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अफगानिस्तान में भारी बारिश और बाढ़ से भारी तबाही, अब तक12 की मौत
3 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल। युद्ध और आर्थिक संकट से जूझ रहे अफगानिस्तान के लिए नई मुसीबत कुदरत के कहर के रूप में सामने आई है। देश के विभिन्न हिस्सों में पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश और भारी बर्फबारी ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण कई प्रांतों में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक कम से कम 12 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, इस आपदा में 11 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जबकि कई अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
बाढ़ का सबसे भीषण प्रभाव कपिसा, परवान, कंधार, हेलमंद, हेरात और बदख्शां समेत कई प्रमुख प्रांतों में देखा गया है। मूसलाधार बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं और बाढ़ का पानी रिहाइशी इलाकों में घुस गया है। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 1,859 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से ढह गए हैं, जिससे हजारों परिवार कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुँचा है; करीब 209 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कें पानी में बह गई हैं, जिससे प्रभावित इलाकों का संपर्क मुख्य शहरों से कट गया है। बिजली गुल है और स्वच्छ पेयजल के साथ-साथ खाद्य सामग्री की आपूर्ति भी ठप हो गई है।
कृषि और पशुपालन पर आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी इस बाढ़ ने करारा झटका दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 13,941 एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे तैयार फसलें बर्बाद हो गई हैं। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन रहे करीब 1,200 पशुओं की भी इस आपदा में मौत हो गई है। आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन खराब मौसम और कटे हुए रास्तों के कारण सहायता पहुँचाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।अफगानिस्तान में मानवीय स्थिति पहले से ही बेहद नाजुक बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2026 में देश की लगभग 2.19 करोड़ आबादी को मानवीय सहायता की तत्काल आवश्यकता होगी। जलवायु परिवर्तन के कारण बार-बार आने वाले सूखे, भूकंप और अब इस भीषण बाढ़ ने हालात को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। साथ ही, पड़ोसी देशों से लौट रहे लाखों शरणार्थियों के कारण स्थानीय संसाधनों और बुनियादी सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि मानवीय साझेदार भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और आश्रय के लिए करोड़ों डॉलर की सहायता योजना पर काम कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान आपदा ने इन प्रयासों के सामने एक नई और बड़ी चुनौती पेश कर दी है। आने वाले दिनों में यदि मौसम नहीं सुधरा, तो संकट और अधिक गहरा सकता है।
बांग्लादेश: उस्मान हादी की हत्या में जमात-ए-इस्लामी के अंदरूनी सत्ता संघर्ष का खुलासा
3 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका । बांग्लादेश की राजनीति को झकझोर देने वाली शरीफ उस्मान हादी की हत्या को लेकर बड़ा राजनीतिक खुलासा सामने आया है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, यह हत्या किसी बाहरी साजिश का नहीं, बल्कि जमात-ए-इस्लामी के भीतर चल रहे सत्ता संघर्ष का नतीजा हो सकती है। दावा किया जा रहा है कि हादी की बढ़ती लोकप्रियता से संगठन के कट्टरपंथी नेतृत्व में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, शरीफ उस्मान हादी खासकर युवाओं और छात्र वर्ग में तेजी से लोकप्रिय हो रहे थे। आगामी 12 फरवरी को होने वाले चुनावों से पहले वे एक मजबूत राजनीतिक फैक्टर बन चुके थे। उनका उभरता प्रभाव जमात की पारंपरिक राजनीति और पुराने नेतृत्व के लिए सीधी चुनौती माना जा रहा था। इसी वजह से संगठन के भीतर एक गुट उन्हें “रास्ते से हटाने” के पक्ष में आ गया। बताया जा रहा है कि हादी की हत्या की साजिश ढाका स्थित जमात-ए-इस्लामी के कार्यालय में रची गई। सूत्रों का दावा है कि शुरुआत में हत्या की सुपारी एक करोड़ टका में तय करने की बात हुई थी, लेकिन रकम को लेकर संगठन के भीतर ही मतभेद उभर आए। एक धड़ा इसे बड़ी राजनीतिक बाधा बताते हुए ज्यादा रकम देने के पक्ष में था, जबकि दूसरा गुट खर्च कम रखने पर अड़ा रहा। इसी खींचतान के दौरान मामला अंदरूनी तौर पर लीक होने की बात कही जा रही है। शूटर को अलग से बड़ी रकम देने पर सहमति बनने का भी दावा है।
इस बीच, हादी की हत्या को भारत से जोड़ने की कोशिशें भी की गईं। आरोप लगाया गया कि आरोपी भारत भागकर मेघालय में छिपे हैं, लेकिन इस थ्योरी के समर्थन में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया। दुबई भागने की कहानी भी गढ़ी गई, पर वहां भी प्रमाणों का अभाव रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति, कट्टरपंथी संगठनों के भीतर की दरार और सत्ता संघर्ष की तस्वीर पेश करता है।
'दक्षिण एशिया में भारत का नेतृत्व जरूरी', श्रीलंका विपक्षी नेता सजिथ प्रेमदासा सेजानिए क्या कहा?
