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गुरुग्राम एमसीजी चुनाव अपडेट: दूसरी बार भी नहीं चुना गया सीनियर डिप्टी मेयर, पार्षदों में भारी नाराजगी
30 Apr, 2026 01:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुरुग्राम: साइबर सिटी के नगर निगम में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों के लिए होने वाला बहुप्रतीक्षित चुनाव वीरवार को एक बार फिर नाटकीय रूप से टल गया। सवा साल के लंबे अंतराल और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कड़े हस्तक्षेप के बाद उम्मीद थी कि आज शहर को नए डिप्टी मेयर मिल जाएंगे, लेकिन ऐन वक्त पर मेयर राजरानी मल्होत्रा के अस्वस्थ होने के चलते बैठक रद्द करनी पड़ी। हिपा (HIPA) के कॉन्फ्रेंस हॉल में सुबह 11 बजे पार्षदों और निगम आयुक्त की मौजूदगी के बावजूद चुनावी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
मेयर की अनुपस्थिति और 'स्वास्थ्य' का पेंच
निर्धारित समय के अनुसार निगम के 36 पार्षद और उच्चाधिकारी चुनाव स्थल पर पहुँच चुके थे, लेकिन बैठक की अध्यक्षता करने वाली मेयर की तबीयत बिगड़ने की सूचना ने पूरी प्रक्रिया पर पानी फेर दिया। आधिकारिक नोटिस और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच प्रशासन को एक बार फिर चुनाव टालने का निर्णय लेना पड़ा। जानकारों का मानना है कि यह स्थगन केवल स्वास्थ्य कारणों से नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल के भीतर चल रही आपसी खींचतान का नतीजा भी हो सकता है, क्योंकि पार्टी अभी तक चेहरों पर सर्वसम्मति नहीं बना पाई है।
भाजपा के भीतर 'शक्ति प्रदर्शन': राव इंद्रजीत बनाम राव नरबीर
नगर निगम में भाजपा के पास 24 पार्षदों का स्पष्ट बहुमत है और कई निर्दलीयों का भी समर्थन प्राप्त है, लेकिन असली लड़ाई पार्टी के दो दिग्गज धड़ों के बीच है। एक तरफ केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का खेमा अपनी पकड़ बनाए रखना चाहता है, तो दूसरी ओर कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह के समर्थक अपने पार्षदों को इन मलाईदार पदों पर आसीन कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। दक्षिण हरियाणा की राजनीति में वर्चस्व की यह 'अंदरूनी जंग' विकास कार्यों में बाधा बन रही है, क्योंकि इन पदों के खाली होने से 'फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट कमेटी' (F&CC) जैसी महत्वपूर्ण समितियां निष्क्रिय पड़ी हैं।
HTET रिकॉर्ड को लेकर भिड़े कर्मचारी और अधिकारी: भिवानी बोर्ड में हंगामा, कर्मचारियों ने शुरू की हड़ताल
30 Apr, 2026 01:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भिवानी: हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (BSEH) मुख्यालय में वीरवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब बोर्ड प्रशासन द्वारा 'हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा' (HTET) 2024 के रिकॉर्ड को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस कदम का बोर्ड के कर्मचारियों ने कड़ा विरोध किया, जिसके बाद कार्यालय परिसर हंगामे और नारेबाजी के अखाड़े में तब्दील हो गया। कर्मचारियों ने प्रशासन की इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए तुरंत प्रभाव से हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे बोर्ड का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया।
रिकॉर्ड नष्ट करने की मंशा पर उठे सवाल, जांच प्रभावित होने का डर
हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का आरोप है कि HTET 2024 की परीक्षा और परिणामों को लेकर पहले से ही कई विवाद चल रहे हैं, ऐसे में रिकॉर्ड को इतनी जल्दी नष्ट करना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। कर्मचारियों का तर्क है कि नियमानुसार किसी भी परीक्षा का रिकॉर्ड एक निश्चित समय तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होता है, लेकिन बोर्ड प्रशासन इसे जल्दबाजी में ठिकाने लगाना चाहता है। विरोध प्रदर्शन कर रहे नेताओं ने कहा कि यदि यह रिकॉर्ड नष्ट हो गया, तो भविष्य में होने वाली किसी भी कानूनी जांच या आरटीआई (RTI) प्रक्रिया का कोई आधार नहीं बचेगा।
बोर्ड प्रशासन और कर्मचारियों के बीच गतिरोध बरकरार
प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मामले में सफाई देते हुए इसे एक नियमित प्रक्रिया (Routine Process) बताया है, लेकिन कर्मचारियों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते बोर्ड की कई महत्वपूर्ण शाखाओं में ताले लटक गए हैं, जिससे दूर-दराज से आए छात्रों और अभिभावकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक रिकॉर्ड नष्ट करने का फैसला वापस नहीं लिया जाता और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक उनका धरना और काम रोको आंदोलन जारी रहेगा।
