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पाकिस्तान बार-बार सीमा कर देता है बंद, अफगान को हो रहा व्यापार में भारी नुकसान
12 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जेनेवा। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हमलों की कड़ी निंदा की। पाकिस्तान के हमलों में महिलाओं, बच्चों और यहां तक कि स्थानीय क्रिकेट खिलाड़ियों की भी मौत हुई है। भारत ने इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए ख़तरा बताया है। इस हफ्ते की शुरुआत में तालिबान और पाकिस्तानी सैनिकों के बीच ताजा झड़पें हुईं। दोनों देशों ने दो महीने पहले सीमा पर हफ्तों से चल रही लड़ाई रोकने के लिए संघर्षविराम पर सहमति जताई थी, लेकिन अब दोनों पक्ष एक बार फिर एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। दोनों ही देशों ने एक-दूसरे पर संघर्षविराम तोड़ने के आरोप लगाए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनि हरीश ने कहा कि पाकिस्तान की व्यापार और परिवहन आतंकवाद की नीति पर भारत गहरी चिंता व्यक्त करता है। अफगानिस्तान चारों तरफ से जमीन से घिरा है और ऐसे में पाकिस्तान बार-बार उससे लगी सीमा बंद कर देता है जिससे उसके व्यापार को भारी नुकसान पहुंच रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि हम संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का पूर्ण सम्मान करने की अपील का समर्थन करते हैं, खासकर निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा पर जोर देते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि हम ऐसे कृत्यों की निंदा करते हैं और साथ ही अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और स्वतंत्रता का दृढ़ समर्थन करते हैं। बता दें पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच सीमा पर संघर्ष तब शुरू हुआ जब इस साल अक्टूबर की शुरुआत में पाकिस्तान ने काबुल पर हवाई हमला कर दिया था। अफगानिस्तान ने भी जवाबी हमला किया लेकिन लड़ाई उस समय तेज हो गई, जब अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी भारत यात्रा पर आए थे। यह झड़पें 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद सबसे गंभीर थीं।
कई हफ्तों की लड़ाई के बाद 19 अक्टूबर को कतर और तुर्की की मध्यस्थता से दोनों पक्षों ने संघर्षविराम पर सहमति जताई। तालिबान सरकार के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि पाकिस्तान ने ही नई झड़पों की शुरुआत की और काबुल के मजबूरी में जवाब देना पड़ा। हरीश ने कहा कि भारत सुरक्षा स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से साथ मिलकर कार्रवाई की अपील करता है ताकि संयुक्त राष्ट्र की तरफ से नामित आतंकी संगठनों- जैसे अल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और उनके प्रॉक्सी समूह जैसे द रेसिस्टेंस फ्रंट को सीमा पार सक्रिय होने से रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि तालिबान के साथ व्यवहारिक संवाद की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के खिलाफ केवल दंडात्मक नीति असफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि हम संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हैं कि वे ऐसी नीतियां अपनाएं जो अफगानिस्तान के लोगों के लिए स्थायी लाभ ला सकें।
ऑयल टैंकर पर अमेरिका के कई कमांडो रस्सियों के सहारे उतरे और कर लिया कब्जा
12 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका ने वेनेजुएला के तट के पास बीच समंदर में एक बहुत बड़े क्रूड ऑयल टैंकर को जब्त किया है। बुधवार को अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी ने सोशल मीडिया पर इस ऑपरेशन का 45 सेकंड का वीडियो जारी किया है। वीडियो में दो सैन्य हेलिकॉप्टर समुद्र के ऊपर तेजी से उड़ते हुए एक टैंकर को घेरते हैं। उनसे कई कमांडो रस्सियों के सहारे टैंकर के डेक पर उतरते हैं और कुछ ही मिनटों में टैंकर को अपने कब्जे में ले लेते हैं।
व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इस जब्ती की पुष्टि की। दूसरी ओर, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने इस कार्रवाई को समुद्री डकैती और खुलेआम चोरी करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। ट्रम्प ने कहा कि हमने वेनेजुएला के तट पर एक टैंकर जब्त कर लिया है, बहुत बड़ा टैंकर, शायद अब तक का सबसे बड़ा। जब उनसे पूछा गया कि जहाज में भरे लाखों बैरल तेल का क्या होगा, तो ट्रम्प ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि हम रख लेंगे, मुझे ऐसा लगता है।
अटॉर्नी जनरल बॉन्डी ने कहा कि यह जहाज कई सालों से अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में था क्योंकि यह वेनेजुएला और ईरान के प्रतिबंधित तेल को गैरकानूनी तरीके से ले जा रहा था। इस तेल की कमाई से विदेशी आतंकवादी संगठनों को मदद पहुंचाई जा रही थी। वहीं, तीन अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि जहाज वेनेजुएला का तेल लेकर जा रहा था। मिलिट्री ऑपरेशन का जहाज के कर्मचारियों ने कोई विरोध नहीं किया और ऑपरेशन में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। बॉन्डी ने इसे पूरी तरह सुरक्षित और सफल ऑपरेशन बताया और कहा कि प्रतिबंधित तेल की तस्करी करने वाले छिपे हुए नेटवर्क को तोड़ने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।
वहीं वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने कहा कि अमेरिका उनका तेल हथियाना चाहता है। सितंबर से अब तक अमेरिका कैरेबियन सी में 22 से अधिक हमले कर चुका है, जिनमें 80 से ज्यादा लोग मारे गए। अमेरिका का दावा है कि वेनेजुएला की नाव से नशीले पदार्थों की तस्करी होती हैं। हालांकि अमेरिका ने कभी इसका सबूत नहीं दिया।
जापान में महाभूकंप का अलर्ट, इसका असर हो सकता है भारत तक?