2 Jan, 2026 05:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीलंका में मुख्य विपक्षी पार्टी समगी जना बेलावेगया (एसजेबी) के राजनेता और विपक्ष के नेता सजिथ प्रेमदासा ने भारत के नेतृत्व को लेकर बात की है। एक इंटरव्यू में प्रेमदासा ने कहा है कि हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने और पूरे दक्षिण एशिया में लंबे समय तक शांति बनाए रखने के लिए भारत का नेतृत्व आवश्यक है। कोलंबो में एक इंटरव्यू में प्रेमदासा ने कहा कि भारत के राष्ट्रीय हित और श्रीलंका के राष्ट्रीय हित साफ तौर पर एक जैसे हैं, जो दोनों पड़ोसी देश आपसी सम्मान, समझ और रचनात्मक सहयोग की नींव बनाते हैं। भारत को एक वैश्विक महाशक्ति बताते हुए प्रेमदासा ने कहा कि इस सच्चाई को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाना चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपने समर्थन को दोहराते हुए कहा कि यह मौजूदा वैश्विक शक्ति संतुलन को दिखाएगा।
प्रेमदासा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय सरकार की हालिया नीतियों की तारीफ की, और कहा कि भारत ने आर्थिक कठिनाई और संकट के समय श्रीलंकाई लोगों का समर्थन करने के लिए प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत भारत-श्रीलंका संबंधों ने श्रीलंकाई लोगों की बुनियादी आर्थिक, सामाजिक, स्वास्थ्य और विकास संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करके ठोस फायदे पहुंचाए हैं। साक्षात्कार के दौरान प्रेमदासा ने कहा, "क्षेत्र में भारत का नेतृत्व बहुत महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक सुरक्षा दोनों को बढ़ावा देने के लिए बहुत जरूरी है।" उन्होंने आगे कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध फल-फूल रहे हैं और श्रीलंका के लिए मूल्य जोड़ना जारी रखे हुए हैं। दक्षिण एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर बात करते हुए प्रेमदासा ने बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता के महत्व पर जोर दिया, खासकर आने वाले चुनावों के संदर्भ में। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में स्थिरता लोकतंत्र को मजबूत करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि बांग्लादेशी लोगों की आवाज, आकांक्षाएं और संप्रभु अधिकार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से दिखाए जाएं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि बांग्लादेश के चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होंगे, जिसके परिणामस्वरूप लोगों की इच्छा की सच्ची झलक मिलेगी। जब उनसे बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के SAARC को फिर से सक्रिय करने के आह्वान पर उनके विचारों के बारे में पूछा गया, तो प्रेमदासा ने कहा कि दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) जैसे बहुपक्षीय ढांचे शांति, बातचीत और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए प्रासंगिक बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि SAARC ने ऐतिहासिक रूप से चर्चा, सहयोग और संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया है। समावेशी विकास पर जोर देते हुए प्रेमदासा ने कहा कि समृद्धि साझा होनी चाहिए और समानता, न्याय और निष्पक्षता जैसे सामाजिक लोकतांत्रिक मूल्यों में निहित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक कार्यात्मक सार्क क्षेत्रीय शांति, समृद्धि और दीर्घकालिक स्थिरता को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
'प्रदर्शनकारियों पर हिंसा का मुंहतोड़ जवाब मिलेगा'; ट्रंप ने ईरान को चेताया
2 Jan, 2026 01:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान । ईरान में आर्थिक संकट के बीच जनता सड़क पर उतर आई है। राजधानी तेहरान से लेकर देश के कई शहरों में हिंसक विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ विरोध के स्वर तेज हैं। देश की मुद्रा में लगातार गिरावट, भारी महंगाई और रोजगार के मुद्दे पर लोग उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की खबर सामने आ रही है, जिसमें कई लोगों के मारे जाने की खबर है। इस बीच ईरान में फैली अशांति को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी जारी है।
हिंसा के बीच डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (02 जनवरी) को कहा कि अगर ईरानी अधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा का इस्तेमाल करते हैं, तो संयुक्त राज्य अमेरिका जवाबी कार्रवाई के लिए पूरी तरह से तैयार है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपने एक पोस्ट में लिखा, "अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाता है और उन्हें बेरहमी से मारता है, जो कि उनकी आदत है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा। हम पूरी तरह से तैयार हैं।'
विरोध प्रदर्शन के बीच अब तक सात लोगों की मौत
ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। राजधानी तेहरान में शुरू हुआ ये प्रदर्शन अन्य शहरों के साथ ग्रामीण इलाकों तक पहुंच गया है। प्रदर्शनकारियों ने कई सड़कों को ब्लॉक कर दिया है। हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर चुके हैं। प्रदर्शन की शुरुआत तेहरान के ग्रैंड बाजार के दुकानदारों से हुई, जो धीरे धीरे देशव्यापी प्रदर्शन में बदल गया।
नए साल पर जयशंकर के लिए बलूचिस्तान से आया खुला पत्र, लिखा- पाकिस्तान को उखाड़ फेंको, हम भारत के साथ
2 Jan, 2026 11:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बलूचिस्तान। पाकिस्तान के बलूचिस्तान के निर्वासित बलोच नेता मीर यार बलोच ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक खुला पत्र लिखा है। इस ओपन लेटर में मीर यार बलोच ने भारत और बलूचिस्तान के बीच ऐतिहासिक संबंधों के बारे में बताते हुए सहयोग बढ़ाने की अपील की। उन्होंने बलूचिस्तान के छह करोड़ नागरिकों की ओर से भारत के 140 करोड़ लोगों को नए साल की शुभकामनाएं दीं।
