ख़बर
Iran Protest: ईरान में तनाव बरकरार, अमेरिका ने लगाए नए प्रतिबंध
16 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Iran Protest : ईरान में हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। 28 दिसंबर से शुरू हुए इन प्रदर्शनों के बाद से देश के कई हिस्सों में तनाव की स्थिति बनी हुई है। एक तरफ ईरानी प्रशासन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका खुलकर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सामने आ गया है। इस टकराव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिका पहले भी कई बार ईरान को चेतावनी दे चुका है कि वह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा बंद करे। अमेरिकी प्रशासन का साफ कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है और उन्हें बल प्रयोग के जरिए दबाना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। अमेरिका ने यहां तक कहा है कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या और दमन नहीं रोका गया, तो वह सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
इसी कड़ी में Iran Protest के दौरान गुरुवार को अमेरिका ने बड़ा फैसला लिया। शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने के आरोप में अमेरिका ने कई ईरानी सुरक्षा अधिकारियों और उनसे जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाना और मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकना बताया जा रहा है।
अमेरिका का यह कदम ऐसे समय पर आया है, जब ईरान के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के चलते माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी ईरान की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
165 करोड़ की गोल्ड चोरी के आरोपी प्रीत पनेसर के प्रत्यर्पण की भारत से मांग
16 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोरंटो। 2023 में हुई करीब 20 मिलियन डॉलर यानी करीब 165 करोड़ रुपये की गोल्ड हीस्ट कनाडा के इतिहास की सबसे बड़ी चोरी है। इस मामले में कनाडा सरकार ने भारत से आरोपी प्रीत पनेसर के प्रत्यर्पण की मांग की है। मीडिया रिपोर्ट में कनाडा पुलिस के मुताबिक 32 साल के प्रीत पनेसर इस पूरी चोरी की मुख्य कड़ी था। पनेसर एयर कनाडा में मैनेजर के पद पर काम कर चुका है और उस पर एयर कार्गो सिस्टम का दुरुपयोग कर सोने से भरे कंटेनरों को चोरी करने का आरोप है।
रिपोर्टे के मुताबिक पनेसर ने गोल्ड शिपमेंट की पहचान करके सिस्टम को हैक किया और इसके जरिए सोने भरे कंटेनर को एयरपोर्ट से बाहर निकलवाने में अहम भूमिका निभाई। फरवरी 2025 में जांच में पता चला कि पनेसर भारत में छिपा है। वह पंजाब के मोहाली में किराए के मकान में पकड़ा गया। इस पर प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में छापेमारी करते हुए केस दर्ज किया। संदेह है कि चोरी के बाद करीब 8.5 करोड़ रुपए हवाला सिस्टम के जरिए भारत लाए गए, जिनका उपयोग म्यूजिक और फिल्म इंडस्ट्री के प्रोजेक्ट्स में किया गया। यह पैसा पनेसर की पत्नी की कंपनी के जरिए निवेश किया गया था।
इस बीच कनाडाई पुलिस ने एक और आरोपी अरसलान चौधरी को टोरंटो पियर्सन एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया है। अब तक कुल नौ आरोपियों पर केस दर्ज हो चुका है, जबकि प्रीत पनेसर समेत दो अभी फरार हैं। प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों का कहना है कि अभी तक प्रत्यर्पण का आधिकारिक अनुरोध नहीं मिला है, लेकिन कनाडाई एजेंसियों से संपर्क जारी है। यह मामला दोनों देशों के बीच कानून प्रवर्तन सहयोग की एक बड़ी चुनौती बन गया है।
ट्रप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी के बाद नाटो के 6 देशों के सैनिक तैनात
16 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेनमार्क। ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। किसी भी बाहरी खतरे से ग्रीनलैंड को बचाने के लिए नाटो देश सक्रिय हो गए हैं। डेनमार्क की अपील पर अब तक छह नाटो देशों ने वहां अपने सैनिक या सैन्य कर्मी भेजने का फैसला किया है। इनमें स्वीडन, नॉर्वे, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड्स और कनाडा शामिल हैं। ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है, लेकिन इसकी रणनीतिक अहमियत के चलते यह वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताते हुए उस पर कब्जे की धमकी दी है। ट्रंप का दावा है कि रूस और चीन ग्रीनलैंड का फायदा उठा सकते हैं। इन बयानों के बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर वहां और आसपास के इलाकों में सैन्य मौजूदगी बढ़ानी शुरू कर दी है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सबसे पहले स्वीडन ने ग्रीनलैंड में सैनिक भेजने का ऐलान किया। स्वीडन के पीएम उल्फ क्रिस्टर्सन ने कहा कि डेनमार्क के अनुरोध पर यह कदम उठाया गया है। यह तैनाती डेनमार्क के सैन्य अभ्यास ‘ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस’ के तहत की जा रही है। इसके बाद नॉर्वे के रक्षा मंत्री टोरे सैंडविक ने बताया कि उनका देश भी दो सैन्य कर्मियों को ग्रीनलैंड भेज रहा है। उन्होंने कहा कि नाटो देश आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करने के तरीकों पर लगातार चर्चा कर रहे हैं।
जर्मनी ने भी ग्रीनलैंड में सैनिक भेजने की घोषणा की है। जर्मन सरकार के मुताबिक एक टोही मिशन के तहत 13 सैनिक भेजे जाएंगे। यह मिशन डेनमार्क के अनुरोध पर शुरू किया गया है और इसका उद्देश्य यह जानना है कि क्षेत्र की सुरक्षा को और कैसे मजबूत किया जाए, जिसमें समुद्री निगरानी भी शामिल हो सकती है। वहीं फ्रांस के एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि फ्रांस ने भी ग्रीनलैंड में अपने सैन्य कर्मी भेजे हैं, जो कई सहयोगी देशों के साथ संयुक्त अभ्यास में हिस्सा लेंगे।
ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम है और नाटो को अमेरिका की मदद करनी चाहिए, लेकिन डेनमार्क समेत नाटो के अन्य सदस्य देश इस मांग को खारिज कर चुके हैं। उनका साफ कहना है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है और नाटो के नियमों के तहत सदस्य देश एक-दूसरे पर हमला नहीं कर सकते हैं।
मध्य-पूर्व में अमेरिकी मिलिट्री बेस की स्थिति
15 Jan, 2026 06:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान |ईरान और अमेरिका में तनातनी चरम पर पहुंच गई है। आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका ईरान पर कभी भी सैन्य हमला कर सकता है। यही वजह है कि भारत समेत दुनिया भर के देशों ने अपने-अपने नागरिकों से तुरंत ईरान छोड़ने को कहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस तनातनी को तब और बढ़ा दिया, जब उन्होंने ईरान में प्रदर्शनकारियों से अपना आंदोलन तेज करने का आह्वान किया और कहा कि मदद पहुंच रही है। इस बीच, ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया वह चुप नहीं बैठेगा और मध्य-पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर जवाही हमला करेगा।शायद यही वजह है कि अमेरिका ने मध्य-पूर्व में स्थित अपने मिलिट्री बेस से सैनिकों और कर्मियों को वापस बुलाने का फैसला किया है। ईरान ने अमेरिकी हमलों की आशंकाओं के मद्देनजर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर और तुर्की समेत मिडिल ईस्ट के कई देशों को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो वह उनके देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाएगा।
चुप्पी खतरों को कम नहीं करती, US हमले की आशंका के बीच भारत से बोला ईरान
दुनिया भर में अमेरिका के सैन्य अड्डे: कहां, क्यों और कितने अहम?
