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पीएम मोदी ने शी जिनपिंग से की मुलाकात, संबंधों को आगे बढ़ाने पर दिया जोर
31 Aug, 2025 03:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार की उम्मीद के साथ, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के लिए दो दिवसीय यात्रा पर चीन गए पीएम मोदी ने रविवार को राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। शी जिनपिंग के साथ अपनी द्विपक्षीय बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि पिछले साल कज़ान में उनकी बहुत ही उपयोगी चर्चा हुई थी जिसने भारत-चीन संबंधों को सकारात्मक दिशा दी।
उन्होंने कहा कि सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद, शांति और स्थिरता का माहौल बना है। सीमा प्रबंधन को लेकर भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों के बीच एक समझौता हुआ है। उन्होंने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू कर दी गई है और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी बहाल की जा रही हैं। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के हित उनके सहयोग से जुड़े हैं और यह पूरी मानवता के कल्याण में योगदान देगा। उन्होंने आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
बता दें व्यापार और शुल्क संबंधी अमेरिकी नीतियों के कारण भारत एवं अमेरिका के संबंधों में अचानक गिरावट आई है। ऐसे में भारत एवं चीन के नेताओं के बीच यह मुलाकात महत्व रखती है। मोदी और शी रविवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर मिलेंगे। सूत्रों ने संकेत दिया है कि चर्चा के लिए मुद्दों की व्यापकता को देखते हुए वे दिन में बाद में दोबारा भी मुलाकात कर सकते हैं। दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात अक्टूबर में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। सोमवार को भारत रवाना होने से पहले पीएम मोदी के रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मिलने की संभावना है।
चीन द्वारा आयोजित ‘एससीओ प्लस’ शिखर सम्मेलन में विभिन्न देशों के 20 नेता भाग ले रहे हैं। चीन इस साल रूस, भारत, ईरान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, बेलारूस और चीन के 10 सदस्यीय समूह का अध्यक्ष है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। यहां पहुंचे नेताओं में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू शामिल हैं। नेताओं का शिखर सम्मेलन सोमवार को होगा।
चीन के सहायक विदेश मंत्री लियू बिन ने कहा था कि एससीओ का अब तक का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन इस वर्ष चीन में राष्ट्राध्यक्षों और घरेलू कूटनीति के सबसे अहम आयोजनों में से एक होगा। उन्होंने कहा था कि शिखर सम्मेलन में अपने मुख्य भाषण में शी चिनफिंग ‘‘शंघाई भावना’’ को आगे बढ़ाने और लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए एससीओ के लिए चीन के नए दृष्टिकोण एवं प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
Trump Tariffs: कोर्ट ने कहा—दुनिया के हर देश पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं
30 Aug, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका की एक संघीय अपील अदालत ने शुक्रवार (29 अगस्त, 2025) को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दुनिया के कई देशों पर लगाए गए टैरिफ पर अपना फैसला सुनाया. कोर्ट के इस फैसले से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ के फैसले को बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी अपील कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को अवैध करार दिया. कोर्ट ने कहा कि ट्रंप को हर देश पर व्यापक रूप से टैरिफ लगाने का कोई कानूनी अधिकार हासिल नहीं था. हालांकि, कोर्ट ने इन टैरिफ को फिलहाल लागू रहने दिया है, ताकि ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का समय मिल सके.
अमेरिका के संघीय सर्किट के अपील कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने आपातकालीन शक्तियों के कानून के तहत अपने अधिकारों को दायरे का पार कर दिया था. यह फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ी कानूनी हार है, जो न्यूयॉर्क के एक स्पेशल फेडरल ट्रेड कोर्ट के मई महीने में दिए फैसले को पुष्टि करता है.
कोर्ट ने किन देशों पर लगाए टैरिफ पर सुनाया फैसला?
अमेरिकी अदालत ने उन टैरिफ को फैसला सुनाया है, जो डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल महीने में सभी साझेदार देशों पर लगाए थे. इसमें उन टैरिफ को शामिल किया गया जो अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले चीन, मैक्सिको और कनाडा पर लागू किए थे. ट्रंप ने 2 अप्रैल को आजादी के दिन घोषित करते हुए दुनिया के कई देशों पर रेसीप्रोकल टैरिफ लागू किया था. ट्रंप ने तर्क दिया था कि कई साझेदार देशों से अमेरिका को व्यापारिक घाटा हो रहा है. ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरमेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट का हवाला देते हुए लागू किए गए इन टैरिफों को सही ठहराया.
कोर्ट ने 7-4 के बहुमत से सुनाया फैसला
संघीय अपील कोर्ट ने शुक्रवार (29 अगस्त) को 7-4 के बहुमत से फैसला सुनाया है. कोर्ट ने फैसले में लिखा कि यह कहीं से संभव नहीं लगता कि कांग्रेस की मनसा राष्ट्रपति को असीमित अधिकार देने का था, जिससे वह दुनिया के किसी भी देश पर मनमाने ढ़ंग से टैरिफ लगा सकें.
ट्रंप प्रशासन कोर्ट में क्या दी दलीलें?
सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि अगर ट्रंप के टैरिफ को रद्द किया जाता है, तो उसे इंपोर्ट टैक्स से वसूल किए गए कुछ पैसों को वापस करना पड़ सकता है, इससे अमेरिका के खजाने को एक बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है और अगर ऐसा होता है तो आगे चलकर यह ट्रंप की टैरिफ लगाने की कोशिशों को भी कमजोर कर सकता है.
