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मुहम्मद यूनुस पर भड़कीं शेख हसीना, बोले – आग से खेलने वालों को नहीं बख्शा जाएगा
14 Apr, 2025 03:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश की पूर्व मुख्यनंत्री शेख हसीना ने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर फिर निशाना साधा है। हसीना ने उन्होंने यूनुस स्वार्थी और आत्मकेंद्रित शख्त बताया। उन्होंने कहा कि यूनुस ने ने सत्ता की भूख में विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश को तबाह करने की साजिश रची। आठ मिनट के अपने वर्चुअल संबोधन में हसीना ने अबू सईद की हत्या पर भी संदेह जताया, जो एक छात्र प्रदर्शनकारी था।
हसीना ने यूनुस पर लगाए गंभीर आरोप
बीते साल भारत आई हसीना ने कुछ दिन पहले बांग्लादेश लौटने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि कोई तो वजह है जिसकी वजह से अल्लाह ने उन्हें जीवित रखा है। इस बीच रविवार को अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने यूनुस पर बांग्लादेश के इतिहास को मिटाने का आरोप लगाया।
हसीना ने यूनुस को दी चेतावनी
शेख हसीना ने अपने संबोधन में कहा, "बांग्लादेशी स्वतंत्रता आंदोलन के सभी चिह्न मिटाए जा रहे हैं। मुक्ति योद्धाओं (स्वतंत्रता सेनानियों) का अपमान किया जा रहा है। हमने उनकी यादों को जीवित रखने के लिए सभी जिलों में मुक्ति योद्धा परिसर बनाए थे, लेकिन उन्हें जला दिया जा रहा है। क्या यूनुस इसे सही ठहरा पाएंगे?" उन्होंने मुख्य सलाहकार को चेतावनी देते हुए कहा, "अगर आप आग से खेलेंगे, तो यह आपको भी जला देगी।"
'सबकुछ नष्ट हो रहा है'
हसीना ने विदेशी साजिश के अपने दावे को दोहराते हुए कहा, "उस कर्जदार, सत्ता के भूखे, पैसे के भूखे, आत्म-केंद्रित व्यक्ति ने एक विदेशी साजिश रची और देश को नष्ट करने के लिए विदेशी धन का इस्तेमाल किया। बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) और जमात-ए-इस्लामी (राजनीतिक) हत्याएं कर रहे हैं और (अवामी लीग के नेताओं) को परेशान कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि आवामी लीग के शासन के अंत ने बांग्लादेश को औद्योगिक झटका दिया है। हजारों कारखाने बंद हो चुके हैं और आवामी नेताओं से जुड़े कारखानों को जला दिया गया है। उद्योग खत्म हो रहे हैं। होटल, अस्पताल, सबकुछ नष्ट हो रहा है।
'आवामी लीग के नेताओं को फंसाया जा रहा है'
शेख हसीना ने कहा कि यूनुस को परिणामों के बारे में अच्छी तरह पता था, लेकिन वो सत्ता के भूखे थे। उन्होंने कहा, "आवामी लीग के नेताओं को उपद्रवियों की मौत के लिए फंसाया जा रहा है। जिन लोगों ने पुलिस स्टेशन जलाए और पुलिसकर्मियों को पीट-पीटकर मार डाला, उन पर आरोप नहीं लगाए जा रहे हैं। आवामी लीग के नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं। हमारे नेता घर पर नहीं रह पा रहे हैं।"
हसीना ने यूनुस को कहा आतंकवादी
अवामी लीग की प्रमुख ने कहा, "अगर कानून लागू करने वाले कर्मियों की सार्वजनिक रूप से हत्या की जाती रहेगी तो यह देश कैसे चलेगा? क्या यूनुस को यह समझ में नहीं आता? या फिर वह देश को विनाश की ओर ले जा रहे हैं? यह फासीवादी आतंकवादी यूनुस सत्ता की भूख में हमारे देश को नष्ट कर रहा है।"
अमेरिका में विदेशियों के लिए नए नियम लागू, फॉर्म और फिंगरप्रिंट अनिवार्य
14 Apr, 2025 03:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अमेरिका में विदेशी नागरिकों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किए जाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से इस संबंध में नई चेतावनी जारी की गई है। यूएस के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने कहा है कि विदेशियों को 30 दिन से ज्यादा रहना है, तो रजिस्ट्रेशन करा लें। ऐसा ना करने पर जुर्माना और जेल दोनों हो सकती हैं। रजिस्ट्रेशन ना कराने वाले विदेशों को अमेरिका से डिपोर्ट भी किया जा सकता है। ऐसे में अवैध विदेशियों के लिए मैसेज है कि वह तुरंत अमेरिका से निकल जाएं। अमेरिका में ये नई व्यवस्था 11 अप्रैल से लागू हो गई है। ट्रंप प्रशासन ने इसे सख्ती से लागू करने के संकेत दिए हैं।
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने 'अवैध एलियंस को संदेश' नाम से एक पोस्ट जारी किया है। इसमें कहा गया है कि बिना इजाजत रहने वाले विदेशी नागरिक खुद देश छोड़ दें। पोस्ट में लिखा है, 'खुद से डिपोर्ट होना एकदम सुरक्षित है। अपनी मर्जी से फ्लाइट चुनकर चले जाइए। अगर आप खुद से डिपोर्ट होते हैं तो अमेरिका में कमाए पैसे रख सकते हैं। खुद से डिपोर्ट होने वाले शख्स को भविष्य में कानूनी रूप से अमेरिका आने का मौका मिल सकता है।'
'आप गैरकानूनी तरीके से रुके तो होगी मुश्किल'
DHS की ओर से कहा गया है कि अगर किसी को अवैध रूप से रहते हुए पाया जाता है और डिपोर्ट करने फैसला लिया जाता है तो फिर वह मुश्किल में आएगा। उसको हर दिन 998 डॉलर का जुर्माना देना होगा। किसी ने खुद से डिपोर्ट होने का वादा किया और ऐसा नहीं किया तो जुर्माना 1,000 से 5,000 डॉलर तक बढ़ जाएगा। ऐसे शख्स को जेल भी हो सकती है।
डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने बीते हफ्ते ये नया नियम पेश किया है। वाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने बताया है कि अमेरिका में 30 दिनों से ज्यादा रहने वाले सभी विदेशी नागरिकों को संघीय सरकार के साथ पंजीकरण कराना होगा। ऐसा नहीं करने वालों गिरफ्तार किया जाएगा, जुर्माना लगाया जाएगा और देश से निकाल दिया जाएगा। ऐसे लोग कभी वापस नहीं आ सकेंगे।
नए नियम के अनुसार, 11 अप्रैल के बाद अमेरिका आने वाले लोगों को 30 दिनों के अंदर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। 14 साल के होने वाले बच्चों को भी दोबारा पंजीकरण कराते हुए अपने फिंगरप्रिंट जमा करने होंगे। इस नियम का ऐलान होते ही कई संगठनों ने इसे भ्रम पैदा करने वाला कहा है। इससे प्रवासियों की मुश्किल बढ़ सकती है।
हज के दौरान गर्मी से होने वाली मौतों पर लगेगा ब्रेक, अगले 16 साल राहत के
14 Apr, 2025 01:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस साल हज 4 जून से शुरू होने जा रहा है, जिसके लिए दुनिया भर से तीर्थ यात्री सऊदी अरब पहुंचने की तैयारी कर रह हैं. हर साल हज करने दुनिया भर से लाखों लोग सऊदी अरब आते हैं और इनका इंतजाम सरकार का हज और उमरा मंत्रालय करता है. पिछले साल हज यात्रा के दौरान के एक बड़ा हादसा हो गया था, जिसमें एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी.
