तान के अशांत उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में शनिवार को हुए दो सिलसिलेवार और भीषण बम धमाकों ने देश में पैर पसार रहे आतंकवाद के खौफनाक चेहरे को एक बार फिर उजागर कर दिया है। उग्रवादियों ने बेहद सुनियोजित तरीके से पहले एक आम नागरिक गाड़ी को अपना निशाना बनाया। इसके बाद, जब स्थानीय लोग और मददगार पहले धमाके के जख्मियों को लेकर अस्पताल की तरफ भाग रहे थे, तभी रास्ते में दूसरा तगड़ा विस्फोट कर दिया गया। इन दोनों कायराना हमलों में कम से कम सात नागरिकों की जान चली गई है, जबकि दर्जन भर से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय पुलिस प्रशासन ने इसे रिमोट कंट्रोल के जरिए अंजाम दिया गया आईईडी (IED) ब्लास्ट करार दिया है। घटना के फौरन बाद सेना और अर्धसैनिक बलों ने पूरे संवेदनशील बेल्ट की घेराबंदी कर बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
पहला धमाका: डैटसन गाड़ी के उड़े परखच्चे, 5 ने मौके पर ही तोड़ा दम
सुरक्षा अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, पहला आईईडी धमाका बन्नू जिले के फांग मूसा खेल नामक ग्रामीण इलाके में हुआ। यहाँ एक निजी डैटसन गाड़ी आम मुसाफिरों को लेकर डोमेल की तरफ बढ़ रही थी, तभी सड़क किनारे छिपाकर रखे गए रिमोट संचालित बम में अचानक ब्लास्ट कर दिया गया। विस्फोट का असर इतना घातक था कि वह चौपहिया गाड़ी पूरी तरह मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। इस शुरुआती हमले में ही पांच यात्रियों की घटना स्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि गाड़ी में बैठे अन्य लोग गंभीर रूप से लहूलुहान हो गए। धमाके की आवाज सुनते ही नजदीकी गांवों के लोग राहत और बचाव के लिए दौड़े और उन्होंने घायलों को गाड़ियों में लादना शुरू किया।
दूसरा विस्फोट: एम्बुलेंस के रास्ते में हमला, मलबे में तब्दील हुई दूसरी गाड़ी
रोंगटे खड़े कर देने वाली बात यह रही कि जब पहले हमले के पीड़ितों को इलाज के लिए ले जाया जा रहा था, ठीक उसी रूट पर करीब एक किलोमीटर की दूरी पर दूसरा जोरदार धमाका हुआ। चश्मदीदों के अनुसार, आतंकियों ने इस बार उन वाहनों को टारगेट किया जो घायलों की मदद के लिए आगे बढ़े थे। दूसरे विस्फोट की चपेट में आने से दो और नागरिकों की मौत हो गई और वह गाड़ी भी पूरी तरह तबाह हो गई। बैक-टू-बैक दो बम धमाकों के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई और दहशत का माहौल पैदा हो गया। खुफिया एजेंसियों को अंदेशा है कि आतंकियों ने रेस्क्यू टीम और आम लोगों को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए ही इस डबल-ब्लास्ट की रणनीति बनाई थी।
अस्पतालों में इमरजेंसी लागू, नए बमों की तलाश में जुटे खोजी कुत्ते
वारदात की भयावहता को देखते हुए रेस्क्यू टीमों को तुरंत घटना स्थल के लिए रवाना किया गया। मृतकों के शवों और खून से लथपथ घायलों को तुरंत डोमेल ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र और खलीफा गुल नवाज टीचिंग अस्पताल पहुंचाया गया, जहाँ आपातकाल (इमरजेंसी) घोषित कर दी गई है। दूसरी तरफ, सुरक्षा बलों ने अतिरिक्त बारूदी सुरंगों या बमों की आशंका के मद्देनजर पूरे हाईवे को सील कर दिया है। खोजी कुत्तों और बम निरोधक दस्ते की मदद से झाड़ियों और संदिग्ध रास्तों की सघन चेकिंग की जा रही है ताकि किसी और अनहोनी को रोका जा सके।
हुक्मरानों ने जताई संवेदना, आतंकवाद के वित्तीय तंत्र को ध्वस्त करने की मांग
इस खूनी खेल पर नाराजगी जाहिर करते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हमले की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है और बेगुनाह लोगों की मौत पर गहरा रंज प्रकट किया है। राष्ट्रपति ने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि न केवल बंदूक उठाने वाले आतंकियों, बल्कि उन्हें पीछे से लॉजिस्टिक सपोर्ट, पनाह और वित्तीय मदद (फंडिंग) देने वाले आकाओं के खिलाफ भी निर्णायक कार्रवाई की जाए। वहीं, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और नेशनल असेंबली के अध्यक्ष अयाज सादिक ने भी इस घटना को बेहद कायराना और इंसानियत को शर्मसार करने वाला कृत्य बताया है।
आतंकवाद का नया गढ़ बनता जा रहा है बन्नू जिला
भौगोलिक रूप से संवेदनशील बन्नू जिला पिछले कई महीनों से उग्रवादी संगठनों की हिंसक गतिविधियों का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है। हालिया हफ्तों में यहाँ स्थानीय पुलिसकर्मियों, सीमा सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को लगातार निशाना बनाया गया है। बीते हफ्ते भी चरमपंथियों ने रणनीतिक रूप से अहम एक पुल को उड़ाने की नाकाम कोशिश की थी, जबकि जून महीने की शुरुआत में ही दो अलग-अलग हमलों में पुलिस के जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। क्षेत्र में लगातार खराब होती कानून-व्यवस्था और बढ़ते बारूदी हमलों के कारण स्थानीय कबीलाई समाज में भारी आक्रोश है, और हाल ही में आयोजित एक पारंपरिक जिरगा (पंचायत) में भी स्थानीय नेताओं ने सरकार और फौज से इस इलाके को आतंकवाद से पूरी तरह मुक्त कराने की पुरजोर मांग की थी।
