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गवाह से बड़ी रकम बरामद, पुलिस ने शुरू की आगे की जांच
25 Apr, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आसाराम और नारायण साईं मामलों में मुख्य गवाह रहे महेंद्र चावला की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पुलिस ने जबरन वसूली के मामले में कार्रवाई करते हुए उनके पास से अब तक 42 लाख रुपये की नकद राशि बरामद कर ली है। पुलिस रिमांड की अवधि समाप्त होने के बाद शनिवार को महेंद्र चावला को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
महेंद्र चावला, उनके भाई देवेंद्र चावला और भतीजे राम को पुलिस ने 18 अप्रैल को गिरफ्तार किया था। इनके खिलाफ सेक्टर-12 के निवासी भगत सिंह ने चांदनीबाग थाने में केस दर्ज कराया था।
मुख्य आरोप: आरोप है कि महेंद्र चावला ने सनौली गांव के पूर्व सरपंच सुरेंद्र शर्मा के साथ चल रहे एक कानूनी मामले में अपनी गवाही से पलटने के बदले 70 लाख रुपये लिए थे।
अतिरिक्त मांग: शिकायतकर्ता के अनुसार, इसके बाद आरोपियों द्वारा 80 लाख रुपये की और मांग की जा रही थी।
पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने महेंद्र चावला को दो बार रिमांड पर लिया:
पहला रिमांड: पहले तीन दिनों की पूछताछ में पुलिस ने 24 लाख रुपये बरामद किए थे। इस दौरान उनके भाई देवेंद्र और भतीजे राम को जेल भेज दिया गया था।
दूसरा रिमांड: महेंद्र चावला को दोबारा दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया, जिसमें पुलिस ने 18 लाख रुपये और बरामद किए।
अब तक कुल मिलाकर 42 लाख रुपये की रिकवरी की जा चुकी है।
फरार आरोपी की तलाश
पूछताछ में यह तथ्य सामने आया है कि वसूली गई बाकी की रकम महेंद्र चावला के दूसरे भतीजे के पास है। पुलिस की टीमें फरार आरोपी की गिरफ्तारी और बकाया नकदी की बरामदगी के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं।
आधिकारिक बयान: मुख्यालय डीएसपी सतीश वत्स ने पुष्टि की है कि आरोपी महेंद्र चावला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और शेष राशि की बरामदगी के लिए दबिश दी जा रही है।
अमेरिका में सख्ती की तैयारी, विदेशी वर्कर्स पर फोकस
25 Apr, 2026 04:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
H-1B वीजा पर संकट: अमेरिकी संसद में नया विधेयक पेश, भारतीय पेशेवरों की राह हो सकती है मुश्किल
वॉशिंगटन। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के तहत विदेशी कामगारों और प्रवासियों को लेकर नियमों को और सख्त करने की कवायद तेज हो गई है। हाल ही में रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने अमेरिकी कांग्रेस में एक बेहद कड़ा विधेयक पेश किया है, जिसका सीधा असर भारत और चीन जैसे देशों के कुशल पेशेवरों पर पड़ सकता है।
इस विधेयक का नाम 'एंड एच-1बी वीजा अब्यूज एक्ट 2026' है। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी श्रमिकों की निर्भरता कम कर अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर सुरक्षित करना बताया गया है।
क्या है 'एंड एच-1बी वीजा अब्यूज एक्ट 2026'?
यह विधेयक एरिजोना के रिपब्लिकन सांसद एली क्रेन और उनके सहयोगियों द्वारा पेश किया गया है। इन सांसदों का तर्क है कि बड़ी कंपनियां एच-1बी वीजा का दुरुपयोग कर स्थानीय अमेरिकी नागरिकों के बजाय कम वेतन पर विदेशी पेशेवरों को नियुक्त कर रही हैं।
विधेयक के प्रमुख और कड़े प्रस्ताव:
वीजा पर 3 साल का पूर्ण प्रतिबंध: नए एच-1बी वीजा जारी करने पर तत्काल प्रभाव से तीन साल की रोक लगाने का प्रस्ताव है।
सालाना कोटा में कटौती: हर साल जारी होने वाले वीजा की सीमा को 65,000 से घटाकर मात्र 25,000 करने की बात कही गई है।
न्यूनतम वेतन में भारी वृद्धि: एच-1बी कर्मचारियों का सालाना न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 2 लाख डॉलर (लगभग 1.87 करोड़ रुपये) करने का सुझाव है, ताकि कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारी महंगे साबित हों।
H-4 वीजा का खात्मा: पेशेवरों के जीवनसाथी और बच्चों को मिलने वाले आश्रित वीजा (H-4) को बंद करने का प्रस्ताव है।
ग्रीन कार्ड की राह बंद: इस विधेयक के तहत एच-1बी धारकों को स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) हासिल करने से रोकने का प्रावधान है।
छात्रों पर असर: अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद काम करने की अनुमति देने वाले ओपीटी (OPT) कार्यक्रम को खत्म करने की बात कही गई है।
भारी-भरकम फीस: विदेशी कर्मचारी रखने पर कंपनियों को 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस देनी होगी।
भारत और चीन पर क्या होगा असर?