12 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोक्यो। जापान में हाल ही में 7.5 (बाद में 7.6 से बदलकर) तीव्रता का भूकंप आया, जिसने सड़क, बिजली और मकानों को नुकसान पहुँचाया और 70 सेंटीमीटर तक सुनामी लहरें भी आईं। जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी ने ऑफ द कोस्ट ऑफ होक्काइडो एंड सैनरिकु सबसीक्वेंट अर्थक्वेक एडवाइजरी नामक एक विशेष अलर्ट जारी किया है। यह अलर्ट 7.0 या उससे अधिक की तीव्रता वाले भूकंप के बाद सक्रिय होता है। इसका मतलब है कि अगले सात दिनों तक 8 या उससे ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप के आने की संभावना सामान्य से अधिक है, हालांकि इसकी कुल संभावना अभी भी कम है। यह महाभूकंप मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में सुनामी और झटकों का खतरा पैदा करेगा, जिससे जापान, रूस का सुदूर पूर्व और संभवतः अलास्का के कुछ हिस्से प्रभावित होगा।
भारत पर असर
जानकारी के अनुसार, भारत पर जापान के इस महाभूकंप का कोई खास असर होने की संभावना नहीं है। रिसर्चों से पता चलता है कि जापान-ट्रेंच प्रकार की घटनाओं से उत्पन्न ऊर्जा प्रशांत महासागर में केंद्रित होती है। हिंद महासागर और भारत मुख्य रूप से सुंडा (जावा) ट्रेंच जैसे सबडक्शन ज़ोन के साथ आने वाले मेगाथ्रस्ट भूकंपों से प्रभावित होते हैं। भारत में अब तक की सबसे भीषण सुनामी 2004 में सुमात्रा के पास आए 9.1 तीव्रता के भूकंप के बाद आई थी। प्रशांत महासागर में आए भूकंपों से भारत में कोई खास असर नहीं पड़ा है। भारतीय वैज्ञानिक भारत के तटों के लिए सुंडा ट्रेंच और अरब सागर को सुनामी का मुख्य स्रोत मानते हैं। जापान की यह चेतावनी भारत के लिए साझा टेक्टोनिक संवेदनशीलता और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के महत्व को दर्शाती है, लेकिन इससे आने वाले दिनों में भारतीय तटों पर सुनामी या भूकंप के खतरे के बढ़ने का कोई संकेत नहीं मिलता है।
जापान में बार-बार भूकंप क्यों आते हैं?
जापान एक इसतरह के क्षेत्र में स्थित है जहाँ पैसिफिक प्लेट उत्तरी अमेरिकी और ओखोत्स्क प्लेटों के नीचे खिसकती है। इस प्रक्रिया को सबडक्शन ज़ोन कहते हैं। जापान और कुरिल ट्रेंच के साथ, ये प्लेटें बहुत अधिक दबाव जमा करती हैं, जो कभी-कभी बड़े मेगाथ्रस्ट भूकंपों के रूप में बाहर आता है।
पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार, मंत्रियों समेत 55 पर मामला दर्ज
12 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। नेपाल में पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। 2012 में 620 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाला यह प्रोजेक्ट 892 करोड़ पर पहुंच गया। जांच के बाद नेपाल की कमिशन फॉर इन्वेस्टिगेशन ऑफ एब्यूज ऑफ अथॉरिटी (सीआईएए) ने पांच पूर्व मंत्रियों, दस पूर्व सचिवों समेत कुल 55 लोगों और चीनी कंपनी चाइना सीएएमसी इंजीनियरिंग पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एयरपोर्ट 2023 में शुरू हुआ था, लेकिन ढाई साल में यहां सिर्फ 45 इंटरनेशनल फ्लाइट्स आईं और करीब 3,000 यात्री पहुंचे, जबकि इसे पश्चिमी नेपाल का अंतरराष्ट्रीय पर्यटन हब घोषित किया गया था। पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कभी नेपाल के “गेटवे ऑफ वर्ल्ड” के रूप में पेश किया गया। दावा किया गया था कि यह पश्चिमी नेपाल का अंतरराष्ट्रीय पर्यटन हब बनेगा और टूरिस्ट बढ़ेंगे। संचालन के ढाई साल बाद यहां सिर्फ 45 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें दर्ज की गई हैं। हिमालयन एयरलाइंस और सिचुआन एयरलाइंस ने कुछ टेस्ट फ्लाइट्स चलाईं, लेकिन नियमित सेवा नहीं चल सकीं। पोखरा एयरपोर्ट प्रोजेक्ट चीन के एग्जिम बैंक से लोन लेकर बनाई गई थी और इसे नेपाल की पर्यटन क्षमता दोगुनी करने वाला प्रोजेक्ट बताया गया था।
नेपाल की सीआईएए ने पोखरा एयरपोर्ट के निर्माण में भारी अनियमितताओं का खुलासा करते हुए 55 लोगों और चीनी कंपनी चाइना सीएएमसी इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। यह नेपाल के इतिहास के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक माना जा रहा है। जांच एजेंसी के मुताबिक नेपाल के कुछ अधिकारियों ने चीनी कंपनी सीएएमसी के साथ मिलकर रकम में अनैतिक फेरबदल किया। एयरपोर्ट का निर्माण 2016 में शुरू हुआ था। उस समय नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली थे और चीन के साथ यह डील भी उनकी ही सरकार में औपचारिक रूप से आगे बढ़ी। एयरपोर्ट 2023 में शुरू हुआ, लेकिन बड़े दावों के बावजूद इसके अंतरराष्ट्रीय उड़ानें करीब न के बराबर रहीं।
इस मामले में रामशरण महत (पूर्व वित्त मंत्री), भीम प्रसाद आचार्य (पूर्व पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री), दीपक चन्द्र अमात्य (पूर्व पर्यटन मंत्री), रामकुमार श्रेष्ठ (पूर्व पर्यटन मंत्री) और बहादुर बोगटी (दिवंगत) (पूर्व पर्यटन मंत्री) को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा अधिकारियों में नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के निलंबित महानिर्देशक प्रदीप अधिकारी, पूर्व महानिर्देशक रत्नचन्द्र लाल सुमन और पूर्व महानिर्देशक त्रिरत्न मानन्धर शामिल हैं।
चीनी महिला के कदम से लोगों के बीच छिडी बहस
