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ईरान पर हमला नहीं इजराइल का असल टारगेट........यहूदियों के तीसरे सबसे बड़े मंदिर की तैयारी
10 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मास्को। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच रूस की मीडिया ने इजराइल पर एक ऐसा खुलासा किया है जिसे सुनकर 57 मुस्लिम देश हिल ही जाएंगे, लेकिन भारत भी चौंक जाएगा। इस जंग में अब जिस तरह से ईरान और खाड़ी देश आपस में लड़ रहे हैं, यह देखकर लग रहा है कि यह एक धार्मिक जंग बन गई है। यानी यह जंग अब शिया सुन्नी बवाल में बदल रही है। लेकिन सवाल ये हैं कि क्या इजराइल सच में यही चाहता था? क्या शिया सुन्नी जंग के बीच इजराइल यहूदियों का तीसरा सबसे बड़ा रहस्यमी मंदिर बनाने की कोशिश में है? सोशल मीडिया पर कई लोग दावा कर रहे हैं कि मुस्लिम देशों में अफरातफरी मचाकर इजराइल यरूशलम में अल अक्सा मस्जिद को नष्ट कर उसी जगह पर यहूदियों का तीसरा मंदिर बना सके।
मीडिया के मुताबिक इजराइली सैनिकों की वर्दी पर एक होश उड़ा देने वाली चीज दिखी है। बता दें कि यरूशलम स्थित अल अक्सा मस्जिद जिस टेंपल माउंट पर स्थित है, उसी जगह पर यहूदियों का प्राचीन मंदिर हुआ करता था। टेंपल माउंट पर यहूदियों का पहला मंदिर किंग सोलोमन ने बनवाया था जिसे सदियों पहले बेबीलोन के लोगों ने तोड़ दिया था। इसके बाद उसी जगह पर दूसरा मंदिर बनाया गया। लेकिन करीब 2000 साल पहले रोमंस ने उस मंदिर को भी गिरा दिया। तभी से टेंपल माउंट पर कोई मंदिर नहीं है। टेंपल माउंट पर जिस जगह यहूदियों के दो मंदिर थे, उसी परिसर में अब अल अक्सा मस्जिद है। बता दें कि मक्का मदीना के बाद मुस्लिमों की सबसे पवित्र अल अक्सा मस्जिद ही मानी जाती है। लेकिन इजराइल के लोग सदियों से विरोध करते आए हैं कि जिस टेंपल माउंट पर अल अक्सा मस्जिद है, वहां पर यहूदियों का तीसरा मंदिर बनना चाहिए।
इजराइल के लाखों लोगों ने कहा है कि अब टेंपल माउंट पर तीसरा मंदिर बनाने का समय आ गया है। यानी इसका सीधा मतलब यह है कि यहूदियों का तीसरा मंदिर तभी बन सकता है जब टेंपल माउंट परिसर से अल अक्सा मस्जिद हटे। एक प्रमुख अमेरिकी पत्रकार ने ईरान के खिलाफ जंग को लीड कर रहे अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ वॉर पीट हेगथ का एक पुराना बयान पोस्ट किया जिसमें वे यहूदियों के तीसरे मंदिर को बनाने की वकालत कर रहे हैं। बयान पुराना है लेकिन बयान देने वाला शख्स आज ईरान के खिलाफ जंग को लीड कर रहा है। इस मुद्दे पर अब चर्चा हो रही है। रूसी मीडिया ने इजराइल के कुछ सैनिकों की फोटो पोस्ट की है जिसमें उनकी वर्दी पर टेंपल माउंट की तस्वीरें दिख रही हैं। इजराइल जानता है कि अल अक्सा मस्जिद को हटाया गया, तब दुनिया में बवाल खड़ा हो जाएगा। लेकिन फिर भी कई लोग सवाल पूछ रहे हैं कि इजराइल ने ईरान के सबसे बड़े शिया धार्मिक नेता खामनई को क्यों मारा? इजराइल ने यह जंग सुन्नी बहुल मिडिल ईस्ट में क्यों फैला दी?
