धर्म एवं ज्योतिष
पितृ पक्ष के अंतिम दिन क्या करना चाहिए? अगर करेंगे ये 5 उपाय, नाराज पितर हो जाएंगे खुश
7 Sep, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सर्व पितृ अमावस्या या महालया अमावस्या पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष का अंतिम दिन होता है. इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत 7 सितंबर से हो रही है. पितृ पक्ष का प्रारंभ अश्विन कृष्ण प्रतिपदा तिथि से होता है. इस दौरान लोग अपने पितरों को याद कर तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, दान, ब्राह्मण भोज, पंचबलि आदि करते हैं. माना जाता है कि ऐसा करने से पितर खुश होते हैं और तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं. पितृ पक्ष 14, 15 या 16 दिनों का होता है. तिथियों के कम या ज्यादा होने पर इसके दिन घट या बढ़ जाते हैं. इस बार पितृ पक्ष 14 दिन चलेंगे. इस दौरान लोग पितरों को प्रसन्न करने के लिए लोग कई उपाय करते हैं. लेकिन, पितृ पक्ष के अंतिम दिन के कुछ उपाय अधिक कारगर हो सकते हैं. अब सवाल है कि आखिर पितृ पक्ष के अंतिम दिन क्या करना चाहिए? सर्व पितृ अमावस्या के उपाय क्या हैं? आइए जानते हैं इस बारे में-
नाराज पितरों को खुश करने के उपाय
तर्पण करें: सर्व पितृ अमावस्या या पितृ पक्ष के अंतिम दिन कुछ उपाय करने से नाराज पितर खुश होते हैं. इसके लिए सर्व पितृ अमावस्या के दिन स्नान करने के बाद अपने पितरों को जल, सफेद फूल, काले तिल से कुशा का उपयोग कर उसके पोरों से तर्पण दें. कुशा के पोरों से दिया गया तर्पण पितरों को प्राप्त होता है और वे तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं.
पंचबलि कर्म: सर्व पितृ अमावस्या के अवसर पर आप अपने पितरों के लिए पंचबलि कर्म जरूर करें. इसमें आपको भोजन बनाकर उसका कुछ अंश कौआ, गाय, कुत्ता आदि को खिलाना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों को भोजन का अंश कौआ, गाय, कुत्ता आदि के माध्यम से उन तक पहुंचता है. उसे पाकर वे तृप्त होते हैं और प्रसन्न रहते हैं.
पितृ सूक्त पाठ: नाराज पितरों को खुश करने के लिए आपको पितरों के देव अर्यमा की पूजा करनी चाहिए. उसके बाद पितृ सूक्त का पाठ करना चाहिए. इससे पितर खुश होते हैं और अपनी संतान को खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं.
अन्न दान: पितृ ऋण या पितृ दोष से मुक्ति के लिए आपको सर्व पितृ अमावस्या के दिन अन्न का दान जरूर करना चाहिए. अन्न का दान करने से पितर तृप्त होते हैं और खुश होकर आपकी उन्नति का आशीर्वाद देंगे.
गाय का दान: गरुड़ पुराण और प्रेत मंजरी के अनुसार, अमावस्या के दिन पितरों को खुश करने के लिए आप उनके नाम से गाय का दान कर सकते हैं. गाय दान करने से पितर वैतरणी नदी पार करने में सफल होते हैं. वे कष्टों से मुक्ति पाते हैं.
पितृ पक्ष में शनिवार के दिन क्या करें? कैसे होगी न्याय के देवता की कृपा, जानिए 5 उपाय
7 Sep, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पितृ पक्ष का प्रारंभ अश्विन कृष्ण प्रतिपदा तिथि से होता है. इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत 7 सितंबर 2025 दिन रविवार से हो रही है. पितृ पक्ष 14, 15 या 16 दिनों का होता है. तिथियों के कम या ज्यादा होने पर इसके दिन घट या बढ़ जाते हैं. इस बार पितृ पक्ष 14 दिन तक चलेंगे. इस दौरान लोग अपने पितरों को याद कर तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, दान, ब्राह्मण भोज, पंचबलि आदि करते हैं. माना जाता है कि ऐसा करने से पितर खुश होते हैं और तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं. पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाले शनिवार का विशेष महत्व होता है. धार्मिक मान्यता है कि, शनिवार को किए गए उपाय न केवल पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करते हैं, बल्कि परिवार में सुख-समृद्धि और शांति का संचार भी करते हैं. अब सवाल है कि आखिर पितृ पक्ष के शनिवार को क्या करना चाहिए? आइए जानते हैं इस बारे में-
पितृ पक्ष के शनिवार को किए जाने वाले उपाय
– पितृ पक्ष के दौरान शनिवार के दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए उपायों से पितरों की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सभी प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है. मान्यता है कि, पितृपक्ष में शनिवार के दिन घर पर ही तुलसी या पीपल के पेड़ के नीचे तर्पण करना भी लाभकारी है. ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे अपनी संतानों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं.
– पितृ पक्ष में शनिवार के दिन निमित्त काले तिल का दान करना चाहिए. मान्यता है कि, ऐसा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है. इसके लिए तिल को पवित्र जल में मिलाकर तर्पण करें. इसके अलावा, काले तिल का दान किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है.
– पितृपक्ष में पीपल की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है, क्योंकि यह वृक्ष पितरों का वास स्थान माना गया है. पूजा के दौरान पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करें और उसके चारों ओर सात बार परिक्रमा करें. इससे पितरों की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.
– पितृ पक्ष के शनिवार को जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और अनाज का दान भी करें. इसके अलावा, इस दिन काले वस्त्र, उड़द, तिल और लोहे से बनी वस्तुओं का भी दान करें. ऐसा करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का संचार होता है.
