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चीन में योग की बढ़ती लोकप्रियता, पीएम मोदी ने वांग झी चेंग के योगदान की तारीफ
11 Apr, 2025 12:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चीन: चीन के शंघाई जैसे शहरों में आने वाले 10वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह की पहल की जा रही है. ये चीन के साथ भारत के गहराते सांस्कृतिक आदान-प्रदान, चीनी समाज में योग और भारतीय संस्कृति के बढ़ते प्रभाव को भी दिखा रहा है. इसी बीच शंघाई में भारत के महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पत्र झेजियांग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वांग झी चेंग को सौंपा. अपने पत्र में पीएम मोदी ने चीन में योग और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के प्रचार-प्रसार में उनके प्रयासों की सराहना की है. उन्होंने कहा कि यह समारोह हांग्जो में प्रतिष्ठित झेजियांग विश्वविद्यालय परिसर में हुआ, जो भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में अनमोल क्षण रहा. इस साल ये राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं.
योग पर निकाली गई किताबों से जुटाई प्रशंसा
योग और भारतीय संस्कृति का प्रभाव शारीरिक व्यायाम से परे है, ये चीनी समाज में गहराई से देखा जाता है. प्रोफ़ेसर ने योग लाइब्रेरी सीरीज़ की पुस्तकों के मुख्य संपादक हैं. ये भगवद गीता और पतंजलि के योग सूत्रों सहित प्राचीन भारतीय ग्रंथों के उनके अनुवाद, सौ से ज़्यादा वर्चुअल चर्चाओं का विषय बन गए हैं. इन्हें चीन में काफ़ी प्रशंसा मिली है. 2016 में G20 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मोदी की हांग्जो यात्रा के दौरान, प्रोफ़ेसर वांग ने व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री को भगवद गीता का अपना अनुवाद दिया था. प्रोफ़ेसर वांग के प्रयासों ने चीन में योग की बढ़ती लोकप्रियता में अहम योगदान दिया है. यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए व्यापक रूप से अपनाई जाने वाली प्रथा के रूप में उभरा है.
योग में चीन के लोगों की बढ़ रही है रुचि
पिछले एक दशक में, योग ने चीनी शहरों में काफ़ी लोकप्रियता हासिल की है. इसमें लाखों लोग कक्षाओं, कार्यशालाओं और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस जैसे कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं. अकेले झेजियांग प्रांत में, हांग्जो, वुई और जियाक्सिंग जैसे शहरों ने बड़े पैमाने पर योग सभाओं की मेजबानी की है. इसमें हजारों लोग उत्साह के साथ शामिल हुए हैं. योग को लेकर चीनी लोगों की जीवनशैली में ये बदलाव योग के बढ़ते प्रभाव को दिखाता है. ये ताई ची जैसी पारंपरिक प्रथाओं के साथ सामंजस्यपूर्ण रूप से मिला हुआ है. योग स्वास्थ्य के लिए लोगों के समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है. प्रोफेसर वांग ने भारतीय दार्शनिक परंपराओं में युवा चीनी लोगों के बीच बढ़ती रुचि पर ध्यान दिया है. जो ध्यान, संतुलन और आंतरिक शांति तथा चीन की अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ जुड़े मूल्यों पर जोर देती है.
न्यूयॉर्क में बड़ा हादसा: हवा में बिखरे हेलिकॉप्टर के परखच्चे, दर्दनाक मंजर
11 Apr, 2025 12:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क के हडसन नदी में गुरुवार को एक सैर-सपाटे के लिए उड़ रहा हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया, जिसमें एक स्पेनिश परिवार के पांच सदस्यों सहित कुल छह लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में तीन बच्चे और हेलिकॉप्टर का पायलट शामिल हैं। यह दर्दनाक हादसा तब हुआ जब हेलिकॉप्टर मैनहट्टन के पास उड़ान भर रहा था।
हेलिकॉप्टर, जो बेल 206 मॉडल का था, दोपहर करीब 3 बजे स्काईपोर्ट से उड़ा और मैनहट्टन के किनारे होते हुए जॉर्ज वॉशिंगटन ब्रिज तक पहुंचा। इसके बाद वह वापस मुड़ा लेकिन नियंत्रण खो बैठा और न्यू जर्सी के होबोकेन पियर के पास पानी में गिर गया।
न्यूयॉर्क पुलिस कमिश्नर जेसिका टिश के अनुसार, एनवाईपीडी और एफडीएनवाई के गोताखोरों ने सभी छह लोगों को पानी से निकाला। चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य को अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।
चश्मदीदों ने बताया आंखों देखा हाल
हादसे के कई चश्मदीद गवाहों ने बताया कि हेलिकॉप्टर हवा में ही गोल-गोल घूमता नजर आया और उसमें से धुआं निकल रहा था। एक व्यक्ति ने बताया कि ऐसा लगा जैसे हेलिकॉप्टर का रोटर ब्लेड हवा में ही टूट गया, जिससे वह सीधा पानी में गिर पड़ा। एक और गवाह ने कहा, "हेलिकॉप्टर ने स्पाइरल करना शुरू किया और फिर तेजी से पानी में गिर गया।"
एविएशन लॉयर और पूर्व मरीन कॉर्प्स पायलट जस्टिन ग्रीन ने बताया कि वीडियो देखकर लगता है कि यह एक 'कैटस्ट्रॉफिक मैकेनिकल फेल्योर' था, यानी तकनीकी खराबी इतनी गंभीर थी कि पायलट कुछ भी नहीं कर सकता था।
राष्ट्रपति ट्रंप और मेयर एरिक एडम्स की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हादसे को "बहुत भयानक" बताया। उन्होंने कहा, "हडसन नदी में हेलिकॉप्टर क्रैश बहुत दर्दनाक है। पायलट, दो वयस्क और तीन बच्चों की मौत हो गई। हादसे का वीडियो बहुत ही दिल दहला देने वाला है। ईश्वर पीड़ितों के परिवारों को शक्ति दे।"
ट्रंप ने यह भी कहा कि ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी शॉन डफी और उनकी टीम हादसे की जांच में जुटी है और जल्द ही इसकी पूरी जानकारी दी जाएगी। न्यूयॉर्क के मेयर एरिक एडम्स ने इसे "दिल तोड़ देने वाला और दुखद हादसा" बताया और कहा कि सभी पीड़ितों को पानी से निकाल लिया गया है।
पाकिस्तान के खनिज निवेश का विरोध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में गुस्से की लहर
11 Apr, 2025 12:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान: दुनिया भर से निवेश बुलाना पाकिस्तान के लिए जितनी बड़ी कामयाबी लग रही है, असल में उतना ही बड़ा सिरदर्द बनता जा रहा है. वजह? जिन जमीनों के नीचे खजाना दबा है जैसे बलूचिस्तान, गिलगित बाल्टिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, उन्हीं जमीनों के लोग अब सरकार के खिलाफ खड़े हो गए हैं. वहाँ के लोगों को लग रहा है कि उनकी जमीनें तो लूटी जा रही हैं, लेकिन हिस्सेदारी में वो पीछे छूट रहे हैं. यानी पाकिस्तान ने खनिज बेचने की तैयारी तो कर ली, लेकिन उन्हें निकालने से पहले ही विरोध की दीवार खड़ी हो गई है.