बलोच नेता ने भारत के साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का दिया हवाला
इस खुले पत्र में एक ओर मीर यार बलोच ने भारत और बलूचिस्तान के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और वाणिज्यिक रिश्तों का जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने भारत से पाकिस्तान को जड़ से उखाड़ फेंकने की मांग भी कर डाली। बलोच नेता ने कहा कि इस मामले में बलूचिस्तान का हर नागरिक भारत के साथ है। इस खुले पत्र में बलोच नेता ने लिखा, हिंगलाज माता मंदिर जैसे पवित्र स्थल हमारी साझा विरासत के प्रतीक हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के लिए मोदी सरकार की तारीफ की
बलोच नेता ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की और मोदी सरकार की साहसिक और दृढ़ कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने लिखा, बलूचिस्तान के लोग बीते 69 वर्षों से पाकिस्तान का दमन झेल रहे हैं। अब समय आ गया है कि इस गंभीर समस्या को जड़ से उखाड़ फेंका जाए और हमारे देश की संप्रभुता सुनिश्चित की जाए। चिट्ठी में चीन और पाकिस्तान के बढ़ते गठजोड़ पर चिंता जताई गई है और कहा गया है कि अगर बलूचिस्तान की स्वतंत्र सेनाओं को जल्द ही मजबूत नहीं किया गया तो हो सकता है कि चीन यहां अपने सैनिक तैनात कर दे। बलूचिस्तान में चीनी सैनिकों की उपस्थिति भविष्य में भारत और बलूचिस्तान दोनों के लिए खतरा और चुनौती होगी।
जर्मनी में भारतीय छात्र की मौत, आग से बचने की कोशिश में अपार्टमेंट से कूदा; घर पर पसरा मातम
2 Jan, 2026 10:24 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बर्लिन। जर्मनी की राजधानी बर्लिन में एक भारतीय छात्र की बुधवार की रात भीषण अग्निकांड में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि उनके अपार्टमेंट में भीषण आग लगी। आग और घने धुएं से बचने की कोशिश में छात्र अपार्टमेंट की ऊपरी मंजिल से कूद गया और उसके सिर पर चोटें आईं। उसे पास के अस्पताल में ले जाया गया। लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान तेलंगाना के जंगांव जिले के मल्कापुर गांव निवासी रितिक रेड्डी (25 वर्षीय) के रूप में हुई है। संक्रांति के त्योहार पर उनका परिवार उनके घर लौटने का इंतजार कर रहा था। लेकिन नए साल के पहले दिन यह हादसा हो गया। उनके निधन की खबर सुनकर घर शोक में डूब गया। परिवार अब उनके असामयिक निधन से सदमे में है। रिपोर्ट के मुताबिक, रितिक रेड्डी यूरोप विश्वविद्यालय से एमएस की पढ़ाई के लिए जून 2023 में जर्मनी के मैगडेबर्ग गए थे। उन्होंने 2022 में वाग्देवी इंजीनियरिंग कॉलेज से स्नातक किया था। बताया जा रहा है कि रितिक ने दशहरा के समय छुट्टी को टाल दिया और योजना बनाई थी कि जनवरी के दूसरे सप्ताह में संक्रांति के लिए घर लौटेंगे।जर्मनी के स्थानीय अधिकारी आग लगने के कारण की जांच कर रहे हैं। इसी बीच, रितिक का परिवार और उनके मित्र तेलंगाना से विदेश मंत्रालय (एमईए) और जर्मनी में भारतीय दूतावास से संपर्क कर रहे हैं, ताकि उनके शव को उनके घर गांव लाने की प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सके। पिछले महीने जंगांव जिले की सहज रेड्डी उदुमला (24 वर्षीय महिला) की अमेरिका में घर की आग लगने के कारण मौत हो गई थी। सहज रेड्डी 2021 में उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गई थीं। वह न्यूयॉर्क के अल्बानी में रह रही थीं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग पड़ोसी भवन से शुरू हुई और तेजी से सहज के घर तक फैल गई। बताया गया कि आग लगने के समय वह सो रही थीं और बाहर नहीं निकल पाईं।
नए साल के जश्न के बीच स्विटजरलैंड में बम धमाका, बार में हुआ ब्लास्ट, कई लोगों के मारे जाने की आशंका
1 Jan, 2026 02:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नए साल के जश्न के बीच स्विटजरलैंड में बम धमाका हुआ है. जिसमें कई लोगों की मौत की खबर आ रही है. यह हादसा उस दौरान हुआ जब बार में पार्टी चल रही थी और भारी भीड़ मौजूद थी. फिलहाल, मौके पर पहुंची पुलिस की टीम ने घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करा दिया है, जहां इलाज जारी है. पुलिस के अनुसार, यह धमाका गुरुवार की सुबह क्रैंस मोंटाना के लग्जरी अल्पाइन स्की रिजॉर्ट में हुआ. हालांकि अभी तक यह जानकारी सामने नहीं आई है कि आखिर यह धमाका कैसे हुआ? स्विटजरलैंड मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस हादसे में कई लोगों की मौत हो गई है और कई घायल हैं.
जश्न के बीच धमाका, कई लोगों की मौत
बता दें, हादसा उस दौरान हुआ जब बार में नए साल की पार्टी चल रही थी. ले कॉन्स्टेलेशन बार पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है. इसलिए यहां पर हमेशा भीड़ रहती है लेकिन नए साल की वजह से भीड़ पहले की अपेक्षा ज्यादा ही थी. अब इस हादसे का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दिखाई दे रहा है कि धमाके के तुरंत बाद ही बार पूरी तरह से आग की लपटों में घिर गया. मौके पर काफी चीख-पुकार मच गई. इस घटना का वीडियो किसी राहगीर ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया. जो अब वायरल हो रहा है.
जांच में जुटी पुलिस
पुलिस की टीम धमाके के बाद एक्टिव हो गई है और जांच में जुट गई है. दक्षिण-पश्चिमी स्विट्जरलैंड के वालिस कैंटन में पुलिस प्रवक्ता गेटान लैथियन ने बताया कि अभी तक धमाके की वजह साफ नहीं हो पाई है. पूरे मामले की जांच की जा रही है. जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि आखिर यह धमाका कैसे हुआ. फॉरेंसिक टीमें सबूत जुटाने का प्रयास कर रही हैं और बार में मौजूद लोगों से भी पूछताछ की जा रही है.
