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बांग्लादेश: चुनाव से पहले खूनी संघर्ष, ढाका में विपक्षी दल के पूर्व नेता की गोली मारकर हत्या
9 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में आगामी आम चुनाव से पहले राजनीतिक हिंसा का दौर थमता नजर नहीं आ रहा है। राजधानी ढाका के करवान बाजार इलाके में मंगलवार रात अज्ञात हमलावरों ने स्वेच्छासेबक दल के पूर्व नेता अजीजुर रहमान मुसब्बिर की गोली मारकर हत्या कर दी। देश में 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले लागू आदर्श आचार संहिता के बीच हुई इस सनसनीखेज वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुसब्बिर, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की स्वयंसेवी इकाई ढाका मेट्रोपॉलिटन नॉर्थ स्वेच्छासेबक दल के महासचिव रह चुके थे।
पुलिस के अनुसार, यह हमला रात करीब 8:30 बजे बशुंधरा सिटी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के पास स्थित एक होटल के समीप हुआ। भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक क्षेत्र का लाभ उठाकर हमलावरों ने मुसब्बिर पर बेहद करीब से गोलियां चलाईं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमलावरों ने कई राउंड फायरिंग की, जिससे इलाके में भगदड़ मच गई। इस गोलीबारी में मुसब्बिर के पेट में गोली लगी, जबकि उनके साथ मौजूद एक अन्य व्यक्ति भी गंभीर रूप से घायल हो गया। मुसब्बिर को तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दूसरे घायल व्यक्ति की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है और उनका इलाज ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है।
वारदात की खबर फैलते ही करवान बाजार और आसपास के इलाकों में भारी तनाव व्याप्त हो गया। आक्रोशित समर्थकों और स्थानीय लोगों ने देर रात सार्क फाउंटेन चौराहे पर सड़क जाम कर दी, जिससे राजधानी की यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के साथ-साथ सेना के जवानों को मोर्चा संभालना पड़ा। सेना ने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर रास्ता खुलवाया, लेकिन क्षेत्र में रह-रहकर विरोध प्रदर्शन होते रहे। फिलहाल सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है और हमलावरों की तलाश में व्यापक छापेमारी की जा रही है।
बांग्लादेश में चुनावी सरगर्मियों के बीच राजनीतिक हत्याओं का यह सिलसिला चिंताजनक है। मुसब्बिर की हत्या से कुछ दिन पहले ही जूबो दल के एक नेता पर जानलेवा हमला हुआ था, जबकि बीते 12 दिसंबर को इंकलाब मंच के नेता उस्मान हादी की भी हत्या कर दी गई थी। विपक्षी दलों ने इन घटनाओं को चुनाव से पहले डराने-धमकाने की साजिश करार दिया है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि वे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं और दोषियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हालांकि, मतदान में अब एक महीने से भी कम समय बचा है, ऐसे में बढ़ती हिंसा ने आम नागरिकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है।
2025 में बांग्लादेश में अपराध में उछाल............महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा अत्याचार
9 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। साल 2025 में बांग्लादेश का क्राइम रेट खतरनाक स्तर पर पहुंचा। इस दौर में महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा अत्याचार हुए, जबकि हत्या, डकैती और मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं में भी बढ़ोतरी हुई है। विश्लेषकों के मुताबिक, अपराध में बढ़ोतरी कानून-व्यवस्था की चुनौतियों का नतीजा है। तख्ता पलट के बाद मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार सामान्य माहौल बनने में नाकाम रही है। पुलिस क्राइम के आंकड़ों का हवाला देकर बांग्लादेश के बांग्ला अखबार ने बताया कि 2025 में रेस्क्यू से जुड़े मामलों सहित कुल 1,81,737 केस रजिस्टर किए गए, जिसमें से कुछ 2024 की घटनाओं से जुड़े थे। इसमें सबसे ज्यादा मामले महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा से जुड़े थे। बीते साल, पुलिस ने पूरे बांग्लादेश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा के 21,936 केस पंजीकृत किए, इसके बाद 12,740 चोरी और 3,785 मर्डर के मामले दर्ज किए गए।
डकैती की घटनाओं में भी इजाफा हुआ, पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक डकैती के 1,935 केस रजिस्टर किए गए।
इसके अलावा, पूरे देश में 702 लूट के मामले, स्पीडी ट्रायल एक्ट के तहत 988 मामले, दंगों के 66, अपहरण के 1,101 मामले, पुलिस पर हमले के 601 मामले और 81,738 दूसरे मामले दर्ज किए गए।
पिछले साल साढ़े चार साल की रोजा मणि की हत्या के बाद पूरे बांग्लादेश में जबरदस्त प्रदर्शन हुआ था। बच्ची का शव 13 मई 2025 को बिजॉय सरानी ओवरपास के पास तेजकुनीपारा में कूड़े के ढेर में मिला था, उसके एक दिन पहले वह ढाका स्थित तेजगांव इलाके से लापता हो गई थी।
रोजा मणि मामले के अलावा, बीते साल ढाका में बच्चों के साथ बदसलूकी के करीब 1,000 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि देश भर के शैक्षिक संस्थानों और काम की जगहों से भी ऐसी घटनाएं सामने आईं। ढाका यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल वेलफेयर एंड रिसर्च में एसोसिएट प्रोफेसर और क्रिमिनोलॉजिस्ट ने बताया कि 2025 में, हम सभी ने क्राइम के आंकड़ों में कुछ डरावने पहलू देखने को मिले। लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति पूरी तरह से सामान्य नहीं होने के कारण अपराध बढ़ा है। इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ा है।
