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रूस से भारत का तेल आयात घटने पर ट्रम्प बोले-मोदी ने यह मुझे खुश करने के लिए किया, वे जानते थे मैं नाखुश था
6 Jan, 2026 09:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के रूस से तेल आयात कम करने को लेकर बयान दिया है। ट्रम्प ने कहा है कि भारत ने यह फैसला उन्हें खुश करने के लिए लिया। ट्रम्प ने कहा कि वे मुझे खुश करना चाहते थे। प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। वह जानते थे कि मैं खुश नहीं था, इसलिए मुझे खुश करना जरूरी था। हम व्यापार करते हैं और उन पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया था। अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन पर हो रहे हमलों को फंड कर रहा है। इसे लेकर ट्रम्प प्रशासन ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ भी लगाया था।
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि वह करीब एक महीने पहले भारतीय राजदूत के घर गए थे। उस मुलाकात में सबसे ज्यादा चर्चा भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद कम करने को लेकर हुई थी। उन्होंने बताया कि भारतीय राजदूत ने उनसे राष्ट्रपति ट्रम्प तक यह संदेश पहुंचाने को कहा था कि भारत पर लगाया गया एक्स्ट्रा 25 प्रतिशत टैरिफ हटाया जाए। लिंडसे ग्राहम के मुताबिक, भारत अब पहले के मुकाबले रूस से काफी कम मात्रा में तेल खरीद रहा है। इस मुद्दे को बातचीत में प्रमुख रूप से उठाया गया।
भारत ने 4 साल बाद रूस से तेल आयात कम किया
भारत ने 2021 के बाद पहली बार रूस से कच्चे तेल का आयात घटाया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रूसी तेल आयात नवंबर में करीब 17.7 लाख बैरल प्रति दिन था, जो दिसंबर में घटकर लगभग 12 लाख बैरल प्रति दिन रह गया है। आने वाले समय में यह 10 लाख बैरल प्रति दिन से भी नीचे जा सकता है। जनवरी में आने वाले आंकड़ों में भारत के रूसी तेल आयात में बड़ी गिरावट दिख सकती है। नवंबर 21 से रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हुए हैं। इसके बाद भारत का रूस से तेल आयात घटने लगा है।
रूस ने डिस्काउंट देना कम किया
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने 20-25 डॉलर प्रति बैरल सस्ता क्रूड ऑयल बेचना शुरू किया। तब अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल थी, ऐसे में ये छूट भारत के लिए किफायती थी। हालांकि अब अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 63 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। रूस ने भी अपनी छूट घटाकर 1.5 से 2 डॉलर प्रति बैरल कर दी है। इतनी कम रियायत में भारत को पहले जैसा फायदा नहीं मिल रहा, ऊपर से रूस से तेल लाने में शिपिंग और बीमा खर्च भी ज्यादा पड़ता है। इसी वजह से भारत अब दोबारा सऊदी, यूएई और अमेरिका जैसे स्थिर और भरोसेमंद सप्लायर्स से तेल खरीद रहा है, क्योंकि अब कीमत में पहले जैसा बड़ा अंतर नहीं बचा।
बांग्लादेश में हिन्दू विधवा से गैंगरेप
6 Jan, 2026 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में कालीगंज इलाके में एक हिंदू विधवा महिला के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया। आरोप है कि दो लोगों ने पहले महिला के साथ रेप किया और फिर उसे पेड़ से बांधकर उसके बाल काट दिए।
लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता ने पुलिस में दर्ज शिकायत में बताया कि करीब ढाई साल पहले उसने कालीगंज म्युनिसिपैलिटी के वार्ड नंबर 7 में शाहीन और उसके भाई से 20 लाख टका में तीन डेसिमल जमीन और एक दो मंजिला मकान खरीदा था। इसके बाद से ही आरोपी शाहीन कथित तौर पर महिला को आपत्तिजनक प्रस्ताव देने लगा। मना करने पर वह उसे लगातार परेशान करता रहा।
पीड़िता के मुताबिक, शनिवार शाम को जब उसके गांव से दो रिश्तेदार घर आए हुए थे, उसी दौरान शाहीन अपने साथी हसन के साथ जबरन उसके घर में घुस आया। आरोप है कि दोनों ने महिला के साथ दुष्कर्म किया और बाद में उससे 50 हजार टका (करीब 37 हजार रुपये) की मांग भी की।
उत्तरी नाइजीरिया फिर दहला, गांव में गोलीबारी से 30 से ज्यादा मौतें, कई ग्रामीण अगवा
5 Jan, 2026 11:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: नाइजीरिया (Nigeria) के उत्तरी हिस्से में एक बार फिर खूनी हमला हुआ है. नाइजर राज्य के एक गांव में हथियारबंद लोगों ने 30 लोगों की हत्या कर दी और कई ग्रामीणों को अगवा कर लिया. पुलिस ने रविवार को इसकी पुष्टि की. यह इलाका पहले से ही हिंसा और असुरक्षा से जूझ रहा है. पुलिस के अनुसार, यह हमला शनिवार शाम को नाइजर राज्य के बोरगु लोकल गवर्नमेंट एरिया के कसुवान-दाजी गांव में हुआ.
