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किम जोंग ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया को चेताते हुए किया मल्टी-रॉकेट टेस्ट का निरीक्षण
16 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्योंगयांग। उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने एक बार फिर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए अपनी बेटी के साथ एक शक्तिशाली मल्टी-रॉकेट लॉन्चर परीक्षण का निरीक्षण किया है। सरकारी मीडिया द्वारा रविवार को दी गई जानकारी के अनुसार, किम जोंग उन ने शनिवार को देश के पूर्वी तट पर 12 अति-सटीक 600 मिमी कैलिबर के रॉकेट प्रक्षेपकों के परीक्षण की निगरानी की। इस कदम को अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच चल रहे वार्षिक फ्रीडम शील्ड सैन्य अभ्यास के कड़े जवाब के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तर कोरिया ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि वह इन संयुक्त सैन्य अभ्यासों का मुंहतोड़ जवाब देगा, जिन्हें वह अपने ऊपर आक्रमण की तैयारी और उकसावे के रूप में देखता है। परीक्षण के दौरान किम जोंग उन ने स्पष्ट किया कि यह अभ्यास उनके दुश्मनों को बेचैन करने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि इन हथियारों की मारक क्षमता के दायरे में आने वाला प्रतिद्वंद्वी का कोई भी सैन्य बुनियादी ढांचा बच नहीं पाएगा। किम ने यह भी रेखांकित किया कि इस परीक्षण के माध्यम से दुनिया उनके सामरिक परमाणु हथियार की विनाशकारी शक्ति को बेहतर ढंग से समझ सकेगी।
दक्षिण कोरियाई सेना के अनुसार, शनिवार को उत्तर कोरिया की ओर से पूर्वी सागर में लगभग 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की है। परिषद ने इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उन प्रस्तावों का सीधा उल्लंघन बताया है जो उत्तर कोरिया की किसी भी प्रकार की बैलिस्टिक गतिविधियों पर रोक लगाते हैं। जानकारों का मानना है कि 420 किलोमीटर की मारक क्षमता वाले इन रॉकेट्स का मुख्य निशाना दक्षिण कोरिया और वहां तैनात अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं।
इस सैन्य निरीक्षण के दौरान किम जोंग उन की बेटी, किम जू ऐ भी उनके साथ नजर आईं। तस्वीरों में पिता-पुत्री विशाल जैतूनी-हरे रंग के लॉन्चिंग ट्रकों के पास चलते हुए और हथियारों के प्रक्षेपण का अवलोकन करते हुए दिखाई दे रहे हैं। लगभग 13 वर्षीय किम जू ऐ 2022 के अंत से ही प्रमुख सैन्य परेडों और हथियार परीक्षणों में अपने पिता के साथ सक्रिय रूप से दिखाई दे रही हैं। दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि किम जोंग उन अपनी बेटी को अपने उत्तराधिकारी के रूप में तैयार कर रहे हैं। गौरतलब है कि किम जोंग उन ने हाल ही में अमेरिका को सीधी धमकी देते हुए कहा था कि यदि दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर कोई भी सैन्य कार्रवाई की गई, तो उसका परिणाम बेहद विनाशकारी होगा।
तालिबान के सुप्रीम लीडर अखुंदजादा को निशाना बनाकर पाकिस्तान ने की घातक एयरस्ट्राइक
16 Mar, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद अब एक खतरनाक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हालिया सुरक्षा रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है कि पाकिस्तान वायुसेना ने कंधार के कैंप गेको में एक बेहद सटीक और बड़ा हवाई हमला किया है। इस हमले का मुख्य उद्देश्य अफगान तालिबान के सर्वोच्च नेता हैबतुल्लाह अखुंदजादा को निशाना बनाना था। यदि यह दावा पूरी तरह पुष्ट होता है, तो इसे केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को हिला देने वाली घटना माना जाएगा।
यह भीषण हमला शुक्रवार तड़के उस समय किया गया, जब खुफिया सूचनाओं के आधार पर यह संकेत मिले थे कि हैबतुल्लाह अखुंदजादा पिछले कुछ हफ्तों से कैंप गेको के एक अत्यंत सुरक्षित परिसर में ठहरे हुए हैं। जमीनी स्तर से आ रही शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, इस एयरस्ट्राइक में कम से कम 22 लोगों के मारे जाने और 50 से अधिक के घायल होने की सूचना है। कंधार, जिसे तालिबान नेतृत्व का आध्यात्मिक और संचालन केंद्र माना जाता है, पिछले 48 घंटों से भारी तनाव और सुरक्षा घेरे में है। इस हमले की तुलना उन चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय अभियानों से की जा रही है, जिनमें किसी देश ने सीधे तौर पर दूसरे देश के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने की कोशिश की हो।
हालांकि, सबसे बड़ा सवाल अभी भी अखुंदजादा की स्थिति को लेकर बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, हवाई हमले ने कैंप गेको की बाहरी सुरक्षा परतों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है, लेकिन तालिबान के सुप्रीम लीडर की वर्तमान स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हैबतुल्लाह अखुंदजादा एक अत्यंत गुप्त और बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में रहते हैं। रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि उनके लिए विशेष रूप से जमीन के नीचे ऐसे बंकरों का निर्माण किया गया है, जो भारी हवाई हमलों को सहने में सक्षम हैं। यही कारण है कि ऊपरी इमारतों के तबाह होने के बावजूद उनके बचने की संभावना बनी हुई है। मारे गए 22 लोगों के बारे में माना जा रहा है कि वे तालिबान के उस विशिष्ट आंतरिक सुरक्षा दस्ते का हिस्सा थे, जो सुप्रीम लीडर के सबसे करीबी रक्षा कवच के रूप में तैनात रहते हैं। यह तथ्य इस बात की पुष्टि करता है कि पाकिस्तान की यह कार्रवाई केवल एक संदेश देने के लिए नहीं, बल्कि सीधे तौर पर नेतृत्व को खत्म करने के लिए की गई थी। इस स्ट्राइक को हाल के वर्षों में पाकिस्तान की ओर से की गई अब तक की सबसे घातक और सीधी सैन्य कार्रवाई बताया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस घटना के प्रतिशोध में तालिबान की प्रतिक्रिया पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति तय करेगी।