11 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग । एक चीनी महिला ने ऐसा हैरान कर देने वाला कदम उठाया है, जिसने लोगों के बीच बहस छेड़ दी है। इस महिला ने अपनी ही दो बेटियों के स्थान पर एक बेटी को विज्ञापन के जरिए नौकरी पर रखने की पेशकश की है, जिसके बदले वह करीब 420 डॉलर मासिक वेतन और रहने के लिए एक फ्लैट देने को तैयार है।
एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, हेनान प्रांत की रहने वाली इस महिला का नाम मा है, जिसने एक स्थानीय टीवी कार्यक्रम पर यह विज्ञापन जारी किया। कार्यक्रम के दौरान मा ने बताया कि वह अपनी दो बेटियों के बावजूद अकेली हैं। उनकी बड़ी बेटी ने पोती की परवरिश को लेकर हुए विवाद के बाद उनसे सारे संबंध तोड़ लिए। बड़ी बेटी का कहना है कि वह बेरोजगार है और न तो मा की देखभाल कर सकती है, न ही उससे कोई नाता रखना चाहती है। दूसरी ओर, उनकी छोटी बेटी मानसिक रूप से बीमार है और स्वयं की देखभाल करने में सक्षम नहीं। मा काफी पहले अपने पति से तलाक ले चुकी हैं और समय के साथ अन्य रिश्तेदारों से भी उनका संपर्क धीरे-धीरे समाप्त हो गया। विज्ञापन में मा ने लिखा कि वह अस्थमा से पीड़ित हैं और उन्हें ऐसी लड़की की जरूरत है, जो उनकी देखभाल करे, समय पर अस्पताल ले जाए और उन्हें एक बेटी की तरह स्नेह दे। बदले में वह अपनी संपत्तियों में से एक फ्लैट और 420 डॉलर की नियमित पेंशन देने के साथ, पूरे समझौते का कानूनी कॉन्ट्रैक्ट करने को भी तैयार हैं।
इस अनोखे विज्ञापन ने चीनी सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया पैदा की है। कुछ लोगों ने इसे मानवीय परिस्थिति से उपजा दुखद प्रयास बताया, जबकि कई लोगों ने इसे भावनात्मक शोषण माना। एक यूजर ने लिखा कि ऐसा लगता है जैसे मा किसी ऐसी लड़की की तलाश कर रही है जो उसकी और उसकी बीमार बेटी दोनों की देखभाल करे। एक अन्य व्यक्ति ने टिप्पणी की कि प्रॉपर्टी मार्केट के गिरावट और कम पैसों में दो लोगों की सेवा करने के लिए नेनी भी नहीं मिल सकती। वहीं एक वकील ने कहा कि कानून के अनुसार वृद्ध माता-पिता की देखभाल करना बड़ी बेटी की जिम्मेदारी है और मा इस जिम्मेदारी से कानूनी प्रक्रिया के जरिए अलग नहीं हो सकतीं। ध्यान देने योग्य है कि चीन में बुजुर्गों की अकेलेपन की समस्या लगातार बढ़ रही है। 2021 में हुए सर्वे के अनुसार, 60 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 60 प्रतिशत बुजुर्ग अकेले रहते हैं।
दक्षिण कोरिया में चौंकाने वाला साइबर हमला उजागर
11 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सियोल। हाल ही में दक्षिण कोरिया में एक चौंकाने वाला साइबर हमला सामने आया है। इस ताजा हमले ने तकनीकी सुरक्षा और निजी गोपनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगभग 1 लाख 20 हजार सीसीटीवी कैमरों को चार आरोपियों ने हैक कर लिया और उनकी रिकॉर्डिंग को विदेशी वेबसाइट पर यौन शोषण संबंधी सामग्री के रूप में बेचा।
यह घटना इसलिए और भी चिंता का विषय है क्योंकि भारत में भी घरों और दुकानों में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अधिकांश लोग इसके साइबर खतरों से अनजान हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे ज्यादा खतरा आईपी कैमरों को हैक होने का रहता है। ये कैमरे इंटरनेट से जुड़े होने के कारण सुविधाजनक तो हैं, लेकिन साइबर हमलावरों के लिए इन्हें निशाना बनाना आसान हो जाता है।
ज्यादातर कैमरे डिफॉल्ट पासवर्ड के साथ आते हैं, जिसे बदलना लोग भूल जाते हैं। अगर पासवर्ड कमजोर या फैक्ट्री सेट रहता है, तो कोई भी हैकर दूर बैठे-बैठे कैमरा एक्सेस कर सकता है और घर के अंदर की गतिविधियों पर नजर रख सकता है। ‘शोडन’ नाम की वेबसाइट ऐसे कैमरों की खोज करती है और उनकी लाइव फीड को इंटरनेट पर उजागर कर देती है। कई बार हैकर्स इन वीडियो को विदेशी वेबसाइट पर भी अपलोड कर देते हैं। हैकर्स कैमरे का डायरेक्शन बदलकर घर के बेडरूम या निजी जगहों तक की गतिविधियों को देख सकते हैं। इसका मतलब यह है कि आपके रोजमर्रा के काम जैसे सोना, खाना या कपड़े बदलना भी उनके हाथों में आ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस खतरे से बचने के लिए सबसे जरूरी कदम है मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड सेट करना, जिसमें बड़े और छोटे अक्षर, नंबर और स्पेशल कैरेक्टर शामिल हों। इसके अलावा मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करना, सॉफ्टवेयर और फर्मवेयर को हमेशा लेटेस्ट वर्जन में अपडेट रखना बेहद जरूरी है। साइबर सुरक्षा में सावधानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कैमरा कभी अपने आप घूमे या असामान्य आवाज़ आए तो तुरंत पासवर्ड बदलें और साइबर सेल या पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं। बेडरूम, बाथरूम या संवेदनशील जगहों में कैमरा लगाने से बचें। अगर ये सरल लेकिन प्रभावी उपाय अपनाए जाएं, तो घरों और दुकानों के कैमरे हैकर्स की पहुंच से सुरक्षित रह सकते हैं।
नेपाल में भ्रष्टाचार: पोखरा एयरपोर्ट में 74 मिलियन डॉलर की गड़बड़ी, 55 अधिकारियों और चीनी कंपनी पर केस
11 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। नेपाल में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। देश की भ्रष्टाचार जांच आयोग ने पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण में भारी अनियमितता का आरोप लगाते हुए 55 नेपाली अधिकारियों और चीनी कंपनी सीएएमसी इंजीनियरिंग के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आयोग का दावा है कि इस प्रोजेक्ट में 74 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 10 अरब नेपाली रुपए) से अधिक की धांधली हुई है। इसे नेपाल के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार मामला माना जा रहा है।
