ख़बर
पैरासिटामोल और आइबूप्रोफेन जैसी दवाओं को लेकर चौंकाने वाला खुलासा
2 Sep, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिडनी। ऑस्ट्रेलिया की एक नई रिसर्च ने पैरासिटामोल और आइबूप्रोफेन जैसी दवाओं को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ ऑस्ट्रेलिया की इस स्टडी में पाया गया कि पैरासिटामोल और आइबूप्रोफेन जैसी आम दवाएं एंटीबायोटिक दवाओं के असर को कम कर सकती हैं। ये दोनों ही टेबलेट बैक्टीरिया को ज्यादा मजबूत बना सकती हैं। इसका सीधा मतलब है कि ये दवाएं एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को बढ़ावा देती हैं, जो इस वक्त पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट बन चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, जब इन दवाओं का सेवन एंटीबायोटिक दवाओं के साथ किया जाता है, तो बैक्टीरिया में म्यूटेशन होने लगता है। यह बदलाव उन्हें न केवल सिप्रोफ्लोक्सासिन बल्कि कई अन्य एंटीबायोटिक्स के खिलाफ भी ज्यादा रजिस्टेंट बना देता है। इसके कारण इलाज असरदार नहीं हो पाता और संक्रमण बढ़ता जाता है। यह खतरा खासतौर पर बुजुर्गों में ज्यादा पाया गया है, क्योंकि वे अक्सर दर्द की दवाएं, ब्लड प्रेशर की दवाएं, नींद की गोलियां और एंटीबायोटिक्स एक साथ लेते हैं। इससे बैक्टीरिया तेजी से रजिस्टेंस विकसित कर लेते हैं और इलाज बेअसर हो जाता है। इस स्टडी में कुल नौ आम दवाओं का असर परखा गया, जिनमें पैरासिटामोल, आइबूप्रोफेन, गठिया और डायबिटीज की दवाएं, ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने वाली गोलियां और नींद की दवाएं शामिल थीं।
नतीजे चौंकाने वाले रहे, क्योंकि इनमें से कई दवाओं ने बैक्टीरिया को एंटीबायोटिक दवाओं से बचने में मदद की। इसका मतलब यह है कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या सिर्फ एंटीबायोटिक्स के गलत और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल की वजह से नहीं है, बल्कि आम दर्दनिवारक और दूसरी दवाएं भी इस समस्या को गंभीर बना रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहले ही चेतावनी दी है कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा है। 2019 में ही करीब 12.70 लाख लोगों की मौत इसी वजह से हुई थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दशकों में कई खतरनाक बीमारियों का इलाज नामुमकिन हो सकता है।
यही वजह है कि इस रिसर्च को बेहद अहम माना जा रहा है और विशेषज्ञ लोगों को चेतावनी दे रहे हैं कि दवाओं का इस्तेमाल सोच-समझकर और डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाए। बुजुर्गों के मामले में तो यह सतर्कता और भी जरूरी है, क्योंकि एक साथ कई दवाओं का सेवन उन्हें ज्यादा जोखिम में डाल सकता है। बता दें कि पैरासिटामोल और आइबूप्रोफेन जैसी दवाएं दुनियाभर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती हैं। बुखार या हल्के दर्द में लोग अक्सर इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के ओवर द काउंटर खरीदकर खा लेते हैं।
पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों के चलते सताए जा रहे ईसाई, झेल रहे प्रताड़ना
2 Sep, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों के तहत वहां रह रहे क्रिश्चियन को निशाना बनाया जा रहा है। पाकिस्तान में कुल आबादी का केवल 1.8 फीसदी ही क्रिश्चियन हैं। फिर भी ईशनिंदा के करीब एक-चौथाई आरोप उन पर लगे हैं। ईशनिंदा कानूनों में मौत की सजा का प्रावधान है। जून 2024 में 73 साल के पाकिस्तानी ईसाई लज़ार को कुरआन जलाने के आरोपों में बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला गया था। वर्ल्ड वॉच सूची के मुताबिक पाकिस्तान में लड़कियां और महिलाएं अपहरण, जबरन विवाह, यौन हिंसा और धर्मांतरण का शिकार हो रही हैं। 2023 में जरानवाला में ईसाई घरों और इमारतों पर हुए हमलों से डर का माहौल बढ़ा है।
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की संस्कृति में परिवार के किसी सदस्य का इस्लाम छोड़ना शर्मनाक माना जाता है और इसलिए धर्म परिवर्तन करने वालों को अपने ही परिवार और समुदाय से तीखे विरोध का सामना करना पड़ता है, जिसमें तथाकथित ऑनर किलिंग भी शामिल है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में ईसाई संस्थागत भेदभाव से पीड़ित हैं। उनसे गंदे काम कराए जाते हैं। मुसलमानों को कार्यस्थल पर ईसाई पुरुषों को वरिष्ठ पदों पर स्वीकार न करने के लिए उकसाया जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक मुस्लिम पृष्ठभूमि के ईसाइयों को उत्पीड़न का दंश झेलना पड़ता है, एक तो कट्टरपंथी इस्लामी समूहों से जो उन्हें धर्मत्यागी मानते हैं और दूसरा उन परिवारों, दोस्तों और पड़ोसियों से जो धर्मांतरण को परिवार और समुदाय के साथ विश्वासघात का शर्मनाक कृत्य मानते हैं। ज्यादातर ईसाई पंजाब में रहते हैं और ये पाकिस्तान का वह क्षेत्र है, जहां उत्पीड़न और भेदभाव की घटनाएं सबसे ज्यादा सामने आती हैं।
अमेरिका-इजराइल ने किया गाजा के लिए प्लान तैयार, 20 लाख लोग होंगे बाहर