ट्रंप की टिप्पणी पर छिड़ी बहस, पूर्व राष्ट्रपति ने कहा- लोग मजाक नहीं समझे
20 Jun, 2026 02:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया के शीर्ष राष्ट्राध्यक्षों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई एक अनौपचारिक टिप्पणी अचानक वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई। सम्मेलन कक्ष में प्रवेश करते वक्त ट्रंप ने बेहद चुटीले अंदाज में मुस्कुराते हुए कहा था, 'मैं बॉस हूँ।' यह बयान देखते ही देखते इंटरनेट मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो गया और इस पर तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे। अब इस पूरे मामले पर खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा है कि उनके इस बयान का मकसद किसी अन्य देश के नेता पर अपना रसूख या रौब जमाना बिल्कुल नहीं था, बल्कि वे केवल मजाक कर रहे थे। ट्रंप का मानना है कि उनकी इस टिप्पणी को वास्तविक संदर्भ से काटकर देखा गया और लोगों ने इसे जरूरत से ज्यादा गंभीरता से ले लिया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी टिप्पणी पर क्या स्पष्टीकरण दिया?
एक विशेष बातचीत के दौरान जब ट्रंप से जी7 बैठक के उस चर्चित वाक्य को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह एक विशुद्ध रूप से मजाकिया पल था और वे किसी भी वैश्विक नेता के सामने खुद को सर्वश्रेष्ठ या सर्वोपरि दिखाने का प्रयास नहीं कर रहे थे। ट्रंप ने उस पल की कड़ियों को जोड़ते हुए बताया कि जब वे मुख्य बैठक कक्ष के भीतर पहुंचे, तो वहां दुनिया के कई ताकतवर देशों के प्रमुख पहले से ही अपनी कुर्सियों पर मौजूद थे। उसी गंभीर माहौल को थोड़ा दोस्ताना और हल्का-फुल्का बनाने के उद्देश्य से उन्होंने सहज भाव में कह दिया, 'मैं बॉस हूँ।' ट्रंप ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर हैरानी होती है कि कैसे एक बेहद सामान्य से परिहास (मजाक) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतना बड़ा मुद्दा बना दिया गया।
शिखर सम्मेलन के भीतर क्या था वास्तविक घटनाक्रम?
यह पूरा वाकया जी7 शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन की सुबह आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान का है। जैसे ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने कक्ष में कदम रखा और यह टिप्पणी की, वहां मौजूद विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच का तनाव कम हो गया और पूरा कमरा हंसी के ठहाकों से गूंज उठा। ट्रंप की यह बात सुनकर वहां उपस्थित कई राजनेता मुस्कुराने लगे। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी इस चुटकी को बेहद सकारात्मक तरीके से लिया और गर्मजोशी से आगे बढ़कर ट्रंप से कुशलक्षेम पूछते हुए कहा, 'आप कैसे हैं?' इसके जवाब में ट्रंप ने सहजता से कहा, 'मैं बिल्कुल ठीक हूँ, आपका शुक्रिया।' इस पूरे वाकये को सम्मेलन के एक बेहद अनौपचारिक और खुशनुमा पल के रूप में दर्ज किया गया था।
वैश्विक मंच पर माहौल को सामान्य करने की थी कोशिश
डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि उस कमरे में बैठे सभी लोग अंतरराष्ट्रीय राजनीति की बड़ी हस्तियां हैं और अपने-अपने लोकतांत्रिक देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे कूटनीतिक माहौल में जहां गंभीर मुद्दों पर चर्चा होनी थी, उन्होंने सिर्फ एक बर्फ तोड़ने (आइस-ब्रेकर) और माहौल को खुशनुमा करने के लिए यह बात कही थी। उनके मुताबिक, किसी भी राजनीतिक विश्लेषक या व्यक्ति को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि वे हकीकत में खुद को अन्य वैश्विक महाशक्तियों का लीडर या बॉस घोषित कर रहे थे। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से हास्य-विनोद का एक हिस्सा था, भले ही बाद में इसे लेकर दुनिया भर के राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की व्याख्याएं और प्रतिक्रियाएं सामने आती रहीं।
भारत विरोधी प्रदर्शन से हड़कंप, सड़क पर उतरे लोग, उच्चायोग पर हमले का प्रयास
20 Jun, 2026 01:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। पड़ोसी देश बांग्लादेश में सिर उठा रही भारत विरोधी ताकतों ने एक बार फिर कूटनीतिक हलकों में चिंता पैदा कर दी है। राजधानी ढाका में कट्टरपंथी विचारधारा वाले संगठन जमात-ए-इस्लामी और उसके समवैचारिक घटक दलों के कार्यकर्ताओं ने भारत के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया। इस दौरान आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पुतला दहन किया और वहां स्थित भारतीय उच्चायोग का घेराव करने के उद्देश्य से मार्च निकालने का प्रयास किया। हालांकि, मुस्तैद सुरक्षा बलों ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक लिया। शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद से वहां भारत विरोधी भावनाओं और प्रदर्शनों में अचानक आई तेजी ने दोनों देशों के आपसी रिश्तों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीमा विवाद और कथित 'पुश-इन' को बनाया आंदोलन का मुख्य मुद्दा
जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व में संचालित 11 राजनैतिक दलों के मोर्चे ने इस भारत विरोधी अभियान को हवा दी है। इस धड़े का तर्क है कि भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हो रही कथित गोलीबारी और 'पुश-इन' (जबरन सीमा पार धकेलने) की घटनाओं के प्रतिकार में यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया गया है। प्रदर्शनकारी नेताओं ने मंच से आरोप लगाया कि हालिया महीनों में सीमा सुरक्षा बल द्वारा बांग्लादेशी नागरिकों को प्रताड़ित करने और उन्हें जबरन इस पार भेजने की कोशिशें की गई हैं। इन आरोपों को आधार बनाकर यह संगठन पूरे देश में रैलियां, विरोध मार्च, संगोष्ठियां और बैठकें आयोजित कर जनभावनाओं को भड़काने में जुटा है।
मशाल जुलूस के साथ उच्चायोग की तरफ बढ़ने का प्रयास और पुतला दहन
राजधानी में विरोध की कमान मुख्य रूप से 'बांग्लादेश आजाद पार्टी' के हाथों में दिखी, जिसके कार्यकर्ताओं ने देर शाम एक विशाल मशाल जुलूस निकाला। यह हिंसक भीड़ भारतीय उच्चायोग की तरफ कूच कर रही थी, लेकिन कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने गुलशन-1 क्षेत्र में बैरिकेडिंग करके उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। रोके जाने से नाराज प्रदर्शनकारी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और भारत विरोधी नारेबाजी करने लगे। इसी स्थान पर केंद्रीय गृह मंत्री का पुतला फूंका गया और विभिन्न धार्मिक व राजनैतिक संगठनों के शीर्ष नेताओं ने भारत पर क्षेत्रीय राजनीति में कथित 'दादागीरी' करने के आरोप लगाते हुए भड़काऊ भाषण दिए।
नया राजनैतिक विकल्प और द्विपक्षीय संबंधों पर मंडराता खतरा
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में रही 'बांग्लादेश आजाद पार्टी' एक नया राजनैतिक दल है, जिसका गठन इसी वर्ष अप्रैल महीने में हुआ था। इस दल का मुख्य एजेंडा कथित तौर पर बांग्लादेश को भारतीय प्रभाव से पूरी तरह मुक्त कराना और संप्रभुता की रक्षा करना है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद वहां का एक बड़ा धड़ा भारत विरोध को एक मजबूत चुनावी और राजनैतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। उच्चायोग जैसे अत्यधिक संवेदनशील कूटनीतिक क्षेत्र की तरफ मार्च करना और शीर्ष भारतीय राजनेताओं को निशाना बनाना दोनों देशों के बीच भविष्य के द्विपक्षीय और व्यापारिक संबंधों के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर सकता है।
CET Group-D भर्ती का क्रेज, पहले ही दिन 50 हजार से ज्यादा रजिस्ट्रेशन
20 Jun, 2026 12:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचकूला। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) द्वारा आयोजित की जा रही सीईटी (सीईटी) ग्रुप-डी भर्ती प्रक्रिया को लेकर सूबे के बेरोजगार युवाओं में अभूतपूर्व उत्साह और होड़ देखने को मिल रही है। आयोग के नवनियुक्त चेयरमैन हिम्मत सिंह ने सोशल मीडिया मंच के जरिए इस बात की आधिकारिक जानकारी साझा की है कि महज 24 घंटे की अवधि के भीतर रिकॉर्ड 50,146 अभ्यर्थियों ने पोर्टल पर अपना नया पंजीकरण कराया है। विशेष बात यह है कि इनमें से 10,646 आवेदकों ने बिना समय गंवाए अपना पूरा विवरण दर्ज कर आवेदन फॉर्म को अंतिम रूप से लॉक यानी सबमिट भी कर दिया है।
स्वयं आवेदन भरने और त्रुटियों से बचने की विशेष अपील
पंजीकरण की इस भारी बाढ़ के बीच चेयरमैन हिम्मत सिंह ने नौकरी की चाहत रखने वाले सभी युवक-युवतियों से एक विशेष प्रशासनिक अपील की है। उन्होंने अभ्यर्थियों को हिदायत दी है कि वे अपने आवेदन फॉर्म को किसी साइबर कैफे वाले के भरोसे छोड़ने के बजाय स्वयं अपनी देखरेख में भरें और 'फाइनल सबमिट' का बटन दबाने से पहले नाम, शैक्षणिक योग्यता और श्रेणी जैसी तमाम महत्वपूर्ण जानकारियों को दो बार अच्छी तरह से जांच लें। उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि फॉर्म भरते समय की गई कोई भी छोटी सी लापरवाही या टाइपिंग की गलती भविष्य में दस्तावेज़ सत्यापन के समय उनकी पात्रता को रद्द कर सकती है, इसलिए जल्दबाजी करने से पूरी तरह बचें।
भ्रामक अफवाहों से बचने और पारदर्शिता बरतने का भरोसा
आयोग के अध्यक्ष ने भर्ती परीक्षाओं को लेकर सोशल मीडिया और अन्य अनौपचारिक माध्यमों पर प्रसारित होने वाली विभिन्न प्रकार की भ्रामक खबरों और अफवाहों का पूरी तरह खंडन किया है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे किसी भी असत्यापित जानकारी के बहकावे में न आएं और केवल हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के डिजिटल पोर्टल पर जारी होने वाले आधिकारिक दिशा-निर्देशों को ही सत्य मानें। हिम्मत सिंह ने युवाओं को आश्वस्त किया कि पूरी चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी, निष्पक्ष और योग्यता (मेरिट) के आधार पर संपन्न होगी। इतनी बड़ी संख्या में हो रहे आवेदनों को उन्होंने वर्तमान चयन प्रणाली के प्रति युवाओं के अटूट विश्वास का प्रमाण बताया है।
