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उच्च शिक्षा में बड़ा कदम, 21 कॉलेजों में जुड़े नए विषय; 6 में नए कोर्स की शुरुआत
24 Jun, 2026 01:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़: हरियाणा के उच्चतर शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी कॉलेजों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के 6 राजकीय महाविद्यालयों में पूरी तरह से नए कोर्स शुरू करने और 21 अन्य कॉलेजों में नए विषयों को शामिल करने की आधिकारिक घोषणा की गई है। विभाग के अनुसार, इन सभी नए विषयों और पाठ्यक्रमों में दाखिले की प्रक्रिया आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रभावी होगी। जो भी छात्र इन कोर्सेज में एडमिशन लेना चाहते हैं, वे आगामी 30 जून तक अपना आवेदन फॉर्म जमा कर सकते हैं।
रोजगारपरक शिक्षा पर फोकस, पंचकूला को मिलीं सबसे ज्यादा सीटें
उच्चतर शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा जारी आदेशों के मुताबिक, भिवानी, झज्जर, पंचकूला और सोनीपत के कॉलेजों में अंडर ग्रेजुएट (UG) और पोस्ट ग्रेजुएट (PG) स्तर के नए कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। इनमें एमएससी, बीएससी ऑनर्स और कई व्यावसायिक (प्रफेशनल) कोर्स शामिल हैं।
इस बदलाव में सबसे बड़ा फायदा पंचकूला के सेक्टर-1 स्थित राजकीय कॉलेज को मिला है, जहाँ चार नए ऑनर्स कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। इन सभी कोर्सेज में प्रति कोर्स 80-80 सीटें तय की गई हैं। विभाग का कहना है कि यह कदम छात्रों की मांग और रोजगार के अवसरों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
इन कॉलेजों में शुरू होंगे नए पोस्ट ग्रेजुएट और ऑनर्स कोर्स
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन प्रमुख कॉलेजों में नए पाठ्यक्रम शुरू हो रहे हैं, उनकी सूची इस प्रकार है:
कॉलेज का नाम
कोर्स का नाम
कुल सीटें
गवर्नमेंट कॉलेज, लोहारू (भिवानी)
एमएससी केमिस्ट्री
40
जीसीडब्ल्यू, बेहल (भिवानी)
एमएससी मैथमेटिक्स
40
गवर्नमेंट कॉलेज, दुबलधन (झज्जर)
बीएससी फिजिकल साइंस
40
गवर्नमेंट कॉलेज, बादली (झज्जर)
रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस
40
राजकीय महाविद्यालय, सेक्टर-1 पंचकूला
बीए इंग्लिश (ऑनर्स)
80
राजकीय महाविद्यालय, सेक्टर-1 पंचकूला
बीए ज्योग्राफी (ऑनर्स)
80
राजकीय महाविद्यालय, सेक्टर-1 पंचकूला
बीए एप्लाइड साइकोलॉजी (ऑनर्स)
80
राजकीय महाविद्यालय, सेक्टर-1 पंचकूला
बीएससी फिजिक्स (ऑनर्स)
80
जीसीडब्ल्यू, गोहाना (सोनीपत)
पीजीडीसीए
40
जीसीडब्ल्यू, गोहाना (सोनीपत)
एमएससी केमिस्ट्री
40
कॉलेजों में स्नातक स्तर पर शामिल हुए नए विषय
नए पाठ्यक्रमों के अलावा कई कॉलेजों में स्थानीय मांग के आधार पर नए विषय भी जोड़े गए हैं। करनाल के जीसीडब्ल्यू पाढ़ा में अब संस्कृत और सोनीपत के राजकीय कन्या महाविद्यालय, खरखौदा में मनोविज्ञान (Psychology) विषय की पढ़ाई शुरू होगी।
इसके साथ ही, राज्य के 13 प्रमुख कॉलेजों (जैसे अंबाला कैंट, भिवानी, फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार, जींद, झज्जर, कैथल, करनाल, नारनौल, पंचकूला, रोहतक और सिरसा) में बीएससी फिजिकल साइंस के पाठ्यक्रम के तहत अब इलेक्ट्रॉनिक्स विषय को भी अनिवार्य विकल्प के रूप में मंजूरी दे दी गई है। वहीं, आदमपुर (हिसार) और मटक माजरी (करनाल) के कॉलेजों में बायोटेक्नोलॉजी की शुरुआत की जा रही है। डॉ. भीम राव अंबेडकर राजकीय कॉलेज में भी केमिस्ट्री और फिजिक्स ऑनर्स के साथ अब इलेक्ट्रॉनिक्स को जोड़ दिया गया है।
कम छात्र संख्या होने पर बंद हो सकते हैं कोर्स: विभाग की चेतावनी
उच्चतर शिक्षा विभाग ने इस संबंध में एक कड़ा नियम भी जारी किया है। आदेश के अनुसार, यदि किसी नए कोर्स या विषय में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या 20 से कम रहती है, तो संबंधित यूनिवर्सिटी की अनुमति लेकर उस कोर्स को बंद किया जा सकता है। सभी प्राचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एआईसीटीई (AICTE) और संबंधित विश्वविद्यालयों से जरूरी स्वीकृतियां समय पर पूरी कर लें। विभाग सितंबर 2026 में दाखिलों के अंतिम आंकड़ों के आधार पर इन सभी नए प्रोग्राम्स की दोबारा समीक्षा करेगा।
अधिकारियों का पक्ष:
कैथल के जिला नोडल अधिकारी डॉ. मनोज भांबू ने बताया कि प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में नए कोर्सेज का आना युवाओं के भविष्य के लिए एक बेहतरीन अवसर है। छात्रों को इन रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों का लाभ उठाना चाहिए और अंतिम तारीख से पहले बढ़-चढ़कर आवेदन करना चाहिए।
पाकिस्तान पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति, सुरक्षा और व्यापार पर हो सकती है अहम चर्चा
24 Jun, 2026 01:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान एक दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पाकिस्तान पहुंचे हैं। इस बेहद महत्वपूर्ण और संक्षिप्त दौरे के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गहन चर्चा हुई। बातचीत का मुख्य फोकस हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुई ऐतिहासिक 'पीस डील' (शांति समझौते) पर रहा, जिसके दूरगामी कूटनीतिक और आर्थिक प्रभावों को लेकर दोनों देशों के नेताओं ने अपने विचार साझा किए।
इस मुलाकात को मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीति (जियोपॉलिटिक्स) के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
युद्ध नहीं, बातचीत का रास्ता! ईरान मुद्दे पर अमेरिकी सीनेट का अहम प्रस्ताव
24 Jun, 2026 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन/दुबई: अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट (Senate) ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किया है। सीनेट में यह प्रस्ताव 50 के मुकाबले 48 वोटों से मंजूर किया गया, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ बिना संसद की मंजूरी के सैन्य कदम न उठाने को कहा गया है। चूंकि इस प्रस्ताव को संसद के निचले सदन 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' में पहले ही हरी झंडी मिल चुकी है, इसलिए अब अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से इसे मंजूरी मिल गई है।
वॉर पॉवर्स एक्ट के बाद ऐतिहासिक कदम, रिपब्लिकन सांसदों की बगावत
