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अमेरिका-साउथ कोरिया की सैन्य ड्रिल पर भड़का उत्तर कोरिया, दी जवाबी हमले की चेतावनी
17 Apr, 2025 01:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सियोल: अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास के लेकर उत्तर कोरिया भड़का हुआ है। उत्तर कोरिया ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका की ओर से दक्षिण कोरिया में लंबी दूरी के बमवर्षक विमान उड़ाए गए, तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी। उत्तर कोरिया का मानना है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया इस प्रकार का सैन्य अभ्यास उस पर हमले की तैयारी के लिए करते हैं।
अमेरिकी सुरक्षा को होगा नुकसान
उत्तर कोरिया के रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने सरकारी मीडिया में जारी एक बयान में कहा, "अमेरिका और दक्षिण कोरिया का हालिया सैन्य कदम हमारे देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। यह एक गंभीर उकसावे की कार्रवाई है जो क्षेत्र में सैन्य तनाव को खतरनाक स्तर तक बढ़ाती है।" बयान में चेतावनी देते हुए कहा गया है कि इस कार्रवाई से अमेरिकी सुरक्षा को निश्चित रूप से नुकसान पहुंचेगा।
अमेरिकी और दक्षिण कोरिया ने किया सैन्य अभ्यास
बता दें कि, अमेरिकी और दक्षिण कोरिया के लड़ाकू विमानों ने मंगलवार को सैन्य अभ्यास किया था। अभ्यास के दौरान अमेरिका ने 'बी-1बी' बमवर्षक विमान उड़ाए थे। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि इस अभ्यास का मकसद उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ दोनों देशों की संयुक्त क्षमता का प्रदर्शन करना था।
क्या रहता है उत्तर कोरिया का रुख
गौरतलब है कि, अमेरिका और दक्षिण कोरिया नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यास करते रहे हैं। संयुक्त सैन्य अभ्यास को लेकर दोनों देशों का कहना है कि यह सुरक्षा के लिए हैं। भले ही अमेरिका और दक्षिण कोरिया की ओर से कुछ भी कहा जाता रहा हो। लेकिन, उत्तर कोरिया इसे आक्रमण के अभ्यास के तौर पर देखता है। इस बीच यहां यह भी बता दें कि, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश मिसाइल और हथियारों के निर्माण संबंधी उत्तर कोरिया के प्रयासों को क्षेत्र के लिए गंभीर खतरे के रूप में देखते हैं। वहीं, उत्तर कोरिया अपने परमाणु जखीरे को आधुनिक बनाने के लिए हथियारों का लगातार परीक्षण कर रहा है।
क्रेमलिन में पुतिन की भावुक मुलाकात, पूर्व बंदियों से की बातचीत
17 Apr, 2025 12:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार शाम को मॉस्को के क्रेमलिन में हमास ने जिन बंधकों को रिहा किया उन से मुलाकात की. इन तीनों रिहा हुए बंधकों से पुतिन ने बातचीत की. पुतिन ने रिहा की गई बंधक साशा ट्रूफ़ानोव से मुलाकात की, साथ ही उनकी मां एलेना ट्रूफ़ानोवा और साथी सपिर कोहेन, जो दोनों भी पूर्व बंदी हैं से बातचीत की.
पुतिन ने इस मुलाकात के दौरान पूर्व बंधकों को बताया, यह फैक्ट कि आप मुक्त होने में कामयाब रहे, यह इस वजह से है कि रूस के फिलिस्तीनी लोगों, उसके प्रतिनिधियों और कई तरह के संगठनों के साथ स्थिर और लॉन्ग टर्म संबंध हैं. साथ ही पुतिन ने कहा, हमें हमारे साथ सहयोग करने और इस मानवीय कार्य को अंजाम देने के लिए हमास के प्रति आभार व्यक्त करने की जरूरत है.
बंधकों ने बताया अपना दर्द
इस मौके पर पुतिन ने सभी बंधकों के रिहा होने की कामना की. रूसी राष्ट्रपति ने कहा, सभी लोग जो अभी भी उन्हीं परिस्थितियों में हैं जिनमें आप थे, जल्द हा हो जाएं. साशा ने राष्ट्रपति को बताया कि उन्हें गाजा में 498 दिनों तक हिरासत में रखा गया था. ट्रौफ़ानोव और कोहेन को 7 अक्टूबर, 2023 को साशा की मां और दादी इरेना ताती के साथ किबुत्ज़ नीर ओज़ से फिलिस्तीनी आतंकवादियों ने बंधक बना लिया था, जबकि उनके पिता विटाली हमास के नेतृत्व वाले अत्याचारों के दौरान मारे गए थे. नवंबर 2023 के युद्धविराम के दौरान कैदी बनाई गई तीन महिलाओं को मुक्त कर दिया गया.
रूसी विदेश मंत्री ने हमास से की मुलाकात
इजरायली विदेश मंत्रालय के अनुसार, फरवरी में इस्लामिक जिहाद की कैद से ट्रौफानोव की रिहाई से कुछ दिन पहले, एक उप रूसी विदेश मंत्री ने मास्को में हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात की और फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह से दोहरे रूसी-इजरायल नागरिक ट्रौफानोव और यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र से वर्तमान इजरायली बंधक मैक्सिम हर्किन, जिनके रूसी रिश्तेदार हैं, को रिहा करने के “वादे” को निभाने का आग्रह किया था.
