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ट्रंप का बड़ा प्रोजेक्ट विवादों में, लिंकन पूल की हालत बिगड़ी
19 Jun, 2026 03:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का राजधानी वॉशिंगटन डीसी को खूबसूरत बनाने का प्रोजेक्ट फिलहाल मुश्किलों में घिरता नजर आ रहा है। करोड़ों डॉलर खर्च कर रेनोवेट किए गए ऐतिहासिक 'लिंकन मेमोरियल रिफ्लेक्टिंग पूल' में एक नई और शर्मनाक गड़बड़ी सामने आई है। पूल के तल (बॉटम) पर की गई बेहद महंगी नीली कोटिंग अब कई जगहों से उखड़कर पानी में तैरती दिखाई दे रही है, जिससे इस काम की क्वालिटी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पानी में तैरने लगी नीली कोटिंग
गुरुवार को नेशनल मॉल में मौजूद इस ऐतिहासिक पूल के अंदर नीले रंग की एक परत पानी के ऊपर तैरती देखी गई। यह अभी साफ नहीं है कि यह पेंट है या कोई केमिकल सीलेंट, लेकिन तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया और अमेरिकी मीडिया में इस प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार को लेकर बहस छिड़ गई है।
1.47 करोड़ डॉलर का प्रोजेक्ट और लगातार विफलता
बेहद प्रतिष्ठित इस पूल को नए सिरे से संवारने का आदेश अप्रैल में दिया गया था। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट की लागत 18 लाख डॉलर बताई गई थी, लेकिन बाद में यह बढ़कर लगभग 1.47 करोड़ डॉलर (करीब 1.32 अरब रुपये) तक पहुंच गई। कॉन्ट्रैक्ट के तहत पूल को खाली करके उसके तल को अमेरिकी झंडे के नीले रंग से रंगा गया था। लेकिन काम पूरा होने के कुछ ही दिनों बाद पहले तो पूल के पानी में हरी काई जमने लगी और अब यह महंगी कोटिंग भी उखड़ने लगी है।
विशेषज्ञों और कंपनी का क्या है कहना?
रेनोवेशन का काम करने वाली कंपनी 'अटलांटिक इंडस्ट्रियल कोटिंग' के मालिक एडी वुड ने सफाई में कहा कि सिर्फ तस्वीरों के आधार पर समस्या बताना मुश्किल है, लेकिन मेंटेनेंस के दौरान इसे ठीक कर दिया जाएगा। दूसरी तरफ, पूल इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ टिम आउरहान का कहना है कि सतह की खराब तैयारी, गलत तरीके से कोटिंग करने या मौसम के असर के कारण ऐसा हो सकता है। अगर यह बड़े पैमाने पर उखड़ रहा है, तो यह बेहद चिंताजनक है।
ओबामा बनाम ट्रंप: 100 साल पुराने पूल का इतिहास
लगभग 100 साल पुराना यह रिफ्लेक्टिंग पूल लंबे समय से पानी रिसने और काई जमने की समस्या से जूझ रहा है। इससे पहले 2012 में तत्कालीन प्रशासन ने भी करीब 3.4 करोड़ डॉलर खर्च कर 18 महीने तक इसका रेनोवेशन कराया था, लेकिन कुछ समय बाद वहां गंदा पानी और गंदगी मिलने से वह प्रोजेक्ट भी नाकाम रहा था। वर्तमान प्रशासन ने पिछले काम को नाकाम बताते हुए ही इस साल दोबारा रेनोवेशन शुरू कराया था।
तकनीक भी फेल, प्रशासन के लिए शर्मिंदगी
पूल के पानी को साफ रखने के लिए हाल ही में प्रशासन ने हाइड्रोजन पेरॉक्साइड और एडवांस्ड 'नैनोबबलर टेक्नोलॉजी' का भी इस्तेमाल किया था, लेकिन इसके बावजूद गुरुवार को पूल का पानी कई जगहों पर हरा ही नजर आया। कोटिंग उखड़ने और काई की इस नई समस्या ने प्रशासन को बैकफुट पर ला दिया है और इसे जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिका-ईरान वार्ता रद्द होने से कूटनीति को बड़ा झटका
19 Jun, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जिनेवा: अमेरिका और ईरान के बीच फ्रांस में हुए ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद आज स्विट्जरलैंड में होने वाली बेहद महत्वपूर्ण बैठक अचानक रद्द कर दी गई है। इस बैठक में समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा होनी थी, लेकिन लेबनान में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच भड़की ताजा हिंसा को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है।
बैठक रद्द होने की मुख्य वजह
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लेबनान में इजराइल के लगातार जारी सैन्य हमलों के कारण यह बैठक टालनी पड़ी। शुक्रवार को इजराइली हवाई हमलों में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई। वहीं दूसरी तरफ, हिजबुल्लाह के पलटवार में एक टैंक बटालियन कमांडर समेत 4 इजराइली सैनिक भी मारे गए हैं।
'पूरा लेबनान जलना चाहिए': इजराइली मंत्री का विवादित बयान
अपने सैनिकों की मौत से नाराज होकर इजराइल के दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गवीर ने बेहद तीखा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि "पूरा लेबनान जलना चाहिए।" बेन गवीर ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मांग की है कि हर एक इजराइली मां के आंसुओं के बदले अब एक हजार लेबनानी मांओं को रोना चाहिए।
बीते 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स
1. ईरान-अमेरिका पीस डील लागू: दोनों देशों के बीच जंग को पूरी तरह खत्म करने के लिए एक अंतरिम समझौते (MoU) पर दस्तखत हो चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय पैलेस में इस पर साइन किए थे।
2. स्विट्जरलैंड की बैठक टली: अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच पहली औपचारिक और तकनीकी बातचीत शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में होनी थी, जिसे अब स्थगित कर दिया गया है।
3. इजराइल का पीछे हटने से इनकार: अंतरराष्ट्रीय शांति समझौते के बावजूद इजराइली सेना (IDF) ने दक्षिणी लेबनान में अपनी तैनाती का नया नक्शा जारी कर साफ कर दिया है कि वे फिलहाल वहां से अपने सैनिक नहीं हटाएंगे।
4. होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापार तेज: शांति समझौते का बड़ा असर वैश्विक बाजार पर दिखने लगा है। समुद्री नाकेबंदी हटने के बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही तेज हो गई है और सऊदी अरब के तीन बड़े तेल टैंकर वहां से सुरक्षित गुजर चुके हैं।
5. युद्धविराम के बीच भी मौतें: पीस डील के अमल में आने के बाद भी जमीनी स्तर पर तनाव बरकरार है। साउथ लेबनान में हुए इजराइली हमलों में 3 और लोगों की मौत हुई है। मार्च से शुरू हुई इस जंग में अब तक 3,900 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा दावा
