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अमेरिका के न्यू ऑर्लियंस में आईएसआईएस के आतंकी ने किया हमला
2 Jan, 2025 12:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के न्यू ऑर्लियंस में नए साल के पहले दिन हुए आतंकी हमले ने अमेरिका को हिला कर रख दिया. टेक्सास के रहने वाले 42 साल के शम्सुद्दीन जब्बार ने एक तेज़ स्पीड वाले पिकअप ट्रक से भीड़ को कुचल दिया. ये एक आईएसआईएस (ISIS) समर्थक था. इस हमले में 15 लोग मारे गए और 35 से ज्यादा लोग बुरी तरह से घायल हो गए. घटना के बाद पुलिस ने जब्बार को मार गिराया. एफबीआई ने उसकी कार से आईएसआईएस का झंडा और विस्फोटक बरामद किया.
इस हमले के ठीक बाद, लास वेगास में ट्रंप होटल के सामने एक टेस्ला साइबरट्रक में विस्फोट हुआ. राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि दोनों घटनाओं के बीच संभावित कनेक्शन की जांच की जा रही है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में अभी कुछ भी ठोस जानकारी नहीं है. डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति पद के शपथ लेने से ठीक पहले ट्रम्प टावर के सामने ट्रम्प के सहयोगी एलोन मस्क की टेस्ला कार में विस्फोटक से हमले ने आने वाले समय को लेकर आम अमेरिकियों को डरा दिया है.
जब्बार ह्यूस्टन की मस्जिद बिलाल में जाया करता था. इस मस्जिद ने अपने सदस्यों को निर्देश दिया है कि वे एफबीआई या मीडिया से बात न करें. इसके बजाय, उन्हें सीएआईआर और इस्लामिक सोसाइटी ऑफ ग्रेटर ह्यूस्टन (ISGH) से संपर्क करने को कहा गया है. मस्जिद प्रबंधन ने अपने बयान में कहा कि यह समय एकजुट रहने और इस तरह के गंदे कामों की निंदा करने का है. इस घटना के बाद अमेरिका में रहने वाले मुस्लिमों को भी यह चिंता सता रही है कि 9/11 हमले के बाद जैसा माहौल फिर ना शुरू हो जाए और निर्दोष लोगों को उसका शिकार होना पड़े. ट्रम्प समर्थकों ने न्यू ऑर्लियंस की घटना को राजनैतिक रंग देना शुरू भी कर दिया है.
एफबीआई की आगे की जांच की दिशा
एफबीआई को शक है कि जब्बार इस हमले के लिए अकेला जिम्मेदार नहीं था. उसके चार और सहयोगियों की तलाश की जा रही है. न्यू ऑर्लियंस के इस हमले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आईएसआईएस ने अमेरिका में नई रणनीति के तहत हमला किया है.
आईएसआईएस और अमेरिका के रिश्तों पर सवाल
एक और चिंताजनक पहलू यह है कि सीरिया में आईएसआईएस से जुड़े संगठन एचटीएस (HTS) को सत्ता दिलाने में अमेरिका ने मदद की है. अब आईएसआईएस के विचारधारा से प्रभावित लोग अमेरिकी जमीन पर आतंकी हमलों को अंजाम दे रहे हैं. अगर ISIS की अमेरिका में पैठ मजबूत हुई तो अमेरिका को आने वाले समय में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
संत चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई पर कोर्ट ने सुनवाई के बाद दिया फैसला
2 Jan, 2025 12:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका (बांग्लादेश)। चटगाँव की एक अदालत ने आज कड़ी सुरक्षा के बीच हुई सुनवाई के बाद पूर्व इस्कॉन नेता चिन्मय कृष्ण दास को जमानत देने से इनकार कर दिया। इसकी जानकारी रिपोर्ट में दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के लगभग 30 मिनट बाद चटगाँव मेट्रोपॉलिटन सेशन जज मोहम्मद सैफुल इस्लाम ने जमानत याचिका खारिज कर दी।
अधिवक्ता अपूर्व कुमार भट्टाचार्य के नेतृत्व में कानूनी टीम बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने के आरोप से उत्पन्न राजद्रोह के मामले में चिन्मय का बचाव करेगी।
