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बीएमडब्ल्यू कारखाने पहुंचे राहुल गांधी बोले..........देश में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ना चाहिए
18 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बर्लिन। जर्मनी दौरे के दौरान राजधानी बर्लिन पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत के गिरते विनिर्माण क्षेत्र पर चर्चा कर कहा कि अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए भारत को उत्पादन बढ़ाना होगा। कांग्रेस नेता आलोक शर्मा द्वारा साझा किए वीडियो में, राहुल गांधी बीएमडब्ल्यू कारखाने के अपने दौरे के बारे में बात करते हुए कहते हैं कि हम बीएमडब्ल्यू कारखाने गए थे शानदार अनुभव रहा और मुझे यह देखकर विशेष रूप से खुशी हुई कि उनके पास 450 सीसी की बाइक, टीवीएस है, और मुझे लगता है कि यह अच्छा प्रदर्शन करेगी। यह देखकर अच्छा लगा कि यहां एक भारतीय ध्वज लहरा रहा है।
वीडियों में राहुल गांधी ने कहा, भारत को उत्पादन शुरू करने की जरूरत है। उत्पादन किसी भी देश की सफलता की कुंजी है। हमारा विनिर्माण क्षेत्र गिर रहा है; वास्तव में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ना चाहिए। इस बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का जर्मनी के अपने पांच दिवसीय दौरे के दौरान बर्लिन हवाई अड्डे पर भारतीय प्रवासी कांग्रेस (आईओसी) द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। वे आज होने वाले एक महत्वपूर्ण आईओसी कार्यक्रम में भाग लेने वाले हैं, जहां वे यूरोप भर के आईओसी नेताओं से मिलने वाले है। उनके आगमन पर आईओसी टीमों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उनका स्वागत किया और सभी के चेहरे पर मुस्कान थी।
आईओसी का कहना है कि राहुल गांधी भारतीय प्रवासी भारतीयों को संबोधित करने और यूरोप में पार्टी के विभिन्न अध्यक्षों से मिलने के लिए आए हैं। वे अनिवासी भारतीयों से संबंधित मुद्दों और पार्टी की विचारधारा को और अधिक फैलाने के तरीकों पर चर्चा करने वाले है। इंडियन ओवरसीज कांग्रेस ने बताया हमें राहुल गांधी का स्वागत करते हुए गर्व हो रहा है, जो 17 दिसंबर को बर्लिन में भारतीय प्रवासी भारतीयों के साथ बातचीत करने वाले है। इस कार्यक्रम में यूरोप भर से भारतीय प्रवासी कांग्रेस के सभी अध्यक्ष एक साथ आएंगे और राहुल गांधी के साथ प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करने वाले हैं, विशेष रूप से पार्टी को मजबूत करने, प्रवासी भारतीयों की चिंताओं और आईओसी किस प्रकार अधिक लोगों को पार्टी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
तुर्किये में जहां उगता है सबसे ज्यादा गेहूं, अब जमीन में हो रहे सैकड़ों गड्ढे
17 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंकारा। तुर्किये के कोन्या मैदान में सबसे ज्यादा गेहूं उगाया जाता है। कोन्या मैदान का कुल कृषि क्षेत्र करीब 2.6 मिलियन हेक्टेयर है, जो तुर्किये के कुल कृषि क्षेत्र का 11.2 फीसद है। क्षमता से ज्यादा उपज और ग्राउंड वाटर के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण यह इलाका सूखा का सामना कर रहा है। इससे जमीनों में सैकड़ों गड्ढे बन रहे हैं, जो खेतों को बर्बाद कर रहे हैं। तुर्किये की आपदा प्रबंधन एजेंसी की नई रिपोर्ट के मुताबिक कोन्या बेसिन में अब तक 684 ऐसे गड्ढों की पहचान की गई है, जबकि रिसर्च सेंटर के मुताबिक 2017 में 299 सिंकहोल थे, जो 2021 तक बढ़कर 2,550 हो गए।
रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 में करीब 20 नए बड़े सिंकहोल बनने की पुष्टि हुई है। इन गड्ढों की गहराई 30 मीटर से ज्यादा और चौड़ाई 100 फीट तक बताई जा रही है। यह संकट अचानक नहीं आया है, बल्कि पिछले 20 साल से किसानों और प्रशासन की अनदेखी के कारण यह धीरे-धीरे बढ़ी है। 2025 में यह समस्या और बढ़ गई, क्योंकि सूखा और भूजल दोहन काफी बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ करापिनार जिले में 534 सिंकहोल हैं और ये मुख्य रूप से ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह इंसानों के कारण आई आपदा है, लापरवाही ने इसे और बढ़ावा दिया है। कोन्या मैदान की भूवैज्ञानिक संरचना कार्स्ट टाइप की है, मतलब यह मैदान कार्बोनेट और जिप्सम जैसी घुलनशील चट्टानों से बना है। ये चट्टानें हजारों सालों में पानी में घुलकर गड्ढे बनाती हैं। कोन्या में चुकंदर, मक्का और अन्य पानी-गहन फसलों की सिंचाई के लिए हजारों वैध और अवैध कुएं चल रहे हैं। 1970 के दशक से कुछ इलाकों में ग्राउंड वाटर लेवल 60 मीटर तक गिर चुका है। अवैध कुओं और अनियंत्रित पंपिंग ने जमीन को कमजोर कर दिया है, जिससे जमीन अचानक धंस रही है।