19 Jun, 2026 02:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक ऐतिहासिक समझौते के बाद पश्चिम एशिया में लंबे समय से चली आ रही समुद्री नाकेबंदी (ब्लॉकेड) आखिरकार खत्म हो गई है। अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों के रास्ते से अपनी पाबंदियां हटा ली हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा व्यापार की लाइफलाइन माना जाने वाला 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह खुल गया है।
अमेरिकी नौसेना ने हटाया ब्लॉकेड
ईरान के साथ समझौता होने के बाद, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक घोषणा की है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों पर लागू सभी नौसैनिक ब्लॉकेड ऑपरेशंस को तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। सेंटकॉम ने साफ किया कि अब अमेरिकी सेना ईरानी बंदरगाहों, अरब की खाड़ी या ओमान की खाड़ी से आने-जाने वाले किसी भी कमर्शियल जहाज को नहीं रोकेगी।
डोनाल्ड ट्रंप का तेवर: 'मेरी ताकत की कोई सीमा नहीं'
इस शांति समझौते के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में नजर आए। जब उनसे पूछा गया कि क्या इस युद्ध ने उन्हें यह सिखाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति होने के नाते उनकी शक्तियों की कोई सीमाएं हैं, तो ट्रंप ने दो टूक कहा, "मेरी शक्तियों की कोई सीमा नहीं है।" उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को सैन्य रूप से पूरी तरह हरा दिया है और यह समझौता ईरान के 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' जैसा ही है।
वैश्विक मंदी के डर से चुना समझौते का रास्ता
ट्रंप ने युद्ध को और लंबा न खींचने के पीछे की अपनी रणनीति का भी खुलासा किया। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि अगर वह चाहते तो ईरान पर कई हफ़्तों तक लगातार बमबारी करवा सकते थे, लेकिन ऐसा करने से होर्मुज जलडमरूमध्य कभी नहीं खुल पाता। कई महीनों तक दुनिया को तेल-गैस न मिलने के कारण पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था गंभीर मंदी में डूब सकती थी। इसी बड़े वैश्विक खतरे को देखते हुए उन्होंने बमबारी के बजाय समझौते का रास्ता चुनना बेहतर समझा।
रास्ता खुला, लेकिन अमेरिकी नौसेना की तैनाती रहेगी बरकरार
भले ही अमेरिका ने समुद्री नाकेबंदी को समाप्त कर दिया है, लेकिन उसने इस संवेदनशील इलाके से अपनी सेना को पीछे नहीं हटाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी युद्धपोत इस समुद्री क्षेत्र में लगातार तैनात रहेंगे। ये युद्धपोत इस बात की कड़ी निगरानी करेंगे कि ईरान समझौते की सभी शर्तों का पूरी तरह पालन कर रहा है या नहीं, ताकि भविष्य में किसी भी उल्लंघन से तुरंत निपटा जा सके।
फंड घोटाले में कार्रवाई तेज, IAS आरके सिंह को CBI ने तीन दिन की रिमांड पर लिया
19 Jun, 2026 01:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचकूला। नगर निगम बैंक धोखाधड़ी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा गिरफ्तार किए गए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आरके सिंह को शुक्रवार को सीबीआई की विशेष अदालत में प्रस्तुत किया गया। अदालती कार्यवाही के दौरान जांच एजेंसी ने इस हाई-प्रोफाइल घोटाले की तह तक जाने और गुप्त तथ्यों को उजागर करने के लिए आरोपी अधिकारी की कस्टडी मांगी। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें और कानूनी पक्षों को सुनने के बाद आईएएस आरके सिंह को तीन दिनों के लिए सीबीआई रिमांड पर सौंपने का आदेश जारी कर दिया।
वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों की गहन कड़ियों को खंगालेगी सीबीआई
विशेष रिमांड अवधि के दौरान जांच एजेंसी मुख्य रूप से घोटाले से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, विभिन्न बैंक खातों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की विस्तृत स्क्रूटनी करेगी। सीबीआई अधिकारियों का मानना है कि आरोपी अधिकारी से आमने-सामने पूछताछ करने पर कई ऐसे गुप्त दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिल सकते हैं, जो इस बैंकिंग धोखाधड़ी को पूरी तरह स्पष्ट कर देंगे। इसके अलावा, रिमांड के दौरान फंड ट्रांसफर के प्रामाणिक स्रोतों की भी कड़ाई से पड़ताल की जानी बाकी है।
करोड़ों रुपये के कॉर्पोरेशन फंड घोटाले में अन्य चेहरों की तलाश
जांच एजेंसी का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि पंचकूला नगर निगम के सरकारी खजाने से जुड़े इस करोड़ों रुपये के कथित घपले और बैंकिंग अनियमितताओं में पर्दे के पीछे से और कौन-कौन से रसूखदार लोग या अधिकारी शामिल थे। सीबीआई इस बात की बारीकी से जांच कर रही है कि अवैध रूप से ट्रांसफर की गई इस बड़ी धनराशि की पूरी श्रृंखला (मनी ट्रेल) कहां-कहां तक फैली हुई है। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में कई नए नाम सामने आने की प्रबल संभावना है, जिससे इस रैकेट का दायरा और बढ़ सकता है।
कथित लाभार्थियों की पहचान और आगामी बड़े खुलासे की तैयारी
गौरतलब है कि नगर निगम के फंड में हुई इस बड़ी हेराफेरी को लेकर काफी समय से जांच चल रही है और पूर्व में भी कई अहम वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा जब्त किए जा चुके हैं। अब तीन दिवसीय रिमांड के दौरान सीबीआई इस घोटाले के वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करने और उनके खातों में भेजी गई रकम को रिकवर करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। अधिकारियों का दावा है कि इस रिमांड अवधि के दौरान मिलने वाले इनपुट और आरोपी के बयानों के आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
भारत के लिए 40 टैंकर LPG और पेट्रोलियम उत्पाद रवाना
19 Jun, 2026 12:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: दुनिया के तमाम देशों, खासकर भारत के लिए पश्चिम एशिया से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद इस क्षेत्र में जारी युद्ध की आग शांत होने की उम्मीद बढ़ गई है। इसके साथ ही, वैश्विक ऊर्जा व्यापार की जीवनरेखा माने जाने वाले 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को दोबारा खोल दिया गया है, जिससे भारत के लिए तेल और गैस की आपूर्ति फिर से बहाल हो गई है।
