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बांग्लादेश हिंसा के विरोध में लंदन उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन, भारतीयों के प्रोटेस्ट में खालिस्तानियों ने डाली बाधा
28 Dec, 2025 03:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन. बांग्लादेश (Bangladesh) में जारी हिंसा (violence) की गूंज अब लंदन (London) तक सुनाई दे रही है। इसी क्रम में शनिवार को एक बड़ी खबर तब सामने आई जब बांग्लादेश (Bangladesh) में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचार के खिलाफ लंदन स्थित बांग्लादेश उच्चायोग (High Commission) के बाहर हो रहे विरोध प्रदर्शन में खलिस्तान समर्थकों ने अपनी खराब मंशा का परिचय दिया। साथ ही इस पूरे विरोध प्रदर्शन में बाधा डालने की कोशिश की। इस घटना के बाद पूरे मामले में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की रणनीति सामने आने का संदेह बढ़ गया है। आइए जानते है कैसे?
दरअसल बांग्लादेश हिंदू एसोसिएशन और भारतीय समुदाय ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों, खासकर दीपु चंद्र दास की निर्मम हत्या के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया था। लेकिन इसी दौरान कुछ खलिस्तान समर्थक आ गए और प्रदर्शन में हल्की झड़प हो गई।
बांग्लादेश में अब-तक क्यों जारी है हिंसा?
बता दें कि बीते कुछ दिनों से बांग्लादेश में हिंसा बदस्तूर जारी है। ढाका से लेकर चटगांव तक भीड़ के प्रदर्शन और उससे जुड़ी हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। 12 दिसंबर को इंकलाब मंच के छात्र नेता उस्मान हादी को गोली मार दी गई थी। इसके बाद 18 दिसंबर को हादी का सिंगापुर में निधन हो गया और तब से लेकर अब तक बांग्लादेश में लगातार माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। इसके ठीक बाद चटगांव में एक हिंदू शख्स की लिंचिंग की घटना ने पूरी दुनिया को चौंका दिया।
खालिस्तानी समर्थकों का आने से विवाद क्यों?
बता दें कि खलिस्तान समर्थकों का प्रदर्शन स्थल और समय पर अचानक आना एक संयोग नहीं बल्कि पहले से योजना के तहत किया गया कदम माना जा रहा है। उनके वहां होने का मतलब ये है कि किसी बाहरी शक्ति का हाथ है। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान की आईएसआई लंबे समय से बांग्लादेश और भारत की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति पर असर डाल रही है। ऐसे में आईएसआई का मकसद युवाओं को कट्टरपंथ की ओर मोड़ना और धार्मिक अतिवाद फैलाना है।
खालिस्तानी समर्थकों का मकसद
आईएसआई के इस अभियान के तहत बांग्लादेश में इस्लामवादी समूह हिंदू अल्पसंख्यकों की आवाज दबा रहे हैं। बाहर देशों में खलिस्तान समर्थक हिंदू विरोधी और भारत विरोधी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। खलिस्तान समर्थकों का यह प्रदर्शन सीधे हिंदुओं के खिलाफ नहीं था, बल्कि इसका असली मकसद बांग्लादेश में हो रहे हिंदू उत्पीड़न की घटनाओं पर से ध्यान हटाकर भारत विरोधी संदेश फैलाना था।
सूत्रों का कहना है कि आईएसआई बांग्लादेश में और बाहर दोनों जगह रणनीति चला रही है। एक तो बांग्लादेश में इस्लामवादी समूह भारत विरोधी संदेश फैलाते हैं और अल्पसंख्यकों की आवाज दबाते हैं। दूसरा पश्चिमी देशों में खलिस्तान समर्थक भारत और हिंदुओं के समर्थन में उठ रही आवाजों को बाधित करते हैं।
PAK राष्ट्रपति जरदारी का बड़ा कबूलनामा, बोले-ऑपरेशन सिंदूर के समय बंकरों में छिपी थी सेना, फिर हुई पाकिस्तान की किरकिरी
28 Dec, 2025 02:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद. आतंकियों (terrorists) के पनाहगार पाकिस्तान (Pakistan) को हमेशा से ही अपनी बुजदिल हरकतों के चलते वैश्विक मंच (global stage) पर शर्मसार होना पड़ता है। ऐसे में एक बार फिर ऐसी स्थिति तब आई जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के दौरान अपनी ताकत का झूठा बखान करने वाला नापाक पड़ोसी पाकिस्तान की सेना और उसके हालात को लेकर नया और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। ये खुलासा किसी और ने नहीं खुद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी (Asif Ali Zardari) ने किया है।
पाकिस्तानी राष्ट्रपति जरदारी ने बताया कि कैसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी सेना बंकर में छिपी हुई थी। एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करने के दौरान जरदारी ने यह स्वीकार किया कि तनाव के हालात में पाकिस्तान की सेना बंकरों में छिपी हुई थी और उन्हें खुद भी बंकर में रहने की सलाह दी गई थी।
आर्थिक तंगी से जूझ रहा पाकिस्तान और फिर ये…
बता दें कि राष्ट्रपति जरदारी का यह बयान पाकिस्तान की कमजोर स्थिति को उजागर करता है। गंभीर आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई और कर्ज में डूबे पाकिस्तान के पास न तो मजबूत अर्थव्यवस्था है और न ही लंबी सैन्य तैयारी की क्षमता। ऐसे में पाकिस्तानी सेना के बंकरों में छिपने की बात यह दिखाती है कि पाकिस्तान अंदर से असुरक्षित और दबाव में है।
पहलगाम हमले के जवाब में भारत का एक्शन: ‘ऑपरेशन सिंदूर’
पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने 6-7 मई की दरमियानी रात को भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। इस दौरान 9 ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय और ट्रेनिंग सेंटर शामिल थे। इन जगहों से भारत के खिलाफ आतंकी हमलों की साजिश रची जाती थी।
