धर्म एवं ज्योतिष
चांदी की मछली: धन, भाग्य और खुशहाली का आसान उपाय जो बदल सकता है आपकी आर्थिक किस्मत
10 Sep, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दोस्तों, अक्सर हम सबकी जिंदगी में ऐसे समय आते हैं जब मेहनत के बावजूद पैसा टिकता नहीं या व्यवसाय में ग्राहक तो आते हैं लेकिन खरीददारी नहीं करते. कई बार घर-परिवार में आर्थिक दिक्कतें लगातार बनी रहती हैं और समझ ही नहीं आता कि इसका उपाय क्या किया जाए. ऐसे में कुछ खास ज्योतिषीय और वास्तु उपाय बहुत मददगार साबित होते हैं. इन्हीं में से एक है चांदी की मछली का उपाय. माना जाता है कि यह न सिर्फ धन आकर्षित करती है बल्कि घर में खुशहाली और शुभ समाचार भी लाती है, अगर आपकी जिंदगी में पैसों की दिक्कतें हैं, तरक्की रुक-सी गई है या व्यवसाय में मनचाहा फल नहीं मिल रहा, तो यह उपाय आपके लिए बेहद उपयोगी हो सकता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
चांदी की मछली क्यों मानी जाती है शुभ?
ज्योतिष के अनुसार मछली का संबंध शनि ग्रह से जोड़ा जाता है. वहीं चांदी की धातु का संबंध चंद्रमा और शुक्र ग्रह से है. चंद्रमा शांति और मानसिक संतुलन का प्रतीक है जबकि शुक्र वैभव और धन का कारक माना जाता है. इस तरह शनि, चंद्रमा और शुक्र का मेल व्यक्ति के जीवन में तरक्की, लग्जरी और धन का मार्ग खोलता है. यही कारण है कि चांदी की मछली बेहद शुभ मानी जाती है.
इसके अलावा धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था, इसलिए मछली को भगवान नारायण का प्रतीक भी माना जाता है. इस कारण इसे घर या दुकान में रखना शुभता और समृद्धि का प्रतीक है.
घर और व्यवसाय में रखने का तरीका
1. चांदी की मछली को घर की ईशान दिशा (नॉर्थ ईस्ट कॉर्नर) में रखना सबसे अच्छा माना जाता है.
2. मछली का मुख हमेशा घर के अंदर की ओर होना चाहिए.
3. व्यवसाय स्थल जैसे दुकान या ऑफिस में भी इसे ईशान दिशा में रखें.
4. जब भी आप सुबह दुकान खोलें या ऑफिस जाएं, तो सबसे पहले चांदी की मछली का दर्शन करें. इससे ग्राहकों की संख्या बढ़ती है और कारोबार तेजी से बढ़ने लगता है.
छोटी चांदी की मछली का कमाल
बड़ी मछली के साथ-साथ छोटी-छोटी चांदी की मछलियां भी खास असर डालती हैं.
1. इन छोटी मछलियों को जोड़े में पर्स में रखने से धन आकर्षित होता है.
2. वास्तु और फेंगशुई दोनों में इसे शुभ माना गया है.
3. इससे न केवल आर्थिक स्थिति सुधरती है बल्कि अच्छी खबरें भी मिलना शुरू हो जाती हैं.
खास ज्योतिषीय उपाय
अगर आपकी कुंडली में चंद्रमा और शनि का मेल है या शनि की दृष्टि चंद्रमा पर है, जिससे मानसिक तनाव, उदासी या आर्थिक रुकावट आती है, तो चांदी की मछली से इसका समाधान किया जा सकता है.
1. इसके लिए छोटी चांदी की मछलियों पर काजल लगाएं और शनिवार के दिन बहते पानी में प्रवाहित कर दें.
2. अगर बहता पानी उपलब्ध न हो, तो मंदिर में दान भी कर सकते हैं.
3. कितनी मछलियां प्रवाहित करनी हैं यह आपकी कुंडली के घर के हिसाब से तय किया जाता है. जैसे, यदि यह योग दूसरे घर में हो तो दो मछलियां, चौथे घर में हो तो चार मछलियां प्रवाहित करनी होंगी.