खुल गया समुद्री मार्ग, भारत आ रहे 40 टैंकर
अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इस फैसले के बाद, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। भारत के लिए राहत की बात यह है कि एलपीजी, एलएनजी और कच्चे तेल से लदे 40 टैंकर भारत आने के लिए बिल्कुल तैयार हैं। इससे भारतीय घरों में रसोई गैस (एलपीजी) के संकट का खतरा टल गया है।
रसोई गैस की किल्लत होगी दूर
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण भारत का एलपीजी आयात घटकर सामान्य दिनों के मुकाबले सिर्फ 51 प्रतिशत रह गया था। ऐसे में अब मार्ग खुलने के बाद सबसे पहले एलपीजी और एलएनजी की सप्लाई को चरणबद्ध तरीके से सुधारा जाएगा। हालांकि, इस संकट के दौरान भारत ने अन्य वैकल्पिक स्रोतों से कच्चा तेल खरीदना जारी रखा था, जिससे देश में कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह ठप नहीं हुई थी।
खेती के लिए भी बड़ी राहत, उर्वरकों से लदे 16 जहाज रवाना
पश्चिम एशिया के इस संकट के कारण भारत के लिए उर्वरक (फर्टिलाइजर) लेकर आ रहे 16 जहाज भी होर्मुज जलडमरूमध्य में फंस गए थे। मार्ग खुलने के बाद अब ये जहाज भी भारत के लिए रवाना होने को तैयार हैं। इन जहाजों में यूरिया, डीएपी, अमोनिया और सल्फर की बड़ी खेप है, जो देश में खरीफ फसल के सीजन के लिए बेहद जरूरी है। इससे भारतीय कृषि और किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।
भारतीय अर्थव्यवस्था और रिफाइनरियों को लाभ
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग के सामान्य होने से समुद्री मालभाड़ा और बीमा की लागत कम होगी, जिससे भारतीय रिफाइनरियों को सस्ता कच्चा तेल आसानी से मिल सकेगा। इससे देश की आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार मिलेगी।
भविष्य के संकट से बचने के लिए विशेषज्ञों की सलाह
इस संकट के टलने के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भारत को भविष्य के लिए सतर्क किया है। उन्होंने कहा है कि भारत को ऐसे झटकों से बचने के लिए अपने 'रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार' (Strategic Petroleum Reserve) को और बड़ा करना होगा। साथ ही उन्होंने सलाह दी कि भारत को ऊर्जा और दवा (फार्मा) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए किसी एक देश या समुद्री मार्ग पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए।
न्यूयॉर्क में सनसनी: टाइम्स स्क्वायर पर दो गुटों में खूनी संघर्ष
19 Jun, 2026 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयार्क: दुनिया के सबसे व्यस्त और मशहूर पर्यटन स्थलों में से एक, न्यूयॉर्क का टाइम्स स्क्वायर गुरुवार दोपहर अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा। फायरिंग होते ही वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया और वे जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकानों की ओर भागने लगे।
विवाद के बाद चाकूबाजी और फिर चलीं गोलियां
यह पूरी घटना गुरुवार दोपहर करीब 3:40 बजे वेस्ट 45वीं स्ट्रीट और एट्थ एवेन्यू के पास हुई। पुलिस के मुताबिक, पहले दो गुटों के बीच किसी बात को लेकर बड़ा झगड़ा हुआ। विवाद इतना बढ़ा कि एक 26 साल के युवक पर चाकू से हमला कर दिया गया। इसके कुछ ही देर बाद वहां ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, 17 वर्षीय आरोपी हिरासत में
हादसे के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं, जिसमें न्यूयॉर्क पुलिस (NYPD) की गाड़ी के पास दो लोगों को सरेआम गोलियां चलाते हुए देखा जा सकता है। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए फायरिंग के आरोप में एक 17 साल के किशोर को हिरासत में लिया है और मौके से एक हथियार भी बरामद किया है। फिलहाल आरोपी पर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।
राहत की बात: किसी को नहीं लगी गोली
इस भयानक गोलीबारी के बीच राहत की बात यह रही कि किसी भी व्यक्ति को गोली नहीं लगी। हालांकि, चाकूबाजी में गंभीर रूप से घायल हुए 26 वर्षीय युवक को तुरंत बेलव्यू अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर काले कपड़े पहने एक अन्य बंदूकधारी शख्स की तलाश कर रही है।
परेड के चलते तैनात थी भारी पुलिस
यह वारदात उस समय हुई जब न्यूयॉर्क शहर में एनबीए टीम 'न्यूयॉर्क निक्स' की चैंपियनशिप परेड होने वाली थी। इस वजह से शहर में पहले से ही हजारों पुलिसकर्मी तैनात थे और टाइम्स स्क्वायर पर भारी संख्या में विदेशी पर्यटक और खेल प्रेमी मौजूद थे। घटना के तुरंत बाद पूरे इलाके को सील कर दिया गया और जांच एजेंसियों ने सबूत जुटाने शुरू कर दिए हैं।
राशन व्यवस्था पर प्रशासन की नजर, डिपो रिकॉर्ड के सत्यापन का अभियान आज से
19 Jun, 2026 11:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने पूरे राज्य में उचित मूल्य की दुकानों यानी राशन डिपो के विशेष भौतिक और दस्तावेजी सत्यापन के लिए एक बड़ा अभियान छेड़ने का निर्देश दिया है। मुख्यालय द्वारा जारी सख्त आदेशों के मुताबिक, सभी जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों, सहायक अधिकारियों और निरीक्षकों को आगामी चार दिनों के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों के सभी राशन डिपो के रिकॉर्ड की जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस सघन अभियान की शुरुआत शुक्रवार से होने जा रही है। वर्तमान में प्रदेश भर में लगभग 9081 राशन डिपो संचालित हैं, जिनमें से 9060 को पोर्टल पर मैप किया जा चुका है, जबकि अकेले मुख्य जिले में 656 डिपो के माध्यम से करीब 4.72 लाख लाभार्थी राशन प्राप्त कर रहे हैं।
डिपो की स्थिति का आकलन और फैमिली आईडी से मिलान
इस विशेष अभियान के तहत हर एक उचित मूल्य की दुकान की जमीनी सच्चाई और मौजूदा स्थिति का बारीकी से आकलन किया जाएगा। जांच टीमें यह सुनिश्चित करेंगी कि रिकॉर्ड में दर्ज डिपो वास्तव में चालू है, या फिर उसे रद्द, निलंबित या स्वेच्छा से वापस (सरेंडर) किया जा चुका है। यदि डिजिटल पोर्टल और मौके की स्थिति में कोई भी भिन्नता मिलती है, तो उसे तुरंत सुधारा जाएगा। इसके साथ ही, पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने डिपो संचालकों की परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) यानी फैमिली आईडी और उनके परिजनों के पूरे विवरण का मिलान सरकारी आंकड़ों से करने का फैसला किया है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
