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हरियाणा के नूंह में सामने आई धर्म परिवर्तन की घटना, 5 लोगों ने कबूला इस्लाम, जांच में जुटा प्रशासन
28 Aug, 2025 11:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नूंह: हरियाणा के नूंह जिले के नगीना में धर्मांतरण का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां हिंदू समुदाय से जुड़े एक ही परिवार के पांच सदस्यों के इस्लाम धर्म कबूल करने का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि उन्हें बहला-फुसलाकर और लालच देकर धर्मांतरण कराया गया, जबकि सोशल मीडिया पर वायरल हुए एफिडेविट के मुताबिक अपनी स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन किया है। परिजनों का आरोप है कि इसमें नगीना ब्लॉक के रहने वाले शहीद अटेरणा की मुख्य भूमिका है। आरोप है कि परिवार के पांचों लोग 25 अगस्त की शाम को ही घर छोड़कर निकले थे। उन्हें इस्लाम धर्म कबूल करने के बाद शहीद अटेरणा निवासी अटेरना के मकान में छिपा कर रखा हैं।
नगीना थाना पुलिस को दी शिकायत में मरोड़ा गांव के रहने वाले सतबीर ने कहा कि सोमवार से उनका भाई चेतराम (45), भाभी रेखा (39), बड़ा भतीजा शिवम (21), भतीजी सोनम और छोटा भतीजा अरुण (8) सोमवार से गायब है। उन्होंने कहा कि परिवार के पांचों सदस्यों को शहीद निवासी अटेरना, जिनका मकान बडकली चौक पर बना हुआ है, वहां पर छिपा कर रखा गया है और उन्हें तरह-तरह का लालच देकर उनके भाई और भतीजे का धर्मांतरण कराया है। इसके साथ ही सिराजुद्दीन निवासी राजाका सहित अन्य लोगों पर भी धर्मांतरण का आरोप लगाया है। सतबीर ने कहा कि चेतराम के साथ-साथ उनकी भाभी रेखा और भतीजे अरुण और भतीजी सोनम को भी कहीं गायब कर दिया है।
पुलिस ने थाने बुलाकर की पूछताछ
सतबीर ने बताया कि उनकी शिकायत पर पुलिस ने पांचों सदस्यों को पूछताछ के लिए थाना नगीना में बुला लिया। देर रात तक उनसे पूछताछ होती रही। उन्होंने कहा कि उनके पास कुछ एफिडेविट भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। जिसमें लिखा गया है कि उन्होंने अपनी स्वेच्छा से इस्लाम धर्म कबूल किया है। सूत्रों की माने तो थाने में भी परिवार के लोगों के सामने चेतराम और उसके परिवार के लोगों ने साफ तौर पर कहा था कि यह किसी की नहीं मानेंगे, उन्होंने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म कबूल किया है।
2 लोगों के खिलाफ केस दर्ज
नगीना थाना प्रभारी प्रवीण कुमार ने बताया कि पुलिस ने शिकायत के आधार पर शहीद अटेरना और सिराजुद्दीन राजाका के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। धर्मांतरण करने वाले सभी लोगों के कोर्ट में बयान करवाए हैं। बयानों में उन्होंने बताया है कि अपनी मर्जी से बिना किसी दबाव में इस्लाम धर्म कबूल किया है। परिवार के बयान करने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया है।
मामले पर हुई पंचायत
इस मामले के विरोध बुधवार को नूंह के कबीर नाथ मंदिर में हिंदू समाज के लोगों की एक पंचायत का आयोजन किया गया। जिसमें जिला के गणमान्य लोगों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। इस दौरान सभी ने जिला में समय समय पर कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन का विरोध किया। वक्ताओं ने बताया कि यह कोई पहला अवसर नहीं है बल्कि इससे पूर्व भी जिला के अल्पसंख्यक हिंदू समाज के लोगों को मुसलमान बनाया जा रहा है। यहां का बहुसंख्यक मुसलमान समाज उसका तमाशा देख रहा है। इस दौरान उन्होंने लव जिहाद, जबरन धर्मांतरण सहित हिंदूओं को प्रताडि़त करने के कई पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
गाजा में भूख से तड़पकर 10 की जान गई, पोप फ्रांसिस नाराज़, ट्रंप ने बुलाई मीटिंग
28 Aug, 2025 10:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गाजा। इजरायल और हमास का संघर्ष लंबे समय से चल रहा है। फिलहाल शांति की कोई संभावना भी नहीं दिख रही है। इजरायल की ओर से गाजा पर लगातार हमले हो रहे हैं। पिछले 24 घंटे में भूख से 10 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई है, जिनमें दो छोटे बच्चे भी शामिल हैं। इसके बाद पोप भी नाराज दिख रहे हैं।
गाजा से दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। हमास-नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि बीते 24 घंटे में भूख से 10 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई है, जिनमें दो छोटे बच्चे भी शामिल हैं। इस बीच पोप लियो चौदहवें ने युद्ध रोकने की अपील करते हुए कहा है कि इजरायल को क्षेत्र की आबादी पर ‘सामूहिक सजा’ देना बंद करना चाहिए। वेटिकन से जारी बयान में पोप ने कहा, ‘मैं स्थायी संघर्षविराम की अपील करता हूं। मानवीय सहायता को सुरक्षित रास्ता दिया जाए और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पूरा सम्मान किया जाए।’ उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय कानून सामूहिक सज़ा, अंधाधुंध बल प्रयोग और जबरन विस्थापन पर रोक लगाता है।