पहलगाम आतंकी हमला, जब गई थी 26 निर्दोष लोगों की जान
गौरतलब है कि 22 अप्रैल का वो काला दिन, जिसे भारतवासी आज भी नहीं भुला पा रहे। जगह था जम्मू-कश्मीर का पहलगाम। जहां एक साथ कई आतंकियों ने वहां उपस्थित सभी पर्यटकों पर अंधाधुंध गोली चलानी शुरू कर दी। इस आतंकी हमले में कुल 26 लोगों की जान गई। इस घटना को बीते अब तीन महीने से ज्यादा का समय हो चुका है। लेकिन लोगों में नाराजगी और अपनों के खोने का गम अभी भी है। हमले की जिम्मेदारी टीआरएफ ने उसी दिन ली और एक फोटो भी शेयर किया।
ब्राजील के स्कूल में भीषण आग, दूर तक दिखा धुएं का गुबार, उधर ढाका के मदरसे में धमाका
28 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रियो ग्रांडे। दुनिया के दो अलग-अलग हिस्सों से आग और विस्फोट की बड़ी खबरें सामने आई हैं। ब्राजील के सांता मारिया शहर में जहां एक 120 साल पुराना ऐतिहासिक स्कूल आग की भेंट चढ़ गया, वहीं बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक मदरसे के भीतर हुए विस्फोट ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। ब्राजील के रियो ग्रांडे दो सुल राज्य से मिली जानकारी के अनुसार, सांता मारिया शहर के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल में शाम करीब 7:30 बजे अचानक भीषण आग लग गई। यह स्कूल 120 साल पुराना है और स्थानीय समुदाय के लिए एक बड़ी सांस्कृतिक विरासत माना जाता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इमारत की ऊपरी मंजिलों से शुरू हुई और देखते ही देखते पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें इतनी भयानक थीं कि उन्हें शहर के दूर-दराज के हिस्सों से भी देखा जा सकता था। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। राहत की बात यह रही कि क्रिसमस की छुट्टियों के कारण स्कूल परिसर पूरी तरह खाली था, जिससे किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। सावधानी बरतते हुए प्रशासन ने आसपास की इमारतों को खाली करा लिया था और सड़कों को बंद कर दिया गया था। स्थानीय मेयर और राजनीतिक नेताओं ने इस ऐतिहासिक नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त किया है और संस्थान के पुनर्निर्माण में हर संभव मदद का भरोसा दिया है।
मदरसे में धमाका, दीवारें ढहीं
दूसरी ओर, बांग्लादेश की राजधानी ढाका के दक्षिण केरानीगंज इलाके में स्थित उम्माल कुरा इंटरनेशनल मदरसा शुक्रवार को एक जोरदार धमाके से दहल उठा। धमाका इतना शक्तिशाली था कि मदरसे के एक कमरे की छत और दीवारें पूरी तरह ढह गईं। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने जब मौके पर पहुंचकर तलाशी ली, तो वहां से बम बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई। प्रारंभिक जांच में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन बम बनाने के सामान की बरामदगी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की तफ्तीश कर रही हैं कि मदरसे के भीतर विस्फोटक सामग्री किस उद्देश्य से रखी गई थी और इस साजिश के पीछे किन तत्वों का हाथ है।
सीरिया में नमाज के दौरान मस्जिद में धमाका, 8 की मौत, 20 से ज्यादा घायल
28 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
होम्स। सीरिया के होम्स शहर में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक मस्जिद में धमाका हो गया। इस हमले में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह धमाका होम्स प्रांत के वादी अल-दहब इलाके में स्थित मस्जिद को निशाना बनाकर किया गया। विस्फोट शुक्रवार की नमाज़ के समय हुआ, जिससे मस्जिद में मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। सामने आए वीडियो फुटेज में लोग मस्जिद से बाहर भागते नजर आए, वहीं कई घायलों को अस्पताल ले जाया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक धमाका मस्जिद के मुख्य नमाज़ हॉल के एक कोने में हुआ, जिससे दीवार में गड्ढा हो गया और आसपास का इलाका बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। आशंका जताई जा रही है कि यह हमला आत्मघाती हो सकता है या फिर मस्जिद में पहले से विस्फोटक लगाए गए थे। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी और जांच शुरू कर दी गई है।
बता दें होम्स शहर में अलावाइट, ईसाई और सुन्नी मुस्लिमों की मिश्रित आबादी रहती है और यह हमला एक अलावाइट (नुसैरी) मस्जिद में हुआ, जिससे देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन हाल के दिनों में सीरिया में इस्लामिक स्टेट की गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई है। सेना ने हाल ही में अलेप्पो के पास एक अभियान के दौरान तीन कथित आईएसआईएस आतंकियों को गिरफ्तार किया है। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह अमेरिका ने सीरिया में आईएसआईएस ठिकानों पर हवाई हमले किए थे, जो दो अमेरिकी सैनिकों और एक ट्रांसलेटर की हत्या के जवाब में बताए गए थे।
कंपनी मालिक ने 1.7 बिलियन डॉलर के सौदे में रखी अनोखी शर्त, कर्मचारियों को बोनस में दिए 2000 करोड़
28 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। कॉरपोरेट जगत में अक्सर मुनाफे और अधिग्रहण की खबरें सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन अमेरिका की एक कंपनी के मालिक ने अपने कर्मचारियों के प्रति वफादारी और सम्मान की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरी दुनिया का दिल जीत लिया है। फाइबरबॉन्ड कंपनी के मालिक ग्राहम वॉकर ने हाल ही में अपना व्यवसाय ईटन नामक दिग्गज कंपनी को बेच दिया, लेकिन इस सौदे को अंतिम रूप देने से पहले उन्होंने एक ऐसी शर्त रखी जिसे सुनकर व्यापारिक सलाहकार भी हैरान रह गए। वॉकर ने स्पष्ट कर दिया कि कंपनी की कुल बिक्री राशि का 15 प्रतिशत हिस्सा सीधे उन कर्मचारियों को दिया जाएगा, जिन्होंने कंपनी को इस मुकाम तक पहुँचाया है।
