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हरविंद्र कल्याण की मां मति प्रेम कौर पंचतत्व में विलीन, अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
14 Mar, 2026 03:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
घरौंडा। हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने आज अपनी माता मति प्रेम कौर कल्याण के अंतिम दर्शन करते हुए गहरी भावुकता व्यक्त की। अंतिम संस्कार के दौरान स्पीकर हरविंद्र कल्याण ने स्वयं मां के शव को कंधा दिया और शव यात्रा में शामिल हुए। मति प्रेम कौर का अंतिम संस्कार शनिवार दोपहर उनके पैतृक गांव कुटेल की शिव पूरी में विधि-विधान से संपन्न हुआ। शव यात्रा में हजारों की संख्या में स्थानीय निवासी, राजनीतिक कार्यकर्ता, विधायक, पूर्व विधायक, सरकारी अधिकारी और आम जनता शामिल हुई। सभी ने मति प्रेम कौर को श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।अंतिम दर्शन के दौरान हरविंद्र कल्याण कई बार भावुक हो गए। उन्होंने मां के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित करते हुए लंबे समय तक नमन किया। परिवार के सदस्यों और मौजूद लोगों ने बताया कि मति प्रेम कौर ने पूरे जीवन में सादगी, धैर्य और परिवार के प्रति समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत किया था।हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष माननीय हरविंद्र कल्याण की माता प्रेम कौर जी के निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति दें। ओम शांति।”बता दें कि मति प्रेम कौर (85 वर्ष) का निधन शुक्रवार रात लगभग 12 बजे उनके निवास स्थान पर हुआ था। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उनके पति स्वर्गीय चौधरी देवी सिंह कल्याण हरियाणा एग्रो कॉर्पोरेशन के चेयरमैन रह चुके थे।
तुर्की में 5.5 तीव्रता का भूकंप: घरों से बाहर निकले लोग, कम गहराई ने बढ़ाई कंपन की तीव्रता
14 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
निक्सा। मध्य तुर्की में शुक्रवार तड़के भूकंप के तेज झटकों ने एक बार फिर लोगों को खौफजदा कर दिया है। तुर्की की डिजास्टर एंड इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी के अनुसार, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.5 मापी गई। भूकंप उस समय आया जब लोग गहरी नींद में थे, जिससे निक्सार और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। दहशत के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, भूकंप सुबह ठीक 3:35 बजे महसूस किया गया। इसका केंद्र टोकाट प्रांत का निक्सार कस्बा था। भूकंप की सबसे चिंताजनक बात इसकी गहराई रही, जो जमीन से मात्र 6.4 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र की गहराई कम होने के कारण ही झटके इतने शक्तिशाली और व्यापक महसूस किए गए। कंपन इतना तेज था कि टोकाट के अलावा आसपास के कई अन्य प्रांतों में भी इसे स्पष्ट रूप से महसूस किया गया। राहत की बात यह है कि प्राथमिक जांच और आपदा प्रबंधन टीमों की शुरुआती रिपोर्टों में अभी तक किसी भी जान-माल के नुकसान या बड़ी इमारतों के गिरने की सूचना नहीं मिली है। आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि फिलहाल कोई प्रतिकूल घटना सामने नहीं आई है, लेकिन आपातकालीन टीमें पूरी तरह अलर्ट पर हैं और ग्रामीण इलाकों में स्थिति का सर्वे कर रही हैं। भले ही प्रशासन सुरक्षा का भरोसा दे रहा है, लेकिन स्थानीय आबादी में भारी डर का माहौल है। कड़ाके की ठंड और शून्य से नीचे गिरते तापमान के बावजूद, निक्सार और टोकाट के निवासी अपने घरों में लौटने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर अलाव जलाकर या अपनी कारों के भीतर बैठकर सुबह होने का इंतजार करते देखे गए। उन्हें डर है कि मुख्य झटके के बाद आने वाले आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के छोटे झटके) उनकी इमारतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