एफ-1 वीजा पर पढ़ाई कर रहे छात्र के पक्ष में आया अमेरिकी संघीय जज का फैसला
17 Apr, 2025 12:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के एक संघीय जज ने 21 वर्षीय भारतीय छात्र को राहत दी है। जज ने ट्रंप प्रशासन को छात्र को निर्वासित करने से अस्थायी रूप से रोक दिया है।
एफ-1 छात्र वीजा पर पढ़ाई कर रहा है छात्र
एफ-1 छात्र वीजा पर विस्कांसिन-मेडिसन यूनिवर्सिटी में 2021 से कंम्यूटर इंजीरियरिंग में स्नातक कर रहे कृष लाल इस्सरदासानी का वीजा रद कर दिया गया है। उसका वीजा ऐसे समय रद किया गया, जब स्नातक की पढ़ाई पूरी होने में महज कुछ सप्ताह ही बचे हैं।
अदालती दस्तावेज के अनुसार, कृष क्लास में उपस्थित रहता था और उसकी अकादमिक स्थिति भी अच्छी रही है। वह अंतिम सेमेस्टर में है और 10 मई तक स्नातक कोर्स खत्म होने की संभावना है।
कृष को खराब आचरण के कारण गिरफ्तार किया गया था
विस्कांसिन के जिला कोर्ट में दाखिल दस्तावेज में मंगलवार को बताया गया कि कृष ने स्वीकार किया है कि एक बार से देर रात दोस्तों के साथ घर लौटते समय रास्ते में कुछ लोगों के साथ बहस होने पर उसे 22 नवंबर, 2024 को गिरफ्तार किया गया था। कृष को खराब आचरण के कारण गिरफ्तार किया गया था, लेकिन मामले की समीक्षा के बाद डिस्टि्रक्ट अटार्नी ने आरोपों को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था।
मामला पूरी तरह सुलझ गया है
नतीजन उसे अदालत में पेश नहीं होना पड़ा और यह माना गया कि मामला पूरी तरह सुलझ गया है। हालांकि चार अप्रैल को विस्कांसिन-मेडिसन यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय छात्र सेवा (आइएसएस) कार्यालय ने उसे ईमेल के माध्यम से सूचित किया कि उसका स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर सिस्टम (सेविस) रिकॉर्ड समाप्त कर दिया गया है।
कोर्ट 28 अप्रैल को अगली सुनवाई करेगा
अदालती दस्तावेज में बताया गया कि कृष को वीजा रद किए जाने के बारे में अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन, यूनिवर्सिटी या विदेश विभाग की ओर से सूचना नहीं मिली। कृष के परिवार ने अमेरिका में उसकी पढ़ाई पर लगभग दो लाख 40 हजार डॉलर खर्च किए हैं। कोर्ट 28 अप्रैल को अगली सुनवाई करेगा।
एक भारतीय समेत चार छात्र पहुंचे कोर्ट
अमेरिका के मिशिगन की यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले एक भारतीय समेत चार छात्र देश से संभावित निर्वासन के खिलाफ कोर्ट पहुंचे हैं। भारत के चिन्मय देवरे समेत चार छात्रों ने अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग और आव्रजन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। इनका आरोप है कि पर्याप्त नोटिस और स्पष्टीकरण के बगैर उनका सेविस रिकार्ड समाप्त कर दिया गया है।
ढाका में 15 साल बाद पाक-बांग्लादेश के डिप्लोमैट्स आमने-सामने
17 Apr, 2025 12:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश की राजधानी ढाका के पॉश पद्मा स्टेट गेस्ट हाउस में एक ऐसी मुलाकात होने जा रही है, जिसने भारत की विदेश नीति से जुड़े हलकों में हलचल मचा दी है. लगभग 15 साल बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश के टॉप डिप्लोमैट्स आमना बलोच और एमडी जाशिमुद्दीन एक ही टेबल पर आमने-सामने बैठने वाले हैं.
ये मीटिंग ऐसे वक्त में होने जा रही है जब भारत बांग्लादेश के रिश्ते पहले जैसे मजबूत नहीं रहे हैं. दूसरी ओर पाकिस्तान की बांग्लादेश में इस तरह की कूटनीतिक एंट्री को कई सवालों की नजर से भी देखा जा रहा है.
विदेश स्तर की बातचीत 15 साल बाद
पाकिस्तानी विदेश सचिव आमना बलोच इस दौरान बांग्लादेश के विदेश सचिव जाशिमुद्दीन के साथ विदेश मंत्रालय स्तर की बातचीत यानी फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन (FOC) करेंगी. दोनों देशों के बीच आखिरी फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन की बैठक 2010 में हुई थी. इसके अलावा, वो बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन और मोहम्मद यूनुस से भी मुलाकात करेंगी. इस दौरे पर पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्तों को नई दिशा देने की तैयारी है. चर्चा है कि इस दौरे के बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार भी ढाका आ सकते हैं जो कि 2012 के बाद किसी पाकिस्तानी विदेश मंत्री का पहला बांग्लादेश दौरा होगा.
मीटिंग का ऐजेंडा क्या है?
इस बैठक का एजेंडा काफी दिलचस्प है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ढाका यूनिवर्सिटी में पाकिस्तानी छात्रों पर लगा बैन हटा दिया गया है, और वीजा नीतियों में भी ढील दी गई है. पाकिस्तान सीधी हवाई सेवा शुरू करने, व्यापारिक संपर्क बढ़ाने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठा रहा है. इससे ये तो साफ है कि इस बार पाकिस्तान की दिलचस्पी सिर्फ कूटनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि बांग्लादेश में अपनी खोई हुई पकड़ दोबारा पाने के इरादे से आया है.