वहीं अब इस युद्ध को लेकर बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अहम मीटिंग की है। पॉलिसी को लेकर हुई इस मीटिंग में पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और पूर्व ट्रंप प्रशासन के मिडिल ईस्ट दूत जेरेड कुशनर भी शामिल हुए। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इसमें खाने-पीने के सामान की सप्लाई बढ़ाने, बंधक संकट, युद्ध के बाद की योजनाओं जैसेकई पहलुओं पर चर्चा हुई। हालांकि ट्रंप प्रशासन के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने एक दिन पहले कहा था कि यह बैठक गाजा के ‘युद्ध के बाद मैनेजमेंट की व्यापक योजना’ पर होगी, लेकिन व्हाइट हाउस ने इसे एक सामान्य नीति बैठक बताया, जैसी बैठकें ट्रंप और उनकी टीम अक्सर करती रहती हैं। कुशनर, जो ट्रंप की बेटी इवांका के पति भी हैं, पहले कार्यकाल में वेस्ट एशिया नीति के प्रमुख सलाहकार रहे थे। वहीं टोनी ब्लेयर लंबे समय से मध्य-पूर्व शांति प्रक्रिया से जुड़े हैं और हाल के महीनों से गाजा के लिए युद्ध के बाद का खाका तैयार करने में जुटे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लेयर ने इस मुद्दे पर क्षेत्रीय नेताओं से भी बातचीत की है और वे पहले व्हाइट हाउस में स्टीव विटकॉफ से मिल चुके हैं। इस बीच, इजराइल के रणनीतिक मामलों के मंत्री रॉन डेरमर भी बुधवार को वॉशिंगटन पहुंचे और बैठक से ठीक पहले अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की।
चीन का सख्त संदेश अमेरिका को: "परमाणु बातचीत में शामिल नहीं होंगे, दूर रखो हमें"
28 Aug, 2025 09:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। अमेरिका और रूस के साथ परमाणु निरस्त्रीकरण की बातचीत में चीन शामिल नहीं होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील को बीजिंग ने खारिज करते हुए कहा कि ये न तो सही है और न ही संभव। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन और अमेरिका की परमाणु ताकत की तुलना ही नहीं हो सकती। उनके मुताबिक, जिन देशों के पास सबसे ज्यादा हथियार हैं, वही सबसे पहले जिम्मेदारी निभाएं। साफ है कि बीजिंग खुद को इस खेल से बाहर रखना चाहता है।
बीजिंग का कहना है कि उसकी पॉलिसी साफ है। वो बातचीत का विरोधी नहीं है, लेकिन अमेरिका और रूस की बराबरी में मेज पर बैठने को तैयार नहीं। चीन मानता है कि ये उस पर अनावश्यक दबाव डालने की कोशिश है। विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन का ये रुख दुनिया के लिए दोहरी चुनौती है। एक तरफ अमेरिका और रूस को खुला मैदान मिल जाता है, दूसरी तरफ एशिया में भारत जैसे देशों पर सीधा दबाव बढ़ता है। चीन की परमाणु और मिसाइल ताकत भारत के लिए चिंता का सबब है।
ट्रंप ने कुछ दिन पहले कहा था कि रूस तैयार है और चीन भी राजी होगा। उन्होंने ये भी कहा कि परमाणु हथियारों का फैलाव रोकना जरूरी है, वरना दुनिया खतरे में पड़ जाएगी। लेकिन चीन ने उनकी उम्मीदों को झटका दे दिया। हकीकत ये है कि दुनिया के लगभग 80प्रतिशत परमाणु हथियार सिर्फ अमेरिका और रूस के पास हैं। 2023 में रूस ने अमेरिका के साथ आखिरी हथियार नियंत्रण समझौता भी तोड़ दिया था। इसके बाद निरस्त्रीकरण की कोशिशें और मुश्किल हो गईं। चीन का कहना है कि उसके पास सिर्फ उतने हथियार हैं, जितने देश की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। वो किसी हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं होना चाहता। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि उसका जखीरा लगातार बढ़ रहा है। साल 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के पास 5,277 से ज्यादा और रूस के पास 5,459 से ज्यादा वारहेड हैं। चीन के पास करीब 600 वारहेड हैं, जो पिछले साल से 100 ज्यादा हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान – पीड़ित परिवारों के साथ हैं पूरे देश की संवेदनाएँ
28 Aug, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के मिनेसोटा के मिनियापोलिस शहर के एक कैथोलिक स्कूल में अंधाधुंध फायरिंग हुई. जिस समय बच्चे प्रार्थना कर रहे थे तभी आरोपी ने उन पर गोलियां बरसाई. इस गोलीबारी में 2 बच्चों की मौत हो गई है, साथ ही 17 लोग घायल हो गए हैं. इसी के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आदेश दिया है कि मिनियापोलिस शहर के कैथोलिक स्कूल में हुई गोलीबारी के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए रविवार, 31 अगस्त को सूर्यास्त तक व्हाइट हाउस और देश भर की सभी बाकी सार्वजनिक इमारतों पर सभी अमेरिकी झंडे आधे झुके रहेंगे.
अमेरिका के मिनेसोटा के मिनियापोलिस शहर के एक कैथोलिक स्कूल में अंधाधुंध फायरिंग हुई. जिस समय बच्चे प्रार्थना कर रहे थे तभी आरोपी ने उन पर गोलियां बरसाई. इस गोलीबारी में 2 बच्चों की मौत हो गई है, साथ ही 17 लोग घायल हो गए हैं. इसी के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आदेश दिया है कि मिनियापोलिस शहर के कैथोलिक स्कूल में हुई गोलीबारी के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए रविवार, 31 अगस्त को सूर्यास्त तक व्हाइट हाउस और देश भर की सभी बाकी सार्वजनिक इमारतों पर सभी अमेरिकी झंडे आधे झुके रहेंगे.
ट्रंप ने पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि
ट्रंप ने दुनिया भर के सभी अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में अमेरिकी झंडे को आधा झुकाए रखने का भी निर्देश दिया है. घोषणा में आगे लिखा है, मैं यह भी निर्देश देता हूं कि सभी अमेरिकी दूतावासों, वाणिज्य दूतावासों और विदेशों में स्थित अन्य सुविधाओं, जिनमें सभी सैन्य सुविधाएं, नौसैनिक जहाज और स्टेशन शामिल हैं, उन पर झंडे को 31 अगस्त तक आधा झुकाए रखा जाएगा.
