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अमेरिका का नया नियम: H-1B वीजा एप्लीकेंट्स की सोशल मीडिया जांच अनिवार्य, भारतीय प्रोफेशनल्स चिंतित
15 Dec, 2025 10:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ट्रंप प्रशासन ने सोमवार से H-1B वीजा और H-4 वीजा आवेदकों की जांच के आदेश दिए हैं। यह जांच आज (सोमवार) से शुरू होगी। जांच के दौरान सभी की सोशल मीडिया प्रोफाइल भी चेक की जाएगी। ट्रंप प्रशासन ने एक नया आदेश जारी करते हुए कहा है कि 15 दिसंबर से H-1B वीजा का आवेदन करने वालों और उनपर आश्रित लोगों की ऑनलाइन उपस्थिति की समीक्षा की जाएगी।
स्टूडेंट्स पहले से ही इस समीक्षा के दायरे में थे। वहीं, अब अमेरिकी प्रशासन ने ऑनलाइन उपस्थिति के साथ-साथ सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच करने का भी आदेश दिया है। साथ ही H-1B वीजा और H-4 वीजा आवेदक और उनपर आश्रित लोग भी इस जांच के दायरे में आएंगे।
अमेरिकी विभाग ने दिया आदेश
अमेरिकी विभाग के अनुसार, "जांच प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए वीजा आवेदन करने वाले सभी लोगों की सोशल मीडिया प्रोफाइल भी देखी जाएगी। सभी लोगों को अपनी प्रोफाइल प्राइवेट से सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया है।"
अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि अमेरिका का वीजा लेना अपने आप में एक विशेष अधिकार है। इसलिए वीजा देने से पहले अच्छी तरह से छानबीन करना बेहद जरूरी है। इस दौरान विभाग उन लोगों की पहचान करता है, जो अमेरिका में आने के योग्य नहीं हैं। ऐसे लोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।
विदेश विभाग ने आगे कहा-
हम सभी वीजा आवेदकों की पूरी तरह से जांच करते हैं। इस जांच में एफ, एम और जे श्रेणी के सारे छात्र समेत एक्सचेंट विजिटर भी शामिल होते हैं, जिन्होंने वीजा के लिए आवेदन किया है।
विदेश विभाग ने दी चेतावनी
विदेश विभाग ने चेतावनी देते हुए कहा है कि वीजा जारी करते समय अमेरिका को सतर्क रहने की जरूरत है। इस बात की गहन जांच की जानी चाहिए कि वीजा का आवेदन करने वालों का इराजा कहीं अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाना तो नहीं है?
बता दें कि H-1B वीजा धारकों में सबसे ज्यादा भारतीय पेशेवर होते हैं। इसी साल सितंबर में ट्रंप ने H-1B वीजा की फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दी थी।
भारतियों पर कैसे होगा असर?
H-1B वीजा पाने वालों में करीब 70% भारतीय हैं। वित्त वर्ष 2024 में भारत को करीब 80,500 नए H-1B वीजा मिले, इसलिए यह सख्ती सबसे ज्यादा भारतीय पेशेवरों को प्रभावित कर रही है।
अमेरिका एक नए प्रस्ताव पर काम कर रहा है, जिसके तहत टूरिस्ट और बिजनेस ट्रैवलर्स से भी पिछले 5 साल की सोशल मीडिया जानकारी मांगी जा सकती है। इससे यूके, जर्मनी, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के यात्रियों पर भी असर पड़ेगा, जो अब तक वीजा-फ्री यात्रा करते थे।
अमेरिका का पाकिस्तान को लिंक-22 देने से इनकार, पुरानी टेक्नोलॉजी थमाई
15 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका ने पाकिस्तान को एफ-16 लड़ाकू विमानों के लिए 686 मिलियन डॉलर का पैकेज मंजूर किया है। दिखावे में यह डील पाकिस्तान की वायुसेना की ताकत बढ़ाने जैसी लगती है, लेकिन गहराई से देखें तो यह नई क्षमता नहीं, बल्कि पुराने विमानों को किसी तरह घसीटकर उड़ाए रखने की कोशिश है। इस पैकेज में पाकिस्तान को एक भी नया एफ-16 नहीं मिला है। न कोई लंबी दूरी का घातक हथियार, न एडवांस एयर-टू-एयर मिसाइल और न ही इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम।
अमेरिका ने साफ तौर पर पाकिस्तान को सिर्फ मेंटेनेंस, रिपेयर और सेफ्टी से जुड़ा सामान दिया है, ताकि कोल्ड वॉर दौर के ये जेट 2040 तक किसी तरह सेवा में बने रहें। सबसे अहम बात यह है कि पाकिस्तान को जिस डेटा लिंक टेक्नोलॉजी की सबसे ज्यादा जरूरत थी, वह लिंग-22, उसे अमेरिका ने सिरे से देने से इनकार कर दिया है। लिंग-22 को आज की तारीख में लिंग-16 से कहीं ज्यादा आधुनिक, जैम-प्रूफ और लंबी दूरी तक काम करने वाला सिस्टम माना जाता है। यह टेक्नोलॉजी नाटो के चुनिंदा देशों और हाई-एंड फाइटर जेट्स तक ही सीमित है।
इसके उलट पाकिस्तान को सिर्फ लिंग-16 दिया है, जिसे अब विशेषज्ञ पुरानी और सीमित क्षमता वाली टेक्नोलॉजी मानते हैं। आधुनिक युद्ध में जहां चीन, रूस और पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स एडवांस सेंसर फ्यूजन और हाई-स्पीड नेटवर्किंग पर काम कर रहे हैं, वहीं लिंग-16 ऐसी तकनीक है जो जैमिंग और इलेक्ट्रॉनिक हमलों के सामने कमजोर पड़ सकती है यानी साफ शब्दों में कहें तो अमेरिका ने पाकिस्तान को कटिंग-एज टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि ‘सेकेंड लाइन’ का सिस्टम थमा दिया है। इस डील से पाकिस्तान के एफ-16 कुछ साल और उड़ते जरूर रहेंगे, लेकिन उन्हें भविष्य के हाई-टेक युद्ध के लिए तैयार नहीं कहा जा सकता। रणनीतिक हलकों में इसे पाकिस्तान के लिए एफ-16 के नाम पर कबाड़ का सौदा माना जा रहा है, जिसमें दिखावा ज्यादा है और असली ताकत न के बराबर।
अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ अपने रक्षा संबंधों में एक बहुत ही सधी हुई लकीर खींच दी है। पाकिस्तान को अपने एफ-16 लड़ाकू विमानों के रखरखाव पैकेज के साथ डाटा लिंक सिस्टम तो मिलेगा, लेकिन वह अत्याधुनिक ‘लिंक 22’ नहीं होगा। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान को पुराना लेकिन भरोसेमंद ‘लिंक 16’ ही दिया जाएगा। यह फैसला वाशिंगटन के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें वह पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए तो साथ रखना चाहता है, लेकिन अपनी सबसे बेहतरीन तकनीक उसे नहीं देना चाहता।