Switzerland Blast: नए साल के जश्न के बीच स्विटजरलैंड में बम धमाका, बार में हुआ ब्लास्ट, कई लोगों के मारे जाने की आशंका
1 Jan, 2026 01:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Switzerland Blast: नए साल के जश्न के बीच स्विटजरलैंड में बम धमाका हुआ है. जिसमें कई लोगों की मौत की खबर आ रही है. यह हादसा उस दौरान हुआ जब बार में पार्टी चल रही थी और भारी भीड़ मौजूद थी. फिलहाल, मौके पर पहुंची पुलिस की टीम ने घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करा दिया है, जहां इलाज जारी है.
रेत के समंदर के बावजूद! सऊदी-UAE क्यों मंगाते हैं ऑस्ट्रेलिया से रेत?
1 Jan, 2026 11:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सुनने में अजीब लग सकता है पर दुनिया के सबसे बड़े रेगिस्तानी देशों में गिने जाने वाले सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को रेत आयात करनी पड़ रही है. सवाल उठता है कि जब इन देशों के पास रेत की कोई कमी नहीं, तो आखिर बाहर से रेत लाने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
दरअसल, सऊदी अरब के भविष्य के शहर, UAE की आसमान छूती इमारतें और अरबों डॉलर के मेगा प्रोजेक्ट्स जिस रेत की मांग करते हैं, वह आम नजर आने वाली रेगिस्तानी रेत से बिल्कुल अलग है. यही फर्क इन देशों को ऑस्ट्रेलिया जैसे दूर-दराज़ के देशों की ओर देखने पर मजबूर कर रहा है. आइए इसे विस्तार से समझते हैं |
रेगिस्तान की रेत क्यों फेल हो जाती है?
रेगिस्तानी रेत के कण इतने चिकने होते हैं कि वे सीमेंट के साथ ठीक से चिपक नहीं पाते. नतीजा यह होता है कि कंक्रीट कमजोर बनती है और भारी इमारतों का वजन सहन नहीं कर पाती. इसलिए ऊंची इमारतों, पुलों, मेट्रो और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में खास किस्म की रेत का इस्तेमाल जरूरी होता है |
ऑस्ट्रेलिया बना रेत का बड़ा सप्लायर
ऑस्ट्रेलिया आज दुनिया के बड़े निर्माण-ग्रेड रेत निर्यातकों में शामिल है. साल 2023 में ऑस्ट्रेलिया ने करीब 273 मिलियन डॉलर की रेत का निर्यात किया. 2023 में सऊदी अरब ने ऑस्ट्रेलिया से करीब 1.4 लाख डॉलर की प्राकृतिक निर्माण योग्य रेत खरीदी. यह सिलसिला 2024 में भी जारी रहा, खासकर तब जब सऊदी अरब ने अपने बड़े प्रोजेक्ट्स को तेज रफ्तार दी
सऊदी अरब का विजन 2030, निओम सिटी, द लाइन, रेड सी प्रोजेक्ट और किद्दिया जैसे प्रोजेक्ट्स भारी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाले कंक्रीट की मांग करते हैं. इन प्रोजेक्ट्स में किसी तरह की गुणवत्ता से समझौता संभव नहीं है। ऐसे में विदेशी रेत आयात करना मजबूरी बन गया है |
बुर्ज खलीफा की कहानी भी यही है
दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा के निर्माण में भी स्थानीय रेगिस्तानी रेत का इस्तेमाल नहीं किया गया. इस इमारत को बनाने के लिए करोड़ों लीटर कंक्रीट, हजारों टन स्टील और विशेष निर्माण सामग्री लगी, जिसमें ऑस्ट्रेलिया से मंगाई गई रेत का अहम योगदान रहा |
UAE और कतर भी इसी राह पर
सिर्फ सऊदी अरब ही नहीं, UAE और कतर भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं. दुबई और अबू धाबी की तेजी से बदलती स्काईलाइन, आर्टिफिशियल आइलैंड्स और बीच प्रोजेक्ट्स के लिए भारी मात्रा में समुद्री और विदेशी रेत का इस्तेमाल किया गया है. पाम जुमैरा जैसे प्रोजेक्ट्स ने स्थानीय रेत संसाधनों पर भारी दबाव डाला |
दुनिया के सामने खड़ी रेत की कमी
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के मुताबिक, हर साल दुनिया में करीब 50 अरब टन रेत की खपत हो रही है. यह दुनिया में सबसे ज्यादा निकाली जाने वाली ठोस प्राकृतिक सामग्री बन चुकी है. अनियंत्रित रेत खनन से नदियों का कटाव, जैव विविधता का नुकसान और पर्यावरण संकट गहराता जा रहा है. इस बढ़ते संकट को देखते हुए कई देश मैन्युफैक्चर्ड सैंड और निर्माण कचरे के दोबारा इस्तेमाल जैसे विकल्पों पर काम कर रहे हैं. सऊदी अरब भी ऐसे समाधानों की तलाश में है, ताकि भविष्य में विदेशी रेत पर निर्भरता कम की जा सके |
S-400 के बाद अगला कदम S-350, रूस ने भारत को दिया एडवांस एयर डिफेंस का प्रस्ताव
31 Dec, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस ने एक बार फिर भारत के साथ सैन्य चर्चा की है, जिसमें मध्यम दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम S-350 वित्याज ऑफर किया है. इसके अलावा अतिरिक्त S-400 रेजिमेंट्स और S-500 सिस्टम पर भी चर्चा हुई | रूस ने जिस एयर डिफेंस सिस्टम S-350 वित्याज को भारत के लिए ऑफर किया है. इसे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ दिया जाएगा. यानी अब भारत में भी कुछ भाग बनाए जा सकते हैं | जिसकी मदद से S-400 ट्रायम्फ बैटरियों को सपोर्ट मिलेगा. रूस इसे तुरंत उपलब्ध कराने के लिए व्यावहारिक विकल्प का ऑफर दिया है. अगर भारत इस ऑफर को स्वीकार करता है तो देश के एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूती मिलेगी |
बता दें, रूस पहले ही तीन S-400 ‘सुदर्शन चक्र’ भारत को दे चुका है और दो अभी और आने वाले हैं. ‘सुदर्शन चक्र’ की ताकत आपरेशन सिंदूर के समय दुनिया ने देखी. इसकी डील 2019 में हुई थी | अगर बचे दोनों S-400 पहुंच जाएंगे तो भारत के पास कुल 5 S-400 हो जाएंगे. इसके साथ ही इसके अपग्रेड वर्जन S-500 पर भी बातचीत चल रही है. जानिए क्या है S-350 वित्याज की खासियत और कैसे करेगा काम?
