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60 दिन की समयसीमा पूरी, ट्रंप ने संसद को दी जानकारी
2 May, 2026 08:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा एलान—"ईरान के साथ युद्ध अब समाप्त", कांग्रेस को पत्र लिख दी सैन्य कार्रवाई रोकने की जानकारी
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। राष्ट्रपति ने अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को पत्र लिखकर सूचित किया कि निर्धारित 60 दिनों की कानूनी समयसीमा पूरी होने के साथ ही शत्रुता समाप्त कर दी गई है।
7 अप्रैल के बाद से शांति का दावा
सांसदों को संबोधित अपने पत्र में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि 7 अप्रैल 2026 के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी प्रकार की गोलीबारी या सैन्य झड़प नहीं हुई है। उन्होंने कहा, "28 फरवरी 2026 को शुरू हुई शत्रुता अब औपचारिक रूप से समाप्त हो चुकी है।"
'वार पावर्स रिजोल्यूशन' और कानूनी मजबूरी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम अमेरिका के 1973 के 'वार पावर्स रिजोल्यूशन' (War Powers Resolution) के कानूनी पेच को सुलझाने की कोशिश है।
इस कानून के तहत राष्ट्रपति को किसी भी सैन्य कार्रवाई की सूचना कांग्रेस को देनी होती है।
बिना संसद की विशेष मंजूरी के ऐसी कार्रवाई को 60 दिनों के भीतर समाप्त करना अनिवार्य है।
2 मार्च को कांग्रेस को दी गई जानकारी के बाद, यह समयसीमा 1 मई को समाप्त हो रही थी।
ईरान के प्रस्तावों से असंतुष्ट हैं ट्रंप
युद्ध समाप्ति की घोषणा के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के रुख पर अनिश्चितता जताई है। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा में कहा, "वे (ईरान) समझौता तो करना चाहते हैं, लेकिन उनके वर्तमान प्रस्तावों से मैं संतुष्ट नहीं हूँ। हमें देखना होगा कि आगे क्या होता है।"
ईरानी नेतृत्व पर साधा निशाना
ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को "असंगठित और बिखरा हुआ" करार दिया। उन्होंने दावा किया कि तेहरान के भीतर भारी आंतरिक मतभेद हैं, जिसके कारण बातचीत की स्थिति कमजोर हो रही है। ट्रंप के अनुसार:
ईरान का नेतृत्व अंदरूनी कलह से घिरा हुआ है।
यह स्पष्ट नहीं है कि वहां सत्ता की बागडोर असल में किसके हाथ में है।
नेतृत्व में आपसी सहमति की कमी के कारण कूटनीतिक वार्ता जटिल हो रही है।
कूटनीति बनाम सैन्य विकल्प
कड़ी बयानबाजी के बीच ट्रंप ने मानवीय आधार पर कूटनीतिक समाधान को अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा, "क्या हमें पूरी तरह हमला कर इसे खत्म कर देना चाहिए या समझौते की कोशिश करनी चाहिए? मैं समझौते के पक्ष में हूँ।" हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि यदि कूटनीति विफल रहती है, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प अभी भी खुला रखा गया है।
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इस्राइल ने शुरू किया था साझा सैन्य अभियान।
1 मई को सैन्य कार्रवाई की 60 दिनों की कानूनी समयसीमा हुई पूरी।
अमेरिकी प्रशासन ने कूटनीतिक और सैन्य, दोनों रास्ते खुले रखने की बात कही।
ईरान का दावा: होर्मुज बनेगा क्षेत्रीय स्थिरता का आधार
2 May, 2026 08:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान का रणनीतिक दांव: होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र के लिए घोषित किए 'नए नियम', विदेशी शक्तियों को दी चेतावनी
तेहरान: मध्य पूर्व (West Asia) में जारी भारी तनाव के बीच ईरान की इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने दक्षिणी तट से सटे समुद्री क्षेत्रों के लिए नए 'परिचालन नियम' (Rules of Engagement) जारी किए हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इन कदमों का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और फारस की खाड़ी जैसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों पर अपना प्रभुत्व और कड़ा नियंत्रण स्थापित करना है।
IRGC नौसेना की सख्त निगरानी
आईआरजीसी की नौसेना कमान ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि वह ईरान की लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा और उससे सटे जलक्षेत्र की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
प्रभुत्व का विस्तार: ईरान का लक्ष्य इन जल क्षेत्रों को अपनी शक्ति के स्रोत के रूप में स्थापित करना है।
रणनीतिक नियंत्रण: होर्मुज जलडमरूमध्य, जहाँ से दुनिया का एक-तिहाई समुद्री तेल गुजरता है, वहाँ ईरान अपनी निगरानी और नियंत्रण को अभूतपूर्व स्तर पर ले जाने की तैयारी में है।
सर्वोच्च नेता का कड़ा संदेश: "विदेशी ताकतों के लिए कोई जगह नहीं"
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने इस क्षेत्र में मौजूद विदेशी शक्तियों, विशेषकर अमेरिका को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। उन्होंने निर्देश जारी करते हुए कहा कि फारस की खाड़ी में उन विदेशी शक्तियों के लिए कोई स्थान नहीं है जो क्षेत्र की शांति को भंग करना चाहती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय सुरक्षा का जिम्मा केवल यहाँ के देशों का होना चाहिए।
अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बताया 'कागजी शेर'
वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच खामेनेई ने पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर तीखा हमला बोला है:
रक्षा क्षमता पर सवाल: उन्होंने अमेरिकी ठिकानों को 'कागजी शेर' करार देते हुए उनकी सुरक्षा क्षमताओं का मजाक उड़ाया।
क्षेत्रीय सहयोगियों को चेतावनी: ईरान ने उन क्षेत्रीय देशों और सहयोगियों पर भी निशाना साधा है जो इस संघर्ष में अमेरिका और इजरायल का समर्थन कर रहे हैं।
बढ़ता तनाव और नाकाबंदी की स्थिति
13 अप्रैल को कूटनीतिक वार्ताओं की विफलता के बाद से अमेरिका द्वारा ईरान की घेराबंदी की कोशिशें तेज हुई हैं। इसके जवाब में ईरान ने समुद्री मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत कर वैश्विक व्यापार और सुरक्षा समीकरणों को चुनौती दे दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के ये 'नए नियम' आने वाले दिनों में खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और तनाव को और अधिक बढ़ा सकते हैं।
क्षेत्र: होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी।
दायरा: 2,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा पर IRGC का कड़ा पहरा।
उद्देश्य: विदेशी हस्तक्षेप को समाप्त करना और क्षेत्रीय जल क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण।
एपस्टीन के प्रोजेक्ट को लेकर नया विवाद, मिडल ईस्ट कनेक्शन सामने आया
1 May, 2026 11:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन | दिवंगत अमेरिकी फाइनेंसर और यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के बारे में सामने आए नए दस्तावेजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी मचा दी है। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, एपस्टीन मध्य पूर्व के देशों में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का सलाहकार बनना चाहता था। अपनी इस महात्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए उसने न केवल प्रभावशाली लोगों से कूटनीतिक संबंध बनाए, बल्कि खुद को इस्लामी कला और संस्कृति के प्रति बेहद समर्पित दिखाने का प्रयास भी किया। दस्तावेजों से पता चलता है कि वह सऊदी अरब के बड़े आर्थिक प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने की फिराक में था और इसके लिए उसने कई वर्षों तक जमीन तैयार की थी।
निजी द्वीप पर बनाई 'नकली मस्जिद': काबा के पवित्र 'किस्वा' का भी किया इस्तेमाल
रिपोर्ट में सबसे हैरान करने वाला खुलासा एपस्टीन के निजी कैरेबियाई द्वीप 'लिटिल सेंट जेम्स' को लेकर हुआ है। एपस्टीन ने वहां एक अनोखी इमारत बनवाई थी, जिसे वह खुद 'मस्जिद' कहता था। इस इमारत को सजाने के लिए उसने मक्का के पवित्र काबा के 'किस्वा' (कुरान की आयतों वाले रेशमी कपड़े) के हिस्से, उज्बेकिस्तान की प्राचीन टाइल्स और सीरियाई वास्तुकला से प्रेरित सोने का गुंबद जैसी दुर्लभ धार्मिक वस्तुओं का संग्रह किया था। हालांकि, जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह इमारत किसी धार्मिक उद्देश्य के लिए नहीं बल्कि एक आर्ट प्रोजेक्ट के रूप में बनाई गई थी, जिसका उपयोग वह अरब देशों के सहयोगियों को प्रभावित करने के लिए करता था। साल 2017 में आए भीषण तूफान 'मारिया' के बाद इस ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा, जिसके साथ ही एपस्टीन के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का यह मायाजाल भी बिखरने लगा।
भरी सभा में ट्रंप पर सवाल, अमेरिकी सांसद का बयान चर्चा में
1 May, 2026 09:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन | वाशिंगटन में 'हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी' की बैठक के दौरान उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब डेमोक्रेटिक सांसद सारा जैकब्स ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मानसिक स्थिति को लेकर सीधे सवाल दाग दिए। सैन डिएगो का प्रतिनिधित्व करने वाली जैकब्स ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से पूछा कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप कमांडर-इन-चीफ की जिम्मेदारी निभाने के लिए मानसिक रूप से पर्याप्त स्थिर हैं? अपनी दलील को पुख्ता करने के लिए उन्होंने ट्रंप के पिछले डेढ़ साल के कार्यकाल के दौरान किए गए विवादित सोशल मीडिया पोस्ट्स और एआई (AI) द्वारा निर्मित उस मीम का हवाला दिया, जिसमें ट्रंप को ईसा मसीह के रूप में दर्शाया गया था। जैकब्स ने तर्क दिया कि इस तरह का व्यवहार एक जिम्मेदार वैश्विक नेता की छवि के अनुकूल नहीं है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से चिंता का विषय है।
रक्षा मंत्री का पलटवार: ट्रंप को बताया सबसे दूरदर्शी नेता, बाइडेन का दिया हवाला