सम्मान से FIR तक! 15 दिन पहले SP से सम्मानित थाना प्रभारी अब जांच के घेरे में
20 Jun, 2026 11:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फतेहाबाद। हरियाणा के फतेहाबाद जिले में खाकी को दागदार करने वाला एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है, जहां सदर थाने के मालखाने में जब्त कर रखी गई शराब की पेटियों को अवैध रूप से खुर्द-बुर्द कर दिया गया। इस संगीन मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सदर थाना प्रभारी प्रहलाद सिंह के विरुद्ध ही आपराधिक मुकदमा दर्ज कर लिया है। शुरुआती जांच में मालखाने से करीब 100 से अधिक शराब की पेटियां गायब होने की पुष्टि हुई है।
पुलिस अधीक्षक के औचक निरीक्षण में खुली पोल
इस पूरे काले कारनामे का भंडाफोड़ उस समय हुआ जब पुलिस अधीक्षक (एसपी) निकिता खट्टर ने मालखाने के रिकॉर्ड और वहां रखी सामग्री की बारीकी से जांच करवाई। स्टॉक में भारी विसंगति और शराब की पेटियां गायब मिलने पर एसपी ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी थाना प्रभारी के खिलाफ तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने के कड़े आदेश जारी किए। इसके साथ ही, आरोपी इंस्पेक्टर प्रहलाद सिंह को शुक्रवार की शाम को ही पद से हटाकर लाइन हाजिर (पुलिस लाइन में ट्रांसफर) कर दिया गया है। प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए उनकी जगह पर रतिया के थाना प्रभारी को सदर थाने की कमान सौंपी गई है।
विशेष जांच टीम का गठन और अन्य कर्मियों पर संशय
मालखाने से इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी कस्टडी से माल गायब होना किसी एक व्यक्ति का काम नहीं माना जा रहा है, जिसके चलते इस मामले में थाने के कुछ अन्य पुलिसकर्मियों और मुंशी पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए इसकी कमान सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) दिव्यांशी सिंगला को सौंपी गई है। एएसपी की अगुवाई में विशेष टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि गायब की गई शराब को कहां खपाया गया और इस रैकेट में कौन-कौन शामिल था।
सम्मान के पंद्रह दिन बाद ही दर्ज हुआ मुकदमा
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि जिस थाना प्रभारी प्रहलाद सिंह पर आज भ्रष्टाचार और अमानत में ख्यानत का मुकदमा चला है, उन्हें महज 15 दिन पहले ही उनके उत्कृष्ट कार्यों और बेहतर पुलिसिंग के लिए विभाग द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया गया था। पुलिस प्रवक्ता विनोद कुमार ने इस पूरे मामले की आधिकारिक पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, इसलिए आरोपी अधिकारी के खिलाफ सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है और मामले की गहनता से तफ्तीश की जा रही है।
दिनदहाड़े फायरिंग से सनसनी, कांग्रेस विधायक के कार्यालय को बनाया निशाना
20 Jun, 2026 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक। हरियाणा के रोहतक जिले के अंतर्गत आने वाले महम क्षेत्र से कांग्रेस विधायक बलराम दांगी के मुख्य दफ्तर पर शुक्रवार की देर रात कुछ अज्ञात बदमाशों ने ताबड़तोड़ चार गोलियां बरसा दीं। इस फायरिंग में दो गोलियां कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगे शीशे को चीरते हुए आर-पार निकल गईं, जबकि दो अन्य गोलियां वहां लगे एल्युमिनियम के दरवाजे में जा धंसी। घटना के बाद महम थाना पुलिस ने पूरे इलाके की नाकेबंदी कर आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है।
दफ्तर पर हमला और सुबह मिली क्षति की जानकारी
कांग्रेस विधायक ने महम कस्बे के मुख्य मार्ग पर अपना जनसंपर्क कार्यालय खोल रखा है, जिसके शीर्ष पर 'कांग्रेस कार्यालय महम' अंकित है। शनिवार की सुबह जब विधायक और उनके स्टाफ को सूचना मिली कि रात के समय किसी ने उनके दफ्तर के मुख्य द्वार पर गोलीबारी कर कांच के शीशे तोड़ दिए हैं, तो वहां हड़कंप मच गया। इस गंभीर वारदात की जानकारी मिलते ही महम पुलिस की एक विशेष टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने विधायक बलराम दांगी से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की।
महम हल्के का ऐतिहासिक और सियासी महत्व
राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो हरियाणा की सियासत में महम विधानसभा क्षेत्र हमेशा से एक बेहद संवेदनशील और रसूखदार हलका रहा है। इस क्षेत्र का इतिहास न केवल 1990 के बहुचर्चित महम कांड से जुड़ा हुआ है, बल्कि 80 के दशक में देश के दिग्गज नेता 'ताऊ' देवीलाल भी इसी ऐतिहासिक धरती से विधायक चुनकर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे थे। इसके बाद के वर्षों में खुद दिग्गज नेता आनंद सिंह दांगी ने भी इस सीट पर कई बार जीत दर्ज कर अपना सियासी परचम लहराया था।