– पितृ पक्ष के शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक भी जलाना शुभ माना जाता है. हालांकि, दीपदान के समय प्रार्थना करें कि आपके पितर तृप्त हों और उनके आशीर्वाद से आपके जीवन में सुख-शांति बनी रहे. ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिल सकती है
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 07 सितम्बर 2025)
7 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- इष्ट-मित्र सुखवर्धक होंगे, साधन सम्पन्नता के योग बनेंगे, कार्य सम्पन्नता अवश्य होगी।
वृष राशि :- कुटुम्ब की चिन्ता व समस्या अवश्य बनेगी, किसी से कष्ट अवश्य होगा।
मिथुन राशि :- कार्य-व्यवसाय में बाधा, मानसिक उद्विघ्नता तथा कार्य में बाधा, ध्यान दें।
कर्क राशि :- धन का लाभ, बिगड़े हुये कार्य में बाधा, व्यर्थ भ्रमण होगा।
सिंह राशि :- असमंजस का वातावरण बना रहेगा, अनायास कार्य विफल होगा, ध्यान दें।
कन्या राशि :- विपरीत परिस्थितियों के वातावरण की संरचना होगी तथा व्यवसाय में बाधा बनेगी।
तुला राशि :- सुख-समृद्धि के योग बनेंगे, कार्य कुशलता से संतोष होगा, ध्यान से कार्य सम्पन्न करें।
वृश्चिक राशि :- स्त्री-शरीर कष्ट, मानिसक बेचैनी, उद्विघ्नता से बचें तथा कार्य अवरोध सदैव रहेगा।
धनु राशि :- अशुद्ध गोचर रहने से विशेष कार्य स्थिगित रखें अन्यथा हानि की संभावना प्रबल होगी।
मकर राशि :- भाग्य का सितारा साथ देगा, बिगड़े कार्य बनेंगे तथा विशेष कार्य सम्पन्न होंगे।
कुंभ राशि :- इष्ट-मित्र सुख वर्धक होंगे, दैनिक कार्य में अनुकूलता बनेगी, समय का ध्यान रखें।
मीन राशि :- प्रबलता-प्रभुत्व वृद्धि, भौतिक सफलता के साधन जुटायेंगे, रुके कार्य बन ही जायेंगे।
1 दिन बाद लगेगा चंद्र ग्रहण, इस दिन क्या करना चाहिए क्या नहीं?
6 Sep, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
खगोलीय घटना में दिलचस्पी रखने वालों के लिए 7 सितंबर का दिन बेहद खास होने वाला है. वजह… इस दिन साल का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने वाला है. बड़ी बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा. जबकि, बाकी के ग्रहणों का भारत में प्रभाव नहीं है. 7 सितंबर को लगने वाला चंद्र ग्रहण रात 8:58 बजे लगेगा, जो मध्य रात्रि में 1:25 एएम पर खत्म होगा. इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल भी मान्य होगा. चंद्रग्रहण के दौरान कुछ बातों का ध्यान हर किसी को रखना चाहिए, नहीं तो ग्रहण का दुष्प्रभाव जीवन पर हो सकता है. अब सवाल है कि आखिर चंद्र ग्रहण के दिन क्या करना चाहिए? इस दिन क्या नहीं करना चाहिए? आइए जानते हैं इस बारे में-
चंद्रग्रहण के दिन क्या नहीं करना चाहिए?
पूजा मंदिर छूने से बचें: चंद्र ग्रहण के दिन नकारात्मक शक्तियां सक्रिय होती हैं इसलिए इस दिन देवी-देवताओं की प्रतिमा या मंदिर को छूने बचना चाहिए. इसलिए ग्रहण से पहले घर के पूजा स्थल को लाल या पीले रंग के कपड़े से ढक कर रखें.
इन पौधों को न छुएं: चंद्र ग्रहण के दिन दिन आपको तुलसी के पौधे और पीपल, बरगद के पेड़ को स्पर्श करने से भी बचना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से आपको दोष लग सकता है.
गर्भवती घर से न निकलें: इस दिन गर्भवती महिलाओं को बाहर निकलने से बचना चाहिए. इसके साथ ही नुकीली चीजों को भी गर्भवती महिलाएं न पकड़ें.
निगेटिविटी से बचें: ग्रहण वाले दिन ऐसे लोगों से न मिलें जो नकारात्मक बातें करते हैं. वहीं, नकारात्मक जगहों पर जाने से भी आपको इस दिन बचना चाहिए.
संबंध बनाने से बचें: इस दिन शारीरिक संबंध बनाने से भी बचें. ऐसा करने से आपको शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
लड़ाई-झगड़े से बचें: ग्रहण वाले दिन ज्यादा वार्तालाप करने से बचें और लड़ाई-झगड़ा या बहसबाजी तो गलती से भी न करें. ऐसा करने आपके पारिवारिक जीवन की खुशियों को दूर कर सकता है.
इन चीजों के यूज से बचें: चंद्र ग्रहण के दिन आपको नुकीली चीजों जैसे चाकू, सुई, कैची आदि का इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए. इस दौरान इन चीजों को छूना अशुभता का संकेत है.
नाखून-बाल न काटें: ज्योतिष आचार्यों की मानें तो, चंद्रग्रहण वाले दिन नाखून, बाल आदि काटना भी शुभ नहीं माना जाता.
चंद्रग्रहण के दिन क्या करना चाहिए
इन चीजों का दान: चंद्रग्रहण वाले दिन दान करना बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन आप चावल, दूध, घी, सफेद वस्त्र, चांदी आदि का दान करना बेहद शुभ माना जाता है. इन चीजों के दान से चंद्रदोष दूर होता है और साथ ही पितरों का आशीर्वाद भी आपको मिलता है.
शिव मंत्रों का जप: चंद्रग्रहण के दौरान आपको मंत्रों का जप करने से भी लाभ मिलते हैं. इस दिन शिव जी के मंत्र खासकर महामृत्युंजय मंत्र का जप करना अतिशुभ माना जाता है. इसके साथ ही चंद्रमा के मंत्र- ‘ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः’ का मंत्र भी आप कर सकते हैं. ग्रहण के दिन इष्ट देव के मंत्रों का जप करने से भी आपको शुभ फल मिलते हैं.
हवन और तर्पण करें: इस दिन पितरों के निमित्त आप श्राद्ध, जप, हवन और तर्पण आदि भी कर सकते हैं. इसके अलावा, इस दौरान धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करना भी शुभ है. वहीं, ग्रहण के खत्म होने के बाद आपको स्नान कर घर के पूजा स्थल के साथ ही पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें
अनंत चतुर्दशी पर कर लिया यह उपाय, तो बरसेगी भगवान विष्णु की कृपा और दूर होंगे सारे कष्ट
6 Sep, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैदिक पंचांग के अनुसार साल भर पर्वों का आगमन होता रहता है. भाद्रपद का महीना भी अपने साथ कई तीज त्यौहार लेकर आता है. भाद्रपद के दौरान विष्णु भगवान क्षीर सागर में विश्राम करते हैं और पूरी सृष्टि का संचालन भगवान शिव द्वारा किया जाता हैं. भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि, भगवान विष्णु के समर्पित होती है. इस दिन अनंत चतुर्दशी को मनाने का विधान होता है. इस दिन का व्रत करने और 14 गांठ वाला धागा धारण करने पर अनेक चमत्कारी लाभ मिलने की धार्मिक मान्यता है और उसी के साथ विष्णु भगवान की कृपा सदैव बनी रहती है.