2 Sep, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गाजा। अमेरिकी प्रशासन और इजरायल ने मिलकर गाजा को लेकर प्लान तैयार किया है। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के पास मौजूद दस्तावेजों के हवाले से एक रिपोर्ट छापी है। इसके मुताबिक फिलिस्तीन के बड़े हिस्से गाजा से 20 लाख लोगों को अस्थायी तौर पर हटाया जाएगा। इन लोगों को मिस्र, कतर जैसे देशों में शिफ्ट किया जाएगा या फिर फिलिस्तीन के ही किसी एक क्षेत्र में रखा जाएगा। इन लोगों को तब तक गाजा से बाहर रहना होगा, जब तक इलाके का पुनर्विकास नहीं हो जाता। इस दौरान गाजा छोड़ने वाले फिलिस्तीनियों को डिजिटल टोकन दिए जाएंगे। इसके अलावा कैश पेमेंट किया जाएगा।
गाजा से अस्थायी तौर पर हटाए लोग जहां रहेंगे, वहां खानपान की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा रेंट सब्सिडी भी दी जाएगी। गाजा के लोगों को हटाने के प्लान को वॉलेंट्री डिपार्टर कहा जा रहा है, जिसके तहत वे दूसरे देश में जाएंगे या फिर तय स्थान पर रहेंगे। गाजा के लोगों को कुल 4 साल तक बाहर रखने के प्लान पर काम चल रहा है। इसके तहत उन्हें चार साल की रेंट सब्सिडी मिलेगी और एक साल तक खाने की व्यवस्था की जाएगी।
अमेरिकी प्लान के मुताबिक गाजा को टूरिस्ट डेस्टिनेशन में तब्दील करने का प्लान है। यहां गाजा ट्रंप रेवरा बनाया जाएगा। इसके अलावा एआई से लैस स्मार्ट सिटी बनाए जाएंगे। स्कूल, अस्पताल, इंडस्ट्री, ग्रीन स्पेस जैसी व्यवस्था रहेगी। यहां बड़े पैमाने पर अपार्टमेंट्स बनाने की तैयारी है, जिनके फ्लैट गाजा के उन लोगों को दिए जाएंगे, जिन्हें बाहर भेजा जाएगा। वे अपनी जमीन के बदले मिले डिजिटल टोकन का इस्तेमाल करते हुए फ्लैट हासिल कर सकेंगे। अब तक इस मामले पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से कोई अधिकारी पुष्टि नहीं कही गई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गाजा को लेकर बने इस प्लान में अमेरिकी फंड की जरूरत नहीं होगी बल्कि इससे लाभ ही होगा। इस प्रोजेक्ट के तहत दुनिया भर से निवेश को आमंत्रित किया जाएगा। यहां इलेक्ट्रिक वीकल प्लांट्स से लेकर डेटा सेंटर्स तक तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा हाईराइज इमारतें होंगी। इस प्रोजेक्ट में कुल 100 अरब डॉलर के शुरुआती निवेश की तैयारी है। इसके बाद यह प्रोजेक्ट खुद ही फंड जनरेट करेगा।
एक साथ तीन महाशक्तियों को देख बौखलाए ट्रंप के सलाहकार बोले- ये ठीक बात नहीं…
2 Sep, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। भारत पर टैरिफ लगाकर अमेरिका ने अब तक की सबसे बड़ी गलती की है। इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की छवि वैश्विक स्तर पर खराब हुई है। भारत चीन और रुस के एक साथ आने से ट्रंप की नींद उड़ गई है। उनके व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने एक बार फिर अपनी खीझ निकाली है। नवारो ने भारत-रूस व्यापारिक संबंधों की आलोचना की है और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात को शर्मनाक बताया है।
उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी को शी जिनपिंग और पुतिन के साथ घुलते-मिलते देखना शर्मनाक है। मुझे समझ नहीं आ रहा कि वह क्या सोच रहे हैं। हमें उम्मीद है कि उन्हें यह समझ आ जाएगा कि उन्हें रूस के साथ नहीं, बल्कि हमारे साथ रहना चाहिए। इससे पहले नवारो ने भारत को शुल्कों का महाराजा कहा था और दावा किया था कि नई दिल्ली अमेरिका पर सबसे ज्यादा टैरिफ लगाता रहा है। उन्होंने कहा था, भारत के साथ दोतरफ़ा समस्या है...25 फीसदी समस्या अनुचित व्यापार के कारण पारस्परिक है और बाकी पच्चीस फीसदी समस्या इसलिए है क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा है।
यूक्रेन-रूस युद्ध को ‘मोदी का युद्ध’बताने वाले पीटर नवारो ने एक दिन पहले भारत के खिलाफ जहर उगलते हुए भारतीय ब्राह्मणों पर रूस से तेल खरीद में मुनाफाखोरी करने का आरोप लगाया था। एक इंटरव्यू में नवारो ने ट्रम्प प्रशासन द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ को सही ठहराते हुए चेतावनी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग से निकटता वैश्विक व्यवस्था को अस्थिर कर रही है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जब से भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी का टैरिफ लगाया है, तभी से ही वाइट हाउस के व्यापार सलाहकार नवारो भारत पर हमला करते रहे हैं। वह मॉस्को के साथ नई दिल्ली के कच्चे तेल के व्यापार की लगातार आलोचना करते रहे हैं। उनका आरोप है कि भारत रूसी तेल खरीदकर यूक्रेन के खिलाफ जंग में मॉस्को को फंडिंग कर रहा है। नवारो ने कई मौकों पर कहा है कि तेल खरीद से होने वाली आय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को वित्त पोषित कर रही है।
भारत पर गुस्साए ट्रंप अब दवाओं पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बना रहे योजना
2 Sep, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। भारत पर दबाव नहीं बना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुरी तरह खिसिया गए हैं। उन्होंने आयातित दवाओं पर 200 प्रतिशत या उससे भी अधिक का टैरिफ लगाने की योजना बनाई है। उनका उद्देश्य दवा निर्माण को विदेशों से वापस अमेरिका लाना है। हालांकि, उन्होंने कंपनियों को तैयारी का समय देने के लिए इन टैरिफों को लागू करने में लगभग एक से डेढ़ साल की देरी की बात भी कही है। ट्रंप का मुख्य टार्गेट फार्मा कंपनियों को दबाव डालकर अपना प्रोडक्शनअमेरिका में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर करना है। उनका तर्क है कि अमेरिका में बनी दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। पहले से ही, कुछ बड़ी कंपनियों जैसे जॉनसन एंड जॉनसन और रोश ने अमेरिका में निवेश बढ़ाने की घोषणा की है।