अभिनेता विल स्मिथ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में फंसे
8 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लॉस एजेलिस । वर्तमान में हॉलीवुड के मशहूर अभिनेता विल स्मिथ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में फंस गए हैं। अभिनेता पर यह केस ब्रायन किंग जोसेफ नाम के वायलिनिस्ट ने दर्ज कराया है। ब्रायन का दावा है कि 2025 के उनके म्यूजिकल टूर ‘बेस्ड ऑन ए ट्रू स्टोरी’ के दौरान विल ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया।
ब्रायन ने बताया कि संबंध की शुरुआत नवंबर 2024 में हुई थी, जब उन्हें विल ने सैन डिएगो के एक शो में परफॉर्म करने का मौका दिया। इसके बाद उन्हें 2025 के बड़े टूर के लिए साइन किया गया। शुरुआत में सब सामान्य था, लेकिन धीरे-धीरे विल का व्यवहार बदल गया। ब्रायन का कहना है कि विल ने उन्हें कहा कि उनके बीच एक खास कनेक्शन है, जो किसी और के साथ नहीं है। ब्रायन ने आगे बताया कि मार्च 2025 में लास वेगास टूर के दौरान उनका बैग और कमरे की चाबियां गायब रहीं।
बाद में कमरे में बीयर की बोतलें, वाइप्स और अजनबी के नाम की एचआईवी दवाइयां पाईं गईं। एक नोट मिला, जिसमें लिखा था कि ब्रायन, मैं 5:30 बजे तक वापस आ जाऊंगा, सिर्फ हम दोनों होंगे। ब्रायन ने कहा कि जब उन्होंने इस मामले की शिकायत होटल सिक्योरिटी से की, तो कोई ठोस जवाब नहीं मिला। एक रात जब वे सो रहे थे, तो देखा कि विल उनके कमरे में खड़े थे और जबरन यौन संबंध बनाने की कोशिश कर रहे थे। ब्रायन ने बताया कि जैसे ही उन्होंने यह बात सामने रखी, विल स्मिथ की कंपनी ‘ट्रेबॉल स्टूडियोज मैनेजमेंट’ ने उन्हें दबाव बनाने की कोशिश की कि वे इसे दबा दें। जब ब्रायन ने ऐसा नहीं किया, तो उन्हें तुरंत टूर से निकाल दिया गया।
विल स्मिथ पहले भी विवादों में रह चुके हैं। ऑस्कर इवेंट में हुए थप्पड़ कांड के बाद उन्होंने अपनी छवि सुधारने की कोशिश की थी। लेकिन इस नए आरोप के साथ उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। ब्रायन किंग जोसेफ ने अब विल स्मिथ और उनकी कंपनी के खिलाफ यौन उत्पीड़न और नौकरी से निकालने के मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। बता दें कि अभिनेता विल स्मिथ को ‘मैन इन ब्लैक’ और ‘बैड बॉयज’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय को लेकर पूरी दुनिया में जाना जाता है।
नया अध्याय: लक्जमबर्ग में जयशंकर ने साझा किया डिजिटल और अंतरिक्ष सहयोग का विजन
8 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लक्जमबर्ग। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया लक्जमबर्ग यात्रा ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई और आधुनिक दिशा प्रदान की है। इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान उन्होंने लक्जमबर्ग के राष्ट्राध्यक्ष ग्रैंड ड्यूक गुइलौम से मुलाकात कर उन्हें भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं। जयशंकर ने भारत के प्रति ग्रैंड ड्यूक के सकारात्मक दृष्टिकोण और आपसी साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। इस मुलाकात को कूटनीतिक स्तर पर बेहद सम्मानजनक और भविष्योन्मुखी माना जा रहा है।
इस यात्रा का सबसे प्रमुख आकर्षण भविष्य की तकनीकों पर केंद्रित चर्चा रही। लक्जमबर्ग के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत और लक्जमबर्ग अब पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर फिनटेक, अंतरिक्ष अनुसंधान, डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक क्षेत्रों में अधिक उत्पादक तरीके से सहयोग कर सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय की वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इन क्षेत्रों में साझेदारी न केवल समय की मांग है, बल्कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए अत्यंत लाभकारी भी है।
विदेश मंत्री ने लक्जमबर्ग में सक्रिय भारतीय समुदाय की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि एक मजबूत व्यापारिक रिश्ते के साथ-साथ अब हमें उभरती हुई प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डिजिटल दुनिया और एआई के क्षेत्र में साझा प्रयास पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी परिणाम देंगे। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और तेजी से बदलते अंतरराष्ट्रीय परिवेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया की वर्तमान स्थिति पर भारत और लक्जमबर्ग के बीच एक खुली और स्पष्ट चर्चा दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
जेवियर बेटेल द्वारा किए गए गर्मजोशी से भरे स्वागत के लिए आभार व्यक्त करते हुए विदेश मंत्री ने द्विपक्षीय संबंधों को पुनर्जीवित करने के लिए उनके व्यक्तिगत समर्थन की प्रशंसा की। यह यात्रा इस बात का संकेत है कि भारत अपने यूरोपीय सहयोगियों के साथ अंतरिक्ष और उच्च तकनीक जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में नई संभावनाएं तलाश रहा है। जयशंकर का यह दौरा भारत की उस सक्रिय विदेश नीति का हिस्सा है जो वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक और तकनीकी सहयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
वेनेजुएला अटैक के बाद दहशत में ट्रंप: मिडटर्म चुनाव में हार और महाभियोग का बढ़ा खतरा
