धर्म एवं ज्योतिष
रावण का भांजा कौन था? किस देवता के वरदान से बन गया था शक्तिशाली राक्षस
30 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जब भी हम राक्षसों की बात करते हैं तो त्रेतायुग सबसे पहले जहन में आता है. यही वो युग था जब एक से बढ़कर एक खतरनाक राक्षस हुए. आज हम एक ऐसे राक्षस की बात करेंगे जो भक्त तो भोलेनाथ का था, लेकिन लंकापति रावण का भांजा था. वैसे राक्षस तो लगभग सभी देवों के देव महादेव के भक्त और रावण के खानदान से संबंध होता था. वाल्मीकि रामायण के अनुसार, रावण का भांजा भयंकर खतरनाक और आततायी राक्षस था. उसने महादेव को अपनी तपस्या से खुश करके वरदान में उनके अमोघ त्रिशूल को हासिल किया था. यही वो त्रिशूल था, जिसके दम पर उसने भगवान श्रीराम के पूर्वज से राज्य हथिया लिया था. अब सवाल है कि आखिर रावण का भांजा कौन था? कितना खतरनाक राक्षण था रावण का भांजा? महादेव के कैसे मिला अमोघ त्रिशूल? आइए जानते हैं इस बारे में-
जानिए कौन था रावण का खतरनाक भांजा
रावण का खतरनाक भांजा लवणासुर था. वह त्रेतायुग में भयंकर खतरनाक और आततायी राक्षस था. इस क्रूर राक्षस का सीधा संबंध रावण से था. वाल्मीकि कृत रामायण के उत्तर कांड में लवणासुर की कथा वर्णित है. कथा के अनुसार, भयंकर असुर लवणासुर के पिता का नाम मधु था, जबकि उसकी माता राक्षसी वंश की कुम्भिनी थी. कुम्भिनी रावण की सौतेली बहन थी. इस तरह से लवणासुर रावण का भांजा हुआ.
लवणासुर ने श्रीराम के पूर्वज से छीन लिया था राज्य
लवणासुर मथुरा से लगभग साढ़े तीन मील दक्षिण-पश्चिम की ओर स्थित मधुपुरी का राजा था, जिसे मधुवन ग्राम भी कहते हैं. आज भी यहां लवणासुर की गुफा है. लवणासुर अपने मामा रावण की तरह महादेव का भक्त था और उसने तप कर अमोघ त्रिशूल हासिल किया था. उस त्रिशूल के बल पर उसने भगवान श्रीराम के पूर्वज मांधाता यौवनाश्व चक्रवर्ती सूर्यवंशी सम्राट से राज्य छीन लिया था.
स्वभाव में रावण से भी अधिक अहंकारी था लवणासुर
लवणासुर अपने मामा की ही तरह रूद्र की राक्षसी उपासना में पशुओं, मनुष्यों और ब्राह्मणों की नर बलि दिया करता था. वैदिक यज्ञ करने वाले ऋषियों के लिए तो वह काल था. त्रस्त देवताओं की प्रार्थना पर श्रीराम ने अपने छोटे भाई शत्रुघ्न को लवणासुर का वध करने का आदेश दिया. शत्रुघ्न युद्ध के लिए जाते समय महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में भी रुके थे.
शत्रुघ्न ने कई दिनों तक चले भयंकर युद्ध में रावण के भांजे लवणासुर को न केवल बुरी तरह हराया, बल्कि उसका वध भी किया. वध करने के बाद उन्होंने भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा को नए सिरे से बसाया. महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में लोणार सरोवर, जो पहले लवणासुर सरोवर था, विश्व प्रसिद्ध है. माना जाता है कि शत्रुघ्न ने यहीं पर लवणासुर का वध किया था तभी इसका नाम लवणासुर सरोवर पड़ा.
राधा अष्टमी पर पढ़ें श्री राधा कृष्ण स्तोत्र, जीवन में बरसेगी प्रेम की फुहार, मिलेगी सुख, शांति और समृद्धि
30 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राधा अष्टमी 31 अगस्त दिन रविवार को है. राधा अष्टमी के दिन बरसाने की राधारानी का जन्म हुआ था. पंचांग के अनुसार, द्वापर युग में भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा जी जन्म हुआ था. भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति राधा नाम के बिना अधूरी है. राधा और कृष्ण एक दूसरे के पूरक हैं. राधा अष्टमी के अवसर पर आप किशोरी जी का जन्मदिन मनाएं. राधा रानी की भगवान श्रीकृष्ण के साथ विधि विधान से पूजा करें. उसके बाद श्री राधा कृष्ण स्तोत्र का पाठ करें. इसके बाद चाहें तो राधा कृष्ण अष्टकम भी पढ़ सकते हैं. श्री राधा कृष्ण स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में प्रेम बढ़ता है. इसके साथ ही सुख, शांति और समृद्धि आती है.