अबूधाबी का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर अस्थायी रूप से बंद, सुरक्षा अलर्ट पर जारी रहेगी पूजा
10 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अबूधाबी। संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी में स्थित बेप्स हिंदू मंदिर अबुधाबी को मौजूदा सुरक्षा हालात के कारण अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। मंदिर प्रशासन ने घोषणा की है कि यह आदेश सोमवार से अगले आधिकारिक आदेश तक लागू रहेगा, और श्रद्धालु तथा आगंतुक मंदिर परिसर में प्रवेश नहीं कर पाएंगे।
हालांकि, मंदिर में रहने वाले स्वामी और संत नियमित प्रार्थना और पूजा जारी रखेंगे। मंदिर प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें, अफवाहों से बचें और जहां तक संभव हो घरों में ही रहें। साथ ही सभी से कहा गया है कि सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी किए गए सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।
यहां बताते चलें कि बेप्स मंदिर, जिसे बोचनवासी स्वामीनारायण परंपरा के तहत बनाया गया है, यूएई में सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है और यह भारतीय वास्तुकला और संस्कृति का प्रतीक माना जाता है। 27 एकड़ क्षेत्र में फैले इस मंदिर को पारंपरिक नागर शैली में डिजाइन किया गया है।
मंदिर का मुख्य ढांचा 13.5 एकड़ में फैला है, जिसकी लंबाई 262 फीट, चौड़ाई 180 फीट और ऊंचाई 108 फीट है। सात भव्य शिखर और पांच गुंबद इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं। निर्माण में लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च हुए और इसमें 50 हजार घन फीट इटैलियन संगमरमर, 18 लाख घन फीट भारतीय सैंडस्टोन और 18 लाख पत्थर की ईंटों का इस्तेमाल किया गया। खास बात यह है कि इसमें लोहे या स्टील का उपयोग नहीं किया गया; पूरी संरचना चूने और संगमरमर से बनी है, ताकि यह हजारों वर्षों तक सुरक्षित रहे।
मंदिर परिसर में एम्फीथिएटर बनारस के घाटों की शैली में बनाया गया है, जिसमें चलते समय गंगा और यमुना के प्रतीकात्मक जलधाराएं दिखाई देती हैं। त्रिवेणी संगम का प्रतीक सरस्वती नदी को दर्शाने के लिए प्रकाश की एक किरण भी दिखाई जाती है। प्रवेश द्वार पर स्थापित आठ मूर्तियां सनातन धर्म के आठ मूल्यों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
ईरान में धमाकों से हड़कंप: कई शहरों में विस्फोट, ट्रंप बोले- मिशन जल्द पूरा होगा
10 Mar, 2026 07:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध का आज 11वां दिन है. इस युद्ध ने कमोबेश पूरी दुनिया को प्रभावित किया है. खासकर कच्चे तेल और उड़ान को लेकर. अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर लगातार हमले किए जा रहे हैं. वहीं ईरान इजराइल और खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बना रहा है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना का अभियान जल्द खत्म करने के संकेत दिए हालांकि इस हफ्ते खत्म नहीं होगा. वहीं ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से ईरान मसले पर फोन पर बात की. इजराइल ईरान के साथ लेबनान में भी एक बड़ा ऑपरेशन चला रहा है, जहाँ वह ईरान समर्थक हिज्बुल्लाह से लड़ रहा है. लेबनान में मरने वालों की संख्या 486 हो गई. ईरान ने सोमवार को इजराइल और खाड़ी देशों पर और हमले किए, इसके कुछ ही घंटों बाद ईरानी सरकारी टीवी ने कहा कि देश के दिवंगत सुप्रीम लीडर के बेटे और लंबे समय से दावेदार माने जाने वाले मोजतबा खामेनेई को उनका उत्तराधिकारी बनाया गया. वहीं इजराइल और ईरान की तरफ से कोई नरमी के कोई संकेत नहीं हैं. इस बीच ईरान के सिक्योरिटी चीफ का कहना है कि जब तक युद्ध चलता रहेगा, होर्मुज स्ट्रेट असुरक्षित रहेगा. ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट को हिलाकर रख दिया है, कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई. यूएस सेंट्रल कमांड द्वारा जारी जानकारी के अनुसार देश के सुरक्षा ढांचे को खत्म करने के उद्देश्य से व्यापक सैन्य अभियान के पहले दस दिनों में अमेरिका ने ईरान में 5000 से अधिक लक्ष्यों पर हमला किया. ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 28 फरवरी, 2026 को सुबह 1:15 बजे शुरू हुआ और इसमें देश भर में ईरानी सैन्य क्षमताओं को लक्षित करने वाले अमेरिकी वायु, नौसेना और मिसाइल प्रणालियों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है. यूएस सेंट्रल कमांड ने कहा कि अभियान अमेरिका के राष्ट्रपति के निर्देश पर शुरू किया गया. इसमें बलों को ईरानी शासन के सुरक्षा तंत्र से जुड़े साइटों और उन स्थानों पर हमला करने का काम सौंपा गया. इन हमलों B-1 बॉम्बर, B-2 स्टील्थ बॉम्बर और B-52 बॉम्बर जैसे लंबी दूरी के बॉम्बर के साथ-साथ F-15, F-16, F-18, F-22 स्टील्थ फाइटर और F-35 स्टील्थ फाइटर जैसे उन्नत लड़ाकू विमान शामिल हैं.
ईरान के कई शहरों में भीषण धमाके
ईरान की राजधानी में लोगों ने 20 से ज्यादा जोरदार धमाके की आवाज सुनी. कई लोग सुरक्षित जगहों पर भागे. आधी रात के आस-पास हुए ये हमले, युद्ध शुरू होने के बाद से तेहरान पर हुए सबसे बड़े हवाई हमले थे. लगभग आधे घंटे तक लगातार ऊपर से उड़ते बॉम्बर और लड़ाकू विमानों की आवाज आती रही. प्रत्यदर्शियों ने शहर के पश्चिमी इलाकों में धमाकों की खबर दी. कुछ इलाकों में बिजली काट दी गई. सोशल मीडिया पर ईरान के दूसरे शहरों में भी ऐसे ही धमाकों की खबर मिली. ईरानी मीडिया ने हमलों से हुए नुकसान और हताहतों की खबर नहीं दी. वहीं आईडीएफ ने दक्षिणी लेबनान के इलाके में ऑपरेशन के दौरान हिज्बुल्लाह रॉकेट लॉन्चर का पता लगाकर उसे नष्ट कर दिया. इस दौरान एक हिज्बुल्लाह लड़ाका मारा गया.