8 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला में की गई सैन्य कार्रवाई और वहां के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के बाद अब अमेरिका के भीतर ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी पार्टी, रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों को एक गंभीर चेतावनी जारी की है, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया है कि आगामी मिडटर्म (मध्यावधि) चुनाव उनके भविष्य के लिए रेड लाइन साबित हो सकते हैं। वॉशिंगटन में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के रिपब्लिकन सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि पार्टी इन चुनावों में हारती है, तो उनका राष्ट्रपति पद खतरे में पड़ सकता है। उन्हें डर है कि यदि विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को कांग्रेस में बहुमत मिल गया, तो वे उनके खिलाफ तत्काल महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर देंगे।
ट्रंप का यह डर उनकी हालिया विदेश नीति और सैन्य फैसलों से उपजी आलोचनाओं के बीच सामने आया है। उन्होंने अपने सांसदों से दो टूक शब्दों में कहा है कि उन्हें हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी, क्योंकि विपक्षी दल उन्हें पद से हटाने का कोई न कोई आधार जरूर तलाश लेंगे। अमेरिका की राजनीतिक व्यवस्था में राष्ट्रपति को पद से हटाना एक जटिल प्रक्रिया है, लेकिन मिडटर्म चुनाव हारने का मतलब है कि कांग्रेस पर राष्ट्रपति का नियंत्रण समाप्त हो जाना। यदि प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स का बहुमत होता है, तो उनके पास महाभियोग चलाने की संवैधानिक शक्ति आ जाएगी, जो राष्ट्रपति के लिए सबसे बड़ी विधायी चुनौती होगी।
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक बीच में आयोजित किए जाते हैं। ये चुनाव केवल प्रतीकात्मक नहीं होते, बल्कि सत्ता के संतुलन की असली परीक्षा होते हैं। इनमें प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों के लिए मतदान होता है। इसके साथ ही, कई राज्यों में राज्यपालों और स्थानीय निकायों के चुनाव भी संपन्न होते हैं। यदि इन चुनावों में सत्ताधारी पार्टी का प्रदर्शन खराब रहता है, तो राष्ट्रपति के लिए नए कानून बनाना, बजट पारित करना और महत्वपूर्ण नियुक्तियां करना लगभग असंभव हो जाता है। वर्तमान परिदृश्य में, ट्रंप को डर है कि वेनेजुएला और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर उनके कड़े रुख को विपक्षी दल एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करेंगे। प्रतिनिधि सभा में बहुमत खोने का सीधा अर्थ है कि राष्ट्रपति के हर फैसले की सूक्ष्म जांच होगी और उनके कार्यकाल के बीच में ही उन्हें पद से हटाने की कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि ट्रंप अपनी पूरी ताकत इन चुनावों को जीतने में लगा रहे हैं, ताकि वे अपनी राजनीतिक और संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।
मादुरो ही नहीं, वेनेजुएला की नई राष्ट्रपति भी हैं सत्य साईं बाबा की भक्त
8 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काराकस। वेनेजुएला के राजनीतिक परिदृश्य में एक नाटकीय और ऐतिहासिक मोड़ तब आया जब अमेरिकी विशेष बलों द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद डेल्सी रोड्रिग्ज ने देश की अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में कमान संभाल ली। मादुरो प्रशासन में उपराष्ट्रपति रहीं रोड्रिग्ज को उनके भाई और नेशनल असेंबली के नेता जॉर्ज रोड्रिग्ज ने पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के दौरान भावुक होते हुए रोड्रिग्ज ने इस सैन्य हस्तक्षेप को मातृभूमि पर नाजायज आक्रमण करार दिया और मादुरो व उनकी पत्नी की गिरफ्तारी को दो नायकों का अपहरण बताते हुए जनता के दुख में सहभागी होने की बात कही। इस गंभीर राजनीतिक संकट के बीच एक बेहद दिलचस्प और मानवीय पहलू यह उभरकर सामने आया है कि सत्ता से बेदखल किए गए निकोलस मादुरो और वर्तमान अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज, दोनों का भारत के साथ गहरा आध्यात्मिक संबंध है।
ये दोनों ही नेता भारतीय आध्यात्मिक गुरु श्री सत्य साईं बाबा के परम भक्त हैं। निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस दशकों से साईं बाबा के सिद्धांतों का अनुसरण कर रहे हैं। इस जुड़ाव की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2005 में मादुरो ने स्वयं आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्ती स्थित प्रशांति निलयम आश्रम का दौरा किया था और बाबा से व्यक्तिगत मुलाकात की थी। राष्ट्रपति रहते हुए मादुरो के कार्यालय में साईं बाबा की तस्वीर वेनेजुएला के महान नायकों साइमन बोलिवार और ह्यूगो शावेज की तस्वीरों के साथ सम्मानपूर्वक लगी रहती थी। यहां तक कि साल 2025 में साईं बाबा की जन्म शताब्दी के अवसर पर मादुरो ने उन्हें प्रकाश का पुंज कहकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
इसी आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए डेल्सी रोड्रिग्ज ने भी कई बार भारत की यात्रा की है। उपराष्ट्रपति के अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अगस्त 2023 और अक्टूबर 2024 में विशेष रूप से पुट्टपर्ती जाकर साईं बाबा के समाधि मंदिर में प्रार्थना की थी। अक्टूबर 2024 में उनकी भारत यात्रा उस समय चर्चा में रही जब वे नई दिल्ली में उच्च स्तरीय कूटनीतिक बैठकों के बाद सीधे शांति और दिव्यता की तलाश में आश्रम पहुँची थीं। श्री सत्य साईं सेंट्रल ट्रस्ट के अनुसार, उनकी ये यात्राएं पूर्णतः व्यक्तिगत थीं। वेनेजुएला में सत्य साईं संगठन का काफी प्रभाव है और वहां के शीर्ष नेताओं का बाबा के प्रति अटूट विश्वास इस संगठन को देश में एक विशेष स्थान दिलाता है।