भारत के लिए डिप्लोमैटिक अलार्म?
2024 में 15 साल से प्रधानमंत्री के पद पर बैठी शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश की सत्ता एक अंतरिम सरकार के हाथ में है. जिसके चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस पर पहले ही चीन के प्रति झुकाव और भारत को नजरअंदाज करने के आरोप लग चुके हैं. अब जब पाकिस्तान को भी वहां कूटनीतिक स्पेस मिलता दिख रहा है, तो यह भारत के लिए एक डिप्लोमैटिक अलार्म जैसा है. चीन के बाद अब पाकिस्तान को बांग्लादेश में तवज्जो मिलना इस बात का संकेत है कि दक्षिण एशिया की राजनीति में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं.
पीले सागर में चीन ने तैनात कीं 6 परमाणु पनडुब्बियां, बढ़ा तनाव
17 Apr, 2025 11:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ताइवान और जापान से टकराव के बीच चीन के असल मंसूबों का खुलासा हुआ है. गूगल मैप्स से ली गई तस्वीर के मुताबिक ताइवान और जापान को मिटाने के लिए चीन ने पीले सागर में 6 परमाणु पनडुब्बियों को तैनात किया है. इन पनडुब्बियों को बहुत ही घातक माना जाता है. कहा जा रहा है कि चीन एक ही झटके में ताइवान को नक्शे से मिटाने की कवायद में जुटा है.
गूगल मैप्स से जिन पनडुब्बियों की तस्वीर ली गई है, उनमें एक घातक टाइप 091 पनडुब्बी, दो 093A और एक अज्ञात पनडुब्बी शामिल है. चीन ने पीले सागर में एक 092 परमाणु उर्जा चलित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी को भी तैनात किया है.
चीन ने इन हथियारों की तैनाती कहां पर की है?
चीन ने इन हथियारों की तैनाती जापान और ताइवान के बीच में की है. चीन ने किंगदाओ पोर्ट से 18 किमी दूर पर पानी के नीचे इन पनडुब्बियों को तैनात किया है. चीन की तैयारी देखकर कहा जा रहा है कि ताइवान और जापान को एक ही झटके में मारने कान प्लान है.
चीन के विदेश मंत्री ने हाल ही में जापान को हिदायत दी थी. चीन ने कहा था कि जापान को हिरोशिमा नहीं भूलनी चाहिए. हम उससे भी ज्यादा दर्द दे सकते हैं. जापान लगातार चीन के खिलाफ मुखर है.
प्रशांत महासागर में 3 हजार किमी की घेराबंदी
चीन ने पूरे प्रशांत महासागर में 3 हजार किमी की घेराबंदी कर ली है. चीन पापुआ गिनी से लेकर समाओ तक अपने जंगी बेरे को तैनात कर दिया है. चीन की कोशिश अमेरिका और अन्य देशों से ताइवान और जापान युद्ध सामाग्री नहीं पहुंचने देने की है.
इसी मकसद से चीन ने बड़े जहाज समंदर में तैनात किए हैं. चीन का कहना है कि ताइवान और जापान अमेरिका के भरोसे बैठा है, जिसका उसे सीधा नुकसान उठाना पड़ेगा.
ताइवान और जापान के खिलाफ चीन मुखर क्यों?
चीन ताइवान को अपना अधीन मानता है, जब की वहां की सरकार ने उसे स्वतंत्र देश घोषित कर रखा है. ताइवान ने हाल ही में चीन के खिलाफ समंदर में मोर्चा खोल दिया था, जिसके बाद चीन ने ताइवान के इर्द-गिर्द अपना डेरा डाल दिया. दूसरी तरफ जापान लगातार ताइवान के संपर्क में है.
चीन का कहना है कि जापान ताइवान से दूरी बनाकर रखें. नहीं तो उसे भी नुकसान उठाना पड़ सकता है. ताइवान, चीन और जापान के बीच 1948 के बाद से ही तनाव के माहौल हैं.
ईरान पर मई में हमला करने वाला था इज़राइल, ट्रंप ने रोका
17 Apr, 2025 11:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इजराइल को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. बेंजामिन नेतन्याहू का ये मुल्क मई के महीने ईरान पर हमला करने वाला था. वो अमेरिका के साथ मिलकर इसे अंजाम देने वाला था. इजराइल का ये अटैक ईरान के न्यूक्लियर प्लांट पर होना था. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने आखिरी वक्त में इजराइल के प्रधानमंत्री को अटैक करने से रोक लिया.
8 अप्रैल को व्हाइट हाउस में ट्रंप ने नेतन्याहू से ईरान को एक मौका देने के लिए कहा. टैरिफ पर बातचीत के बहाने इजराइली पीएम ईरान पर हमले की हरी झंडी लेने के लिए अमेरिका गए थे. ट्रंप ने ईरान के साथ अमेरिका की बातचीत का नेतन्याहू को ऑफर दिया था. नेतन्याहू ने ट्रंप की बात मानते हुए लीबिया-स्टाइल में ईरान के साथ डील करने की शर्त रखी. शनिवार को ईरान और अमेरिका की बातचीत से 48 घंटे पहले ये खुलासा हुआ है.