सांसद जैकब्स के तीखे सवालों पर रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और इसे राष्ट्रपति पद का सीधा अपमान करार दिया। हेगसेथ ने ट्रंप का पुरजोर बचाव करते हुए उन्हें अमेरिका के इतिहास का सबसे तेज और दूरदर्शी कमांडर-इन-चीफ बताया। उन्होंने डेमोक्रेटिक सांसद पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए पलटवार किया और पूछा कि क्या उन्होंने इसी तरह की चिंताएं पिछले चार वर्षों के दौरान जो बाइडेन के स्वास्थ्य को लेकर जताई थीं? इस पर जैकब्स ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ट्रंप ही सत्ता के केंद्र में हैं और उनकी नीतियों व आचरण का प्रभाव सीधे तौर पर देश के सैन्य नेतृत्व पर पड़ता है। इस बहस ने एक बार फिर वाशिंगटन के सियासी गलियारों में राष्ट्रपति की कार्यशैली और उनके विरोधियों के बीच बढ़ती वैचारिक खाई को उजागर कर दिया है।
शांति वार्ता पर असर, होर्मुज मुद्दे को लेकर United Arab Emirates ने जताई चिंता
1 May, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: यूएई ने ईरान पर जताया अविश्वास, वैश्विक तेल आपूर्ति ठप होने से मंदी का खतरा
दुबई: पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से जारी सैन्य संघर्ष को समाप्त करने की तमाम कोशिशें अब तक बेअसर साबित हुई हैं। इस बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जिससे शांति वार्ताओं में गहरा अविश्वास साफ झलक रहा है। यूएई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को स्पष्ट कहा कि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को लेकर ईरान पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
दुनिया की 20% तेल-गैस आपूर्ति पर संकट
पिछले दो महीनों से जारी जंग के कारण दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ईरानी नाकाबंदी की वजह से बंद पड़ा है।
अमेरिकी कार्रवाई: अमेरिकी नौसेना लगातार ईरानी कच्चे तेल के निर्यात को रोक रही है।
आपूर्ति बाधित: इस सैन्य गतिरोध के कारण दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई रुक गई है।
महंगाई का असर: इसके परिणामस्वरूप वैश्विक बाजार में ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे दुनिया भर में आर्थिक मंदी की आशंका गहरा गई है।
युद्धविराम के बावजूद तनाव बरकरार
यद्यपि 8 अप्रैल से अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम लागू है, लेकिन हालिया सैन्य गतिविधियों और नए हमलों की खबरों ने बाजार को डरा दिया है। ईरान ने अपनी हवाई सुरक्षा प्रणालियों को सक्रिय कर दिया है और किसी भी हमले की स्थिति में 'व्यापक जवाबी कार्रवाई' की चेतावनी दी है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ताजा शांति प्रस्ताव पर असंतोष जताया है। इस बीच, मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान ने अगली वार्ता के लिए फिलहाल कोई तारीख तय नहीं की है।
राजनयिक गतिरोध और अविश्वास की दीवार
यूएई के राष्ट्रपति सलाहकार अनवर गर्गश ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए कहा कि समुद्री मार्ग की स्वतंत्रता ही प्राथमिक गारंटर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान की आक्रामकता को देखते हुए उसके एकतरफा समझौतों पर भरोसा करना मुश्किल है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने स्पष्ट किया है कि बातचीत के तत्काल परिणामों की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहराता साया
होर्मुज जलडमरूमध्य के लंबे समय तक बंद रहने की चिंताओं के बीच वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। यह मार्च 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है।
गठबंधन की तैयारी: अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों को 'मैरीटाइम फ्रीडम कंस्ट्रक्ट' गठबंधन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है।
रुक-रुक कर हमले: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी ठिकानों पर 'लंबे और दर्दनाक' हमलों की धमकी दी है।
सहयोगियों का रुख: फ्रांस और ब्रिटेन ने कहा है कि वे जलडमरूमध्य को खोलने में तभी मदद करेंगे जब संघर्ष पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
Zohran Mamdani की ब्रिटिश किंग से मुलाकात, कोहिनूर वापसी का मुद्दा उठा
1 May, 2026 07:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क | ब्रिटेन के किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला ने अपनी न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान बुधवार को 9/11 मेमोरियल का दौरा कर 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों में जान गंवाने वाले पीड़ितों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान शाही जोड़े ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी से औपचारिक मुलाकात की। इस संक्षिप्त मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान तब खींचा, जब मेयर ममदानी ने मुलाकात से ठीक पहले सार्वजनिक रूप से यह संकेत दिया था कि यदि उन्हें किंग चार्ल्स के साथ निजी तौर पर संवाद का अवसर मिला, तो वे कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने का मुद्दा जरूर उठाएंगे। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि प्रोटोकॉल और सुरक्षा घेरे के बीच हुई इस छोटी सी बातचीत में मेयर ने अपनी बात रखी या नहीं, क्योंकि उनके कार्यालय ने इस संवेदनशील विषय पर फिलहाल चुप्पी साध रखी है।