पिज्जा लेने गई युवती के साथ दरिंदगी, बंधक बनाकर दुष्कर्म का आरोप
9 Mar, 2026 02:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जींद। पिज्जा लेने गई युवती के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। दुकान संचालक ने दोस्त के साथ मिलकर युवती को दुकान के अंदर बने केबिन में बंधक बनाकर वारदात को अंजाम दिया। शहर थाना पुलिस ने आरोपी संचालक सुमित और उसके दोस्त के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
परिजनों ने लगाए आरोप
शहर थाना क्षेत्र की एक कॉलोनी निवासी महिला ने एफआईआर में बताया कि शहर में एक स्कूल के सामने उनका शिक्षण संस्थान है, जहां वह अपनी बेटी के साथ रोजाना आती-जाती है। आरोप लगाया कि रास्ते में सुंदरपुरा निवासी सुमित तथा उसका एक दोस्त अक्सर उनकी बेटी का रास्ता रोककर उससे जबरन बात करने की कोशिश करते थे और धमकाते भी थे।बीते 23
फरवरी की घटना
23 फरवरी को उनकी बेटी संस्थान से पिज्जा लेने के लिए सुमित की दुकान पर गई थी। आरोप है कि वहां सुमित और उसके दोस्त ने युवती को पकड़ लिया। फिर सुमित उसे जबरदस्ती दुकान के अंदर बने केबिन में ले गया जबकि उसका साथी मुख्य गेट बंद कर बाहर खड़ा हो गया। आरोप है कि इस दौरान युवती के साथ दुष्कर्म किया गया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी गई।
आरोपी ने हत्या का किया प्रयास
परिजनों का आरोप है कि आरोपी ने युवती का गला दबाकर जान से मारने की भी कोशिश की। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी आरोपी को कई बार समझाने का प्रयास किया गया था लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। पुलिस ने ओम पिज्जा के संचालक सुमित और उसके साथी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सड़क हादसे में मासूम की जान, आक्रोशित भीड़ ने ड्राइवर की धुनाई की
9 Mar, 2026 01:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत। में सोमवार को एक बड़ा हादसा पेश आया। यहां थाना 1317 क्षेत्र के बरना गांव में रेत से भरी ट्रैक्टर ट्राली की टक्कर लगने से 7 साल के बच्चे की मौत हो गई। गुस्साए ग्रामीणों ने चालक को मौके पर ही पकड़ कर पीट दिया। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से चालक को भीड़ से बचाया और अस्पताल में भर्ती करवाया। बराना गांव के बाल किशन ने बताया कि उनका भतीजा शिवम घर के बाहर खेल रहा था। करीब नौ बजे राणा माजरा की ओर से रेत से भरी ट्रैक्टर ट्राली आई।
ट्राली की चपेट में आने से बच्चे की मौत हो गई। हादसे के बाद ट्रैक्टर चालक मौके से भागने लगा तो पास में ही काम कर रही महिलाओं ने चालक को पकड़ लिया। इसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने चालक को पीट दिया। सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और भीड़ के चंगुल से चालक को बचाया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। हरियाणा के पानीपत में एक दर्दनाक सड़क हादसे में 7 साल के बच्चे की मौत हो गई। हादसे के बाद गुस्साए लोगों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली के चालक की पिटाई कर दी।
हमने बच्चियों के स्कूल पर बम नहीं गिराया, ईरान ने खुद किया यह हमला: ट्रंप
9 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन,। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बीच ईरान के कई शहरों में भारी तबाही की खबरें सामने आ रही हैं। इसी बीच एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में एक प्राथमिक स्कूल पर बमबारी हुई। इस हमले में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हुई। शुरुआती रिपोर्टों में कहा गया कि यह हमला उस दिन हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की थी। हमले की भयावह तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद दुनिया भर में इसका विरोध हुआ। कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने सवाल उठाए कि आखिर बच्चियों के स्कूल तक जंग क्यों पहुंची।