मनकामना मंदिर से लौट रहे भारतीय श्रद्धालुओं की बस गहरी खाई में गिरी, 7 की मौत
16 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू,। नेपाल के पहाड़ी रास्तों पर एक बार फिर रफ्तार का कहर देखने को मिला है। शनिवार शाम गोरखा जिले में हुए एक भीषण सड़क हादसे में कम से कम सात भारतीय श्रद्धालुओं की मौत हो गई। यह दुखद घटना उस समय हुई जब श्रद्धालु प्रसिद्ध मनकामना मंदिर में दर्शन कर वापस लौट रहे थे। स्थानीय पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, श्रद्धालुओं को ले जा रही एक इलेक्ट्रिक माइक्रोबस साहिद लखन ग्रामीण नगरपालिका के कंतार क्षेत्र में अनियंत्रित होकर सड़क से फिसल गई और गहरी खाई में जा गिरी।
गोरखा जिला पुलिस कार्यालय के उप पुलिस अधीक्षक राज कुमार श्रेष्ठ ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि इस हादसे में सात अन्य श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हुए हैं। बचाव दल ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को खाई से बाहर निकाला, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए चितवन जिले के भरतपुर स्थित चितवन मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। अधिकारियों के मुताबिक, माइक्रोबस में एक दर्जन से अधिक यात्री सवार थे, जिसके चलते हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई थी। गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी तुलसी बहादुर श्रेष्ठ ने बताया कि वाहन मनकामना मंदिर से पश्चिम की ओर तनहूं जिले के अनबुखैरेनी क्षेत्र की ओर जा रहा था। हालांकि, यात्रियों के गंतव्य को लेकर अभी पूरी जानकारी स्पष्ट नहीं हो पाई है।पुलिस अभी हादसे के सटीक कारणों की जांच कर रही है, लेकिन प्राथमिक दृष्टि में पहाड़ी सड़क के तीखे मोड़ पर चालक का नियंत्रण खोना दुर्घटना की वजह माना जा रहा है। गौरतलब है कि नेपाल के इस क्षेत्र में भारतीय तीर्थयात्रियों के साथ होने वाला यह पहला बड़ा हादसा नहीं है। इससे पहले अगस्त 2024 में भी अनबुखैरेनी के पास एक बस दुर्घटना में 27 भारतीय श्रद्धालुओं ने अपनी जान गंवाई थी।
हाल के वर्षों में नेपाल में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। नेपाल ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में हादसों की संख्या 4,999 से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 7,669 तक पहुंच गई है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट बताती है कि इन दुर्घटनाओं से होने वाला आर्थिक नुकसान नेपाल के कुल सकल राष्ट्रीय उत्पाद (जीएनपी) का लगभग 1.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ते, वाहनों की खराब स्थिति और सुरक्षा मानकों की कमी नेपाल में संवेदनशील सड़क उपयोगकर्ताओं और विदेशी पर्यटकों के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है।
अमेरिकी सेना ने खर्ग द्वीप को मिट्टी में मिला दिया, अब मजे के लिए करेंगे हमले: ट्रंप
16 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सबसे अहम तेल हब, खर्ग द्वीप पर बड़े हमलों की पुष्टि की है। शनिवार को दिए एक इंटरव्यू और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने द्वीप पर मौजूद ईरान के 100फीसदी सैन्य ठिकानों को मिट्टी में मिला दिया है। ट्रंप ने कहा कि हालांकि ईरान अब संघर्ष को खत्म करने के लिए समझौते की मेज पर आता दिख रहा है, लेकिन अभी शर्तें अमेरिका के पक्ष में पर्याप्त नहीं हैं। ट्रंप ने बेबाक अंदाज में कहा कि हमने खर्ग द्वीप का ज्यादातर हिस्सा तबाह कर दिया है और हम मजे के लिए इस पर कई बार हमला कर सकते हैं।
मडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल पर जानकारी दी कि ईरान की सैन्य क्षमता अब लगभग खत्म हो चुकी है, लेकिन वह अभी भी समुद्री जलमार्ग में खदानों या छोटे ड्रोनों के जरिए बाधा डाल सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और अन्य मित्र देश होर्मुज में युद्धपोत तैनात करेंगे। ब्रिटेन, फ्रांस, जापान भी इस मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका का साथ देंगे। लक्ष्य यह है कि वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन बिना किसी डर के जारी रह सके।
ईरान ने अमेरिका-इजराइल हमलों का बदला लेने की कसम खाई है। इसी कड़ी में ईरानी सरकारी मीडिया ने संयुक्त अरब अमीरात के तीन बड़े बंदरगाहों को खाली करने का अल्टीमेटम दिया है जिसमें जेबेल अली बंदरगाह, खलीफा बंदरगाह, फुजैरा बंदरगाह शामिल हैं। ईरान का आरोप है कि अमेरिका इन बंदरगाहों का इस्तेमाल उस पर हमले करने के लिए कर रहा है। निवासियों और कामगारों को तुरंत इलाका छोड़ने को कहा है, जिससे क्षेत्र में युद्ध के और फैलने की आशंका है।
युद्ध की विभीषिका अब मानवीय आंकड़ों में सामने आ रही है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने सनसनीखेज दावा किया है कि अमेरिका और इजराइल के हमलों में अब तक 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई उच्चाधिकारी भी मारे गए हैं। राजदूत ने आरोप लगाया कि जानबूझकर रिहायशी इलाकों और स्कूलों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, मानवाधिकार संस्था का अनुमान है कि मरने वालों की संख्या 1858 से ज्यादा हो सकती है, जिसमें नागरिक और सैनिक दोनों शामिल हैं।