विवादों के केंद्र में कोहिनूर: 177 सालों से ब्रिटिश ताज की शोभा बना 'भारतीय रत्न'
कोहिनूर हीरा, जो वर्तमान में 'टावर ऑफ लंदन' में सुरक्षित है और ब्रिटिश शाही ताज का अहम हिस्सा माना जाता है, लंबे समय से भारत और ब्रिटेन के बीच कूटनीतिक विवाद का विषय रहा है। भारत ने बार-बार इस ऐतिहासिक रत्न पर अपना कानूनी और नैतिक दावा पेश करते हुए इसे वापस लौटाने की मांग की है। कोहिनूर के ब्रिटेन पहुंचने का इतिहास 1849 के 'द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध' से जुड़ा है, जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने पंजाब पर अधिकार कर लिया था। उस समय सिख साम्राज्य के मात्र 10 वर्षीय शासक दलीप सिंह को 'लाहौर की संधि' पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया था, जिसकी शर्तों के तहत यह बेशकीमती हीरा महारानी विक्टोरिया को सौंपना पड़ा था। न्यूयॉर्क के मेयर की हालिया टिप्पणी ने एक बार फिर सदियों पुराने इस औपनिवेशिक विरासत के मुद्दे को वैश्विक मंच पर ताजा कर दिया है।
गैस की भारी कमी, पाकिस्तान में लोग जान जोखिम में डालकर कर रहे खाना तैयार
1 May, 2026 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कराची | पाकिस्तान का सबसे बड़ा शहर कराची इस समय ऊर्जा के भीषण संकट से जूझ रहा है, जहां रसोई गैस (LPG) की भारी कमी ने नागरिकों को जानलेवा जोखिम उठाने पर मजबूर कर दिया है। एआरवाई (ARY) न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, कराची के ओरंगी टाउन और मोमिनाबाद जैसे इलाकों में लोग अब लोहे के सिलेंडरों के बजाय बड़े प्लास्टिक के गुब्बारों में गैस भरकर घरों में रख रहे हैं। अनियमित गैस सप्लाई के कारण जब भी कुछ देर के लिए पाइपलाइन में गैस आती है, लोग इन खास प्लास्टिक बैग्स को भर लेते हैं और फिर दिन भर इन्हीं से खाना पकाते हैं। स्थानीय बाजारों में ये खतरनाक प्लास्टिक बैग 1000 से 1500 रुपये में धड़ल्ले से बिक रहे हैं। विशेषज्ञों ने इस जुगाड़ को 'मोबाइल बम' की संज्ञा दी है, क्योंकि घनी आबादी वाले इन क्षेत्रों में घर्षण या मामूली सी चिंगारी भी एक भयानक विस्फोट का कारण बन सकती है।
ईरान-अमेरिका तनाव का असर: ऊर्जा संकट और सुरक्षा विशेषज्ञों की गंभीर चेतावनी
कराची में गैस का यह संकट ऐसे समय में गहराया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की आपूर्ति बाधित हो रही है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सैन्य तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे पाकिस्तान जैसे देशों में गैस और तेल की किल्लत चरम पर पहुंच गई है। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि घरों के भीतर गैस से भरे इन गुब्बारों को रखना किसी बड़े हादसे को आमंत्रण देने जैसा है। कराची में सालों से गैस की कम सप्लाई और भारी कटौती की समस्या बनी हुई है, लेकिन वर्तमान युद्ध जैसी स्थितियों ने आम लोगों के पास कोई सुरक्षित विकल्प नहीं छोड़ा है। सुरक्षा विशेषज्ञों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि इन असुरक्षित तरीकों के कारण होने वाली संभावित जनहानि को रोका जा सके।
होर्मुज बंद होने का असर, खाड़ी में बदला ट्रेड का पूरा सिस्टम
1 May, 2026 02:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से आई एक खबर ने वैश्विक रक्षा गलियारों में खलबली मचा दी है। अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर 'USS हिगिंस' एशियाई समुद्र में तैनात रहने के दौरान भीषण आग की चपेट में आ गया। रिपोर्टों के अनुसार, इस घटना में जहाज के इलेक्ट्रिकल सिस्टम और इंजन को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे इसकी परिचालन क्षमता पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इसे एक 'इलेक्ट्रिकल फॉल्ट' बताया है, लेकिन घटना की टाइमिंग और परिस्थितियों ने साजिश की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। सोशल मीडिया पर इस आग को चीन की गुप्त कार्रवाई या मिडिल ईस्ट की जंग के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी महीने अमेरिका के दो अन्य विशाल विमानवाहक पोतों—USS ड्वाइट डी आइजनहावर और USS जेराल्ड आर फोर्ड—में भी रहस्यमयी तरीके से आग लगने की खबरें आई थीं, जिससे अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा तैयारियों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पश्चिम एशिया में गहराता संकट: UAE का यात्रा बैन और ट्रंप की नाटो को सेना वापसी की धमकी
बदलते वैश्विक हालातों के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने नागरिकों के लिए सख्त चेतावनी जारी करते हुए ईरान, लेबनान और इराक की यात्रा पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। विदेश मंत्रालय ने इन देशों में मौजूद अपने नागरिकों को तुरंत स्वदेश लौटने का निर्देश दिया है, जो क्षेत्र में किसी बड़े सैन्य टकराव की आहट का संकेत माना जा रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए विवाद को जन्म देते हुए यूरोप से अपने सैनिकों को वापस बुलाने के संकेत दिए हैं। ट्रंप ने स्पेन और इटली में तैनात अमेरिकी सेना की संख्या कम करने पर विचार करने की बात कही है, क्योंकि उनके अनुसार इन देशों ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं दिया। ट्रंप ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की कार्यशैली पर भी तीखा हमला बोला है। ट्रंप का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि मिडिल ईस्ट की जंग अब केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गई है, बल्कि इसने अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगियों (नाटो) के बीच भी एक गहरी कूटनीतिक दरार पैदा कर दी है।