पितृ पक्ष में अपनाते हैं ये उपाय.. तो संतान की होगी प्राप्ति, घर में आएगी खुशहाली, पितृ दोष से मिलेगा छुटकारा
10 Sep, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साल में 15 दिन ऐसे होते हैं जो पितृ को समर्पित रहते हैं. जिसे पितृ पक्ष क्या श्राद्ध पक्ष भी कहते हैं. इस पक्ष में पितरों की पूजा आराधना की जाती है. इससे पितृ बेहद प्रसन्न होते हैं इसके साथ ही पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है और माना जाता है जब पितृ प्रसन्न हो जाते हैं तो घर में सुख समृद्धि की वृद्धि होती है और कई प्रकार की समस्याओं का समापन हो जाता है. वहीं कुछ ऐसे उपाय भी बताए गए हैं जिनको अपनाकर भी आप पितृ को प्रसन्न कर सकते हैं. तो कि पितृपक्ष में क्या कुछ खास उपाय करना चाहिए जिससे पितृ प्रसन्न हो जाए.
कहा कि 8 सितंबर अश्विन माह की प्रतिपदा तिथि से पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है और 21 सितंबर तक यह पितृपक्ष चलने वाला है. पितृ पक्ष के दौरान अपने मृत पूर्वज की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध इत्यादि अवश्य करनी चाहिए. इससे न कि सिर्फ पितृ प्रसन्न होते हैं बल्कि आपके घर में पितृ की कृपा से हमेशा खुशहाली बनी रहती है और आने वाली पीढ़ियों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इसके साथ ही पितृदोष से छुटकारा मिलेगा. संतान इच्छुक दंपति को संतान सुख की भी प्राप्ति होगी.
इन उपाय से भी पितृ होते हैं प्रसन्न
गाय को खिलाएं चारा: ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि पूरे पितृपक्ष में अगर गाय को चारा खिलाते हैं या गए सेवा करते हैं तो इससे पितृ बेहद प्रसन्न होंगे और आपकी कुंडली में अगर पितृ दोष भी है तो वह समाप्त हो जाएगा.
दूध और काला तिल करें अर्पण: जिस तिथि में आपके पितृ की मृत्यु हुई है उस तिथि में किसी नदी किनारे स्नान कर पितृ के नाम से दूध और काला तिल से तर्पण, पिंडदान इत्यादि करते हैं तो पितृ बेहद प्रसन्न हो जाएंगे और पितृ दोष से भी छुटकारा मिल जाएगा.
दक्षिण दिशा में जलाएं दीपक: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दक्षिण की दिशा पितरों के लिए शुभ होती है. इसलिए पूरे पितृपक्ष में अगर घर के दक्षिण दिशा में पितृ के नाम से हर रोज संध्या के समय तिल के तेल का दीपक जलाते हैं तो पितृ बेहद प्रसन्न हो जाएंगे और घर में सुख समृद्धि की वृद्धि होगी. साथ ही पितृ दोष से भी छुटकारा मिल जाएगा.
पितृ पक्ष में नक्षत्र अनुसार लगाएं शुभ पेड़-पौधे, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद और भाग्य होगा प्रबल
10 Sep, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर साल आने वाला पितृ पक्ष सिर्फ पितरों को याद करने का ही समय नहीं होता, बल्कि ये ऐसा अवसर भी है जब हम अपने जीवन को सकारात्मक ऊर्जा और आशीर्वाद से भर सकते हैं. इस दौरान किए गए छोटे-छोटे कर्म कई गुना फल देते हैं. धर्म ग्रंथों और परंपराओं में बताया गया है कि श्राद्ध के दिनों में अगर सही नक्षत्र के अनुसार कुछ खास पेड़-पौधों को लगाया जाए, तो पितरों का आशीर्वाद मिलता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है. खास बात ये है कि इस बार श्राद्ध में कई महत्वपूर्ण नक्षत्र पड़ रहे हैं जिनसे जुड़े पेड़-पौधों को लगाने से न सिर्फ पितृ प्रसन्न होंगे बल्कि जीवन में सौभाग्य और सफलता भी बढ़ेगी. आइए जानते हैं कौन-सा पेड़ किस नक्षत्र में लगाना शुभ माना जाता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
कृतिका नक्षत्र – गूलर का पेड़
13 सितम्बर की सुबह 10:12 बजे तक कृतिका नक्षत्र रहेगा. इस नक्षत्र का संबंध गूलर के पेड़ से है. मान्यता है कि इस समय गूलर का पेड़ लगाने और उसकी सेवा करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है.