S-350 की क्या है खासियत?
S-350 मुख्य रूप से पुराने वाले S-300PS को रिप्लेस करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो मध्यम दूरी के लिए सबसे बेस्ट माना जा रहा है |
ऊंचाईः S-350 करीब 20 से 30 किलोमीटर की ऊंचाईे तक इंटरसेप्ट कर सकता है.
रेंजः इसकी रेंज करीब 120 किमी. तक रहती है, जबकि बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए 25 से 30 किमी. तक रेंज है |
मिसाइलेंः इसमें मुख्य रूप से एक लॉन्चर में 12 मिसाइलें लोड हो जाती हैं. 9M96E, 9M96E2 और 9M100 मिसाइलों का इसमें सबसे अधिक प्रयोग किया जा सकता है |
क्षमताः S-350 एक साथ 16 टार्गेट्स या 12 बैलिस्टिक टारगेट्स को ट्रैक और अटैक कर सकता है |
फीचर्सः इसमें काफी सारे फीचर्स दिए गए हैं, जो S-400 में दिए गए हैं. यह क्रूज मिसाइलें, प्रिसिजन गाइडेड बम, ड्रोन और स्टेल्थ टारगेट्स को रोकने में सक्षम है |
सीमावर्ती देशों के पास हैं खतरनाक हथियार
भारत के उत्तर पूर्व दिशा में चीन और पश्चिम दिशा में पाकिस्तान यानी दो तरफा सीमाएं हैं. बड़ी बात यह भी है कि इन दोनों देशों के पास खतरनाक लड़ाकू विमान, बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और ड्रोन हैं. ऐसे में भारत के पास भी आधुनिक हथियार होने बहुत जरूरी हैं. अगर भारत के पास S-350 एयर डिफेंस सिस्टम आता है तो इससे सैन्य ताकतों को बढ़ावा मिलेगा. यह सिस्टम रूस की लेयर्ड एयर डिफेंस स्ट्रेटजी का हिस्सा है |
खाड़ी की राजनीति में भूचाल, UAE और सऊदी की लड़ाई में इजराइल को फायदा?
31 Dec, 2025 06:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मिडिल ईस्ट और हॉर्न ऑफ अफ्रीका की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी दिख रही है. 26 दिसंबर 2025 को इजराइल ने सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी. इसके बाद अब चर्चा है कि इजराइल और उसके सहयोगी देश दक्षिण यमन को भी देश के तौर पर मान्यता दे सकते हैं | यमन को लेकर सऊदी अरब और यूएई के हित आपस में टकरा रहे हैं. इस हालात से इजराइल को रणनीतिक फायदा मिलता दिख रहा है |
दक्षिण यमन की मांग क्यों हो रही?
दक्षिण यमन पहले एक अलग देश रह चुका है और उसकी सीमाएं साफ तौर पर तय हैं. यहां की राजनीतिक संस्कृति उत्तर यमन की तुलना में ज्यादा उदार मानी जाती है. सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) ने यहां एक काम करने वाला प्रशासन खड़ा किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मान्यता न मिलने से उसकी स्थिति कमजोर बनी हुई है |
STC की स्थापना साल 2017 में हुई थी. इस संगठन का नेतृत्व एदरस अल-जोबैदी करते हैं. इसका मुख्यालय यमन के दक्षिणी शहर अदन में है. STC खुद को दक्षिण यमन की आवाज बताता है और उसका मकसद है यमन को दो हिस्सों में बांटना और एक अलग दक्षिणी देश बनाना | इसके समर्थक लगातार दक्षिण यमन का पुराना झंडा लहराते हैं और खुले तौर पर अलग मुल्क की मांग करते हैं |
दक्षिण यमन से इजराइल को क्या फायदा?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर दक्षिण यमन को मान्यता मिलती है, तो ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे संगठनों का असर कम होगा | साथ ही रेड सी और अरब सागर के अहम समुद्री रास्तों पर नियंत्रण मजबूत किया जा सकेगा | यूएई और सऊदी के बीच यमन को लेकर चल रही खींचतान में इजराइल इस स्थिति का फायदा उठा सकता है | इसी वजह से सवाल उठ रहा है कि क्या खाड़ी क्षेत्र में एक नया देश बनने की राह तैयार हो रही है |
किसी देश को मान्यता कैसे दी जाती है?
