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फिलिस्तीनी पहचान को मिटाने में जुटा इजरायल, वेस्ट बैंक में सेना का बुलडोजर ऑपरेशन
25 Aug, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वेस्ट बैंक। इजरायली सेना वेस्ट बैंक में बुलडोजर लेकर जैतून के पेड़ उखाड़ रही है। वेस्ट बैंक के अल-मुगय्यिर गांव में इजरायली सेना की मौजूदगी में बुलडोजरों ने सैकड़ों जैतून के पेड़ नष्ट कर दिए। संयुक्त राष्ट्र ने भी पुष्टि की है कि क्षेत्र में अकाल जैसी स्थिति है, जहां लोग और बच्चे भूख से जूझ रहे हैं।
बता दें कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद गाजा में युद्ध शुरू होने से वेस्ट बैंक में हिंसा बढ़ी है। एएफपी के आंकड़ों के मुताबिक, तब से 971 फिलिस्तीनी (आतंकवादी और नागरिक) इजरायली सैनिकों या बस्ती वासियों द्वारा मारे गए, जबकि 36 इजरायली मारे गए। 1967 से इजरायल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में 30 लाख फिलिस्तीनी और 5 लाख इजरायली रहते हैं, जिनकी बस्तियां अंतरराष्ट्रीय कानून में अवैध मानी जाती हैं। उखाड़े गए ज्यादातर पेड़ जैतून के थे, जो वेस्ट बैंक की अर्थव्यवस्था और संस्कृति का अहम हिस्सा हैं। ये पेड़ लंबे समय से फिलिस्तीनी किसानों और इजरायली बस्तियों के बीच तनाव का कारण रहे हैं। रामल्लाह के पास इस गांव के किसान अब्देलतीफ मोहम्मद अबू आलिया ने बताया कि 70 साल पुराने, एक हेक्टेयर में फैले जैतून के पेड़ों को झूठे बहानों के तहत उखाड़कर जमीन समतल कर दी गई। स्थानीय लोग उखड़े पेड़ों को फिर से लगाने की कोशिश कर रहे हैं। फोटोग्राफरों ने गिरे हुए जैतून के पेड़ और पहाड़ियों पर चलते बुलडोजर देखे, जिनमें से एक पर इजरायली झंडा था और पास में सेना की गाड़ियां खड़ी थीं। जैतून के पेड़ फिलिस्तीन के इतिहास, संस्कृति और अर्थव्यवस्था से गहराई से जुड़े हैं। ये लचीलेपन, पैतृक भूमि से लगाव और कब्जे के खिलाफ प्रतिरोध के प्रतीक हैं। जैतून की खेती हजारों परिवारों की आजीविका का आधार है। सालाना फसल का समय उत्सव के साथ-साथ इजरायली प्रतिबंधों और हमलों के खिलाफ संघर्ष का भी दौर होता है।
क्वाड का कोई भविष्य नहीं? चीन की भविष्यवाणी क्या सच होगी साबित
24 Aug, 2025 12:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। चीनी के प्रमुख अखबार ने तीन साल पहले भविष्यवाणी करते हुए कहा था कि क्वाड का भविष्य नहीं है। उसने कहा था कि भविष्य में क्वाड का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। उस वक्त इस भविष्यवाणी को सिर्फ एक प्रोपेगेंडा माना गया था, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के करीब 200 दिनों में यह साबित कर दिया है कि क्वाड का भविष्य खतरे में है। ट्रंप ने पहले भारत-अमेरिका के रिश्तों को खराब किया और अब उन्होंने जापान के साथ भी अच्छा सलूक नहीं किया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक क्वाड बनाने का मकसद इंडो-पैसिफिक में चीन को काउंटर करना था। इसमें चार सदस्य देश हैं, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में क्वाड को मजबूत किया था और बाइडेन प्रशासन ने उस नीति को आगे बढ़ाया था, लेकिन अब ट्रंप प्रशासन ने भारत के साथ जापान पर भी टैरिफ लगाए हैं, बल्कि अपमानजनक बयानबाजी भी की है। ट्रंप ने इस गठबंधन की एकजुटता और आपसी विश्वास को तहस-नहस कर दिया है।
ट्रंप के फैसले चीन के लिए किसी रणनीतिक जीत से कम नहीं है, क्योंकि खुद वॉशिंगटन ने अपने सबसे करीबी साझेदारों को अपमानित किया है, उनमें अविश्वास पैदा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप ऐसा अपने घरेलू राजनीति के लिए कर रहे हैं, लेकिन इसका असर अमेरिका की विदेश नीति और एशिया में अमेरिका की पकड़ को कमजोर कर देंगे। ट्रंप ने भारत को पहला बड़ा झटका अप्रैल महीने में 25 फीसदी टैरिफ लगाकर दिया था। इसके बाद उन्होंने रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया, जिससे भारतीय सामानों पर कुल अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 50 फीसदी हो गया है, जिसने भारत और अमेरिका के रिश्ते की बुनियाद हिला दिया है।
ट्रंप की अपमानजनक बयानबाजी और उग्र टैरिफ का नतीजा ये हुआ है कि भारत ने अमेरिकी 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट एफ-35 खरीदने से इनकार कर दिया है, अमेरिका से कई डिफेंस प्रोजेक्ट रोकने के संकेत दिए हैं और चीन के साथ रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया हैं। जाहिर तौर पर इससे अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी पर सीधा असर पड़ा है।
वहीं दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से जापान अमेरिकी छतरी के नीचे रहा है। जापान की सुरक्षा अमेरिका पर निर्भर है और अमेरिका की एशिया पॉलिसी में जापान हमेशा से शीर्ष पर रहा है, लेकिन ट्रंप के टैरिफ ने जापान की अर्थव्यवस्था को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है। ट्रंप ने 22 जुलाई को जापान पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी और 15 फीसदी टैरिफ लगाया है, जबकि अभी तक जापानी सामानों पर अमेरिका में कोई टैरिफ नहीं था। जापान की स्टील और कार इंडस्ट्री पर ट्रंप की टैरिफ का सीधा असर हुआ है। जबकि इसी जापान ने 2023 में अमेरिका में 780 अरब डॉलर का निवेश किया था, लेकिन ट्रंप के टैरिफ को जापान की सरकार धोखा मान रही है। जापान के पीएम शिगेरु इशिबा, जिन पर पहले से ही चीन को लेकर नरम रवैया अपनाने का आरोप लगता रहा है, वह देश को अमेरिकी टैरिफ से संभालने की कोशिश कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने चीन के साथ रिश्तों को सामान्य करने के संकेत दे दिए हैं। जापान में पिछले दिनों करवाए गए सर्वे से पता चला है कि जापानी लोगों में अमेरिका को लेकर विश्वसनीयत तेजी से गिरी है।
