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“बांग्लादेश दो बार आज़ाद हुआ”: 17 साल बाद देश लौटे तारिक रहमान का बड़ा राजनीतिक संदेश
26 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका । बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान ने लगभग 17 वर्षों के लंबे निर्वासन के बाद स्वदेश लौटने पर अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में देश की राजनीति को लेकर बड़ा और भावनात्मक बयान दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को “दो बार आज़ादी” मिली है। पहली बार 1971 के मुक्ति संग्राम में और दूसरी बार जुलाई 2024 के जनआंदोलन के माध्यम से। उनके इस बयान को मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में बेहद अहम माना जा रहा है।
तारिक रहमान ने अपने भाषण की शुरुआत 1971 के मुक्ति संग्राम के शहीदों को श्रद्धांजलि देकर की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की स्वतंत्रता केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि लोकतंत्र, आत्मसम्मान और जनता के अधिकारों की निरंतर लड़ाई का प्रतीक है। उन्होंने दावा किया कि जुलाई 2024 में हुए जनआंदोलन ने देश में लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को फिर से जीवित किया और जनता की आवाज़ को ताकत दी। बीएनपी नेता ने कहा, “1971 में हमने विदेशी दमन से आज़ादी हासिल की थी और 2024 में जनता ने अपने अधिकारों और लोकतंत्र के लिए फिर से संघर्ष कर देश को आज़ाद कराया।” उनके इस बयान को सत्ता पक्ष के खिलाफ तीखा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। तारिक रहमान ने संकेत दिया कि उनकी पार्टी आने वाले समय में जनता की उम्मीदों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए निर्णायक भूमिका निभाएगी। अपने संबोधन में तारिक रहमान ने अपनी मां और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का भी भावुक ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी मां लंबे समय से बीमार हैं, लेकिन तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने हमेशा देश और लोकतंत्र के हितों को प्राथमिकता दी। तारिक ने समर्थकों से अपील की कि वे खालिदा जिया के संघर्ष और त्याग से प्रेरणा लें और शांतिपूर्ण तथा लोकतांत्रिक तरीकों से देश के भविष्य को मजबूत करें। तारिक रहमान की वापसी को बीएनपी के लिए एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं का मानना है कि उनकी मौजूदगी से संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी और आगामी चुनावों से पहले पार्टी को मजबूती मिलेगी। ढाका और अन्य शहरों में उनके समर्थकों की भारी भीड़ देखी गई, जिससे यह साफ हो गया कि बीएनपी उन्हें एक बड़े जननेता के रूप में पेश करना चाहती है।
हालांकि, तारिक रहमान का “दो बार आज़ादी” वाला बयान राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर सकता है। सत्तारूढ़ दल और उसके समर्थक इसे इतिहास की व्याख्या को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश बता सकते हैं। बावजूद इसके, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान सीधे तौर पर जनता को भावनात्मक रूप से जोड़ने और 2024 के घटनाक्रम को एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है। कुल मिलाकर, 17 साल बाद देश लौटे तारिक रहमान का यह पहला संबोधन न सिर्फ बीएनपी के लिए बल्कि बांग्लादेश की राजनीति के लिए भी एक नया संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि उनका यह संदेश चुनावी राजनीति और सत्ता संतुलन को किस दिशा में ले जाता है।
चीन के बाद उत्तर कोरिया ने भी दिखाई न्यूक्लियर पावर, परमाणु-संचालित पनडुब्बी का प्रदर्शन
26 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्योंगयांग,। उत्तर कोरिया के पास पहले से ही दुनिया के सबसे बड़े पनडुब्बी बेड़ों में से एक है, लेकिन वे ज्यादातर पुरानी और शोर करने वाली डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां हैं। डीजल पनडुब्बियों को अपनी बैटरी चार्ज करने के लिए बार-बार सतह पर आना पड़ता है, जिससे वे रडार की पकड़ में आ जाती हैं। परमाणु पनडुब्बी तब तक पानी के नीचे रह सकती है जब तक चालक दल के लिए भोजन समाप्त न हो जाए। परमाणु पनडुब्बियां पानी के भीतर डीजल पनडुब्बियों की तुलना में काफी तेज गति से चल सकती हैं, जिससे वे दुश्मन के युद्धपोतों से आसानी से बच सकती हैं।
उत्तर कोरिया के लिए परमाणु पनडुब्बी का सबसे बड़ा लाभ अजेयता है। यदि अमेरिका या दक्षिण कोरिया उत्तर कोरिया के जमीनी मिसाइल साइलो को नष्ट भी कर दें, तब समुद्र में छिपी यह पनडुब्बी जवाबी हमला करने के लिए सुरक्षित रहेगी। यह म्युचुअली एश्योर्ड डिस्ट्रक्शन (एमडीए) की स्थिति पैदा करता है, जिससे कोई भी पक्ष युद्ध शुरू करने से डरेगा। उत्तर कोरिया ने रूस को लाखों आर्टिलरी गोले और ह्वासोंग-11 मिसाइलें प्रदान की हैं।
परमाणु रिएक्टर को एक पनडुब्बी के छोटे से हिस्से में फिट करना बहुत ही जटिल इंजीनियरिंग है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस ने मिनिएचराइजेशन और साइलेंसिंग तकनीक (शोर कम करने की तकनीक) साझा की होगी, जो उत्तर कोरिया के पास पहले नहीं थी। यह पनडुब्बी अभी भी निर्माण के चरण में है। वास्तविक चुनौती इसका समुद्री परीक्षण होगा, जहाँ यह देखा जाएगा कि क्या इसका रिएक्टर सुरक्षित रूप से काम करता है और क्या यह बिना पता चले गहरे पानी में गोता लगा सकती है।
किम जोंग उन ने इस पनडुब्बी को युगांतकारी बताया है। उनका मानना है कि यह तकनीक दुश्मन देशों (मुख्यतः अमेरिका और दक्षिण कोरिया) के खिलाफ उनकी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी। पनडुब्बी के हल का पूरा दिखना और उस पर एंटी-कोरोसिव पेंट (जंग-रोधी परत) का होना यह दर्शाता है कि आंतरिक मशीनरी, जैसे रिएक्टर और इंजन, संभवतः स्थापित किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जहाज अगले कुछ महीनों में समुद्री परीक्षणों के लिए तैयार हो सकता है।
यह चिंता का विषय क्यों है?