अगर यह विधेयक कानून बनता है, तो इसका सबसे बड़ा प्रहार भारतीय आईटी सेक्टर और पेशेवरों पर होगा।
आंकड़े: वित्त वर्ष 2024 में कुल मंजूर एच-1बी याचिकाओं में से 71% (लगभग 2.83 लाख) भारतीय नागरिकों की थीं।
प्रवेश पर रोक: नए पेशेवरों के अमेरिका जाने का रास्ता लगभग बंद हो जाएगा और वहां मौजूद लोगों को भी वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
विकल्प: हालांकि, उच्च पदों पर बैठे अधिकारी L-1 वीजा का उपयोग जारी रख सकेंगे, लेकिन सामान्य आईटी पेशेवरों के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
जानकारों का मानना है कि इस विधेयक को पारित कराना इतना आसान नहीं होगा। अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में इसे बहुमत प्राप्त करना होगा, विशेषकर सीनेट में जहाँ 60 वोटों की आवश्यकता होती है। कई विश्लेषक इसे वास्तविक नीतिगत बदलाव के बजाय एक राजनैतिक संकेत मान रहे हैं।
दूसरी ओर, 'इमिग्रेशन अकाउंटेबिलिटी प्रोजेक्ट' जैसे समूहों का कहना है कि यह अब तक का सबसे मजबूत बिल है जो वास्तव में अमेरिकी श्रमिकों के हितों की रक्षा करेगा।
ट्रंप समर्थकों द्वारा पेश किए गए अन्य प्रमुख विधेयक:
इस नए एक्ट से पहले भी एच-1बी कार्यक्रम को निशाना बनाने वाले कई प्रस्ताव लाए जा चुके हैं:
द एसिमिलेशन एक्ट: एच-1बी को पूरी तरह खत्म करने और वीजा लॉटरी बंद करने का प्रस्ताव।
द एक्साइल एक्ट: साल 2027 तक एच-1बी वीजा की संख्या को शून्य (0) करने की मांग।
द पॉज एक्ट: छात्र प्रशिक्षण कार्यक्रमों को रद्द करने और एच-1बी श्रेणी को ही समाप्त करने का सुझाव।
$100,000 फीस नियम: राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रस्तावित वह नियम जिसमें नए आवेदनों पर भारी शुल्क लगाने की बात कही गई है।
चुनावी मैदान में महिलाओं की मजबूत एंट्री, पार्टियों की नई रणनीति
25 Apr, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संसद में पारित होने के बाद, अब इसका प्रभाव जमीनी स्तर पर भी नजर आने लगा है। आगामी निकाय चुनावों में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने टिकट वितरण में महिलाओं को खासी तरजीह दी है। यह बदलाव साफ संकेत देता है कि राजनीतिक दल अब महिलाओं को केवल 'वोट बैंक' के रूप में ही नहीं, बल्कि सक्रिय नेतृत्व के तौर पर देख रहे हैं।
टिकट वितरण: भाजपा बनाम कांग्रेस
निकाय चुनावों (नगर निगम, परिषद और पालिका) के लिए जारी की गई सूचियों में दोनों प्रमुख दलों ने महिलाओं को महत्वपूर्ण भागीदारी दी है:
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा): पार्टी ने अब तक घोषित 117 उम्मीदवारों में से 47 सीटों पर महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा है। यह कुल सीटों का लगभग 40.7% है।
कांग्रेस: कांग्रेस ने अब तक जारी 45 टिकटों में से 27 महिलाओं को आवंटित किए हैं, जो कि 60% की बड़ी हिस्सेदारी है। हालांकि, कांग्रेस की अंतिम सूची 25 अप्रैल तक आने की संभावना है, जिससे ये आंकड़े बदल सकते हैं।
प्रमुख जिलों में भागीदारी का विवरण
जिला/निकाय
भाजपा (महिला उम्मीदवार)
कांग्रेस (महिला उम्मीदवार)
सोनीपत
22 में से 9
18 में से 9
अंबाला
20 में से 9
20 में से 8
पंचकूला
20 में से 7
18 में से 6
मेयर पद
3 में से 1
3 में से 2
रेवाड़ी
32 में से 13
सूची प्रतीक्षित
सांपला
16 में से 6
सूची प्रतीक्षित
सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ी जांच, लोगों से सतर्क रहने की अपील
25 Apr, 2026 02:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश में आतंकी हमले का अलर्ट: संसद और सैन्य ठिकानों सहित कई संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा बढ़ाई गई
ढाका। बांग्लादेश में संभावित आतंकवादी हमलों की खुफिया जानकारी मिलने के बाद पूरे देश में 'नेशनल सिक्योरिटी अलर्ट' जारी कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने राष्ट्रीय संसद, धार्मिक स्थलों, सैन्य प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक मनोरंजन केंद्रों को संभावित खतरों की सूची में रखा है। विशेष रूप से शस्त्रागारों (आर्मरियों) की सुरक्षा को लेकर कड़ा निर्देश दिया गया है।
खुफिया रिपोर्ट के बाद बढ़ी हलचल
पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, यह गोपनीय अलर्ट हालिया खुफिया इनपुट्स के आधार पर जारी किया गया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई करें।
क्या है अलर्ट की मुख्य वजह?