यह सौदा 1.7 बिलियन डॉलर (लगभग 14,000 करोड़ रुपये) में तय हुआ। वॉकर की शर्त के अनुसार, बिक्री की राशि में से 240 मिलियन डॉलर (लगभग 2,000 करोड़ रुपये) का बोनस कंपनी के सभी 540 फुल-टाइम कर्मचारियों के लिए आरक्षित किया गया। इस फैसले की सबसे खास बात यह थी कि कर्मचारियों के पास कंपनी का कोई शेयर नहीं था, फिर भी वॉकर ने उन्हें मुनाफे का हिस्सेदार बनाया। इस हिसाब से प्रत्येक कर्मचारी को औसतन 4.4 लाख डॉलर (लगभग 3.7 करोड़ रुपये) मिले, जिसे रिटेंशन अवॉर्ड के रूप में अगले पांच वर्षों में वितरित किया जाएगा। जब जून के महीने में कर्मचारियों को उनके नाम के सीलबंद लिफाफे मिले, तो कई लोगों की आंखों में आंसू आ गए। 29 साल से कंपनी में काम कर रही लेसिया की ने बताया कि उन्होंने 1995 में मात्र 5.35 डॉलर प्रति घंटे की मजदूरी से शुरुआत की थी। बोनस की राशि मिलने के बाद उन्होंने अपना होम लोन चुकाया और खुद का व्यवसाय शुरू करने का सपना पूरा किया। इसी तरह 15 साल से काम कर रही 67 वर्षीय हांग ब्लैकवेल को भी लाखों डॉलर का बोनस मिला, जिससे उन्होंने सम्मानजनक सेवानिवृत्ति ली।
फाइबरबॉन्ड की यात्रा संघर्षों से भरी रही है। 1982 में शुरू हुई यह कंपनी 1998 में भीषण आग के कारण खाक हो गई थी, लेकिन वॉकर परिवार ने उत्पादन बंद होने के बावजूद कर्मचारियों का वेतन नहीं रोका। बाद में डॉट-कॉम मंदी के दौरान भी कंपनी ने कड़े संघर्ष किए। कंपनी की किस्मत तब बदली जब उसने डेटा सेंटर क्षेत्र में भारी निवेश किया और महामारी के दौरान क्लाउड कंप्यूटिंग की मांग बढ़ने से इसकी बिक्री में 400% का उछाल आया। ग्राहम वॉकर के सलाहकारों ने उन्हें चेतावनी दी थी कि बिक्री का 15% कर्मचारियों को देने की शर्त सौदे को जटिल बना सकती है, लेकिन वॉकर अपने फैसले पर अडिग रहे। उनका मानना था कि यह पैसा सिर्फ एक उपहार नहीं, बल्कि उन लोगों के प्रति आभार है जिन्होंने मुश्किल समय में कंपनी का साथ नहीं छोड़ा। यह कदम न केवल कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को सुधारने वाला साबित हुआ, बल्कि नई मालिक कंपनी के लिए भी संचालन को स्थिर रखने का एक जरिया बना।
जब तक मैं इसे मंजूरी नहीं देता, उनके पास कुछ भी नहीं
28 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूक्रेन की शांति पहल पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वाशिंगटन के समर्थन के बिना यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के पास कोई खास प्रभाव नहीं है। एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि जब तक मैं इसे मंजूरी नहीं देता, उनके पास कुछ भी नहीं है। इसलिए हम देखेंगे कि उनके पास क्या है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि वार्ता फलदायी हो सकती है। जेलेंस्की के फ्लोरिडा में ट्रंप से मिलने की उम्मीद है और उन्होंने कहा है कि वे एक नई 20 सूत्री शांति योजना पेश करेंगे। इस योजना में विसैन्यीकृत क्षेत्र के प्रस्ताव शामिल हैं और वार्ता में यूक्रेन के लिए अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने कीव के नवीनतम प्रस्ताव का समर्थन करने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई। एक रचनात्मक बैठक की भविष्यवाणी करते हुए, उन्होंने संकेत दिया कि जेलेंस्की के प्रस्तावों को विस्तार से देखे बिना वे उनसे पूरी तरह सहमत नहीं हैं। ट्रंप ने कहा कि मुझे लगता है कि उनके साथ बातचीत अच्छी रहेगी। मुझे लगता है कि व्लादिमीर पुतिन के साथ भी बातचीत अच्छी रहेगी और साथ ही यह भी जोड़ा कि उन्हें रूसी राष्ट्रपति से जल्द ही बात करने की उम्मीद है, मैं ऐसा चाहता हूं।
ट्रम्प की ये टिप्पणी जेलेंस्की के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि संघर्ष को लेकर राजनयिक गतिविधियां तेज होने के बीच उनकी अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर के साथ अच्छी बातचीत हुई। ये हमले नाइजीरिया में आईएसआईएस के ठिकानों पर अमेरिकी हवाई हमलों के बाद हुए जिन्हें ट्रंप ने ईसाईयों की हत्या के जवाब में किए गए हमले बताया था। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने प्रतीकात्मक कारणों से व्यक्तिगत रूप से इन हमलों को एक दिन के लिए टाल दिया था।
जेलेंस्की ने कहा था कि उनकी शांति योजना 90फीसदी तैयार है और वे अमेरिका के साथ सुरक्षा गारंटियों पर अंतिम मुहर चाहते हैं। हालांकि ट्रंप के साफ कर दिया है कि अमेरिका केवल एक सहयोगी नहीं बल्कि निर्णायक की भूमिका में है। ट्रंप ने कहा कि जेलेंस्की के पास तब तक कुछ भी नहीं है, जब तक मैं उसे मंजूर नहीं करता। हम देखेंगे कि उनके पास क्या प्रस्ताव है।
न्यूजीलैंड के पीएम ने एफटीए समझौते को बताया उपलब्धि, विदेशमंत्री ने जताई आपत्ति
28 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैलिन्गटन। न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने शनिवार को भारत के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का स्वागत करते हुए इसे अपनी सरकार की उपलब्धि बताया। यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इस समझौते को लेकर आपत्तियां जताई थीं और इसका विरोध किया था। पीएम लक्सन ने कहा कि हमने अपने पहले कार्यकाल में भारत के साथ एफटीए करने का वादा किया था और हमने उसे पूरा किया।