खबरों के मुताबिक भारत, जो दुनिया में जेनेरिक दवाओं का एक प्रमुख निर्यातक है, विशेष रूप से असुरक्षित है। अगर अमेरिका में टैरिफ लगता है, तो भारतीय दवा निर्माताओं को नुकसान हो सकता है और उनके निर्यात पर असर पड़ सकता है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ट्रंप प्रशासन चीन से आयातित दवाओं और उनके कच्चे माल पर बहुत फोकस कर रहा है। विशेषज्ञों और उद्योग समूहों का मानना है कि इतने ऊंचे टैरिफ का उल्टा असर हो सकता है। इससे दवाओं की कीमतों में वृद्धि होने और दवाओं की कमी पैदा होने का खतरा है। खासकर जेनेरिक (सामान्य) दवाएं, जो पहले से ही कम मुनाफे पर बिकती हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं। कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि 25 प्रतिशत टैरिफ भी अमेरिकी दवा की लागत को लगभग 51 अरब डॉलर बढ़ा सकता है। कई दवा कंपनियों और उद्योग समूहों ने इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि टैरिफ से आर एंड डी और इनोवेशन पर बुरा असर पड़ेगा। दिलचस्प बात यह है कि कुछ निवेशकों और विश्लेषकों को संदेह है कि ट्रंप वास्तव में 200 प्रतिशत जैसी ऊंची दर लागू करेंगे। उनका मानना है कि यह केवल निगोशिएशन की एक रणनीति हो सकती है।
अतिक्रमण हटाने के लिए अधिकारियों को 3 दिन की डेडलाइन
1 Sep, 2025 12:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचकूला। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के हरियाणा शहर स्वच्छता अभियान के तहत पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (PMDA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. मकरंद पांडुरंग ने शहर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ढांचागत व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
सीईओ ने सेक्टर 11 और 14 की पार्किंग में गंदगी मिलने पर नगर निगम को तुरंत सफाई करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि सभी सेक्टरों की पार्किंग की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए ताकि शहर की छवि खराब न हो। साथ ही, पॉलीथिन पर सख्ती से प्रतिबंध लागू करने और नागरिकों को कपड़े के थैले इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के प्रमुख बिंदु
अतिक्रमण हटाना: सड़क किनारे सभी अतिक्रमण 3 दिन में हटाने के आदेश। , ट्रैफिक सुधार: माजरी चौक पर रेड लाइट लगाने और स्लिप रोड चौड़ा करने पर जोर।
बागवानी: शहीद संदीप सांकला चौक पर पेड़ों की छंटाई के निर्देश। औद्योगिक क्षेत्र: वर्षा जल निकासी लाइनें, रोड-गलियों की सफाई और टूटी सड़कों की तुरंत मरम्मत के आदेश। चंडीगढ़ सीमा तक सड़क: गड्ढे भरने, सड़क चौड़ीकरण और ट्रैफिक जाम का समाधान निकालने पर बल।
एचएसवीपी प्लॉट: सेक्टर-16 और 17 के खाली प्लॉटों से झाड़ियां तीन दिन में हटाने के निर्देश। लेबर चौक: तुरंत मरम्मत और डिवाइडिंग ग्रिल की खाली जगह भरने के आदेश। पार्क: निरझर वाटिका और आम बाग (मैंगो गार्डन) पार्क में सफाई, लाइटिंग और घास कटाई सुनिश्चित करने को कहा।
सीईओ ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के स्वच्छता अभियान को सफल बनाने के लिए सभी अधिकारी निष्ठा से काम करें। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान दिए गए सभी निर्देशों की प्रगति की समीक्षा अगले सप्ताह की जाएगी। निरीक्षण के दौरान अतिरिक्त उपायुक्त निशा यादव, डीसीपी सृष्टि गुप्ता, पीएमडीए व नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पुतिन ने चीन से अमेरिका को चेताया, बोले- भेदभावपूर्ण प्रतिबंध नहीं सहेंगे
1 Sep, 2025 12:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। रसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रविवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के तियानजिन पहुंचे। उन्होंने कहा कि रूस और चीन ने ब्रिक्स देशों के सामाजिक-आर्थिक विकास में बाधा डालने वाले भेदभावपूर्ण प्रतिबंधों के खिलाफ एकजुट है। माना जा रहा है कि पुतिन ने चीन से अमेरिका को सीधा संदेश दिया है कि भेदभावपूर्ण प्रतिबंधों के खिलाफ वे एकजुट हैं। पुतिन ने यह बातें चीनी मीडिया से बातचीत में कही।
उन्होंने कहा कि रूस और चीन महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने पर ध्यान दे रहे हैं और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ब्रिक्स की क्षमता को मजबूत करने में जुटे हैं। पुतिन ने कहा कि मॉस्को और बीजिंग ब्रिक्स सदस्यों और वैश्विक स्तर पर सामाजिक-आर्थिक विकास में बाधा डालने वाले भेदभावपूर्ण प्रतिबंधों के खिलाफ साझा रुख अपनाते हैं। पुतिन ने कहा कि रूस और चीन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक में सुधार का समर्थन करते हैं।