बताया जा रहा है कि हाल ही में एक प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन के सक्रिय सदस्य, इस्तिक अहमद सामी उर्फ अबू बकर की गिरफ्तारी हुई है। पूछताछ में सामने आया है कि वह सेना से बर्खास्त किए गए दो पूर्व कर्मियों के संपर्क में था।
सुरक्षा रिपोर्टों में दो मुख्य साजिशकर्ताओं को चिन्हित किया गया है, जिन्हें देश की सुरक्षा के लिए 'अत्यंत घातक' माना जा रहा है।
हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी किसी विशेष आतंकी संगठन के नाम का खुलासा नहीं किया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों को कड़े निर्देश
आतंकवाद विरोधी अभियानों को और तेज करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने विशेष इकाइयों को सक्रिय कर दिया है, जिनमें शामिल हैं:
सीआईडी (CID): आपराधिक जांच विभाग को निगरानी तेज करने को कहा गया है।
विशेष शाखा (SB): खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीटीटीसी (CTTC): आतंकवाद निरोधक और अंतर्राष्ट्रीय अपराध इकाई को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
US-Iran Talks: ईरान ने साफ किया रुख, शर्तों के बिना बातचीत नहीं
25 Apr, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक हलचल: मध्यस्थ की भूमिका में पाकिस्तान सक्रिय
तेहरान/इस्लामाबाद। पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के मध्य रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच सीधे संवाद के रास्ते बंद हैं, लेकिन बैक-चैनल कूटनीति के जरिए संपर्क साधने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में उभरकर सामने आया है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयास
हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद का दौरा किया, जहाँ उन्होंने पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व (जनरल असीम मुनीर) के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय शांति और दोनों प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच संवाद के लिए एक साझा मंच तैयार करना था। पाकिस्तान इस समय वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक सेतु (Bridge) की भूमिका निभाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है।
सीधे संवाद की राह में प्रमुख चुनौतियाँ
ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी सीधी मेज पर बैठने के लिए कड़ी शर्तें रखी हैं:
प्रतिबंधों का मुद्दा: ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी आर्थिक और सामरिक नाकाबंदी खत्म नहीं करता, तब तक सीधी बातचीत संभव नहीं है।
अप्रत्यक्ष संवाद: ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में कोई भी सीधी बैठक प्रस्तावित नहीं है। तेहरान अपने संदेशों और चिंताओं को पाकिस्तानी दूतों के माध्यम से अमेरिका तक पहुँचाने के विकल्प पर काम कर रहा है।
तनाव के प्रमुख कारण
पिछले कुछ महीनों में दोनों शक्तियों के बीच संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
सैन्य तैनाती: अमेरिका द्वारा क्षेत्र में नौसैनिक बेड़े भेजे जाने से स्थिति संवेदनशील हो गई है।
समुद्री मार्ग का अवरोध: जवाबी कार्रवाई में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी और जहाजों की जब्ती ने संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है।
बंदरगाहों की नाकाबंदी: दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के व्यापारिक हितों को चोट पहुँचाने की कोशिशों से अविश्वास और गहरा गया है।
अन्य वैश्विक मध्यस्थ
पाकिस्तान के अलावा ओमान और रूस भी इस कूटनीतिक गतिरोध को कम करने में जुटे हैं। विशेष रूप से ओमान का इतिहास ईरान और अमेरिका के बीच जिनेवा जैसे मंचों पर सफल अप्रत्यक्ष वार्ता कराने का रहा है।
ईरान की आंतरिक राजनीति का असर
ईरान के भीतर चल रही वैचारिक खींचतान भी वार्ता की राह में एक बड़ा रोड़ा है। वहाँ के उदारवादी और कट्टरपंथी धड़ों के बीच कूटनीति को लेकर अलग-अलग राय है। दूसरी ओर, अमेरिकी नेतृत्व ईरान की इस आंतरिक स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और फिलहाल संघर्ष विराम जैसी स्थितियों को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाकर कूटनीति को एक मौका देना चाहता है।
मिडिल ईस्ट में हलचल: खामेनेई के बेटे को लेकर फैली खबरों का सच
25 Apr, 2026 12:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान-इस्राइल युद्ध: मोजतबा खामेनेई की रहस्यमयी स्थिति और सुरक्षा चक्र पर बड़ा खुलासा
तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान के भावी नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हैं। 28 फरवरी को हुए हमले के बाद अमेरिका और इस्राइल को उम्मीद थी कि ईरान में सत्ता परिवर्तन आसान होगा, लेकिन अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई ने इस योजना को कड़ी चुनौती दी है।
खुफिया एजेंसियों को दे रहे हैं चकमा
ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी के हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मोजतबा न सिर्फ जीवित हैं, बल्कि एक गुप्त स्थान से देश और सेना का संचालन कर रहे हैं। सीआईए (CIA) और मोसाद (Mossad) जैसी एजेंसियों से बचने के लिए उनकी सुरक्षा में अभूतपूर्व बदलाव किए गए हैं:
डिजिटल दूरी: उनके ठिकाने पर इंटरनेट या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क का उपयोग पूरी तरह वर्जित है।
मानव श्रृंखला: मोजतबा तक संदेश पहुंचाने के लिए केवल हस्तलिखित पत्रों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें भरोसेमंद दूतों के माध्यम से पहुंचाया जाता है।
अज्ञात लोकेशन: उनकी सुरक्षा इतनी कड़ी है कि आईआरजीसी (IRGC) के शीर्ष कमांडर भी सीधे उनसे नहीं मिलते, ताकि कोई उनकी लोकेशन को ट्रैक न कर सके।
सार्वजनिक रूप से सामने न आने की वजह
विशेषज्ञों और ईरानी अधिकारियों के हवाले से खबर है कि मोजतबा शारीरिक रूप से घायल हैं और वह अपनी 'कमजोर' छवि दुनिया के सामने पेश नहीं करना चाहते। यही कारण है कि उनकी ओर से केवल लिखित बयान जारी किए जाते हैं, जिन्हें सरकारी मीडिया द्वारा पढ़ा जाता है।
बदलते दावे और हकीकत
जहाँ अमेरिका और इस्राइल शुरुआत में उनके मारे जाने या पूरी तरह अक्षम होने का दावा कर रहे थे, वहीं अब यह स्पष्ट हो रहा है कि वह मानसिक रूप से सक्रिय हैं। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में मोजतबा पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हैं और वह 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' के सहयोग व सामूहिक निर्णयों के आधार पर शासन चला रहे हैं।
जॉर्जिया मेलोनी का देसी अंदाज वायरल, झुमकों ने खींचा ध्यान
25 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इटली। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी एक बार फिर इंटरनेट पर सुर्खियां बटोर रही हैं। इस बार उनकी चर्चा का कारण कोई कूटनीतिक समझौता नहीं, बल्कि उनका खास अंदाज और एक्सेसरीज हैं। मेलोनी द्वारा साझा की गई एक हालिया तस्वीर ने भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया, क्योंकि इसमें वे पारंपरिक भारतीय 'झुमका' पहने नजर आईं।
विंटर लुक के साथ भारतीय झुमकों का संगम
जॉर्जिया मेलोनी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक सेल्फी साझा की, जिसमें उनका पहनावा काफी पेशेवर और प्रभावशाली था। उन्होंने चारकोल रंग का ब्लेजर और बेज निट टॉप पहना था। उनके इस पॉलिश्ड विंटर लुक में जो चीज सबसे अलग दिखी, वह थे उनके कान के झुमके। इन झुमकों पर घुंघरू शैली की बारीक कारीगरी थी, जो स्पष्ट रूप से भारतीय पारंपरिक आभूषणों की याद दिलाती है।
राजनीतिक संदेश पर भारी पड़ा फैशन
दिलचस्प बात यह है कि इस पोस्ट के जरिए मेलोनी ने इटली के राष्ट्रीय हितों, स्वतंत्रता और प्रचार (Propaganda) को लेकर एक गंभीर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की थी। हालांकि, भारतीय इंटरनेट यूजर्स की नजरें उनके संदेश से ज्यादा उनके कानों के झुमकों पर टिक गईं। देखते ही देखते यह तस्वीर भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गई।
भारतीय यूजर्स की प्रतिक्रिया: 'सांस्कृतिक जीत'
तस्वीर वायरल होते ही कमेंट सेक्शन में भारतीयों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई:
सांस्कृतिक प्रभाव: कई लोगों ने इसे 'सॉफ्ट पावर' का उदाहरण बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और फैशन अब वैश्विक स्तर पर बड़े नेताओं को भी प्रभावित कर रहा है।
मजेदार मीम्स: कुछ यूजर्स ने इसे हल्के-फुल्के अंदाज में 'बॉलीवुड स्टाइल' बताया, तो कुछ ने कहा कि भारतीय झुमकों की सुंदरता के आगे पूरी दुनिया नतमस्तक है।
अनोखा मेल: यूजर्स इस बात से काफी प्रभावित दिखे कि मेलोनी ने पश्चिमी औपचारिक कपड़ों (वेस्टर्न फॉर्मल्स) के साथ भारतीय झुमकों का इतना सुंदर तालमेल बैठाया है।
वैश्विक मंच पर भारतीय परंपरा का गौरव
भारत में झुमका केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि एक गहरी सांस्कृतिक पहचान है। सदियों से यह त्योहारों, शादियों और भारतीय श्रृंगार का अभिन्न अंग रहा है। आज की आधुनिक पीढ़ी भी इसे बड़े चाव से पहनती है।
जब इटली जैसे देश की प्रधानमंत्री वैश्विक मंच पर भारतीय कला का प्रतिनिधित्व करने वाला आभूषण पहनती हैं, तो यह न केवल भारतीयों के लिए गर्व का क्षण बन जाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कला और सौंदर्य की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती। मेलोनी का यह 'झुमका मोमेंट' भारतीयों के लिए एक सुखद और अपनापन महसूस कराने वाला पल साबित हुआ।
इस्लामाबाद में सख्त लॉकडाउन, सड़कों पर पसरा सन्नाटा
25 Apr, 2026 11:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इन दिनों कूटनीतिक हलचलों और सख्त सुरक्षा घेरे के कारण पूरी तरह ठहर सी गई है। पिछले एक सप्ताह से जारी सुरक्षा लॉकडाउन ने आम नागरिकों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की संभावित वार्ता को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। सुरक्षा के मद्देनजर शहर के मुख्य रास्तों को अवरुद्ध कर दिया गया है और दूतावासों वाले 'रेड जोन' को किले में तब्दील कर दिया गया है।
