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विश्व बैंक से पाकिस्तान को 70 करोड़ डॉलर की सहायता, आईएमएफ ने भी लोन को दी मंजूरी
21 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका।पाकिस्तान को गंभीर आर्थिक संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राहत मिली है। विश्व बैंक ने पाकिस्तान की व्यापक आर्थिक स्थिरता और सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से 70 करोड़ डॉलर (करीब 5,800 करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता को मंजूरी दे दी है। यह सहायता ऐसे समय में दी जा रही है, जब पाकिस्तान भारी कर्ज, बढ़ती महंगाई, विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहा है। इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी पाकिस्तान को लोन देने की मंजूरी दे दी है, जिससे देश की डगमगाती अर्थव्यवस्था को कुछ सहारा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
विश्व बैंक की यह वित्तीय मदद समावेशी विकास के लिए सार्वजनिक संसाधन–बहु-चरणीय कार्यक्रमबद्ध दृष्टिकोण के तहत दी जाएगी। इस कार्यक्रम के अंतर्गत पाकिस्तान को कुल 1.35 अरब डॉलर तक की फंडिंग मिल सकती है। फिलहाल मंजूर की गई 70 करोड़ डॉलर की राशि इसी दीर्घकालिक कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान में आर्थिक सुधारों को गति देना और सार्वजनिक क्षेत्र की सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।
इस स्वीकृत राशि में से 60 करोड़ डॉलर संघीय स्तर के कार्यक्रमों के लिए निर्धारित किए गए हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार के राजस्व प्रबंधन, बजट प्रणाली, वित्तीय पारदर्शिता और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार पर जोर दिया जाएगा। वहीं, 10 करोड़ डॉलर सिंध प्रांत के एक विशेष कार्यक्रम के लिए आवंटित किए गए हैं, जिसका लक्ष्य प्रांतीय स्तर पर आर्थिक प्रशासन को मजबूत करना और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाना है।
विश्व बैंक का मानना है कि यह सहायता पाकिस्तान को आर्थिक स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करेगी और सरकार को संरचनात्मक सुधार लागू करने का अवसर देगी। बैंक के अनुसार, बेहतर वित्तीय प्रबंधन और संसाधनों के कुशल उपयोग से देश में विकास की रफ्तार को दोबारा पटरी पर लाया जा सकता है।
उधर, IMF द्वारा लोन को मंजूरी मिलने को भी पाकिस्तान के लिए अहम माना जा रहा है। आईएमएफ की शर्तों के तहत पाकिस्तान को कर सुधार, सब्सिडी में कटौती और वित्तीय अनुशासन जैसे कठिन कदम उठाने होंगे। हालांकि, सरकार का दावा है कि इन सुधारों से दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि विश्व बैंक और आईएमएफ से मिलने वाली यह सहायता अल्पकालिक राहत तो दे सकती है, लेकिन पाकिस्तान को स्थायी समाधान के लिए व्यापक आर्थिक सुधारों, निर्यात बढ़ाने और निवेश का माहौल सुधारने पर गंभीरता से काम करना होगा।
150 कंप्यूटर लूटे, फाइलें फाड़ीं, बांग्लादेश के मीडिया हाउस में भीड़ का तांडव
20 Dec, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हंगामा मचा हुआ है. देश में लोग सड़कों पर उतर आए हैं. नारेबाजी की गई. आगजनी की गई. साथ ही भीड़ ने मीडिया हाउस पर अटैक किया. शुक्रवार देर रात बांग्लादेश में भीड़ ने ढाका में द डेली स्टार और प्रोथोम आलो के दफ्तरों पर एक साथ हमले किए. इस दौरान कीमती सामान लूटा गया, इमारतों में तोड़फोड़ की गई और पत्रकारों को कई घंटों तक अंदर ही फंसाकर रखा गया. इस दौरान कम से कम 150 कंप्यूटर और कई जरूरी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चोरी कर लिए गए, जबकि दफ्तरों की कैंटीन और फाइलों को भी तहस-नहस कर दिया गया |
बांग्लादेश में लोगों का गुस्सा छात्र नेता हादी की मौत के बाद फूटा. हादी को हाल ही में सिर पर गोली मारी गई थी. इसी के बाद उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था. लेकिन, उन्हें बचाया नहीं जा सका. 18 दिसंबर को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने हादी की मौत का ऐलान किया. उनके यह ऐलान करने के बाद से ही देश में हंगामा मच गया. लोगों का गुस्सा मीडिया हाउस पर भी फूटा |
ऑफिस में मचाई तबाही
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि ये अखबार अशांति फैलाने और राजनीतिक हितों से जुड़े हुए हैं, हालांकि दोनों मीडिया संस्थानों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. द डेली स्टार के काजी नजरुल इस्लाम एवेन्यू स्थित दफ्तर में हमलावरों ने आधी रात के आसपास जबरन घुसपैठ की. उन्होंने फर्नीचर और कांच के दरवाजे तोड़ दिए, कंप्यूटर, कैमरे और हार्ड ड्राइव नष्ट कर दीं, शहीद अबू सैयद और मीर महफूजुर रहमान मुग्धो के पोस्टर फाड़ दिए और कई मंजिलों में आग लगा दी |