सर्वे के मुताबिक सिर्फ 55 फीसदी जापानियों को ही अमेरिका पर विश्वास है, जबकि ट्रंप पर सिर्फ 38 फीसदी लोगों को विश्वास है। ट्रंप ने जापान पर अमेरिका में 550 अरब डॉलर का निवेश करने का जबरदस्त प्रेशर डाला है और जापान को ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे जापानियों में भारी आक्रोश है। इसके अलावा जापान को अपने कृषि बाजार को अमेरिका के लिए जबरदस्ती खोलना पड़ा है, जिससे देश की सरकार की काफी आलोचना हुई।
ट्रंप ने भारत और जापान के साथ जैसा सलूक किया है, उसका सीधा असर क्वाड पर होता दिख रहा है। नई दिल्ली में इस साल क्वाड शिखर सम्मेलन होना है, लेकिन अभी तक उसकी तारीख तय नहीं है, जबकि इस साल के खत्म होने में चार महीने बचे हैं। उम्मीद है कि क्वाड की बैठक को स्थगित कर दिया जाएगा। क्वाड की अगर बैठक होती है तो ट्रंप को दिल्ली आना होगा और मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा होना अत्यंत मुश्किल है। इसके अलावा पीएम मोदी करीब सात सालों के बाद इसी महिने शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में हिस्सा लेने चीन जा रहे हैं। जापान भी चीन के साथ सीमित स्तर पर आर्थिक बातचीत आगे बढ़ा रहा है। इससे साफ है कि जब अमेरिका अपने सहयोगियों पर आर्थिक और रणनीतिक दबाव डाल रहा है, तब चीन उसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है और वह वैकल्पिक साझेदार बनने की कोशिश में जुट गया है। चीन ने अमेरिकी टैरिफ का मुकाबला करने के लिए भारत को साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया है, जाहिर तौर पर ट्रंप के टैरिफ के असर को कम करने के लिए भारत के पास भी ऑप्शन सीमित हैं। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स को अभी भी क्वाड को लेकर पॉजिटिव उम्मीदें हैं और उनका मानना है कि चीन का खतरा वास्तविक है, इसे भारत और जापान काफी अच्छे से समझ रहे हैं, लेकिन सभी एक्सपर्ट इस बात पर सहमत हैं कि ट्रंप ने सहयोगी देशों में अमेरिका को लेकर विश्वास को चकनाचूर कर दिया है।
चीन का नया परमाणु टॉरपीडो: एक खतरनाक डूम्सडे हथियार
24 Aug, 2025 11:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग । चीन एक इसतरह के हथियार पर काम कर रहा है जिसे डूम्सडे हथियार कहा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह एक परमाणु टॉरपीडो है जो समुद्र के भीतर परमाणु विस्फोट करके तटीय शहरों में रेडियोएक्टिव सुनामी ला सकता है। यह तकनीक रूस के पोसाइडन टॉरपीडो से प्रेरित मानी जा रही है। यह एक पानी के भीतर चलने वाला ड्रोन हथियार है, जिसे पनडुब्बियों या युद्धपोतों से लांच किया जा सकता है। इसमें एक छोटा परमाणु रिएक्टर लगा है, जिससे यह 200 घंटे तक लगातार चल सकता है। इसकी गति लगभग 56 किमी/घंटा है और इसकी रेंज हजारों किलोमीटर तक हो सकती है। फिलहाल इसमें पारंपरिक वॉरहेड लगाने की बात कही जा रही है, लेकिन भविष्य में इसे परमाणु वॉरहेड से भी लैस किया जा सकता है।
टॉरपीडो तट के पास फटने से परमाणु विस्फोट से पैदा हुई सुनामी तटीय शहरों को पूरी तरह से तबाह कर सकती है। विस्फोट से प्रभावित क्षेत्र लंबे समय तक रहने लायक नहीं रहेंगे क्योंकि वहाँ रेडियोएक्टिव प्रदूषण फैल जाएगा। समुद्री जीवन और पूरे समुद्री पर्यावरण को भारी क्षति पहुँचेगी। चीन इस हथियार को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने और अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाने के लिए विकसित कर रहा है। समझौते के तहत परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती और ताइवान पर तनाव के कारण, चीन इसे एक रणनीतिक डर पैदा करने वाला हथियार मान रहा है। अमेरिका और नॉर्वे जैसे देशों ने इस पर चिंता जाहिर की है, लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी रेडियोएक्टिव सुनामी पैदा करना तकनीकी रूप से मुश्किल है। हो सकता है कि चीन का यह प्रोजेक्ट केवल मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने और सामरिक वार्ताओं में फायदा पाने का एक तरीका हो। यह हथियार अंतरराष्ट्रीय युद्ध कानूनों और पर्यावरण संधियों का भी उल्लंघन हो सकता है।
चीन में एक होटल में रुम से साथ अब डॉगी बनेगा पार्टनर
24 Aug, 2025 10:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वुहान। चीन के वुहान में एक होटल ने ऐसा आइडिया निकाला है कि सुनकर हर कुत्तों से प्यार करने वालों का दिल खुश हो जाएगा। होटल का नाम है कंट्री गार्डन फीनिक्स यह होटल और यहां आपको सिर्फ कमरा नहीं, बल्कि साथ में एक प्यारा कुत्ता भी देगा। यहां करीब 4700 रुपए खर्च करिए और गोल्डन रिट्रीवर, हस्की या वेस्ट हाईलैंड टेरियर जैसे कुत्ते आपके रूम पार्टनर बन जाएंगे। मतलब न अकेलापन, न बोरियत, पूरा टाइम डॉगी दोस्त के साथ गुजार सकेंगे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक होटल ने यह सर्विस जुलाई में शुरू की है और कुछ ही हफ्तों में 300 से ज्यादा लोग इसकी बुकिंग कर चुके हैं। होटल मैनेजर के मुताबिक ज्यादातर ट्रैवलर्स को यह आइडिया पसंद आया क्योंकि उन्हें होटल में रहकर भी ‘घर जैसा माहौल’ मिल रहा है। बता दें चीन का पेट-इकोनॉमी तेजी से बढ़ रहा है। 2024 में सिर्फ शहरी इलाकों का पेट सप्लाई मार्केट 300 अरब युआन का हो गया। यह साल-दर-साल 7.5 फीसदी बढ़ रहा है। 2027 तक यह मार्केट 400 अरब युआन तक पहुंच जाएगा।