श्री राधा कृष्ण स्तोत्र
वन्दे नवघनश्यामं पीतकौशेयवाससम्।
सानन्दं सुन्दरं शुद्धं श्रीकृष्णं प्रकृतेः परम्॥
राधेशं राधिकाप्राणवल्लभं वल्लवीसुतम्।
राधासेवितपादाब्जं राधावक्षस्थलस्थितम्॥
राधानुगं राधिकेष्टं राधापहृतमानसम्।
राधाधारं भवाधारं सर्वाधारं नमामि तम्॥
राधाहृत्पद्ममध्ये च वसन्तं सन्ततं शुभम्।
राधासहचरं शश्वत् राधाज्ञापरिपालकम्॥
ध्यायन्ते योगिनो योगान् सिद्धाः सिद्धेश्वराश्च यम्।
तं ध्यायेत् सततं शुद्धं भगवन्तं सनातनम्॥
निर्लिप्तं च निरीहं च परमात्मानमीश्वरम्।
नित्यं सत्यं च परमं भगवन्तं सनातनम्॥
यः सृष्टेरादिभूतं च सर्वबीजं परात्परम्।
योगिनस्तं प्रपद्यन्ते भगवन्तं सनातनम्॥
बीजं नानावताराणां सर्वकारणकारणम्।
वेदवेद्यं वेदबीजं वेदकारणकारणम्॥
योगिनस्तं प्रपद्यन्ते भगवन्तं सनातनम्।
गन्धर्वेण कृतं स्तोत्रं यः पठेत् प्रयतः शुचिः।
इहैव जीवन्मुक्तश्च परं याति परां गतिम्॥
हरिभक्तिं हरेर्दास्यं गोलोकं च निरामयम्।
पार्षदप्रवरत्वं च लभते नात्र संशयः॥
राधा कृष्ण अष्टकम
चथुर मुखाधि संस्थुथं, समास्थ स्थ्वथोनुथं।
हलौधधि सयुथं, नमामि रधिकधिपं ॥
भकाधि दैथ्य कालकं, सगोपगोपिपलकं।
मनोहरसि थालकं, नमामि रधिकधिपं॥
सुरेन्द्र गर्व बन्जनं, विरिञ्चि मोह बन्जनं।
वृजङ्ग ननु रञ्जनं, नमामि रधिकधिपं॥
मयूर पिञ्च मण्डनं, गजेन्द्र दण्ड गन्दनं।
नृशंस कंस दण्डनं, नमामि रधिकधिपं॥
प्रदथ विप्रदरकं, सुधमधम कारकं।
सुरद्रुमपःअरकं, नमामि रधिकधिपं॥
दानन्जय जयपाहं, महा चमूक्षयवाहं।
इथमहव्यधपहम्, नमामि रधिकधिपं॥
मुनीन्द्र सप करणं, यदुप्रजप हरिणं।
धरभरवत्हरणं, नमामि रधिकधिपं॥
सुवृक्ष मूल सयिनं, मृगारि मोक्षधयिनं।
श्र्वकीयधमययिनम्, नमामि रधिकधिपं॥
सुकर्मा योग में भाद्रपद पूर्णिमा, किस समय होगा स्नान और दान?
30 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस साल की भाद्रपद पूर्णिमा 7 सितंबर दिन रविवार को है. भाद्रपद पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और उसके बाद दान करने का विधान है. भाद्रपद पूर्णिमा पर स्नान और दान करने से पाप मिटते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है. इस बार की भाद्रपद पूर्णिमा पर सुकर्मा योग बन रहा है. इस शुभ योग में स्नान और दान करना अत्यंत ही शुभ फलदायी होगा. आइए जानते हैं भाद्रपद पूर्णिमा पर स्नान और दान का शुभ मुहूर्त क्या है?
भाद्रपद पूर्णिमा तिथि मुहूर्त
पंचांग के आधार पर देखा जाए तो इस साल भाद्रपद पूर्णिमा की तिथि 7 सितंबर रविवार को 1:41 एएम से लेकर देर रात 11:38 पीएम तक है. सूर्योदय की तिथि के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा का स्नान और दान करना 7 सितंबर को शास्त्र सम्मत है.
भाद्रपद पूर्णिमा पर स्नान-दान का मुहूर्त
हिंदू धर्म शास्त्रों में स्नान के दिन ब्रह्म मुहूर्त को सबसे उत्तम समय माना जाता है. ब्रह्म मुहूर्त स्थान के आधार पर अलग-अलग हो सकता है, हालांकि उसमें भी अधिक अंतर नहीं होना चाहिए. देश की राजधानी नई दिल्ली में भाद्रपद पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त 04:31 ए एम से 05:16 ए एम तक है. इस समय में आपको भाद्रपद पूर्णिमा का स्नान करना चाहिए.
यदि आप ब्रह्म मुहूर्त में स्नान नहीं कर सकते हैं तो सूर्योदय के बाद कर लें. भाद्रपद पूर्णिमा पर सूर्योदय 06:02 बजे होगा. आप किसी पवित्र नदी में या फिर घर पर भी स्नान कर सकते हैं. घर पर नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान कर लें.
भाद्रपद पूर्णिमा का स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनें. उसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार दान करें. यह दान आप किसी ब्राह्मण, गरीब या जरूरतमंद को कर सकते हैं. भाद्रपद पूर्णिमा का स्नान करने के बाद पितरों के लिए तर्पण करना न भूलें.
भाद्रपद पूर्णिमा पर क्या दान करें?
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद आपको चंद्रमा से जुड़ी वस्तुओं का दान करना चाहिए. पूर्णिमा का संबंध चंद्रमा से होता है. चंद्रमा मन का कारक है. पूर्णिमा और अमावस्या के दिन चंद्रमा की शक्तियां कम या ज्यादा होती हैं, जिसका लोगों के मन पर प्रभाव होता है. चंद्रमा को मजबूत करने या चंद्र दोष को दूर करने के लिए भाद्रपद पूर्णिमा चावल, चीनी, दूध, खीर, सफेद वस्त्र, चांदी आदि का दान कर सकते हैं.