हालात इतने बिगड़ गए कि आग की लपटों और घने धुएं की वजह से पत्रकारों को छत पर जाना पड़ा. 28 पत्रकारों और कर्मचारियों को कई घंटों तक छत पर शरण लेनी पड़ी. खोजी पत्रकार जायमा इस्लाम ने फेसबुक पर लिखा, मैं अब सांस नहीं ले पा रही हूं. बहुत ज्यादा धुआं है. मैं अंदर फंसी हूं. आप मुझे मार रहे हैं. दमकलकर्मियों, पुलिस और सेना के जवानों ने सुबह करीब 5 बजे फंसे हुए पत्रकारों को बाहर निकाला |
अखबार नहीं हुआ प्रसारित
भीड़ के इस हमले से दफ्तर को भारी नुकसान हुआ और बिजली, पानी और गैस की आपूर्ति काट दी गई. हालात इतने बिगड़ गए कि द डेली स्टार अपने 34 साल के इतिहास में पहली बार अपना अखबार नहीं छाप सका |
इमारत को किया तहस-नहस
न सिर्फ डेली स्टार बल्कि प्रोथोम आलो पर भी हमला हुआ. प्रोथोम आलो के कारवां बाजार स्थित मुख्यालय में हमलावरों ने रात करीब 11:15 बजे हमला शुरू किया. शुरुआत में पुलिस ने उन्हें रोका, लेकिन भीड़ फिर से इकट्ठा हुई और बड़े पैमाने पर हमला किया. इस दौरान ऑफिस की खिड़कियां, फर्नीचर, कंप्यूटर, सीसीटीवी कैमरे, फायर सेफ्टी सिस्टम और कैश लॉकर तोड़ दिए गए. ग्राउंड फ्लोर से लेकर दूसरी मंजिल तक का हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया और इमारत के ओटीटी प्लेटफॉर्म चोरकी को भी भारी नुकसान पहुंचा |
छत पर भागे पत्रकार
कर्मचारियों को जान बचाकर भागना पड़ा. एक कर्मचारी छत से पास की इमारत में कूद गया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं. मीडिया हाउस अपने 27 साल के इतिहास में पहली बार शुक्रवार को अपना अखबार नहीं छाप सका. साथ ही ऑनलाइन सेवाएं भी करीब 17 घंटे तक बंद रहीं |
साथ ही प्रदर्शनकारियों ने रास्ता रोका इसी वजह से दमकल सेवाओं को पहुंचने में देरी हुई. दो फायरफाइटर, एमडी आलमगीर और एमडी शफिउल आलम को करंट लग गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. बाद में पुलिस, सेना ने मिलकर लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला | हिंसा केवल मीडिया संस्थानों तक सीमित नहीं रही. धानमंडी में भीड़ ने छायानट भवन पर हमला किया और संगीत वाद्ययंत्रों, कलाकृतियों और दफ्तरों में तोड़फोड़ की |
किन इलाकों में फैली हिंसा
प्रदर्शन चटगांव, राजशाही, उत्तरा और अन्य इलाकों तक फैल गए, जहां राजनीतिक और सांस्कृतिक संस्थानों को निशाना बनाया गया. चटगांव में प्रदर्शनकारियों की ओर से सहायक भारतीय उच्चायोग पर पत्थर फेंके जाने के बाद पुलिस ने 10 लोगों को हिरासत में लिया |
अंतरिम मुख्य सलाहकार प्रो. मुहम्मद यूनुस ने संपादक मतीउर रहमान और महफूज अनाम से बात कर गहरा दुख जताया और सरकार की ओर से सहयोग का भरोसा दिया. सांस्कृतिक मामलों के सलाहकार मोस्तोफा सरवर फारूकी ने क्षतिग्रस्त संस्थानों की मरम्मत में मदद का आश्वासन दिया |
एडिटर्स काउंसिल, कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) और मीडिया फ्रीडम कोएलिशन सहित राजनीतिक दलों और मीडिया संगठनों ने इन हमलों की निंदा की. स्थानीय पत्रकारों और नागरिक नेताओं ने हमलावरों को समझाने की कोशिश की, जिसके बाद दमकल कर्मियों और पुलिस को आग पर काबू पाने का मौका मिला |
दीपू चंद्र दास हत्याकांड: बांग्लादेश पुलिस ने 7 आरोपी धर दबोचे
20 Dec, 2025 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश इस समय हिंसा और अशांति की आग में घिरा हुआ है. छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद ढाका समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. इसी उथल-पुथल भरे माहौल में सांप्रदायिक हिंसा की एक और दर्दनाक घटना घटी, जिसमें एक हिंदू युवक अपनी जान गंवा बैठा |
मायमनसिंह जिले के वालुका (भालुका) उपजिला से सामने आई इस दिल दहला देने वाली वारदात में कथित तौर पर ईशनिंदा के आरोप में उग्र भीड़ ने 27 वर्षीय दिपु चंद्र दास को बेरहमी से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया. घटना के बाद सुरक्षा बल रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया है |
7 संदिग्ध हुए गिरफ्तार
घटना के बाद RAB-14 ने अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार किए गए लोगों में मोहम्मद लिमोन सरकार (19), मोहम्मद तारिक हुसैन (19), मोहम्मद मानिक मिया (20), एरशाद अली (39),निजुम उद्दीन (20), आलमगीर हुसैन (38) और मोहम्मद मिराज हुसैन आकॉन (46) शामिल हैं. अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ जारी है और मामले की गहराई से जांच की जा रही है |
घटना कब और कैसे हुई?
पुलिस और बांग्ला की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार रात करीब 9 बजे स्क्वायर मास्टर बारी डुबालिया पाड़ा इलाके में एक उग्र भीड़ ने दिपु चंद्र दास को पकड़ लिया. आरोप लगाया गया कि उसने पैगंबर के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की है. गुस्साई भीड़ ने युवक को बेरहमी ससे पीटा जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. इसके बाद हमलावरों ने शव को एक पेड़ से बांधकर आग लगा दी |
कौन थे दिपु चंद्र दास?