दूसरी ओर, वेनेजुएला की वर्तमान सरकार दुनिया को यह संदेश देने की पुरजोर कोशिश कर रही है कि देश की संप्रभुता अभी भी बरकरार है और वह बाहरी शक्तियों के दबाव में नहीं है। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद पैदा हुई अनिश्चितता के बीच सत्ताधारी दल के सांसद और मादुरो के पुत्र निकोलस मादुरो ग्वेरा राजधानी काराकास में नेशनल असेंबली के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। इस दौरान मादुरो के पुत्र ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक चुने हुए राष्ट्राध्यक्ष के अपहरण को वैश्विक स्तर पर स्वीकार कर लिया गया, तो भविष्य में कोई भी देश सुरक्षित नहीं रहेगा। उन्होंने इसे केवल वेनेजुएला की समस्या न मानकर वैश्विक राजनीतिक स्थिरता के लिए एक सीधा खतरा बताया। वेनेजुएला के संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में 30 दिनों के भीतर चुनाव होने अनिवार्य हैं, लेकिन अमेरिकी हस्तक्षेप और आंतरिक तनाव को देखते हुए वहां की संवैधानिक व्यवस्था और भविष्य की राह फिलहाल धुंधली नजर आ रही है।
सोवियत संघ को खुफिया जानकारी बेचने वाला सीआईए का पूर्व एजेंट एल्ड्रिक एमेस जेल में मृत
8 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व अधिकारी और शीत युद्ध के दौर के सबसे कुख्यात जासूसों में शामिल एल्ड्रिक एमेस का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। मैरीलैंड की जेल में बंद एमेस की मौत बीते सोमवार को हुई। जेल ब्यूरो के प्रवक्ता ने उनके निधन की पुष्टि की है। एमेस पिछले कई दशकों से आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। एल्ड्रिक एमेस ने करीब 31 वर्षों तक अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए में सेवा दी थी, लेकिन इसी दौरान उन्होंने अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर नुकसान पहुंचाया। एमेस ने स्वीकार किया था कि उन्होंने 1985 से 1994 के बीच सोवियत संघ को अमेरिकी खुफिया जानकारियां बेची थीं। इसके बदले उन्हें मॉस्को से करीब 25 लाख डॉलर मिले थे। यह मामला शीत युद्ध के समय सामने आए सबसे बड़े जासूसी घोटालों में से एक माना जाता है।
एमेस ने अपनी स्वीकारोक्ति में बताया था कि उन्होंने 10 रूसी अधिकारियों और एक पूर्वी यूरोपीय अधिकारी की पहचान उजागर की थी, जो अमेरिका और ब्रिटेन के लिए जासूसी कर रहे थे। इसके अलावा उन्होंने उपग्रह आधारित निगरानी अभियानों, गुप्त बातचीत, जासूसी नेटवर्क और खुफिया एजेंसियों के काम करने के तरीकों से जुड़ी बेहद संवेदनशील जानकारियां भी सोवियत संघ को सौंपी थीं। इन सूचनाओं के कारण पश्चिमी देशों के कई खुफिया एजेंट पकड़े गए और उनमें से कई की मौत हो गई। यह घटना सीआईए और उसके सहयोगी देशों के लिए बड़ा झटका साबित हुई थी।
एल्ड्रिक एमेस पर जासूसी और टैक्स चोरी के आरोप लगे थे, जिन्हें उन्होंने अदालत में स्वीकार कर लिया था। इसके बाद उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। अभियोजकों का कहना था कि एमेस ने लंबे समय तक अमेरिका से महत्वपूर्ण खुफिया जानकारियां छिपाकर रखीं और उन्हें दुश्मन देश को सौंपा। वहीं अदालत में दिए गए अपने बयान में एमेस ने कहा था कि वह अपने विश्वासघात को लेकर शर्मिंदा हैं और अपराधबोध से ग्रस्त हैं। उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने यह कदम अपने भारी कर्ज चुकाने के लिए उठाया था।
एफबीआई के अनुसार, एमेस सीआईए के लैंगली मुख्यालय में सोवियत और पूर्वी यूरोप विभाग में तैनात थे, तभी उन्होंने पहली बार सोवियत खुफिया एजेंसी केजीबी से संपर्क किया। रोम में पोस्टिंग के दौरान और बाद में वाशिंगटन लौटने के बाद भी उन्होंने गोपनीय सूचनाएं साझा करना जारी रखा। लंबे समय तक अमेरिकी खुफिया एजेंसियां यह समझ नहीं पाईं कि सोवियत संघ इतनी आसानी से उनके एजेंटों को कैसे पकड़ पा रहा है। एल्ड्रिक एमेस की मौत के साथ शीत युद्ध के एक काले अध्याय का अंत हो गया है।
जापान के शिमाने प्रांत में 6.3 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, सुनामी का खतरा नहीं
7 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोक्यो । जापान के पश्चिमी हिस्से में स्थित शिमाने प्रांत मंगलवार तड़के भीषण भूकंप के झटकों से दहल उठा। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 6.3 मापी गई। झटके इतने तेज थे कि स्थानीय निवासियों में दहशत फैल गई और लोग अपनी सुरक्षा के लिए आनन-फानन में घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। राहत की बात यह है कि इतनी अधिक तीव्रता के बावजूद अभी तक किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है और न ही प्रशासन की ओर से सुनामी की कोई चेतावनी जारी की गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 10:18 बजे आया। इसका केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। इस मुख्य झटके के ठीक 10 मिनट बाद, यानी 10:28 बजे, इलाके में एक और मध्यम तीव्रता का झटका महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 5.1 दर्ज की गई। इन झटकों का सबसे अधिक असर शिमाने प्रांत की राजधानी मात्सुए और पड़ोसी तोत्तोरी प्रांत के विभिन्न शहरों में देखा गया। स्थानीय प्रशासन और परमाणु विनियमन प्राधिकरण ने तुरंत स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि क्षेत्र में स्थित शिमाने परमाणु बिजली संयंत्र और उससे जुड़ी अन्य इकाइयों में किसी भी तरह की असामान्यता या खराबी नहीं पाई गई है। संयंत्र पूरी तरह सुरक्षित है और परिचालन सामान्य रूप से चल रहा है।