रोम में होगी मुलाकात
ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शनिवार को ईरान के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे. ट्रंप ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से वाशिंगटन और तेहरान के बीच ओमान की मध्यस्थता की भूमिका के बारे में बात की थी. ट्रंप ने शनिवार को अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच होने वाली बैठक से पहले ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए मंगलवार को अपने शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा सहयोगियों के साथ मुलाकात की.
ईरान ने बुधवार को पुष्टि की कि ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता का दूसरा दौर रोम में आयोजित किया जाएगा. इससे पहले इस बात पर भ्रम था कि वार्ता कहां होगी. वार्ता की मध्यस्थता ओमान द्वारा की जाएगी. ओमान की राजधानी मस्कट में पहले दौर की वार्ता हो चुकी है.
ट्रंप ने दी है धमकी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार चेतावनी दी है कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाकर हवाई हमले करेंगे. ईरानी अधिकारी लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि वे अपने यूरेनियम भंडार को समृद्ध करके परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर सकते हैं.
अमेरिका का एक्शन
इस बीच अमेरिका ने ईरान से एक अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक कीमत का तेल खरीदने पर चीन की एक रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगाया है. अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस धन से ईरान की सरकार को और ईरान समर्थित आतंकवादी समूहों को आर्थिक मदद मलती है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के अनुसार जिस रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगाया गया है उसे ईरान से कच्चे तेल की दर्जनों खेप प्राप्त हुईं, जिनकी कीमत एक अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार कुछ खेप ईरान के अर्द्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़ी एक कंपनी से थी. प्रतिबंध की इस सूची में कई कंपनी और पोतों के नाम शामिल हैं.
चिन्मय देओरे ने ट्रंप प्रशासन पर ठोका मुकदमा
17 Apr, 2025 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका की डिपोर्टेशन नीति एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह बने हैं भारत के छात्र चिन्मय देओरे. वेन स्टेट यूनिवर्सिटी (Wayne State University) में पढ़ाई कर रहे चिन्मय ने और तीन अन्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों के साथ मिलकर ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है.
इन छात्रों का आरोप है कि बिना किसी जानकारी के और उचित कानूनी प्रक्रिया के उनका स्टूडेंट वीजा और कानूनी दर्जा खत्म कर दिया गया. इससे अब उन्हें अमेरिका से डिपोर्ट किया जा सकता है. यह मामला ऐसे समय पर सामने आया है जब ट्रंप प्रशासन पर अंतरराष्ट्रीय छात्रों के खिलाफ सख्त और भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने के आरोप भी लग रहे हैं.
क्या है पूरा मामला?
मामला अमेरिका की स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर इंफॉर्मेशन सिस्टम (SEVIS) से जुड़ा है. इसमें इन छात्रों का इमिग्रेशन स्टेटस ‘अवैध रूप से समाप्त’ कर दिया गया. चिन्मय देओरे के अलावा दो छात्र चीन से और एक नेपाल से है. इन सभी ने अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और इमिग्रेशन अधिकारियों के खिलाफ मिचिगन की एक जिला अदालत में केस दर्ज करवाया है. छात्रों की ओर से यह मुकदमा अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) ने दायर किया है.
ट्रंप प्रशासन पर कौन से आरोप लगे?
छात्रों का कहना है कि उन पर न तो किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल होने का आरोप है और न ही उन्होंने कोई इमिग्रेशन कानून तोड़ा है. वे किसी राजनीतिक या कैंपस विरोध-प्रदर्शन से भी जुड़े नहीं हैं. आरोप है कि ट्रंप प्रशासन ने कुछ मामूली घटनाओं को आधार बनाकर छात्रों को अमेरिका छोड़ने को मजबूर कर दिया. इनमें पार्किंग टिकट या ट्रैफिक वार्निंग जैसे सामान्य मामले भी शामिल हैं.
क्या बोली अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन?
यह कदम संविधान के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन है. संगठन की कार्यकारी निदेशक लोरेन खोघाली ने कहा कि इस प्रशासन का उद्देश्य भय और भ्रम फैलाना है. वे चुनिंदा लोगों को निशाना बनाकर बाकी सभी को आतंकित करने की कोशिश कर रहे हैं. खोघाली ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय छात्र न केवल शैक्षणिक समुदाय को समृद्ध करते हैं बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.
इस भारतीय छात्र का रुका था डिपोर्टेशन
ट्रंप प्रशासन की सख्ती का यह अकेला मामला नहीं है. हाल ही में एक अमेरिकी न्यायाधीश ने 21 साल के भारतीय छात्र कृष लाल इसरदासानी की डिपोर्टेशन पर रोक लगाई थी, जिनका वीज़ा इसी तरह रद्द कर दिया गया था. कृष मई में अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करने वाले थे. यह घटनाएं ट्रंप प्रशासन की उस नीति की ओर इशारा करती हैं, जिसमें अंतरराष्ट्रीय छात्रों को भी अप्रवासियों की तरह टारगेट किया जा रहा है.
अदालत के फैसले का इंतजार
भारत के चिन्मय देओरे की यह लड़ाई न केवल उनके अपने भविष्य की रक्षा के लिए है, बल्कि हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए भी एक नजीर बन सकती है. अमेरिका के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए यह मुद्दा बेहद संवेदनशील हो गया है, क्योंकि वीजा रद्द होने की प्रक्रिया अचानक और बिना किसी स्पष्टीकरण के हो रही है. अब देखना होगा कि अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाती है और ट्रंप प्रशासन को कितना जवाबदेह ठहराया जाता है.
