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उड़ान के दौरान दरवाजा खोलने की कोशिश, क्रू से भिड़ा यात्री, इमरजेंसी लैंडिंग
19 Jul, 2025 12:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के डेट्रायट जा रही एक डोमेस्टिक एयरलाइन को पूर्वी आयोवा में इमरजेंसी लैंडिंग करना पड़ा. बताया जा रहा है कि उड़ान के दौरान एक यात्री ने विमान के चालक दल के सदस्य के साथ हाथापाई की और हवा में इमरजेंसी दरवाजा खोलने की कोशिश की. पायलट की हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) से बातचीत के आधार पर यह जानकारी मिली है.
स्काइवेस्ट एयरलाइन की उड़ान संख्या 3612 के पायलट ने करीब छह बजे सिडार रैपिड्स के पूर्वी आयोवा एयरपोर्ट टावर से संपर्क कर विमान को तत्काल उतारने की अनुमति मांगी.
इमरजेंसी दरवाजा खोलने की कोशिश
पायलट ने बताया, वह अभी फ्लाइट अटेंडेंट से लड़ रहा है और इमरजेंसी दरवाजा खोलने की कोशिश कर रहा है. पुलिस के अनुसार, यह घटना विमान के ओमाहा, नेब्रास्का से रवाना होने के थोड़ी देर बाद हुई. विमान को सिडार रैपिड्स एयरपोर्ट की ओर मोड़ दिया गया और सुरक्षित उतारा गया. विमान के उतरते ही स्थानीय पुलिस ने ओमाहा निवासी 23 वर्षीय युवक को गिरफ्तार कर लिया.
डेट्रॉइट के लिए रवाना हुआ विमान
स्काईवेस्ट एयरलाइंस का मुख्यालय यूटा राज्य में है. यह कंपनी यूनाइटेड, डेल्टा, अमेरिकन और अलास्का एयरलाइंस जैसी प्रमुख एयरलाइनों के लिए उड़ानें संचालित करती है. स्काईवेस्ट द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, बाद में विमान डेट्रॉइट के लिए रवाना हुआ. एयरलाइन ने यह भी कहा कि यात्रयों और चालक दल की सुरक्षा सबसे जरूरी है, और इस तरह के बर्ताव को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
टीआरएफ को वैश्विक आतंकी घोषित करने पर भड़का पाकिस्तान, भारत पर लगाए आरोप
19 Jul, 2025 12:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने आतंकवादी नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है और पहलगाम आतंकवादी हमले को लश्कर-ए-तैयबा से जोड़ने का कोई भी प्रयास गलत है. अमेरिका ने पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जिसने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी ली थी.
अमेरिका के इस कदम के बाद पाकिस्तान के विदेश कार्यालय का बयान आया है. बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान ने संबंधित संगठनों के नेटवर्क को प्रभावी ढंग से और व्यापक रूप से ध्वस्त कर दिया है, उसके सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है और उन पर मुकदमा चलाया है. पहलगाम हमले की जांच अभी भी अनिर्णायक बताते हुए उसने कहा कि पाकिस्तान में प्रतिबंधित एक निष्क्रिय संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ इसका कोई भी संबंध जमीनी हकीकत से उलट है.
पाकिस्तान ने संबंधित संगठनों को ध्वस्त किया
विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि पाकिस्तान ने संबंधित आतंकवादी संगठनों को प्रभावी और व्यापक रूप से ध्वस्त कर दिया है. उनके नेताओं को गिरफ्तार किया गया है, और उन पर मुकदमा चलाया गया है. उनके सदस्यों को कट्टरपंथी विचारधारा से मुक्त किया गया है.
द रेजिस्टेंस फ्रंट आतंकवादी संगठन घोषित
अमेरिका ने पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जिसने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी ली थी. अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके यह जानकारी दी. बयान में विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यह कार्रवाई पहलगाम हमला मामले में न्याय संबंधी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख पर अमल की अमेरिका की प्रतिबद्धता को दर्शाती है.
पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत
अमेरिका के इस कदम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि इससे पता चलता है कि भारत-अमेरिका आतंकवाद-रोधी सहयोग कितना मजबूत है. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए हमले में 26 लोग मारे गए थे. द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली थी लेकिन बाद में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने पर उसने अपना बयान वापस ले लिया था.
टीआरएफ प्रमुख हमले का मास्टरमाइंड
रुबियो ने कहा कि विदेश मंत्रालय टीआरएफ को विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (एसडीजीटी) घोषित करता है. उन्होंने कहा कि टीआरएफ और इससे जुड़े अन्य संगठनों को लश्कर-ए-तैयबा के नाम के साथ विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (एसडीजीटी) के रूप में शामिल किया गया है.
अफगानिस्तान में भूगर्भीय हलचल, उत्तराखंड तक पहुंचा झटकों का असर
19 Jul, 2025 12:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के एक बयान में कहा गया है कि शुक्रवार देर रात अफगानिस्तान में 4.6 तीव्रता का भूकंप आया. एनसीएस के अनुसार, भूकंप 125 किलोमीटर की गहराई पर आया. एक्स पर एक पोस्ट में, एनसीएस ने कहा कि भूकंप की तीव्रता 4.6 मापी गई. वहीं रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार तड़के उत्तराखंड के चमोली जिले में 3.3 तीव्रता का भूकंप आया.
रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई पर आया. एक्स पर एक पोस्ट में, एनसीएस ने कहा कि भूकंप की तीव्रता 3.3 रही, जिसकी गहराई 10 किलोमीटर रही. इससे पहले 8 जुलाई को, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में रिक्टर पैमाने पर 3.2 तीव्रता का भूकंप आया था. रिपोर्ट के अनुसार, यह भूकंप दोपहर 1:07 बजे 5 किलोमीटर की गहराई पर आया था.
इस महीने कई बार आया भूकंप
जानकारी के मुताबिक अफगानिस्तान में इससे पहले 17 जुलाई को, रिक्टर पैमाने पर 4.7 तीव्रता का एक और भूकंप आया था. वहीं 14 जुलाई को, इस क्षेत्र में 4.0 तीव्रता का भूकंप आया था. 10 जुलाई को, 4.3 तीव्रता के भूकंप ने इस क्षेत्र को हिला दिया था.
इस तरह के उथले भूकंप, पृथ्वी की सतह के पास आने पर ऊर्जा के अधिक उत्सर्जन के कारण, गहरे भूकंपों की तुलना में अधिक खतरनाक होते हैं. गहरे भूकंपों की तुलना में, जो सतह पर आते ही ऊर्जा खो देते हैं, इससे जमीन का कंपन ज्यादा होता है और इमारतों को अधिक नुकसान होते हैं.
शक्तिशाली भूकंपों का इतिहास
अफगानिस्तान में शक्तिशाली भूकंपों का इतिहास रहा है, और रेड क्रॉस के अनुसार, हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला एक भूगर्भीय रूप से सक्रिय क्षेत्र है, जहां हर साल भूकंप आते हैं. अफगानिस्तान भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच कई फॉल्ट लाइन पर स्थित है. और एक फॉल्ट लाइन सीधे हेरात से भी होकर गुजरती है.
यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच टकराव
भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच टकराव क्षेत्र में कई सक्रिय भ्रंश रेखाओं पर इसका स्थान इसे एक भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र बनाता है. ये प्लेटें आपस में मिलती और टकराती रहती हैं, जिससे लगातार भूकंपीय गतिविधियां होती हैं. संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (यूएनओसीएचए) के अनुसार, अफगानिस्तान मौसमी बाढ़, भूस्खलन और भूकंप सहित प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है.
रिपोर्ट ने कहा कि अफगानिस्तान में लगातार आने वाले भूकंप कमजोर समुदायों को नुकसान पहुंचाते हैं, जो पहले से ही दशकों के संघर्ष और अविकसितता से जूझ रहे हैं और एक साथ कई झटकों से निपटने के लिए उनके पास बहुत कम लचीलापन है.
अफगानिस्तान में हुई तिहाई मुल्कों की बैठक: भारत से जोड़ने के लिए नई रेल कनेक्टिविटी का मार्ग तय
18 Jul, 2025 10:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में तीन देशों की बैठक हुई। इस बैठम में फैसला लिया गया है कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा स्थित खारलाची से उज्बेकिस्तान के नैबाबाद तक ट्रेन का रूट विकसित किया जाएगा। काबुल में हुई इस बैठक में अफगानिस्तान पर शासन कर रहे तालिबान के नेता और उज्बेकिस्तान एवं पाकिस्तान के नेता मौजूद थे। इस बैठक में फैसला हुआ कि इस रेलवे परियोजना के लिए फिजिबिलिटी स्टडी कराई जाए। तीनों देशों के बीच इसे लेकर सहमति बन गई है। इसे यूएपी रेलवे प्रोजेक्ट नाम दिया गया है, जिसका अर्थ उज्बेकिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान रेलवे परियोजना से है।
उज्बेकिस्तान ऐसा देश है, जो सिल्क रूट पर स्थित है। यह सिल्क रूट यानी रेशम मार्ग चीन को मध्य एशिया के देशों से जोड़ता था और फिर यही रूट आगे बढ़ते हुए यूरोप तक जाता है। ऐसे में यदि यह परियोजना शुरु होती है तो पाकिस्तान के लिए बड़ी सफलता होगी। पाकिस्तान के डिप्टी पीएम इशाक डार ने एक्स पर इस समझौते की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि मैं पाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और अफगानिस्तान के लोगों को बधाई देता हूं। तीनों देशों के बीच रेल नेटवर्क के लिए फिजिबिलिटी स्टडी पर सहमति बनी है।
उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट क्षेत्रीय स्तर पर कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। इसके अलावा आर्थिक तौर पर भी फायदेमंद होगा। डार ने कहा कि पाकिस्तान के बंदरगाहों से मध्य एशिया तक सीधी पहुंच इस कॉरिडोर से होगी। इस समझौते पर साइन से पहले तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की भी बैठक हुई थी।
बता दें पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बीते कई सालों से तनाव की स्थिति बनी हुई है। फिर भी इस अहम प्रोजेक्ट पर सहमति मायने रखती है। इस परियोजना पर तीनों देशों ने 2023 में ही सहमति जताई थी। यह रेल लिंक उज्बेकिस्तान के तरमिज से होकर गुजरेगा। इसके अलावा अफगानिस्तान में मजार-ए-शरीफ और लोगार से जाएगा। पाकिस्तान में इस रेल लिंक की एंट्री खारलाची बॉर्डर से होगी। यह बॉर्डर खैबर पख्तूनख्वा में पड़ता है और अफगानिस्तान से सटा है। तीनों देशों का मानना है कि इससे कनेक्टिविटी बढ़ेगी तो अर्थव्यवस्था को भी ताकत मिलेगी।