उन्होंने इस समझौते को आर्थिक विकास के लिए अहम बताते हुए कहा कि इससे रोजगार के नए अवसर आय में वृद्धि और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। लक्सन के मुताबिक यह समझौता 1.4 अरब भारतीय उपभोक्ताओं के विशाल बाजार के दरवाजे न्यूजीलैंड के लिए खोलेगा। लक्सन ने इसे अपनी सरकार के व्यापक एजेंडे से जोड़ते हुए कहा कि यह समझौता बुनियादी सुधार और भविष्य के निर्माण की दिशा में एक ठोस कदम है।
इस समझौते ने न्यूजीलैंड की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के अंदर मतभेद भी उजागर कर दिए हैं। विदेश मंत्री और न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी के नेता विंस्टन पीटर्स ने इस समझौते को न तो मुक्त और न ही निष्पक्ष बताया है। पीटर्स ने कहा कि उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को अपनी पार्टी की चिंताओं से अवगत कराया है। पीटर्स ने आरोप लगाया कि समझौते में गुणवत्ता से अधिक रफ्तार को प्राथमिकता दी गई। एक्स पर एक लंबी पोस्ट में उन्होंने लिखा- न्यूजीलैंड फर्स्ट ने अपने गठबंधन सहयोगी को चेतावनी दी थी कि भारत के साथ कमजोर और जल्दबाजी में समझौता न किया जाए। उनका कहना था कि सरकार को पूरे संसदीय कार्यकाल का उपयोग कर एक बेहतर और संतुलित समझौता करना चाहिए था, जो दोनों देशों के नागरिकों के हित में होता।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते को लेकर सबसे बड़ा विवाद डेयरी उद्योग को लेकर है। पीटर्स ने आरोप लगाया कि न्यूजीलैंड ने भारत के लिए अपना बाज़ार खोल दिया, लेकिन बदले में भारतीय बाजार में न्यूजीलैंड के डेयरी उत्पादों जैसे दूध, पनीर और मक्खन पर टैरिफ में कोई ठोस रियायत नहीं दी। उन्होंने कहा कि यह समझौता न्यूजीलैंड के किसानों के लिए अच्छा नहीं है और ग्रामीण समुदायों के सामने इसका बचाव करना असंभव है।
यह एफटीए इस सप्ताह पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई बातचीत के बाद घोषित किया गया था। दोनों नेताओं ने कहा कि यह समझौता अगले पांच सालों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर सकता है और अगले 15 सालों में भारत में 20 अरब डॉलर तक का निवेश ला सकता है। वर्ष 2024 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच कुल व्यापार 2.07 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 1.1 अरब डॉलर था। भारत से प्रमुख निर्यातों में दवाइयां शामिल हैं, जबकि न्यूजीलैंड से कृषि और वानिकी उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। भारत सरकार के मुताबिक न्यूजीलैंड ओशिनिया क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
पीटर्स ने यह भी आरोप लगाया कि यह समझौता व्यापार से ज्यादा भारतीय श्रमिकों की आवाजाही और भारत में निवेश बढ़ाने पर केंद्रित है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय नागरिकों के लिए एक नया रोजगार वीजा श्रेणी बनाई गई है, जो ऑस्ट्रेलिया या ब्रिटेन जैसे साझेदारों को नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड फर्स्ट हर प्रवासन नीति को इस कसौटी पर परखता है कि क्या वह स्थानीय लोगों के रोजगार और आव्रजन प्रणाली की अखंडता की रक्षा करती है। पीटर्स के मुताबिक भारत के साथ किया गया यह समझौता उस कसौटी पर खरा नहीं उतरता, खासकर ऐसे समय में जब न्यूजीलैंड का श्रम बाज़ार पहले से ही दबाव में है।
17 साल बाद मतदान के काबिल, तारिक रहमान की किस सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी
27 Dec, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
17 साल बाद देश लौटकर बीएनपी के एक्टिंग चेयरमैन तारिक रहमान फिर बांग्लादेश के वोटर बन गए | शनिवार को उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल कर लिया गया और उन्होंने नेशनल आइडेंटिटी कार्ड (NID) के लिए रजिस्टर भी करा लिया है | इस बार बांग्लादेश का चुनाव लड़ने में उनका कोई रुकावट नहीं है | तारिक रहमान अपनी पुश्तैनी सीट बोगरा सदर (बोगरा-6) चुनाव क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे. लोकल नेताओं ने उनकी तरफ से नॉमिनेशन पेपर पहले ही ले लिए हैं. बांग्लादेश में 12 फरवरी को जातीय संसद के लिए चुनाव है |
तारिक रहमान लंदन से लौटने के दो दिन बाद शनिवार सुबह ढाका यूनिवर्सिटी इलाके में शहीद उस्मान हादी की कब्र पर जाने के बाद वे अगरगांव गए | वहां उन्होंने इलेक्शन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में वोटर के तौर पर रजिस्टर करने और नेशनल आइडेंटिटी कार्ड पाने का काम पूरा किया | तारिक रहमान ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि वह 27 दिसंबर को वोटर बनने के लिए जरूरी काम करेंगे. इलेक्शन कमीशन ने भी उसी हिसाब से तैयारी कर ली थी |
तारिक रहमान ने बनवाया अपना वोटर कार्ड
बांग्लादेश आउटलेट प्रथम आलो के अनुसार तारिक रहमान शनिवार दोपहर करीब 1 बजे ढ़ाका के अगरगांव में इलेक्शन बिल्डिंग के पीछे इलेक्टोरल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बिल्डिंग गए. बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर एक कमरे में बाहर से आए लोगों और खास लोगों को NID से जुड़ी सर्विस दी जाती हैं |
