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मुठभेड़ में घायल आरोपी गिरफ्तार, अस्पताल में परिजनों का हंगामा
27 Apr, 2026 12:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
घरौंडा (करनाल): सूरज हत्याकांड मामले में सीआईए-2 (CIA-2) की टीम और बदमाशों के बीच देर रात फुरलक-उपली लिंक रोड पर मुठभेड़ हो गई। इस गोलीबारी में हत्याकांड का आरोपी गोविंदा पैर में गोली लगने से घायल हो गया, जिसे पुलिस ने हिरासत में लेकर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया है। घटना के बाद अस्पताल में भारी हंगामा हुआ और परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
देर रात हुई मुठभेड़ का घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, रविवार रात करीब 1:00 बजे सीआईए-2 की टीम को सूचना मिली थी कि आरोपी गोविंदा फुरलक क्षेत्र के पास मौजूद है।
फायरिंग: जब पुलिस टीम ने बाइक सवार गोविंदा को रुकने का इशारा किया, तो उसने पुलिस पर गोलियां चला दीं। एक गोली पुलिस वाहन के शीशे पर भी लगी।
जवाबी कार्रवाई: आत्मरक्षा में पुलिस ने भी छह राउंड फायरिंग की, जिसमें से एक गोली गोविंदा के पैर में लगी और वह घायल होकर गिर पड़ा।
अस्पताल में हंगामा और 'फर्जी एनकाउंटर' के आरोप
मुठभेड़ की खबर फैलते ही रात करीब 1:30 बजे बड़ी संख्या में दलित समाज के लोग और समाजसेवी अस्पताल पहुंच गए।
समर्पण का दावा: समाज के प्रतिनिधि अमृत एडवोकेट और अन्य लोगों ने पुलिस के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि उन्होंने पुलिस के कहे अनुसार दोपहर 11:00 बजे ही गोविंदा को मधुबन थाने में आत्मसमर्पण (Surrender) करवा दिया था।
प्रशासनिक जवाब: परिजनों का सवाल है कि जब आरोपी पहले से पुलिस की हिरासत में था, तो रात को मुठभेड़ कैसे हुई? लोगों ने इसे 'फर्जी एनकाउंटर' करार देते हुए अस्पताल में जमकर नारेबाजी की।
भारी पुलिस बल तैनात, स्थिति तनावपूर्ण
तनाव को देखते हुए घरौंडा के डीएसपी मनोज कुमार और डीएसपी राजीव मौके पर पहुंचे, लेकिन प्रदर्शनकारी शांत नहीं हुए। स्थिति बिगड़ते देख एसपी नरेंद्र बिजारनियां ने अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया।
क्रांतिमान पार्क बना छात्र आंदोलन का केंद्र, महापंचायत में उठेंगे मुद्दे
27 Apr, 2026 12:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार: हरियाणा के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर सोमवार को हिसार के क्रांतिमान पार्क में 'छात्र हित महापंचायत' का आयोजन किया गया। विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा बुलाई गई इस महापंचायत में न केवल छात्र नेता, बल्कि खाप प्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के सदस्य भी अपनी आवाज बुलंद करने पहुंचे हैं।
दमन के खिलाफ एकजुट हुए छात्र संगठन
इनसो (INSO) के प्रदेशाध्यक्ष दीपक मलिक ने महापंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन पूरी तरह से गैर-राजनीतिक है और इसका एकमात्र उद्देश्य छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की आवाज को तानाशाही पूर्ण तरीके से दबाया जा रहा है।
प्रशासन और पुलिस पर गंभीर आरोप
महापंचायत के दौरान छात्र नेताओं ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठाए:
गन पॉइंट पर गिरफ्तारी: दीपक मलिक ने आरोप लगाया कि जीजेयू (GJU) प्रकरण के बाद छात्रों को इस तरह गिरफ्तार किया गया जैसे वे कोई बड़े अपराधी हों। उन्होंने दावा किया कि छह छात्रों को रात के समय गन पॉइंट पर उठाया गया, जिनमें से पांच का नाम तो एफआईआर (FIR) में भी नहीं था।
दहशत का माहौल: आरोप है कि पुलिस ने केवल दहशत पैदा करने के लिए प्रतिष्ठित व्यक्तियों के घरों में पिस्तौल के साथ प्रवेश किया, जबकि शांतिपूर्ण संवाद की अनुमति मांगने वालों पर संगीन धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए।
विश्वविद्यालयों के 'भगवाकरण' पर तीखा प्रहार
महापंचायत में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हालिया घटनाक्रम का भी जिक्र किया गया। छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया:
पक्षपातपूर्ण रवैया: वक्ताओं ने कहा कि जहाँ एक तरफ लोकतांत्रिक संवाद करने वाले छात्रों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष से जुड़े संगठनों के प्रदर्शनकारियों का कुलपति खुद स्वागत करते हैं।
नियुक्ति पर सवाल: छात्र संगठनों ने कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि आज विश्वविद्यालयों में 'शिक्षाविद' होने के बजाय किसी विशेष विचारधारा (RSS) से जुड़ा होना कुलपति बनने की योग्यता बन गई है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ते 'भगवाकरण' के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया।
कोलंबिया में यात्री बस में आतंकियों ने किया धमाका, 13 की मौत, 38 घायल