तेल, गैस के बाद अब भारत की इंटरनेट व्यवस्था को चोट पहुंच सकता हैं मिडिल ईस्ट में जारी तनाव
15 Mar, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते तनाव के बीच में एक नया खतरा सामने दिख रहा है, जिसका बहुत बड़ा असर भारत पर पड़ सकता है। दरअसल, तनाव का असर दुनिया की इंटरनेट व्यवस्था को भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ इलाके में संघर्ष बढ़ता है, तब उस इलाके के समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक्स केबल्स को नुकसान पहुंच सकता है। ये वहीं केबल्स हैं, जिससे दुनिया का ज्यादातर इंटरनेट डेटा गुजरता है।
बात दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल गुजरता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि समुद्र की सतह के नीचे यहां से कई महत्वपूर्ण इंटरनेट केबल्स भी गुजरती हैं। ये केबल्स एशिया, पश्चिम एशिया और यूरोप को डिजिटल रूप से जोड़ती हैं। एक के अनुसार भारत से यूरोप को जोड़ने वाली कई बड़ी केबल्स इसी क्षेत्र से होकर गुजरती हैं। इसलिए यह इलाका भारत के लिए भी डिजिटल कनेक्टिविटी का बेहद अहम कॉरिडोर माना जाता है।
इंटरनेट कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के लिए दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां और टेलीकॉम ऑपरेटर लगातार नए अंडरसी केबल नेटवर्क में निवेश कर रहे हैं। हाल ही में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने नई दिल्ली की यात्रा के दौरान इंडिया-अमेरिका कनेक्ट प्रोजेक्ट की घोषणा की। इसका मकसद भारत को वैश्विक डिजिटल नेटवर्क से और मजबूत तरीके से जोड़ना है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत का लगभग एक-तिहाई पश्चिम दिशा की इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं केबल्स के जरिए गुजरती है। इसका मतलब अगर इस क्षेत्र में कोई बड़ी रुकावट आती है, तब भारत और यूरोप के बीच डेटा ट्रांसमिशन प्रभावित हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क में बैकअप सिस्टम भी मौजूद हैं।
इस पूरे मामले से जुड़े एक जानकार ने कहा, समुद्री केबल्स में रेडंडेंसी होती है। अगर एक केबल कट भी जाए, तब डेटा दूसरे रास्तों से भेजा जा सकता है, लेकिन अगर कई केबल्स एक साथ प्रभावित हो जाएं, तब बाकी रूट्स पर ज्यादा लोड पड़ जाएगा। इसके बाद इंटरनेट की स्पीड स्लो हो सकती है और सर्विस में दिक्कतें आ सकती हैं।
उन्होंने कहा कि इसका असर तुरंत दिखाई नहीं देगा। दुनिया भर में इंटरनेट सर्वर रिजर्व में रखे जाते हैं। भारत के पास भी इसतरह के सिस्टम हैं। इस कारण कम से कम एक हफ्ते तक बड़ा असर देखने को नहीं मिलेगा। इसके अलावा अटलांटिक महासागर से आने वाले केबल्स भी विकल्प के रूप में मौजूद हैं।
एक अन्य जानकार ने कहा कि, अभी तक इंटरनेट कनेक्टिविटी पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन अगर केबल्स काट दी गईं या टेलीकॉम और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला हुआ, तब स्थिति गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत का अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक मुख्य रूप से दो बड़े गेटवे से बाहर जाता है। एक मुंबई में और दूसरा चेन्नई में। मुंबई के रास्ते जाने वाला डेटा अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र से होकर यूरोप तक पहुंचता है, इसलिए इस इलाके में किसी भी तरह की गड़बड़ी भारत के डिजिटल नेटवर्क को प्रभावित कर सकती है।
साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ ने बताया कि दुनिया का इंटरनेट सैटेलाइट्स से नहीं बल्कि समुद्र के नीचे बिछी केबल्स से चलता है। उन्होंने कहा, दुनिया के 99 प्रतिशत से ज्यादा डेटा अंडरसी फाइबर-ऑप्टिक केबल्स से गुजरता है। यही डिजिटल अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ हैं। साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ के मुताबिक रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के आसपास का इलाका आज दुनिया का अहम डिजिटल हाईवे बन चुका है। अगर यहां कोई रुकावट आती है, तब इंटरनेट सर्विसेज़ स्लो हो सकती हैं और ग्लोबल कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि युद्ध की स्थिति में ये केबल्स बेहद असुरक्षित हो जाती हैं। उनके मुताबिक, अब दुनिया एक नए सीबेड इंफ्रास्ट्रक्चर वॉर की तरफ बढ़ रही है। जैसे तेल पाइपलाइन और समुद्री रास्ते रणनीतिक संपत्ति माने जाते हैं, वैसे ही अब इंटरनेट केबल्स भी वैश्विक शक्ति संतुलन का अहम हिस्सा बन गए हैं।
ईरान-अमेरिका युद्ध: 15वें दिन खार्ग द्वीप पर भीषण हमला, ईरान की आर्थिक लाइफलाइन पर संकट
15 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के 15वें दिन संघर्ष एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके आदेश पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खार्ग आइलैंड पर अब तक की सबसे शक्तिशाली बमबारी की है। यह हमला न केवल सैन्य दृष्टिकोण से, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था को चोट पहुँचाने के इरादे से किया गया है।खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित एक छोटा कोरल द्वीप है, जिसे ईरान के तेल निर्यात का नर्व सिस्टम माना जाता है। ईरान के कुल कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा इसी द्वीप के टर्मिनलों से होकर दुनिया भर में जाता है। यही कारण है कि इस द्वीप को तबाह करने का मतलब ईरान की आर्थिक रीढ़ को तोड़ना है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी वायुसेना ने द्वीप पर मौजूद सभी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है, जिससे तेहरान को भारी रणनीतिक नुकसान हुआ है।