2 बच्चों की फायरिंग में मौत
मिनियापोलिस के एक कैथोलिक स्कूल में बुधवार सुबह को प्रार्थना सभा में शामिल बच्चों पर एक हमलावर ने गोलीबारी की, जिसमें 8 और 10 साल के कम से कम दो बच्चों की मौत हो गई और 17 लोग घायल हो गए हैं. पुलिस के अनुसार, हमलावर ने बाद में खुद को लगी चोटों के कारण दम तोड़ दिया.
मिनियापोलिस के पुलिस प्रमुख ब्रायन ओ’हारा के अनुसार, हमलावर की उम्र लगभग 20 साल थी और उसके पास एक राइफल, शॉटगन और पिस्तौल थी. उन्होंने कहा कि गोलीबारी के समय बच्चे स्कूल में वापसी के अपने पहले हफ्ते के मौके पर प्रार्थना सभा में मौजूद थे.
ट्रंप ने जताया दुख
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए, ट्रंप ने पहले कहा था कि उन्हें इस दुखद गोलीबारी के बारे में पूरी जानकारी दे दी गई है और एफबीआई ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और घटनास्थल पर पहुंच गई. उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में हुई इस दुखद गोलीबारी के बारे में मुझे पूरी जानकारी दे दी गई है. एफबीआई तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गई है. व्हाइट हाउस इस भयावह हालात पर नजर बनाए रखेगा. साथ ही ट्रंप ने कहा, मेरे साथ मिलकर इसमें शामिल सभी लोगों के लिए प्रार्थना करें!मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे ने भी गोलीबारी पर शोक व्यक्त किया.
ट्रंप की भी नहीं सुन रहे नेतन्याहू: सीरिया के कई इलाकों पर इजरायल ने किया कब्जा
26 Aug, 2025 06:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेलअवीव। हमास से भिड़ने के साथ साथ इजरायल सीरिया से भी भिड़ गया है। इजरायल ने 60 सैनिक भेजकर सीरिया के कई इलाकों कब्जा कर लिया है। सीरिया के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि इजरायल ने माउंट हर्मोन के आसपास सीरियाई सीमा में घुसकर करीब 60 सैनिक भेजे और कई इलाकों पर कब्जा कर लिया। यही नहीं, इजरायली सैनिकों ने 6 सीरियाई नागरिकों को भी गिरफ्तार किया। इस बीच सीरिया के राष्ट्रपति ने अमेरिका से गुहार लगाई है। बताया ये भी जा रहा है कि इजरायल के पीएम नेतन्याहू इस वक्त यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी नहीं सुन रहे हैं।
सीरिया ने इस कार्रवाई को अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन और क्षेत्रीय शांति के लिए सीधा खतरा बताया है। विदेश मंत्रालय ने कड़े लहजे में कहा कि इजरायल का यह कदम खतरनाक बढ़ोतरी है। वहीं, इजरायल की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। घटना उस जगह हुई है जो लेबनान बॉर्डर के नजदीक है और हथियारों की तस्करी के लिए कुख्यात रही है। यहां से ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह और फिलीस्तीनी उग्रवादी धड़ों के लिए हथियारों का नेटवर्क चलता रहा है। यही वजह है कि इजरायल इस इलाके को अपनी सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मानता है। इजरायली सेना ने पिछले हफ्ते ही फुटेज जारी किया था, जिसमें दक्षिण सीरिया में हथियार भंडारण केंद्रों को खोजने का दावा किया गया था। इसके बाद सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शर्रा ने दमिश्क में अमेरिकी विशेष दूत थॉमस बैरक से मुलाकात की। राष्ट्रपति कार्यालय के बयान के अनुसार, बातचीत में सीरिया और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई। इससे एक दिन पहले बैरक ने यरुशलम में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात कर सीरिया और लेबनान पर विचार-विमर्श किया था। अमेरिकी मध्यस्थता में सीरियाई और इजरायली अधिकारियों के बीच दक्षिण सीरिया में संघर्ष कम करने पर बातचीत चल रही है। यह कूटनीतिक गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता और तनाव घटाने की दिशा में अहम मानी जा रही हैं।
महत्त्वपूर्ण बात यह है कि सीरिया और इजरायल के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में दक्षिण सीरिया में संघर्ष कम करने की बातचीत चल रही थी। दमिश्क को उम्मीद थी कि सुरक्षा समझौते के जरिये भविष्य में राजनीतिक बातचीत का रास्ता खुलेगा। लेकिन अब इजरायल की इस कार्रवाई से बातचीत पर बड़ा साया पड़ गया है। सीरिया का कहना है कि इजरायल ट्रंप प्रशासन से करीबी रिश्ते का फायदा उठाकर लगातार दखलअंदाजी कर रहा है। मगर यह दोस्ती भी सीरिया को कब्जे से नहीं बचा सकी।
इससे सीरिया की संप्रभुता को चुनौती मिली है। लेबनान और फिलीस्तीनी धड़ों के साथ तनाव और बढ़ सकता है। अमेरिका की मध्यस्थता से चल रही बातचीत पटरी से उतर सकती है। पहले से अस्थिर सीरिया में नया मोर्चा खुल सकता है। सीरिया और इजरायल के बीच यह टकराव केवल सीमा विवाद नहीं, बल्कि पूरे मध्यपूर्व की सुरक्षा और संतुलन से जुड़ा हुआ है। इजरायल का दावा है कि वह अपने लोगों और ड्रूज़ समुदाय को बचाने के लिए कार्रवाई कर रहा है, जबकि सीरिया इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बता रहा है।
शरणार्थियों के मामले पर बोले यूनुस......रोहिंग्याओं को संभालना अब हो रहा मुश्किल
26 Aug, 2025 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने शरणार्थियों को लेकर कहा है कि इन्हें संभाल पाना अब मुश्किल हो रहा है। बांग्लादेश में रह रहे 13 लाख से अधिक रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर उन्होंने कहा कि यह समस्या सिर्फ बांग्लादेश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चुनौती बन गई है।
इसी के साथ मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि सभी देश एकजुट होकर रोहिंग्या मुस्लिमों को सुरक्षित तरीके से म्यांमार वापस भेजने में मदद करें। उन्होंने इस दिशा में सोमवार को 7 प्वाइंट का रोडमैप भी जारी किया है। वहीं
यूनुस ने अपने बयान में रेखांकित किया कि बांग्लादेश में 13 लाख से ज्यादा रोहिंग्या रह रहे हैं। इन शरणार्थियों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर भारी दबाव पड़ा है। उन्होंने कहा है कि 2017 में म्यांमार से हिंसा और दमन के बाद सबसे ज्यादा रोहिंग्या बांग्लादेश चले आए थे। कॉक्स बाजार में दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी शिविर मौजूद है।
रोहिंग्या नरसंहार स्मृति दिवस
इसी बीच कॉक्स बाजार में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों ने ‘रोहिंग्या नरसंहार स्मृति दिवस’ भी मनाया। शरणार्थियों ने हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया, जिन पर लिखा था- “नो मोर रिफ्यूजी लाइफ” यानी शरणार्थी का कोई जीवन नहीं। इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय संगठनों और कई देशों के डिप्लोमैट्स ने भी हिस्सा लिया।
कब शुरू हुआ पलायन?