रोहिणी नक्षत्र – जामुन का पेड़
14 सितम्बर की सुबह 8:41 बजे तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा. इसका संबंध जामुन के पेड़ से है. मान्यता है कि इस समय जामुन का पेड़ लगाने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और परिवार में खुशहाली आती है.
मृगशिरा नक्षत्र – खैर का पेड़
14 सितम्बर सुबह 8:41 बजे से 15 सितम्बर सुबह 7:32 बजे तक मृगशिरा नक्षत्र रहेगा. इसका संबंध खैर के पेड़ से है. इस समय खैर का पौधा लगाने से व्यक्ति के अंदर अच्छे गुणों का विकास होता है और आत्मबल मजबूत होता है.
आर्द्रा नक्षत्र – शीशम का पेड़
15 सितम्बर सुबह 7:32 बजे से 16 सितम्बर सुबह 6:46 बजे तक आर्द्रा नक्षत्र रहेगा. इस नक्षत्र से जुड़ा पेड़ शीशम है. इसे लगाने से घर-परिवार में ऐश्वर्य और समृद्धि आती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है.
पुनर्वसु नक्षत्र – बांस का पेड़
16 सितम्बर सुबह 6:46 बजे से 17 सितम्बर सुबह 6:26 बजे तक पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा. इस नक्षत्र में बांस का पौधा लगाना बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे शरीर और मन दोनों ही सुंदर रहते हैं और व्यक्ति जीवन में तरक्की करता है.
पुष्य नक्षत्र – पीपल का पेड़
17 सितम्बर सुबह 6:26 बजे से 18 सितम्बर सुबह 6:33 बजे तक पुष्य नक्षत्र रहेगा. इसका संबंध पीपल के पेड़ से है. इस समय पीपल लगाने और उसकी देखभाल करने से लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है.
मघा नक्षत्र – बरगद का पेड़
19 सितम्बर सुबह 7:06 बजे से 20 सितम्बर सुबह 8:06 बजे तक मघा नक्षत्र रहेगा. इसका पेड़ बरगद है. मान्यता है कि बरगद लगाने से परिवार के सभी सदस्यों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और जीवन में स्थिरता आती है.
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र – ढाक का पेड़
20 सितम्बर सुबह 8:06 बजे से 21 सितम्बर सुबह 9:32 बजे तक पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा. इसका संबंध ढाक के पेड़ से है. इसे लगाने से घर में सौभाग्य और समृद्धि आती है.
नवरात्री से पहले घर ले आए ये वस्तुएं.. मां दुर्गा होंगी बेहद प्रसन्न, बरसेगी विशेष कृपा
10 Sep, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साल भर में कुल चार बार नवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है. एक शारदीय नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि. इन चारों में सबसे ज्यादा धूमधाम से शारदीय नवरात्रि पूरे देश भर में मनाई जाती है. नवरात्रि के दौरान माता दुर्गा नौ रूपों की पूजा 9 दिनों तक पूरे विधि विधान और मंत्र उच्चारण के साथ की जाती है. इससे माता दुर्गा बेहद प्रसन्न होती हैं और घर में सुख समृद्धि की वृद्धि होती है. वहीं कुछ ऐसी भी वस्तु हैं जो मां दुर्गा को बेहद प्रिय हैं, अगर नवरात्रि के दौरान उस वस्तु को घर ले आकर रखते हैं तो भक्त पर मां दुर्गा की विशेष कृपा बरसती है. कौन सी है वह वस्तु जानते हैं
कहा कि अश्विन माह की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है. इस साल 22 सितंबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होने वाली है. इस दौरान माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा आराधना की जाएगी. महा अष्टमी और महानवमी तिथि के दिन कुमारी कन्या पूजन भी किया जाएगा. इससे माता दुर्गा बेहद प्रसन्न होती हैं और भक्त के घर में या भक्ति के ऊपर आने वाले सभी संकट समाप्त हो जाते हैं. सुख सौभाग्य में भी वृद्धि होती है.
