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ब्रिटिश राजनीति का अगला बड़ा चेहरा, एंडी बर्नहम पर टिकी निगाहें
23 Jun, 2026 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। ब्रिटेन की राजनीति से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने मंगलवार को अचानक अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है, जिसके बाद देश के राजनीतिक गलियारों में भारी खलबली मच गई है। गौर करने वाली बात यह है कि ब्रिटेन में बीते दस वर्षों के भीतर यह सातवें प्रधानमंत्री का इस्तीफा है, जो वहां की चरमराई और अस्थिर राजनीतिक स्थिति को साफ तौर पर बयां करता है।
अपनों की बगावत के आगे झुके कीर स्टार्मर
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर यह इस्तीफा देने का दबाव किसी विपक्षी दल की तरफ से नहीं, बल्कि उनकी ही कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों की ओर से आ रहा था। बताया जा रहा है कि देश की विदेश सचिव (फॉरेन सेक्रेटरी) येवेट कूपर ने खुद निजी तौर पर स्टार्मर से मुलाकात कर उन्हें पद छोड़ने के लिए कह दिया था। इस आंतरिक संकट की शुरुआत तब हुई थी जब रक्षा मंत्री जॉन हीली ने स्टार्मर सरकार पर डिफेंस बजट (रक्षा बजट) में भारी कटौती करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। रक्षा मंत्री के जाने के बाद सरकार के भीतर असंतोष और ज्यादा बढ़ गया, जिसके चलते आखिरकार स्टार्मर को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी।
अगले पीएम की रेस में सबसे आगे एंडी बर्नहम
इस अप्रत्याशित राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के बेहद कद्दावर और वरिष्ठ नेता एंडी बर्नहम का नाम ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार के रूप में सामने आया है। एंडी बर्नहम वर्तमान में लेबर पार्टी के एक प्रमुख स्तंभ हैं और साल 2017 से लगातार 'ग्रेटर मैनचेस्टर' के मेयर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कैम्ब्रिज से पढ़ाई और 'किंग ऑफ द नॉर्थ' का सफर
शुरुआती जीवन और शिक्षा: जनवरी 1970 में लिवरपूल में जन्मे एंडी बर्नहम उत्तर-पश्चिम इंग्लैंड में पले-बढ़े। वे बचपन से ही राजनीति की तरफ आकर्षित थे और महज 15 साल की छोटी उम्र में ही उन्होंने लेबर पार्टी की सदस्यता ले ली थी। उन्होंने दुनिया की प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य (इंग्लिश लिटरेचर) की पढ़ाई पूरी की है।
संसदीय और कैबिनेट करियर: बर्नहम ने साल 2001 में पहली बार सांसद (MP) का चुनाव जीता था। इसके बाद उन्होंने पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्रियों टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन की लेबर सरकारों में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला। साल 2008 में उन्हें ब्रिटेन का कल्चर सेक्रेटरी नियुक्त किया गया और उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए 2009 में उन्हें प्रमोट करके देश का हेल्थ सेक्रेटरी (स्वास्थ्य मंत्री) बनाया गया, जहाँ उन्होंने इंग्लैंड की प्रतिष्ठित नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के प्रभारी के रूप में उल्लेखनीय काम किया।
तीसरी कोशिश में मिल सकती है कामयाबी: बर्नहम बेहद महत्वाकांक्षी नेता माने जाते हैं। वे इससे पहले भी दो बार लेबर पार्टी का शीर्ष नेता (और पीएम उम्मीदवार) बनने की रेस में शामिल हो चुके हैं। हालांकि, साल 2010 में वे एड मिलिबैंट से और साल 2015 में जेरेमी कॉर्बिन के खिलाफ आंतरिक चुनाव हार गए थे। लेकिन मौजूदा संकट में लेबर पार्टी के सांसद और कार्यकर्ता उनके नाम पर पूरी तरह एकजुट दिखाई दे रहे हैं, जिससे उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ नजर आ रहा है।
क्यों कहलाए 'किंग ऑफ द नॉर्थ'?: मेयर के तौर पर बर्नहम ने मैनचेस्टर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट, हाउसिंग और रोजगार के क्षेत्र में क्रांतिकारी काम किए हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान जब पूरा देश संकट में था, तब उन्होंने उत्तरी इंग्लैंड के हक और सरकारी आर्थिक मदद के लिए तत्कालीन यूके सरकार से सीधी लड़ाई लड़ी थी। उनके इसी आक्रामक और जनता के प्रति समर्पित रुख के कारण जनता ने उन्हें बेहद लोकप्रिय टीवी सीरीज 'गेम ऑफ थ्रोन्स' से प्रेरित होकर 'किंग ऑफ द नॉर्थ' (उत्तर का राजा) का उपनाम दिया था।
कतर के औद्योगिक क्षेत्र में त्रासदी, गैस प्लांट ब्लास्ट में भारी जनहानि
23 Jun, 2026 09:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दोहा। कतर के एक औद्योगिक क्षेत्र में स्थित गैस प्रसंस्करण संयंत्र (गैस प्रोसेसिंग प्लांट) में एक भीषण विस्फोट होने से बड़ा हादसा हो गया है। इस दर्दनाक दुर्घटना में भारतीय नागरिकों समेत कई लोगों की मौत हो गई है, जबकि बहुत बड़ी संख्या में श्रमिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं। विस्फोट इतना जोरदार था कि इसके तुरंत बाद पूरे प्लांट परिसर में भीषण आग फैल गई, जिससे वहां काम कर रहे कर्मचारियों के बीच अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई।
बचाव कार्य जारी, हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका
हादसे की सूचना मिलते ही कतर के स्थानीय प्रशासन, दमकल विभाग और आपदा राहत टीमों ने बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंचकर बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। अधिकारियों के मुताबिक, जिस समय यह जोरदार धमाका हुआ, उस समय प्लांट के अंदर भारी संख्या में मजदूर अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। यही वजह है कि इस हादसे में हताहतों की संख्या अभी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल, सभी घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ कई श्रमिकों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
भारतीय दूतावास ने शुरू की मदद