बाजारों पर असर और नागरिकों की बेबसी
इस्लामाबाद का सबसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र 'ब्लू एरिया' वर्तमान में सन्नाटे की चपेट में है।
आपूर्ति में कमी: बाजारों और कैफे में जरूरी सामान का संकट खड़ा हो गया है।
यातायात ठप: सार्वजनिक बसें और परिवहन सेवाएं बंद होने से कामकाजी लोग और छात्र अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर पैदा हुई इस अनिश्चितता ने उनके जीवन की गति रोक दी है।
कुछ ही हफ्तों में दूसरा लॉकडाउन
गौरतलब है कि पिछले कुछ हफ्तों के भीतर यह दूसरी बार है जब इस्लामाबाद को पूरी तरह सील किया गया है।
इससे पहले 11 अप्रैल को भी अमेरिका-ईरान वार्ता के दौरान ऐसा ही लॉकडाउन लगाया गया था, हालांकि वह बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई थी।
पाबंदियां हटने के कुछ समय बाद, कूटनीतिक सरगर्मियां फिर से तेज होने पर शहर को दोबारा बंद करना पड़ा है।
ईरान के विदेश मंत्री का दौरा और बातचीत का सस्पेंस
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची शुक्रवार देर रात इस्लामाबाद पहुंचे। उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख, विदेश मंत्री और गृह मंत्री के साथ महत्वपूर्ण बैठकें की हैं।
वार्ता पर संशय: अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत होगी या नहीं, इस पर अब भी धुंध छाई हुई है।
मध्यस्थ की भूमिका: ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि फिलहाल अमेरिका के साथ कोई सीधी मीटिंग तय नहीं है; वे पाकिस्तान के जरिए अपनी राय साझा करेंगे। दूसरी ओर, व्हाइट हाउस ने अपने विशेष दूतों को पाकिस्तान भेजने के संकेत दिए हैं, लेकिन उनकी टीम अभी इस्लामाबाद नहीं पहुंची है।
क्षेत्रीय शांति के लिए पाकिस्तान की कोशिश
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने आशा व्यक्त की है कि इस संवाद से मध्य पूर्व में तनाव कम होगा और स्थिरता आएगी। पाकिस्तान फरवरी से जारी अमेरिका-ईरान विवाद को सुलझाने के लिए एक सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि प्रस्तावित बातचीत की तैयारियां पूरी हैं, बस दोनों पक्षों के रुख स्पष्ट होने का इंतजार है।
समुद्र में बढ़ती सख्ती: US Navy की इंटरसेप्शन कार्रवाई से तनाव
25 Apr, 2026 10:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
समुद्र में बढ़ा तनाव: अमेरिकी नौसेना ने ईरानी जहाज को रोका, नाकाबंदी की रणनीति हुई तेज
फ्लोरिडा (अमेरिका)| अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि अमेरिकी नौसेना के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS राफेल पेराल्टा (DDG 115) ने समुद्र में एक ईरानी ध्वज वाले जहाज को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया है। यह कार्रवाई अमेरिका के एक विशेष समुद्री मिशन का हिस्सा है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भू-राजनीतिक गरमाहट एक बार फिर बढ़ गई है।
24 अप्रैल की कार्रवाई का विवरण
नौसेना के सूत्रों के अनुसार, 24 अप्रैल को इस जहाज की संदिग्ध गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी जा रही थी। जब यह स्पष्ट हुआ कि जहाज ईरान के बंदरगाह की ओर अग्रसर है, तब अमेरिकी युद्धपोत ने त्वरित कदम उठाते हुए उसे रोका। इसके बाद अमेरिकी मरीन ने जहाज पर चढ़कर (Boarding) गहन तलाशी अभियान शुरू किया।
अमेरिका की सख्त समुद्री नीति और 'डार्क फ्लीट' पर प्रहार
पेंटागन में आयोजित ब्रीफिंग के दौरान जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने अमेरिका के कड़े रुख को स्पष्ट किया:
समुद्री नाकाबंदी: अमेरिका अब ईरान के खिलाफ और अधिक आक्रामक नाकाबंदी नीति अपना रहा है।
डार्क फ्लीट पर शिकंजा: 8 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान के तहत अब तक 34 जहाजों को रोका जा चुका है। इनमें से कई 'डार्क फ्लीट' (प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल जहाज) श्रेणी के थे।
चेतावनी: अमेरिकी सेना ने साफ कर दिया है कि ईरान के बंदरगाहों की ओर जाने वाले या वहां से निकलने वाले किसी भी संदिग्ध जहाज को जांच का सामना करना होगा।
हालिया सैन्य ऑपरेशंस की श्रृंखला
पिछले कुछ दिनों में अमेरिकी सेना ने कई महत्वपूर्ण जहाजों पर नियंत्रण हासिल किया है:
मोटर वेसल तोस्का: चेतावनी की अनदेखी करने पर अमेरिकी मरीन ने हेलीकॉप्टर के जरिए इस जहाज को जब्त किया।
टैंकर टिफ़नी (20 अप्रैल): इसमें कथित तौर पर प्रतिबंधित ईरानी कच्चा तेल ले जाया जा रहा था, जिसे रोक दिया गया।
मैजेस्टिक एक्स (22 अप्रैल): हिंद महासागर में इस जहाज को अमेरिकी सेना ने अपने कब्जे में लिया।
ऐतिहासिक संदर्भ और सैनिकों का सम्मान