दान देते समय क्या मंत्र पढ़ें
पूर्णिमा पर चंद्रमा से जुड़ी वस्तुओं का दान करते समय आप ऊँ ऐं क्लीं सोमाय नम: या ऊँ श्रां श्रीं श्रौं चन्द्रमसे नम: मंत्र का जाप कर सकते हैं.
घर पर पूजा करते समय इन 7 बातों का जरूर रखें ध्यान, मिलेगी सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा
30 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर घर में पूजा करना सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि यह मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा पाने का एक तरीका भी है. जब हम भगवान के सामने सच्चे मन से बैठते हैं और पूजा करते हैं, तो हमारे घर में सुख, समृद्धि और शांति का वातावरण बनता है, लेकिन अक्सर लोग छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं देते और उनकी पूजा पूरी तरह प्रभावशाली नहीं हो पाती. सही दिशा में बैठना, साफ-सुथरा स्थान चुनना, कलश और जल का प्रयोग, ये चीजें हमारी पूजा को पूरी तरह फलदायी बनाती हैं, अगर आप इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखेंगे, तो आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा हमेशा बनी रहेगी. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
मुख्य बातें
1. भगवान का आसन: पूजा करते समय भगवान का आसन हमेशा लाल, पीला या गुलाबी रंग का होना चाहिए. ये रंग ऊर्जा और खुशहाली को बढ़ाते हैं. लाल रंग उत्साह और शक्ति का प्रतीक है, पीला रंग धन और सुख का प्रतीक है, और गुलाबी रंग प्रेम और सुकून का प्रतीक माना जाता है. इसलिए आसन का रंग सही होना बहुत जरूरी है.
2. पूजा घर का स्थान: पूजा घर का स्थान भी बहुत मायने रखता है. यह घर के ऊपर या बगल में शौचालय से दूर होना चाहिए. शौचालय के पास पूजा करना शुभ नहीं माना जाता क्योंकि यह स्थान स्वच्छता और ऊर्जा के लिए उपयुक्त नहीं होता. घर में सकारात्मक ऊर्जा के लिए पूजा घर साफ-सुथरा और हर समय व्यवस्थित होना चाहिए.
3. दिशा का ध्यान: पूजा करते समय आपका मुंह हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए, ये दिशा ऊर्जा और शक्ति के लिए सबसे अनुकूल मानी जाती हैं. उत्तर दिशा धन और करियर में उन्नति देती है और पूर्व दिशा स्वास्थ्य और मानसिक शांति लाती है. इसलिए पूजा करते समय इन दिशाओं का ध्यान रखें.
4. कलश और जल का महत्व: पूजा में एक कलश अवश्य रखें. कलश में जल डालकर उसे भगवान के सामने रखें. पूजा के बाद इस जल का पूरे घर में छिड़काव करें. यह घर में सकारात्मक ऊर्जा फैलाता है और बुरी ऊर्जा को दूर करता है. कलश और जल का प्रयोग सिर्फ पूजा का हिस्सा नहीं, बल्कि यह घर में खुशहाली और स्वास्थ्य का प्रतीक भी है.
5. पूजा के समय ध्यान और शांति: पूजा करते समय मन को शांत रखना बहुत जरूरी है. किसी भी तरह की जल्दबाजी या बेचैनी पूजा के प्रभाव को कम कर देती है. इसलिए पूजा से पहले कुछ समय बैठकर सांसों पर ध्यान दें और अपने मन को शांत करें. यह आपके मन को स्थिर रखेगा और पूजा में आपकी भावनाएं पूरी तरह भगवान तक पहुंचेंगी.
6. साफ-सुथरा वातावरण: पूजा करते समय आसपास का माहौल साफ होना चाहिए. धूल-मिट्टी, गंदगी या अव्यवस्था पूजा के प्रभाव को कम कर सकती है. घर के अन्य सदस्य भी अगर सहयोग करें और पूजा के समय चुप्पी बनाए रखें तो यह पूजा का प्रभाव और बढ़ जाता है.