इल्हान उमर का आरोप, उनके बेटे से नागरिकता सिद्ध करने के लिए कहा गया
17 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से प्रवासियों के लिए जीवन थोड़ा कठिन हुआ है। इसी कड़ी में मिनेसोटा की डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि इल्हान उमर ने दावा किया है कि उनके बेटे अदनान को अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्ट्स्म एनफोर्समेंट के एजेंट्स ने रोक कर अपनी नागरिकता सिद्ध करने के लिए कहा।
रिपोर्ट के मुताबिक यह एजेंट्स सरकार के आदेश पर अवैध अप्रवासियों की तलाश कर रहे हैं। इल्हान ने पूरी घटना के बारे में बताया कि कल, जब वह एक स्टोर पर कुछ खरीद रहा था, तभी अदनान को कुछ आईसीई एजेंट्स ने रोक दिया और अपनी नागरिकता सिद्ध करने को कहा। चूंकि अदनान अपना पासपोर्ट हमेशा अपने साथ रखता है, उसने एजेंट को दिखाया और फिर अदनान को जाने दिया गया। दरअसल, अमेरिका में इल्हान उमर का नाम कोई कम जाना पहचाना नहीं है। कश्मीर के मुद्दे पर खुलकर पाकिस्तान का सपोर्ट करने वाली इल्हान उमर सोमालिया की मूल निवासी हैं। ट्रंप कई बार उन पर निजी हमला करते हुए उन्हें कचर बताकर कहा था कि वह नहीं चाहते कि यह अमेरिका में रहे। ट्रंप का आरोप है कि अमेरिका की नागरिकता पाने के लिए इ्ल्हान ने अपने भाई से ही शादी कर ली।
कौन है अदनान हिरसी?
इल्हान उमर और उनके पूर्व पति अहमद हिरसी के बेटे का नाम अदनान है। इसके अलावा इस दंपत्ति के दो बेटियां और हैं। हालांकि, इन तीनों के बारे में सार्वजनिक जानकारी बहुत कम है। हालांकि, 2016 में जब मिनेसोटा से इल्हान जीतकर आई थीं, उस वक्त अदनान 10 साल के थे। उमर ने बताया कि यह पहली बार नहीं है, जब उनके बेटे को एजेंट्स ने रोका हो। इससे पहले भी एक मस्जिद में वह कुछ लोगों के साथ नमाज पढ़ रहा था। ठीक उसी समय वहां पर एजेंट्स आ गए और सभी से पूछताछ की। हालांकि, बाद में सभी को छोड़ दिया गया।
चुनाव आते ही पाकिस्तान के प्रति बांग्लादेशी नेताओं में जागी हमदर्दी, भारत पर मढ़ने लगे आरोप
17 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में आम चुनाव नजदीक आते ही भारत-विरोधी बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक नेता के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। बीएनपी नेता ने 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान बंगाली बुद्धिजीवियों के नरसंहार के लिए पाकिस्तानी सेना की बजाय भारत की ओर इशारा किया है। इस बयान को न केवल ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ माना जा रहा है, बल्कि इसे भारत-विरोधी राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि ऐसे नेता पाकिस्तान से हमदर्दी रखते हैं जो भारत का विरोध कर रहे हैं।
बीएनपी की नारायणगंज शहर इकाई के सदस्य सचिव एडवोकेट अबू अल यूसुफ खान टिपू ने रविवार को शहीद बुद्धिजीवी दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित एक चर्चा कार्यक्रम में कहा कि 1971 में बंगाली बुद्धिजीवियों की सामूहिक हत्या पाकिस्तानी सेना ने नहीं, बल्कि एक पड़ोसी देश की सेना ने की थी। उनका यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से भारत की ओर इशारा करता माना गया। टिपू के बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी आलोचना हुई, जिसके बाद बीएनपी ने औपचारिक रूप से खुद को इस बयान से अलग कर लिया।
गौरतलब है कि यह बयान 16 दिसंबर को मनाए जाने वाले विजय दिवस से ठीक एक दिन पहले आया है। विजय दिवस वह दिन है जब 1971 में पाकिस्तानी सेना ने आत्मसमर्पण किया था और बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र बना। भारत में भी इसे विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। ऐसे संवेदनशील मौके पर दिए गए इस बयान ने माहौल को और गरमा दिया है। टिपू ने अपने बयान में जमात-ए-इस्लामी को भी पश्चिमी पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों में मिलीभगत के आरोप से बरी करने की कोशिश की और कहा कि किसी एक राजनीतिक समूह को दोषी ठहराना इतिहास का विकृतिकरण है। उन्होंने जमात से अंतरिम सरकार पर इतिहास को सही करने का दबाव बनाने का आग्रह भी किया। इससे पहले इसी कार्यक्रम में जमात के नेता गुलाम पोरवार ने भी दावा किया था कि बुद्धिजीवियों की हत्या भारतीय सेना और उसकी खुफिया एजेंसी की सुनियोजित साजिश थी।