27 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बोगोटा। कोलंबिया के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित काउका क्षेत्र में एक यात्री बस को निशाना बनाकर किए गए भीषण बम धमाके में कम से कम 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। जबकि 38 अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनमें 5 बच्चे भी शामिल हैं। धमाका उस समय हुआ जब बस यात्रियों से भरी हुई थी और काजिबियो इलाके में पैनअमेरिकन हाईवे से गुजर रही थी। स्थानीय गवर्नर ऑक्टावियो गुजमान के अनुसार, विस्फोटक उपकरण सड़क पर ही लगाया गया था और बस के पास पहुंचते ही उसमें विस्फोट कर दिया गया। सेना के शीर्ष अधिकारियों ने इस घटना को स्पष्ट रूप से एक सुनियोजित आतंकी हमला करार दिया है।
कोलंबिया के सशस्त्र बलों के कमांडर जनरल ह्यूगो लोपेज ने प्रारंभिक जांच के आधार पर इस हमले के पीछे कुख्यात अपराधी इवान मोर्दिस्को के नेटवर्क और जैमे मार्टिनेज गुट का हाथ होने की आशंका जताई है। ये दोनों समूह पूर्व विद्रोही संगठन के उन धड़ों से जुड़े हैं, जिन्होंने 2016 के शांति समझौते को मानने से इनकार कर दिया था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कई घायलों की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है, जिससे मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस हमले की तीखी निंदा की है। उन्होंने हमले के दोषियों को आतंकवादी, फासीवादी और ड्रग तस्कर बताते हुए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। कोलंबिया का यह क्षेत्र पिछले 48 घंटों से भीषण हिंसा की चपेट में है, जहां पुलिस स्टेशनों पर गोलीबारी, एयर ट्रैफिक रडार पर हमले और बम से लदे ड्रोनों के इस्तेमाल सहित 26 से अधिक हिंसक घटनाएं दर्ज की गई हैं। इससे पहले काली और पामिरा शहरों में सैन्य ठिकानों के पास भी विस्फोटक से लदे वाहनों में धमाके किए गए थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि काउका और वाये डेल काउका क्षेत्रों में हिंसा की इस लहर के पीछे ड्रग तस्करी मार्गों पर कब्जे की जंग है। यह इलाका सेंट्रल अमेरिका और यूरोप तक नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए मुख्य गलियारे के रूप में जाना जाता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। सरकार ने इस हिंसा के पीछे मुख्य सूत्रधार माने जा रहे मार्लोन नामक नेता की गिरफ्तारी के लिए 10 लाख डॉलर से अधिक के इनाम की घोषणा की है। प्रशासन ने क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी है ताकि अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके।
नाबालिग के साथ थर्ड डिग्री! पुलिस पर गंभीर आरोप, चार कर्मियों पर मामला दर्ज
27 Apr, 2026 11:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भिवाड़ी: राजस्थान के भिवाड़ी में एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़के को अवैध हिरासत में रखकर 'थर्ड डिग्री' टॉर्चर देने का गंभीर मामला सामने आया है। भारी जन-आक्रोश और विरोध प्रदर्शन के बाद, प्रशासन ने रविवार देर रात यूआईटी (UIT) थाना प्रभारी दारा सिंह मीणा सहित चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है। इन सभी पर मारपीट और एससी/एसटी (SC/ST) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
विरोध के बाद जागी पुलिस
परिजनों का आरोप है कि शुरुआत में पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
धरना प्रदर्शन: रविवार शाम कांग्रेस जिलाध्यक्ष बलराम यादव के नेतृत्व में चौपानकी थाने के बाहर धरना शुरू हुआ।
नेताओं का समर्थन: रात होते-होते पूर्व विधायक संदीप यादव और कांग्रेस प्रत्याशी इमरान खान भी प्रदर्शन में शामिल हो गए, जिसके बाद दबाव में आकर पुलिस प्रशासन को मामला दर्ज करना पड़ा।
घटना का क्रम: हिरासत से वेंटिलेटर तक
परिजनों द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार:
21 अप्रैल: भिवाड़ी फेस-3 थाने के सिपाही गोपाल और अन्य कर्मी नाबालिग को उसके घर से उठाकर ले गए। उस वक्त वह पूरी तरह स्वस्थ था।
मदद की गुहार: चचेरे भाई के पास आए एक फोन कॉल में पीड़ित लड़का रोते हुए बता रहा था कि पुलिस उसे बुरी तरह पीट रही है।
अस्पताल में भर्ती: अगले दिन परिजनों को सूचना मिली कि लड़के की तबीयत खराब है। जब वे अस्पताल पहुंचे, तो वह बेहोशी की हालत में वेंटिलेटर पर था। हालत गंभीर होने के कारण उसे जयपुर रेफर किया गया।
धमकाने के आरोप: परिवार का दावा है कि पुलिस ने सबूत मिटाने के लिए अस्पताल में लड़के के फोटो और वीडियो बनाने से रोका और जबरन रिकॉर्डिंग डिलीट करवा दी।
चेर्नोबिल की परमाणु त्रासदी: एक गलती जिससे फूटे परमाणु बम