बात करते हुए वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने कहा, हम ऐनजीबी ओइक्या परिषद के बैनर तले चटगाँव आए हैं और हम चिन्मय की जमानत के लिए अदालत में पैरवी करेंगे। मुझे चिन्मय से वकालतनामा पहले ही मिल चुका है। मैं सुप्रीम कोर्ट और चटगाँव बार एसोसिएशन दोनों का सदस्य हूँ, इसलिए मुझे केस चलाने के लिए किसी स्थानीय वकील की अनुमति की जरूरत नहीं है।
इससे पहले 3 दिसंबर 2024 को चटगांव अदालत ने जमानत पर सुनवाई के लिए 2 जनवरी की तारीख तय की थी क्योंकि अभियोजन पक्ष ने समय याचिका प्रस्तुत की थी और चिन्मय का प्रतिनिधित्व करने के लिए कोई वकील नहीं था।
बांग्लादेश में अशांति की शुरुआत चिन्मॉय कृष्ण दास के खिलाफ दर्ज किए गए राजद्रोह के आरोपों से हुई है, जिन पर 25 अक्टूबर को चटगांव में बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर भगवा झंडा फहराने का आरोप है।
25 नवंबर को उनकी गिरफ्तारी से विरोध प्रदर्शन भड़क उठे, जिसके कारण 27 नवंबर को चटगाँव न्यायालय भवन के बाहर उनके अनुयायियों और कानून प्रवर्तन अधिकारियों के बीच हिंसक झड़पों के रूप में हुई, जिसके परिणामस्वरूप एक वकील की मौत हो गई।
अतिरिक्त गिरफ़्तारियों के बाद स्थिति और भी खराब हो गई। इस्कॉन कोलकाता के अनुसार, दो साधुओं, आदिपुरुष श्याम दास और रंगनाथ दास ब्रह्मचारी को 29 नवंबर को हिरासत में लिया गया, जब वे हिरासत में चिन्मय कृष्ण दास से मिलने गए थे। संगठन के उपाध्यक्ष राधा रमन ने यह भी दावा किया कि दंगाइयों ने अशांति के दौरान बांग्लादेश में इस्कॉन केंद्र में तोड़फोड़ की।
विदेश मंत्रालय ने भी बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा और चरमपंथी बयानबाजी पर चिंता व्यक्त की थी और इस बात पर जोर दिया था कि उसने ढाका के साथ अल्पसंख्यकों पर लक्षित हमलों के मुद्दे को लगातार उठाया है।
दिसंबर 2024 में बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीना सीकरी ने चिन्मय कृष्ण दास के बारे में एक खुला पत्र लिखा था। पत्र में कहा गया था, पूर्व में विश्व प्रसिद्ध इस्कॉन के साथ जुड़े चिन्मय कृष्ण दास ने सनातनी जागरण जोत में अपने सहयोगियों के साथ बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों की ओर से 8 सूत्री मांग रखी थी, जिसमें बांग्लादेश में अल्पसंख्यक संरक्षण कानून बनाने, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए एक मंत्रालय, अल्पसंख्यक उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष न्यायाधिकरण, जिसमें पीड़ितों के लिए मुआवजा और पुनर्वास शामिल है, मंदिरों को पुनः प्राप्त करने और उनकी सुरक्षा के लिए एक कानून (देबोत्तर), निहित संपत्ति वापसी अधिनियम का उचित प्रवर्तन और मौजूदा (अलग) हिंदू, बौद्ध और ईसाई कल्याण ट्रस्टों को फाउंडेशन में अपग्रेड करने की मांग की गई थी।
हमास-इजरायल युद्ध का असर: गाजा की आबादी में छह फीसदी की गिरावट
2 Jan, 2025 12:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अक्टूबर 2023 से हमास-इजरायल के बीच युद्ध चल रहा है। इसका खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ा है। वहीं, रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में गाजा की आबादी में छह फीसदी की गिरावट आई और लगभग 160,000 लोग कम हुए। हमास के खिलाफ इजरायल के युद्ध ने फिलिस्तीनी एन्क्लेव की जनसांख्यिकी पर भारी असर डाला है।
गाजा पट्टी में इजरायली हमलों में 45,553 लोग मारे गए
फलस्तीनी केंद्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (पीसीबीएस) ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि सात अक्टूबर, 2023 को युद्ध की शुरुआत के बाद से लगभग 100,000 फिलिस्तीनियों ने गाजा छोड़ दिया, इसके अलावा गाजा पट्टी में इजरायली हमलों में कम से कम 45,553 लोग मारे गए थे।