इसी कड़ी में नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के दक्षिण क्षेत्र के प्रमुख संयोजक हसनत अब्दुल्ला ने भी भारत के खिलाफ तीखा जहर उगला। उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा कि यदि बांग्लादेश को अस्थिर करने की कोशिश हुई तो उसका असर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचेगा। उन्होंने भारत पर सीमा हत्याओं और बांग्लादेश की राजनीति में दखल देने के बेबुनियाद आरोप लगाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शेख हसीना की सरकार के पतन और नई सत्ता व्यवस्था के बाद भारत-विरोधी बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा बनते जा रहे हैं। चुनाव से पहले राष्ट्रवाद और बाहरी दुश्मन का मुद्दा उछालकर जनता को प्रभावित करने की कोशिश साफ नजर आ रही है, जिससे भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।
मेक्सिको में निजी विमान लैंडिंग के दौरान छत से टकराया, 7 लोगों की मौत
17 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अकापुल्को। मध्य मेक्सिको में सोमवार को एक छोटा निजी विमान इमरजेंसी लैंडिंग की के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मेक्सिको स्टेट सिविल प्रोटेक्शन के कोऑर्डिनेटर एड्रियन हर्नांडेज़ ने इस घटना की पुष्टि की है। यह हादसा सैन मातेओ अटेंको इलाके में हुआ, जो एक औद्योगिक क्षेत्र है। यह जगह टोलुका एयरपोर्ट से करीब पांच किलोमीटर और मेक्सिको सिटी से लगभग 50 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। जानकारी के मुताबिक विमान ने मेक्सिको के प्रशांत तट पर स्थित अकापुल्को शहर से उड़ान भरी थी।
एड्रियन हर्नांडेज़ ने बताया कि इस निजी जेट में कुल 8 यात्री और 2 क्रू मेंबर सवार थे। हादसे के कई घंटे बाद तक मलबे से केवल सात शव ही बरामद किए गए। बाकी लोगों की स्थिति को लेकर जांच की जारी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक विमान ने एक फुटबॉल मैदान पर आपात लैंडिंग की कोशिश की थी, लेकिन वह पास ही स्थित एक फैक्ट्री या कारोबारी इमारत की छत से टकरा गया जिससे उसमें आग लग गई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग और हादसे के कारण काफी नुकसान हुआ। इस दुर्घटना की जांच शुरू कर दी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक आग की वजह से आसपास के इलाके से करीब 130 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा। एहतियात के तौर पर कई इमारतों को खाली कराया गया, ताकि किसी और को नुकसान न पहुंचे। फिलहाल राहत और बचाव कार्य पूरा कर लिया गया है और स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
भारत और यूएई के बीच गहरा सहयोग साझा हितों को बढ़ाता है आगे
17 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अबू धाबी। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अबू धाबी में संयुक्त अरब अमीरात के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ 16वीं संयुक्त आयोग बैठक और पांचवीं रणनीतिक वार्ता की सह-अध्यक्षता की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और यूएई के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की और आने वाले समय की प्रमुख प्राथमिकताओं पर चर्चा की। मंगलवार को एक्स पर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि आज के समय में भारत और यूएई के बीच गहरा सहयोग साझा हितों को आगे बढ़ाता है और क्षेत्रीय व वैश्विक स्थिरता में योगदान देता है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जयशंकर ने कहा कि व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते और द्विपक्षीय निवेश संधि के बाद भारत-यूएई के बीच व्यापार, निवेश, वित्तीय तकनीक और डिजिटल कनेक्टिविटी में हुई अहम बढ़ोतरी पर प्रकाश डाला। उन्होंने कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भी बड़ी संभावनाओं की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा जैसी पहलें शामिल हैं। उन्होंने ऊर्जा सहयोग के विस्तार पर भी जोर दिया, खासतौर पर नागरिक परमाणु ऊर्जा सहयोग, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करने और रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करने की बात कही।