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब इस हमले को लेकर सवाल पूछा गया तो उनका जवाब भी विवादों में घिर गया। उन्होंने तुरंत जवाब दिया कि जो जानकारी उन्होंने देखी है उसके मुताबिक यह हमला ईरान ने खुद किया है। हालांकि शुरुआती जांच और कुछ अमेरिकी अधिकारियों के बयान इस दावे से अलग कहानी बताते हैं। यही वजह है कि ट्रंप के बयान पर अब सवाल उठ रहे हैं और आलोचक कह रहे हैं कि जंग के बीच सच को छिपाने की कोशिश की जा रही है। इस हमले में कम से कम 168 लोगों की मौत हुई थी। इनमें बड़ी संख्या में बच्चियां शामिल थीं। शुरुआती संकेत मिले कि हमले में इस्तेमाल किया गया हथियार अमेरिकी हो सकता है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर इसकी जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने बंद कमरे में हुई बैठक में सांसदों को बताया कि हमले के समय अमेरिकी सेना उसी इलाके में ऑपरेशन चला रही थी जहां यह स्कूल है। वहीं यह भी कहा गया कि इस हमले में इजराइल की कोई भूमिका नहीं थी। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। इस विवाद के बीच एक और दिलचस्प मोड़ तब आया जब ब्रिटेन ने मध्य पूर्व में अपने विमानवाहक पोत को तैनात करने की तैयारी दिखाई। ब्रिटेन की रॉयल नेवी का एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स कैरियर इस मिशन के लिए तैयार किया जा रहा था, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका को इस जंग में ब्रिटेन की मदद की जरूरत नहीं। उन्होंने कहा कि अगर मदद करनी थी तो दो हफ्ते पहले करते अब इसकी जरूरत नहीं है।
बता दें इस हमले को लेकर जांच जारी है और अमेरिकी प्रशासन भी आंतरिक जांच कर रहा है। शुरुआती संकेतों में कहा गया है कि हमले में अमेरिकी हथियार का इस्तेमाल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर जांच में यह साबित होता है तो यह अमेरिका के लिए बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन सकता है। दूसरी ओर ईरान भी इस घटना को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की तैयारी कर रहा है।
होर्मुज में एक और जहाज बना निशाना, आइलैंड्स का लगा था झंडा
9 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल का ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ लॉन्च होने के बाद से पूरा वेस्ट एशिया बारूद के ढेर पर बैठा है। होर्मुज की जलडमरूमध्य जो दुनिया के तेल व्यापार की लाइफलाइन मानी जाती है, अब जंग का मैदान बन चुकी है। इस तनाव ने तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। ईरान इस रास्ते को चोकहोल्ड करके बैठा है। वह कभी इस रास्ते को खोलने की बात करता है तो कभी यहां मिसाइलें दाग देता है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने शनिवार को दावा किया है कि उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक और जहाज को निशाना बनाया है। इस बार निशाने पर मार्शल आइलैंड्स का झंडा लगा तेल टैंकर था। ईरान का आरोप है कि यह टैंकर आतंकवादी अमेरिका की संपत्ति है। इस हमले के लिए एक सुसाइड ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जिसने फारस की खाड़ी के बीचों-बीच जहाज को टक्कर मारी। यह हमला उस समय हुआ है जब अमेरिका और इजराइल ने तेहरान के तेल ठिकानों पर बमबारी तेज कर दी है।
दुनिया का 25फीसदी समुद्री तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान पिछले 8 दिनों से इस समुद्री रास्ते पर कंट्रोल होने का दावा ठोक रहा है। आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि अमेरिका या इजराइल से जुड़े किसी भी जहाज को यहां से गुजरने नहीं दिया जाएगा। पिछले कुछ दिनों में जहाजों पर भी हमले हुए हैं। इन हमलों की वजह से कई बड़ी शिपिंग कंपनियों ने इस रास्ते से अपने जहाज भेजना बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय ईरान के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। उन्होंने ईरान से बिना शर्त सरेंडर की मांग की है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की कमर तोड़ दी है और अब बातचीत का समय निकल चुका है। दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस मांग को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह एक ऐसा सपना है जिसे वे अपनी कब्र तक ले जाएंगे। ईरान अब अपनी हार मानने के बजाय पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी बेस को निशाना बना रहा है।
भारतीय कुश्ती में समन्वय का अभाव, 17 मार्च की तारीख ने बढ़ाई परेशानी