तारिक रहमान उस कमरे में फोटो खिंचवाने, दस फिंगरप्रिंट देने, अपनी आइरिस स्कैन करवाने और साइन करने गए. उस समय बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन के सेक्रेटरी अख्तर अहमद मौजूद थे |
इससे पहले सुबह NID विंग के डायरेक्टर जनरल (DG) ASM हुमायूं कबीर ने मीडिया बताया कि वोटर बनने के लिए, व्यक्ति की फोटो, आईरिस और फिंगरप्रिंट लिए जाते हैं. इन्हें EC डेटाबेस में अपलोड किया जाता है. डेटा सेंटर में वोटर्स की जानकारी के साथ इनका क्रॉस-मैच किया जाता है. फिर एक नंबर जेनरेट होता है. यह सॉफ्टवेयर में किया जाता है |
इलेक्शन कमीशन ने आने वाले 13वें पार्लियामेंट्री इलेक्शन के लिए वोटर लिस्ट पहले ही फाइनल कर दी है | हालांकि, वोटर लिस्ट एक्ट कहता है कि चुनाव आयोग किसी भी समय वोटर बनने के लायक किसी भी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में शामिल कर सकता है |
2008 में बांग्लादेश छोड़कर चले गए थे तारिक रहमान
बांग्लादेश में पहली फोटो वाली वोटर लिस्ट 1998 के बाद केयरटेकर सरकार के दौरान 2008 में तैयार की गई थी. बीएनपी चेयरपर्सन खालिदा जिया के सबसे बड़े बेटे तारिक रहमान 11 सितंबर, 2008 को जेल से रिहा होकर बांग्लादेश से लंदन चले गए थे. क्योंकि वे विदेश में थे, इसलिए उस समय उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं था. बाद में अवामी लीग के राज में वे देश वापस नहीं आए, न ही वे वोटर बने |
पिछले साल जुलाई में छात्र विद्रोह के बाद शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट हुआ था | उसके बाद देश में पहली बार चुनाव होंगे और चुनाव लड़ने के लिए वोटर बनना जरूरी थी, जिसकी प्रक्रिया तारिक रहमान ने पूरी कर ली |
ट्रंप से मुलाकात से पहले रूस का बड़ा एक्शन, यूक्रेन पर ड्रोन-मिसाइल से भीषण हमला
27 Dec, 2025 06:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों के बीच हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की प्रस्तावित अहम बैठक से ठीक पहले रूस ने कीव और यूक्रेन के कई इलाकों पर मिसाइलों और ड्रोन से जोरदार हमला किया |
इन हमलों ने साफ संकेत दे दिया है कि शांति की राह अभी भी बेहद मुश्किल और खतरों से भरी हुई है. शनिवार सुबह कीव में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं. यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली तुरंत सक्रिय हो गई और आसमान में रूसी मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराने की कोशिश शुरू हुई |
यूक्रेन में जारी हुआ रेड अलर्ट
यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक, रूस ने राजधानी कीव के साथ-साथ देश के उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी इलाकों को भी निशाना बनाया. सुबह 8 बजे तक हमले जारी थे और राजधानी में एयर रेड अलर्ट लागू रहा. कीव प्रशासन के अनुसार, इन हमलों में कम से कम आठ लोग घायल हुए हैं. इससे एक दिन पहले रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे और दक्षिणी ओडेसा क्षेत्र पर भी हमले तेज कर दिए थे |
ट्रंप-जेलेंस्की बैठक से पहले बढ़ा दबाव
इन हमलों का समय बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि रविवार को जेलेंस्की की डोनाल्ड ट्रंप से फ्लोरिडा में मुलाकात होनी है. जेलेंस्की ने कहा है कि इस बैठक में युद्ध रोकने के बाद किन इलाकों पर किसका नियंत्रण होगा, यही सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा |यूक्रेनी राष्ट्रपति के मुताबिक, अमेरिका की अगुवाई में तैयार किए जा रहे 20 बिंदुओं वाले शांति प्रस्ताव का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा तैयार हो चुका है. उन्होंने यह भी संकेत दिए कि नए साल से पहले कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं |
जमीन और सुरक्षा गारंटी सबसे बड़ी अड़चन
जेलेंस्की का कहना है कि शांति समझौते में सबसे बड़ा रोड़ा जमीन का बंटवारा है. रूस चाहता है कि यूक्रेन पूर्वी डोनबास क्षेत्र से पीछे हटे, जबकि कीव मौजूदा मोर्चों पर ही युद्धविराम चाहता है. इसके अलावा सुरक्षा गारंटी भी बड़ा मुद्दा है. जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका ने 15 साल की सुरक्षा गारंटी का प्रस्ताव दिया है, लेकिन यूक्रेन इससे ज्यादा मजबूत और कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता चाहता है ताकि भविष्य में रूस दोबारा हमला न कर सके |
पाकिस्तान छोड़ रहे डॉक्टर और इंजीनियर्स, आसिम मुनीर का मजाक उड़ रहा इंटरनेट पर
27 Dec, 2025 04:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान की एक सरकारी रिपोर्ट ने ‘प्रतिभा पलायन’ को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. रिपोर्ट के बाद पाकिस्तान की काफी खिल्ली उड़ाई जा रही है. पाकिस्तान के रक्षामंत्री आसिम मुनीर ने इसे ‘ब्रेन गेन’ बताया था, लेकिन अब मुनीर की सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हो रही है, मजाक बनाया जा रहा है. इसके साथ ही देश के प्रबुद्ध वर्ग ने पढ़े-लिखे लोगों को लेकर चिंता जताई है |
बता दें, सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो सालों के अंदर पाकिस्तान से करीब 5,000 डॉक्टर, 11 हजार इंजीनियर और 13,000 अकाउंटेंट दूसरे देशों में पलायन कर गए हैं. जिसकी वजह से देश प्रतिभा पलायन के दौर से गुजर रहा है. इसका सबसे बड़ा कारण बिगड़ती अर्थव्यवस्था और राजनीतिक अस्थिरता सामने आई है. जब से यह रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है, तब से सेना प्रमुख आसिम मुनीर की काफी आलोचना हो रही है |