14 से 19 जून 2024 के बीच मक्का में हज यात्रा पर गए कम से कम 1,301 लोगों की अत्यधिक गर्मी के वजह से मौत हो गई, उस समय यहां का तापमान 50 डिग्री से ज्यादा रिकॉर्ड किया गया था. अत्यधिक गर्मी के कारण तीर्थ यात्रियों को हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन हुआ, जो मौत की वजह बना. लेकिन 2026 के हज से ये परेशानी खत्म हो जाएगी.
अब नहीं होगी गर्मी से मौत!
सऊदी राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने इस हफ्ते ऐलान किया कि 2025 में होने वाला हज सीजन अगले 16 सालों के लिए भीषण गर्मी के महीनों के दौरान आने वाला आखिरी हज सीजन होगा.
2026 से शुरू होकर, हज यात्रा धीरे-धीरे ठंडे मौसम में बदल जाएगी – पहले वसंत में और अंत में सर्दियों में. बता दें, ऐसे इस्लामी चंद्र कैलेंडर के क्रमिक बदलाव की वजह से होता है.
हर साल 10 दिन पीछे हट जाता है इस्लामी कैलेंडर
इस्लामी कैलेंडर ग्रेगोरियन कैलेंडर से हर साल 10 दिन पीछे हट जाता है. क्योंकि ये चंद्रमा के मुताबिक चलता है. पिछले कई सालों से हज यात्रा भीषण गर्मी में आ रही थी, अगले साल से गर्मी झेलने वाले लाखों तीर्थयात्रियों के लिए ये एक स्वागत योग्य बदलाव होगा.
हज 2024 के दौरान, मक्का में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस और 51 डिग्री सेल्सियस के बीच बढ़ गया, जिसकी वजह से कई मौतों के साथ-साथ एक ही दिन में हीटस्ट्रोक के 2,760 से अधिक मामले सामने आए थे.
80 लाख लोगों पर मंडरा रहा खतरा, तूफानों से तबाही की ओर बढ़ रहा बांग्लादेश
14 Apr, 2025 01:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश में जलवायु आपदा का खतरा अब दरवाजे पर दस्तक दे रहा है. और इस बार तबाही की आहट पहले से कहीं ज्यादा डरावनी है. वन अर्थ नाम की जानी-मानी साइंटिफिक जर्नल में छपी एक नई स्टडी ने चौंकाने वाली चेतावनी दी है. चेतावनी ये कि वो विनाशकारी तूफान जो पहले सदी में एक बार आते थे, अब हर दशक बांग्लादेश पर कहर बरपा सकते हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, इस तूफान के साथ आने वाला “स्टॉर्म टाइड” यानि समुद्र की उफनती लहरें और बढ़ता समुद्री स्तर मिलकर एक ऐसा विनाशकारी कॉम्बिनेशन बना सकते हैं जो शहरों और गांवों को निगलने की ताकत रखता है. इस डरावनी रिपोर्ट ने देश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की टेंशन बढ़ा दी है. स्टडी कहती है कि अगर हालात नहीं बदले तो आने वाले वक्त में करीब 80 लाख लोग ऐसे तूफानों की चपेट में आ सकते हैं.
क्या है खतरे की असली जड़?
इस रिसर्च को एमआईटी के शोधकर्ता साई रवेला और उनकी टीम ने अंजाम दिया है. रवेला बताते हैं कि भविष्य में भले ही तूफानों की संख्या बहुत ज्यादा न बढ़े, लेकिन उनकी ताकत बढ़ेगी और समुद्र का स्तर भी. इससे तूफानी लहरों का असर कई गुना ज्यादा खतरनाक होगा. रिसर्च में शामिल शोधकर्ताओं की टीम ने क्लाइमेट मॉडल्स की मदद से हजारो काल्पनिक तूफानों को बांग्लागेश के पास सिम्युलेट किया और पाया कि अगर कार्बन उत्सर्जन ऐसे ही बढ़ता रहा तो हर दशक में विनाशकारी तूफानी लहरें आ सकती हैं.
मानसून और चक्रवात एक ही वक्त पर आएंगे
बांग्लादेश का समुद्री किनारा पहले से ही बहुत संवेदनशीनल है. यहां करीब 80 लाख लोग निचले तटीय इलाकों में रहते हैं जो हर साल किसी न किसी तूफान की चपेट में आते हैं. अब तक छह बड़े तूफानों में एक-एक लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. इस रिसर्च में चेताया गया है कि अगर ग्लोबल वार्मिंग का असर ऐसे ही बढ़ता रहा, तो एक और खतरनाक ट्रेंड देखने को मिलेगा. और वे ये कि मानसून और चक्रवात एक ही वक्त पर आने लगेंगे.
अभी तक बांग्लादेश में मानसून जून से सितंबर के बीच आता है, जबकि चक्रवात मई-जून और फिर अक्टूबर-नवंबर में आते हैं. लेकिन अब जलवायु परिवर्तन की वजह से समुद्र गर्म रहेगा, मानसून देर से जाएगा और चक्रवात उसी समय लौट आएंगे. यानी लोगों को कोई भी राहत नहीं मिलेगी.