जापान के लिए यह प्राकृतिक आपदा एक महीने के भीतर दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में आए एक शक्तिशाली भूकंप के कारण लगभग 90,000 लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी थी। वर्तमान घटना के बाद भी बचाव दल और आपदा प्रबंधन इकाइयां अलर्ट पर हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके।भौगोलिक दृष्टि से जापान प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर क्षेत्र पर स्थित है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय बेल्ट में से एक माना जाता है, जिसके कारण यहाँ अक्सर टेक्टोनिक प्लेटों में हलचल होती रहती है। यही वजह है कि जापान में भूकंप रोधी तकनीक और आपदा पूर्व तैयारियों पर विशेष जोर दिया जाता है, जिससे बड़े खतरों के बावजूद जान-माल का नुकसान कम से कम हो।
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ रही हिंसा: 24 घंटों में दो और हत्याओं से दहशत
7 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ जारी हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 24 घंटों के भीतर दो हिंदू व्यक्तियों की नृशंस हत्याओं ने पूरे देश में सांप्रदायिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। ताजा घटनाओं में एक किराना व्यवसायी और एक बर्फ फैक्ट्री के मालिक सह पत्रकार को निशाना बनाया गया है। ये हत्याएं पिछले 18 दिनों में हिंदू समुदाय के सदस्यों की लक्षित हत्याओं (टारगेट किलिंग) की श्रृंखला की छठी कड़ी हैं, जिसने स्थानीय अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा और भय की गहरी लहर पैदा कर दी है।
पहली घटना सोमवार रात करीब 10 बजे नरसिंगड़ी जिले के पलाश उपजिला स्थित चोरसिंदूर बाजार में घटी। यहाँ अपनी किराना दुकान चलाने वाले 40 वर्षीय शरत चक्रवर्ती मणि (जिन्हें मोनी चक्रवर्ती के नाम से भी जाना जाता है) पर अज्ञात हमलावरों ने उस समय हमला किया जब वे दुकान पर थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने धारदार हथियारों से उन पर ताबड़तोड़ प्रहार किए और फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल मणि को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। राजधानी ढाका के इतने निकट हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह हमला पूरी तरह से धार्मिक पहचान के कारण किया गया था। इससे कुछ ही घंटे पहले सोमवार शाम करीब 6 बजे जशोर जिले के मणिरामपुर उपजिला में एक अन्य सनसनीखेज वारदात हुई। यहाँ के कोपालिया बाजार में 45 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। राणा प्रताप एक बर्फ फैक्ट्री के मालिक होने के साथ-साथ एक स्थानीय समाचार पत्र के कार्यकारी संपादक भी थे। बताया जा रहा है कि मोटरसाइकिल पर सवार कुछ हमलावर उनकी फैक्ट्री पहुंचे और उन्हें बातचीत के बहाने बाहर बुलाया। इसके बाद उन्हें एक सुनसान गली में ले जाया गया, जहाँ बहस के बाद उनके सिर में कई गोलियां मार दी गईं और उनका गला रेत दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल से सात खाली कारतूस बरामद किए हैं और पुष्टि की है कि उनके सिर में तीन गोलियां लगी थीं।
पिछले 18 दिनों का घटनाक्रम बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति की भयावह तस्वीर पेश करता है। हिंसा का यह दौर 18 दिसंबर 2025 को मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर और जलाकर की गई हत्या से शुरू हुआ था। इसके बाद 24 दिसंबर को राजबारी में अमृत मंडल, 30 दिसंबर को गारमेंट फैक्ट्री में कार्यरत बजेंद्र बिस्वास और 31 दिसंबर को शरियतपुर में खोकन चंद्र दास पर जानलेवा हमले हुए, जिसमें खोकन की इलाज के दौरान मौत हो गई। हिंदू बौद्ध ईसाई ओइक्य परिषद जैसे संगठनों ने चेतावनी दी है कि कट्टरपंथी समूह अल्पसंख्यकों को डराने और उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर करने के लिए सुनियोजित तरीके से हमले कर रहे हैं। इन हमलों की पृष्ठभूमि दिसंबर 2025 में एक कट्टरपंथी छात्र नेता की हत्या के बाद शुरू हुए भारत-विरोधी प्रदर्शनों से जुड़ी बताई जा रही है, जिसने धीरे-धीरे सांप्रदायिक रंग ले लिया। वर्तमान अंतरिम सरकार के प्रशासन पर अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में विफल रहने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। जहाँ सरकार कुछ मामलों को व्यक्तिगत रंजिश या आपराधिक घटना बता रही है, वहीं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इसे धार्मिक कट्टरता से प्रेरित कानून-व्यवस्था की विफलता करार दिया है। भारत ने भी इन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे एक गंभीर मानवीय मुद्दा बताया है। फिलहाल पूरे प्रभावित क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है, लेकिन समुदाय के भीतर व्याप्त असुरक्षा कम होने का नाम नहीं ले रही है।
वेनेजुएला में चुनाव के लिए दबाव नहीं बनाएगा अमेरिका: डोनाल्ड ट्रंप