क्यों है 14 गांठ वाले सूत्र को बांधना जरूरी
अनंत चतुर्दशी के दिन 14 गांठ वाला धागा धारण करने के महत्व की ज्यादा जानकारी देते हुए हरिद्वार के विद्वान ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि अनंत चतुर्दशी का पर्व भगवान विष्णु को समर्पित होता है. इस दौरान विष्णु भगवान क्षीर सागर में योग निद्रा में होते हैं. अनंत चतुर्दशी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को होने वाला पर्व है. इस दिन विष्णु भगवान के अनंत रूपों के पूजा अर्चना, पूजा पाठ और उनका ध्यान करने मात्र से सभी पापों से मुक्ति, मोक्ष की प्राप्ति और परम आनंद की प्राप्ति होती है. पूजा पाठ पूजा अर्चना करते हुए हाथ में 14 गांठ वाला सूत्र (धागा) बांधने का विधान है.
अनंत चतुर्दशी पर विष्णु भगवान के स्त्रोत, मंत्र आदि का पाठ करते हुए सूती धागे को हल्दी में डाला जाता है और इसमें 14 गांठ लगाई जाती है. पुरुष इस धागे को दाएं हाथ में धारण करते हैं, तो वही स्त्रियां इसी धागे को बाय हाथ में बांधती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 14 गांठ वाला सूती धागा हाथ में बांधने से 14 लोको में यश की प्राप्ति होती है और विष्णु भगवान अक्षय फल प्रदान करते हैं.
पितृपक्ष में कौन-सा दान करने से घर में आए सुख-शांति और आर्थिक समृद्धि
6 Sep, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पितृपक्ष 7 सितंबर, रविवार से आरंभ हो रहा है. इस अवधि में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा और दान-पुण्य करते हैं. ऐसा माना जाता है कि पितृपक्ष में किया गया दान और पुण्य कार्य पूर्वजों को प्रसन्न करता है और जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य लाता है.
पितृपक्ष में दान-पुण्य करने से पूर्वजों की विशेष कृपा प्राप्त होती है. ऐसा माना जाता है कि इससे जीवन की कठिनाइयाँ कम होती हैं और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. इस अवधि में किए गए दान-पुण्य से पूर्वजों का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
गरुड़ पुराण और अन्य शास्त्रों के अनुसार, पितरों के लिए वस्त्र का दान अत्यंत लाभकारी माना गया है. पितृपक्ष में दुपट्टा और धोती का दान करने से पितरों की कृपा हमेशा जातक पर बनी रहती है और इसके प्रभाव से जीवन में खुशहाली और समृद्धि आती है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितरों के नाम पर छतरी का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. ऐसा करने से जीवन में कई बाधाएँ दूर होती हैं, जातक को सुख-शांति प्राप्त होती है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है.
पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म में काले तिल का विशेष महत्व है. मान्यता है कि पितरों की तृप्ति के लिए काले तिल का दान अवश्य करना चाहिए. यदि अन्य वस्तुएँ दान न कर पाएं, तब भी काले तिल का दान करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है.
पितृपक्ष में यदि घर में झगड़े, समस्याएँ या आर्थिक तंगी हो तो गुड़ और नमक का दान करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है. ऐसा करने से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरती है, घर का माहौल खुशनुमा बनता है और पूर्वजों की कृपा से जीवन में संतुलन और शांति आती है.
पितृपक्ष में चांदी, दूध और चावल का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है. ऐसा दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सौभाग्य, सुख और शांति बनी रहती है.
अनंत चतुर्दशी शनिवार, 6 सितंबर को पड़ेगी
4 Sep, 2025 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस साल अनंत चतुर्दशी शनिवार, 6 सितंबर को पड़ रही है । आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली इस दिन में भक्ति, विसर्जन और दिव्य नवीनीकरण का मिश्रण होता है । हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 06 सितंबर को देर रात 03 बजकर 12 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 07 सितंबर को देर रात 01 बजकर 41 मिनट पर होगा। उदया तिथि को देखते हुए इस साल 06 सितंबर को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी। अनंत चतुर्दशी का धार्मिक महत्व यह गणेश चतुर्थी के अंतिम दिन को दर्शाता है , जिसे गणेश विसर्जन के नाम से जाना जाता है , जब भगवान गणेश को हर्षोल्लास और भावनात्मक विदाई के साथ जल में विसर्जित किया जाता है। यह क्रिया रूप की नश्वरता और आत्मा की शाश्वत प्रकृति का प्रतीक है । साथ में, अनंत चतुर्दशी वैदिक दर्शन और सामुदायिक उत्सव में निहित त्याग और भक्ति का एक गहन दिन बन जाता है। अनंत व्रत कैसे करें - अनुष्ठान और पालन अनंत चतुर्दशी व्रत रखने वाले भक्तों द्वा
अनंत चतुर्दशी शनिवार, 6 सितंबर को पड़ेगी