खतरे में 24 लाख नौकरियां
सोशल मीडिया पर सरकारी आंकड़े को लेकर पूर्व सीनेटर मुस्तफा नवाज खोखर ने ‘एक्स’ पर लिखा, “पाकिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा फ्रीलांसिंग हब है, लेकिन देश को इंटरनेट शटडाउन के कारण 1.62 करोड़ डॉलर का नुकसान झेलना पड़ रहा है. जिसकी वजह से करीब 24 लाख फ्रीलांसिंग नौकरियां खतरे पर हैं.” उन्होंने मुनीर द्वारा की गई बयानबाजी को लेकर सलाह दी कि राजनीति ठीक करो तो अर्थव्यवस्था सुधर जाएगी |
2 सालों में 14 लाख से ज्यादा हुआ पलायन
पाकिस्तान की इस रिपोर्ट ने चिंता पैदा कर दी है. रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 तक करीब 6.87 लाख लोगों ने विदेश में नौकरियों के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है. वहीं, पिछले साल 2024 में 7.27 लाख से अधिक लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. यानी पिछले 2 सालों के बढ़ते आंकड़े पाकिस्तान के लिए चिंताजनक हैं. यह न सिर्फ मजदूरों या खाड़ी देशों में कमाने जा रहे लोगों तक सीमित है, बल्कि इसमें काफी पढ़े-लिखे प्रतिभा के धनी लोग शामिल हैं, जो लगातार देश छोड़ रहे हैं
सोशल मीडिया पर मुनीर बने मजाक
आंकड़ों ने सोशल मीडिया पर बहस का नया मुद्दा खड़ा कर दिया है. टारगेट पर हैं आसिम मुनीर, क्योंकि उन्होंने अभी कुछ महीनों पहले ही अमेरिका में पाकिस्तान प्रवासियों को संबोधित करते हुए देश के पढ़े-लिखे युवाओं और स्किल प्रोफेशनल्स के पलायन को लेकर ‘ब्रेन ड्रेन’ की धारणा को खारिज करते हुए ‘ब्रेन गेन’ बताया. अब इस बयान की काफी आलोचना हो रही है. सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि किसी प्रकार की सख्ती दिखाकर सरकार पलायन को कम नहीं कर सकती है, प्रतिभा पलायन को रोकने के लिए सरकार को अच्छे अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है |
यूरोप पर मंडराया खतरा, बेलारूस में रूस करेगा हाइपरसोनिक मिसाइल तैनात
27 Dec, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के दो शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन के आधार पर दावा किया कि रूस, पूर्वी बेलारूस में नई हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात करने की तैयारी कर रहा है. अगर रूस इन मिसाइलों की तैनाती करता है तो यूरोप में रूस की मिसाइल हमले की क्षमता पहले की अपेक्षा और मजबूत हो जाएगी. ये मिसाइलें पुराने एयरबेस पर परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं |
शोधकर्ताओं के अनुसार, बेलारूस के क्रिचेव शहर में एक पुराने एयरबेस के पास मोबाइल ओरेशनिक मिसाइल लॉन्चर तैनात किए जाएंगे. क्रिचेव शहर रूस की राजधानी मिन्स्क से करीब 300 किमी. पूर्व और मॉस्को से करीब 480 किमी. दूर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है. शोधकर्ताओं ने कैलिफोर्निया स्थित मिडलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज और CNA रिसर्च एंड एनालिसिस ऑर्गनाइजेशन की मदद से कमर्शियल सैटैलाइट कंपनी की तस्वीरों के आधार पर विश्वलेषण किया |
कितनी खतरनाक है Oreshnik हाइपरसोनिक मिसाइल?
Oreshnik एक इंटरमीडिएट-रेंज हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता करीब साढ़े 5 हजार किमी. बताई जाती है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, बेलारूस में इन मिसाइलों को पहले भी तैनात करने की बात कर चुके हैं |लेकिन उन्होंने इसके लिए जगह नहीं बताई थी. रूस ने इसका परीक्षण नवंबर 2024 में किया था. पुतिन के अनुसार यह मिसाइल मैक-10 से ज्यादा तेज रफ्तार से उड़ने में सक्षम है, जिसे रोक पाना असंभव है |
शीत युद्ध के बाद पहली बार क्षेत्र के बाहर तैनाती
रूस के Oreshnik की तैनाती की खबर उस दौरान आई है, जब New Start संधि को खत्म होने में गिने-चुने दिन ही बचे हैं. सैन्य हथियारों को लेकर यह अमेरिका और रूस के बीच की आखिरी सबसे बड़ी संधि मानी जा रही है. पुतिन ने पिछले साल दिसंबर 2024 में भी बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको से मुलाकात की थी. इस दौरान कहा था कि Oreshnik मिसाइलें बेलारूस में तैनात की जा सकती हैं. रूस के लिए भी यह शीत युद्ध के बाद पहली बार होगा कि जब अपने सीमा क्षेत्र के बाहर हथियारों की तैनाती कर रहा है |
10 Oreshnik मिसाइलें तैनात करने की तैयारी
बता दें, मिसाइल को लेकर बेलारूस के राष्ट्रपति ने पिछले हफ्ते ही कहा था की हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल तैनात कर दी गई हैं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि किस जगह पर ये मिसाइलें तैनात की गई हैं. हालांकि, उन्होंने ये जरूर बताया कि 10 Oreshnik मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं. फिलहाल, इन्हें कहां तैनात किया जाएगा, इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है |
अमेरिका को टक्कर, इस मुस्लिम देश ने भेजा 11 हजार भारतीयों को देश वापिस
27 Dec, 2025 11:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सऊदी में बड़ी तादाद में भारतीय कारोबार, रोजगार से लेकर इबादत के मकसद तक से जाते हैं. हाल ही में इसी बीच एक आंकड़ा सामने आया जिसमें बड़ा खुलासा हुआ. इसमें सामने आया कि अमेरिका नहीं सऊदी अरब ने सबसे बड़ी तादाद में भारतीयों को डिपोर्ट किया है. राज्यसभा में पेश किए गए विदेश मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में 81 देशों से 24 हजार 600 से ज्यादा भारतीयों को डिपोर्ट किया गया |