पुतिन ने यह टिप्पणी तब की, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ब्रिक्स देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की धमकी दे रहे हैं। ब्रिक्स एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। सऊदी अरब, ईरान, इथियोपिया, मिस्र, अर्जेंटीना और संयुक्त अरब अमीरात इसके नए सदस्य हैं। पुतिन ने उम्मीद जाहिर की कि तियानजिन में होने वाला एससीओ शिखर सम्मेलन 10-सदस्यीय संगठन को नई गति देगा, समकालीन चुनौतियों और खतरों का सामना करने की इसकी क्षमता को मजबूत करेगा, तथा यूरेशियाई क्षेत्र में एकजुटता को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि इससे अधिक न्यायसंगत बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में मदद मिलेगी।
अफगानिस्तान में जोरदार भूकंप का कहर, मृतकों की संख्या 250 पार, सैकड़ों घायल
1 Sep, 2025 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल। बीती रात अफगानिस्तान के कई इलाकों में भीषण भूकंप आया है। इससे कई घरों और भवनों को नुकसान हुआ है। इस मलबे में दबकर 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई जबकि 500 से ज्यादा घायल हुए है। ये शुरुआती आंकड़ा है, मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 250 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
रिक्टर स्कैल पर भूकंप की तीव्रता 6.0 मापी गई और इसका केंद्र जमीन से केवल 8 किलोमीटर की गहराई पर था। इसके कारण भारी तबाही की आशंका जताई जा रही है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में मलबे में दबे घरों और घायलों को बाहर निकालने की कोशिश करते लोगों की तस्वीरें देखी जा सकती हैं। एक तस्वीर में एक व्यक्ति मलबे के बीच रोते हुए नजर आ रहा है, जो इस दुखद घटना की गंभीरता को दर्शाता है। आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी बयान में बताया गया कि भूकंप का केंद्र कुनर प्रांत के हिंदू कुश क्षेत्र में था, जिसने नूरगल, सूकी, वतपुर, मानोगी और चपे-दरे जैसे दूरदराज के इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्थानीय अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कई गांवों तक राहत और बचाव कार्यों की पहुंच अभी तक नहीं हो पाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदू कुश क्षेत्र का भूकृतिकीय रूप से सक्रिय होना इस तरह की आपदाओं का कारण है जहां यूरेशियन और भारतीय टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती हैं। मौजूदा स्थिति में चिकित्सा शिविरों की स्थापना और भोजन-पानी की आपूर्ति की मांग बढ़ गई है, क्योंकि कई परिवार बेघर हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस संकट पर चिंता जताई है और राहत सामग्री भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। संयुक्त राष्ट्र के आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा कि वे प्रभावित क्षेत्रों का आकलन करने के लिए जल्द ही अपनी टीम भेजेंगे। तालिबान सरकार के पास सीमित संसाधन हैं और वे संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवीय संगठनों से तत्काल मदद की उम्मीद कर रहे हैं। इस भूकंप ने अफगानिस्तान की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य ढांचे को और चुनौती दी है। पिछले कुछ वर्षों में आए भूकंपों ने पहले भी इस देश को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन 2023 का 6.3 मैग्निट्यूड का भूकंप सबसे घातक माना जाता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहायता की मांग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि भूकंप के बाद कई झोपड़ियों और पक्के मकानों में दरारें आ गईं, जबकि कुछ पूरी तरह ढह गए। तालिबान प्रशासन के प्रवक्ता ने बताया कि राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और टूटी सड़कों के कारण टीमों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हेलिकॉप्टर और चिकित्सा सहायता मुहैया कराने की अपील की है, क्योंकि कई प्रभावित क्षेत्रों तक सड़क मार्ग से पहुंचना असंभव हो गया है।
गृह युद्ध जैसे हालात से जूझ रहा ईरान, सरकार ने हिजाब कानून किया स्थगित
1 Sep, 2025 11:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान में हिजाब को लेकर बनाए गए कानून को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इसकी वजह ये है कि सरकार को लगा कि कहीं कोई हालात बिगड़ न जाएं इसलिए सावधानी बरती जा रही है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि उन्होंने देश में सख्त हिजाब कानून लागू किया होता, तो समाज के भीतर एक युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती थी। उन्होंने माना कि यह कानून लागू करना समाज को टकराव की ओर धकेल देता और हालात राष्ट्रीय विवाद में बदल जाते। राष्ट्रपति ने साफ कहा कि हिजाब पर उनका निजी विश्वास है। उन्होंने कहा कि “मेरे परिवार की महिलाएं हिजाब पहनती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जो महिला हिजाब नहीं पहनती, वह बुरी इंसान है।
2022 में महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद ईरान भर में भड़के प्रदर्शनों ने हिजाब कानून को लेकर गहरी बहस छेड़ दी थी। लाखों महिलाएं और युवा सड़कों पर उतरे थे। इसी माहौल को देखते हुए 2023 में संसद द्वारा पास किए गए कठोर हिजाब कानून को राष्ट्रपति ने लागू करने से रोक दिया। नए कानून के तहत बिना हिजाब दिखने वाली महिलाओं पर भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान था। इतना ही नहीं, उन दुकानदारों या संस्थानों पर भी कार्रवाई होनी थी जो बिना हिजाब महिलाओं को सेवा देते। लेकिन राष्ट्रपति पेजेश्कियान का मानना है कि इस कानून को लागू करने से समाज में फूट और अशांति और बढ़ जाती।