हथियारबंद हमलावर अचानक गांव में घुसे और सीधे लोगों पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं. गोलीबारी के बाद हमलावरों ने गांव के बाजार और कई घरों में आग लगा दी, जिससे भारी नुकसान हुआ. कसुवान-दाजी गांव के पास ही पापिरी समुदाय है, जहां पिछले साल नवंबर में एक कैथोलिक स्कूल से 300 से ज्यादा बच्चों और शिक्षकों का अपहरण किया गया था.
मौतों का आंकड़ा और बढ़ सकता है
नाइजर स्टेट पुलिस के प्रवक्ता वासियू अबियोदुन ने कहा कि इस हमले में कम से कम 30 लोगों की मौत हुई है. हालांकि गांव के कुछ लोगों का कहना है कि मरने वालों की संख्या 37 या उससे भी ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई लोग अब भी लापता हैं. रविवार तक कुछ ग्रामीणों का कोई पता नहीं चल पाया था, जिससे मौत का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है. ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि हमले के बाद अब तक सुरक्षा बल गांव नहीं पहुंचे. उनका कहना है कि पुलिस और सेना की कोई मौजूदगी नहीं दिखी, जबकि पुलिस का दावा है कि अगवा किए गए लोगों की तलाश के लिए जवानों को तैनात कर दिया गया है.
नाइजीरिया में पुलिस का डर नहीं
नाइजीरिया अफ्रीका का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है, लेकिन यहां के कई दूर-दराज इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है. ऐसे इलाकों में अपराधी गिरोह और हथियारबंद बदमाश सक्रिय रहते हैं. ये गिरोह अक्सर गांवों पर हमला करते हैं, लोगों की हत्या करते हैं और फिरौती के लिए अपहरण करते हैं. पुलिस के मुताबिक, कसुवान-दाजी पर हमला करने वाले हथियारबंद लोग नेशनल पार्क फॉरेस्ट और काबे जिले की ओर से आए थे. इन इलाकों में बड़े-बड़े और सुनसान जंगल हैं, जो अक्सर हथियारबंद गिरोहों के छिपने के ठिकाने बन जाते हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत को दी नई धमकी, बोले-टैरिफ बढ़ा सकते हैं…
5 Jan, 2026 10:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति (US President) डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सोमवार को कहा कि अगर नई दिल्ली ‘रूसी तेल मुद्दे’ (‘Russian oil issue’) पर मदद नहीं करता है, तो देश भारतीय इंपोर्ट (Indian imports) पर मौजूदा टैरिफ बढ़ा सकता है. एजेंस के मुताबिक, ट्रंप ने एक पब्लिक संबोधन के दौरान यह बात कही.
भारत के रूसी तेल इंपोर्ट पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “वे असल में मुझे खुश करना चाहते थे. पीएम मोदी बहुत अच्छे आदमी हैं. वह एक अच्छे इंसान हैं. उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था. मुझे खुश करना ज़रूरी था. हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं.”
ट्रंप भारत के रूस के साथ तेल व्यापार की बात कर रहे थे, जिसका उनकी सरकार लंबे समय से विरोध कर रही है. अगस्त 2025 में भारत पर टैरिफ दोगुना करके 50% करने के पीछे रूस के साथ ऑयल ट्रेड को एक वजह बताया गया था.
इन बयानों से रूस के साथ भारत के एनर्जी संबंधों को लेकर तनाव फिर से बढ़ गया है और ये बातें ट्रंप के उस दावे के कुछ महीने बाद आई हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ‘भरोसा दिलाया’ था कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा. नई दिल्ली ने पहले इस दावे को खारिज कर दिया था और कहा था कि ट्रंप और मोदी के बीच इस तरह की कोई बातचीत नहीं हुई थी.
भारत को ऑयल सप्लाई करने वाला सबड़े देश है रूस
रूस, भारत को तेल सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है. ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के कई अधिकारियों ने पहले आरोप लगाया था कि रूस इस तेल व्यापार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल यूक्रेन में युद्ध को बढ़ावा देने के लिए कर रहा है, और भारत भी इस तेल को दोबारा बेचकर ‘मुनाफ़ा कमा रहा है’ और ‘अरबों कमा रहा’ है.