25 अगस्त 2017 को म्यांमार के रखाइन प्रांत में अराकान सेना और सुरक्षा बलों के दमन से बचकर लाखों रोहिंग्या बांग्लादेश पहुंचे थे। उस समय करीब 70 हजार लोग भागकर आए, जबकि पहले से ही 3 लाख से ज्यादा शरणार्थी बांग्लादेश में रह रहे थे।
आज उनकी संख्या बढ़कर 13 लाख हो चुकी है।
चीन में महिलाओं की प्राइवेसी से जुड़ा बड़ा स्कैंडल आया सामने
26 Aug, 2025 11:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीन में महिलाओं की प्राइवेसी से जुड़ा बड़ा स्कैंडल सामने आया है। टेलीग्राम पर चल रहे एक सीक्रेट चैनल मास्क पार्क ट्रीहोल फोरम में हजारों महिलाओं की इंटिमेट फोटो और वीडियो शेयर हो रहे थे।
खबर के मुताबिक, चैनल के 1 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर थे। चीन में सिर्फ वीपीएन के जरिए चैनल को एक्सेस किया जा सकता था। पीड़ितों में शामिल महिला ने बताया कि उनके एक्स-बॉयफ्रेंड ने उनकी निजी तस्वीरें लीक कर दीं।
मुझे इसकी जानकारी तब मिली जब एक अनजान शख्स ने सबूत भेजकर बताया कि उसकी सोशल मीडिया डिटेल्स और वीडियो इस चैनल पर घूम रहे हैं। जब उसने एक्स-बॉयफ्रेंड से बात कि तब उसने 3 लोगों को तस्वीरें भेजने की बात मानी, लेकिन असल में लीक कहीं ज्यादा बड़ा था।
पीड़ित ने कहा, यह घिनौना है...जैसे हमें बार-बार वर्बल रेप किया जा रहा हो, हैरानी की बात है कि ये लोग अपनी ही फैमिली के बारे में भी फैंटेसी कर रहे हैं। इस चैनल पर महिलाओं की तस्वीरों के साथ-साथ नाबालिगों, अपराधियों की रिश्तेदार महिलाओं की भी तस्वीरें डाली गई थीं।
पिछले महीने सोशल मीडिया पर इस बात खुलासा किया था। तब मामले ने तूल पकड़ा। बड़ी संख्या में चीनी महिलाओं ने ऑनलाइन कैंपेन शुरू किया, चैनल की जांच की और रिपोर्ट करने के तरीके शेयर किए। नाराज महिलाओं ने स्लोगन दिया अगर सरकार जांच नहीं करेगी तब हम बच्चे पैदा नहीं करने वाले। वहीं मामले पर चीन सरकार का कहना है कि चैनल अब बंद हो चुका है, लेकिन छोटे-छोटे चैनल अब भी मौजूद हैं। सरकार ने कैंपेन पोस्ट्स को डिलीट और म्यूट करना शुरू कर दिया है।
परमाणु जंग के मुहाने पर थे भारत-पाक! ट्रंप बोले– मेरी वजह से बचा युद्ध, 7 लड़ाकू विमान भी गिरे
26 Aug, 2025 11:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर सोमवार को बड़ा दावा किया. वॉशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई बड़े युद्धों को रोकने में भूमिका निभाई. ट्रंप के मुताबिक, इनमें से एक बड़ा संघर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच था, जो 'परमाणु युद्ध' में तब्दील हो सकता था.
इतना ही नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "मैंने इन सब युद्धों को रोक दिया. इनमें से एक बड़ा युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला था." "यह युद्ध अगले स्तर तक पहुंच चुका था और परमाणु युद्ध में तब्दील हो सकता था. उन्होंने पहले ही 7 लड़ाकू विमानों गिरा दिए थे, इससे हालात बेकाबू हो रहे थे.'
भारत और पाकिस्तान पर व्यापारिक दबाव बनाया
ट्रंप ने खुलासा करते हुए एक बार फिर कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान पर व्यापारिक दबाव बनाया. मैंने कहा, क्या तुम लोग व्यापार करना चाहते हो? अगर लड़ाई जारी रखी तो हम कोई व्यापार या समझौता नहीं करेंगे. इतना ही नहीं मैंने साफ कहा, तुम्हारे पास मामले को सुलझाने के लिए 24 घंटे का समय है. इस पर उन्होंने जवाब दिया- अब कोई युद्ध नहीं होगा. ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने इस तरह का तरीका कई मौकों पर अपनाया है और व्यापार को हथियार बनाकर देशों को लड़ाई रोकने के लिए विवश किया.
