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ट्रंप की टैरिफ नीति पर अड़े अमेरिका, देशों को दी सख्त सलाह
12 Jul, 2025 04:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टैरिफ वॉर के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार वार्ता में शामिल देशों को सलाह दी है। ट्रंप ने कहा कि सभी देश टैरिफ की एक अगस्त की समयसीमा से पहले वार्ता के लिए कड़ी मेहनत करते रहें। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से अमेरिका का दोस्त और दुश्मन दोनों देशों ने खूब फायदा उठाया है। दक्षिण कोरिया, जापान समेत कई देश एक अगस्त से लागू होने वाले ट्रंप के जवाबी टैरिफ से बचने के लिए अमेरिका से समझौता करने का प्रयास कर रहे हैं।
बाढ़ प्रभावित टेक्सास के दौरे में रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा कि मुझे लगता है कि बस कड़ी मेहनत करते रहिए। कई वर्षों से मित्र और शत्रु दोनों ही देशों ने हमारा फायदा उठाया है। सच कहूं तो कई मामलों में मित्र, शत्रुओं से भी बदतर रहे हैं। इसलिए मैं कहूंगा, बस काम करते रहो। सब ठीक हो जाएगा।
ट्रंप ने हाल के दिनों में ट्रेड युद्ध का दायरा बढ़ाते हुए कई देशों पर नए टैरिफ लगाए हैं। कनाडा के अलावा, ट्रंप ने हाल ही में जापान और दक्षिण कोरिया पर भी नए टैरिफ लगाए हैं। इसके साथ ही आयातित तांबे पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। गुरुवार को एक साक्षात्कार में ट्रंप ने संकेत दिया कि जल्द ही दूसरे देशों को भी 15 से 20 प्रतिशत तक के व्यापक टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका ने दक्षिण कोरिया को लिखा पत्र
टैरिफ को लेकर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग को ट्रंप ने पत्र लिखा था। इसमें कहा गया कि अमेरिका एक अगस्त से दक्षिण कोरियाई उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाना शुरू करेगा। इस बीच दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका ने सियोल में वार्ता की। इसमें द्विपक्षीय गठबंधन को लाभकारी, आधुनिक, भविष्योन्मुख और व्यापक रणनीतिक" गठबंधन के रूप में मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की गई।
कनाडा पर भी लगाया था टैरिफ
इससे पहले गुरुवार (10 जुलाई) को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को एक पत्र लिखकर नई टैरिफ दरों की जानकारी दी थी। ट्रंप ने घोषणा की है कि 1 अगस्त से कनाडा से होने वाले सभी आयातों पर 35 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। उन्होंने इसे कनाडा की ओर से फेंटेनाइल ड्रग की सप्लाई कम करने में नाकामी का नतीजा बताया है।
एलन मस्क की मुश्किलें बढ़ीं, पाकिस्तान में स्टारलिंक को मिलेगा लाइसेंस?
12 Jul, 2025 04:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान : पाकिस्तान में सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा की शुरुआत लगातार टल रही है। इसकी बड़ी वजह यह है कि सरकार अब इस क्षेत्र में विदेशी कंपनियों के लिए कड़े नियम बना रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, स्टारलिंक जैसी कंपनियों के लिए नए दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि ज्यादा देरी से मस्क की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. हालांकि सख्त दिशानिर्देशों को लागू करने से पहले सरकार और अंतरिक्ष क्षेत्र की संस्थाएं कंपनियों से सुझाव भी ले रही हैं।
मीडिया के मुताबिक, हाल के भारत-पाकिस्तान और ईरान-इस्राइल विवादों के बाद पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान सैटेलाइट कम्युनिकेशन पर गया है। इसके बाद अब पाकिस्तान स्पेस एक्टिविटीज रेगुलेटरी बोर्ड सैटेलाइट इंटरनेट से जुड़ी कंपनियों के लिए कड़े सुरक्षा नियम ला रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यदि हाल के युद्ध न होते तो शायद इन सुरक्षा पहलुओं पर गौर नहीं किया जाता।
नए नियमों में सुरक्षा और लाइसेंसिंग प्रमुख
स्टारलिंक पाकिस्तान में काम करने के लिए मार्च में मिला अस्थायी एनओसी समाप्त हो चुका है। अब सभी विदेशी सैटेलाइट ऑपरेटरों को नए बनाए गए 'सैटेलाइट कम्युनिकेशन रेगुलेशंस' के तहत फिर से आवेदन करना होगा। इन कंपनियों को पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी (पीटीए) से ऑपरेशनल लाइसेंस भी लेना होगा।
स्टारलिंक के साथ दो और कंपनियां लाइन में
स्टारलिंक के अलावा दो और कंपनियां, वनवेब और शंघाई स्थित शंघाई स्पेसकॉम सैटेलाइट टेक्नोलॉजी भी पाकिस्तान में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करना चाहती हैं। ये तीनों कंपनियां लो अर्थ ऑर्बिट (लिओ) सैटेलाइट आधारित सेवाएं देती हैं, जो दूर-दराज के क्षेत्रों में भी तेज इंटरनेट पहुंचा सकती हैं। इससे पाकिस्तान के ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों को फायदा हो सकता है।
एलन मस्क लॉन्च में हो सकते हैं शामिल
सूत्रों के मुताबिक, स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क भी पाकिस्तान में स्टारलिंक की लॉन्चिंग के कार्यक्रम में हिस्सा ले सकते हैं। स्टारलिंक ने पाकिस्तान में सेवाएं शुरू करने के लिए सबसे पहले औपचारिक आवेदन दिया था। हालांकि, स्पष्ट नियमन के अभाव में इसकी मंजूरी में देरी हो रही है।
वर्ष के अंत तक सेवाएं शुरू होने की उम्मीद
पीटीए के एक अधिकारी ने बताया कि स्टालिंक समेत अन्य कंपनियां इस साल के अंत तक पाकिस्तान में अपनी सेवाएं शुरू कर सकती हैं। इसके लिए उन्हें सभी नए नियमों का पालन करते हुए लाइसेंस लेना होगा। पाकिस्तान सरकार को उम्मीद है कि नए नियमों से देश की डिजिटल सुरक्षा मजबूत होगी और एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी तैयार होगी। इस पूरी प्रक्रिया के बाद पाकिस्तान उन गिने-चुने देशों में शामिल हो सकता है, जो अपनी सीमाओं में विदेशी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को विनियमित करने के लिए स्पष्ट और सख्त नियम लागू कर रहे हैं।
जब पूरी दुनिया कर रही विरोध, म्यांमार जनरल ने कहा- शुक्रिया ट्रंप!