ट्रंप द्वारा भारत पर भारी टैरिफ लगाना काफी हद तक पुतिन पर दबाव डालने की एक चाल के तौर पर देखा गया है.
बांग्लादेश में हिंदू उम्मीदवार का नामांकन रद्द, शेख हसीना की सीट से भरा था पर्चा
5 Jan, 2026 09:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: बांग्लादेश (Bangladesh) में जहां एक ओर अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर एक प्रमुख हिंदू चेहरे को चुनावी मैदान से बाहर कर दिए जाने का मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है. बांग्लादेश चुनाव आयोग ने जातीय हिंदू महाजोत के महासचिव और वरिष्ठ वकील गोबिंद चंद्र प्रामाणिक का नामांकन रद्द कर दिया है.
गोबिंद चंद्र प्रामाणिक ने 28 दिसंबर को आगामी आम चुनाव के लिए गोपालगंज-3 संसदीय सीट से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार नामांकन पत्र दाखिल किया था. यह वही सीट है, जहां से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भी चुनाव लड़ चुकी हैं और जिसे उनकी पारंपरिक सीट माना जाता है. 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव में हिंदू समुदाय की ओर से प्रामाणिक को एक मजबूत चेहरे के तौर पर देखा जा रहा था.
हालांकि चुनाव आयोग ने उनका नामांकन खारिज कर दिया. चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, किसी भी निर्दलीय उम्मीदवार को नामांकन के साथ अपनी संसदीय क्षेत्र की कुल मतदाता संख्या के 1 प्रतिशत मतदाताओं के हस्ताक्षर जमा करने होते हैं. प्रामाणिक का कहना है कि उन्होंने यह सभी हस्ताक्षर समय पर जमा किए थे, लेकिन ऐन मौके पर रिटर्निंग ऑफिसर ने इन हस्ताक्षरों को अमान्य घोषित कर दिया.
गोबिंद चंद्र प्रामाणिक ने आरोप लगाया कि BNP के इशारे पर हस्ताक्षर करने वाले लोग मुकर गए, जिसके बाद चुनाव आयोग ने उनके नामांकन को रद्द कर दिया. उन्होंने कहा कि वह चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ अपील दाखिल करेंगे और जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे.
इस मुद्दे पर बांग्लादेश के वरिष्ठ पत्रकार सलाहउद्दीन शोएब चौधरी ने दावा किया कि देश की संस्थाएं BNP को चुनाव जिताने में जुटी हुई हैं. उनके अनुसार, चुनाव आयोग की कोशिश है कि कोई भी निर्दलीय, जातीय दल या जमात-ए-इस्लामी का उम्मीदवार जीत न सके, जिससे BNP के उम्मीदवारों को कोई चुनौती न मिले.
प्रामाणिक लंबे समय से हिंदू संगठनों का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं, हालांकि शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद अंतरिम सरकार के प्रमुख डॉक्टर यूनुस के समर्थन को लेकर वह विवादों में भी आए थे. बांग्लादेश में अल्पसंख्यक मतदाता कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं और ऐसे में एक प्रमुख हिंदू उम्मीदवार का नामांकन रद्द होना चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
वेनेजुएला टेंशन का ग्लोबल मार्केट पर दिखेगा असर… सोने-चांदी और क्रूड भी होंगे प्रभावित
5 Jan, 2026 09:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका (America) द्वारा वेनेजुएला (Venezuela) पर की गई सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक वित्तीय बाजारों (Global financial markets) में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। इससे भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market), सोने, चांदी और कच्चे तेल पर संभावित प्रभावों का आकलन किया जा रहा है। जानें, निवेशकों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों के साथ-साथ भारत पर भी पड़ता नजर आ रहा है। वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार रखने वाला देश है, इसलिए इस घटनाक्रम ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है और शेयर बाजार से लेकर सोना-चांदी तथा कच्चे तेल तक सभी एसेट क्लास पर इसका प्रभाव देखा जा रहा है।
भारतीय शेयर बाजार की बात करें तो फिलहाल किसी बड़ी घबराहट के संकेत नहीं हैं, लेकिन अस्थिरता बढ़ने की संभावना जरूर बनी हुई है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं, जिसका दबाव ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, एयरलाइंस और उपभोक्ता आधारित कंपनियों के शेयरों पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर डॉलर के मजबूत होने की स्थिति में आईटी कंपनियों के शेयरों को कुछ समर्थन मिल सकता है। कुल मिलाकर बाजार में बड़ी गिरावट की बजाय सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनती दिख रही है।