दुनिया भर में अमेरिका के सैन्य ठिकाने दो तरह हैं। पहला एयर बेस, जहां लड़ाकू विमान रखे जाते हैं और वहां से संचालित किए जाते हैं, और दूसरा नेवल बेस होते हैं, जहां युद्धपोत और नौसैनिक जहाज़ तैनात रहते हैं। जुलाई 2024 तक, अमेरिका के पास दूसरे देशों में कम से कम 128 सैन्य अड्डे हैं। इनमें सबसे बड़ा विदेशी अड्डा दक्षिण कोरिया का कैंप हम्फ्रीज़ है, जो क्षेत्रफल के लिहाज़ से अमेरिका का सबसे बड़ा ओवरसीज़ बेस माना जाता है। ब्राउन यूनिवर्सिटी के वॉटसन इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2001 के बाद 19 से 30 लाख अमेरिकी सैनिकों ने अफगानिस्तान और इराक युद्धों में सेवा दी इनमें से आधे से ज़्यादा सैनिक एक से अधिक बार इन युद्ध क्षेत्रों में भेजे गए।
मिडिल-ईस्ट में कहां-कहां अमेरिकी सैन्य अड्डे?
मध्य-पूर्व के करीब आधा दर्जन मुस्लिम देशों में अमेरिका के सैन्य अड्डे हैं। इनमें सउदी अरब, कतर, UAE, बहरीन, तुर्की, इराक और जॉर्डन शामिल हैं। ये अमेरिकी सैन्य अड्डे मध्य-पूर्व और पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन बनाए रखते हैं। आतंकवाद विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाते हैं और ईरान, रूस और चीन जैसे देशों पर रणनीतिक दबाव बनाए रखते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट में अमेरिका के कुल 19 मिलिट्री बेस हैं। इनमें से हरेक सैन्य अड्डों पर करीब 40 से 50 हजार सैनिक तैनात हैं। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय है। यह बेड़ा खाड़ी क्षेत्रों खासकर लाल सागर, अरब सागर और हिंद महासागर के कुछ हिस्सों में नौसैनिक सुरक्षा और सैन्य अभियानों की निगरानी करता है। समुद्री रक्षा में यह बेड़ा काफी अहम माना जाता है।
रूस-ईरान समेत 75 देशों के लोगों की US में नो एंट्री, ट्रंप ने दिया एक और झटका
कतर की राजधानी दोहा के पास अल उदैद एयर बेस है, जो रेगिस्तान में 24 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह ईरान से करीब 190 KM की दूरी पर फारस की खाड़ी के किनारे स्थित है। यहां करीब 10,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का मुख्यालय है। यह कमांड मिस्र से कजाकिस्तान तक के बड़े क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों को संभालता है। पिछले साल जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु सुविधा ठिकानों पर हमले किए थे तब ईरान ने कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। इस वजह से कतर पहले से ही सचेत है और अमेरिका पर हमले नहीं करने का दबाव बना रहा है।कुवैत: कुवैत में कई अमेरिकी सैन्य बेस हैं। कैंप आरिफजान यूएस आर्मी सेंट्रल कमांड का मुख्यालय है। वहां अली अल सलेम एयर बेस भी है, जो इराक सीमा से 40 किमी दूर, अलग-थलग और कठिन इलाके में स्थित है। कुवैत में ही कैंप ब्यूहरिंग सैन्य अड्डा भी है। 2003 के इराक युद्ध के दौरान ये अड्डा बना था। यह इराक और सीरिया भेजे जाने वाले सैनिकों का ट्रांज़िट बेस है।
ईरान की धमकी से डर गए ट्रंप? मिडिल ईस्ट बेस से वापस बुलाई जा रही अमेरिकी सेना
संयुक्त अरब अमीरात: UAE की राजधानी अबू धाबी के पास अल धफरा एयर बेस है, जो यूएई वायुसेना के साथ साझेदारी में है यहां से ISR और ड्रोन ऑपरेशंस किए जाते हैं। ISIS के खिलाफ अभियानों और क्षेत्रीय निगरानी में यह अड्डा अहम भूमिका निभाता रहा है। दुबई के जिबेल अली पोर्ट औपचारिक बेस नहीं है लेकिन पश्चिम एशिया में अमेरिकी नौसेना का सबसे बड़ा पोर्ट ऑफ कॉल है। यहां अक्सर अमेरिकी विमानवाहक पोत और युद्धपोत आते हैंइराक: पश्चिमी इराक के अनबार प्रांत में ऐन अल असद एयर बेस है। यह इराकी सुरक्षा बलों और नाटो मिशन को समर्थन देता है। 2020 में जनरल कासेम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए ईरान ने इस पर मिसाइल हमला किया था। इसके अलावा उत्तरी इराक के कुर्द क्षेत्र में एरबिल एयर बेस इराक में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है। यह अमेरिकी और सहयोगी देशों के प्रशिक्षण का केंद्र है। यह खुफिया जानकारी, लॉजिस्टिक्स और सैन्य योजना का अहम ठिकाना है।सऊदी अरब: सऊदी अरब के रियाद के दक्षिण में 60 किलोमीटर की दूरी पर प्रिंस सुल्तान एयर बेस है। यह क्षेत्र में हवाई और मिसाइल रक्षा अभियानों का समर्थन करता है। यहां पैट्रियट और THAAD जैसे उन्नत रक्षा सिस्टम तैनात हैं। सऊदी अरब में 2024 तक 2,321 अमेरिकी सैनिक मौजूद थे। क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सऊदी सेना के साथ अमेरिकी सेना समन्वय कर ऑपरेशन करती है।जॉर्डन: जॉर्डन की राजधानी अम्मान से लगभग 100 किमी दूर अज़्राक में मुवाफ़क़ अल सल्टी एयर बेस है। यहां अमेरिकी वायुसेना की 332वीं एयर एक्सपेडिशनरी विंग तैनात है। यह सीरिया, लेबनान, इज़राइल, जॉर्डन और इराक क्षेत्र में निगरानी, हवाई अभियान और सैन्य समन्वय करती है।तुर्की और अमेरिका मिलकर दक्षिणी अदाना प्रांत में इंसिरलिक एयर बेस चलाते हैं। यहां अमेरिकी परमाणु हथियार रखे हैं। यहां से ISIS के खिलाफ गठबंधन को सहयोग दिया जाता है। तुर्की में 1465 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। इनके अलावा पाकिस्तान, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, किरगिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान में भी अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं। कुल मिलाकर देखें तो ईरान को चारों तरफ से अमेरिकी सैन्य अड्डों ने घेर रखा है।