7. अन्य छोटे उपाय: अगर संभव हो तो पूजा के समय हल्का दीपक जलाएं और सुगंधित धूपबत्ती का प्रयोग करें. यह वातावरण को शुद्ध करता है और मन को शांत करता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 30 अगस्त 2025)
30 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- किसी के द्वारा धोखा देने से मनोवृत्ति खिन्न रहेगी, धन का व्यय तथा परिश्रम विफल होगा।
वृष :- समय अनुकूल नहीं है, लेन-देन के मामले विफल रहेंगे, व्यर्थ विवाद से बचें।
मिथुन :- व्यर्थ समय नष्ट होगा, यात्रा प्रसंग में थकावट व बेचैनी बनी रहेगी, समय समस्या का ध्यान रखें।
कर्क :- प्रयत्नशीलता विफल हो, परिश्रम करने में ही कुछ सफलता अवश्य मिलेगी।
सिंह :- परिश्रम से कार्यपूर्ण होंगे, तर्क-वितर्क से विजय प्राप्त हो, सफलता मिले, धन का लाभ होगा।
कन्या :- व्यवसायिक अनुकूलता से असंतोष किन्तु कार्य-व्यवस्था अनुकूल बनी रहेगी।
तुला :- किसी तनावपूर्ण वातावरण से बचिये, कुछ उदविघ्नता से परेशानी बने, मित्रों से लाभ होगा।
वृश्चिक :- परिश्रम से कार्य में सुधार होते हुए भी फलप्रद नहीं, कार्य विफलत्व की चिन्ता बनेगी।
धनु :- स्त्री वर्ग से उल्लास, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे तथा रुके कार्य अवश्य ही बन जायेंगे।
मकर :- स्वभाव में क्लेश व अशांति, व्यर्थ विभ्रम, भय तथा उद्विघ्नता अवश्य बनेगी।
कुम्भ :- कार्यगति अनुकूल रहेगी, चिन्ताऐं कम होंगी तथा विलासिता के साधन जुटायेंगे।
मीन :- आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा तथा इष्ट मित्रों का समर्थन फलप्रद होगा।
दस दिन रहेगी भगवान गणेश की आराधना
29 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में किसी भी शुभ काम की शुरुआत भगवान गणेश के नाम के साथ ही होती है। मान्यता है कि खुद देवता भी भगवान गणेश का नाम लिए बिना अपने किसी कार्य की शुरूआत नहीं करते। शास्त्रों में वर्णित है कि सभी देवताओं से पहले गणेश की पूजा का प्रावधान है। बिना गणेश की पूजा शुरू किए अगर किसी अन्य देव की पूजा की जाए तो वह फलदायक नहीं होती। साल में एक बार गणेश चतुर्थी का पर्व आता है। गणेश चतुर्थी में लोग गणपति को लुभाने के लिए तरह-तरह की पूजा करते हैं। गणेश को मोदक और दुर्वा घास अधिक प्रिय है, लेकिन अगर गणेश चतुर्थी पर आप घर में खुद ही प्रतिमा को बनाए और इसकी पूजा करें तो गणपति आवश्य ही प्रसन्न होते हैं और मनवांछित मुराद पुरी करते हैं। गणेश चतुर्थी पर हर घर में गणेश विराजमान होते हैं। हर गली मोहल्ले में गणपति बाप्पा मोरया की गूंज सुनाई देती है। गणेश चतुर्थी महोत्सव 27 अगस्त से शुरू हो रहा है, जो 6 सितंबर तक चलेगा।
अभीष्ट सिद्धि के लिए बनाएं इस मिट्टी की प्रतिमा
शास्त्रों के अनुसार गणपति की मूर्ति बनाने के लिए कई नियम बताये गए हैं। ऐसा कहा जाता है कि अगर आप भगवान गणपति की मूर्ति इन खास चीजों से बनाते हैं तो आपसे भगवान गणेश जल्दी ही प्रसन्न हो जाते हैं। अगर आपको प्रतिमा बनानी आती है या आप इसकी कोशिश कर रहे हैं तो आप सांप के बांबी की मिट्टी घर ले आए और उससे गणेश की प्रतिमा बनाकर उसकी पूजा करें। यह प्रतिमा आपको अभीष्ट सिद्धि प्रदान करेगी। इसे बेहद ही शुभ माना जाता है। यह प्रतिमा घर में सुख समृद्धि और धन की कमी पूरी करती है। माना जाता है कि सांप की बांबी की मिट्टी सबसे शुद्ध होती है। सांप भगवान शिव के गले में पड़ा रहता है। गणेश जी भगवान शिव के पुत्र हैं। गणेश जी को सांप के बांबी की मिट्टी अति प्रिय है। सांप की बांबी की बनी गणेश प्रतिमा को घर पर रखकर पूजा करने से सुख-समृद्धि आती है।
गणेश जी को इसलिए चढ़ाई जाती है दूर्वा
29 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आजकल सब जगह भगवान गणेश विराजे हुए हैं। गणेशोत्सव के दौरान घर-घर में गणपति की स्थापना की जाती है और भली-भांति पूजा की जाती है। इस दौरान भगवान गणेश को कई चीज़ें अर्पित भी की जाती हैं जिसमें से एक दूर्वा भी है। कहा जाता है कि बिना दूर्वा के भगवान गणेश की पूजा पूरी नहीं होती है। आइए जानते हैं क्यों गणपति को दूर्वा चढ़ाना इतना महत्वपूर्ण है।
दूर्वा चढ़ाते समय बोलें ये मंत्र
ॐ गणाधिपाय नमः ,ॐ उमापुत्राय नमः ,ॐ विघ्ननाशनाय नमः ,ॐ विनायकाय नमः
ॐ ईशपुत्राय नमः ,ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः ,ॐ एकदन्ताय नमः ,ॐ इभवक्त्राय नमः
ॐ मूषकवाहनाय नमः ,ॐ कुमारगुरवे नमः
कथा