अमेरिका ने पाकिस्तान को वह तकनीक देने से साफ इनकार कर दिया है जो उसके सबसे करीबी संधि सहयोगियों के लिए आरक्षित है। लिंक 22 की खासियत है कि यह ‘जैम-रेसिस्टेंट’ है और ‘बियॉन्ड लाइन ऑफ साइट’ (नेटवर्किंग की क्षमता देता है यानी दुश्मन इसे आसानी से जाम नहीं कर सकता और यह बहुत लंबी दूरी तक डेटा शेयर कर सकता है। अमेरिका नहीं चाहता कि इस्लामाबाद के पास इतनी संवेदनशील और अत्याधुनिक नेटवर्किंग क्षमता हो, इसलिए उसे लिंक 16 पर ही संतोष करना होगा।
ऑस्ट्रेलिया दहला: सिडनी में पाकिस्तानी बाप-बेटे की गोलीबारी से 15 मृत, कई घायल
15 Dec, 2025 08:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बोंडी बीच पर एक यहूदी त्योहार की तैयारी के दौरान लोगों पर गोलियां बरसाईं गईं। इस हमले में कम से कम 15 लोगों की जान गई है। मामले में जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस ने शुरुआती जांच के बाज बताया कि लोगों पर गोलियां बरसाने वाले दो बंदूकधारी पिता-पुत्र थे। बता दें कि सख्त बंदूक नियंत्रण कानूनों वाले देश ऑस्ट्रेलिया में लगभग तीन दशकों में यह सबसे घातक गोलीबारी की घटना थी।
एक हमलावर मौके पर ढेर
हमले को लेकर न्यू साउथ वेल्स के पुलिस आयुक्त माल लैन्योन ने बताया कि 50 साल के बंदूकधारी साजिद अकरम को पुलिस ने मार गिराया। वहीं, उसके पुत्र 24 साल के नवीद अकरम घायल हो गया और उसका अस्पताल में उपचार चल रहा है।
पाकिस्तानी नागरिक थे हमलावर
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि जांच से जुड़े अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के हवाले से बताया कि दोनों पाकिस्तानी नागरिक थे। अकरम के न्यू साउथ वेल्स स्थित ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
10 मिनट तक चली गोलियां
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सिडनी का बोंडी बीच काफी प्रसिद्ध है, जो रविवार को लोगों से खचाखच भरा हुआ था। हमलावरों ने करीब 10 मिनट तक गोलियां चलाईं। इससे सैकड़ों लोग रेत पर और आस-पास की सड़कों पर इधर-उधर भागने लगे। पुलिस का कहना है कि लक्षित हनुक्का कार्यक्रम में लगभग 1,000 लोग शामिल हुए थे, जो समुद्र तट के पास एक छोटे से पार्क में आयोजित किया गया था।
गाजा में टार्गेट ऑपरेशन, हमास के वरिष्ठ कमांडर राद साद के मारे जाने का दावा
15 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेलअवीव। इजरायली सुरक्षा बलों ने दावा किया है कि 13 दिसंबर 2025 को गाजा में किए गए एक टार्गेट ऑपरेशन में हमास के वरिष्ठ कमांडर राद साद को मार गिराया गया। इजरायल के अनुसार, राद साद हमास के सैन्य विंग में हथियार उत्पादन से जुड़े मुख्यालय का प्रमुख था और 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए बड़े हमले की साजिश रचने वालों में शामिल रहा था। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि वह हाल के महीनों में हमास के सबसे अनुभवी और खतरनाक कमांडरों में गिना जाता था।
इजरायली दावों के मुताबिक, संघर्षविराम के बावजूद राद साद गाजा में हमास की सैन्य संरचना को दोबारा मजबूत करने में जुटा हुआ था। वह हथियारों और विस्फोटकों के निर्माण को तेज करने के साथ-साथ संगठन की लड़ाकू क्षमताओं को पुनर्गठित करने में अहम भूमिका निभा रहा था। बताया गया है कि हाल के हफ्तों में इजरायली सैनिकों पर हुए कई विस्फोटक हमलों के पीछे उसकी सीधी भूमिका थी, जिनमें सुरक्षा बलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इजरायल का कहना है कि राद साद पहले गाजा सिटी ब्रिगेड का संस्थापक और कमांडर रह चुका था। इसके अलावा, उसने गाजा में हमास की नौसैनिक ताकत को विकसित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। वह हमास के सैन्य विंग के शीर्ष नेतृत्व के काफी करीब माना जाता था और संगठन के रणनीतिक फैसलों में उसकी गहरी भागीदारी रही थी। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उसकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल रॉकेट, विस्फोटक उपकरण और अन्य हथियार प्रणालियों के निर्माण में किया जा रहा था।
इजरायली सेना ने यह भी आरोप लगाया है कि राद साद ने उस योजना को तैयार करने में योगदान दिया था, जिसके तहत 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमला किया गया। इस हमले को इजरायल अपने इतिहास के सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक मानता है। इजरायल का दावा है कि संघर्षविराम लागू होने के बाद भी राद साद हमास के लिए हथियार बनवाता रहा और उन्हीं हथियारों का इस्तेमाल गाजा में इजरायली सैनिकों पर हमलों में किया गया, जिनमें कई जवानों की मौत हुई। इजरायली सुरक्षा बलों ने स्पष्ट किया है कि हमास के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। उनका कहना है कि संगठन की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह खत्म करने के लिए ऐसे लक्षित ऑपरेशन जारी रखे जाएंगे और किसी भी ऐसे कमांडर को बख्शा नहीं जाएगा जो इजरायल के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देता है।
मौत के 11 मिनट बाद लौटी महिला का चौंकाने वाला खुलासा! बताया 'जन्नत और जहन्नुम' में क्या देखा?
14 Dec, 2025 12:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Woman Death Experience: विज्ञान भले ही मृत्यु को जीवन का अंतिम सत्य मानता हो, लेकिन अमेरिका की एक महिला ने इस धारणा को चुनौती दी है. 68 वर्षीय शार्लोट होम्स ने दावा किया है कि वह मेडिकल रूप से पूरे 11 मिनट के लिए ‘मर’ चुकी थीं और इस दौरान उन्होंने जन्नत और जहन्नुम दोनों की यात्रा की. शार्लोट का कहना है कि यह ‘अजीबोगरीब’ अनुभव उनकी पूरी जिंदगी बदल चुका है और वह इस रहस्य को दुनिया के साथ साझा कर रही हैं.