अपने इंटरव्यू में राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि विरोधी ताकतें, खासकर इजरायल, उम्मीद कर रहे थे कि हिजाब कानून लागू होते ही लोग तीसरे दिन सड़कों पर आ जाएंगे और शासन को गिरा देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और हालात नियंत्रण में रहे। राष्ट्रपति के बयान के बाद ईरान में एक बार फिर महिलाओं की स्वतंत्रता और परंपरा को लेकर बहस तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय जगत भी इस पर नजर गड़ाए हुए है कि क्या ईरान भविष्य में कानून को फिर से लागू करेगा या महिला अधिकारों को प्राथमिकता देगा।
चीन के तियानजिन से आई तस्वीरों ने बढ़ाई अमेरिका की धड़कन, महाशक्तियों की नज़दीकी पर नजर
1 Sep, 2025 09:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तियानजिन। चीन से कुछ ऐसी तस्वीरें आई हैं तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नींद उड़ा सकती हैं। ट्रंप का टैरिफ कार्ड फेल होने के बाद परेशान हैं और ये तीन महाशक्तियों को देखकर और ज्यादा परेशान होंगे। चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट चल रहा है। इस बीच सोमवार को एक बड़ी तस्वीर देखने को मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तिकड़ी ने एससीओ मंच पर आगे बढ़कर, मुस्कुराते हुए एक दूसरे से हाथ मिलाए। थोड़ी देर तक तीनों नेता मुस्कुराते रहे और तीनों एक-दूसरे की बात सुनते रहे। चीन के तियानजिन से आई यह तस्वीर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को परेशान कर सकती है, जिन्होंने भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ बम फोड़ा है।
25वें शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत रविवार रात शी जिनपिंग द्वारा आयोजित एक भव्य भोज के साथ हुई। इसमें प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत अन्य नेता भी शामिल हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संगठन के अन्य नेताओं के साथ मिलकर इस समूह की भावी दिशा तय करने के लिए एक दिवसीय शिखर सम्मेलन में विचार-विमर्श शुरू किया है। भारत समेत दुनियाभर के देशों पर ट्रंप के भारी-भरकम टैरिफ टेंशन के बीच अब सबकी निगाहें एससीओ शिखर सम्मेलन और इसके बड़े नेताओं की मीटिंग पर है। लोग इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि एससीओ के देश क्या तय करते हैं।
इस वर्ष का शिखर सम्मेलन एससीओ समूह का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन बताया गया है, क्योंकि इस वर्ष एससीओ के अध्यक्ष चीन ने एससीओ प्लस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस सहित 20 विदेशी नेताओं और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों को आमंत्रित किया है। सोमवार को विभिन्न नेता बैठक को संबोधित करेंगे तथा संगठन के लिए अपने भविष्य के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करेंगे। स्वागत भोज पर अपने संबोधन में शी ने कहा कि एससीओ पर क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की रक्षा करने तथा बढ़ती अनिश्चितताओं और तेज परिवर्तन की दुनिया में विभिन्न देशों के विकास को बढ़ावा देने की बड़ी जिम्मेदारी है। शी ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी पक्षों के सम्मिलित प्रयासों से शिखर सम्मेलन पूर्णतः सफल होगा तथा एससीओ निश्चित रूप से और भी बड़ी भूमिका निभाएगा, सदस्य देशों के बीच एकता और सहयोग को बढ़ावा देने में अधिक योगदान देगा, ‘ग्लोबल साउथ’ की ताकत को एकजुट करेगा तथा मानव सभ्यता की और अधिक प्रगति को बढ़ावा देगा। ‘ग्लोबल साउथ’ का संदर्भ आर्थिक रूप से कमजोर देशों के समूह के लिए दिया जाता है।
PM मोदी का विज़न: SCO शिखर सम्मेलन में भारत की प्रगति का रोडमैप पेश किया
1 Sep, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तियानजिन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज तियानजिन में 25वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्राध्यक्ष परिषद शिखर सम्मेलन सत्र को संबोधित कर रहे हैं. इस बीच वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे. इसके बाद उनका भारत के लिए रवाना होने का कार्यक्रम है. इससे पहले रविवार को पीएम मोदी ने एससीओ नेताओं के शिखर सम्मेलन के मौके पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता की. इस दौरान दोनों नेताओं ने अक्टूबर 2024 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मौके पर कजान में अपनी पिछली बैठक के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक प्रगति का स्वागत किया. दोनों ने पुष्टि की कि दोनों देश विकास भागीदार हैं न कि प्रतिद्वंद्वी और उनके मतभेद विवादों में नहीं बदलने चाहिए. पीएम मोदी ने आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर भारत और चीन के बीच एक स्थिर संबंध और सहयोग का आह्वान किया. प्रधानमंत्री मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता के महत्व पर भी जोर दिया. दोनों नेताओं ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने और पर्यटक वीजा की शुरुआत के आधार पर सीधी उड़ानों और वीजा सुविधा के माध्यम से लोगों से लोगों के संबंधों को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया.