आयोग के अनुसार, 2012 में प्रोजेक्ट की बिडिंग मात्र 169.6 मिलियन डॉलर में हुई थी, लेकिन बाद में खर्च को बढ़ाकर 244 मिलियन डॉलर कर दिया गया। यह अतिरिक्त राशि कथित रूप से अधिकारियों और चीनी कंपनी ने मिलकर हड़पी। पोखरा हवाई अड्डा चीन के एक्जिम बैंक से मिले भारी कर्ज पर बनाया गया था। यह नेपाल के प्रमुख पर्यटन शहर पोखरा में स्थित है, जो अन्नपूर्णा ट्रेकिंग रूट का मुख्य द्वार है। जनवरी 2023 में उद्घाटन के बावजूद हवाई अड्डे पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानें लगभग शून्य हैं और यह घाटे में चल रहा है। इस मामले ने नेपाल में चीन की आक्रामक आर्थिक नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन अपनी कंपनियों और कर्ज के जरिए नेपाल में राजनीतिक तथा आर्थिक प्रभाव बढ़ा रहा है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ सितंबर में हुए बड़े जन-आंदोलन में दर्जनों लोग मारे गए थे और सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था। अब यह मुकदमा काठमांडू की विशेष अदालत में चलेगा, लेकिन नेपाल में ऐसे बड़े केस अक्सर सालों तक लटके रहते हैं। मार्च 2025 में होने वाले आम चुनाव से ठीक पहले इस मामले ने सियासी पारा और गर्म कर दिया है। विपक्षी दल इसे चीन-समर्थक नेताओं के खिलाफ हथियार बनाने की तैयारी में हैं। नेपाल में बढ़ते चीनी प्रभाव और कर्ज जाल की आशंका के बीच यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।
लिथुआनिया में इमरजेंसी: एक गुब्बारे के कारण थमा पूरा देश, शुरू होगी नई जंग?
11 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विनियस। लिथुआनिया ने रूस के कलिनिनग्राद और बेलारूस से सटी अपनी सीमाओं पर बढ़ते तनाव के बीच बड़ा फैसला लेते हुए पूरे देश में ‘नेशनवाइड इमरजेंसी सिचुएशन’ लागू कर दी है। यह कदम बेलारूस की ओर से लगातार भेजे जा रहे मौसम मापने वाले बैलून के कारण उठाया गया है, जिनका इस्तेमाल छिपकर सिगरेट की तस्करी के लिए किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि ये बैलून न केवल अवैध गतिविधियों के लिए खतरा हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और हवाई यातायात के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुके हैं।
प्रधानमंत्री इंगा रुगिनिएने ने बताया कि हालात दिनों-दिन खराब होते जा रहे हैं। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इसी वर्ष लगभग 600 बैलून और करीब 200 ड्रोन बेलारूस की तरफ से लिथुआनिया की सीमा पार कर चुके हैं। कई बार ये बैलून विमानों के नियमित लैंडिंग मार्ग में आ गए, जिससे विल्नियस एयरपोर्ट को कई बार बंद करना पड़ा। अक्टूबर के बाद से एयरपोर्ट 60 घंटे से अधिक समय तक बाधित रहा और 30,000 से ज्यादा यात्रियों की उड़ानें प्रभावित हुईं।
यह इमरजेंसी स्तर ‘स्टेट ऑफ इमरजेंसी’ से नीचे है, लेकिन सरकार का मानना है कि स्थिति इतनी गंभीर है कि कड़ा कदम उठाना जरूरी था। इससे पहले लिथुआनिया ने 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भी इमरजेंसी घोषित की थी। इस बार सरकार का कहना है कि बैलून की बढ़ती गतिविधि सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लगती है, जिसका उद्देश्य देश में अस्थिरता बढ़ाना है।
लिथुआनिया के आरोपों को बेलारूस ने सिरे से नकार दिया है। बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको का कहना है कि लिथुआनिया इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहा है और बैलून से किसी भी तरह का खतरा नहीं है। उन्होंने यहां तक कहा कि क्या लिथुआनिया युद्ध चाहता है, क्योंकि बेलारूस का ऐसा कोई इरादा नहीं है। इसके जवाब में लिथुआनिया के राष्ट्रपति गितानस नाउसैदा ने कहा कि उनके पास पर्याप्त सबूत मौजूद हैं जो दिखाते हैं कि यह बेलारूस की डिसरप्शन रणनीति का हिस्सा है।
तनाव इस कदर बढ़ गया कि लिथुआनिया को अक्टूबर में बेलारूस से लगी दो बॉर्डर चेकपोस्ट बंद करनी पड़ीं। इसके बाद बेलारूस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए लिथुआनियाई ट्रकों के अपनी सड़कों पर चलने पर रोक लगा दी, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया। यूरोपीय संघ ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने इन घटनाओं को ‘हाइब्रिड अटैक’ करार दिया और कहा कि बेलारूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों पर विचार किया जा रहा है। ब्रसेल्स में बेलारूस के प्रतिनिधि को तलब कर चेतावनी भी दी गई है। लिथुआनिया का कहना है कि अब यह मामला सिर्फ तस्करी का नहीं रहा, बल्कि एविएशन सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बन गया है। कुछ अधिकारी इसे संभावित ‘आतंकवादी गतिविधि’ की श्रेणी में रखने की बात भी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ये बैलून 10 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाते हैं और सीधे विमानों के मार्ग में प्रवेश कर सकते हैं। यदि कोई बैलून किसी यात्री विमान से टकरा जाए, तो बड़ा हादसा हो सकता है। इसी जोखिम को देखते हुए लिथुआनिया ने देशव्यापी इमरजेंसी जैसी स्थिति लागू की है, ताकि हवाई सुरक्षा और राष्ट्रीय स्थिरता को किसी भी खतरे से बचाया जा सके।