शुक्रवार के इस भूकंप ने तुर्की के लोगों के मन में फरवरी 2023 की उस भयावह त्रासदी की यादें ताजा कर दी हैं, जब 7.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने देश के दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में तबाही मचाई थी। उस समय 53,000 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। तुर्की की भौगोलिक स्थिति प्रमुख फॉल्ट लाइन्स के ऊपर होने के कारण यहाँ अक्सर भूकंप आते रहते हैं, जिससे सुरक्षा और आपदा प्रबंधन हमेशा एक बड़ी चुनौती बनी रहती है। फिलहाल स्थानीय प्रशासन सड़कों पर मौजूद लोगों के लिए सहायता और गर्म कपड़ों का इंतजाम करने में जुटा है।
राष्ट्रपति ट्रंप का दावा बोले- हमले में घायल ईरान के नए सुप्रीम लीडर कोमा में गए, पैर भी कटा
14 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। ईरान में सत्ता परिवर्तन और जारी संघर्ष के बीच नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर वैश्विक स्तर पर कयासों का बाजार गर्म है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू के दौरान संकेत दिया है कि मोजतबा खामेनेई जीवित तो हो सकते हैं, लेकिन वे गंभीर रूप से घायल हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, मोजतबा खामेनेई की हालत अत्यंत चिंताजनक है और वे वर्तमान में कोमा में हो सकते हैं। दावों के मुताबिक, उस हमले में उन्होंने अपना एक पैर खो दिया है और उनके आंतरिक अंगों, विशेषकर पेट या लीवर को भी गंभीर क्षति पहुंची है। अपुष्ट खबरों के अनुसार, तेहरान के सीना यूनिवर्सिटी अस्पताल को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है, जहां भारी सुरक्षा के बीच उनका उपचार चल रहा है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब मोजतबा ने पद संभालने के बाद से अब तक एक बार भी सार्वजनिक रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए साक्षात्कार में मोजतबा की स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि ईरानी नेता शायद जीवित हैं, लेकिन किसी न किसी रूप में गंभीर चोटों से जूझ रहे हैं। ट्रंप की यह टिप्पणी उन खुफिया रिपोर्टों को बल देती है जिनमें दावा किया गया था कि 28 फरवरी को हुए उस हवाई हमले में, जिसमें आयतुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे, मोजतबा भी बुरी तरह प्रभावित हुए थे।
इस रहस्यमयी चुप्पी के बीच ईरान के सरकारी टेलीविजन पर मोजतबा खामेनेई की ओर से एक आधिकारिक बयान जारी किया गया। हालांकि, इस संबोधन की खास बात यह रही कि इसे स्वयं सर्वोच्च नेता ने नहीं पढ़ा, बल्कि एंकर द्वारा पढ़कर सुनाया गया। इस संदेश में अमेरिका को सीधी और कड़ी चेतावनी दी गई है। बयान में मांग की गई है कि क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए, अन्यथा उन पर भीषण हमले किए जाएंगे। मोजतबा के नाम से जारी इस संदेश में यह भी कहा गया कि ईरान इस थोपे गए युद्ध के लिए दुश्मन से हर्जाना वसूल करेगा। यदि उनकी शर्तें नहीं मानी गईं, तो ईरान विरोधी पक्षों की संपत्तियों को जब्त करने या उसी मूल्य की संपत्तियों को नष्ट करने से पीछे नहीं हटेगा। फिलहाल, सर्वोच्च नेता का सार्वजनिक रूप से सामने न आना ईरान के भीतर और बाहर कई बड़े सुरक्षा और राजनीतिक सवाल खड़े कर रहा है।
हवा में ईंधन भर रहा था अमेरिकी फाइटर विमान, तभी हो गया हादसे का शिकार, ईरान पर शक
14 Mar, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। मध्य पूर्व में जारी भीषण सैन्य संघर्ष और ईरान के खिलाफ बढ़ते आक्रामक अभियानों के बीच अमेरिकी वायुसेना को एक बड़ा झटका लगा है। पश्चिमी इराक के हवाई क्षेत्र में अमेरिकी सेना का एक केसी-135 स्ट्रेटोटैंकर (ईंधन भरने वाला) विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह हादसा उस समय हुआ जब विमान हवा में ही दूसरे लड़ाकू विमानों की रिफ्यूलिंग कर रहा था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस घटना की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया है कि दुर्घटना के तुरंत बाद बड़े पैमाने पर बचाव और खोज अभियान शुरू कर दिया गया है। वहीं इस हादसे के लिए ईरान को शक की नजर देखा जा रहा है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के बयान के मुताबिक, इस मिशन में दो केसी-135 टैंकर विमान शामिल थे। ये विमान ईरान के खिलाफ जारी ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत लंबी दूरी के मिशन पर निकले लड़ाकू विमानों को ईंधन आपूर्ति करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे थे। मिशन के दौरान एक विमान तो सुरक्षित रूप से उतरने में सफल रहा, लेकिन दूसरा विमान पश्चिमी इराक के फ्रेंडली एयरस्पेस (मित्र क्षेत्र) में हादसे का शिकार हो गया। शुरुआती जांच और सैन्य अधिकारियों के बयानों के अनुसार, विमान के गिरने के पीछे किसी दुश्मन की गोलाबारी या अपनी ही सेना की गलती (फ्रेंडली फायर) का कोई संकेत नहीं मिला है। फिलहाल इस दुर्घटना का प्राथमिक कारण तकनीकी खराबी को माना जा रहा है। हालांकि, सेंट्रल कमांड ने अभी तक विमान में सवार चालक दल के सदस्यों की सही संख्या या उनकी वर्तमान स्थिति के बारे में कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है, जिससे सस्पेंस बना हुआ है।
केसी-135 स्ट्रेटोटैंकर अमेरिकी वायुसेना के लिए एक लाइफलाइन की तरह काम करता है। इसकी विशेषता यह है कि यह लड़ाकू विमानों को बिना जमीन पर उतरे हवा में ही ईंधन उपलब्ध कराता है, जिससे वे लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम होते हैं। ईरान जैसे व्यापक भौगोलिक क्षेत्र में जारी युद्ध के लिए इन विमानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से पूरा क्षेत्र युद्ध की आग में झुलस रहा है। इस निरंतर जारी संघर्ष में अमेरिकी सेना को लगातार जान-माल का नुकसान उठाना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 7 अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि लगभग 150 सैनिक अलग-अलग घटनाओं में घायल हुए हैं। ताजा विमान हादसा इस तनावपूर्ण माहौल में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
सुरक्षित मार्ग: भारतीय जहाजों के लिए हो सकता है होर्मुज स्ट्रेट खुला
14 Mar, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के चलते भारत भी तेल-गैस के संकट से जूझ रहा है. देश के कई शहरों में गैस सिलेंडर के लिए लंबी लाइनें लगाई जा रही हैं. कई बार बुकिंग करने के बाद भी समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा. इसी बीच खबर है कि जल्द ही भारत को इस किल्लत से राहत मिल सकती है. भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने शुक्रवार को कहा कि जल्द ही भारतीय समुद्री जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर सुरक्षित रास्ता मिल सकता है।
भारत और ईरान के रिश्ते पर जोर
इस बातचीत के दौरान उन्होंने भारत और ईरान के रिश्ते पर जोर दिया. विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है. ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही का कहना है कि इस संबंध में चर्चा चल रही है और जल्द ही तेल-गैस और अन्य उर्जा संसाधनों में भारत को राहत मिलने की उम्मीद हैं. उन्होंने ये भी कहा कि इस क्षेत्र में युद्ध को रोकने के लिए दुनिया के नेताओं को मिलकर कूटनीतिक प्रयास करने होंगे।
क्या चाहता है अमेरिका ?
दूसरी तरफ मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को नौसैनिक सुरक्षा (एस्कॉर्ट) देने के लिए पूरी तरह तैयार है. संभावनाएं हैं कि इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है. व्हाइट हाउस की डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी अन्ना केली ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस को बताया है कि ‘राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगर जरूरी लगा, तो होर्मुज से अमेरिकी नौसेना के एस्कॉर्ट उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।’
कंधार में पाकिस्तान ने की एयरस्ट्राइक, फ्यूल डिपो और रिहाइशी इलाकों में मचा दी तबाही
14 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर जारी तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हालिया घटनाक्रम में पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने कंधार हवाई अड्डे के पास स्थित निजी एयरलाइन काम एयर के फ्यूल डिपो और रिहाइशी इलाकों को निशाना बनाया है। यह डिपो न केवल नागरिक उड़ानों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के विमानों को भी ईंधन की आपूर्ति करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल संकट के बीच अफगानिस्तान की रसद व्यवस्था को चोट पहुँचाने की कोशिश है।