विरासत की राजनीति और पुलिस की तफ्तीश
पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान आनंद सिंह दांगी ने अपनी राजनैतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए अपने पुत्र बलराम दांगी को चुनावी मैदान में उतारा था, जिसमें बलराम भारी मतों से विजयी होकर विधानसभा पहुंचे थे। जनप्रतिनिधि के कार्यालय पर इस तरह सरेआम हुई फायरिंग की घटना ने स्थानीय कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और दोषियों की धरपकड़ के लिए कई संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
अमेरिकी नाकाबंदी हटते ही ईरान का बड़ा फैसला, समुद्री जहाजों के लिए बदले नियम
20 Jun, 2026 11:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने एक बहुत बड़ा नीतिगत परिवर्तन किया है। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के मध्य संपन्न हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) के आलोक में अब किसी भी वाणिज्यिक पोत या जहाज को इस जलमार्ग से सीधे गुजरने की स्वतंत्रता नहीं होगी। ईरान सरकार द्वारा लागू की गई नई विनियामक व्यवस्था के अंतर्गत अब केवल उन्हीं जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आवागमन की अनुमति मिलेगी जो पूर्व में इसके लिए औपचारिक आवेदन करेंगे और निर्धारित दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन करेंगे। चूंकि वैश्विक स्तर पर कुल कच्चे तेल और एलएनजी के लगभग पांचवें हिस्से का परिवहन इसी संकीर्ण मार्ग से होता है, इसलिए ईरान के इस रणनीतिक कदम को अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्य और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परमिट आधारित नई व्यवस्था और कड़े सुरक्षा नियम
इस ऐतिहासिक बदलाव से पूर्व होर्मुज जलडमरूमध्य से पारगमन के लिए किसी विशेष प्रशासनिक परमिशन की आवश्यकता नहीं होती थी और जहाज अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों के अनुरूप यहां से गुजरते थे। हालांकि, अब ईरान ने 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' (पीजीएसए) नामक एक नई नोडल एजेंसी का गठन कर संपूर्ण प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल दिया है। नए नियमों के तहत प्रत्येक जहाज को होर्मुज क्षेत्र में प्रवेश करने से कम से कम 48 घंटे पहले ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रस्तुत करना होगा। इस डिजिटल आवेदन में जहाज का नाम, पंजीकृत ध्वज, आईएमओ नंबर, कार्गो (सामान) की विस्तृत प्रकृति, स्वामित्व का विवरण, बीमा प्रपत्र और चालक दल के सदस्यों की राष्ट्रीयता जैसी अत्यंत गोपनीय जानकारियां साझा करनी होंगी। यदि कोई भी दस्तावेज या सूचना अपूर्ण पाई जाती है, तो पीजीएसए को आवेदन लंबित रखने या उसे पूरी तरह से निरस्त करने का सर्वाधिकार होगा।
सीमित वैधता, निर्धारित समुद्री मार्ग और बीमा के नए प्रावधान
ईरान की नई एजेंसी द्वारा आवेदन स्वीकृत किए जाने के उपरांत जहाजों को एक विशिष्ट पारगमन परमिट जारी किया जाएगा, जो केवल एक बार की यात्रा के लिए और अधिकतम पांच दिनों तक ही वैध रहेगा। समय सीमा समाप्त होने पर नया आवेदन करना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, जहाजों को अपनी मर्जी से मार्ग बदलने की अनुमति नहीं होगी; उन्हें लारक द्वीप के समीप से गुजरने वाले ईरान द्वारा निर्धारित आधिकारिक रूट का ही अनुसरण करना होगा। तय मार्ग से हटने पर होने वाले किसी भी नुकसान या दंडात्मक कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी जहाज के कप्तान और मालिक की होगी। इस व्यवस्था के अंतर्गत जहाजों के लिए पीजीएसए से मान्यता प्राप्त बीमा होना भी आवश्यक कर दिया गया है। सबसे विवादास्पद पहलू यह है कि आवेदन प्रक्रिया के दौरान जहाज मालिकों को एक घोषणा पत्र पर सहमति देनी होगी, जिसके तहत वे भविष्य में इस नियामक एजेंसी के किसी भी निर्णय को विधिक चुनौती नहीं दे सकेंगे।
शुरुआती रियायतें और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव
द्विपक्षीय समझौते की शर्तों के अनुसार, पहले 60 दिनों की प्रारंभिक अवधि के दौरान जहाजों से नौवहन सहायता, सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और इसका संपूर्ण वित्तीय भार ईरानी सरकार स्वयं वहन करेगी। हालांकि, यह कर-मुक्त सुविधा केवल अस्थायी है और ईरान ने भविष्य में इन सेवाओं पर भारी शुल्क लगाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। भारत, जो अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं का एक बहुत बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आयात करता है, सहित चीन, जापान और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख वैश्विक उपभोक्ता इस नई व्यवस्था पर पैनी नजर रख रहे हैं। वर्तमान में भू-राजनीतिक तनाव कम होने से समुद्री यातायात सुचारू होने की उम्मीद तो जगी है, परंतु दूरगामी रूप से सख्त नियमों और भावी शुल्कों के कारण वैश्विक शिपिंग लागत में बढ़ोतरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