इसके अलावा, उन्होंने लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने, अहम खनिज, अंतरिक्ष और ध्रुवीय अनुसंधान जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी समन्वय को अहम बताया। जयशंकर ने लिखा कि उपराष्ट्रपति से मुलाकात सम्मान की बात है और भारत-यूएई के बीच आर्थिक और रक्षा सहयोग को गहरा करने पर उपयोगी बातचीत हुई। इसके अलावा विदेश मंत्री ने यूएई की मुबाडाला निवेश कंपनी के प्रबंध निदेशक और समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी खलदून खलीफा अल मुबारक से भी मुलाकात की। इस बैठक में वैश्विक भू-आर्थिक परिदृश्य और भारत-यूएई संबंधों को और मजबूत करने के अवसरों पर विचार किया गया।
‘लिटिल फुट’ जीवाश्म मानव पूर्वज की नई प्रजाति हो सकता है: अध्ययन
16 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेलबर्न/जोहान्सबर्ग । मानव विकास के इतिहास को लेकर एक अहम खोज सामने आई है। दुनिया के सबसे पूर्ण होमिनिन जीवाश्मों में से एक माने जाने वाले ‘लिटिल फुट’ को लेकर वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मानव पूर्वज की अब तक अज्ञात प्रजाति हो सकती है। ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं की अगुवाई में किए गए इस अध्ययन ने मानव विकास वृक्ष को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
‘लिटिल फुट’ कंकाल को वर्ष 2017 में सार्वजनिक रूप से पेश किया गया था। इसके पैर की हड्डियां 1994 में दक्षिण अफ्रीका के स्टरकफॉन्टेन गुफा क्षेत्र में मिली थीं। इसके बाद करीब 20 वर्षों तक चली खुदाई के बाद यह लगभग पूर्ण कंकाल सामने आया। इसे अब तक का सबसे संपूर्ण ऑस्ट्रालोपिथेकस कंकाल माना जाता है। अब तक वैज्ञानिकों के बीच इस बात को लेकर मतभेद रहे हैं कि ‘लिटिल फुट’ किस प्रजाति से संबंधित है। कुछ विशेषज्ञ इसे ऑस्ट्रालोपिथेकस प्रोमेथियस मानते रहे हैं, जबकि अन्य का कहना था कि यह 1925 में पहचानी गई ऑस्ट्रालोपिथेकस अफ्रीकैनस प्रजाति का हिस्सा है, जिसके जीवाश्म उसी गुफा क्षेत्र में पहले भी मिल चुके हैं।
हालांकि, अमेरिकन जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल एंथ्रोपोलॉजी में प्रकाशित नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि ‘लिटिल फुट’ की शारीरिक बनावट दोनों ज्ञात प्रजातियों से अलग है। अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. जेसी मार्टिन के अनुसार, खोपड़ी के पीछे के हिस्से सहित कई संरचनात्मक अंतर इस ओर इशारा करते हैं कि यह एक नई, अब तक नमूना न ली गई मानव पूर्वज प्रजाति हो सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज मानव परिवार वृक्ष की एक पूरी नई शाखा को उजागर कर सकती है। हालांकि, उन्होंने औपचारिक रूप से नई प्रजाति का नामकरण नहीं किया है और कहा है कि यह कार्य उस टीम को करना चाहिए, जिसने दो दशकों से अधिक समय तक इस जीवाश्म पर काम किया है।
इमरान की रिहाई के लिए खैबर पख्तूनख्वा में बड़ा आंदोलन, मुख्यमंत्री ने कहा-आजादी या मौत
16 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रावलपिंडी। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई को लेकर देश की सरकार और सैन्य नेतृत्व के खिलाफ एक बड़े आंदोलन की घोषणा कर दी है। रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद इमरान खान का संदेश लेकर अफरीदी अब सड़कों पर उतर आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, अफरीदी ने स्पष्ट शब्दों में ऐलान किया है कि इमरान खान का नारा आजादी या मौत है और अब इसी रास्ते पर चलकर निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उन्हें प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने की धमकी दी जा रही है, लेकिन वह डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने साफ किया कि खैबर पख्तूनख्वा में सिर्फ इमरान खान की राजनीति और नीतियां ही प्रभावी रहेंगी।
अफरीदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान इमरान खान की जेल में एकांत कारावास की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है। इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं, और उनकी पार्टी लगातार आरोप लगा रही है कि उन्हें मानसिक यातना देने के लिए एकांत में रखा गया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस पर चिंता व्यक्त की है। इस बीच, अफरीदी ने यह दावा भी किया है कि इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को जेल में लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अदियाला जेल प्रशासन ने उन्हें लगातार दसवीं बार इमरान खान से मिलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इमरान खान के करीबी सहयोगियों और पार्टी नेताओं ने सेना प्रमुख पर अवैध हस्तक्षेप और राजनीतिक बदले की कार्रवाई का आरोप लगाया है। अदियाला जेल के बाहर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, जहां इमरान खान की बहनें, पार्टी कार्यकर्ता और स्वयं मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी कई दिनों से डटे हुए हैं। इमरान खान की सेहत को लेकर फैल रही अफवाहों ने भी माहौल को और गर्म कर दिया है।
बांग्लादेश के रिश्ते ‘क्षणिक नहीं हमेशा वाले’ हैं, इन्हें कमजोर नहीं किया जा सकता
16 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। भारत-बांग्लादेश में जारी तनाव के बीच भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने कहा है कि नई दिल्ली और ढाका के रिश्ते ‘क्षणिक नहीं, बल्कि हमेशा वाले’ हैं और इन्हें कमजोर नहीं किया जा सकता। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ ही घंटे पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने उन्हें तलब कर पूर्व पीएम शेख हसीना के बयानों को लेकर चिंता जताई थी। बता दें बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का आरोप है कि शेख हसीना भारत में रहते हुए ऐसे बयान दे रही हैं जो देश में हिंसा और अशांति भड़का सकते हैं। ये आगामी संसदीय चुनावों को पटरी से उतारने की कोशिश है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसको लेकर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने भारत से हसीना के ‘त्वरित प्रत्यर्पण’ की मांग दोहराई। इन घटनाक्रमों के बीच ढाका में एक अकादमिक और सांस्कृतिक संगठन ‘इतिहास ओ ओइतिज्जो परिषद’ के कार्यक्रम में बोलते हुए प्रणय वर्मा ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच जो रिश्ता है, वह अस्थायी नहीं है, यह रिश्ता खून और बलिदान से बना है और इसे कमजोर नहीं किया जा सकता। यह कार्यक्रम 16 दिसंबर को मनाए जाने वाले विजय दिवस की 54वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया था, जो 1971 के मुक्ति संग्राम में पाकिस्तान पर बांग्लादेश की जीत की याद दिलाता है।
प्रणय वर्मा ने कहा कि भारत ने 1971 में बांग्लादेश के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया था और आगे भी एक लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के निर्माण में उसका समर्थन करता रहेगा। वर्मा ने मुक्ति संग्राम को याद करते हुए कहा कि उस संघर्ष में भारत ने अपने ‘बांग्लादेशी भाइयों और बहनों’ का गर्व के साथ साथ दिया था। उन्होंने कहा कि उस दौरान हजारों भारतीय सैनिकों ने अपनी जान गंवाई और असंख्य घायल हुए। उन्होंने कहा कि अब समय है उन मूल्यों को संजोने का, जिनके लिए वह आजादी की लड़ाई लड़ी गई थी।
ऑस्ट्रेलिया में यहूदियों पर हुए हमले को इजराइल ने भड़काने वाला बताया, दी चेतावनी
16 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल अवीव। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रविवार को बोंडी बीच पर हुई फायरिंग मामले में मौत का आंकड़ा 16 हो गया है। घटना के चश्मदीदों ने फायरिंग का खौफनाक मंजर बयां किया। इस सबके बीच इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज पर निशाना साधा है। नेतन्याहू ने इस फायरिंग को भड़काने वाला बताया। नेतन्याहू ने दावा किया है कि ऑस्ट्रेलिया में यहूदियों के खिलाफ हो रही साजिशों को लेकर उन्होंने चार महीने पहले पीएम अल्बनीज को एक खत लिखा था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीएम नेतन्याहू ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम को चेतावनी देते हुए लिखा, लगभग 4 महीने पहले 17 अगस्त को मैंने पीएम अल्बनीज को एक चिट्ठी भेजी थी, जिसमें मैंने उन्हें आगाह किया था कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार की नीति यहूदी-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है। फिलिस्तीनी देश के लिए आपकी मांग यहूदी विरोधी आग में घी डालने का काम करती है। यह ऐसे लोगों को हिम्मत देती है जो ऑस्ट्रेलियाई यहूदियों को धमकाते हैं और यहूदियों से नफरत को बढ़ावा देती है जो अब आपकी सड़कों पर घूम रही है।