अमेरिकी इतिहास में साल 1973 के 'वॉर पॉवर्स एक्ट' (War Powers Act) के लागू होने के बाद यह पहला ऐतिहासिक मौका है, जब अमेरिकी संसद के दोनों सदनों ने किसी राष्ट्रपति से युद्ध जैसी सैन्य कार्रवाई को खत्म करने की औपचारिक मांग की है। इस वोटिंग के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप की अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने पाला बदलकर विपक्षी डेमोक्रेट्स का साथ दिया, जिसने ट्रंप सरकार के भीतर आंतरिक असंतोष और बगावत को भी खुलकर सामने ला दिया है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया है कि इस प्रस्ताव का कोई कानूनी असर नहीं होगा और ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पहले ही समाप्त हो चुकी है।
खाड़ी देशों को मनाने पहुंचे विदेश मंत्री मार्को रूबियो
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया पीस डील (शांति समझौते) को लेकर खाड़ी देशों (Gulf Countries) की चिंताओं को दूर करने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और कुवैत के कूटनीतिक दौरे पर पहुंचे हैं। दरअसल, इन सहयोगी देशों को डर है कि इस समझौते के बाद कच्चे तेल के मुख्य समुद्री मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) में ईरान का वर्चस्व और प्रभाव काफी बढ़ सकता है। इसके अलावा, इस समझौते में ईरान के खतरनाक मिसाइल कार्यक्रम पर कोई स्पष्ट और सख्त शर्त न होने की वजह से भी सहयोगी देश वॉशिंगटन पर सवाल उठा रहे हैं।
ईरान के पुनर्निर्माण के लिए $300 अरब का फंड
परदे के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं से एक और बड़ी बात सामने आई है। ईरान के पुनर्निर्माण (Reconstruction) के लिए करीब 300 अरब डॉलर के एक संभावित फंड को तैयार करने पर चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि अमेरिका इस भारी-भरकम राशि के लिए खाड़ी के अमीर देशों से बड़े आर्थिक सहयोग की मांग कर सकता है। यही कारण है कि वॉशिंगटन इस समय मध्य-पूर्व (मिडल-ईस्ट) में अपने पुराने सहयोगी देशों का समर्थन जुटाने के लिए पूरा जोर लगा रहा है।
यूरोप में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच बेलारूस ने मजबूत की सैन्य व्यवस्था
24 Jun, 2026 10:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मिन्स्क: बेलारूस की सरकार रूस-यूक्रेन युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने की बड़ी तैयारी कर रही है। बेलारूस के विपक्षी संगठन 'यूनाइटेड ट्रांजिशनल कैबिनेट' ने इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट यूक्रेन सरकार को सौंपी है। विपक्ष का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में बेलारूस सरकार ने कई ऐसे कदम उठाए हैं, जो साफ तौर पर युद्ध की तैयारियों की ओर इशारा करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बेलारूस ने अपने सैन्य कानूनों में बड़े बदलाव किए हैं, जिससे अब जरूरत पड़ने पर विदेशी धरती पर भी अपनी सेना भेजने का रास्ता साफ हो गया है।
यूक्रेन की जीत से जुड़ी है बेलारूस की आजादी
इस रिपोर्ट को लेकर बेलारूस की प्रमुख विपक्षी नेता स्वेतलाना त्सिखानोव्सकाया का एक बड़ा बयान सामने आया है। उनका कहना है कि यूक्रेन का यह संघर्ष केवल उसकी अपनी आजादी की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह खुद बेलारूस के लोकतांत्रिक भविष्य से भी गहरा संबंध रखता है। विपक्ष का मानना है कि यदि यूक्रेन इस युद्ध में सफल होता है, तो इससे बेलारूस के भीतर भी तानाशाही के खिलाफ राजनीतिक बदलाव की उम्मीदों को नई ताकत मिलेगी।
सेना का विस्तार और कैदियों की भर्ती का आरोप
विपक्ष की इस रिपोर्ट में बेलारूस की सैन्य तैयारियों को लेकर कई चौंकाने वाले दावे किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बेलारूस ने पिछले कुछ समय में अपनी सेना का तेजी से आधुनिकीकरण और विस्तार किया है। इसके तहत न केवल नियमित सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई है, बल्कि नए मिलिट्री कमांड भी गठित किए जा रहे हैं। इसके अलावा, आपातकालीन स्थितियों के लिए बड़ी संख्या में रिजर्व बल (सैनिकों) को तैयार किया जा रहा है। विपक्ष ने यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि सरकार ने सेना में भर्ती के नियमों को काफी ढीला कर दिया है और अब कैदियों को भी फौज में शामिल करने की कोशिशें की जा रही हैं।
रूसी सेना और परमाणु हथियारों की तैनाती
रिपोर्ट में एक और बड़ा दावा करते हुए कहा गया है कि बेलारूस की धरती पर रूसी सैनिकों की हलचल और मौजूदगी पहले के मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ गई है। रूस ने अपने सामरिक परमाणु हथियार (टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन्स) और अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम भी बेलारूस में तैनात कर दिए हैं। इसके साथ ही, रूस का कुख्यात 'वैगनर ग्रुप' बेलारूस के सैनिकों को युद्ध के लिए विशेष ट्रेनिंग दे रहा है। हालांकि, ये सभी दावे पूरी तरह से बेलारूस के विपक्षी दल की रिपोर्ट पर आधारित हैं और बेलारूस सरकार की तरफ से अभी तक इन आरोपों पर कोई भी आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
चीनी फाइटर जेट से लैस होगा बांग्लादेश, पीएम रहमान की यात्रा पर टिकी निगाहें
24 Jun, 2026 09:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका: बांग्लादेश अपनी वायुसेना को और अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए चीन से 24 आधुनिक जे-10सीई (J-10CE) मल्टी-रोल फाइटर जेट खरीदने की बड़ी तैयारी कर रहा है। दोनों देशों के बीच इस रक्षा सौदे को लेकर बातचीत अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। इस सैन्य समझौते को लेकर इसी हफ्ते चीन के दौरे पर जा रहे बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की यात्रा के दौरान बड़ी प्रगति होने की उम्मीद है, जहां 26 जून को वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। रक्षा जानकारों का मानना है कि पूर्वी मोर्चे पर हो रही यह रणनीतिक हलचल भारत के लिए चिंता की बात हो सकती है, क्योंकि पाकिस्तानी वायुसेना भी पहले से ही इसी चीनी लड़ाकू विमान का इस्तेमाल कर रही है।
अगस्त तक फाइनल हो सकती है करीब 9000 करोड़ की डील