7 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला की वर्तमान स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिका वहां जल्दबाजी में चुनाव कराने के लिए कोई दबाव नहीं डालेगा। एक विशेष साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला इस समय एक टूटी हुई व्यवस्था और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, इसलिए चुनाव से पहले देश के ढांचे को फिर से खड़ा करना और व्यवस्था को स्थिर करना अनिवार्य है। निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद पैदा हुए हालातों पर चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि अगले 30 दिनों में वहां चुनाव कराना संभव नहीं है क्योंकि वर्तमान जमीनी स्थितियां मतदान के अनुकूल नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक लोग सुरक्षित महसूस न करें और मतदान करने की स्थिति में न हों, तब तक लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं है।
ट्रंप ने अमेरिका और वेनेजुएला के बीच युद्ध की संभावनाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वाशिंगटन किसी देश के खिलाफ युद्ध में नहीं है, बल्कि उसका संघर्ष उन तत्वों के खिलाफ है जो नशीले पदार्थों की तस्करी करते हैं और अपनी जेलों से अपराधियों व मानसिक रोगियों को अमेरिका भेज रहे हैं। उन्होंने वेनेजुएला की दुर्दशा के लिए पूर्ववर्ती नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया, जिन्होंने देश को अपराध और आर्थिक तबाही के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया। गौरतलब है कि मादुरो को अमेरिकी कार्रवाई के दौरान पकड़ा गया था और उन पर नशीले पदार्थों की तस्करी तथा आतंकवाद से संबंधित गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वेनेजुएला के पुनर्निर्माण पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि देश के ऊर्जा क्षेत्र और तेल ढांचे को फिर से विकसित करने में अमेरिकी तेल कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उनके अनुसार, यह कार्य 18 महीनों के भीतर पूरा किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुनर्निर्माण का आर्थिक बोझ मुख्य रूप से तेल कंपनियां ही उठाएंगी, जिसे वे भविष्य के राजस्व से वसूल सकेंगी। जब ट्रंप से सवाल किया गया कि फिलहाल वेनेजुएला का संचालन कौन कर रहा है, तो उन्होंने आत्मविश्वास के साथ स्वयं का नाम लिया। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री मार्को रूबियो वहां के नेतृत्व के साथ निरंतर संपर्क में हैं। अंत में, राष्ट्रपति ने उन आलोचनाओं का भी जवाब दिया जिसमें कहा गया था कि उन्होंने इस कार्रवाई के लिए अमेरिकी कांग्रेस की अनुमति नहीं ली। उन्होंने दावा किया कि सांसदों को पूरी जानकारी थी और उन्हें कांग्रेस का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा कि यदि सहयोग की प्रक्रिया विफल होती है, तो अमेरिका भविष्य में सैन्य कार्रवाई के लिए भी तैयार है, हालांकि उन्हें विश्वास है कि इसकी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। फिलहाल अमेरिका का पूरा ध्यान वेनेजुएला में कानून-व्यवस्था की बहाली और उसकी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने पर केंद्रित है।
अमेरिकी अदालत में गरजे निकोलस मादुरो: खुद को बताया अपहृत राष्ट्रपति और युद्धबंदी
7 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क। वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच मैनहट्टन की अमेरिकी फेडरल कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान अदालत कक्ष का माहौल तब बेहद तनावपूर्ण हो गया जब मादुरो ने न केवल अपने ऊपर लगे नार्को-टेररिज्म के आरोपों को खारिज किया, बल्कि भरे कोर्ट में खुद को अपहृत राष्ट्रपति घोषित कर दिया। जेल की वर्दी और पैरों में बेड़ियां पहने मादुरो ने जज के सामने दावा किया कि उन्हें उनके देश से गैरकानूनी तरीके से अगवा कर अमेरिका लाया गया है।
अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज एल्विन हेलरस्टीन के समक्ष हुई इस पहली पेशी में मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस ने ड्रग्स तस्करी से जुड़े सभी चार गंभीर आरोपों में खुद को निर्दोष बताया। जैसे ही सुनवाई शुरू हुई और जज ने उनसे उनकी पहचान की पुष्टि करने को कहा, मादुरो ने संक्षिप्त उत्तर देने के बजाय स्पेनिश भाषा में जोर देकर कहा, मैं वेनेजुएला का निर्वाचित राष्ट्रपति हूं। मुझे काराकस में मेरे घर से जबरदस्ती पकड़ा गया और मेरा अपहरण किया गया है। इस पर जज ने उन्हें टोकते हुए कहा कि इन दलीलों को रखने के लिए उनके पास भविष्य में उचित समय और स्थान होगा। लगभग 40 मिनट तक चली इस नाटकीय सुनवाई के दौरान मादुरो काफी आक्रामक और मुखर नजर आए। उन्होंने खुद को एक युद्धबंदी के रूप में पेश किया। वहीं, उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस के चेहरे पर चोट के कई निशान देखे गए, जिसे लेकर उनके वकील ने दावा किया कि 3 जनवरी को अमेरिकी सेना द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के दौरान उनके साथ बदसलूकी की गई और उन्हें चोटें आईं। मादुरो के वकील ने फिलहाल अदालत से जमानत की कोई मांग नहीं की है।
सुनवाई के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब दर्शकों के बीच बैठे एक व्यक्ति ने मादुरो पर चिल्लाते हुए कहा कि उन्हें अपने कर्मों की कीमत चुकानी होगी। इस पर मादुरो विचलित नहीं हुए और उसकी ओर मुड़कर दोबारा वही बात दोहराई कि वे एक अपहृत राष्ट्राध्यक्ष हैं। पूरी कार्यवाही के दौरान मादुरो एक पीले लीगल पैड पर नोट्स लेते रहे और उन्होंने जज से उन नोट्स को अपने पास रखने की अनुमति भी मांगी।अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 मार्च की तारीख तय की है। सुनवाई खत्म होने के बाद मादुरो और उनकी पत्नी को भारी सुरक्षा घेरे में वापस जेल भेज दिया गया। अंतरराष्ट्रीय जगत की निगाहें अब इस मुकदमे पर टिकी हैं, क्योंकि यह पहली बार है जब किसी देश के शीर्ष नेता को इस तरह के सैन्य ऑपरेशन के बाद सीधे अमेरिकी अदालत में कठघरे में खड़ा किया गया है। यह मामला न केवल कानूनी बल्कि कूटनीतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है।