कैथल: मामूली विवाद में पति ने की पत्नी और 8 महीने के बेटे की बेरहमी से हत्या
16 Apr, 2025 05:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बरोट गांव में बुधवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां पति पत्नी के मामूली विवाद के चलते एक व्यक्ति अजय ने अपनी पत्नी की सिर में ईंट और लाठियों से हमला कर बेरहमी से हत्या कर दी। इस कलह का शिकार एक आठ साल का मासूम भी बन गया। व्यक्ति ने अपने आठ महीने के मासूम बेटे को भी जमीन पर पटक कर मौत के घाट उतार दिया। इस दोहरे हत्याकांड से पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई है।
क्या है पूरा मामला
घटना की सूचना मिलते ही डायल 112 टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक आरोपित फरार हो चुका था। मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी गुरविंदर सिंह और ढांड थाना प्रभारी संजय कुमार सब इंस्पेक्टर ने बताया कि प्रथम दृष्टि में यह पति-पत्नी के बीच के झगड़े का मामला बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। आरोपित की पहचान अजय उर्फ अज्जू के रूप में हुई है, जो रणबीर सिंह वाल्मीकी का बेटा है और तीन भाइयों में से एक है।
उसकी पत्नी सुदेश (21 वर्ष) से सुबह किसी बात को लेकर कहासुनी हुई, जिसके बाद गुस्से में आकर उसने पहले ईंट मारी, फिर लाठियों से सिर में ताबड़तोड़ वार किए। घटना के वक्त पास में रो रहा आठ महीने का बेटा भी उसकी हैवानियत से नहीं बच सका। अजय ने उसे भी जमीन पर पटक दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
आरोपित की तलाश में जुटी पुलिस
स्वजन बच्चे को तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतका के शव को सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए रखा गया है। पुलिस मृतका के मायके वालों का इंतजार है। ढांड थाना पुलिस की टीम आरोपित की तलाश में जुटी है। थाना प्रभारी संजय कुमार ने बताया कि जल्द ही आरोपित अजय को गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हरियाणा सरकार की नई आवास योजना: गरीबों को 1 लाख में मिलेगा 30 गज का प्लॉट
16 Apr, 2025 05:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा में 16 हजार गरीब परिवारों को प्रदेश सरकार एक लाख रुपये में 30 गज का प्लॉट देगी। मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना के तहत एक लाख 80 हजार रुपये तक की सालाना आय वाले परिवार 30 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं। प्लॉट पर मकान बनाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ढाई लाख रुपये तक की सब्सिडी भी दी जाएगी।
16 शहरों में दिए जाएंगे प्लॉट
सभी को आवास विभाग ने प्लॉटों के आवंटन के लिए गरीब परिवारों से आवेदन मांगें हैं। 16 शहरों चरखी दादरी, हिसार, सिरसा, झज्जर, फतेहाबाद, जगाधरी, सफीदों, अंबाला, रोहतक, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, करनाल, पलवल, जुलाना, बहादुरगढ़ और जींद में यह प्लॉट दिए जाएंगे।
प्लॉट के लिए 10 हजार रुपये देकर पोर्टल www.hfa.haryana.gov.in पर आवेदन किया जा सकता है। विशेष बात यह कि प्लॉटों के आंवटन में घुमंतू जाति के परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।
हरियाणा में गरीबों को सस्ते आवास
गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को किफायती दरों पर पक्के मकान दिलाने के लिए प्रदेश में मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना और मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना-2.0 को प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी और प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के साथ मिलकर क्रियान्वित किया जा रहा है।
इससे लाभार्थियों को महाग्रामों में 50 वर्ग गज और दूसरे गांवों में 100 वर्ग गज के प्लॉट प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जबकि इन पर निर्माण के लिए आर्थिक सहायता केंद्र सरकार द्वारा दिलवाई जा रही है।
कम किराए पर भी ले सकेंगे मकान
प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत शहरों में प्रवासियों, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग योजना शुरू करने जा रही है, जो अपना घर नहीं खरीदना चाहते।
अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग योजना के तहत ऐसे परिवारों को किराए पर सस्ते मकान उपलब्ध कराए जाएंगे। सोनीपत से पायलट परियोजना शुरू होगी, जहां विभिन्न सेक्टरों में लगभग 1600 फ्लैटों को 25 वर्षों के लिए रियायती दरों पर किराये पर दिया जाएगा। प्रयोग सफल रहा तो अन्य जिलों में भी यह योजना लागू होगी।
अवैध अप्रवासियों को ट्रंप का ऑफर , "जाना है तो टिकट और पैसे हम देंगे"
16 Apr, 2025 05:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अवैध अप्रवासियों की निकासी को लेकर एक और बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप अवैध अप्रवासियों को स्वेच्छा से अमेरिका छोड़कर अपने देश जाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हम देश में अवैध रूप से रह रहे उन अप्रवासियों को पैसे और विमान का टिकट देंगे जो स्वेच्छा से लौटने को इच्छुक हैं। मगर आप जाओ तो सही। इस सहूलियत के ऐलान से पहले वह धमकी भी दे चुके हैं कि अगर आप स्वेच्छा से नहीं जाना चाहते हैं। तो अमेरिका कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। जेल भी भेजा जा सकता है, जहां से फिर स्वदेश वापसी संभव नहीं होगी।
ट्रंप ने किया वापसी कार्यक्रम का ऐलान