दिपु चंद्र दास एक स्थानीय गार्मेंट फैक्ट्री में काम करते थे और इलाके में किराए के मकान में रहता थे. शुरुआती जानकारी के मुताबिक वह लंबे समय से वहीं रह रहे थे. घटना के बाद शव को मायमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मुर्दाघर भेज दिया गया है |
राजनीतिक उथल-पुथल के बीच खालिदा जिया की बहू सुरक्षित लंदन पहुंचीं
20 Dec, 2025 01:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश में इस समय बवाल मचा हुआ है. हाल ही में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हंगामा मचा हुआ है. देश में हादी की मौत के बाद लोगों का आक्रोश देखा गया. लाखों लोग सड़कों पर उतर आए. जमकर नारेबाजी की, आगजनी की. इसी बीच जहां बांग्लादेश में अशांति फैली हुई है. वहीं, खालिदा जिया की बहू वापस लंदन रवाना हो गई हैं |
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की तबीयत के चलते इस समय उनकी बहू जुबैदा रहमान उन्हें देखने के लिए आई थीं. जुबैदा 5 दिसंबर को ढाका पहुंची थीं. इसी के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान की पत्नी जुबैदा रहमान शनिवार को ढाका से लंदन रवाना हो गई हैं |
लंदन के लिए रवाना हुईं जुबैदा
खालिदा जिया की बहू शनिवार को सुबह करीब 8:30 बजे ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कतर एयरवेज की उड़ान से लंदन (यूके) के लिए रवाना हुईं. जुबैदा रहमान 5 दिसंबर को ढाका पहुंची थीं, जब बीएनपी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की तबीयत बिगड़ गई थी. वो खालिदा जिया को बेहतर इलाज के लिए ब्रिटेन ले जाने की तैयारियों के तहत देश आई थीं. लेकिन, अब देश में मचे बवाल के बीच वो वापस लंदन चली गई हैं |
तारिक रहमान लौटेंगे ढाका
इसी बीच बीबीसी बांग्ला की जानकारी के मुताबिक, बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान के 25 दिसंबर को देश लौटने की संभावना है. राज्य समाचार एजेंसी बीएसएस की रिपोर्ट के मुताबिक, जुबैदा रहमान भी उसी समय तारिक रहमान के साथ ढाका लौटेंगी |
क्यों वापस लौटीं जुबैदा?
जुबैदा रहमान की उड़ान सिलहट में ठहराव के बाद लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर पहुंचेगी. उनका लंदन लौटना ऐसे समय हुआ है, जब एक दिन पहले खालिदा जिया के डॉक्टरों ने कहा कि 79 वर्षीय बीएनपी प्रमुख की हालत स्थिर हो गई है. खालिदा जिया की लंबे समय से तबीयत बिगड़ती जा रही है. इसी बीच शुक्रवार को एक राहत की खबर सामने आई है डॉक्टर्स ने कहा है कि उनका हालत अब स्थिर है |
खालिदा जिया का इलाज स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का एक मेडिकल बोर्ड कर रहा है. बोर्ड के एक सदस्य और खालिदा जिया के निजी डॉक्टर प्रोफेसर एजेडएम जाहिद हुसैन ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि पिछले एक महीने से उनकी स्थिति काफी हद तक स्थिर बनी हुई है |
वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था
खालिदा जिया बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की अध्यक्ष हैं, 23 नवंबर से कई स्वास्थ्य समस्याओं के चलते ढाका के एवरकेयर अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है. बाद में उन्हें कोरोनरी केयर यूनिट (सीसीयू) में शिफ्ट किया गया. 11 दिसंबर को उनके फेफड़ों और अन्य अंगों को आराम देने के लिए उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया |
पिछले हफ्ते मेडिकल बोर्ड की मंजूरी के साथ उन्हें लंदन ले जाने की योजना थी, लेकिन कतर की ओर से उपलब्ध कराई गई एयर एंबुलेंस ढाका नहीं पहुंच सकी, जिसकी वजह से वो लंदन नहीं जा सकीं |
हादी की मौत से हंगामा
बांग्लादेश में हादी की मौत के बाद कई इलाकों में अशांति देखने को मिली. हादी एक प्रमुख छात्र नेता थे. कुछ ही दिन पहले उन्हें सिर में गोली मार दी गई थी. इसी के बाद उनका सिंगापुर में इलाज चल रहा था. लेकिन, हादी को बचाया नहीं जा सका. गुरुवार को उन्होंने दम तोड़ दिया |
अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने जैसे ही हादी की मौत की खबर का ऐलान किया, उसके तुरंत बाद ही देशभर में हिंसा फैल गई. लोगों ने न सिर्फ सड़कों पर आगजनी की बल्कि देश में मीडिया के ऑफिस पर भी हिंसा की गई. देश के दो प्रमुख अखबारों — डेली स्टार और प्रोथोम आलो — के दफ्तरों में तोड़फोड़ की गई |
पाकिस्तान की राजनीति में भूचाल, इमरान खान-बुशरा बीबी को 17 साल जेल
20 Dec, 2025 12:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की कानूनी परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं. शनिवार को एक जवाबदेही अदालत ने बहुचर्चित तोशाखाना-2 भ्रष्टाचार मामले में इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को 17-17 साल की जेल की सजा सुनाई. यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब इमरान खान पहले से ही जेल में बंद हैं |
इस हाई-प्रोफाइल मामले का फैसला रावलपिंडी की हाई-सिक्योरिटी अदियाला जेल में सुनाया गया. विशेष अदालत के जज शाहरुख अर्जुमंद ने जेल परिसर में ही दोनों को दोषी करार दिया. सुरक्षा कारणों से कोर्ट की कार्यवाही जेल के अंदर कराई गई |
क्या है अदालत का पूरा फैसला