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल की कमी के कारण गाजा में 60,000 गर्भवती महिलाएं खतरे में रहीं और 96 फीसदी आबादी उच्च स्तर की खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गाजा की आबादी अब 2.1 मिलियन है, जिसमें 18 वर्ष से कम उम्र के दस लाख से अधिक बच्चे शामिल हैं, जो आबादी का 47 फीसदी है।
इस बीच, इजरायल के केंद्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (सीबीएस) की एक अलग रिपोर्ट में पाया गया कि इजरायल की जनसंख्या अभी भी बढ़ रही है लेकिन पहले की तुलना में अधिक धीरे-धीरे, यह इसलिए हो रहा है क्योंकि बड़ी संख्या में इजरायलियों ने देश छोड़ दिया। मंगलवार को प्रकाशित रिपोर्ट में, जनगणना कार्यालय ने कहा कि 2024 में इजरायल की जनसंख्या 1.1 फीसदी बढ़ी, जबकि 2023 में 1.6 फीसदी बढ़ी।
साल के पहले दिन गाजा पर हमला
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, उत्तरी गाजा के जबालिया इलाके में एक घर पर हवाई हमले में एक महिला और चार बच्चों समेत सात लोग मारे गए। एक दर्जन के करीब घायल हुए हैं। मध्य गाजा में रात के दौरान बुरेइज शरणार्थी शिविर में किए गए हमले में एक महिला और एक बच्चे की जान गई। जबकि बुधवार तड़के दक्षिणी शहर खान यूनुस में किए गए हवाई हमले में तीन लोग मारे गए।
बता दें कि सात अक्टूबर, 2023 को हमास ने इजरायल में बड़े पैमाने पर हमला किया था, जिसमें करीब 1200 लोग मारे गए थे। इसके बाद से ही इजरायल ने हमास के सफाए के लिए सैन्य अभियान चला रखा है। इसमें अब तक 45 हजार से ज्यादा फलस्तीनी मारे गए हैं।
इस यूरोपीय देश में बढ़ सकती हैं मुस्लिम महिलाओं की मुश्किलें, नए साल पर लागू हुआ बुर्का बैन
1 Jan, 2025 07:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
स्विट्जरलैंड: स्विट्जरलैंड में बुधवार यानी 1 जनवरी 2025 से बुर्का बैन लागू हो गया है। इस नए कानून के तहत सार्वजनिक जगहों पर चेहरा ढकना प्रतिबंधित होगा, वहीं इस नियम का उल्लंघन करने पर एक हजार स्विस फ्रैंक (करीब 96 हजार रुपये) तक का जुर्माना लग सकता है। स्विट्जरलैंड में 2021 में हुए जनमत संग्रह में पारित इस प्रतिबंध की मुस्लिम संगठनों ने आलोचना की थी। खास बात यह है कि बुर्का पर प्रतिबंध का प्रावधान उसी समूह ने पेश किया था जिसने 2009 में देश में नई मीनारों के निर्माण पर रोक लगाई थी।
बुर्का बैन को लेकर हुआ था जनमत संग्रह
2021 में हुए जनमत संग्रह के दौरान स्विट्जरलैंड की 51.21 फीसदी जनता ने इस प्रतिबंध के समर्थन में वोट दिया था। दक्षिणपंथी स्विस पीपुल्स पार्टी ने देश में बुर्का बैन का प्रस्ताव रखते हुए तर्क दिया था कि इससे देश के सांस्कृतिक मूल्यों और सार्वजनिक सुरक्षा की रक्षा होगी। इसके बाद साल 2022 में देश की नेशनल काउंसिल ने इस कानून को मंजूरी दे दी। जिसके अनुसार, सार्वजनिक स्थानों, कार्यालयों, दुकानों और रेस्तरां में महिलाओं के चेहरे को पूरी तरह से ढकने पर प्रतिबंध रहेगा।
बुर्का बैन को लेकर जनमत संग्रह हुआ था
2021 में हुए जनमत संग्रह के दौरान स्विट्जरलैंड के 51.21 प्रतिशत लोगों ने इस प्रतिबंध के समर्थन में मतदान किया था। दक्षिणपंथी स्विस पीपुल्स पार्टी ने देश में बुर्का प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा था, जिसमें तर्क दिया गया था कि इससे देश के सांस्कृतिक मूल्यों और सार्वजनिक सुरक्षा की रक्षा होगी। इसके बाद साल 2022 में देश की राष्ट्रीय परिषद ने इस कानून को मंजूरी दे दी। जिसके अनुसार, सार्वजनिक स्थानों, कार्यालयों, दुकानों और रेस्तरां में महिलाओं के चेहरे को पूरी तरह से ढकने पर प्रतिबंध रहेगा।
किस-किस जगह बुर्का बैन में छूट है?