ब्रीफिंग के दौरान जनरल केन ने 1983 के बेरूत हमले को याद करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने वर्तमान मिशनों में तैनात सैनिकों के साहस की सराहना करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना राष्ट्रपति के आदेश पर किसी भी बड़े सैन्य अभियान को फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह सुसज्जित और तैयार है।
रूस का दावा: यूक्रेन संकट के पीछे पश्चिम की रणनीति
25 Apr, 2026 10:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सर्गेई लावरोव का कड़ा प्रहार: "यूक्रेन के बहाने रूस के खिलाफ सीधा युद्ध लड़ रहा है पश्चिम"
यूक्रेन| रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पश्चिमी शक्तियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अब यूक्रेन संघर्ष केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि रूस के विरुद्ध एक 'खुला युद्ध' बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश यूक्रेन को एक ढाल के रूप में इस्तेमाल कर अपना असली एजेंडा चला रहे हैं।
"पश्चिमी मदद के बिना कीव का टिकना असंभव"
रूसी गैर-सरकारी संगठनों के साथ एक संवाद के दौरान लावरोव ने यूक्रेन की वर्तमान स्थिति पर तीखी टिप्पणी की:
मोहरे की तरह इस्तेमाल: उन्होंने कहा कि कीव प्रशासन पश्चिमी देशों के लिए 'भाले की नोक' की तरह काम कर रहा है।
पूर्ण निर्भरता: लावरोव के अनुसार, पश्चिमी हथियारों, सैटेलाइट डेटा, खुफिया सूचनाओं और भारी आर्थिक सहायता के बिना यूक्रेन की सैन्य क्षमता समाप्त हो चुकी होती।
यूरोपीय सैन्य तैयारी: उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ यूरोपीय सैन्य अधिकारी अब सार्वजनिक रूप से रूस के खिलाफ सीधे टकराव की बात करने लगे हैं।
यूरोप से बढ़ता वैश्विक खतरा
रूसी विदेश मंत्री ने इतिहास का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि आधुनिक काल में यह तीसरी बार है जब पूरी दुनिया के लिए खतरा यूरोप की धरती से पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की नीतियां अंतरराष्ट्रीय शांति को दांव पर लगाकर अस्थिरता को बढ़ावा दे रही हैं।
धार्मिक दमन का उठाया मुद्दा
लावरोव ने यूक्रेन में 'यूक्रेनी ऑर्थोडॉक्स चर्च' के साथ हो रहे व्यवहार की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि:
चर्चों पर अवैध कब्जे और तोड़फोड़ की जा रही है।
धर्मगुरुओं और श्रद्धालुओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिसके तहत 180 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
यूरोपीय संघ का बड़ा दांव: 90 अरब यूरो का सहायता पैकेज
तनाव के बीच यूरोपीय संघ (EU) ने यूक्रेन के लिए एक विशाल सहायता राशि की घोषणा की है:
वित्तीय मदद: कुल 90 अरब यूरो के पैकेज को मंजूरी दी गई है।
रक्षा आवंटन: इसमें से 60 अरब यूरो सैन्य उपकरणों की खरीद और रक्षा उत्पादन बढ़ाने के लिए रखे गए हैं।
प्रतिबंध: साथ ही रूस पर 20वें दौर के प्रतिबंधों को लागू किया गया है, ताकि मॉस्को की आर्थिक और सैन्य शक्ति को कमजोर किया जा सके।
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने स्पष्ट किया कि यूरोप, यूक्रेन के समर्थन से पीछे हटने वाला नहीं है।
अमेरिका पर संसाधनों की लूट का आरोप
लावरोव ने अमेरिका की विदेश नीति पर प्रहार करते हुए कहा कि वाशिंगटन लोकतंत्र के नाम पर केवल तेल और प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है। उन्होंने ईरान और वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका अपने ऊर्जा हितों के लिए किसी भी देश की चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की क्षमता रखता है।
कूटनीति का नया मोर्चा: पाकिस्तान में वार्ता
इसी गहमागहमी के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक हलचल भी देखने को मिली है। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के पाकिस्तान पहुंचने की पुष्टि हुई है। वहां वे ईरानी प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस गुप्त वार्ता का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया का तनाव और परमाणु मुद्दे हो सकते हैं।
बेड के अंदर छुपाई लाश, जींद में युवक की हत्या का खुलासा
24 Apr, 2026 01:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जुलाना। क्षेत्र के नंदगढ़ गांव में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहाँ एक 40 वर्षीय व्यक्ति की हत्या कर उसकी लाश को घर के ही बेड (दीवान) में छिपा दिया गया। घटना का खुलासा होने के बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई है।
बदबू आने पर हुआ खुलासा
मृतक की पहचान गांव के निवासी चांद के रूप में हुई है। चांद अविवाहित था और अपने भाइयों में सबसे छोटा था। जानकारी के अनुसार, जब घर के भीतर से असहनीय दुर्गंध आने लगी, तब परिजनों और ग्रामीणों को किसी अनहोनी का संदेह हुआ। छानबीन करने पर चांद का शव बेड के अंदर मिला, जिसके बाद तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई।
फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य