हरियाणा सरकार ने केंद्र को लिखा पत्र, कहा- “BBMB बांध से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा घटाई जाए”
30 Aug, 2025 06:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ (हरियाणा)। बाढ़ जैसे हालात के बीच पंजाब और हरियाणा में पानी को लेकर फिर से विवाद शुरू हो गया है। हरियाणा ने बीबीएमबी को पत्र लिखकर कहा है कि हरियाणा की मांग के अनुरूप बोर्ड की तरफ से कम पानी छोड़ा जाना चाहिए। वहीं आम आदमी पार्टी पंजाब का आरोप है कि अब संकट की स्थिति में पंजाब को अकेला छोड़ा जा रहा है, जबकि पहले अधिक पानी के लिए दबाव बनाया जा रहा था।
हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने पत्र में कहा कि हरियाणा के लिए पानी का डिस्चार्ज 8,894 क्यूसेक दर्ज किया गया, जबकि उन्होंने 7,900 क्यूसेक पानी देने की ही मांग की थी। विभाग ने बताया कि 26 अगस्त को 7,900 क्यूसेक तक पानी की मांग घटा दी गई थी, लेकिन पानी का डिस्चार्ज कम नहीं हुआ। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पानी की मांग काफी घट गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब 6,250 क्यूसेक पानी लेने की ही उन्होंने सहमति दी है।
विभाग ने चेतावनी दी है कि बाढ़ जैसी स्थिति को देखते हुए नहर प्रणाली और आसपास की आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से कम पानी छोड़ना चाहिए। आम आदमी पार्टी पंजाब के प्रवक्ता नील गर्ग ने कहा कि जब पंजाब की धरती प्यासी होती है तो उसका हक छीना जाता है। अब जब चारों तरफ पानी ही पानी है तो पंजाब को अकेला छोड़ दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पंजाब ने हरियाणा से गुहार लगाई कि भाखड़ा का पानी ज्यादा ले लो, ताकि पंजाब को बाढ़ से बचाया जा सके, लेकिन हरियाणा पानी का कोटा कम करने की मांग कर रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या पंजाब सिर्फ नुकसान झेलने के लिए है। हरियाणा को जवाब देना चाहिए कि क्या मदद की पेशकश सिर्फ सियासी जुमला था।
यूक्रेन में हाहाकार, ड्रोन और मिसाइल हमले में 1 की मौत, 24 घायल
30 Aug, 2025 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। रुस ने शुक्रवार रात से लेकर शनिवार सुबह तक यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला किया है। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 24 लोग घायल हो गए। घायलों में तीन बच्चे भी शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार, मिसाइल और ड्रोन हमलों से कई शहरों की इमारतें और जरूरी ढांचे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बताया कि यह हमला 14 अलग-अलग जगहों पर हुआ।
कितने ड्रोन और मिसाइलों से हुआ हमला?
उन्होंने बताया कि हमले के दौरान करीब 540 ड्रोन और 45 मिसाइलें दागी गई। जापोरिज्झिया शहर में पांच मंजिला इमारत पर सीधा हमला हुआ, जिससे बिजली कट गई और 25 हजार लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हो गए।
स्थानीय गवर्नर इवान फेदोरोव ने बताया कि धमाकों से इलाके में कई जगह आग लग गई और बच्चे समेत दर्जनों लोग घायल हो गए। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा, एक बार फिर आम लोगों के घरों को निशाना बनाया गया है। बच्चे समेत कई लोग घायल हो गए। कई जगहों पर आपात सेवाएं राहत और बचाव कार्य में जुटी है।
किन-किन चीजों को हुआ ज्यादा नुकसान?
रूसी हमले में सबसे ज्यादा नुकसान घरों, दुकानों और नागरिक ढांचों को हुआ है। वोलिन, डोनबास, खार्किव, कीव समेत 14 क्षेत्रों में हमले की खबरें आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस ने कूटनीतिक बातचीत के लिए तय समय का इस्तेमाल हमले की तैयारी में किया।
जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि रूस के खिलाफ केवल बयानों से काम नहीं चलेगा, "बल्कि बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र पर कड़े प्रतिबंध लगाने होंगे। उन्होंने कहा, अगर रूस को रोका नहीं गया तो वह लगातार ऐसे ही हमले करता रहेगा।"
शांति वार्ता ठप
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब शांति वार्ता की कोशिशें ठप पड़ी हुई हैं। इसी महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के नेताओं से अलग-अलग मुलाकात की थी, लेकिन मॉस्को ने पुतिन और जेलेंस्की की सीधी बैठक की संभावना को नकार दिया है।
यूक्रेन ने रूस के तेल रिफाइनरी को बनाया निशाना
इस बीच यूक्रेन ने रूस के दो तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमले किए। साउथ रूस के क्रास्नोदार और सामारा से सिजरान इलाके में धमाकों और आग की खबर आई। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, क्रास्नोदार रिफाइनरी पर गिरे ड्रोन के मलबे से आग लगी।
इसके साथ ही, यूक्रेन की तरफ से सामारा क्षेत्र में सिजरान रिफाइनरी के पास भी हमले की कोशिश हुई, लेकिन वहां बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई। रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसने 11 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए।
स्काईवेस्ट एयरलाइन ने उड़ानों पर लगाया रोक, यात्रियों में पैदा हुई दिक्कत
30 Aug, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिकी एअरलाइन स्काई वेस्ट की सभी उड़ानों को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है। खबर है कि तकनीकी खराबी के कारण ये फैसला लिया गया है। अमेरिका की सबसे बड़ी क्षेत्रीय एयरलाइन ने बताया कि शुक्रवार रात एक तकनीकी समस्या सामने आई थी।
एहतियात के तौर पर इस एअरलाइन की सभी उड़ानों को फिलहाल रोक दिया गया है। अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन के अनुसार, स्काईवेस्ट के अनुरोध पर 0149 GMT पर उड़ान रोकने की सलाह जारी की गई और 0210 GMT पर रद कर दी गई।
सामने आया एअरलाइन का बयान
बता दें कि इस संबंध में एअरलाइन की ओर से बयान भी जारी किया गया है। बयान में बताया गया कि स्काईवेस्ट में आज शाम एक संक्षिप्त तकनीकी समस्या आई, जिसे अब ठीक कर लिया गया है।
बयान में आगे कहा गया कि सभी प्रणालियों को बहाल कर दिया गया है और हम सामान्य परिचालन फिर से शुरू करने के लिए किसी भी देरी को कम करने के लिए काम कर रहे हैं।
बड़ी एअरलाइन कंपनी है स्काई वेस्ट
गौरतलब है कि सेंट जॉर्ज, यूटा स्थित स्काईवेस्ट यूनाइटेड एअरलाइंस, डेल्टा एअरलाइंस, अमेरिकन एअरलाइंस और अलास्का एअरलाइंस के लिए उड़ानें संचालित करती है।
भारत की विदेश नीति पर AJC का भरोसा, बोली- अमेरिका को समझदारी दिखानी चाहिए
30 Aug, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस -यूक्रेन युद्ध को मोदी का युद्ध बताने पर अमेरिकी-यहूदी समुदाय की प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी-यहूदी कमेटी (AJC) ने कहा कि हम अमेरिकी अधिकारियों द्वारा भारत पर किए जा रहे हमलों से हैरान और बेहद परेशान है. ट्रंप के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने रूस-यूक्रेन जंग को मोदी का युद्ध कहा था. AJC ने इसे घिनौना आरोप बताया है.