चार कड़े चरणों में पूरी होगी डेटा शुद्धिकरण की प्रक्रिया
प्रशासनिक स्तर पर इस पूरी कवायद को पारदर्शी बनाने के लिए चार चरणों वाली एक विशेष कार्यप्रणाली तैयार की गई है। सबसे पहले क्षेत्रीय खाद्य एवं आपूर्ति निरीक्षक (IFS) अपने इलाके के डिपो का मौके पर जाकर मुआयना करेंगे और अपनी रिपोर्ट सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी (AFSO) को सौंपेंगे। इसके बाद एएफएसओ उस रिपोर्ट की समीक्षा कर अपनी टिप्पणियों के साथ इसे जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) के पास भेजेंगे। जिला नियंत्रक द्वारा अंतिम जांच के बाद ही डेटा को स्वीकृत या अस्वीकृत किया जाएगा। स्वीकृत रिकॉर्ड को पूरी तरह शुद्ध मान लिया जाएगा, जबकि त्रुटि वाले मामलों को दोबारा जांच के लिए वापस भेज दिया जाएगा।
राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने की कवायद
शीर्ष अधिकारियों ने इस पूरे सत्यापन कार्य को शीर्ष प्राथमिकता पर रखते हुए तय समय सीमा के भीतर काम निपटाने की हिदायत दी है। विभाग का मुख्य उद्देश्य सरकारी पोर्टल पर दर्ज राशन डिपो की जानकारियों को शत-प्रतिशत सटीक, प्रमाणित और अद्यतन (अपडेट) करना है। सरकार का मानना है कि इस अभियान से जो प्रामाणिक आंकड़े प्राप्त होंगे, उनकी मदद से भविष्य में जनकल्याणकारी नीतियां बनाने, योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन और त्वरित प्रशासनिक फैसले लेने में बहुत मदद मिलेगी, जिससे राशन वितरण प्रणाली में कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकेगी।
अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता, व्यावहारिक कार्यान्वयन पर सबकी नजर
19 Jun, 2026 09:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वर्साय (फ्रांस): मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में लंबे समय से जारी भारी तनाव और संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर औपचारिक रूप से मुहर लग गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय पैलेस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एक रात्रि भोज (डिनर) के अवसर पर इस महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस कदम के बाद दोनों देशों के आधिकारिक सूत्रों और मीडिया पोर्टलों ने भी पुष्टि कर दी है कि समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है और अब इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन यानी जमीन पर उतारने का समय आ चुका है।
लेबनान संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य पर बनी सहमति
इस शांति समझौते के तहत स्विट्जरलैंड के जिनेवा में होने वाली औपचारिक बैठकें अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही जारी रहेंगी। इस बीच, दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और लेबनान के मोर्चे को लेकर भी बड़ी सहमति बनी है। समझौते के प्रावधानों के तहत ईरान तत्काल प्रभाव से होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोल देगा। इसके साथ ही, लेबनान सहित सभी युद्धग्रस्त मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयों और अभियानों को पूरी तरह से रोक दिया जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र में शांति का माहौल तैयार हो सके।
परमाणु कार्यक्रम पर रोक और 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण पैकेज
समझौते के सबसे महत्वपूर्ण सूत्रों के तहत ईरान ने इस बात को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि वह न तो परमाणु हथियार हासिल करेगा और न ही उनके विकास की दिशा में कोई कदम उठाएगा। इसके बदले में, अमेरिका ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की मंजूरी देने की बात कही है। इसके अतिरिक्त, युद्ध के कारण हुए नुकसान की भरपाई और देश के ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए ईरान को पुनर्निर्माण के तहत कम से कम 300 अरब डॉलर (लगभग 25 लाख करोड़ रुपये) का वित्तीय पैकेज मिलेगा।
प्रतिबंधों की समाप्ति और संप्रभुता का सम्मान
समझौते की रूपरेखा के अनुसार, जैसे ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित अंतिम नियम और शर्तें पूरी हो जाएंगी, अमेरिका तेहरान (ईरान) पर लगाए गए अपने सभी एकतरफा प्रतिबंधों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रतिबंधों को भी पूरी तरह हटा लेगा। इसके अलावा, दोनों देश एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता, सीमाओं और संप्रभुता का पूरी तरह सम्मान करने तथा किसी भी देश के आंतरिक मामलों में दखल न देने के लिए प्रतिबद्ध हुए हैं। फिलहाल, आगामी 60 दिनों की इस लंबी वार्ता अवधि के दौरान दोनों पक्ष अंतिम समझौते को पूरी तरह लागू करने पर काम करेंगे, जिसे आवश्यकता पड़ने पर आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
ईरान-अमेरिका समझौते पर खामेनेई का यू-टर्न वाला बयान चर्चा में
19 Jun, 2026 08:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुआ शांति समझौता इस समय वैश्विक स्तर पर सुर्खियों में बना हुआ है। इस ऐतिहासिक पीस डील पर अब ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई की बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है। खामेनेई का दावा है कि इस समझौते के लिए ईरान से ज्यादा अमेरिका मजबूर और बेचैन था। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस डील को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रभाव और दबाव सहित हर मुमकिन कोशिश की।
खामेनेई ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा करते हुए दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने की पुष्टि की। उन्होंने साफ किया कि भले ही ईरान ने इसमें भागीदारी की, लेकिन इसे अमलीजामा पहनाने के लिए सबसे ज्यादा छटपटाहट अमेरिका की तरफ से देखी गई।
सर्वोच्च नेता की व्यक्तिगत राय और चेतावनी