रॉयटर्स के अनुसार, स्विस सरकार ने बुर्का प्रतिबंध को लेकर स्पष्ट किया है कि चेहरा ढकने पर प्रतिबंध हवाई जहाज या राजनयिक और वाणिज्य दूतावास परिसर में लागू नहीं होगा। इसके अलावा धार्मिक स्थलों और अन्य पवित्र स्थानों पर भी व्यक्ति को चेहरा ढकने की अनुमति होगी।
सरकार ने यह भी कहा है कि स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों, पारंपरिक रीति-रिवाजों या मौसम की स्थिति के कारण चेहरा ढंकने की अनुमति दी जाएगी। उन्हें कलात्मक या मनोरंजन के साथ-साथ विज्ञापन उद्देश्यों के लिए भी यह मंजूरी दी जाएगी। बेल्जियम और फ्रांस में भी बुर्का प्रतिबंध लागू: सितंबर 2022 में स्विट्जरलैंड की संसद के निचले सदन ने कुछ मुस्लिम महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले बुर्का जैसे चेहरा ढंकने वाले कपड़ों पर प्रतिबंध लगाने के लिए मतदान किया था। राष्ट्रीय परिषद ने 29 मतों के मुकाबले 151 मतों से इस कानून को मंजूरी दी थी।
कई मुस्लिम संगठनों की आपत्तियों के बावजूद दक्षिणपंथी स्विस पीपुल्स पार्टी ने इस कानून को आगे बढ़ाया था। स्विट्जरलैंड ऐसा करने वाला पहला देश नहीं है, बल्कि यूरोप के बेल्जियम, डेनमार्क और फ्रांस जैसे देशों ने भी इसी तरह के प्रतिबंध लागू किए हैं। हालांकि, इन यूरोपीय देशों में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं। आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा के नाम पर बनाए गए इन कानूनों के जरिए मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है।
पाकिस्तान में आतंकी हमला, नए साल के पहले दिन दहला, 3 की मौत; 11 घायल
1 Jan, 2025 06:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पेशावर। पाकिस्तान के अशांत उत्तर-पश्चिम में बुधवार को तीन अलग-अलग आतंकी घटनाओं में एक बच्चे समेत कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए। पुलिस ने बताया कि रात करीब एक बजे खैबर पख्तूनख्वा के डेरा इस्माइल खान जिले के दरबन इलाके में आतंकियों ने एक पुलिस चौकी पर हमला किया, जिसमें एक पुलिस कांस्टेबल और एक मजदूर की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए।
यहां भी हुए आतंकी हमले
पुलिस ने बताया कि दूसरी घटना दक्षिण वजीरिस्तान जिले के आजम वारसाक इलाके में हुई, जहां मोटरसाइकिल में रखे बम के फटने से एक बच्चे की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक एक और घटना बन्नू जिले के मामाखेल इलाके में हुई, जहां सड़क किनारे बम फटने से कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए।
क्या कहते हैं आंकड़े
इससे पहले सोमवार को जारी एक आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा बलों ने 2024 में 270 आतंकियों को मार गिराया, जिनमें इनाम वाले बड़े आतंकी भी शामिल हैं। प्रांतीय सूचना निदेशालय द्वारा जारी पुलिस विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, प्रांतीय पुलिस ने ऑपरेशन के दौरान 802 संदिग्धों को गिरफ्तार किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल ड्यूटी के दौरान 149 पुलिस अधिकारी मारे गए और 232 घायल हुए।
अमेरिका: नए साल का जश्न मना रहे थे लोग, एक शख्स ने उन पर ट्रक चढ़ा दिया और अंधाधुंध फायरिंग की, 10 की मौत
1 Jan, 2025 06:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यू ऑरलियन्स: दक्षिणी अमेरिकी शहर न्यू ऑरलियन्स में एक भीषण हादसा हुआ है। नए साल के पहले दिन एक तेज रफ्तार पिकअप ट्रक ने भीड़ को टक्कर मार दी। इस हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक लुइसियाना शहर के मशहूर पर्यटन स्थल फ्रेंच क्वार्टर के बॉर्बन स्ट्रीट पर भारी भीड़ जमा थी। इसी दौरान वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि चालक भीड़ में ट्रक से उतरा और फायरिंग शुरू कर दी। यह घटना सुबह करीब 3.15 बजे हुई।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि जब पिकअप ने बॉर्बन स्ट्रीट के चौराहे पर भीड़ को टक्कर मारी, तब लोग नए साल का जश्न मना रहे थे। न्यू ऑरलियन्स के पुलिस प्रवक्ता ने सीबीएस न्यूज को बताया कि शुरुआती रिपोर्ट से पता चला है कि कार ने लोगों के एक समूह को टक्कर मारी होगी। घायलों की संख्या का पता नहीं चल पाया है लेकिन कुछ लोगों के मारे जाने की खबर है। लोगों को कैनाल और बॉर्बन स्ट्रीट के इलाके से दूर रहने को कहा गया है, जहां यह घटना हुई।