इनमें सबसे ज्यादा निर्वासन अमेरिका से नहीं, बल्कि सऊदी अरब से हुए, जहां 12 महीनों में 11 हजार से ज्यादा भारतीयों को वापस भेजा गया. इसके मुकाबले, 2025 में अमेरिका से सिर्फ 3,800 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया, जिनमें ज्यादातर प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारी थे. रिपोर्ट के अनुसार, यह संख्या पिछले 5 सालों में अमेरिका से दर्ज की गई सबसे ज्यादा निर्वासन संख्या है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी वजह ट्रंप प्रशासन की ओर से हाल में की गई सख्ती और दस्तावेजों, वीजा स्थिति, कार्य-अनुमति, वीजा पीरियड से अधिक ठहरने जैसे मामलों की बढ़ी हुई जांच है |
किस-किस देश ने भारतीयों को किया डिपोर्ट
पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा भारतीयों को डिपोर्ट सऊदी ने किया. सऊदी ने 11 हजार भारतीयों को निर्वासित किया. वहीं, अमेरिका ने 3,800 को बाहर किया. अमेरिका से किए गए ज्यादातर निर्वासन वॉशिंगटन डीसी (3,414) और ह्यूस्टन (234) से हुए. जिन अन्य देशों से बड़ी संख्या में भारतीयों को निर्वासित किया गया, उनमें म्यांमार (1,591), यूएई (1,469), बहरीन (764), मलेशिया (1,485), थाईलैंड (481) और कंबोडिया (305) शामिल हैं |
क्या है डिपोर्ट करने की वजह
विदेश मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, खासकर खाड़ी देशों से बड़ी संख्या में हुए डिपोर्ट की वजह वीजा या रेजिडेंसी पीरियड से ज्यादा समय तक देश में रहना, वैध कार्य-अनुमति के बिना देश में काम करना, श्रम कानूनों का उल्लंघन करना, नियोक्ता से फरार होना, आपराधिक मामलों में शामिल होना शामिल है |
तेलंगाना सरकार की एनआरआई सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष भीमा रेड्डी ने कहा, खाड़ी देशों में बड़ी तादाद में भारतीय काम करने के लिए जाते हैं. यह खाड़ी देशों में एक आम पैटर्न है. यहां लोग निर्माण क्षेत्र में मजदूरी करते हैं, देखभालकर्ता बनते हैं या घरेलू कामकाज में लगे रहते हैं. इनमें ज्यादातर लोग ऐसे होते हैं जो कम-कुशल श्रमिक होते हैं जो एजेंटों के जरिए से इन देशों में जाते हैं और कई मामलों में और ज्यादा पैसे कमाने की कोशिश में छोटे-मोटे अपराधों में फंस जाते हैं |
उन्होंने आगे कहा, कुछ मामलों में स्थानीय कानूनों और नियमों के बारे में जागरूकता की कमी भी महंगी पड़ती है. कई बार ये लोग जो खाड़ी देशों में जाते हैं यह जागरूक नहीं होते और एजेंट इनके साथ धोखाधड़ी कर देते हैं. यह मजदूर धोखाधड़ी के शिकार बन जाते हैं और विदेश में पुलिस इन्हें पकड़ लेती है और फिर डिपोर्ट कर दिया जाता है |
म्यांमार-कंबोडिया में बढ़ रहा साइबर क्राइम
हालांकि, म्यांमार और कंबोडिया जैसे देशों में निर्वासन का पैटर्न अलग है. रेड्डी के अनुसार, इनमें से ज्यादातर मामले साइबर क्राइम से जुड़े हैं. ये देश बहु-अरब डॉलर के साइबर अपराध उद्योग के प्रमुख केंद्र बन गए हैं, जहां भारतीयों को हाई सैलरी वाली नौकरी का वादा करके फंसाया जाता है, फिर उन्हें अवैध गतिविधियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है और गिरफ्तार करके डिपोर्ट कर दिया जाता है |
तेलंगाना ओवरसीज मैनपावर कंपनी की नागा भारानी के अनुसार, इसलिए यह अहम है कि मजदूरों को विदेश पहुंचने से पहले नियमों की जानकारी दी जाए. उन्होंने कहा, लोगों को अपने वीजा की समय-सीमा पर नजर रखने और स्थानीय नियमों का पालन करने के लिए कहा जाना चाहिए. वीजा विस्तार के लिए आवेदन करने का हमेशा विकल्प मौजूद होता है |
विद्यार्थियों के निर्वासन की बात करें तो 2025 में ब्रिटेन से सबसे ज्यादा 170 भारतीय छात्रों को देश वापस भेजा गया. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया (114), रूस (82) और अमेरिका (45) से सबसे ज्यादा डिपोर्ट किया गया |
नाइजीरिया में ISIS पर अमेरिका का बड़ा हमला, ट्रंप के आदेश पर हुए घातक एयरस्ट्राइक
26 Dec, 2025 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Nigeria ISIS Airstrike : के तहत अमेरिका ने नाइजीरिया में सक्रिय ISIS आतंकियों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान चलाया है। गुरुवार रात उत्तर-पश्चिमी नाइजीरिया में कई घातक और सटीक हवाई हमले किए गए। इस कार्रवाई की पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की है। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन सीधे उनके आदेश पर अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा अंजाम दिया गया।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ISIS आतंकी लंबे समय से इलाके में ईसाइयों को निशाना बनाकर उनकी हत्या कर रहे थे। लगातार मिल रही इन हिंसक घटनाओं की जानकारी के बाद अमेरिका ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया। राष्ट्रपति ने साफ कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि आतंकियों को पहले कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन जब हमले नहीं रुके तो Nigeria ISIS Airstrike के जरिए उनके ठिकानों को निशाना बनाया गया। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग ने आतंकियों के ठिकानों पर “परफेक्ट स्ट्राइक” की और यह साबित किया कि ऐसी सैन्य क्षमता केवल संयुक्त राज्य अमेरिका के पास है।