विशेष केंद्रीय जज शाहरुख अर्जुमंद ने रावलपिंडी की हाई-सिक्योरिटी अदियाला जेल में यह फैसला सुनाया. अदालत ने इमरान खान और बुशरा बीबी को पाकिस्तान पीनल कोड की धारा 409 के तहत भी दोषी ठहराते हुए 7-7 साल की अतिरिक्त सज़ा सुनाई. इसके साथ ही दोनों पर कुल एक करोड़ रुपये (10-10 मिलियन रुपये) का जुर्माना भी लगाया गया है. अदियाला जेल अधिकारियों के मुताबिक, फैसला सुनाए जाने के वक्त इमरान खान और बुशरा बीबी कोर्टरूम में मौजूद थे. वहीं, फैसले से पहले इमरान खान के वकील सलमान सफदर को नोटिस भी जारी किया गया था |
क्या है तोशाखाना-2 मामला
यह मामला साल 2021 में सऊदी अरब सरकार से मिले सरकारी उपहारों से जुड़ा है. आरोप है कि इमरान खान और बुशरा बीबी ने इन महंगे तोहफों को नियमों के खिलाफ अपने पास रखा और बाद में कथित तौर पर धोखाधड़ी की. अदालत ने इसे राज्य के साथ विश्वासघात मानते हुए सख्त सज़ा सुनाई |
जांच से सजा तक का सफर
तोशाखाना-2 मामले की शुरुआती जांच राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (NAB) ने की थी. बाद में NAB संशोधनों के तहत केस को FIA को सौंप दिया गया. सितंबर 2024 में FIA ने जांच पूरी कर अदालत में चालान पेश किया. इसके बाद 12 दिसंबर 2024 को इमरान ख़ान और बुशरा बीबी पर औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए. गौरतलब है कि अदालत पहले तोशाखाना-1 मामले में इमरान ख़ान और बुशरा बीबी को बरी कर चुकी है. हालांकि, दूसरे मामले में आई सज़ा ने उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं |
नई सजा और बढ़ता विवाद
ताजा सजा ऐसे समय में आई है, जब इमरान खान को जेल में कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है. उनके समर्थकों और पार्टी पीटीआई ने आरोप लगाया है कि खान को लंबे समय तक एकांत कारावास में रखा गया. इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आवाज़ उठी है. संयुक्त राष्ट्र ने भी इमरान खान को एकांस कारावास से बाहर निकालने की अपील की है और इसे मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताया था |
महीने में 12 लाख रुपए की आमदनी होगी तभी सऊदी अरब में मिलेगी शराब
19 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रियाद । सऊदी अरब ने दशकों पुराने शराब प्रतिबंध में ढील देते हुए गैर-मुस्लिम विदेशी निवासियों को सीमित शराब खरीदने की अनुमति दी है। यह बदलाव राजधानी रियाद की एकमात्र लाइसेंस प्राप्त शराब दुकान से शुरू हुआ है, जो पहले केवल विदेशी राजनयिकों के लिए थी। अब उच्च आय वाले गैर-मुस्लिम एक्सपैट्स भी यहां से शराब खरीद सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, शराब खरीदने के लिए गैर-मुस्लिम विदेशी को मासिक आय कम से कम 50,000 सऊदी रियाल (लगभग 13,300 अमेरिकी डॉलर या 11-12 लाख भारतीय रुपये) साबित करनी होगी। इसके लिए सैलरी स्लिप या आय प्रमाणपत्र दिखाना अनिवार्य है।
दुकान में प्रवेश और खरीदारी पर मासिक कोटा लागू है, जो सरकारी आईडी से जुड़ा होता है। यह सुविधा केवल प्रीमियम रेजीडेंसी धारकों या उच्च आय वाले एक्सपैट्स तक सीमित है। सऊदी नागरिकों और मुस्लिमों के लिए शराब पर पूर्ण प्रतिबंध बरकरार है। सरकार ने अभी इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, और जानकारी अनाम सूत्रों से आई है। यह कदम सऊदी अरब की विजन 2030 योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य तेल पर निर्भरता कम कर पर्यटन, निवेश और व्यवसाय को बढ़ावा देना है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में देश सामाजिक प्रतिबंधों को शिथिल कर रहा है, जैसे महिलाओं को ड्राइविंग की अनुमति, सार्वजनिक मनोरंजन और संगीत कार्यक्रमों की छूट। शराब की सीमित बिक्री से विदेशी प्रतिभा और निवेशकों को आकर्षित करने का लक्ष्य है, ताकि सऊदी को वैश्विक व्यापारिक केंद्र बनाया जा सके। आने वाले वर्षों में जेद्दा और धहरान में भी नई दुकानें खुलने की योजना है। यह बदलाव सऊदी अरब को आधुनिक और निवेश-अनुकूल छवि देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, हालांकि यह बेहद नियंत्रित और चुनिंदा है।
फिर म्यांमार में कांपी धरती, सुबह-सुबह आए भूकंप से लोग डर गए और घरों से बाहर भागे
19 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नेपीडॉ। म्यांमार में सुबह काफी डराने वाली थी। वजह थी कि यहां आए भूकंप ने लोगों को काफी ज्यादा डरा दिया। हालांकि तीव्रता केवल 4.4 मापी गई, लेकिन लोगों को लगा कि कहीं तेज भूकंप आ गया तो भागना भी कठिन हो जाएगा। इसी सोच के चलते लोग घरों से निकले और सुरक्षित स्थान की तरफ भागने लगे। गुरुवार सुबह म्यांमार में भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (एनसीएस) की जानकारी के मुताबिक रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.4 मापी गई। भूकंप का केंद्र 26.07 डिग्री उत्तर अक्षांश और 97.00 डिग्री पूर्व देशांतर पर स्थित था, जबकि इसकी गहराई 100 किलोमीटर बताई जा रही है। हालांकि इस भूकंप से अब तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है लेकिन फिर भी इसे खतरनाक माना जा रहा है।