ट्रंप लगातार अवैध अप्रवासियों को यह संदेश दे रहे हैं कि स्वेच्छा से अपने देश वापस लौट जाओ, यही आप लोगों के हित में है। उन्होंने मंगलवार को प्रसारित 'फॉक्स नोटिसियास' को दिए साक्षात्कार में कहा कि हमारा प्रशासन हत्यारों को देश से निकालने पर ध्यान केंद्रित किए हुए है। बावजूद हम अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे अन्य लोगों के लिए स्वेच्छा से वापसी कार्यक्रम लागू करेंगे। ताकि जो लोग खुद यहां से जाना चाहते हैं, उनकी वापसी को सुविधाजनक बनाया जा सके।
घर जाओ, पैसे और टिकट हमसे लो
अवैध अप्रवासियों के लिए ट्रंप का संदेश साफ है कि आप सभी स्वेच्छा से घर वापसी करो, अपने देश जाओ। आपकी वापसी का इंतजाम यानि पैसे और टिकट हम देंगे। उन्होंने योजना के बारे में कुछ जानकारी दी और कहा कि अमेरिका आप्रवासियों को विमान का किराया और कुछ पैसे देगा। ट्रंप ने कहा, "हम उन्हें कुछ पैसे देंगे। हम उन्हें विमान का टिकट देंगे और अगर वे अच्छे हैं और वापस आना चाहते हैं तो हम उनके साथ काम करेंगे। हम उनके साथ मिलकर काम करेंगे ताकि उन्हें जल्द से जल्द कानूनी रूप से वापस लाया जा सके।"
भूकंप से कांपी ज़मीन, अफगानिस्तान के बाद फिलीपींस में दहशत
16 Apr, 2025 03:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अफगानिस्तान के बाद दक्षिणी फिलीपींस में भूकंप के तेज झटके आए जिससे वहां के लोगों में दहशत फैल गई। संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने बताया कि बुधवार को दक्षिणी फिलीपींस में 5.6 तीव्रता का भूकंप आया। ये झटके इतने तेज थे कि लोगों की नींद खुल गई और वो डर के मारे घरों से बाहर आ गए। इससे पहले आज सुबह अफगानिस्तान में भूकंप आया जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.9 दर्ज की गई थी, इसके झटके इतने तेज थे कि दिल्ली-एनसीआर की धरती भी हिल पड़ी।
कहां रहा भूकंप का केंद्र
बुधवार को दक्षिणी फिलीपींस में आए भूकंप के झटके बहुत तेज रहे। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.6 मापी गई। यूएसजीएस ने बताया कि मिंडानाओ द्वीप के तट पर आए भूकंप की गहराई 30 किलोमीटर थी। फिलीपीन ज्वालामुखी एवं भूकंप विज्ञान संस्थान ने भूकंप का केंद्र मैतुम शहर से लगभग 43 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में बताया, जो पहाड़ी और कम आबादी वाले क्षेत्र में स्थित है।
कितना हुआ नुकसान
हालांकि झटके बहुत तेज थे, लेकिन इससे किसी प्रकार के नुकसान या हताहत होने की अभी तक कोई सूचना नहीं है। अगर कोई ऐसा अपडेट आता है तो बताया जाएगा, लेकिन नुकसान होने की संभावना कम ही है क्योंकि जहां केंद्र था वहां की आबादी बहुत कम बताई गई है।
फिलीपींस में आते रहते हैं भूकंप
फिलीपींस में भूकंप आना एक दैनिक घटना है, जो प्रशांत महासागर के “फायर रिंग” पर स्थित है। तीव्र भूकंपीय और ज्वालामुखीय गतिविधियों का एक क्षेत्र है, जो जापान से दक्षिण-पूर्व एशिया और प्रशांत बेसिन तक फैला हुआ है। मैतुम में अग्निशमन विभाग के अधिकारी गिल्बर्ट रोलिफोर ने कहा, यह भूकंप शक्तिशाली था, लेकिन ज्यादा देर तक नहीं रहा। जिस वजह से किसी तरह का कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
ईरान से वार्ता से पहले अमेरिका का बड़ा कदम, बढ़ी सैन्य मौजूदगी
16 Apr, 2025 01:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई। अमेरिका ने पश्चिम एशिया में दूसरा विमानवाहक पोत भेज दिया है। उसने ईरान के साथ दूसरे दौर की वार्ता से पहले यह कदम उठाया है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों पक्षों में शनिवार को ओमान की राजधानी मस्कट में पहले दौर की वार्ता हुई। वार्ता सकारात्मक बताई गई थी। अब वाशिंगटन और तेहरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता रोम में हो सकती है।
अरब सागर में तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोत
अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस कार्ल विंसन को अरब सागर में तैनात किया गया है। इस क्षेत्र में पहले से ही यूएसएस ट्रूमैन तैनात है। इस क्षेत्र में अमेरिकी सेना यमन में ईरान समर्थित हाउती विद्रोहियों को निशाना बना रही है।
ईरान पर दबाव बनाना चाहता है अमेरिका
अमेरिका के इस कदम को ईरान पर दबाव बनाने के रूप में देखा जा रहा है। मस्कट में पहले दौर की वार्ता के बाद अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता को लेकर सहमति बनी थी। यह संभावना है कि दोनों पक्षो में 19 अप्रैल को फिर वार्ता हो सकती है। ओमान लंबे समय से पश्चिमी देशों और ईरान के बीच मध्यस्थता कर रहा है।
ईरान के सर्वोच्च नेता ने वार्ता का किया समर्थन
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामनेई ने वार्ता का समर्थन किया और कहा कि अमेरिका के साथ पहले दौर की वार्ता अच्छी रही। उन्होंने ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता पर पहली बार सार्वजनिक टिप्पणी में यह बात कही।
खामनेई की यह टिप्पणी अब तक की वार्ता के प्रति उनकी सहमति दर्शाती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हम वार्ता के बारे में न तो पूरी तरह आशावादी हैं और न ही पूरी तरह निराशावादी हैं।
काजी सलाउद्दीन की सऊदी अरब में मौत, 44 साल की उम्र में अचानक निधन
16 Apr, 2025 12:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश के कुमिला का काजी सलाउद्दीन हर मेहनती मजदूर की तरह अपने परिवार के उज्जवल भविष्य के लिए अक्टूबर 2022 सऊदी अरब काम करने गया था. लेकिन बमुश्किल एक साल बाद उसके परिवार को उसकी लाश सऊदी से वापस लौटाई गई. काजी सलाउद्दीन सिर्फ 44 साल के उम्र में दो बेटियों और एक बेटे को छोड़ दुनिया से चला गया.