चीन में डॉगी कैफ़े, पेट क्लोनिंग, पेट योगा और डॉगी ग्रूमिंग का चलन बढ़ गया है। होटल में डॉगी रूम सर्विस भी इस सूची में जुड़ गया है। एक ग्राहक ने बताया कि पहले उन्हें डर था कि पपी ज्यादा उछलकूद करेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। डॉगी शांत, आज्ञाकारी और दोस्त की तरह व्यवहार करता रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक होटल के पास 10 डॉगी (कुत्ते) हैं, हस्की, रिट्रीवर और टेरियर. इनमें से कुछ होटल खुद पालता है, कुछ प्राइवेट ट्रेनर्स या मालिकों से लेता हैं। सभी डॉगी अच्छे से ट्रेनिंग पाए हुए और हेल्थ-चेक्ड हैं। इस सर्विस का मकसद डॉगी को एक्टिविटी और प्यार मिले और गेस्ट को इमोशनल सपोर्ट। खासकर वे लोग जो जानवरों से प्यार करते हैं लेकिन घर पर रखने की सुविधा नहीं है।
एक डॉग ओनर ने बताया कि उन्होंने अपना 14 महीने का सामॉयड ‘नैचा’ होटल को भेजा था। पहले वे उसे पेट कैफे भेजती थीं, लेकिन अब होटल में डॉगी खुश रहता है। स्टाफ समय-समय पर वीडियो भी भेजता है जिसमें नैचा गेस्ट्स और स्टाफ के साथ खेलता दिखता है। हालांकि सबको यह कॉन्सेप्ट अच्छा लग रहा है, लेकिन कुछ लीगल रिस्क भी हैं। एक वकील के मुताबिक अगर डॉगी से कोई हादसा हो जाए तो होटल को ही जिम्मेदारी उठानी होगी। इसी वजह से एक्सपर्ट्स ने सलाह दी है कि होटल को प्रोफेशनल ट्रेनर्स रखने चाहिए और पेट सेफ्टी पर फोकस करना चाहिए। एक दिलचस्प डेटा ये भी है कि चीन में अब बच्चों से ज्यादा पालतू जानवर हो गए हैं। 2024 में आधिकारिक आंकड़े आए कि देश में चार साल से छोटे बच्चों से ज्यादा पेट्स मौजूद हैं। हर 8 में से 1 शहरी इंसान अब पेट पालता है।
पाकिस्तान की हुनजा घाटी धरती का स्वर्ग यहां की महिलाएं हमेशा रहती हैं जवां
24 Aug, 2025 09:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करांची । पाकिस्तान की हुनजा घाटी जहां की महिलाएं दुनियाभर में मशहूर हैं। पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान की हुनजा घाटी को धरती का स्वर्ग कहा जाता है। यह जगह सिर्फ अपनी वादियों और बर्फीली चोटियों के लिए ही नहीं, बल्कि यहां की महिलाओं की खुबसूरती और लंबी उम्र के लिए भी दुनिया भर में मशहूर है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक माना जाता है कि यहां की महिलाओं की चमकती त्वचा और तंदुरुस्ती के पीछे वहां का शुद्ध वातावरण, ताजा खान-पान, खुबानी जैसी हेल्दी डाइट और एक्टिव लाइफ़स्टाइल है। अपनी अच्छी लाइफस्टाइल की वजह से हुंजा वैली की 60-70 साल की उम्र की महिलाएं भी 30-35 साल की नजर आती हैं। आपको उनके चेहरे पर झुर्रियां नजर नही आएंगी। उनकी चमकती त्वचा और ऊर्जा से भरी जिंदगी लोगों को हैरान कर देती है।
जानकारी के मुताबिक यहां की हवा और पानी बेहद साफ़ और प्रदूषण रहित है। पहाड़ों और ग्लेशियर का शुद्ध पानी त्वचा और सेहत के लिए वरदान होता है। यहां की महिलाएं ताज़ा और ऑर्गेनिक खाना खाती हैं। खान-पान की बात करें तो महिलाएं खुबानी, चेरी, सेब, सब्जियां और अनाज खाती हैं। खुबानी तो उनकी खूबसूरती का सीक्रेट कहा जाता है। तेल, घी और मसालों का इस्तेमाल बहुत कम होता है। उनके आहार में सब्ज़ियां, जौ, बाजरा, दालें और खासकर खुबानी ज़रूरी हिस्सा हैं। ये महिलाएं मीठा और पैकेट वाला खाना नहीं खातीं। खुबानी का तेल उनकी त्वचा को जवां बनाए रखता है।
हुनजा घाटी की महिलाएं रोजाना कड़ी मेहनत और शारीरिक गतिविधियां करती हैं। पहाड़ों पर रहकर साफ हवा और प्राकृतिक पानी पीकर उनकी सेहत और भी बेहतर रहती है। वे सुबह जल्दी उठती हैं और प्राकृतिक जीवन जीती हैं, जिससे तनाव कम रहता है। ऐसा कहा जाता है कि हुनजा घाटी के लोग अक्सर 90 से 100 साल तक जीते हैं। वहां की ज्यादातर महिलाएं काफी लंबी उम्र तक जीतीं हैं। वहां की महिलाएं शारीरिक रूप से एक्टिव रहती हैं। वह पैदल चलती हैं और खेतों में भी काम करती हैं। जिम की जरूरत नहीं, उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी ही फिटनेस है।
यहां की समाजिक ज़िंदगी काफी शांत और संतुलित है। कम तनाव और खुशहाल जीवन चेहरे की रौनक को और बढ़ा देता है। यहां की जनजातियों की जेनेटिक संरचना भी ऐसी है कि वह लंबे समय तक जवान और ताजा दिखती हैं। कई रिसर्च कहती हैं कि हुनजा लोग 100 साल तक जीते हैं और बुढ़ापे में भी जवान रहते हैं।
ट्रंप के बस की बात नहीं… पीएम मोदी रुकवाएंगे रूस-यूक्रेन युद्ध, पुतिन और जेलेंस्की आएंगे भारत
24 Aug, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोई ग्लोबल लीडर कहता है तो कोई उनकी सराहना करने से नहीं थकता है। जिस काम को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नहीं कर पाए उसे पीएम मोदी पूरा करने जा रहे हैं। वो है रूस-यूक्रेन के बीच शांति बहाल कराना। ट्रंप का मानना है कि भारत रूस से लगातार तेल खरीद रहा है इसके कारण यह युद्ध अनवरत जारी है। इन तमाम आरोप प्रत्यारोपों के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा की खबरें सामने आई। वहीं, अब भारत में यूक्रेन के राजदूत अलेक्जेंडर पोलिशचुक ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की भारत यात्रा की बात कही है।