बचने के लिए क्या किया जा सकता है?
इसका मतलब होगा कि ज़मीन पहले से गीली होगी, नदियों में पहले से पानी भरा होगा और ऊपर से आएगा तूफान, ये दोनों मिलकर बाढ़ और तबाही को कई गुना बढ़ा देंगे. इसे वैज्ञानिक भाषा में कम्पाउंड फ्लड इवेंट्स कहा जाता है. रिसर्चर्स की अगली कोशिश अब इन आंकड़ों को ऐसे टूल्स में बदलने की है, जो बांग्लादेश के स्थानीय लोगों और सरकार की प्लानिंग में काम आएं ताकि समय रहते तैयारी की जा सके.
गाजा अस्पताल में मारा गया मिसाइल हमला, 21 लोगों की हुई मौत और कई कर्मचारी घायल
14 Apr, 2025 01:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरुशलम। इजरायल ने रविवार को गाजा के अल-अहली अस्पताल पर मिसाइल हमला किया। इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है लेकिन अस्पताल के भवन को भारी क्षति हुई है। इजरायल ने कहा है कि हमास के आतंकी इस अस्पताल से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे थे इसलिए उस पर हमला किया गया। गाजा के अन्य इलाकों में हुए ताजा हमलों में 21 लोग मारे गए हैं।
ईसाई समुदाय करता है संचालन
बताया गया है कि हमले से कुछ मिनट पहले इजरायली सेना ने मरीजों और चिकित्सा से जुड़े लोगों को अस्पताल खाली करने के लिए कहा, इसके बाद अस्पताल भवन से दो मिसाइलें टकराईं। इस हमले से अस्पताल का आपात चिकित्सा विभाग, आगंतुक कक्ष नष्ट हो गए हैं और अन्य हिस्सों को भी नुकसान हुआ है।
इस अस्पताल को गाजा का ईसाई समुदाय संचालित करता है। अस्पताल के प्रवक्ता ने कहा है कि सैकड़ों मरीजों और अन्य लोगों को आधी रात में अस्पताल छोड़ना पड़ा, अब वे लोग सड़कों पर हैं। कई मरीजों की जान को खतरा पैदा हो गया है। इस अस्पताल पर इजरायली सेना 2023 में भी कार्रवाई कर चुकी है, तब उस कार्रवाई में कई लोग मारे गए थे।
लेकिन इस बार वहां मौजूद लोगों को परिसर खाली करने का समय दिया गया। यह हमला तब हुआ है जब काहिरा में मिस्त्र, कतर और अमेरिका की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम के लिए वार्ता का नया दौर शुरू हुआ है।
पुतिन से मिले ट्रंप के विशेष दूत, यूक्रेन युद्ध पर तेज़ होगी शांति वार्ता
12 Apr, 2025 12:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लगभग 10 दिनों बाद एक बार फिर सार्वजनिक तौर पर दिखाई दिए. उन्होंने शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से सेंट पीटर्सबर्ग में मुलाकात की. यह मीटिंग यूक्रेन में चल रहे युद्ध को रोकने की कोशिशों का हिस्सा है. चार घंटे से ज्यादा तक दोनों के बीच मीटिंग चलती रही. इस बातचीत को रूस ने ‘यूक्रेन समझौते के पहलुओं’ पर केंद्रित बताया. लेकिन क्या यह मुलाकात शांति की दिशा में कोई बड़ा कदम उठा पाएगी, या फिर बातें सिर्फ खबरों तक सीमित रहेंगी?
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में रूस को शांति के लिए तैयार होने को कहा.
डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर शांति वार्ता में तेजी लाने का दबाव बनाया है. शुक्रवार को उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, ‘रूस को जल्दी करना होगा. इस बेकार और भयानक युद्ध में हर हफ्ते हजारों लोग मर रहे हैं.’ ट्रंप का कहना है कि यह युद्ध कभी नहीं होना चाहिए था. वह विटकॉफ के जरिए पुतिन तक यह संदेश पहुंचा रहे हैं कि बातचीत में देरी बर्दाश्त नहीं होगी. ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर रूस टस से मस नहीं हुआ, तो वह रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगा सकते हैं.
रूस को मीटिंग से ज्यादा उम्मीद नहीं
यह विटकॉफ और पुतिन की इस साल तीसरी मुलाकात थी. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि इस मीटिंग में पुतिन और ट्रंप की आमने-सामने मुलाकात की संभावना पर चर्चा हो सकती है. दोनों नेता फोन पर बात कर चुके हैं, लेकिन ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अभी तक उनकी आमने-सामने मुलाकात नहीं हुई. दिमित्री पेसकोव ने इसे ‘बड़ा’ न बताते हुए कहा कि इस बैठक से कोई चमत्कार की उम्मीद नहीं है. फिर भी, रूस के निवेश दूत किरिल दमित्रियेव ने बातचीत को ‘उपयोगी’ करार दिया. उन्होंने कहा कि यह मीटिंग रूस के लिए अपनी चिंताओं को व्यक्त करने का एक मौका होगी. दोनों पक्षों ने ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने के पिछले समझौते का जिक्र किया है. हालांकि रूस और यूक्रेन एक-दूसरे पर इसका उल्लंघन करने का आरोप लगाते रहे हैं.
पुतिन सच में चाहते हैं शांति?
राष्ट्रपति पुतिन हमेशा शांति की बात करते रहे हैं, लेकिन वह साफ कहते हैं कि इसके लिए कुछ बुनियादी मुद्दों का हल जरूरी है. रूस के मुताबिक, पुतिन चाहते हैं कि यूक्रेन नाटो में शामिल न हो, उसकी सेना का आकार सीमित हो, और रूस के दावे वाले चार यूक्रेनी क्षेत्रों से यूक्रेन पीछे हट जाए. रूस का मानना है कि वह जंग में मजबूत स्थिति में है, क्योंकि वह यूक्रेन के करीब 20 फीसदी हिस्से पर कब्जा किए हुए है और उसकी सेना आगे बढ़ रही है. पुतिन का यह रुख दर्शाता है कि वह स्थायी शांति चाहते हैं, न कि कोई अस्थायी समझौता.
शांति की राह में अड़चन क्या है?