उसकी अचानक मौत ने परिवार को हैरान कर दिया. सऊदी अधिकारियों ने उसकी मौत का कारण दिल का दौरा बताया है. लेकिन उनके परिवार को इस बात पर यकीन नहीं है, क्योंकि उनको कभी दिल से जुड़ी कोई समस्या या कोई अन्य बीमारी नहीं थी. ये बस सलाउद्दीन की कहानी नहीं है, हर साल बांग्लादेश के हजारों प्रवासी मजदूर की लाश बांग्लादेश आती है और ये आंकड़ा पिछले कुछ सालों में बढ़ गया है.
हर साल 4 हजार बांग्लादेशियों की विदेशों में मौत
बांग्लादेश ने माइग्रेंट वर्कर्स के शव को लेकर आंकड़ा जारी किया है. इसके मुताबिक खाड़ी देशों से 2023 में 4,552, 2022 में 3,904 और 2021 में 3,818 लाशें बांग्लादेश भेजी गई. 2024 में 4800 से ज्यादा लाशों को बांग्लादेश लाया गया. सबसे ज्यादा लाशें सऊदी अरब से भेजी जा रही हैं. द डेली स्टार के मुताबिक जितने भी माइग्रेंट वर्कस के लाश बांग्लादेश भेजी जा रही हैं, उन सब में नेचुरल डेथ लिखा जा रहा है, जिस पर बांग्लादेश में अब सवाल उठने लगे हैं.
खाड़ी देशों में क्यों मर रहे बांग्लादेश
बांग्लादेश से बड़ी तादाद में लोग सऊदी अरब, कुवैत, कतर और UAE जैसे देशों में काम करने जाते हैं. यहां ज्यादातर बांग्लादेश मजदूरी का काम करते हैं, ज्यादा तापमान और खराब रहन सहन की वजह से जान जोखिम बना रहता है और इसी वजह से मजदूरों की मौतों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है. बांग्लादेश से सबसे ज्यादा माइग्रेंट वर्कर सऊदी अरब जाते हैं, एक डेटा के मुताबिक सऊदी अरब में करीब 26 लाख बांग्लादेश प्रवासी मजदूर रहते हैं.
हनीमून डेस्टिनेशन मालदीव ने इजराइल के लिए बंद किए दरवाज़े
16 Apr, 2025 12:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मालदीव दुनिया भर के पर्यटकों के लिए बेस्ट हनीमून डेस्टिनेशन बना हुआ है. यहां हर साल 15 लाख ऊपर पर्यटक घूमने आते हैं, लेकिन इजराइल के लिए इस देश के दरवाजे बंद हो चुके हैं. मालदीव ने मंगलवार को इजराइली पर्यटकों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की और फिलिस्तीनी मुद्दे के साथ अपनी ‘दृढ़ एकजुटता’ को दोहराया.
राष्ट्रपति मोहम्मद मुइजू के ऑफिस के बयान में कहा गया है कि मुइजू ने मालदीव इमिग्रेशन एक्ट में तीसरे संशोधन को मंजूरी दे दी है, जिसे 15 अप्रैल 2025 को संसद ने पास किया था. बयान में आगे कहा गया कि यह कदम इजराइल की ओर से फिलिस्तीनी लोगों के खिलाफ किए जा रहे अत्याचारों और नरसंहार के जवाब में सरकार के ‘दृढ़ रुख’ को दर्शाता है.
चीन से आए सबसे ज्यादा टूरिस्ट
इजराइल मालदीव में पर्यटकों को भेजने वाले शीर्ष दस देशों में से एक नहीं है, मालदीव के पर्यटन विभाग के मुताबिक इस साल 14 अप्रैल 2025 तक 729,932 पर्यटक मालदीव आए. उनमें से लगभग 70 फीसद द्वीप रिसॉर्ट्स में रुके. यहां चीन से जबसे ज्यादा 11 फीसद पर्यटकों आए और भारत 5 फीसद भारत से, जो कि छठे स्थान पर है. इजराइली पर्यटकों पर बैन के बाद मालदीव की अर्थव्यवस्था पर ज्यादा असर पड़ने वाला नहीं है, क्योंकि यहां इजराइल के पर्यटक पहले से ही कम तादाद में आते हैं.