डोनाल्ड ट्रंप के तेवर पड़े नरम, बोले- ईरान में हत्याएं रूक गई, अब फांसी देने का कोई प्लान नहीं
15 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । कई दिनों तक चली धमकियों, चेतावनियों और टकराव की आशंका के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने कहा है कि ईरान (Iran) में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों (Protests) के दौरान हो रही हत्याएं अब रुक गई हैं। ट्रंप के इस बयान को हाल के दिनों में तीखे और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी वाले रुख के बाद अपेक्षाकृत सतर्क संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
ट्रंप का यह बयान 26 वर्षीय ईरानी प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी के भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता के बाद आया है। सुल्तानी को एक हफ्ते से भी कम समय पहले हिरासत में लिया गया था और उनके जल्द फांसी दिए जाने की आशंकाएं जताई जा रही थीं।
हत्या और फांसी दोनों रुकीं: ट्रंप
वॉशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि प्रदर्शनकारियों की हत्याएं और प्रस्तावित फांसियां दोनों ही रोक दी गई हैं। ट्रंप ने कहा- मुझे अभी-अभी कुछ जानकारी मिली है कि हत्याएं रुक गई हैं। फांसियां भी रुक गई हैं और अब किसी को फांसी नहीं दी जाएगी, जिसे लेकर पिछले कुछ दिनों से बहुत चर्चा थी।
हालांकि जब उनसे पूछा गया कि उन्हें यह जानकारी किसने दी, तो उन्होंने किसी का नाम बताने से इनकार करते हुए सिर्फ इतना कहा कि ये सूचनाएं दूसरी तरफ के बेहद महत्वपूर्ण स्रोतों से आई हैं।
सुल्तानी की फांसी टली
इसी बीच, नॉर्वे स्थित हेंगा संगठन मानवाधिकार ने बुधवार देर रात बताया कि सुल्तानी की फांसी फिलहाल टाल दी गई है। इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ राहत देखी गई।
ट्रंप ने कहा कि अब उनका प्रशासन वेट एंड वॉच यानी हालात पर नजर बनाए रखने की नीति अपनाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि वाइट हाउस को ईरान की ओर से एक बहुत अच्छा बयान मिला है। हालांकि उन्होंने सैन्य कार्रवाई की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका ने क्षेत्रीय तनाव के बीच कतर के एक एयरबेस से कुछ कर्मियों को वापस बुलाना शुरू कर दिया है।
ईरान ने बंद किया एयरस्पेस, एयर इंडिया और इंडिगो ने यात्रियों के लिए जारी की ट्रैवल एडवाइजरी, उड़ानों के रूट में बदलाव
15 Jan, 2026 09:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Air India Advisory: ईरान में हिंसा के बाद तनाव की स्थिति बनी हुई है, अभी भी हालातों में सुधार नहीं हो पाया है. इसी तनाव की वजह से ईरान के ऊपर से गुजरने वाली फ्लाइटों के रूट में बदलाव करना पड़ा है. एअर इंडिया और इंडिगो एयरलाइन ने भी अपने यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है. ईरान के ऊपर से विमान नहीं गुजरेंगे तो इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था होगी, जिसमें यात्रियों का समय तय समय से ज्यादा लग सकता है, तो वहीं कुछ उड़ानों को रद्द भी किया जा सकता है. इसलिए अगर आप भी यात्रा पर जा रहे हैं तो यात्रा करने से पहले उड़ानों के स्टेटस के बारे में जरूर पता कर लें.
एयर इंडिया ने जारी की एडवाइजरी?
एयर इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “ईरान में उत्पन्न स्थिति और उसके हवाई क्षेत्र के बंद होने के कारण, तथा हमारे यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, इस क्षेत्र से गुजरने वाली एयर इंडिया की उड़ानें अब वैकल्पिक मार्ग का उपयोग कर रही हैं, जिससे विलंब हो सकता है. कुछ एयर इंडिया की उड़ानें, जिनका मार्ग बदलना फिलहाल संभव नहीं है, रद्द की जा रही हैं. हम यात्रियों से अनुरोध करते हैं कि हवाई अड्डे जाने से पहले हमारी ऑफिशियल वेबसाइट पर अपनी उड़ानों की स्थिति अवश्य देख लें. इस अप्रत्याशित व्यवधान के कारण यात्रियों को हुई असुविधा के लिए एयर इंडिया खेद व्यक्त करती है. हमारे यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है.”