9 Mar, 2026 10:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़।भारतीय कुश्ती जगत में एक बार फिर तालमेल की कमी का खामियाजा महिला पहलवानों को भुगतना पड़ रहा है। आने वाली 17 मार्च को एक ही दिन में कुश्ती से जुड़े दो आयोजन होने से महिला पहलवान असमंजस में हैं। वे ट्रायल दें या प्रतियोगिता में हिस्सा लें। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में होने वाली ऑल इंडिया अंतर विश्वविद्यालय कुश्ती प्रतियोगिता फ्री स्टाइल (महिला) चैंपियनशिप का कार्यक्रम पहले से 17 से 20 मार्च तक निर्धारित है। भारतीय कुश्ती संघ (डब्ल्यूएफआई) ने सर्कुलर जारी कर सीनियर एशियन कुश्ती चैंपियनशिप के चयन ट्रायल की तारीख बदलकर 17 मार्च कर दी है। फेडरेशन ने अल्बानिया से लौट रही टीम की फ्लाइट में देरी को इसका कारण बताया है।
खिलाड़ियों की दुविधा
- इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप : यह डिग्री और भविष्य की सरकारी नौकरियों (स्पोर्ट्स कोटा) के लिए अनिवार्य मानी जाती है।
- एशियन चैंपियनशिप ट्रायल : यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराने और ओलंपिक जैसे बड़े सपनों का प्रवेश द्वार है।
तारीख में परिवर्तन जरूरी
कुश्ती कोच विजय कुमार ने कहा, 17 तारीख को प्रतियोगिता और ट्रायल रखने से पहलवानों का नुकसान है। ब्लॉक व जिला स्तर के बाद राष्ट्रीय स्तर पर अपनी-अपनी श्रेणी में चयनित पहलवान शिविर में रहती हैं। जो खिलाड़ी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रही हैं वो अपने विश्वविद्यालय की तरफ से भी खेलती हैं। ऐसी हरियाणा की कई महिला पहलवान हैं। प्रशासन और फेडरेशन आपस में समन्वय बैठाकर तारीखों में थोड़ा बदलाव करें तो प्रतिभाशाली बेटियों का साल बर्बाद होने से बच सकता है। फिलहाल खिलाड़ी और उनके कोच इस उम्मीद में हैं कि शायद किसी एक आयोजन की तिथि में अंतिम समय पर राहत दी जाए।
साल भर की मेहनत होगी बेकार
सोनीपत की 76 किग्रा भार वर्ग में खेलने वालीं काजल, हिसार की 53 किग्रा भार वर्ग की ज्योति, रोहतक 68 किग्रा भार वर्ग की कीर्ति के मुताबिक एक ही तारीख पर प्रतियोगिता और ट्रायल निर्धारित करने के कारण असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने साल भर इन दोनों प्रतियोगिताओं के लिए पसीना बहाया है। अब एक ही दिन दोनों आयोजन होने से उन्हें किसी एक सुनहरे अवसर को छोड़ना पड़ेगा। उनके लिए दोनों ही प्रतियोगिताएं महत्वपूर्ण हैं। खिलाड़ियों ने भारतीय कुश्ती संघ से निवेदन है कि दोनों में किसी एक की तारीख में बदलाव करें।
कैंप वाली खिलाड़ियों के लिए ट्रायल, फिर भी चेक करवा लेंगे
इंडिया स्तर पर चयनित कैंप में रहने वाले पहलवानों के लिए एशियन चैंपियनशिप ट्रायल आयोजित कराया जा रहा है। इसमें दूसरे खिलाड़ियों की संख्या नहीं होती है। फिर भी एक बार पहलवानों की सूची की जांच करवा लेंगे। फेडरेशन खिलाड़ियों के हित में ही फैसला लेगा।
ईरान को मिला नया सुप्रीम लीडर: Mojtaba Khamenei के चयन के बाद सड़कों पर जश्न
9 Mar, 2026 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका और इजराइल के हमलों के बीच ईरान ने बड़ा फैसला लेते हुए दिवंगत आयतुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मुजतबा अली खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना है. ईरान के प्रेस टीवी ने एक्स पोस्ट में यह जानकारी दी. पोस्ट में कहा गया, "ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने आयतुल्लाह सैयद मुजतबा खामेनेई को इस्लामिक रिपब्लिक का नया लीडर नियुक्त किया है."
मुजतबा, अली खामेनेई के दूसरे नंबर के बेटे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने ईरानियों से एकता बनाए रखने और मुजतबा खामेनेई के साथ खड़े होने की अपील की है. मुजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर चुने जाने के बाद पूरे ईरान में जश्न का माहौल है. बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और अपनी खुशी का इजहार किया. IRGC और आर्म्ड फोर्सेज के जनरल स्टाफ ने मुजतबा खामेनेई को समर्थन दिया है.
ईरान की राजधानी तेहरान में हमले जारी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, मुजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर चुने जाने के बाद तेहरान में कई धमाकों की आवाज सुनी गईं.
उधर, ईरानी जवाबी हमलों में सऊदी अरब के अल-खारज में दो लोगों की मौत हो गई. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि ईरान के खिलाफ जंग में अब तक आठ अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं.