इस साल अनंत चतुर्दशी शनिवार, 6 सितंबर को पड़ रही है । आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली इस दिन में भक्ति, विसर्जन और दिव्य नवीनीकरण का मिश्रण होता है ।
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 06 सितंबर को देर रात 03 बजकर 12 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 07 सितंबर को देर रात 01 बजकर 41 मिनट पर होगा। उदया तिथि को देखते हुए इस साल 06 सितंबर को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी।
अनंत चतुर्दशी का धार्मिक महत्व
यह गणेश चतुर्थी के अंतिम दिन को दर्शाता है , जिसे गणेश विसर्जन के नाम से जाना जाता है , जब भगवान गणेश को हर्षोल्लास और भावनात्मक विदाई के साथ जल में विसर्जित किया जाता है। यह क्रिया रूप की नश्वरता और आत्मा की शाश्वत प्रकृति का प्रतीक है ।
साथ में, अनंत चतुर्दशी वैदिक दर्शन और सामुदायिक उत्सव में निहित त्याग और भक्ति का एक गहन दिन बन जाता है।
अनंत व्रत कैसे करें - अनुष्ठान और पालन
अनंत चतुर्दशी व्रत रखने वाले भक्तों द्वारा अपनाए जाने वाले पारंपरिक चरण इस प्रकार हैं :
सुबह स्नान और स्वच्छ पोशाक
दिन की शुरुआत पवित्र स्नान से करें और पारंपरिक कपड़े पहनें।
अनन्त सूत्र
14 गांठों वाला पवित्र धागा (हल्दी और कुमकुम से रंगा हुआ) दाहिने हाथ (पुरुषों के लिए) या बाएं हाथ (महिलाओं के लिए) पर बांधें।
कलश और मूर्ति स्थापना पूजा के लिए अनंत शेष पर लेटे हुए भगवान विष्णु
की एक कलश या मूर्ति/चित्र स्थापित करें ।
पूजा और नैवेद्य
तुलसी के पत्ते, फल, मिठाई और पंचामृत चढ़ाएं। विष्णु सहस्रनाम या अनंत अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ करें ।
अनंत चतुर्दशी व्रत के आध्यात्मिक लाभ
पारिवारिक स्थिरता और वित्तीय निरंतरता को बढ़ावा देता है
कर्म संबंधी रुकावटों और बाधाओं को दूर करता है
जीवन की रक्षा के लिए भगवान विष्णु की कृपा का आह्वान
आंतरिक शांति, अनुशासन और भक्ति को बढ़ावा देता है
रिश्तों और करियर में दीर्घकालिक आशीर्वाद को प्रोत्साहित करता है
अंगूठा बता देता है आपके अंदर का राज
4 Sep, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सभी को भविष्य में क्या छिपा है यह राज जानने की जिज्ञासा होती है। जन्मकुंडली के साथ ही हाथ की रेखाएं देखकर भी भविष्य के राज जाने जा सकते हैं।
हस्तरेखा विज्ञान में अंगूठे को चरित्र का आइना कहा जाता है। आप इसे देखकर व्यक्ति के बारे में कई गुप्त बातें जान सकते हैं। व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, बचत, काम वासना और रोगों का पता भी अंगूठे से लग जाता है।
अंगूठा लंबा
जिनका अंगूठा लंबा होता है वह बुद्धिमान और उदार होते हैं। ऐसे व्यक्ति शौकीन भी खूब होते हैं। अगर अंगूठा तर्जनी उंगली के दूसरे पोर तक पहुंच रहा है तो व्यक्ति नेक होता है और कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता।
अंगूठा छोटा
अंगूठा छोटा होना अच्छा नहीं माना जाता। ऐसे लोगों के उधार और कर्ज देने से बचना चाहिए क्योंकि पैसा डूबने का डर रहता है। इन्हें जीवन में कई बार हानि उठानी पड़ती और पारिवारिक जीवन में भी उथल-पुथल मचा रहता है।
अंगूठा अधिक चौड़ा
अगर अंगूठा अधिक चौड़ा हो तो व्यक्ति खर्चीले स्वभाव का होता है। ऐसे लोग अक्सर कोई न कोई बुरी लत अपना लेते हैं।
कम खुलने वाला अंगूठा
कम खुलने वाला अंगूठा हस्तरेखा विज्ञान में अच्छा नहीं माना गया है। ऐसे लोगों के हर काम में बाधा आती रहती है और सफलता देर से मिलती है। ऐसे लोग चाहकर भी कमाई के अनुसार बचत नहीं कर पाते हैं।
ऊपर मोटा और गोल हो तो
अगर अंगूठा नीचे पतला और ऊपर मोटा और गोल हो तो ऐसा व्यक्ति शंकालु होते और इन्हे भी अपने काम में बाधाओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन हाथ भारी हो तो उन्नति करते हैं।
अंगूठा हो लंबा पतला तो
अंगूठा पतला और लंबा हो तो व्यक्ति शांत स्वभाव का होता है। ऐसे व्यक्ति अपने काम वासना पर नियंत्रण रखने में कुशल होते हैं। इन्हें व्यवहारकुशल भी माना जाता है। ऐसे लोग भावुक भी खूब होते हैं।
ऐसे लोग धनी होते हैं
जिनका अंगूठा ज्यादा खुलता है ऐसे लोग धनी होते हैं। अपने व्यक्तित्व के कारण इन्हें समाज में खूब सम्मान मिलता है।
जीवन की समस्याओं का समाधान बताते हैं यंत्र
4 Sep, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिन्दू धर्म के अनेक ग्रंथों में कई तरह के चक्रों और यंत्रों के बारे में विस्तार से उल्लेख किया गया है। जिनमें राम शलाका प्रश्नावली, हनुमान प्रश्नावली चक्र, नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र, श्रीगणेश प्रश्नावली चक्र आदि प्रमुख हैं। कहते हैं इन चक्रों और यंत्रों की सहायता से लोग अपने मन में उठ रहे सवालों, जीवन में आने वाली कठिनाइयों आदि का समाधान पा सकते हैं। इन चक्रों और यंत्रों की सहायता लेकर केवल आम आदमी ही नहीं बल्कि ज्योतिष और पुरोहित लोग भी सटीक भविष्यवाणियां तक कर देते हैं।
श्री राम शलाका प्रश्नावली