कहते हैं कि प्रचीन काल में अनलासुर नामक एक असुर था जिसकी वजह से स्वर्ग और धरती के सभी लोग परेशान थे। वह इतना खतरनाक था कि ऋषि-मुनियों सहित आम लोगों को भी जिंदा निगल जाता था। इस असुर से हताश होकर देवराज इंद्र सहित सभी देवी-देवता और ऋषि-मुनि के साथ महादेव से प्रार्थना करने पहुंचे। सभी ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे इस असुर का वध करें। शिवजी ने सभी देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों की प्रार्थना सुनकर उन्हें बताया कि अनलासुर का अंत केवल गणपति ही कर सकते हैं।
पेट में होने लगी थी जलन
कथा के अनुसार जब गणेश ने अनलासुर को निगला तो उनके पेट में बहुत जलन होने लगी। कई प्रकार के उपाय किए गए, लेकिन गणेशजी के पेट की जलन शांत ही नहीं हो रही थी। तब कश्यप ऋषि को एक युक्ति सूझी। उन्होंने दूर्वा की 21 गठान बनाकर श्रीगणेश को खाने के लिए दी। जब गणेशजी ने दूर्वा खाई तो उनके पेट की जलन शांत हो गई। तभी से भगवान श्रीगणेश जी को दूर्वा अर्पित करने की परंपरा शुरु हुई।
भगवान गणेश के साथ-साथ सूर्य देव की उपासना करना लाभप्रद
29 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मान्यता है कि भगवान गणेश के साथ-साथ सूर्य देव की उपासना करना बहुत फलदायी माना जाता है। इसलिए बप्पा के साथ ही सूर्य देव की भी उपासना करें।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य देव को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है। इसीलिए इसकी शुभ-अशुभ स्थिति व्यक्ति के जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव डालती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार सूर्य देव की अलग-अलग प्रतिमाएं रखना शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अपनी इच्छानुसार घर में सूर्य देव की प्रतिमाएं रखी जा सकती हैं। तो आइए आज जानते हैं कि सूर्य देव की कौन सी प्रतिमा को घर में रखा जा सकता है।
लकड़ी की प्रतिमा
ज्योतिष और वास्तु के अनुसार सूर्यदेव की लकड़ी की प्रतिमा घर रखना बहुत अच्छा माना जाता है। मान्यता है कि इसके निरंतर पूजा-पाठ करने से घर के लोगों का समाज में मान-सम्मान बढ़ता है। इसके साथ ही उन्हें भाग्य का साथ मिल जाता है।
मिट्टी की प्रतिमा
जिस जातक की कुंडली में सूर्य दोष हो और उसके सभी कामों में बार-बार बाधाएं आ रही हो तो वो इंसान घर में पत्थर या मिट्टी की सूर्य प्रतिमा रख सकता है। कहा जाता है कि इसकी पूजा करने से हर कार्य में सफलता मिलती है।
तांबे की प्रतिमा
कहते हैं कि घर में सकारात्मकता बनाए रखने के लिए हर किसी को तांबे से बनी प्रतिमा रखनी चाहिए। इसके शुभ असर से सभी परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है।
चांदी की प्रतिमा
कार्य क्षेत्र में अधिकार बनाए रखने के लिए चांदी की सूर्य प्रतिमा रख सकते हैं।
सोने की प्रतिमा
सोने से बनी सूर्य प्रतिमा घर में रखने और उसकी पूजा करने से घर में धन-धान्य बढ़ता है, सुख-समृद्धि बनी रहती है।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 29 अगस्त 2025)
29 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- संसारिक धन की प्राप्ति, स्त्री सुख तथा कल्याणकारी कार्य बनेंगे, समाचार प्राप्त होगा।
वृष :- अचानक संतान को श्रेष्ठ लाभ होगा, रोगों की वृद्धि से समय का लाभ लवें।
मिथुन :- व्यर्थ की दौड़धूप होगा, संतान कष्ट होगा तथा शत्रु पराजित होंगे।
कर्क :- वाहन से मानसिक कष्ट, व्यय, तनाव से मानसिक पीड़ा अवश्य ही होगा।
सिंह :- जमीन-जायजाद तथा संतान से सुख की प्राप्ति होगी, योजना गुप्त रखें।
कन्या :- यश, सुख की प्राप्ति होगी, संतान के कार्यों में यश प्राप्त होगा, रुके कार्य अवश्य ही बनेंगे।
तुला :- मित्र व सहयोगियों से लाभ होगा, रोजगार का प्रस्ताव प्राप्त होगा, अर्थ व्यवस्था बिगड़ेगी।
वृश्चिक :- अभिष्ट सिद्धी की प्राप्ति होगी, अधिकार प्राप्त होगा किन्तु खर्च से मन बेचैन रहेगा।
धनु :- नये निर्माण की योजना पर धन व्यय होगा किन्तु लाभ अवश्य ही प्राप्त होगा।
मकर :- व्यापार से आय का लाभ बराबर बना रहेगा तथा नवीन कार्य योजना की प्राप्ति होगी।
कुम्भ :- अचानक कार्य लाभ होगा परंतु नई समस्या तत्काल ही खड़ी हो जायेगी।
मीन :- नये कार्यों में में खर्च बढ़े, यात्रा, व्यापार से लाभ अवश्य ही होगा, ध्यान दें।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 27 अगस्त 2025)