एससीओ समय की बदलती जरूरतों के साथ विकसित हो रहा है:पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'यह प्रसन्नता की बात है कि एससीओ समय की बदलती जरूरतों के साथ विकसित हो रहा है. संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए चार नए केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं. हम इस सुधारोन्मुखी सोच का स्वागत करते हैं.'
आज भारत रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है: पीएम मोदी
चीन के तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी कहा, 'आज भारत रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है. हमने हर चुनौती को अवसर में बदलने की कोशिश की है. मैं आप सभी को भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करता हूं.'
आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद पूरी मानवता के लिए साझा चुनौती है: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'सुरक्षा, शांति और स्थिरता किसी भी देश के विकास का आधार है. लेकिन आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद इस राह में बड़ी चुनौतियाँ हैं. आतंकवाद सिर्फ किसी देश की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक साझा चुनौती है. कोई भी देश, कोई भी समाज, कोई भी नागरिक इससे खुद को सुरक्षित नहीं मान सकता. इसलिए, भारत ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एकता पर जोर दिया है. भारत ने संयुक्त सूचना अभियान का नेतृत्व करके अल-कायदा और उससे जुड़े आतंकवादी संगठनों से लड़ने की पहल की. हमने आतंकवाद के फंडिंग के खिलाफ आवाज उठाई.'
आतंकवाद का सर्वसम्मति से विरोध करना होगा: PM मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,'हमें स्पष्ट और सर्वसम्मति से कहना होगा कि आतंकवाद पर कोई भी दोहरा मापदंड स्वीकार्य नहीं है. यह हमला मानवता में विश्वास रखने वाले हर देश और व्यक्ति के लिए एक खुली चुनौती थी. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कुछ देशों द्वारा आतंकवाद का खुला समर्थन हमें स्वीकार्य हो सकता है. हमें हर रूप और रंग के आतंकवाद का सर्वसम्मति से विरोध करना होगा. मानवता के प्रति यह हमारा कर्तव्य है.'
बलूचिस्तान में 15 दिनों के लिए धारा 144 बढ़ाई, बाइक पर 2 लोग नहीं बैठ सकेंगे
31 Aug, 2025 08:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
क्वेटा बलूचिस्तान की प्रांतीय सरकार ने कानून-व्यवस्था की मौजूदा स्थिति का हवाला देते हुए पूरे प्रांत में धारा 144 की अवधि 15 दिनों के लिए और बढ़ा दी है। इस अवधि में हथियारों का प्रदर्शन और उपयोग, मोटरसाइकिल पर डबल सवारी, काली शीशे वाली गाड़ियां, बिना पंजीकरण वाली मोटरसाइकिलें, तथा पांच या अधिक लोगों के जमावड़े, धरना, जुलूस और रैली पर प्रतिबंध रहेगा। निर्देश में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकना, खासकर मफलर, मास्क या किसी भी अन्य तरीके से पहचान छिपाना भी पूरी तरह वर्जित होगा।
नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) के केंद्रीय प्रवक्ता शाहजेब बलोच ने इन प्रतिबंधों को असंवैधानिक करार दिया और पत्रकार वार्ता में कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंटने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान और देशभर के अन्य वंचित समूहों के कार्यकर्ताओं को न केवल परेशान किया जा रहा है बल्कि उन्हें जबरन गायब करने जैसी गंभीर रणनीतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।शाहजेब ने कहा कि सरकार को चाहिए कि सभी लापता बलोच और अन्य पीड़ितों को वापस लाने की व्यवस्था करे। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता पर आरोप है तो उसे अदालत में पेश किया जाना चाहिए, लेकिन पूरे समुदाय को सामूहिक सजा देना जातीय और राष्ट्रीय शुद्धिकरण की तरह है और औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है।
इस बीच खुजदार जिले के जवाह और जहरी इलाकों में तनाव बढ़ गया, जहां क्वेटा-कराची राजमार्ग को प्रदर्शनकारियों ने दूसरे दिन भी जाम रखा। यह विरोध तब शुरू हुआ जब हब चौकी से खुजदार जा रही एक वैन से यात्रियों को अगवा कर लिया गया। स्थानीय नेताओं का आरोप है कि हाल ही में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने एक वैन को रोका, जिसमें से महिलाओं और बच्चों को उतारने के बाद पुरुष यात्रियों और वाहन को अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। स्थानीय नेता बाबा फतेह जहरी ने फोन पर पत्रकारों को बताया कि खुजदार प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को खत्म करने के लिए बल प्रयोग किया। लवीज बलों ने गोलीबारी और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिससे दो यात्री घायल हो गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बलों ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया और युवाओं को पीटा। फतेह ने जहरी क्षेत्र के लोगों से बड़ी संख्या में धरने में शामिल होने की अपील की ताकि खुजदार प्रशासन की ज्यादतियों को रोका जा सके।