अफगान अधिकारियों द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, पाकिस्तानी विमानों ने न केवल रणनीतिक ठिकानों बल्कि रिहाइशी इलाकों को भी अपना निशाना बनाया है। इस बमबारी में कई नागरिक आवास पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं। स्थानीय प्रशासन का दावा है कि इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित कई बेगुनाह लोगों की जान गई है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में बमबारी खाली रेगिस्तानी और निर्जन इलाकों में भी की गई है। तालिबान सरकार ने इस सैन्य कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे क्रूर आक्रामकता करार दिया है। बयान में कहा गया है कि रमजान के पवित्र महीने के अंतिम दस दिनों और ईद जैसे बड़े त्योहार के मुहाने पर इस तरह का हमला करना पाकिस्तानी शासन की नैतिक शून्यता को दर्शाता है। अफगान प्रवक्ता ने इसे एक घिनौना अपराध बताते हुए चेतावनी दी है कि इस क्रूरता का जवाब दिए बिना नहीं रहा जाएगा और पाकिस्तान को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से आर-पार की जंग जैसे हालात बने हुए हैं। इससे पहले जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के विभिन्न शहरों में हवाई हमले किए थे, तब उसने दावा किया था कि निशाने पर तालिबान सरकार के सैन्य ठिकाने थे।इसके उलट, अफगान सरकार ने दावा किया है कि उन्होंने पिछली एयरस्ट्राइक का मुंहतोड़ जवाब दिया था। अफगान सेना के आंकड़ों के अनुसार, उनकी जवाबी कार्रवाई में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और उन्होंने सीमा पर स्थित 19 सैन्य चौकियों पर कब्जा कर लिया है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में भारी तनाव है और दोनों सेनाएं युद्ध के स्तर पर तैनात हैं।
10 साल सत्ता में रहने पर भी मोदी ने खुद को सत्ता के अहंकार से दूर रखा
14 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम टोनी एबॉट ने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि 10 साल से ज्यादा समय तक सत्ता में रहने के बावजूद, पीएम मोदी ने खुद को सत्ता के अहंकार से दूर रखा है। भारत ने हाल ही में रायसीना डायलॉग 2026 के 11वें संस्करण का आयोजन किया था। इसको लेकर एबॉट ने यह बात कही। रणनीतिक फोरम की बढ़ती वैश्विक अहमियत, इसकी शुरुआत और भारत की विदेश नीति में नेतृत्व की भूमिका पर बात करते हुए एबॉट ने कहा कि 2016 से हर मार्च में दिल्ली में रायसीना डायलॉग होता आ रहा है। दूसरे ग्लोबल जमावड़ों की तरह, यह राजनीतिक नेताओं, वरिष्ठ सैन्य कमांडर्स, जाने-माने बिजनेसमैन, पत्रकारों और थिंक टैंक प्रमुखों को जरूरी मुद्दों पर बात करने के लिए एक साथ लाता है; लेकिन यह दावोस से बेहतर है क्योंकि यह असल में मेजबानी करने वाली सरकार की सराहना करने का अभियान नहीं है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एबॉट ने पीएम मोदी के नेतृत्व की स्टाइल और आज दुनिया के सबसे असरदार नेताओं में से एक होने के बावजूद ग्लोबल आवाजों को सुनने की उनकी इच्छा की सराहना की। एबॉट ने कहा कि अब तक हर डायलॉग में पीएम मोदी ने ओपनिंग सेशन में आकर, मुख्य मेहमान को सुनकर मिसाल कायम की है, पिछले साल न्यूजीलैंड के पीएम और इस साल फिनलैंड के राष्ट्रपति, लेकिन खुद नहीं बोले। एबॉट ने कहा कि पीएम मोदी आज दुनिया के तीसरे सबसे ताकतवर नेता हैं। अमेरिका और चीन के राष्ट्रपति के बाद, वह शायद दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान हैं, फिर भी वह नेतृत्व करने का घमंड नहीं करते और दूसरों को सुनने की कला भी रखते हैं।