मैंने सात युद्धों को रोका
अमेरिकी राष्ट्रपति कहा, "मैंने जिन सात युद्धों को रोका, उनमें से चार इसलिए थे क्योंकि मेरे पास टैरिफ और व्यापार था और मैं यह कहने में सक्षम था, 'यदि आप लड़ने जाते हैं और सभी को मारना चाहते हैं, तो यह ठीक है, लेकिन जब आप हमारे साथ व्यापार करेंगे तो मैं आप सभी पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाऊंगा. उन्होंने सभी को छोड़ दिया... हम टैरिफ के रूप में खरबों डॉलर ले रहे हैं और टैरिफ के कारण युद्ध रोक रहे हैं... अन्य देशों ने हमारे साथ ऐसा किया और अब हम अन्य देशों के साथ ऐसा कर रहे हैं."
जेलेंस्की व पुतिन की मुलाकात नहीं होन पर गंभीर परिणाम होंगे
यह पूछे जाने पर कि रूसी और यूक्रेनी राष्ट्रपतियों की मुलाकात नहीं होने पर इसके क्या परिणाम होंगे, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "... इसके गंभीर परिणाम होंगे... यदि मैं राष्ट्रपति होता तो यह युद्ध कभी नहीं होता... हम देखेंगे कि अगले एक या दो सप्ताह में क्या होता है और उस समय मैं बहुत मजबूती से कदम उठाऊंगा..."
यूक्रेन पर अमेरिका कोई पैसा नहीं खर्च करता
रूस-यूक्रेन जंग पर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "अमेरिका अब यूक्रेन पर कोई पैसा खर्च नहीं करता है. हम नाटो से निपटते हैं, यूक्रेन से नहीं. हम युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं और इस संबंध में व्लादिमीर पुतिन से बात भी की है. रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकना मेरे लिए सबसे आसान था, लेकिन यह अब जटिल होता जा रहा है."
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह परमाणु निरस्त्रीकरण चाहते हैं और उन्होंने पुतिन से परमाणु मिसाइलों को लेकर भी बात की है. यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी पर उन्होंने कहा कि मैंने इसकी प्रक्रियाओं पर अभी चर्चा नहीं की है, लेकिन मुझको लगता है कि वे इसका हल निकाल लेंगे. उन्होंने कहा कि हम नाटो को मिसाइलें देते हैं और वे यूक्रेन को देते हैं. हम अब यूक्रेन पर पैसा नहीं खो रहे, बल्कि कमा रहे हैं.
पाकिस्तान और बांग्लादेश ने 6 समझौतों पर हस्ताक्षर किए
26 Aug, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका । पाकिस्तान और बांग्लादेश ने रविवार को 6 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें ट्रेड, इकोनॉमी, डिप्लोमेटिक ट्रेनिंग, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना शामिल है।
ये समझौते पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मुहम्मद इशाक डार और बांग्लादेश के विदेश सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन के बीच हुए। दरअसल, डार रविवार को दिवसीय दौरे पर बांग्लादेश पहुंचे थे। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने यात्रा को दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। ये यात्रा 13 साल बाद पहली बार किसी पाकिस्तानी विदेश मंत्री का बांग्लादेश दौरा था। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देश सितंबर या अक्टूबर में संयुक्त आर्थिक आयोग की बैठक आयोजित करने की योजना बना रहे हैं, जो दो दशक बाद होगी। इसके लिए पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ढाका आ सकते हैं।
पाकिस्तान और बांग्लादेश ने 6 समझौतों पर हस्ताक्षर किए
वीजा मुक्त समझौता: दोनों देशों के सरकारी और राजनयिक पासपोर्ट वाले लोग बिना वीजा के एक-दूसरे के देश जा सकते है।
व्यापार कार्य समूह: दोनों देश मिलकर व्यापार बढ़ाने के लिए एक समूह बनाएंगे, जो व्यापार से जुड़े मुद्दों पर काम करेगा।
विदेश सेवा अकादमी सहयोग: दोनों देशों के कूटनीतिक प्रशिक्षण संस्थान एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करेंगे और अनुभव साझा करेंगे।
मीडिया एजेंसी सहयोग: एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान कॉर्पोरेशन और बांग्लादेश समाचार एजेंसी संगबाद के बीच एक समझौता हुआ है। ये संस्था मिलकर काम करेंगी।
रणनीतिक अध्ययन सहयोग: दोनों देशों के रणनीतिक और अंतरराष्ट्रीय मामलों के शोध संस्थान मिलकर काम करने वाले है।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान: दोनों देश अपनी संस्कृति, कला और परंपराओं को साझा करने के लिए कार्यक्रम आयोजित करेगा।
अमेरिका से दूरी बना रहे कई देश, दक्षिण कोरिया भी करेगा बाय-बाय
26 Aug, 2025 09:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । कभी दुनिया भर में सहयोगियों को साथ लेकर चलने वाला वॉशिंगटन अब एक-एक कर अपने दोस्तों से हाथ धोता दिख रहा है। भारत से लेकर यूरोप और एशिया तक, अब वो देश भी अमेरिका से दूरी बनाने लगे हैं जो कभी उसके पक्के साझेदार माने जाते थे। इसी कड़ी में अब दक्षिण कोरिया ने भी संकेत दे दिए हैं कि उसका झुकाव धीरे-धीरे चीन की ओर बढ़ रहा है।
भारत पर दबाव बनाने की कोशिश में लगे अमेरिका को यह झटका और भी बड़ा लग सकता है। क्योंकि वॉशिंगटन चाहता है कि भारत चीन से दूरी बनाए, रूस से नजदीकी घटाए और पूरी तरह अमेरिकी पाले में आ जाए। लेकिन भारत साफ कर चुका है… उसके लिए पहला और आखिरी पैमाना राष्ट्रीय हित है। और अब जब दक्षिण कोरिया जैसा अहम एशियाई देश भी बीजिंग की तरफ बढ़ रहा है, तो अमेरिकी रणनीति की जड़ें हिलनी तय हैं।