27 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कीव। 26 अप्रैल 1986 की रात दुनिया के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है, जब सोवियत संघ (अब यूक्रेन) के चेर्नोबिल में स्थित न्यूक्लियर पावर प्लांट के रिएक्टर-4 में विस्फोट हुआ। इस हादसे को आज 40 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन इसका असर आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उस रात एक मामूली टेस्ट के दौरान हुई मानवीय भूल और तकनीकी खामियों ने मिलकर ऐसी तबाही मचाई, जिसने पूरे यूरोप को रेडिएशन की चपेट में ला दिया। विशेषज्ञों के मुताबिक, विस्फोट के बाद निकलने वाला रेडिएशन इतना ज्यादा था कि शुरुआती घंटों में इसका प्रभाव हर घंटे दो परमाणु बमों के बराबर आंका गया। हादसे की शुरुआत एक रूटीन सेफ्टी टेस्ट से हुई थी, जिसमें यह जांचा जा रहा था कि बिजली गुल होने की स्थिति में रिएक्टर को कैसे ठंडा रखा जा सकता है। लेकिन अनुभवहीन स्टाफ और सुरक्षा नियमों की अनदेखी ने स्थिति को भयावह बना दिया। कंट्रोल रॉड्स को जरूरत से ज्यादा बाहर निकाल दिया गया, जिससे रिएक्टर की ऊर्जा अचानक कई गुना बढ़ गई।
जब हालात काबू से बाहर हो गए, तो इमरजेंसी शटडाउन बटन दबाया गया, लेकिन रिएक्टर के डिजाइन में मौजूद खामी ने स्थिति और बिगाड़ दी। दो भीषण विस्फोटों ने 1000 टन वजनी कवर प्लेट को उड़ा दिया और आसमान में जहरीली रेडिएशन की लपटें फैल गईं।
इस हादसे के पहले गवाह बने 25 वर्षीय फायरफाइटर वसिली इग्नातेंको, जिन्हें एक सामान्य आग बुझाने के लिए बुलाया गया था। बिना किसी सुरक्षा उपकरण के वे और उनके साथी आग बुझाने पहुंच गए। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि वे घातक रेडियोएक्टिव पदार्थों के संपर्क में आ चुके हैं।
कुछ ही घंटों में फायरफाइटर्स को उल्टियां, त्वचा में जलन और आंखों में जलन जैसी समस्याएं होने लगीं। धीरे-धीरे उनकी हालत बिगड़ती गई—त्वचा पर फफोले, आंतरिक अंगों का फेल होना और अंततः मौत। वसिली समेत उनके कई साथी कुछ ही हफ्तों में दम तोड़ गए।
इस त्रासदी का केंद्र प्रिपयत शहर था, जहां करीब 50 हजार लोग रहते थे। हादसे के बाद पूरे शहर को खाली कराना पड़ा और आज भी यह ‘घोस्ट सिटी’ बना हुआ है। चेर्नोबिल आपदा ने दुनिया को परमाणु ऊर्जा के खतरों के प्रति आगाह किया। 40 साल बाद भी उस क्षेत्र में रेडिएशन का असर बना हुआ है और यह घटना आज भी मानव भूल और तकनीकी लापरवाही की सबसे बड़ी चेतावनी मानी जाती है।
खाड़ी मिशन पर एनएसए डोभाल, अबू धाबी में यूएई राष्ट्रपति से अहम मुलाकात
27 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अबू धाबी। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल खाड़ी देशों के अहम दौरे पर हैं। इसी क्रम में उन्होंने अबू धाबी पहुंचकर संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जाएद अल नाहयान से मुलाकात की।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस उच्चस्तरीय बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता, पश्चिम एशिया के मौजूदा भू-राजनीतिक हालात और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। खास तौर पर इजरायल-ईरान तनाव के बाद क्षेत्र में पैदा हुए असंतुलन और उसके संभावित प्रभावों पर दोनों पक्षों ने विचार-विमर्श किया।
डोभाल का यह दौरा भारत की खाड़ी नीति के तहत रणनीतिक संपर्क बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इससे पहले वह सऊदी अरब का भी दौरा कर चुके हैं, जहां उन्होंने ऊर्जा, विदेश और सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें की थीं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर की जा रही है और इसका उद्देश्य खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत करना है।
सऊदी अरब की राजधानी रियाद में हुई बैठकों में चार प्रमुख मुद्दों पर फोकस किया गया था, जिनमें वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा, सप्लाई चेन की स्थिरता, होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं, खुफिया सहयोग बढ़ाना और आर्थिक संबंधों को मजबूत करना शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच भारत अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए सक्रिय कूटनीति अपना रहा है।
डोभाल की यह यात्रा न सिर्फ सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है, बल्कि इससे भारत और खाड़ी देशों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कैरोलिन लेविट को कैसे पता ट्रंप के कार्यक्रम में फायर-शॉट भी होगा
27 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । अमेरिका में शनिवार की रात को जो कुछ भी हुआ, उस घटना ने हर किसी को चौंका दिया। हिल्टन होटल में जहां होनी थी एक ऐसी पार्टी, जिसमें सभी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण को सुनने वाले और कहां उन्हें सुनाई दी गोलियों की तड़तड़ाहट। इस बीच व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट का पुराना वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह वीडियो व्हाइट हाउस कॉरेंसपॉन्डेंट्स डिनर में हुई गोलीबारी की घटना के बाद फिर से चर्चा में आ गया है।