फोरम में सऊदी यूएस चीन से हुआ सौदा
दरअसल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 8 और 9 अप्रैल को पाकिस्तान खनिज निवेश फोरम 2025 का खूब शोर हुआ. जिसमें दावा किया गया कि पाकिस्तान अब अपनी मिट्टी के नीचे छुपे अरबों डॉलर के खजाने को दुनिया के सामने लाने जा रहा है. मंच से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ऐलान कर दिया कि अब देश को किसी कर्ज देने वाले की जरूरत नहीं क्योंकि अब हमारी खदानें हमारी ताकत बनेंगी. इस फोरम में अमेरिका, सऊदी अरब और चीन जैसे देशों से आए 300 से ज्यादा निवेशकों ने हिस्सा लिया. डील्स हुईं, वादे किए गए और इसे पाकिस्तान की इकोनॉमी के लिए 'गेमचेंजर' बताया गया. लेकिन असली सवाल ये है कि क्या पाकिस्तान इन खदानों को वाकई खोद पाएगा?
बलूचिस्तान के लोगों में नाराजगी
बलूचिस्तान की रेको डेक खदान, जहां तांबे और सोने के भंडार हैं. वहां लोगों का गुस्सा सबसे ज़्यादा है. उनका आरोप है कि इस्लामाबाद सिर्फ विदेशी ताकतों और राजधानी के अमीर लोगों की जेब भरना चाहता है. खनिज उन्हीं की ज़मीन से निकलेंगे, मगर फायदा दूसरों को मिलेगा. खैबर पख्तूनख्वा, जो लंबे समय से रत्नों के लिए मशहूर रहा है, वहां भी स्थानीय लोग कह रहे हैं कि हमें तो सिर्फ धूल ही मिलती है. एक बुज़ुर्ग आदिवासी का कहना था, 'इन पहाड़ों से दौलत निकलती है, लेकिन हमारे बच्चे भूखे हैं' .
इन दो प्रांतों में लोग कर रहे विरोध प्रदर्शन
गिलगित-बाल्टिस्तान में भी माहौल गरम है. सोना, यूरेनियम और कीमती पत्थरों की भरमार वाले इस इलाके में चीनी कंपनियों को खनन के पट्टे दिए गए हैं, जिसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. स्थानीय लोगों को डर है कि बाहरवाले उनकी ज़मीन का खजाना ले जाएंगे और बदले में कुछ नहीं मिलेगा. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) की हालत भी कुछ अलग नहीं. यहां मणिक और नीलम जैसे कीमती रत्नों के बड़े भंडार हैं. पूर्व प्रधानमंत्री सरदार अतीक अहमद खान ने साफ कहा-'हमारे खनिज विदेशी जेबों में जाएंगे और हमारे हिस्से में सिर्फ धूल ही बचेगी. सरकार भले ही विदेशी निवेश के जरिए देश की किस्मत बदलने का सपना दिखा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि जिन इलाकों से खनिज निकाले जाएंगे. वहीं के लोग खुद को सबसे ज्यादा ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं'.