सोने पर इफेक्ट
भू-राजनीतिक तनाव का सीधा फायदा सोने को मिलता दिख रहा है। अनिश्चित माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं और सोना पारंपरिक रूप से उनका पसंदीदा विकल्प रहा है। वेनेजुएला संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मजबूती देखी जा रही है। यदि तनाव लंबा खिंचता है तो सोना नए रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंच सकता है।
चांदी में तेज उतार-चढ़ाव बना रहेगा
चांदी पर इस घटनाक्रम का असर थोड़ा अलग नजर आता है। एक तरफ सुरक्षित निवेश की मांग चांदी को सहारा देती है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता औद्योगिक मांग को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से चांदी की कीमतों में तेजी के साथ तेज उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
महंगा हो सकता है कच्चा तेल
कच्चे तेल के मोर्चे पर फिलहाल स्थिति संतुलित है, क्योंकि वेनेजुएला से वैश्विक बाजार में पहले ही सीमित मात्रा में तेल की आपूर्ति हो रही थी। हालांकि इस सैन्य कार्रवाई से तेल बाजार में ‘रिस्क प्रीमियम’ जुड़ गया है। यदि तनाव बढ़ता है या तेल आपूर्ति से जुड़े अन्य क्षेत्रों में अस्थिरता आती है, तो कच्चा तेल आने वाले समय में महंगा हो सकता है।
भारत के लिए राहत की बात यह है कि वह फिलहाल वेनेजुएला से कच्चा तेल आयात नहीं करता और उसकी आपूर्ति रूस तथा पश्चिम एशिया से स्थिर बनी हुई है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भी भारत को इस वैश्विक संकट से निपटने में सहारा दे सकता है।
सीरिया में ब्रिटेन और फ्रांस की संयुक्त कार्रवाई, आतंकी संगठन आईएस के ठिकानों पर बरसाए बम
5 Jan, 2026 08:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। ब्रिटेन (Britain) और फ्रांस (French) के लड़ाकू विमानों (Fighter Jets) ने सीरिया (Syria) में आतंकी संगठन आईएस के ठिकानों पर हवाई हमले (Air Strikes) किए। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को यह जानकारी दी। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सीरिया में आईएस के हथियारों के ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिन्हें एक सुरंग में छिपाकर रखा गया था। ब्रिटेन की सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि सीरिया में हवाई हमले शनिवार को किए गए। यह हमले सीरिया के होम्स प्रांत के ऐतिहासिक पल्मायरा के पहाड़ी इलाके में किए गए।
इतिहास का सबसे बड़ा ड्रामा...गिरफ्तारी के बाद न्यूयॉर्क लाए गए मादुरो, क्या अमेरिका के इस कदम से दुनिया में मच जाएगी तबाही
4 Jan, 2026 12:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Venezuela News: अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी कराकस में हवाई हमले कर दिए. इसके बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क लाया गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मादुरो की हाथ में हथकड़ी और आंखों पर पट्टी बांधे फोटो सोशल मीडिया पर जारी की. मादुरो के न्यूयॉर्क पहुंचने की जानकारी भी डोनाल्ड ट्रंप ने खुद दी है. ट्रंप ने यह भी ऐलान किया है कि अब फिलहाल, वेनेजुएला को अमेरिका चलाएगा. हालांकि ट्रंप की इस कार्रवाई को लेकर कई देशों ने इसकी निंदा करते हुए तनाव कम करने की अपील की है. मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कहा कि यह संघीय और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. उन्होंने वेनेजुएला पर किए गए हमले की निंदा की है.
गिरफ्तारी पर भड़के ममदानी
वेनेजुएला राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी पर न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा, “मुझे आज सुबह वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिकी सेना द्वारा पकड़े जाने और न्यूयॉर्क शहर में संघीय हिरासत में उनकी नियोजित कैद के बारे में जानकारी दी गई. किसी संप्रभु राष्ट्र पर एकतरफा हमला युद्ध का कार्य है और संघीय एवं अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है.”
ममदानी ने कहा “सत्ता परिवर्तन का यह खुला प्रयास न केवल विदेशियों को प्रभावित करता है, बल्कि न्यूयॉर्कवासियों को भी सीधे तौर पर प्रभावित करता है, जिनमें हजारों वेनेजुएलावासी शामिल हैं जो इस शहर को अपना घर मानते हैं. मेरी प्राथमिकता उनकी और हर न्यूयॉर्कवासी की सुरक्षा है, और मेरा प्रशासन स्थिति पर नजर रखना जारी रखेगा और प्रासंगिक दिशानिर्देश जारी करेगा.