मामले की गंभीरता को देखते हुए जुलाना पुलिस के साथ-साथ एसएफएल (स्टेट फॉरेंसिक लैब) की टीम भी मौके पर पहुंची। विशेषज्ञों ने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट्स और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्रित किए हैं। पुलिस को अंदेशा है कि हत्या कुछ दिन पहले की गई होगी, जिससे शव गलना शुरू हो गया था।
पुलिस की जांच और कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही डीएसपी ऋषभ सोढ़ी और थाना प्रभारी कुलदीप सिंह ने दल-बल के साथ मौके का मुआयना किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जींद के सामान्य अस्पताल भेज दिया है।
अधिकारियों का कहना है कि:
हत्या के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है।
परिजनों और आसपास के लोगों से गहन पूछताछ की जा रही है।
पुलिस रंजिश और घरेलू विवाद समेत हर संभावित कोण से मामले की तफ्तीश कर रही है।
बलूचिस्तान में रिफाइनरी पर हमला, कर्मचारियों में फैली दहशत, मची अफरा-तफरी
24 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान के दरिग्वान इलाके में स्थित नेशनल रिफाइनरी लिमिटेड के प्लांट पर अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने हमला कर दिया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। कंपनी के मुताबिक बंदूकधारियों ने अचानक रिफाइनरी परिसर पर फायरिंग शुरू कर दी। उस समय साइट पर मौजूद कर्मचारियों में दहशत फैल गई और कई लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके को घेर लिया। सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत क्लियरेंस ऑपरेशन शुरू किया, जिसके बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। फिलहाल किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रिफाइनरी प्रबंधन ने बताया कि एहतियात के तौर पर कुछ समय के लिए ऑपरेशन रोक दिए गए थे। इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू करते हुए कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। नुकसान सीमित बताया जा रहा है, लेकिन विस्तृत जांच अभी जारी है। स्थानीय प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र को सील कर दिया है और हमलावरों की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी है। साथ ही अन्य तेल और गैस प्रतिष्ठानों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान पहले से ही सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है, खासकर बलूचिस्तान जैसे संवेदनशील इलाकों में।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि विदेशी निवेशकों के भरोसे को भी प्रभावित कर सकते हैं। इससे पहले भी पाकिस्तान की रिफाइनरी और ऊर्जा क्षेत्र पर असर पड़ा था। अटॉक रिफाइनरी लिमिटेड को हाल ही में अपने ऑपरेशन रोकने पड़े थे, जब इस्लामाबाद में संभावित शांति वार्ता के चलते सुरक्षा कारणों से सड़कों को बंद कर दिया था। इससे कच्चे तेल की सप्लाई और प्रोडक्ट की डिलीवरी पर सीधा असर पड़ा था। वहीं, अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज के आसपास की नाकेबंदी ने भी पूरे क्षेत्र के ऊर्जा व्यापार पर दबाव बढ़ा दिया है।
ईरान-ट्रंप टकराव बढ़ा, अल्टीमेटम से सीजफायर पर संकट
24 Apr, 2026 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान/वाशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी अब 'आर-पार' की जंग में तब्दील होती दिख रही है। शांति वार्ता की मेज पर सन्नाटा पसरा होने के बीच ईरान ने ट्रंप प्रशासन को सीधे शब्दों में 48 घंटे की समय सीमा (Ultimatum) दे दी है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका वार्ता में जानबूझकर देरी कर रहा है ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को और चोट पहुँचाई जा सके।
11 ट्रिलियन डॉलर का 'महा-विवाद'
दोनों देशों के बीच गतिरोध की सबसे बड़ी दीवार वह 11 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 900 लाख करोड़ रुपये) की ईरानी संपत्ति है, जिसे अमेरिका ने फ्रीज कर रखा है।
ईरान का दावा: जब तक यह भारी-भरकम राशि जारी नहीं की जाती और ईरानी बंदरगाहों से प्रतिबंध नहीं हटाए जाते, तब तक बातचीत का कोई अर्थ नहीं है।
अमेरिका का रुख: फिलहाल वाशिंगटन ने इन संपत्तियों को मुक्त करने के बदले कई कड़े समझौते की शर्तें रखी हैं, जिस पर सहमति नहीं बन पाई है।
"हवा नहीं, आग बरसेगी": विदेश मंत्री की चेतावनी
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सख्त लहजे में कहा कि यदि अगले दो दिनों के भीतर संपत्तियों को लेकर कोई ठोस लिखित प्रस्ताव नहीं मिलता, तो वर्तमान सीजफायर (युद्धविराम) स्वतः समाप्त मान लिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा:
"अगर हमारी संपत्तियां हमें वापस नहीं मिलती हैं, तो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करना हमारा अगला कदम होगा। दुनिया को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अमेरिका की जिद की कीमत चुकानी पड़ सकती है।"
दुनिया पर क्या होगा असर?
होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी भूकंप से कम नहीं होगा:
तेल की कीमतें: दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
वैश्विक मंदी का खतरा: ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिससे वैश्विक महंगाई दर में भारी उछाल आ सकता है।
युद्ध की आशंका: यदि ईरान होर्मुज को बंद करता है, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं, जिससे मध्य पूर्व में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत हो सकती है।
कूटनीति के लिए आखिरी 48 घंटे
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। क्या ट्रंप प्रशासन ईरान की शर्तों के आगे झुकेगा या फिर यह अल्टीमेटम एक नए संघर्ष का बिगुल फूंकेगा? अगले 48 घंटे वैश्विक शांति और अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक होने वाले हैं।
जातीय समीकरण बनाम अनुभव: अंबाला चुनाव में दो दावेदारों की टक्कर
24 Apr, 2026 11:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला सिटी। नगर निगम चुनाव का बिगुल बज चुका है और शहर की 'सरकार' चुनने के लिए बिसात बिछ गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस, दोनों ने ही मेयर पद के लिए नए चेहरों पर दांव खेला है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही प्रमुख दलों ने सैनी समाज से ताल्लुक रखने वाली महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। भाजपा ने अक्षिता सैनी को अपना प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस ने कुलविंदर कौर को टिकट दिया है।
पुराने नेताओं की साख दांव पर
चूंकि मेयर पद के लिए दोनों ही चेहरे नए हैं, ऐसे में यह मुकाबला सीधे तौर पर पार्टियों के संगठन और पुराने दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। मतदाता इस बार किसी चेहरे के बजाय पार्टियों के प्रदर्शन और उनके नेताओं के पिछले 'रिपोर्ट कार्ड' के आधार पर फैसला करेंगे।
भाजपा ने महिलाओं और अनुभवी चेहरों पर जताया भरोसा
टिकट वितरण के मामले में भाजपा कांग्रेस से एक कदम आगे नजर आ रही है:
महिला प्रतिनिधित्व: मेयर सहित 8 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित होने के बावजूद भाजपा ने 10 महिलाओं को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने केवल 8 महिलाओं को प्रत्याशी बनाया है।
अनुभव को प्राथमिकता: भाजपा ने अपने 9 पूर्व पार्षदों को दोबारा मौका दिया है, जिससे पार्टी की रणनीति में अनुभव और जोश का तालमेल दिख रहा है।
जातीय समीकरणों का तालमेल
दोनों पार्टियों ने जातीय गणित को साधने की पूरी कोशिश की है:
सैनी समाज का दबदबा: दोनों दलों द्वारा मेयर पद के लिए सैनी समाज के उम्मीदवार उतारने से यह साफ है कि इस बार नगर निगम की कमान इसी समाज के हाथ में रहने की संभावना है।
विविधता: निगम के कुल 20 वार्डों में वैश्य और पंजाबी समाज को भी दोनों पार्टियों ने उनकी आबादी के हिसाब से पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया है।
अमेरिका ने नौसेना के सेक्रेटरी जॉन फेलन को पद से हटाया
24 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। ईरान युद्ध के बीच अमेरिका में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने नौसेना सचिव जॉन फेलन को पद से हटा दिया है। पेंटागन ने बुधवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि ये फैसला तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है, हालांकि उन्हें हटाने का कारण नहीं बताया गया है। सूत्रों के मुताबिक ये भी कहा जा रहा है कि फेलन और हेगसेथ के बीच संबंध अच्छे नहीं थे। बताया जा रहा है कि फेलन ने कई बार कमांड चेन को दरकिनार कर सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संपर्क किया, जिससे नाराजगी बढ़ गई। फेलन के हटने के बाद नौसेना के अंडरसेक्रेटरी हंग काओ को फिलहाल कार्यवाहक जिम्मेदारी दी गई है।
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प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय संचालन समिति की द्वितीय बैठक आयोजित