ट्रंप-नेतन्याहू संबंधों में खटास की अटकलें, रुबियो ने दिया लेबनान को भरोसा
20 Jun, 2026 09:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच अमेरिका ने लेबनान की संप्रभुता और स्थिरता को लेकर अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन से फोन पर वार्ता कर देश की सुरक्षा के प्रति अमेरिकी प्रतिबद्धता को दोहराया। यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब लेबनान अपनी सीमाओं पर इस्राइली सैन्य कार्रवाइयों को थामने की पुरजोर कोशिश कर रहा है, जिसे विशेषज्ञ ट्रंप प्रशासन की क्षेत्रीय रणनीति के एक नए अध्याय के रूप में देख रहे हैं।
अमेरिकी संदेश और सैन्य सहयोग का भरोसा
मार्को रुबियो ने राष्ट्रपति आउन को आश्वस्त किया कि वाशिंगटन लेबनान की अखंडता का समर्थक है और वह चाहता है कि देश के सभी हिस्सों पर वहां की चुनी हुई सरकार का पूर्ण नियंत्रण हो। अमेरिका ने लेबनान की आधिकारिक सेना और सुरक्षा एजेंसियों को अपनी सहायता जारी रखने का दृढ़ संकल्प जताया है, जो वर्तमान सीमाई चुनौतियों के बीच बेहद अहम माना जा रहा है।
वार्ता से पूर्व स्थाई संघर्ष विराम की आवश्यकता
अमेरिकी रुख की सराहना करते हुए राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने लेबनान की धरती पर इस्राइली सैन्य अभियानों पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन में होने वाली आगामी त्रिपक्षीय बैठक को सार्थक बनाने के लिए जमीन पर शांति होना पहली शर्त है। आउन के अनुसार, यह युद्धविराम केवल अस्थायी व्यवस्था न होकर भविष्य की स्थाई सुरक्षा और संप्रभुता की बुनियादी आवश्यकता है।
क्षेत्रीय शांति प्रयास और युद्धविराम का प्रभाव
इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच हाल ही में प्रभावी हुआ संघर्ष विराम इस दिशा में एक राहत भरा कदम माना जा रहा है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय राजनयिक प्रयासों के बाद लागू हुए इस ठहराव से सीमा पर तनाव कम होने की उम्मीद है, जिससे आगामी वाशिंगटन वार्ता के लिए एक सकारात्मक मंच तैयार होगा। वर्तमान में अमेरिका और कतर सहित अन्य मध्यस्थ देश इस संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी की नेतृत्व शैली की सराहना की
20 Jun, 2026 09:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक नेतृत्व की जमकर प्रशंसा करते हुए उन्हें एक उत्कृष्ट नेता और दृढ़ प्रशासक बताया है। 'एक्सियोस' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया के उन चुनिंदा नेताओं का उल्लेख किया जिन्हें वे सबसे अधिक सम्मान देते हैं, जिनमें पीएम मोदी का नाम प्रमुखता से शामिल था। बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने वैश्विक कूटनीति, राजनीतिक सामर्थ्य और अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारतीय प्रधानमंत्री के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया।
राजनीतिक स्थिरता और दूरदर्शी नेतृत्व
हाल ही में संपन्न हुई जी-7 शिखर वार्ता का स्मरण करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री मोदी की प्रभावशाली उपस्थिति की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री एक महान व्यक्तित्व के धनी हैं। जब ट्रंप से एक सफल नेता की परिभाषा पूछी गई, तो उन्होंने पीएम मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत जैसे विशाल देश में जहां पहले सरकारें और नेतृत्व तेजी से बदलते रहते थे, वहां नरेंद्र मोदी ने एक अभूतपूर्व राजनीतिक स्थिरता दी है। वे पिछले 12 वर्षों से अधिक समय से सुदृढ़ता के साथ देश का नेतृत्व कर रहे हैं।
शांत स्वभाव के पीछे दृढ़ संकल्प
अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली और उनके व्यक्तित्व के आंतरिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे बाहर से जितने शांत और सौम्य दिखाई देते हैं, वास्तव में वे उतने ही सख्त और निर्णय लेने में अडिग प्रशासक हैं। ट्रंप ने साझा किया कि वे व्यक्तिगत रूप से भारतीय प्रधानमंत्री को बहुत करीब से जानते हैं और उनका यह दृढ़ स्वाभाव ही भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।
वैश्विक मंच पर सम्मान और आर्थिक प्रगति
साक्षात्कार में ट्रंप ने स्वीकार किया कि करीब डेढ़ अरब की आबादी वाले विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का कुशल संचालन करने वाले पीएम मोदी की वे दिल से इज्जत करते हैं। उन्होंने भारत के हालिया आर्थिक विकास और शानदार प्रदर्शन का श्रेय प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को देते हुए कहा कि भारत ने आर्थिक मोर्चे पर बेहतरीन आंकड़े पेश किए हैं। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय विवादों और युद्ध जैसी परिस्थितियों से दूरी बनाए रखने की भारतीय नीति को भी उन्होंने एक बेहद समझदारी भरा कदम बताया।