पाकिस्तान में बेटी को कॉलेज छोड़ने जा रहे पादरी को गोलियों से भूना
11 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा घटना पंजाब प्रांत की है, जहां एक पादरी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस हमले ने पूरे ईसाई समुदाय को दहशत में डाल दिया है। अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करने वाले प्रमुख संगठन ‘द वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी’ ने इस हत्या पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा है कि यह घटना देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की असुरक्षा और बढ़ते कट्टरपन की भयावह हकीकत को सामने लाती है। डरावनी बात यह है कि इसी पादरी पर दो महीने पहले भी हमला हुआ था, लेकिन तब वह बच गए थे।
इस बार हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाकर मौत के घाट उतार दिया। पादरी कामरान अपने परिवार में पत्नी सल्मिना और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं। मानवाधिकार संगठन ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान में न्याय की उम्मीद दिन पर दिन कमजोर पड़ती जा रही है। संगठन के अनुसार, 5 दिसंबर को पादरी कामरान अपनी बेटी को कॉलेज छोड़ने के लिए घर से निकले थे। जैसे ही वे कार की ओर बढ़े, बाइक पर आए दो बदमाशों ने उन पर नजदीक से गोलियां दाग दीं। उन्हें तुरंत गुजरांवाला के जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। यह हमला एक बार फिर पाकिस्तान की कानून व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी करता है।
इस वारदात का दर्द इसलिए भी गहरा है क्योंकि पादरी कामरान ने अपना जीवन मानव सेवा में लगाया था। अक्टूबर में उन पर इस्लामाबाद में कुछ कट्टरपंथियों ने गोलीबारी की थी, जिसमें वे घायल हुए थे। तब उनकी जान बच गई थी, लेकिन दूसरी बार के हमले में वे नहीं बच सके। इससे साफ दिखता है कि हमलावर न तो कानून से डरते हैं और न ही प्रशासन को उनकी गतिविधियों पर काबू है। संगठन ने कहा है कि इस हत्या ने ईसाई समुदाय के भीतर पहले से मौजूद भय को और बढ़ा दिया है। यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि हाल के वर्षों में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों की श्रृंखला का हिस्सा है। समुदाय के लोग लगातार असुरक्षा और हिंसा के साये में जीने को मजबूर हैं। भले ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के कारण न्याय मिलने की उम्मीद बेहद क्षीण मानी जा रही है। पादरी कामरान की हत्या एक बार फिर दिखाती है कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक किस हद तक हाशिये पर धकेले जा चुके हैं और उनकी सुरक्षा एक गंभीर सवाल बन चुकी है।
मोदी-पुतिन की दोस्ती से चिढ़े ट्रंप, भारत पर लगा सकते हैं एक और टैरिफ, दिए संकेत
10 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। हाल ही में रुसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा पर दुनिया के कई देशों की नजरें लगीं हुई है। अमेरिका एक एक कदम पर नजर बनाए हुए था। अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए है कि जल्द ही भारत पर एक और टैरिफ लगाया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका अब भारत से आयात होने वाले चावल पर टैरिफ बढ़ा सकता है। साथ ही वह कनाडा से आयातिति उर्वरक पर भी टैरिफ बढ़ाने पर विचार कर रहा है। अमेरिकी उत्पादकों ने डोनाल्ड ट्रंप से मार्केट में सस्ते विदेशी चावल की शिकायत की है। बता दें कि अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ लगाया है। वहीं दोनों देशों के बीच ट्रेड टॉक इस सप्ताह एक बार फिर शुरू होने वाली है। 10 और 11 दिसंबर को अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल भारत के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक करेगा और द्विपक्षीय व्यापार समझौता करने का प्रयास करेगा। भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भारत की तरफ से मुख्य वार्ताकार होंगे।
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी किसानों के लिए 12 अरब डॉलर का बेलाउट पैकेज जारी किया है। इस मौके पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार जांच करेगी कि अमेरिकी की मार्केट में सस्ता विदेशी चावल कितना आ रहा है। किसानों ने डोनाल्ड ट्रंप पर कड़े कदम उठाने का दबाव बनाने की कोशिश की। किसानों ने कहा कि चावल के विदेशी आयात पर सब्सिडी की वजह से घरेलू चावल को सही कीमत नहीं मिल पाती है। इसपर ट्रंप ने कहा कि वे लोग धोखा दे रहे हैं और उनपर टैरिफ बढ़ाने की जरूरत है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अब वह कनाडा के उर्वरक पर भी टैरिफ बढ़ाने वाले हैं। लूसियाना के केनेडी राइस मिल के सीईओ मेरिल केनेडी ने ट्रंप से कहा कि भारत, थाइलैंड और चीन से सबसे ज्यादा चावल आ रहा है। उन्होंने कहा कि इन देशों पर टैरिफ लगा है लेकिन चावल पर टैरिफ दोगुना करने की जरूरत है। हम चाहते हैं कि उनपर और ज्यादा टैरिफ लगाया जाए। डोनाल्ड ट्रंप ने तुरंत अपने वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से उन देशों की लिस्ट बनाने का निर्देश दिया जो कि अमेरिका में ज्यादा चावल निर्यात कर रहे हैं। केनेडी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए शुल्क काम कर रहे हैं, ‘लेकिन हमें इसे और बढ़ाने की जरूरत है। वट्रंप ने फिर बेसेंट की ओर देखते हुए कहा, ‘भारत, मुझे भारत के बारे में बताइए। भारत को ऐसा करने की अनुमति क्यों है? उन्हें शुल्क देना होगा। क्या उन्हें चावल पर छूट मिली हुई है?’ इस पर बेसेंट ने कहा, नहीं सर, हम अभी उनके साथ व्यापार सौदे पर बातचीत कर रहे हैं।