“सिंधु जल संधि पर नई चुनौती: चीन दे सकता है पाकिस्तान को कूटनीतिक सहारा”
18 Jul, 2025 08:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब भारत ने सिंधु जल संधि पर रोक लगाने का फैसला किया, फिर क्या पाकिस्तान बौखला उठा था। इस संधि के लागू होने के बाद 65 वर्षों में भारत और पाकिस्तान ने कई जंग लड़ी, लेकिन यह समझौता जारी रहा। लेकिन इस पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने साफ कर दिया कि खून और पानी साथ नहीं बह सकते। सिंधु जल समझौते के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच लगातार तनातनी बनी हुई है, लेकिन भारत अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं है। इस बीच चीन ने इस मामले में रुचि दिखाई है।
दरअसल, पाकिस्तान ने मामले में चीन से कूटनीतिक समर्थन मांगा है, जिसके बाद बीजिंग और उसके विश्लेषकों ने भारत के इस कदम को एक तरह की गैरकानूनी दबावपूर्ण कूटनीति बताया है। इसके बदले में चीन ने पाकिस्तान के अंदर सिंधु की एक सहायक नदी पर स्थित मोहमंद बांध के निर्माण में तेजी लाने की घोषणा की है। भारत को चीनी प्रतिक्रिया की कुछ हद तक अपेक्षा पहले ही थी, क्योंकि बीजिंग और इस्लामाबाद एक दूसरे को सदाबहार दोस्त हैं। वहीं, चीन भारत को अपना क्षेत्रीय दुश्मन मानता है और दोनों के बीच पूर्वी सीमा पर तनाव चल रहा है। लेकिन एक विश्लेषक के अनुसार, बीजिंग की भूमिका केवल एक तटस्थ पर्यवेक्षक से कहीं अधिक है।
अमेरिका स्थित जल संधाधन अनुसंधान संस्थान में रिसर्च एसोसिएट पिंटू कुमार महला के हवाले से बताया है कि बीजिंग अपने क्षेत्र की नदियों के प्रवाह को बाधित करके प्रतिक्रिया दे सकता है, जो भारत में आती हैं। हालांकि, चीन सिंधु जल संधि का पक्षकार नहीं है, लेकिन सिंधु नदी का उद्गम तिब्बत से होता है।
भड़क सकता है क्षेत्रीय तनाव
महला के अनुसार, सिंधु जल संधि पर बीजिंग का किसी भी तरह का हस्तक्षेप क्षेत्रीय तनाव को भड़काने का जोखिम पैदा करता है। उनका कहना है कि चीनी मीडिया भारत को आक्रामक बताने वाले दुष्प्रचार शामिल है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि दक्षिण एशियाई राजनीति में बीजिंग की व्यापक उपस्थिति को बढ़ावा दिया जा सके।
“मेर्क्ज़ सरकार की कठोर नीति: बिना शरण मिलने वालों को भेजा अफगानिस्तान, तालिबान पर तीसरा तनाव”
18 Jul, 2025 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बर्लिन। ईरान और पाकिस्तान के बाद अब जर्मनी ने भी अफगान नागरिकों को अपने देश से निकालना शुरु कर दिया है। यह तालिबान सरकार के लिए एक और बड़ा झटका है, जो पहले से ही अपने नागरिकों के बड़े पैमाने पर निर्वासन से परेशान है। शुक्रवार सुबह, बर्लिन से एक विमान ने 81 अफगान नागरिकों को लेकर उड़ान भरी। ये वे लोग थे जिनका जर्मनी की न्यायिक एजेंसियों से पहले भी संपर्क रहा था। जर्मनी ने कतर की मदद से यह निर्वासन किया है और स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ शुरुआत है, और आने वाले समय में बड़ी संख्या में अफगानों को निकाला जाएगा। यह कदम जर्मनी की नई सरकार के सख्त प्रवासी कानूनों की घोषणा के बाद हुआ है। चांसलर फ्रेडरिख मर्ज ने चुनावी रैली में साफ कर दिया था कि जर्मनी की सीमाएं अब सबके लिए खुली नहीं रहेंगी। उनके नेतृत्व में अफगानों की देशनिकाली की प्रक्रिया तेज हो गई है। जिन लोगों को निकाला जा रहा है, वे हैं जो 2021 में तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान से भागकर जर्मनी आए थे। कई लोगों को तब उम्मीद थी कि पश्चिमी देश उन्हें अपनाएंगे, लेकिन अब जर्मनी सरकार का कहना है कि केवल उन्हीं लोगों को निकाला गया है जो न्यायिक जांचों में दोषी साबित हुए हैं। पिछले तीन महीनों में, पाकिस्तान, ईरान और अब जर्मनी, तीनों देशों ने हजारों अफगानों को या जबरन निकाला है या बाहर का रास्ता दिखाया है। 19 अप्रैल को आई खबर के अनुसार, 19,500 पाकिस्तानी नागरिकों ने देश छोड़ा था, और हर दिन 700-800 अफगानी नागरिक पाकिस्तान छोड़ रहे थे। पाकिस्तान से निकाले गए ज्यादातर लोगों ने अपने देश की शक्ल तक नहीं देखी थी। कई लोग पाकिस्तान में पैदा हुए थे, और कुछ की बेटियां पंजाब में स्कूल जाती थीं।
वहीं हाल के दिनों में ईरान ने भी बड़ी संख्या में अफगानी नागरिकों को बाहर निकाला है। हाल ही में 29,155 लोगों को वापस अफगानिस्तान भेजा गया था। ईरान ने यह तब किया जब वहां गर्मी 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गई थी। 11 जुलाई को, ईरान और पाकिस्तान ने एक ही दिन में करीब 30 हजार अफगान शरणार्थियों को जबरन निकाला, जिसमें पाकिस्तान ने उसी दिन 568 लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया। इसे लेकर तालिबान और ईरान के बीच तनाव भी देखा जा रहा है। अफगान तालिबान ने हाल ही में ईरान से कहा था कि दूसरों के साथ वही व्यवहार करें जो वे खुद के साथ सह सकें।