पोलिशचुक ने यूक्रेन के राष्ट्रीय ध्वज दिवस के अवसर पर बोलते हुए कहा कि 2023 से यूक्रेन और भारत के बीच बातचीत में वृद्धि हुई है, जिसका उन्होंने स्वागत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान की भी सराहना की कि भारत युद्ध में तटस्थ नहीं है, बल्कि दृढ़ता से शांति, कूटनीति और राजनीतिक संवाद का समर्थन करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सितंबर में होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में दोनों देशों के बीच यह बातचीत जारी रहेगी। इसके अलावा, यूक्रेन ने एक बार फिर रूस के साथ चल रहे संघर्ष को समाप्त करने में भारत की अधिक सक्रिय भूमिका की अपील की है। भारत में यूक्रेन के राजदूत अलेक्जेंडर पोलिशचुक ने शनिवार को कहा कि रूस के साथ भारत के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को देखते हुए यूक्रेन भारत को संभावित शांति वार्ताओं में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में देखता है। जेलेंस्की की भारत यात्रा के बारे में पूछे जाने वाले पर राजदूत ने कहा, दोनों देश यात्रा की तारीख और वार्ता के विषय को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। जल्द ही इसका ऐलान कर दिया जाएगा। राजदूत ने बातचीत में आगे कहा, हम यूक्रेन में शांति-निर्माण प्रक्रिया में भारत की अधिक भागीदारी की उम्मीद करते हैं। मेरा मानना है कि हमारी सभी बैठकें इस बात पर चर्चा का हिस्सा होंगी कि भारत सीधे या परोक्ष रूप से रूस के साथ राजनीतिक बातचीत में कैसे शामिल हो सकता है। विशेष रूप से रूस और भारत के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को ध्यान में रखते हुए हमें इसकी उम्मीद है।
यूक्रेनी राजदूत ने लेख में भारत-यूक्रेन संबंधों के बारे में चर्चा की है। उन्होंने लिखा, यूक्रेन के तीन राष्ट्रपतियों ने भारत का आधिकारिक दौरा किया, जबकि भारत के दो राष्ट्रपतियों ने यूक्रेन का दौरा किया। 2021 तक यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण से पहले द्विपक्षीय व्यापार लगभग 3.4 अरब तक पहुंच गया था। उन्होंने कहा, एक लंबे विराम के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री के बीच पहली बैठक नवंबर 2021 में ग्लासगो में जलवायु शिखर सम्मेलन के दौरान हुई। मई 2023 से ऐसी बैठकें और टेलीफोन वार्ता नियमित हो गई हैं। 23 अगस्त 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूक्रेन की ऐतिहासिक यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय खोला। इसने रणनीतिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ने के लिए दोनों लोकतंत्रों के नेताओं की आकांक्षा की पुष्टि की। आज, दोनों देशों के विदेश मंत्रालय और राजनयिक मिशन इस साझा उद्देश्य को लागू करने के लिए लगन से काम कर रहे हैं। राष्ट्रपति जेलेंस्की की भारत की आगामी यात्रा के दौरान रणनीतिक साझेदारी के लिए एक रोडमैप पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।
पुतिन का दावा.....रूसी परमाणु पनडुब्बियां बिना किसी विदेशी रडार की जद में आए चल सकती
23 Aug, 2025 07:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मास्को । अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में वर्तमान में कोई देश अपने आक्रामक तेवरों की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में है, वहां रुस है। यूक्रेन के साथ लंबे समय से रूस की जंग को अमेरिका और यूरोप रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन रूस अपनी शर्तों पर अड़ा हैं। रूस अपने अचूक हथियारों के लिए भी प्रसिद्ध है। यूक्रेन के साथ युद्धविराम की कोशिशों के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी परमाणु पनडुब्बियों को विदेशी रडारों से सुरक्षित बताया है। पुतिन ने कहा कि रूसी परमाणु पनडुब्बियां आर्कटिक की बर्फ के नीचे बिना किसी विदेशी रडार की जद में आए चल सकती हैं। यह हमें औरों के मुकाबले ज्यादा सशक्त बनाता है।
पुतिन ने दावा किया कि आर्कटिक क्षेत्र रूस की सिक्योरिटी के लिहाज से बेहद अहम है। इस क्षेत्र में रिसर्च की जरूरत पर बल देकर पुतिन ने कहा कि आर्कटिक अनुसंधान बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि बर्फ पिघलने के कारण नौवहन मार्ग अधिक सुलभ होते जा रहे हैं। कई देश इन मार्गों का उपयोग करने में रुचि रखते हैं। अपने वर्कर्स का उत्साह बढ़ाते हुए उन्होंने दावा किया कि जो परिस्थिति है उसे देखते हुए कह सकते हैं कि हम यहां फायदे में हैं।
रूस वर्तमान में एकमात्र ऐसा देश है जो परमाणु ऊर्जा से चलने वाले आइसब्रेकर बेड़े का संचालन कर रहा है। 2000 के दशक से, रूस ने आठ बोरेई-श्रेणी की परमाणु पनडुब्बियां बनाईं, जिनमें से सबसे हालिया पोत, क्यनाज पॉजर्स्की, पिछले साल लांच किया गया था, जबकि दो निर्माणाधीन हैं। पुतिन ने कहा था कि पनडुब्बियां बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस हैं, जिनकी मारक क्षमता 8,000 किमी (4,970 मील) तक है। रूस और अमेरिका सहित कई देशों ने हाल के वर्षों में सुरक्षा और वैश्विक व्यापार के लिए आर्कटिक के महत्व पर प्रकाश डाला है।
गिलगित-बाल्टिस्तान में भीषण बाढ़ से आई तबाही.... 300 से ज़्यादा घर और कई दुकानें बह गई
23 Aug, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
क्वेटा। पाकिस्तान के कब्ज़े वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) के घिज़र ज़िले में एक ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी हिमनद झील विस्फोट से अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण 300 से ज़्यादा घर और कई दुकानें तबाह हो गईं। यह घटना शुक्रवार तड़के हुई, जिससे रौशन और तिल्दास जैसे कई गाँव बुरी तरह प्रभावित हुए।