क्या वुहान लैब में बना था वायरस? तुलसी गबार्ड के बयान से फिर गरमाई बहस
19 Jun, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। चीन की विख्यात वुहान वायरोलॉजी प्रयोगशाला को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज अंतरराष्ट्रीय खुलासा हुआ है। यह वही प्रयोगशाला है जिसे वैश्विक स्तर पर कोरोना महामारी की उत्पत्ति का मुख्य केंद्र माना जाता रहा है। अब अमेरिकी खुफिया एजेंसी (ODNI) की निवर्तमान महानिदेशक तुलसी गबार्ड ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के शीर्ष चिकित्सा सलाहकार रहे डॉ. एंथनी फाउची ने इस चीनी प्रयोगशाला को गुप्त रूप से आर्थिक सहायता पहुंचाई थी। गबार्ड ने डोनाल्ड ट्रंप के खुफिया प्रमुख का पद छोड़ने के तुरंत बाद अपने कार्यकाल के अंतिम दिन कई ऐसे गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक कर दिए हैं, जिन्होंने चिकित्सा जगत और वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है। इन अप्रत्याशित सरकारी कागजातों के जरिए सीधे डॉ. फाउची की भूमिका को गंभीर संदेहास्पद घेरे में खड़ा किया गया है।
करदाताओं के पैसों से चमगादड़ वायरस पर जानलेवा शोध और वैक्सीन बाजार का खेल
सार्वजनिक किए गए आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, 85 वर्षीय डॉ. एंथनी फाउची ने अमेरिकी नागरिकों के टैक्स के पैसों का दुरुपयोग करते हुए वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को लाखों डॉलर का गुप्त अनुदान दिया था। इस भारी-भरकम अमेरिकी फंडिंग का मुख्य उद्देश्य वुहान की लैब में चमगादड़ों में पाए जाने वाले कोरोना वायरस पर अत्यधिक जोखिम भरी 'गेन-ऑफ-फंक्शन' रिसर्च को अंजाम देना था। वैज्ञानिक भाषा में इस प्रकार के प्रयोगों के माध्यम से प्राकृतिक वायरसों को प्रयोगशाला के भीतर कृत्रिम रूप से कहीं अधिक संक्रामक, घातक और जानलेवा बनाया जाता है। राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान (NIAID) के प्रमुख के रूप में 38 वर्षों तक काम करने वाले डॉ. फाउची पर आरोप है कि उन्होंने ट्रिलियन डॉलर के 'यूनिवर्सल वैक्सीन' मार्केट को खड़ा करने और दवा निर्माता कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए इस खतरनाक रिसर्च को जानबूझकर बढ़ावा दिया।
इंटेलिजेंस कम्युनिटी पर दबाव और फर्जी रिसर्च पेपर के जरिए सच को दबाने की साजिश
खुफिया रिपोर्ट में यह सनसनीखेज आरोप भी लगाया गया है कि डॉ. फाउची ने प्रशासनिक तंत्र में बैठे कुछ चुनिंदा अधिकारियों के साथ साठगांठ कर वायरस के लैब से लीक होने की थ्योरी को पूरी तरह दफन करने का प्रयास किया। साक्ष्यों के मुताबिक, उन्होंने अपने पसंदीदा वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम तैयार की और अमेरिकी खुफिया समुदाय पर यह मनगढ़ंत नैरेटिव स्वीकार करने का कड़ा दबाव बनाया कि कोविड-19 पूरी तरह से एक प्राकृतिक आपदा थी जो जानवरों के जरिए इंसानों में फैली। इसके लिए एक सोची-समझी रणनीति के तहत 'सर्कुलर रिपोर्टिंग लूप' का सहारा लिया गया, जिसके तहत फाउची के ही विभाग से आर्थिक लाभ पाने वाले विशेषज्ञों को खुफिया एजेंसियों को सलाह देने के लिए भेजा जाता था और बाद में उसी सरकारी इनपुट को 'वैज्ञानिक आम सहमति' का नाम देकर दुनिया के सामने परोसा जाता था ताकि कोई भी वुहान लैब पर शक न कर सके।
संसदीय समिति के सामने झूठी गवाही और सच बोलने वाले व्हिसलब्लोअर्स का उत्पीड़न
इन दस्तावेजों में सबसे गंभीर और दंडात्मक आरोप डॉ. फाउची द्वारा अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की लोक सुनवाई के दौरान झूठी शपथ लेने को लेकर लगा है। जून 2024 में हुई एक कड़े संसदीय कड़े इम्तिहान के दौरान जब उनसे पूछा गया था कि क्या उन्होंने कभी सीआईए, एफबीआई या अन्य खुफिया जांच एजेंसियों से इस वायरल रिसर्च पर गुप्त संवाद किया था, तो उन्होंने साफ मुकरते हुए इस बात से पूरी तरह इनकार कर दिया था, जबकि नए दस्तावेज इसके ठीक विपरीत गवाही दे रहे हैं। तुलसी गबार्ड ने इस पूरे घटनाक्रम को 'डीप स्टेट' की एक खतरनाक और अलोकतांत्रिक साजिश करार देते हुए कहा कि जिस वायरस ने करोड़ों वैश्विक नागरिकों को असहनीय दर्द और मौत दी, उसकी सच्चाई जानने का हक पूरी दुनिया को है। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि जिन साहसी खुफिया विश्लेषकों और व्हिसलब्लोअर्स ने फाउची के इस निष्कर्ष को चुनौती देने की कोशिश की, उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर उनके करियर को तबाह कर दिया गया ताकि असहमति की हर आवाज को दबाया जा सके।
खतरे में दाना-पानी? सिंधु विवाद को लेकर पाकिस्तान पहुंचा संयुक्त राष्ट्र