प्रशासनिक अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि मलबे से निकाले गए मृतकों में कुछ भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। हालांकि, अभी कतर प्रशासन की ओर से सभी मृतकों और घायलों की आधिकारिक पहचान (नाम और पते) उजागर करने की कानूनी प्रक्रिया चल रही है। इस बीच, कतर स्थित भारतीय दूतावास ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। दूतावास ने बयान जारी कर कहा है कि वे कतर के स्थानीय अधिकारियों और अस्पताल प्रशासन के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और प्रभावित भारतीय मूल के श्रमिकों व उनके परिवारों को हर संभव कूटनीतिक और चिकित्सीय सहायता पहुंचाई जा रही है।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल, जांच के आदेश
इस भीषण हादसे के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमों ने घटनास्थल को अपने घेरे में लेकर बारीकी से निरीक्षण शुरू कर दिया है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि प्लांट की पाइपलाइन में हुए किसी बड़े गैस रिसाव (लीकेज) के कारण यह धमाका हुआ होगा, लेकिन इसकी पूरी तरह से आधिकारिक पुष्टि विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। इस भयंकर औद्योगिक दुर्घटना ने कतर के कारखानों में लागू होने वाले सुरक्षा मानकों (सेफ्टी प्रोटोकॉल) पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय सरकार ने मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं और मामले की पूरी तरह निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिया है।
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच बड़ा फैसला, तेल प्रतिबंध 21 अगस्त तक शिथिल
23 Jun, 2026 08:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर लगे कुछ प्रमुख कड़े प्रतिबंधों में अस्थायी रूप से ढील देने का बड़ा फैसला किया है। अमेरिकी प्रशासन ने इसके लिए 60 दिनों के लिए एक विशेष लाइसेंस जारी किया है। इस छूट के तहत 21 अगस्त तक ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, बिक्री, उनके परिवहन (शिपिंग) और इससे जुड़े तमाम वित्तीय लेनदेन (बैंकिंग ट्रांजैक्शन) को वैध अनुमति दे दी गई है।
तनाव कम करने के लिए अंतरिम व्यवस्था
यह महत्वपूर्ण कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच शांति, क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा से जुड़े बेहद संवेदनशील मुद्दों पर गुप्त और द्विपक्षीय बातचीत चल रही है। इस उच्च स्तरीय वार्ता में दोनों देशों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही जैसे गंभीर विषयों पर गहन चर्चा हो रही है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका द्वारा दी गई यह राहत किसी स्थायी समझौते का हिस्सा नहीं है, बल्कि कूटनीतिक बातचीत को बिना किसी कड़वाहट के आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच बने युद्ध के माहौल (तनाव) को कम करने के लिए एक अंतरिम (कामचलाऊ) व्यवस्था है।
वैश्विक तेल बाजार में आई गिरावट
अमेरिकी वित्त विभाग (US Treasury Department) ने इस फैसले पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। विभाग का कहना है कि यह विशेष छूट 21 अगस्त तक ही प्रभावी रहेगी और इसके बाद प्रतिबंधों को आगे बढ़ाना या हटाना पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि स्विट्जरलैंड में चल रही वार्ताओं की प्रगति कैसी रहती है। इस बड़े फैसले का सीधा और तत्काल असर वैश्विक ऊर्जा और तेल बाजार पर देखने को मिला है। प्रतिबंधों में ढील की घोषणा होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। बाजार के निवेशकों और विश्लेषकों को उम्मीद है कि इस छूट के बाद वैश्विक बाजार में ईरानी तेल की आपूर्ति (सप्लाई) तेजी से बढ़ेगी, जिससे कच्चे तेल के दाम नियंत्रित रहेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बातचीत सफल रही, तो न केवल मध्य पूर्व का संकट टलेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी बड़ी स्थिरता मिलेगी।
अंतिम पल में टला खतरा: भारतीय जहाज होर्मुज से सुरक्षित बाहर निकला
22 Jun, 2026 04:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। लेबनान पर इज़राइली सेना की लगातार बमबारी से असंतुष्ट होकर ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को यातायात के लिए पूरी तरह बंद करने का फैसला किया है। हालांकि, इस नाकेबंदी से ठीक पहले भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। भारतीय ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े चार जहाज ईरान के इस कड़े कदम से ऐन पहले सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार करने में सफल रहे हैं, जिससे देश की एनर्जी सुरक्षा पर मंडरा रहा तत्काल खतरा टल गया है।
भारतीय जहाजों की सुरक्षित वापसी और उनका महत्व
ईरान द्वारा जलमार्ग बंद किए जाने से ठीक पहले जो 55 जहाज वहां से रवाना हुए, उनमें भारत आ रहा एलएनजी (LNG) से लदा एक प्रमुख जहाज 'अल हामरा' भी शामिल है। सुरक्षा कारणों से इस जहाज ने संवेदनशील इलाकों से गुजरते समय अपनी ट्रैकिंग प्रणाली को बंद कर दिया था। यह जहाज संयुक्त अरब अमीरात की राष्ट्रीय तेल कंपनी से 1 लाख 32 हजार 890 क्यूबिक मीटर गैस लेकर तमिलनाडु के एन्नोर टर्मिनल की तरफ बढ़ रहा है। दक्षिण भारत के ऊर्जा संकट को दूर रखने और वहां मौजूद बिजली व खाद कारखानों को चालू रखने के लिए इस कार्गो का समय पर पहुंचना बेहद जरूरी है। भारत अपनी आवश्यकता का 10 से 15 प्रतिशत एलएनजी अबू धाबी से जबकि सबसे बड़ा हिस्सा (40 से 45 फीसदी) कतर से आयात करता है।
कच्चे तेल के तीन अन्य टैंकरों का सफर
केंद्रीय मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, 'अल हामरा' के अलावा भारतीय ध्वज वाले तीन अन्य बड़े कच्चे तेल के टैंकर भी 94 भारतीय क्रू मेंबर्स के साथ होर्मुज जलमार्ग को पार कर सुरक्षित आगे बढ़ चुके हैं। इन जहाजों में कुल मिलाकर 8.6 लाख टन से अधिक कच्चा तेल लदा हुआ है। इन तीनों जहाजों के भारत पहुंचने का विवरण इस प्रकार है:
देश वैभव: इसके 24 जून को वाडीनार बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है।
देश विभोर: इसके भी 24 जून को सिक्का बंदरगाह पर लंगर डालने की संभावना है।
सनमार हेराल्ड: इस तीसरे टैंकर के 1 जुलाई तक पारादीप बंदरगाह पहुंचने का अनुमान है।
ईरान की चेतावनी और शांति बहाली के प्रयास
ईरान के सैन्य मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज को बंद करने का फैसला विरोधी देशों द्वारा किए गए वादों को तोड़ने और लेबनान पर हमलों के विरोध में लिया गया पहला कदम है। यदि परिस्थितियां नहीं सुधरीं, तो ईरान आगे और भी कड़े कदम उठा सकता है। इस बीच, खाड़ी देशों में शांति बहाल करने के लिए स्विट्जरलैंड के एक रिसॉर्ट में अमेरिका और ईरान के शीर्ष प्रतिनिधियों के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी शुरू हो चुकी है। हालांकि, मौजूदा सत्र में यह बातचीत कुछ हद तक रुक सी गई है, लेकिन दोनों पक्षों के राजनयिकों को फिर से चर्चा की मेज पर लाने के लिए परदे के पीछे से प्रयास (बैकचैनल संपर्क) लगातार किए जा रहे हैं।
हिजाब विवाद में फंसी ईरानी कलाकार, कोर्ट ने सुनाई सजा
22 Jun, 2026 03:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: ईरान की एक अदालत ने देश के बेहद कड़े इस्लामी कानूनों का उल्लंघन करने के आरोप में 29 वर्षीय मशहूर गायिका और संगीतकार परस्तू अहमदी को 74 कोड़ों की अमानवीय सजा सुनाई है। परस्तू पर आरोप है कि उन्होंने एक ऑनलाइन प्रस्तुति के दौरान देश के अनिवार्य हिजाब कानून का पालन नहीं किया और बिना हिजाब के स्लीवलेस (बिना आस्तीन की) ड्रेस पहनकर परफॉर्म किया। कोम प्रांत की अदालत ने उनके इस कृत्य को 'अश्लीलता फैलाना' करार देते हुए यह सख्त सजा मुकर्रर की है।
पूरी प्रोडक्शन टीम पर गाज और करियर पर पूर्ण प्रतिबंध
अदालत का यह सख्त रुख केवल गायिका तक ही सीमित नहीं रहा। कोर्ट ने परस्तू अहमदी की प्रोडक्शन टीम के आठ अन्य सदस्यों को भी इस कृत्य का दोषी मानते हुए 74-74 कोड़े मारने का हुक्म दिया है। इसके साथ ही परस्तू के करियर को पूरी तरह प्रभावित करने वाले कई प्रतिबंध भी लगाए गए हैं, जिसके तहत अगले दो वर्षों तक उनके देश छोड़ने पर रोक लगा दी गई है और वे किसी भी तरह के कॉन्सर्ट या पब्लिक इवेंट में हिस्सा नहीं ले सकेंगी।
यूट्यूब लाइव कॉन्सर्ट से शुरू हुआ विवाद और मानवाधिकारों पर बहस
यह पूरा विवाद दिसंबर 2024 में आयोजित एक ऑनलाइन कॉन्सर्ट से जुड़ा है, जिसमें परस्तू ने यूट्यूब पर लाइव आकर प्रसिद्ध देशभक्ति गीत 'अज खूने जवानाने वतन' गाया था। इस प्रदर्शन के दौरान काले रंग की स्लीवलेस पोशाक पहनने के कारण उन्हें और उनकी टीम को तुरंत हिरासत में ले लिया गया था। ईरान में महिलाओं के लिए सार्वजनिक और डिजिटल मंचों पर हिजाब पहनना अनिवार्य है। इस फैसले के सामने आने के बाद दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों ने इसकी तीखी आलोचना की है और सोशल मीडिया पर ईरान में महिलाओं की आजादी तथा मानवाधिकारों की दयनीय स्थिति को लेकर वैश्विक स्तर पर आक्रोश देखा जा रहा है।
यूके राजनीति में बड़ा बदलाव, स्टार्मर के इस्तीफे से हलचल
22 Jun, 2026 02:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को अपने पद और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी है। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर देश को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर अब यह माना जा रहा है कि वे आगामी चुनावों में नेतृत्व के लिए सही व्यक्ति नहीं हैं। पिछले कुछ महीनों से लेबर पार्टी के भीतर उनके नेतृत्व को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा था, जिसके बाद बढ़ते राजनीतिक दबाव के कारण उन्हें यह बड़ा कदम उठाना पड़ा।
पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष और गिरती लोकप्रियता
कीर स्टार्मर का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब लेबर पार्टी के कई सांसदों और मंत्रियों ने उनकी कार्यशैली पर खुलेआम सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय चुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन और जनता के बीच लगातार गिरती लोकप्रियता ने उन पर पद छोड़ने का भारी दबाव बना दिया था। कई नीतिगत बदलावों (यू-टर्न) और आम जनता के जीवनस्तर में सुधार के वादों को पूरा न कर पाने के कारण उनकी छवि को काफी नुकसान पहुंचा था, जिससे पार्टी के भीतर उनके विरोधी मुखर हो गए।
उपचुनाव में प्रतिद्वंद्वी की जीत और उत्तराधिकारी की रेस
स्टार्मर के लिए मुश्किलें तब और गंभीर हो गईं जब उनके मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी एंडी बर्नहैम ने मेकरफील्ड उपचुनाव में शानदार जीत हासिल कर संसद में वापसी की। इस बड़ी जीत के बाद बर्नहैम के समर्थकों ने स्टार्मर से तुरंत पद छोड़ने की मांग तेज कर दी। हालांकि स्टार्मर ने शुरुआत में किसी भी चुनौती का सामना करने की बात कही थी, लेकिन राजनीतिक वास्तविकताओं को देखते हुए आखिरकार उन्होंने पीछे हटने का फैसला किया। वर्तमान में एंडी बर्नहैम देश के अगले प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नए नेता बनने की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं।
ब्रिटेन की राजनीति में बढ़ता अस्थिरता का दौर
कीर स्टार्मर के इस फैसले के साथ ही ब्रिटेन की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन का एक अभूतपूर्व दौर देखने को मिल रहा है, जिसके तहत देश को पिछले सात वर्षों में छठा प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है। पिछले एक दशक में डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस और ऋषि सुनक जैसे कद्दावर नेता भी ब्रेक्जिट विवाद, आर्थिक मंदी, आंतरिक कलह और महामारी के दौर में अपनी नीतियां सफल न होने के कारण अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे। स्टार्मर का जाना इसी राजनीतिक अस्थिरता की एक नई कड़ी माना जा रहा है।
इटली की पीएम मेलोनी बनी वैश्विक राजनीति में प्रभावशाली चेहरा