ढाका और बीजिंग के बीच की यह बड़ी रक्षा डील दोनों देशों के मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों को दर्शाती है। बांग्लादेश सरकार को उम्मीद है कि आगामी अगस्त महीने तक इस विमान सौदे को पूरी तरह फाइनल कर लिया जाएगा। बांग्लादेश के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर पुष्टि की है कि दोनों देश अगस्त तक इस खरीद समझौते पर दस्तखत कर सकते हैं। यह पूरा सौदा आर्थिक रूप से बेहद बड़ा है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 960 मिलियन डॉलर (करीब 9000 करोड़ भारतीय रुपये से अधिक) है। इसके तहत एक लड़ाकू विमान की कीमत लगभग 40 मिलियन डॉलर आएगी। इस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए हाल ही में चीन का एक उच्चस्तरीय दल ढाका भी आया था।
प्रधानमंत्री की चीन यात्रा के दौरान होंगे कई बड़े समझौते
प्रधानमंत्री तारिक रहमान की यह बीजिंग यात्रा सिर्फ रक्षा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि कई अन्य मायनों में भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बांग्लादेश के विदेश सचिव के मुताबिक, इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कुल 17 महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं, जिनमें 15 समझौता ज्ञापन (एमओयू), 2 समझौते और भविष्य की एक कार्ययोजना शामिल है। व्यापार और विकास के मामले में चीन इस समय बांग्लादेश का एक बेहद करीबी और बड़ा साझेदार बन चुका है। चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग के विशेष निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा के दौरान बहुप्रतीक्षित तीस्ता नदी परियोजना और चीन की अन्य वैश्विक योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।
यूके की राजनीति में भूचाल, दुनिया भर की नजरें अगली सरकार पर
24 Jun, 2026 08:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के अचानक इस्तीफे ने न केवल ब्रिटिश राजनीति में भूचाल ला दिया है, बल्कि इसके अंतर्राष्ट्रीय प्रभावों को लेकर भी चर्चाएं तेज कर दी हैं। लेबर पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री पद से उनके हटने के बाद अब ब्रिटेन में नए नेतृत्व की तलाश शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि इस बड़े बदलाव का असर वैश्विक कूटनीति, व्यापारिक संबंधों और यूरोपीय राजनीति पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।
पार्टी के भीतर असंतोष और घटती लोकप्रियता बनी वजह
प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद 10 डाउनिंग स्ट्रीट (ब्रिटिश पीएम आवास) से देश को संबोधित करते हुए स्टार्मर ने कहा कि लेबर पार्टी अब उन्हें अगले चुनाव में नेतृत्व के लिए उपयुक्त नहीं मानती है। उन्होंने देशहित को सबसे ऊपर रखते हुए पद छोड़ने का फैसला किया और नए बनने वाले नेता को पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया। दरअसल, पिछले कुछ महीनों से पार्टी के भीतर उनकी नीतियों और फैसलों को लेकर सांसदों और नेताओं में असंतोष लगातार बढ़ रहा था। साथ ही स्थानीय चुनावों में मिली नाकामी और लगातार गिरती लोकप्रियता ने उन पर पद छोड़ने का भारी दबाव बना दिया था।
जुलाई में होगा नए प्रधानमंत्री का फैसला
ब्रिटेन की राजनीतिक व्यवस्था के अनुसार, वहाँ प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं किया जाता, बल्कि संसद में बहुमत रखने वाली पार्टी का नेता ही देश का प्रधानमंत्री बनता है। ऐसे में अब लेबर पार्टी के नए नेता का चुनाव ही यह तय करेगा कि ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति आगामी जुलाई महीने में नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगी और उम्मीद जताई जा रही है कि मध्य जुलाई तक नए नेता के नाम पर मुहर लग जाएगी।
एंडी बर्नहैम रेस में सबसे आगे
ब्रिटेन के नए नेतृत्व की इस रेस में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और वर्तमान में मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें पार्टी के विभिन्न गुटों का अच्छा समर्थन हासिल है। उनके अलावा संभावित उम्मीदवारों की सूची में एंजेला रेनर, यवेट कूपर और वेस स्ट्रीटिंग जैसे कद्दावर नेताओं के नाम भी रेस में शामिल हैं।
भारत सहित वैश्विक संबंधों पर पड़ेगा असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नेतृत्व परिवर्तन का सीधा असर भारत और ब्रिटेन के बीच चल रहे व्यापारिक संबंधों पर पड़ सकता है। इसके साथ ही, ब्रेक्जिट के बाद यूरोपीय संघ (EU) के साथ रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की प्रक्रिया में नए प्रधानमंत्री की नीतियां बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगी। हालांकि स्टार्मर के इस्तीफे को लेकर कई तरह के कयास और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनके इस कदम को मुख्य रूप से राजनीतिक दबाव और पार्टी के आंतरिक असंतोष का नतीजा ही माना जा रहा है। अब पूरी दुनिया की नजरें ब्रिटेन के इस नए राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
अमेरिका-ईरान की बढ़ती नजदीकियों से बेचैन नेतन्याहू, ट्रंप के सामने नई चुनौती
23 Jun, 2026 06:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे चल रही गुप्त कूटनीतिक बातचीत ने पूरे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के सुरक्षा समीकरणों को एक नया और बेहद अप्रत्याशित मोड़ दे दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी शीर्ष अधिकारियों के बीच परवान चढ़ रही इस नई सहमति को लेकर इजरायल के भीतर गहरी चिंता और भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इजरायल को यह डर सता रहा है कि इस गुप्त समझौते से न सिर्फ लेबनान में ईरान का राजनीतिक और सैन्य दबदबा और ज्यादा मजबूत हो जाएगा, बल्कि कट्टर दुश्मन हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की आक्रामक सैन्य क्षमता भी बेहद कमजोर पड़ जाएगी।
विभिन्न अंतरराष्ट्रीय खुफिया और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के शीर्ष प्रतिनिधियों के बीच स्विट्जरलैंड के जिनेवा में कई दौर की अत्यंत गुप्त वार्ता संपन्न हुई है। इस गोपनीय बैठक के बाद दोनों देशों ने एक रणनीतिक 'सहमति पत्र' (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में चल रहे विनाशकारी युद्ध और सैन्य तनाव को तुरंत रोकना है।
समझौते से बेंजामिन नेतन्याहू आखिर क्यों हैं परेशान?