हैरानी की बात यह है कि इस भीषण हमले में फिलहाल तेल के बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया है। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ने संयम दिखाते हुए तेल टर्मिनलों को सुरक्षित रखा है, ताकि वैश्विक तेल बाजार में अचानक हाहाकार न मचे। हालांकि, उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का रास्ता रोकने की कोशिश जारी रखी, तो यह शालीनता तुरंत खत्म कर दी जाएगी और तेल ठिकानों को भी उड़ा दिया जाएगा।
अमेरिका की यह चाल केवल ईरान ही नहीं, बल्कि चीन की भी बेचैनी बढ़ाने वाली है। चीन, ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और उसकी ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक खार्ग द्वीप से होने वाली सप्लाई पर निर्भर है। इस द्वीप पर अमेरिकी दबाव का सीधा मतलब है कि बीजिंग की तेल आपूर्ति अब वाशिंगटन की इच्छा पर निर्भर हो सकती है। ट्रंप ने इस संबंध में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी चर्चा की है, जिससे साफ है कि यह युद्ध अब केवल दो देशों के बीच नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति का केंद्र बन चुका है। दूसरी ओर, ईरान ने इस हमले के बाद तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने धमकी दी है कि यदि उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला जारी रहा, तो वह उन सभी अंतरराष्ट्रीय तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाएगा जिनमें अमेरिकी हिस्सेदारी है। इस बीच, ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में संकेत दिया है कि हॉर्मुज की खाड़ी से गुजरने वाले तेल टैंकरों को बहुत जल्द अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा प्रदान की जाएगी। फिलहाल, खार्ग द्वीप पर हुआ यह हमला इस युद्ध के भविष्य की दिशा तय करेगा। यदि तनाव कम नहीं हुआ, तो दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका में यू-वीजा हासिल करने 11 भारतीयों ने रची डकैती की साजिश, पकड़ाए
15 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बोस्टन। अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे 11 भारतीय नागरिकों पर वीजा धोखाधड़ी की साजिश रचने का आरोप है। अमेरिकी सरकारी वकीलों के मुताबिक इन लोगों ने ग्रीन कार्ड हासिल करने के शॉर्टकट के तौर पर सुविधा दुकानों में हथियारों के बल पर डकैती का नाटक रचा था। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने जानबूझकर दुकानों में फर्जी डकैती की योजना बनाई थी। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि स्टोर में काम करने वाले क्लर्क आव्रजन आवेदनों में खुद को अपराध का शिकार बता सकें।
बता दें यह पूरी साजिश यू-वीजा हासिल करने के लिए रची गई थी। यू-वीजा उन प्रवासियों को दिया जाता है जो किसी अपराध के शिकार हुए हों, जिन्होंने मानसिक या शारीरिक शोषण झेला हो और जो पुलिस की जांच में मददगार साबित हुए हों। यह वीजा प्रवासियों को काम करने की अनुमति देता है और 5 से 10 साल के अंदर ग्रीन कार्ड प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करता है। इस मामले में जिन 11 लोगों पर वीजा धोखाधड़ी की साजिश का आरोप लगा है, उनके नाम हैं-
जितेंद्र कुमार पटेल (39), महेश कुमार पटेल (36), संजय कुमार पटेल (45), दीपिका बेन पटेल (40), रमेशभाई पटेल (52), अमिता बेन पटेल (43), रौनक कुमार पटेल (28), संगीताबेन पटेल (36), मिंकेश पटेल (42), सोनल पटेल (42) और मितुल पटेल (40)। ये सभी मैसाचुसेट्स, केंटकी और ओहियो जैसे अमेरिकी राज्यों में अवैध रूप से रह रहे थे। दीपिकाबेन पटेल को मैसाचुसेट्स के वेमाउथ में अवैध रूप से रहने के कारण वापस भारत डिपोर्ट (निर्वासित) कर दिया गया है।
आरोप पत्र के मुताबिक मार्च 2023 में रामभाई नामक मुख्य साजिशकर्ता और उसके साथियों ने मैसाचुसेट्स और अन्य स्थानों पर कम से कम छह सुविधा/शराब की दुकानों और फास्ट फूड रेस्तरां में फर्जी डकैतियों को अंजाम दिया। इस नाटक में लुटेरा सीसीटीवी कैमरे के सामने बंदूक दिखाकर कैशियर या मालिक को धमकाता था और गल्ले से पैसे लेकर भाग जाता था। लुटेरे के भागने के पांच मिनट या उससे ज्यादा समय बाद, पीड़ित क्लर्क या मालिक जानबूझकर पुलिस को फोन करके अपराध की रिपोर्ट दर्ज कराते थे ताकि मामला असली लगे।
जांच में सामने आया है कि इन पीड़ितों ने इस पूरी योजना में शामिल होने के लिए आयोजक रामभाई को पैसे दिए थे। इसके बदले में, रामभाई ने इस फर्जी डकैती के लिए अपनी दुकानों का इस्तेमाल करने देने के लिए स्टोर मालिकों को पैसे चुकाए थे। रामभाई, डकैती का नाटक करने वाले लुटेरे और उन्हें भगाने वाले ड्राइवर को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है। वीजा धोखाधड़ी की साजिश के इस आरोप में अधिकतम 5 साल जेल, 3 साल की निगरानी और 2,50,000 अमेरिकी डॉलर के जुर्माने का प्रावधान है।
ट्रंप बोले- होर्मुज पर निर्भर देशों को अमेरिकी मदद से इस मार्ग को खुला रखने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए
15 Mar, 2026 10:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: ईरान ने शनिवार को लोगों से आग्रह किया कि वे मिडिल ईस्ट के सबसे व्यस्त बंदरगाह और संयुक्त अरब अमीरात के दो अन्य बंदरगाहों को खाली कर दें. यह पहली बार था जब उसने खुले तौर पर किसी पड़ोसी देश की गैर-अमेरिकी संपत्तियों को धमकी दी, जबकि अमेरिका और इजराइल के साथ उसका युद्ध तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. तेहरान ने कहा कि अमेरिका ने बिना कोई सबूत दिए यूएई में मौजूद बंदरगाहों और ठिकानों का इस्तेमाल करके खार्ग द्वीप पर हमले किए. खार्ग द्वीप पर ही ईरान के तेल निर्यात को संभालने वाला मुख्य टर्मिनल स्थित है. उसने लोगों से उन इलाकों को छोड़ने का आग्रह किया, जहाँ उसके अनुसार अमेरिकी सेनाएँ पनाह लिए हुए है. इस युद्ध के दौरान ईरान ने अरब खाड़ी क्षेत्र के अपने पड़ोसी देशों पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे. हालांकि, उसका कहना है कि वह केवल अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बना रहा है, जबकि हवाई अड्डों और तेल क्षेत्रों जैसी नागरिक संपत्तियों पर भी हमले होने या हमले के प्रयास किए जाने की खबरें सामने आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि देश ने खार्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया है और अगर तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के गुजरने में दखल देना जारी रखता है, तो तेल का बुनियादी ढांचा अगला निशाना हो सकता है. तेल की कीमतों और आपूर्ति को लेकर दुनिया भर में बढ़ती चिंता के बीच ट्रंप ने शनिवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित रखने के लिए युद्धपोत भेजेंगे. जवाब में ब्रिटेन ने कहा कि वह जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोगियों के साथ कई विकल्पों पर चर्चा कर रहा है. इजराइल ने कहा कि उसकी वायु सेना ने पिछले 24 घंटों में 200 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए जिनमें मिसाइल लॉन्चर, रक्षा प्रणालियां और हथियार बनाने वाले ठिकाने शामिल हैं. इस बीच, लेबनान में मानवीय संकट और गहरा गया. इजराइल द्वारा ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह लड़ाकों के खिलाफ लगातार हमले किए जाने से 800 से ज़्यादा लोग मारे गए और 850,000 लोग बेघर हो गए. एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट के 2500 और मरीन तथा एम्फीबियस असॉल्ट शिप यूएसएस ट्रिपोली को मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है. यह इस क्षेत्र में दशकों में युद्धपोतों और विमानों की सेना की सबसे बड़ी तैनाती है.
कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला: एविएशन अथॉरिटी
देश की सिविल एविएशन अथॉरिटी ने बताया कि शनिवार को कई ड्रोन्स ने कुवैत के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमला किया और उसके रडार सिस्टम को निशाना बनाया, लेकिन इस घटना में किसी को कोई चोट नहीं आई. अथॉरिटी ने कहा, 'कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कई ड्रोन्स द्वारा निशाना बनाया गया, जिन्होंने उसके रडार सिस्टम पर हमला किया.' उन्होंने आगे कहा, 'गनीमत रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है.'
यह युद्ध इस्लाम और मुस्लिमों के खिलाफ है, हम किसी भी घटनाक्रम के लिए तैयार
15 Mar, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रियाद। ईरान और अमेरिका में युद्ध के बीच यमन के हूतियों ने बड़ा ऐलान किया है। यमन के हूती नेता अब्दुल मलिक अल हूती ने इस जंग को इस्लाम और मुस्लिमों के खिलाफ युद्ध बताया है। अब्दुल मलिक ने ऐलान किया कि उनका संगठन ईरान के साथ खड़ा है। उसने कहा कि हम इस इलाके में लड़ाई के किसी भी घटनाक्रम के लिए तैयार हैं। अपने भाषण में मलिक ने चेतावनी दी कि इस लड़ाई के निशाने पर पूरा इलाका है। अब तक हूती विद्रोही इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई से दूर थे लेकिन अब वे तेहरान के साथ आते दिख रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हूतियों के इस ऐलान से सऊदी की धड़कन तेज हो गई है जो लाल सागर से तेल के निर्यात के लिए तैयारी कर चुका है। अमेरिका के इस हमले में अब तक 1300 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और 10 हजार लोग घायल हुए हैं। ईरान लगातार सऊदी अरब से लेकर यूएई तक में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है। यही नहीं ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है। इससे सऊदी अरब, कतर, यूएई, ओमान, कुवैत, बहरीन का तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
सऊदी अरब ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद लाल सागर के रास्ते तेल सप्लाई की योजना पर काम तेज कर दिया है लेकिन अब हूतियों के ऐलान से बड़ा खतरा पैदा हो गया है। हूतियों का एक हमला दुनियाभर में तेल की कीमतों में आग लगा सकता है। सऊदी अरब को बहुत पहले ही इस बात का डर था कि ईरान कभी भी होर्मुज से तेल की सप्लाई को रोक सकता है। इसी वजह से उसने 1980 के दशक में अपने रेगिस्तानी इलाके से एक तेल पाइपलाइन को लाल सागर तक बनाया था।
सऊदी कंपनी आरामको के चीफ ने कहा था कि वे अब ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन के जरिए तेल की आपूर्ति को तेज करने जा रहे हैं। ईरान के होर्मुज को बंद कर देने की वजह से दुनिया में तेल की सप्लाई में भारी कमी आई है। अगर यह पाइपलाइन पूरी तरह से शुरू हो जाती है तो इससे हर दिन 70 लाख बैरल तेल भेजा जा सकेगा। यह पाइपलाइन सऊदी अरब के अबकैब तेल इलाके से लाल सागर के यान्बू पोर्ट तक जाती है।
मिडिल ईस्ट मामलों के एक्सपर्ट का कहना है कि यही वजह है कि हूती अहम हैं। उन्होंने कहा कि सऊदी के यांबू पोर्ट से एशिया को तेल भेजने के लिए उसे बाब अल मंदेब से गुजरना होगा। यह हूतियों का गढ़ है। यही नहीं इस पूरे में इलाके में हूती कहीं भी ड्रोन हमला करने की ताकत रखते हैं। हूतियों के पास पहले से ही बड़ी मात्रा में ईरानी आत्मघाती ड्रोन हैं। ये ईरानी ड्रोन अभी पूरे मिडिल ईस्ट में तबाही मचाए हुए हैं। लाल सागर में पिछले कुछ महीनों में हूती कई बार इजराइल और अमेरिका के तेल टैंकरों को निशाना बना चुके हैं।
समझौता कर फंसा पाकिस्तान, ईरान के खिलाफ जंग में देगा सऊदी अरब का साथ!