इजरायली पीएम ने अल्बनीज पर यहूदियों के विरोध में चल रही गतिविधियों के खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई ना करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आपकी सरकार ने ऑस्ट्रेलिया में यहूदियों के विरोध को फैलने से रोकने के लिए कुछ नहीं किया। आपने बीमारी को फैलने दिया, और इसका नतीजा यह है कि आज हमने यहूदियों पर भयानक हमले देखे।
इजराइली पीएम ने कहा कि हमने एक बहादुर आदमी का एक्शन देखा, जो एक मुस्लिम था और मैं उसे सलाम करता हूं, जिसने इन आतंकवादियों में से एक को बेगुनाह यहूदियों को मारने से रोका, लेकिन इसके लिए आपकी सरकार के एक्शन की जरूरत है, जो आप नहीं कर रहे हैं और आपको करना ही होगा, क्योंकि इतिहास हिचकिचाहट और कमजोरी को माफ नहीं करेगा। यह एक्शन और ताकत का सम्मान करेगा।
बता दें बीते दिन सीरिया में दो अमेरिकी सैनिक मारे गए। इसे लेकर इजराइल के पीएम ने कहा, सीरिया में, दो अमेरिकन सैनिकों और एक अमेरिकन इंटरप्रेटर को भी मारा गया। उन्हें इसलिए मारा गया क्योंकि वे हमारे कॉमन कल्चर को रिप्रेजेंट करते हैं। इस हमले के नतीजे में, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि अगर आप दुनिया में कहीं भी अमेरिकियों को टारगेट करते हैं, तो आप अपनी बाकी की छोटी, चिंता भरी जिंदगी यह जानते हुए बिताएंगे कि अमेरिका आपको ढूंढेगा, और बेरहमी से मार डालेगा।
इजरायली पीएम ने चेतावनी दी है कि दुनिया के किसी भी कोने में कोई अगर यहूदियों को चोट पहुंचाएगा, तो उसे बेरहमी से खत्म किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में हमारी यही नीति है जो अमेरिका की है। हम चुपचाप बैठकर इन हत्यारों को हमें मारने नहीं देंगे।
निकल गई जेलेंस्की की सारी अकड़..........अब नाटो में नहीं शामिल होने की कर रहे बात
16 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। बीते 3 सालों से रूस से चले आ रहे संघर्ष के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की फिलहाल समझौते के मूड में दिख रहे हैं। उनका कहना है कि वे नाटो में शामिल होने की अपनी मांग को वापस लेने को तैयार हैं। इसी मांग को लेकर रूस हमलावर रहा है कि आखिर यूक्रेन नाटो में क्यों शामिल होना चाहता है और यदि वे अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य संगठन का हिस्सा बनता है, तब उसकी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा होगा। इस बीच यूक्रेनी नेता ने यदि नाटो में जाने की डिमांड को ही वापस लेने की बात कर दी है तब फिर उनके झुकाव का संकेत है, लेकिन उन्होंने दो मांगें भी रख दी हैं।
जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर से कहा है कि वह दो बातें कहना चाहते हैं। पहली बात यह कि वे रूस की ओर से कब्जाए गए इलाकों पर दावेदारी छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इसके अलावा वह चाहते हैं कि अमेरिका और पश्चिमी देशों की ओर से यूक्रेन को सुरक्षा की गारंटी मिले। दरअसल ट्रंप ने पिछले दिनों शांति प्रस्ताव को लेकर यह शर्त भी रखी थी कि रूस की ओर से कब्जाए इलाकों का उसी में विलय हो जाए और यूक्रेन की ओर से उस पर सहमति जताकर युद्ध को समाप्त किया जाए।
अब जेलेंस्की ने नाटो वाली शर्त को स्वीकार किया है, लेकिन यूक्रेन के इलाके रूस को सौंपने को लेकर सहमत नहीं हैं। इस वार्ता के दौरान जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भी उनके साथ बैठे थे। जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों ने यूक्रेन की ओर से नाटो में शामिल होने की कोशिश से इंकार कर दिया है। लेकिन हम चाहते हैं कि नाटो और उसके सहयोगी देशों की ओर से हमें सुरक्षा को लेकर भरोसा दिया जाए।
जॉर्डन की राजधानी पहुंचे PM मोदी, व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग पर होगी बातचीत