नवरात्रि से पहले घर लें आए यह वस्तुएं
माता दुर्गा को कई वस्तु ऐसी है जो बेहद प्रिय है. अगर भक्त नवरात्रि के दिन या नवरात्रि से एक दिन पहले घर ले आए तो सुख सौभाग्य में वृद्धि होगी.
महालक्ष्मी यंत्र: महालक्ष्मी यंत्र मां दुर्गा बेहद प्रिय है. अगर घर में नवरात्रि से पहले महालक्ष्मी यंत्र ले आते हैं तो घर में कभी धन की कमी नहीं होंगी. आर्थिक तंगी नहीं होगी.
स्वास्तिक: नवरात्रि के दिन या उससे पहले भक्त स्वास्तिक ले आये और पूजा स्थल में रखकर हर रोज पूजा आराधना करें. मां दुर्गा बेहद प्रसन्न होंगी. घर में सुख सौभाग्य की वृद्धि होंगी.
नवग्रह यंत्र: अगर नवरात्रि से पहले घर में नवग्रह यंत्र ला कर रख देते हैं और पूरे नौ दिन पूजा आराधना करते हैं तो कुंडली में जितने भी ग्रह दोष है वह समाप्त हो जाएगा.
श्रृंगार: श्रृंगार की वस्तु मां दुर्गा को बेहद प्रिय है. इसलिए नवरात्रि में 16 श्रृंगार की वस्तु घर ले आये और मां दुर्गा के ऊपर अर्पण करें. हर मनोकामना पूर्ण होंगी.
शंख: कई पूजा में बिना शंख बजाए पूर्ण होती है. वहीं नवरात्रि में भी शंख बजाया जाता है. इसलिए अगर नवरात्रि से पहले दक्षिणावर्ती शंख घर ले आते है तो मां दुर्गा बेहद प्रसन्न होंगी. इससे घर में हमेशा खुशहाली बनी रहेगी.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 10 सितम्बर 2025)
10 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- अधिकारियों के तनाव से बचकर चलें तथा अपना कार्य पूर्ण करें, निश्चय लाभ होगा।
वृष राशि :- इष्ट-मित्र सुखवर्धक होंगे, हर्ष-उल्लास का अवसर हाथ से न जाने दें सतर्कता अवश्य रखें।
मिथुन राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, कार्य-कुशलता से संतोष होगा तथा व्यवसायिक गति उत्तम होगी।
कर्क राशि :- कुटुम्ब की समस्यायें सुलझें तथा कार्य-व्यवस्था अनुकूल होगी, रुके कार्य बन ही जायेंगे।
सिंह राशि :- शुभ सूचना से हर्ष-उल्लास रहे, दैनिक-कार्यगति अनुकूल होगी, रुके कार्य बना लें।
कन्या राशि :- विरोधी तत्वों से चिन्ता बनी रहेगी, कार्यवृत्ति में सुधार होगा, समय का ध्यान रखें।
तुला राशि :- आर्थिक योजना सफल हो, सोचे कार्य समय पर पूर्ण होंगे किन्तु समय का ध्यान अवश्य रखें।
वृश्चिक राशि :- मान-प्रतिष्ठा पर आंच आने का भय, कार्यगति में बाधा आयेगी, कष्ट से बचें।
धनु राशि :- पराक्रम, मनोबल उत्साहवर्धक होगा, दैनिक कार्यगति में सुधार अवश्य होगा।
मकर राशि :- सामर्थ्य रखने के लिये धैर्य से कार्य करें, स्वभाव में क्रोध तथा आवेग से हानि होगी।
कुंभ राशि :- दैनिक कार्यगति अनुकूल होगी, इष्ट-मित्र सहायक बने ही रहेंगे, समय का ध्यान रखें।
मीन राशि :- विघटनकारी तत्व परेशान करेंगे, अर्थ-व्यवस्था में बाधा तथा कार्य-अवरोध अवश्य होगा।
पितृ पक्ष में गूंथा हुआ आटा फ्रिज में क्यों नहीं रखना चाहिए