डेमोक्रेट्स की आपातकालीन बैठक!
मीडिया रिपोर्ट के सूत्रों के अनुसार, वेनेजुएला पर बड़े हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर डेमोक्रेट्स की रविवार को आपातकालीन बैठक हो सकती है. जानकारी के अनुसार यह बैठक वर्चुअल रूप से की जाएगी. सूत्रों के मुताबिक बैठक स्थानीय समयानुसार दोपहर 2 बजे होगी.
अमेरिकी परिवारों कीमत चुकानी पड़ती है: कमला हैरिस
वेनेजुएला पर अमेरिकी हमला के बाद डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन सदस्यों ने चिंता जाहिर की है. कमला हैरिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वेनेजुएला नीति का विरोध करते हुए कहा कि इस कार्रवाइयों से अमेरिका न तो अधिक सुरक्षित, न ही अधिक मजबूत और न ही अधिक किफायती बनता है. मादुरो का क्रूर और अवैध तानाशाह होना इस तथ्य को नहीं बदलता कि यह कार्रवाई गैरकानूनी और नासमझी भरी थी. हमने यह कहानी पहले भी देखी है. सत्ता परिवर्तन या तेल के लिए युद्ध, जिन्हें ताकत के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन अंततः अराजकता में तब्दील हो जाते हैं, और अमेरिकी परिवारों को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है.
कमला हैरिस ने आगे लिखा, “अमेरिकी जनता ऐसा नहीं चाहती, और वे झूठ से तंग आ चुके हैं. यह मामला न तो ड्रग्स का है और न ही लोकतंत्र का. यह तेल और डोनाल्ड ट्रम्प की क्षेत्रीय ताकतवर नेता बनने की चाहत का है. अगर उन्हें इन दोनों की परवाह होती, तो वे न तो दोषी ठहराए गए ड्रग तस्कर को माफ करते और न ही मादुरो के साथियों के साथ सौदे करते हुए वेनेजुएला के वैध विपक्ष को दरकिनार करते. राष्ट्रपति सैनिकों को खतरे में डाल रहे हैं, अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं, एक क्षेत्र को अस्थिर कर रहे हैं, और न तो कोई कानूनी अधिकार दे रहे हैं, न ही कोई निकास योजना, और न ही देश को कोई लाभ पहुंचा रहे हैं.”
कौन बना वेनेजुएला का नया राष्ट्रपति?
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी गिरफ्तारी के बाद वहां की सुप्रीम कोर्ट ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त किया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला मादुरो को अमेरिकी सुरक्षाबलों द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद लिया है.
बाबा वेंगा की खौफनाक भविष्यवाणी सच होने के करीब? अमेरिका-वेनेजुएला युद्ध क्या बनेगा तीसरे विश्व युद्ध की वजह
4 Jan, 2026 12:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Baba Vanga 2026 Predictions: फ्रांसीसी भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस और बुल्गारियन लेडी बाबा वेंगा की भविष्यवाणी एक बार फिर सही होती दिखाई दे रही है. उन्होंने अपनी भविष्यवाणी में कहा था कि 2026 में वैश्विक स्तर पर बड़े युद्ध होंगे. अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी कराकस में 3 जनवरी की रात को बड़े पैमाने पर हमला कर दिया. इसके बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में ले लिया. इसकी जानकारी खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शेयर की है. साल 2026 शुरू होते ही दो देशों के बीच हुई सैन्य कार्रवाई ने बाबा वेंगा की याद दिला दी. अब उनकी कही गई बात सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी.
बाबा वेंगा ने भविष्यवाणी की थी कि साल 2026 में दुनिया में तीसरा विश्व युद्ध हो सकता है. यह भविष्य के लिए काफी विनाशकारी रहने वाला है. इस दौरान इंसान ही इंसान का दुश्मन बन जाएगा. धर्म और राष्ट्रवाद के नाम पर चौतरफा हिंसा देखने को मिलेगी. इससे दुनिया में तबाही का मंजर देखने को मिल सकता है. इसके अलावा उन्होंने समुद्र से जुड़े हादसों की भी बात कही थी.
बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हुई सच!
हाल ही में हुई वेनेजुएला की घटना बाबा वेंगा की भविष्यवाणी से बिल्कुल मेल खाती है. अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी कराकस में हमला कर दिया. इसके बाद वहां के राष्ट्रपति मादुरो को और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अमेरिका ले जाया गया. अमेरिकी हमले में करीब 40 लोगों की जनहानि की खबर है. फिलहाल, दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है.