कमेटी ने कहा कि भारत कच्चे तेल के लिए रूसी तेल पर निर्भर है, लेकिन भारत पुतिन के युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं है. भारत एक सहयोगी लोकतंत्र है और अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है. भारत महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा में अहम भूमिका निभाता है. इस अहम रिश्ते को फिर से मजबूत करने का समय आ गया है.
अमेरिकी -कमेटी एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका उद्देश्य यहूदियों और अन्य लोगों के धार्मिक और नागरिक अधिकारों को बढ़ावा देना है. कमेटी के अमेरिका में 25 क्षेत्रीय कार्यालय, 13 विदेशी कार्यालय हैं.
भारत पर मुनाफा कमाने का आरोप
ट्रंप के एडवाजर नवारो ने आरोप लगाया कि यूक्रेन जंग से पहले भारत 1% से भी कम रूसी तेल इंपोर्ट करता था, जो कि अब 30% से भी ज्यादा यानी 15 लाख बैरल प्रतिदिन है. इस इजाफे की वजह घरेलू मांग नहीं है. इससे भारी मुनाफा कमाया जा रहा है.
हालांकि भारत का कहना है कि रूस से तेल खरीदने का उद्देश्य बाजारों को शांत करना है. हम कीमतों को स्थिर रखने के लिए रूस से तेल खरीद रहे हैं. यह राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों के हित में है. इसी तेल खरीद को लेकर भारत पर अमेरिका ने 25% पेनाल्टी टैरिफ लगाई है.
कैसे हो सकता है भारत का टैरिफ कम?
भारत पर जुलाई महीने में अमेरिका ने 25% टैरिफ लगाया गया था. इस दौरान 80 से ज्यादा देशों पर टैरिफ लगाए गए. बाद में ट्रंप ने इसमें 25% पेनाल्टी टैरिफ लगाने का भी ऐलान कर दिया.
भारत पर लगे टैरिफ को कम करने के बारे में जब व्हाइट हाउस सलाहकार से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसको कम करना बेहद आसान है. अगर भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर दे तो उसे कल ही 25% की छूट मिल सकती है.
टैरिफ विवाद में ट्रंप को झटका, कोर्ट ने फैसले की आलोचना की
30 Aug, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगाए गए टैरिफ ने ट्रंप की ही मुसीबतें बढ़ा दी हैं. दूसरे देशों पर टैरिफ लगाते हुए ट्रंप ने दावा किया था कि उनके पास कांग्रेस को दरकिनार करके विदेश से आने वाले सामानों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार है. ट्रंप के इस दावे के बीच एक फेडरल अपील कोर्ट ने रोड़ा अटका दिया है. अदालत का कहना है कि संविधान ने टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस को दिया है, लेकिन नेताओं ने धीरे-धीरे राष्ट्रपति को टैरिफ को लेकर ज्यादा अधिकार दे दिए हैं. कोर्ट ने कहा और ट्रंप ने इसका भरपूर फायदा उठाया है.
अमेरिका की संघीय सर्किट अपील कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करके दुनिया के लगभग हर देश पर अधिक टैरिफ लगाने को सही ठहराने की सारी हदें पार कर दी हैं. कोर्ट का यह फैसला न्यूयॉर्क की विशेष फेडरल ट्रेड कोर्ट के मई के फैसले को काफी हद तक सही ठहराता है.
कोर्ट का फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका
कोर्ट का यह फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका था. इस फैसले से ट्रंप की अनिश्चित व्यापार नीतियों ने वित्तीय बाजारों को हिलाकर रख दिया है, अनिश्चितता के कारण कारोबार ठप्प हो गया है, कीमतें बढ़ने लगीं और आर्थिक वृद्धि धीमी होने की चिंताएं पैदा हो गई हैं. बता दें कि कोर्ट का यह निर्णय ट्रंप की तरफ से अप्रैल में लगभग सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर लगाए गए टैरिफ को लेकर था.