शांति की राह में सबसे बड़ा रोड़ा अविश्वास है. यूक्रेन का कहना है कि रूस की शर्तें मानने का मतलब होगा सरेंडर करना. यूक्रेन ने अमेरिका को उन ठिकानों की लिस्ट भेजी है, जहां रूस ने हाल में हमले किए, जो ऊर्जा समझौते का उल्लंघन है. दूसरी तरफ, रूस का मानना है कि यूक्रेन को कुछ इलाकों को छोड़ना होगा, क्योंकि जंग में वह कमजोर स्थिति में है. यह टकराव शांति की राह को मुश्किल बना रहा है.
ईरान से भी बात करेंगे विटकॉफ
विटकॉफ की यह यात्रा सिर्फ रूस तक सीमित नहीं थी. वह शनिवार को ओमान में ईरान के साथ उसकी परमाणु नीति पर मीटिंग करने वाले हैं. ट्रंप ने समझौते को तैयार नहीं होने पर ईरान को सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है.
अमेरिका की इमिग्रेशन कोर्ट का बड़ा फैसला, महमूद खलील होंगे देश से डिपोर्ट
12 Apr, 2025 11:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका में पिछले दिनों एक्टिविस्ट महमूद खलील की गिरफ्तारी को लेकर जमकर बवाल मचा. न्यूयॉर्क में ट्रंप टॉवर पर महमूद खलील की गिरफ्तारी को लेकर सैकड़ों प्रदर्शनकारी विरोध करते दिखाई दिए. इसी के बाद अब इस बात पर फैसला लिया जा रहा है कि खलील को देश से डिपोर्ट किया जाएगा या नहीं. 8 मार्च 2025 को हुई गिरफ्तारी के बाद खलील इस समय जेल में है.
अमेरिकी इमिग्रेशन जज ने शुक्रवार को फैसला सुनाया कि फिलिस्तीनी कार्यकर्ता महमूद खलील को निर्वासित किया जा सकता है. दरअसल, महमूद खलील कोलंबिया यूनिवर्सिटी का छात्र है जिसको राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने न्यूयॉर्क शहर में एक महीने पहले गिरफ्तार किया था.
कोर्ट ने सुनाया फैसला
फिलिस्तीनी कार्यकर्ता महमूद खलील को निर्वासित किए जाने का फैसला लुइसियाना में लासेल इमिग्रेशन कोर्ट के जज जेमी कॉमन्स ने सुनाया है. हालांकि, इस फैसले के आधार पर ही खलील को निर्वासित नहीं किया जाएगा, यह अंतिम फैसला नहीं था, लेकिन यह विदेशी फिलिस्तीनी समर्थक छात्रों को निर्वासित करने के उनके प्रयासों में रिपब्लिकन राष्ट्रपति के लिए एक महत्वपूर्ण जीत का प्रतिनिधित्व करता है.
विदेश मंत्री ने लिखा पत्र
1952 के इमिग्रेशन और राष्ट्रीयता अधिनियम का हवाला देते हुए, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पिछले महीने निर्धारित किया था कि खलील अमेरिकी विदेश नीति के हितों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और उनके “अन्यथा वैध” (Otherwise Lawful) भाषण और सक्रियता के लिए उन्हें निर्वासित किया जाना चाहिए.
रुबियो ने लिखा, यहूदी विरोधी प्रदर्शन और विघटनकारी गतिविधियों में उनकी भूमिका के लिए खलील को यूएस से हटा दिया जाना चाहिए, यह अमेरिका में यहूदी छात्रों के लिए शत्रुतापूर्ण माहौल को बढ़ावा देता है.
हालांकि, रुबियो के पत्र में खलील पर किसी भी कानून को तोड़ने का आरोप नहीं लगाया गया, लेकिन कहा गया कि विदेश विभाग उन अप्रवासियों की कानूनी स्थिति को रद्द कर सकता है जो अमेरिकी विदेश नीति के हितों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, भले ही उनकी मान्यताएं, संघ या बयान “अन्यथा वैध” हों.
90 मिनट तक चली सुनवाई
जज ने खलील के वकीलों के विदेश मंत्री मार्को रुबियो को समन करने और 1952 के कानून के तहत उनके संकल्प के लिए उनके पास मौजूद “उचित आधार” के बारे में सवाल करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. जज का फैसला 90 मिनट की सुनवाई के बाद सामने आया.
कौन हैं मोहम्मद खलील?
खलील, फिलिस्तीन समर्थक छात्र विरोध आंदोलन में एक प्रमुख व्यक्ति है. खलील सीरिया में एक फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविर में पैदा हुआ था और वो अल्जीरिया की नागरिकता रखता है और पिछले साल अमेरिका का वैध स्थायी निवासी बन गया है. खलील की पत्नी अमेरिकी नागरिक हैं. गाजा में युद्ध विराम को लेकर खलील कोलंबिया में मुखर तौर पर सामने आए. CUAD समूह के साथ मिलकर इजरायल के साथ आर्थिक संबंधों को तोड़ने की भी मांग की थी.
फिलहाल, खलील लुइसियाना जेल में है, जहां संघीय अधिकारियों ने उसे 8 मार्च को लगभग 1,200 मील (1,930 किमी) दूर कोलंबिया यूनिवर्सिटी के अपार्टमेंट में गिरफ्तारी के बाद ट्रांसफर कर दिया था.
जज कॉमन्स ने निर्वासन आदेश जारी करने पर विचार करने से पहले खलील के वकीलों को राहत के लिए आवेदन करने के लिए 23 अप्रैल तक का समय दिया है. न्यू जर्सी में एक अलग मामले में, अमेरिकी जिला न्यायाधीश माइकल फार्बिअर्ज़ ने खलील के निर्वासन को रोक दिया है, न्यायाधीश खलील के दावे पर विचार करते हैं कि उनकी गिरफ्तारी अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा का उल्लंघन करते हुए की गई थी.
खलील ने कोर्ट में क्या कहा?
जैसे ही कॉमन्स की कार्यवाही स्थगित हुई, खलील आगे की ओर झुके और अदालत को संबोधित करने के लिए कहने लगे. कॉमन्स झिझकीं, फिर सहमत हो गईं. खलील ने मंगलवार को अपनी सुनवाई में उनकी टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि अदालत के लिए “उचित प्रक्रिया अधिकार और मौलिक निष्पक्षता” से अधिक जरूरी कुछ भी नहीं है.