मुझे पता है राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिल से पीएम मोदी का सम्मान करते हैं
7 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणी पर कहा कि भारत जैसे देश के साथ अनावश्यक तनाव से बचना चाहिए। मैरी ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वे आगे बढ़ते रहें और भारत के सर्वोत्तम हित में सेवा करना जारी रखें। अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने मंगलवार को एक्स पर लिखा- मुझे पता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिल से पीएम मोदी का सम्मान करते हैं, लेकिन दुख की बात है कि ट्रंप को भारत के प्रति अपने रवैये के बारे में गलत सलाह दी जा रही है। मैं इस बारे में राष्ट्रपति के लिए प्रार्थना कर रही हूं। भारत में विपक्ष की टिप्पणियों का जवाब देते हुए मैरी मिलबेन ने कहा कि पीएम मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप की हर टिप्पणी या धमकी का जवाब देने की जरूरत नहीं है। मोदी को सिर्फ भारतीय लोगों को खुश करने की जरूरत है। वे लंबी अवधि की कूटनीति समझते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मैरी मिलबेन ने कहा कि पीएम मोदी को सीनेटर लिंडसे ग्राहम जैसे लोगों पर भी ध्यान देने की जरूरत नहीं है। वह हममें से कई लोगों के लिए अमेरिका में अप्रासंगिक है। उन्होंने लिखा- पीएम नरेंद्र मोदी, रुसी राष्ट्रपति पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी और दुनिया के कई नेताओं को पता है कि नवंबर के मध्यावधि चुनाव तक सिर्फ 10 महीने बचे हैं। और अगर डेमोक्रेट्स कांग्रेस पर कंट्रोल कर लेते हैं, जिसकी संभावना है क्योंकि रिपब्लिकन लगातार कांग्रेस से रिटायरमेंट की घोषणा कर रहे हैं, तो वैश्विक भू-राजनीति में एक बिल्कुल नई बातचीत शुरू होगी। मैरी मिलबेन ने उम्मीद जताई कि डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस मध्यावधि चुनाव जीतने पर ध्यान देंगे और भारत जैसे दोस्तों के साथ बेवजह के तनाव से बचेंगे। अमेरिकी सिंगर ने अपने पोस्ट के आखिर में लिखा- पीएम मोदी आप आगे बढ़ते रहें। आप भारत के सबसे अच्छे हित में काम करते रहें। आपको इसी काम के लिए चुना गया था।
बता दें डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले दिन एक बयान में फिर से टैरिफ की धमकी दी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि वाशिंगटन की नाराजगी के कारण भारत ने रूस से तेल खरीद में कटौती की है। ट्रंप के बयान के बाद भारत में कांग्रेस के कई नेताओं ने सरकार पर सवाल उठाए हैं।
ट्रंप को सीधी चुनौती: 'हिम्मत है तो मुझे पकड़ो', कोलंबियाई राष्ट्रपति के इस बयान से अमेरिका में मचा हड़कंप
6 Jan, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Colombian President Gustavo Petro: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दुनिया भर में माहौल तनावपूर्ण हो गया है. इसका सबसे ज्यादा असर लैटिन अमेरिका के देशों में देखने को मिल रहा है. अब कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्ताव पेट्रो ने अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को चुनौती दी है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि आओ, मुझे ले जाओ, मैं इंतजार कर रहा हूं.
लैटिन अमेरिका में ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई तेज की
यूएस ने लैटिन अमेरिका में ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है. इस मामले के बीच कोलंबिया राष्ट्रपति पेट्रो और ट्रंप के बीच टकराव अब चुनौती में बदल गया है. पेट्रो ने डोनाल्ड ट्रंप को खुले शब्दों में चुनौती दी है. उनकी ओर से ये तीखा बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को अमेरिका ने स्पेशल फोर्स ऑपरेशन जरिए ड्रग्स तस्करी के आरोपों में गिरफ्तार किया है. इसी कार्रवाई ने पूरी दुनिया में हलचल मची दी है.
मुझे धमकाओ मत- राष्ट्रपति पेट्रो
ट्रंप को दो टूक शब्दों में राष्ट्रपति पेट्रो ने कहा कि आओ, मुझे ले जाओ, मैं यहीं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं. मुझे धमकाओ मत, अगर तुम चाहते हो तो मैं यहीं इंतजार करूंगा. इसके साथ ही उन्होंने बिल्कुल साफ कर दिया कि उन्हें किसी भी तरह का सैन्य अभियान मंजूर नहीं है. पेट्रो ने ट्रंप पर वार करते हुए कहा कि मैं किसी भी तरह का हमला, मिसाइल अटैक या हत्या स्वीकार नहीं करता हूं. सिर्फ इंटेलिजेंस पर बात की जाएगी. यदि आपको बात करना है तो सामने आकर तथ्यों पर बात करो, झूठ के साथ नहीं.
ट्रंप ने दिए थे सैन्य कार्रवाई के संकेत
कोलंबिया राष्ट्रपति की ओर से तीखा बयान ट्रंप की उस टिपण्णी के बाद आया है जिसमें उन्होंने कोलंबिया को लेकर सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए थे. डोनाल्ड ट्रंप ने कोलंबिया के शीर्ष नेतृत्व को सिक लीडर कहा था. उन्होंने आरोप लगाया था कि कोलंबिया से कोकीन अमेरिका भेजी जा रही है. ट्रंप ने दावा करते हुए कहा था कि वह कोकीन बना रहा है और उसे यूएसए भेज रहा है, इसलिए उसे सावधान रहना चाहिए.