मौत के मुंह से वापसी
यह चौंकाने वाली घटना सितंबर 2019 में हुई थी, जब शार्लोट एक नियमित हृदय जांच के लिए अस्पताल गई थीं. अचानक उनका ब्लडप्रेशर बढ़कर खतरनाक स्तर 234/134 पर पहुंच गया. डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत भर्ती कर लिया. उनके पति डैनी उनके साथ ही थे. शार्लोट की हालत बिगड़ती चली गई. आखिरकार, एक वक्त ऐसा आया जब मेडिकल टीम की आंखों के सामने ही उनका दिल 11 मिनट के लिए थम गया. डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था. शार्लोट ने इस दौरान जो महसूस किया, वह किसी कल्पना से कम नहीं है.
संगीत की धुन पर जन्नत में झूम रहे थे लोग!
शार्लोट ने अपने अनुभव को याद करते हुए बताया कि जब डॉक्टर उन्हें होश में लाने की कोशिश कर रहे थे, तब उन्हें चारों ओर सबसे खूबसूरत फूलों की खुशबू और मधुर संगीत सुनाई दे रहा था. उन्होंने खुद को अपने शरीर से ऊपर हवा में देखा. उन्होंने कहा, “मैंने अपनी आंखें खोलीं और मुझे पता था कि मैं कहां हूं. मुझे पता था कि मैं स्वर्ग में हूं.” शार्लोट के अनुसार, स्वर्ग की सुंदरता हमारी कल्पना से लाखों गुना ऊपर है. वहां हरियाली, पेड़ और घास सब कुछ संगीत की धुन पर झूम रहा था, मानो हर चीज़ ईश्वर की आराधना कर रही हो. उन्हें स्वर्गदूतों ने मार्गदर्शन दिया और वहां भय का नामोनिशान नहीं था. यह ‘परम आनंद’ जैसा था.
खोए हुए बेटे से मुलाकात और माता-पिता का दीदार
इस दिव्य यात्रा के दौरान शार्लोट की मुलाकात उन सभी प्रियजनों से हुई जिन्हें वह खो चुकी थीं, जिनमें उनके माता-पिता, बहन और अन्य रिश्तेदार शामिल थे. सबसे भावुक पल तब आया जब उन्हें एक छोटे बच्चे से मिलवाया गया. शार्लोट समझ नहीं पा रही थीं कि वह बच्चा कौन है, तभी उन्हें ईश्वर की आवाज़ सुनाई दी. उन्होंने बताया कि यह उनका वह बच्चा है, जिसे उन्होंने साढ़े पांच महीने की गर्भावस्था में खो दिया था. उन्होंने बच्चे को गोद में उठाकर कहा, “शार्लोट, यह एक लड़का है.”
दुर्गंध और चीखों से भरा भयानक नर्क
स्वर्ग की अतुलनीय सुंदरता देखने के बाद शार्लोट ने दावा किया कि भगवान उन्हें कुछ देर के लिए नर्क भी ले गए. यह अनुभव असहनीय और भयानक था. उन्होंने नीचे देखा और उन्हें सड़े हुए मांस जैसी दुर्गंध आई. चारों ओर केवल चीखें सुनाई दे रही थीं.उन्होंने बताया कि उन्हें यह इसलिए दिखाया गया, ताकि वह चेतावनियों के रूप में लोगों को बता सकें कि अगर वे अपना व्यवहार नहीं बदलते हैं, तो उनका क्या अंजाम होगा. वापस जाकर ये सब साझा करो”
नर्क का अनुभव खत्म होने के बाद शार्लोट ने अपने पिता की आवाज़ सुनी, जिन्होंने कहा कि “तुम्हारे पास वापस जाकर ये सब साझा करने का समय है.” इसके तुरंत बाद उन्हें लगा जैसे वह वापस अपने शरीर में समा रही हों. दर्द महसूस होते ही वह ‘जिंदा’ हो गईं. दो हफ़्ते अस्पताल में बिताने के बाद शार्लोट पूरी तरह से ठीक हो गईं और तब से वह इस जीवन बदलने वाले अनुभव को दुनिया के साथ साझा कर रही हैं.
मासिक धर्म के रक्त का इस्तेमाल कर एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारी के तंत्र को समझेंगे शोधकर्ता
14 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। शोधकर्ताओं द्वारा मासिक धर्म के रक्त का इस्तेमाल करके एंडोमेट्रियोसिस जैसे रोगों के तंत्र को समझना, संक्रमण का पता लगाना और क्षतिग्रस्त त्वचा की मरम्मत जैसे कई क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, जिसमें एंडोमेट्रियोसिस और कैंसर जैसी बीमारियों के लिए नया इलाज और डायग्नोस्टिक्स विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
मासिक धर्म के रक्त में जीवित प्रतिरक्षा कोशिकाएं होती हैं जो प्रजनन पथ से आती हैं। इनका अध्ययन सूजन को समझने और दर्दनाक यौन संबंधों जैसे लक्षणों के इलाज के लिए नई विधियां विकसित करने में मदद कर सकता है। शोधकर्ता एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं के मासिक धर्म के रक्त से ऑर्गेनॉइड विकसित कर सकते हैं, जो प्रयोगशाला में इस बीमारी के मॉडल बनाने में मदद करता है। मासिक धर्म के द्रव से प्राप्त प्लाज्मा ने क्षतिग्रस्त त्वचा के घावों को पूरी तरह से ठीक करने में मदद की है, जो सामान्य रक्त प्लाज्मा की तुलना में बहुत तेज़ है।
जानकारी के मुताबिक मासिक धर्म के रक्त से प्राप्त स्टेम सेल और अन्य कोशिकाएं कई प्रकार की बीमारियों, जैसे कैंसर के अनुसंधान और उपचार में उपयोग की जा सकती हैं। मासिक धर्म के रक्त से प्राप्त स्टेम कोशिकाएं, जैसे एंडोमेट्रियल पुनर्योजी कोशिकाएं और एंडोमेट्रियल स्ट्रोमल कोशिकाएं, स्टेम सेल थेरेपी के विकास में अहम योगदान दे सकती हैं।
यह शोध अभी अपने शुरुआती चरण में है मासिक धर्म के रक्त के इस्तेमाल से कई रोगों के निदान और उपचार के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं। यह पारंपरिक तरीकों के पूरक के रूप में काम कर सकता है और महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के लिए नए मार्ग प्रदान कर सकता है।
अमेरिकी कांग्रेस की ट्रंप को दो टूक कहा- भारत पर लगाया 50 प्रतिशत टैरिफ तत्काल हटाएं
14 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के तीन सदस्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से आयातित वस्तुओं पर लगाए गए भारी टैरिफ को समाप्त कराने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव का मकसद भारत से आने वाले उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत तक के आयात शुल्क को रद्द करना है। सांसदों का कहना है कि ये टैरिफ न केवल अवैध हैं, बल्कि अमेरिकी श्रमिकों, उपभोक्ताओं और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों के लिए भी नुकसानदेह साबित हो रहे हैं।
यह प्रस्ताव प्रतिनिधि डेबोरा रॉस, मार्क वेसी और राजा कृष्णमूर्ति द्वारा प्रस्तुत किया गया है। इसे उस द्विदलीय पहल के अनुरूप माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य अन्य देशों पर लगाए गए समान टैरिफ को खत्म करना और आयात शुल्क बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों के इस्तेमाल को सीमित करना है। प्रस्ताव में विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम के तहत भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को रद्द करने की मांग की गई है। ये अतिरिक्त शुल्क 27 अगस्त 2025 को पहले से लागू टैरिफ के ऊपर लगाए गए थे, जिससे कुल आयात शुल्क बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। डेबोरा रॉस ने कहा कि उत्तरी कैरोलिना की अर्थव्यवस्था भारत के साथ व्यापार, निवेश और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के जरिए गहराई से जुड़ी हुई है। उनके अनुसार भारतीय कंपनियों ने राज्य में एक अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है, जिससे जीवन विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में हजारों रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। इसके साथ ही उत्तरी कैरोलिना के निर्माता हर साल भारत को लाखों डॉलर का सामान निर्यात करते हैं, जिससे दोनों देशों को आर्थिक लाभ होता है।