श्री राम शलाका प्रश्नावली का उल्लेख गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस में प्राप्त होता है। यह राम भक्ति पर आधारित है। इस प्रश्नावली का प्रयोग से लोग जीवन के अनेक प्रश्नों का जवाब पाते हैं। इस प्रश्नावली का प्रयोग के बारे कहा जाता है कि सबसे पहले भगवान श्रीराम का स्मरण करते हुए किसी सवाल को मन में अच्छी तरह सोच लिया जाता है।फिर शलाका चार्ट पर दिए गए किसी भी अक्षर पर आंख बंद कर उंगली रख दी जाती है। जिस अक्षर पर उंगली रखी जाती है, उसके अक्षर से प्रत्येक 9वें नम्बर के अक्षर को जोड़ कर एक चौपाई बनती है, जो प्रश्नकर्ता के प्रश्न का उत्तर होती है।
हनुमान प्रश्नावली चक्र
यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि हनुमानजी एक उच्च कोटि के ज्योतिषी भी थे। इसका कारण शायद यह हो सकता है कि वे शिव के ग्यारहवें अंशावतार थे, जिनसे ज्योतिष विद्या की उत्पत्ति हुई मानी जाती है। कहते हैं, हनुमानजी ने ज्योतिष प्रश्नावली के 40 चक्र बनाए हैं। यहां भी प्रश्नकर्ता आंख मूंद कर चक्र के नाम पर उंगली रखता है। अगर उंगली किसी लाइन पर रखी गई होती है, तो दोबारा उंगली रखी जाती है। फिर नाम के अनुसार शुभ-अशुभ फल का निराकरण किया जाता है। कहते हैं। रामायण काल के परम दुर्लभ यंत्रों में हनुमान चक्र श्रेष्ठ यंत्रों का सिरमौर है।
नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र
अनेक लोग, विशेष देवी दुर्गा के परम भक्त, यह मानते हैं कि नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र एक चमत्कारिक चक्र है, जिसे के माध्यम से कोई भी अपने जीवन की समस्त परेशानियों और मन के सवालों का संतोषजनक हल आसानी से पा सकते हैं। इस चक्र के उपयोग की विधि के लिए पहले पांच बार ऊँ ऐं ह्लीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का जप करना पड़ता फिर एक बार या देवी सर्वभूतेषु मातृरुपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: मंत्र का जप कर, आंखें बंद करके सवाल पूछा जाता है और देवी दुर्गा का स्मरण करते हुए प्रश्नावली चक्र पर उंगली घुमाते हुए रोक दिया जाता है, जिस कोष्ठक उंगली होती है। उस कोष्ठक में लिखे अंक के अनुसार फलादेश को जाना जाता है।
श्रीगणेश प्रश्नावली चक्र
हिंदू मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश प्रथमपूज्य हैं। वे सभी मांगलिक कार्यों में सबसे पहले पूजे जाते हैं। उनकी पूजा के बिना कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। श्रीगणेश प्रश्नावली यंत्र के माध्यम से भी लोग अपने जीवन की सभी परेशानियों और सवालों के हल जानने की कोशिश करते हैं। जिसे भी अपने सवालों का जवाब या परेशानियों का हल जानना होता है, वे पहले पांच बार ऊँ नम: शिवाय: और फिर 11 बार ऊँ गं गणपतयै नम: मंत्र का जप करते हैं और फिर आंखें बंद करके अपना सवाल मन में रख भगवान गणेश का स्मरण करते हुए प्रश्नावली चक्र प्रश्नावली चक्र पर उंगली घुमाते हुए रोक देते हैं, जिस कोष्ठक उंगली होती है। उस कोष्ठक में लिखे अंक के अनुसार फलादेश को जाना जाता है।
शिव प्रश्नावली यंत्र
इस यंत्र में भगवान शिव के एक चित्र पर 1 से 7 तक अंक दिए गए होते हैं। श्रद्धालु अपनी आंख बंद करके पूरी आस्था और भक्ति के साथ शिवजी का ध्यान करते हैं और और मन ही मन ऊं नम: शिवाय: मंत्र का जाप कर उंगली को शिव यंत्र पर घुमाते हैं और फिर उंगली घुमाते हुए रोक देते हैं, जिस कोष्ठक उंगली होती है। उस कोष्ठक में लिखे अंक के अनुसार फलादेश को जाना जाता है1
इन प्रश्नावलियों और यंत्रों के अलावा अनेक लोग साईं प्रश्नावली का उपयोग भी अपने मन में उठ रहे सवालों का जवाब पाने के लिए करते हैं।
गुरुवार के दिन कुछ काम नहीं करना चाहिए
4 Sep, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आपने अक्सर बड़े-बुजुर्गों से सुना होगा कि गुरुवार के दिन कुछ काम नहीं करना चाहिए क्योंकि इनका नकारात्मक प्रभाव जीवन पर होता है और इसकी वजह से आर्थिेक तंगी हो सकती है।
ज्योतििषशास्त्र में भी कुछ ऐसा ही माना गया है कि बृहस्पतिआ ग्रह की अनुकूलता के लिए कुछ ऐसे काम हैं, जो गुरूवार के दिन नहीं करने चाहिए. सुखद पारिवारिक जीवन, शिएक्षा, ज्ञान और धन इनकी कृपा से ही प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसे काम हैं, जो गुरूवार के दिन नहीं करने चाहिए अन्यथा अनुकूल गुरू भी प्ितिहकूल प्रभाव देता है।
अगर आप पहले से ही आर्थिक परेशानी और दूसरी दिक्कतों से गुजर रहे हैं तो गुरुवार को भूलकर भी इन कामों को न करें.
जानिये कौन से हैं वो काम...
पिनता, गुरू और साधु-संत बृहस्पति का प्रतिनिधि करते हैं. कभी भी इनका अपमान न करें.
खिनचड़ी न तो घर में बनाएं और न खाएं.
नाखून नहीं काटने चाहिए।
महिलाओं को बाल नहीं धोने चाहिए. कहा जाता है की इससे संपत्ति और संपन्नता सुख में कमी आती है।
कपड़े नहीं धोने चाहिए।
क्या करें
गुरुवार को ये कार्य करने से घर में आती है शुभता और बन जाते हैं बिगड़े काम...