15 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रियाद। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बीच सऊदी अरब और पाकिस्तान में तनाव बढ़ गया है। रिपोर्टों से पता चलता है कि सऊदी अरब पाकिस्तान से नाराज है और उसके बुलावे पर पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ जेद्दा पहुंचे। गुरुवार को शहबाज ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की थी। इसके पहले पिछले सप्ताह पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर भी सऊदी गए थे।
बताया जा रहा है कि इन मुलाकातों से पाकिस्तान और ईरान के रिश्तों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती हैं, क्योंकि ईरानी हमलों को रोकने के लिए रियाद ने इस्लामाबाद से सक्रिय समर्थन की मांग की है। सऊदी अरब और पाकिस्तान ने पिछले साल एक ऐतिहासिक समझौता किया था, जिसके मुताबिक किसी एक देश पर हमला दूसरे पर हमला माना जाएगा। अमेरिका-इजराइल के हमले के जवाब में ईरान ने सऊदी अरब समेत खाड़ी देशों में लगातार मिसाइल और ड्रोन दाग रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रियाद का कहना है कि अब यही समय है जब पाकिस्तान को समझौते के तहत ईरानी हमलों को रोकने के लिए सऊदी के साथ देना चाहिए। क्राउन प्रिंस से मुलाकात के बाद पीएम शहबाज के प्रवक्ता मुशर्रफ जैदी ने कहा कि पीएम शहबाजा ने इन मुश्किल समय में सऊदी अरब के प्रति पाकिस्तान की एकजुटता और समर्थन किया। शरीफ ने मुलाकात के दौरान एमबीएस को भरोसा दिलाया कि पाकिस्तान हमेशा सऊदी अरब के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।
पिछले सप्ताह ही सऊदी रक्षा मंत्री ने पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में दोनों पक्षों ने ईरान के हालिया हमलों और अपने संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत उनका जवाब देने के तरीकों पर बात की।
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ बड़ा हमला बोला था, जिसके बाद क्षेत्र में बड़े पैमाने पर युद्ध भड़क गया। शुक्रवार को अमेरिका ने ईरान की आर्थिक रीढ़ कहे जाने वाले खर्ग द्वीप पर हमला किया। ट्रंप ने इस हमले की जानकारी दी। इस बीच अमेरिका ने अतिरिक्त मरीन सैनिकों और युद्धपोतों को तैनात करने का फैसला किया है। अमेरिका पोत यूएसएस त्रिपोली के साथ एक मरीन एम्फीबियस रेडी ग्रुप और 31वीं मरीन अभियान इकाई को क्षेत्र में भेज रहा है। एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि इस तैनाती में करीब 2,500 मरीन और 2,500 नाविक शामिल होंगे।
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच उत्तर कोरिया ने किया बैलिस्टिक प्रोजेक्टाइल का परीक्षण
15 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्योंगयांग। उत्तर कोरिया ने शनिवार को एक संदिग्ध बैलिस्टिक प्रोजेक्टाइल दागकर एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह प्रक्षेपण ऐसे समय हुआ है जब कुछ दिन पहले ही किम जोंग उन ने अपने नए युद्धपोत से क्रूज प्रोजेक्टाइल परीक्षण की निगरानी की थी। इस कदम को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। जापान के कोस्ट गार्ड के मुताबिक दागा गया संदिग्ध बैलिस्टिक प्रोजेक्टाइल समुद्र में गिर गया। जापान के सार्वजनिक प्रसारक ने रक्षा मंत्रालय के एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से बताया कि प्रोजेक्टाइल देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र के बाहर समुद्री क्षेत्र में गिरी।
यह प्रोजेक्टाइल परीक्षण ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच 9 मार्च से 19 मार्च तक वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास चल रहा है। उत्तर कोरिया लंबे समय से इन अभ्यासों का विरोध करता रहा है और इन्हें अपने खिलाफ युद्ध की तैयारी बताता है। हाल ही में प्योंगयांग ने अमेरिका से उसे परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। यह मांग पांच साल में पहली बार आयोजित सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की कांग्रेस के दौरान उठाई गई थी, जिसमें देश की सुरक्षा और परमाणु नीति पर भी चर्चा हुई थी।
उत्तर कोरिया ने हाल ही में ईरान पर अमेरिका हमले की भी कड़ी आलोचना की है। प्योंगयांग ने इस कार्रवाई को अमेरिका का बेशर्म कदम बताते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी निंदा की।
शीत्सांग की नई पहल, विकास और आधुनिकता की ओर बढ़ता कदम
14 Mar, 2026 06:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शीत्सांग। पिछले कुछ वर्षों में शीत्सांग (तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश ने विकास और परिवर्तन की एक उल्लेखनीय यात्रा तय की है। कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के कारण पिछड़े माने जाने वाले इस क्षेत्र ने आज आर्थिक प्रगति, सामाजिक स्थिरता, तकनीकी नवाचार और जनकल्याण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। 2023 से 2026 तक की अवधि में क्षेत्र ने अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है, जो केंद्र सरकार की नीतियों का परिणाम है। शीत्सांग की जीडीपी में लगातार वृद्धि हुई है। 2023 में 9.5% की दर से बढ़कर 2024 के पहले नौ महीनों में 6.2% वृद्धि दर्ज की गई, जो पूरे देश में सबसे ऊपर रही। 2025 में जीडीपी 303 अरब युआन को पार कर 7% बढ़ी, जबकि 2026 के लिए 7% से अधिक का लक्ष्य रखा गया है। ऑनलाइन खुदरा बिक्री में 75% से अधिक की वृद्धि ने अर्थव्यवस्था को नई गति दी। इस आर्थिक उछाल का केंद्र रहा है बुनियादी ढांचे का विस्तार। सरकार ने ‘प्रमुख परियोजना अभियान’ के तहत भारी निवेश किया है। सछ्वान -शीत्सांग रेलवे जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जो इस क्षेत्र को बाकी देश से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होंगी । वहीं, राजमार्गों के उन्नयन और जल विद्युत परियोजनाओं ने भी गति पकड़ी है। उदाहरण के लिए, त्संगपो नदी पर बन रहा विशाल जलविद्युत बांध न केवल ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देगा, बल्कि यह पर्यावरण के अनुकूल विकास का भी प्रतीक है ।