19 Jun, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। सिंधु जल समझौते के क्रियान्वयन को लेकर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की छटपटाहट एक बार फिर वैश्विक मंच पर उजागर हुई है। पाकिस्तान ने सीधे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का रुख करते हुए भारत पर इस ऐतिहासिक जल संधि की शर्तों के उल्लंघन का सनसनीखेज आरोप मढ़ा है। इस्लामाबाद प्रशासन का तर्क है कि भारत द्वारा चिनाब नदी के जल तंत्र पर बनाई जा रही कुछ बुनियादी ढांचागत जल परियोजनाएं इस द्विपक्षीय समझौते की मूल भावना के सर्वथा विपरीत हैं। पाकिस्तान को यह डर सता रहा है कि भारत के इन कदमों से उसके हिस्से के पानी, कृषि, खाद्य सुरक्षा और पूरी अर्थव्यवस्था पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिससे देश के सामने जीवन-यापन का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। इस सिलसिले में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार की ओर से सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को एक आधिकारिक विरोध पत्र भी भेजा गया है, जिसे संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद ने यूएनएससी की वर्तमान अध्यक्ष व कोलंबिया की राजनयिक लियोनोर जालाबाता टोरेस के समक्ष प्रस्तुत किया।
चिनाब नदी के प्राकृतिक बहाव को प्रभावित करने का आरोप और यूएन से हस्तक्षेप की गुहार
पाकिस्तानी पक्ष का मुख्य आरोप यह है कि भारत चिनाब नदी प्रणाली पर संचालित अपनी दो बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं के माध्यम से पश्चिमी क्षेत्र की नदियों के प्राकृतिक जल प्रवाह और उसके उपभोग के दशकों पुराने स्थापित ढांचे को कृत्रिम रूप से बदलने की कोशिश कर रहा है। इस्लामाबाद के राजनयिकों का कहना है कि नई दिल्ली की ये निर्माण गतिविधियां सिंधु जल संधि के नियमों के दायरे में नहीं आती हैं और इससे संपूर्ण दक्षिण एशियाई क्षेत्र की स्थिरता और शांति दांव पर लग सकती है। पाकिस्तानी राजदूत ने सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने सुरक्षा परिषद से इस संवेदनशील जल विवाद का तुरंत संज्ञान लेने तथा भारत को इन कथित तकनीकी उल्लंघनों के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर जवाबदेह बनाने की पुरजोर अपील की है। इसके साथ ही पाकिस्तानी तंत्र ने हमेशा की तरह इस मुद्दे की आड़ में कश्मीर से जुड़े पुराने राग को भी अलापने का प्रयास किया।
एक वर्ष से अधिक समय से जारी है गतिरोध, भारत ने जल संसाधनों पर नियंत्रण की बात को नकारा
दोनों देशों के बीच इस रणनीतिक मुद्दे को लेकर पिछले एक साल से भी अधिक समय से तीखा कूटनीतिक गतिरोध चल रहा है। विदेश मंत्री इशाक डार ने इससे पहले अप्रैल महीने में भी संयुक्त राष्ट्र को इसी तरह का एक शिकायती पत्र प्रेषित किया था, जिसमें उन्होंने भारत सरकार द्वारा सिंधु जल संधि की बैठकों को प्रभावी रूप से स्थगित रखने के एक वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए इसके गंभीर मानवीय दुष्परिणामों की चेतावनी दी थी। हालिया रिपोर्टों में पाकिस्तान ने यह नया दावा भी ठोक दिया है कि भारत सिंधु नदी तंत्र से जुड़ी कुल 17 परियोजनाओं पर समानांतर काम कर रहा है, जो भविष्य में नई दिल्ली को इन महत्वपूर्ण जल संसाधनों पर एकाधिकार और पूर्ण नियंत्रण की शक्ति दे सकती हैं। दूसरी ओर, भारत सरकार ने पाकिस्तान के इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए बार-बार स्पष्ट किया है कि उसकी सभी परियोजनाएं पूरी तरह वैध हैं और वे अंतरराष्ट्रीय नियमों व देश की अपनी विकासात्मक जरूरतों के बिल्कुल अनुकूल हैं।
वर्ष 1960 की ऐतिहासिक संधि का सफर और पहलगाम आतंकी हमले के बाद बदला रुख
उल्लेखनीय है कि विश्व बैंक की सीधी मध्यस्थता में साल 1960 में हस्ताक्षरित हुई सिंधु जल संधि दोनों पड़ोसी देशों के बीच नदियों के पानी के न्यायसंगत बंटवारे की कानूनी रूपरेखा तय करती है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत रावी, ब्यास और सतलुज जैसी पूर्वी नदियों के पानी के इस्तेमाल का पूर्ण अधिकार भारत को सौंपा गया था, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी तीन पश्चिमी नदियों का अधिकांश पानी पाकिस्तान के हिस्से में तय किया गया था। बीते कई दशकों तक यह संधि दोनों देशों के बीच बेहद सफल और अटूट मानी जाती रही, जो भीषण युद्धों और कूटनीतिक कड़वाहट के दौर में भी कभी नहीं रुकी। परंतु, साल 2025 में हुए भीषण पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत का रुख बेहद कड़ा हो गया। नई दिल्ली ने इस कायरतापूर्ण हमले के लिए पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए इस जल समझौते के भविष्य को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया, जिसने पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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