यह लगातार तीसरा बड़ा झटका है जब हजारों अफगानी नागरिकों को अपने ही देश लौटना पड़ रहा है, जहां तालिबान का शासन है। इनमें से कई लोगों का अफगानिस्तान से कोई सीधा संबंध नहीं रहा है, और उन्हें एक इसतरह के देश में भेजा जा रहा है जिसकी राजनीतिक और सामाजिक स्थिति अस्थिर है। यह स्थिति तालिबान सरकार के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा करती है, जिसमें इतने बड़े पैमाने पर विस्थापित लोगों के पुनर्वास और उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने का दबाव शामिल है।
हरियाणा में मौसम की मार, फसलें हुईं चौपट, किसानों की बढ़ी चिंता
18 Jul, 2025 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Haryana: प्रदेश में तेजी से मौसम में बदलाव के साथ ही बादलवाही रही। शुक्रवार को कई जिलों में छिटपुट बूंदाबांदी हुई। वहीं यमुनानगर में वर्षा होने के साथ ही नकटी नदी में एक 66 वर्षीय किसान ठाकुर सिंह की डूबने से मौत हो गई।
वहीं प्रदेश में मौसम विज्ञानियों ने आने वाले दिनों भी वर्षा होने की संभावना व्यक्त की है। साथ ही इससे तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा सकती है। पिछले कुछ दिनों से लगातार वर्षा होने से हिसार के हांसी-नारनौंद क्षेत्र में खेतों में पानी भर गया। इससे करीब छह हजार एकड़ में फसल खराब हो गई।
मौसम विज्ञान विभाग की ओर से मानसून के लगातार सक्रिय रहने की बात कही गई है। विज्ञानियों के अनुसार 18 जुलाई को भी हवा में नमी रहने से कई जिलों में छिटपुट बूंदाबांदी हुई।
यमुनानगर के कुछ इलाकों व नूंह में तेज वर्षा हुई। वहीं प्रदेश के नारनौल, सिरसा और सोनीपत में हल्की वर्षा हुई। प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा का असर खेतों पर भी पड़ा है। खेत में खड़ी हजारों एकड़ भूमि में पानी भर गया है। इसका सीधा प्रभाव कपास की फसल पर पड़ा है।
यमुनानगर के साढौरा में 70 एमएम वर्षा
यमुनानगर जिले में वीरवार को कहीं बादल खूब बरसे तो कहीं सूखा रहा। वर्षा से धान व गन्ना उत्पादक किसानों को काफी फायदा मिला। सबसे अधिक साढौरा तहसील क्षेत्र में 70 एमएम वर्षा दर्ज की गई। यमुनानगर के कई क्षेत्रों में अल सुबह वर्षा शुरू हो गई।
वहीं गांव कल्याणपुर अंटारी निवासी 66 साल के किसान ठाकुर सिंह नकटी नदी में अचानक आए पानी की उफनती लहरों में बह गया जिससे उसकी मौत हो गई। वीरवार को उसका शव नदी की पटरी के पास पेड़ में फंसा मिला। वहीं जीटी बेल्ट के कई जिलों में बादलवाही रही तो कहीं धूप खिली रही।
इन जिलो में आज भी वर्षा की संभावना
सिरसा, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, फरीदाबाद, मेवात, पलवल, पंचकूला, अंबाला, यमुनागनर, फतेहाबाद, जींद, रोहतक, झज्जर, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, पानीपत व सोनीपत।
बदमाशों का कहर: बाइक से लौट रहे सरपंच को बीच रास्ते रोका और कर दी हत्या
18 Jul, 2025 01:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा : जींद में गुरुवार देर रात एक सनसनीखेज वारदात में चाबरी गांव के सरपंच रोहताश की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बदमाशों ने सरपंच की लाइसेंसी रिवॉल्वर छीनकर उसी से उनके सिर में गोली मारी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जींद के सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
जानकारी के अनुसार, चाबरी गांव के सरपंच रोहताश गुरुवार शाम को किसी काम से जींद शहर आए थे। अपना काम निपटाने के बाद वे रात करीब 12:30 बजे बाइक से अपने गांव लौट रहे थे। पिंडारा और रधाना गांव के बीच कुछ अज्ञात बदमाशों ने उन्हें रोक लिया। बदमाशों ने सरपंच के साथ धक्का-मुक्की की और उनकी लाइसेंसी रिवॉल्वर छीन ली। इसके बाद बदमाशों ने उसी रिवॉल्वर से रोहताश के सिर में गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो गए।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही जींद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया। पुलिस ने हत्यारों की तलाश में आसपास के क्षेत्रों में नाकेबंदी कर सर्च अभियान शुरू किया है, लेकिन अभी तक आरोपियों का कोई सुराग नहीं मिला है। मृतक की लाइसेंसी रिवॉल्वर भी मौके पर बरामद की गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
13 साल पहले रचा था इतिहास, अब आसमान से गिरकर टूट गया सपना
18 Jul, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ऑस्ट्रियाई चरम खेलों के में निपुणता रखने वाले फेलिक्स बॉमगार्टनर का गुरुवार को मध्य इटली में एक पैराग्लाइडिंग दुर्घटना में निधन हो गया. उनकी उम्र 56 वर्ष की थी. इटली के मध्य मार्चे क्षेत्र में पोर्टो सैंट’एल्पिडियो के ऊपर उड़ान भरते समय वह अपने मोटराइज्ड पैराग्लाइडर से नियंत्रण खो बैठे और एक होटल के स्विमिंग पूल के पास जमीन पर गिर पड़े. जिस वजह से उनकी मृत्यू हो गई.