सोशल मीडिया से दूरी, पढ़ाई से दोस्ती: Karnal की छात्राओं का कमाल
1 May, 2026 12:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ICSE बोर्ड परिणाम: टॉपर्स ने सेल्फ स्टडी से गाड़े सफलता के झंडे, सोशल मीडिया से बनाई दूरी
नई दिल्ली: ICSE बोर्ड ने 10वीं और 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस बार की परीक्षाओं में 10वीं में छवि और 12वीं में रिया ने शीर्ष स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। सफलता पाने वाले इन होनहारों ने कोचिंग के बजाय 'सेल्फ स्टडी' और बेहतर योजना को अपनी जीत का आधार बताया।
10वीं की टॉपर छवि: न्यूरोलॉजिस्ट बनने का है सपना
आरकेपुरम की निवासी छवि ने बिना किसी ट्यूशन के जिले में अपना नाम रोशन किया है। उनके पिता रोडवेज में चालक हैं और मां शिक्षिका हैं। छवि ने अपनी तैयारी के लिए न केवल सोशल मीडिया से दूरी बनाई, बल्कि अपने चाचा की शादी तक में शामिल नहीं हुईं।
रणनीति: पिछले 10 वर्षों के प्रश्नपत्र हल किए और रोजाना 'टू-डू लिस्ट' बनाकर पढ़ाई की।
उपलब्धि: बायोलॉजी और एसएसटी में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए।
भारती: डे-प्लानिंग से मिली कामयाबी
मॉडल टाउन की रहने वाली भारती ने भी 10वीं में शानदार प्रदर्शन किया है। पुलिस विभाग में कार्यरत मां और पिता की इस बेटी का लक्ष्य डॉक्टर बनकर समाज सेवा करना है।
रणनीति: भारती का मानना है कि रटने के बजाय विषय को समझना जरूरी है। वह सुबह ही अपना डे-प्लान तैयार कर लेती थीं और उसे पूरा करने के बाद ही सोती थीं।
उपलब्धि: हिंदी, इतिहास और भूगोल जैसे विषयों में पूरे 100 अंक हासिल किए।
12वीं की टॉपर रिया: सीए बनने का लक्ष्य
शक्तिपुरम की रिया कांबोज ने 12वीं में सफलता का परचम लहराया है। एक संयुक्त परिवार से आने वाली रिया ने पारिवारिक कार्यक्रमों और घर के निर्माण कार्य के बावजूद अपनी पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने दिया।
रणनीति: "आज का काम कल पर न छोड़ना" रिया की सफलता का मूलमंत्र रहा। वह रोजाना 3-4 घंटे की एकाग्र पढ़ाई को पर्याप्त मानती हैं।
उपलब्धि: फिजिकल एजुकेशन में 99 और बिजनेस स्टडीज में 96 अंक प्राप्त किए।
चेतन्य: मुश्किल सवालों को पहले किया हल
12वीं के छात्र चेतन्य ने कठिन विषयों पर पहले पकड़ बनाई। उन्होंने नीट (NEET) की तैयारी भी शुरू कर दी है और अपने मामा की तरह डॉक्टर बनना चाहते हैं।
रणनीति: चेतन्य रात में पढ़ाई करना पसंद करते थे। उनकी बहन ने टाइमटेबल बनाने में मदद की, जबकि स्कूल शिक्षकों ने उन्हें पुराने पेपर हल करने का अभ्यास कराया।
उपलब्धि: केमिस्ट्री में 96 और फिजिकल एजुकेशन में 98 अंक मिले।
60 दिन के युद्ध कानून पर अमेरिका में बवाल, ईरान संघर्ष ने बढ़ाया टकराव
1 May, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियान ने अब व्हाइट हाउस और कैपिटल हिल (अमेरिकी संसद) के बीच एक बड़ा संवैधानिक गतिरोध पैदा कर दिया है। 1973 के वॉर पावर्स रिजोल्यूशन (War Powers Resolution) की 60 दिनों की समयसीमा खत्म होने के करीब है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस (संसद) से मंजूरी लेने की किसी भी योजना से इनकार कर दिया है। सीनेट की सुनवाई के दौरान रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और डेमोक्रेटिक सांसदों के बीच तीखी बहस हुई, जिसने अमेरिकी सैन्य नीतियों और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
60 दिन की समयसीमा और 'सीज़फायर' की ढाल
1973 के कानून के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति को किसी भी सैन्य अभियान की शुरुआत के 60 दिनों के भीतर कांग्रेस से औपचारिक अनुमति लेनी पड़ती है। इस कानून का उल्लंघन करने पर सैन्य कार्रवाई को रोकना पड़ता है। हालांकि, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक नई कानूनी व्याख्या पेश करते हुए कहा कि क्योंकि क्षेत्र में वर्तमान में 'युद्धविराम' (Ceasefire) जैसी स्थिति है, इसलिए यह 60 दिन की कानूनी घड़ी प्रभावी रूप से रुक गई है।
विरोध: वर्जीनिया के सीनेटर टिम केन ने इस तर्क को 'कानूनी आधारहीनता' करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रशासन कानून की अपनी सुविधानुसार व्याख्या कर रहा है, जो भविष्य के लिए एक खतरनाक मिसाल बन सकता है।
नागरिक हताहतों और AI हथियारों पर सवाल
सुनवाई के दौरान एक लड़कियों के स्कूल पर हुए कथित हमले का मुद्दा भी गरमाया, जिसमें 170 से अधिक लोगों की मौत का दावा किया गया है। सांसदों ने पूछा कि क्या अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल नागरिकों को निशाना बनाने के लिए हुआ?