2026 को लेकर बाबा वेंगा की क्या है भविष्यवाणी?
बाबा वेंगा की 2026 की भविष्यवाणी के अनुसार, पूर्वी देशों के बीच चल रहा तनाव एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है. इसका प्रभाव पूरी दुनिया में देखने को मिलेगा. इसका असर कई पश्चिमी देशों तक पहुंचेगा. इस दौरान काफी उथल-पुथल और जान-माल की बड़ी हानि की संभावना है. इतना ही नहीं भविष्यवाणी के अनुसार, 2026 में रूस, चीन और अमेरिका जैसे देशों के बीच टकराव की स्थिति बनने की संभावना जताई गई है. अमेरिका और रूस के बीच सीधे टकराव का जिक्र किया गया है.
कैसे काम करती हैं स्पेशल डेल्टा फोर्स........निकोलस मादुरो और पत्नी को अपने साथ ले गई
4 Jan, 2026 11:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन । वेनेजुएला की राजधानी काराकास को दहलाने के बाद अमेरिकी सेना उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को उठकर अपने साथ ले गए है। अमेरिका की स्पेशल डेल्टा फोर्स ने कार्रवाई को इस तरह से अंजाम दिया कि वेनेजुएला में किसी को कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला। एक ओर अमेरिकी डेल्टा फोर्स के फाइटर जेट्स ने वेनेजुएला के कई मिलिट्री बेस पर अचानक से हमला बोला और दूसरी तरफ सीक्रेट तरीके से मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया। ये वहीं डेल्टा फोर्स है, जिसने दुनिया के खूंखार आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के सरगना अबु बक्र अल बगदादी को मौत के घाट उतारा था। डेल्टा फोर्स आज भी दुनिया की सबसे रहस्यमयी और खतरनाक स्पेशल यूनिट्स में मानी जाती है। इसकी अधिकांश जानकारी पब्लिक में भी नहीं आती। डेल्टा फोर्स अमेरिका की सशस्त्र सेनाओं की सबसे गोपनीय और हाईलेवल की स्पेशल मिशन यूनिट होती है। इस अलग-अलग समय पर कॉम्बैट एप्लिकेशंस ग्रुप (सीएजी), टास्क फोर्स ग्रीन, आर्मी कंपार्टमेंटेड एलिमेंट्स (एसीई) और सामान्य तौर पर सिर्फ ‘द यूनिट’ भी कहा गया है। इसकी असली पहचान और अस्तित्व को अमेरिकी सरकार ने कभी औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है, जो भी जानकारी सार्वजनिक है, वह पूर्व सदस्यों के बयानों पर आधारित है।
डेल्टा फोर्स का असली फोकस एंटी टेररिस्ट ऑपरेशंसन हैं, जिसमें हाई-वैल्यू टारगेट्स को पकड़ना या समाप्त करना और आतंकी नेटवर्क को तोड़ना शामिल है। हालांकि, यह यूनिट केवल काउंटर-टेररिज्म तक सीमित नहीं है। इस छापेमारी, तोड़फोड़, बंधक मुक्ति, विशेष निगरानी और खुफिया अभियानों जैसे कई प्रकार के मिशनों में तैनात किया जाता है। यह यूनिट जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (जेएसओसी) के ऑपरेशनल कंट्रोल में काम करती है, जबकि इसका प्रशासन यूएस आर्मी स्पेशल ऑपरेशंस कमांड संभालता है। इसका हेडक्वॉर्टर नॉर्थ कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग में है।
चीन से चले रहे तनाव के बीच ट्रंप ने दिया जापानी पीएम को अमेरिका आने का न्यौता
4 Jan, 2026 09:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को फोन पर बातचीत में जापान की पीएम साने ताकाइची को अमेरिका आने का निमंत्रण दिया है। जापान के विदेश मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि अक्टूबर में पदभार संभालने के बाद ताकाइची की यह अमेरिका की पहली यात्रा होगी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस ने हालांकि अब तक इस बातचीत और निमंत्रण की पुष्टि नहीं की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है, जब जापान और चीन के बीच संबंध तनावपूर्ण चल रहे हैं और क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है। अमेरिका, जापान के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ अप्रैल में ट्रंप की संभावित चीन यात्रा से पहले बीजिंग के साथ भी अपने संबंधों को स्थिर करने की कोशिश में जुटा है। अमेरिका को जापान का करीबी सहयोगी माना जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक बीजिंग ने इस सप्ताह ताइवान के तटवर्ती जलक्षेत्र में दो दिवसीय सैन्य अभ्यास किया था। शुक्रवार को जारी बयान में जापान के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि ताकाइची और ट्रंप ने इस साल प्रस्तावित यात्रा को संभव बनाने के लिए समन्वय करने पर सहमति जताई है। जापान की समाचार एजेंसी ने संकेत दिया है कि ताकाइची की अमेरिका यात्रा वॉशिंगटन में होने वाले वार्षिक ‘चेरी ब्लॉसम’ महोत्सव के दौरान हो सकती है।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने निकोलस मादुरो को बताया नार्को-आतंकी