केनेडी ने ट्रंप को यह भी बताया कि भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में एक मामला चल रहा है। उन्होंने कहा, यह उन देशों पर शुल्क लगाकर बहुत जल्दी हल हो जाएगा, जो अवैध रूप से सामान भेज रहे हैं। आपकी समस्या एक दिन में हल हो जाएगी इसलिए हमें उच्चतम न्यायालय में मुकदमा जीतना है। आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है और वैश्विक बाजार में 28 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। वह शीर्ष निर्यातक भी है, जिसकी 2024-25 में वैश्विक निर्यात में 30.3 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। भारत चावल की जो किस्में वैश्विक स्तर पर निर्यात करता है, उनमें सोना मसूरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में पसंद की जाती है।
चीन ने अमेरिका को चेताया कहा- अब हम तीनों मिलकर तय करेंगे ग्लोबल साउथ का भविष्य
10 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। भारत, चीन और रुस मिलकर अब ग्लोबल साउथ का भविष्य तय करेंगे। ये बात चीन ने अमेरिका को चेताते हुए कही है। चीन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया भारत यात्रा पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। चीन ने तीनों देशों (चीन, रूस और भारत) को ग्लोबल साउथ का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि इनके बीच अच्छे त्रिपक्षीय संबंध क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए लाभकारी सिद्ध होंगे।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि चीन, रूस और भारत उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाएं हैं तथा वैश्विक दक्षिण के अहम सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि तीनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखना न सिर्फ उनके अपने हित में है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, सुरक्षा, स्थिरता तथा समृद्धि के लिए भी अनुकूल है। भारत-चीन संबंधों (जो 2020 के पूर्वी लद्दाख गतिरोध के बाद ठंडे पड़े थे और अब सामान्यीकरण की राह पर हैं) के बारे में प्रवक्ता ने कहा कि चीन दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाते हुए भारत के साथ निरंतर, मजबूत और स्थिर संबंधों को बढ़ावा देना चाहता है। उन्होंने कहा कि चीन-भारत संबंधों के मामले में हम भारत के साथ मिलकर इन संबंधों को रणनीतिक ऊंचाई और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य से देखने-संभालने को तैयार हैं, ताकि दोनों देशों के सतत, सुदृढ़ और स्थिर विकास को बढ़ावा मिले, दोनों देशों और उनके लोगों को वास्तविक लाभ पहुंचे तथा एशिया और उससे आगे शांति व समृद्धि में योगदान दिया जा सके।
बता दें कि राष्ट्रपति पुतिन 4-5 दिसंबर को भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए थे। 2021 के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। दोनों पक्षों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने के लक्ष्य के साथ एक दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग कार्यक्रम पर भी सहमति जताई। गौरतलब है कि बीजिंग और मॉस्को के बीच गहरे एवं मजबूत संबंधों को देखते हुए पुतिन की भारत यात्रा पर चीन की पैनी नजर थी। यात्रा से पहले नई दिल्ली और बीजिंग संबंधों पर की गई पुतिन की टिप्पणियों के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन रूस और भारत दोनों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। दरअसल, भारत दौरे से पहले एक साक्षात्कार में पुतिन ने कहा था कि भारत और चीन रूस के सबसे करीबी मित्र हैं और मॉस्को इन रिश्तों को बहुत महत्व देता है। उन्होंने एक एक इंटरव्यू में यह भी कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि भारत और चीन का नेतृत्व आपसी विवादों का समाधान स्वयं निकालने में सक्षम है और रूस को उनके द्विपक्षीय मामलों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। चीनी सरकारी मीडिया ने पुतिन की भारत-चीन संबंधों वाली इन टिप्पणियों को प्रमुखता से प्रकाशित किया।
भारत को मुनीर की कड़ी चेतावनी- अब हमला हुआ तो मिलेगा कड़ा जवाब
10 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद,। पाकिस्तान के नए चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने रावलपिंडी स्थित जीएचक्यू में औपचारिक रूप से अपना पद संभाल लिया। समारोह में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। पदभार ग्रहण करते ही अपने पहले संबोधन में उन्होंने पड़ोसी देशों, खासकर भारत और अफगानिस्तान को कड़े संदेश दिए।