होर्मुज स्ट्रेट बना तनाव का केंद्र, ईरान ने दी घातक परिणामों की धमकी
30 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान/वाशिंगटन। मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव अब एक ऐसे मुहाने पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी की राह कठिन नजर आ रही है। ईरान और अमेरिका के बीच मची सैन्य होड़ ने पूरी दुनिया को युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। इस बीच, ईरान ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अमेरिका को अंतिम चेतावनी जारी की है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की रणनीतिक नाकेबंदी के बीच ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह झुकने के बजाय अपने अस्तित्व और शर्तों के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करने को तैयार है।
वैश्विक ऊर्जा संकट: होर्मुज की नाकेबंदी ने बढ़ाई धड़कनें
दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है, जो अब दोनों देशों के बीच शक्ति प्रदर्शन का अखाड़ा बन चुका है। ईरान ने जहाँ अमेरिकी और इजरायली जहाजों के लिए इस रास्ते को अवरुद्ध कर दिया है, वहीं अमेरिका ने भी अरब सागर की ओर से कड़ी नाकेबंदी कर रखी है। इस दोहरी घेराबंदी ने वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। हालांकि कई अंतरराष्ट्रीय शक्तियां मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
कमांडर शहरम ईरानी का पलटवार: 'ईरान को कम समझना दुश्मन का भ्रम'
ईरानी नौसेना के कमांडर शहरम ईरानी ने अमेरिका की युद्ध क्षमताओं और उसकी धारणाओं पर तीखा प्रहार किया है। कमांडर ने कहा कि जो लोग यह मानते हैं कि वे ईरान को कुछ ही दिनों के भीतर घुटने टेकने पर मजबूर कर देंगे, वे एक बड़े भ्रम में जी रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दुश्मन की यह सोच अब सैन्य अकादमियों में एक मजाक बनकर रह गई है। कमांडर ईरानी के अनुसार, अब तक बरता गया संयम कमजोरी नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति थी, लेकिन यदि उनकी जायज मांगें अनसुनी की गईं, तो ईरान अपनी सैन्य रणनीति में ऐसा बदलाव करेगा जिसकी कल्पना भी वाशिंगटन ने नहीं की होगी।
ट्रंप की सख्त नीति और ईरान का आक्रामक पैंतरा
बुधवार को सरकारी ब्रॉडकास्टर के जरिए जारी संदेश में ईरानी नौसैनिक अधिकारियों ने सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि अमेरिकी सेना की किसी भी अगली गतिविधि का जवाब तत्काल और विनाशकारी कार्रवाई से दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि स्थायी समाधान की उम्मीद में अब तक दिखाया गया धैर्य अब समाप्त हो रहा है। दूसरी ओर, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के किसी भी समझौते के प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए अपनी नाकेबंदी की नीति को सही ठहराया है। ट्रंप का मानना है कि नौसैनिक घेराबंदी हवाई हमलों से कहीं अधिक प्रभावशाली है और इसने ईरान को आर्थिक रूप से बैकफुट पर धकेल दिया है। इस तनातनी ने पूरे क्षेत्र को बारूद के ढेर पर बैठा दिया है।
हाईवे पर पलटी बस, बोलीविया में 9 लोगों की दर्दनाक मौत, 22 जख्मी
30 Apr, 2026 10:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ला पाज़। दुनियाभर में सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते ग्राफ ने सुरक्षा दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी कड़ी में दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया से एक विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ बुधवार को एक यात्री बस के दुर्घटनाग्रस्त होने से कोहराम मच गया। यह भीषण हादसा पिसिगा-ओरुरो अंतर्राष्ट्रीय राजमार्ग पर विला चालाकोलो कस्बे के पास हुआ। यह मार्ग बोलीविया और चिली को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण व्यापारिक और यात्रा गलियारा है, जहाँ यात्रियों से खचाखच भरी एक तेज रफ्तार बस अनियंत्रित होकर पलट गई।
हादसे में 9 यात्रियों की मौत, कई की हालत नाजुक
इस दर्दनाक सड़क दुर्घटना में अब तक 9 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर और पलटने की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई यात्रियों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया, जबकि कुछ अन्य की मौत अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में हो गई। जान गंवाने वालों के अलावा, इस हादसे में 22 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सभी घायलों को तत्काल समीपवर्ती चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों के अनुसार कई पीड़ितों की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है, जिससे मृतक संख्या बढ़ने की आशंका है।
जांच के घेरे में ड्राइवर: शराब नहीं, थकान हो सकती है वजह