परमाणु-संचालित पनडुब्बियां सामान्य डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक होती हैं क्योंकि ये हफ्तों तक पानी के भीतर रह सकती हैं, जिससे दुश्मन के रडार और उपग्रहों के लिए इन्हें ट्रैक करना लगभग असंभव हो जाता है। यदि उत्तर कोरिया पर जमीनी हमला होता है, तो ये पनडुब्बियां समुद्र के भीतर छिपी रहकर जवाबी परमाणु हमला करने में सक्षम होंगी। यह पनडुब्बी किम जोंग के उन पांच प्रमुख सैन्य लक्ष्यों में से एक है, जिसमें हाइपरसोनिक मिसाइलें और जासूसी उपग्रह भी शामिल हैं।
भले ही तस्वीरें प्रभावशाली दिख रही हों, लेकिन कुछ बड़े सवाल अभी भी बने हुए हैं
कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया ने परमाणु रिएक्टर को छोटा करने और उसे पनडुब्बी में फिट करने की तकनीक कहाँ से हासिल की? परमाणु पनडुब्बियों को बहुत शांत होना चाहिए। यदि यह पनडुब्बी शोर करती है, तो इसे आधुनिक सोनार सिस्टम से आसानी से पकड़ा जा सकेगा। कई रक्षा विश्लेषकों का संदेह है कि हाल के महीनों में रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ती नजदीकी के कारण, रूस ने इस परियोजना में तकनीकी मदद दी हो सकती है।
एप्स्टीन पीड़िता ने एंड्रयू माउंटबेटन को अमेरिका में कटघरे में लाने की मांग की
26 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन/वॉशिंगटन । कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन से जुड़े मामलों ने एक बार फिर ब्रिटेन के शाही परिवार और अंतरराष्ट्रीय सत्ता गलियारों में हलचल मचा दी है। एप्स्टीन की एक पीड़िता मरीना लासेर्दा ने पूर्व शाही सदस्य एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर (पूर्व में प्रिंस एंड्रयू) को अमेरिका में पूछताछ के लिए बुलाने और “न्याय के कटघरे में लाने” की खुली मांग की है। यह मांग ऐसे समय आई है, जब अमेरिका के न्याय विभाग की ओर से जारी किए गए नए एप्स्टीन दस्तावेजों ने पुराने आरोपों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
मरीना लासेर्दा, जो मूल रूप से ब्राज़ील की रहने वाली हैं और अब अमेरिका में रहती हैं, ने कहा कि एप्स्टीन नेटवर्क से जुड़े कई प्रभावशाली लोग अब तक कानून से बचे हुए हैं। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक व्यक्ति की बात नहीं है। कई ताकतवर लोग हैं जिन्हें आज तक जवाबदेह नहीं ठहराया गया। माउंटबेटन-विंडसर को भी न्याय के सामने लाया जाना चाहिए।” इस मामले में दिवंगत वर्जीनिया जिउफ्रे के वकील ब्रैड एडवर्ड्स ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने पहले माउंटबेटन-विंडसर या एप्स्टीन और घिसलेन मैक्सवेल के इनकारों पर भरोसा किया, उन्हें “शर्मिंदा होना चाहिए।” एडवर्ड्स ने जिउफ्रे को “असाधारण रूप से साहसी” बताते हुए कहा कि वर्षों तक उनकी बातों को नज़रअंदाज़ किया गया।
वर्जीनिया जिउफ्रे ने आरोप लगाया था कि वह 2001 में, जब वह मात्र 17 वर्ष की थीं, तब एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर से मिली थीं और उनके साथ यौन शोषण हुआ। एंड्रयू ने इन आरोपों से हमेशा इनकार किया, हालांकि 2022 में उन्होंने जिउफ्रे के साथ अदालत के बाहर समझौता कर लिया था। अप्रैल 2025 में जिउफ्रे की आत्महत्या के बाद यह मामला और भी संवेदनशील हो गया। हाल ही में जारी दस्तावेजों में ऐसे ई-मेल सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर ने एप्स्टीन की सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल से “अनुचित दोस्तों” की व्यवस्था करने को कहा था। इन ई-मेल्स में “मैत्रीपूर्ण, गोपनीय और मज़ेदार” लड़कियों का ज़िक्र भी किया गया है।
तुर्किये में विमान हादसे में लीबिया के सेना प्रमुख की मौत, चार अन्य भी मारे गए
25 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंकारा। तुर्किये में हुए एक दर्दनाक विमान हादसे में लीबिया के सेना प्रमुख (चीफ ऑफ जनरल स्टाफ) जनरल मोहम्मद अली अहमद अल-हद्दाद समेत कुल पांच लोगों की मौत हो गई। लीबिया की त्रिपोली स्थित सरकार ने मंगलवार देर शाम इस हादसे की आधिकारिक पुष्टि की। यह दुर्घटना उस समय हुई, जब अल-हद्दाद तुर्किये की राजधानी अंकारा की आधिकारिक यात्रा पूरी करने के बाद स्वदेश लौट रहे थे।
लीबिया के प्रधानमंत्री अब्दुलहमीद दबीबा ने सोशल मीडिया पर शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि जनरल अल-हद्दाद की मौत देश के लिए “अपूरणीय क्षति” है। उन्होंने इसे लीबियाई सेना और पूरे राष्ट्र के लिए गहरा आघात बताया। सरकार के बयान में कहा गया कि अल-हद्दाद और उनके सहयोगी देश की सेवा, अनुशासन और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का प्रतीक थे। तुर्की अधिकारियों के अनुसार, निजी जेट फाल्कन-50 ने 23 दिसंबर की शाम 8:17 बजे अंकारा के एसेनबोगा एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। उड़ान के करीब 15 मिनट बाद विमान में तकनीकी खराबी, विशेष रूप से इलेक्ट्रिकल फेल्योर की सूचना मिली। विमान ने हायमाना क्षेत्र के पास आपात लैंडिंग का अलर्ट भेजा, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद रडार से गायब हो गया और संपर्क टूट गया।
तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय के संचार निदेशक बुरहानत्तिन दुरान ने बताया कि रातभर चले सर्च ऑपरेशन के बाद विमान का मलबा अंकारा के दक्षिण में हायमाना के पास बरामद किया गया। गृह मंत्री अली येरलिकाया ने भी पुष्टि की कि हादसे की जांच शुरू कर दी गई है और सभी संबंधित एजेंसियां पूरी सतर्कता से काम कर रही हैं। गौरतलब है कि जनरल अल-हद्दाद पश्चिमी लीबिया के शीर्ष सैन्य कमांडर थे और संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में लीबिया की बंटी हुई सेना को एकजुट करने की कोशिशों में उनकी अहम भूमिका रही थी। अंकारा यात्रा के दौरान उन्होंने तुर्की के शीर्ष सैन्य अधिकारियों से रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर महत्वपूर्ण बातचीत की थी।
इज़राइल के खिलाफ नरसंहार मामले में बेल्जियम भी शामिल, आईसीजे में दक्षिण अफ्रीका के पक्ष को मिला समर्थन
25 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
द हेग। इज़राइल पर गाजा पट्टी में नरसंहार करने के आरोपों से जुड़े मामले में बेल्जियम भी औपचारिक रूप से शामिल हो गया है। यह मामला दक्षिण अफ्रीका ने संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च अदालत अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में दायर किया था। आईसीजे ने मंगलवार को बयान जारी कर बताया कि बेल्जियम ने इस केस में हस्तक्षेप (इंटरवेंशन) की घोषणा दाखिल कर दी है।
बेल्जियम से पहले ब्राजील, कोलंबिया, आयरलैंड, मेक्सिको, स्पेन और तुर्किये जैसे देश भी इस कानूनी प्रक्रिया में शामिल हो चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका ने दिसंबर 2023 में यह मामला दायर करते हुए दावा किया था कि गाजा में इज़राइल की सैन्य कार्रवाई 1948 के संयुक्त राष्ट्र नरसंहार रोकथाम और दंड कन्वेंशन का उल्लंघन है। इज़राइल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताया है। हालांकि, जनवरी 2024 में आईसीजे ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए इज़राइल को गाजा में नरसंहार रोकने के लिए ठोस कदम उठाने और मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। अदालत के ये आदेश कानूनी रूप से बाध्यकारी हैं, भले ही इन्हें लागू कराने के लिए आईसीजे के पास कोई प्रत्यक्ष तंत्र नहीं है।
आईसीजे पहले ही यह भी कह चुका है कि कब्जे वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में इज़राइल की मौजूदगी गैरकानूनी है और उसकी नीतियां व्यावहारिक रूप से कब्जे के विस्तार (एनेक्सेशन) के समान हैं। इसके बावजूद इज़राइल ने गाजा और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में सैन्य कार्रवाई जारी रखी है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना बढ़ती जा रही है। इस बीच, अमेरिका और उसके कुछ यूरोपीय सहयोगी देश इज़राइल को सैन्य और आर्थिक सहायता देना जारी रखे हुए हैं। अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका के मामले को खारिज करते हुए उसकी आलोचना की है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) द्वारा इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बाद अमेरिका ने आईसीसी अधिकारियों पर प्रतिबंध भी लगाए हैं।
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 10 अक्टूबर से लागू युद्धविराम के बाद भी इज़राइली हमलों में सैकड़ों फ़िलिस्तीनी मारे गए हैं, जबकि अक्टूबर 2023 से अब तक मरने वालों की संख्या 70 हजार से अधिक बताई जा रही है।
अमेरिका में अवैध प्रवासियों पर सख्ती, 30 भारतीय ड्राइवरों समेत 42 गिरफ्तार
25 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। अमेरिकी सीमा गश्ती दल ने हाल ही में बड़ी कार्रवाई करते हुए 30 भारतीय नागरिकों सहित कुल 42 अवैध प्रवासियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी लोग अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे थे और वाणिज्यिक वाहन चलाने का लाइसेंस लेकर सेमीट्रक चला रहे थे।
अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा (सीबीपी) ने बयान जारी कर बताया कि यह कार्रवाई कैलिफोर्निया के एल सेंट्रो सेक्टर में की गई। 23 नवंबर से 12 दिसंबर के बीच सीमा गश्ती एजेंटों ने आव्रजन चौकियों पर वाहनों को रोका और अंतर-एजेंसी अभियानों के तहत इन लोगों को हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए सभी लोग अंतरराज्यीय मार्गों पर सेमीट्रक चला रहे थे। सीबीपी के मुताबिक, गिरफ्तार 42 लोगों में से 30 भारत, दो एल साल्वाडोर से हैं, जबकि शेष लोग चीन, इरिट्रिया, हैती, होंडुरस, मैक्सिको, रूस, सोमालिया, तुर्किये और यूक्रेन जैसे देशों के नागरिक हैं। यह तथ्य सामने आने के बाद अमेरिकी प्रशासन ने वाणिज्यिक परिवहन क्षेत्र में सुरक्षा और नियमों को लेकर चिंता जताई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि विभिन्न अमेरिकी राज्यों द्वारा इन लोगों को वाणिज्यिक चालक लाइसेंस जारी किए गए थे। सीबीपी के अनुसार, कैलिफोर्निया ने 31, जबकि फ्लोरिडा, इलिनोइस, इंडियाना, ओहियो, मैरीलैंड, मिनेसोटा, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क, पेंसिल्वेनिया और वाशिंगटन जैसे राज्यों ने मिलकर आठ वाणिज्यिक चालक लाइसेंस जारी किए थे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस अंतर-एजेंसी अभियान का मुख्य उद्देश्य आव्रजन कानूनों का सख्ती से पालन कराना, अमेरिकी राजमार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और वाणिज्यिक परिवहन क्षेत्र में नियामक मानकों को बनाए रखना है। सीबीपी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में अवैध प्रवासियों और नियमों के उल्लंघन पर इसी तरह की और सख्त कार्रवाइयां जारी रहेंगी।
काबुल पर हमले जायज हैं तो भारतीय हमले गलत कैसे हो गए: मौलाना फजलुर रहमान
25 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद।पाकिस्तान की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा भूचाल आया हुआ है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल) के अध्यक्ष मौलाना फजलुर रहमान द्वारा अपनी ही सेना और सरकार के खिलाफ दिए गए कड़े बयानों ने शहबाज शरीफ सरकार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है। कराची के ल्यारी में आयोजित एक जनसभा में मौलाना फजलुर रहमान ने सीधे तौर पर पाकिस्तान की सैन्य रणनीति और अफगानिस्तान के प्रति उसके दृष्टिकोण पर तीखे सवाल पूछे हैं। उनके इन सवालों ने न केवल देश के भीतर सनसनी फैला दी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की स्थिति को और अधिक असहज कर दिया है।मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तानी जनरलों और हुक्मरानों से दो टूक पूछा कि यदि पाकिस्तान काबुल पर अपने हमलों को जायज मानता है, तो वह भारत द्वारा मुरीदके और बहावलपुर पर की गई स्ट्राइक को गलत कैसे ठहरा सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर एक देश दूसरे देश की संप्रभुता का उल्लंघन कर हमला करता है, तो उसे दूसरों पर उंगली उठाने का नैतिक अधिकार नहीं रह जाता। उल्लेखनीय है कि भारत ने मई 2025 में पहलगाम हमले का जवाब देने के लिए पाकिस्तान के भीतर मुरीदके और बहावलपुर जैसे आतंकी अड्डों को निशाना बनाया था। मौलाना के इस बयान ने पाकिस्तान के उस पुराने विमर्श को हिलाकर रख दिया है, जिसमें वह हमेशा खुद को पीड़ित दिखाता आया है। मौलाना के इन तीखे हमलों के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को सफाई देने के लिए सामने आना पड़ा। उन्होंने मौलाना फजलुर रहमान की तुलना को गलत और अनुचित करार देते हुए कहा कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के खिलाफ इस्लामाबाद की कार्रवाई और भारत द्वारा किया गया हमला एक समान नहीं हैं। रक्षा मंत्री ने दावा किया कि पाकिस्तान अपनी संप्रभुता की रक्षा कर रहा है, जबकि भारत की कार्रवाई उकसावे वाली और अवैध थी। हालांकि, ख्वाजा आसिफ उन ठोस सबूतों पर चुप्पी साध गए जो पहलगाम के आतंकियों के पास से मिले थे और न ही उनके पास अफगानिस्तान में हुई उस एयर स्ट्राइक का कोई जवाब था, जिसमें मासूम बच्चों की जान गई थी। अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान के बिगड़ते रिश्तों पर भी मौलाना ने सरकार को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा अफगानिस्तान चाहता है जो उसके पक्ष में हो, लेकिन इतिहास गवाह है कि जाहिर शाह से लेकर अशरफ गनी तक, काबुल की सरकारें हमेशा भारत के करीब रही हैं। वर्तमान में पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच तनाव चरम पर है। पाकिस्तान का आरोप है कि उसकी धरती पर होने वाले हमलों के लिए अफगान जमीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि काबुल इन आरोपों को सिरे से खारिज करता है। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता के कई दौर विफल रहे हैं और सीमा पर झड़पें एक आम बात हो गई हैं। मौलाना फजलुर रहमान के इस साहसपूर्ण रुख ने पाकिस्तान के भीतर उस बहस को जन्म दे दिया है, जिसे दबाने की कोशिश सेना और सरकार लंबे समय से करती आ रही थी।
भूकंप के तेज झटकों से दहल गया ताइवान, ताइपे की गगनचुंबी इमारतें हिलीं