सूर्य उदय होने से पहले शुद्ध होकर भगवान विष्णु के समक्ष गाय के शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं।
केसर अथवा हल्दी का तिलक मस्तक पर लगाएं1
पीली चीजों का दान करें।
संभव हो तो व्रत रखें।
भगवान शिव पर पीले रंग के लड्डू अर्पित करें।
केले के पेड़ का पूजन करें, प्रसाद में पीले रंग के पकवान अथवा फल अर्पित करें।
केले का दान करें।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 04 सितम्बर 2025)
4 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- व्यवसायिक क्षमता अनुकूल है, किसी तनाव में विवाद ग्रस्त, आय अवश्य होगी।
वृष राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष उल्लास, भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति तथा कार्य संतोषप्रद रहेगा ध्यान रखें।
मिथुन राशि :- सामाजिक कार्यो में मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि, कार्यकुशलता से संतोष होगा।
कर्क राशि :- कार्य कुशलता से संतोष एवं नवीन योजना फलनप्रद हो, रुके कार्य बन जायेंगे।
सिंह राशि :- मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि किन्तु अधिकारियों की उपेक्षा से कार्य हानि अवश्य होगी।
कन्या राशि :- दैनिक कार्यों में सुधार, तत्परता से रुके कार्य निपटा ही लेवें, चिंता मुक्त होंगे।
तुला राशि :- तनाव, अशांति, कष्ट ग्रस्त होने से बचें, रुके कार्य निपटा लेवें कार्य बनेंगे।
वृश्चिक राशि :- स्त्री शरीर सुख, मनोबल-उत्साह वर्धक होने से विरोध होगा, ध्यान अवश्य रखें।
धनु राशि :- स्वभाव में उद्विघ्नता, क्लेश, मन अशान्त से बचें, कार्य अवरोध अवश्य होगा।
मकर राशि :- सफलता के साधन जुटायें, मनोबल उत्साह वर्धक होगा, समय का ध्यान रखें।
कुंभ राशि :- विशेष कार्य स्थगित रखें, मानसिक विभ्रम व उद्विघ्ंता से आप अवश्य बचेंगे।
मीन राशि :- किसी तनाव व क्लेश से बचें, मानसिक उद्विघ्नता बनेगी तथा परेशानी होगी।
प्रत्येक दिन करें श्री दुर्गा चालीसा पाठ, सब दुख दूर करेंगी जगदम्बा भवानी
3 Sep, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुर्गा चालीसा का पाठ हर दिन करने से व्यक्ति का आत्मबल बढ़ता है. मां दुर्गा के आशीर्वाद से डर, मृत्यु भय, रोग, दुख दूर होते हैं. आदिशक्ति की कृपा से अपार शक्ति मिलती है, जिससे आप अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं. दुर्गा चालीसा में मां दुर्गा की महिमा का गुणगान किया गया है. दुर्गा चालीसा का प्रारंभ नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥… से होता है. जो लोग प्रतिदिन दुर्गा चालीसा नहीं पढ़ सकते हैं, उनको प्रत्येक शुक्रवार को इसका पाठ करना चाहिए. शारदीय नवरात्रि भी आने वाली है, उसमें भी दुर्गा चालीसा का पाठ अत्यंत ही शुभ फलदायी है.
श्री दुर्गा चालीसा ।
नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूं लोक फैली उजियारी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे।
दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लै कीना।
पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी।
लांगुर वीर चलत अगवानी॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै।
जाको देख काल डर भाजै॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
तिहुंलोक में डंका बाजत॥
शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे।
रक्तबीज शंखन संहारे॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी।
जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा।
सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ संतन पर जब जब।
भई सहाय मातु तुम तब तब॥
अमरपुरी अरु बासव लोका।
तब महिमा सब रहें अशोका॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
शंकर आचारज तप कीनो।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप का मरम न पायो।
शक्ति गई तब मन पछितायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावें।
रिपू मुरख मौही डरपावे॥
शत्रु नाश कीजै महारानी।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
करो कृपा हे मातु दयाला।
ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।
जब लगि जिऊं दया फल पाऊं।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥
दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
सब सुख भोग परमपद पावै॥
देवीदास शरण निज जानी।
करहु कृपा जगदम्बा भवानी॥
दोहा
शरणागत रक्षा करे, भक्त रहे नि:शंक।
मैं आया तेरी शरण में, मातु लिजिये अंक॥
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अनंत चतुर्दशी पर करें ये शक्तिशाली स्तोत्र पाठ
3 Sep, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है. यह दिन धार्मिक दृष्टि से बहुत खास होता है, क्योंकि इसी दिन गणेश उत्सव का समापन होता है और श्रीगणेश का विसर्जन भी किया जाता है. साल 2025 में यह पर्व 6 सितंबर को मनाया जाएगा. अनंत चतुर्दशी का नाम सुनते ही भगवान विष्णु का ध्यान आता है, क्योंकि यह दिन उन्हीं को समर्पित होता है. इस दिन अगर श्रद्धा और विश्वास से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाए, तो जीवन के कई दुख और परेशानियां दूर हो सकती हैं. खासकर अगर आप आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं या बार-बार धन की हानि हो रही है, तो इस दिन एक खास स्तोत्र का पाठ करने से आपके सभी काम बनने लगते हैं. यह स्तोत्र है – श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का महत्व
शास्त्रों में इस स्तोत्र को बहुत प्रभावशाली बताया गया है. माना जाता है कि यह स्तोत्र माता लक्ष्मी के 108 नामों का संग्रह है, जिनका जाप करने से माता तुरंत प्रसन्न होती हैं. इसका पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में समृद्धि, शांति और सफलता आती है. यह स्तोत्र न सिर्फ धन संबंधित परेशानियों को दूर करता है, बल्कि मानसिक तनाव और नकारात्मक सोच को भी खत्म करता है.
क्यों करें इस दिन स्तोत्र का पाठ?
अनंत चतुर्दशी पर इस स्तोत्र का पाठ इसलिए भी खास माना गया है क्योंकि इस दिन की गई पूजा सीधा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी तक पहुंचती है. यह दिन एक प्रकार से जीवन के हर “अंत” को अनंत ऊर्जा देने का प्रतीक है. स्तोत्र का पाठ करते समय मन को शांत रखें और श्रद्धा से हर नाम का उच्चारण करें. अगर आप नियमित रूप से इसका पाठ नहीं कर सकते, तो कम से कम अनंत चतुर्दशी पर एक बार ज़रूर करें.
पाठ करने का सही समय और विधि
सुबह जल्दी स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें. घर के मंदिर में माता लक्ष्मी और विष्णु जी की मूर्ति या तस्वीर रखें. उन्हें फूल, धूप और दीप अर्पित करें. इसके बाद श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का उच्चारण करें. आप चाहें तो इसे पढ़ते समय बैकग्राउंड में शांत संगीत या भजन चला सकते हैं, जिससे ध्यान केंद्रित रहे.
किन लोगों को करना चाहिए यह पाठ?
-जो व्यक्ति आर्थिक तंगी से गुजर रहे हों
-जिनके काम समय पर पूरे नहीं हो रहे हों
-जो नौकरी या व्यवसाय में रुकावट का सामना कर रहे हों
-जो मानसिक शांति पाना चाहते हों
श्री लक्ष्मीअष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र
देव्युवाच
देवदेव! महादेव! त्रिकालज्ञ! महेश्वर!