12 Jul, 2025 01:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जब पूरी दुनिया अमेरिकी टैरिफ की मार से परेशान है, म्यांमार का सैन्य शासक मिन आंग ह्लाइंग इसे सम्मान बताकर खुशियां मना रहे हैं. ट्रंप की ओर से मिले एक औपचारिक लेटर को म्यांमार की तानाशाही सरकार ने ऐसे पेश किया जैसे उन्हें वैश्विक मान्यता मिल गई हो.
दरअसल, अमेरिका ने म्यांमार के उत्पादों पर 40 फीसदी का नया टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो 1 अगस्त से लागू होगा. ये वही म्यांमार है जिसे अमेरिका और यूरोप अब तक आधिकारिक सरकार नहीं मानते और जिस पर तमाम प्रतिबंध लगाए गए हैं. लेकिन जनरल ह्लाइंग को इस टैरिफ में नुकसान नहीं, एक अवसर नजर आ रहा है.
कौन है जनरल ह्लाइंग
जनरल ह्लाइंग वही नेता हैं जिन पर रोहिंग्या नरसंहार का आरोप है और जिन्होंने नोबेल विजेता आंग सान सूची की लोकतांत्रिक सरकार को 2021 में तख्तापलट कर गिरा दिया. सू ची अब बंद दरवाजों के पीछे हुई सुनवाई के बाद 27 साल की सजा काट रही हैं.
चिट्ठी को बताया आमंत्रण, मिलने की जताई इच्छा
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप का ये पत्र न सिर्फ ईमानदारी से सराहा गया, बल्कि जनरल ने इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भागीदारी का संकेत बताया. उन्होंने अमेरिका को बातचीत के लिए एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की पेशकश भी कर डाली. ह्लाइंग ने यहां तक कहा कि अमेरिका को म्यांमार पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने पर विचार करना चाहिए क्योंकि ये दोनों देशों के साझा हितों और समृद्धि में बाधा डालते हैं.
ट्रंप की तारीफ, लोकतंत्र पर हमला
चिट्ठी की आड़ में जनरल ह्लाइंग ने ट्रंप की जमकर तारीफ भी की. उन्होंने ट्रंप को सच्चा राष्ट्रभक्त बताया और उनके वैश्विक शांति के प्रयासों की सराहना की. यही नहीं, उन्होंने ट्रंप की उस शिकायत को भी दोहराया जिसमें ट्रंप ने 2020 के अमेरिकी चुनाव में धांधली का आरोप लगाया था.
ह्लाइंग ने कहा कि जैसे ट्रंप को चुनाव में गड़बड़ी का सामना करना पड़ा, म्यांमार में भी कुछ ऐसा ही हुआ. जबकि सच्चाई ये है कि म्यांमार में 2020 का चुनाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निष्पक्ष और स्वतंत्र माना गया था. लेकिन सेना ने धोखाधड़ी का बहाना बनाकर सत्ता पर कब्जा कर लिया.
सीजफायर के बाद ईरान का अफगानों पर एक्शन, हजारों शरणार्थी बाहर निकाले गए
12 Jul, 2025 12:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इजराइल और ईरान के बीच हालिया संघर्ष खत्म होने के कुछ ही दिन बाद ईरान में अफगान नागरिकों पर कार्रवाई तेज हो गई है. महज 16 दिनों में 5 लाख से ज्यादा अफगानों को ईरान से बाहर निकाल दिया गया है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, ये दशक के सबसे बड़े जबरन विस्थापन में से एक माना जा रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक 24 जून से 9 जुलाई के बीच 5 लाख 8 हजार से ज्यादा अफगान नागरिकों ने ईरान-अफगानिस्तान बॉर्डर पार किया है. एक दिन में 51,000 लोगों को बाहर किया गया, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. ईरान ने बीते रविवार तक का अल्टीमेटम दिया था कि बिना कागजों वाले सभी अफगान नागरिक देश छोड़ दें.