22 Jun, 2026 01:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोम: इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी वर्तमान में यूरोपीय राजनीति के उन प्रमुख चेहरों में शामिल हैं, जो अपनी बेबाक बयानबाजी और कड़े फैसलों के कारण लगातार चर्चा का केंद्र बनी रहती हैं। वैश्विक मंच पर राष्ट्रवाद, सुरक्षा, यूरोपीय पहचान और प्रवासन (इमिग्रेशन) जैसे संवेदनशील विषयों पर उनके बयानों ने एक नई अंतरराष्ट्रीय बहस को जन्म दे दिया है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई जुबानी जंग के बाद उनकी आक्रामक राजनीतिक कार्यशैली एक बार फिर दुनिया भर के विश्लेषकों की नजरों में आ गई है।
वैचारिक हिंसा और अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व से टकराव
मेलोनी ने यूरोप के भीतर पनप रही वैचारिक हिंसा और सुरक्षा खतरों पर हमेशा खुलकर अपनी बात रखी है। फ्रांस में एक दक्षिणपंथी कार्यकर्ता की हत्या का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने इसे किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरे महाद्वीप की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी बताया था। हालांकि इस टिप्पणी पर फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने परोक्ष रूप से आपत्ति जताई थी, लेकिन मेलोनी ने अपने कदम पीछे खींचने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार किसी एक देश की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता।
अवैध प्रवासन और सांस्कृतिक पहचान पर अडिग रुख
सांस्कृतिक ताने-बाने की सुरक्षा और अवैध प्रवासन का मुद्दा मेलोनी के एजेंडे में सबसे ऊपर रहा है। यूरोप में अनियंत्रित रूप से बढ़ रहे अवैध आव्रजन और उसके कारण सांस्कृतिक एकीकरण में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों पर उन्होंने हमेशा चिंता व्यक्त की है। उनके इस कड़े रुख के कारण सोशल मीडिया पर उनके पुराने बयानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी तीखी प्रतिक्रियाएं भी हुईं, लेकिन मेलोनी वैश्विक दबाव के आगे नहीं झुकीं। उन्होंने घुसपैठ को रोकने के लिए अपनी सख्त नीतियों और कड़े प्रशासनिक उपायों का समर्थन जारी रखा है।
घरेलू राजनीति में सख्त कानून व्यवस्था और छवि
इटली के आंतरिक मामलों में भी मेलोनी न्यायपालिका और प्रशासनिक निर्णयों पर अपनी बेबाक राय रखने के लिए जानी जाती हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ उन्होंने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने पर जोर दिया है। इसके साथ ही महिलाओं के सम्मान की रक्षा और इंटरनेट पर फैलने वाले भ्रामक प्रचार (ऑनलाइन दुष्प्रचार) के खिलाफ भी उन्होंने बेहद सख्त दंडात्मक कार्रवाई की वकालत की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आलोचक भले ही उनकी विचारधारा को विवादित मानें, लेकिन आम जनता के बीच उनकी बढ़ती लोकप्रियता की मुख्य वजह उनका यही निर्भीक और मजबूत नेतृत्व है, जो उन्हें यूरोप की सबसे ताकतवर नेताओं की कतार में खड़ा करता है।
CCTV में कैद हुई करतूत, खाटू श्याम मंदिर से दानपात्र के एक लाख रुपये चोरी
22 Jun, 2026 01:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करनाल। शहर के सदर बाजार इलाके में स्थित सुप्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर को चोरों ने अपना निशाना बनाया है। अज्ञात चोरों ने मंदिर परिसर में घुसकर वहां रखे दान पात्र का ताला तोड़ दिया और उसमें जमा एक लाख रुपये से अधिक का चढ़ावा समेटकर रफूचक्कर हो गए। यह पूरी वारदात मंदिर परिसर में लगे तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है। घटना का खुलासा शनिवार की सुबह उस वक्त हुआ, जब मंदिर के पुजारी हमेशा की तरह पूजा-अर्चना के लिए वहां पहुंचे। उन्होंने देखा कि मुख्य दरवाजे का ताला कटा हुआ था और गर्भगृह के पास रखा डोनेशन बॉक्स भी क्षतिग्रस्त था, जिसमें से सारी नकदी गायब थी। इसके तुरंत बाद मंदिर प्रशासन ने स्थानीय पुलिस को इस वारदात की लिखित सूचना दी।
सीसीटीवी फुटेज में दिखे दो संदिग्ध, पुलिस ने शुरू की तलाश
सूचना मिलते ही पुलिस विभाग की एक विशेष टीम घटना स्थल पर पहुंची और मुआयना करने के बाद मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने शुरू किए। रिकॉर्डिंग की जांच के दौरान दो संदिग्ध चोर मंदिर के भीतर चोरी की वारदात को अंजाम देते हुए साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने इस फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है और इसके आधार पर आरोपियों के हुलिए और पहचान का सुराग लगाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि उन्हें अविलंब हिरासत में लिया जा सके।
फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य और सुरक्षा बढ़ाने की उठी मांग
वारदात की गंभीरता को देखते हुए फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जिसने मुख्य द्वार और दान पात्र के आसपास से चोरों के उंगलियों के निशान और अन्य तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए हैं। इस बीच, धार्मिक स्थल पर हुई इस चोरी की घटना को लेकर स्थानीय नागरिकों और खाटू श्याम बाबा के श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। मंदिर प्रबंधन और स्थानीय निवासियों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि बाजार और धार्मिक स्थलों के आसपास पुलिस की गश्त बढ़ाई जाए और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
मुकदमा दर्ज कर धरपकड़ के लिए पुलिस की छापेमारी तेज
स्थानीय पुलिस चौकी के अधिकारियों ने बताया कि मंदिर प्रबंधन की शिकायत के आधार पर अज्ञात चोरों के खिलाफ चोरी और धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने की सुसंगत धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए सदर बाजार और उसके आसपास के रास्तों पर लगे अन्य व्यावसायिक कैमरों की फुटेज की भी कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित पक्ष और श्रद्धालुओं को भरोसा दिलाया है कि चोरों के तमाम ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और बहुत जल्द ही दोनों आरोपी कानून की गिरफ्त में होंगे।