हरियाणा में गर्मी से बचाव के लिए स्कूलों को सख्त निर्देश, धूप में कार्यक्रमों पर रोक
11 Apr, 2025 11:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ । हरियाणा में बढ़ती गर्मी और लू की तीव्रता को देखते हुए गुरुवार को शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी और निजी विद्यालयों के लिए आदेश जारी किया है। इस आदेश का मकसद छात्रों को गर्मी से सुरक्षित रखना और लू से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचाना है।
निदेशालय की ओर से प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों, खंड मौलिक शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्रमुखों को पत्र लिखकर इन दिशा-निर्देशों की सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्देशों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी परिस्थिति में विद्यार्थियों को खुली धूप में न बैठाया जाए और न ही किसी प्रकार के कार्यक्रम या आयोजन खुले में किए जाएं। विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए स्वच्छ पीने के पानी की समुचित व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाए, ताकि उन्हें निर्जलीकरण से बचाया जा सके। इसके अतिरिक्त, सभी स्कूलों में दिन में तीन बार पानी पीने के लिए घंटी बजाने के आदेश दिए गए हैं, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी विद्यार्थी नियमित अंतराल पर पानी पिएं और उनके शरीर में तरलता बनी रहे।
इसके अलावा, शिक्षा निदेशालय ने कहा कि स्कूलों में उपलब्ध रेड क्रॉस फंड का उपयोग करते हुए लू से बचाव हेतु ओआरएस पैकेट्स की पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था की जाए। इसके लिए स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) को अधिकृत किया गया है ताकि वह आवश्यकता अनुसार इस निधि का प्रयोग कर सके। साथ ही विद्यार्थियों के साथ गर्मी से बचने के उपायों पर चर्चा की जाए और उन्हें जागरूक किया जाए। यदि आवश्यकता हो तो आयुष विभाग से भी संपर्क किया जा सकता है।
आपात स्थिति की तैयारी के तहत स्थानीय अस्पतालों से संपर्क की व्यवस्था रखने और प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण लेने की सलाह दी गई है। विद्यालयों को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे क्लासरूम की खिड़कियों को एल्यूमीनियम पन्नी, गत्ते या अन्य रिफ्लेक्टिव सामग्री से ढंक कर रखें, जिससे गर्मी अंदर प्रवेश न कर सके। जिन खिड़कियों और दरवाजों से दोपहर में गर्म हवा आती है, उन पर पर्दे लगाए जाएं। साथ ही, मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान से सुना जाए और संभावित तापमान वृद्धि के प्रति सतर्कता बरती जाए।
विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि उन्हें कभी भी बंद वाहनों में अकेला न छोड़ा जाए। इसके अलावा, विद्यार्थियों को यह निर्देशित किया गया है कि वे गर्मी की छुट्टियों के दौरान घर पर ही रहें और धूप में बाहर निकलने से परहेज करें। संतुलित, हल्का और नियमित भोजन करने के साथ-साथ अगर घर से बाहर निकलना अनिवार्य हो तो सिर और शरीर को कपड़े या टोपी से ढंक कर निकलें।
विद्यालयों को यह भी कहा गया है कि वे बाहरी गतिविधियों का आयोजन सुबह 10 बजे तक संपन्न कर लें, ताकि विद्यार्थियों को तीव्र गर्मी से बचाया जा सके। शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी यह आदेश विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसे राज्यभर के सभी स्कूलों में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना अनिवार्य है।
अमेरिका का टैरिफ धमाका: चीन समेत 60 देशों पर बढ़ा शुल्क, हर दिन कमा रहे 2 बिलियन डॉलर
11 Apr, 2025 08:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका: अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी को लेकर पूरी दुनिया के अर्थ जगत में हड़कंप जैसी स्थिति देखी गई. चीन ने जब अमेरिका का विरोध किया, तो दोनों देशों के बीच टैरिफ वॉर छिड़ गया. हालांकि जिन देशों ने अमेरिकी टैरिफ नीति पर जवाबी कार्रवाई नहीं की, उसके लिए अमेरिका ने 90 दिनों की छूट की घोषणा की. हालांकि इस दौरान भी इन देशों पर 10% टैरिफ लगता ही रहेगा. टैरिफ को लेकर हो रही इस चर्चा के बीच एक सवाल सबके मन में उठता है कि आखिर इस टैरिफ से अमेरिका को कितनी कमाई होती है. टैरिफ से हो रही कमाई के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद बताया है कि अमेरिका टैरिफ लगाकर रोजाना दो बिलियन डॉलर कमा रहा है. हालांकि, इससे दुनिया के दूसरे देशों को नुकसान हो रहा है. लेकिन इस तरह, अमेरिका का खजाना पूरा भर रहा है.
टैरिफ अमेरिकी उद्योग को मजबूत करने के लिए जरूरीः ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को 'विस्फोटक' बताया है, जिसका मतलब है कि उन्हें लगता है कि इसका प्रभाव बहुत बड़ा होगा. वे व्हाइट हाउस में सांसदों और मंत्रियों के साथ बात करते हुए कह रहे थे कि ये टैरिफ अमेरिकी उद्योग को फिर से मजबूत बनाने के लिए जरूरी हैं.
ट्रंप ने बताया- टैरिफ ने रोज 2 बिलियन डॉलर की हो रही कमाई
उन्होंने बताया कि उन्होंने 60 देशों के खिलाफ टैरिफ बढ़ाने का ऐलान कर दिया है. ट्रंप का कहना है कि इन टैरिफ से अमेरिका को हर दिन 2 बिलियन डॉलर की आमदनी हो रही है. दो बिलियन डॉलर यानी कि 200 करोड़ डॉलर हर रोज. इसे भारतीय मुद्रा में बदले तो यह रकम 1,72,08,38,00,000 रुपए होती है. हालांकि ट्रंप ने यह नहीं बताया कि यह आमदनी किस टैरिफ से आई है और वास्तविक राजस्व कितना बढ़ा है. अमेरिका ने चीन से आने वाले सामान पर 104% तक टैक्स लगाने का फैसला किया है. इसका मतलब है कि चीन से जिन चीजों पर पहले से टैक्स लगता था, अब उसमें 50% और बढ़ोतरी की जाएगी. यह नया टैक्स मंगलवार रात से लागू हो चूका है.
कई देशों ने अमेरिकी श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी की
व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी कामकाजी लोगों और उद्योगों की रक्षा के लिए ये कदम उठाए हैं. इसके कारण दुनिया के कई देशों ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते करने की इच्छा जताई है. प्रवक्ता ने बताया कि कई देशों ने लंबे समय तक अमेरिकी श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी की है, और अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा.