सर्वोच्च नेता ने यह भी खुलासा किया कि इस समझौते को लेकर उनके निजी विचार अलग थे। उन्होंने कहा, "सैद्धांतिक रूप से मेरी सोच इस डील के पक्ष में नहीं थी, लेकिन मैंने ईरान के राष्ट्रपति को इस शर्त पर मंजूरी दी कि वे देश के हितों और 'प्रतिरोध मोर्चे' (एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस) के अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेंगे।" इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका को दोटूक चेतावनी दी कि यदि भविष्य में उसने अपनी सीमाओं से बाहर जाकर अनुचित मांगें रखने की कोशिश की, तो ईरान उसके आगे कतई नहीं झुकेगा। खामेनेई ने देश की जनता से धैर्य रखने और समझौते की शर्तों के लागू होने का इंतजार करने की अपील की है।
शांति समझौते की मुख्य शर्तें
इस समझौते में पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने के लिए कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनी है:
सैन्य गतिविधियों पर रोक: लेबनान सहित सभी मोर्चों पर जारी सैन्य कार्रवाइयों को हमेशा के लिए समाप्त किया जाएगा।
समुद्री व्यापार की बहाली: तनाव के दौर से पहले जिस तरह समुद्री जहाजों की आवाजाही होती थी, उसे फिर से उसी स्तर पर बहाल किया जाएगा।
नौसैनिक प्रतिबंधों का खात्मा: अमेरिका अगले 30 दिनों के भीतर ईरान पर लगाए गए अपने सभी नौसैनिक प्रतिबंधों को हटा लेगा।
सुरक्षित आवाजाही का भरोसा: ईरान ने वादा किया है कि वह अगले 60 दिनों तक वाणिज्यिक (कमर्शियल) जहाजों की सुरक्षित और मुफ्त आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए पूरा सहयोग करेगा।
60 दिनों का समय और अंतिम निर्णय
इस शुरुआती समझौते के बाद अब ईरान और अमेरिका के पास 60 दिनों का समय है। इस अवधि के दौरान दोनों पक्षों के बीच अंतिम समझौते की रूपरेखा और शर्तों पर गहन बातचीत होगी। यदि यह वार्ता सकारात्मक रहती है, तो एक पूर्ण और स्थाई शांति समझौते पर मुहर लग जाएगी। माना जा रहा है कि अगर यह डील पूरी तरह सफल रही, तो पश्चिम एशिया में लंबे समय से चला आ रहा तनाव काफी हद तक शांत हो सकता है।
हरियाणा में येलो अलर्ट जारी, 19-20 जून को आंधी-बारिश से मिल सकती है राहत
19 Jun, 2026 07:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार। हरियाणा में लगातार दूसरे पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के चलते वीरवार को राज्य के कई हिस्सों में झमाझम बारिश दर्ज की गई, जबकि सिरसा जिले में वर्षा के साथ ओले भी गिरे। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 19 और 20 जून को भी प्री-मानसून की सक्रियता के कारण तेज आंधी के साथ पानी गिरने की संभावना बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 21 जून को मौसम कुछ समय के लिए साफ रहेगा, लेकिन इसके तुरंत बाद 22 और 23 जून को दोबारा मेघ बरसेंगे। इस मौसमी उतार-चढ़ाव के बीच जुलाई के प्रथम सप्ताह में हरियाणा में मानसून के विधिवत प्रवेश की उम्मीद जताई गई है, जिसे देखते हुए विभाग ने 22 जून तक के लिए येलो अलर्ट जारी कर 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी है।
प्री-मानसून की बौछारों से बदला तापमान का मिजाज
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के वायुमंडल में लगातार हो रहे बदलावों और प्री-मानसून गतिविधियों के कारण पूरे क्षेत्र के दिन और रात के तापमान में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। हालिया विक्षोभ के असर से राज्य के उत्तरी जिलों जैसे पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र के साथ-साथ पश्चिमी और दक्षिणी अंचलों के सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, झज्जर, रोहतक और गुरुग्राम में धूलभरी आंधी के साथ मध्यम दर्जे की बारिश हुई है। इस अचानक आए बदलाव से लोगों को उमस भरी गर्मी से काफी राहत मिली है।
आगामी 21 जून की रात से फिर सक्रिय होगा नया सिस्टम
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि वर्तमान मौसमी सिस्टम के धीमा पड़ने के बाद 21 जून की रात से एक और नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में दस्तक देगा। इसके प्रभाव से 22 और 23 जून को एक बार फिर मौसम करवट लेगा और राज्य के कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ प्री-मानसून की बारिश का नया दौर शुरू होगा। हालिया आंकड़ों की बात करें तो चरखी दादरी में सबसे ज्यादा 8.5 मिलीमीटर, हिसार के आदमपुर में 7.5 मिलीमीटर, सिरसा में 3 मिलीमीटर और सोनीपत में 0.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है।
तापमान के आंकड़े और आगामी दिनों का पूर्वानुमान
बारिश और बादलों की आवाजाही के बीच वीरवार को रोहतक में दिन का अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा अंबाला में पारा 40.6 डिग्री, मेवात में 40.4 डिग्री, सिरसा में 39.4 डिग्री, हिसार में 39.1 डिग्री और करनाल में 38.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि 22 और 23 जून को होने वाली संभावित बारिश के बाद 24 जून से पूरे सूबे में मौसम पूरी तरह साफ और शुष्क हो जाएगा, जिसके बाद तापमान में एक बार फिर बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
11 दिनों से ठप जनजीवन, PoJK में कर्फ्यू जैसे हालात ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें
18 Jun, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) एक बार फिर बड़े पैमाने पर नागरिक असंतोष और उग्र विरोध प्रदर्शनों की आग में झुलस रहा है। रावलाकोट सहित क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण संभागों में पिछले 11 दिनों से अघोषित कर्फ्यू जैसे कड़े प्रतिबंध लागू हैं, जबकि बीते 10 दिनों से मुकम्मल बंद और चक्का जाम के कारण पूरे इलाके की रफ्तार थम गई है। नागरिक अधिकारों के लिए लड़ रहे संगठन 'जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JKJAAC) का कहना है कि स्थानीय अवाम अपनी बुनियादी जरूरतों और हकों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हुई है, लेकिन पाकिस्तानी हुकूमत और स्थानीय प्रशासन इस शांतिपूर्ण जन-आंदोलन को बलपूर्वक कुचलने के लिए लगातार दमनकारी नीतियां अपना रहा है।
आखिर रावलाकोट में क्यों सुलग रहा है जनता का गुस्सा?