25 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ताइपे। ताइवान के दक्षिणपूर्वी तटीय शहर ताइतुंग में बुधवार 24 दिसंबर को तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए। सेंट्रल वेदर एडमिनिस्ट्रेशन (सीडब्ल्यूए) के मुताबिक भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.1 मापी गई। भूकंप का केंद्र ताइतुंग काउंटी हॉल से करीब 10.1 किलोमीटर उत्तर में स्थित था और इसकी गहराई 11.9 किलोमीटर दर्ज की गई। फिलहाल राहत की बात यह रही, कि अब तक किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
जानकारी अनुसार भूकंप के झटकों का असर राजधानी ताइपे तक देखने को मिला, जहां गगनचुंबी इमारतें काफी देर तक हिलती रहीं। अचानक आए इन झटकों से लोगों में दहशत फैल गई और कई इलाकों में लोग घरों व दफ्तरों से भागते हुए बाहर निकल आए। भूकंप के बाद ताइपे, काओशुंग, ताइचुंग और ताइनान समेत कई प्रमुख शहरों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। सीडब्ल्यूए के मुताबिक, हुलिएन और पिंगतुंग काउंटी में भूकंप की तीव्रता ताइवान के सात स्तर वाले पैमाने पर चार दर्ज की गई। वहीं काओशुंग, नांतौ, ताइनान, चियाई काउंटी, युनलिन, चियाई शहर और चांगहुआ में स्तर तीन तथा ताइचुंग, मियाओली, यिलान, हसिंचु काउंटी, ताओयुआन, न्यू ताइपे और ताइपे में स्तर दो की तीव्रता महसूस की गई।
विशेषज्ञों का कहना है, कि ताइवान दो प्रमुख टेक्टॉनिक प्लेटों के पास स्थित है, जिसके कारण यहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। इससे पहले वर्ष 2016 में ताइवान में 7.3 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 100 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। वहीं 1999 में आए भीषण भूकंप में करीब 2000 लोगों की मौत हुई थी।
Pakistan Airline Sold: आर्थिक संकट में पाकिस्तान ने 135 अरब में बेची PIA
24 Dec, 2025 02:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Pakistan Airline Sold—यह खबर पाकिस्तान की बिगड़ती आर्थिक हालत की सबसे बड़ी तस्वीर बनकर सामने आई है। भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार को आखिरकार अपनी सरकारी एयरलाइन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) को बेचना पड़ा। लंबे समय से घाटे में चल रही PIA को 135 अरब रुपये में एक लोकल इन्वेस्टमेंट कंपनी को बेच दिया गया है। सरकार ने इससे पहले भी PIA के निजीकरण की कोशिश की थी, लेकिन तब तय मूल्य नहीं मिलने के कारण सौदा टाल दिया गया था।
इस्लामाबाद में PIA के निजीकरण को लेकर एक औपचारिक सेरेमनी आयोजित की गई, जिसमें कई बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया। बोली प्रक्रिया में लकी सीमेंट, इन्वेस्टमेंट फर्म आरिफ हबीब और निजी एयरलाइन एयरब्लू शामिल रहीं। तीनों कंपनियों ने अपनी सील बंद बिड्स पारदर्शी बॉक्स में जमा कीं। दूसरे चरण में बिड्स खोली गईं, जिसमें सबसे ऊंची बोली आरिफ हबीब इन्वेस्टमेंट फर्म की निकली और उसी ने PIA को खरीद लिया।
PIA के लिए सरकार ने रेफरेंस प्राइस 100 अरब रुपये तय की थी। बोली के दौरान आरिफ हबीब और लकी सीमेंट के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। कीमत बढ़ते-बढ़ते 135 अरब रुपये तक पहुंच गई, जिसके बाद लकी सीमेंट ने पीछे हटते हुए आरिफ हबीब को बधाई दी। इस तरह 135 अरब रुपये में PIA का सौदा तय हुआ, जिसे पाकिस्तान के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा निजीकरण सौदा बताया जा रहा है।
Pakistan Airline Sold होने के पीछे सरकार ने तर्क दिया कि एयरलाइन लंबे समय से लापरवाही, कुप्रबंधन और घाटे की शिकार रही है। सरकार ने 75 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की पेशकश की थी, जबकि शेष 25 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए निवेशक को 90 दिन का समय दिया गया है। बिक्री से मिलने वाली राशि का 92.5 प्रतिशत PIA में पुनर्निवेश किया जाएगा, जबकि बाकी रकम सरकार को मिलेगी। इसके अलावा नए निवेशक को अगले पांच वर्षों में करीब 80 अरब रुपये का अतिरिक्त निवेश भी करना होगा।
Who Is Nazneen Munni: बांग्लादेश में पत्रकार नाजनीन मुन्नी को कट्टरपंथियों से धमकी
24 Dec, 2025 02:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Who Is Nazneen Munni—:यह सवाल इन दिनों बांग्लादेश में तेजी से बढ़ती हिंसा और मीडिया पर हो रहे हमलों के बीच चर्चा में है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले, हिंसक प्रदर्शन और उग्र माहौल के बीच जानी-मानी पत्रकार नाजनीन मुन्नी की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। कट्टरपंथी समूहों ने ग्लोबल TV बांग्लादेश की न्यूज हेड नाजनीन मुन्नी को पद से हटाने की मांग की है और चेतावनी दी है कि ऐसा न होने पर चैनल के ऑफिस को जला दिया जाएगा।