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम एबॉट ने कुछ इंटरनेशनल ऑब्जर्वर की इस आलोचना को खारिज कर दिया कि बीजेपी सरकार के तहत भारत कम लोकतांत्रिक हो गया है। उन्होंने कहा कि जहां तक इस सोच की बात है कि बीजेपी के राज में भारत किसी तरह एक तानाशाही देश बन गया है, यह पूरी तरह से बकवास है, जिस देश में आजाद और निष्पक्ष चुनाव, पूरी तरह से आजाद मीडिया और मजबूती से आजाद न्यायपालिका हो, वहां तानाशाही का गंभीर खतरा नहीं है और कोई भी तानाशाही ऐसी ग्लोबल कॉन्फ्रेंस नहीं करेगी जहां कुछ भी मना न हो और किसी को चुप न कराया जाए। आखिरकार, इस साल की बातचीत में इजरायली विदेश मंत्री और ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री दोनों ने हिस्सा लिया था।
सिर पर वार कर की गई थी हत्या, फतेहाबाद पुलिस ने सुलझाया केस
13 Mar, 2026 05:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फतेहाबाद। शहर के सेक्टर 11 में निर्माणधीन अस्पताल के पास कैंटर चालक जयवीर की हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोप दोस्त मनोज उर्फ वकील निवासी गांव मानावाली को को गिरफ्तार किया है। आरोपी को पुलिस कोर्ट में पेश करके रिमांड पर लेगी। थाना शहर प्रभारी निरीक्षक सुरेंद्रा ने बताया कि 11 मार्च 2026 को पुलिस को सूचना मिली थी कि सेक्टर-11 स्थित निर्माणाधीन सरकारी अस्पताल के पास सड़क किनारे एक व्यक्ति का शव पड़ा है। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव की पहचान जयवीर पुत्र खेताराम, निवासी भोडिया खेड़ा के रूप में की। मृतक के मामा श्रवण ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि जयवीर अपना टाटा कैंटर स्वयं चलाता था और यूपी से सामान लोड कर बीकानेर (राजस्थान) जा रहा था।10 मार्च की शाम जयवीर ने फतेहाबाद पहुंचने की बात कही थी, लेकिन अगले दिन उसका शव उसके कैंटर के पास ही संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। शव के सिर पर गंभीर चोट के निशान पाए गए, जिससे हत्या की आशंका जताई गई। सूचना मिलते ही थाना शहर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा सीन ऑफ क्राइम टीम को बुलाकर वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए।शिकायत के आधार पर थाना शहर में प्राथमिकी दर्ज करके जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण व खुफिया सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी मनोज कुमार उर्फ वकील को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस द्वारा आरोपी से पूछताछ की जा रही है, ताकि हत्या के पीछे के कारणों और वारदात में प्रयुक्त हथियार के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सके।
अंबाला में भैंस चोरी करने आए आरोपियों ने व्यक्ति की जान ली
13 Mar, 2026 01:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला। के गांव कालपी में वीरवार रात भैंस चोरों ने खूनी खेल खेला। पशु चोरी करने आए नकाबपोश बदमाशों ने विरोध करने पर पशुपालक की गंडासियों से वार कर बेरहमी से हत्या कर दी, जबकि बीच-बचाव करने आए एक अन्य बुजुर्ग पर भी हमला कर उसे घायल कर दिया। वारदात के बाद भाग रहे बदमाशों की गाड़ी भी अनियंत्रित होकर नेशनल हाईवे पर पलट गई, लेकिन अंधेरे का फायदा उठाकर आरोपी मौके से भागने में सफल रहे। इस घटना के बाद इलाके में दशहत का माहौल है।
गंडासियों से किया ताबड़तोड़ हमला
वीरवार रात 12.30 पर कालपी गांव निवासी जय दयाल (52) रात को अपने पशुओं की रखवाली कर रहे थे। तभी पिकअप गाड़ी में सवार होकर आए बदमाशों ने उनके पशुधन को चोरी करने का प्रयास किया। आहट होने पर जब जय दयाल ने शोर मचाया और बदमाशों को रोकने की कोशिश की तो हमलावरों ने उन पर गंडासियों से हमला कर दिया। चीख-पुकार सुनकर पास ही मौजूद रामरत्न (65) भी मौके पर पहुंचे, जिन्हें भी बदमाशों ने लहूलुहान कर दिया। अत्यधिक खून बह जाने के कारण जय दयाल की मौके पर ही मौत हो गई।
बदमाशों की गाड़ी पलटी, सुराग हाथ लगे
वारदात को अंजाम देकर भाग रहे बदमाशों की गाड़ी ब्राह्मण माजरा मोड़ के पास हाईवे पर अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। राहगीरों और पुलिस के पहुंचने से पहले ही घायल बदमाश वाहन छोड़कर खेतों के रास्ते फरार हो गए। पुलिस ने मौके से गाड़ी को कब्जे में ले लिया है, जिससे बदमाशों के गिरोह का सुराग मिलने की उम्मीद है। सूचना मिलते ही पुलिस की फॉरेंसिक टीम और डीएसपी बराड़ा सुरेश शर्मा ने घटनास्थल का मुआयना किया। शव को पोस्टमार्टम के लिए कैंट के नागरिक अस्पताल भेजा गया है।