अमेरिका चाहता है कि साउथ कोरिया, जापान और ऑस्ट्रेलिया उसके साथ मिलकर चीन को घेरें। लेकिन अगर सियोल बीजिंग के साथ रिश्ते सुधारता है, तो यह “कोरिया को अपने पाले में रखने” की अमेरिकी रणनीति को कमजोर कर देगा। चीन-रूस नज़दीकी पर संतुलन: यूक्रेन युद्ध और ताइवान विवाद पहले से ही अमेरिका के सिरदर्द बने हुए हैं। ऐसे वक्त साउथ कोरिया का चीन की तरफ झुकाव वॉशिंगटन के लिए और असहज स्थिति पैदा करेगा। अमेरिका दुनिया की चिप्स और टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन को चीन से हटाकर फ्रेंड-शोरिंग करना चाहता है। लेकिन अगर साउथ कोरिया बैलेंस बनाने लगे, तो यह अमेरिकी प्रयासों को कमजोर कर देगा। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यंग ने चीन के लिए एक विशेष दूतमंडल भेजा। यह दौरा संयोग से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों की 33वीं सालगिरह पर हुआ। चार दिन की इस यात्रा का नेतृत्व पूर्व नेशनल असेंबली स्पीकर पार्क ब्युंग-सुग कर रहे हैं, जो राष्ट्रपति का व्यक्तिगत पत्र लेकर बीजिंग पहुंचे। रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रतिनिधिमंडल में सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद किम ताए-न्योन और पार्क जंग के अलावा पूर्व राष्ट्रपति रो ताए-वू के बेटे रो जे-हुन भी शामिल हैं। साफ है कि यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि चीन और दक्षिण कोरिया के बीच नए समीकरण गढ़ने की शुरुआत है।
बुजुर्गों की संख्या बढ़ी तो भारत के दोस्त के सिर पर मंडराया खतरा, देश छोड़कर भाग रहे युवा, जानें पूरी बात
26 Aug, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
एथेंस। ग्रीस में जनसंख्या का संकट दुनिया को हैरान कर रहा है। एक नई रिपोर्ट में दावा है कि पिछले 13 सालों में भारत के दोस्त ग्रीस की जनसंख्या में 4 लाख से अधिक की गिरावट आई है। इसका मुख्य कारण घटती जन्म दर, बढ़ती उम्र और देश से बाहर प्रवास है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, थेसाली विश्वविद्यालय की डेमोग्राफिक एंड सोशल एनालिसिस लैब की रिसर्च का हवाला देते हुए ग्रीस के अखबार टो विमा ने शनिवार को बताया कि यह गिरावट दशकों तक जारी रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में जन्म से ज्यादा मौतें हो रही हैं और बूढ़े लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हेलेनिक स्टैटिस्टिक्स अथॉरिटी के अनुसार, 2011 की जनगणना में देश की निवासी जनसंख्या 1,08,16,286 थी। लेकिन 1 जनवरी 2024 तक यह घटकर 1,04,00,720 रह गई, जो एक दशक से भी कम समय में 4 लाख से अधिक लोगों की कमी को दर्शाता है। आंकड़ों से पता चला है कि ग्रीस में 2023 में सिर्फ 72,300 बच्चों का जन्म हुआ, जो 1950 और 1960 के दशकों की औसत वार्षिक जन्म दर का लगभग आधा है।
प्रजनन दर बेहद कम
1980 के आसपास जन्म लेने वाली महिलाओं में प्रजनन दर 1।3 से 1।4 बच्चों तक सीमित है, जो कि जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी स्तर से काफी कम है। लगभग 23 प्रतिशत आबादी पहले से ही 65 वर्ष से अधिक आयु की है, और बुजुर्गों की संख्या बच्चों से लगभग 10 लाख अधिक है। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि 2011 में वित्तीय संकट के बाद जनसंख्या में यह कमी शुरू हुई, जब कई प्रवासी मजदूर वापस लौट गए और बड़ी संख्या में युवा यूनानी देश छोड़कर चले गए।
देश छोड़ रहे युवा
इसके अलावा, बेहतर करियर के मौकों की कमी और घर की बढ़ती कीमतों जैसी समस्याओं ने भी परिवार बसाने के लिए लोगों को हतोत्साहित किया है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि ग्रीस के सामने ‘दोहरी चुनौती’ है, जिसमें युवा पीढ़ी या तो देश छोड़ रही है या देर से माता-पिता बनने का फैसला कर रहे हैं, जिससे दीर्घकालिक जनसांख्यिकीय गिरावट और भी तेज हो रही है।
लाडो लक्ष्मी योजना कब से होगी लागू? हरियाणा सरकार ने महिलाओं को सीधे खाते में 2100 रुपये भेजने की बनाई योजना
25 Aug, 2025 01:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को कहा कि लाडो लक्ष्मी योजना के तहत पात्र महिलाओं को 2100 रुपये देने की तैयारी पूरी कर ली गई है। पहले बजट में इसके लिए पांच हजार करोड़ का प्रावधान किया गया था। अब हमारा दूसरा बजट आएगा। दूसरा बजट आने के बाज हरियाणा की महिलाओं को पैसे मिलने शुरू हो जाएंगे। हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने जो चुनावी वादे किए थे, उनमें से एक है लाडो लक्ष्मी योजना।
CM सैनी ने बताया कि 'लाडो लक्ष्मी योजना' को लागू करने के लिए पूरा प्लान तैयार हो गया है। इसके लिए एक पोर्टल शुरू किया जाएगा। पोर्टल पर सारी जानकारी रहेगी। लोग लाडी लक्ष्मी योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया के बाली में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव मनाया जाएगा। ये कार्यक्रम स्वामी ज्ञानानंद की अध्यक्षता में 12 से 14 सिंतबर तक होग। प्रधानमंत्री ने हरियाणा केविकास करने के लिए 2000 करोड़ की दो परियोजना शुरू करने का ऐलान किया है।