ट्रंप प्रशासन का तर्क
ट्रंप सरकार ने तर्क देते हुए कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति रह चुके रिचर्ड निक्सन को भी आर्थिक संकट के दौरान आपातकाल के आधार पर टैरिफ लगाने की अनुमति मिली थी. इस बात का जवाब देते हुए कोर्ट ने कहा कि निक्सन ने यह कदम उस समय उठाया था जब उन्होंने डॉलर को सोने से जोड़ने वाली नीति को समाप्त किया था. न्यूयॉर्क स्थित अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने अपने फैसले में सुनाया था कि ट्रंप के लिबरेशन डे टैरिफ राष्ट्रपति को आपातकालीन शक्ति के तहत दिए गए अधिकारों से बाहर हैं.
अमेरिका पर आ सकता है वित्तीय संकट
कोर्ट के शुक्रवार के फैसले में कुछ जजों के बीच असहमति भी दिखी. कोर्ट ने कहा कि 1977 का कानून आपातकालीन कदम उठाने की अनुमति नहीं देता है. सरकार की तरफ से दिए गए तर्क में कहा गया कि अगर ट्रंप की तरफ से लगाए गए टैरिफ हटा दिए जाते हैं, तो उसे उन सभी टैरिफ को वापस करना होगा जो वह अब तक कई देशों से ले चुके हैं. सरकार ने बताया कि जुलाई का कुल राजस्व 159 अरब डॉलर था, जो पिछले साल के मुकाबले दो गुना अधिक था. साथ ही न्याय विभाग ने कानूनी दलील में चेतावनी देते हुए कहा कि टैरिफ हटाने से अमेरिका में वित्तीय संकट आ सकता है और इससे ट्रंप को आगे चलकर टैरिफ लगाने में भी कठिनाई हो सकती है.
ट्रंप ने सभी टैरिफ को सही बताया
ट्रंप ने लंबे समय से चल रहे अमेरिका के व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल बताया. ट्रंप ने कांग्रेस की सहमति लिए बिना दावा किया कि उन्होंने यह टैरिफ 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का इस्तेमाल करके लगाया है, जो जोकि देश के हित में है. कोर्ट ने कहा कि अमेरिकी संविधान कांग्रेस को टैरिफ सहित कर निर्धारित करने का अधिकार देता है, लेकिन सांसदों ने धीरे-धीरे राष्ट्रपतियों को टैरिफ को लेकर ज्यादा अधिकार दे दिए हैं. कोर्ट ने कहा, और ट्रंप ने इसका भरपूर फायदा उठाया है.
कई देशों पर लगाए भारी कर
ट्रंप ने टैरिफ की घोषणा करने के बाद इसे 90 दिनों के लिए स्थगित कर दिया ताकि देशों को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत करने का समय मिल सके. कुछ देशों ने ट्रंप का यह फैसला मान लिया, जिनमें यूके, जापान और यूरोपीय संघ शामिल हैं. लेकिन कई देश ऐसे भी थे जिन्होंने जिसने ट्रंप के आगे अपने घुटने नहीं टेके. उन देशों को इस महीने की शुरुआत में ट्रंप ने अतिरिक्त टैरिफ लगाकर एक बड़ा झटका दिया, जिसमें लाओस (40%), भारत (50%), और अल्जीरिया (30%) हैं.
रूस में 7 साल के बच्चों को सिखाई जा रही ड्रोन वॉरफेयर की ट्रेनिंग
30 Aug, 2025 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध लंबे समय से चल रहा है. इसी बीच रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अब सात साल के बच्चों को ड्रोन युद्ध में घसीटने की कोशिश कर रहे हैं. यूक्रेन की राजधानी कीव में गुरुवार को एक बार फिर से ड्रोन हमला हुआ. जिसमें 4 बच्चों समेत 23 लोगों की मौत हो गई. हालांकि फिलहाल यूक्रेन में बच्चे ड्रोन उड़ाना शुरू नहीं कर रहे हैं, लेकिन अगले साल से रूस के स्कूलों में ड्रोन उड़ाने की शिक्षा रेगुलर सिलेबस का हिस्सा बनने जा रही है. नौवीं क्लास तक छात्रों को यूक्रेनी शहरों पर हमलों में इस्तेमाल किए जाने वाले लड़ाकू ड्रोन असेंबल करना भी सिखाया जाएगा.
रिपोर्ट के अनुसार, सात साल के बच्चे सीधे तौर पर रूस-यूक्रेन युद्ध में हिस्सा नहीं ले रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें भविष्य में ड्रोन पायलट बनने के लिए स्कूलों में ट्रेनिंग दी जाएगी. नौवीं क्लास से इन्हें अलाबुगा पॉलिटेक्निक कॉलेज जैसे संस्थानों में सक्रिय रूप से भर्ती किया जा रहा है, यहां पर उन्हें मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) की ट्रेनिंग दी जा रही है. यूएवी का इस्तेमाल यूक्रेनी इलाकों पर हमले के लिए किया जाता है.
रूस में बच्चों को ड्रोन ट्रेनिंग
अलाबुगा कॉलेज की स्थित बहुत खराब है. यह रूस की राजधानी मॉस्को से 600 मील (965.61 किमी) पश्चिम में स्थित है. इस जगह को बच्चों के माता पिता नरक बतातें हैं. यहां बच्चों से मशीन के पुर्जों जैसा व्यवहार किया जाता है. बच्चों के उत्पीड़न की शिकायते भी सामने आईं हैं. इस कॉलेज से जुड़ने के बाद स्वेर्दलोव्स्क क्षेत्र के 17 साल के डेनिस नाम के एक किशोर ने आत्महत्या तक कर ली. ऐसी भयानक स्थिति के बाद भी कई किशोर इस कॉलेज में आते रहते हैं. प्रचार के जरिए इन सभी पर देशभक्ति का रंग चढ़ जाता है. यहां वेतन काफी ज्यादा है. रूसी मानको के हिसाब से वेतन 700 डॉलर हर महीने से भी ज्यादा है.