पत्रकारों का डिनर शुरू होने से कुछ समय पहले, लेविट ने मीडिया से बातचीत में दर्शकों से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का भाषण देखने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि ट्रंप का संबोधन काफी दिलचस्प और मनोरंजक होगा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि भाषण में कुछ तीखे हमले देखने को मिल सकते हैं, जिससे कार्यक्रम और आकर्षक बनेगा। उस समय उनके बयान को राजनीतिक कटाक्ष और मजाक की तरह देखा गया लेकिन लेविट का फायर-शॉट वाला मजाक कार्यक्रम के दौरान बिल्कुल सही साबित हुआ।
दअरसल लेविट ने कार्यक्रम से पहले पूछा गया था कि आज पत्रकारों के सामने ट्रंप क्या बोलने वाले हैं? इस पर लेविट ने कहा था कि उन्होंने खुद ही अपना भाषण लिखा है और वे ही जानते हैं कि वे क्या कहने वाले हैं, लेकिन ये बिल्कुल क्लासिक ट्रंप का स्टाइल होगा। उन्होंने कहा कि वे पूरे हाल को अपनी बातों से हिलाकर रख देने वाले है। इसके बाद लेविट ने मजाक में कहा कि मजे के साथ-साथ कुछ फायर शॉट भी देखने को मिल सकते है। हालांकि ये सिर्फ बातों के लिहाज से कहा गया था लेकिन कार्यक्रम में वाकई फायर शॉट हुए और अफरा-तफी मच गई।
म्यांमार में 4.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ
27 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रगूंन। रविवार सुबह म्यांमार में 4.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) के अनुसार यह भूकंप सुबह 02:57 बजे आया और इसकी गहराई करीब 90 किलोमीटर थी। इससे एक दिन पहले शनिवार को भी इसी क्षेत्र में 4.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसकी गहराई 95 किलोमीटर थी। लगातार आ रहे इन झटकों ने क्षेत्र की भूकंपीय सक्रियता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, भूकंप पृथ्वी की सतह से लेकर लगभग 700 किलोमीटर की गहराई तक उत्पन्न हो सकते हैं। इन्हें तीन श्रेणियों में बांटा जाता है उथले (0–70 किमी), मध्यवर्ती (70–300 किमी) और गहरे (300–700 किमी)। आमतौर पर 70 किमी से अधिक गहराई वाले भूकंपों को डीप-फोकस भूकंप माना जाता है। म्यांमार में आए ये हालिया भूकंप मध्यवर्ती श्रेणी में आते हैं। म्यांमार भूकंप और सुनामी के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है। इसका प्रमुख कारण इसकी भौगोलिक स्थिति है, जहां चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटें—भारतीय, यूरेशियन, सुंडा और बर्मा प्लेट—आपस में टकराती और सरकती रहती हैं। इन प्लेटों की सक्रियता के कारण यहां भूगर्भीय हलचल लगातार बनी रहती है। देश के भीतर 1400 किलोमीटर लंबी एक ट्रांसफॉर्म फॉल्ट लाइन गुजरती है, जो अंडमान स्प्रेडिंग सेंटर को उत्तर में स्थित सागाइंग फॉल्ट से जोड़ती है। यह सागाइंग फॉल्ट म्यांमार के प्रमुख शहरों जैसे सागाइंग, मांडले, बागो और यांगून के लिए बड़ा खतरा बनती है, जहां देश की लगभग 46 प्रतिशत आबादी रहती है। दहालांकि यांगून फॉल्ट लाइन से कुछ दूरी पर है, फिर भी इसकी घनी आबादी के कारण जोखिम बना रहता है। इतिहास में 1903 में बागो में आए 7.0 तीव्रता के भूकंप का असर यांगून तक महसूस किया गया था, जो इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
बांग्लादेश- हत्याओं में 14 प्रतिशत का उछाल, चरमराई कानून-व्यवस्था
26 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति जनता के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। हालिया पुलिस आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 की पहली तिमाही में हत्या की घटनाओं में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 14 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। राजधानी ढाका सहित देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे हिंसक अपराधों ने नागरिकों के बीच असुरक्षा की भावना को गहरा कर दिया है। हाल ही में मोहखाली इलाके में एक डॉक्टर पर हुए चाकू से हमले जैसी घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि अपराधी अब खुलेआम वार करने से भी नहीं कतरा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंसक अपराधों में यह वृद्धि न केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर जनता के भरोसे को कम करती है, बल्कि सामाजिक स्थिरता के लिए भी बड़ा खतरा है। वैश्विक स्तर पर जारी ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा संकट और बढ़ती महंगाई ने पहले ही आम जनता की कमर तोड़ रखी है, ऐसे में आंतरिक सुरक्षा का गिरता स्तर लोगों के लिए दोहरी मार साबित हो रहा है। रिपोर्टों में इस बात पर जोर दिया गया है कि अपराधियों में कानून का भय समाप्त होता जा रहा है, जिसका मुख्य कारण पुलिस व्यवस्था की कमजोरी, जांच में सुस्ती और न्याय मिलने में होने वाली देरी है। जब तक त्वरित जवाबदेही तय नहीं की जाती, तब तक अपराध समाज में सामान्य बात बन जाएंगे और डर लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन जाएगा।
राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। संसद में निर्दलीय सांसदों ने गृह मंत्री की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद देश में भीड़ तंत्र (मॉब कल्चर) का प्रभाव खत्म नहीं हो रहा है। प्रशासन द्वारा दंडमुक्ति की संस्कृति को समाप्त करने के वादे कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। देश भर में एक के बाद एक हो रहे भीड़ के हमले और हिंसक झड़पें सरकार के दावों की पोल खोल रही हैं।
मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के पिछले 18 महीनों के कार्यकाल में भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा की घटनाओं में तेजी आई है। आलोचकों का तर्क है कि वर्तमान शासन व्यवस्था बहाल करने में विफल रहा है, जिससे आपराधिक गिरोहों को पनपने का अवसर मिल रहा है। यह बढ़ता अपराध ग्राफ अब केवल पुलिसिया मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के आर्थिक विकास, सामाजिक सामंजस्य और राष्ट्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। सरकार के लिए यह समय निर्णायक कार्रवाई करने और न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास बहाल करने का है।
ईरान में 3500 मौतों के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री ने युद्ध को बताया दुनिया के लिए उपहार
26 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध में अब तक 3500 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन इस मानवीय क्षति के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है। हेगसेथ ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई को दुनिया के लिए एक वरदान और उपहार करार दिया है। उनका तर्क है कि यह युद्ध वास्तव में वैश्विक सुरक्षा के लिए ईरान के परमाणु खतरे को जड़ से समाप्त करने की एक अनिवार्य प्रक्रिया है, जिससे अंततः पूरी दुनिया का भला होगा।
रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ ही हफ्तों में अमेरिकी सेना ने निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका का एकमात्र लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित न कर पाए। इसके लिए ओमान की खाड़ी से लेकर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र तक अमेरिकी नौसेना ने अभेद्य घेराबंदी कर दी है। ईरान की ओर आने-जाने वाले संदिग्ध जहाजों को सख्ती से मोड़ा जा रहा है। अब तक केवल 34 गैर-ईरानी जहाजों को ही इस क्षेत्र से गुजरने की अनुमति मिली है। हेगसेथ ने यह भी संकेत दिया कि जल्द ही एक और विमानवाहक पोत इस सैन्य अभियान में शामिल होकर अमेरिकी पकड़ को और मजबूत करेगा। युद्ध के मैदान से आ रही खबरों के बीच एयर फोर्स जनरल डैन केन ने सैन्य कड़े रुख की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह एक विशाल कंटेनर जहाज द्वारा चेतावनी की अनदेखी करने पर सेंटकॉम के आदेश पर उसके इंजन रूम पर सीधी फायरिंग की गई। जहाज को अक्षम करने के बाद अमेरिकी नौसैनिकों ने उस पर कब्जा कर लिया। हालांकि, अमेरिकी दावों के विपरीत लॉयड लिस्ट इंटेलिजेंस और विंडवर्ड जैसी फर्मों का डेटा बताता है कि ईरान का गुमनाम बेड़ा (शैडो फ्लीट) अब भी सक्रिय है। ईरानी टैंकर ट्रैकिंग डेटा के साथ छेड़छाड़ कर और पाकिस्तानी समुद्री सीमा का सहारा लेकर अमेरिकी घेराबंदी को चकमा देने की कोशिश कर रहे हैं। रक्षा मंत्री हेगसेथ ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) की तुलना समुद्री लुटेरों से करते हुए कड़ी चेतावनी दी है कि यदि समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाई गईं, तो उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के रुख को दोहराते हुए साफ किया कि अमेरिका किसी भी समझौते के लिए जल्दबाजी में नहीं है; वार्ता तभी संभव है जब ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह और स्थायी रूप से त्याग दे।
भारतीय 250 यहूदी पहुंचे इजरायल
26 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल अवीव। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, मणिपुर और मिजोरम में निवास करने वाले बीने मनेशे समुदाय के लगभग 250 सदस्य गुरुवार को इजराइल पहुंच गए हैं। यह कदम इजराइल सरकार द्वारा पिछले साल शुरू किए गए एक विशेष अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत भारत में रह रहे इस समुदाय के लोगों को वापस उनके मूल देश में बसाने की योजना बनाई गई है। इजराइल सरकार ने अगले पांच वर्षों के भीतर हजारों यहूदियों के आव्रजन (इमिग्रेशन) के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का वादा किया था, जिसकी पहली कड़ी के रूप में इस समूह का आगमन हुआ है।