21 दिसंबर 2025 को खुद को एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट का सदस्य बताने वाले कुछ युवक ढाका के तेजगांव स्थित ग्लोबल TV के ऑफिस पहुंचे। उन्होंने चैनल प्रबंधन से साफ कहा कि अगर नाजनीन मुन्नी को हटाया नहीं गया, तो ‘प्रथम आलो’ और ‘द डेली स्टार’ की तरह ऑफिस में आग लगा दी जाएगी। इनका आरोप था कि उस्मान हादी की मौत की कवरेज में चैनल ने निष्पक्षता नहीं बरती। इस घटना की पुष्टि संगठन के अध्यक्ष रिफत राशिद ने भी की, जिन्होंने बताया कि एक सदस्य मेमोरेंडम देने ऑफिस गया था।
नाजनीन मुन्नी ने बताया कि घटना के वक्त वह ऑफिस में मौजूद नहीं थीं। बाद में 7–8 युवाओं ने चैनल के मैनेजिंग डायरेक्टर अहमद हुसैन से मुलाकात कर उन्हें हटाने की मांग की और अवामी लीग समर्थक होने का आरोप लगाया। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में इस धमकी की जानकारी सार्वजनिक की।
Who Is Nazneen Munni—वह बांग्लादेश की चर्चित पत्रकार हैं और वर्तमान में ग्लोबल TV की न्यूज हेड हैं। इससे पहले वह DBC न्यूज में असाइनमेंट एडिटर रह चुकी हैं। सोशल मीडिया पर उनकी मजबूत मौजूदगी है और 2024 से पहले वह शेख हसीना सरकार की आलोचना को लेकर भी मुखर रही हैं। मौजूदा घटनाक्रम ने बांग्लादेश में मीडिया की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समुद्र में विंड टर्बाइन पर ट्रंप ने लगाई रोक, अमेरिका में हरित ऊर्जा को बड़ा झटका
24 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका में हरित ऊर्जा उद्योग के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। ट्रंप प्रशासन ने एक कड़ा निर्णय लेते हुए समुद्र में निर्माणाधीन सभी प्रमुख ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट्स के फेडरल लीज को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रशासन का तर्क है कि समुद्र में स्थापित ये विशाल पवन चक्कियां और उनकी घूमने वाली ब्लेडें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। हालांकि, इन कथित खतरों की प्रकृति को लेकर अब तक कोई विस्तृत या सार्वजनिक जानकारी साझा नहीं की गई है, जिससे उद्योग जगत और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से ऑफशोर विंड एनर्जी के आलोचक रहे हैं, और इस ताजा फैसले को उनकी ऊर्जा नीति का सबसे आक्रामक कदम माना जा रहा है। इस आदेश का सीधा असर अरबों डॉलर के निवेश पर पड़ेगा। जानकारों का अनुमान है कि इससे लगभग 6 गीगावॉट बिजली उत्पादन क्षमता ठप हो सकती है, जो आने वाले वर्षों में अमेरिकी ग्रिड का हिस्सा बनने वाली थी। यह निलंबन अटलांटिक महासागर में चल रही पांच बड़ी परियोजनाओं पर लागू होगा। इनमें सबसे महत्वपूर्ण वर्जीनिया का विशाल ऑफशोर विंड फार्म है, जिसे साल 2026 तक पूरा होना था। यह प्रोजेक्ट न केवल अमेरिका का सबसे बड़ा विंड फार्म बनने वाला था, बल्कि वर्जीनिया स्थित दुनिया के सबसे बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए भी बेहद अहम था। इसके अलावा न्यू इंग्लैंड तट के पास चल रहे अन्य प्रोजेक्ट्स भी अब अधर में लटक गए हैं।
अमेरिकी गृह मंत्रालय ने इस फैसले के पीछे रक्षा विभाग की गोपनीय रिपोर्टों का हवाला दिया है। प्रशासन का कहना है कि विंड टर्बाइनों की विशाल ब्लेडें और उनसे होने वाला प्रकाश परावर्तन (रिफ्लेक्शन) रडार प्रणालियों में हस्तक्षेप पैदा कर सकता है। अधिकारियों का दावा है कि ईस्ट कोस्ट पर रडार इंटरफेरेंस के कारण नागरिक इलाकों की निगरानी और सुरक्षा तंत्र प्रभावित हो रहा है। हालांकि, रक्षा विभाग के ही कुछ सूत्रों का कहना है कि इन खतरों को कम करने के तकनीकी उपायों पर अभी विचार किया जा रहा था, लेकिन प्रशासन ने उससे पहले ही निलंबन का रास्ता चुन लिया।
इस फैसले के सामाजिक और आर्थिक परिणाम भी गंभीर होने की आशंका है। राजनीतिक स्तर पर, वर्जीनिया और अन्य राज्यों के सीनेटरों ने इसे राष्ट्रपति की निजी पसंद-नापसंद से प्रेरित बताया है। उनका तर्क है कि यदि सुरक्षा चिंताएं इतनी ही बड़ी थीं, तो प्रशासन को पारदर्शी तरीके से जानकारी देनी चाहिए थी। वहीं, ऑफशोर एनर्जी इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों ने चेतावनी दी है कि इस कदम से न केवल हजारों नौकरियां खत्म होंगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का अमेरिकी ऊर्जा बाजार से भरोसा भी उठ जाएगा। उद्योग जगत का कहना है कि वे पिछले एक दशक से रक्षा विभाग के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और हर परियोजना को सभी आवश्यक सुरक्षा मंजूरियां मिलने के बाद ही शुरू किया गया था। अचानक लिए गए इस निर्णय ने अमेरिका के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों और आर्थिक स्थिरता के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
मुनीर ने दी भारत को धमकी बोले- बांग्लादेश पर हमला मतलब पाकिस्तान पर अटैक!