इंडिगो ने भी यात्रियों को दी सलाह
इंडिगो एयरलाइन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यात्रियों के लिए सलाह दी है, जिसमें लिखा, “ईरान द्वारा अचानक हवाई क्षेत्र बंद किए जाने के कारण, हमारी कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुई हैं. हमारी टीमें स्थिति का आकलन करने और प्रभावित यात्रियों को सर्वोत्तम संभव विकल्प उपलब्ध कराने के लिए तत्परता से काम कर रही हैं.
यह घटनाक्रम हमारे नियंत्रण से बाहर है, और आपकी यात्रा योजनाओं में हुई असुविधा के लिए हमें खेद है. यदि आपकी उड़ान प्रभावित हुई है, तो हम आपको हमारी वेबसाइट पर जाकर लचीले पुनर्बुकिंग विकल्पों का पता लगाने या अपनी पसंद के अनुसार धनवापसी का दावा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. हम इस बदलती स्थिति में आपको सूचित रखने और आपका समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. आपके धैर्य और समझ के लिए धन्यवाद.
एविएशन एक्सपर्टों का मानना है कि ईरान में राजनैतिक तनाव और एयरस्पेस बंद होने से इसका असर वैश्विक एयर ऑपरेशंस पर दिखाई देगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के ऊपर से कोई भी फ्लाइट्स नहीं गुजर रहा है.
सभी एयरलाइनों ने वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करना शुरू कर दी हैं. तो वहीं कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन ने अपने मार्ग बदल दिए या कैंसिल कर दिए. एयर इंडिया ने साफ कहा कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
एलन मस्क पर हो रही धन वर्षा… एक ही दिन में 42.2 अरब डॉलर बढ़ी दौलत
15 Jan, 2026 08:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। दुनिया सबसे अमीर व्यक्ति टेस्ला के एलन मस्क ( World’s Richest Person Elon Musk) की दौलत में भारी इजाफा (Huge Increase Wealth) हुआ है। बुधवार को उनके ऊपर डॉलर की ऐसी बारिश हुई कि एक ही दिन में 42.2 अरब डॉलर पीट दिए। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स (Bloomberg Billionaire List) के मुताबिक मस्क की दौलत इस उछाल के बाद 683 अरब डॉलर पर पहुंच गई है। महज 14 दिनों में मस्क की संपत्ति 63.1 अरब डॉलर बढ़ी है।
दूसरी ओर ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के टॉप-10 अरबपतियों को बुधवार को बड़े झटके लगे। जेफ बेजोस को 5.22 अरब डॉलर, लैरी एलिसन को 8.85 अरब डॉलर, मार्क जुकरबर्ग को 5.32 अरब डॉलर और बर्नार्ड अर्नाल्ट को 2.48 अरब डॉलर का झटका लगा है। स्टीव बाल्मर को भी 3.55 अबर डॉलर और जेनसेन हुआंग को 2.16 अरब डॉलर की चोट पहुंची है। लैरी पेज को 70.5 मिलियन डॉलर, सर्गेई ब्रिन को 90 मिलियन डॉलर और वॉरेन बफेट को 118 मिलियन डॉलर की चोट पहुंची है।
मस्क दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कार बनाने वाली कंपनी टेस्ला और प्राइवेट रॉकेट बिजनेस स्पेसएक्स के CEO हैं। कंपनी के 2025 प्रॉक्सी स्टेटमेंट के अनुसार, मस्क के पास टेस्ला का लगभग 12% हिस्सा है। उनके पास 2018 के कंपनसेशन पैकेज से लगभग 304 मिलियन एक्सरसाइजेबल स्टॉक ऑप्शन भी हैं।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक स्पेसएक्स का वैल्यूएशन दिसंबर 2025 के टेंडर ऑफर का इस्तेमाल करके किया गया है, जिसमें कंपनी की वैल्यू लगभग $800 बिलियन आंकी गई है। फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन के साथ सितंबर 2025 की फाइलिंग के आधार पर एक ट्रस्ट के जरिए मस्क के पास इस प्राइवेट कंपनी का लगभग 42% हिस्सा है। 5% प्राइवेट कंपनी डिस्काउंट लागू किया गया है। दिसंबर 2025 में नए वैल्यूएशन को ध्यान में रखते हुए एक एडजस्टमेंट किया गया, जिससे उनकी नेटवर्थ में $168 बिलियन की बढ़ोतरी हुई।
क्यों उछली दौलत
xAI का वैल्यूएशन जनवरी 2026 के फंडिंग राउंड का इस्तेमाल करके किया गया है, जिसमें 20 अरब डॉलर जुटाए गए और पोस्ट-मनी वैल्यूएशन 230 अरब डॉलर था। कंपनी के कैपिटल स्ट्रक्चर से परिचित एक व्यक्ति के अनुसार, जो अपनी पहचान नहीं बताना चाहता था क्योंकि यह जानकारी प्राइवेट है, इस राउंड के बाद मस्क के पास कंपनी का 51% हिस्सा था। 15% लिक्विडिटी डिस्काउंट लागू किया गया है। नया वैल्यूएशन जनवरी 2026 में लागू किया गया, जिससे उनकी नेटवर्थ में 48 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई।
ईरान में हिंसा बेकाबू, ढाई हजार से ज्यादा मौतों का दावा
14 Jan, 2026 07:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान|ईरान में विरोध प्रदर्शन के चलते हालात बेकाबू हो गए हैं। अब तक इन प्रदर्शनों में ढाई हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। बिगड़ते हालात के बीच भारत ने ईरान में रह रहे अपने लोगों से तुरंत ईरान छोड़ने की अपील की है। ईरान में स्थित भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिक- टूरिस्ट, बिजनेसमैन, छात्र आदि से देश छोड़ने के लिए कह दिया है। दूतावास ने कहा है कि वे कमर्शियल फ्लाइट्स समेत उपलब्ध ट्रांसपोर्ट के साधनों का इस्तेमाल करके ईरान छोड़ दें। यह फैसला बदलती स्थिति को देखते हुए लिया गया है।दूतावास ने ईरान में सभी भारतीय नागरिकों और PIO को सावधानी बरतने की सलाह दी है, और उनसे उन इलाकों से दूर रहने को कहा है जहां विरोध प्रदर्शन या धरने हो रहे हैं। नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे ईरान में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें और किसी भी नई जानकारी के लिए स्थानीय मीडिया रिपोर्ट पर नजर रखें।दूतावास ने भारतीय नागरिकों से अपने इमिग्रेशन डॉक्यूमेंट्स तैयार रखने का आग्रह किया है। एडवाइजरी में कहा गया है, “ईरान में सभी भारतीय नागरिकों से अनुरोध है कि वे अपने यात्रा और इमिग्रेशन डॉक्यूमेंट्स, जिसमें पासपोर्ट और आईडी शामिल हैं, अपने पास तैयार रखें। इस संबंध में किसी भी सहायता के लिए उनसे भारतीय दूतावास से संपर्क करने का अनुरोध किया जाता है।”