एक्शन कमेटी के स्थानीय पदाधिकारियों के मुताबिक, रावलाकोट के अलग-अलग रणनीतिक चौराहों और प्रवेश द्वारों पर प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण धरने अनवरत जारी हैं। इस आंदोलन को व्यापारिक संगठनों, युवाओं और आम नागरिकों का अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है। प्रदर्शनकारी बुनियादी सामाजिक-आर्थिक अधिकारों, बढ़ती महंगाई और करों (टैक्स) के बोझ के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा लगाए गए कड़े पहरे, मोबाइल इंटरनेट बंदी और लगातार बढ़ते दबाव के बावजूद यह जमीनी आंदोलन कमजोर होने के बजाय दिन-ब-दिन और मजबूत होता जा रहा है।
सुरक्षा बलों पर काफिलों को रोकने और गिरफ्तारियों के गंभीर आरोप
आंदोलन की अगुवाई कर रहे नेताओं ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों पर संगीन आरोप मढ़े हैं। उनका दावा है कि नीलम घाटी जैसे सुदूर इलाकों से रावलाकोट की तरफ आ रहे प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण काफिलों और गाड़ियों को सुरक्षाबलों ने जबरन रोकने की कोशिश की। हालांकि, इस तनातनी में अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। संगठन ने आरोप लगाया है कि प्रमुख कार्यकर्ताओं की अवैध गिरफ्तारियों, धमकियों और डराने-धमकाने के हथकंडों के जरिए आंदोलन को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इसके विपरीत धरना स्थलों पर महिलाओं और बुजुर्गों समेत लोगों का हुजूम लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
दवाइयों और राशन की सप्लाई रोकी, आम जनता में त्राहि-त्राहि
स्थानीय सूत्रों और प्रदर्शनकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, सोनू क्षेत्र के निकटवर्ती रास्तों पर प्रशासन ने रात के अंधेरे में भारी बैरिकेडिंग कर पूरी आवाजाही को ठप कर दिया है। कमेटी का आरोप है कि जीवन रक्षक दवाइयां, बच्चों के दूध, राशन और अन्य अत्यंत आवश्यक सामग्रियों को लेकर आ रहे ट्रकों और निजी वाहनों को भी जबरन सीमा पर ही रोक दिया गया है।
इस अड़ियल रवैये के कारण क्षेत्र में आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत हो गई है और आम नागरिकों को बेहद गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। लगातार जारी हड़ताल के चलते सभी छोटे-बड़े बाजार पूरी तरह बंद हैं, व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर ताले लटके हैं, मुख्य राजमार्ग अवरुद्ध हैं और सार्वजनिक परिवहन के साधन नदारद हैं।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा संघर्ष
एक्शन कमेटी (JKJAAC) ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का ध्यान आकर्षित करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उनका यह प्रतिरोध पूरी तरह से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक हुकूमत जनता की जायज मांगों को मान नहीं लेती, तब तक यह बंद और धरना खत्म नहीं होगा।
दूसरी ओर, इस गंभीर मानवीय संकट और पाबंदियों ने वैश्विक पटल पर पाकिस्तानी प्रशासन के दावों की पोल खोल कर रख दी है। फिलहाल, रावलाकोट और उसके आसपास के पूरे बेल्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और आने वाले दिनों में यह टकराव और गहराने के आसार नजर आ रहे हैं।
पाकिस्तान में धार्मिक स्थल से जुड़े दंपति की हत्या, इलाके में तनाव
18 Jun, 2026 04:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पेशावर। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से एक बेहद दर्दनाक और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। यहां के मरदान जिले में स्थित एक गुरुद्वारे के भीतर घुसकर अज्ञात बंदूकधारियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें वहां सेवा दे रहे एक सिख सेवादार दंपति की बेरहमी से हत्या कर दी गई। पुलिस द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस कायराना हमले में जगन्नाथ और उनकी पत्नी असमावंती ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। यह सनसनीखेज वारदात प्रांतीय राजधानी पेशावर से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित मरदान के बाबू मोहल्ला इलाके में अंजाम दी गई।
गुरुद्वारा परिसर में घुसकर बरसाईं गोलियां
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, हमलावर पूरी तैयारी के साथ गुरुद्वारा परिसर के भीतर दाखिल हुए थे। उन्होंने वहां मौजूद सेवादार दंपति को निशाना बनाते हुए उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद आरोपी हथियार लहराते हुए मौके से फरार हो गए। पवित्र धार्मिक स्थल के भीतर हुई इस दोहरे हत्याकांड की वारदात से पूरे इलाके में भारी दहशत का माहौल है और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
जांच में जुटी पुलिस, हमलावरों की तलाश तेज
मरदान के जिला पुलिस अधिकारी (DPO) ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि फिलहाल इस जघन्य हत्याकांड के पीछे के असली कारणों और मकसदों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर पूरे इलाके की नाकेबंदी कर दी है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि मामले की तफ्तीश सभी संभावित पहलुओं (Target Killing या आपसी रंजिश) को ध्यान में रखकर की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर फिर उठे गंभीर सवाल
गुरुद्वारे के भीतर हुई इस टारगेट किलिंग ने पाकिस्तान में रह रहे सिख समुदाय और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के बीच एक बार फिर असुरक्षा की भावना और गहरी चिंता पैदा कर दी है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पाकिस्तान में सिखों, हिंदुओं और अन्य ईसाई अल्पसंख्यकों पर जानलेवा हमलों और उत्पीड़न की घटनाएं लगातार सुर्खियां बनती रही हैं। भू-राजनीतिक और मानवाधिकार विशेषज्ञों का मानना है कि पवित्र धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर किए जाने वाले ऐसे हमले न केवल वहां की लचर कानून-व्यवस्था को दर्शाते हैं, बल्कि अल्पसंख्यकों को खौफ के साए में जीने पर मजबूर करते हैं। अब देखना यह होगा कि वैश्विक दबाव के बीच पाकिस्तानी प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कार्रवाई करता है।
अमेरिकी झंडे के 13 स्ट्राइप्स और 50 स्टार्स का ऐतिहासिक महत्व
18 Jun, 2026 03:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। क्या आप जानते हैं कि दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका का झंडा हमेशा से ऐसा नहीं था जैसा आज दिखाई देता है? इसके 'ओल्ड ग्लोरी' या 'तारे और पट्टियां' (Stars and Stripes) कहे जाने वाले ध्वज में मौजूद 50 सितारे और 13 लाल-सफेद धारियां महज कोई सजावट नहीं हैं। यह झंडा अपने भीतर अमेरिका की आजादी, 13 छोटी कॉलोनियों के एकजुट होने और फिर सुपरपावर बनने तक का पूरा इतिहास समेटे हुए है।
रंगों और प्रतीकों का गहरा दार्शनिक अर्थ
अमेरिकी झंडे को ध्यान से देखें तो इसमें तीन मुख्य चीजें नजर आती हैं—13 लाल-सफेद पट्टियां, ऊपर बाईं ओर एक नीला बॉक्स (जिसे कैंटन कहते हैं) और उसमें सजे 50 सफेद सितारे। इन सभी का एक विशेष महत्व है:
13 धारियां: यह उन 13 मूल ब्रिटिश कॉलोनियों की याद दिलाती हैं जिन्होंने मिलकर अमेरिका की नींव रखी थी।
50 तारे: यह आज के समय में अमेरिका के कुल 50 मजबूत राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
रंगों का संदेश: झंडे का लाल रंग बहादुरी, शौर्य और आजादी के संघर्ष में बहे खून का प्रतीक है। सफेद रंग शुचिता, शांति और ईमानदारी को दर्शाता है, जबकि नीला रंग न्याय, सतर्कता और अटूट दृढ़ता का संदेश देता है।
13 धारियों का इतिहास: क्यों ये कभी नहीं बदलतीं?