अमेरिका के पेंटागन में अचानक बढ़े पिज्जा ऑर्डर, मतलब अमेरिका में बड़ा संकट आने वाला है
31 Aug, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। दुनिया के तमाम संकेतों में से एक है अमेरिका का मशहूर पेंटागन पिज्जा इंडेक्स। कहा जाता है कि जब पेंटागन में देर रात तक पिज्जा के ऑर्डर अचानक बढ़ने लगते हैं तो यह किसी बड़े सुरक्षा संकट या सैन्य गतिविधि का इशारा होता है। पिछले शुक्रवार पेंटागन के पास फिर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। दोपहर करीब 1 बजे (ईटी) अचानक पिज्जा ऑर्डर बढ़ गए। रिपोर्ट नाम के एक्स अकाउंट ने यह डेटा शेयर किया और देखते ही देखते यह खबर वायरल हो गई।
इस थ्योरी के समर्थकों का कहना है कि इसके पीछे पुराने उदाहरण भी हैं। 1990 में जब सद्दाम हुसैन ने कुवैत पर हमला किया था, उससे ठीक एक रात पहले वॉशिंगटन डीसी में पिज्जा ऑर्डर अचानक बढ़ गए थे। डोमिनोस के मालिक फ्रैंक मीक्स ने दावा किया था कि 1991 में ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म से पहले भी ऐसा ही पैटर्न सामने आया था। यहां तक कि ईरान पर हमले से पहले भी पिज्जा ऑर्डर बढ़ने की घटनाएं दर्ज की गईं, जिसे अमेरिका की पूर्व जानकारी से जोड़ा गया।
रिपोर्ट में बताया गया कि फ्रेडीज बीच बार पर सामान्य से ज्यादा भीड़ रही। वहीं दूसरी दुकानों पर हाल अलग-अलग दिखा।कुछ जगह खाली रहीं, तो कुछ पर वेटिंग टाइम 15 मिनट तक पहुंच गया। पोस्ट में लिखा गया कि पेंटागन के पास पिज्जा दुकानों का हाल फिलहाल मिक्स है, कहीं भीड़ ज्यादा तो कहीं कम। शाम 7:36 बजे तक यह पैटर्न बना रहा। शुक्रवार की शाम वैसे भी खाने-पीने की जगहों पर भीड़ रहती है, लेकिन पेंटागन के पास अचानक ऐसा ट्रेंड देखने को मिला तो सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। द पेंटागन रिपोर्ट का कहना है कि 27 और 28 अगस्त को भी इसी तरह का पैटर्न सामने आया था। डेटा सामने आते ही लोग एक्स पर कमेंट्स की झड़ी लग गई। एक यूजर ने लिखा-पिजाटो पिज्जा, जो पेंटागन के पास आधी रात बाद भी खुला रहता है, वहां आज ऑर्डर 303 प्रतिशत बढ़ गए हैं। किसी और ने कहा, कि हमें तुरंत अपडेट चाहिए। वहीं एक यूज़र ने सीधा सवाल दागा-आखिर चल क्या रहा है? इस अचानक उछाल ने एक बार फिर पेंटागन पिज्जा इंडेक्स थ्योरी की चर्चा तेज कर दी। माना जाता है कि जब भी पेंटागन में इमरजेंसी आती है, वहां काम करने वाले अफसरों और कर्मचारियों को लंबे समय तक ड्यूटी करनी पड़ती है। ऐसे में खाने-पीने, खासकर पिज्जा की मांग अचानक बढ़ जाती है।
चीन में पुतिन-जिनपिंग के साथ मंच पर नजर आएंगे किम जोंग-उन
31 Aug, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सियोल। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन वैश्विक राजनीति में दखल देने की तैयारी कर रहे हैं। किम इस सप्ताह चीन में बहुपक्षीय कूटनीतिक मंच पर कदम रखने वाले हैं। बीजिंग में सैन्य परेड में भाग लेने के लिए उनकी यात्रा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ संभावित त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का मंच तैयार कर रही है। 2011 के आखिर में सत्ता संभालने वाले किम के लिए यह पहली बार होगा जब वे किसी बहुपक्षीय राजनयिक कार्यक्रम में शामिल होंगे। उनके दादा और उत्तर कोरिया के संस्थापक किम इल-सुंग 1959 में चीन में एक सैन्य परेड में शामिल हुए थे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक किम का चीन में द्वितीय विश्व युद्ध के अंत की 80वीं वर्षगांठ के सैन्य परेड में पुतिन और शी के साथ भाग लेंगे। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन में अपनी उच्च-स्तरीय शिखर वार्ता में उत्तर कोरिया के साथ कूटनीति फिर से शुरू करने की उत्सुकता व्यक्त करने के कुछ दिनों बाद घोषित किया गया। किम का इस सप्ताह बीजिंग में पुतिन और शी जिनपिंग के साथ सैन्य परेड में शामिल होना इस बात का संकेत है कि किम जोंग उन की दक्षिण कोरिया या अमेरिका के साथ कूटनीति में कोई रुचि नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, किम और पुतिन ने सैन्य संबंधों को गहरा किया है। प्योंगयांग ने यूक्रेन के खिलाफ मास्को युद्ध में मदद के लिए अपने सैनिक और हथियार भेजे हैं। उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया के मुताबिक किम ने पिछले साल 28 अगस्त को अपने सैन्य तैनाती के फैसले को अंतिम रूप दिया था। वहीं रूसी मीडिया के मुताबिक किम, पुतिन और शी 3 सितंबर को बीजिंग में होने वाली सैन्य परेड में शामिल होंगे। क्रेमलिन के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि किम शी के बाईं ओर बैठेंगे, जबकि पुतिन शी के दाईं ओर। अगर किम चीन विशेष ट्रेन से जाते हैं, तो करीब 20 घंटे लगेंगे।