ट्रंप से दूरी पर Benjamin Netanyahu का तीखा बयान
22 Jun, 2026 12:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरूशलेम/वॉशिंगटन: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने रणनीतिक व व्यक्तिगत संबंधों को लेकर एक बड़ा और बेहद बेबाक बयान दिया है। एक इंटरनेशनल पॉलिसी समिट को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि दोनों नेता हमेशा एक-दूसरे के फैसलों या बातों से पूरी तरह सहमत नहीं होते। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप वह सब कुछ नहीं करते जो मैं चाहता हूं, और न ही मैं वह सब कुछ करता हूं जो वे चाहते हैं।" नेतन्याहू का यह बयान साफ तौर पर दोनों देशों के बीच एक परिपक्व और संप्रभु साझेदारी को प्रदर्शित करता है।
नेतन्याहू की दोटूक और इजरायल-अमेरिका संबंधों की संप्रभुता
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने दोनों देशों की स्वतंत्रता पर जोर देते हुए कहा कि इजरायल और अमेरिका दो आजाद और स्वाभिमानी देश हैं, इसलिए रणनीतिक हितों के मेल खाने के बावजूद कई मुद्दों पर दोनों की राय अलग हो सकती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल लगातार हमास, हिज्बुल्लाह और ईरान समर्थित अन्य समूहों से कड़ी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। हालांकि अमेरिका पारंपरिक रूप से इजरायल का सबसे बड़ा मददगार रहा है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने हमेशा इजरायल की हर मांग को आंख मूंदकर स्वीकार नहीं किया है। ठीक इसी तरह, इजरायल भी अमेरिकी प्राथमिकताओं के दबाव में आए बिना अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार स्वतंत्र नीतियां तय करता आया है।
अमेरिका-ईरान के बीच 18 घंटे की मैराथन बातचीत
एक तरफ जहां इजरायल ने अमेरिका के साथ अपनी नीति स्पष्ट की है, वहीं मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) की भू-राजनीति में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने के उद्देश्य से एक लंबी और गोपनीय वार्ता आयोजित की गई। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक, दोनों पक्षों के मुख्य वार्ताकार दलों के बीच पूरे 18 घंटे तक मैराथन कूटनीतिक बातचीत चली। इस बेहद संवेदनशील और जटिल बातचीत को सफल बनाने में कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थ (मिडिएटर) की अहम भूमिका निभाई है।
आगे का कूटनीतिक रोडमैप और ईरान की दो बड़ी शर्तें
इस महामंथन का मुख्य चरण फिलहाल समाप्त हो चुका है, लेकिन पर्दे के पीछे की कूटनीति अभी थमी नहीं है। प्रवक्ता ने साफ किया कि दोनों देशों की तकनीकी टीमें और विशेषज्ञ अगले चरण के विवरणों पर काम जारी रखेंगे। इस 18 घंटे की बातचीत में जिन बिंदुओं पर आम सहमति बनी है, उसकी पूरी रूपरेखा समेटे हुए मध्यस्थ देश कतर और पाकिस्तान जल्द ही एक संयुक्त लिखित दस्तावेज (आधिकारिक रिकॉर्ड) जारी करेंगे।
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि आगे की किसी भी शांति प्रक्रिया के लिए उसकी दो मुख्य शर्तों पर अमल होना अनिवार्य है:
तेल बिक्री की अनुमति: ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाकर उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना तेल बेचने के लिए जरूरी कानूनी परमिट दिए जाएं।
फ्रीज संपत्तियों की बहाली: अमेरिकी पाबंदियों के कारण दुनिया भर के विदेशी बैंकों में जमे (फ्रोजन एसेट्स) ईरान के अरबों डॉलर उसे तुरंत वापस सौंपे जाएं।
इन दोनों शर्तों पर अमेरिका का क्या रुख रहता है, इसी पर मध्य पूर्व का भविष्य और आगे की कूटनीति टिकी हुई है।
लोहारहेड़ी गांव में बड़ा हादसा, मकान की दीवार के नीचे दबकर महिला की मौत
22 Jun, 2026 11:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बहादुरगढ़। झज्जर जिले के लोहारहेड़ी गांव में सोमवार की सुबह एक बेहद दुखद हादसा सामने आया, जहां एक 52 वर्षीय महिला की मलबे में दबने से मौत हो गई। मिली जानकारी के मुताबिक, निर्मला नामक महिला अपने घर के भीतर सो रही थीं। इसी दौरान सुबह करीब 7:30 बजे मकान की एक जर्जर दीवार अचानक ढह गई और सीधे उनके ऊपर आ गिरी। इस अचानक हुए हादसे में महिला के सिर पर गहरे जख्म हो गए, जिसके चलते उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
दीवार गिरते ही मचा हड़कंप और ग्रामीणों ने शुरू किया बचाव कार्य
मकान की दीवार गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास रहने वाले ग्रामीण तुरंत मौके की तरफ दौड़े। मलबे के नीचे महिला को दबा देख लोगों ने फौरन अपने स्तर पर राहत और बचाव का काम शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद महिला को मलबे से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। इस अप्रत्याशित हादसे के बाद से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस और शव को कब्जे में लिया
हादसे के तुरंत बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना स्थानीय पुलिस प्रशासन को दी। खबर मिलते ही पुलिस की एक विशेष टीम घटना स्थल पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस कर्मियों ने वहां मौजूद चश्मदीदों और परिजनों से बातचीत कर हादसे के कारणों की जानकारी जुटाई। इसके बाद कागजी कार्रवाई पूरी करते हुए शव को अपने संरक्षण में लेकर पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी औपचारिकताओं के लिए नागरिक अस्पताल भिजवा दिया।
जर्जर निर्माण और सुरक्षा मानकों को लेकर उठे सवाल
इस दर्दनाक वाकये ने ग्रामीण इलाकों में बने पुराने और जर्जर मकानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय-समय पर ऐसे कमजोर ढांचों की मरम्मत न होना बड़े हादसों को न्योता देता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक दृष्टि में यह मामला एक दुर्घटना का प्रतीत हो रहा है, फिर भी पुलिस सभी तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि हादसे की सही वजह स्पष्ट हो सके।