16 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) आज से तीन देशों के अहम दौरे पर है, पीएम मोदी अपनी यात्रा के पहले पड़ाव के तौर पर जॉर्डन पहुंचे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह दौरा भारत के पश्चिम एशिया और अफ्रीका के साथ रिश्तों को नई मजबूती देने वाला है। व्यापार, निवेश, रणनीतिक सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर इस दौरान गहन बातचीत होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जॉर्डन की राजधानी अमान पहुंचने पर औपचारिक स्वागत किया गया। जॉर्डन के प्रधानमंत्री जाफर हसन ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी है। भारत इस दौरे के जरिए अपने भरोसेमंद साझेदारों के साथ राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाना चाहता है। खास बात यह है कि जॉर्डन और इथियोपिया की यह पीएम मोदी की पहली पूर्ण द्विपक्षीय यात्रा होगी, जबकि ओमान का यह उनका दूसरा दौरा है।
पीएम मोदी जॉर्डन में किंग अब्दुल्ला द्वितीय से आमने-सामने बातचीत करेंगे। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी। भारत और जॉर्डन के बीच कूटनीतिक संबंधों के 75 साल पूरे हो रहे हैं, ऐसे में यह यात्रा विशेष मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और राजनीतिक सहयोग पर फोकस रहेगा।
दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी और किंग अब्दुल्ला भारत-जॉर्डन व्यापार कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इसमें दोनों देशों के प्रमुख कारोबारी शामिल होंगे। इसके अलावा पीएम मोदी जॉर्डन में बसे भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे। युवराज के साथ वह पेट्रा शहर का दौरा करेंगे, जो भारत के साथ प्राचीन व्यापारिक संबंधों का प्रतीक रहा है।
जॉर्डन के बाद प्रधानमंत्री मोदी 16 से 17 दिसंबर तक इथियोपिया के राजकीय दौरे पर रहेंगे। यह उनकी पहली इथियोपिया यात्रा होगी। यहां वह प्रधानमंत्री अबी अहमद अली से मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्तों के सभी पहलुओं पर चर्चा होगी। भारतीय प्रधानमंत्री इथियोपिया की संसद के संयुक्त सत्र को भी संबोधित करेंगे।
इथियोपिया दौरे के दौरान कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। भारत इस यात्रा के जरिए अफ्रीका में दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करना चाहता है। एजेंडा 2063 के तहत अफ्रीका की प्राथमिकताओं और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार होगा। भारतीय समुदाय से संवाद भी इस यात्रा का अहम हिस्सा रहेगा।
दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी 17 से 18 दिसंबर तक ओमान जाएंगे। यह उनकी ओमान की दूसरी यात्रा होगी। भारत और ओमान के कूटनीतिक संबंधों के 70 साल पूरे हो रहे हैं। इस दौरान भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर खास ध्यान रहेगा। माना जा रहा है कि यह समझौता दोनों देशों के व्यापार और निवेश को नई दिशा देगा।
तानाशाह किम जोंग ने अपनी सेना की तारीफ में कहा- हमारे बहादुर जवान नहीं होते तो रूस को बड़ा नुकसान होता
15 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्योंगयांग। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग अपने सैनिकों की जमकर तारीफ कर रहे है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि यदि उत्तर कोरिया की सेना रुस की मदद नहीं करती तो वहां की सेना को भारी नुकसान हो सकता था। वजह ये है कि यूक्रेन की तरफ से बिछाई गई बारुद की सुरंग को हटाने का काम उत्तर कोरिया की सेना ने किया है। अपनी जान जोखिम में डालकर रुसी सेना को भारी नुकसान से बचाने का काम हमारे सैनिकों ने किया है।
तानाशाह किम के मुताबिक इस साल की शुरुआत में कुर्स्क क्षेत्र में भेजे गए उत्तर कोरियाई सैनिकों ने यहां पर बारूदी सुरंगे हटाने का काम किया, जिसकी वजह से हजारों रूसी सैनिकों की जान बची।
शनिवार को उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया पर प्रसारित एक कार्यक्रम में किम जोंग उन ने रूस से वापस लौटे अपने इन सैनिकों की सराहना की। तानाशाह ने कहा, अगस्त से शुरू हुई 120 दिनों की तैनाती के दौरान हमारे सैनिकों ने अभूतपूर्व साहस दिखाया। चाहे अधिकारी हों या सैनिक सभी ने लगभग हर दिन अपनी कल्पना से परे मानसिक और शारीरिक दबावों पर काबू पाते हुए सामूहिक वीरता का परिचय दिया। बारूदी सुरंगे हटाने के काम के दौरान यह लोग अपने शहरों और गांवों को पत्र भी भेजते थे।
किम ने आगे कहा, तीन महीने से भी कम समय में हमारे सैनिकों ने एक बड़े खतरनाक क्षेत्र को रूसी सेना के लिए पूरी तरह से सुरक्षित कर दिया। इसमें हमारे जिन भी सैनिकों की जान गई है। उनकी बहादुरी को हमेशा के लिए अमर बनाने के उद्देश्य से राज्य उनको सम्मान प्रदान करेगा।