24 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ डिफेंस एग्रीमेंट किया था। इस एग्रीमेंट के मुताबिक एक देश पर हमला दूसरे देश पर हमला माना जाएगा। अब इसी तरह का एक और समझौता बांग्लादेश के साथ पाकिस्तान करना चाह रहा है। यह समझौता पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में ऐतिहासिक मोड़ की तरह होगा। दोनों देश एक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट पर काम कर रहे हैं, जिसे दक्षिण एशिया की सुरक्षा राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। इस प्रस्तावित समझौते को गति देने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश ने एक उच्चस्तरीय संयुक्त तंत्र का गठन किया है, जिसका प्राथमिक कार्य समझौते की शर्तों को तय करना और एक अंतिम मसौदा तैयार करना है। बताया जा रहा है कि बांग्लादेश का वर्तमान सैन्य नेतृत्व पाकिस्तान के साथ रणनीतिक और रक्षा सहयोग बढ़ाने में विशेष रुचि प्रदर्शित कर रहा है। पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रमों पर नजर डालें तो दोनों देशों की थलसेना, वायुसेना और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कई दौर की वार्ताएं संपन्न हो चुकी हैं। इन बैठकों के परिणामस्वरूप प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और सैन्य आदान-प्रदान से संबंधित कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर भी किए गए हैं, जो भविष्य के व्यापक रक्षा समझौते की नींव माने जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश में शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता से हटने के बाद वहां के राजनीतिक और कूटनीतिक समीकरणों में भारी बदलाव आया है। पूर्ववर्ती सरकार के समय जो संबंध ठंडे बस्ते में चले गए थे, उन्हें अब रक्षा और सुरक्षा सहयोग के मोर्चे पर फिर से सक्रिय किया जा रहा है। हालांकि, कूटनीतिक सूत्रों का यह भी कहना है कि इस साझा रक्षा समझौते पर प्रगति निरंतर जारी है, लेकिन इसके अंतिम मसौदे और औपचारिक मंजूरी के लिए बांग्लादेश के आगामी आम चुनावों तक प्रतीक्षा की जा सकती है, ताकि आने वाली नई सरकार इसे संवैधानिक वैधता प्रदान कर सके। पाकिस्तान की यह डिफेंस डिप्लोमेसी केवल बांग्लादेश तक ही सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, लगभग आठ अन्य देश भी पाकिस्तान के साथ इसी तरह के रणनीतिक और पारस्परिक रक्षा समझौतों में रुचि दिखा रहे हैं। यह इस्लामाबाद की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसके तहत वह क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग में अपनी भूमिका को पुनः परिभाषित और मजबूत करना चाहता है। पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच बढ़ता यह सैन्य समन्वय निश्चित रूप से दक्षिण एशिया के अन्य देशों, विशेषकर भारत के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती पेश कर सकता है, क्योंकि यह क्षेत्र की पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा असंतुलन पैदा करने की क्षमता रखता है।
यूनुस सरकार हर नागरिक की सुरक्षा तय करे, चाहे वह किसी भी धर्म का हो
24 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जेनेवा। बांग्लादेश में हिंसा के बीच अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बयान जारी करते हुए कहा कि हम बांग्लादेश की स्थिति पर फिक्रमंद हैं। हम बांग्लादेश की सरकार से अपील करते हैं कि हर एक नागरिकों की सुरक्षा तय की जाए, चाहे वह किसी भी धर्म से ताल्लुक रखता हो।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में बीते हफ्ते से ढाका समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन और हिंसक घटनाएं हो रही हैं। युवा नेता उस्मान हादी की मौत के बाद ये हिंसक घटनाएं शुरू हुई हैं। इस दौरान दीपू चंद्रदास की भीड़ के हाथों हत्या ने यूएन समेत दुनिया का ध्यान खींचा है। दीपू की ईशनिंदा के आरोप में ना सिर्फ भीड़ ने हत्या कर दी बल्कि उनको शव को भी जला दिया। स्टीफन दुजारिक ने बांग्लादेश में हिंसा पर चिंता जताते हुए कहा कि जो लोग बहुसंख्यक समुदाय से नहीं हैं, उन्हें भी सुरक्षित महसूस करने का अधिकार है। ऐसे में यह जरूरी है कि बांग्लादेश में हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए यूनुस की अंतरिम सरकार कदम उठाए।
रिपोर्ट के मुताबिक गुटेरेस के प्रवक्ता ने यूनुस सरकार से उम्मीद जताई कि वह हर बांग्लादेशी को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने बांग्लादेश के लोगों से शांति बनाए रखने और हिंसा समाप्त करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले सभी के लिए सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल बनना जरूरी है। अमेरिका से भी बांग्लादेश की स्थिति पर चिंता जाहिर की गई है।