किसी देश को मान्यता देने का मतलब होता है यह स्वीकार करना कि वह एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है. आमतौर पर मान्यता दो तरीकों से दी जाती है. पहला तरीका औपचारिक होता है, जिसमें कोई देश आधिकारिक घोषणा करता है. यह घोषणा राष्ट्रपति या विदेश मंत्री के बयान, प्रेस कॉन्फ्रेंस, सरकारी नोटिफिकेशन या संसद में प्रस्ताव के जरिए की जाती है |
इसके बाद दूतावास खोलना, राजदूत नियुक्त करना और द्विपक्षीय संधियां करना मान्यता को मजबूत करता है. दूसरा तरीका व्यवहारिक होता है. इसमें बिना औपचारिक घोषणा के भी किसी इकाई को देश की तरह माना जाता है, जैसे उच्च स्तरीय बातचीत करना, आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजना, लंबे समझौते करना या उसके पासपोर्ट को स्वीकार करना |
चीन की नई रणनीति, पड़ोसी देशों में सैन्य अड्डा बना सकता है भारत के लिए चुनौती
31 Dec, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चीन एक बार फिर अपनी बढ़ती सैन्य महत्वाकांक्षाओं को लेकर चर्चा में है. अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) की ताज़ा रिपोर्ट ने संकेत दिए हैं कि चीन न सिर्फ अपनी सेना का तेज़ी से आधुनिकीकरण कर रहा है, बल्कि भारत के आसपास रणनीतिक तौर पर अहम देशों में सैन्य अड्डे बनाने की संभावनाएं भी तलाश रहा है
न्यूज़वीक की तरफ से जारी एक मैप में जिन देशों के नाम सामने आए हैं, उनमें भारत के चार पड़ोसी पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका खास तौर पर ध्यान खींचते हैं. इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या चीन भारत को चारों तरफ से घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है?
नए अड्डों के लिए योजना बना रहा है चीन, पेंटागन का दावा
पेंटागन की रिपोर्ट Military and Security Developments Involving the Peoples Republic of China 2025 के मुताबिक, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) नए विदेशी सैन्य ठिकानों को लेकर सक्रिय रूप से विचार और योजना बना रही है. इन अड्डों का मकसद चीन की नौसेना और वायुसेना को दूर-दराज़ इलाकों तक ऑपरेट करने में मदद देना और जमीनी सुरक्षा बलों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देना है |
भारत के पड़ोस में क्यों बढ़ी चिंता?
रिपोर्ट में जिन देशों का जिक्र है, उनमें भारत के चार पड़ोसी देश- पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं. पाकिस्तान पहले से ही चीन का करीबी साझेदार है और CPEC के ज़रिए दोनों देशों का सैन्य और आर्थिक सहयोग गहरा हुआ है. बांग्लादेश भारत के पूर्वी मोर्चे पर स्थित है और यहां चीन की सैन्य मौजूदगी भारत की सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन सकती है. म्यांमार में चीन पहले से इंफ्रास्ट्रक्चर और बंदरगाह परियोजनाओं में सक्रिय है. वहीं श्रीलंका हिंद महासागर में भारत के लिए बेहद अहम है, जहां चीन की बढ़ती दिलचस्पी पहले ही चिंता का विषय रही है |
अभी कहां-कहां हैं चीन के सैन्य अड्डे?
फिलहाल चीन के पास अपनी सीमा के बाहर दो आधिकारिक सैन्य ठिकाने हैं. पहला, अफ्रीका के जिबूती में स्थित सपोर्ट बेस, जिसे 2017 में स्थापित किया गया था. ये अड्डा हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी नौसेना के अभियानों और समुद्री सुरक्षा मिशनों को समर्थन देता है. दूसरा कंबोडिया में हाल ही में शुरू किया गया संयुक्त लॉजिस्टिक्स और ट्रेनिंग सेंटर, जो दक्षिण चीन सागर में चीन की सैन्य मौजूदगी को मजबूत करता है |
चीन का पक्ष क्या है?
पेंटागन की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत काम करता है और उसकी सैन्य गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक सुरक्षा और शांति स्थापना के लिए हैं. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि जमीनी हकीकत इससे कहीं ज्यादा जटिल है |
कैंसर की वजह से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति की नातिन का निधन, मौत से पहले लिखी दर्दनाक कहानी
31 Dec, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी की नातिन तातियाना श्लॉसबर्ग ( Tatiana Schlossberg) का 35 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है. तातियाना लंबे समय से एक दुर्लभ कैंसर से जूझ रही थीं. यह बीमारी आमतौर पर बुजुर्गों में पाई जाती है, लेकिन किस्मत ने इसे एक युवा मां के हिस्से में डाल दिया. नवंबर 2025 में उन्होंने खुद खुलासा किया था कि वह एक्यूट मायलॉइड ल्यूकेमिया (AML) के एक दुर्लभ प्रकार से पीड़ित हैं |
उनके निधन की जानकारी जॉन एफ. केनेडी प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी एंड म्यूज़ियम ने सोशल मीडिया के जरिए दी. तातियाना ने अपनी मौत से पहले अपनी बीमारी, दर्द, डर और उम्मीदों को शब्दों में ढालकर एक ऐसी कहानी लिखी, जिसने पूरी दुनिया को भावुक कर दिया |
कौन थीं तातियाना श्लॉसबर्ग
तातियाना श्लॉसबर्ग अमेरिका के 35वें राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी की नातिन और कैरोलिन केनेडी की बेटी थीं. वह एक पर्यावरण पत्रकार थीं और द न्यू यॉर्कर जैसी प्रतिष्ठित मैगजीन के लिए लिखती थीं. वह दो बच्चों की मां थीं और पूरी तरह एक्टिव, फिट और स्वस्थ जीवन जी रही थीं जब तक कि मई 2024 में उनकी जिंदगी अचानक बदल नहीं गई. उस साल उन्हें कैंसर के बारे में पता चला. तब उनकी उम्र 34 साल थी.
किस बीमारी से हुई मौत?