अमेरिका में प्रवासी कल्याण पाने वालों की देश की सूची में शामिल नहीं भारत
6 Jan, 2026 11:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रवासी कल्याण पाने वालों की देश के हिसाब से रैंकिंग के आंकड़ों की सूची सामने आई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इस सूची में भारत का नाम नहीं है। सूची में भारत का नाम ना होना कोई सामान्य बात नहीं है। यह अमेरिका के बड़े प्रवासी माहौल में भारतीय प्रवासियों की खास आर्थिक प्रोफाइल को दिखाता है। ये अमेरिका में सरकारी मदद पाने वाले प्रवासी परिवारों का हिस्सा दिखाते हैं।
इस सूची में सबसे ऊपर नाम भूटान का है, और भूटानी प्रवासियों का अमेरिकी सरकार से मदद पाने की दर 81.4 प्रतिशत है। इसके बाद यमन (उत्तर) 75.2 फीसदी, सोमालिया 71.9 फीसदी और मार्शल आइलैंड्स 71.4 फीसदी के साथ हैं। कई दूसरे देशों में भी कल्याणकारी भागीदारी का स्तर ऊंचा है।
इस सूची में डोमिनिकन रिपब्लिक और अफगानिस्तान दोनों ही देशों का दर 68.1 फीसदी है। कांगो 66 फीसदी, गिनी 65.8 फीसदी और इराक 60.7 फीसदी पर हैं। इस समूह में खासतौर से कई सेंट्रल अमेरिकन, कैरिबियन और अफ्रीकी देश शामिल हैं। ग्वाटेमाला 56.5 फीसदी, सूडान 56.3 फीसदी और अल साल्वाडोर 55.4 फीसदी पर दिखाए गए हैं। होंडुरास 52.9 फीसदी पर है। बांग्लादेश 54.8 फीसदी पर लिस्टेड है। इसके अलावा, लिस्ट के दूसरे पेज पर वे देश शामिल हैं, जिसमें वेलफेयर में कम, लेकिन फिर भी उल्लेखनीय, भागीदारी है। आइवरी कोस्ट सूची में 49.1 फीसदी के साथ सबसे आगे है, इसके बाद लाइबेरिया 48.9 फीसदी और अल्जीरिया 48.1 फीसदी के साथ दूसरे नंबर पर हैं। सीरिया 48 फीसदी पर लिस्टेड है। जॉर्डन और लीबिया दोनों 47.8 फीसदी पर हैं। इथियोपिया 47.6 फीसदी, रवांडा 47.1 फीसदी और मोरक्को 46.6 फीसदी पर दिखाए गए हैं। पाकिस्तान 40.2 फीसदी और मिस्र 39.3 फीसदी पर शामिल हैं।
लेकिन भारत का दो पेज की सूची में कहीं भी नाम नहीं है। अमेरिका में प्रवासी और कल्याण के मुख्य राजनीतिक मुद्दे हैं, और भारत इनमें काफी चर्चा में रहता है। इसके बावजूद भी लिस्ट में इसकी गैर-मौजूदगी है। यह पता चला है कि भारतीय प्रवासी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में, खासकर तकनीक, हेल्थकेयर और इंजीनियरिंग में, एक बड़ी भूमिका निभाते हैं। वे इनकम टैक्स रेवेन्यू में अहम योगदान देते हैं और सिलिकॉन वैली में कई स्टार्टअप्स शुरू करने में शामिल रहे हैं।
भारत-बांग्लादेश के बीच तनाव और बढ़ा
6 Jan, 2026 10:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। टी20 विश्व कप के लिए अपनी टीम भारत नहीं भेजने का फैसला करने के बाद अब बांग्लादेश ने आईपीएल के प्रसारण पर भी रोक लगा दी है। अंतरिम सरकार ने आईपीएल के प्रसारण पर रोक लगाने का फैसला किया है। आईपीएल 2026 की शुरुआत मार्च में होनी है।
भारत और बांग्लादेश के बीच विवाद उस वक्त से गरमा गया है जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) से बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को टीम से बाहर करने कहा था। पूरे विवाद की शुरुआत मुस्तफिजुर को आईपीएल से बाहर करने से शुरू हुई। केकेआर ने पिछले महीने मिनी नीलामी में मुस्तफिजुर को 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था। लेकिन बीसीसीआई के निर्देश पर केकेआर ने इस बांग्लादेशी गेंदबाज को टीम से बाहर कर दिया। मुस्तफिजुर को लेने पर भारत में विरोध हो रहा था और कई राजनेताओं तथा कथावाचक ने इसे लेकर केकेआर के मालिका शाहरुख खान को घेरा था। मुस्तफिजुर को बाहर करने के बाद बांग्लादेश बौखला गया है।
बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने की पुष्टि
बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के खेल मंत्री आसिफ नजरुल ने कहा था कि उन्होंने बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण मंत्री से अनुरोध किया है कि बांग्लादेश में आईपीएल का प्रसारण निलंबित किया जाए। इसके एक दिन बाद ही बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने आईपीएल का प्रसराण निलंबित करने का फैसला लिया। बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा, मार्च से शुरू होने वाले आगामी आईपीएल के लिए बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम से बाहर करने के बीसीसीआई के फैसले से बांग्लादेश के लोग बेहद आहत, दुखी और आक्रोशित हैं। इन परिस्थितियों में बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सूचित किया है कि अगले आदेश तक बांग्लादेश में आईपीएल के सभी मैच और संबंधित कार्यक्रमों का प्रसारण निलंबित रहेगा।
टी20 विश्व कप के लिए भारत नहीं आएगी टीम
इससे पहले, रविवार को बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने स्पष्ट किया था कि वह अगले महीने होने वाले टी20 विश्व कप के लिए अपनी टीम भारत नहीं भेजेगा। उन्होंने आईसीसी से श्रीलंका में विश्व कप के मैच कराने की मांग की है। फिलहाल आईसीसी ने बीसीबी की मांग पर कोई फैसला नहीं लिया है। बांग्लादेश को अपने चार लीग मैच में से तीन कोलकाता और एक मुंबई में खेलना है। बांग्लादेश के लीग मैच वेस्टइंडीज (सात फरवरी), इटली (नौ फरवरी) और इंग्लैंड (14 फरवरी) के खिलाफ कोलकाता में और नेपाल (17 फरवरी) के खिलाफ मुंबई में है। बांग्लादेश को ग्रुप सी में इटली, नेपाल, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के साथ रखा गया है।
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