मार्क वेसी ने इन टैरिफ को उत्तर टेक्सास के आम लोगों पर अतिरिक्त कर जैसा बताया। उन्होंने कहा कि पहले से ही महंगाई और बढ़ती लागत से जूझ रहे परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। वेसी के अनुसार भारत अमेरिका का एक अहम सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक साझेदार है, और ऐसे कदम दोनों देशों के रिश्तों को कमजोर करते हैं।
राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि ये टैरिफ पूरी तरह प्रतिउत्पादक हैं। इनसे आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित होती हैं, अमेरिकी श्रमिकों को नुकसान पहुंचता है और उपभोक्ताओं के लिए रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि टैरिफ हटाने से अमेरिका और भारत के बीच आर्थिक सहयोग और सुरक्षा साझेदारी को मजबूती मिलेगी। यह प्रस्ताव डेमोक्रेट सांसदों द्वारा ट्रंप प्रशासन की एकतरफा व्यापार नीतियों को चुनौती देने और भारत के साथ संबंधों को फिर से संतुलित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। इससे पहले भी इन सांसदों ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर राष्ट्रपति से टैरिफ नीतियों को वापस लेने और दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की अपील की थी। ट्रंप प्रशासन ने अगस्त की शुरुआत में भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और कुछ ही दिनों बाद इसमें 25 प्रतिशत की और बढ़ोतरी कर दी गई थी। इसके पीछे भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को कारण बताया गया था।
रूस-तुर्की की मीटिंग में जबरन घुसे पाक पीएम शहबाज? पुतिन चौंके, पर किया नजरअंदाज
14 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंकारा। तुर्कमेनिस्तान में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान की कूटनीति को झटका लगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने का कार्यक्रम था, लेकिन पुतिन उनसे मिलने नहीं आए। पुतिन उस समय तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन से मुलाकात कर रहे थे, जिससे शहबाज को करीब 40 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। लंबे इंतजार के बाद शहबाज ने तय प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए पुतिन और एर्दोगन की मीटिंग में अचानक प्रवेश कर लिया। इस दौरान दोनों राष्ट्राध्यक्ष बातचीत में व्यस्त थे और शहबाज की उपस्थिति से माहौल असहज हो गया।
यह पूरी घटना तुर्कमेनिस्तान की तटस्थता की 30वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुई। वायरल हुए वीडियो में देखा जा सकता है कि शहबाज शरीफ अपने विदेश मंत्री इशाक डार के साथ अलग कमरे में बैठे हुए बेचैनी महसूस कर रहे थे। तय समय बीत जाने और बुलावे के न आने पर शहबाज अचानक उस हॉल में चले गए जहां पुतिन और एर्दोगन आमने-सामने बातचीत कर रहे थे। शहबाज के अचानक प्रवेश से रूसी और तुर्की अधिकारियों में चौंकाहट फैल गई। वीडियो में स्पष्ट है कि पुतिन बातचीत में असहज नजर आए और शहबाज उनके पास सिंगल सोफे पर बैठे। यह दर्शाता है कि यह बैठक पहले से शहबाज की उपस्थिति के लिए तय नहीं थी और प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ।
सूत्रों के अनुसार, यह घटना पाकिस्तान की बढ़ती कूटनीतिक बेचैनी को उजागर करती है। शहबाज शरीफ देश में कई गंभीर संकटों का सामना कर रहे हैं, जबकि वास्तविक सत्ता सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के पास है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मंच पर मौजूदगी बनाए रखने के प्रयास में यह कदम प्रोटोकॉल की बड़ी चूक माना जा रहा है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि पुतिन और एर्दोगन की यह बैठक पहले से तय और संवेदनशील थी। किसी तीसरे नेता का बिना बुलाए प्रवेश न केवल असहज करने वाला था, बल्कि इससे पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति पर भी सवाल उठे। इस घटना को पाकिस्तान की घटती अंतरराष्ट्रीय हैसियत से जोड़ा जा रहा है। शहबाज को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा और फिर खुद बैठक में घुसना पड़ा, जो इस बात का संकेत है कि इस्लामाबाद अब वैश्विक मंच पर अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने में दबाव महसूस कर रहा है। इस पूरे प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान को अब प्रभावशाली वैश्विक नेताओं के साथ औपचारिक और प्रभावी संवाद स्थापित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शहबाज की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की कूटनीतिक स्थिति को लेकर चिंता पैदा करती है और वैश्विक मंच पर उसकी कमज़ोरी को उजागर करती है।
ट्रंप के सीजफायर कराने के बाद भी नहीं रुक रहा थाईलैंड और कंबोडिया संघर्ष
14 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैंकॉक,। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीजफायर कराने के दावे के बावजूद दोनों देशों के बीच जंग थमती नहीं दिख रही है। कंबोडिया ने दावा किया है कि शनिवार सुबह से थाई सेनाएं विवादित सीमा पर हमले कर रही हैं, वहीं थाईलैंड ने भी कंबोडिया पर अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। फिलहाल, थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सैन्य टकराव नहीं रुका। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने में अहम भूमिका निभाई है।
कंबोडिया के सूचना मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि थाई सैन्य बलों ने सीमा पार हमले बंद नहीं किए हैं। मंत्रालय के मुताबिक थाई सेनाएं अब भी बमबारी कर रही हैं और इन हमलों में फाइटर जेट्स का भी इस्तेमाल किया गया है। बयान में कहा गया है थाई सेनाओं ने अब तक बमबारी बंद नहीं की है और हमले लगातार जारी हैं। वहीं, थाईलैंड की सेना ने कंबोडिया के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कंबोडिया बार-बार अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहा है। थाईलैंड के मुताबिक कंबोडियाई बलों ने नागरिक इलाकों को निशाना बनाया है और सीमा क्षेत्रों में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं।