ईरान और अमेरिका के बीच हो रहे इस सीधे समझौते ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (जिन्हें राजनीतिक हलकों में 'बीबी' भी कहा जाता है) की रातों की नींद उड़ा दी है। तेल अवीव (इजरायल) के एक उच्च पदस्थ रणनीतिक सूत्र ने साफ शब्दों में कहा कि, "प्रधानमंत्री नेतन्याहू वाशिंगटन के इस बदले रुख से बेहद घबराए हुए और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।" इस समझौते से इजरायल की चिंता के मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:
हिजबुल्लाह को मिला सुरक्षा कवच: इजरायल का पुख्ता मानना है कि ईरान ने अमेरिका के साथ सौदेबाजी में लेबनान के मुद्दे को चालाकी से शामिल कर लिया है। ऐसा करके ईरान ने अपने सबसे बड़े और घातक छद्म संगठन (प्रॉक्सी वॉर ग्रुप) 'हिजबुल्लाह' को इजरायली हमलों से एक तरह का अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा कवच दिला दिया है।
सैन्य कार्रवाई की आजादी पर पाबंदी: अब तक इजरायल अपनी खुफिया जानकारी के आधार पर जब चाहता, तब लेबनान में घुसकर हिजबुल्लाह के ठिकानों और हथियारों के जखीरे पर एयरस्ट्राइक (हवाई हमले) कर देता था। लेकिन इस नए समझौते के बाद, इजरायल को लेबनान में कोई भी सैन्य कदम उठाने से पहले वाशिंगटन (व्हाइट हाउस) के कड़े सवालों, जांच और जवाबदेही का सामना करना पड़ेगा।
सेना वापसी का दबाव: तीसरा और सबसे तात्कालिक डर यह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायल पर यह कड़ा दबाव बना सकते हैं कि वह दक्षिणी लेबनान की सीमा से अपनी जमीनी सेना (IDF) को तुरंत पीछे बुलाए, जबकि इजरायल का मानना है कि हिजबुल्लाह का खतरा अभी सीमा पर टला नहीं है।
जो बाइडेन के पुराने समझौते और ट्रंप के नए मैकेनिज्म में जमीन-आसमान का अंतर
इजरायली रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बन रहा यह नया ढांचा नवंबर 2024 में जो बाइडेन प्रशासन के कार्यकाल के दौरान हुए युद्धविराम समझौतों को पूरी तरह से कमजोर और बेअसर करता है। दोनों समझौतों की रूपरेखा में यह बड़ा अंतर है:
तुलनात्मक बिंदु
पुराना मैकेनिज्म (नवंबर 2024 - बाइडेन)
नया मैकेनिज्म (2026 - ट्रंप प्रशासन)
मुख्य वार्ताकार और भागीदार
इजरायल, लेबनान, अमेरिका और फ्रांस सीधे मेज पर थे।
केवल अमेरिका और ईरान ही मुख्य भूमिका में हैं (इजरायल बाहर)।
रणनीतिक फोकस
दक्षिणी लेबनान से हिजबुल्लाह के सैन्य ढांचे को उखाड़ना।
हिजबुल्लाह को खत्म करने के बजाय केवल आपसी झड़पें रोकना।
ऑपरेशनल फ्रीडम (हमले की आजादी)
संभावित खतरे की भनक लगते ही तुरंत हमले की छूट थी।
अत्यधिक सीमित। केवल तब कार्रवाई जब हमला सिर पर आ चुका हो।
पाकिस्तान और कतर बने मध्यस्थ; पश्चिम एशिया में नया सुरक्षा संतुलन
सीमा पर जारी तनाव को कम करने और युद्धविराम को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए एक नए 'डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल' का गठन किया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सेल में लेबनान के साथ-साथ मुख्य मध्यस्थ और शांति तंत्र की निगरानी के रूप में पाकिस्तान और कतर को शामिल किया गया है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इन दो मुस्लिम देशों की एंट्री से पश्चिम एशिया में सुरक्षा का संतुलन इजरायल के खिलाफ और ईरान के पक्ष में झुक सकता है।
अक्टूबर में होने वाले चुनाव और नेतन्याहू की लॉबिंग
इस पूरे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम में इजरायल की घरेलू राजनीति भी एक बड़ा फैक्टर बनी हुई है, क्योंकि इजरायल में आगामी अक्टूबर महीने में आम चुनाव होने वाले हैं। ऐसे नाजुक समय में हिजबुल्लाह के खिलाफ किसी भी तरह की ढिलाई या कमजोरी बेंजामिन नेतन्याहू की राष्ट्रवादी नेता वाली छवि को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अपनी साख बचाने के लिए नेतन्याहू ने अपने सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार रॉन डर्मर को ट्रंप के करीबियों को प्रभावित करने और लॉबिंग के काम पर लगाया था। इसी बैकचैनल लॉबिंग के बाद ही ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान को चेतावनी देते हुए एक सख्त पोस्ट लिखा था, ताकि इजरायल के गुस्से को शांत किया जा सके।
लेबनान में खुशी की लहर, ट्रंप बोले— "मैं प्रॉब्लम सॉल्वर हूं"
दूसरी तरफ, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन इस नए अमेरिकी-ईरानी सिस्टम से बेहद खुश और संतुष्ट नजर आ रहे हैं। खुद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ने फोन पर उन्हें इस पूरे शांति प्लान की विस्तृत जानकारी दी है।
जब वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप से इजरायल की इस गहरी चिंता और नाराजगी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने अपने चिरपरिचित कारोबारी अंदाज में कहा, "मैं एक 'प्रॉblem सॉल्वर' (समस्याएं सुलझाने वाला) हूं। मैं बहुत तेजी से और कुशलता के साथ बड़ी से बड़ी वैश्विक समस्याओं को हल कर लेता हूं, और बीबी (नेतन्याहू) के साथ भी इस मसले को बहुत जल्द सुलझा लूंगा।"
हालांकि, इस नीति का विरोध खुद अमेरिका के भीतर भी शुरू हो गया है। नेतन्याहू के सबसे पक्के समर्थक माने जाने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा, "लेबनान के लिए बनाया जा रहा यह नया सिस्टम जिसमें मुख्य हितधारक इजरायल ही शामिल नहीं है, मेरी नजर में एक बहुत बड़ी रणनीतिक भूल है।"
फिलहाल, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की देखरेख में इजरायल और लेबनान के बीच अलग से एक औपचारिक बातचीत की रूपरेखा तैयार की जा रही है, ताकि दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना सुरक्षित हट सके। लेकिन अमेरिका-ईरान की इस नई गुप्त समझ ने हिजबुल्लाह को जो संजीवनी दी है, उसने इजरायल के पूरे रक्षा तंत्र में हड़कंप मचा रखा है।
इजरायली PM नेतन्याहू का बड़ा बयान, ट्रंप के दावे को नकारा
23 Jun, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेलअवीव। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को साफ तौर पर खारिज कर दिया है, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि नेतन्याहू उनके इशारे पर काम करते हैं। नेतन्याहू ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि इजरायल एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है। वह अपने सभी फैसले किसी बाहरी दबाव या देश के कहने पर नहीं, बल्कि केवल अपने राष्ट्रीय हितों और देश की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लेता है। नेतन्याहू का यह बयान दोनों नेताओं के रिश्तों को लेकर चल रही चर्चाओं को शांत करने और इजरायल की स्वतंत्र विदेश नीति को दुनिया के सामने रखने की एक बड़ी कोशिश है।