मालदीव में हुए प्रदर्शन
मालदीव की सरकार द्वारा ये कदम मालदीव में हुए फिलिस्तीन समर्थन में प्रदर्शनों के बाद लिया गया है. देश की सड़कों पर इजराइल हमलों के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं और मालदीव के लोग लंबे समय सरकार से इजराइल के बायकॉट की मांग कर रहे हैं.
रूस-यूक्रेन युद्ध तीसरे साल में, सूमी पर मिसाइल हमले में 35 की मौत
16 Apr, 2025 12:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस और यूक्रेन का युद्ध पिछले तीन सालों से चल रहा है. इस युद्ध में अभी शांति नहीं हुई है, और अब दूसरे देशों पर भी खतरा मंडरा रहा है. रूस की एक धमकी के बाद सवाल उठ रहे हैं कि पुतिन क्या पोलैंड और बाल्टिक देशों को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं? रूस के खुफिया प्रमुख सर्गेई नारिश्किन ने नाटो को खुली धमकी दी है कि अगर पोलैंड और बाल्टिक देश अपनी ‘आक्रामक’ हरकतें नहीं रोकते, तो रूस जवाबी कार्रवाई करेगा. यह बयान तब आया है, जब यूक्रेन में रूस की बमबारी तेज हो गई है और दुनिया भर में इसे लेकर गुस्सा भड़क रहा है.
रूस के विदेशी खुफिया सेवा के डायरेक्टर सर्गेई नारिश्किन ने मंगलवार को बेलारूस के तानाशाह अलेक्जेंडर लुकाशेंको से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद उन्होंने कहा, ‘अगर नाटो ने रूस और बेलारूस के खिलाफ आक्रामकता दिखाई, तो सबसे पहले पोलैंड और बाल्टिक देशों को नुकसान होगा.’ नारिश्किन ने पोलैंड और बाल्टिक देशों (लातविया, लिथुआनिया, एस्तोनिया) पर ‘हथियार लहराने’ और ‘उकसाने’ का आरोप लगाया. उन्होंने पोलैंड के उस कथित प्लान का जिक्र किया, जिसमें वह बेलारूस और रूस के कलिनिनग्राद क्षेत्र की सीमा पर 20 लाख एंटी-टैंक माइंस बिछाने की योजना बना रहा है. लातविया के रक्षा मंत्री आंद्रिस स्प्रूड्स ने भी कहा कि उनका देश अपनी रक्षा को और मजबूत करने के लिए ‘हर संभव विकल्प’ पर विचार कर रहा है.
ट्रंप ने जेलेंस्की को युद्ध का बताया जिम्मेदार
रूस की धमकी के बीच यूक्रेन में उसकी बमबारी ने नया कहर बरपाया है. रविवार को यूक्रेन के सूमी शहर पर रूसी मिसाइल हमले में 35 लोग मारे गए और 100 से ज्यादा घायल हुए. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की पर ही युद्ध शुरू करने का आरोप लगाकर हंगामा खड़ा कर दिया. ट्रंप ने कहा, ‘आप 20 गुना बड़े देश के खिलाफ युद्ध शुरू नहीं करते और फिर मिसाइलों की उम्मीद करते हैं.’ ट्रंप ने सूमी हमले को सिर्फ ‘गलती’ कहकर दुनिया को चौंका दिया.
‘यूक्रेन के साथ खड़ा है NATO’
नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने मंगलवार को जेलेंस्की के साथ ओडेसा का दौरा किया और यूक्रेन को ‘अटूट समर्थन’ का वादा किया. रुटे ने कहा, ‘रूस इस युद्ध का आक्रामक है. इसमें कोई शक नहीं.’ जेलेंस्की ने नाटो से एयर डिफेंस सिस्टम की मांग की, ताकि रूसी हमलों से बचा जा सके. रुटे ने यह भी साफ किया कि नाटो ट्रंप के सीजफायर प्रस्ताव का समर्थन करता है, लेकिन यूक्रेन के साथ उसका साथ नहीं छूटेगा. स्वीडन ने रूस के राजदूत को तलब कर रूसी हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया.
चीन ने सैनिक भेजने से किया इनकार
यूक्रेन ने दावा किया कि रूस के लिए सैकड़ों चीनी नागरिक लड़ रहे हैं. दो चीनी युद्धबंदियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्य चीनी नागरिकों को युद्ध में न आने की चेतावनी दी. चीन ने इसे ‘राजनीतिक चालबाजी और सनसनी’ बताते हुए खारिज किया है. यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने आरोप लगाया था कि सैकड़ों चीनी नागरिक फ्रंटलाइन पर लड़ रहे हैं. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि ‘चीन इस मामले से जुड़ी जानकारी और हालात की जांच कर रहा है.
रूस की सैन्य अदालत ने दी सजा
रूस की एक सैन्य अदालत ने पांच युवाओं को 18 साल तक की सजा सुनाई, जिन्होंने पिछले साल मॉस्को के पास रेलवे और एक हेलीकॉप्टर में आग लगाई थी. रूस का दावा है कि यह हमला यूक्रेन की खुफिया एजेंसी के इशारे पर हुआ. हेलीकॉप्टर में आग लगने का वीडियो जारी किया था, लेकिन हमले की जिम्मेदारी नहीं ली.
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