बता दें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार रात थाई पीएम अनुतिन चार्नवीराकुल और कंबोडिया के पीएम हुन मानेत से फोन पर बातचीत के बाद कहा था कि दोनों देश शुक्रवार से ही सभी तरह की गोलीबारी रोकने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि ट्रंप के इस दावे के बाद दोनों देशों के नेताओं के बयानों में किसी औपचारिक सीजफायर समझौते का जिक्र नहीं किया है। थाई पीएम अनुतिन चार्नवीराकुल ने साफ कहा कि कोई सीजफायर नहीं हुआ है। जब ट्रंप के दावे पर सवाल किया गया तो थाई विदेश मंत्रालय ने पत्रकारों को पीएम के बयान का हवाला दिया।
कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेत ने शनिवार को फेसबुक पर जारी एक बयान में ट्रंप के साथ हुई बातचीत और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ पहले हुई चर्चा का जिक्र किया। मानेत ने कहा कि कंबोडिया अब भी विवादों का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है। उन्होंने कहा कि कंबोडिया अक्टूबर में मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में हुए पहले के समझौते के तहत ही विवाद सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है।
ट्रंप के ट्रुथ सोशल पर जारी संदेश के मुताबिक दोनों नेताओं ने तुरंत सभी तरह की गोलीबारी रोकने और उस शांति ढांचे पर वापस लौटने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसे पहले अमेरिका की भूमिका और मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम की मध्यस्थता से तय किया गया था। ट्रंप ने कहा कि वे इस शाम से सभी तरह की फायरिंग रोकने पर सहमत हो गए हैं और मेरे साथ तथा उनके साथ मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम की मदद से किए गए मूल शांति समझौते पर वापस लौटेंगे। यह नए सीजफायर का ऐलान ऐसे समय किया गया था, जब बीते कुछ दिनों में हुए घातक संघर्षों के चलते हजारों नागरिकों को अपने घर छोड़ने पड़े थे और इस साल की शुरुआत में मलेशिया की मध्यस्थता से हुए संघर्षविराम के टूटने का खतरा पैदा हो गया था। ट्रंप ने अक्टूबर में मलेशिया में हुई फॉलो-अप बैठकों में भी हिस्सा लिया था। वे इस संघर्ष को उन कई विवादों में से एक बताते हैं, जिन्हें उनके मुताबिक उन्होंने सुलझाया है।
ट्रम्प गोल्ड कार्ड के फैसले के खिलाफ अमेरिका के 20 राज्यों ने ठोका मुकदमा
14 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी प्रशासन ने ट्रम्प गोल्ड कार्ड वीजा के आवेदनों पर 1 मिलियन डॉलर यानी करीब 9 करोड़ रुपए की फीस लगा दी है। इस फैसले के खिलाफ कैलिफोर्निया के नेतृत्व में कुल 20 अमेरिकी राज्यों ने कोर्ट में मुकदमा दायर किया है। इन राज्यों का कहना है कि यह फीस गैर-कानूनी है और इससे अस्पतालों, स्कूलों, यूनिवर्सिटी और सरकारी सेवाओं में पहले से चल रही डॉक्टरों-शिक्षकों की कमी और गंभीर हो जाएगी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कहा कि ये वीजा डॉक्टर, नर्स, इंजीनियर, वैज्ञानिक और शिक्षक जैसे उच्च कुशल प्रोफेशनल्स के लिए होता है। दुनियाभर का टैलेंट जब अमेरिका आता है तो पूरा देश आगे बढ़ता है। कैलिफोर्निया के साथ न्यूयॉर्क, इलिनॉय, वॉशिंगटन, मैसाचुसेट्स समेत 20 बड़े राज्य इस मुकदमे में शामिल हैं। राज्यों का तर्क है कि पहले एच-1बी वीजा की फीस 1,000 से 7,500 डॉलर यानी 1 से 6 लाख रुपए के बीच होती थी, लेकिन संसद की मंजूरी के बिना अचानक फीस बढ़ा देना अवैध है। साथ ही यह फीस वीजा प्रोसेसिंग की वास्तविक लागत से सैकड़ों गुना ज्यादा है। उन्होंने इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का उल्लंघन बताया। क्योंकि बिना नोटिस और पब्लिक कमेंट के इतना बड़ा नियम नहीं बनाया जा सकता।
रिपोर्ट के मुताबिक राज्यों का कहना है कि इसका सबसे बड़ा असर सरकारी और गैर-लाभकारी संस्थानों पर पड़ेगा। स्कूल, यूनिवर्सिटी और अस्पताल को वीजा में छूट मिलती थी, लेकिन अब एक-एक विदेशी टीचर या डॉक्टर लाने में 9 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इससे ये संस्थान या तो सेवाएं घटाएंगे या दूसरी जरूरी योजनाओं से पैसा काटेंगे। अमेरिकी शिक्षा विभाग की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक इस साल अमेरिका के करीब 75फीसदी डिस्ट्रिक्ट स्कूल को शिक्षक नहीं मिल पा रहे हैं। खासकर स्पेशल एजुकेशन, साइंस और बाइलिंगुअल शिक्षकों की भारी कमी है।
वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में 2024 में करीब 17,000 वीजा डॉक्टरों-नर्सों को दिए गए थे। साल 2036 तक अमेरिका में 86,000 डॉक्टरों की कमी हो सकती है, जो ग्रामीण और गरीब इलाकों में पहले से ही गंभीर है। अमेरिकी सरकार वीजा में फीस बढ़ोतरी को जायज बताती रही है। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह कदम वीजा प्रोग्राम के दुरुपयोग को रोकेगा। इसका साथ ही अमेरिकी नागरिकों के वेतन और नौकरियों की रक्षा करेगा। इसके उलट आलोचकों का कहना है कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा। भारत जैसे देशों से आने वाले 70फीसदी से ज्यादा प्रोफेशनल्स पर इसका असर पड़ेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक प्रोफेशनल अब कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या यूरोप जैसे देशों की ओर जा सकते हैं। इसके साथ ही ट्रम्प प्रशासन वीजा आवेदकों के सोशल मीडिया के पिछले 5 साल का रिकॉर्ड मांग रहा है। इससे जांच और सख्त हो जाएगी। कुल मिलाकर कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए अमेरिका जाना अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा और मुश्किल हो जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को ट्रम्प गोल्ड कार्ड के लिए अप्लाई प्रोसेस शुरू करने का ऐलान किया था। कार्ड की कीमत 1 मिलियन डॉलर यानी करीब 9 करोड़ रुपए है। हालांकि कंपनियों को कार्ड के लिए 2 मिलियन डॉलर देना होगा। ट्रम्प ने इसी साल फरवरी में ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा प्रोग्राम शुरू करने का ऐलान किया था।
लीक दस्तावेज से हड़कंप, यूरोप के खिलाफ अमेरिका की कथित प्लानिंग उजागर