लंबे समय से थी तैयारी, अब मिला मौका?
ईरान लंबे समय से ये संकेत देता रहा है कि वो देश में रह रहे अवैध अफगान प्रवासियों को निकालना चाहता है. इन अफगानों में बड़ी संख्या उन लोगों की है जो बेहद कम वेतन में ईरान के शहरों में मजदूरी करते हैं. तेहरान, मशहद और इस्फहान जैसे शहरों में ये मजदूर निर्माण, सफाई और खेतों में काम करते हैं. लेकिन इजराइल के साथ 12 दिन की जंग खत्म होते ही अफगानों पर कार्रवाई अचानक तेज हो गई.
आरोप- अफगान कर रहे थे इजराइल के लिए जासूसी
ईरान की ओर से कहा जा रहा है कि कुछ अफगान नागरिक इजराइल के लिए जासूसी कर रहे थे, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से ये जरूरी है. वहीं ईरानी मीडिया में ऐसा ही दावा किया जा रहा है. एक कथित वीडियो भी दिखाया गया जिसमें एक अफगान युवक 2000 डॉलर के बदले जर्मनी में बैठे किसी हैंडलर को लोकेशन की जानकारी देने की बात कबूल कर रहा है. हालांकि इस वीडियो की पुष्टि नहीं हुई है और आरोप भी सबूतों के बगैर ही हैं.
आलोचना के घेरे में ईरान
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ईरान इन जासूसी के आरोपों को बहाना बनाकर लंबे समय से पलायन की योजना पर काम कर रहा था. अब उस पर अमल शुरू हो चुका है. आलोचकों का कहना है कि सरकार ने आंतरिक असंतोष को दबाने के लिए अफगानों को निशाना बनाया है, जो पहले से ही एक कमजोर और शोषित समुदाय है.
अफगानिस्तान में हालात गंभीर
ईरान से निकाले गए अफगानों के लिए हालात आसान नहीं हैं. तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर है और बॉर्डर पर बनाए गए अस्थायी कैंप्स में सुविधाएं सीमित हैं. इस साल अब तक ईरान और पाकिस्तान से करीब 16 लाख अफगान अपने देश लौट चुके हैं. UNHCR का अनुमान है कि साल के अंत तक यह संख्या 30 लाख तक पहुंच सकती है. जानकारों की मानें तो बिना जांच-पड़ताल और कानूनी प्रक्रिया के इतने बड़े पैमाने पर पलायन, भविष्य में और संकट खड़ा कर सकता है.
तिराह घाटी में धमाका, क्वाडकॉप्टर से बम छोड़ते हुए TTP आतंकी मारा गया
12 Jul, 2025 12:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान के तहरीक-ए-तालिबान (TTP) के एक आतंकवादी कमांडर की हाल ही में मौत हो गई. आतंकवादी की यह मौत तब हुई जब वो बम संभाल रहा था और तभी बम फट गया. सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में क्वाडकॉप्टर लॉन्च करने की कोशिश करते समय, जब आतंकवादी बम संभाल रहा था, तभी उसमें विस्फोट हो गया, तभी टीटीपी के आतंकवादी कमांडर की मौत हो गई.
जिस आतंकवादी की मौत हुई उसका नाम कमांडर यासीन उर्फ अब्दुल्ला था. आतंकवादी अब्दुल्ला की मौत उस समय हुई जब वो अफगानिस्तान की सीमा से लगे खैबर जिले की तिराह घाटी में क्वाडकॉप्टर चलाने की कोशिश कर रहा था, तभी एक बम विस्फोट हो गया.
TTP कमांडर की कैसे हुई मौत
सूत्रों के मुताबिक, कमांडर अब्दुल्ला के दो और साथी बम विस्फोट में बुरी तरह घायल हो गए हैं. उन्होंने बताया कि यासीन और उसका ग्रुप 24 मई को औपचारिक रूप से प्रतिबंधित टीटीपी में शामिल हो गया था. यासीन तिराह क्षेत्र में ग्रुप के अभियानों का नेतृत्व कर रहा था – जो सुरक्षा बलों और टीटीपी, लश्कर-ए-इस्लाम और अंसार-उल-इस्लाम जैसे आतंकवादी गुटों के बीच संघर्ष का केंद्र है.
तिराह घाटी में बढ़ रहा आतंकवाद
इस क्षेत्र में आतंकवाद-रोधी अभियान तेज हो गए हैं, पिछले महीने ही 22 आतंकवादियों को मार गिराया गया है. तिराह घाटी एक ऐसा क्षेत्र है जहां बार-बार हमले हुए हैं, जिनमें नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए आईईडी विस्फोट और आतंकवादी समूहों के बीच ही झड़पें शामिल हैं.
पाकिस्तानी सेना इस क्षेत्र को आतंकवाद मुक्त बनाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है. सेना ने तिराह में खुफिया जानकारी के आधार पर अभियान जारी रखा और आतंकवादी ठिकानों और हथियारों के जखीरे को नष्ट किया जा रहा है.
क्या है टीटीपी?