जानकारी के मुताबिक प्रभावित क्षेत्र में घिज़र ज़िले के तिल्दास, मिदुरी, मुलाबाद, हॉक्स थांगी, रौशन और गोथ गाँव। बाढ़ से करीब 330 घर और कई दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं। रौशन गाँव का 80 प्रतिशत हिस्सा इस भयावक बाढ़ में बह गया। इस बाढ़ के कारण 7 किलोमीटर से ज़्यादा लंबी एक कृत्रिम झील बन गई, जिसने कृषि भूमि को जलमग्न कर दिया और सड़क नेटवर्क के कई हिस्सों को बहा दिया। अधिकारियों ने लगभग 200 लोगों को सुरक्षित निकाला है। हालाँकि, अभी तक किसी भी जान-माल के नुकसान की कोई ख़बर नहीं है। विस्थापित परिवारों के लिए टेंट, खाद्य सामग्री और अन्य ज़रूरी सामान की तुरंत आवश्यकता है। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, अस्थायी झील का जलस्तर कम हो रहा है, जिससे आगे के नुकसान की आशंका कम हो गई है।
इस घटना के बाद, पाकिस्तान मौसम विभाग ने गिलगित-बाल्टिस्तान के पहाड़ी क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी किया है, क्योंकि शनिवार, 23 अगस्त से और बारिश का पूर्वानुमान है। यह भी चेतावनी दी गई है कि रौशन गाँव में बना प्राकृतिक बाँध अभी भी अस्थिर है और दबाव के कारण टूट सकता है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस तरह की चार घटनाओं से गिलगित-बाल्टिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में घरों, फसलों और महत्वपूर्ण सड़कों को पहले भी भारी नुकसान पहुँचा है।
बाढ़ और भूस्खलन से तिल्दास, मिदुरी, मुलाबाद, हॉक्स थांगी, रौशन और गोथ गांव बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। 330 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा है और दर्जनों दुकानों के ध्वस्त होने की पुष्टि की गई है। गिजर के वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि हालांकि स्पिलवे खुलने से बड़ी तबाही टली है, लेकिन कई ऊंचाई पर बने मकान अब भी पानी में डूबे हुए हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ के पानी को पूरी तरह से निकलने में अभी और समय लगेगा।
इस बीच पाकिस्तान मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में बारिश की चेतावनी जारी करते हुए हिमालयी क्षेत्रों के लिए हाई अलर्ट घोषित किया है। विभाग ने स्थानीय प्रशासन और निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
मनीषा के पिता का भावुक बयान: “बेटी के नाम पर कोई राजनीति न करे”
23 Aug, 2025 12:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भिवानी: हरियाणा के भिवानी जिले में 19 वर्षीय शिक्षिका मनीषा के मामले में इन प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है। हालांकि नायब सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई को जांच सौंप दी है। लेकिन इस मामले पर विपक्षी दल सरकार को घेर रहे हैं। अब इस मामले में मनीषा के पिता ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस मामले में नायब सरकार का बचाव किया है। मनीषा के पिता ने वीडियो जारी कर कहा है कि मैं सभी से निवेदन करना चाहता हूं कि मेरी बेटी की मौत के बार में हमने और जनता ने हरियाणा सरकार से दो मांगे मांगी थी। पहले मांग थी की इस मामले में सीबीआई जांच हो और दूसरा दिल्ली एम्स से शव का पोस्टमार्टम हो। हरियाणा सरकार ने तुरंत ऐक्शन लेते हुए हमारी दोनों मांगे मान ली।
इस मामले पर राजनीति न करें
मनीषा के पिता ने आगे कहा कि मेरे पास बहुत से लोग आते हैं। यहां पर मैं कभी किसी सुनती हूं तो कभी की। कोई आकर कुछ कहता है तो कोई कुछ और। मैं सभी राजनीतिक दलों से हाथ जोड़कर ये निवेदन करता हूं कि मेरे बेटी की मौत के बारे में इस तरह की राजनीति न करें। बता दें कि भिवानी और रोहतक के बाद बुधवार को दिल्ली के एम्स में मनीषा के शव का तीसरा पोस्टमार्टम किया गया था। दिल्ली एम्स में पोस्टमार्टम के बाद मनीषा का शव उसके गांव पहुंचा, जहां भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच अंतिम संस्कार किया गया था।
डीजीपी ने कही थी ये बात
डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि सारी जांच पोस्टमार्टम व फॉरेंसिक स्तर पर हो रही थी, जिसमें समय लगता है। मनीषा के जहर खाने या किसी और की तरफ से खिलाने, सीसीटीवी और सुसाइड नोट से जुड़े सवालों पर डीजीपी ने कहा कि इन सभी तथ्यों की जांच सीबीआई करेगी। ऐसे में अब कोई खुलासा पुलिस नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि इन सभी विवरणों को सीबीआई पर छोड़ देना ही बेहतर है। जहां तक मेरा सवाल है, मैं इस मामले पर पारंपरिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं करूंगाष लेकिन हां, यह आम तौर पर समझा जाता है कि अगर लड़ाई के कोई निशान नहीं हैं, तो यह आत्म-सेवन का संकेत है। नाखूनों पर किए गए डीएनए परीक्षण, जहां से डीएनए नमूने लिए गए और उनकी जांच की गई, लड़ाई के कोई निशान नहीं मिले। ये सभी बातें जांच के दौरान सामने आएंगी।
आप ने सरकार को घेरा था