इस महत्वपूर्ण पुनर्वास प्रक्रिया को ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन का नाम दिया गया है। वर्ष 2026 के दौरान इस ऑपरेशन के माध्यम से लगभग 1,200 और लोगों को इजराइल लाने का लक्ष्य रखा गया है। इजराइल के अलिया और इंटीग्रेशन मंत्रालय के अनुसार, आगामी दो सप्ताहों में दो और उड़ानों की व्यवस्था की गई है। इस पूरी पुनर्वास परियोजना के लिए इजराइल सरकार ने लगभग 9 करोड़ शेकेल (तीन करोड़ अमेरिकी डॉलर) का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है, ताकि आने वाले नागरिकों को सुव्यवस्थित तरीके से बसाया जा सके।
बीने मनेशे समुदाय का इतिहास काफी दिलचस्प और चर्चाओं भरा रहा है। इस समुदाय का दावा है कि वे बाइबिल में वर्णित मनेशे कबीले के वंशज हैं, जो लगभग 2,700 साल पहले निर्वासित किए गए 10 कबीलों में से एक था। माना जाता है कि सदियों के विस्थापन के दौरान यह समुदाय फारस, अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन होता हुआ भारत के पूर्वोत्तर हिस्से तक पहुंचा। लंबी अवधि तक अलग-थलग रहने और स्थानीय संस्कृतियों के प्रभाव के बावजूद, इस समुदाय ने खतना जैसी अपनी कुछ मौलिक यहूदी धार्मिक परंपराओं को जीवित रखा। हालांकि, इनके यहूदी होने को लेकर लंबे समय तक धार्मिक और वैधानिक बहस चलती रही। वर्ष 2005 में सेफारदी समुदाय के मुख्य रब्बी श्लोमो अमर ने अंततः उन्हें इजराइल के वंशज के रूप में मान्यता प्रदान की, जिससे उनके लिए इजराइल की नागरिकता का कानूनी रास्ता साफ हुआ। जानकारों का कहना है कि भारत में रहने के दौरान कई लोग ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए थे, इसलिए इजराइली कानून के तहत पूर्ण नागरिक बनने के लिए उन्हें औपचारिक धर्मांतरण प्रक्रिया से गुजरना होगा। पिछले तीन दशकों में इस समुदाय के करीब 4,000 सदस्य पहले ही इजराइल जा चुके हैं, जबकि 6,000 अन्य अभी भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इजराइल का गठन ही दुनिया भर के यहूदियों को एक सुरक्षित छत प्रदान करने के उद्देश्य से हुआ था, और वर्तमान योजना इसी विचारधारा को मजबूती प्रदान करती है।
वाशिंगटन के होटल में दनादन गोलियां, ट्रंप और वैंस की मौजूदगी से बढ़ी सनसनी
26 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी स्थित हिल्टन होटल में आज उस समय हड़कंप मच गया, जब 'व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर' के दौरान अचानक फायरिंग शुरू हो गई। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी मौजूद थे। गोलीबारी की आवाज सुनते ही कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
सीक्रेट सर्विस की मुस्तैदी से बचे राष्ट्रपति
घटना का जो वीडियो सामने आया है, उसमें देखा जा सकता है कि राष्ट्रपति ट्रंप मंच पर मौजूद थे, तभी होटल के ऊपरी तल पर गोलीबारी हुई। खतरे को भांपते हुए सीक्रेट सर्विस के जवानों ने तुरंत राष्ट्रपति ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप को सुरक्षा घेरे में ले लिया और सुरक्षित बाहर निकाल लिया। वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। डिनर में शामिल करीब 2600 मेहमानों में दहशत का माहौल था, कई लोगों को जान बचाने के लिए टेबल के नीचे छिपते हुए देखा गया।
संदिग्ध हमलावर हिरासत में
सुरक्षा एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे होटल को खाली करा लिया। घटना के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है और सुरक्षाबलों ने संदिग्ध हमलावर को पकड़ लिया है। राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।
ट्रंप का बयान: 'हमें इसे फिर से करना होगा'
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए बताया कि संदिग्ध हमलावर को हिरासत में ले लिया गया है। उन्होंने कहा, "मैंने सुझाव दिया था कि शो को जारी रखा जाए, लेकिन मैं सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के निर्देशों का पूर्णतः पालन करूँगा।"
ट्रंप ने आगे कहा कि आज की शाम वैसी नहीं रही जैसी योजना बनाई गई थी। उन्होंने घटना का जिक्र करते हुए कहा कि, "हमें इसे फिर से आयोजित करना होगा।" गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने संदेश में याद दिलाया कि 40 साल पहले इसी स्थान पर एक अमेरिकी राष्ट्रपति की हत्या हुई थी, जिसने इस घटना की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।
इटली की पीएम मेलोनी ने भारतीय झुमके पहनकर दिया राष्ट्रपति ट्रंप को करारा जवाब!