करुणाकर देवेश! भक्तानुग्रहकारक! ॥
अष्टोत्तर शतं लक्ष्म्याः श्रोतुमिच्छामि तत्त्वतः ॥
ईश्वर उवाच
देवि! साधु महाभागे महाभाग्य प्रदायकम् .
सर्वैश्वर्यकरं पुण्यं सर्वपाप प्रणाशनम् ॥
सर्वदारिद्र्य शमनं श्रवणाद्भुक्ति मुक्तिदम् .
राजवश्यकरं दिव्यं गुह्याद्–गुह्यतरं परम् ॥
दुर्लभं सर्वदेवानां चतुष्षष्टि कलास्पदम् .
पद्मादीनां वरांतानां निधीनां नित्यदायकम् ॥
समस्त देव संसेव्यम् अणिमाद्यष्ट सिद्धिदम् .
किमत्र बहुनोक्तेन देवी प्रत्यक्षदायकम् ॥
तव प्रीत्याद्य वक्ष्यामि समाहितमनाश्शृणु .
अष्टोत्तर शतस्यास्य महालक्ष्मिस्तु देवता ॥
क्लीं बीज पदमित्युक्तं शक्तिस्तु भुवनेश्वरी .
अंगन्यासः करन्यासः स इत्यादि प्रकीर्तितः ॥
ध्यानम्
वंदे पद्मकरां प्रसन्नवदनां सौभाग्यदां भाग्यदां
हस्ताभ्यामभयप्रदां मणिगणैः नानाविधैः भूषिताम् .
भक्ताभीष्ट फलप्रदां हरिहर ब्रह्माधिभिस्सेवितां
पार्श्वे पंकज शंखपद्म निधिभिः युक्तां सदा शक्तिभिः ॥
सरसिज नयने सरोजहस्ते धवल तरांशुक गंधमाल्य शोभे .
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवन भूतिकरि प्रसीदमह्यम् ॥
ॐ प्रकृतिं, विकृतिं, विद्यां, सर्वभूत हितप्रदाम् .
श्रद्धां, विभूतिं, सुरभिं, नमामि परमात्मिकाम् ॥
वाचं, पद्मालयां, पद्मां, शुचिं, स्वाहां, स्वधां, सुधाम् .
धन्यां, हिरण्ययीं, लक्ष्मीं, नित्यपुष्टां, विभावरीम् ॥
अदितिं च, दितिं, दीप्तां, वसुधां, वसुधारिणीम् .
नमामि कमलां, कांतां, क्षमां, क्षीरोद संभवाम् ॥
अनुग्रहपरां, बुद्धिं, अनघां, हरिवल्लभाम् .
अशोका,ममृतां दीप्तां, लोकशोक विनाशिनीम् ॥
नमामि धर्मनिलयां, करुणां, लोकमातरम् .
पद्मप्रियां, पद्महस्तां, पद्माक्षीं, पद्मसुंदरीम् ॥
पद्मोद्भवां, पद्ममुखीं, पद्मनाभप्रियां, रमाम् .
पद्ममालाधरां, देवीं, पद्मिनीं, पद्मगंधिनीम् ॥
पुण्यगंधां, सुप्रसन्नां, प्रसादाभिमुखीं, प्रभाम् .
नमामि चंद्रवदनां, चंद्रां, चंद्रसहोदरीम् ॥
चतुर्भुजां, चंद्ररूपां, इंदिरा,मिंदुशीतलाम् .
आह्लाद जननीं, पुष्टिं, शिवां, शिवकरीं, सतीम् ॥
विमलां, विश्वजननीं, तुष्टिं, दारिद्र्य नाशिनीम् .
प्रीति पुष्करिणीं, शांतां, शुक्लमाल्यांबरां, श्रियम् ॥
भास्करीं, बिल्वनिलयां, वरारोहां, यशस्विनीम् .
वसुंधरा, मुदारांगां, हरिणीं, हेममालिनीम् ॥
धनधान्यकरीं, सिद्धिं, स्रैणसौम्यां, शुभप्रदाम् .
नृपवेश्म गतानंदां, वरलक्ष्मीं, वसुप्रदाम् ॥
शुभां, हिरण्यप्राकारां, समुद्रतनयां, जयाम् .
नमामि मंगलां देवीं, विष्णु वक्षःस्थल स्थिताम् ॥
विष्णुपत्नीं, प्रसन्नाक्षीं, नारायण समाश्रिताम् .
दारिद्र्य ध्वंसिनीं, देवीं, सर्वोपद्रव वारिणीम् ॥
नवदुर्गां, महाकालीं, ब्रह्म विष्णु शिवात्मिकाम् .
त्रिकालज्ञान संपन्नां, नमामि भुवनेश्वरीम् ॥
लक्ष्मीं क्षीरसमुद्रराज तनयां श्रीरंगधामेश्वरीम् .
दासीभूत समस्तदेव वनितां लोकैक दीपांकुराम् ॥
श्रीमन्मंद कटाक्ष लब्ध विभवद्–ब्रह्मेंद्र गंगाधराम् .
त्वां त्रैलोक्य कुटुंबिनीं सरसिजां वंदे मुकुंदप्रियाम् ॥
मातर्नमामि! कमले! कमलायताक्षि!
श्री विष्णु हृत्–कमलवासिनि! विश्वमातः!
क्षीरोदजे कमल कोमल गर्भगौरि!
लक्ष्मी! प्रसीद सततं समतां शरण्ये ॥
त्रिकालं यो जपेत् विद्वान् षण्मासं विजितेंद्रियः .
दारिद्र्य ध्वंसनं कृत्वा सर्वमाप्नोत्–ययत्नतः .
देवीनाम सहस्रेषु पुण्यमष्टोत्तरं शतम् .
येन श्रिय मवाप्नोति कोटिजन्म दरिद्रतः ॥
भृगुवारे शतं धीमान् पठेत् वत्सरमात्रकम् .
अष्टैश्वर्य मवाप्नोति कुबेर इव भूतले ॥
दारिद्र्य मोचनं नाम स्तोत्रमंबापरं शतम् .
येन श्रिय मवाप्नोति कोटिजन्म दरिद्रतः ॥
भुक्त्वातु विपुलान् भोगान् अंते सायुज्यमाप्नुयात् .