फेलिक्स बॉमगार्टनर ने 2012 में गुब्बारे से पृथ्वी पर छलांग लगाई थी, जिसमें उन्होंने ध्वनि की गति को मात दे दी थी. वह ऐसा करने वाले दुनिया के पहले स्काईडाइवर बने. बॉमगार्टनर ने 16 वर्ष की उम्र में ही बेस जंपिंग के चरम खेल और पैराशूटिंग शुरू कर दी थी.
स्वास्थ्य समस्या की वजह से हुई दुर्घटना- मेयर
पोर्टो सैंट’एल्पिडियो के मेयर मासिमिलियानो सियारपेला का कहना है कि रिपोर्टों से पता चलता है कि उन्हें उड़ान के दौरान अचानक कोई स्वास्थ्य समस्या हुई होगी, जिस वजह से उन्होंने अपना नियंत्रण को दिया और यह दुर्घटना हो गई. मेयर ने पूरे शहर की तरफ से फेलिक्स बॉमगार्टनर मृत्यु पर संवेदना व्यक्त की. उन्होंने कहा कि अत्यधिक उड़ानों के लिए साहस और जुनून के प्रतीक फेलिक्स के निधन पर सारा शहर दुखी है. हालांकि अभी तक दुर्घटना के स्पष्ट कारणों की पुष्टि नहीं हो पाई है.
अंतरिक्ष से गुब्बारे से लगाई थी छलांग
ऑस्ट्रियाई खिलाड़ी ने अक्टूबर 2012 में दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं थी. उन्होंने एक विशेष रूप से निर्मित सूट (अंतरिक्ष सूट) पहनकर, पृथ्वी से 24 मील (38 किमी) ऊपर एक गुब्बारे से छलांग लगाई, और ध्वनि से भी तेज गति वाले पहले स्काईडाइवर बने. इसकी गति आमतौर पर 690 मील प्रति घंटे से अधिक मापी गई थी. यह ऐसा करने वाले दुनिया के पहले स्काईडाइवर बने. उन्होंने यह छलांग 14 अक्टूबर को लगाई थी. क्योंकि इससे पहले 14 अक्टूबर 1947 के यानी ठीक 65 साल पहले अमेरिकी पायलट चक येजर ने पहली बार ध्वनि की गति तोड़ी थी.
किशोरावस्था से ही ऊंची इमारतों से कूदना शुरू कर दिया था
फेलिक्स बॉमगार्टनर ने किशोरावस्था से ही पैराशूटिंग शुरू कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने बेस जंपिंग के चरम खेल को भी अपनाया और इतिहास रचा. उनके साहसिक छलांगों के लंबे करियर में इंग्लिश चैनल के पार स्काईडाइविंग और मलेशिया के पेट्रोनास टावर्स से पैराशूट से कूदना शामिल है.
तानाशाही शासन प्रणाली का करते थे समर्थन
वह ऑस्ट्रिया में तानाशाही शासन प्रणाली के समर्थन के साथ-साथ अपने विचारों को लेकर भी काफी विवादों से घिरे रहते थे. बताया जाता है कि 2010 में साल्जबर्ग के पास एक ट्रैफिक जाम की वजह एक ग्रीक ट्रक ड्राइवर से झगड़ा हो गया. झगडे के दौरान उन्होंने ट्रक ड्राइवर के चेहरे पर मुक्का मार दिया था. बाद में बॉमगार्टनर को इसको लेकर 1,500 यूरो का जुर्माना भी देना पड़ा था.
बलूचिस्तान में फिर खूनी वारदात, मशहूर कव्वालों पर बरसी गोलियां
18 Jul, 2025 12:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान के कलात में बलूचिस्तान के विद्रोही लड़ाकों ने साबरी समूह के 3 कव्वालों की हत्या कर दी है. ये कव्वाल क्वैटा में एक शादी समारोह में भाग लेने के लिए जा रहे थे. साबरी समूह के कव्वालों की हत्या की खबर ने पाकिस्तान की सरगर्मी बढ़ा दी है. बलूच लड़ाकों ने अब तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार (16 जुलाई) को एक बस से साबरी समूह के कव्वाल क्वैटा जा रहे थे. इसी दौरान घात लगाए विद्रोहियों ने बस पर हमला कर दिया. बलूच लड़ाकों का कहना था कि इस बस में पंजाब से सेना के जासूस थे, जिन पर अटैक किया गया है.