13 Dec, 2025 06:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ ने हाल ही में दावा किया है कि उसके हाथ एक ड्राफ्ट दस्तावेज लगा है. इस लीक हुए दस्तावेज से पता चला है कि अमेरिका, यूरोप को बर्बाद करना चाहता है, साथ ही भारत, चीन समेत एशियाई देशों के साथ नया गठबंधन बनाने की तैयारी कर रहा है | हालांकि इस दस्तावेज को अमेरिका ने फेक बताया है. US का कहना है शुक्रवार को जारी किया गया 29-पेज का US नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटजी (NSS) ही असली और ऑफिशियल डॉक्यूमेंट है |
लीक दस्तावेज के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन यूरोपीय यूनियन (EU) को रणनीतिक रूप से कमजोर करने के लिए 3 देशों- ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी में सरकार बदलना चाहता है|साथ ही 4 देशों इटली, हंगरी, पोलैंड और ऑस्ट्रिया को EU से अलग करने की प्लानिंग कर रहा है. इसकी ये वजहें हो सकती है |
आर्थिक प्रतिस्पर्धा और व्यापार
यूरोपीयन यूनियन (EU) दुनिया की सबसे बड़ी आपस में जुड़ी हुई अर्थव्यवस्था है. EU का मजबूत होना, अमेरिका के व्यापारिक हितों के लिए चुनौती है. इसे कमजोर करके, अमेरिका यूरोपीय देशों के साथ अलग-अलग व्यापार सौदे कर सकता है, बेहतर ट्रेड डील हासिल कर सकता है. साथ ही यूरोपीय बाजार पर अधिक नियंत्रण रख सकता है| EU में शामिल 27 देशों की कुल GDP लगभग 17 ट्रिलियन डॉलर है. अमेरिका और EU के बीच सालाना 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का व्यापार होता है. EU अमेरिका का सबसे बड़ा बड़ा ट्रेड पार्टनर माना जाता है|
NATO पर वित्तीय बोझ
ट्रंप और उनके मंत्री नाटो खर्च में यूरोप की हिस्सेदारी को लेकर अपनी नाराजगी जता चुके हैं. दरअसल, अमेरिका का कहना है NATO की सुरक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा बोझ वही उठाता है, जबकि कई यूरोपीय देश तय लक्ष्य के मुताबिक खर्च नहीं करते. NATO के नियमों के मुताबिक, सदस्य देशों को अपनी GDP का कम से कम 2% रक्षा पर खर्च करना चाहिए | रूस-यूक्रेन युद्ध और बढ़ते सुरक्षा खतरों के बाद कई यूरोपीय देशों ने रक्षा बजट बढ़ाने शुरू कर दिए हैं, लेकिन अमेरिका अब भी बराबर हिस्सेदारी की मांग करता है. नाटो के 32 सदस्य देश हैं. अमेरिका इसके कुल सैन्य खर्च का लगभग 65 से 70% हिस्सा अकेले उठाता है. इसके बाद जर्मनी (6%), ब्रिटेन (5.4%) और फ्रांस (4.3%) आते हैं |
यूरोप की माइग्रेशन पॉलिसी से नाराजगी
ट्रंप कई मौकों पर यूरोप की कमजोर इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर नाराजगी जता चुके हैं. हाल ही में ट्रंप ने इमिग्रेशन को लेकर ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी का जिक्र किया | इस थ्योरी में दावा किया जाता है कि प्रवासियों के आने से यूरोप कमजोर हो रहा है और अपनी पहचान खो रहा है. उन्होंने कहा कि यूरोप के कई नेता बहुत मूर्ख हैं और उनकी प्रवासन नीतियां पूरी तरह असफल साबित हुई हैं. ट्रंप का मानना है कि यूरोप में लगातार हो रहे इमिग्रेशन और फ्री स्पीच पर सेंसरशिप की वजह से सभ्यता के खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है |
Core 5- नई वैश्विक व्यवस्था से फायदा
अमेरिका एक नई Core-5 गठबंधन बनाने की सोच रहा है, जिसमें अमेरिका, चीन, रूस, भारत और जापान शामिल होंगे. ये गठबंधन यूरोप को किनारे कर देगा. यह ऐसी रणनीति है, जिससे अमेरिका, यूरोप की सहमति के बिना वैश्विक फैसले ले सकता है |एशिया में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है. यूरोप के बजाय एशियाई महाशक्तियों के साथ सीधे डील कर सकता है |
राष्ट्रवादी सरकारों के साथ गठजोड़
ट्रंप यूरोप के देशों में राइट विंग (दक्षिणपंथी) सरकारों को इसलिए पसंद करते हैं, क्योंकि उनकी सोच और नीतियां कई अहम मुद्दों पर ट्रंप की विचारधारा से मेल खाती हैं. इटली में प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी, राष्ट्रवाद और पारंपरिक मूल्यों की बात करती है. यह रुख ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट की सोच से मेल खाता है| हंगरी में प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन खुले तौर पर अवैध इमिग्रेशन और यूरोपीय यूनियन की नीतियों का विरोध करते हैं. ट्रंप कई बार ऑर्बन की तारीफ कर चुके हैं |
पोलैंड NATO पर रक्षा खर्च बढ़ाने वाले देशों में भी रहा है, जो ट्रंप की मुख्य मांग रही है. ऑस्ट्रिया की सरकार भी इमिग्रेशन सीमित करने और EU की ताकत घटाने की बात करती हैं | ये सभी बातें ट्रंप की सोच से मेल खाती हैं. चारों ही देशों में फिलहाल राइट विंग पार्टियों की सरकार है, यही वजह है कि लीक डॉक्यूमेंट में इन 4 देशों को EU से अलग करने की बात कही गई है |
रूस-चीन को बैलेंस करने की जरूरत
नई रणनीति रूस के साथ रणनीतिक स्थिरता को बढ़ावा देती है. अगर EU कमजोर होता है, तो यूक्रेन युद्ध में यूरोप की आवाज कमजोर होगी और अमेरिका-रूस सीधे समझौता कर सकते हैं | एक एकजुट यूरोप अमेरिका-चीन के बीच चल रहे कॉम्पिटिशन में तीसरी शक्ति बन सकता है | यूरोप को कमजोर करके और Core-5 बनाकर, अमेरिका चीन के साथ सीधे डील कर सकता है |
पुतिन का सख्त संदेश? पाकिस्तान के PM शहबाज़ शरीफ को मीटिंग से पहले कराया 40 मिनट इंतजार
13 Dec, 2025 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस समय सुर्खियों में बने हुए हैं. शहबाज शरीफ हाल ही में इंटरनेशनल फोरम फॉर पीस एंड ट्रस्ट में हिस्सा लेने तुर्कमेनिस्तान गए थे | इस मौके पर रूस के राष्ट्रपति पुतिन, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भी मौजूद थे. लेकिन, तुर्कमेनिस्तान में पाक पीएम शहबाज शरीफ और रूस के राष्ट्रपति पुतिन को लेकर खूब चर्चा हो रही है. शहबाज शरीफ ने पुतिन से मिलने के लिए 40 मिनट तक इंतजार किया. इसी के बाद अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी बेइज्जती का सामना करना पड़ा है. हालांकि, अब सामने आया है कि दोस्त तुर्की की ही वजह से पाक पीएम को इतनी फजीहत का सामना करना पड़ा है |
पीएम शहबाज शरीफ उस हॉल में जाकर बैठ गए थे, जहां उन्हें पुतिन से मुलाकात करनी थी. आरटी इंडिया ने एक वीडियो भी रीलीज किया था जिसे बाद में हटा दिया गया, इस वीडियो में एक रूम में पाकिस्तानी और रूसी झंडा है. वहीं, कुर्सी पर अकेले बैठे पाक पीएम पुतिन का इंतजार कर रहे हैं | रिपोर्ट्स के मुताबिक, शहबाज शरीफ ने पूरे 40 मिनट तक पुतिन का इंतजार किया. इसी के बाद अब सामने आ गया है कि आखिर क्यों शहबाज शरीफ को पुतिन का इंतजार करना पड़ा |
क्यों करना पड़ा इंतजार?