सर्वे करने पहुंची आयकर टीम की गाड़ियों पर हमला, ड्राइवर घायल
13 Mar, 2026 01:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साहा (अंबाला) | साहा स्थित न्यूट्रिशन फैक्टरी में सर्वे करने गई आयकर विभाग की टीम पर फैक्टरी कर्मचारियों द्वारा जानलेवा हमला करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। भीड़ ने न केवल टीम की गाड़ियों पर पथराव किया, बल्कि एक ड्राइवर के साथ मारपीट कर उसके कपड़े तक फाड़ दिए। पुलिस ने इस मामले में सरकारी काम में बाधा डालने और हिंसा की विभिन्न धाराओं के तहत साहा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
आग की सूचना के बाद बिगड़े हालात
आयकर विभाग करनाल की अधिकारी कविता बतरा के नेतृत्व में एक टीम न्यूट्रीवेल लेबोरेटरीज एब्सोल्यूट न्यूट्रिशन प्राइवेट लिमिटेड' में सर्वे के लिए पहुंची थी। दोपहर करीब 1:40 बजे फैक्ट्री के डायरेक्टर राहुल डावर भी मौके पर मौजूद थे। इसी बीच अचानक शोर मचा कि फैक्ट्री के नीचे आग लग गई है। सुरक्षा की दृष्टि से पूरी टीम बाहर निकलकर सड़क की दूसरी तरफ खड़ी होकर फायर ब्रिगेड का इंतजार करने लगी।
टीम को घेरकर किया पथराव
आरोप है कि करीब 45 मिनट बाद फैक्टरी के कुछ वर्कर, जिनका नेतृत्व वर्क हाउस मैनेजर पारस कर रहा था, ने अचानक आयकर टीम पर हमला बोल दिया। टीम के सदस्य जब अपनी जान बचाने के लिए गाड़ियों में बैठे, तो आरोपियों ने उन्हें बाहर खींचने की कोशिश की।गाड़ियों को नुकसान: टीम की अर्टिगा गाड़ी पर भारी पथराव किया गया, जिससे उसके शीशे टूट गए। हमले में ड्राइवर जगदीप को गंभीर चोटें आई हैं। उपद्रवियों ने एक अन्य हुंडई वर्ना गाड़ी के हैंडल तोड़ दिए और ड्राइवर के साथ हाथापाई कर उसके कपड़े फाड़ दिए।
सरकारी दस्तावेज और मुहर फैक्ट्री में छूटे
हमले के दौरान अफरातफरी का माहौल ऐसा था कि टीम को जान बचाकर भागना पड़ा। इस दौरान आयकर अधिकारी अमरजीत की कुछ किताबें, आधिकारिक मुहर और मोबाइल चार्जर फैक्टरी परिसर में ही छूट गए। मौके पर मौजूद एएसआई तेजपाल ने किसी तरह टीम को सुरक्षित बाहर निकाला, जिसके बाद जॉइंट कमिश्नर शक्ति सिंह भी मौके पर पहुंचे।
रोहतक में ट्राले की डीजल टैंक फटी, आसपास के इलाके में अफरा-तफरी
13 Mar, 2026 01:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक। दिल्ली रोड पर शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे ट्राले के डीजल टैंक में धमाका होने से न केवल आग लग गई, बल्कि सड़क किनारे सोलर प्लेट का शोरूम भी चपेट में आ गया। फायर ब्रिगेड की गाड़ी ने दो घंटे की जद्दोजहद के बाद आग पर काबू पाया।घटनास्थल पर मौजूद युवक ने बताया कि खरावड़ बाईपास की तरफ से एक ट्रक राजीव चौक की तरफ जा रहा था। चालक ने ट्रक रोक दिया। नीचे उतरकर वह सिगरेट पी रहा था। उसके पास एक तेल की टंकी भी थी। अचानक उस टंकी में आग लगी फैलकर केबिन में लग गई। इसके बाद पूरे ट्राले को चपेट में ले लिया।देखते ही देखते ट्रक के डीजल टैंक ने आग पकड़ ली। तभी जोरदार धमाका हुआ। चिंगारी गिरने से नजदीक के सोलर प्लेट के शोरूम में आग लग गई। पूरा गोदाम धूं-धूं कर जलने लगा। सूचना पाकर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंचे और सात गाड़ियों की मदद से एक घंटे में आग पर काबू पाया जा सका। शोरूम मालिक नरेंद्र का कहना है कि उसका लाखों रुपये का नुकसान हो गया।
दुबई में धमाके के बाद आसमान में धुआं, सुरक्षा एजेंसियों ने हमला विफल किया
13 Mar, 2026 12:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई। दुबई में शुक्रवार को फिर से धमाके हुए और आसमान में धुएं का गुबार देखा गया। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने एक हमले को नाकाम किया है। इसका मलबा एक इमारत पर गिरने से उसे नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच दुबई में लगातार दूसरे दिन जोरदार धमाकों की आवाज सुनी गई। शुक्रवार को तेज धमाकों की आवाज से शहर की कई इमारतें हिल गईं। इस दौरान मध्य दुबई के एक हिस्से में आसमान में काले धुएं का घना गुबार देखा गया। चश्मदीदों के अनुसार, दो बड़े धमाके हुए जिससे पूरा इलाका दहल गया।
क्या बोला प्रशासन?