म्यांमार के नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक इससे पहे 11 दिसंबर को म्यांमार में 3.8 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। वहीं इससे एक दिन पहले, 10 दिसंबर को 4.6 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई करीब 138 किलोमीटर थी। भूवैज्ञानिकों का कहना है कि म्यांमार अपनी लंबी समुद्री तटरेखा की वजह से भूंकप को लेकर संवेदनशील है। यहां मध्यम से लेकर बड़े भूकंप और सुनामी के खतरे बने रहते हैं। देश चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के एक्टिव होने की वजह से यहां अक्सर धरती में कंपन महसूस किया जाता है। जानकारों के मुताबिक म्यांमार भौगोलिक रूप से भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र में आता है। देश की लंबी समुद्री तटरेखा के कारण यहां मध्यम से लेकर बड़े भूकंप और सुनामी का खतरा बना रहता है। म्यांमार चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों- भारतीय, यूरेशियन, सुंडा और बर्मा प्लेट के संगम क्षेत्र में स्थित है। इन प्लेटों के लगातार टकराने और खिसकने की वजह से यहां अक्सर भूकंपीय गतिविधियां देखने को मिलती रहती हैं।
बता दें कि इस साल 2025 की करें तो इस साल 28 मार्च को सेंट्रल म्यांमार में बड़ा भूंकप आया था, जिसमें 7.7 और 6.4 तीव्रता के शक्तिशाली झटके महसूस किए गए थे। म्यांमार से होकर गुजरने वाला करीब 1,400 किलोमीटर लंबा सागाइंग फॉल्ट देश के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। यह फॉल्ट अंडमान क्षेत्र को देश के उत्तरी हिस्से से जोड़ता है और सागाइंग, मांडले, बागो और यांगून जैसे बड़े शहरों के लिए गंभीर भूकंप का जोखिम पैदा करता है। इन शहरों में म्यांमार की लगभग 46 प्रतिशत आबादी रहती है। साल 1903 में म्यांमार के बागो में आए 7.0 तीव्रता के भूकंप का असर यांगून तक महसूस किया गया था।
यूरोप के छोटे सूअरों को हमारे देश के पतन से लाभ उठाने की उम्मीद थी
19 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। आम तौर पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के चेहरे पर दिखने वाली शांति देख दुश्मनों की रूह कांप जाती है। वहीं, हाल ही में पुतिन का एक ऐसा अवतार सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। गुस्से में पुतिन के मुंह से ‘छोटे सुअर’ जैसे शब्द निकाल गए। ये तब हुआ जब वह रूस-यूक्रेन के बीच चल रही पीस डील पर बात कर रहे थे, जिसमें दुनिया भर के देश जुड़ चुके हैं, कोई क्रेडिट लेने की होड़ में है तो कई आग में घी डालने का काम कर रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय के साथ वार्षिक बैठक में बोलते हुए पुतिन ने साफ कहा कि अगर डिप्लोमेसी से बात नहीं बनी तो फोर्स का इस्तेमाल करके रूस अपनी मांगे पूरी करके ही मानेगा। उन्होंने कहा कि ‘मॉस्को जिसे अपना ‘विशेष सैन्य अभियान’ मानता है वह लक्ष्य ‘बिना शर्त’ पूरे किए जाएंगे। अगर वे सार्थक चर्चा नहीं चाहते, तो रूस युद्ध के मैदान में अपनी ऐतिहासिक भूमि को मुक्त कराएगा।
पुतिन ने दावा किया कि पिछली अमेरिकी सरकार ने जानबूझकर स्थिति को सशस्त्र संघर्ष की ओर धकेला था। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन का मानना था कि रूस थोड़े ही समय में कमजोर पड़ जाएगा और खत्म हो जाएगा। इसके बाद यूरोपीय नेताओं पर बात करते हुए पुतिन गुस्से से लाल हो गए। उन्होंने कहा कि ‘यूरोप के छोटे सूअरों ने पिछली अमेरिकी सरकार का इस में तुरंत साथ दिया, उन्हें हमारे देश के पतन से लाभ उठाने की उम्मीद थी। यूरोपीय देशों और पुतिन की दुश्मनी जगजाहिर है लेकिन इस तरह की टिप्पणियां इशारा करती हैं कि शांति समझौता हो जाने के बाद भी युद्ध का खतरा बना रहेगा।
बता दें हाल ही में अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि बर्लिन में यूक्रेन के साथ हुई पिछली वार्ता में करीब 90फीसदी मुद्दों का समाधान हो गया है। बताया गया है कि सबसे कठिन मुद्दों पर बात बन गई है। अभी भी इस बात पर संशय बना हुआ कि रूस की तरफ से किसी तरह कोई समझौता किया जाएगा या नहीं।
वेनेजुएला में अपने तेल और ऊर्जा अधिकार वापस चाहता है अमेरिका, टैंकरों की नाकाबंदी
19 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका-वेनेजुएला के बीच चल रहे विवाद ने जंग की शक्ल लेता दिख रहा। अमेरिका अब वेनेजुएला को धमकी दे रहा है और उसके तेल पर अपना हक जता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका वेनेजुएला में अपने तेल और ऊर्जा अधिकार वापस चाहता है, जिन्हें ट्रंप के मुताबिक वहां की सरकार ने अवैध तरीके से छीन लिया था। ट्रंप ने ये बात पत्रकारों से बातचीत में कही।