यूक्रेन में गिरफ्तार चीनी सैनिकों का दावा, रूस ने उन्हें मारने की योजना बनाई थी
10 Apr, 2025 01:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूक्रेन में पकड़े गए चीनी सैनिकों ने रूस, व्लादिमीर पुतिन और अपने देश चीन को लेकर बड़ा खुलासा किया है. पकड़े गए चीनी सैनिकों का कहना है कि रूस ने उन्हें मारने की तैयारी कर ली थी, इसलिए वे लोग सरेंडर कर गए. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमीर जेलेंस्की ने खुद इन चीनी सैनिकों से पूछताछ की है.
चीनी सैनिकों में से एक हेनान और दूसरा जियांग्शी प्रांत का रहने वाला है. दोनों की भर्ती रूसी सैनिकों के अनुबंध के तहत की गई है. दोनों पिछले कई महीनों से युद्ध के मोर्चे पर तैनात थे.
सरेंडर से पहले मारने की साजिश
पकड़े गए चीनी सैनिकों में से एक ने जेलेंस्की को बताया कि हम दोनों के साथ एक रूसी सैनिक सरेंडर करना चाहता था. इसकी भनक रूस की सेना को लग गई. खबर मिलते ही रूस की सेना ने हमें मारने की कोशिश की. वे लोग हम पर बम भी फेंके, लेकिन हम बच गए.
चीनी सैनिकों का कहना है कि वे पहले कभी युद्ध के मोर्चे पर नहीं गए. पहली बार उन्हें रूस में युद्ध के मोर्चे पर भेजा गया. इन सैनिकों का कहना है कि उन्हें नहीं पता था कि रूस की सेना इतनी क्रूर सेना है.
चीन के लोग पैसे के चक्कर में आ रहे
यूक्रेनी सेना के गिरफ्त में आए चीनी सैनिकों का कहना था कि चीन में नौकरी की संकट है. यही वजह है कि लोग यहां से उन जगहों पर जा रहे हैं, जहां पैसे और भविष्य की संभावनाएं उन्हें दिख रही है. चीन से बेहतर देश की तलाश में लोग जा रहे हैं. हम दोनों भी इसी कोशिश में रूस आए थे.
रूस के लिए लड़ने पर ज्यादा पैसे मिलते हैं. यही वजह है कि चीन के अधिकांश लोग रूस के लिए जंग लड़ रहे हैं. जेलेंस्की का कहना है कि चीन के 160 से ज्यादा सैनिक जंग के मैदान में डटे हुए हैं. सैनिकों का कहना है कि जिनपिंग की सरकार इसे रोकने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रही है.
जेलेंस्की के मुताबिक रूस के समर्थन में चीन, उत्तर कोरिया और ईरान के सैनिक जंग लड़ रहे हैं. यूक्रेन ने चीन से संपर्क कर इस पर सफाई देने के लिए कहा है. यूक्रेन ने इसे पीठ के पीछे खंजर मारने का आरोप लगाया है.
ट्रंप सरकार का बड़ा ऐलान: यहूदी विरोधी सोच रखने वालों की एंट्री बंद
10 Apr, 2025 11:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका में रह रहे इजराइल विरोधी लोगों की अब खेर नहीं है. अमेरिका के आव्रजन अधिकारियों ने बुधवार को ऐलान किया कि वे सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच करेंगे और उन लोगों को वीजा या ग्रीन कार्ड नहीं दिया जाएगा जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा यहूदी विरोधी (Anti-Semitic) मानी जाने वाली सामग्री पोस्ट करते हैं.
यहूदी विरोधी के रूप में माने जाने वाली पोस्टों में अमेरिका की ओर से आतंकवादी घोषित किए गए समूहों के समर्थन में सोशल मीडिया पर लिखना या कुछ शेयर शामिल होगा, जिसमें हमास, लेबनान का हिजबुल्लाह और यमन का हूती शामिल हैं. यह कदम ट्रंप प्रशासन की ओर अमेरिका के अंदर छात्रों के लिए विवादास्पद रूप से वीजा रद्द करने के बाद उठाया गया है, जहां संविधान का पहला संशोधन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है.
होमलैंड सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने साफ किया कि जो कोई भी सोचता है कि वह अमेरिका आ सकता है और यहूदी विरोधी हिंसा और आतंकवाद की वकालत करने के लिए पहले संशोधन के पीछे छिप सकता है – उसे फिर से सोचना चाहिए. आपका यहां स्वागत नहीं है.”
फैसले को माना जा रहा अभिव्यक्ति की आजादी उल्लंघन
बयान में कहा गया है कि अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवाएं “ऐसी सोशल मीडिया सामग्री पर विचार करेंगी जो किसी विदेशी द्वारा यहूदी विरोधी आतंकवाद, यहूदी विरोधी आतंकवादी संगठनों या अन्य यहूदी विरोधी गतिविधि का समर्थन, समर्थन, प्रचार या समर्थन करने का संकेत देती है.” ट्रंप प्रशासन के इस कदम को उदारवादी लोग अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ मान रहे हैं.
इजराइल का विरोध करना पड़ रहा भारी
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पिछले महीने के अंत में कहा था कि उन्होंने करीब 300 लोगों के वीजा रद्द कर दिए हैं और ऐसा वे रोजाना कर रहे हैं. जिन लोगों के वीजा रद्द किए गए हैं, उनमें से कई लोगों का कहना है कि उन्होंने यहूदियों के प्रति कभी भी कोई विरोध नहीं जताया, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे खुद को विरोध प्रदर्शनों वाली जगह पर पाते थे.
अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ की जंग, भारत को बना रहे सहयोगी
10 Apr, 2025 11:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ को लेकर जंग छेड़े हुए हैं. इस वॉर में उनका तगड़ा प्रहार चीन पर होता है. दोनों मुल्कों में होड़ मची है कि कौन किसपर ज्यादा टैरिफ लगाता है. टैरिफ को लेकर छिड़ी इस जंग में भारत की अहमियत भी बढ़ गई है. चीन पहले ही कह चुका है कि वो और भारत साथ मिलकर टैरिफ की चुनौतियों से बाहर निकल सकते हैं तो वहीं अब अमेरिका भी इस लड़ाई में भारत का साथ चाह रहा है. अमेरिका के वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भारत हमारा महत्वपूर्ण ट्रेड पार्टनर है.
क्या बोले वित्त सचिव?
अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीन पर 125 प्रतिशत टैरिफ पर कहा कि यह मुद्दा केवल देश के बारे में नहीं है, बल्कि वैश्विक व्यापार में बेड एक्टर्स के बारे में भी है. ब्रीफिंग के दौरान, बेसेंट ने कहा कि टैरिफ को लेकर घोषणाओं के बीच व्यापार वार्ता मुख्य रूप से जापान, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे चीन के पड़ोसियों के साथ हो रही है.
उन्होंने कहा कि ये बेड एक्टर्स के बारे में है. चीन के पड़ोसियों पर हमारी नजर है. मैंने वियतनाम को देखा है. जापान सबसे आगे है, उसके बाद दक्षिण कोरिया और भारत. जैसा कि मैंने बार-बार कहा है और राष्ट्रपति ट्रंप चार साल से कह रहे हैं, चीन आधुनिक दुनिया इतिहास में सबसे असंतुलित अर्थव्यवस्था है और वे अमेरिकी व्यापार समस्याओं का सबसे बड़ा स्रोत हैं. वास्तव में वे बाकी दुनिया के लिए एक समस्या हैं.
स्कॉट बेसेंट ने कहा, मैं इसे ट्रेड वॉर नहीं कह रहा हूं, लेकिन मैं यह कह रहा हूं कि चीन ने इसे बढ़ा दिया है और राष्ट्रपति ने इसका बहुत साहस के साथ जवाब दिया है और हम अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ समाधान पर काम करने जा रहे हैं.
भारत का क्या स्टैंड?
टैरिफ की इस लड़ाई में भारत का भी रुख साफ है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने साफ कर दिया है सरकार देश के हित में काम कर रही है. उन्होंने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है. सरकार देश के सर्वोत्तम हित में काम कर रही है और समाधान तलाश रही है.
चीन भी भारत की ओर देख रहा
भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने इससे पहले कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ से बनी चुनौतियों से निपटने के लिए भारत और चीन को एक साथ खड़ा होना चाहिए. प्रवक्ता यू जिंग ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, चीन-भारत आर्थिक और व्यापारिक संबंध पारस्परिक लाभ पर आधारित हैं. अमेरिका टैरिफ का दुरुपयोग कर रहा है ऐसे में दो सबसे बड़े विकासशील देशों को कठिनाइयों से निपटने के लिए एक साथ खड़ा होना चाहिए.
अमेरिका-वियतनाम के बीच ट्रेड डील
इस बीच, वियतनाम सरकार ने कहा है कि अमेरिका और वियतनाम व्यापार समझौते के लिए वार्ता शुरू करने पर सहमत हो गए हैं. यह बात अमेरिका द्वारा वियतनाम पर 46% टैरिफ पर रोक लगाने के कुछ घंटों बाद कही गई. वियतनाम अनेक पश्चिमी कम्पनियों के लिए एक प्रमुख क्षेत्रीय विनिर्माण आधार है. अमेरिका उसका सबसे बड़ा निर्याता बाजार है.
मरियम नवाज के नेतृत्व में पंजाब की कृषि नीति में बड़ा बदलाव
10 Apr, 2025 11:24 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ ने अपने सूबे के विकास के लिए कई कदम उठाए हैं. उनके सत्ता में आने के बाद से पंजाब की कई मूलभूत सुविधाओं में सुधार हुआ है. एक और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मरियम नवाज ने गेहूं विनियमन (Deregulation) को मंजूरी दी है और कृषि सुधार के लिए फ्री मार्केट पॉलिसी शुरू की है.
मुख्यमंत्री का ये कदम गेहूं के अंतर-प्रांतीय परिवहन (inter-provincial transportation) से प्रतिबंध हटाता है, जिससे किसानों को प्रतिस्पर्धी बाजारों तक पहुंच बनाने और अपनी फसल को अच्छे दामों में बेचने में मदद मिलेगी. इस निर्णय के बाद मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब से गेहूं को स्वतंत्र रूप से ट्रांसपोर्ट करने की अनुमति मिलने से किसान अब अपनी फसल का पूरा मूल्य प्राप्त कर सकेंगे.” फ्री मार्केट नीति से बाजार की गतिशीलता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने और पूरे सूबे में किसानों को सशक्त बनाने की उम्मीद है.
गेहूं की होगी निजी खरीद
पाकिस्तान के किसानों से गेहूं सरकार द्वारा खरीदा जाता था, जिसके कारण मार्केट कॉम्पिटिशन का किसानों को ज्यादा फायदा नहीं मिलता था. एक अन्य ऐतिहासिक फैसले में मरियम नवाज शरीफ ने ऐलान किया है कि इस साल गेहूं की खरीद निजी क्षेत्र के जरिए की जाएगी.
पंजाब के इतिहास में पहली बार, निजी संस्थाएं गेहूं की खरीद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रही हैं. इस पहल का उद्देश्य खरीदारों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य निर्धारण और बाजार पहुंच से लाभ होगा.