प्रातःकाले पठेन्नित्यं सर्व दुःखोप शांतये .
पठंतु चिंतयेद्देवीं सर्वाभरण भूषिताम् ॥
॥ इति श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रं संपूर्णम् ॥
भाद्रपद पूर्णिमा पर करें तुलसी के 5 उपाय, तेजी से बढ़ेगा बैंक बैलेंस, बिजनेस भी रहेगा चकाचक
3 Sep, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस साल भाद्रपद पूर्णिमा 7 सितंबर रविवार को है. भाद्रपद पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद सत्यनारायण भगवान की पूजा करते हैं और कथा सुनते हैं. प्रदोष काल में माता लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा करने का विधान है. इससे जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, धन, संपत्ति आदि बढ़ती है. भाद्रपद पूर्णिमा के दिन आप तुलसी के कुछ उपायों को करके धन और बिजनेस में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं. आइए जानते हैं भाद्रपद पूर्णिमा पर तुलसी के उपायों के बारे में.
भाद्रपद पूर्णिमा पर तुलसी के उपाय
1. भाद्रपद पूर्णिमा के दिन आप स्नान के बाद जब पूजा करें तो तुलसी के पौधे को जल अर्पित करें. उसके बाद एक दीपक जलाएं. उसमें घी या फिर तिल के तेल का उपयोग करें. माता लक्ष्मी की पूजा करें. इससे दरिद्रता और आर्थिक तंग दूर होती है. घर में माता लक्ष्मी का वास होता है.
2. यदि आपको बिजनेस में लाभ नहीं हो रहा है तो भाद्रपद पूर्णिमा को तुलसी के 11 पत्तों को साफ कर लें. उस पर हल्दी से श्री लिखें और भगवान विष्णु को अर्पित कर दें. तुलसी के इस उपाय से माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु दोनों की प्रसन्न होंगे. आपके धन और कारोबार में बढ़ोत्तरी होगी.
3. भाद्रपद पूर्णिमा की रात तुलसी के पास एक दीपक जलाएं. फिर माता लक्ष्मी का ध्यान करके तुलसी की जड़ के पास चांदी का एक सिक्का रख दें. उस सिक्के को रातभर वहीं रहने दें, उसके अगले दिन उस सिक्के को अपने पर्स या तिजोरी में रख दें. आप पर माता लक्ष्मी की कृपा होगी, आपके धन और संपत्ति वृद्धि होगी.
4. भाद्रपद पूर्णिमा के अवसर पर आप पूजा के समय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. इस मंत्र जाप के लिए तुलसी की माला का उपयोग करें. आप चाहें तो ॐ नमो नारायणाय मंत्र का भी जाप कर सकते हैं. वैसे ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र सर्व मनोकामना पूर्ति का माध्यम है. धन, सुख, समृद्धि की मनोकामना से आप इस मंत्र का जाप करें, आप पर माता लक्ष्मी और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा होगी.
5. भाद्रपद पूर्णिमा की रात दूध में चावल और शक्कर डालकर खीर बनाएं. खीर जब ठंडी हो जाए तो उसमें तुलसी के कुछ पत्ते डाल दें. खीर का कुछ अंश भगवान विष्णु और माता पार्वती को भोग स्वरूप अर्पित कर दें, कुछ दान कर दें और कुछ को प्रसाद स्वरूप परिवार के सदस्यों में बांट दें. आप और आपके पूरे परिवार को माता लक्ष्मी के साथ विष्णु जी का आशीर्वाद प्राप्त होगा. कष्ट मिटेंगे और पुण्य लाभ होगा. आपके रिश्ते मधुर रहेंगे.
कब है शुक्र प्रदोष व्रत? भगवान शिव को चढ़ाएं ये 4 फूल, मिलेगी मनचाही सफलता
3 Sep, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है. इस खास दिन पूजा करने से भगवान शिव की कृपा से सुख-समृद्धि और जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है. दरअसल, एक महीने में 2 प्रदोष व्रत होते हैं. भगवान शिव समेत उनके पूरे परिवार की आराधना की जाती है. साथ ही, विधि-विधान से पूजा करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है. प्रदोष व्रत पर भगवान को उनके पिर्य पुष्प अर्पित करना बेहद शुभ होता है.
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 5 सितंबर को सुबह 4 बजकर 8 मिनट पर शुरू हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन 6 सितंबर को प्रातः 3 बजकर 12 मिनट पर होने जा रहा है. ऐसे में प्रदोष व्रत शुक्रवार 5 सितंबर को किया जाएगा. शुक्रवार का दिन पड़ने की वजह से इसे शुक्र प्रदोष व्रत भी कहा जाएगा. इस दौरान पूजा के लिए शाम 6:38 से रात 8:55 बजे तक का समय शुभ रहेगा.
कनेर का फूल – भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के लिए प्रदोष के दिन भगवान भोलनाथ को कनेर का फूल चढ़ाना चाहिए. शिव को यह फूल चढ़ाने से वे काफी प्रसन्न होते हैं. यह फूल सफेद और लाल रंग में भी मिलता है. इसे बड़ा ही शुभ माना जाता है
शमी का फूल – भगवान शिव को ऐसे तो बहुत सारे फूल प्रिय हैं, लेकिन प्रदोष के दिन भोलेनाथ को शमी का फूल अति प्रिय है. इस फूल को काफी शुभ माना जाता है. इतना ही नहीं, वेद-पुराणों में भी शमी के पेड़ और फूलों का जिक्र है. प्रदोष पर शमी फूल को अर्पित करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी.
आक का फूल – भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के लिए प्रदोष के दिन भगवान भोलनाथ को आक का फूल चढ़ाना चाहिए. प्रदोष पर भगवान शिव को आक का फूल चढ़ाना काफी शुभ माना जाता है, जो महादेव को काफी पसंद है. इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से इच्छाएं पूरी होती हैं. भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है.
धतूरे का फूल – प्रदोष पर भगवान शिव को धतूरे का फूल विशेष रूप से अर्पित किया जाता है. क्योंकि, यह फूल उन्हें बहुत प्रिय है. साथ ही इसका फल भी शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है. इस फूल को चढ़ाने से व्यक्ति के पाप कट जाते हैं. पुण्य की प्राप्ति होती है.
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