4 Jan, 2026 08:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । वेनेजुएला में निकोलस मादुरो के खिलाफ की गई अमेरिकी कार्रवाई को लेकर उठ रहे अंतरराष्ट्रीय सवालों पर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने तीखा जवाब दिया है। वेंस ने साफ कहा कि मादुरो किसी भी सूरत में वैध राष्ट्राध्यक्ष नहीं हैं, बल्कि अमेरिका में कई मामलों में आरोपित एक “नार्को-आतंकी” हैं, जिनके खिलाफ अमेरिकी अदालतों में गिरफ्तारी वारंट जारी हैं। उपराष्ट्रपति वेंस के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मादुरो को कई बार चेतावनी दी थी और “ऑफ-रैम्प” यानी सुधार का मौका दिया गया था। इन चेतावनियों में ड्रग तस्करी रोकने और अमेरिका से कथित रूप से चुराए गए तेल को लौटाने की मांग शामिल थी। लेकिन मादुरो ने इन सभी चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया। वेंस ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आप कराकस के किसी महल में रहकर अमेरिका में ड्रग तस्करी के अपराधों से बच नहीं सकते।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ट्रंप प्रशासन पूरे समय इस बात को लेकर स्पष्ट था कि अगर अवैध गतिविधियां बंद नहीं हुईं, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
न्यूयॉर्क के मेयर ने जेल में बंद उमर खालिद को लिखी चिट्ठी, यूएस सांसदों ने भी उठाई रिहाई की मांग
3 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क। उमर खालिद साल 2020 से दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में यूएपीए के तहत जेल में हैं। हाल ही में दिसंबर में उन्हें अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए संक्षिप्त अंतरिम जमानत मिली थी, जिसके बाद वे अब पुनः जेल वापस जा चुके हैं। इसी बीच, अमेरिका में भी उमर खालिद और अन्य मुस्लिम कार्यकर्ताओं की लंबी हिरासत को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं। अमेरिकी सांसद जेम्स पी. मैकगवर्न सहित आठ विधायकों ने भारतीय राजदूत को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। न्यूयॉर्क शहर के नवनिर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी ने जेल में बंद भारतीय कार्यकर्ता उमर खालिद के प्रति अपना समर्थन जताते हुए उन्हें हाथ से लिखी एक भावुक चिट्ठी भेजी है।
भारतीय मूल के मुस्लिम नेता ममदानी ने 1 जनवरी 2026 को मेयर पद की शपथ लेने के साथ ही इस पहल के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। यह चिट्ठी उस समय सामने आई है जब उमर खालिद के साथी और परिवार के सदस्य उनकी लंबी हिरासत के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं। अपनी चिट्ठी में मेयर ममदानी ने उमर खालिद के साहस की सराहना करते हुए लिखा कि वह अक्सर उनके उन शब्दों को याद करते हैं, जिनमें कड़वाहट को खुद पर हावी न होने देने की बात कही गई थी। ममदानी ने दिसंबर 2025 में अमेरिका यात्रा पर गए उमर के माता-पिता से मुलाकात के बाद यह नोट लिखा था। उन्होंने संदेश में स्पष्ट किया कि वे और उनके समर्थक उमर के बारे में सोच रहे हैं। इस पत्र को उमर की साथी बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने सोशल मीडिया पर साझा किया है। यह ममदानी का उमर के प्रति पहला समर्थन नहीं है, इससे पहले 2023 में भी उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उमर की जेल से लिखी चिट्ठी पढ़ी थी और उन्हें नफरत के खिलाफ लड़ने वाला व्यक्तित्व बताया था। अमेरिकी सांसदों ने अपनी चिट्ठी में जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि मानवाधिकार संगठनों को ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं जो उमर को आतंकवाद से जोड़ते हों। उन्होंने भारत सरकार से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समझौतों का पालन करने और त्वरित सुनवाई या रिहाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। न्यूयॉर्क के मेयर और अमेरिकी सांसदों के इन कदमों ने उमर खालिद के मामले को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