पुलिस ने लोगों से की अपील
प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और कई सोशल मीडिया पोस्ट से पता चला है कि हादसा बेहद भयानक था। हादसे के बाद कई वीडियो फुटेज और तस्वीरें भी सामने आई हैं। इनमें चौराहे के आसपास पुलिस की गाड़ियां और एंबुलेंस खड़ी नजर आईं। अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। पुलिस ने लोगों से फिलहाल इस इलाके में यात्रा करने से बचने को कहा है।
इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई
ऑरलियन्स में हादसे के बाद हुई फायरिंग की घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अधिकारी जांच कर रहे हैं। ट्रक ड्राइवर को पकड़ने के लिए ऑपरेशन चलाया जा रहा है। फिलहाल ऑर्लियन्स में आपातकाल जैसे हालात बन गए हैं।
क्या शेख हसीना की पार्टी बांग्लादेश में चुनाव लड़ेगी? जानिए मुख्य चुनाव आयुक्त ने क्या कहा
1 Jan, 2025 06:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका: बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नसीरुद्दीन ने बड़ी बात कही है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा है कि अगर सरकार या न्यायपालिका अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध नहीं लगाती है, तो पार्टी चुनाव लड़ सकती है। समाचार पत्र 'ढाका ट्रिब्यून' की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ने चटगांव सर्किट हाउस में चुनाव अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान यह बात कही।
'चुनाव आयोग स्वतंत्र है'
नसीरुद्दीन ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग पूरी तरह स्वतंत्र है और उस पर कोई बाहरी दबाव नहीं है। उन्होंने कहा, "हम निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" बांग्लादेश में हुए पिछले कुछ चुनावों में मतदान में भारी गिरावट आई है। पिछले चुनावों में मुख्य विपक्षी दलों ने धांधली का आरोप लगाते हुए चुनाव का बहिष्कार किया था।
वोटर लिस्ट अपडेट की जाएगी
सीईसी ने पिछले चुनावों में फर्जी मतदाताओं के मुद्दे को भी स्वीकार किया और मतदाता पंजीकरण में गिरावट के लिए मतदान प्रक्रिया में अविश्वास को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा है कि मतदाता सूची को जल्द ही अपडेट किया जाएगा। उन्होंने कहा, "मतदाता सूची को अगले छह महीनों में अपडेट किया जाएगा। इस बार चुनाव पिछली बार की तरह नहीं होंगे। 5 अगस्त के बाद से चुनावी मामलों पर राष्ट्रीय सहमति बनाने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।"
रूस की गैस अब यूक्रेन के रास्ते यूरोप तक नहीं पहुंच सकेगी, क्या होगा यूरोप का?
1 Jan, 2025 06:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूरोप में 1 जनवरी 2025 से एक ऐतिहासिक बदलाव आने वाला है। दरअसल, यूक्रेन के रास्ते गैस की आपूर्ति पूरी तरह से बंद हो गई है। यह घटना रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच हुई है, जो 2025 में तीन साल का हो जाएगा। इस एक बदलाव से यूरोप के ऊर्जा संकट पर गहरा असर पड़ सकता है। दशकों तक रूस से यूक्रेन के रास्ते यूरोप तक गैस पहुंचाने वाली इस पाइपलाइन को ऊर्जा के क्षेत्र में परस्पर निर्भरता का प्रतीक माना जाता था। लेकिन अब इस पाइपलाइन के बंद होने से रूस, यूक्रेन और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों में बड़े बदलाव का संकेत मिलता है, जिसका असर ऊर्जा नीतियों, राजनीतिक खींचतान और भविष्य की रणनीतियों पर पड़ेगा। आइए जानते हैं इसका इतिहास और इससे निपटने के लिए यूरोप कितना तैयार है?