डोनाल्ड ट्रंप ने क्या दावा किया था
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक इंटरव्यू में दावा किया था कि इजरायली प्रधानमंत्री उनका बहुत सम्मान करते हैं और वही करते हैं जो ट्रंप उनसे करने को कहते हैं। ट्रंप ने यहाँ तक कहा था कि कई संवेदनशील मुद्दों पर तो उन्हें नेतन्याहू को समझाना भी पड़ता है। ट्रंप के इस बयान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश जा रहा था कि इजरायली सरकार पूरी तरह से अमेरिकी नेतृत्व के नियंत्रण में काम कर रही है। यह दावा उस समय और ज्यादा चर्चा में आ गया जब ईरान और लेबनान जैसे गंभीर मुद्दों पर अमेरिका और इजरायल के बीच अंदरूनी मतभेदों की खबरें लगातार सामने आ रही थीं।
नेतन्याहू ने मजाकिया अंदाज में दिया जवाब
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ट्रंप के इस दावे पर पलटवार करते हुए मजाकिया लेकिन बेहद मजबूत अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में लोग सोचते हैं कि ट्रंप वही करते हैं जो मैं उनसे कहता हूँ, और इसके उलट इजरायल में लोग कहते हैं कि मैं वही करता हूँ जो ट्रंप चाहते हैं। सच्चाई यह है कि इन दोनों में से कोई भी बात ठीक नहीं है। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका और इजरायल दोनों ही आजाद देश हैं। कई महत्वपूर्ण मामलों पर दोनों देशों की सोच और रणनीतियाँ जरूर एक जैसी होती हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कोई भी देश एक-दूसरे के इशारे पर चलता है।
मतभेदों के बीच रणनीतिक साझेदारी
नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि उनका सबसे पहला और मुख्य लक्ष्य इजरायल की सुरक्षा करना है, ठीक उसी तरह जैसे ट्रंप हमेशा अमेरिका के हितों को आगे रखते हैं। दोनों नेता एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, लेकिन फैसले लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई को लेकर दोनों देशों के बीच कुछ रणनीतिक मतभेद दिखे हैं। इसके बावजूद, दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम कर रहे हैं, जो यह दिखाता है कि आपसी मतभेद उनकी गहरी दोस्ती और सहयोग के आड़े नहीं आते हैं।
नई तकनीक का चमत्कार, 40 घंटे की जटिल सर्जरी के बाद मुस्कुराईं दो बहनें
23 Jun, 2026 04:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और अनोखी सर्जरी (ऑपरेशन) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस सफल ऑपरेशन के जरिए जन्म से सिर से जुड़ी दो सगी नाइजीरियाई बहनों, गुडनेस और मर्सी को एक नया जीवन मिला है। जून 2023 में जन्मीं ये दोनों बच्चियां 'क्रैनियोपैगस ट्विन्स' थीं, जिसका मतलब है कि उनके सिर और दिमाग की कुछ मुख्य खून की नसें आपस में जुड़ी हुई थीं। चिकित्सा जगत में ऐसे मामले बहुत ही दुर्लभ माने जाते हैं, जो लगभग 25 लाख बच्चों में से किसी एक में देखने को मिलते हैं।
चार महीनों में हुए चार बड़े ऑपरेशन
जब ये बच्चियां छह महीने की थीं, तब उनके माता-पिता को लंदन के प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉक्टर नूर उल ओवैस जिलानी के बारे में पता चला। उनकी संस्था 'जेमिनी अनट्वाइंड' ने इन बच्चियों के इलाज और ऑपरेशन का पूरा खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली। साल 2025 में इस बेहद कठिन और लंबी चिकित्सा प्रक्रिया की शुरुआत हुई। डॉक्टरों की टीम ने चार महीनों के दौरान चार बड़े और जटिल ऑपरेशन किए। इन सभी ऑपरेशनों को मिलाकर डॉक्टरों ने लगभग 40 घंटे तक ऑपरेशन थिएटर में लगातार काम किया, जिसके बाद दोनों बच्चियों के सिर को सुरक्षित रूप से अलग करने में सफलता मिली।
एआई तकनीक ने दिखाई राह
इस बेहद मुश्किल ऑपरेशन को कामयाब बनाने में एआई (AI) तकनीक की बहुत बड़ी भूमिका रही। डॉक्टरों ने ऑपरेशन शुरू करने से पहले ही इस आधुनिक तकनीक की मदद से दोनों बच्चियों के सिर, नसों और दिमाग की बनावट का एक सटीक 3D (त्रि-आयामी) मॉडल तैयार कर लिया था। इस मॉडल की वजह से डॉक्टरों को ऑपरेशन की एक-एक बारीकी को पहले से समझने और उसकी सटीक योजना बनाने में बहुत मदद मिली। इस सफल सर्जरी के बाद दोनों बच्चियां अब पूरी तरह से ठीक हैं और सामान्य जिंदगी जी रही हैं। हाल ही में उन्होंने अपने परिवार के साथ अपना तीसरा जन्मदिन भी मनाया है, जिसे चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कामयाबी माना जा रहा है।
हेलीकॉप्टर दुर्घटना से मचा हड़कंप, चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित लेकिन घायल
23 Jun, 2026 03:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अलास्का। अमेरिका के अलास्का राज्य से एक बड़े विमान हादसे की खबर आई है। यहाँ अमेरिकी तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) का एक एमएच-60 जयहॉक हेलीकॉप्टर नियमित ट्रेनिंग के दौरान अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में हेलीकॉप्टर में सवार चालक दल के सभी चार सदस्य घायल हो गए, जिन्हें रेस्क्यू टीम ने काफी कोशिशों के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
ट्रेनिंग के दौरान पहाड़ी इलाके में हुआ हादसा
तटरक्षक बल द्वारा जारी बयान के मुताबिक, यह दुर्घटना सिटका इलाके में स्थित हार्बर माउंटेन (पहाड़ी क्षेत्र) के पास हुई। हेलीकॉप्टर के क्रैश होने के ठीक एक घंटे बाद बचाव दल मौके पर पहुंच गया था। पहाड़ी इलाका होने के कारण बचाव कार्य में काफी चुनौतियाँ आईं, लेकिन टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए समय पर राहत कार्य शुरू कर दिया।
घायलों को पहुँचाया गया अस्पताल
मलबे से सुरक्षित निकाले जाने के बाद, घायल चालक दल के चारों सदस्यों को तुरंत इलाज के लिए पास के अस्पताल पहुँचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है। अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के सही कारणों का पता लगाने के लिए मामले की जांच की जा रही है।
कृष्णा नगर में सनसनी: कारोबारी ने खुद को मारी गोली
23 Jun, 2026 03:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार। शहर के रिहायशी और पॉश इलाके कृष्णा नगर से मंगलवार दोपहर एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ रहने वाले 30 वर्षीय अंडा व्यवसायी अमन शर्मा ने अपने घर पर पिस्टल से सिर में गोली मारकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। अचानक हुई फायरिंग की आवाज से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। वारदात की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन तुरंत एक्शन में आया।
रेलवे स्टेशन के पास संभालते थे थोक का कारोबार