मोबाइल से दूर होते ही बेचैनी? डॉक्टरों ने ‘नोमोफोबिया’ को लेकर किया सतर्क
3 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अबू धाबी/दुबई। आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। यूएई में स्कूल बस से लेकर दफ्तर और घर तक, मोबाइल हर वक्त लोगों के हाथ में नजर आता है। काम, परिवार, सुरक्षा और दोस्तों से जुड़े रहने के लिए मोबाइल जरूरी बन गया है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि मोबाइल से जरूरत से ज्यादा जुड़ाव अब सेहत के लिए खतरा बन रहा है।
डॉक्टरों के मुताबिक, मोबाइल फोन से दूर होते ही घबराहट या बेचैनी महसूस होना एक मानसिक स्थिति की ओर इशारा करता है, जिसे ‘नोमोफोबिया’ कहा जाता है। इसका मतलब है मोबाइल फोन के बिना रहने का डर। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिसर्च स्टडीज इन एजुकेशन में छपी एक स्टडी के अनुसार, अमेरिका में 94 प्रतिशत मोबाइल यूजर्स किसी न किसी रूप में इस समस्या से जूझ रहे हैं।
हालांकि, यह अध्ययन अमेरिका पर आधारित है, लेकिन यूएई के मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यहां भी ऐसे ही लक्षण तेजी से देखने को मिल रहे हैं। डॉक्टर बताते हैं कि ज्यादातर लोग खुद यह नहीं समझ पाते कि उन्हें नोमोफोबिया है। यह बीमारी सीधे सामने नहीं आती, बल्कि इसके संकेत रोजमर्रा की परेशानियों में दिखते हैं।
अबू धाबी स्थित एनएमसी रॉयल हॉस्पिटल के मनोचिकित्सक डॉ. ओमर बिन अब्दुलअज़ीज ने बताया कि मोबाइल से दूरी होने पर लोगों को नींद न आना, चिड़चिड़ापन, चिंता, ध्यान लगाने में परेशानी और तनाव जैसी समस्याएं होने लगती हैं। खासतौर पर तब, जब फोन हाथ में न हो या नेटवर्क न मिले। डॉक्टरों का कहना है कि यह समस्या इसलिए बढ़ रही है, क्योंकि मोबाइल फोन हमारी दिनचर्या में पूरी तरह घुल-मिल गया है। देर रात तक फोन चलाना नींद की गुणवत्ता को खराब करता है और मानसिक तनाव बढ़ाता है।
ईरान में महंगाई के खिलाफ लोगों में भारी गुस्सा, हिंसा में छह लोगों की मौत
3 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान में खराब आर्थिक स्थिति और बढ़ती महंगाई के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने अब उग्र रूप धारण कर लिया है। राजधानी तेहरान से शुरू हुआ यह असंतोष अब देश के ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों तक फैल गया है। गुरुवार को हालात उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गए जब प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों में कम से कम छह लोगों की जान चली गई। साल 2022 के बड़े जन-आंदोलन के बाद यह पहली बार है जब देश में इतने बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों के दौरान मौतें दर्ज की गई हैं।
आधिकारिक जानकारियों और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, हिंसा की ये घटनाएं मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में हुईं जहां लुर समुदाय की घनी आबादी है। बुधवार को एक व्यक्ति की मौत के बाद गुरुवार को पांच अन्य लोगों ने अपनी जान गंवाई। लोरेस्तान प्रांत का अजना शहर हिंसा का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में सड़कों पर आगजनी, गोलियों की आवाजें और सरकार विरोधी नारेबाजी साफ सुनी जा सकती है। हालांकि तेहरान में फिलहाल स्थिति कुछ हद तक नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन देश के अन्य हिस्सों में आंदोलन की आग लगातार फैल रही है।
विशेषज्ञ इन प्रदर्शनों को 2022 के महसा अमीनी आंदोलन के बाद का सबसे बड़ा विरोध मान रहे हैं। हालांकि मौजूदा आंदोलन अभी उतना व्यापक नहीं है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का स्वर अब धीरे-धीरे विशुद्ध आर्थिक मांगों से हटकर सत्ता के खिलाफ होता जा रहा है। दूसरी ओर, सरकारी मीडिया इन घटनाओं पर लगभग मौन है और बहुत ही सीमित जानकारी साझा कर रहा है। 2022 की हिंसा के दौरान रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर हुई सख्ती के कारण भी स्थानीय स्तर पर सूचनाओं का प्रवाह धीमा है। जिस तरह से सुरक्षा बलों ने कार्रवाई शुरू की है, उससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में प्रशासन इस आंदोलन को कुचलने के लिए और भी कड़े कदम उठा सकता है, जिससे तनाव और बढ़ने की आशंका है।
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