रक्षा मंत्रालय का पक्ष: पीट हेगसेथ ने कहा कि पेंटागन AI-सहायता प्राप्त लक्ष्य प्रणाली का उपयोग कर रहा है, जिसमें मानवीय निगरानी (Human Oversight) भी शामिल है ताकि नागरिक हताहतों की संख्या कम की जा सके।
जनता का समर्थन: सीनेटर क्रिस्टन गिलिब्रैंड ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिकी जनता ईरान के साथ एक और लंबे युद्ध के पक्ष में नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी संदेह जताया कि इस अभियान से अमेरिका पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हुआ है।
ट्रंप की स्पष्टोक्ति: "यह युद्ध नहीं, सर्जिकल स्ट्राइक है"
इस पूरे विवाद के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चिरपरिचित अंदाज में इस संघर्ष को नया नाम दिया है। ट्रंप ने इसे 'युद्ध' मानने से इनकार करते हुए 'सैन्य अभियान' करार दिया। व्हाइट हाउस से जारी बयानों के अनुसार:
ईरान की हालत: ट्रंप का दावा है कि उनकी "मैक्सिमम प्रेशर" नीति और सैन्य प्रहारों से ईरान की नौसेना और वायुसेना लगभग ध्वस्त हो चुकी है।
आर्थिक घेराबंदी: ट्रंप के अनुसार, कड़े प्रतिबंधों और नाकाबंदी के कारण ईरान की तेल से होने वाली कमाई शून्य के करीब पहुंच गई है।
समझौते की संभावना: राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान अब समझौते के लिए "बेताब" है और अमेरिकी कार्रवाई ने मध्य पूर्व में एक बड़े नरसंहार को रोक दिया है।
फिलहाल, यह मामला कानूनी मोड़ ले चुका है। यदि प्रशासन और कांग्रेस के बीच सहमति नहीं बनती, तो यह विवाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच सकता है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप प्रशासन 60 दिन की समयसीमा के बाद भी बिना संसदीय मंजूरी के ईरान पर दबाव जारी रख पाएगा।
चार-चार वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से बदलेगा मौसम, आंधी-बारिश की चेतावनी
1 May, 2026 10:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मई की शुरुआत में राहत: चार पश्चिमी विक्षोभों के चलते थमेगी गर्मी, आंधी-बारिश का पूर्वानुमान
नई दिल्ली/हरियाणा: भीषण गर्मी का सामना कर रहे लोगों के लिए मई का पहला पखवाड़ा राहत भरा रहने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, एक के बाद एक चार पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) सक्रिय होने जा रहे हैं, जिससे तापमान में गिरावट आएगी और हीटवेव से बचाव होगा। हाल ही में हुई आंधी और बारिश की गतिविधियों के कारण गुरुवार को प्रदेश के अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई।
तापमान में गिरावट: 40 डिग्री से नीचे पहुंचा पारा
अप्रैल के आखिरी दिन प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से नीचे रहा। जहां कुछ समय पहले पारा 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया था, वहीं अब यह 35 से 40 डिग्री के बीच बना हुआ है।
रोहतक: 40.8 डिग्री सेल्सियस (सर्वाधिक)
हिसार: 39.9 डिग्री सेल्सियस
फरीदाबाद: 39.7 डिग्री सेल्सियस
सिरसा: 39.6 डिग्री सेल्सियस
सोनीपत: 39 डिग्री सेल्सियस प्रदेश में रात का तापमान भी 20 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।
मई के पहले 10 दिनों का मौसम कैलेंडर
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, लगातार सक्रिय हो रहे सिस्टम के कारण मई के शुरुआती 15 दिनों में भीषण गर्मी के आसार कम हैं:
30 अप्रैल की रात: दूसरा पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ, जिससे बादलों की आवाजाही शुरू होगी।
2 मई: तीसरे विक्षोभ के कारण तेज आंधी और बारिश की प्रबल संभावना है।
5 मई और 8 मई: इन तारीखों पर सक्रिय होने वाले विक्षोभों से मध्यम श्रेणी की वर्षा हो सकती है।
10 मई: एक और सिस्टम सक्रिय होने की उम्मीद है, जिससे मौसम कूल बना रहेगा।
ईरान का पलटवार: ट्रंप के दावे के बाद दी गंभीर अंजाम भुगतने की चेतावनी
1 May, 2026 10:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य और आर्थिक दबाव के बीच एक चौंकाने वाला बयान दिया है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से चर्चा के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियानों ने ईरान की सैन्य शक्ति की कमर तोड़ दी है। ट्रंप के अनुसार, ईरान की नौसेना और वायु सेना लगभग समाप्त हो चुकी है और उनकी परमाणु क्षमता को "पूरी तरह से नष्ट" कर दिया गया है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के ड्रोन निर्माण उद्योग में 82 प्रतिशत की गिरावट आई है और वहां की अर्थव्यवस्था अब पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।
ईरान की चेतावनी: 'दुखद और लंबे हमले होंगे'
राष्ट्रपति ट्रंप के दावों के विपरीत, ईरान ने इसे "बड़े झूठ" का पुलिंदा करार दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई और विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उनकी परमाणु और मिसाइल क्षमताएं सुरक्षित हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने फिर से हमला करने की हिमाकत की, तो उसे "लंबे और दर्दनाक" जवाबी हमलों का सामना करना पड़ेगा।