ड्रोन युद्ध में बच्चों की भागीदारी
एक हैरान करने वाली बात तो तब सामने आई जब एक 13 साल के बच्चे ने ये कहा कि ड्रोन बनाने पर बहुत खुशी होगी. साथ ही उसने यह भी कहा कि इससे लोग मरे लेकिन ड्रोन न मरे. पुतिन ने इसके लिए प्रवेश की अवधि को 10 साल से कम करके 7 साल कर दिया है. उन्होंने कहा है कि बच्चों को ड्रोन उड़ाना, असेंबल करना और डिजाइन करना सीखना चाहिए. यह उनके लिए जरूरी भी है और बिजी रहने का एक प्रभावी तरीका भी है.
हरियाणा में अनोखा वाकया: दुकानदार को काटने के बाद अचानक मौत का शिकार हुआ कुत्ता, ग्रामीणों में तरह-तरह की चर्चाएं
29 Aug, 2025 05:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत: हरियाणा के पानीपत जिले में ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। दरअसल शहर के बाजार में एक दुकानदार पर कुत्ते ने हमला कर दिया। कुत्ते ने दुकानदार के पैर में दांत लगा दिए। दुकानदर को काटने के बाद अचानक कुत्ते की मौत हो गई। कुत्ते की मौत होगई से सभी लोग हैरानी में पड़ गए। सभी के मन में एक ही सवाल था कि कुत्ते की मौत कैसे हो गई। इस बीच दुकानदार अपना इलाज और जांच करवाने के लिए शहर के सिविल अस्पताल में पहुंचा।
कैसे हुई कुत्ते की मौत
दुकानदार ललित बजाज ने बताया कि वो होलसेल का काम करता है। उसकी महावीर बाजार में प्रेम मंदिर के पास किराना होलसेल की दुकान है। उन्होंने बताया कि जैसे ही मैं अपनी दुकान के बाहर से बाइक पर जा रहा था कि दो कुत्ते आपस में लड़ रहे थे। मैने उन्हें हटाने का प्रयास किया, क्योंकि ये कुत्ते दुकान पर आने वाले ग्राहकों को काटने का प्रयास करते है। इस दौरान एक कुत्ते ने मुझे काट लिया। मुझ काटने के कुछ समय के बाद ही उस कुत्ते की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि कुत्ते की मौत कैसे हुई, इसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है। मुझे भी आसपास के दुकानदारों ने जानकारी दी कि तुझे काटने के बाद कुत्ते की हालत खराब हो गई और उसी मौत हो गई है।
दुकानदार इलाज करवाने पहुंचा अस्पताल
दुकानदार ने बताया कि इस बात से मुझे टेंशन हो गई। मैं हैरान था कि मुझे काटने के बाद अचानक कुत्ता कैसे मर गया। इसिलए मैं अपना इलाज करवाने के लिए सिविल अस्पताल पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने मुझे इंजेक्शन लगा दिया है। वहीं जन सेवा दल के पदाधिकारी चमन गुलाटी ने बताया कि आज प्रदेश के हर शहर में आवारा कुत्तों की संख्या बेहद अधिक हो गई है और सरकारी अस्पतालों में रोजाना कुत्तों द्वारा लोगों को काटने के ऐसे बहुत से केस आ रहे है। परंतु ये केस हमने भी पहली बार सुना है कि युवक को काटने पर कुत्ते की मौत हो गई। युवक को डॉक्टरों द्वारा हिमोग्लोबिन का इंजेक्शन लगा दिया गया है।
रैपर फ्रेंच मोंटाना से सगाई कर चर्चा में आई दुबई की राजकुमारी शेखा महरा
29 Aug, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई । संयुक्त अरब अमीरात के प्रधानमंत्री और दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की बेटी शेखा महरा फिर चर्चा में हैं। खबर है कि शेखा माहरा ने मशहूर मोरक्कन-अमेरिकी रैपर फ्रेंच मोंटाना से सगाई कर ली है। मोंटाना के एक प्रतिनिधि ने बताया कि जोड़े ने इसी साल जून में पेरिस फैशन वीक के दौरान अपने रिश्ते को औपचारिक रूप दिया। साल की शुरुआत में उनका रोमांस पहली बार सार्वजनिक हुआ था, जब यह जोड़ा पेरिस में एक फैशन इवेंट्स के दौरान हाथ में हाथ डाले दिखाई दिया।
शेखा माहरा ने बीते साल एक इंस्टाग्राम पोस्ट में अपने पति मोहम्मद बिन राशिद बिन माना अल मकतूम को तलाक दे दिया था। दोनों ने मई 2023 में शादी की थी और उनकी एक बेटी भी है। शेखा माहरा ने पोस्ट के जरिए तलाक की घोषणा की थी जो खूब सुर्खियां बना था। उन्होंने अपने पूर्व पति पर बेवफाई का आरोप लगाया था।
दुबई की राजकुमारी ने पोस्ट में लिखा था, डियर हसबैंड, चूंकि आप अपने दूसरे साथियों के साथ बिजी हैं, इसलिए मैं अपने तलाक की घोषणा करती हूं। मैं आपको तलाक देती हूं, मैं आपको तलाक देती हूं और मैं आपको तलाक देती हूं। अपना ख्याल रखना। आपकी पूर्व पत्नी। तलाक के बाद उन्होंने अपने ब्रांड माहरा एम1 के तहत डिवोर्स नाम से परफ्यूम लाइन भी लांच की।