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और बचाव दलों ने मोर्चा संभाला और मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। शुरुआती पड़ताल में पुलिस का मानना है कि दुर्घटना का संभावित कारण बस की अत्यधिक गति (ओवरस्पीडिंग) या चालक को नींद की झपकी आना हो सकता है। अधिकारियों ने बताया कि 24 वर्षीय बस चालक को हिरासत में लेकर उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया है, जिसकी रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि वह शराब के नशे में नहीं था। फिलहाल, पुलिस इस पहलू पर गौर कर रही है कि क्या लंबी दूरी की थकान या मानवीय चूक इस त्रासदी की मुख्य वजह रही।
असुरक्षित सफर और नियमों की अनदेखी
बोलीविया का यह हादसा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करता है। हर साल हजारों लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा देते हैं, जिसका बड़ा कारण यातायात नियमों का पालन न करना और लंबी दूरी के सफर में ड्राइवरों पर काम का अतिरिक्त दबाव होता है। प्रशासन ने फिलहाल दुर्घटनाग्रस्त बस को हाईवे से हटाकर यातायात बहाल कर दिया है, लेकिन इस घटना ने स्थानीय यात्रियों और प्रशासन के बीच सुरक्षा इंतजामों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
ईरान युद्ध का असर: पाकिस्तान की टूटी कमर, शहबाज शरीफ ने बयां किया दर्द
30 Apr, 2026 09:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता को हिलाकर रख दिया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हालिया कैबिनेट बैठक में इस संकट पर चिंता जताते हुए स्वीकार किया कि मौजूदा संघर्ष ने देश द्वारा पिछले दो वर्षों में बड़ी मशक्कत से हासिल की गई आर्थिक प्रगति को पटरी से उतार दिया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, युद्ध की विभीषिका ने न केवल क्षेत्रीय शांति को भंग किया है, बल्कि पाकिस्तान के विकास कार्यों को भी भारी क्षति पहुँचाई है, जिसके चलते अब सरकार कूटनीतिक रास्तों के जरिए शांति बहाली को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बना रही है।
आसमान छूता तेल बिल और डगमगाती अर्थव्यवस्था
इस युद्ध का सबसे भयावह असर पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार और ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ा है। प्रधानमंत्री शरीफ ने खुलासा किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के कारण देश का साप्ताहिक तेल आयात बिल 300 मिलियन डॉलर के सामान्य स्तर से उछलकर अब 800 मिलियन डॉलर के खतरनाक स्तर तक पहुँच गया है। खर्च में हुई इस बेतहाशा बढ़ोतरी ने अर्थव्यवस्था पर असहनीय बोझ डाल दिया है, जिसका असर घरेलू खपत पर भी दिखने लगा है। चालू सप्ताह के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों की मांग में आई बड़ी गिरावट स्पष्ट रूप से औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों में छाई सुस्ती की ओर इशारा कर रही है। हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने एक विशेष टास्क फोर्स तैनात की है, जो हर दिन बदलती स्थितियों का विश्लेषण कर बचाव के उपाय तलाश रही है।
शांति की पहल: इस्लामाबाद में ऐतिहासिक कूटनीतिक प्रयास
इन विपरीत परिस्थितियों के बीच पाकिस्तान ने एक कुशल मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच चली 21 घंटे की मैराथन बैठक को प्रधानमंत्री ने एक मील का पत्थर करार दिया है। इस महत्वपूर्ण वार्ता को सफल बनाने में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार ने पर्दे के पीछे से बड़ी भूमिका निभाई, जिसके सुखद परिणाम स्वरूप दोनों महाशक्तियों के बीच संघर्ष विराम की अवधि को आगे बढ़ाना संभव हो पाया। यह बातचीत न केवल पाकिस्तान की कूटनीतिक परिपक्वता को दर्शाती है, बल्कि युद्ध को टालने की दिशा में एक बड़ी वैश्विक उम्मीद बनकर उभरी है।
दूसरे दौर की वार्ता और भविष्य की रणनीतिक योजना
शांति प्रयासों की इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए पाकिस्तान अब दोनों प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच दूसरे चरण की प्रत्यक्ष बातचीत की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के पाकिस्तान दौरे ने इन उम्मीदों को और बल दिया है, जहाँ उन्होंने पाकिस्तानी नेतृत्व को सकारात्मक सहयोग का भरोसा दिलाया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने विश्वास व्यक्त किया है कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा के बाद कूटनीतिक बातचीत का यह सिलसिला एक स्थायी समाधान की ओर बढ़ेगा। पाकिस्तान सरकार का मानना है कि यदि यह बातचीत सफल रहती है, तो न केवल क्षेत्र में शांति लौटेगी, बल्कि युद्ध की मार झेल रही दक्षिण एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को भी पुनः विकास के पथ पर लौटने का अवसर मिलेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का नया बयान, होर्मुज स्ट्रेट को दिया अपना नाम