लेबनान में भूमिगत नेटवर्क का खुलासा, हिज्बुल्लाह पर बढ़ा दबाव
22 Jun, 2026 11:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरूशलेम/बेरुत: इज़रायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने दक्षिणी लेबनान के माजदल जौन गांव के ठीक नीचे हिज्बुल्लाह की एक बेहद विशाल और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सुरंग का पर्दाफाश किया है। करीब 200 मीटर लंबी और 29 मीटर गहरी यह सुरंग इजरायल की सीमा के बेहद करीब बनाई गई थी। इस भूमिगत सैन्य ठिकाने से इजरायल पर बड़े हमले के लिए तैयार किए गए सैकड़ों आधुनिक हथियार, घातक एंटी-टैंक मिसाइलें और ईरान में बने 50 सुसाइड (विस्फोटक) ड्रोन का एक बड़ा जखीरा बरामद हुआ है। आईडीएफ के मुताबिक, यह खोज वर्ष 2006 के युद्धविराम समझौते के तहत सीमावर्ती इलाकों को सुरक्षित करने के मिशन का एक अहम हिस्सा है।
एलीट याहलोम यूनिट का ऑपरेशन और हिज्बुल्लाह को भारी नुकसान
इस बेहद जटिल भूमिगत नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए आईडीएफ की 551वीं ब्रिगेड और एलीट कमांडो विंग 'याहलोम यूनिट' (Yahalom Unit) के सैनिकों ने दक्षिणी लेबनान में एक बड़ा विशेष अभियान चलाया था। पिछले सप्ताह चले इस कड़े सैन्य ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने 20 से अधिक हिज्बुल्लाह लड़ाकों को मार गिराया और सुरंग के आसपास बने कई अन्य लॉन्चिंग पैड्स को भी तबाह कर दिया। सुरंग के भीतर से मिले अत्याधुनिक लॉन्च शाफ्ट, लंबे समय तक रहने के लिए बनाए गए सुसज्जित कमरे और भारी सैन्य साजो-सामान से यह साफ होता है कि हिज्बुल्लाह इजरायल के खिलाफ एक सुनियोजित और बड़े पैमाने पर हमले (Surprise Attack) की फिराक में था।
ईरानी फंडिंग और 'ह्यूमन शील्ड' की खतरनाक रणनीति
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस विशालकाय सुरंग का निर्माण पिछले एक दशक के दौरान ईरान से मिली भारी फंडिंग और तकनीकी विशेषज्ञता के दम पर किया गया था। इस खुफिया नेटवर्क की सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसे जानबूझकर नागरिक आबादी वाले गांवों, रिहायशी घरों और मस्जिद जैसी बेहद संवेदनशील जगहों के ठीक नीचे खोदा गया था। यह खोज हिज्बुल्लाह की उस पुरानी युद्ध रणनीति को उजागर करती है जिसमें वह आम नागरिकों को 'मानव ढाल' (Human Shield) के रूप में इस्तेमाल करता है, ताकि इजरायली हवाई हमलों से अपनी सैन्य संपत्तियों को बचा सके। ईरान का मुख्य उद्देश्य हिज्बुल्लाह के जरिए इजरायल को सीमा पर उलझाए रखना और मध्य-पूर्व में अपना दबदबा बढ़ाना है।
नाजुक युद्धविराम पर संकट और आईडीएफ की खुली चेतावनी
"दक्षिणी लेबनान में हमारे तलाशी अभियान और तेज होंगे। यदि हिज्बुल्लाह ने भविष्य में किसी भी हिमाकत की कोशिश की, तो इजरायल की जवाबी कार्रवाई पहले से कहीं ज्यादा घातक होगी।" — प्रवक्ता, इजरायल डिफेंस फोर्सेज
इस बड़ी कामयाबी के बाद आईडीएफ ने साफ कर दिया है कि सीमा पर घोषित युद्धविराम के बावजूद इजरायल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और दक्षिणी लेबनान में ऐसे गहन तलाशी अभियान जारी रहेंगे। इजरायल का आरोप है कि हिज्बुल्लाह शांति समझौते की आड़ में अपनी सैन्य क्षमताओं को दोबारा मजबूत कर रहा था। वहीं, लेबनान इन सैन्य अभियानों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बता रहा है। बहरहाल, रिहायशी इलाकों के नीचे मिली इस 'ड्रोन फैक्ट्री और मिसाइल डिपो' ने दोनों देशों के बीच बने बेहद नाजुक युद्धविराम की स्थिरता पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
गोलीबारी में गैंगस्टर गोपाल ढेर, जवाबी कार्रवाई में सीआईए-1 का जवान घायल
22 Jun, 2026 11:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोनीपत। जिला अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) और गन्नौर सीआईए पुलिस की संयुक्त टीम की सोमवार तड़के गांव खुबडू के खेतों में कुख्यात गैंगस्टर गोपाल के साथ सीधी मुठभेड़ हो गई। खुद को पुलिस से घिरा देख जब आरोपी ने अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं, तो पुलिस ने भी आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें गैंगस्टर गोपाल ढेर हो गया। इस क्रॉस-फायरिंग के दौरान सीआईए-1 के हेड कांस्टेबल देवेंद्र के हाथ में गोली लग गई, जिससे वे घायल हो गए। उन्हें तुरंत इलाज के लिए खानपुर स्थित बीपीएस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मारा गया बदमाश गोपाल मूल रूप से गांव अटायल का निवासी था और हत्या के दो अलग-अलग संगीन मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहा था। वह इसी साल मार्च के महीने में जेल से पैरोल पर रिहा हुआ था, लेकिन अवधि खत्म होने के बाद 30 मई को उसने सरेंडर नहीं किया और फरार हो गया। पैरोल जंप करने के बाद से ही वह सोनीपत और पानीपत के इलाकों में लगातार नई वारदातों को अंजाम देकर कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ था।
मर्डर की नई साजिश रचते वक्त पुलिस ने घेरा
पुलिस को खुफिया सूत्रों से पुख्ता जानकारी मिली थी कि फरार गैंगस्टर गोपाल इलाके के ही एक अन्य ग्रामीण की हत्या करने का नया ताना-बाना बुन रहा है और वह खुबडू के आसपास देखा गया है। इस इनपुट के आधार पर सोमवार सुबह करीब छह बजे सीआईए-1 और गन्नौर थाना पुलिस की विशेष टीमों ने संयुक्त रूप से खेतों की घेराबंदी शुरू की। पुलिस ने जब उसे सरेंडर करने की चेतावनी दी, तो आरोपी ने आत्मसमर्पण करने के बजाय सरकारी अमले पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं, जिसमें एक जांबाज हवलदार जख्मी हो गया। इसके बाद पुलिस की ओर से की गई डिफेंसिव फायरिंग में गोपाल को कई गोलियां लगीं और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
दर्जनों संगीन मुकदमे और इलाके में दहशत का पर्याय