कांग्रेसी राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि मैं बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की लक्षित भीड़ द्वारा हत्या से स्तब्ध हूं। सुहास सुब्रमण्यम ने भी ढाका में अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों को चिंताजनक कहा है। बांग्लादेश में बीते एक साल से ज्यादा समय से राजनीतिक उथल पुथल मची है। इन प्रदर्शनों के पीछे दक्षिणपंथी ताकतों साफतौर पर दिखी हैं। ऐसे में इनके प्रदर्शनों में अल्पसंख्यकों और लिबरल मिजाज के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
मुझे बिल क्लिंटन बहुत पसंद, मेरे उनसे हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं
24 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। एपस्टीन फाइल्स पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। इसे लेकर अमेरिकी सियासत में भूचाल आ गया। वहीं अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का कहना है कि यह अमेरिका की सफलता से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। ट्रंप के मुताबिक कई लोग अंजाने में जेफ्री एपस्टीन से मिले थे और उन्हें एपस्टीन के काले कारनामों की भनक तक नहीं थी। ऐसे में अगर एपस्टीन फाइल्स के सारे नाम सामने आते हैं तो कई लोगों की छवि खराब हो सकती है।
मीडिया रिपो्ट के मुताबिक अमेरिका के न्यायिक विभाग ने शुक्रवार से एपस्टीन फाइल्स रिलीज करना शुरू किया है, जिसके बाद ट्रंप का पहली बार इसपर बयान सामने आया है। ट्रंप का कहना है कि एपस्टीन पर हंगामा मचाने का सीधा मकसद यही है कि वह अमेरिका के विकास में रिपब्लिकन पार्टी की सफलता को नजरअंदाज करना चाहते हैं। एपस्टीन फाइल्स के पहले बैच में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की तस्वीर भी मौजूद थी। जब ट्रंप से इसपर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि मुझे बिल क्लिंटन बहुत पसंद हैं। मेरे उनसे हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं। मुझे एपस्टीन फाइल्स में उनकी तस्वीरें देखना बिल्कुल पसंद नहीं है। वैसे उसमें मेरी भी तस्वीरें हैं। सभी इस आदमी एपस्टीन के दोस्त थे।
ट्रंप ने कहा कि बिल क्लिंटन एक समझदार व्यक्ति हैं। वह इस मामले को संभाल लेंगे, लेकिन एपस्टीन फाइल्स में कई ऐसे लोगों की भी तस्वीरें हैं, जो बेगुनाह है और अंजाने में एपस्टीन से मिले थे। तस्वीरें जारी करने से बहुत लोग नाराज हैं। उनका एपस्टीन से वास्तव में कोई लेना-देना नहीं था।
बता दें अमेरिका के सबसे धनी और प्रभावशाली व्यक्तियों की फेहरिस्त में शुमार जेफ्री एपस्टीन पर यौन तस्करी करने का आरोप है। 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में एपस्टीन की मौत हो गई थी, जिसे आत्महत्या करार दिया था। हालांकि, एपस्टीन फाइल्स आज भी दुनिया के लिए राज बनी हुई है।
ट्रंप और उनकी टीम ने बड़े पैमाने पर कारोबारियों से चंदा जुटाया........बदले में किसी को माफी मिली, किसी का केस खत्म हुआ
24 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी टीम ने बड़े पैमाने पर चंदा जुटाया है। एक मीडिया हाउस की रिपोर्ट में सामने आया है कि चुनाव के बाद ट्रंप और उनके करीबियों ने करीब 2 अरब डॉलर (18 हजार करोड़ रुपए) अलग-अलग फंड और योजनाओं के लिए इकट्ठा किए। यह रकम उनके चुनाव कैंपेन के लिए जुटाई गई राशि से भी ज्यादा है।
रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी कागजात, फंडिंग रिकॉर्ड और कई लोगों से बातचीत करके पता लगा कि कम से कम 346 बड़े दानदाता हैं, जिसमें से हर एक ने 2.5 लाख डॉलर या उससे ज्यादा का चंदा दिया। इन लोगों से ही करीब 50 करोड़ डॉलर से ज्यादा की रकम आई। इसमें से 200 दानदाता हैं, जिन्हें या जिनके कारोबार को ट्रम्प सरकार के फैसलों से फायदा मिला। इसमें सुंदर पिचाई और सत्या नडेला जैसे 6 भारतवंशी बिजनेसमैन शामिल हैं। इन फायदों में कई बातें शामिल हैं। किसी को राष्ट्रपति की तरफ से माफी मिली, किसी के खिलाफ चल रहे केस खत्म हो गए, किसी कंपनी को बड़े सरकारी ठेके मिल गए, तब किसी को सीधे व्हाइट हाउस तक पहुंच मिली या सरकार में बड़ा पद मिला। हालांकि रिपोर्ट कहती है कि यह साबित करना मुश्किल है कि किसी ने पैसा दिया और बदले में सीधा फायदा मिला, लेकिन इतना जरूर है कि पैसे और फायदों का यह रिश्ता सवाल खड़े करता है।
ट्रम्प की टीम ने पैसे जुटाने के लिए कई अलग-अलग रास्ते बनाए। इसमें सबसे बड़ा है एमएजीए (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन), जो एक सुपर पीएसी है। पीएसी एक ऐसा संगठन होता है, जो राजनीति के लिए पैसा इकट्ठा करता है और उस पैसे से किसी उम्मीदवार या पार्टी का समर्थन करता है। इसने नवंबर 2024 से जून 2025 के बीच करीब 200 मिलियन डॉलर जुटाए। इसके अलावा ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह के लिए बनी कमेटी ने करीब 240 मिलियन डॉलर जुटाए, जो अमेरिका के इतिहास में सबसे ज्यादा है। इतना ही नहीं, व्हाइट हाउस में एक शानदार बॉलरूम बनाने के लिए भी चंदा लिया जा रहा है। ट्रम्प का कहना है कि इसके लिए करीब 350 मिलियन डॉलर जुट चुके हैं, हालांकि मीडिया हाऊस को करीब 100 मिलियन डॉलर के दानदाताओं की पुष्टि मिली है।
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