झंडे की सबसे अनोखी बात यह है कि समय के साथ इसमें राज्यों की संख्या तो बदली, लेकिन इसकी धारियां हमेशा 13 ही रहीं। साल 1776 में ब्रिटेन की गुलामी से आजाद होने से पहले अमेरिका 13 ब्रिटिश कॉलोनियों में बंटा हुआ था। यही कॉलोनियां बाद में अमेरिका के पहले 13 राज्य बने, जिनमें न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, पेंसिल्वेनिया, वर्जीनिया और जॉर्जिया जैसे नाम शामिल थे।
इनकी याद को अक्षुण्ण रखने के लिए 14 जून 1777 को अमेरिकी कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर 13 धारियों वाले झंडे को अपनाया, जिसका शुरुआती डिजाइन फ्रांसिस हॉपकिंसन ने तैयार किया था। इससे पहले 1775 में 'ग्रैंड यूनियन फ्लैग' इस्तेमाल होता था, जिसमें इन धारियों के साथ कोने में ब्रिटेन का 'यूनियन जैक' बना हुआ था, जिसे पूर्ण आजादी के बाद हटा दिया गया।
13 से 50 तारों तक का ऐतिहासिक सफर
जैसे-जैसे अमेरिकी संघ का विस्तार हुआ और नए इलाके इसमें जुड़ते गए, वैसे-वैसे झंडे में सितारों की संख्या बढ़ती चली गई:
1777: शुरुआती दौर में झंडे में केवल 13 तारे थे।
1795: वर्मोंट और केंटकी के शामिल होने पर यह संख्या 15 हुई।
1818: नए राज्यों के आने से झंडे में 20 तारे जगमगाने लगे।
1912: न्यू मैक्सिको और एरिजोना के जुड़ने के बाद झंडे में 48 तारे हो गए।
1959-1960: अलास्का और हवाई को राज्य का दर्जा मिलने के बाद साल 1960 में इसमें 50 तारे शामिल किए गए। पिछले 66 सालों से अमेरिका का यही स्वरूप बरकरार है और यह अमेरिकी इतिहास में सबसे लंबे समय तक चलने वाला फ्लैग डिजाइन है।
भविष्य में 51वां राज्य बना तो क्या होगा?
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या भविष्य में अमेरिका में कोई नया राज्य शामिल होने पर झंडा फिर बदलेगा? इसका जवाब है—हां। नियमों के मुताबिक, यदि आने वाले समय में कोई नया सूबा (जैसे प्यूर्टो रिको या वॉशिंगटन डीसी) अमेरिका का 51वां राज्य बनता है, तो झंडे में 51 सितारे लगा दिए जाएंगे। अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी मिलते ही नया डिजाइन आधिकारिक हो जाएगा। हालांकि, तब भी उसकी 13 धारियों को छुआ नहीं जाएगा क्योंकि वे अमेरिका की ऐतिहासिक जड़ों का प्रतीक हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इतिहास रचने वाला यह झंडा धरती तक ही सीमित नहीं है, बल्कि 'अपोलो मिशन' के दौरान अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री इसे चांद की सतह पर भी गर्व से फहरा चुके हैं।
झज्जर हत्याकांड में एक और गिरफ्तारी, चौथा आरोपी पहुंचा सलाखों के पीछे
18 Jun, 2026 02:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
झज्जर। डीघल गांव के बहुचर्चित जितेंद्र हत्याकांड में मुस्तैद पुलिस ने एक और बड़ी सफलता हासिल करते हुए गांगटान गांव के रहने वाले अमित नाम के आरोपी को दबोच लिया है। गिरफ्तारी के फौरन बाद पुलिस टीम ने उसे स्थानीय अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से माननीय न्यायाधीश ने उसे न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया। गौरतलब है कि इस सनसनीखेज हत्या के मामले में झज्जर पुलिस द्वारा एक विधि विरुद्ध बालक (नाबालिग) सहित तीन मुख्य आरोपियों को पहले ही कानून के शिकंजे में लिया जा चुका है। पुलिस कमिश्नर डॉ. राजश्री सिंह के कुशल मार्गदर्शन में काम कर रही सीआईए झज्जर की विशेष टीम लगातार तकनीकी साक्ष्यों, जमीनी मुखबिरों और आधुनिक वैज्ञानिक प्रणालियों का बारीकी से विश्लेषण करके बाकी बचे अपराधियों की धरपकड़ में जुटी हुई थी।
सीआईए टीम की लगातार छानबीन और चौथी गिरफ्तारी
इसी सघन तलाशी अभियान और पुख्ता वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर सीआईए प्रभारी निरीक्षक कर्मवीर फोगाट के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने सटीक रणनीति अपनाकर गांगटान निवासी अमित को उसके संभावित ठिकाने से गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की। इस नई गिरफ्तारी के साथ ही जितेंद्र हत्याकांड में सलाखों के पीछे पहुंचने वाले कुल आरोपियों की संख्या अब बढ़कर चार हो गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस वारदात को अंजाम देने के बाद मुख्य आरोपी अपनी पहचान छिपाकर और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए सुदूर राज्यों में भाग गए थे, जिन्हें पूर्व में झज्जर पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से ढूंढ निकाला था।
वारदात के बाद मुंबई भागे थे आरोपी, पुलिस ने किया भंडाफोड़
हत्याकांड को अंजाम देने के बाद सभी नामजद आरोपी कानून की गिरफ्त से बचने के लिए अलग-अलग ठिकानों पर छिपते फिर रहे थे, परंतु पुलिस की विशेष विंग द्वारा की जा रही चौबीसों घंटे की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, कॉल डिटेल एनालिसिस (सीडीआर) और त्वरित जमीनी इनपुट के कारण उनका भागना ज्यादा दिनों तक सफल नहीं हो सका। मुंबई से हुई उन शुरुआती तीन गिरफ्तारियों के बाद से ही पुलिस लगातार इस साजिश में शामिल अन्य मददगारों की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही थी, जिसमें अब गांगटान के अमित की गिरफ्तारी के रूप में जांच टीम को एक बेहद मजबूत कड़ी हाथ लगी है।