तातियाना को एक्यूट मायलॉइड ल्यूकेमिया (AML) का पता तब चला, जब उन्होंने अपने दूसरे बच्चे को जन्म दिया. डिलीवरी के कुछ घंटों बाद डॉक्टरों ने उनके खून में व्हाइट ब्लड सेल काउंट असामान्य रूप से ज्यादा पाया. जहां सामान्य संख्या 4,000 से 11,000 होती है, वहीं उनका काउंट 1,31,000 तक पहुंच गया था. जांच में सामने आया कि उन्हें AML का एक दुर्लभ म्यूटेशन इनवर्ज़न 3 है, जो ज़्यादातर बुजुर्ग मरीजों में पाया जाता है. डॉक्टरों के मुताबिक यह कैंसर बार-बार लौटने की प्रवृत्ति रखता है और सामान्य इलाज से ठीक नहीं होता |
कीमोथेरेपी से लेकर स्टेम सेल ट्रांसप्लांट तक
तातियाना को कई दौर की कीमोथेरेपी से गुजरना पड़ा. इसके बाद उनकी बहन ने स्टेम सेल डोनेट किए, जिससे पहला बोन मैरो ट्रांसप्लांट हुआ. कुछ समय के लिए वह रिमिशन में भी गईं, लेकिन कैंसर लौट आया | इसके बाद CAR-T सेल थेरेपी समेत कई क्लिनिकल ट्रायल हुए, दूसरा ट्रांसप्लांट भी किया गया, लेकिन बीमारी हर बार वापस लौटती रही. आखिरकार डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि शायद वह एक साल से ज्यादा नहीं जी पाएंगी |
मौत से पहले लिखी मार्मिक कहानी
मौत से कुछ समय पहले तातियाना श्लॉसबर्ग ने द न्यू यॉर्कर में एक लंबा और बेहद भावुक लेख लिखा था. लेख का शिर्षक है- A Battle with My Blood. यह लेख उनके नाना, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी की हत्या की 62वीं बरसी पर प्रकाशित हुआ. इस लेख में तातियाना बताती हैं कि जब किसी इंसान को ये एहसास हो जाता है कि उसकी जिंदगी अब ज्यादा लंबी नहीं है तो यादें अपने आप लौटने लगती हैं. बचपन, दोस्त, लोग, जगहें और छोटी-छोटी बातें, सब कुछ एक साथ दिमाग में आने लगता है |
बच्चों से बिछड़ने का दर्द किया बयां
अपने लेख में उन्होंने सबसे ज्यादा दर्द अपने बच्चों से दूर रहने का बताया है. वो लिखती है कि संक्रमण के खतरे की वजह से वो अपनी नवजात बेटी की ठीक से देखभाल भी नहीं कर पाईं. न उसे गोद में ले सकीं, न नहला सकीं, न ठीक से उसके साथ समय बिता सकीं. उन्हें डर था कि कहीं उनकी बेटी उन्हें याद भी रख पाएगी या नहीं. उन्होंने लिखा कि, क्या उसे पता होगा कि मैं उसकी मां हूं? वहीं अपने बेटे के लिए वह हर छोटी याद को अपने भीतर सहेज लेना चाहती थीं | उसकी बातें, उसकी हंसी और उसका उन्हें गले लगाना | लेख के अंत में वह लिखती हैं कि उन्हें नहीं पता मौत के बाद क्या होता है, लेकिन जब तक सांस है, वह यादें संजोती रहेंगी और उम्मीद करती रहेंगी कि उनके बच्चे जानें उनकी मां सिर्फ बीमार नहीं थी, वह उनसे बेहद प्यार करती थी |
अपने पति के लिए भावुक शब्द
तातियाना ने अपने लेख में अपने पति की भी दिल से तारीफ की है. उन्होंने लिखा कि इस मुश्किल दौर में उनके पति हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे. वह अस्पताल के फर्श पर सोए, हर डॉक्टर से बात की, बीमा और इलाज से जुड़े सारे फैसले संभाले और उनकी नाराज़गी तक चुपचाप सहते रहे. तातियाना लिखती हैं कि वह खुद को बहुत खुशकिस्मत मानती हैं कि उन्हें ऐसा जीवनसाथी मिला, और उतनी ही दुखी हैं कि उन्हें इतनी जल्दी यह खूबसूरत जिंदगी छोड़नी पड़ रही है |
अधूरी रह गई किताब
तातियाना बताती हैं कि उन्हें इलाज के दौरान बताया गया था कि उन्हें महीनों तक कीमोथेरेपी करानी होगी और फिर बोन मैरो ट्रांसप्लांट से गुजरना पड़ेगा. इलाज लंबा, दर्दनाक और अनिश्चित था. वह समुद्र और पर्यावरण पर एक किताब लिखना चाहती थीं, लेकिन बीमारी ने यह सपना भी छीन लिया. उन्होंने लिखा कि, मैं कभी नहीं जान पाऊंगी कि हमने महासागरों को बचाया या उन्हें बर्बाद होने दिया |
अपने ही रिश्तेदार की नीतियों पर सवाल
अपने लेख में तातियाना ने अपने चचेरे भाई और अमेरिका के हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज सेक्रेटरी रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर की नीतियों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने लिखा कि वैक्सीन और मेडिकल रिसर्च को लेकर उनकी सोच कैंसर जैसे गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. तातियाना ने चिंता जताई कि जिन सरकारी फंडिंग और रिसर्च के सहारे उनकी जान बचाने की कोशिश हो रही थी, वही अब कटौती का शिकार हो रही है और इसका असर सिर्फ उन पर नहीं, बल्कि हजारों मरीजों पर पड़ेगा |
क्या फिर आमने-सामने होंगे भारत और पाकिस्तान? अमेरिकी थिंक टैंक की चेतावनी
31 Dec, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत और पाकिस्तान के बीच साल 2025 के मई महीने में संघर्ष हुआ था. हालांकि कुछ दिनों में सीजफायर हो गया था | ये संघर्ष भी पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आया था. अब दोनों देशों के को लेकर अमेरिका के एक बड़े थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR) ने बड़ा दावा किया है | इसके मुताबिक साल 2026 में एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हो सकता है |
CFR की रिपोर्ट कॉन्फ्लिक्ट्स टू वॉच इन 2026 के अनुसार, कश्मीर में आतंकी गतिविधियां बढ़ने से दोनों देशों के बीच टकराव की संभावना है. इससे पहले भी दोनों देशों के बीच आतंकी घटनाओं के कारण ही संघर्ष देखने को मिला था | संस्था की लेटेस्ट रिपोर्ट में वॉर्निंग जारी करते हुए कहा गया है कि अगले साल भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हो सकता है |
CFR की रिपोर्ट अमेरिकी विदेश नीति के एक्सपर्ट के सर्वे पर आधारित है. इसमें पूर्व राजनयिक, सैन्य अधिकारी, प्रोफेसर और नीति विशेषज्ञ शामिल होते हैं | हालांकि इस समय दोनों देशों के बीच फिलहाल सीजफायर जारी है |
अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट ने क्या बताया?
अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध होता है. तो इसका सीधा असर अमेरिका पर पड़ सकता है |हाल के दिनों में इनपुट सामने आया था कि जम्मू-कश्मीर में 30 से ज्यादा आतंकी छिपे हुए हैं |
रिपोर्ट में भारत-पाकिस्तान के अलावा दूसरे खतरे के बारे में भी बताया गया है. CFR के मुताबिक 2026 में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भी सशस्त्र संघर्ष की संभावना है | हालांकि इसका असर अमेरिकी हितों पर कम होगा |
पाकिस्तान और अफगानिस्तान में हुई थी झड़पें
अक्टूबर में अफगान तालिबान और आतंकवादियों द्वारा पाकिस्तान की सीमा चौकियों पर बिना किसी उकसावे के हमले शुरू करने के बाद इस्लामाबाद और काबुल सीमा पर झड़पों में शामिल हुए | झड़पों में 200 से अधिक तालिबान और संबद्ध आतंकवादी मारे गए, जबकि 23 पाकिस्तानी सैनिक मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद हो गए |
पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था संघर्ष
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाया था | इसके बाद ही भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा था.भारत ने आतंकियों से बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की थी | इसके बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष देखने को मिला | हालांकि कुछ ही समय बाद दोनों के बीच सीजफायर हो गया था |
पुतिन के घर पर हुए ड्रोन हमले से भड़के राष्ट्रपति ट्रंप, अब शांति की उम्मीद भी खत्म
31 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब एक ऐसे विनाशकारी मोड़ पर आ चुका है, जहां से शांति की रही-सही उम्मीदें भी खत्म होती नजर आ रही हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नोवगोरोद स्थित निजी आवास पर हुए एक बड़े ड्रोन हमले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। 28-29 दिसंबर 2025 की आधी रात को हुए इस हमले में कुल 91 ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, रूस की वायु रक्षा प्रणाली (एयर डिफेंस) ने सभी ड्रोनों को समय रहते नष्ट कर दिया, जिससे राष्ट्रपति पुतिन पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना ने युद्ध की आग को और भड़का दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे अस्वीकार्य बताया है। ट्रंप का मानना है कि यह हमला न केवल गलत था, बल्कि यह बेहद गलत समय पर किया गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने खुलासा किया कि इस घटना के बाद खुद पुतिन ने उन्हें फोन कर हमले की जानकारी दी। ट्रंप के अनुसार, पुतिन इस हमले को लेकर अत्यधिक क्रोधित हैं और इसे अपनी हत्या की सीधी साजिश मान रहे हैं। ट्रंप ने कहा, किसी के घर पर हमला करना एक अलग और गंभीर बात है। यह हमला शांति की कोशिशों पर पानी फेरने जैसा है। ट्रंप ने बताया कि पुतिन से उनकी फोन पर लंबी बातचीत हुई, जिसमें पुतिन ने इस हमले को एक बड़ा झटका करार दिया। इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ट्रंप ने फिलहाल टॉमहॉक मिसाइलों की आपूर्ति पर भी रोक लगा दी है। उनका मानना है कि वर्तमान माहौल बेहद नाजुक है और ऐसी कोई भी कार्रवाई आग में घी डालने का काम करेगी। चुनाव के समय ट्रंप ने युद्ध को समाप्त कराने का वादा किया था, लेकिन इस ताजा हमले ने उनकी मध्यस्थता की कोशिशों के सामने एक बड़ी दीवार खड़ी कर दी है।
इस पूरे घटनाक्रम पर रूस और यूक्रेन के पक्ष पूरी तरह विरोधाभासी हैं। रूस का दावा है कि यूक्रेन ने सुनियोजित तरीके से 91 ड्रोनों के जरिए राष्ट्रपति के आवास को निशाना बनाया। क्रेमलिन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस हमले को हल्के में नहीं लेगा और अब वह यूक्रेन के साथ किसी भी बातचीत या अपनी अगली सैन्य कार्रवाई की नीति पर नए सिरे से पुनर्विचार करेगा। रूस की ओर से इसे एक आतंकवादी कृत्य बताया जा रहा है।
यूक्रेन ने आरोपों को खारिज किया
वहीं दूसरी ओर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। यूक्रेन का कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई हमला नहीं किया है। यूक्रेनी प्रशासन का तर्क है कि रूस खुद इस तरह के आरोप लगाकर कीव पर किसी बड़े और भीषण हमले की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा है। दो साल से अधिक समय से चल रहे इस युद्ध में पहले ही हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और लाखों बेघर हो चुके हैं। पुतिन के घर पर हुए इस हमले ने अब इस आशंका को प्रबल कर दिया है कि आने वाले दिनों में रूस की ओर से कोई अत्यंत विनाशकारी जवाबी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
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