शहबाज शरीफ के सामने आए फोटो-वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हो रही है | साथ ही पाक पीएम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेइज्जती का सामना करना पड़ा है. हालांकि, अब सामने आया है कि दोस्त तुर्की की ही वजह से पीएम शहबाज शरीफ को इस बेइज्जती का सामना करना पड़ा है |
रूसी अखबार कोमर्सांत ने इस घटना को लेकर जानकारी दी. रूसी अखबार की रिपोर्ट से ही पता लगता है कि आखिर क्यों शहबाज शरीफ को पुतिन का 40 मिनट तक इंतजार करना पड़ा | अखबार ने रिपोर्ट किया, पुतिन के साथ एर्दोआन की बैठक इतनी लंबी चली कि पास के कमरे में इंतजार कर रहे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ आधे घंटे तक अकेले बैठे रह गए | अकेले बैठे रहने से वो थक गए. इसी के बाद वो उठे, दरवाजा खोला और सीधे उस हॉल में चले गए जहां पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन के बीच बैठक चल रही थी |
एक और रूसी अखबार एमकेआरयू (MKRU) ने भी इस बैठक का जिक्र किया. अखबार ने कहा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी तुर्की और रूस के राष्ट्रपतियों के बीच हुई बैठक में शामिल हुए और इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों और मध्यस्थ के रूप में तुर्की की भूमिका पर भी चर्चा हुई | हालांकि, इस संयुक्त बैठक के बाद अभी तक पाकिस्तानी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है |
पुतिन-एर्दोआन की मीटिंग में घुसे
आरटी इंडिया ने एक वीडियो भी शेयर की थी. वीडियो के अनुसार, तुर्कमेनिस्तान में अंतरराष्ट्रीय फोरम के दौरान, शरीफ की रूस के राष्ट्रपति के साथ तय द्विपक्षीय बैठक में देरी हो गई थी | इसी के चलते वो लंबे समय तक पुतिन का इंतजार करते रहे. इसी के बाद वो उठे और उस कमरे में चले गए जहां राष्ट्रपति पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन के बीच बैठक चल रही थी | हालांकि, आरटी इंडिया ने बाद में यह वीडियो यह कहते हुए हटा दिया कि यह पोस्ट घटनाओं की गलत प्रस्तुति हो सकती है|
PAK ने मामले को लेकर क्या कहा?
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को तुर्की, तुर्कमेनिस्तान और ईरान के राष्ट्रपतियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं| इसके अलावा, उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान और किर्गिजस्तान के राष्ट्रपति सादिर जपारोव के साथ अनौपचारिक मुलाकातें भी कीं |
प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों के बाद, प्रधानमंत्री हाउस ने इन बैठकों पर एक रिपोर्ट भी जारी की | पाकिस्तान ने पुतिन और शहबाज शरीफ को लेकर कहा, दोनों नेताओं के बीच कोई औपचारिक द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई, लेकिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक वीडियो में शहबाज शरीफ और व्लादिमीर पुतिन को हाथ मिलाते और बातचीत करते हुए देखा जा सकता है |
भीषण आग से हिल गई फिलीपींस की राजधानी, जानें क्यों होती है आगजनी
13 Dec, 2025 01:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
12 दिसंबर 2025 को शाम करीब 6:38 बजे फिलीपींस की राजधानी मनीला के मंडलुयोंग सिटी में एक घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके में भीषण आग लग गई. यह आग बैरंगेय प्लेजेंट हिल्स के ब्लॉक 5, नुवेवे दे फेब्रेरो में शुरू हुई और जल्दी ही फैल गई क्योंकि घर हल्की और जल्दी जलने वाली सामग्री से बने थे |
आग की लपटें बहुत ऊंची उठीं और काला धुआं दूर तक दिखाई दिया जिससे शाम का आसमान नारंगी हो गया. आग का अलार्म तेजी से बढ़ता गया और शाम 7:19 बजे तक यह बड़े स्तर पर फैल चुकी थी |
20 से ज्यादा दमकल गाड़ियों ने आग बुझाई
दमकल विभाग ने 20 से ज्यादा फायर ट्रक और आसपास के इलाकों से टीमों को लगाया. आग पर आधी रात तक काबू पा लिया गया लेकिन नुकसान का आकलन अभी जारी है. इस आग से करीब 500 परिवार बेघर हो गए और उनके घर पूरी तरह जलकर राख हो गए. अच्छी बात यह है कि इस हादसे में अभी तक किसी के घायल होने या मरने की कोई खबर नहीं आई |
गरीब बस्तियों में आग मुसीबत बनी
मेट्रो मनीला के गरीब बस्तियों में ऐसी आग बार-बार लगती है क्योंकि वहां घर बहुत करीब-करीब बने होते हैं. बिजली की वायरिंग खराब होती है और गलियां संकरी होती हैं जिससे दमकल गाड़ियां मुश्किल से पहुंच पाती हैं. यह घटना शहर की आग सुरक्षा की समस्याओं को फिर से उजागर करती है |
मनीला के इलाके में आगजनी नई बात नहीं
इससे पहले 6 अगस्त 2025 को टोंडो के हैप्पीलैंड अरोमा इलाके में बड़ी आग लगी जिसमें सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए |
सितंबर 2025 में टोंडो में दो अलग-अलग आग लगीं एक 13 सितंबर को हैप्पीलैंड में जिसने करीब 1100 परिवारों को प्रभावित किया और अगले दिन दूसरी आग लगी |
नवंबर 2024 में टोंडो के इस्ला पुटिंग बाटो इलाके में बहुत बड़ी आग लगी जिसमें करीब 1000 घर जल गए और 8000 से ज्यादा लोग बेघर हो गए. यह आग आठ घंटे तक जलती रही और हेलिकॉप्टर से पानी डाला गया |
मार्च 2024 में टोंडो के हैप्पीलैंड में आग लगी जिसमें दमकल कर्मियों पर हमला भी हुआ |
दिसंबर 2023 में भी हैप्पीलैंड में आग से 1500 से ज्यादा लोग बेघर हुए थे
2017 में एक स्लम एरिया में आग से 15000 लोग बेघर हो गए थे |
BNP ने किया बड़ा खुलासा, 17 साल बाद लंदन से लौटे शख्स से बदल सकता है चुनावी खेल
13 Dec, 2025 12:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश में जहां चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है. 12 फरवरी को देश में चुनाव होंगे. इस बीच अब तक देश में सामने आ रही सबसे बड़ी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ा कदम उठाया है | देश की पूर्व पीएम और पार्टी की अध्यक्ष खालिदा जिया की तबीयत बिगड़ती जा रही है. इस बीच बीएनपी ने घोषणा की है कि खालिदा जिया के बेटे और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान 25 दिसंबर को ढाका लौटेंगे. पूरे 17 साल तक वो स्व-निर्वासन (Self-Exile) में लंदन में रहते थे |