खलील ने कहा, साफ तौर पर हम ने आज जो देखा, इनमें से कोई भी सिद्धांत आज या इस पूरी प्रक्रिया में मौजूद नहीं था. यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन ने मुझे मेरे परिवार से एक हजार मील दूर इस अदालत में भेजा है.
खलील के वकीलों ने एक वीडियो लिंक के जरिए से पेश होकर शिकायत की कि उन्हें रुबियो के पत्र और ट्रंप प्रशासन ने जो इस हफ्ते कॉमन्स को जो सबूत सौंपे उसकी समीक्षा करने के लिए 48 घंटे से भी कम समय दिया गया था.
सिंधु नदी सूख रही है, शेरी रहमान ने शहबाज सरकार को घेरा
12 Apr, 2025 11:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान की महिला सांसद ने एक ऐसा बयान दिया है जो शहबाज शरीफ को नींद से उठाने का काम करेगा. सीनेटर शेरी रहमान ने बुधवार को सिंधु नदी सिस्टम का मुद्दा उठाया है. सांसद शेरी रहमान ने सिंधु नदी का मामला उठाते हुए देश में जल संकट पर चिंता जताई. सिंधु नदी में पानी 100 साल के ऐतिहासिक निचले स्तर पर है.
सांसद ने जल के निचले स्तर को लेकर तत्काल कार्रवाई के लिए कहा. पूर्व जलवायु परिवर्तन मंत्री ने जोर देकर कहा कि हालात अब नेशनल इमरजेंसी जैसे है और इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए. जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण समन्वय पर सीनेट की स्थायी समिति के प्रमुख सीनेटर रहमान ने चेतावनी दी कि सिंधु नदी हमारी आंखों के सामने सूख रही है.
जल संकट का मुद्दा उठाया
सांसद शेरी रहमान ने कहा, जलवायु परिवर्तन में तेजी के चलते बारिश में 40 प्रतिशत की गिरावट आई है. सुक्कुर बैराज में जल स्तर में 71 प्रतिशत की गिरावट देखी जा रही है, जबकि सभी तीन बैराजों में कुल कमी 65 प्रतिशत तक पहुंच गई है. ये चौंका देने वाली संख्याएं हैं.”
रहमान ने संकट की वर्तमान प्रतिक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि तेजी से घटते जल संसाधनों को संरक्षित करने के बजाय, नहरों से पानी निकाला जा रहा है, जिससे सिंधु नदी का पानी और भी कम हो रहा है.
“पानी के अधिकार पर कोई समझौता नहीं”
इस मामले पर तत्काल और एकजुट राष्ट्रीय कार्रवाई के लिए कहते हुए पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) नेता ने कहा कि उनकी पार्टी लोगों के पानी के अधिकार पर कोई समझौता नहीं करेगी. उन्होंने कहा, “हमें प्रांतों और महासंघ के बीच तत्काल समन्वय की जरूरत है. पीपीपी हमेशा लोगों के अधिकारों के लिए खड़ी रही है और यह इस महत्वपूर्ण संसाधन तक उनकी पहुंच के लिए संघर्ष करेगी.
सरकार से समाधान की अपील
शेरी रहमान ने संघीय सरकार से पानी की कमी को जलवायु आपातकाल घोषित करने का आग्रह किया और संघीय सरकार से गंभीर पानी के मुद्दे के समाधान के लिए तत्काल सीसीआई बैठक बुलाने का आग्रह किया. उन्होंने आगे कहा, यह आरोप-प्रत्यारोप का समय नहीं है.
चीन का अजूबा: 1 मिनट में तय होगी 1 घंटे की दूरी, बना सबसे ऊंचा ब्रिज
12 Apr, 2025 11:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चीन अपने नाम एक और रिकॉर्ड दर्ज करने जा रहा है, जिसकी देश ने पूरी तरह से तैयारी कर ली है. देश में दुनिया के सबसे ऊंचे ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है. तैयार होने के बाद यह दुनिया का सबसे ज्यादा हाइट वाला ब्रिज होगा. जिससे 1 घंटे का रास्ता 1 मिनट में तय किया जा सकेगा. चीन जून में हुआजियांग ग्रांड कैन्यन ब्रिज को खोलने के लिए तैयार है. यह ब्रिज 2,051 फीट ऊंचा है.
इस ब्रिज को तैयार करने के लिए चीन ने 216 मिलियन पाउंड (2200 करोड़ रुपये) खर्च किए हैं. इससे ट्रेवल करने में लोगों के समय की काफी ज्यादा बचत होगी.
ब्रिज क्यों है खास?
यह ब्रिज सिर्फ इसीलिए खास और अलग नहीं है क्योंकि यह ट्रेवल टाइम को कम करेगा बल्कि यह ब्रिज एफिल टॉवर से 200 मीटर ऊंचा है और तीन गुना ज्यादा वजन वाला है. चीनी राजनेता झांग शेंगलिन ने कहा, यह सुपर प्रोजेक्ट चीन की इंजीनियरिंग क्षमताओं को सामने रखेगा और गुइझोउ के विश्व स्तरीय टूरिस्ट प्लेस बनने के लक्ष्य को बढ़ावा देगा.
2 महीने में किया गया तैयार
ब्रिज के स्टील ट्रस का वजन लगभग 22,000 मैट्रिक टन है जोकि तीन एफिल टावरों के बराबर है. बड़ी बात यह है कि इस पुल को सिर्फ दो महीनों में तैयार किया गया है. चीफ इंजीनियर ली झाओ ने कहा, पुल को दिन-ब-दिन बढ़ते देखना और घाटी के ऊपर खड़ा होना मुझे इसकी उपलब्धि पर गर्व महसूस कराता है.
टूरिज्म को बढ़ाएगा
यह ब्रिज जहां एक तरफ चीन के ग्रामीण क्षेत्र को जोड़ने का काम करेगा और परिवहन में आसानी पैदा करेगा. वहीं, दूसरी तरफ यह नया पुल एक प्रमुख टूरिस्ट आकर्षण भी बनेगा और बड़ी तादाद में वैश्विक स्तर पर लोग इस ब्रिज को देखने के लिए आएंगे.