शुरुआती पुलिस जांच के मुताबिक, मृतक अमन शर्मा (30) मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के निवासी थे, लेकिन पिछले कुछ वक्त से वह हिसार के कृष्णा नगर में ही रह रहे थे। अमन का हिसार रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार के पास अंडों का एक बड़ा होलसेल (थोक) बिजनेस था। मंगलवार दोपहर को उन्होंने किन कारणों से यह आत्मघाती कदम उठाया, इसका अभी पता नहीं चल पाया है। उन्होंने अपनी ही पिस्टल से खुद को गोली मारी, जिससे घटनास्थल पर ही उनकी सांसें थम गईं।
फोरेंसिक टीम और पुलिस अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
घटना की भनक लगते ही थाना प्रबंधक इंस्पेक्टर विकास कुमार और चौकी इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुँचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम को भी बुलाया गया, जिसने घटनास्थल से जरूरी सबूत इकट्ठा किए। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल भेज दिया है और मामले की गहराई से तफ्तीश शुरू कर दी है।
चानौत गांव में झड़प के बाद 1500 लोगों पर FIR दर्ज
23 Jun, 2026 02:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हांसी: स्थानीय उपमंडल के गांव चानौत में देर रात पानी की पाइपलाइन से अवैध टी-कनेक्शन हटाने पहुंची पुलिस और प्रशासनिक टीम पर ग्रामीणों ने पथराव कर दिया। जन स्वास्थ्य विभाग के एक्सईन (XEN) की शिकायत पर पुलिस ने गांव की महिला सरपंच, उनके प्रतिनिधि सहित 6 नामजद और करीब 1500 अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। इस हिंसक झड़प में दो पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
अमृत योजना की पाइपलाइन से जुड़ा है विवाद
जन स्वास्थ्य विभाग के एक्सईन संजीव त्यागी ने दर्ज शिकायत में बताया कि अमृत योजना के तहत हांसी शहर को पानी सप्लाई करने के लिए भाखड़ा नहर से एक विशेष डीआई पाइपलाइन बिछाई जा रही है। यह लाइन हांसी शहर से गांव चानौत खरकड़ी मोड़ तक दबाई जा चुकी है। आरोप है कि 20 जून को ग्रामीणों ने विभाग की अनुमति के बिना इस पाइपलाइन में एक अवैध टी-कनेक्शन लगा दिया था।
भारी पुलिस बल के साथ रात में हुई कार्रवाई
उच्चाधिकारियों के आदेश पर एक्सईन संजीव त्यागी को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था। सोमवार रात को वह उपायुक्त (DC) राहुल नरवाल, पुलिस अधीक्षक (SP) विनोद कुमार, एसडीएम राजेश कोथ व विकास यादव और भारी पुलिस बल के साथ अवैध कनेक्शन हटाने चानौत खरकड़ी मोड़ पहुंचे थे।
प्रशासन का कहना है कि भीड़ के उग्र होने की आशंका को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए रात के समय इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
अधिकारियों पर हमला और सरकारी काम में बाधा
शिकायत के अनुसार, मौके पर मौजूद पूर्व सरपंच सत्यवान, अनूप कुमार, सरपंच प्रतिनिधि हिमांशु, महिला सरपंच सरस्वती, विशाखा और सुधीर ने करीब 1000 से 1500 ग्रामीणों और महिलाओं को उकसाया। इसके बाद भीड़ ने प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल पर जान से मारने की नियत से ईंट, पत्थरों और डंडों से हमला कर दिया।
हमले के दौरान उपद्रवियों ने सरकारी काम में बाधा डाली और अधिकारियों को धमकी भी दी। इस पथराव में ईएएसआई प्रीतम सिंह और हेड कांस्टेबल वजीर सिंह को गंभीर चोटें आई हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा और आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े।
39 दिनों से चल रहा है धरना, ग्रामीणों पर चौथी FIR
गांव चानौत में पिछले 39 दिनों से पानी की मांग को लेकर ग्रामीणों का धरना जारी है। इस आंदोलन के दौरान ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज होने वाली यह चौथी एफआईआर है। इससे दो दिन पहले ही पाइपलाइन में टी-कनेक्शन लगाने के आरोप में भी एक मामला दर्ज किया गया था।
SP की अपील: शरारती तत्वों से बचें, बातचीत का रास्ता अपनाएं
इस पूरे मामले पर हांसी के एसपी विनोद कुमार ने प्रेस वार्ता कर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि धरना कमेटी की ओर से योजनाबद्ध तरीके से अवैध टी-कनेक्शन लगाया गया था। कुछ शरारती तत्व ग्रामीणों को गुमराह कर रहे हैं और गांव का माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। एसपी ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी के बहकावे में न आएं, धरना समाप्त करें और प्रशासन के साथ बातचीत का रास्ता अपनाएं क्योंकि संवाद के द्वार हमेशा खुले हैं।
तनाव से समझौते तक: अमेरिका-ईरान के बीच बड़ी आर्थिक डील
23 Jun, 2026 12:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान/वाशिंगटन। लगभग चार दशकों के कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय अलगाव के बाद, ईरान के लिए एक बहुत बड़े आर्थिक कायाकल्प (आर्थिक मोड़) का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में चल रही कूटनीतिक वार्ताओं के बीच अब 300 अरब डॉलर ($300 Billion) के एक विशालकाय प्रस्तावित 'विकास और निवेश फंड' की चर्चा दुनिया भर के बाजारों में जोर पकड़ रही है। यह भारी-भरकम राशि दुनिया के कई छोटे देशों की कुल जीडीपी (अर्थव्यवस्था) से भी कहीं बड़ी है, जो ईरान के भविष्य को पूरी तरह बदल सकती है।
यह सीधा मुआवजा नहीं, बल्कि 'इन्वेस्टमेंट मॉडल' है
इस ऐतिहासिक सौदे के पीछे के नियम और कूटनीति बेहद जटिल हैं। अमेरिकी प्रशासन ने पहले ही पूरी दुनिया के सामने यह साफ कर दिया है कि यह राशि ईरान को दिया जाने वाला कोई सीधा कैश पेमेंट (नकद भुगतान) या युद्ध का मुआवजा नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह ईरान के नाम कोई 300 अरब डॉलर का चेक काटना नहीं है, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय निवेश मंच (इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म) होगा।
इस मंच के जरिए अमेरिकी, खाड़ी देश और दुनिया भर की बड़ी कंपनियां व निजी कॉर्पोरेट निवेशक ईरान के अलग-अलग क्षेत्रों में अपना पैसा लगाएंगे। यह पूरा फंड सीधे ईरानी सरकार के खजाने या खाते में ट्रांसफर नहीं किया जाएगा, बल्कि सीधे विकास परियोजनाओं के निवेश के रूप में ईरान के भीतर आएगा।
दुनिया भर के निवेशकों से मिला बड़ा कमिटमेंट
इस प्रस्तावित फंड को लेकर वैश्विक बाजार में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इसमें सिर्फ अमेरिकी कंपनियां ही नहीं, बल्कि निम्नलिखित क्षेत्रों के बड़े निवेशक भी गहरी रुचि दिखा रहे हैं:
खाड़ी देश (Gulf Countries): यूएई, कतर और अन्य तेल समृद्ध राष्ट्र।
एशियाई देश: दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर और मलेशिया।