शीत्सांग अब केवल पारंपरिक अर्थव्यवस्था पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि वह तकनीक के क्षेत्र में भी बड़ी छलांग लगा रहा है। वर्ष 2025 में क्षेत्र की डिजिटल अर्थव्यवस्था का मूल्य 20 अरब युआन को पार कर गया । सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर दिया है। एक उल्लेखनीय उपलब्धि ‘दीपज़ांग’(DeepZang) नामक तिब्बती भाषा के पहले लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एआई मॉडल) का विकास है । यह तकनीक न केवल तिब्बती भाषा और संस्कृति के डिजिटल संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और पारिस्थितिकी संरक्षण जैसे क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। इसके अलावा, शांगहाई जियाओतोंग विश्वविद्यालय ने शीत्सांग में ‘हाई-एल्टीट्यूड टेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर’की स्थापना की है, जो उच्च ऊंचाई वाले स्वास्थ्य, हरित खनिज, स्वच्छ ऊर्जा और तिब्बती चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा देगा । अब तक, शीत्सांग में 200 से अधिक राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त उच्च तकनीक उद्यम हैं । आर्थिक और तकनीकी प्रगति के साथ-साथ, सामाजिक स्थिरता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान ने भी शीत्सांग की पहचान को मजबूत किया है। शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोहों ने इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और जातीय एकता को प्रदर्शित किया । यहाँ के लोग पारंपरिक परिधानों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, जो सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है। शीत्सांग में पर्यटन उद्योग ने भी शानदार प्रदर्शन किया है। वर्ष 2025 में पर्यटकों की संख्या में 10.7% की वृद्धि हुई, जिससे सांस्कृतिक उद्योग का मूल्य 15 अरब युआन से अधिक हो गया । यह दर्शाता है कि दुनिया शीत्सांग की समृद्ध संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता को देखने के लिए उत्सुक है। शीत्सांग सरकार के लिए लोगों की भलाई सर्वोपरि है। ‘14वीं पंचवर्षीय योजना’ के दौरान, जन कल्याण पर खर्च कुल बजट का 80% से अधिक रहा, जो 1 ट्रिलियन युआन (करीब 12 लाख करोड़ रुपये) से भी अधिक है । इस धनराशि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार और आवास जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया गया। शिक्षा और स्वास्थ्य: सरकारी स्कूलों में ‘तीन सुरक्षा’(भोजन, आवास और ट्यूशन) भत्ता बढ़ाकर 5,700 युआन प्रति छात्र प्रति वर्ष कर दिया गया है । स्वास्थ्य के क्षेत्र में, एक व्यापक चिकित्सा सेवा नेटवर्क स्थापित किया गया है, जिसमें पैकेज्ड रोग (हाइडेटिड रोग) और बड़ी हड्डी रोग (काशिन-बेक रोग) जैसी स्थानिक बीमारियों का मुफ्त इलाज शामिल है । जीवन स्तर में सुधार: छोटी-छोटी चीजें भी लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही हैं। उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ‘ऑक्सीजन युक्त खाना पकाने के बर्तन’ (हाई-लैंड प्रेशर कुकर) का उत्पादन और वितरण सुनिश्चित किया गया है, जिससे परिवारों की रसोई आसान हुई है । साथ ही, गांव स्तर पर रसोई और स्नानघरों के नवीनीकरण की परियोजनाओं से ग्रामीणों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है । ठंडे इलाकों में हीटिंग की सुविधा विस्तारित की गई है, जिससे लोग सर्दियों में भी गर्म और आरामदायक रहते हैं।
आपदा प्रबंधन और पुनर्वास: जनवरी 2025 में आए 6.8 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई, लेकिन सरकार की त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया ने एक मिसाल कायम की। ‘उसी वर्ष आपदा, उसी वर्ष पुनर्निर्माण, उसी वर्ष आवास’ के लक्ष्य को हासिल करते हुए, 22,000 से अधिक क्षतिग्रस्त घरों का पुनर्निर्माण किया गया। इन सभी पहलों का अंतिम लक्ष्य आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाना है। आज शीत्सांग के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक घर, बेहतर शिक्षा सुविधाएँ और स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हैं। युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिससे वे नए अवसरों का लाभ उठा सकें।शीत्सांग की बर्फीली चोटियों और शांत घाटियों के बीच अब विकास की नई रोशनी दिखाई देती है। आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक स्थिरता और तकनीकी प्रगति के साथ यह क्षेत्र एक संतुलित और समावेशी विकास मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। वर्तमान दौर में शीत्सांग न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए, बल्कि विकास और परिवर्तन की इस सकारात्मक कहानी के लिए भी जाना जा रहा है। यह परिवर्तन इस बात का संकेत है कि दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्र भी सही नीतियों और निरंतर प्रयासों से समृद्धि और स्थिरता की नई ऊँचाइयों को छू सकते हैं।