30 Apr, 2026 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जारी इस तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया सोशल मीडिया पोस्ट अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। अप्रैल 2026 के ताजा घटनाक्रम के अनुसार, ट्रंप ने न केवल इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अमेरिकी नाकेबंदी को सख्त करने के संकेत दिए हैं, बल्कि इसे सांकेतिक रूप से 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' (Strait of Trump) का नाम भी दे दिया है।
इस विवाद से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' का विवाद: हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक यूजर ने होर्मुज स्ट्रेट का नक्शा साझा करते हुए इसे 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' लिखा। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पोस्ट को री-शेयर करते हुए अपनी सहमति दी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य और आर्थिक तनातनी चरम पर है।
पुरानी टिप्पणी और 'फर्जी न्यूज़' का तंज: ट्रंप ने पिछले महीने (मार्च 2026) मियामी में आयोजित 'फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव (FII) प्रायोरिटी समिट' के दौरान भी अनजाने में होर्मुज को 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' कह दिया था। बाद में उन्होंने मज़ाकिया लहजे में इसे सुधारते हुए कहा कि मीडिया इसे उनकी "गलती" बताएगा, जबकि उनके मुताबिक उनसे गलतियां बहुत कम होती हैं।
नाकेबंदी पर सख्त रुख: ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के बंदरगाहों और होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक ईरान एक नए "परमाणु समझौते" (Non-nuclear deal) पर हस्ताक्षर नहीं कर देता। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह आर्थिक घेराबंदी बमबारी से अधिक प्रभावी है क्योंकि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था "पतन की स्थिति" (State of collapse) में पहुँच गई है।
वैश्विक प्रभाव: इस नाकेबंदी के कारण दुनिया के तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा प्रभावित हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें $110 प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं, जिससे भारत और यूरोप जैसे तेल आयातक देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।
ईरान ने इस नाकेबंदी को "समुद्री डकैती" करार दिया है और बदले में खुद भी इस मार्ग को बंद करने की चेतावनी दी है। ट्रंप का मानना है कि समय ईरान के पक्ष में नहीं है और वे "अधिकतम दबाव" की नीति के जरिए तेहरान को अपनी शर्तों पर समझौता करने के लिए मजबूर कर देंगे।
‘आप मेरी मां का क्रश’—ट्रंप के बयान पर किंग चार्ल्स हुए लाल
29 Apr, 2026 12:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III की ऐतिहासिक मुलाकात के दौरान व्हाइट हाउस का माहौल उस वक्त हंसी-मजाक से भर गया, जब ट्रंप ने कूटनीतिक शिष्टाचार को दरकिनार कर एक बेहद निजी और दिलचस्प पारिवारिक किस्सा साझा किया।
"मेरी मां को आप पर क्रश था"
28 अप्रैल को आयोजित औपचारिक स्वागत समारोह के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने मुस्कुराते हुए खुलासा किया कि उनकी दिवंगत मां, मैरी ऐन मैकलॉड ट्रंप, अपनी युवावस्था के दौरान किंग चार्ल्स की बहुत बड़ी प्रशंसक थीं। ट्रंप ने कहा:
"मेरी मां स्कॉटलैंड से थीं और उन्हें ब्रिटिश राजघराने से बेहद लगाव था। वह हमेशा कहती थीं कि 'देखो, युवा चार्ल्स कितने क्यूट (Cute) हैं।' सच तो यह है कि उन्हें आप पर 'क्रश' हुआ करता था।"
यह सुनकर 77 वर्षीय किंग चार्ल्स अपनी हंसी नहीं रोक पाए। राष्ट्रपति ने आगे याद किया कि जब भी टीवी पर शाही परिवार का कोई कार्यक्रम आता था, तो उनकी मां सब काम छोड़कर स्क्रीन से चिपक जाती थीं और उन्हें भी बड़े गौर से देखने को कहती थीं।
कूटनीति और पुरानी दोस्ती का नया अध्याय
मजाक के साथ-साथ ट्रंप ने इस मुलाकात के रणनीतिक महत्व को भी रेखांकित किया:
स्कॉटिश कनेक्शन: ट्रंप ने अपनी मां की पृष्ठभूमि (स्कॉटलैंड का छोटा गांव) का जिक्र करते हुए बताया कि उनके परिवार में ब्रिटिश परंपराओं के प्रति हमेशा से गहरा सम्मान रहा है।
बदलता इतिहास: ट्रंप ने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर अमेरिका के संस्थापक नेता आज किंग चार्ल्स और उन्हें एक साथ खड़े देखते, तो वे हैरान रह जाते कि 1776 की दुश्मनी अब इतनी गहरी दोस्ती में बदल चुकी है।
विरासत: मैरी ऐन मैकलॉड (1912-2000) 18 साल की उम्र में अमेरिका आई थीं। ट्रंप ने बताया कि उनके जीवन और विचारों पर उनकी मां का अटूट प्रभाव रहा है।