इसी के साथ अब 17 साल बाद चुनाव के चलते वो 25 दिसंबर को बांग्लादेश लौटने वाले हैं. पार्टी की तरफ से यह ऐलान ऐसे समय में किया गया है, जब खालिदा जिया की सेहत गंभीर रूप से बिगड़ गई है और राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है. BNP के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बताया कि यह फैसला पार्टी की स्थायी समिति की बैठक में लिया गया |
खालिदा जिया की बिगड़ी तबीयत
उन्होंने कहा, हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि हमारे कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान 25 दिसंबर को ढाका लौटेंगे. आलमगीर ने आगे कहा कि पार्टी उनका स्वागत करती है. बांग्लादेश की पूर्व पीएम 80 वर्षीय खालिदा जिया 23 नवंबर से ढाका के एवरकेयर अस्पताल में भर्ती हैं. वो कई बीमारियों से जूझ रही हैं. गुरुवार को उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया |
एक विस्तृत बयान में उनकी मेडिकल बोर्ड के प्रमुख, हृदय रोग विशेषज्ञ शाहाबुद्दीन तालुकदार ने कहा कि जिया के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर अचानक गिर गया और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ गया. बयान में कहा गया, उन्हें सांस लेने में दिक्कत बढ़ गई, ऑक्सीजन का स्तर गिर गया और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ गया |
क्यों लौट रहे भारत
रहमान लंबे समय से विदेश से ही पार्टी के वास्तविक नेता के रूप में एक्टिव रहे हैं और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए रणनीति का समन्वय करते रहे हैं. BNP नेताओं ने कहा, अस्पष्ट कारणों से वो अपने देश लौटकर अपनी बीमार मां के साथ नहीं रह पाए हैं |
रहमान की वापसी की घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब उससे एक दिन पहले बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने पुष्टि की थी कि 13वां संसदीय चुनाव 12 फरवरी को आयोजित किया जाएगा. BNP ने संकेत दिया है कि अगर खालिदा जिया राजनीतिक जिम्मेदारियां निभाने की स्थिति में नहीं होती हैं, तो पार्टी के सत्ता में आने की स्थिति में रहमान को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाएगा |
साल 2008 में शेख हसीना के सत्ता में आते ही तारिक रहमान अपने परिवार के साथ लंदन चले गए थे. तारिक पर हसीना सरकार में कई गंभीर मुकदमे दर्ज किए गए थे. तारिक इस वजह से लंदन में ही रह रहे थे |
PM रेस में सबसे आगे
तारिक रहमान पीएम की रेस में बड़ा चेहरा बन कर सामने आ सकते हैं. देश में हो रहे सर्वे में बीएनपी को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है. बीएनपी नेता तारिक रहमान पीएम की रेस में सबसे आगे हैं. बांग्लादेश में अब तक जितने भी सर्वे आए हैं, उसमें बीएनपी को ही बढ़त मिलती दिख रही है |
सर्वे अगर रिजल्ट में तब्दील हो जाता है तो तारिक बांग्लादेश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं. इससे पहले साल 2001 में तारिक की मां आखिरी बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री नियुक्त हुई थीं. तब से तारिक का परिवार सत्ता से दूर है. इस बीच अगर तारिक बांग्लादेश आ जाते हैं और लोगों के बीच जाते हैं. रणनीति तय करते हैं तो इससे पार्टी को खासा फायदा मिलने की उम्मीद है |
म्यांमार में सैन्य जुंटा ने किया अस्पताल पर हवाई हमला, 31 की मौत, 70 घायल
12 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नेपीडा। म्यांमार की सैन्य जुंटा ने गुरुवार को रखाइन स्टेट में बड़ा हमला किया है। म्यांमार सेना ने अस्पताल को निशाना बनाते हुए यह हवाई हमला किया। इस बमबारी में अस्पताल में मौजूद कम से कम 31 लोग मारे गए हैं। वहीं करीब 70 घायल हुए हैं। अराकान आर्मी के गढ़ कहे जाने वाले पश्चिमी रखाइन राज्य के म्राउक-यू शहर स्थित अस्पताल पर ये अटैक ऐसे समय हुआ है, जब जुंटा ने विद्रोहियों पर हमले तेज कर दिए हैं। जुंटा ने इस महीने शुरू होने वाले चुनावों से पहले अपनी सैन्य कार्रवाई तेज की है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल कर्मी ने बताया कि स्थिति बहुत भयानक है। अभी तक 31 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। ये संख्या और भी बढ़ सकती है। मलबे से 70 घायल लोग निकाले गए हैं। इनमें से कई की हालत गंभीर है। उन्होंने कहा कि रातभर अस्पताल पर बम बरसाए गए। जुंटा सेना ने हालिया दिनों में लगातार हवाई हमले किए हैं। पिछले हफ्ते म्यांमार की जुंटा सेना ने ऊपरी-मध्य क्षेत्र सगाइंग में एक चाय की दुकान पर हवाई हमला किया था। ये हमला तब किया गया था जब यहां काफी भीड़ थी। हमले में कम से कम 18 नागरिकों की मौत हो गई थी और 20 लोग घायल हुए थे।
म्यांमार की सेना ने 28 दिसंबर को चुनाव कराने की घोषणा की है। सेना का कहना है कि यह कदम लड़ाई खत्म करने के लिए उठाया गया है। दूसरी ओर विद्रोही समूहों ने उन इलाकों में चुनाव रोकने की कसम खाई है, जिन पर उनका कब्जा है। सेना इन इलाकों को वापस पाने के लिए हवाई हमले कर रही है। बता दें म्यांमार में तीन साल से ज्यादा समय से गृहयुद्ध चल रहा है। 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से ही देश में हिंसा जारी है। एक तरफ जुंटा कहा जाने वाला सैन्य शासन है तो दूसरी ओर विद्रोही गुट हैं। इस संघर्ष ने देश में बड़े पैमाने पर विस्थापन और मानवीय संकट पैदा किया है।
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