27 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- शत्रु पक्ष से हानि, शारीरिक विकार उत्पन्न होंगे तथा परेशानी अवश्य ही बनेगी।
वृष :- स्त्री सुख में कमी बने, कार्य में अड़चन पैदा होने से कार्य में उलझने बनेंगी।
मिथुन :- व्यापार में लाभ, खर्च रुकेंगे, कार्य पूर्ण होंगे, स्त्री-मित्रों में खर्च अवश्य होगा।
कर्क :- शारीरिक सुख, पुत्र चिन्ता, यश के कार्य में अपयश मिलेगा, ध्यान दें।
सिंह :- धन लाभ, कार्य सफल होंगे, मान-सम्मान बढ़े, भाग्योदय तथा आय अवश्य होगी।
कन्या :- यात्रा से लाभ, पारिवार में सुख-शांति तथा कार्य में रुकावट होगी।
तुला :- धार्मिक कार्यों में खर्च बढ़े, धन का आभाव किन्तु विशेष सुख होगा, ध्यान दें।
वृश्चिक :- चिन्ताओं की समाप्ति होगी, नये कार्य-व्यापार में लाभ के कार्य अवश्य होंगे।
धनु :- संघर्ष कार्य, अशांति, व्यापार में अशांति, संतान से सुख समाचार मिलेगा।
मकर :- रोग, शरीर व्याधि से कष्ट, धन की कमी, घर में अवश्य रहेगी।
कुम्भ :- व्यापार में सुधार होगा, शत्रु पीड़ा से सावधान रहें, स्वास्थ्य में कुछ खराबी होगी।
मीन :- व्यापार से लाभ, कार्यक्षेत्र-व्यवसाय में लाभ, भूमि-भवन की खरीदारी होगी।
गणपति की पूजा में क्यों नहीं चढ़ती तुलसी? इस श्राप के बारे में कम लोगों को होगा पता
26 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि गणेश जी की पूजा करने से जीवन के विभिन्न कष्टों का अंत होता है. गौरी पुत्र गणेश की पूजा को लेकर कई सारे नियम भी बताए गए हैं, जिनमें से एक उनकी पूजा में तुलसी दल का इस्तेमाल न होना भी है. बहुत कम लोगों को पता होता है कि गणेश जी को तुलसी नहीं चढ़ती. लेकिन, क्या आपको इसके पीछे की वजह पता है?
कब घर-घर विराजेंगे गणेश जी
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 26 अगस्त को दोपहर 01 बजकर 54 मिनट से होगी. वहीं, इसका समापन 27 अगस्त को लदोपहर 03 बजकर 44 मिनट पर होगा. पंचांग को देखते हुए गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त को शुरू होगा और इसी दिन गणेश प्रतीमा की स्थापना की जाएगी.
क्यों वर्जित है गणेश पूजा में तुलसी
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार गणेशजी ध्यान कर रहे थे. तपस्या में लीन थे. गणेशजी सुंदर वस्त्र, कंठ माला पहन कर बैठे थे. उसी समय तुलसी माता का वहां से निकलना हुआ. उन्होंने जैसे ही गणेश जी को सुंदर रूप में देखा तो वह मोहित हो गईं. उसके बाद तुलसी ने भगवान गणेश का ध्यान भंग कर दिया. जैसे ही गणेश जी का ध्यान भंग हुआ तो देवी तुलसी ने गणेश से विवाह का प्रस्ताव रखा. लेकिन, गणेश जी ने उन्हें कहा मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता. यह सुनने के बाद तुलसी क्रोधित हो गईं. कहा, तुमने मेरी बात नहीं मानी. मैं तुम्हे श्राप देती हूं कि तुम्हारी दो पत्नियों होंगी. फिर गणेश जी महाराज भी क्रोधित हो गए जानिए आगे क्या हुआ?.
तुलसी के बाद भगवान गणेश नें दिया श्राप
तुलसी ने जब भगवान गणेश को श्राप दिया तो इस पर श्री गणेश ने भी तुलसी को श्राप दिया. तुम्हारा विवाह एक असुर से होगा. एक राक्षस की पत्नी होने का श्राप सुन तुलसी ने गणेश भगवान से माफी मांगी. गणेश भगवान ने कहा, तुम्हारा विवाह राक्षस से होगा. जब तुलसी ने क्षमा याचना की तो भगवान गणेश ने कहा, तुम भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की प्रिय होने के साथ-साथ कलयुग में जीवन और मोक्ष देने वाली होगी. लेकिन, मेरी पूजा में तुलसी चढ़ाना अशुभ होगा. इसलिए गणेश पूजा मे तुलसी वर्जित बताई गई है.
धन-संपत्ति और तरक्की चाहिए? जानिए कैसे जेड प्लांट बन सकता है आपके घर का भाग्यवर्धक पौधा
26 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आजकल लोग घर और ऑफिस में ऐसे पौधे लगाना पसंद करते हैं जो सिर्फ सुंदर दिखें ही नहीं बल्कि पॉजिटिव एनर्जी और समृद्धि भी लाएं. इन्हीं खास पौधों में से एक है जेड प्लांट, जिसे लोग लकी प्लांट और कुबेर का पौधा भी कहते हैं. माना जाता है कि इसे लगाने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है और घर में धन-दौलत की कमी नहीं रहती. यही वजह है कि जेड प्लांट को वास्तु और फेंगशुई दोनों में शुभ पौधा माना जाता है. इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि इसे लगाना और संभालना बेहद आसान है. सही जगह पर रखने से यह पौधा न सिर्फ आपका घर सजाता है बल्कि घर के माहौल को भी पॉजिटिव बना देता है.
जेड प्लांट क्यों है खास?