US-ईरान की लड़ाई में फंस गया PAK, 3 संकट ने घेरा; मुनीर को बुलानी पड़ी आपात बैठकये भी पढ़ें:प्रदर्शनकारियों को फांसी पर लटकाएगा ईरान, ट्रंप की धमकियों का भी नहीं असर
ईरान में मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,571 हो गई है। अमेरिका की एक मानवाधिकार संस्था ने बुधवार को यह जानकारी दी। अमेरिका की मानवाधिकार संस्था ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी’ ने ये आंकड़े बताए हैं। यह एजेंसी हाल के वर्षों में हुई हिंसक घटनाओं के दौरान सटीक जानकारी देने के लिए जानी जाती रही है और ईरान में मौजूद अपने समर्थकों के जरिए सूचनाओं का सत्यापन करती है। संस्था ने कहा कि मरने वालों में 2,403 प्रदर्शनकारी हैं और 147 सरकारी कर्मी हैं। संस्था ने बताया कि मारे गए लोगों में 12 बच्चे और नौ आम नागरिक भी शामिल हैं जो प्रदर्शनों में शामिल नहीं थे। संस्था ने बताया कि 18,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
ईरान की हिंसा पर लारीजानी ने ट्रंप और नेतन्याहू को बताया असली कातिल
14 Jan, 2026 05:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने अब एक बेहद हिंसक और भयावह मोड़ ले लिया है। पिछले दो हफ्तों से जारी इस उथल-पुथल में मरने वालों की संख्या आधिकारिक तौर पर 2,000 के पार पहुंच गई है, जिसके बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने मंगलवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को ईरानी जनता का मुख्य हत्यारा करार दिया है। लारीजानी का यह हमला तब आया जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान में हो रहे रक्तपात के विरोध में ईरानी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित सभी बैठकें रद्द कर दीं और प्रदर्शनकारियों को सरकारी संस्थानों पर कब्जा करने का आह्वान किया।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और पूर्व संसद अध्यक्ष अली लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सीधे तौर पर वॉशिंगटन और तेल अवीव को इस अशांति का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने अपनी पोस्ट में स्पष्ट रूप से लिखा, हम ईरानी जनता के असली कातिलों के नाम घोषित करते हैं। पहला ट्रंप और दूसरा नेतन्याहू। लारीजानी ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल सुनियोजित तरीके से देश के भीतर अस्थिरता पैदा कर रहे हैं और हिंसा भड़का रहे हैं।
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया संदेश ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर प्रदर्शनकारियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा, ईरानी देशभक्तों, विरोध जारी रखो। अपने संस्थानों पर कब्जा कर लो! मदद आ रही है। हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह मदद सैन्य होगी या आर्थिक, लेकिन उनके इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। एक साक्षात्कार के दौरान ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों को फांसी देने का सिलसिला शुरू हुआ, तो अमेरिका बेहद कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक निर्दोषों की हत्याएं नहीं रुकतीं, ईरान के साथ किसी भी स्तर की बातचीत संभव नहीं है।
मानवाधिकार संस्थाओं और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, ईरान में स्थिति अब गृहयुद्ध जैसी होती जा रही है। कार्यकर्ताओं का दावा है कि अब तक कम से कम 2,003 लोग मारे गए हैं, जबकि कुछ अंतरराष्ट्रीय सूत्र यह संख्या 12,000 से 20,000 के बीच होने की आशंका जता रहे हैं। ईरानी सरकारी मीडिया ने भी अब अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार किया है कि देश में कई शहीद हुए हैं। इस पूरे संकट की जड़ में ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था और मुद्रा का गिरता मूल्य है, जिसने अब सत्ता परिवर्तन की उग्र मांग का रूप ले लिया है। ट्रंप ने आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए यह भी घोषणा की है कि जो देश ईरान के साथ व्यापार करेंगे, उन पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा, जिससे ईरान की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
थाईलैंड में भीषण रेल हादसा: हाई-स्पीड प्रोजेक्ट की क्रेन ट्रेन पर गिरी, 22 यात्रियों की मौत
14 Jan, 2026 04:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैंकाक। थाईलैंड के नाखोन रत्चासिमा प्रांत में बुधवार की सुबह एक ह्रदय विदारक रेल दुर्घटना हो गई। जिसमें कम से कम 22 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब बैंकॉक से उत्तर-पूर्वी थाईलैंड की ओर जा रही एक पैसेंजर ट्रेन पर निर्माण कार्य में लगी एक विशाल क्रेन गिर गई। इस टक्कर के कारण ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतर गए और मौके पर चीख-पुकार मच गई।
यह भीषण हादसा उस समय हुआ जब बैंकॉक से उत्तर-पूर्वी थाईलैंड की ओर जा रही एक यात्री ट्रेन पर निर्माण कार्य में लगी एक विशालकाय क्रेन अचानक गिर गई। क्रेन की सीधी टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए और घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई।
यह दुर्घटना बैंकॉक से लगभग 230 किलोमीटर (143 मील) दूर स्थित सिखियो जिले में हुई। जानकारी के अनुसार, यह ट्रेन उबोन रत्चथानी प्रांत की ओर जा रही थी। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, इलाके में एक हाई-स्पीड रेल परियोजना का काम चल रहा था। इसी दौरान निर्माण स्थल पर मौजूद एक भारी-भरकम क्रेन अनियंत्रित होकर नीचे से गुजर रही ट्रेन के डिब्बों पर जा गिरी। क्रेन के गिरने से हुए जोरदार धमाके के बाद ट्रेन के डिब्बों में मामूली आग भी लग गई, जिससे यात्रियों में भगदड़ मच गई।
सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक जान-माल का भारी नुकसान हो चुका था। स्थानीय पुलिस प्रमुख थचापोन चिन्नावोंग ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि इस हादसे में अब तक 22 लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा, कम से कम 30 लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिन्हें उपचार के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। राहत एवं बचाव कार्य अभी भी जारी है और बचाव दल मलबे में दबे संभावित जीवित लोगों की तलाश कर रहे हैं, जिसके कारण मृतकों की संख्या में और वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है। इस भयावह हादसे के बाद प्रशासन ने बैंकॉक और उत्तर-पूर्वी प्रांतों को जोड़ने वाले इस रेल मार्ग पर ट्रेनों का परिचालन अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है कि आखिर निर्माण कार्य में लगी क्रेन किस तकनीकी खराबी या लापरवाही की वजह से ट्रेन पर गिरी। सरकार ने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और घायलों को बेहतर उपचार मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं।
ईरान-अमेरिका तनाव पर बोला कतर- परिणाम बेहद विनाशकारी होंगे
14 Jan, 2026 03:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दोहा। ईरान में जारी आंतरिक विद्रोह और प्रदर्शनकारियों पर हो रही हिंसक कार्रवाई ने खाड़ी देशों में युद्ध की आहट तेज कर दी है। ईरान में मौतों का आंकड़ा 2,000 के पार पहुंचने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आक्रामक रुख ने पूरे क्षेत्र में चिंता पैदा कर दी है। इस गंभीर संकट पर पहली बार किसी मुस्लिम देश ने खुलकर अपनी राय रखी है। कतर ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ता है, तो इसके नतीजे पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी होंगे।
दोहा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने वैश्विक समुदाय को आगाह किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान पर संभावित हवाई हमले की धमकियों के बाद स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। कतर का मानना है कि सैन्य टकराव किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और इससे न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता को खतरा पैदा होगा। प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि कतर अभी भी कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर विश्वास करता है और दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता के लिए अपने सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क में है। कतर की यह चिंता बेवजह नहीं है। जून 2025 में जब अमेरिका ने ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, तब ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कतर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे अल उदीद को निशाना बनाया था। उस समय भी कतर ने ही वाशिंगटन और तेहरान के बीच समझौता कराने में अहम भूमिका निभाई थी। वर्तमान में कतर के इसी अमेरिकी बेस पर बढ़ती हलचल ने इन कयासों को बल दिया है कि अमेरिका कभी भी ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है।
दूसरी ओर, ईरान के तेवर भी बेहद सख्त नजर आ रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रदर्शनकारियों को संस्थाओं पर कब्जे के लिए उकसाने और अधिकारियों के साथ बैठकें रद्द करने के जवाब में ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबाफ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा है कि यदि अमेरिका हस्तक्षेप करता है, तो अमेरिकी सेना और उनके जहाज ईरान के लिए वैध लक्ष्य होंगे। वहीं, मानवाधिकार संगठनों और विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार ईरान में स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है, जहाँ मरने वालों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। हालाँकि, व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि कूटनीति का रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन ट्रंप की मदद रास्ते में है वाली चेतावनी ने युद्ध की आशंका को बढ़ा दिया है।
दुनिया की 5 सबसे शक्तिशाली नौसेनाओं में अमेरिका पहले, चीन दूसरे............भारत सातवें नंबर पर
14 Jan, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। दुनिया की सबसे शक्तिशाली नौसेनाओं को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग जारी हुई है, इसमें भारतीय नौसेना को टॉप-5 में जगह नहीं मिली है। वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न वॉरशिप्स एंड सबमरीन (डब्ल्यूडीएमएमडब्ल्यू) द्वारा जारी ताजा रैंकिंग में भारत को सातवां स्थान मिला है, जबकि अमेरिका पहले और चीन दूसरे स्थान पर काबिज है। यह रैंकिंग तब आई है, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियों को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ी हैं।
डब्ल्यूडीएमएमडब्ल्यू की रैंकिंग में “ट्रू वैल्यू रेटिंग” का इस्तेमाल किया है। इसमें केवल युद्धपोतों की संख्या नहीं, बल्कि नौसेना की कुल युद्ध क्षमता, आधुनिकीकरण, लॉजिस्टिक्स, हमला करने और बचाव की ताकत को आधार बनाया है। इस सूची में दुनिया की टॉप 40 नौसेनाओं को शामिल किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना अपनी बेजोड़ क्षमता और 11 एयरक्राफ्ट कैरियर के कारण पहले स्थान पर बनी हुई है। हालांकि जहाजों की संख्या के मामले में चीन आगे निकल चुका है, लेकिन युद्धक क्षमता और वैश्विक पहुंच के कारण अमेरिका अभी भी शीर्ष पर है। चीन की नौसेना को दूसरे नंबर पर रखा गया है। डब्ल्यूडीएमएमडब्ल्यू का कहना है कि तेजी से हो रहे आधुनिकीकरण के कारण आने वाले वर्षों में चीन दुनिया की सबसे शक्तिशाली नौसेना बन सकता है। चीन के पास फिलहाल 370 से ज्यादा युद्धपोत और पनडुब्बियां हैं, तीन एयरक्राफ्ट कैरियर ऑपरेशनल हैं और चौथा निर्माणाधीन है। चीन का लक्ष्य 2035 तक 9 एयरक्राफ्ट कैरियर तैयार करने का है।