ईरान के विपक्षी नेताओं ने तैयार किया ब्लू प्रिंट, चाबहार पोर्ट फिर शुरु करने पर जोर
9 Mar, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। ईरान के विपक्षी नेताओं ने एक ब्लू प्रिंट तैयार किया है, जिसमें भारत के साथ चाबहार बंदरगाह परियोजना को दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव शामिल है। भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बड़े ऊर्जा बाजारों में से एक है। ऐसे में ईरान के विपक्षी नेताओं की ओर से जारी ब्लू प्रिंट में भारत को लंबे समय तक कच्चे तेल के निर्यात को फिर से बहाल करने की भी बात कही गई है। यह प्रस्ताव ईरान प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट की इमरजेंसी फेज बुकलेट में है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक ट्रांजिशनल सरकार ईरान की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति को किसी सरकार के गिरने के बाद पहले छह महीनों में कैसे स्थिर कर सकती है, इसे लेकर भी इस प्रस्ताव में बात कही गई है। 178 पेज के इस प्रस्ताव में ईरान की भविष्य की विदेश नीति में भारत को एक जरूरी आर्थिक और रणनीतिक साझेदार के तौर पर बताया गया है। इस प्रस्ताव का मकसद सालों के बैन और आइसोलेशन के बाद व्यापार लिंक को फिर से स्थापित करने और अंतरराष्ट्रीय निवेश को आकर्षित करने की कोशिश है।
इस प्लान के तहत ईरान देश के दक्षिण-पूर्वी तट पर चाबहार पोर्ट के विकास पर नई दिल्ली के साथ सहयोग फिर से शुरू करेगा। इसके साथ ही इसे फारस की खाड़ी और हिंद महासागर को मध्य एशिया से जोड़ने वाले एक कमर्शियल हब के तौर पर तैयार करने की योजना है। भारत के लिए इस पोर्ट को लंबे समय से पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और बड़े सेंट्रल एशियाई इलाके के लिए एक रणनीतिक गेटवे के तौर पर देखा जाता रहा है।
ब्लू प्रिंट के हिसाब से ईरान चीन और रूस जैसी बड़ी ग्लोबल ताकतों के साथ संबंधों को फिर से सुधारने पर जोर देने की योजना भी बना रहा है। वहीं, आर्थिक साझेदारी और राष्ट्रीय संप्रभुता के बीच संतुलन बनाए रखा जाएगा। दस्तावेजों में कहा गया है कि ईरान की आने वाली लीडरशिप दोनों देशों के साथ मौजूदा रणनीतिक समझौते की समीक्षा करेगी और साथ ही पारदर्शिता और आपसी हितों के आधार पर सहयोग जारी रखेगी। ब्लूप्रिंट में पाकिस्तान समेत पड़ोसी देशों के साथ जुड़ाव बढ़ाने का भी प्रस्ताव है, खासकर सुरक्षा, काउंटरटेररिज्म सहयोग और क्रॉस-बॉर्डर उग्रवादी गतिविधियों को रोकने जैसे क्षेत्रों में। क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी करीब 1978 से देश निकाला के चलते अमेरिका में रहे हैं। क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ईरान के आखिरी राजा के बेटे हैं।
ईरान की भौगोलिक स्थिति, फारस की खाड़ी, हिंद महासागर और सेंट्रल एशिया के बीच है। जब ईरान से प्रतिबंध हटेंगे और अंतरराष्ट्रीय संबंध सामान्य होंगे, तो देश की भौगोलिक स्थिति देश को एक बड़ा कमर्शियल चौराहा बनने दे सकती है। भारत ने चाबहार पोर्ट पर शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल को विकसित करने में पहले ही करीब 12 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया है। यह भारत को अफगानिस्तान और यूरेशिया से जोड़ने वाले व्यापार रूट को बढ़ाने की लंबे समय से चली आ रही कोशिश का हिस्सा है। यह योजना चाबहार को फिर से शुरू करना और भारत के साथ एनर्जी ट्रेड को फिर से शुरू करना ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़े पैमाने पर फिर से खोलने और दशकों के अकेलेपन के बाद ग्लोबल कॉमर्स में उसकी वापसी का संकेत होगा।
दुबई की 90 मंजिला इमारत में लगी आग, मरीना टॉवर के पास धुंआ-धुंआ फैला
9 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई। दुबई में स्थित मशहूर रिहायशी गगनचुंबी इमारत 23 मरीना टॉवर में शनिवार रात आग लग गई। यह घटना उस समय हुई जब ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे थे। सामने आए कई वीडियो में इमारत से घना धुआं उठता दिखाई दिया। करीब 90 मंजिला यह इमारत दुबई मरीना के सबसे पॉश इलाकों में गिनी जाती है, जहां बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक, पेशेवर और निवेशक रहते हैं। हालांकि बाद में अधिकारियों ने कहा कि इमारत पर सीधे कोई ड्रोन हमला नहीं हुआ था। यूएई की एयर डिफेंस सिस्टम ने आसमान में ही एक संभावित हमले को रोक दिया। उसी दौरान गिरे मलबे के कारण इमारत के बाहरी हिस्से में हल्का नुकसान हुआ और आग लग गई।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक बयान में कहा गया है कि एयर डिफेंस की तरफ से सफल इंटरसेप्शन के बाद गिरा मलबा दुबई मरीना की एक इमारत के बाहरी हिस्से से टकराया, जिससे छोटा हादसा हुआ स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
इस घटना की सूचना मिलते ही दमकल और आपातकालीन सेवाएं तुरंत मौके पर पहुंच गईं। एहतियात के तौर पर इमारत के कुछ हिस्सों को खाली कराया गया है। अधिकारियों ने अभी तक नुकसान का आकलन जारी नहीं किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक दुबई की यह घटना ऐसे समय हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने पहले ही नागरिकों को ईरान से संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों को लेकर सतर्क रहने की चेतावनी दी थी। यूएई के कई हिस्सों में लोगों ने जोरदार धमाकों की आवाजें भी सुनीं। ये आवाजें एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने के दौरान आईं। बता दें 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल की तरफ से ईरान के पर किए सैन्य हमलों के बाद से क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया है। इसके जवाब में ईरान ने कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी अरब, बहरीन और अजरबैजान जैसे देशों में भी धमाकों की खबरें सामने आई हैं।