सीडीएफ मुनीर ने समारोह के दौरान सोमवार को कहा, कि पाकिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी प्रकार का समझौता संभव नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में पाकिस्तान पर कोई हमला होता है, तो उसका जवाब पहले से भी ज्यादा तीखा, तेज और प्रभावी होगा। यही नहीं उन्होंने सीधे तौर पर कहा, भारत किसी गलतफहमी में न रहे। खुद पाकिस्तान किसी को भी परखने की अनुमति नहीं देगा। यदि कोई आक्रामक कदम उठाया गया, तो उसका परिणाम तुरंत मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक युद्ध अब परंपरागत सीमाओं से आगे बढ़ चुका है और साइबरस्पेस, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम, स्पेस, इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे नए क्षेत्रों में फैल चुका है। ऐसे में पाकिस्तान की सेनाओं को भी समय के साथ खुद को रूपांतरित करने की आवश्यकता है।
अपने संबोधन में आसिम मुनीर ने मई में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान पाकिस्तान ने भारत को मुंहतोड़ जवाब दिया था। उन्होंने पाकिस्तानी सेना के जवानों और नागरिकों की सहनशीलता तथा धैर्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश के सभी वर्गों ने एकजुट होकर चुनौतियों का सामना किया।
अफगानिस्तान को लेकर भी फील्ड मार्शल मुनीर ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अफगान तालिबान को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि उन्हें पाकिस्तान तालिबान (टीटीपी) और पाकिस्तान सरकार में से किसी एक को ही चुनना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अफगानिस्तान की जमीन से सक्रिय आतंकियों को समर्थन मिल रहा है। उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान शांति का समर्थक है, लेकिन अपनी सुरक्षा को लेकर किसी तरह की ढील नहीं बरती जाएगी। मुनीर ने यह भी कहा कि अफगान तालिबान उन समूहों को सहायता दे रहा है जिनका संबंध भारत से भी बताया जाता है। पाकिस्तान लंबे समय से टीटीपी को आतंकवादी संगठन मानता है और उस पर भारत की ओर से समर्थन पाने का आरोप लगाता रहा है।
अनंत अंबानी को ग्लोबल ह्यूमनिटेरियन अवॉर्ड: वन्यजीव संरक्षण में नई मिसाल
10 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। भारत के उद्योगपति अनंत अंबानी, रिलायंस इंडस्ट्रीज के ‘वनतारा’ संस्थापक, को ‘ग्लोबल ह्यूमनिटेरियन अवॉर्ड फॉर एनिमल वेलफेयर’ से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें पशु कल्याण और संरक्षण के क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान के लिए दिया गया। अनंत अंबानी इस सम्मान को पाने वाले सबसे युवा और पहले एशियाई व्यक्ति बन गए हैं। यह सम्मान वॉशिंगटन डीसी में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया, जिसमें दुनिया भर के वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञ और पशु कल्याण कार्यकर्ता शामिल हुए।
ग्लोबल ह्यूमन सोसाइटी ने इस पुरस्कार के जरिए अनंत अंबानी और उनके नेतृत्व में स्थापित वनतारा की सराहना की। वनतारा ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू, पुनर्वास और प्रजातियों के संरक्षण की परिभाषा बदल दी है। उनके कार्यों ने पशु कल्याण और संरक्षण में एक नया वैश्विक मानक स्थापित किया है। संस्था ने कहा कि वनतारा केवल एक रेस्क्यू सेंटर नहीं है, बल्कि यह एक अभयारण्य है, जो हर जीवन को गरिमा, देखभाल और उम्मीद देने के लिए समर्पित है। समारोह में ग्लोबल ह्यूमन सोसाइटी की प्रेसिडेंट डॉ रॉबिन गैन्जर्ट ने कहा, “वनतारा को ‘ग्लोबल ह्यूमन सर्टिफाइड’ का दर्जा मिलना देखभाल में उत्कृष्टता और जानवरों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अनंत अंबानी ने करुणा को कार्यरूप देने का नया वैश्विक मानक स्थापित किया है।उन्होंने यह भी कहा कि वनतारा के उद्देश्य, पैमाने और भावना ने आधुनिक पशु कल्याण के लिए एक नया बेंचमार्क तय किया है।
सम्मान ग्रहण करते हुए अनंत अंबानी ने कहा, संरक्षण कल के लिए नहीं, बल्कि आज का धर्म है। वनतारा के माध्यम से हम सेवा की भावना से निर्देशित होकर हर जीवन को गरिमा और देखभाल देना चाहते हैं। जानवर हमें संतुलन, विनम्रता और विश्वास सिखाते हैं। यह सम्मान हमारे सिद्धांत ‘सर्व भूत हित’ की पुष्टि करता है।
इस पुरस्कार के पिछले विजेताओं में हॉलीवुड के दिग्गज शर्ली मैकलेन, जॉन वेन, बेटी व्हाइट और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी और बिल क्लिंटन शामिल रहे हैं। वनतारा को यह मान्यता कठोर ऑडिट और वैश्विक विशेषज्ञों के निरीक्षण के बाद मिली, जिसमें पशु कल्याण, व्यवहार विज्ञान, पशु चिकित्सा और नैतिकता के पहलुओं का मूल्यांकन किया गया। वनतारा ‘एक्स सीटू’ और ‘इन सीटू’ संरक्षण को जोड़ते हुए वन्यजीवों के दीर्घकालिक संरक्षण का मॉडल पेश करता है। समारोह में आईयूसीएन के पूर्व चेयर डॉ जॉन पॉल रोड्रिग्ज, कोलोसल बायोसाइंसेज के मैट जेम्स और कई प्रमुख अमेरिकी चिड़ियाघरों के सीईओ शामिल थे। भारत से डॉ नीलम खैरे, डॉ वीबी प्रकाश और डॉ केके सरमा जैसे विशेषज्ञ भी उपस्थित थे।अमेरिकन ह्यूमन सोसाइटी, जो लगभग 150 वर्षों से पशु कल्याण के क्षेत्र में काम कर रही है, दुनिया की सबसे बड़ी पशु कल्याण संस्था है। यह हर साल 59 देशों में 1.5 अरब से अधिक जानवरों की सुरक्षा और उनके साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करती है। इसके इतिहास में कई अमेरिकी राष्ट्रपति और विश्व नेताओं को भी इस संस्था ने सम्मानित किया है। अनंत अंबानी का यह पुरस्कार न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान को मान्यता देता है, बल्कि भारत और विश्व में वन्यजीव संरक्षण और पशु कल्याण के लिए नए मानक स्थापित करने का प्रतीक भी है।
पीढ़ियां बदल सकती हैं, लेकिन सच नहीं, 1971 में बांग्लादेशियों ने चुकाई थी भारी कीमत