31 वर्षीय माहरा और 40 वर्षीय रैपर की मुलाकात 2024 के अंत में हुई थी, जब राजुकमारी ने मोंटाना को दुबई का दौरा कराया था। उन्होंने इसकी तस्वीरें साझा की थीं। उसके बाद से उन्हें अक्सर दुबई और मोरक्को में साथ देखा गया है। वे महंगे रेस्टोरेंट में खाना खाते हैं, मस्जिदों में जाते हैं और पेरिस के पोंट डेस आर्ट्स ब्रिज पर टहलते हैं।
किसी परीकथा जैसा लगता है इंग्लैंड का शहर डार्टमाउथ
29 Aug, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डार्टमाउथ । अगर आप किसी जादुई और अनोखी जगह का अनुभव लेना चाहते हैं, तो इंग्लैंड के डेवोन में बसा डार्टमाउथ आपके लिए बेहतरीन विकल्प है। यह शहर किसी परीकथा जैसा लगता है, जहां हर गली, हर घर और हर नजारा किसी सपनों की दुनिया का हिस्सा प्रतीत होता है। डार्टमाउथ की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी गलियों और घरों में छिपी है। यहां की पत्थरों से बनी घुमावदार गलियां रंग-बिरंगे कॉटेज से सजी हुई हैं। हर कदम पर ऐसा लगता है मानो आप किसी पुराने अंग्रेजी किस्से का हिस्सा बन गए हों। यहां का डार्टमाउथ ओल्ड मार्केट, जो 1828 से चलता आ रहा है, आज भी लोगों को आकर्षित करता है। हर शुक्रवार यहां स्थानीय कारीगर और किसान अपने उत्पाद बेचते हैं। वहीं, हर महीने के दूसरे शनिवार को लगने वाले गुड फूड और आर्टिसन मार्केट में डार्टमूर शहद और ताजी ब्रेड जैसे व्यंजन मिलते हैं। खाने के शौकीनों के लिए यहां एंबैंकमेंट बिस्ट्रो और रॉकफिश जैसे रेस्टोरेंट भी हैं, जो अपने स्वादिष्ट फिश एंड चिप्स के लिए मशहूर हैं। इतिहास प्रेमियों के लिए भी यह शहर किसी खजाने से कम नहीं है। यहां 600 साल पुराना डार्टमाउथ कैसल स्थित है, जिसके गन टॉवर और घुमावदार रास्ते 100 साल के युद्ध की कहानियां सुनाते हैं।
शहर का गौरव बढ़ाने वाला ब्रिटानिया रॉयल नेवल कॉलेज भी यहां है, जहां अब भी रॉयल नेवी के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाता है। पर्यटक यहां का दो घंटे का गाइडेड टूर लेकर इसके 150 साल पुराने इतिहास को करीब से जान सकते हैं। वहीं, बेयार्ड्स कोव फ़ोर्ट नामक किला, जो 1522 में बना था, मुफ्त में घूमने के लिए खुला रहता है। हालांकि डार्टमाउथ समुद्र किनारे नहीं बसा, लेकिन यहां के बीच किसी भी तटीय इलाके से कम खूबसूरत नहीं हैं। कैसल कोव और सुगरी कोव परिवार के साथ समय बिताने के लिए आदर्श स्थान हैं। खासकर सुगरी कोव स्थानीय लोगों की पहली पसंद है, क्योंकि यह शांत और कम भीड़भाड़ वाला है। नदी पर बोट ट्रिप्स का आनंद यहां की यात्रा का सबसे यादगार हिस्सा होता है।
साफ पानी में तैरती मछलियों को देखते हुए ‘द फिज बोट’ पर सफर करना हर पर्यटक को मंत्रमुग्ध कर देता है। अगस्त के आखिर में यहां का नजारा और भी खास हो जाता है। डार्टमाउथ रॉयल रेगाटा के दौरान नौकायन, लाइव संगीत और आतिशबाजी से शहर का हर कोना जगमगा उठता है। इसी दौरान दुनिया के आखिरी समुद्री पैडल स्टीमर ‘वेवरली’ को भी देखने का मौका मिलता है। यहां तक पहुंचना बेहद आसान है। किंग्सवेयर तक ट्रेन से आकर छोटी पैसेंजर फेरी द्वारा डार्टमाउथ पहुंचा जा सकता है। गाड़ी से आने वाले यात्री किंग्सवेयर से कार फेरी ले सकते हैं।
रहस्यमयी कबीले का हिस्सा बनी अमेरिका से गुम हुई एक महिला
29 Aug, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । अमेरिका के टेक्सास की रहने वाली गुम हुई एक महिला अजीबोगरीब कहानी में बदल गई। ये महिला लगभग पांच हजार किलोमीटर दूर स्कॉटलैंड के जंगलों में मिली और वहां वह खुद को एक रहस्यमय कबीले का हिस्सा बता रही थी। इस महिला का नाम कौरा टेलर है, जिसे अब लोग लेडी साफी के नाम से जानते हैं। वह “किंगडम ऑफ कुबाला” नामक एक छोटे से समूह के साथ रह रही है। इस समूह का नेतृत्व किंग अतेहेने नाम का व्यक्ति करता है, जो पहले कोफी ऑफेह नामक ओपेरा सिंगर था। उसके साथ उसकी पत्नी क्वीन नांदी और अब कौरा टेलर भी शामिल हैं। यह समूह खुद को “खोया हुआ हिब्रू कबीला” बताता है और दावा करता है कि वे स्कॉटलैंड और इंग्लैंड के मूल निवासी “ब्लैक जैकोबाइट्स” के वंशज हैं, जिन्हें 400 साल पहले इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम ने निष्कासित किया था। समूह का कहना है कि असली यरुशलम स्कॉटलैंड में है और किंग अतेहेने खुद को राजा दाऊद का वंशज मानते हैं।