उन्होंने कहा कि वेनेजुएला ने हमारी सारी ऊर्जा और तेल के अधिकार छीन ले लिए थे। ये सब कुछ गैरकानूनी रूप से हुआ और अब हम इसे वापस चाहते हैं। इससे पहले ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर बताया था कि वेनेजुएला को दक्षिण अमेरिका की अब तक की सबसे बड़ी नौसैनिक घेराबंदी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह घेराबंदी तब तक बढ़ती रहेगी, जब तक कराकास चोरी किया गया तेल और उससे जुड़ी संपत्तियां वापस नहीं करता। वेनेजुएला ने अमेरिका के इस कदम की कड़ी आलोचना की है और यूएन से शिकायत की है। कुल मिलाकर जंग की स्थिति बन रही है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप के करीबी सहयोगी और व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने भी वेनेजुएला के तेल को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला का तेल असल में अमेरिका का है और वहां तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण चोरी था। मिलर ने पोस्ट में लिखा- अमेरिकी मेहनत, तकनीक और पूंजी से वेनेजुएला में तेल उद्योग खड़ा हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां की सरकार ने इसे जबरन अपने कब्जे में ले लिया और इस लूटे गए धन का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने और ड्रग्स फैलाने में किया गया।
बता दें अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक किसी देश के प्राकृतिक संसाधनों पर उसी देश का अधिकार होता है। वेनेजुएला ने 1976 में अपने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया और उसे सरकारी कंपनी के तहत लाया। साल 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने बची हुई विदेशी तेल परियोजनाओं को भी नेशनलाइज्ड कर दिया, जिससे अमेरिकी कंपनियों को बाहर होना पड़ा। अमेरिकी कंपनियों ने इसे लीगल चैलेंज दिया और साल 2014 में वर्ल्ड बैंक के एक ट्राइब्यूनल ने वेनेजुएला को 1.6 अरब डॉलर देने का आदेश दिया। ये मामला अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में वेनेजुएला की सरकारी कंपनी पर सैंक्शन लगाए थे। दूसरे कार्यकाल में ट्रंप ने वेनेजुएला के खिलाफ मैक्सिमम प्रेशर की नीति और तेज कर दी है।
एफबीआई के डिप्टी डायरेक्टर ने की इस्तीफे की घोषणा, नहीं बताया कारण
19 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। एफबीआई के डिप्टी डायरेक्टर डैन बोंगिनो ने बुधवार को घोषणा की कि वह नौकरी शुरू करने के 10 महीने बाद जनवरी में अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। 51 साल के बोंगिनो ने एक्स पर इस्तीफे का कोई कारण नहीं बताया, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि बोंगिनो अपने लोकप्रिय पॉडकास्ट पर वापस जाना चाहते हैं। एफबीआई में शामिल होने से पहले बोंगिनो का कानून प्रवर्तन की पृष्ठभूमि रही है। उन्होंने न्यूयॉर्क पुलिस ऑफिसर और सीक्रेट सर्विस एजेंट के तौर पर काम किया था, लेकिन उनकी नियुक्ति असामान्य थी क्योंकि एफबीआई में नंबर दो की पोस्ट पारंपरिक रूप से एक करियर कर्मचारी के पास होती है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एफबीआई में उनका कार्यकाल मार्च में शुरू हुआ था और अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी के साथ तनाव की खबरों से भरा रहा। अपने एक्स पोस्ट में, बोंगिनो ने मकसद के साथ सेवा करने का मौका देने के लिए ट्रंप, बोंडी और एफबीआई डायरेक्टर को धन्यवाद दिया। बोंगिनो के नाम वाले पॉडकास्ट के देश में सबसे ज्यादा श्रोता हैं और यह अक्सर साजिश की थ्योरी फैलाता है, जिसमें यह दावा भी शामिल है कि 2020 का राष्ट्रपति चुनाव ट्रंप से चुरा लिया गया था।
ओमान में PM मोदी ने भारतीय समुदाय के लोगों को किया संबोधित, बोले- ‘भारत आगे बढ़ रहा है’
18 Dec, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ओमान (Oman) में भारतीय समुदाय (Indian Community) के लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम’ और ‘मोदी, मोदी’ के नारों के बीच अपना भाषण शुरू किया। ओमान में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “मैं मेरे सामने एक मिनी इंडिया देख रहा हूं।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “ओमान में रहने वाले भारतीय अकसर भारत आते-जाते रहते हैं। आप भारत की हर घटना से अपडेट रहते हैं। आप सभी देख रहे हैं कि आज हमारा भारत कैसे प्रगति की नई गति से आगे बढ़ रहा है। भारत की गति हमारे इरादों में दिख रही है, हमारे प्रदर्शन में नजर आती है। कुछ दिनों पहले ही आर्थिक विकास के आंकड़े आए हैं और आपको पता होगा कि भारत की विकास दर 8% से भी अधिक रही है यानी भारत लगातार दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना है और ये तब हुआ है जब पूरी दुनिया चुनौतियों से घिरी हुई है।”
पाकिस्तान में फिर होगा बवाल- इमरान की तीनों बहनें आदियाला जेल के बाहर धरने पर बैठीं
18 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रावलपिंडी। पाकिस्तान की सरकार इन दिनों भीतर और बाहर दोनों मोर्चों पर दबाव में दिखाई दे रही है। एक ओर आर्थिक बदहाली और सुरक्षा चुनौतियां हैं, तो दूसरी ओर जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहनों ने सरकार और सैन्य नेतृत्व के लिए नई परेशानी खड़ी कर दी है। अपने भाई से मुलाकात न हो पाने से नाराज इमरान खान की बहनों ने एक बार फिर खुला विरोध शुरू कर दिया है। सिर्फ 20 मिनट की सीमित मुलाकात के बाद दोबारा किसी को मिलने की अनुमति न मिलने से आक्रोश और बढ़ गया है। इसी के चलते इमरान खान की बहनें पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ आदियाला जेल के पास धरने पर बैठ गई हैं और लंबे आंदोलन का संकेत दे दिया है।