अदालती प्रक्रिया और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई
इस चौथे आरोपी अमित की गिरफ्तारी से न केवल हत्या के इस संगीन मुकदमे की फाइल और पुख्ता हुई है, बल्कि वारदात के पीछे की पूरी साजिश का पर्दाफाश करने में भी मदद मिली है। सीआईए टीम ने आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं और पूछताछ की प्रक्रिया पूरी करने के उपरांत आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में साक्ष्यों को पूरी मजबूती के साथ अदालत में पेश किया जा रहा है ताकि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।
रक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम: 6 कंपनियों को मिला मल्टी-बिलियन डील कॉन्ट्रैक्ट
18 Jun, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: पश्चिम एशिया में ईरान के साथ एक ऐतिहासिक 14 सूत्रीय शांति समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद, अमेरिका ने अपनी सैन्य और रणनीतिक शक्ति को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी वायुसेना (USAF) ने अपने बेड़े को अत्याधुनिक बनाने के लिए लगभग 1,000 सेमी-ऑटोनॉमस कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (मानवरहित लड़ाकू विमान जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से संचालित होते हैं) तैनात करने की औपचारिक तैयारी शुरू कर दी है।
ये मानवरहित विमान पारंपरिक फाइटर जेट्स (जैसे F-35 या नैक्स्ट जनरेशन विमान) के साथ एक डिजिटल 'कवच' या विंगमैन के रूप में उड़ान भरेंगे। इन्हें आधुनिक एआई तकनीक और 'मिशन ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर' से लैस किया जाएगा, ताकि वे बिना किसी मानवीय चूक के दुनिया के सबसे खतरनाक युद्ध क्षेत्रों में भी जासूसी और सीधे हमलों को अंजाम दे सकें।
जनरल एटॉमिक्स और एंडुरिल को मिले मुख्य कॉन्ट्रैक्ट
अमेरिकी वायुसेना ने इस महत्वाकांक्षी सहयोगी लड़ाकू विमान (Collaborative Combat Aircraft - CCA) प्रोग्राम के पहले चरण के उत्पादन के लिए दो दिग्गज कंपनियों को शॉर्टलिस्ट कर कॉन्ट्रैक्ट सौंपे हैं:
जनरल एटॉमिक्स: यह कंपनी FQ-42A लड़ाकू विमान विकसित कर रही है।
एंडुरिल (Anduril): यह कंपनी FQ-44A लड़ाकू विमान का निर्माण करेगी।
अमेरिकी वायुसेना के चीफ जनरल केन विल्सबाख ने इस तकनीक की तारीफ करते हुए कहा कि भविष्य के युद्धों में मानव और मशीन की यह डिजिटल साझेदारी बेहद निर्णायक साबित होगी। खास बात यह है कि दोनों ही कंपनियों ने तय समय सीमा से चार महीने पहले ही वायुसेना की कूटनीतिक और तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा कर लिया है।
दिग्गज कंपनियों को मिला ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर का जिम्मा
अमेरिकी वायुसेना इस प्रोजेक्ट को लेकर कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल विमान के ढांचे पर ही नहीं, बल्कि उसके 'दिमाग' यानी मिशन ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर को अचूक बनाने के लिए दुनिया की छह सबसे बड़ी रक्षा और टेक कंपनियों को शामिल किया गया है।
इन कंपनियों में एंडुरिल, जनरल एटॉमिक्स, लॉकहीड मार्टिन, नॉर्थरोप ग्रुम्मन, आरटीएक्स कॉलिन्स एयरोस्पेस और शील्ड एआई शामिल हैं। वायुसेना सचिव ट्रॉय मिंक के अनुसार, इस मल्टी-वेंडर मॉडल (कई कंपनियों को एक साथ काम सौंपना) से सॉफ्टवेयर डिलीवरी की गति तेज होगी और नई तकनीकों को बिना किसी देरी के तुरंत एयरक्राफ्ट में अपडेट किया जा सकेगा।
पारंपरिक रक्षा प्रणालियों से तेज विकास: 15 महीनों में टेस्ट से प्रोडक्शन
इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे हैरान करने वाली बात इसकी रफ्तार है। जनरल एटॉमिक्स के मुताबिक, उनके YFQ-42A प्रोटोटाइप ने अगस्त 2025 में अपनी पहली उड़ान भरी थी और इसके ठीक 15 महीनों के भीतर (यानी 2026 के अंत तक) यह प्रोजेक्ट कड़े परीक्षणों को पार कर उत्पादन (प्रॉडक्शन) चरण तक पहुंच चुका है। इन विमानों को मॉड्यूलर डिजाइन में तैयार किया गया है, यानी जरूरत पड़ने पर युद्ध के मैदान में ही इनके हथियारों और सेंसर को मिशन के हिसाब से बदला जा सकता है।
एंडुरिल के सीईओ ब्रायन शिम्फ ने कहा कि यह प्रोग्राम पारंपरिक सुस्त रक्षा खरीद प्रणाली को तोड़कर आधुनिक और तेज विकास मॉडल का एक नया वैश्विक उदाहरण पेश करता है। अमेरिकी वायुसेना का प्रारंभिक लक्ष्य इस दशक के अंत तक (2030 तक) 150 से अधिक कॉम्बैट-रेडी (युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार) विमानों को तैनात करना है, जिसे आगे चलकर बढ़ाकर 1,000 किया जाएगा।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