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का एक आतंकवादी ग्रुप है. यह आतंकवादी ग्रुप साल 2007 में बना था. समूह का संस्थापक नेता बैतुल्लाह महसूद था. इसकी जड़ें अफगानिस्तान/पाकिस्तान सीमा पर हैं. कुछ अनुमान बताते हैं कि टीटीपी के 30,000 से 35,000 सदस्य हैं.
पुतिन ने तेज किए ड्रोन अटैक, यूरोप के दो देश उतरे यूक्रेन के समर्थन में
12 Jul, 2025 11:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूक्रेन के खात्मे के लिए पुतिन ने ऐसा प्लान बनाया है. जो जेलेंस्की के लिए बहुत बड़ी टेंशन बन गया है. कीव पर जीत के लिए पुतिन ने जो फॉर्मूला बनाया है. अगर वो कामयाब रहा तो कुछ हफ्तों में ही यूक्रेन सरेंडर कर सकता है. पुतिन ने यूक्रेन पर हर दिन एक हजार ड्रोन से हमलों का प्लान रेडी किया है. पिछले 72 घंटों से यूक्रेन पर रूस ड्रोन से भीषण हमले भी कर रहा है. रूस के नए हमलों में कीव से लेकर खारकीव तक भारी तबाही हुई है. रूस के हमलों में तेजी को देखते हुए लंदन में उन देशों की बैठक हुई है जो यूक्रेन को समर्थन कर रहे हैं, इनमें ब्रिटेन और फ्रांस ने यूक्रेन की रक्षा का संकल्प लिया है.
यूक्रेन के शहरों पर रूस 72 घंटे से लगातार बारूद बरसा रहा है. कीव से लेकर खारकीव तक रूस की ऐसी ड्रोन-वर्षा हो रही है कि यूक्रेन के शहरों में हर तरफ शोले उठते देखे जा रहे हैं.शुक्रवार को भी कीव, खारकीव, डोनेस्क, ओडेसा, मायकोलेव और निकोलेव में रूस ने विध्वंसक ड्रोन अटैक किए. यूक्रेन के शहरों में रूस के ये घातक हमले क्या पुतिन के उस प्लान का टेस्ट हैं, जिसके बारे में जेलेंस्की ने आशंका जताई थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक यूक्रेन पर ड्रोन प्रहार में रूस एक राउंड में करीब 800 ड्रोन हमले कर रहा है.रूस अब यूक्रेन पर हर दिन 1000 ड्रोन दागने की तैयारी में है.
धुएं से भर गया कीव का आसमान
पिछली रात भी कीव पर रूस ने ड्रोन से भीषण प्रहार किया, जिसके बाद शहर का आसमान आग की लपटों और धुएं से भर गया. यूक्रेन की राजधानी कीव को दहलाने के लिए रूस ने ड्रोन्स के साथ-साथ मिसाइल से भी हमले किए,जिसमें कम से कम दो लोगों की मौत की खबर है. ये हमला यूक्रेन पर अब तक के सबसे बड़े रूसी हवाई हमले के एक दिन बाद हुआ. रूस ने इससे पहले पिछले दो दिनों में यूक्रेन के शहरों पर 700 से ज्यादा कामकाजी ड्रोन से हमले किए थे. रूस ने यूक्रेन के शहरों पर मिसाइलों से भी कहर बरपाया था. इन हमलों में कीव के अलावा यूक्रेन के 10 और शहरों को निशाना बनाया गया था. इन हमलों के अभी 48 घंटे भी नहीं बीते थे तब तक रूस ने कीव से लेकर खारकीव तक ड्रोन हमलों की रफ्तार बढ़ा दी.
खारकीव में मेडिकल सेंटर को बनाया निशाना
रूस ने खारकीव के मध्य क्षेत्र में शाहेद ड्रोन से हमला किया. खारकीव के स्थानीय प्रशासन के मुताबिक खारकीव में एक मेडिकल सेंटर को भी निशाना बनाया गया. खारकीव पर रूस के ड्रोन हमलों का खतरा अभी बरकरार है. खारकीव और और पूरे क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है. रूस अभी तक यूक्रेन के 54 ड्रोन ऑपरेशन सेंटर तबाह कर चुका है. यूक्रेन के 4 स्टारलिंक टर्मिनल स्टेशन भी नष्ट हो चुके हैं.
लंदन में हुई कोएलिशन ऑफ द विलिंग की बैठक
लंदन में हुई कोएलिशन ऑफ द विलिंग की बैठक हुई है. यानी उन देशों के समूह की बैठक जो यूक्रेन को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसी प्रतिबद्धता को निभाने के लिए दो बड़े फैसले किए गए हैं. पहला फैसला है यूक्रेन में यूरोप की सेना को उतारना, जबकि दूसर फैसला है, यूक्रेन को हथियारों से संपन्न बनाना. इस जंग में जो दो देश बड़ी भूमिका निभाएंगे वे ब्रिटेन और फ्रांस हैं. यही दो देश हैं, जो रूस के खिलाफ इस जंग में अब रूस के खिलाफ संयुक्त मोर्चे का नेतृत्व करेंगे.
क्या करेंगे फ्रांस और ब्रिटेन?