दुबई मीडिया ऑफिस ने सोशल मीडिया पर इस घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों ने एक हमले को सफलतापूर्वक बीच में ही रोक दिया। इस कार्रवाई के दौरान हमले का मलबा एक इमारत के बाहरी हिस्से पर गिरा। अधिकारियों ने इसे एक मामूली घटना करार दिया है। अच्छी बात यह है कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई और कोई घायल भी नहीं हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, धमाकों के तुरंत बाद दुबई की मुख्य सड़क शेख जायद रोड पर सायरन की आवाजें गूंजने लगीं। पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है। यह घटना दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर (DIFC) के पास हुई। धमाके और मलबे की वजह से इमारत को काफी नुकसान पहुंचा है।
लगातार दूसरे दिन हुआ हमला
दुबई में लगातार दूसरे दिन ऐसी घटना हुई है। इससे पहले गुरुवार को भी अल बदा इलाके में ड्रोन से जुड़ी एक घटना सामने आई थी। तब भी शहर के बीचों-बीच धमाकों की आवाज सुनी गई थी। 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से खाड़ी क्षेत्र में तनाव बहुत बढ़ गया है। ईरान के हमलों की वजह से इस इलाके में अब तक 11 आम नागरिकों की मौत हो चुकी है। फिलहाल दुबई प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
प्राचीन एलर्स पेड़ के आसपास की मिट्टी में पाई जाती है सैकड़ों फंगस प्रजातियां
13 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेलबर्न। चिली के टेम्परेट रेनफॉरेस्ट में खड़े विशाल एलर्स पेड़ों का महत्व केवल उनके ऊपर दिखाई देने वाले हिस्सों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन के नीचे एक विशाल जैविक नेटवर्क को सहारा देते हैं। सैकडों साल पुराने एलर्स के ये पेड़ हजारों सालों से तूफान, आग और बदलते मौसम का सामना करते आए हैं। हाल ही में वैज्ञानिकों ने पाया है कि इनके आसपास की मिट्टी में सैकड़ों फंगस प्रजातियां पाई जाती हैं, जो जंगल के लिए बेहद जरूरी काम करती हैं। ये फंगस पौधों तक पानी और पोषक तत्व पहुंचाने, मिट्टी में कार्बन स्टोर करने और पूरे जंगल को पर्यावरणीय तनाव से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
रिसर्च के अनुसार अगर एक हजार साल पुराने पेड़ को काट दिया जाए, तो केवल एक पेड़ नहीं खोता, बल्कि हजारों साल में विकसित हुआ पूरा अंडरग्राउंड इकोसिस्टम भी नष्ट हो जाता है। मेलबर्न यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता केमिली ट्रुओंग बताती हैं कि हर पेड़ समान नहीं होता। बड़े और प्राचीन पेड़ की मिट्टी में छोटी पौधों की तुलना में दोगुनी फंगल विविधता पाई जाती है। जब एक विशाल पेड़ गायब होता है, तो उसके साथ सदियों पुराना वह नेटवर्क भी समाप्त हो जाता है, जो मिट्टी की उपजाऊ शक्ति और जंगल की मजबूती बनाए रखता है। एसपीयूएन की एड्रियाना कोरालेस के अनुसार यह विविधता जंगल की ‘रेजिलिएंस’ या मजबूती को दर्शाती है, जो प्राकृतिक आपदाओं से उबरने में मदद करती है। यह खोज 2022 में चिली के एलर्स कोस्टेरो नेशनल पार्क में शुरू हुई।
शोधकर्ताओं ने 31 अलग-अलग एलर्स पेड़ों के नीचे मिट्टी के सैंपल लिए, जिनमें छोटे पेड़ और ‘एलर्स अबुएलो’ नामक विशाल पेड़ शामिल थे। इस पेड़ का तना 14.8 फीट से अधिक चौड़ा है। वैज्ञानिकों ने डीएनए तकनीक का इस्तेमाल करके मिट्टी में छिपी फंगल प्रजातियों की पहचान की। विश्लेषण में पता चला कि सबसे बड़े पेड़ के पास 300 से अधिक ऐसी फंगल प्रजातियां थीं, जो किसी और पेड़ के पास नहीं मिलीं। इससे यह स्पष्ट होता है कि पुराने पेड़ मिट्टी की जैव विविधता के लिए छाता की तरह काम करते हैं। एलर्स प्रजाति दुनिया की दूसरी सबसे लंबी उम्र वाली पेड़ों में से एक है। सदियों से इनका शिकार मजबूत लकड़ी के लिए किया जाता रहा है। खेती के लिए जंगलों को साफ करना और सड़क निर्माण जैसी गतिविधियां इन पर लगातार दबाव डाल रही हैं। प्रस्तावित सड़कों और बाहरी प्रजातियों के खतरे से जंगल और इसके भूमिगत नेटवर्क को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। नई रिसर्च चेतावनी देती है कि खतरा सिर्फ पेड़ों के नुकसान का नहीं है, बल्कि उस छिपे हुए जैविक खजाने को खोने का भी है, जो जंगल को दोबारा खड़ा करने की ताकत रखता है।
अध्ययन यह बताता है कि हजारों साल पुराने जंगल कभी भी नए लगाए गए पेड़ों से पूरी तरह रिप्लेस नहीं किए जा सकते। हर बड़ा और प्राचीन पेड़ सैकड़ों अनोखी फंगल प्रजातियों का आश्रय है, और इसे बचाना पूरे भूमिगत इकोसिस्टम को संरक्षित करने के बराबर है। इस खोज ने साबित कर दिया है कि पुराने पेड़ केवल वनस्पति नहीं बल्कि पूरे जंगल की नींव हैं। उनका संरक्षण न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं से बचाने और जंगल की मजबूती बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य है।
यूएनएससी का बड़ा कदम: ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा, प्रस्ताव पारित
13 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जेनेवा। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष और अस्थिरता के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। बहरीन की अगुवाई में लाए गए इस प्रस्ताव में खाड़ी देशों पर ईरान द्वारा किए गए हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की गई है। गौरतलब है कि खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी संपत्ति और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए ये हमले, ईरान पर 28 फरवरी को शुरू हुए उन हमलों के जवाब में थे, जिनमें कथित तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु हो गई थी।