गैंगस्टर गोपाल का आपराधिक इतिहास बेहद लंबा और खौफनाक रहा है। पुलिस डोजियर के अनुसार, उस पर मर्डर, मर्डर की कोशिश, बलात्कार, रंगदारी और आर्म्स एक्ट जैसे संगीन अपराधों के तहत करीब 25 गंभीर मुकदमे दर्ज थे। जेल से पैरोल पर बाहर आने के बाद भी उसकी आपराधिक गतिविधियां रुकी नहीं थीं; उसने पानीपत में एक और गन्नौर थाना क्षेत्र के अंतर्गत तीन नई वारदातों को अंजाम देकर पूरे इलाके में दहशत फैला रखी थी। जांच एजेंसियों को आशंका थी कि अगर उसे समय रहते काबू नहीं किया गया, तो वह बहुत जल्द किसी बड़ी खूनी वारदात को अंजाम दे सकता था।
पुलिस कमिश्नर ने किया मौका-मुआयना, मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
इस सनसनीखेज एनकाउंटर के बाद पुलिस कमिश्नर ममता सिंह ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीधे घटनास्थल का दौरा किया और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स से साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए। इसके बाद वे खानपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचीं, जहां उन्होंने घायल हेड कांस्टेबल देवेंद्र की सेहत की जानकारी ली और डॉक्टरों को बेहतर इलाज मुहैया कराने को कहा। पुलिस कमिश्नर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पुलिस की मुस्तैदी और समय पर की गई कार्रवाई की वजह से एक बेकसूर ग्रामीण की जान बचाई जा सकी है। उन्होंने यह भी साफ किया कि मानवाधिकार आयोग के नियमों के मुताबिक इस पूरी मुठभेड़ की मजिस्ट्रेट जांच (न्यायिक जांच) कराई जा रही है। वर्तमान में आरोपी के शव को पोस्टमार्टम के लिए शवगृह में रखवा दिया गया है।
सर्वोच्च नेतृत्व पर सवाल, तेहरान में सत्ता संघर्ष गहराया
22 Jun, 2026 10:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: ईरान की सत्ता के गलियारों में इन दिनों एक गोपनीय पत्र के लीक होने से बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। इस खुलासे के बाद देश के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही है। लीक हुए दस्तावेजों में दावा किया गया है कि ईरानी राजनयिक, अमेरिका के साथ स्विट्जरलैंड में चल रही उच्च स्तरीय बातचीत में उन सीमाओं और दायरों को पार कर गए हैं, जिन्हें खुद सर्वोच्च नेता ने तय किया था। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान की स्थिति को संवेदनशील बना दिया है।
कट्टरपंथी सांसद का दावा और मोजतबा खामेनेई की 11 शर्तें
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब ईरान के एक कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन ने एक इंटरव्यू में सनसनीखेज आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अमेरिका से वार्ता को लेकर मोजतबा खामेनेई द्वारा लिखित बेहद संवेदनशील और गुप्त पत्र देखे हैं, और देश के राजनयिक उन शर्तों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। इस बयान के बाद इंटरव्यू को बीच में ही रोककर रिकॉर्ड से हटा दिया गया। लीक पत्र के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका के सामने 11 सख्त शर्तें रखी थीं, जिनमें निम्नलिखित प्रमुख थीं:
अमेरिका से आर्थिक मुआवजे की मांग और सभी प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना।
यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के अधिकार को बरकरार रखना और फ्रीज संपत्तियों की तत्काल बहाली।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर ईरान का पूर्ण एकाधिकार स्थापित करना, वहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल टैक्स वसूलना और दुश्मन देशों के जहाजों पर पाबंदी लगाना।
आंतरिक कलह के पीछे कट्टरपंथियों की बेचैनी
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस लीक के पीछे ईरान के भीतर सक्रिय कट्टरपंथी धड़े की गहरी राजनीतिक बेचैनी छिपी है। कट्टरपंथी ताकतों को डर है कि यदि अमेरिका के साथ कोई भी समझौता सफल हो जाता है, तो देश के भीतर उदारवादी गुट बेहद मजबूत हो जाएंगे। इससे उन विचारधारा-आधारित सत्ता केंद्रों का प्रभाव कम हो जाएगा जो पश्चिमी देशों के साथ टकराव की बदौलत ही वर्षों से सत्ता का मलाईदार हिस्सा बने हुए हैं। विश्लेषक बाबक दोरबेइकी का मानना है कि कट्टरपंथी ताकतें संघर्ष और तनाव के माहौल में ही पनपती हैं, और अमेरिका के साथ शांति या समझौते का कोई भी प्रयास उनके राजनीतिक अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा है।
सर्वोच्च नेता के रुतबे की परीक्षा और अंतरराष्ट्रीय वार्ता पर असर
हालांकि वर्तमान में मोजतबा खामेनेई की गद्दी को कोई सीधा या खुला खतरा नहीं दिख रहा है, क्योंकि कोई भी गुट उनके खिलाफ सीधे बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा है। इसके उलट, सभी गुट खुद को खामेनेई की शर्तों का सच्चा रक्षक साबित करने की होड़ में लगे हैं। लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि मोजतबा को अपने पिता की कुर्सी तो मिल गई है, पर विभिन्न विरोधी गुटों के बीच संतुलन बनाने और अपनी बात को निर्विवाद रूप से मनवाने का हुनर पाना अभी बाकी है। यह आंतरिक विद्रोह ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बीच दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष तरीकों से वार्ता आगे बढ़ रही थी, जिसे इस आंतरिक कलह ने तगड़ा झटका दिया है।
युद्धविराम पर हिजबुल्ला का सख्त रुख, बोले- अधूरी शांति स्वीकार नहीं
22 Jun, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेरूत। पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों के बीच हिजबुल्ला के शीर्ष नेता शेख नईम कासिम ने अमेरिका और इस्राइल की रणनीतियों पर तीखा प्रहार किया है। उनका दावा है कि ईरान और क्षेत्र के अन्य विद्रोही संगठनों को मिटाने का अमेरिकी-इस्राइली मंसूबा पूरी तरह पस्त हो चुका है। कासिम ने जोर देकर कहा कि लेबनान में इस्राइल द्वारा की जा रही सैन्य कार्रवाई को अमेरिका का पूरा शह प्राप्त है। उन्होंने रेखांकित किया कि इस टकराव के बाद पश्चिम एशिया अब एक ऐसे नए युग की तरफ बढ़ रहा है, जहाँ अमेरिकी-इस्राइली योजनाओं को शिकस्त झेलनी पड़ी है। मध्य अशूरा परिषद में बोलते हुए उन्होंने कहा कि तमाम पाबंदियों और नुकसान के बाद भी ईरान पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर बनकर उभरा है और वह अपने क्षेत्रीय वजूद से कभी पीछे नहीं हटेगा।