जेड प्लांट अपने गोल और मोटे पत्तों की वजह से पहचाना जाता है. इन पत्तों का गोल आकार सिक्कों जैसा दिखता है और इसी कारण इसे धन आकर्षित करने वाला पौधा कहा जाता है. इसे कुबेर का पौधा इसलिए भी कहते हैं क्योंकि धन के देवता कुबेर को यह पौधा बेहद प्रिय माना गया है. माना जाता है कि अगर घर में यह पौधा सही दिशा में लगाया जाए तो आर्थिक तंगी कभी पास नहीं आती.
लगाने और संभालने का आसान तरीका
जेड प्लांट को उगाना बेहद आसान है. इसे कटिंग या पत्तियों से भी लगाया जा सकता है. इस पौधे को ज्यादा खाद-पानी की जरूरत नहीं होती. बस हर 2-3 महीने में इसमें वर्मी कंपोस्ट या फिर चाय की पत्ती से बने लिक्विड फर्टिलाइजर का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे पौधा हरा-भरा और ताज़ा बना रहता है.
ध्यान रखें कि जेड प्लांट को अधिक पानी बिल्कुल न दें. इसे हल्की नमी वाली मिट्टी पसंद है और अगर ज्यादा पानी दिया तो इसकी जड़ें खराब हो सकती हैं.
किस दिशा में लगाएं जेड प्लांट
वास्तु और फेंगशुई दोनों के अनुसार जेड प्लांट को उत्तर दिशा में लगाना शुभ माना जाता है. यहां लगाने से पैसों की ऊर्जा मजबूत होती है और घर में तरक्की के रास्ते खुलते हैं. सुबह की हल्की धूप इस पौधे के लिए फायदेमंद होती है. दिन में 2-3 घंटे की धूप इसे और भी हेल्दी बनाती है.
फायदे और सकारात्मक प्रभाव
1. घर में सुख-समृद्धि और धन का आगमन बढ़ाता है.
2. रिश्तों में तालमेल और पॉजिटिविटी लाता है.
3. ऑफिस या दुकान में लगाने से बिज़नेस में तरक्की होती है.
4. ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं, व्यस्त लोगों के लिए बिल्कुल सही पौधा.
5. घर की सजावट में चार चांद लगाता है.
हीन भावना और तनाव को दूर करता है 3 मुखी रुद्राक्ष, जानें इसके फायदे, पहनने की विधि
26 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रुद्राक्ष का नाम सुनते ही मन में भगवान शिव की छवि सामने आ जाती है. ऐसा माना जाता है कि हर रुद्राक्ष का अपना महत्व और शक्ति होती है, जो पहनने वाले की ज़िंदगी को बदल सकती है. रुद्राक्ष केवल आभूषण नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक साधन है, जो मन और आत्मा को शांति देता है. इन्हीं में से एक है 3 मुखी रुद्राक्ष, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश की त्रिमूर्ति का प्रतीक माना जाता है. इसे धारण करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है बल्कि यह व्यक्ति के आत्मविश्वास और जीवनशक्ति को भी बढ़ाता है. यह रुद्राक्ष उन लोगों के लिए खास उपयोगी है जो परेशानियों, तनाव या हीन भावना से गुजर रहे हों. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
3 मुखी रुद्राक्ष का महत्व
3 मुखी रुद्राक्ष बेहद पवित्र माना जाता है. इसके तीन चेहरे भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश की शक्तियों का प्रतीक हैं. इसे पहनने से पुराने पाप और नकारात्मक कर्मों का असर कम होता है. यह रुद्राक्ष व्यक्ति को आत्मबल देता है और जीवन की परेशानियों का सामना करने की ताकत प्रदान करता है. ऐसा भी कहा जाता है कि इसे पहनने वाला कभी असहाय नहीं होता और धीरे-धीरे जीवन में सफलता और संतुलन पाता है.
3 मुखी रुद्राक्ष के लाभ
1. यह रुद्राक्ष शरीर की कई समस्याओं को दूर करता है.
2. पेट से जुड़ी परेशानियां, बुखार, जुकाम और कमजोरी में राहत दिलाता है.
3. आंखों की परेशानी, अल्सर और सूजन में भी असरदार है.
4. रक्त से जुड़े संक्रमण और कोलेरा जैसी बीमारियों में लाभकारी माना गया है.
5. मंगल ग्रह के बुरे प्रभावों को कम करता है और अच्छे प्रभावों को बढ़ाता है.
6. इसे धारण करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और आत्म-सम्मान बढ़ता है.
7. यह रुद्राक्ष मन की शुद्धि करता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है.
8. हीन भावना या आत्मग्लानि से जूझ रहे लोगों के लिए यह बेहद उपयोगी है.
3 मुखी रुद्राक्ष का स्वामी ग्रह और देवता
हर रुद्राक्ष का एक स्वामी ग्रह होता है और 3 मुखी रुद्राक्ष का स्वामी ग्रह है मंगल. मंगल ग्रह साहस, ऊर्जा और आत्मबल का प्रतीक है. इसे धारण करने से मंगल के बुरे प्रभाव कम हो जाते हैं और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.
इसका स्वामी देवता है भगवान अग्नि. अग्नि शुद्धि और ऊर्जा का प्रतीक हैं. माना जाता है कि इस रुद्राक्ष को धारण करने वाला व्यक्ति अग्निदेव के आशीर्वाद से आत्मविश्वासी और ऊर्जावान बनता है.
3 मुखी रुद्राक्ष पहनने के नियम
1. 3 मुखी रुद्राक्ष को सोमवार के शुक्ल पक्ष में धारण करना शुभ माना गया है.