अन्य महाद्वीप: अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई बड़े कॉर्पोरेट घराने।
ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, इस 300 अरब डॉलर के कुल प्रस्तावित फंड में से आधे से अधिक राशि (लगभग 150 अरब डॉलर से ज्यादा) के लिए निवेशकों से शुरुआती कमिटमेंट (लिखित सहमति) पहले ही मिल चुकी है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि यह कोई कागजी योजना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर एक वास्तविक वैश्विक आर्थिक ढांचा तैयार करने की गंभीर कोशिश है।
400 अरब डॉलर के मुआवजे पर बना 'बीच का रास्ता'
हालिया सैन्य संघर्ष और जंग के दौरान ईरान के कई अत्यंत महत्वपूर्ण औद्योगिक और रणनीतिक ठिकानों—जैसे कच्चे तेल की रिफाइनरियों, कमर्शियल हवाई अड्डों और बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को भारी नुकसान पहुंचा था। इसी तबाही की भरपाई के लिए तेहरान शुरुआत में अमेरिका से करीब 400 अरब डॉलर के सीधे मुआवजे (कंपनसेशन) की मांग पर अड़ा हुआ था।
चूंकि अमेरिका ईरान को सीधे युद्ध का हर्जाना देने के लिए किसी भी कीमत पर तैयार नहीं था, इसलिए दोनों देशों के राजनयिकों ने बीच का रास्ता निकालते हुए 'मुआवजे' के इस दावे को 'वैश्विक निवेश के मॉडल' में तब्दील कर दिया। भले ही वाशिंगटन इसे विकास फंड कह रहा हो, लेकिन ईरान के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी इसे अपनी रणनीतिक जीत और 'अप्रत्यक्ष मुआवजे' के तौर पर ही देख रहे हैं, क्योंकि इस पैसे का अंतिम इस्तेमाल जंग में तबाह हुए ढांचे को दोबारा खड़ा करने में ही किया जाएगा।
ईरान की दशकों पुरानी ऊर्जा तकनीक का होगा आधुनिकीकरण
इस विशालकाय फंड की मदद से ईरान अपनी दशकों पुरानी और प्रतिबंधों के कारण जर्जर हो चुकी ऊर्जा (तेल और गैस) तकनीकों को पूरी तरह आधुनिक और अत्याधुनिक बना सकेगा। इसके साथ ही देश के भीतर:
नए और हाई-स्पीड रेलवे नेटवर्क बिछाए जाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों (सी-पोर्ट्स) और हवाई अड्डों का बड़े पैमाने पर विकास होगा।
युद्ध में पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और संचार व्यवस्था को बहाल किया जाएगा।
गौरतलब है कि ईरान के पास वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार और चौथा सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार मौजूद है। इस निवेश के बाद ईरान अपनी इस प्राकृतिक ऊर्जा क्षमता का दुनिया के बाजारों में पूरी ताकत से इस्तेमाल कर सकेगा।
फंसे हुए 24 अरब डॉलर भी होंगे रिहा
इस 300 अरब डॉलर के नए निवेश फंड से अलग ईरान के लिए एक और बड़ी राहत की खबर है। विभिन्न देशों के विदेशी बैंकों में प्रतिबंधों के कारण फंसे (फ्रीज) पड़े ईरान के करीब 24 अरब डॉलर के सरकारी फंड को भी चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर दोनों पक्षों में पूर्ण सहमति बन गई है। इस समझौते के तहत, कुल राशि की आधी रकम (लगभग 12 अरब डॉलर) दोनों देशों के बीच होने वाली अंतिम कूटनीतिक बातचीत से पहले ही ईरान को वापस मिल सकती है।
परमाणु शर्तों के पालन पर टिकी है पूरी डील
हालांकि, इस पूरे समझौते में एक बहुत बड़ा पेंच (शर्त) भी शामिल है। 300 अरब डॉलर का यह फंड अभी सिर्फ एक प्रस्तावित ढांचा है और इसकी शुरुआत तुरंत नहीं होने वाली है। इस वैश्विक पूंजी बाजार तक पहुंच बनाने के लिए ईरान को समझौते की बेहद सख्त और कड़ी शर्तों का अक्षरसः पालन करना होगा, जिनमें शामिल हैं:
ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) को पूरी तरह सीमित करना होगा।
देश में मौजूद संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के स्टॉक को पूरी तरह नष्ट/खत्म करना होगा।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के कड़े और अचानक होने वाले निरीक्षणों (इन्स्पेक्शंस) को बिना शर्त स्वीकार करना होगा।
यदि ईरान इनमें से किसी भी शर्त के पालन से पीछे हटता है, तो यह पूरी अरबों डॉलर की आर्थिक योजना तत्काल प्रभाव से खतरे में पड़ जाएगी और रद्द कर दी जाएगी।
शुक्रवार को होने वाले एमओयू (MoU) पर टिकी नजरें
पिछले चार दशकों के इतिहास में ईरान को वैश्विक वित्तीय और पूंजी बाजारों तक इतनी बड़ी और खुली पहुंच पहले कभी नहीं मिली है। यदि यह कूटनीतिक और आर्थिक योजना सफल रहती है, तो ईरान न केवल युद्ध की विभीषिका से हुए नुकसान से उबर जाएगा, बल्कि अपनी पूरी अर्थव्यवस्था को एक नई और ऐतिहासिक दिशा दे देगा। फिलहाल, दुनिया भर के कूटनीतिज्ञों और आर्थिक विश्लेषकों की निगाहें आगामी शुक्रवार पर टिकी हैं, जब अमेरिका और ईरान के शीर्ष अधिकारी इस ऐतिहासिक सहमति पत्र (MoU) पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर करने वाले हैं।
पाकिस्तान से आया बड़ा बयान, S-400 को लेकर भारत की बढ़ी साख
23 Jun, 2026 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लाहौर। भारत और पाकिस्तान के बीच सामरिक संतुलन को लेकर पूर्व पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित का एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान सामने आया है। बासित ने पाकिस्तानी सेना और सरकार के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें युद्ध के दौरान बढ़त बनाने की बात कही जा रही थी। उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि भारत की हवाई सुरक्षा में तैनात रूसी निर्मित 'S-400 ट्रायम्फ' एयर डिफेंस सिस्टम बेहद शानदार और अचूक है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सरकार और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को आगाह करते हुए माना कि पाकिस्तान के पास फिलहाल इस अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली की काट या इसका मुकाबला करने की कोई ठोस क्षमता मौजूद नहीं है।
'ऑपरेशन सिंदूर' की खुली पोल, सेना के दावे खोखले
अब्दुल बासित का यह बयान इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह मई 2025 में दोनों देशों के बीच हुए चार दिनों के सैन्य संघर्ष (ऑपरेशन सिंदूर) की जमीनी हकीकत को बयां करता है। उस झड़प के बाद से ही पाकिस्तानी सेना लगातार यह ढिंढोरा पीट रही थी कि उसने भारतीय वायु सीमा की सुरक्षा को भेदकर बढ़त बना ली थी। लेकिन पूर्व उच्चायुक्त ने कबूल किया कि संघर्ष के दौरान भारतीय वायुसेना के S-400 सिस्टम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तानी वायुसेना के मंसूबों को पूरी तरह नाकाम कर दिया था। उन्होंने चेताया कि पाकिस्तानी सेना को अब अपनी कमियों को छिपाने वाले खोखले दावों से बाहर निकलना चाहिए और खुद के एयर डिफेंस को मजबूत करने पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
क्या है भारत का S-400 सौदा?