इस बीच यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने भी देश की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि यूएई को कमजोर समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यूएई आकर्षक जरूर है, लेकिन इसके बाहरी रूप से भ्रमित न हों। यूएई मजबूत है और कोई आसान निशाना नहीं है। तनावपूर्ण हालात के चलते दुबई में कुछ समय के लिए हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ा है।
बालेंद्र शाह ने पीएम ओली को भारी मतों से हराया, पीएम बनने की राह पर
9 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। नेपाल में चुनावो में आरएसपी के बालेंद्र शाह ने पीएम के पी ओली को भारी मतों से हराकर सरकार बनाने की राह पर कदम रखा है। पिछले साल पीढ़ीगत बदलाव और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की मांग को लेकर हुए हिंसक ‘जेन जेड’ प्रदर्शनों के बाद हुए पहले आम चुनाव में उन्होंने पारंपरिक राजनीतिक दलों को करारा झटका दिया। रैपर से राजनीतिक नेता बने बालेंद्र शाह ‘बालेन’, जो राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के पीएम पद के उम्मीदवार हैं, उन्होंने झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी– सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष ओली को करीब 50,000 मतों के भारी अंतर से हराया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल चुनाव आयोग ने बताया कि 35 साल के बालेन ने 74 साल के ओली को 18,734 वोट के मुकाबले 68,348 वोट हासिल किए। रात घोषित परिणामों के मुताबिक रवि लामिछाने द्वारा 2022 में गठित आरएसपी ने अब तक घोषित 87 सीटों के परिणाम में 70 सीट पर जीत दर्ज की है। चुनाव निकाय के आंकड़ों में कहा गया कि आरएसपी ने काठमांडू जिले की सभी 10 सीट जीतकर सूपड़ा-साफ कर दिया और देश भर में 52 सीट पर आगे थे।
नेपाल में 5 मार्च को हुए प्रतिनिधि सभा चुनाव में करीब 60 फीसदी मतदान हुआ था। मतों की गिनती गुरुवार देर रात शुरू हुई और शनिवार शाम 5 बजे तक 162 निर्वाचन क्षेत्रों में गिनती जारी थी। भारत इस चुनाव पर बारीकी से नजर रख रहा था, जो राजनीतिक रूप से अस्थिर हिमालयी देश में एक स्थिर सरकार की उम्मीद कर रहा है ताकि दोनों पक्षों के बीच विकासात्मक साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सके।
इस बीच ओली ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि बालेन बाबू, जीत के लिए बधाई। नेपाल में पिछले 18 साल में 14 सरकार बन चुकी है। ओली ने बालेन को बधाई देते हुए कहा कि मैं कामना करता हूं कि आपका पांच साल का कार्यकाल निर्बाध, सफल हो और हार्दिक बधाई हो। ओली ने 2022 की एक तस्वीर संलग्न की जिसमें वह रैपर से राजनीतिक नेता बने बालेन को तबला भेंट करते हुए दिख रहे हैं, जब बालेन ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर का चुनाव जीता था। आरएसपी ने बालेंद्र शाह ‘बालेन’ को पीएम पद का अपना उम्मीदवार घोषित किया था और मधेस के जनकपुर से अपने पहले चुनाव अभियान की शुरुआत की थी। पार्टी इस प्रांत में दूसरे दलों का सूपड़ा साफ करती दिख रही है।
जंग का असर: अब सस्ता नहीं महंगा तेल बेचेंगे पुतिन, भारत के लिए बढ़ेगी मुश्किलें
8 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी भीषण संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सबसे बड़ा असर भारत की तेल आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ा है। पिछले चार वर्षों से भारत के लिए संकटमोचक बना सस्ता रूसी तेल अब अपनी चमक खोने लगा है। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, रूसी तेल पर मिलने वाला सेंक्शन डिस्काउंट (प्रतिबंधों के कारण मिलने वाली छूट) अब स्कैरसिटी प्रीमियम यानी किल्लत की ऊंची कीमत में तब्दील हो गया है। स्थिति यह है कि अब भारत को रूसी तेल अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की तुलना में भी महंगा मिल रहा है।
भारत के लिए यह बदलाव एक गंभीर आर्थिक संकट का संकेत है। कोरोना काल के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था को संभालने और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने में सस्ते रूसी तेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अब जबकि यूराल्स तेल अंतरराष्ट्रीय दरों को पार कर गया है और ब्रेंट क्रूड खुद 92 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुका है, घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। इस स्थिति का सीधा असर भारतीय रुपये की वैल्यू और मुद्रास्फीति पर पड़ना तय माना जा रहा है।
वर्ष 2022 में यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के समय रूस भारत को प्रति बैरल 15 से 30 डॉलर तक की भारी छूट दे रहा था, लेकिन मार्च और अप्रैल 2026 की डिलीवरी के लिए बाजार के हालात बिल्कुल उलट चुके हैं। अब रूसी तेल ब्रेंट क्रूड से भी लगभग 4-5 डॉलर प्रति बैरल महंगा मिल रहा है। इस मूल्य वृद्धि के पीछे मुख्य कारण खाड़ी देशों से आने वाले तेल का युद्ध के कारण रास्ते में फंसना है। लगभग 14 लाख बैरल तेल की आपूर्ति बाधित होने से भारतीय रिफाइनरियां अपनी अनिवार्य जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस की ओर रुख कर रही हैं, जिसका लाभ उठाते हुए रूसी निर्यातकों ने कीमतें बढ़ा दी हैं।इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की विरोधाभासी तेल कूटनीति ने भी आग में घी डालने का काम किया है। पहले भारत-रूस तेल व्यापार पर आपत्ति जताने वाला अमेरिका अब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें संतुलित करने के लिए भारत से रूसी तेल खरीदने की गुजारिश कर रहा है। जैसे ही यह संकेत मिला कि पश्चिम को रूसी तेल की आपूर्ति की आवश्यकता है, रूसी निर्यातकों ने मौके का फायदा उठाते हुए दरों में भारी इजाफा कर दिया। इसके अलावा, रसद और परिवहन की समस्याओं ने भी लागत को आसमान पर पहुंचा दिया है। मध्य पूर्व में तनाव के कारण जहाजों को केप ऑफ गुड होप यानी अफ्रीका के नीचे से लंबा चक्कर लगाकर आना पड़ रहा है, जिससे समुद्री बीमा और माल ढुलाई का खर्च कई गुना बढ़ गया है।
ईरान पर स्ट्राइक का असर अब अमेरिका पर दिखा, तेल भंडार हो गया खाली!