मनीषा हत्याकांड की जांच सीबीआई को दिए जाने पर आम आदमी पार्टी के नेता अनुराग ढांडा ने सरकार को घेरा था। उन्होंने कहा था कि हरियाणा सरकार कानून व्यवस्था को सुधारने में विफल साबित हो रही है। हरियाणा देश में नागरिक सुरक्षा में अंतिम पायदान पर आता है, जिस भरोसे के साथ लोगों ने भाजपा को चुना था, नायब सैनी ने उस भरोसे को तोड़ा है। अनुराग ढांडा ने कहा कि जब लोग हिंसा और हत्याओं के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो इंटरनेट बंद कर दिया जाता है और लोगों की आवाज दबाई जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि नायब सरकार की यह विफलता है, जिसको छुपाने का वह प्रयास कर रहे हैं।
हरियाणा के पानीपत में हड़कंप, दुकानों के आगे बने छज्जे ढहाए गए
23 Aug, 2025 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत: हरियाणा के पानीपत जिले में नगर निगम अधिकारियों ने शुक्रवार को अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया। नगर निगम की टीम की ओर से की गई कार्रवाई में दुकानों के आगे अवैध रूप से बनाए छज्जों को तोड़ा गया। निगम की कार्रवाई से बाजार के दुकानदार भी अपनी दुकानों के बाहर रखे सामान को अंदर करते नजर आए। नगर निगम एक्सईएन गोपाल कलावत कर्मचारियों की टीम के साथ शुक्रवार को शहर के ठठेरा बाजार और गुडमंडी बाजार में अतिक्रमण पर कार्रवाई करने के लिए पहुंचे।
दुकानदारों ने किया विरोध
दुकानदारों ने इकट्ठा होकर निगम की कार्रवाई का विरोध किया, पर दुकानदारों के विरोध का निगम अधिकारियों पर रत्तीभर भी फर्क नजर नहीं आया। नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि शहर के सभी बाजारों में दुकानदारों ने दुकानों के बाहर हद से ज्यादा अतिक्रमण किया है, जिससे करीब 15 से 20 फुट की सड़क आधी रह जाती है। दुकानों के बाहर खरीदारी करने के लिए आने वाले ग्राहकों के वाहन भी खड़े हो जाते है। ऐसे में दूसरे लोगों के आने-जाने का रास्ता भी नहीं रह जाता और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
लोगों की नगर निगम अधिकारियों की सराहना
वहीं लोगों ने नगर निगम अधिकारियों की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि एक बाजार को पार करने के लिए करीब 30 मिनट का समय लगता था, परंतु अब जब से निगम अधिकारियों ने अतिक्रमण पर कार्रवाई करनी शुरू की है, कोई जाम नहीं मिलता और बाजार में काफी सुविधा होती है। नगर निगम अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल एक दिन की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लगातार जारी रहेगा। निगम ने दुकानदारों को चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में फिर से अतिक्रमण पाया गया तो कठोर जुर्माना लगाया जाएगा और दुकानों के लाइसेंस भी रद्द किए जा सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि शहर को जाम मुक्त और व्यवस्थित बनाने के लिए निगम का यह अभियान आवश्यक है और इसे पूरे जिले में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
"टैरिफ से लागत बढ़ी, रोजगार घटे: फेड ने ट्रम्प की ब्याज दर कटौती की मांग ठुकी"
23 Aug, 2025 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आर्थिक मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने ब्याज दर घटाने के संकेत तो दिए हैं, लेकिन कब घटाएंगे, इसको लेकर कोई समय नहीं दिया है. ट्रंप चाहते हैं कि फेड ब्याज दरों में जल्द से जल्द कटौती करे. पॉवेल ने कोई भी जल्दीबाजी नहीं की है.
शुक्रवार को ब्याज दरों में कटौती को लेकर पॉवेल ने बड़ा इशारा किया. उन्होंने कहा कि टैरिफ ने अमेरिका के सामने ऐसी स्थिति बना दी है, कि फेड को ब्याज दरों में कटौती करनी पड़ सकती है. पॉवेल ने यह भी कहा कि कम दरों की वजह से लेबर मार्केट को फायदा मिलेगा. पिछले आठ महीनों से फेड ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. लेकिन ब्याज दर तुरंत कम कर दिया जाए, इसके लिए वह तैयार नहीं हुए.
ट्रंप मानते हैं कि अमेरिका में कोई भी महंगाई नहीं है, लिहाजा फेड को ब्याज दरों में कमी करनी चाहिए. ट्रंप का कहना है कि ब्याज दरों में कमी की वजह से सरकार को 37 ट्रिलियन के कर्ज को चुकाने में सहुलियत होगी. इसकी वजह से ब्याज दर कम होने की वजह से उन्हें भुगतान कम करना पड़ेगा.
आपको बता दें कि फेड का यह बयान बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पॉवेल ने कहा, "कंज्यूमर प्राइस पर टैरिफ का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है और आने वाले महीनों में भारी अनिश्चितता बनी हुई है. रोजगार के लिए नकारात्मक जोखिम बढ़ रहे हैं."
फेडरल रिज़र्व के अध्यक्ष के रूप में यह उनका आखिरी भाषण है, और निवेशक इस बात पर नज़र रख रहे हैं कि ब्याज दरें किस दिशा में जा सकती हैं. पॉवेल के सामने सचमुच कठिन चुनौती है. उन्हें एक तरफ मुद्रास्फीति की भी चिंता करनी है, साथ ही दूसरी ओर रोजगार को भी बचाना है. रिपलब्लिकन पार्टी के सवाल लगातार उनके सामने बने ही हुए हैं. वे लगातार उनकी आलोचनाओं को झेल रहे हैं. पॉवेल ने साफ तौर पर कहा कि लेबर की मांग और आपूर्ति दोनों के बीच एक संतुलन दिख रहा है, लेकिन यह संतुलन अच्छा नहीं है, क्योंकि यह सबकुछ मांग और आपूर्ति दोनों की कमी की वजह से हुआ है.
पॉवेल ने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था पर टैरिफ का प्रभाव अब दिखने लगा है और आने वाले समय में यह और अधिक बढ़ेगा. उन्होंने कहा, "हम कीमतों में एकमुश्त वृद्धि को मुद्रास्फीति की समस्या नहीं बनने देंगे." फेड की अगली बैठक सितंबर महीने में होगी. उसी समय यह स्पष्ट हो सकेगा कि फेड ने ब्याज दर में कटौती की है या नहीं. पिछली बार दिसंबर महीने में फेड ने ब्याज दर में कटौती की थी. इस समय ब्याज दर 4.25 से 4.50 के बीच है.