सरकारी मीडिया की तरफ से जारी की गई फोटोस में किम साफ तौर पर वापस आए सैनिकों को गले लगाते हुए देखे जा सकते हैं। इनमें से कुछ सैनिक घायल और व्हील चेयर पर भी दिखाई दिए।
इससे पहले, उत्तर कोरिया शुरुआत से ही पुतिन की मदद के लिए कुर्स्क क्षेत्र में सैनिक भेज रहा है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक इस युद्ध में उत्तर कोरिया ने हजारों सैनिक भेजे हैं। इसके बदले में रूस उसकी वित्तीय सहायता, सैन्य तकनीक, खाद्य सामग्री और ऊर्जा आपूर्ति में मदद कर रहा है। इसकी वजह से अपने परमाणु कार्यक्रम के कारण अलग-थलग पड़े इस देश को अपने अभियान चलाने में मदद मिल रही है।
परीक्षा हॉल में घुसे नकाबपोश ने की अंधाधुंध फायरिंग, 2 छात्रों की मौत 8 घायल
15 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। आइलैंड स्थित ब्राउन यूनिवर्सिटी में परीक्षा दे रहे छात्रों पर एक नकाबपोश ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में दो छात्रों की मौत हो गई जबकि 8 घायल हुए हैं। पुलिस ने बताया कि संदिग्ध को अभी गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने यूनिवर्सिटी कैंपस के अलावा आसपास के इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया है।
इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फिलहाल हम पीड़ितों को लिए प्रार्थना कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ब्राउन यूनिवर्सिटी में हुई फायरिंग की जानकारी मुझे मिली। एफबीआई मौके पर पहुंच गई है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, यह बहुत ही खतरनाक हमला था। हम सभी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। एफबीआई संदिग्ध को पकड़ने के सारे प्रयास कर रही है। बता दें कि अमेरिका में इस तरह की घटनाएं आम हो गई हैं। आए दिन भीड़ में शूटिंग के मामले सामने आते रहते हैं।डिप्टी चीफ ऑफ पुलिस टिमोथी ओ हारा के मुताबिक हमलावर काले कपड़े पहनकर इंजीनियरिंग बिल्डिंग में घुसा था। उसके हाथ में बंदूक थी। उसने अचानक अंधाधुंध भफायरिंग शुरू कर दिया। मेयर ब्रेट स्माइली ने कहा कि सभी छात्रों को हिदायत दी गई है कि वे विश्वविद्यालय परिसर में ही रहें और जब तक कहा ना जाए अपने घरों को लौटने का प्रयास ना करें।मेयर ने कहा कि जल्द ही संदिग्ध को पकड़ लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। हॉस्टल में अपने प्रोजेक्ट पर काम कर रहे एक छात्र ने कहा, जब मैंने गोलियों की आवाज सुनी तो मैं कांप गया। एक अन्य छात्र ने कहा कि वह घटनास्थल से कुछ दूरी पर ही खड़ा था। गोलियों की आवाज सुनकर वे डेस्क के नीचे छिप गए।
भारत ने कभी भी अपनी धरती को बांग्लादेश के हितों के खिलाफ गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी - विदेश मंत्रालय
15 Dec, 2025 10:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । भारत के विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश को करारा जवाब देते हुए कहा, भारत बांग्लादेश की अंतरिम सरकार द्वारा प्रेस बयान में किए गए दावों को स्पष्ट रूप से खारिज करता है। भारत ने बांग्लादेश में शांतिपूर्ण माहौल में स्वतंत्र, निष्पक्ष, समावेशी और विश्वसनीय चुनाव कराने के अपने रुख को लगातार दोहराया है। भारत ने कभी भी अपनी धरती को बांग्लादेश के हितों के खिलाफ गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा, हमें उम्मीद है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार आंतरिक कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगी, जिसमें शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराना भी शामिल है।
भारत के यह जवाब बांग्लादेश के उस आरोप के बाद सामने आया है जिसमें बांग्लादेश ने दावा किया है कि शेख हसीना को भड़काऊ बयान जारी करने की अनुमति दी जा रही है, जिसमें वह अपने समर्थकों को बांग्लादेश में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसा रही हैं। उनके बयान का उद्देश्य आगामी संसदीय चुनावों को विफल करना है। बयान में कहा गया है कि बांग्लादेश हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को जल्द से जल्द प्रत्यर्पित करने की अपनी मांग एक बार फिर दोहराता है, ताकि वे पिछले महीने विशेष न्यायाधिकरण की ओर से सुनाई गई मौत की सजा का सामना कर सकें।
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