2. इसे पहनने से पहले साफ जल और गंगाजल से शुद्ध करना चाहिए.
3. रुद्राक्ष धारण करने से पहले “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ क्लीं नमः” मंत्र का जाप करना उत्तम रहता है.
4. इसे लाल या पीले धागे में पहनना अच्छा माना जाता है.
5. धारण करने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या गुरु से परामर्श करना लाभकारी होता है.
6. रुद्राक्ष पहनने के बाद नकारात्मक आदतों से दूर रहना चाहिए ताकि इसका असर पूरी तरह मिले.
कब शुरू होंगे शारदीय नवरात्र? इस बार हाथी पर सवार होकर आएंगी माता
26 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शारदीय नवरात्रि कब से है? जन्माष्टमी समाप्त होने के बाद भक्तों के जेहन में ये सवाल अब आने लगा है. लोग एक-दूसरे से नवरात्रि की डेट पूछ रहे हैं. ऐसे में उज्जैन के आचार्य पंडित आनंद भारद्वाज ने इस सवाल का जवाब तो दिया ही, साथ इस बार मां की सवारी क्या रहेगी और उसका प्रभाव कैसा रहेगा? इस बात का भी जिक्र किया, ताकि भक्त पहले से ही मां के स्वागत की तैयारियां शुरू कर दें.
माना जाता है कि नवरात्रि के दौरान माता रानी पूरे नौ दिन के लिए धरती लोक पर अपने भक्तों को आशीर्वाद देने लिए आती हैं. हर बार माता की सवारी अलग होती है. नवरत्रि में माता रानी किस वाहन पर सवार होकर आती हैं और जाती हैं, इसका प्रभाव धरती लोक पर जरूर पड़ता है. ये भी माना जाता है कि इस बार माता की जो सवारी होगा, उसके अनुरूप प्रभाव अलगे नवरात्रि यानी चैत्र नवरात्रि तक देखने में आएगा. उ
इस दिन से नवरात्रि
वैदिक पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि अश्विन मास की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होती है. नवमी तिथि को समाप्त होती है. इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर से होगी. 22 सितंबर को ही कलश स्थापना की जाएगी. फिर 30 सितंबर को महा अष्टमी, 1 अक्टूबर को महानवमी और 2 अक्टूबर को दशहरा पर्व मनाया जाएगा. 2 अक्टूबर को ही मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन होता है.
नवरात्रि में घटस्थापना का मुहूर्त
नवरात्रि का आरंभ घटस्थापना के साथ शुरू होता है. 22 सितंबर को सुबह 06:09 बजे से 08:06 बजे तक घटस्थापना के लिए सबसे शुभ मुहूर्त है. वहीं, घटस्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:49 बजे से 12:38 बजे तक है.
इस बार ये रहेगी माता की सवारी
शारदीय नवरात्रि में माता के आगमन और प्रस्थान की सवारी बहुत खास होती है. माता की सवारी भविष्य में होने वाली शुभ व अशुभ घटनाओं का संकेत देती है. नवरात्रि के आरंभ और समापन के दिन माता की सवारी प्रकट होती है. इस बार शारदीय नवरात्रि सोमवार से प्रारंभ हो रहे हैं, इसलिए मां दुर्गा की सवारी हाथी होगा. माता का हाथी पर आगमन अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है. इसे समृद्धि, उन्नति और शांति का प्रतीक माना गया है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 26 अगस्त 2025)
26 Aug, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष :- स्त्री सुख, पुत्र सुख मध्यम होगा तथा यश-प्रतिष्ठा की प्राप्ति अवश्य होगी।
वृष :- साप्ताहिक कार्य में रुचि बढ़ेगी, इच्छित कार्य की प्राप्ति होगी, कार्य व्यवसाय का ध्यान रखें।
मिथुन :- कार्य क्षेत्र में विफलता, अल्प व्यवसाय भय होगा, उठा रोग दब जायेगा।
कर्क :- कोई मित्र शत्रु हानि पहुंचान की चेष्ठा करेगा तथा अभिष्ठ कार्य में सफलता मिलेगी।
सिंह :- कार्य क्षेत्र में विफलता, अल्प व्यवस्थित जीवन, प्रभावशाली कार्य बनें अवसर मिलेगा।
कन्या :- पुराने व्यापार में वृद्धि होगी, नये व्यापार में हानि होगी, स्वजनों से मिलन होगा।
तुला :- राजकीय कार्य में प्रतिष्ठा, अन्य योजनाओं में आर्थिक लाभ अवश्य ही मिलेगा।
वृश्चिक :- भौतिक सुख-साधनों की कमी, प्रियजनों की उपेक्षा से हानि तथा पारिवारिक क्लेश बनेगा।
धनु :- कार्य सिद्धी, शारीरिक शिथिलता का निवारण होगा, गृहस्थ जीवन सुखमय रहेगा।
मकर :- पुरजन व्यक्तियों से कष्ट, अनियंत्रित दिनचर्या, मानसिक व्यथा बढ़ेगी।
कुम्भ :- लापरवाही अधिक, निद्रा से हानि संभव, सामान्य सुविधा अवश्य ही बनेगी।
मीन :- सामान्य ब्योहार का वातावरण करना उचित रहेगा, व्यवसायिक यात्रा योग बनेंगे।
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