होर्मुज की खाड़ी का संकट: तेहरान ने होर्मुज की खाड़ी पर नए कड़े नियम लागू करने और इसे ब्लॉक करने के संकेत दिए हैं। इस तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। 1 मई 2026 को ब्रेंट क्रूड $111 प्रति बैरल के पार पहुँच गया है, जिससे दुनिया भर में आर्थिक मंदी और महंगाई का खतरा मंडराने लगा है।
इजरायल-UAE रक्षा गठबंधन: 'आयरन डोम' की पहली विदेशी तैनाती
मध्य पूर्व में बदलते समीकरणों के बीच एक बड़ी खबर यह आई है कि इजरायल ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सुरक्षा के लिए अपना घातक 'आयरन डोम' एयर डिफेंस सिस्टम और 'आयरन बीम' (लेजर आधारित सिस्टम) तैनात किया है। यह पहली बार है जब इजरायल ने अपनी रक्षा तकनीक और सैनिकों को किसी अरब देश की सुरक्षा के लिए भेजा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस सिस्टम ने ईरान द्वारा दागी गई दर्जनों मिसाइलों और ड्रोनों को सफलतापूर्वक मार गिराया है, जो अब्राहम एकॉर्ड्स के तहत दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग को दर्शाता है।
भारत-पाक संघर्ष और '200% टैरिफ' का दावा
राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर दक्षिण एशिया में शांति स्थापित करने का श्रेय लेते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने का जिक्र किया। ट्रंप ने दावा किया कि साल 2025 में जब दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच तनाव चरम पर था और 11 विमान गिरा दिए गए थे, तब उन्होंने 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी देकर युद्ध रुकवाया था। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने दोनों देशों के नेताओं को स्पष्ट कर दिया था कि यदि लड़ाई बंद नहीं हुई, तो वे अमेरिका के साथ व्यापार पूरी तरह खो देंगे। उन्होंने दावा किया कि इस हस्तक्षेप से 2.5 करोड़ से 5 करोड़ लोगों की जान बची। हालांकि, भारतीय पक्ष ने हमेशा की तरह साफ किया है कि युद्धविराम सैन्य अधिकारियों (DGMO) के बीच बातचीत के जरिए हुआ था।
पाकिस्तान में ईंधन कीमतों में उछाल, नेपाल में राहत, भारत पर नजर
1 May, 2026 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतों को लेकर दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं। जहाँ कंगाली की कगार पर खड़ा पाकिस्तान तेल की कीमतों में लगी आग से झुलस रहा है, वहीं नेपाल ने अपने नागरिकों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती कर राहत प्रदान की है। भारत में भी सरकार ने टैक्स ढांचे में बड़ा बदलाव किया है, हालांकि आम जनता के लिए कीमतों को स्थिर रखा गया है।
पाकिस्तान में हाहाकार: ₹399 के पार पहुँचा पेट्रोल
आर्थिक बदहाली का सामना कर रहे पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर के करीब पहुँच गई हैं। गुरुवार को जारी नई अधिसूचना के मुताबिक, पेट्रोल में 6.51 रुपये और हाई-स्पीड डीजल (HSD) में रिकॉर्ड 19.39 रुपये प्रति लीटर की भारी वृद्धि की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 399.86 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई है। डीजल की कीमतों में आए इस जबर्दस्त उछाल से वहां परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ना तय है, जिससे महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है।
नेपाल में राहत, लेकिन रसोई गैस और हवाई ईंधन महंगा
एक तरफ पाकिस्तान में कीमतें आसमान छू रही हैं, तो दूसरी तरफ नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन ने आम जनता को राहत देते हुए पेट्रोल में 2 रुपये और डीजल में 12 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इस कमी के बाद नेपाल में पेट्रोल 214.50 रुपये और डीजल 222.50 रुपये प्रति लीटर (स्थानीय मुद्रा) की दर से मिलेगा। हालांकि, यह राहत रसोई तक नहीं पहुँच सकी है; नेपाल में एलपीजी सिलेंडर के दाम ₹150 बढ़कर ₹2160 हो गए हैं और एविएशन फ्यूल (हवाई ईंधन) की कीमतों में भी भारी इजाफा किया गया है।
भारत में टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव, पर नहीं बढ़े रेट
भारत में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं डाला जाएगा। केंद्र सरकार ने 1 मई 2026 से प्रभावी होने वाले नए नियमों के तहत पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क ₹23 और डीजल पर ₹33 प्रति लीटर निर्धारित किया है। सरकार ने अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को शून्य कर टैक्स के गणित को संतुलित किया है, जिससे खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारतीय महानगरों में पेट्रोल और डीजल के दाम अपने पुराने स्तर पर ही बरकरार हैं, जो वैश्विक संकट के बीच देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
पूर्व CM Bhupinder Singh Hooda पर शिकंजा, प्लॉट आवंटन में गड़बड़ी का आरोप
1 May, 2026 08:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचकूला प्लॉट आवंटन मामला: पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ CBI ने दाखिल की चार्जशीट, नियमों में फेरबदल के आरोप
पंचकूला: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पंचकूला औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अन्य आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। सीबीआई ने चार्जशीट के साथ हरियाणा सरकार द्वारा केस चलाने के लिए दी गई आधिकारिक मंजूरी भी अदालत को सौंप दी है।
भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप
दायर की गई चार्जशीट में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि हुड्डा ने मुख्यमंत्री और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के अध्यक्ष रहते हुए अपने करीबियों को आर्थिक लाभ पहुँचाने के लिए पद का दुरुपयोग किया।
नियमों को ताक पर रखकर आवंटन
चार्जशीट के अनुसार, साल 2016 में दर्ज इस मामले की जांच में सामने आया है कि:
14 औद्योगिक भूखंडों के लिए आवेदन की समय-सीमा समाप्त होने के बाद नियमों में बदलाव किया गया।
चहेतों को फायदा पहुँचाने के लिए अनुभव और वित्तीय क्षमता के अंकों को घटाकर 'वाइवा-वॉइस' (मौखिक परीक्षा) के अंक 15 से बढ़ाकर 25 कर दिए गए।
बाजार भाव के अनुसार 30.34 करोड़ रुपये के भूखंडों को मात्र 7.85 करोड़ रुपये में आवंटित कर दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी चपत लगी।
आरोपियों की सूची में कई बड़े नाम
सीबीआई ने पूर्व सीएम हुड्डा के अलावा कई पूर्व अधिकारियों और उनके करीबियों को नामजद किया है:
धर्मपाल सिंह नांगल: पूर्व आईएएस और एचएसवीपी के तत्कालीन मुख्य प्रशासक।
सुभाष चंद्र कांसल: पूर्व मुख्य वित्तीय नियंत्रक।
बीबी तनेजा: पूर्व उप अधीक्षक।
इसके अलावा हुड्डा के ओएसडी, निजी सचिव के रिश्तेदार, उनके सहपाठी के बेटे और पैतृक गांव के निवासियों सहित कुल 14 आवंटियों को आरोपी बनाया गया है।
अगली सुनवाई 4 जून को
अदालत ने संबंधित विभाग को दस्तावेजों की जांच करने के निर्देश दिए हैं और इस मामले में अगली रिपोर्ट 4 जून को पेश की जानी है। सीबीआई ने एक गवाह के बयान भी सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपे हैं। फिलहाल, कुछ आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत अंतिम मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।
लेबनान पर इज़रायली हमला, एयरस्ट्राइक्स में 24 लोगों की मौत से हड़कंप
1 May, 2026 08:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेरूत/तेल अवीव: लेबनान में शांति की उम्मीदों को करारा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर हुआ युद्धविराम समझौता पूरी तरह धराशायी हो चुका है। इज़रायल ने ट्रंप के आदेशों और अंतरराष्ट्रीय दबाव को दरकिनार करते हुए दक्षिण लेबनान में भीषण हमले शुरू कर दिए हैं। गुरुवार को हुई ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक्स और गोलाबारी ने एक बार फिर खूनी खेल शुरू कर दिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुँच गया है।
घरों पर बरसे बम: महिलाओं और बच्चों समेत एक ही परिवार के कई सदस्य खत्म
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार को हुई इज़रायली एयरस्ट्राइक्स में अब तक 24 लोगों की जान जा चुकी है। हमलों की भयावहता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिबचिट गाँव में एक रिहायशी मकान को निशाना बनाया गया, जिसमें एक ही परिवार के 4 सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। मरने वालों में 5 महिलाएं और 2 मासूम बच्चे भी शामिल हैं। अस्पतालों में घायलों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि बचाव कार्य जारी रहने के कारण मृतकों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है।
हिज़बुल्लाह का पलटवार: इज़रायली टैंकों और सैनिकों पर ड्रोन से हमला
सीज़फायर टूटने और आम नागरिकों की मौत के बाद हिज़बुल्लाह ने इज़रायल से कड़ा बदला लेने का ऐलान किया है। दक्षिण लेबनान में हिज़बुल्लाह के लड़ाके फिर से सक्रिय हो गए हैं और उन्होंने इज़रायली सेना की अग्रिम चौकियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। जवाबी कार्रवाई में हिज़बुल्लाह ने बिन्त जेबिल इलाके में दो इज़रायली मरकावा टैंकों को ड्रोन के जरिए तबाह कर दिया। इसके अलावा, उत्तरी इज़रायल में किए गए एक सटीक ड्रोन हमले में इज़रायल का एक सैनिक भी मारा गया है। दोनों ओर से बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने ट्रंप प्रशासन की शांति कोशिशों पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
रसोई गैस पर सरकार की बड़ी मेहरबानी: 10 करोड़ से अधिक परिवारों को मिल रहा ₹587 तक सस्ता सिलेंडर, बजट को मिला सहारा
क़ेशम द्वीप पर ईरान की मिसाइल तैयारी, क्षेत्र में बढ़ी चिंता
सोना-चांदी खरीदने का सुनहरा मौका: कीमतों में आई गिरावट, दिल्ली-मुंबई समेत बड़े शहरों में ये हैं आज के रेट
द्रविड़, सचिन और गांगुली को मनाने के लिए ललित मोदी ने क्या किया था?
महिंद्रा ग्रुप के निवेश की अमेरिकी राजदूत ने की सराहना: भारत-यूएस दोस्ती को बताया 21वीं सदी का सबसे ताकतवर गठबंधन
बाजार में लौटेगी रौनक, मजबूत होगा रुपया: विदेशी निवेशकों को टैक्स से बड़ी आजादी देने के लिए अध्यादेश लाएगी सरकार
बार-बार नींद आना हो सकता है बीमारी का संकेत, जानिए बचाव के तरीके
कल करेंगे अगले कदम का ऐलान: अन्नामलाई की BJP से विफल बातचीत
गैस की दवा पर उठे गंभीर सवाल, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दी अहम सलाह