26 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोम। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी एक बार फिर अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गई हैं। इस बार वजह कोई आधिकारिक बयान नहीं, बल्कि उनकी एक सेल्फी है जिसमें वे भारतीय शैली के पारंपरिक झुमके पहने नजर आ रही हैं। इस देसी लुक के पीछे छिपा राजनीतिक संदेश इतना तीखा है कि इसकी गूंज वॉशिंगटन से लेकर पूरे यूरोप तक सुनाई दे रही है। मेलोनी ने इस साधारण दिखने वाली तस्वीर के जरिए यह साफ कर दिया है कि उनकी सरकार किसी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं है।
मेलोनी ने इंस्टाग्राम पर इस सेल्फी को साझा करते हुए एक बेहद सख्त कैप्शन लिखा। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए अपने विरोधियों को सत्ता का प्रचारक बताया और कहा कि वे उन्हें स्थिरता या आजादी का पाठ न पढ़ाएं। मेलोनी ने स्पष्ट शब्दों में लिखा-हमारा कोई मालिक नहीं है और हम किसी से आदेश नहीं लेते। हमारा एकमात्र लक्ष्य इटली का हित है। उनके इस बयान को सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दिए गए जवाब के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, ईरान संघर्ष के मुद्दे पर जब मेलोनी ने अमेरिका का बिना शर्त समर्थन करने से इनकार किया था, तब ट्रंप ने उन्हें कायर कहकर संबोधित किया था। मेलोनी का यह ताजा पोस्ट उसी तंज का एक प्रभावी पलटवार है। इस सेल्फी का इंडियन कनेक्शन भी कूटनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मेलोनी का भारतीय झुमके पहनना न केवल भारत और इटली के प्रगाढ़ होते संबंधों की ओर इशारा करता है, बल्कि यह उनकी सॉफ्ट पावर कूटनीति का भी एक हिस्सा है। भारतीय सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है, जिससे भारत में उनकी लोकप्रियता और अधिक बढ़ गई है। विशेषज्ञ इसे मेलोनी की वायरल डिप्लोमेसी कह रहे हैं, जिसके माध्यम से वे फैशन और भावनाओं का उपयोग कर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों को प्रभावित कर रही हैं। मेलोनी का यह कड़ा रुख केवल अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि यूरोपीय संघ के उन नेताओं के लिए भी एक चेतावनी है जो इटली की नीतियों को नियंत्रित करना चाहते हैं। अपनी इस पोस्ट से मेलोनी ने वैश्विक मंच पर यह संदेश पहुंचा दिया है कि इटली अब किसी रिमोट कंट्रोल से नहीं चलेगा। उनकी इस बेबाकी ने यह साबित कर दिया है कि वे अपनी शर्तों पर राजनीति करने वाली एक सशक्त नेता हैं, जो राष्ट्रहित के साथ कोई समझौता नहीं करेंगी।
माली की राजधानी बमाको समेत कई शहरों में धमाके व गोलीबारी
26 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बमाको। पश्चिम अफ्रीकी देश माली में शनिवार को बड़ा सुरक्षा संकट देखने को मिला, जब राजधानी बमाको और आसपास के कई शहरों में एक साथ गोलीबारी और धमाकों की घटनाएं सामने आईं। इन हमलों से पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई।
राजधानी बमाको के मोदिबो कीता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और उसके आसपास भारी गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं। यह इलाका माली वायुसेना के एयर बेस के पास स्थित है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। स्थानीय प्रशासन और सेना ने मीडिया को बताया, कि अज्ञात हथियारबंद समूहों ने कई प्रमुख रणनीतिक स्थानों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। शुरुआती रिपोर्टों में इन हमलों के पीछे अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े गुटों के शामिल होने की आशंका जताई गई है, हालांकि किसी भी संगठन ने अभी तक जिम्मेदारी नहीं ली है।