सुरक्षा परिषद में इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 13 मत पड़े, जबकि दो सदस्य देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। विशेष बात यह रही कि किसी भी सदस्य देश ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट नहीं किया। भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि वह खुद भी इन हमलों के खतरों से अछूता नहीं है। वहीं, रूस और चीन इस मतदान प्रक्रिया से अनुपस्थित रहे।
पारित किए गए प्रस्ताव में ईरान द्वारा बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन के विरुद्ध की गई सैन्य कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताया गया है। सुरक्षा परिषद ने जोर देकर कहा कि ये हमले वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा हैं। प्रस्ताव में मांग की गई है कि ईरान इन देशों के खिलाफ अपनी सभी शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को तुरंत रोके। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत देशों को प्राप्त सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार की पुष्टि की गई है। परिषद ने होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के क्षेत्रों में नागरिक बुनियादी ढांचे, वाणिज्यिक जहाजों और आम लोगों को जानबूझकर निशाना बनाने की तीखी आलोचना की है। प्रस्ताव में चेतावनी दी गई है कि इस तरह के हमलों का वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर विनाशकारी प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा, सुरक्षा परिषद ने जीसीसी देशों और अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थों के उन प्रयासों की सराहना की, जिनका उद्देश्य बातचीत के जरिए विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालना है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, जो दुनिया में शांति बनाए रखने वाली सबसे शक्तिशाली संस्था है, ने इस कदम के माध्यम से मिडिल ईस्ट में स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। 15 सदस्यीय इस परिषद में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे स्थायी सदस्यों के साथ-साथ पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया और अन्य अस्थायी सदस्य शामिल हैं। इस प्रस्ताव का पारित होना ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक कदम माना जा रहा है।
ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों में रूस के ‘फिंगरप्रिंट’, जांच में मिले संकेत
13 Mar, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पता चला है कि ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों के निर्माण में रूस की तकनीकी मदद शामिल हो सकती है। वहीं दूसरी ओर युद्ध को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने फिर दावा किया है। भारत ने भी अपने तेल आयात के स्रोतों में बदलाव किया है और रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। ईरान की तरफ से दागी गई मिसाइलों के मलबे की जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक परीक्षण से पता चला है कि इन मिसाइलों के निर्माण में रूसी विशेषज्ञों की मदद की आशंका जताई जा रही है। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इन मिसाइलों की तकनीक और निर्माण प्रक्रिया में रूस और सोवियत दौर के विशेषज्ञों का योगदान रहा है। इसका मतलब है कि ईरान ने इन मिसाइलों को पूरी तरह अपने दम पर तैयार नहीं किया है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद रूस खुलकर ईरान के समर्थन में खड़ा नजर आ रहा है।
इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध तब खत्म हो जाएगा जब वह चाहेंगे। उनके मुताबिक अब ईरान में निशाना बनाने के लिए करीब कुछ भी बाकी नहीं बचा है। हालांकि ट्रंप के इस बयान के बावजूद क्षेत्र में हमले और जवाबी कार्रवाई अभी भी जारी है। इस बीच इजराइल ने कहा है कि अमेरिका के साथ मिलकर चलाया जा रहा सैन्य अभियान जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई तब तक चलेगी जब तक सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। उनके मुताबिक इस अभियान की कोई समय सीमा तय नहीं है और जरूरत पड़ने पर इसे लंबे समय तक जारी रखा जाएगा।
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष का असर ऊर्जा बाजार पर भी दिख रहा है। भारत ने मार्च महीने में रूस से कच्चे तेल की खरीद में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी की है। जहाज निगरानी से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक इस महीने भारत ने करीब पंद्रह लाख बैरल रूसी तेल खरीदा है। फरवरी में यह मात्रा करीब दस लाख चालीस हजार बैरल प्रतिदिन थी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयात करने वाला देश है और अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 88 फीसदी विदेशों से खरीदता है।
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