महिला की गुमशुदगी पर परिवार परेशान था, लेकिन खुद कौरा टेलर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह कभी लापता नहीं थीं, बल्कि अपने शोषणकारी परिवार से बचकर भागी थीं। उनका आरोप है कि बचपन से उनका यौन शोषण होता रहा और यही वजह है कि उन्होंने सबकुछ छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने साफ लिखा कि “आप अपने शोषकों के लिए कभी गायब नहीं होते।” इस बयान के बाद मामला और रहस्यमय हो गया। यह समूह आधुनिक कानून और नियमों को मानने से इनकार करता है। उनका कहना है कि जमीन किसी सरकार की नहीं, बल्कि केवल सृष्टिकर्ता यहोवाह की है। वे खुले तंबुओं में रहते हैं, झरनों के पानी से स्नान करते हैं और ध्यान के जरिए धरती से जुड़ने की बात कहते हैं। उनका मानना है कि पुरानी दुनिया खत्म हो रही है और अब दूसरा निर्वासन शुरू हो चुका है।
इसी सोच के कारण वे खुद को बाकी समाज से अलग मानते हैं। लेकिन स्कॉटिश अधिकारियों के लिए यह समस्या बन गया। उन्हें सरकारी जमीन पर अवैध रूप से डेरा डालने के कारण हटाया गया, मगर उन्होंने निजी जमीन पर फिर से डेरा डाल लिया। काउंसिल का कहना है कि अब यह मामला भूमि मालिक के अधिकार क्षेत्र में है। इस बीच समूह ने आरोप लगाया कि उनके तंबू जलाए गए और उन्हें बार-बार प्रताड़ित किया जा रहा है। इस घटना ने स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है।
खगोलविदों ने ब्रह्मांड में खोजा दुर्लभ स्टार सिस्टम
29 Aug, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । ब्रह्मांड में एक ऐसा अद्भुत और दुर्लभ स्टार सिस्टम खोजने का दावा खगोलविदों ने किया है जिसने सभी को हैरान कर दिया है। यह अनोखा सिस्टम पृथ्वी से करीब 82 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है। खगोलविदों ने इसे यूपीएम जे1040−3551 आबबाब नाम दिया गया है। यह पहला ऐसा ज्ञात क्वाड्रपल सिस्टम है जिसमें दो युवा रेड ड्वार्फ स्टार्स और उनके चारों ओर घूमते दो ब्राउन ड्वार्फ्स शामिल हैं। यह खोज न केवल खगोलशास्त्र की दिशा बदल सकती है, बल्कि ब्राउन ड्वार्फ्स यानी तथाकथित ‘फेल्ड स्टार्स’ के रहस्यों को सुलझाने में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। ब्राउन ड्वार्फ्स खगोल विज्ञान की दुनिया में सबसे रहस्यमयी पिंड माने जाते हैं। इन्हें असली तारा नहीं माना जाता क्योंकि इनमें इतना द्रव्यमान नहीं होता कि वे हाइड्रोजन को हीलियम में बदलने वाली न्यूक्लियर फ्यूज़न प्रक्रिया शुरू कर सकें। यही कारण है कि इन्हें अक्सर ‘नकली तारे’ या ‘अधूरे तारे’ कहा जाता है। वे उम्र के साथ धीरे-धीरे ठंडे होते जाते हैं, और वैज्ञानिक अब तक इनके सही विकासक्रम को समझने की कोशिश कर रहे हैं। इस सिस्टम में दो रेड ड्वार्फ्स और दो ब्राउन ड्वार्फ्स अलग-अलग जोड़ियों में हैं।
दोनों जोड़ियां अपने-अपने परिक्रमण चक्र में तो कुछ दशकों में घूम जाती हैं, लेकिन दोनों मिलकर एक बड़े कॉमन सेंटर ऑफ मास की परिक्रमा करने में एक लाख साल से भी अधिक समय लेती हैं। इसे एक ब्रह्मांडीय नृत्य की तरह समझा जा सकता है, जहां चार पिंड अद्भुत तालमेल में घूम रहे हों। ये तारे इतने धुंधले हैं कि नंगी आंखों से दिखाई नहीं देते। रेड ड्वार्फ्स को करीब 1.5 प्रकाश-वर्ष दूरी तक लाकर देखा जा सकता है, जबकि ब्राउन ड्वार्फ्स तो 1,000 गुना ज्यादा धुंधले होते हैं और केवल इन्फ्रारेड तकनीक में ही दिखाई देते हैं। इस खोज के पीछे ईएसए के गाइया स्पेसक्राफ्ट और नासा के वाइज मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनकी मदद से वैज्ञानिकों ने इन सितारों की गति और स्थिति का पता लगाया।
इस खोज की सबसे खास बात यह है कि यह सिस्टम वैज्ञानिकों को ब्राउन ड्वार्फ्स की उम्र, द्रव्यमान, तापमान और संरचना का सटीक अध्ययन करने का मौका देगा। जहां रेड ड्वार्फ्स का तापमान लगभग 2,900 डिग्री सेल्सियस है, वहीं ब्राउन ड्वार्फ्स का तापमान 420 से 550 डिग्री सेल्सियस तक पाया गया है। पहली बार ऐसा सिस्टम मिला है जिसमें दो T-टाइप ब्राउन ड्वार्फ्स, दो रेड ड्वार्फ्स की परिक्रमा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग तकनीक से इन ब्राउन ड्वार्फ्स का द्रव्यमान और गति और भी सटीक रूप से मापी जा सकेगी।
लेक मिशिगन की गहराइयों में मिला 138 साल पुराना जहाज