माली सेना ने बयान जारी कर कहा है कि सुरक्षा बल हमलावरों को रोकने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं और कई क्षेत्रों में मुठभेड़ जारी है। हेलीकॉप्टरों की गश्त और अतिरिक्त सैन्य बलों की तैनाती भी की गई है।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, पूर्वोत्तर शहर किदाल और गाओ में भी हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं, जहां सशस्त्र समूहों ने कुछ इलाकों पर नियंत्रण का दावा किया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय निवासियों का कहना था, कि धमाकों और गोलीबारी की आवाजें कई घंटों तक सुनाई देती रहीं, जिससे लोग बाहर नहीं निकले और अपने-अपने घरों में ही कैद होकर रह गए। धमाकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि खिड़कियां और दरवाजे तक हिल गए।
विशेषज्ञों के अनुसार, माली, नाइजर और बुर्किना फासो में पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और आतंकवादी हमलों में बढ़ोतरी देखी गई है। फिलहाल माली की सेना स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी है, लेकिन पूरे क्षेत्र में तनाव और दहशत का माहौल बना हुआ है।
नदी बचाओ अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई, प्रशासन का बड़ा कदम
25 Apr, 2026 10:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू में बड़ा एक्शन: बागमती नदी के तट से हटाए गए सैकड़ों अवैध निर्माण, बालेन शाह के प्रयासों को मिली सफलता
काठमांडू। नेपाल की राजधानी काठमांडू को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के संकल्प के साथ सरकार ने बागमती नदी के किनारों पर बड़ा स्वच्छता अभियान चलाया है। शनिवार को प्रशासन ने नदी तट पर सालों से काबिज अवैध झोपड़ियों और अस्थायी निर्माणों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बागमती नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बहाल करना और शहर के सौंदर्य को निखारना है।
संयुक्त अभियान में हटाए गए सैकड़ों परिवार
यह बड़ी कार्रवाई मेयर बालेन्द्र शाह (बालेन) के नेतृत्व वाली काठमांडू महानगरपालिका और संघीय सरकार ने आपसी तालमेल से पूरी की। सुरक्षा के लिए सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की टुकड़ियाँ तैनात रहीं।
प्रमुख क्षेत्र: मुख्य रूप से थापाथली और गैरेगौण इलाकों में यह अभियान चलाया गया।
प्रभाव: जानकारी के अनुसार, थापाथली से लगभग 146 और गैरेगौण क्षेत्र से करीब 200 परिवारों को हटाया गया है।
पुनर्वास: बेघर हुए परिवारों के लिए प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए दशरथ स्टेडियम और कीर्तिपुर नगर पालिका में अस्थायी शिविरों का इंतजाम किया है, जहाँ कई परिवारों को सुरक्षित शिफ्ट कर दिया गया है।
बालेन शाह की पुरानी कोशिशों को मिला अंजाम
बागमती किनारे से अतिक्रमण हटाने की जद्दोजहद लंबे समय से चल रही थी। मेयर बालेन शाह ने पहले भी थापाथली में इस तरह के अभियान की शुरुआत की थी, लेकिन तब केंद्र सरकार (केपी ओली नेतृत्व) का सहयोग न मिलने के कारण मिशन अधूरा रह गया था। इस बार संघीय सरकार के पूर्ण समर्थन के चलते सालों से अटकी इस योजना को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
बिना हंगामे के संपन्न हुई कार्रवाई
आमतौर पर ऐसी विस्थापन कार्रवाइयों में भारी विरोध देखा जाता है, लेकिन इस बार माहौल पूरी तरह शांत रहा। इसके पीछे सरकार की कुशल रणनीति रही:
पूर्व सूचना: प्रशासन ने कार्रवाई से काफी पहले ही लोगों को नोटिस जारी कर दिया था।
स्वेच्छा से सहयोग: लोगों से अपना सामान समेटने की अपील की गई थी, जिसका सकारात्मक असर दिखा।
पुनर्वास का भरोसा: सरकार द्वारा रहने के लिए वैकल्पिक जगह और बुनियादी सुविधाओं के वादे ने लोगों के गुस्से को शांत रखा।
जारी रहेगा सफाई अभियान
काठमांडू प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अभियान केवल थापाथली तक सीमित नहीं है। आने वाले दिनों में शांतिनगर और गौशाला जैसे इलाकों में भी बागमती नदी के किनारों पर बने अवैध निर्माणों को ढहाया जाएगा। सरकार का अंतिम लक्ष्य पूरे काठमांडू शहर को अतिक्रमण मुक्त कर एक आधुनिक और स्वच्छ राजधानी के रूप में विकसित करना है।
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