रहने वाले क्षेत्रों, एक ग्लास वॉकवे और दुनिया में ‘सबसे ऊंची बंजी जंप’ की भी योजना है. पुल अधिक प्रभावशाली है क्योंकि यह नीचे की प्रमुख घाटी के ऊपर लगभग पूरी तरह से लटका हुआ है. चीन के जिस क्षेत्र में यह पुल बनाया जा रहा है, वह ग्रामीण समुदायों को जोड़ने में मदद करने वाले दुनिया के 100 सबसे ऊंचे पुलों में से लगभग आधे वहां पर है.
साल 2016 में, चीन का सबसे ऊंचा पुल बेइपांजियांग में बनाया गया था, जिसकी ऊंचाई 1,854 फीट थी. जबकि हुआजियांग ग्रांड कैन्यन ब्रिज अधिक प्रभावशाली है क्योंकि यह नीचे प्रमुख घाटी के ऊपर लगभग पूरी तरह से निलंबित है. इसी के साथ इसकी ऊंचाई 2,051 फीट है.
कार्नेगी समिट में भारत की डिजिटल डिप्लोमेसी को मिली वैश्विक मान्यता
12 Apr, 2025 11:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्लोबल डिजिटल शासन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में भारत का बढ़ता प्रभाव कार्नेगी ग्लोबल टेक्नोलॉजी समिट में सामने आया, जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने सुरक्षित, इनक्लूसिव और इनोवेशन ड्रिवेन साइबरस्पेस को आकार देने में देश की महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र किया. समिट के दौरान बोलते हुए, जर्मनी के विदेश कार्यालय में साइबर, विदेश और सुरक्षा नीति की डायरेक्टर मारिया अदेबहर ने उभरते डिजिटल क्षेत्र में भारत के रणनीतिक महत्व की प्रशंसा की.
उन्होंने कहा कि यह समिट भारत के साथ संबंधों को गहरा करने का एक शानदार अवसर है. भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए भारत के साथ काम करना महत्वपूर्ण है. मारिया ने कहा कि दुनिया के लोकतंत्रों को एक ऐसा साइबरस्पेस बनाने के लिए सहयोग करना चाहिए जो सुरक्षित, पारदर्शी और सभी के लिए सुलभ हो.
हाईटेक डेवलपमेंट में सबसे आगे
मारिया अदेबहर ने इस बात पर जोर दिया कि एआई को इनक्लूसिव और सेफ्टी दोनों ही तरह से डिजाइन किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत अपनी आबादी, सेवाओं और डिजिटल सेवाओं के कारण एक बहुत अच्छा उदाहरण है. इससे पहले शिखर सम्मेलन के दौरान, स्वीडिश प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ निदेशक जॉन सिमंसन ने भारत के इनोवेशन इकोसिस्टम और हाईटेक डेवलपमेंट में सबसे आगे होने की इसकी क्षमता की सराहना की. उन्होंने देश के मजबूत नॉलेज बेस और इनोवेशन के लिए अनुकूल परिस्थितियों का जिक्र किया, साथ ही छात्रों और उद्यमियों के लिए अधिक संस्थागत समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया.
भारत में 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न
उन्होंने कहा कि उन्हें छात्रों और उद्यमियों के लिए इस तरह से आगे बढ़ना और काम करना आसान बनाना होगा. उन्होंने इस क्षेत्र के आगे बढ़ने में फाइनेंसिंग के महत्व की ओर भी इशारा करते हुए कहा, कुछ पूंजी की आवश्यकता है, लेकिन चूंकि भारत में 100 से अधिक यूनिकॉर्न स्थित हैं, इसलिए स्टार्टअप इन क्षेत्रों में निवेश कर सकते हैं और ठीक वैसे ही कर सकते हैं जैसे डीपसीक कर रहा है.
रेगुलेशन को खत्म करने की अपील
संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राज शुक्ला ने कहा कि डीपसीक जैसे उपक्रमों में भारत की सफलता प्रतिभा-संचालित एल्गोरिथम इनोवेशन से उपजी है. उन्होंने भारत की पूरी क्षमता को उजागर करने के लिए रेगुलेशन को खत्म करने की अपील की. उन्होंने कहा कि हमें इनोवेशन की जरूरत है, लेकिन इनोवेशन और रेगुलेशन एक साथ नहीं चल सकते.
एआई में भारत का नेतृत्व
उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रतिभाओं को सही मायने में आगे बढ़ने के लिए देश को काफी हद तक रेगुलेशन से मुक्त होना होगा. पूरे समिट के दौरान, प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि डीप लर्निंग और एआई में भारत का नेतृत्व न केवल प्रतिभा और स्टार्टअप पर निर्भर करता है, बल्कि एक ऐसे माहौल को बढ़ावा देने पर भी निर्भर करता है जो खुलेपन, प्रयोग और दीर्घकालिक निवेश को महत्व देता है.
टैरिफ वॉर के बीच ट्रंप की उम्मीद—‘चीन से ट्रेड डील संभव’
12 Apr, 2025 11:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ वॉर अपने चरम पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ पर अब तक 75 से अधिक देशों को 90 दिनों की राहत दे चुके हैं, लेकिन चीन पर 145 प्रतिशत का टैरिफ लगाया है. हालांकि इस ट्रेड वॉर के बीच ट्रंप ने चीन के साथ समझौते की उम्मीद जताई है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप चीन के साथ व्यापार समझौते (ट्रेड डील) के लिए आशावादी हैं.
बता दें कि समझौते की यह बात दोनों आर्थिक दिग्गजों के बीच बढ़ते ट्रेड वॉर के बीच कही गई है, जिसने बाजारों को प्रभावित किया है. कैरोलिन लेविट ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि राष्ट्रपति ने यह साफ कर दिया है कि वह चीन के साथ समझौते के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि अगर चीन जवाबी कार्रवाई जारी रखता है, तो यह उसके लिए अच्छा नहीं है.
चीन पर 145 प्रतिशत टैरिफ
ट्रंप के बीजिंग से संपर्क न करने के बारे में पूछे जाने पर, लेविट ने कहा कि हमेशा की तरह हम पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ते हुए अपडेट प्रदान करेंगे. वहीं एक रिपोर्टर ने पूछा कि बीजिंग का कहना है कि वह अमेरिका की ओर से किसी भी तरह के टैरिफ बढ़ोतरी को अनदेखा कर देगा. क्या ट्रंप इसे चीन के पीछे हटने के रूप में देखते हैं? इस सवाल पर लेविट ने कहा कि चीन पर टैरिफ दर 145 प्रतिशत के स्तर पर बनी हुई है. राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब अमेरिका पर हमला होगा, तो वह और भी ताकत से जवाब देंगे.