पाकिस्तानी सोशल मीडिया स्टार दानिया शाह के पति ने 5वीं शादी रचा हड़कंप
14 Mar, 2026 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कराची। में अक्सर कई मशहूर हस्तियां अपनी कई शादियां करने को लेकर सुर्खियों में रहती हैं. एक ऐसा ही मामला अब फिर सामने आया है. पाकिस्तान की मशहूर सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर दानिया शाह के पति हकीम शहजाद ने 5वीं शादी कर ली है. हैरत की बात ये है कि उन्होंने इस बार नाबालिग लड़की से शादी की है. हकीम की नई दुल्हन अभी 9वीं क्लास की स्टूडेंट है।
सोशल मीडिया पर हकीम शहजाद हुए ट्रोल
दानिया शाह पाकिस्तान की मशहूर टिक टॉकर हैं. पाकिस्तान में उनके फैंस भी खूब हैं. दानिया शाह और हकीम शहजाद की शादी करने के बाद से ही दोनों काफी सुर्खियों में हैं. दानिया शाह हकीम की चौथी पत्नी हैं. वहीं जब हकीम शहजाद की पांचवाीं शादी की खबर सामने आई तो सोशल मीडिया पर लोगों की कड़ी प्रतिक्रिया आ रही है. सोशल मीडिया पर लोग हकीम शहजाद को काफी ट्रोल कर रहे हैं. इसका कारण बताया जा रहा है कि हकीम शहजाद ने 9वीं क्लास की स्टूडेंट से 5वीं शादी कर ली है, जो कि हकीम शहजाद की बेटी की उम्र की है।
हकीम शहजाद ने साधी चुप्पी
हकीम शहजाद सोशल टिक टॉकर दानिया शाह से शादी करने के बाद अक्सर सुर्खियों में रहते हैं. वे कई शादियां कर चुके हैं. इस बीच उनकी पांचवीं शादी की खबर भी सोशल मीडिया पर आई है. हकीम की एक लड़की के साथ एक फोटो वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि ये हकीम शहजाद की पांचवीं पत्नी है और 9वीं क्लास में पढ़ाई कर रही है. हालांकि अभी तक हकीम शहजाद ने इसको लेकर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है।
‘दानिया शाह से प्यार नहीं, पहले से तीन पत्नियां हैं’
कुछ दिन पहले हकीम शहजाद का एक इंटरव्यू काफी चर्चा में रहा था. इस इंटरव्यू के दौरान हकीम शहजाद ने दानिया शाह के साथ रिश्तों को लेकर बात की थी. हकीम शहजाद ने कहा था कि मेरे अंदर दानिया शाह के लिए कभी भी रोमांटिक फीलिंग्स नहीं रहीं. मेरे मन में दानिया शाह के लिए प्यार नहीं है. मेरे पहले से 3 बीवियां हैं। हालांकि हकीम शहजाद टिक टॉकर दानिया शाह से शादी करने के बाद ही सुर्खियों में आए थे. वहीं दानिया शाह ने अपने पहले पति आमिर लियाकत की मौत के बाद हकीम शहजाद से दूसरी शादी की थी. हकीम शहजाद टीवी होस्ट थे।
जींद सड़क हादसा: बस पलटने से 40 यात्री घायल, चालक संदीप को पीजीआई रोहतक भेजा
14 Mar, 2026 04:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जींद। नरवाना से जींद की ओर आ रही किलोमीटर स्कीम के तहत चलने वाली एक निजी बस शुक्रवार को रास्ते में ऑटो से टकराने के बाद पलट गई। हादसे में बस में सवार करीब 40 यात्री घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर दिया।हादसे की सूचना मिलते ही एंबुलेंस मौके पर पहुंची और घायलों को उपचार के लिए नागरिक अस्पताल जींद पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद बस चालक संदीप की हालत गंभीर होने के कारण उसे पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया गया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस नरवाना से जींद की तरफ आ रही थी। इसी दौरान रास्ते में एक ऑटो से उसकी टक्कर हो गई। टक्कर के बाद बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई। हादसे के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और स्थिति का जायजा लिया। नागरिक अस्पताल में घायलों का उपचार जारी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
झज्जर में तेज रफ्तार का कहर, बस और स्कूटी की टक्कर से SPO की मौत
14 Mar, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
झज्जर। के बेरी-दुजाना रोड पर आज एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसमें हरियाणा पुलिस के विशेष पुलिस अधिकारी विजयभान की मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर रोडवेज बस और स्कूटी के बीच हुई। मृतक विजयभान बहादुरगढ़ डीसीपी कार्यालय में तैनात थे। वे दुजाना से अपने गांव शेरिया जा रहे थे, जब रोडवेज बस ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में स्कूटी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और विजयभान गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर ही दम तोड़ दिया।पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है, जिसमें बस चालक की लापरवाही, ओवर स्पीडिंग या अन्य कारक शामिल हो सकते हैं। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने बताया कि टक्कर इतनी जोरदार थी कि स्कूटी सवार को बस के नीचे आने से बचना मुश्किल हो गया।
नगरीय निकायों के कायाकल्प और वित्तीय सुदृढ़ीकरण के लिये दो दिवसीय "शहरी सुधार कार्यशाला" का हुआ समापन
संकल्प से समाधान अभियान’ से त्वरित, प्रभावी और पारदर्शी निराकरण हुआ सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
यूरिया का प्रभावी विकल्प बन रही हरी खाद, जशपुर में 600 हेक्टेयर में प्रदर्शन
फॉरेस्ट ग्राउंड में बना बॉक्स क्रिकेट ग्राउंड युवाओं को खेल के प्रति प्रोत्साहित और अनुशासित कर रहा
माता-पिता के संस्कार और गुरूओं से प्राप्त ज्ञान के प्रति सदैव रहें कृतज्ञ : राज्यपाल पटेल
आदि शंकराचार्य का दर्शन भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक एकता का बना आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