8 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। मिडिल ईस्ट और वेस्ट एशिया के आसमान में फाइटर जेट्स मंडरा रहे हैं। अमेरिका और इजराइल की ईरान पर स्ट्राइक के बाद अब इसका सबसे बुरा असर अमेरिका पर ही दिखने लगा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक रणनीति आज उनके लिए गले की फांस बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप ने अपने देश के स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को भरने का मौका गंवा दिया है। जब तेल की कीमतें कम थीं, तब ट्रंप प्रशासन ने खजाना नहीं भरा और अब जब ईरान के साथ युद्ध जारी है, तो अमेरिका के पास इमरजेंसी के लिए पर्याप्त तेल नहीं बचा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका इस समय एक बड़े ‘ऑयल शॉक’ की दहलीज पर खड़ा है। आम जनता पर इसका बोझ पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के रूप में दिखने लगा है।
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व यानी एसपीआर साल 1974 में बनाया गया था। इसका मकसद किसी भी बड़े युद्ध या संकट के समय देश में तेल की सप्लाई को बनाए रखना था। जो बाइडन ने अपने कार्यकाल के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध के समय पेट्रोल की कीमतें कंट्रोल करने के लिए इस रिजर्व से भारी मात्रा में तेल निकाला था। ट्रंप ने सत्ता में आते ही वादा किया था कि वो इस रिजर्व को फिर से लबालब भर देंगे, लेकिन रिपोर्ट बताती है कि यह वादा सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया। आज स्थिति यह है कि अमेरिका का यह रिजर्व अपनी कुल क्षमता 71.4 करोड़ बैरल के मुकाबले सिर्फ 41.5 करोड़ बैरल पर सिमट गया है। यह स्टॉक अमेरिका की जरूरतों के हिसाब से सिर्फ 20 दिनों का बचा है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने ग्लोबल ऑयल मार्केट को हिला कर रख दिया है। तेहरान ने खाड़ी देशों के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर जवाबी हमले किए हैं, जिससे सप्लाई पूरी तरह ठप होने का डर है। सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। दुनिया का 20 फीसदी तेल यहीं से होकर गुजरता है। अगर ईरान ने इस रास्ते को बंद कर दिया तो अमेरिका के पास अपने रिजर्व को भरने का कोई रास्ता नहीं बचेगा। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के प्रोफेसर कहते हैं कि ट्रंप प्रशासन ने तब मौका छोड़ दिया जब कीमतें कम थीं। अब युद्ध के माहौल में कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि रिजर्व को भरना आर्थिक रूप से बहुत महंगा साबित होगा।
अमेरिका-इजराइल ने स्कूलों और अस्पतालों को जानबूझकर निशाना बनाया
8 Mar, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जेनेवा। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि आमिर सईद इरवनी ने दावा किया है कि 28 फरवरी से ईरान पर हुए अमेरिकी और इजराइली हमलों में अब तक 1,332 आम लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। इरवानी ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। उनके मुताबिक इन हमलों में हजारों लोग घायल हुए हैं और घायलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलों के दौरान स्कूलों, अस्पतालों और अन्य नागरिक बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन हमलों ने आम नागरिकों को भारी नुकसान पहुंचाया है और कई क्षेत्रों में मानवीय स्थिति गंभीर है।
मीडिया रिपोर्ट में इरवानी के मुताबिक हाल ही में ईरान में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले में 150 से ज्यादा छात्राओं की मौत हो गई। इस घटना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है। हालांकि अमेरिका ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसने किसी भी नागरिक ढांचे को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले के मामले में जांच की जाएगी।
वहीं दूसरी ओर इजराइल ने भी ईरान पर अपने नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप से हालात और जटिल होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते हमलों और बढ़ती जनहानि के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र समेत कई वैश्विक संस्थाएं क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति बहाली के प्रयासों पर जोर दे रही हैं।
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