ग्राम पंचायतों को 21 लाख
हरियाणा सीएम ने ग्राम पंचायतों को 21 लाख रुपये देने ककी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है। कांग्रेस झूठ फैलाने का काम कर रही है। जनता ने कांग्रेस को पूरी तरह से नकार दिया है। चुनाव में हारने के बाद ये पहले ईवीएम को दोष देते थे, जबकि यह एक पारदर्शी व्यवस्था उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में स्वामी ज्ञानानंद महाराज द्वारा 12 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव शुरू होगा।, 13 सितंबर को सेमिनार और, प्रदर्शनी लगेगी।
टेक कंपनियों के सीईओ की सुरक्षा पर अरबों का खर्च, खतरे बढ़ने से कंपनियां अलर्ट
25 Aug, 2025 11:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैलिफोर्निया । कुछ वर्षों में दुनिया की बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुखों की सुरक्षा खर्चों में हैरान करने वाली बढ़ोत्तरी हुई हैं। यह इसलिए कि इनके प्रमुख अब केवल बिजनेस लीडर नहीं रहे, बल्कि वे राजनीति, समाज और जनभावनाओं के निशाने पर भी आ चुके हैं और इसी कारण से उनकी सुरक्षा पर खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है और 2024 में यह हैरान करने वाले स्तर तक पहुंच गया। बीते साल 10 बड़ी टेक कंपनियों ने अपने सीईओ की सुरक्षा पर लगभग 369 करोड़ रुपये यानी 45 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक खर्च किया। इसमें सबसे ज्यादा राशि मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग और उनके परिवार की सुरक्षा पर लगी, जिस पर अकेले लगभग 221 करोड़ रुपये यानी 27 मिलियन डॉलर खर्च हुए। इसमें उनके कैलिफोर्निया स्थित घर की सुरक्षा और यात्रा के दौरान की जाने वाली सुरक्षा शामिल रही।
टेस्ला और स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क की सुरक्षा पर खर्च का पूरा ब्योरा सामने नहीं आया, लेकिन 2023 में टेस्ला ने उनकी सुरक्षा पर करीब 21 करोड़ रुपये खर्च किए थे। अब मस्क अपनी ही सिक्योरिटी कंपनी के जरिए सुरक्षा व्यवस्था कराते हैं और उनके साथ हमेशा करीब 20 बॉडीगार्ड तैनात रहते हैं। अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस की सुरक्षा पर हर साल लगभग 13 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, वहीं कंपनी के मौजूदा सीईओ एंडी जासी की सुरक्षा लागत भी साल दर साल बढ़ रही है। एनवीडिया ने अपने सीईओ जेन्सेन हुआंग की सुरक्षा पर 2024 में लगभग 29 करोड़ रुपये खर्च किए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नीतियों में उनकी सीधी भागीदारी और उनकी अरबों की संपत्ति ने उनके लिए खतरा और बढ़ा दिया है। इसी तरह जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डाइमोन की सुरक्षा पर भी बीते साल लगभग 7.2 करोड़ रुपये खर्च हुए।
विशेषज्ञों के अनुसार अब सुरक्षा के खतरे सिर्फ शारीरिक हमलों तक सीमित नहीं हैं। साइबर अटैक, घर में सेंधमारी, डीपफेक तकनीक और फर्जी वित्तीय लेन-देन जैसी नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां केवल बॉडीगार्ड मुहैया कराने तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल मॉनिटरिंग और सोशल मीडिया इंटेलिजेंस जैसी सेवाएं भी दे रही हैं। एआई आधारित डीपफेक वॉइस का इस्तेमाल करके कंपनियों से धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन करवाने के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
यह खतरा और स्पष्ट तब हुआ जब 2024 में अमेरिकी हेल्थकेयर कंपनी यूनाइटेड हेल्थकेयर के सीईओ ब्रायन थॉम्पसन की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस वारदात ने कॉर्पोरेट जगत को हिला कर रख दिया था। वहीं 2025 में न्यूयॉर्क की एक ऑफिस बिल्डिंग में गोलीबारी की घटना में चार लोगों की मौत हुई, जिसमें हमलावर ने नेशनल फुटबॉल लीग को निशाना बनाया। इन घटनाओं के बाद कंपनियों ने सीईओ की सुरक्षा को और मजबूत करने पर जोर दिया। स्पष्ट है कि अब टेक कंपनियों के प्रमुख केवल कारोबारी फैसलों के कारण ही नहीं, बल्कि राजनीति और समाज पर उनके प्रभाव की वजह से भी बड़े खतरे में हैं। यही कारण है कि सुरक्षा पर खर्च अब इन कंपनियों के लिए स्थायी और अनिवार्य हो चुका है।
हूतियों ने दागी हाईटेक मिसाइल, इजरायल के जवाबी हमले में 6 की मौत 86 घायल
25 Aug, 2025 10:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सना। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने अत्याधुनिक हाईटेक मिसाइल से इजरायल पर हमला कर दिया। इसके जवाब में इजरायल ने भी हमले किए जिससे यमन में 6 की मौत हो गई और 86 लोग घायल हो गए। रिपोर्ट के अनुसार, यमन की राजधानी सना पर नियंत्रण रखने वाले हूती विद्रोहियों के अनुसार, इन हमलों में कम से कम छह लोग मारे गए हैं और 86 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इजरायली सेना ने आगे कहा कि उसने एक सैन्य स्थल पर हमला किया, जहाँ राष्ट्रपति भवन स्थित है, साथ ही दो बिजली संयंत्रों और एक ईंधन भंडारण स्थल पर भी हमले किए हैं।