एक हजार ट्रैक्टर किसानों को फ्री दिए
मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ के नेतृत्व में पंजाब सरकार कई किसान-हितैषी नीतियों चला रही है, जो सरकार की प्रतिबद्धता क्षेत्र में कृषि स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा दे रही है. गेहूं विनियमन और मुक्त बाजार नीति कृषि को बढ़ावा देने के लिए पंजाब की व्यापक रणनीति के अनुरूप है.
सरकार ने गेहूं उत्पादन बढ़ाने के लिए काफी सीरियस नजर आ रही है. उसने गेहूं उत्पादक किसानों को 1,000 ट्रैक्टर भी मुफ्त में वितरित किए हैं, जिससे उनके प्रयासों को और बढ़ावा मिला है. ये पहल किसानों को सशक्त बनाने और कृषि स्थिरता को बढ़ाने के लिए प्रशासन के समर्पण को दिखाती है.
कनाडा का नया कदम: कराची में नागरिक महावाणिज्यदूत की नियुक्ति की तैयारी
10 Apr, 2025 11:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कनाडा की ओर से उठाए जा रहे कदमों से लग रहा है कि वह भारत के साथ अपने विवादों को और बढ़ाने में लगा है. कभी खालिस्तानियों समर्थन तो कभी भारत को लेकर कनाडाई नेताओं के बयानों से दोनों देशों के रिश्तों में दूरी बड़ी है. भारत के साथ तनाव के बीच कनाडा पाकिस्तान से अपनी नजदीकियां बढ़ा रहा है. कनाडा के उच्चायोग ने कराची में नागरिक महावाणिज्यदूत की नियुक्ति के लिए आधिकारिक तौर पर आवेदन आमंत्रित किए हैं. भारत के लिए कनाडा और पाक की करीबी इसलिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि दोनों ही देश समय-समय पर खालिस्तानी विद्रोहियों का समर्थन करते रहे हैं.
कराची में कनाडा के महावाणिज्यदूत की तैनाती दोनों देशों के संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक विकास है. कनाडा ने इस पद के लिए एक पब्लिक एडवर्टाइजमेंट जारी किया और इसमें आवेदन देने की आखिरी तारीख 15 जून है. विज्ञापन में कहा गया है कि चयनित उम्मीदवार पांच साल के लिए नियुक्त किया जाएगा, जिसके दौरान वे कराची और सिंध में कनाडा की सकारात्मक छवि को बढ़ावा देने का काम करेगा. साथ ही आवेदकों को अंग्रेजी और फ्रेंच भाषा में महारत हासिल होने चाहिए.
संस्कृती से लेकर व्यापार दोनों का होगा आदान-प्रदान
महावाणिज्यदूत की नियुक्ति दोनों देशों की सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक आदान-प्रदान को प्राथमिकता देती है और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाती है. यह नियुक्ति 2023 में बहरूम डी. अवारी के निधन के बाद हुई है, जो पहले मानद महावाणिज्यदूत पद पर थे. कनाडाई उच्चायोग का मकसद कराची में राजनयिक प्रतिनिधित्व और इंगेजमेंट बनाए रखना है.
क्या काम करता है मानद महावाणिज्यदूत?
मानद महावाणिज्यदूत एक देश का राजनयिक प्रतिनिधि होता है जो किसी अन्य देश में अपने देश के हितों की रक्षा करता है, लेकिन वह अपने देश की सरकार से वेतन नहीं लेता और आमतौर पर मेजबान देश का नागरिक होता है. कनाडा के मानद महावाणिज्यदूत कनाडा के हितों का प्रतिनिधित्व करने और सिंध प्रांत में कनाडाई नागरिकों का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
ये दूत कनाडा और पाक के बीच संपर्क के रूप में कार्य करते हुए, साथ ही कनाडाई व्यवसायों और व्यक्तियों के लिए ये एक संपर्क बिंदु है, जिससे राजनयिक जुड़ाव और सहायता सुनिश्चित होती है. साथ ही कनाडा के मूल्यों, संस्कृति और आर्थिक और राजनीतिक हितों को बढ़ावा देना भी इनकी प्रमुख जिम्मेदारी होती है.
यूक्रेन का दावा: रूसी सेना में लड़ रहे दो चीनी नागरिक पकड़े गए
10 Apr, 2025 11:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस-यूक्रेन जंग के दौरान रूस की सेना में बाहर के सैनिकों के लड़ने की कई बार खबरें आई हैं. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने मंगलवार को कहा कि उनकी सेना ने रूसी सेना के साथ लड़ रहे दो चीनी लोगों को पकड़ लिया है. कीव के मुताबिक यूक्रेनी खुफिया दस्तावेज़ में खुलासा हुआ है कि अप्रैल के शुरू तक कम से कम 163 चीनी नागरिक रूस की सशस्त्र सेनाओं में शामिल हैं.
राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने 9 अप्रैल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “155 चीनी नागरिक यूक्रेन की धरती पर यूक्रेनियन के खिलाफ लड़ रहे हैं.” जेलेंस्की के इस दावे को चीन ने खारिज किया और इसको निराधार बताया. इससे पहले भारत, नेपाल और अन्य देशों के लोगों को भी जबरन यूक्रेन के खिलाफ मोर्चे पर भेजने का खुलासा हुआ था.
रूसी सेना दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना है, जिसमें लगभग 1.5 मिलियन सक्रिय सैनिक और 2 मिलियन रिजर्व सैनिक हैं. फिर सवाल आता है कि रूस के खुद के सैनिक कहां हैं, दो वह यूक्रेन के खिलाफ भाड़े के सैनिक भेज रहा है.