समझौते का खत्म होना और पाइपलाइन का बंद होना
कई दशकों तक यूरोप रूसी गैस पर निर्भर था, जो यूक्रेन के रास्ते यूरोपीय देशों तक पहुंचती थी। इस रास्ते से यूरोप की करीब 35% गैस की जरूरतें पूरी होती थीं, जिससे रूस को अरबों डॉलर की कमाई होती थी और यूक्रेन को ट्रांजिट फीस के रूप में आर्थिक लाभ मिलता था। लेकिन फिर 2014 में रूस द्वारा क्रीमिया पर कब्ज़ा करने के बाद संबंधों में तनाव शुरू हो गया। फिर फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण करने के बाद, यूरोप को रूस की आपूर्ति कम हो गई, जिससे यूरोपीय संघ को रूसी गैस पर अपनी निर्भरता कम करनी पड़ी। मॉस्को ने अपनी यूरोपीय गैस बाजार हिस्सेदारी बनाने में आधी सदी बिताई, जो अपने चरम पर लगभग 35% थी, लेकिन गिरकर लगभग 8% हो गई है।
रूस और यूक्रेन के बीच पांच साल का गैस ट्रांजिट समझौता 2019 में समाप्त हो गया, और यूक्रेन ने इसे बढ़ाने से इनकार कर दिया। 31 दिसंबर 2024 को, यूक्रेनी गैस ट्रांजिट ऑपरेटर ने घोषणा की कि 1 जनवरी 2025 तक कोई गैस प्रवाह का अनुरोध नहीं किया गया था। इसका मतलब है कि यूक्रेन के माध्यम से गैस की आपूर्ति पूरी तरह से बंद हो गई है।
यूरोप की बैकअप योजना क्या है?
जब 2 साल पहले रूस-यूक्रेन की शुरुआत हुई थी, तब यूरोप रूस से गैस खरीदना जारी रखता था, जिसके लिए उसे आलोचना का भी सामना करना पड़ा था। इसके बाद, यूरोपीय संघ ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कई वैकल्पिक उपाय अपनाए। यूरोपीय आयोग ने ऊर्जा क्षेत्र में सुधार, विस्तार और गैस बुनियादी ढांचे को लचीला बनाने की दिशा में कदम उठाए।
यूरोपीय आयोग ने कहा है कि अगर रूस गैस की आपूर्ति बंद कर देता है, तो कोई तनाव नहीं है। रूस से आने वाली गैस की कमी को दूसरे देशों से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और पाइपलाइन के ज़रिए गैस आयात करके पूरी तरह से पूरा किया जा सकता है। कतर और अमेरिका से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात में वृद्धि की गई, साथ ही नॉर्वे से पाइप के ज़रिए गैस की आपूर्ति भी बढ़ाई गई।
यूरोपीय देशों ने गैस भंडारण को भरने की प्रक्रिया भी तेज़ कर दी, ताकि आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। यूरोपीय आयोग का कहना है कि यूरोप का गैस इंफ्रास्ट्रक्चर इतना मज़बूत है कि वह मध्य और पूर्वी यूरोप को गैर-रूसी गैस की आपूर्ति कर सकता है।
इस फ़ैसले पर कैसी प्रतिक्रिया रही?
पाइपलाइन बंद होने का बाज़ार पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। विशेषज्ञों के अनुसार, यूक्रेन के ज़रिए आपूर्ति की जा रही गैस की मात्रा बहुत कम थी- 2023 में सिर्फ़ 15 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस का आयात किया गया। इससे यूरोपीय गैस की कीमतों में ज़्यादा उछाल नहीं आया और 31 दिसंबर को गैस की कीमतें मामूली वृद्धि के साथ 48.50 यूरो प्रति मेगावाट घंटे पर बंद हुईं।
हालांकि, बाद में इसका असर गंभीर हो सकता है। भले ही यूरोप ने इस बदलाव के लिए खुद को तैयार कर लिया है, लेकिन आर्थिक दबाव अभी भी बना हुआ है। उच्च ऊर्जा लागत ने यूरोपीय उद्योगों को मुश्किल में डाल दिया है, खासकर उन देशों की तुलना में जो अमेरिका और चीन जैसे प्रतिस्पर्धी बाजारों में हैं। रूसी गैस आपूर्ति में कमी के कारण जर्मनी को 60 बिलियन यूरो का नुकसान हुआ है।
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