इस फैसले के तहत यूक्रेन में सहयोगी देशों के 50 हज़ार सैनिक तैनात होंगे. इनमें सबसे ज्यादा 10 हज़ार सैनिक ब्रिटेन के होंगे और बाकी यूरोपीय देशों की ब्रिगेड मिलाकर एक सैन्य कोर बनाई जाएगी. यही नहीं इस बैठक में हथियार हासिल करने के लिए यूक्रेन के रास्ते भी खोल दिए गए हैं. यानी ब्रिटेन और यूक्रेन ने एक रक्षा समझौता कर लिया है. जिसके तहत कीव की वायु रक्षा जरूरतों के लिए 5 हजार मिसाइलें ब्रिटेन देगा. ये सौदा 2.5 बिलियन पाउंड यानी 2 खरब 90 अरब रुपये से ज्यादा का है. इसके तहत 19 वर्षों तक यूक्रेन को मिसाइलों की आपूर्ति होती रहेगी. तो वहीं दूसरी तरफ फ्रांस ने उन्हीं घातक मिसाइलों का यूक्रेन के लिए 15 वर्ष बाद उत्पादन शुरू कर दिया है. इसके जरिए यूक्रेन ने रूस के अंदर तक प्रहार किए हैं.
फ्रांस बनाएगा स्टॉर्म शैडो मिसाइल
स्टॉर्म शैडो मिसाइल एक बार फिर यूक्रेन की ताकत बनने जा रही है. ये वही मिसाइल है, जिसे रूस और यूरोप के देश घातक स्कैल्प-EG मिसाइल के नाम से जानते हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि, स्टॉर्म शैडो एक क्रूज़ मिसाइल है. जो रूस के रडार की पकड़ से बाहर है. इसे और भी खास बनाता है, इसका एयर लॉन्च प्लेटफार्म और इस मिसाइल की खूबी ये भी है कि, स्टॉर्म शैडो मिसाइल किसी स्थिर टारगेट जैसे बुनियादी ढांचे को तबाह करने में सक्षम है. खूबी सिर्फ यही नहीं है, स्टॉर्म शैडो की विशेषता है इसकी बनावट है. इसका वजन 1,300 किलो ग्राम है, जबकि इसका 450 किलोग्राम का वॉरहेड और टारगेट को पूरी तरह से ध्वस्त कर सकता है. यही नहीं ये मिसाइल 500 किलोमीटर से भी ज्यादा ऑपरेटिव है.
राधिका हत्याकांड: पुलिस को चाहिए गोलियों का सुराग, आरोपी पिता से होगी कड़ी पूछताछ
11 Jul, 2025 07:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुरुग्राम: हरियाणा के गुरुग्राम में एक दिल दहला देने वाली घटना में 25 साल की टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की उनके पिता दीपक यादव ने गोली मारकर हत्या कर दी। इस मामले में शुक्रवार को गुरुग्राम की एक अदालत ने 49 साल के दीपक यादव को एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। पुलिस ने बताया कि राधिका टेनिस अकादमी की कमान संभालना चाहती थी और इसे लेकर ही पिता इतना नाराज हुआ कि गोलियां दाग दीं। राधिका की मां मंजू यादव ने इस घटना के कारणों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।
कहां से बरामद की जानी है गोलियां?
अदालत के बाहर एक पुलिस अधिकारी ने संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने आरोपी की दो दिन की हिरासत मांगी थी। उन्होंने कहा कि हमें उसकी लाइसेंसी रिवॉल्वर (अपराध में इस्तेमाल) की गोलियां बरामद करनी है। हमें यह भी सत्यापित करना है कि उसने कितनी गोलियां खरीदी थी। यह पूछे जाने पर कि गोलियां कहां से बरामद की जानी है? अधिकारी ने कहा कि रेवाड़ी के निकट कसाम गांव में आरोपी की जमीन है। हमें गोलियां वहीं से लानी है।
क्या है मामला?
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे गुरुग्राम में राज्य स्तरीय टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव (25) की बृहस्पतिवार को उसके पिता दीपक यादव (49) ने ही कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने बताया कि घटना गुरुग्राम के सुशांत लोक में स्थित दो मंजिला मकान में हुई। दीपक यादव को कड़ी सुरक्षा में अदालत में पेशी के लिए अदालत परिसर के निकट पुलिस वाहन से बाहर निकाला गया और उस वक्त उसने अपना सिर तौलिए से ढका हुआ था।
घटना के समय खिलाड़ी की मां क्या कर रही थी?
उसे मीडियाकर्मियों के एक समूह के सवालों का सामना करना पड़ा, जो जानना चाहते थे कि उसने अपनी बेटी की हत्या क्यों की। हालांकि, उसे तुरंत अदालत परिसर के अंदर ले जाया गया। सुनवाई के बाद जब वह अदालत से बाहर आया, तो तौलिया उतार दिया गया था। उससे फिर वही सवाल पूछा गया, और पुलिस उसे जल्दी से वाहन तक ले गई। पुलिस ने बताया कि वे हत्या के सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रहे हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि घटना के समय खिलाड़ी की मां क्या कर रही थी।
पिता-बेटी में क्यों हुआ विवाद?