कहा गई पुतिन के सेना?
तीन साल से लंबे चले युद्ध के बाद रूसी सेना के मनोबल में भारी कमी आई है. युद्ध की शुरुआत में लग रहा था कि यूक्रेन को रूस आसानी से हरा लेगा, लेकिन यूक्रेन ने रूस का डट के सामना किया है और अभी तक हार नहीं मानी है. कई खबरों में बताया गया है कि रूस के सैनिक बीमारी या कोई और बहाना लेकर मैदान छोड़ कर भाग रहे हैं. वहीं रूसी सैनिकों में डिप्रेशन की समस्या भी काफी बढ़ गई है. ऐसे में माना जा रहा है कि रूस किराए के सैनिकों पर निर्भर हो गया है और इन्हें दुनिया भर से रिक्रूट कर रहा है.
उत्तर कोरिया के साथ सौदा
रूस ने उत्तर कोरिया के साथ रक्षा डील की है और उत्तर कोरिया ने खुले तौर पर रूस में अपने सैनिकों को भेजा. जो यूक्रेन सेना के खिलाफ लड़ रहे हैं. किराए के सैनिकों का बार-बार सामने आना रूस जैसे बड़े देश के लिए शर्म का पल है, क्योंकि रूस अपने आपको अमेरिका की टक्कर का मानते हैं और उसके सैनिक यूक्रेन जैसे देश के सामने टिक नहीं पा रहे हैं.
अमेरिका और ईरान के बीच ओमान में परमाणु प्रोग्राम पर अहम बैठक शनिवार को
10 Apr, 2025 10:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका और ईरान शनिवार को ओमान में एक दूसरे के साथ न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बैठक करने जा रहे हैं. ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में अमेरिका को परमाणु डील से बाहर कर लिया था, जिसके बाद से ईरान और अमेरिका में तनाव बढ़ गया था और अब ये तनाव अपने चरम पर है. डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि ईरान परमाणु प्रोग्राम को लेकर डील करे, जिसमें उसको परमाणु बम बनाने से रोका जा सके.
ट्रंप पहले ही धमकी दे चुके हैं कि अगर ईरान डील नहीं करता, तो उसके परिणाम भुगतने होंगे. बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सैन्य कार्रवाई ‘बिल्कुल’ परमाणु समझौते का विकल्प होगी और शनिवार को शुरू होने वाली वार्ता विफल होने पर इजराइल किसी भी हमले का नेतृत्व करेगा. यानी कि ये साफ हो गया है कि अमेरिका से डील न होने पर इजराइल ईरान पर बड़ा हमला कर सकता है.
ओमान में होने वाली वार्ता का जिक्र करते हुए उन्होंने व्हाइट हाउस में मीडिया से कहा, यह एक शुरुआत है, हमारे पास थोड़ा समय है, लेकिन हमारे पास ज्यादा समय नहीं है क्योंकि हम उन्हें परमाणु हथियार नहीं रखने देंगे.
ट्रंप ने ईरान के सामने रखी मांग
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, तेहरान एक कठिन परिस्थिति में है, लेकिन वे समझते हैं और मैं ज्यादा कुछ नहीं मांग रहा हूं. उनके पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते. उन्होंने साफ किया कि अगर ईरान सैन्य लड़ाई चाहता है, तो हम तैयार हैं. ट्रंप ने कहा, “जाहिर है कि इजराइल इसमें बहुत अधिक शामिल होगा, वह इसका नेता होगा. लेकिन कोई भी हमारा नेतृत्व नहीं करता, हम वही करते हैं जो हम करना चाहते हैं.
ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश
ट्रंप का ये बयान शनिवार को ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सीधी वार्ता से कुछ दिन पहले आया है. उन्होंने सोमवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ संयुक्त रूप से कहा था, “हम ईरान के साथ सीधी वार्ता कर रहे हैं. वे शुरू हो चुकी है और शनिवार को शुरू होगी. शायद कोई समझौता हो जाए.” जानकार वार्ता से पहले ट्रंप के इस बयान को ईरान पर दबाव बनाने के लिए दिया गया बयान मान रहे हैं. लेकिन ये साफ हो गया है इस वार्ता पर इजराइल की पैनी नजर रहने वाली है.
घिबली ट्रेंड सोशल मीडिया पर छाया, प्राइवेसी को हो सकता है खतरा, एसपी ने दी चेतावनी!