बस में सवार थे 17 से ज्यादा लोग
क्वैटा प्रांत के पुलिस अधिकारी ने बताया कि बस में 17 से ज्यादा लोग सवार थे. 3 लोग तुरंत ही मारे गए. 14 घायल हो गए, जिनमें से 3 की स्थिति गंभीर बताई जा रही है. सभी का इलाज स्थानीय अस्पताल में कराया जा रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक 16 जुलाई को क्वैटा में एक बड़े परिवार में शादी का आयोजन था, जिसमें इन कव्वालों को बुलाया गया था. बस में अधिकांश साबरी समूह के ही लोग सवार थे. घटना पर साबरी समूह ने कुछ भी टिप्पणी करने से इनकार किया है.
बस में सवार कराची के नागरिक और कव्वाल संगीतकार मोहम्मद रिजवान ने बात करते हुए कहा कि हम लोग एक समारोह में जा रहे थे. बस में जो लोग मारे गए हैं, उनमें 2 अमजद साबरी के रिश्तेदार भी थे.
कव्वाली के लिए मशहूर है साबरी ग्रुप
साबरी समूह पूरी दुनिया में कव्वाली के लिए मशहूर है. इस ग्रुप की स्थापना गुलाम फरीद साबरी, मकबूल साबरी ने की थी. बाद में ग्रुप से अमजद साबरी और महमूद गजनवी साबरी जुड़ गए. समूह के सदस्य सूफी कव्वाली संगीत के कलाकार थे. इसे सबरी ब्रदर्स के नाम से भी जाना जाता है.
साबरी समूह खुद को मियां तानसेन के वंशज होने का भी दावा करते रहे हैं. सबरी ब्रदर्स को सऊदी में मक्का के नबी के प्रांगण में भी गायन का मौका मिल चुका है. इसी के बाद पूरी दुनिया में सबरी ब्रदर्स को जाना जाने लगा.
शिकवा जवाब ए शिकवा के लिए सबरी ब्रदर्स को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की थी. साबरी ग्रुप में वर्तमान में 50 से ज्यादा संगीतकार काम कर रहे हैं. अधिकांश साबरी के परिवार से ही ताल्लुक रखते हैं.
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को नसों से जुड़ी बीमारी, जानें क्या है क्रॉनिक वेनस इन्सफिशिएंसी
18 Jul, 2025 11:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खराब हेल्थ ने व्हाइट हाउस की चिंता बढ़ा दी है. पैरों में सूजन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति को नई बीमारी का पता चला है. ट्रंप को क्रॉनिक वेनस इन्सफिशिएंसी हुई है, जो कि उम्रदराज लोगों में सामान्य है. व्हाइट हाउस ने इस बात की पुष्टि की है. व्हाइट हाउस ने ट्रंप के स्वास्थ्य पर अपडेट देते हुए कहा है कि ट्रंप की सेहत अभी ठीक है.
जांच में किसी गंभीर समस्या का पता नहीं चला है. सभी परिणाम सामान्य पाए गए हैं. पैरों में सूजन की वजह क्रोनिक वेनस इनसफीशिएंसी बताई गई है, जो 70 साल से अधिक उम्र के लोगों में यह आम है. व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति ने पैरों में सूजन के लिए मेडिकल जांच करवाई थी, जिसमें यह नया खुलासा हुआ है यानी नई बीमारी का पता चला है.
ट्रंप की सेहत अच्छी है, सभी रिपोर्ट सामान्य- व्हाइट हाउस
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने कहा कि मुझे पता है कि मीडिया में कई लोग राष्ट्रपति के हाथ में चोट और पैरों में सूजन के बारे में अटकलें लगा रहे हैं. इसलिए राष्ट्रपति चाहते थे कि मैं उनके स्वास्थ्य के बारे में सभी को अपडेट करूं. तो फिलहाल ट्रंप की सेहत अच्छी है. उनके सभी रिपोर्ट सामान्य हैं. डीप पेन थ्रोम्बोसिस या धमनी रोग का कोई प्रमाण नहीं है.
दरअसल, हाल ही में ट्रंप के पैरों के निचले हिस्से में हल्की सूजन देखी गई थी. कुछ वीडियो में वो पैर घसीटते हुए भी नजर आए थे. क्रॉनिक वेनस इन्सफिशिएंसी बीमारी तब होती है जब पैरों की नसों से रक्त को हृदय तक वापस आने में कठिनाई होती है. खासकर बुजुर्गों में यह बीमारी आम है. ट्रंप के हाथों पर जो हल्की गांठ हुई थी, उसे डॉक्टर ने ‘माइल्ड सॉफ्ट‑टिशू इरिटेशन’ बताया.
क्या है क्रॉनिक वेनस इनसफिशिएंसी?