सोनीपत संकल्प पत्र जारी, आधुनिक सुविधाओं पर खास जोर
29 Apr, 2026 12:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोनीपत (हरियाणा। भारतीय जनता पार्टी ने सोनीपत नगर निगम चुनाव के लिए अपना चुनावी घोषणापत्र यानी 'संकल्प पत्र' पेश कर दिया है। 'समर्पित सेवा-सशक्त सुशासन' के ध्येय वाक्य के साथ जारी इस संकल्प पत्र में शहर के कायाकल्प, आधुनिक सुविधाओं और जनता को राहत देने वाले कई महत्वपूर्ण वादे किए गए हैं।
बुनियादी ढांचा और जल प्रबंधन
शहर की पुरानी समस्याओं के समाधान के लिए भारी-भरकम बजट का प्रावधान किया गया है:
निकासी और सीवरेज: जलभराव की समस्या से निपटने के लिए 390 करोड़ रुपये की लागत से ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त किया जाएगा। गांव राठधना और देवडू में नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे। साथ ही स्वच्छ पेयजल के लिए 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
सड़कें और पार्किंग: शहर की मुख्य सड़कों और ग्रीन बेल्ट के सुधार के लिए 190 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए 80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी-लेवल पार्किंग बनाई जाएगी।
सुरक्षा और स्मार्ट तकनीक
CCTV और कमांड सेंटर: शहर की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए 200 करोड़ रुपये की लागत से 'इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर' बनाया जाएगा, जिससे पूरे शहर की सीसीटीवी के जरिए निगरानी होगी।
डिजिटल सेवाएं: भ्रष्टाचार पर लगाम और जनता की सुविधा के लिए प्रॉपर्टी टैक्स, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और नक्शा पास कराने जैसी सुविधाओं को पूरी तरह ऑनलाइन किया जाएगा।
खेल और सामुदायिक विकास
स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स: सेक्टर-4 के स्टेडियम में 50 करोड़ रुपये से नई सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। इसके अतिरिक्त लहराडा और ऋषि कॉलोनी में नए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तैयार होंगे।
जनसुविधाएं: शहर में एक आधुनिक 520 सीटों वाला ऑडिटोरियम और सेक्टर-23 में नई डिस्पेंसरी का निर्माण प्रस्तावित है। ड्रेन नंबर 6 का सौंदर्यीकरण कर वहां शॉपिंग एरिया विकसित किया जाएगा।
महिलाओं और आम नागरिकों को विशेष राहत
पिंक टॉयलेट: महिलाओं की सुविधा के लिए विशेष 'पिंक टॉयलेट' बनाए जाएंगे, जिनमें नैपकिन वेंडिंग मशीन और फीडिंग रूम की व्यवस्था होगी।
टैक्स में छूट: महिलाओं के नाम पर पंजीकृत घरों के हाउस टैक्स में 25% की बड़ी छूट दी जाएगी।
मालिकाना हक: 20 वर्षों से अधिक समय से रह रहे परिवारों को उनके मकानों की रजिस्ट्री और वैध मालिकाना हक देने का वादा किया गया है।
तनाव के बीच ईरान का बयान: बातचीत हुई तो खुलेगा होर्मुज स्ट्रेट
29 Apr, 2026 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान और अमेरिका के बीच जारी यह तनाव वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz), जो दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20-30% नियंत्रित करता है, का बंद होना एक ऐसा दांव है जिसने पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है।
ईरान के डिप्टी रक्षा मंत्री रेज़ा तलाई निक का बयान इस गतिरोध को सुलझाने की दिशा में एक शर्त के रूप में आया है, लेकिन जमीनी हकीकत काफी जटिल है।
ईरान की 3 प्रमुख शर्तें और वर्तमान स्थिति
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए जो शर्तें रखी हैं, वे मुख्य रूप से डोनाल्ड ट्रंप की 'अधिकतम दबाव' (Maximum Pressure) की नीति को चुनौती देती हैं:
अमेरिकी नाकेबंदी (Blockade) खत्म करना: ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके बंदरगाहों और तेल निर्यात पर लगी सख्त पाबंदियों को तुरंत हटाए।
इज़रायल की सैन्य कार्रवाई पर रोक: लेबनान और क्षेत्रीय संघर्षों में इज़रायल के हमलों को रोकना ईरान की एक प्रमुख कूटनीतिक शर्त है।
परमाणु वार्ता को बाद के लिए टालना: ईरान का प्रस्ताव है कि पहले व्यापारिक रास्ते (Hormuz) और युद्ध विराम पर समझौता हो, जबकि परमाणु मुद्दों पर बातचीत बाद में की जाए।
डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी शर्तों पर अडिग हैं। उनका तर्क है कि:
दबाव की नीति: ट्रंप का मानना है कि नाकेबंदी की वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था "पतन की स्थिति" (State of Collapse) में है और यही समय है जब ईरान को बिना किसी रियायत के झुकने पर मजबूर किया जा सकता है।
कोई रियायत नहीं: ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वे तब तक नाकेबंदी नहीं हटाएंगे जब तक ईरान बिना शर्त होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलता और अपनी परमाणु गतिविधियों पर स्थायी रोक नहीं लगाता।
आगे की राह?