सामरिक दृष्टिकोण से भारत ने साल 2018 में रूस के साथ 5.43 अरब डॉलर में पांच S-400 मिसाइल बैटरियों की खरीद का सौदा किया था।
मौजूदा स्थिति: इस सौदे के तहत अधिकांश मिसाइल बैटरियां भारतीय वायुसेना को मिल चुकी हैं और पश्चिमी व पूर्वी सीमाओं पर तैनात हैं।
आगामी योजना: सौदे की अंतिम खेप भी इसी साल (2026) के अंत तक भारत पहुंचने की उम्मीद है।
अतिरिक्त खरीद: इस रक्षा प्रणाली के जबरदस्त और सफल प्रदर्शन को देखते हुए भारत सरकार अब रूस से ऐसी पांच और अतिरिक्त S-400 बैटरियां खरीदने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है।
क्यों अचूक है S-400 ट्रायम्फ?
अब्दुल बासित के मुताबिक, यह सिस्टम भारत को दक्षिण एशिया क्षेत्र में भारी रणनीतिक और सैन्य बढ़त देता है। इस एयर डिफेंस सिस्टम की ताकत निम्नलिखित विशेषताओं के कारण बेहद घातक मानी जाती है:
मल्टी-लेयर सुरक्षा: यह लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली (Surface-to-Air) एक बहुस्तरीय मिसाइल प्रणाली है।
अचूक ट्रैकिंग: यह सिस्टम 600 किलोमीटर की दूरी से ही दुश्मन के लड़ाकू विमानों, स्टील्थ ड्रोन, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों को आसानी से ट्रैक (चिह्नित) कर सकता है।
हवा में ही ध्वस्त: ट्रैक करने के बाद यह प्रणाली दुश्मन के किसी भी हवाई हमले को 400 किलोमीटर के दायरे में ही हवा में मार गिराने और ध्वस्त करने की अचूक क्षमता रखती है।
बंद कमरे में फंसे रहे परिजन, चोर ले गए जेवर और नकदी
23 Jun, 2026 10:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
धारूहेड़ा। इंडस्ट्रियल टाउन धारूहेड़ा के सेक्टर-6 थाना इलाके की हाईराइज सोसायटियों में सुरक्षा के दावों की हवा निकल गई है। यहाँ एक बेहद हैरान करने वाला चोरी का मामला सामने आया है। शातिर चोरों ने दुस्साहस दिखाते हुए घर के भीतर मौजूद महिला और बच्चों को कमरों में बाहर से लॉक कर दिया और पूरे इत्मीनान से लाखों के गहने व कैश समेटकर चंपत हो गए। यह पूरी वारदात आनंदम आवास सोसायटी की है, जहाँ रहने वाले छोटन यादव के घर को चोरों ने निशाना बनाया।
बाथरूम में नहाती रही महिला, चोरों ने बाहर से लगाई कुंडी
पीड़ित छोटन यादव ने पुलिस को बताया कि 18 जून को वह अपने गोदाम पर गए हुए थे। घर में उनकी पत्नी और बच्चे ही थे। दोपहर के वक्त उनकी पत्नी बाथरूम में नहाने गई थीं और बच्चे दूसरे कमरे में टीवी देखने में व्यस्त थे। इसी बीच अज्ञात चोर फ्लैट के अंदर दाखिल हुए। उन्होंने बेहद चालाकी से महिला के बाथरूम और बच्चों वाले कमरे के दरवाजों को बाहर से बंद कर दिया। घर के लोग अंदर ही फंसे रह गए और चोरों ने बेडरूम की अलमारी खंगाल डाली। चोर वहां रखे करीब 40 हजार रुपये कैश और सोने के जेवरात लेकर रफूचक्कर हो गए।
कमरे से बाहर आते ही उड़े होश, डेढ़ लाख का नुकसान
जब महिला नहाने के बाद बाहर निकलने लगी, तो दरवाजा बंद मिला। काफी मशक्कत के बाद जब दरवाजा खुला, तो घर का नजारा देखकर पैर तले जमीन खिसक गई। अलमारी का सारा सामान बिखरा पड़ा था। चोरों ने सोने का लॉकेट, बालियां, अंगूठियां, नोज पिन, झुमके और कीमती हार पार कर दिए थे। चोरी गए कुल सामान और कैश की कीमत लगभग ₹1.5 लाख आंकी गई है।
हाई-टेक सोसायटी की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
इस वारदात ने आनंदम आवास सोसायटी के सिक्योरिटी सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। दिन-दहाड़े चोर इतनी आसानी से गार्ड्स और कैमरों को चकमा देकर फ्लैट तक कैसे पहुँच गए और किसी को भनक तक नहीं लगी? इस घटना के बाद से सोसायटी के अन्य निवासियों में भी डर का माहौल है।
पुलिसिया कार्रवाई: घटना की सूचना मिलते ही सेक्टर-6 थाना पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस टीम सोसायटी और आसपास के रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है, ताकि चोरों का सुराग लगाया जा सके।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