क्योंकि अभी तक जेरोम पॉवेल ने दरों में स्थिरता बनाए रखी है, लिहाजा नीति निर्माताओं ने लेबर मार्केट में फ्लेक्सिबिलिटी का हवाला दिया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कई विश्लेषकों ने भी इशारा किया है कि अचानक ही टैरिफ के बढ़ाए जाने से आयात महंगा हो गया है, लिहाजा इसका असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है. इसे महसूस किया जा सकता है.
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की एक खासियत रही है कि वहां पर फेड इन्फ्लेशन को कंट्रोल करने के लिए ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर रखते हैं. लेकिन टैरिफ ने सारा कैलकुलेशन बिगाड़ दिया है. अमेरिकी मुद्रास्फीति सूचकांक जून में पहले की तुलना में 2.6 फीसदी बढ़ा है.
रोजगार मार्केट ने व्यवस्था में उन दरारों को उजागर कर दिया है, जो टैरिफ को लेकर पैदा हुई है. अब इकोनोमी को संभालने के लिए दरों में कटौती को आवश्यक माना जा रहा है. ट्रंप कई बार इसकी वकालत कर चुके हैं. मई और जून महीने के जो आंकड़े सामने आए हैं, उनके अनुसार नियुक्तियां अनुमान से कम हुई हैं. रोजगार में नमी आने की वजह से अधिकारी परेशान हैं.
फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वालर और मिशेल बोमन ने ब्याज दरों को स्थिर रखने के खिलाफ मतदान किया था. यानि वे भी चाहते थे कि दरों को कम किया जाए, लेकिन पॉवेल इसके लिए तैयार नहीं थे. आप अंदाजा लगा सकते हैं कि 1993 के बाद यह पहली बार था कि दो फेड गवर्नरों ने फैसले पर असहमति दिखाई, इसे असामान्य माना जाता है.
"फिलीपींस पर चीन का दबाव बढ़ा: समुद्र में सैन्य जमावड़ा, तनाव चरम पर"
23 Aug, 2025 09:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग: दक्षिण चीन सागर में तनाव एक बार फिर चरम पर है। चीन की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए फिलीपींस सैन्यबलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। चीन ने विवादित सेकंड थॉमस शोल के पास अपने तटरक्षक जहाजों और कई मिलिशिया पोतों को तैनात किया है। फिलीपींस के सैन्य अधिकारियों ने बताया कि चीन ने विवादित दक्षिण चीन सागर के तटवर्ती क्षेत्र में लंबे समय से खड़े फिलीपीन युद्धपोत-बीआरपी सिएरा माद्रे के निकट तटरक्षक जहाजों और कई मिलिशिया जहाजों को तैनात किया है। उन्होंने कहा कि कम से कम 14 चीनी तटरक्षक और संदिग्ध मिलिशिया जहाज उनके युद्धपोत के आसपास निगरानी में देखे गए हैं। चीन की नेवी फोर्स बुधवार को देखी गई थी और गुरुवार को भी क्षेत्र में मौजूद बताई गई है। इनमें से कुछ हाई-कैलिबर हथियारों से लैस हैं और एक शिप पर हेलिकॉप्टर व ड्रोन भी देखे गए हैं। अधिकारी ने बताया कि चीनी सेना को करीब आने से रोकने के लिए सिएरा माद्रे से दो नावों के जरिए फिलीपीन सेना तैनात की गई थी। सेकंड थॉमस शोल को फिलीपींस में आयुंगिन शोल और चीन में रेन आई रीफ के नाम से जाना जाता है।
यह दक्षिण चीन सागर में एक प्रमुख विवादित क्षेत्र है। यह शोल फिलीपींस के 200-नॉटिकल मील विशेष आर्थिक क्षेत्र के भीतर स्थित है, लेकिन चीन इसे अपने नाइन-डैश लाइन दावे के हिस्से के रूप में मानता है। 1999 में, फिलीपींस ने इस क्षेत्र में अपनी संप्रभुता को बनाए रखने के लिए बीआरपी सिएरा माद्रे नामक एक पुराने युद्धपोत को जानबूझकर इस शोल पर तैनात किया था, जो अब एक क्षेत्रीय चौकी के रूप में कार्य करता है। अतीत में, चीन ने बार-बार मांग की है कि फिलीपींस बीआरपी सिएरा माद्रे को शोल से हटा ले। फिलीपींस ने चीन की मांग को मानने से इनकार कर दिया है। फिलीपीन नौसेना के प्रवक्ता रियर एडमिरल रॉय त्रिनिदाद ने बताया कि उनकी कार्रवाइयों और संख्या में वृद्धि के कारण यह चिंताजनक है। अगर स्थिति बिगड़ती है, तो हमारे पास एक आकस्मिक योजना तैयार है। इन सभी बलपूर्वक और आक्रामक कार्रवाइयों के बीच, कमांडर-इन-चीफ का निर्देश बिल्कुल स्पष्ट है… हम अपने क्षेत्र, संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों के विरुद्ध किसी भी खतरे से पीछे नहीं हटेंगे।
भारत पर दबदवा बनाने पाकिस्तान पहुंच रहे अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो
23 Aug, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के पाकिस्तान दौरे की खबर ने दोनों देशों के संबंधों में एक नई हलचल पैदा कर दी है। हालांकि, अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अगर यह दौरा होता है, तब 7 साल बाद कोई अमेरिकी विदेश मंत्री पाकिस्तान जाएगा। इससे पहले 2018 में माइक पोम्पिओ ने यह दौरा किया था। यह दौरा ट्रंप प्रशासन की उस बदली हुई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें अमेरिका पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत करना चाहता है। यह सिर्फ राजनयिक संबंधों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुछ आर्थिक और रणनीतिक हित भी जुड़े हैं।
बात दें कि ट्रंप सरकार की दिलचस्पी पाकिस्तान में मौजूद रेयर अर्थ मिनरल्स और हाइड्रोकार्बन के भंडारों में है। इन खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसी आधुनिक तकनीकों में होता है। चीन इस क्षेत्र में सबसे बड़ा खिलाड़ी है और अमेरिका अपनी आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाना चाहता है ताकि चीन पर उसकी निर्भरता कम हो सके। 14 अगस्त को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर मार्को रुबियो के बधाई संदेश से इस बात का साफ संकेत मिला था। उन्होंने कहा था कि अमेरिका आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्रों, खासकर महत्वपूर्ण खनिजों और हाइड्रोकार्बन की खोज करने के लिए उत्सुक है।
हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच एक व्यापार समझौते की घोषणा की थी, जिसमें अमेरिका पाकिस्तान में तेल भंडारों के दोहन में सहयोग करेगा। यह समझौता अमेरिकी कंपनियों के लिए पाकिस्तान के खनन क्षेत्र में निवेश के नए रास्ते खोलेगा। ट्रंप का पाकिस्तान के प्रति यह नया झुकाव भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है। अमेरिका भारत के साथ अपने मजबूत संबंधों को बनाए रखते हुए भी पाकिस्तान के साथ एक सामरिक संतुलन बनाना चाहता है। अमेरिका, पाकिस्तान को चीन के बढ़ते प्रभाव से दूर खींचना चाहता है। पाकिस्तान लंबे समय से चीन का करीबी सहयोगी रहा है।
जिस पाकिस्तान ने 1971 में किया कत्लेआम.....उसे ही वीजा-मुक्त यात्रा की सेवा दे रही यूनुस सरकार
23 Aug, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। पाकिस्तान ने 1971 में बांग्लादेश में ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान भयानक नरसंहार किया था, अब उसी कल्तेआम करने वाले पाकिस्तान को बांग्लादेश सरकार ने वीजा-मुक्त यात्रा की सुविधा देने का फैसला किया है। यह कदम पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार की प्रस्तावित बांग्लादेश यात्रा से पहले लिया गया है, और इस दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। बांग्लादेश ने पाकिस्तान के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर करने का फैसला किया है। इस समझौते के तहत, दोनों देशों के सरकारी अधिकारी और राजनयिक पाँच साल तक बिना वीजा के एक-दूसरे के देश में यात्रा कर सकते है। पाकिस्तान सरकार ने पहले ही इस समझौते को मंजूरी दे दी है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने इस एक नियमित मामला बताया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के 30 से अधिक देशों के साथ इसी तरह के समझौते हैं।
उन्होंने कहा कि हस्ताक्षर होने के बाद यह समझौता पांच साल की अवधि के लिए होगा। यह पूछने पर कि क्या यह अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान के साथ बढ़ती मित्रता का एक और संकेत है? आलम ने हालांकि इस समझौते को एक नियमित मामला बातकर कहा कि बांग्लादेश के 30 देशों के साथ इसी तरह के समझौते हैं।
गौरतलब है कि पाकिस्तान ने याह्या खान की अगुवाई में मार्च 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) में ऑपरेशन सर्चलाइट शुरू किया था। जिसमें पाकिस्तानी सेना सभी विद्रोहियों को चुन-चुनकर मारने लगी और कुछ ही समय में वहां की जमीन खून से लाल हो गई। फिर भारतीय सेना, मुक्ति वाहिनी (प्रतिरोध सेनानी) और मित्रो वाहिनी कमान के तहत संयुक्त सैन्य अभियान में बांग्लादेश लिबरेशन वॉर शुरू किया गया, जिसका अंत पाकिस्तान के आत्मसमर्पण और बांग्लादेश की स्वतंत्रता के रूप में हुआ।
जब रुसी विमानों को अमेरिका में भरवाना पड़ा ईंधन, करना पड़ा नगद भुगतान
22 Aug, 2025 12:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 15 अगस्त को बैठक के लिए अलास्का पहुंचे थे, तो इस यात्रा में बहुत सी चीजें खास थीं। इनमें से एक दिलचस्प बात ये थी कि उन्हें अपने जेट विमानों में अमेरिका की धरती पर ही ईंधन डलवाना पड़ा। मजे की बात ये है कि वह आए तो थे एक समझौते के लिए लेकिन उन्हें यहां भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा और ये रिफ्यूलिंग कराने के लिए पुतिन की टीम को नगद पैसे देने पड़े।
15 अगस्त की तारीख ऐतिहासिक थी जब करीब चार साल से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध में किसी समझौते के लिए व्लादिमीर पुतिन अमेरिका आए थे। यहां उनका भव्य स्वागत हुआ और खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उनकी अगुवाई करने पहुंचे थे। हालांकि रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों के चलते उनकी टीम रूसी जेट विमानों की रिफ्यूलिंग अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली का इस्तेमाल करके नहीं कर पाई।
इसकी जानकारी अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो ने एक इंटरव्यू में दी। उन्होंने बताया कि जब रूस के विमान अलास्का में उतरे तो उन्हें ईंधन भरवाने के लिए नकद भुगतान करना पड़ा। वे हमारे बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल नहीं कर सकते थे। बता दें पुतिन की टीम ने कुल 250,000 डॉलर यानि भारतीय मुद्रा में 2.2 करोड़ रुपए का ईंधन भराया था। पुतिन की टीम अलास्का में 5 घंटे रुकी थी। इसके लिए वे नगद राशि लेकर आए थे। मार्को रुबियो ने यह बात रूस पर लगे प्रतिबंध और इसके असर के संदर्भ में कही। उन्होंने कहा है कि रूस पर लगा हर प्रतिबंध आज भी प्रभावी है और उसका असर रूस को झेलना पड़ रहा है।
बता दें जब से रूस-यूक्रेन का युद्ध शुरू हुआ है, तब से अमेरिका ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं लेकिन रूस पर इसका कोई खास असर दिखाई नहीं देता, तभी अमेरिका इन सैंक्शंस को उन देशों पर भी लगा रहा है, जो उससे व्यापार कर रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री ने भी माना कि इन प्रतिबंधों के बावजूद रूस की नीतियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। यही वजह है कि ट्रंप सरकार रूस पर और प्रतिबंध नहीं लगा रहा है क्योंकि इसका कोई तात्कालिक असर नहीं दिखाई देता।
बता दें अलास्का में हुई दोनों नेताओं की बैठक के बाद वॉशिंगटन में एक मल्टीलेटरल बैठक भी हुई थी, जिसमें यूरोपीय नेता और खुद जेलेंस्की भी शामिल हुए थे। बातचीत में यूक्रेन की दीर्घकालिक सुरक्षा की गारंटी पर चर्चा हुई। जेलेंस्की ने कहा कि वह पुतिन से सीधी बातचीत के लिए तैयार हैं। ट्रंप-जेलेंस्की और पुतिन की मुलाकात के लिए फिलहाल जगह और तारीख तय की जा रही है।
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