क्रॉनिक वेनस इनसफिशिएंसी एक ऐसी स्थिति है, जिसमें पैरों की नसों में रक्त का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता है, जिससे पैरों में सूजन, दर्द, और त्वचा में परिवर्तन हो सकते हैं. यह स्थिति तब होती है जब नसों के वाल्व ठीक से काम नहीं करते हैं, जिससे रक्त हृदय की ओर वापस जाने के बजाय पैरों में जमा हो जाता है.
क्रॉनिक वेनस इनसफिशिएंसी के लक्षण
पैरों और टखनों में सूजन
खड़े रहने या चलने पर दर्द-ऐंठन और भारीपन
त्वचा परिवर्तन से खुजली-झुनझुनी
त्वचा का रंग बदलना, भूरापन, मोटी त्वचा
उभरी, मोड़ी हुई नसें
टखनों के आसपास दर्दनाक घाव
युद्धकाल में इतिहास रचा: यूलिया स्विरीडेंको बनीं यूक्रेन की नई प्रधानमंत्री
18 Jul, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कीव। यूलिया स्विरीडेंको अब यूक्रेन की नई प्रधानमंत्री बन गई हैं। राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने उनके नाम की सिफारिश की थी। इसके बाद यूक्रेनी संसद ने उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में चुन लिया। यूलिया पहले डिप्टी पीएम और अर्थव्यवस्था मंत्री थीं। उनकी उम्र 39 साल है और वे पेशे से अर्थशास्त्री हैं। उन्होंने 2020 से पीएम पद पर काबिज डेनिस श्मिहाल की जगह ली है।
बतौर डिप्टी पीएम स्विरीडेंको ने इस साल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ खनिज डील कराने में अहम भूमिका निभाई थी, जिसके बाद उनकी बेहद तारीफ हुई थी। नई कैबिनेट में कुछ और बदलाव भी हुए हैं। श्मिहाल अब भी कैबिनेट में रहेंगे लेकिन रक्षा मंत्री नहीं होंगे। उनकी जगह रुस्तम उमरोव पहले से ही रक्षा मंत्री बने रहेंगे। पहले जेलेंस्की ने श्मिहाल को रक्षा मंत्री बनाने की बात कही थी।
सीरिया के स्वैदा में संघर्ष थमा, पांच दिन बाद हुआ युद्धविराम
17 Jul, 2025 09:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दमिश्क। दक्षिणी सीरिया में पांच दिनों तक चले संघर्ष के बाद सीरिया ने सीजफायर पर सहमति जताई है। इसके साथ उसने स्वैदा शहर से अपनी सेना को वापस बुलाने का आदेश दिया है। इस बीच सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने ड्रूज नागरिकों और उनके अधिकारों की रक्षा करने को प्राथमिकता बताया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसका ऐलान किया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट में कहा कि पिछले सप्ताह के आखिर से चल रहे सांप्रदायिक संघर्ष में शामिल पक्ष युद्धविराम के लिए विशिष्ट कदमों पर सहमत हो गए हैं। इससे भयावह स्थिति का अंत हो जाएगा। इसके लिए सभी पक्षों को अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करना होगा और हम उनसे यही अपेक्षा करते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दमिश्क पर इजराइली एयरस्ट्राइक के बाद अहमद अल-शरा ने ड्रूज नागरिकों से कहा था कि हम आपको किसी बाहरी पक्ष के हाथों में सौंपने के किसी भी प्रयास का विरोध करते हैं। उन्होंने इजराइल पर निशाना साधते हुए कहा कि हम उन लोगों में से नहीं, जो युद्ध से डरते हैं। हमने अपना जीवन चुनौतियों का सामना करने और अपने लोगों की रक्षा करने में बिताया है, लेकिन हमने सीरिया के लोगों के हितों को अराजकता और विनाश से ऊपर रखा है।
अल-शरा ने कहा कि इजराइल हमारी जमीन को अराजकता के अखाड़े में बदलना चाहता है। सीरियाई लोग अपनी गरिमा की खातिर लड़ने को तैयार हैं। हम इस धरती के बच्चे हैं और इजराइल की कोशिशों को नाकाम करने में पूरी तरह सक्षम हैं। हम उन लोगों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए उत्सुक हैं, जिन्होंने हमारे ड्रूज लोगों को नुकसान पहुंचाया। उनके अधिकारों की रक्षा हमारी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है।
अहमद अल-शरा ने कहा कि इससे स्थिति काफी जटिल हो गई। मामला बड़े पैमाने पर बिगड़ गया, लेकिन अमेरिकी, अरब और तुर्की मध्यस्थता के प्रभावी हस्तक्षेप ने क्षेत्र को एक अज्ञात और अनिश्चित भविष्य से बचा लिया। मिडिल ईस्ट में बीते कुछ सालों से युद्ध छिड़ा हुआ है। बता दें सोमवार से ही इजराइल, सीरिया की सेना को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। सीरिया के दक्षिणी शहर स्थित स्वैदा में स्थानीय सुरक्षा बलों और ड्रूज समुदाय के लड़ाकों के बीच झड़प की खबरें सामने आईं थीं, जिसके बाद इजराइल ने सीरियाई बलों को निशाना बनाना शुरू किया। इस झड़प में अब तक सैकड़ों लोग मारे गए।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर ट्रंप का बड़ा बयान: डील अंतिम चरण में