पुलिस ने दावा किया कि राधिका की ओर से संचालित टेनिस अकादमी पिता और पुत्री के बीच विवाद का कारण थी। गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि दीपक ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है और बताया कि उसे अपनी बेटी की ओर से टेनिस अकादमी संचालित करने पर आपत्ति थी, जिसे लेकर दोनों के बीच कई बार झगड़ा भी हुआ था।
पुलिस का दावा
पुलिस ने दावा किया कि आरोपी को लगता था कि वह आर्थिक रूप से संपन्न है और किराये से भी आय होती है, इसलिए उसकी बेटी को अकादमी संचालित करने की कोई जरूरत नहीं है। प्रवक्ता ने कहा कि राधिका की गुरुग्राम में एक टेनिस अकादमी थी और उसके पिता इससे खुश नहीं थे। उसने कई बार राधिका को अकादमी को बंद करने को कहा था, लेकिन वह नहीं मानी। गुस्से में आकर उसने अपनी बेटी को तीन गोलियां मार दीं। (इनपुट एजेंसी)
नशे से रोका तो बन गया दुश्मन, छात्रों ने रची साजिश और कर दिया प्रिंसिपल का कत्ल
11 Jul, 2025 07:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा। हिसार के करतार मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल की गुरुवार को हुई हत्या के मामले में पुलिस ने चार नाबालिग छात्रों को गिरफ्तार किया है। हांसी के एसपी अमित यशवर्धन ने बताया कि इस जघन्य अपराध के पीछे प्रिंसिपल की अनुशासनात्मक सख्ती को रंजिश मानना मुख्य कारण था।
शरीर पर चाकू के तीन घाव पाए गए
एसपी के अनुसार, प्रिंसिपल को गंभीर हालत में एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में उनकी मृत्यु हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर चाकू के तीन घाव पाए गए। घटनास्थल से चार स्कूली छात्रों को भागते हुए देखा गया था।
चारों आरोपी स्कूल यूनिफॉर्म में देखे गए
पुलिस को शुक्रवार सुबह सूचना मिली कि चारों आरोपी मुंढाल बस अड्डे पर स्कूल यूनिफॉर्म में देखे गए। इसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने छापेमारी कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एसपी ने बताया कि चूंकि आरोपी नाबालिग हैं, इसलिए उनकी पहचान उजागर नहीं की जा रही है।
प्रिंसिपल छात्रों को अनुशासित करने के लिए डांटते थे
जांच में खुलासा हुआ कि प्रिंसिपल इन छात्रों को अनुशासित करने के लिए डांटते थे। वे उन्हें नशे से दूर रहने, छोटे बाल रखने और स्कूल में प्रतिबंधित वस्तुएं न लाने की सलाह देते थे। छात्रों ने प्रिंसिपल की इन आपत्तियों को रंजिश मानकर हत्या की साजिश रची।
छात्र सोशल मीडिया पर आपराधिक समूहों से प्रभावित
सीसीटीवी फुटेज में दो छात्र घटनास्थल से भागते दिखाई दिए, लेकिन आगे की जांच में पता चला कि इस अपराध में चार छात्र शामिल थे। दो छात्रों ने घटना को अंजाम दिया, जबकि अन्य दो ने हथियार उपलब्ध कराए। पुलिस ने बताया कि ये छात्र सोशल मीडिया पर आपराधिक समूहों से प्रभावित थे। उनकी उम्र 14 से 15 वर्ष के बीच है। पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में ले लिया है और मामले की गहन जांच जारी है। यह घटना स्कूलों में अनुशासन और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों पर सवाल उठाती है।
हरियाणा में सामूहिक हत्या केस का फैसला, कोर्ट ने सात को दोषी ठहराया
11 Jul, 2025 05:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत (हरियाणा)। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंबरदीप सिंह की कोर्ट ने लोहारी गांव में पांच साल पहले हत्या के एक मामले में सात दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जबकि इस मामले में आठ लोगों को बरी कर दिया है। दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना न जमा करने पर छह-छह महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
मामला थाना इसराना पुलिस के अंतर्गत लोहारी गांव का जुलाई 2020 का है। लोहारी गांव के राजेंद्र ने पुलिस को बताया था कि उनका गांव में पशुबाड़ा है। गांव की वाल्मीकि बस्ती के साथ लगता है। कुछ लोग इस पर कब्जा करने के लिए भी कई बार झगड़ा कर चुके हैं। उक्त उनको पशुबाड़े में आने से रोकते है। वह इसमें पहले भी पुलिस को शिकायत दे चुका है। इसमें मौजिज लोगों के बीच में आने पर समझौता करा दिया था।
नौ जुलाई 2020 की रात करीब नौ बजे कुछ लोग हथियारों से लैस होकर उनके घर के बाहर आ गए। उनको धमकी तो उनके बेटे नीरज ने थाना इसराना के प्रभारी को फोन किया। उनका आरोप है कि करीब डेढ़ घंटे तक भी पुलिस नहीं आई। तब तक आरोपी भी बाहर खड़े रहे। आरोपी दीवार फांदकर घर के भीतर घुस गए। उन्होंने घुसते ही घर का सामान और बाइक तोड़ना शुरू कर दिया। लाठी-डंडों, तलवार व गंडासी से पशुओं पर हमला कर दिया।