वहीं तीसरे स्थान पर रूस की नौसेना है, जो कि परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियों और लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइलों के कारण एक जटिल लेकिन बेहद घातक ताकत माना गया है। रूस के पास बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों और आधुनिक न्यूक्लियर अटैक सबमरीन का बड़ा बेड़ा है। इंडोनेशिया को चौथा और दक्षिण कोरिया को पांचवां स्थान मिला है। दक्षिण कोरिया की नौसेना एशिया की सबसे आधुनिक नौसेनाओं में गिनी जाती है और वह एक बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर के निर्माण की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।
रैंकिंग में जापान छठे और भारत सातवें स्थान पर है। भारतीय नौसेना को 100.5 की ट्रू वैल्यू रेटिंग दी गई है। भारत के पास दो एयरक्राफ्ट कैरियर— आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य—19 पनडुब्बियां और दो परमाणु ऊर्जा से चलने वाली अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बियां हैं, जिससे परमाणु मिसाइलें दागी जा सकती हैं।
वहीं, पाकिस्तान की नौसेना को इस सूची में 26वां स्थान मिला है। पाकिस्तान के पास कोई एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं है और उसकी ताकत मुख्य रूप से 8 पनडुब्बियों और 28 फ्लीट कोर तक सीमित है। चीन द्वारा दी जा रही नई एआईपी तकनीक वाली पनडुब्बियां अभी ट्रेनिंग चरण में हैं, इसलिए उन्हें इस रैंकिंग में शामिल नहीं किया गया है। कुल मिलाकर यह रिपोर्ट वैश्विक नौसैनिक शक्ति संतुलन में तेजी से हो रहे बदलावों की ओर इशारा करती है, जहां चीन तेजी से उभर रहा है, जबकि भारत को टॉप-5 में जगह बनाने के लिए अपने नौसैनिक आधुनिकीकरण को और तेज़ करना होगा।
अमेरिका में ग्रीनलैंड पर कब्जे का बिल पेश
14 Jan, 2026 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
51वां राज्य बनाने का अधिकार मिलेगा, 300 सालों से यह डेनमाक्र का हिस्सा
वॉशिंगटन। अमेरिकी सांसद कांग्रेसमैन रैंडी फाइन ने ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट नामक एक बिल पेश किया है। इस बिल का मकसद अमेरिकी सरकार को ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने और बाद में इसे अमेरिका का राज्य बनाने के लिए कानूनी अधिकार देना है। सांसद रैंडी फाइन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके इस बिल की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह कदम रूस-चीन के प्रभाव को रोकने के लिए बहुत जरूरी है। इसके बाद संसद को राज्य बनने के लिए जरूरी सुधारों की पूरी रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
अगर बिल पास हुआ तो अमेरिका को ग्रीनलैंड को अपना 51वां राज्य बनाने का अधिकार मिल जाएगा। हालांकि, यह बिल अभी सिर्फ पेश हुआ है इसे हाउस और सीनेट दोनों में पास होना है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह बहुत मुश्किल से पास होगा, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। ग्रीनलैंड पर पिछले 300 सालों से ज्यादा समय से डेनमार्क का कंट्रोल है।
ग्रीनलैंड अमेरिकी रक्षा के लिए जरूरी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने जोर देते हुए कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिकी रक्षा के लिए जरूरी है। उन्होंने हाल ही में कहा था कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है और वे इस दिशा में कदम उठा रहे हैं, चाहे दूसरे देश इसे पसंद करें या नहीं। ट्रम्प प्रशासन ने ग्रीनलैंड के लोगों को अमेरिका में शामिल होने के लिए पैसे देने जैसे तरीकों पर भी चर्चा की है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों ने ट्रम्प के इस तरीके की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे असम्मानजनक बताया।
विरोध की आग में धधक रहा ईरान...
14 Jan, 2026 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
खामेनेई की वॉर्निंग के बाद मरने वालों की संख्या बढ़ी, अब तक 2000 से अधिक लोगों की मौत, कतर से हमला करेगा अमेरिका, ईरान की दो टूक...
लड़ोगे तो लडेंग़े, मारोगे तो मरोगे...
नई दिल्ली। ईरान में बगावत की आग धधक रही है जहां जनता खामेनेई शासन के खिलाफ पीछे हटने को तैयार नहीं है। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प में अब तक 2000 लोगों की मौत हो चुकी है। ईरान में हो रहे आंदोलन को अमेरिका खुला समर्थन दे रहा है और राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि वो ईरान में हस्तक्षेप कर सकते हैं। अमेरिका की इन धमकियों के बीच अब ईरान ने कहा है कि अगर उस पर हमला होता है तो वो चुप नहीं बैठेगा, वो भी युद्ध के लिए तैयार है। लड़ोगे तो लडेंग़े, मारोगे तो मरोगे। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने अमेरिका को एक बार फिर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका अशांति से जूझ रहे ईरान में हस्तक्षेप करता है, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, जहाजों और अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया जाएगा। उधर, अमेरिका ने इस बीच मध्य-पूर्व में अपने सबसे बड़े मिलिट्री बेस कतर के अल उदैद एयर बेस पर अपने युद्धक विमानों की गतिविधियां बढ़ा दी है। जहां से वह ईरान पर हमला करने की तैयारी कर रहा है।
ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर प्रेस टीवी के अनुसार, कालिबाफ ने चेतावनी देते हुए कहा कि आइए और देखिए कि क्षेत्र में अमेरिकी जहाजों और सैन्य ठिकानों का क्या हाल होता है। आइए और ईरानी राष्ट्र की आग में इस कदर जलिए कि यह इतिहास में सभी दमनकारी अमेरिकी शासकों के लिए एक स्थायी सबक बन जाए। अगर आप कुछ करते हैं तो समझ ही जाएंगे कि आपके साथ और इस क्षेत्र के साथ क्या होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान में प्रदर्शनों को देखते हुए वहां सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने रविवार को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा था कि सेना इस पर नजर बनाए हुए है और हम कुछ बेहद कड़े विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। हम फैसला करेंगे।