17 Jul, 2025 07:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर कहा है कि उनकी सरकार भारत के साथ समझौते के ‘संभवत:’ बहुत करीब है, क्योंकि बातचीत चल रही है। भारत के साथ व्यापार समझौते पर यह बयान उस समय आया जब भारतीय समयानुसार बुधवार रात राष्ट्रपति ट्रंप अपने ओवल ऑफिस में बहरीन के युवराज सलमान बिन हमद बिन ईसा अल खलीफा के साथ बैठक के दौरान पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने ज़ोर दिया कि पहली अगस्त एक महत्वपूर्ण दिन होगा, जब उनके देश में बहुत सारी धन-राशि (आयात शुल्क की कमाई) आएगी।
ट्रंप ने कहा, ”हम 100 अरब अमरीकी डॉलर से ज़्यादा लाए हैं। ऑटोमोबाइल और स्टील को छोड़कर, प्रशुल्क में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है। पहली अगस्त वह दिन है जब हमारे देश में काफ़ी घन आ रहा होगा। हमने कई जगहों के साथ समझौते किए हैं। कल भी एक समझौता हुआ।” ट्रंप ने कहा, ”हमारा एक और समझौता होने वाला है, शायद भारत के साथ, हम बातचीत कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “जब मैं पत्र भेजता हूं, तो वह एक समझौता होता है। सबसे अच्छा समझौता जो हम कर सकते हैं, वह है एक पत्र का भेजना, और उस पत्र में लिखा होता है कि आप 30 प्रतिशत, 35 प्रतिशत, 25 प्रतिशत, 20 प्रतिशत का भुगतान करेंगे। हमारे पास घोषणा करने के लिए कुछ अच्छे समझौते अभी बाकी हैं। हम भारत के साथ एक समझौते के बहुत करीब हैं जहां वे इसे (व्यापार को) खोलेंगे।”
इससे पहले ट्रंप ने इंडोनेशिया के साथ एक व्यापार समझौते की घोषणा की थी, जिसके तहत ट्रंप ने उस पर पहले लागू 32 प्रतिशत प्रशुल्क की दर को घटाकर केवल 19 प्रतिशत कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे ”सभी के लिए एक बड़ा समझौता” बताया, क्योंकि इंडोनेशिया को अमेरिकी निर्यात पर कोई प्रशुल्क नहीं लगेगा, जबकि इंडोनेशिया के माल पर अमेरिका में 19 प्रतिशत का शुल्क लगाया जाएगा। राष्ट्रपति ने अमरीका से व्यापार करने वाले देशों पर अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए अप्रैल में उनके खिलाफ ऊंचे प्रशुल्क लगा दिए है। उन्होंने इन देशों को समझौता करने के लिए 90 दिन का समय दिया था जो 9 जुलाई को पूरा हो गया है। भारत के साथ बातचीत संभावत: जारी है। उन्होंने उसके बाद कई देशों के खिलाफ ऊंचे शुल्क लगाए हैं जो पहली अगस्त से प्रभावी होने जा रहे हैं।
पाकिस्तानी शख्स ने बाबा बागेश्वर से पूछा सवाल, जवाब सुनकर आप भी हो जाएंगे खुश
17 Jul, 2025 05:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। बाबा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ब्रिटेन दौरे पर हैं। ब्रिटिश सांसदों के एक समूह द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बाबा बागेश्वर को सम्मानित किया गया। इस दौरान संसद में हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। ब्रिटिश संसद में पाकिस्तानी मूल के शख्स मोहम्मद आरिफ धर्म और भारतीयता को लेकर सवाल पूछा।
हिंदू धर्म नहीं बल्कि मानवता की विचारधारा है
बाबा बागेश्वर ने ब्रिटेन संसद में मौजूद लोगों के सवालों का जवाब दिया। पाकिस्तान मूल के मोहम्मद आरिफ ने कहा है कि उनका जन्म पाकिस्तान में जरूर हुआ है लेकिन भगवत गीता पढ़कर अब वह हिंदू हो गए हैं। उन्होंने बाबा बागेश्वर से पूछा कि क्या हिंदू होने के लिये नाम बदलना जरूरी है? क्या बिना नाम बदले हिंदू नहीं हो सकते हैं। इस सवाल के जवाब में पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने जवाब देते हुए कहा कि हिंदू धर्म नहीं बल्कि एक मानवता की विचारधारा है। यदि आप भगवत गीता पढ़ रहे हैं तो आपका इतना ही परिचय काफी है। दिल में विचार बदल गए तो आप सनातनी हो गए।
ब्रिटिश संसद में हनुमान चालीसा का पाठ
बाबा बागेश्वर की मौजूदगी में ब्रिटिश संसद में सांसदों और अन्य लोगों ने हनुमान चालीसा सामूहिक गान किया। बाबा बागेश्वर ने कहा कि अंतरिक्ष से शुभांशु शुक्ला ने जो संदेश दिया उसे सबको याद रखना चाहिए। देश के भीतर की सनातन संस्कृति एक विश्व, एक परिवार की धारणा को लेकर चलती है।
विश्व शांति के लिए हवन पूजन
विश्व शांति के लिए बाबा बागेश्वर ने हवन पूजन किया, जिससे दुनिया में शांति और सद्भावना बनी रहे। बाबा बागेश्वर के सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम में सांसद सीमा मल्होत्रा, सांसद बॉब ब्लेकमैन, हैरो सिटी की मेयर अंजना पटेल रहीं।
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