वे बचाव के लिए आगे आए उन पर भी हमला किया। उनका अंकुश (20) नीचे गिरा गया। हमलावरों ने उन पर तलवार और तेजधार हथियार से हमला कर दिया। उसकी गर्दन और शरीर पर कई जगह तलवार लगी। जिसके चलते अंकुश की मौत हो गई थी। हमलावर इसके बाद भाग गए थे। थाना इसराना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंबरदीप सिंह की कोर्ट ने मामले में वीरवार को अपना फैसला दिया है। कोर्ट ने पवन, सतनारायण, कीमती, राजपाल, जय सिंह, अनिल और अजय को उम्रकैद की सजा सुनाई है। वहीं आठ को बरी कर दिया है।
शेख हसीना पर अंतरराष्ट्रीय शिकंजा: मानवता के खिलाफ अपराध का मामला दर्ज
11 Jul, 2025 01:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर गुरुवार को बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल ने मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में आरोप तय किए। हसीना के अलावा देश के पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और पूर्व आईजीपी चौधरी अब्दुल्लाह अल मामून को सह-आरोपी बनाया गया है। मुकदमे की सुनवाई 3 अगस्त से शुरू होगी। मामून ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है, और मामले में सरकारी गवाह बनने के लिए याचिका दायर की है। मामून फिलहाल जेल में हैं, ये मुकदमा बाकी दो आरोपियों की गैर मौजूदगी में चलेगा।
इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल में हसीना के खिलाफ अब तक 5 मामले दर्ज किए हैं। इसमें 1400 लोगों की हत्या, भीड़ को उकसाना और सरकारी ताकतों का गलत इस्तेमाल शामिल हैं। अगस्त, 2024 में तख्तापलट के बाद से हसीना भारत में रह रहीं हैं। क्रिमिनल ट्रिब्यूनल ने 6 जनवरी, 2025 को 11 और लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
हसीना पर हत्या के आरोप
बांग्लादेश में 5 जून, 2024 को बांग्लादेश हाईकोर्ट ने जॉब में 30 प्रतिशत कोटा सिस्टम लागू किया था, इस आरक्षण के खिलाफ ढाका में यूनिवर्सिटीज के स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट कर रहे थे। यह आरक्षण स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को दिया जा रहा था। हालांकि, हसीना सरकार ने यह आरक्षण बाद में खत्म कर दिया था। नाराज छात्रों ने हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए थे। बड़ी संख्या में छात्र और आम लोग हसीना और उनकी सरकार के खिलाफ सडक़ पर उतर आए थे। इस हिंसा के दौरान लगभग 1,400 नागरिक मारे गए थे, जिसके लिए शेख हसीना को जिम्मेदार ठहराया गया है। इस हिंसा में मरने वाले ज्यादातर छात्र थे। इस प्रोटेस्ट के दो महीने बाद 5 अगस्त को उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, और भारत आ गई थी। बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद बनी यूनुस सरकार ने हसीना पर हत्या, अपहरण से लेकर देशद्रोह के 225 से ज्यादा मामले दर्ज किए हैं। बांग्लादेश सरकार ने जुलाई में हुई हत्याओं की वजह से शेख हसीना का पासपोर्ट भी रद्द कर दिया था।
गश्त के दौरान हादसा: पुलिस का हेलिकॉप्टर नदी में गिरा
11 Jul, 2025 12:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुआलालंपुर। मलेशिया के जोहोर राज्य में एक पुलिस हेलिकॉप्टर आपात लैंडिंग के दौरान सीधे नदी में जा गिरा। यह हादसा सुंगाई पुलाई इलाके में हुआ। उस वक्त हेलिकॉप्टर नियमित सैन्य अभ्यास में शामिल था। हेलिकॉप्टर में सवार पांचों क्रू मेंबर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी घायल अफसरों को जोहोर बारू के सुल्ताना अमीना अस्पताल में भर्ती कराया गया। मलेशिया के सिविल एविएशन अथॉरिटी ने कहा है कि हादसे की जांच एयर एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो करेगी। इस हादसे में कोई जान नहीं गई, लेकिन मलेशियाई नागरिक उड्डयन नियामक ने इसे गंभीर विमानन घटना मानते हुए जांच शुरू कर दी है।
एक्स को झटका: सीईओ ने अचानक दिया इस्तीफा
11 Jul, 2025 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स की सीईओ लिंडा याकारिनो ने दो साल काम करने के बाद इस्तीफा दे दिया है। लिंडा ने एक्स पर पोस्ट शेयर कर इसकी जानकारी दी। लिंडा ने लिखा कि वे अब ग्रोक चैटबॉट बनाने वाली मस्क की एआई कंपनी एक्स-एआई के साथ काम करेंगी। हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि वे एक्स-एआई में किस पद पर काम करेंगी। 5 जून 2023 को लिंडा याकारिनो ने कंपनी (एक्स) के सीईओ के तौर पर जॉइन किया था। लिंडा से पहले मस्क खुद ये जिम्मेदारी संभाल रहे थे। लिंडा सीईओ बनने के बाद प्लेटफॉर्म में कम्युनिटी नोट्स जैसे फीचर्स लेकर आईं और यूजर्स की सिक्योरिटी को लेकर कई बदलाव किए।