9 Apr, 2025 06:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
एसपी राजेश कालिया ने कहा कि हाल ही में सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड छाया हुआ है घिबली स्टाइल इमेज। लोग अपनी पर्सनल फोटो को चैट जीपीटी और अन्य प्लेटफार्म पर अपलोड कर घिबली एनीमेशन जैसी इमेज बना रहे हैं। यह खतरनाक है। एसपी ने कहा कि यह ट्रेंड सेलिब्रिटी से लेकर आम लोगों तक सभी में लोकप्रिय है, लेकिन वह नहीं जानते हैं कि यह ट्रेंड उनकी प्राइवेसी के लिए खतरा बन सकता है।
सावधानी रखें एआई स्कैम से बचकर रहें
इस संदर्भ में एडवाइजरी जारी करते हुए एसपी ने बताया कि साइबर एक्सपर्ट का मानना है कि ओपन एआइ जैसी कंपनियां, इन फोटो का उपयोग एआइ ट्रेनिंग के लिए कर सकती हैं और बिना आपकी सहमति के ये फोटोज डेटा ब्रोकर के जरिए साइबर फ्रॉड करने वाले अपराधियों के हाथों में पहुंच सकती हैं। साइबर अपराधी इन फोटो का गलत इस्तेमाल कर आपको ब्लैकमेल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे टेक्नालाजी अपना रूप बदल रही है वैसे-वैसे साइबर अपराधी ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। नागरिक सावधानी रखकर एआइ स्कैम से बच सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले तक जालसाज लिंक भेजकर, फर्जी वेबसाइट बनाकर आनलाइन जालसाजी करते थे, लेकिन अब फ्रॉड के लिए एआइ तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के जरिए साइबर अपराधी लोगों की आवाज को भी कॉपी कर साइबर फ्राड को अंजाम दे रहे हैं। फोटो के जरिए आपका नकली वीडियो बनाकर ब्लैकमेल कर पैसों की डिमांड की जा रही है।
अनजान नंबर से कॉल आए तो हो जाएं सतर्क
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से नामी लोगों के डीप फेक वीडियो के कई मामले सामने आ चुके हैं। यदि किसी अनजान नंबर से आपके पास कॉल या वीडियो कॉल आया है और उसमें आपके पहचान वाले व्यक्ति की आवाज सुनाई दे रही है या उसका वीडियो दिख रहा है तो उसकी बातों में आने के बजाय उसकी पड़ताल करें और उसके असली नंबर पर संपर्क करें। ऐसा करके आप खुद को स्कैम से बचा पाएंगे। आधुनिकता की इस युग में सावधानी व सतर्कता ही साइबर अपराधियों से बचने का बेहतर उपाय है।
क्या है घिबली
घिबली एक एआई टूल है। चेट जीपीटी के जरिए लोग अपने सिंपल फोटोज को घिबली स्टाइल (एनिमेशन) में बदल रहे हैं। यह आजकल ट्रेंड में बना हुआ है। घिबली एक जापानी एनिमेशन स्टूडियो है, जिसके नाम पर यह ट्रेंड चल रहा है।
कैथल: अजीमगढ़ चौकी के पास ब्लास्ट की धमकी देने वाले दो आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने किया केस दर्ज!
9 Apr, 2025 06:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा के कैथल जिले के अजीमगढ़ चौकी के पास ब्लास्ट करने की बात कह कर दहशत पैदा करने के मामले को लेकर पुलिस ने मन्नू अगवान व पचियागोपी नवासरिया के खिलाफ केस दर्ज किया है। इस मामले को लेकर पुलिस जांच कर रही है। अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
बब्बर खालसा ग्रुप ने सोशल मीडिया पर डाली थी पोस्ट
बता दें कि छह अप्रैल को सोशल मीडिया पर बब्बर खालसा ग्रुप की तरफ से एक पोस्ट डाली गई थी। इसमें लिखा था कि सुबह करीब 4 बजे जीनगढ़ चौकी (हरियाणा) में जो ग्रेनेड हमला हुआ है, उसकी जिम्मेदारी मैं लेता हूं। चौकी का नाम जीनगढ़ लिखा गया था। इस पोस्ट के बाद हरियाणा सहित पंजाब पुलिस सतर्क हो गई थी।
बाद में पता चला कि जीनगढ़ नहीं अजीमगढ़ चौकी हो सकती है, जो गुहला हलके में पंजाब बॉर्डर पर लगती है। उस समय जांच के बाद पुलिस ने इस पोस्ट को मात्र अफवाह बताया था और कहा था कि चौकी या चौकी के आसपास कोई ऐसा हमला नहीं हुआ है। हालांकि, उसी दिन से इस मामले की जांच में पंजाब पुलिस के साथ-साथ हरियाणा पुलिस लगी हुई है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई।
दो आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने दर्ज किया केस
अब इस मामले में चौकी इंचार्ज सब इंस्पेक्टर दलबीर सिंह की शिकायत पर गुहला थाने में मन्नू अगवान व पचियागोपी नवासरिया के खिलाफ केस दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि इन लोगों ने ही सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर हमले की जिम्मेदारी ली थी।
लगातार अजीमगढ़ चौकी पर एसपी राजेश कालिया सहित पुलिस के उच्चाधिकारियों का आना-जाना लगा हुआ है। बताया जा रहा है कि जहां पर ब्लास्ट होने की बात कही जा रही है, वहां से मिट्टी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है। जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि जिस जगह विस्फोट होने की बात कही गई थी, वह कौनसा ज्वलनशील पदार्थ था?
अजीमगढ़ चौकी के पास ब्लास्ट करने के आरोप में मन्नू अगवान व पचियागोपी नवासरिया के खिलाफ केस दर्ज किया है। इस मामले में कैथल पुलिस सहित पंजाब पुलिस भी मामले में जांच कर रही है।
डीएसपी, सुशील प्रकाश
ऊर्जा मंत्री विज ने थर्मल प्लांट का किया निरीक्षण, बिजली उत्पादन के बारे में की समीक्षा
9 Apr, 2025 04:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ऊर्जा मंत्री अनिल विज बुधवार को दीन बंधू छोटूराम थर्मल प्लांट का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। बाद में, चीफ इंजीनियर रमन सोबती ने मंत्री को थर्मल प्लांट का विस्तृत निरीक्षण कराया और उन्हें प्लांट की कार्यप्रणाली तथा तकनीकी जानकारी दी।
मंत्री अनिल विज ने प्लांट में लगे उपकरणों और मशीनों का बारीकी से मुआयना किया और उनके संचालन की प्रक्रिया को समझा। रमन सोबती ने मंत्री को यह भी बताया कि प्लांट में किस प्रकार बिजली का उत्पादन किया जाता है। इसके साथ ही, विज ने 7272 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित होने वाली नई 800 मेगावाट अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल यूनिट के निर्माण स्थल का भी निरीक्षण किया।
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