वर्तमान में पाकिस्तान और कतर जैसे देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच 'भरोसे की कमी' सबसे बड़ी बाधा है। जहाँ एक तरफ ईरान इसे अपनी संप्रभुता और "पायरेसी" (अमेरिका द्वारा टैंकरों को रोकना) के खिलाफ प्रतिरोध बता रहा है, वहीं ट्रंप इसे ईरान को पूरी तरह आत्मसमर्पण कराने के अवसर के रूप में देख रहे हैं।
ईरान का बड़ा दावा—माजिद टेक्नोलॉजी से F-15E जेट को किया ढेर
29 Apr, 2026 10:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान | रक्षा जगत में इस वक्त सबसे बड़ी चर्चा का विषय अमेरिका के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों का गिरना बना हुआ है। अमेरिकी दावे के उलट कि उसने ईरान के एयर डिफेंस को नष्ट कर दिया है, 3 अप्रैल की घटना ने पेंटागन को हिलाकर रख दिया है। पिछले दो दशकों में पहली बार किसी देश ने अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल (F-15E Strike Eagle) को मार गिराने में सफलता पाई है।
'माजिद' सिस्टम: रडार की नजरों से ओझल मौत
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान ने इस उपलब्धि के लिए पारंपरिक रडार तकनीक के बजाय 'माजिद' (Majid) नामक एक छोटे और गुप्त एयर डिफेंस सिस्टम का उपयोग किया है। इसकी सफलता के पीछे के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
रडार-रहित तकनीक: अमेरिकी विमानों के 'रडार वॉर्निंग रिसीवर' (RWR) केवल रडार तरंगों को पकड़ते हैं। चूंकि माजिद सिस्टम में रडार होता ही नहीं, इसलिए विमान के सेंसर किसी भी खतरे का सिग्नल नहीं दे पाए।
इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड ट्रैकिंग: यह सिस्टम विमान के इंजन से निकलने वाली गर्मी (Heat) को ट्रैक करता है। इसमें लगे एडवांस सेंसर 15 किलोमीटर की दूरी से ही इंजन की तपिश पहचान लेते हैं।
एडी-08 (AD-08) मिसाइल: यह मिसाइल Mach 2 (ध्वनि से दोगुनी गति) की रफ्तार से सीधे इंजन पर सटीक निशाना साधती है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में फिर गई भारतीय युवक की जान, गांव में मातम
29 Apr, 2026 10:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फतेहाबाद। हरियाणा के गांव कुम्हारिया के लिए एक और बेहद दुखद खबर सामने आई है। बेहतर भविष्य के सपने लेकर रूस गए गांव के दूसरे युवक, विजय पूनिया की भी मौत की पुष्टि हो गई है। करीब 25 दिनों के लंबे इंतजार और अनिश्चितता के बाद यह सूचना मिलने से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। विजय का पार्थिव शरीर दिल्ली पहुंच चुका है और परिजन उसे लेने के लिए वहां गए हैं; दोपहर तक शव के गांव पहुंचने की संभावना है।
एजेंटों की ठगी और युद्ध का शिकार
विजय पूनिया जुलाई 2025 में बिजनेस वीजा पर रूस गया था। वहां नौकरी दिलाने का झांसा देकर एजेंटों ने उसे अपने जाल में फंसाया और जबरन रूसी सेना में भर्ती करा दिया। इसके बाद उसे यूक्रेन के साथ चल रहे भीषण युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया। विजय के साथ गांव का ही एक अन्य युवक अंकित जांगड़ा भी ठगी का शिकार हुआ था, जिसका शव 4 अप्रैल को ही गांव लाया गया था।
"हमें बचा लो" – वह आखिरी संदेश
13 सितंबर 2025 को विजय और अंकित की अपने परिवारों से आखिरी बार बात हुई थी। उन्होंने एक वॉइस मैसेज भेजकर गुहार लगाई थी, "सुबह हमें युद्ध के मैदान में ले जाया जा रहा है, बचा सकते हो तो बचा लो।" उस संदेश के बाद से ही दोनों का परिवार से संपर्क टूट गया था। परिवार लगातार भारत सरकार से उनकी सुरक्षित वापसी की गुहार लगा रहा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
विजय का परिवार पहले से ही कई संघर्षों से जूझ रहा था:
अकेला सहारा: विजय के पिता का कुछ वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। अब परिवार में केवल उसकी वृद्ध मां माया और छोटा भाई सुनील बचे हैं।
कर्ज का बोझ: परिवार ने जमीन और गहने गिरवी रखकर या लोन लेकर विजय को विदेश भेजा था, ताकि घर की आर्थिक स्थिति सुधर सके।
डीएनए जांच: विजय की पहचान सुनिश्चित करने के लिए करीब दो माह पहले उसका डीएनए सैंपल मंगवाया गया था, जिसके बाद अब उसकी मौत की आधिकारिक पुष्टि हुई है।
विदेश जाने का घटनाक्रम
विजय पहली बार जुलाई 2024 में स्टडी वीजा पर रूस गया था, लेकिन वीजा न बढ़ने के कारण वापस आ गया। फिर अक्टूबर 2024 में गया और मार्च में वापस लौटा। अंततः 15 जुलाई 2025 को वह एक साल के बिजनेस वीजा पर दोबारा रूस गया, जो उसके जीवन का आखिरी सफर साबित हुआ।
स्वच्छता पर सख्ती, आज अधिकारियों के साथ होगी बड़ी समीक्षा बैठक