75 से अधिक देशों ने किया संपर्क
लेविट ने अपने बयान में कहा कि 75 से अधिक देशों ने टैरिफ के बारे में बात करने के लिए अमेरिकी प्रशासन से संपर्क किया है. 75 से अधिक देशों ने अब ट्रंप प्रशासन से संपर्क किया है, जो उन व्यापार मुद्दों को संबोधित करने के लिए उत्सुक हैं, जिन्होंने अमेरिका का शोषण किया है और इस प्रक्रिया में हमारे श्रमिकों को चोट पहुंचाई है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने दी राहत
इन देशों ने राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी का समझदारी से पालन किया कि वे जवाबी कार्रवाई न करें, और इसकी वजह से, उन्हें 90 दिन की रोक और इस अवधि के दौरान काफी कम पारस्परिक टैरिफ दरों के साथ राहत दी गई, ताकि संभावित समाधान के रास्ते निकाले जा सकें.
क्या है ट्रंप का मकसद?
लेविट ने कहा कि ट्रंप की सामान्य रणनीति मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और जीवन की लागत को कम करने के लिए टैरिफ का उपयोग करना था. इसलिए राष्ट्रपति इनको बढ़ाकर अमेरिका में धन वापस लाना चाहते हैं, जिसके बाद अमेरिकी जनता के लिए अच्छी तनख्वाह वाली नौकरियां मिलेंगी. इसलिए अमेरिकियों को उस प्रक्रिया पर भरोसा करना चाहिए. उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में प्रभावी ढंग से टैरिफ लागू किए और इस देश में रहने की लागत को कम किया. और, यही वह काम है जिस पर वह फिर से ध्यान दे रहे हैं.
रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान
बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रंप ने 2 अप्रैल को भारत, चीन समेत कई दूसरे देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान किया था. लेकिन अब उन्होंने भारत समेत कुछ देशों को 90 दिनों के लिए टैरिफ से राहत दी है. दूसरी ओर अमेरिका चीन पर टैरिफ बढ़ा रहा है. साथ ही चीन भी अमेरिका पर टैरिफ की दरों में बढ़ोतरी कर रहा है. ऐसे स्थिति में व्हाइट हाउस की ओर से चीन के साथ ट्रेड डील की बात सामने आने के बाद से राहत मिलती नजर आ रही है.
तेज रफ्तार इनोवा की चपेट में आया बाइक सवार, अस्पताल में भर्ती
11 Apr, 2025 06:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वीरवार देर शाम को हुए हादसे में तीन युवकों की मौत के मामले में परिजनों ने सिविल अस्पताल में प्रदर्शन किया। परिजन पुलिस ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए धरने पर बैठ गए और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग लर अड़ गए। पुलिस ने शाम तक आरोपी को गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया। जिसके बाद परिजन शव ले जाने के लिए मान गए।
एक इनोवा चालक ने डाहर चौक से पानीपत आते समय गुप्ता फैक्टरी के नजदीक पर एक बाइक सवार को टक्कर मार दी। इसमें बाइक सवार शाहपुर गांव का साहिल (25) गंभीर रूप से घायल हो गया। उसको जिला नागरिक अस्पताल में लाया गया। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इससे कुछ आगे ब्राह्मणवास गांव के नजदीक बाइक सवार दो युवकों को टक्कर मार दी। चालक ने इसके बाद एक आई-20 और एक वैगन-आर कार को टक्कर मार दी। इसमें दोनों कारों के चालकों चोट लगी और कारों के टायर फट गए। ब्राह्मणवास के पास मोटरसाइकिल सवार पलड़ी गांव का रविंंद्र (25) और बांध गांव के सौरभ (25) की भी मौत हो गई।
हादसे के बाद पुलिस ने कार को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। उधर, शुक्रवार को मृतक युवकों के परिजन सिविल अस्पताल में पहुंचे। परिजनों ने अभी तक गिरफ्तारी न होने पर रोष जताया। साथ ही प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजन पुलिस पट लापरवाही और आरोपी को बचाने के आरोप लगाए। इस दौरान पुलिस ने भी परिजनों की नौंक झोंक हुई। हंगामे की सूचना पर थाना मॉडल टाउन प्रबन्धक जगमेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाया।
पानीपत: डेयरी संचालक की हत्या के एक महीने बाद आरोपी गिरफ्तार
11 Apr, 2025 06:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा के पानीपत में एक माह पहले हुई डेयरी संचालक की हत्या का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। डेयरी पर पार्ट टाइम करने के वाले एक युवक ने मारपीट का बदला लेने के लिए डेयरी संचालक की हत्या की थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। उसे अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया।
एसपी लोकेंद्र सिंह ने बताया कि 10 मार्च को तहसील कैंप क्षेत्र के हरिसिंह कॉलोनी निवासी पशु डेयरी संचालक जल सिंह की हत्या कर दी गई थी। सुबह के समय उनका शव डेरी में ही मिला था। वारदात के बाद एसपी ने हत्याकांड का खुलासा करने के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया था। लगातार एक माह से पुलिस हत्याकांड का खुलासा करने में जुटी थी। शुक्रवार को पुलिस ने एक आरोपी तारा सिंह उर्फ आशीष निवासी कनसूरी यूपी हाल निवासी जावा कॉलोनी को गिरफ्तार किया।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह कभी कभी जल सिंह के पास डेयरी पर पार्ट टाइम काम करने आता था। इसके लिए वह उससे कुछ पैसे भी लेता था। एक दिन काम करते हुए जल सिंह ने उसके साथ मारपीट कर दी थी। जिस कारण वह काम पर नहीं गया। कुछ दिन बाद उसने फिर से काम पर जाना शुरू कर दिया था। 10 मार्च को शाम को उसने मादक पदार्थ से भरी हुई बीड़ी पी थी। इसके बाद तारा ने ईंट से जल सिंह के सिर पर वार कर उसकी हत्या कर दी थी। सीआईए-1 की टीम ने सेक्टर-13-17 हेलीपैड के पास से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को एक दिन की कस्टडी रिमांड पर लिया गया है।