कतर के एयर बेस पर अमेरिका ने बढ़ाई गतिविधि
अमेरिका ने इस बीच मध्य-पूर्व में अपने सबसे बड़े मिलिट्री बेस कतर के अल उदैद एयर बेस पर अपने युद्धक विमानों की गतिविधियां बढ़ा दी है। ईरान की सीमा से करीब 200 से 300 किलोमीटर दूर स्थित कतर के अल उदैद एयर बेस पर अमेरिकी फाइटर जेट्स की गतिविधियों में इजाफा हुआ है। इसी बीच अमेरिकी सरकार ने एक आपात अलर्ट जारी कर अपने नागरिकों से ईरान छोडऩे का आग्रह किया है। इजरायली मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, रविवार रात अल उदैद एयर बेस से कई अमेरिकी युद्धक विमानों ने उड़ान भरी, जिनमें केसी-135 एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर और बी-52 रणनीतिक बॉम्बर शामिल थे। दोहा से लगभग 35 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित यह एयर बेस 10 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिकों का ठिकाना है। यह क्षेत्र में अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक है। यहां 4,500 मीटर लंबा रनवे है, जिस पर बी-52 जैसे बड़े स्ट्रैटजिक बॉम्बर और सैन्य परिवहन विमान आसानी से उतर सकते हैं और उड़ान भर सकते हैं।
प्रदर्शनों में मौतों का आंकड़ा बढ़ा
ईरान में देशभर में जारी प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढक़र कम से कम 2000 हो गई है। हालांकि, आशंका जताई जा रही है कि मरने वालों की संख्या इसके कई गुना अधिक हो सकती है। यह आंकड़ा अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी की ओर से जारी किया गया है। यह समूह पिछले कई सालों के प्रदर्शनों के दौरान लगातार सटीक जानकारी देता रहा है। एजेंसी ईरान के भीतर सक्रिय एक्टिविस्ट्स के एक नेटवर्क पर निर्भर करती है, जो सभी रिपोर्ट की गई मौतों की पुष्टि करता है। प्रदर्शनों को देखते हुए ईरान ने देशभर में इंटरनेट बैन कर दिया है और स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट को भी लगभग जैम कर दिया गया है। मीडिया पर पाबंदी की वजह से ईरान के प्रदर्शनों के पैमाने को समझना मुश्किल बना हुआ है। ईरानी सरकारी मीडिया ने इन प्रदर्शनों के बारे में बहुत कम जानकारी दी है। सोशल मीडिया पर शेयर कुछ वीडियो में प्रदर्शन कर रहे लोग और गोलियों की आवाज सुनी जा सकती है। इन पाबंदियों के बावजूद, प्रदर्शन रुकते हुए नहीं दिख रहे हैं। प्रदर्शनकारियों पर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की उस धमकी का भी असर नहीं हो रहा जिसमें उन्होंने कहा था दंगाइयों को उनकी सही जगह दिखा देंगे।
अगर वो आजमाना चाहते हैं तो हम तैयार...
ईरान में जनविद्रोह की आवाज लगातार बुलंद हो रही है। लेकिन इस आवाज को कुचलने के लिए ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। ईरान से आ रही खबरों के मुताबिक ईरानी अधिकारियों ने पूरे देश में इंटरनेट तो बंद ही कर दिया था। अब ईरानी पुलिस घर-घर जाकर लोगों के छतों से सैटेलाइट डिश ज़ब्त कर रही है। यही नहीं प्रदर्शनकारियों की पहचान का पता लगाने के लिए पुलिस प्राइवेट सिक्योरिटी कैमरों से फुटेज लेकर जानकारी इक_ा कर रही है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि तेहरान अमेरिका के किसी भी कदम के लिए तैयार है, जिसमें मिलिट्री कदम भी शामिल हैं। विदेश मंत्री अराघची ने अमेरिकी सरकार को खुली चुनौती दी है और कहा है कि ईरान किसी भी जंग के लिए तैयार है। अराघची ने कहा कि हम किसी भी कदम के लिए तैयार हैं। अगर वे फिर से मिलिट्री ऑप्शन आजमाना चाहते हैं, जिसे वे पहले ही आजमा चुके हैं, तो हम तैयार हैं।अराघची ने कहा कि पिछले साल की 12 दिनों की लड़ाई के बाद ईरान ने अपनी क्षमता में इजाफा किया है।
1 लाख से ज्यादा वीजा रद्द किए
14 Jan, 2026 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका ने 2025 में अब तक 1 लाख से ज्यादा वीजा रद्द कर दिए हैं। इनमें करीब 8 हजार छात्र और 2,500 स्पेशल वर्क वीजा शामिल हैं। यह कार्रवाई आपराधिक गतिविधियों से जुड़े मामलों को लेकर इमिग्रेशन पर सख्ती के तहत की गई है। जानकारी अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने दी। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका को सुरक्षित रखने के लिए ऐसे लोगों को देश से बाहर किया जाएगा। मंत्रालय के मुताबिक जिन विदेशी नागरिकों के खिलाफ अपराध से जुड़े मामले सामने आए, उनके वीजा रद्द किए गए हैं। 2025 में रद्द किए गए वीजा की संख्या 2024 के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा है। 2024 में करीब 40 हजार वीजा रद्द किए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में ज्यादातर बिजनेस और टूरिस्ट वीजा थे, जिनमें ओवरस्टे के मामले सामने आए। वहीं 8 हजार छात्रों और 2,500 स्पेशल वीजा धारकों के वीजा कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों के चलते रद्द किए गए।
राशिफल 27 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत का त्वरित समाधान
सपनों को मिला कलेक्टर का साथ, द कलेक्टर्स-15 से शुरू हुई बदलाव की नई इबारत
मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारी राकेश कुमार कुशवाह ने ओपन इंडिया प्री-स्टेट शूटिंग प्रतियोगिता में जीता स्वर्ण पदक
प्रधानमंत्री मोदी ने सीधी जिले में बने 1500 तालाबों और नरसिंहपुर के अमृत सरोवरों का मन की बात में किया उल्लेख
युवाओं के नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को मिलेगा नया आयाम : वित्त मंत्री ओपी चौधरी
जैविक खेती से एरिन भगत बनीं आत्मनिर्भर, प्राकृतिक कृषि से घटी खेती की लागत
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस में भोपाल में "रन फॉर टाइगर का भव्य आयोजन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवाड़ी के नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन का किया लोकार्पण
बिहान योजना से मिली नई पहचान, पोषण सखी बन महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की बनीं संरक्षक