29 Apr, 2026 09:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में साफ-सफाई और स्वच्छता के मानकों को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा निदेशालय ने आज, 29 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण राज्यस्तरीय ऑनलाइन समीक्षा बैठक आयोजित की है। सुबह 11 बजे शुरू हुई इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में प्रदेश के सभी 14,268 सरकारी स्कूलों की स्वच्छता व्यवस्था पर मंथन किया जा रहा है।
'स्वच्छ प्रांगण योजना' पर मुख्य फोकस
बैठक में 'स्वच्छ प्रांगण योजना' को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत शिक्षा विभाग के आला अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी (DEEO) और खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को कड़े निर्देश दिए गए हैं।
समीक्षा के मुख्य बिंदु:
बुनियादी सुविधाएं: स्कूलों में शौचालयों की नियमित सफाई और रखरखाव की स्थिति।
पेयजल व्यवस्था: छात्रों के लिए उपलब्ध पीने के साफ पानी की गुणवत्ता और व्यवस्था।
परिसर स्वच्छता: स्कूल के खेल मैदान और कमरों की साफ-सफाई।
निरीक्षण और जवाबदेही: स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर स्कूल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की होगी।
मॉनिटरिंग का द्वि-स्तरीय ढांचा
शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि केवल निर्देश देना काफी नहीं है, बल्कि इसकी सघन निगरानी भी की जाएगी:
स्थानीय स्तर: जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारी स्कूलों का नियमित औचक निरीक्षण करेंगे।
राज्य स्तर: मुख्यालय स्तर पर हर महीने प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा (मासिक मॉनिटरिंग) की जाएगी।
उद्देश्य: बेहतर शैक्षणिक माहौल
इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में शिक्षा का ऐसा वातावरण तैयार करना है जो स्वच्छ और सुरक्षित हो। विभाग का मानना है कि बेहतर स्वच्छता मानकों से न केवल बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि उनकी उपस्थिति भी बढ़ेगी और अंततः शिक्षा की गुणवत्ता में सकारात्मक बदलाव आएगा।
अपने ही जाल में अमेरिका? ईरान तनाव पर जेडी वेंस की चिंता
29 Apr, 2026 09:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन | ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी सरकार के भीतर एक बड़ा रणनीतिक संकट गहरा गया है। इस विवाद के केंद्र में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और पेंटागन के बीच बढ़ता अविश्वास है। वेंस ने आशंका जताई है कि रक्षा मंत्रालय हथियारों की वास्तविक कमी को लेकर सरकार को अंधेरे में रख रहा है।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की मुख्य चिंताएं
रिपोर्ट्स के अनुसार, जेडी वेंस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक गोपनीय बैठक में पेंटागन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं:
घटता जखीरा: सैन्य आकलनों से संकेत मिले हैं कि अमेरिका ने अपने मिसाइल इंटरसेप्टर और लंबी दूरी की घातक मिसाइलों का 50% से अधिक भंडार पहले ही खर्च कर दिया है।
वैश्विक साख पर खतरा: वेंस का मानना है कि यदि हथियारों का यही हाल रहा, तो ताइवान, दक्षिण कोरिया या यूरोप में किसी नए संकट की स्थिति में अमेरिका असहाय हो जाएगा।
पेंटागन बनाम हकीकत: जहाँ रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ अमेरिकी सैन्य क्षमता को 'मजबूत' बता रहे हैं, वहीं खुफिया रिपोर्टें इसके ठीक उलट इशारा कर रही हैं।
शांति प्रस्ताव पर अटका मामला, ईरान बोला—अभी और समय चाहिए
29 Apr, 2026 08:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। वेस्ट एशिया में युद्ध की आहट भले ही कुछ धीमी पड़ती नजर आ रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव अब भी चरम पर है। ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। तेहरान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि संशोधित शांति प्रस्ताव पेश करने से पहले उसे और अधिक समय की आवश्यकता है, क्योंकि इस पर अंतिम मुहर ईरान के सुप्रीम लीडर द्वारा लगाई जानी है। इस देरी ने कूटनीतिक समाधान की प्रक्रिया को फिलहाल सुस्त कर दिया है, हालांकि पर्दे के पीछे बातचीत का सिलसिला अब भी जारी है।