यूक्रेन को मिलेंगे एंटी-टैंक माइंस और लाखों ड्रोन, ब्रिटेन का बड़ा ऐलान
11 Apr, 2025 12:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूक्रेन और रूस के बीच लंबे समय से चल रहे युद्ध में अब यूरोपीय देश यूक्रेन को और ज्यादा मदद दे रहे हैं। ब्रिटेन ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह यूक्रेन को 450 मिलियन पाउंड (लगभग 580 मिलियन डॉलर) की सैन्य सहायता देगा।
यह सहायता यूक्रेन की रक्षा को मज़बूत बनाने और भविष्य में किसी भी शांति समझौते से पहले उसे मजबूत स्थिति में लाने के लिए दी जा रही है। इस सहायता में से 350 मिलियन पाउंड ब्रिटेन के इस साल के 4.5 बिलियन पाउंड के सैन्य सहायता पैकेज से दिए जाएंगे। इसके साथ ही नॉर्वे भी इस पैकेज में अपना योगदान देगा।
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली और जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने ब्रसेल्स में 'यूक्रेन डिफेंस कॉन्टैक्ट ग्रुप' की बैठक की अध्यक्षता की। यह ग्रुप नाटो और अन्य सहयोगी देशों का एक समूह है, जो यूक्रेन की सहायता कर रहे हैं।
मदद में मिलेंगे हथियार, ड्रोन और मरम्मत की सुविधा
इस सहायता पैकेज के तहत यूक्रेन को हथियारों और उपकरणों की मरम्मत और रखरखाव के लिए जरूरी चीजें मिलेंगी। साथ ही इसमें रडार सिस्टम, एंटी-टैंक माइंस और लाखों की संख्या में ड्रोन भी शामिल हैं।
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री हीली ने कहा कि "यूक्रेन डिफेंस कॉन्टैक्ट ग्रुप" का काम बहुत जरूरी है ताकि यूक्रेन को मजबूत स्थिति में लाया जा सके और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बनाया जा सके कि वह यह युद्ध समाप्त करें।
उन्होंने आगे कहा, "हम शांति को खतरे में नहीं डाल सकते, इसलिए आज का यह बड़ा सहायता पैकेज यूक्रेन की अग्रिम पंक्ति में लड़ाई को मजबूत बनाएगा।"
शांति समझौते के लिए भी हो रही है तैयारी
गुरुवार को ही ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व में एक विशेष बैठक हुई, जिसे "कोएलिशन ऑफ द विलिंग" कहा गया। इस बैठक में उन देशों के रक्षा मंत्री शामिल हुए जो युद्ध समाप्त होने की स्थिति में शांति बनाए रखने के लिए तैयार हैं।
यह पहल इसलिए की जा रही है ताकि अगर रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौता होता है, तो तुरंत वहां स्थिरता और शांति स्थापित की जा सके। इसमें शांति सैनिकों की भूमिका, सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विचार किया जा रहा है।
अवैध प्रवासियों को अमेरिका से बाहर निकालने की नई रणनीति, सोशल सिक्योरिटी नंबर होंगे निष्क्रिय
11 Apr, 2025 12:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों को खुद ही देश छोड़ने के लिए मजबूर करने की एक नई योजना बनाई है। इस योजना के तहत ऐसे लोगों को सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन की "डेथ मास्टर लिस्ट" में शामिल किया जाएगा, जिसमें आमतौर पर मृत व्यक्तियों के नाम होते हैं। इससे इन प्रवासियों के सोशल सिक्योरिटी नंबर (SSN) निष्क्रिय हो जाएंगे और वे सरकारी लाभों और वित्तीय सेवाओं से वंचित हो जाएंगे।
यह जानकारी एक प्रशासनिक अधिकारी ने दी, जिन्होंने नाम उजागर न करने की शर्त पर रॉयटर्स को बताया। यह योजना उन प्रवासियों पर लागू होगी जिन्हें बाइडेन प्रशासन के तहत अमेरिका में कानूनी रूप से अस्थायी दर्जा दिया गया था, लेकिन अब वह दर्जा रद कर दिया गया है।
सोशल सिक्योरिटी नंबर बंद होने से क्या होगा असर?
सोशल सिक्योरिटी नंबर अमेरिका में टैक्स भरने और सरकारी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए जरूरी होता है। इसके बिना कोई व्यक्ति बैंक खाता नहीं खोल सकता, क्रेडिट कार्ड नहीं ले सकता और न ही कई अन्य जरूरी आर्थिक काम कर सकता है।
इस योजना का मकसद यह है कि अवैध रूप से रह रहे लोग जब खुद को पूरी तरह से आर्थिक रूप से कटे हुए पाएंगे, तो वे खुद ही अमेरिका छोड़ देंगे। रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना ट्रंप प्रशासन द्वारा संवेदनशील डाटा के इस्तेमाल को और बढ़ाने की दिशा में एक और कदम है।
6,300 अपराधी या संदिग्ध आतंकवादी पहले से लिस्ट में
रिपोर्ट मे दस्तावेजों के हवाले से बताया कि अब तक 6,300 से अधिक ऐसे लोगों के नाम “डेथ मास्टर लिस्ट” में डाले जा चुके हैं, जिन्हें या तो अपराधी माना गया है या आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ा हुआ समझा गया है।
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अगर अमेरिका में रहने के लिए कोई आर्थिक या कानूनी फायदा नहीं मिलेगा, तो लोग खुद ही वापस लौट जाएंगे। राष्ट्रपति ट्रंप के सहायक प्रेस सचिव लिज़ हस्टन ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने वादा किया था कि अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और यह योजना उसी दिशा में एक कदम है।"
टैक्स डेटा भी अब इमिग्रेशन अधिकारियों को मिलेगा
सोमवार को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग, आंतरिक राजस्व सेवा (IRS) और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के बीच एक समझौता हुआ है, जिसके तहत प्रवासियों का टैक्स डेटा अब इमिग्रेशन अधिकारियों को दिया जाएगा ताकि वे ऐसे लोगों का पता लगा सकें।
इस फैसले के चलते IRS के कार्यवाहक प्रमुख और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन अब उन प्रवासियों पर $998 प्रति दिन का जुर्माना लगाने की तैयारी में है, जो निर्वासन के आदेश के बावजूद अमेरिका नहीं छोड़ते। अगर वे जुर्माना नहीं चुकाते, तो उनकी संपत्ति भी जब्त की जा सकती है।
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