अमेरिका की अर्थव्यवस्था में भारतीय प्रवासियों का बढ़ता योगदान
11 Jul, 2025 10:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। भारतीय प्रवासी अमेरिका को और ज्यादा अमीर बना रहे हैं। वहां रहने वाले विदेशी मूल के अरबपतियों में सबसे ज्यादा संख्या अब भारतीयों की है। फोब्र्स ने अमेरिका में रहने वाले 125 सबसे अमीर विदेशी मूल के नागरिकों की लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में इजराइल, चीन और ताइवान को पीछे छोड़ते हुए भारत 12 अरबपतियों के साथ टॉप पर है।
अमेरिका में सबसे अमीर भारतीय जय चौधरी हैं। इनकी नेटवर्थ 17.9 बिलियन डॉलर यानी 150 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है। वहीं इस लिस्ट में दक्षिण अफ्रीका से आकर अमेरिका में बसे इलॉन मस्क पहले नंबर पर हैं। इनकी नेटवर्थ 33.82 लाख करोड़ रुपए है। दूसरे नंबर पर 11.97 लाख करोड़ की नेटवर्थ के साथ रूस के सर्गी ब्रिन हैं। तीसरे नंबर पर ताइवान के जेन्सेन हुआंग हैं। इसकी नेटवर्थ 12.24 लाख करोड़ रुपए है।
भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे यून सुक येओल, गिरफ्तारी के लिए हरी झंडी
10 Jul, 2025 10:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सियोल। सियोल की एक अदालत ने दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल की गिरफ्तारी को मंज़ूरी दे दी है। उन पर दिसंबर में मार्शल लॉ लागू करने से जुड़े आरोप हैं। अदालत ने विशेष अभियोजक के दावे को स्वीकार कर किया कि यून द्वारा सबूत नष्ट करने का खतरा है।
गौरतलब है कि अप्रैल में संवैधानिक अदालत ने यून पर चलाए गए महाभियोग को बरकरार रखा था, जिसके बाद उन्हें राष्ट्रपति पद से हटा दिया गया था। अब चार महीने बाद, वह सियोल के पास एक हिरासत केंद्र में लौट रहे हैं। इससे पहले, जनवरी में सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी रद्द कर दी थी, जिसके बाद मार्च में उन्हें इस केंद्र से रिहा कर दिया गया था। इससे उन्हें हिरासत में लिए बिना विद्रोह के मुकदमे का सामना करने की अनुमति मिल गई थी। यून का आपराधिक मामला अब एक विशेष अभियोजक द्वारा देखा जा रहा है। ये अभियोजक उनके निरंकुश रवैये से संबंधित अतिरिक्त आरोपों की जांच कर रहे हैं, जिनमें सत्ता का दुरुपयोग, सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी, और सरकारी कर्तव्यों में बाधा डालना शामिल है।
ट्रंप पर हुए हमले में सुरक्षा चूक के आरोप में 6 सीक्रेट एजेंट्स सस्पेंड
10 Jul, 2025 06:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर पिछले साल हुए हमले के दौरान सुरक्षा में चूक के आरोप में सीक्रेट सर्विस के 6 एजेंट्स को सस्पेंड कर दिया गया है। यह कार्रवाई ट्रम्प के हमले के एक साल पूरा होने से 4 दिन पहले की गई है।
बता दें पेनसिल्वेनिया के बटलर में एक चुनावी रैली में 13 जुलाई 2024 ट्रम्प पर गोली चलाई गई थी। यह गोली ट्रम्प के कान को लगती हुई निकल गई थी और वह घायल हो गए थे। इस हमले में ट्रम्प की रैली में शामिल एक फायरफाइटर कोरी कॉम्पेराटोर की मौत हो गई थी। जवाबी कार्रवाई में मौजूद सीक्रेट सर्विस के स्नाइपर्स ने हमलावर थॉमस मैथ्यू क्रूक्स (20) को गोली मार दी थी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सस्पेंड किए गए 6 एजेंट्स को अपील करने का अधिकार दिया गया है। एक अधिकारी के मुताबिक इन्हें 10 से 42 दिन तक के लिए सस्पेंड किया है। इनमें सीनियर अधिकारी से लेकर निचले स्तर के फील्ड एजेंट शामिल हैं। हमले के बाद अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सुरक्षा एजेंसियों की कई स्तरों पर लापरवाही और खामियों के चलते ट्रम्प पर हमला हुआ था।
रिपोर्ट में कहा गया है सीक्रेट सर्विस अब उस स्तर पर काम नहीं कर रही है जो उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए जरूरी है। यह संस्था अब लापरवाह सिस्टम में बदल चुकी है, जबकि खतरे लगातार बढ़ रहे हैं और तकनीक भी बढ़ रही है। हमले के दस दिन बाद उस वक्त की सीक्रेट सर्विस डायरेक्टर किम्बर्ली चीटल ने इस्तीफा दे दिया था। बटलर की घटना के ठीक 9 हफ्ते बाद ट्रम्प पर एक और हमला हुआ था, जब वह फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच में अपने गोल्फ कोर्स पर थे। इन दोनों घटनाओं के बाद ट्रम्प को राष्ट्रपति स्तर की सुरक्षा मुहैया कराई गई और उनकी रैलियों की योजना नई सुरक्षा गाइडलाइंस के तहत बनाई जाने लगी है।
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