पाकिस्तान समेत अन्य मध्यस्थ देशों को उम्मीद थी कि ईरान जल्द ही नया प्रस्ताव साझा करेगा, लेकिन तेहरान ने आंतरिक विचार-विमर्श और रणनीतिक सुझावों का हवाला देते हुए मोहलत मांगी है। सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्री अब्बास अराघची रूस दौरे से लौटने के बाद वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। प्रस्ताव को स्वीकार्य बनाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की सुरक्षा और उनके साथ संपर्क की जटिलताओं के कारण प्रक्रिया में समय लग रहा है। इससे पहले ईरान के उस प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खारिज कर दिया था, जिसमें युद्ध समाप्ति के बाद परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा की शर्त रखी गई थी। अब तेहरान एक अधिक संतुलित और लचीला रुख अपनाने की कोशिश में जुटा है।
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कड़ा रुख अपनाते हुए दावा किया है कि ईरान वर्तमान में गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। अमेरिका फिलहाल सीधे सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक नाकेबंदी और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। अमेरिकी प्रशासन का लक्ष्य ईरान को परमाणु मुद्दे पर झुकने के लिए मजबूर करना है। हालांकि, ईरानी सेना ने स्पष्ट किया है कि वे मौजूदा हालात को शांतिपूर्ण नहीं मानते और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अपने संसाधनों को फिर से मजबूत कर रहे हैं। क्षेत्रीय स्तर पर भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने करीब 60 साल बाद तेल उत्पादक संगठन ओपेक से अलग होने का ऐलान कर वैश्विक बाजार को चौंका दिया है। वहीं, समुद्र में अमेरिकी मरीन कॉर्प्स द्वारा संदिग्ध जहाजों की तलाशी और इजरायल द्वारा लेबनान में हिज़्बुल्लाह की सुरंगों को नष्ट करने के दावों ने माहौल को और गरमा दिया है। एक तरफ शांति की कूटनीति चल रही है, तो दूसरी तरफ सैन्य और आर्थिक दबाव का खेल भी पूरी तीव्रता से जारी है।
आतंकवाद पर भारत का सख्त स्टैंड, Rajnath Singh का पाकिस्तान को संदेश
28 Apr, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। बिश्केक (किर्गिस्तान) में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद और वैश्विक सुरक्षा को लेकर बेहद आक्रामक और स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने पाकिस्तान जैसे देशों का नाम लिए बिना सीमा-पार आतंकवाद और इसे संरक्षण देने वाली ताकतों को कड़ा संदेश दिया।
यहाँ रक्षा मंत्री के संबोधन के प्रमुख बिंदु दिए गए हैं:
आतंकवाद पर "जीरो टॉलरेंस" और दोहरे मानदंडों का विरोध
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद किसी भी देश की संप्रभुता के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
सख्त रुख: उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर "दोहरे मानदंड" (Double Standards) स्वीकार्य नहीं हैं।
जवाबदेही: SCO को उन देशों के खिलाफ कड़े कदम उठाने चाहिए जो आतंकवादियों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण या सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर: उन्होंने इस ऑपरेशन का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी कि अब आतंकी ठिकाने सजा से बच नहीं पाएंगे। भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
मानवता के खिलाफ अपराध और 'तियानजिन घोषणा'
राजनाथ सिंह ने पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले को याद करते हुए इसे पूरी मानवता को झकझोर देने वाली घटना बताया।
उन्होंने 'तियानजिन घोषणा' का जिक्र किया, जो आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर "शून्य सहिष्णुता" (Zero Tolerance) की नीति का समर्थन करती है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद का कोई धर्म या राष्ट्रीयता नहीं होती और किसी भी शिकायत को निर्दोषों की हत्या का बहाना नहीं बनाया जा सकता।
बदलती वैश्विक व्यवस्था और गांधीवादी विचार
बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव और एकतरफावाद (Unilateralism) पर चिंता जताते हुए रक्षा मंत्री ने शांति का मार्ग सुझाया:
शांति की अपील: उन्होंने महात्मा गांधी के प्रसिद्ध कथन का हवाला दिया— "आंख के बदले आंख की सोच पूरी दुनिया को अंधा बना देती है।"
मानवीय दृष्टिकोण: उन्होंने कहा कि किसी भी संघर्ष या निर्णय का सबसे बुरा असर गरीब और जरूरतमंद लोगों पर पड़ता है, इसलिए शांति और आपसी सहमति ही एकमात्र रास्ता है।
SCO और भारत की प्रतिबद्धता
रक्षा मंत्री ने SCO के क्षेत्रीय आतंकवाद निरोधक ढांचे (RATS) की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत कट्टरपंथ, उग्रवाद और अलगाववाद को जड़ से खत्म करने के लिए संगठन के साथ पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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