हवाई हमलों के साथ ट्रंप ने आतंकियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका उनके नेतृत्व में कट्टर आतंकवाद को पनपने नहीं देगा। उन्होंने अमेरिकी सेना की खुलकर सराहना की और कहा कि सैनिकों ने एक बार फिर देश की ताकत और संकल्प को दुनिया के सामने रखा है।
क्रिसमस के मौके पर ट्रंप का बयान चर्चा में रहा। उन्होंने सेना को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “भगवान हमारी सेना को आशीर्वाद दें। मेरी क्रिसमस—यहां तक कि मरे हुए आतंकियों को भी।” Nigeria ISIS Airstrike को अमेरिका की आतंकवाद विरोधी नीति का कड़ा संदेश माना जा रहा है।
खालिदा जिया के बेटे की 17 साल बाद बांग्लादेश वापसी,एयरपोर्ट पर एक लाख लोग पहुंचे, 3 घंटे रोड शो किया
26 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका । बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान 17 साल बाद देश लौट आए हैं। वे गिरफ्तारी से बचने के लिए 2008 में लंदन भाग गए थे। तब हसीना सरकार में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले चल रहे थे। तारिक के स्वागत में उनकी पार्टी बीएनपी के 1 लाख से ज्यादा कार्यकर्ता जुटे। ढाका एयरपोर्ट से लेकर 300 फीट रोड तक रोड शो किया। इस 13 किलोमीटर के रास्ते को कवर करने में उन्हें 3 घंटे का समय लगा। 300 फीट रोड पर तारिक ने 17 मिनट भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम देश में शांति कायम करेंगे और नया बांग्लादेश बनाएंगे। हालांकि उन्होंने शेख हसीना को लेकर एक शब्द भी नहीं कहा। तारिक रहमान ने अपने भाषण में कहा ह िआज बांग्लादेश की जनता बोलने का अपना अधिकार वापस पाना चाहती है। उन्होंने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर देश का निर्माण करें। यह देश पहाड़ों और मैदानों के लोगों का है, मुसलमानों, हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों का है। हम एक सुरक्षित बांग्लादेश बनाना चाहते हैं, जहां हर महिला, पुरुष और बच्चा सुरक्षित रूप से घर से निकल सके और लौट सके।
तारिक ने भाषण में कहा कि उनके पास देश को बेहतर बनाने के लिए एक प्लान है। उन्होंने कहा कि चाहे पुरुष हों, महिलाएं हों या बच्चे, बांग्लादेश की शांति और गरिमा को बनाए रखना हमेशा हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। हम सब मिलकर काम करेंगे और अपने बांग्लादेश का निर्माण करेंगे। तारिक रहमान ने अपने भाषण में कहा कि उनकी यही इच्छा है कि बांग्लादेश का हर आदमी सुरक्षित रहे। उन्होंने सभी से हिंसा से बचने और मिलकर देश के निर्माण में योगदान देने को कहा।
बांग्लादेश में फिर भीड़ हिंसा का कहर: 29 वर्षीय हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या, इलाके में तनाव
26 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका । बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा की एक और गंभीर घटना सामने आई है। राजबाड़ी जिले के पांग्शा उपज़िला क्षेत्र में बुधवार देर रात 29 वर्षीय हिंदू युवक की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान अमृत मंडल उर्फ सम्राट के रूप में हुई है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब कुछ ही दिन पहले दिपु चंद्र दास की हत्या को लेकर देश में पहले से ही तनाव का माहौल बना हुआ है।
पुलिस के अनुसार, यह घटना बुधवार रात करीब 11 बजे होसैनडांगा ओल्ड मार्केट इलाके में हुई। स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर अमृत मंडल पर जबरन वसूली (उगाही) का आरोप लगाया, जिसके बाद मामला बहस से बढ़ते हुए हिंसा में बदल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ ही देर में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और अमृत मंडल पर लाठी-डंडों और मुक्कों से हमला कर दिया गया। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पांग्शा मॉडल पुलिस स्टेशन के प्रभारी शेख मोइनुल इस्लाम ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि अमृत मंडल पुलिस रिकॉर्ड में “सम्राट बहिनी” नामक एक स्थानीय समूह के नेता के रूप में दर्ज था। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि स्थानीय लोगों के साथ किसी विवाद के बाद स्थिति बेकाबू हो गई और भीड़ हिंसा में तब्दील हो गई। हालांकि, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि आरोपों की सच्चाई की जांच की जा रही है और कानून को हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मृतक अमृत मंडल, अक्षय मंडल का पुत्र था और होसैनडांगा गांव का निवासी था। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई है और संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
इस घटना ने एक बार फिर बांग्लादेश में भीड़ हिंसा और अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कानून व्यवस्था की कमजोरी और त्वरित न्याय की कमी के कारण ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं। उनका आरोप है कि अफवाहों या आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को सरेआम पीट-पीटकर मार देना लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
भारत सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना को लेकर चिंता जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह भीड़ हिंसा पर प्रभावी नियंत्रण लगाए और अल्पसंख्यकों में सुरक्षा का भरोसा बहाल करे। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और दोषियों की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
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