सैन्य कार्रवाई की छूट वाले युद्धविराम प्रस्तावों पर हिजबुल्ला का रुख
हिजबुल्ला प्रमुख ने उन सभी शांति प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें इस्राइल को अपनी सैन्य गतिविधियां जारी रखने की परोक्ष अनुमति दी गई हो। कासिम का मानना है कि ऐसे समझौते असल में युद्धविराम नहीं, बल्कि हमले जारी रखने का एक नया बहाना हैं। उन्होंने अतीत का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि हिजबुल्ला द्वारा नियमों का पालन किए जाने के बावजूद इस्राइल ने हमेशा समझौतों को तोड़ा है। संगठन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल उसी प्रस्ताव पर सहमत होगा जो पूरी तरह से सैन्य अभियानों पर रोक लगाने की पक्की गारंटी देता हो।
हिजबुल्ला की शर्तें और भविष्य की रणनीतिक मांगें
संगठन की मांग है कि एक वास्तविक युद्धविराम के तहत जल, थल और नभ तीनों मोर्चों से होने वाले सभी हमलों पर तुरंत पूर्ण विराम लगना चाहिए। इसके साथ ही लेबनान के भीतर रिहाइशी और अन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बनाना बंद किया जाए और इस्राइली सैनिक लेबनानी सीमाओं से पूरी तरह वापस लौटें। कासिम ने ईरान से मिल रहे मजबूत सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि तेहरान के लिए लेबनान की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी करना एक बड़ा और असरदार रणनीतिक कदम साबित हो सकता है।
अमेरिकी नेतृत्व की भूमिका और पश्चिम एशिया के बदलते समीकरण
कासिम ने अमेरिकी प्रशासन को इस जंग के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वाशिंगटन की मदद के बिना इस्राइल इस स्तर पर तबाही नहीं मचा सकता था। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप में इस युद्ध को तुरंत रुकवाने की क्षमता है, क्योंकि अगर अमेरिका कड़ा रुख अपनाए तो बेंजामिन नेतन्याहू उसकी बात को नजरअंदाज नहीं कर पाएंगे। हिजबुल्ला का यह कड़ा रुख ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी बातचीत चल रही है और तनाव घटाने के लिए 14 सूत्रीय समझौते पर काम हो रहा है। लेबनान में इस्राइली कार्रवाई को रोकना इस कूटनीति का मुख्य हिस्सा है, लेकिन हिजबुल्ला के तेवरों से साफ है कि शांति की राह अभी भी बेहद पेचीदा है।
911 कॉल के बाद पुलिस घर में घुसी, जश्न मना रही महिला पर चलाई गोली
22 Jun, 2026 08:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लॉस एंजिलिस: अमेरिका के लॉस एंजिलिस में एक महिला की बेहद खुशी के पल कुछ ही मिनटों में गहरे मातम में बदल गए। अपने पसंदीदा बास्केटबॉल क्लब की ऐतिहासिक खिताबी जीत का जश्न मना रही एक महिला के घर जब पड़ोसी की शिकायत पर पुलिस पहुंची, तो अधिकारियों ने उसके पालतू कुत्ते को गोलियों से भून दिया। इस पूरी घटना का बॉडीकैम वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की बर्बरता और कार्रवाई को लेकर दुनिया भर में भारी आक्रोश और विवाद खड़ा हो गया है।
जीत के जश्न को पुलिस ने समझा संभावित खतरा
लॉस एंजिलिस पुलिस विभाग (LAPD) के अनुसार, 13 जून को एक महिला ने 911 इमरजेंसी नंबर पर फोन कर शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी पड़ोसी पिछले 20 मिनट से अपने घर में लगातार 'ओह माय गॉड' (Oh My God) चिल्ला रही है। शिकायतकर्ता को लगा कि शायद वहां कोई घरेलू हिंसा या गंभीर वारदात हो रही है। इस पर पुलिस के दो अधिकारी 'वेलनेस चेक' (कुशलक्षेम जानने) के लिए उस अपार्टमेंट में पहुंचे। हालांकि, असलियत यह थी कि वहां रहने वाली महिला मैरी मार्सिले अपनी पसंदीदा टीम न्यूयॉर्क निक्स की 53 साल बाद हुई एनबीए (NBA) चैंपियनशिप जीत की खुशी में झूम रही थी।
न्यूयॉर्क निक्स की जर्सी पहने जेम्सन पर दागीं चार गोलियां
पुलिस द्वारा जारी किए गए वीडियो के मुताबिक, जैसे ही अधिकारियों ने मैरी मार्सिले का दरवाजा खटखटाकर बात करना शुरू किया, उनका दो साल का पालतू कुत्ता 'जेम्सन' जोर-जोर से भौंकने लगा। गोल्डन रिट्रीवर, सेंट बर्नार्ड और पूडल नस्ल का यह मिक्स-ब्रीड कुत्ता अपनी मालकिन की तरह न्यूयॉर्क निक्स की जर्सी पहने हुए था। अधिकारियों के कहने पर महिला ने माफी मांगते हुए कुत्ते को अंदर बंद कर दिया। इस बीच एक पुलिसकर्मी को यह कहते सुना गया कि वह इतने बड़े कुत्ते से कटवाना नहीं चाहता।
कुछ ही देर बाद जब महिला ने दोबारा दरवाजा खोला, तो लगभग 48 किलोग्राम वजनी जेम्सन अचानक फिर से बाहर आ गया और भौंकते हुए एक अधिकारी की तरफ बढ़ा। खुद को असुरक्षित महसूस करते हुए पीछे हट रहे अधिकारी ने अपनी सर्विस गन निकाली और बेजुबान जेम्सन पर एक के बाद एक कम से कम चार गोलियां दाग दीं। वीडियो में महिला अपने पालतू को बचाने के लिए बुरी तरह चीखती और रोती हुई दिखाई दे रही है।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा, पुलिस विभाग ने दी सफाई
"किसी भी परिवार के लिए उसका पालतू जानवर सिर्फ एक पशु नहीं, बल्कि उनका बच्चा और भावनात्मक सहारा होता है।" — जिम मैकडॉनेल, पुलिस प्रमुख
इस दर्दनाक घटना का वीडियो इंटरनेट पर आने के बाद पशु प्रेमियों और आम नागरिकों ने पुलिस की इस त्वरित हिंसक कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। लोगों का कहना है कि कुत्ते को बिना गोली मारे भी नियंत्रित किया जा सकता था। बढ़ते दबाव के बीच पुलिस विभाग ने इस घटना को "बेहद दुखद" करार दिया है। पुलिस प्रमुख ने कहा कि अधिकारी हर दिन अज्ञात खतरों से निपटते हैं, लेकिन उनसे संयम और समझदारी की उम्मीद की जाती है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि बल के प्रशिक्षण और आक्रामक पशुओं से निपटने की नीतियों की गहन समीक्षा की जाएगी और दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई होगी।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