हूतियों द्वारा संचालित एक चैनल ने रविवार को देश के स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से बताया है कि इजरायली हमलों में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है और जान-माल का नुकसान हुआ है। खबर के अनुसार, ईरान समर्थित विद्रोहियों द्वारा इजराइल पर क्लस्टर बम दागे जाने के कुछ ही दिन बाद इजराइल का यह हमला हुआ है। हूती मीडिया कार्यालय ने बताया कि सना के बिजलीघर और गैस स्टेशन समेत कई इलाकों को निशाना बनाया गया। निवासियों ने बताया कि राष्ट्रपति भवन के पास समेत कई इलाकों में धमाकों की तेज आवाज़ें सुनी गईं। विद्रोहियों के कब्जे वाले सना पर एक सप्ताह पहले किए गए हमले के वक्त इजरायल ने कहा था कि हमलों में ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाया गया, जिसके बारे में माना जाता है कि इसका इस्तेमाल विद्रोहियों द्वारा किया जाता था। वहीं इजराइली रक्षा बलों ने कहा है कि यह हमला इजरायल और उसके नागरिकों पर हूती आतंकवादी शासन द्वारा बार-बार किए जा रहे हमलों के जवाब में किया गया है। इजरायली वायुसेना के एक अधिकारी के अनुसार, इन हमलों में 10 से अधिक लड़ाकू विमानों ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि सबसे दूर का लक्ष्य इजरायल से लगभग 2,000 किलोमीटर (1,240 मील) की दूरी पर था।
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने 22 महीनों से भी ज़्यादा समय से इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन दागे हैं तथा लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाया है। हूती विद्रोहियों का कहना है कि वे गाज़ा पट्टी में युद्ध के बीच फलस्तीनियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए ये हमले कर रहे हैं। यह हमला हूती विद्रोहियों द्वारा इजरायल की ओर नई मिसाइलों के दागे जाने के दावे के बाद हुआ है, जिसमें देश के सबसे बड़े हवाई अड्डे को निशाना बनाया गया। इस हमले से इजरायल में किसी तरह के नुकसान या किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। इजराइली सेना ने कहा कि उसने मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया। इजराइली वायुसेना के एक अधिकारी ने कहा कि यमन से इजराइल की ओर दागी गई क्लस्टर बम वाली मिसाइल एक नए ख़तरे का संकेत है। अधिकारी ने बताया कि हूती विद्रोहियों ने 2023 में इजराइल की ओर रॉकेट दागना शुरू करने के बाद से पहली बार इजराइल पर क्लस्टर बम दागा है।
ट्रंप उलझे रहे टैरिफ में पुतिन ने कर दिया खेल, समुद्र में उतारा शक्तिशाली युद्धपोत
25 Aug, 2025 09:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मास्को। रुस ने तीन दशक बाद रूसी नौसेना का परमाणु-संचालित युद्धपोत एडमिरल नाखिमोव फिर से समुद्र में उतार दिया है। यह विशाल जहाज 28,000 टन का युद्धपोत जिसे किरोव क्लास क्रूजर के नाम से जाना जाता है, अपनी आधुनिकीकरण प्रक्रिया पूरी कर हाल ही में व्हाइट सी में समुद्री परीक्षण के लिए रवाना हुआ। यह जहाज न केवल अपनी ताकत के लिए चर्चा में है, बल्कि इसमें शामिल एस-400 वायु रक्षा प्रणाली इसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली युद्धपोत बनाती है। यह रूसी नौसेना का भविष्य का फ्लैगशिप बनने की राह पर है। यह ट्रंप के साथ-साथ पूरे नाटो और यूरोप की टेंशन बढ़ाने वाला है। इसके पास आयरन डोम है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एडमिरल नाखिमोव की कहानी 1983 में शुरू हुई, जब इसे लेनिनग्राद में बनाना शुरू किया गया था। 1986 में इसे कालिनिन के नाम से लॉन्च किया था। यह प्रोजेक्ट 1144.2 ओरलान का हिस्सा है, जिस नाटो की ओर से किरोव क्लास नाम दिया गया। सालों की मरम्मत और आधुनिकीकरण के बाद, इसे प्रोजेक्ट 1144.2मी के तहत नया रूप दिया गया है। इसकी सबसे बड़ी ताकत है इसकी हथियार प्रणाली, जिसमें 80 क्रूज मिसाइलें लगी हुई हैं।
इनमें 3एम14टी कलिब्र मिसाइलें हैं, जो 2500 किलोमीटर तक की दूरी पर जमीनी लक्ष्यों पर सटीक हमले कर सकती हैं और जिरकॉन मिसाइलें, जो आवाज की रफ्तार से 9 गुना की गति से दुश्मन के जहाजों को तबाह कर सकती हैं, लेकिन इस युद्धपोत की असली ताकत इसकी वायु रक्षा प्रणाली में है। इसके 176 वर्टिकल लॉन्च सेल्स में से 96 सेल्स में एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की नौसैनिक संस्करण की मिसाइलें तैनात हैं। यह प्रणाली इसे आसमान में अभेद्य कवच प्रदान करती है।
एस-400 की 40एन6 मिसाइल मैक 14 की गति से हाइपरसोनिक टार्गेट्स, जैसे मैक 8 की गति से उड़ने वाले हथियारों को भी नष्ट कर सकती है। यह रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ ऑपरेशन सिंदूर में भारत के खिलाफ अपनी ताकत साबित कर चुकी है। इसके अलावा, जहाज में पैंटसिर-एम प्रणाली भी लगी है, जो छोटी दूरी के हमलों से सुरक्षा देती है। अभी इसमें छह यूनिट्स ही लगी हैं। भविष्य में एस-500 या एम-550 प्रणालियों की मिसाइलें जोड़कर इसकी ताकत को और बढ़ाया जा सकता है, जो अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों को निशाना बना सकती हैं। इस पोत ने समुद्र में उतकर अमेरिका और नाटो सेना को टेंशन में डाल दिया है।
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