इमरान खान की बहनों का कहना है कि अदालत के स्पष्ट आदेशों के बावजूद जेल प्रशासन और सरकार मुलाकात में लगातार बाधा डाल रहे हैं। इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने 24 मार्च को आदेश दिया था कि इमरान खान से हर सप्ताह मंगलवार और गुरुवार को मुलाकात की अनुमति दी जाए। हालांकि पार्टी का आरोप है कि इस आदेश का नियमित रूप से पालन नहीं किया जा रहा। बहनों का कहना है कि अदालत के फैसले के ऊपर जेल प्रशासन का रवैया सवाल खड़े करता है और ऐसा प्रतीत होता है जैसे जेल कानून से ऊपर हो गई हो।
पिछले कई हफ्तों से अलीमा खान, उज्मा खान और नोरीन खान नियाजी लगातार इमरान खान से मिलने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी है। हाल ही में जब मुलाकात की अनुमति नहीं दी गई तो पार्टी समर्थकों के साथ मिलकर उन्होंने धरना दिया। इस दौरान भीड़ को हटाने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए।
मंगलवार को एक बार फिर इमरान खान की बहनें जेल की ओर मार्च करती नजर आईं। रास्ते में उन्हें रोक दिया गया, लेकिन उन्होंने वहीं बैठकर धरना देने का फैसला कर लिया। मार्च के दौरान अलीमा खान ने कहा कि उन्हें जहां भी रोका जाएगा, वे वहीं शांतिपूर्ण तरीके से बैठेंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे लंबे धरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। मीडिया के सामने उन्होंने गर्म कपड़े और कंबल दिखाते हुए संकेत दिया कि विरोध अनिश्चित समय तक चल सकता है।
धरनास्थल पर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे, वहीं सुरक्षा के कड़े इंतजाम भी देखने को मिले। अलीमा खान ने कहा कि उनका विरोध न तो गैरकानूनी है और न ही असंवैधानिक। उनका कहना था कि वे केवल अदालत के आदेशों को लागू कराने और अपने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में संविधान, लोकतंत्र और कानून के शासन को कमजोर किया जा रहा है, जिसके खिलाफ आवाज उठाना मजबूरी बन गया है। अलीमा खान ने देश की मौजूदा स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है, अफगानिस्तान के साथ व्यापार बंद होने से बेरोजगारी बढ़ रही है और सुरक्षा हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से यह भी मांग की कि 2 दिसंबर को इमरान खान और उनकी बहन उज्मा के बीच हुई संक्षिप्त मुलाकात में किन राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत हुई थी, इसकी जानकारी परिवार को दी जाए। उनका कहना था कि यदि राजनीतिक विषयों पर चर्चा हुई है तो उस पर पार्टी नेतृत्व से बात की जानी चाहिए। इमरान खान की बहनों का यह विरोध अब केवल निजी मुलाकात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सरकार की नीतियों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सीधा सवाल बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।
ट्रंप ने वेनेजुएला सरकार को किया विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित
18 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला सरकार को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। इसके साथ ही ट्रंप ने कैरेबियन सागर में अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित ऑयल टैंकरों के मूवमेंट पर रोक लगा दी है। इससे वेनेजुएला के तेल टैंकरों की आवाजाही ठप हो जाएगी। ट्रंप की इस घोषणा से अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने अपने ट्रूथ पर उत्तेजक घोषणा करते हुए लिखा- हमारी संपत्ति की चोरी और आतंकवाद, ड्रग्स तस्करी और मानव तस्करी सहित कई अन्य कारणों से, वेनेजुएला की सरकार को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है। इसलिए आज मैं वेनेजुएला में आने-जाने वाले सभी प्रतिबंधित तेल टैंकरों की पूरी तरह से नाकाबंदी का आदेश दे रहा हूं। वेनेजुएला को धमकाते हुए ट्रंप ने लिखा है- वेनेजुएला पूरी तरह से दक्षिण अमेरिका के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े युद्धपोतों के बेड़े से घिरा हुआ है यह और भी बड़ा होता जाएगा और उन्हें ऐसा झटका लगेगा जैसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा होगा। जब तक कि वे अमेरिका को वह सारा तेल, जमीन और दूसरी संपत्ति वापस नहीं कर देते, जो उन्होंने पहले हमसे चुराई थी।
ट्रंप ने धमकी देते हुए लिखा- नाजायज मादुरो सरकार इन चोरी के तेल क्षेत्रों से मिले तेल का इस्तेमाल खुद को, ड्रग आतंकवाद, मानव तस्करी, हत्या और अपहरण के लिए फाइनेंस करने के लिए कर रही है। हमारी संपत्ति की चोरी और आतंकवाद, ड्रग तस्करी और मानव तस्करी समेत कई अन्य कारणों से वेनेजुएला सरकार को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है।