दक्षिण कोरिया के कुछ विश्लेषकों का मानना है कि किम शम्मा-1 की बजाय अपनी फॉरेस्ट ग्रीन ट्रेन का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह वह निजी विमान है जिसका इस्तेमाल किम ने अपने कार्यकाल के शुरुआती सालों में लंबी दूरी की घरेलू यात्राओं के लिए किया था। विशेषज्ञों का आकलन है कि उत्तर कोरिया ने रूस-यूक्रेन युद्ध के समापन की आशंका में बीजिंग के साथ बिगड़े संबंधों को सुधारने के प्रयासों के तहत किम की चीन यात्रा को चुना है, जिससे मास्को का ध्यान पश्चिम की ओर जा सकता है।
पिछले साल से प्योंगयांग ने मास्को के साथ रिश्ते सुधारे हैं। यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस का समर्थन करने के लिए सेना भेजी है और दुर्लभ संसाधनों और सहायता के अपने मुख्य आपूर्तिकर्ता के रूप में रूस की ओर रुख किया है। इसके साथ ही उत्तर कोरिया और चीन ने हाल ही में संबंधों में सुधार के संकेत दिए हैं। उत्तर कोरिया की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष ने हाल ही में प्योंगयांग में चीनी दूतावास द्वारा वर्षगांठ मनाने के लिए आयोजित एक स्वागत समारोह में भाग लिया। विश्लेषकों का सुझाव है कि किम ने अमेरिका के साथ संभावित वार्ता फिर से शुरू होने से पहले अपनी सौदेबाजी की स्थिति को मजबूत करने के लिए चीन के साथ उत्तर कोरिया के घनिष्ठ संबंधों का लाभ उठाने के लिए सैन्य परेड में भाग लेने का विकल्प चुना है।
इंग्लैंड में अवैध प्रवासियों को हिरासत में लेने और वापस भेजा जाएगा उनके देश
31 Aug, 2025 04:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर ने अवैध प्रवासियों को हिरासत में लेने और वापस उनके देश भेजने का ऐलान किया है। हाल में सरकार पर चैनल क्रॉसिंग और शरण होटलों के मुद्दे से निपटने के लिए बढ़ते दबाव का सामना कर रहा है। स्टारमर ने एक्स पर कहा कि हम अवैध प्रवेश को बढ़ावा नहीं देंगे। अगर आप अवैध रूप से चैनल पार करते हैं, तो आपको हिरासत में लिया जाएगा और वापस भेजा जाएगा। उनकी यह टिप्पणी शनिवार को पूरे इंग्लैंड में कई प्रदर्शनों के दौरान आई, जहां शरणार्थियों को होटलों में ठहराया जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी लंदन में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गर्मियों में हजारों लोग विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए थे, जो एक होटल में ठहरे एक शरणार्थी की गिरफ्तारी और उसके बाद उस पर 14 साल की लड़की के कथित यौन उत्पीड़न समेत कई अपराधों के आरोप लगने के बाद शुरू हुए थे। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक जून तक होटलों में ठहरे शरणार्थियों की संख्या बढ़कर 32 हजार से ज्यादा हो गई। सरकार ने अगले आम चुनाव तक शरणार्थी होटलों को बंद करने का वादा किया था।
बता दें ब्रिटेन और फ्रांस एक ऐसी योजना पर काम कर रहे हैं जिसके तहत इंग्लिश चैनल पार करके छोटी नावों से आने वाले प्रवासियों को वापस फ्रांस भेजा जाएगा। वहीं, इसके बदले में उतनी ही संख्या में शरणार्थियों को कानूनी रास्ते से ब्रिटेन लाया जाएगा,
लेकिन इस योजना में शामिल लोगों की संख्या आने वाले लोगों का एक छोटा सा हिस्सा ही होने की संभावना है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 31 जुलाई 2025 में 25,000 से ज्यादा लोग छोटी नावों से इंग्लैंड चैनल पार कर चुके थे, जो 2024 में इसी समय की तुलना में करीब 49 फीसदी ज्यादा है।
राशिफल 27 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत का त्वरित समाधान
सपनों को मिला कलेक्टर का साथ, द कलेक्टर्स-15 से शुरू हुई बदलाव की नई इबारत
मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारी राकेश कुमार कुशवाह ने ओपन इंडिया प्री-स्टेट शूटिंग प्रतियोगिता में जीता स्वर्ण पदक
प्रधानमंत्री मोदी ने सीधी जिले में बने 1500 तालाबों और नरसिंहपुर के अमृत सरोवरों का मन की बात में किया उल्लेख
युवाओं के नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को मिलेगा नया आयाम : वित्त मंत्री ओपी चौधरी