10 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश की राजधानी ढाका के छात्रों ने विजय दिवस से पहले बड़ा प्रदर्शन किया है और कहा है कि रजाकरों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है। ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने पाकिस्तान को चुनौती दी। उन्होंने 1971 की जंग में पराजित पाकिस्तान का झंडा भेजकर साफ संदेश लिखा- नो कॉम्प्रमाइज विद रजाकर। छात्रों ने 1971 में पाकिस्तान द्वारा बांग्लादेश में किए गए नरसंहार का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि एक अलग राष्ट्र के रूप में आने के लिए बांग्लादेश के लोगों ने भारी कीमत चुकाई है। इन छात्रों का कहना था- पीढ़ियां बदल सकती हैं, लेकिन सच नहीं बदलता।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने कहा कि 1971 में 30 लाख शहीदों और 2 लाख महिलाओं की अस्मिता पर हमले हुए थे। इतनी भारी कीमत पर मिली आजादी से किसी तरह का समझौता नहीं होगा। बता दें बांग्लादेश अपना विजय दिवस हर साल 16 दिसंबर को मनाता है। इस दिन 1971 में पाकिस्तानी सेना ने ढाका में भारतीय सेना और मुक्ति वाहिनी के सामने आत्मसमर्पण किया था। इसके साथ ही बांग्लादेश एक स्वतंत्र देश बना। इस मौके पर बांग्लादेश में लंबा कार्यक्रम चलता है। बांग्लादेश में इस कार्यक्रम की तैयारी शुरू हो गई हैं।
मोहम्मद यूनुस पिछले साल शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद देश के मुख्य प्रशासक हैं। यूनुस के राज में बांग्लादेश ने परंपरागत मूल्यों से इतर जाकर पाकिस्तान से हाथ मिलाया है। इसके बाद यूनुस और पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ की मुलाकात न्यूयॉर्क और काहिरा में हुई। पाकिस्तान की सेना के बड़े अफसर ढाका के दौरे पर आए और ढाका के अफसर पाकिस्तान दौरे पर गए। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच स्वार्थ पर आधारित संबंधों का भारत पर भी असर है। रिपोर्ट के मुताबिक लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी बांग्लादेश के अंदर सक्रिय हैं। ये आतंकी भारतीय सीमा के पास भी आजादी से घूम रहे हैं।
बता दें मार्च 1971 में जब पूर्वी पाकिस्तान में जब बंगाली राष्ट्रवाद उभरा तो इसे कुचलने के लिए 25 मार्च 1971 की रात को पाकिस्तानी सरकार ने “ऑपरेशन सर्चलाइट” शुरू किया। पाकिस्तानी सेना ने ढाका विश्वविद्यालय, पुलिस लाइन्स और हिंदू बस्तियों पर हमला किया। छात्रों, प्रोफेसरों, बुद्धिजीवियों और पत्रकारों को चुन-चुनकर मारा गया। इस दौरान पहले ही कुछ हफ्तों में ही लाखों लोग मारे गए। ऑपरेशन सर्चलाइट को इतिहास के सबसे भयानक नरसंहारों में गिना जाता है। पाकिस्तानी सेना और उसके सहयोगी रजाकार, अल-बद्र, अल-शम्स जैसे अर्धसैनिक दस्तों ने अवामी लीग समर्थकों और बुद्धिजीवियों को निशाना बनाया। महिलाओं से रेप किया गया। अंतरराष्ट्रीय आयोगों के मुताबिक 2-4 लाख महिलाएं रेप का शिकार हुई थीं।
लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर हड़कंप, काली मिर्च के स्प्रे से यात्रियों पर हमला
9 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन।हीथ्रो एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 पर उस समय हड़कंप मच गया, जब मल्टीस्टोरी कार पार्क में काली मिर्च के स्प्रे से लोगों पर हमला किए जाने की सूचना सामने आई। मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अनुसार, हमलावरों के एक समूह ने कई लोगों पर पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया और इसके बाद मौके से फरार हो गया। घटना सुबह 8 बजकर 11 मिनट पर हुई, जिसके तुरंत बाद एयरपोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अफरा-तफरी फैल गई।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक अधिकतर हमलावर भाग चुके थे। हालांकि एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिससे आर्म्ड पुलिस पूछताछ कर रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह हमला किसी व्यक्तिगत विवाद का नतीजा था और इसमें शामिल लोग एक-दूसरे को पहले से जानते थे। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इसे आतंकवाद से जुड़ा मामला नहीं माना जा रहा है, लेकिन एहतियात के तौर पर एयरपोर्ट पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।लंदन एम्बुलेंस सर्विस भी तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और प्रभावित लोगों को अस्पताल ले जाया गया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, किसी की चोटें गंभीर नहीं हैं और सभी घायलों का इलाज चल रहा है। लंदन फायर ब्रिगेड भी 8 बजकर 14 मिनट पर सहायता के लिए पहुंची और अब भी मौके पर तैनात है। अधिकारियों ने इसे महत्वपूर्ण घटना बताते हुए राहत और सुरक्षा कार्यों में कई टीमों को लगाया है।
हीथ्रो एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे अतिरिक्त समय लेकर आएं और अपनी उड़ानों से संबंधित जानकारी एयरलाइन से अवश्य चेक करें। हमले के चलते कुछ समय के लिए ट्रैफिक प्रभावित हुआ, लेकिन बाद में हालात सामान्य होने लगे। यात्रियों में शुरुआती दहशत जरूर देखी गई, हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई के कारण स्थिति नियंत्रण में आ गई। पुलिस मामले की जांच जारी रखे हुए है और बाकी हमलावरों की तलाश की जा रही है।
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