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा- अवैध अप्रवासियों और अपराधियों को जिन्हें मादुरो सरकार ने कमजोर और अक्षम बाइडेन प्रशासन के दौरान अमेरिका भेजा था, उन्हें वेनेजुएला वापस भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका अपराधियों, आतंकवादियों या दूसरे देशों को हमारे देश को लूटने, धमकी देने या नुकसान पहुंचाने की इजाज़त नहीं देगा और इसी तरह किसी दुश्मन सरकार को हमारा तेल, जमीन या कोई दूसरी संपत्ति लेने की इजाज़त नहीं देगा, ये सब तुरंत अमेरिका को वापस किया जाना चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो के बीच पिछले कुछ दिनों से तीखी तकरार चल रही है। कुछ ही दिन पहले अमेरिका ने वेनेजुएला का एक ऑयल टैंकर को जब्त कर लिया था। वेनेजुएला ने अमेरिका के इस कदम को लूट करार दिया था। इसके बाद ट्रंप ने नए प्रतिबंध लगाए, इसके दायरे में मादुरो के परिवार और तेल निर्यात से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। ट्रंप ने मादुरो को सत्ता छोड़ने का अल्टीमेटम दिया है, लेकिन मादुरो ने इसे अस्वीकार कर दिया है।
यौन अपराधी एपस्टीन मामले से जुड़े सभी ईमेल, तस्वीरें और डॉक्यूमेंट्स होंगे सार्वजनिक
18 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। ट्रम्प प्रशासन जल्द ही को कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दशकों पुराने सरकारी रिकॉर्ड सार्वजनिक कर सकता है। इस दौरान एपस्टीन मामले से जुड़े सभी ईमेल, तस्वीरें और डॉक्यूमेंट्स पब्लिक होंगे। इसका मकसद एपस्टीन के पूरे नेटवर्क की सच्चाई सबके सामने लाना है। आरोप है कि इस नेटवर्क में नाबालिग लड़कियों का शोषण हुआ और दुनिया के कई ताकतवर लोग इससे जुड़े थे। इससे पहले इस मामले से जुड़ीं 19 तस्वीरें 12 दिसंबर को पब्लिक हुई थीं। इसमें 3 तस्वीरें ट्रम्प की हैं। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, अरबपति बिल गेट्स जैसे बड़ी हस्तियों की तस्वीरें भी सार्वजनिक हुईं थीं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अब एपस्टीन से जुड़े सभी रिकॉर्ड पब्लिक होने में सिर्फ 2 दिन बाकी हैं। ऐसे में अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में राजनीतिक और कारोबारी हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब तक किसी भारतीय नागरिक या भारतीय नेता-उद्योगपति का नाम आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है।
वहीं भारतीय नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दावा किया है कि इसमें कुछ भारतीय मंत्री, पूर्व मंत्री और मौजूदा सांसदों के नाम सामने आ सकते हैं। हालांकि अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है, लेकिन एपस्टीन के संबंध अमेरिका के बाहर के देशों के नेताओं और बिजनेसमैन से भी बताए जाते हैं, इसलिए पूरी दुनिया की नजर इन फाइलों पर टिकी हैं। जेफ्री एपस्टीन की संपत्ति से जारी 19 तस्वीरों में 9 बड़ी हस्तियों के नाम सामने आए हैं। ये तस्वीरें सीधे तौर पर किसी को अपराधी साबित नहीं करतीं, लेकिन इन्हें एपस्टीन के साथ दिखाती हैं जिससे विवाद और सवाल खड़े हो रहे हैं। इसमें डोनाल्ड ट्रम्प (अमेरिकी राष्ट्रपति), बिल क्लिंटन (पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति), बिल गेट्स (अरबपति), प्रिंस एंड्रयू (ब्रिटिश किंग के भाई), स्टीव बैनन (ट्रम्प के पूर्व सलाहकार), लैरी समर्स (हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष), वुडी एलन (फिल्म निर्माता), रिचर्ड ब्रैनसन (बिजनेसमैन), एलन डर्शोविट्ज (मशहूर वकील) शामिल हैं।
इस्लामिज़्म ना सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की आजादी, सुरक्षा के लिए खतरा
18 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका में नेशनल इंटेलीजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने ऑस्ट्रेलिया में हुए आतंकी हमले को लेकर कहा कि इस्लामिज़्म ना सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की आजादी, सुरक्षा और समृद्धि के लिए सबसे खतरा है। उन्होंने दावा किया कि ऑस्ट्रेलिया में इस्लामिस्टों की भारी घुसपैठ ने हालात को इस मोड़ तक पहुंचाया है। गबार्ड ने कहा कि यह हमला किसी को भी चौंकाने वाला नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर ऑस्ट्रेलिया में इस्लामिस्टों की बड़े पैमाने पर हुई एंट्री का नतीजा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बॉन्डी बीच पर 14 दिसंबर को दो हमलावरों ने अचानक अंधाधुंध फायरिंग की थी। यह हमला यहूदी समुदाय के हनुक्का त्योहार के बीच हुआ। हमले में कम से कम 15 लोग मारे गए और दर्जनों अन्य घायल हुए। पुलिस एनकाउंटर में एक हमलावर को मौके पर ही मारा गया, जबकि दूसरा गंभीर घायल हुआ जो अस्पताल में हिरासत में है। ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने इस गोलीबारी को आतंकवादी हमला बताकर इसकी जांच शुरु कर दी है।
गबार्ड ने यूरोप और ऑस्ट्रेलिया को लेकर भी गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यूरोप के लिए शायद बहुत देर हो चुकी है और संभव है कि ऑस्ट्रेलिया के लिए भी अब हालात हाथ से निकल चुके हों। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के पास अभी वक्त है, लेकिन वह भी ज्यादा समय तक नहीं रहेगा। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने अमेरिका की सीमाओं को सुरक्षित करने को प्राथमिकता दी है, संदिग्ध आतंकियों को देश से बाहर निकालने पर जोर दिया है और बिना जांच-पड़ताल के बड़े पैमाने पर हो रहे माइग्रेशन को रोकने के कदम उठाए हैं, जो अमेरिकियों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
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