29 Aug, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। हाल ही में, विस्कॉन्सिन के डोर काउंटी में लेक मिशिगन की गहराइयों में एक 138 साल पुराने जहाज का मलबा मिला है। इस खोज ने समुद्री इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। डोर काउंटी एडवेंचर राफ्टिंग के मालिक और टूर गाइड मैट ओल्सन को एक रहस्यमयी सैटेलाइट तस्वीर में पानी के भीतर एक अजीब धब्बा दिखाई दिया। उत्सुकता के कारण, उन्होंने अपनी नाव, सोनार और डाइविंग गियर के साथ रोउलीज बे के पास जांच शुरू की। जैसे ही उन्होंने गोता लगाया, उन्हें एक विशाल जहाज के अवशेष मिले।
यह जहाज करीब 130 फुट लंबा और दो मस्तूलों वाला था, जिसे मजबूत ओक की लकड़ी से बनाया गया था। यह जहाज 1887 में मिशिगन की ओर आयरन ओर लोड करने जा रहा था। यात्रा के दौरान, एक भीषण तूफान और घने कोहरे के कारण यह जहाज रास्ते से भटक गया और बार्कर शोल नामक चट्टान से टकराकर डूब गया।
अच्छी बात यह थी कि जहाज पर सवार सभी लोग सुरक्षित बचकर पास के स्पाइडर आइलैंड पर पहुंच गए थे। हालांकि, उस समय जहाज को खोजने के कई प्रयास किए गए, लेकिन वे सभी असफल रहे। उस समय इसकी कीमत लगभग 25 लाख अमेरिकी डॉलर थी।
मैट ओल्सन ने जब यह खोज विस्कॉन्सिन हिस्टोरिकल सोसायटी के समुद्री पुरातत्वविदों के साथ साझा की, तो इसकी पुष्टि हुई कि यह एक ऐतिहासिक जहाज है। समुद्री पुरातत्वविद् तमारा थॉमसेन ने भी इस खोज को बहुत महत्वपूर्ण बताया। यह मैट ओल्सन की तीसरी बड़ी खोज है। इससे पहले उन्होंने 2023 में सनसाइन और 2024 में ग्रे ईगल नामक जहाजों का मलबा भी खोजा था। यह खोज सिर्फ एक जहाज का पता लगाना नहीं है, बल्कि यह लेक मिशिगन की गहराइयों में दबे हुए इतिहास को फिर से दुनिया के सामने लाती है।
फ्लाइट में मारपीट का खामियाजा: यात्री ने ठोका 166 करोड़ का मुआवजा दावा
28 Aug, 2025 01:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका में डेल्टा एयरलाइंस की फ्लाइट पर एक यात्री के साथ कथित मारपीट के मामले में पीड़ित शख्स ने 166 करोड़ का मुआवजा मांगा है।यात्री मोहम्मद शिबली ने एयरलाइन पर 20 मिलियन डॉलर यानी करीब 166 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा है। उनका आरोप है कि फ्लाइट अटेंडेंट ने बीच सफर में उन्हें थप्पड़ जड़ दिया। 29 जुलाई को शिबली अपनी पत्नी और दो छोटे बच्चों (4 और 2 साल) के साथ अटलांटा से फ्रेज़्नो जा रहे थे। फ्लाइट में छोटा बेटा पानी के लिए रोने लगा। शिबली की पत्नी ने पानी मांगा तो अटेंडेंट ने देने से मना कर दिया।
शिबली खुद पीछे जाकर अटेंडेंट से पानी मांगने पहुंचे। वहां भी उन्हें सख्त लहजे में मना कर दिया गया। हालांकि बाद में दूसरे अटेंडेंट्स ने पानी दिया और माफी भी मांगी। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। कुछ देर बाद वही अटेंडेंट फिर से उनके पास पानी लेकर आई। शिबली ने मना कर दिया और कहा कि अब उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए। इसी दौरान अटेंडेंट पास से गुजरी और कान में गाली बक दी। शिबली ने भी पलटकर शब्द कहे। तभी अचानक अटेंडेंट ने उनके चेहरे पर जोरदार थप्पड़ जड़ दिया और फिर बाकी यात्रियों को सर्व करना जारी रखा। शिबली का कहना है कि उन्होंने पूरी फ्लाइट में संयम रखा लेकिन खुद को अपमानित और असुरक्षित महसूस किया। उन्होंने कहा मैं लगभग चार घंटे उस फ्लाइट में फंसा रहा। बेटे के सामने मैं असहाय दिखा, पत्नी के सामने बेइज्जत हुआ। किसी को भी हवा में उड़ते विमान में शारीरिक हमला नहीं झेलना चाहिए।
वकील का कहना है, डेल्टा को अपने हर कर्मचारी को फिलिस्तीन पर शिक्षा और संवेदनशीलता ट्रेनिंग देनी चाहिए। मेरे क्लाइंट का दिन खराब किया गया है और अब इसकी कीमत डेल्टा को चुकानी होगी।” उधर, एयरलाइन ने बयान जारी कर कहा है कि आरोपी अटेंडेंट को सस्पेंड कर दिया गया है और मामले की जांच चल रही है। शिबली के वकील अली अवाद ने दावा किया कि मामला सिर्फ पानी का नहीं बल्कि नस्लीय भेदभाव का है। दरअसल, शिबली की पत्नी की टी-शर्ट पर फलस्तीन लिखा था। वकील ने इसे डेल्टा एयरलाइंस की पुरानी घटना से जोड़ा, जब अटेंडेंट्स ने फिलिस्तीनी झंडे वाले बैज लगाए थे और सोशल मीडिया पर उन्हें “हामास बैज” कहा गया था।
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