9 Sep, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पितृ पक्ष के दौरान हर घर में पूजा, तर्पण और श्राद्ध का खास महत्व होता है. मान्यता है कि इस समय पूर्वज धरती पर आते हैं और उनके लिए किए गए कर्म, दान और भोजन को स्वीकार करते हैं. इस वजह से पितृ पक्ष में खानपान और रोजमर्रा की आदतों को लेकर कई नियम बनाए गए हैं जिनका पालन करना जरूरी माना जाता है. इन नियमों का संबंध सीधे तौर पर श्रद्धा और शुद्धता से होता है. खासकर भोजन की तैयारी और उसे स्टोर करने को लेकर सख्ती से ध्यान रखने की परंपरा है. इन्हीं में से एक नियम है कि पितृ पक्ष के दौरान गूंथे हुए आटे को फ्रिज में नहीं रखना चाहिए. आजकल की व्यस्त जिंदगी में कई लोग समय बचाने के लिए आटा पहले से गूंथकर फ्रिज में रख देते हैं लेकिन पितृ पक्ष के दौरान यह परंपरा और धार्मिक दृष्टि से ठीक नहीं माना जाता. आइए जानते हैं आखिर ऐसा क्यों कहा जाता है और इसके पीछे क्या वजह मानी जाती है.
गूंथे हुए आटे को फ्रिज में रखने से क्यों माना जाता है मना
पितृ पक्ष में हर तरह के भोजन और सामग्री को ताजा बनाने की परंपरा है. मान्यता है कि पूर्वज ताजा और शुद्ध भोजन को ही स्वीकार करते हैं. गूंथा हुआ आटा जब फ्रिज में रखा जाता है तो उसमें नमी और ठंडक की वजह से उसकी ऊर्जा कम हो जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह अशुद्ध माना जाता है और इसे श्राद्ध के भोजन में इस्तेमाल करना वर्जित है.
आटे की ताजगी का महत्व
पितृ पक्ष में भोजन बनाने का सबसे बड़ा नियम यही है कि आटा, सब्जियां और दालें उसी समय तैयार की जाएं जब भोजन बनाना हो. गूंथा हुआ आटा अगर ज्यादा समय तक रखा जाए तो उसमें खट्टापन आ जाता है और उसका स्वाद भी बदल जाता है. यह न केवल स्वास्थ्य की दृष्टि से सही नहीं है बल्कि इसे पितरों के लिए अर्पित करना अपमानजनक भी माना जाता है.
धार्मिक मान्यताएं और शास्त्रों का उल्लेख
धर्म शास्त्रों में साफ तौर पर कहा गया है कि पितृ पक्ष में भोजन बनाने में लापरवाही नहीं करनी चाहिए. ताजा अन्न, ताजा आटा और शुद्ध सामग्री से बना भोजन ही पितरों तक पहुंचता है. फ्रिज में रखा हुआ गूंथा हुआ आटा बासी की श्रेणी में आता है और बासी भोजन पितरों को नहीं चढ़ाना चाहिए. ऐसा करने से पितर नाराज हो सकते हैं और परिवार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.
स्वास्थ्य से जुड़ी वजहें भी हैं
यह सिर्फ धार्मिक मान्यता ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी सही है. जब आटा फ्रिज में रखा जाता है तो उसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं और वह शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है. पितृ पक्ष के समय जब शुद्धता और सेहत दोनों पर जोर दिया जाता है, ऐसे में गूंथे आटे को स्टोर करना बिल्कुल भी उचित नहीं है.
पितृ पक्ष के दौरान पालन करने वाले जरूरी नियम
1. भोजन हमेशा ताजा और समय पर बनाएं.
2. बासी, खट्टा या फ्रिज में रखा खाना न खाएं और न पितरों को अर्पित करें.
3. श्राद्ध कर्म में पवित्रता और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें.
4. पूजा और तर्पण में केवल शुद्ध और सात्विक भोजन ही उपयोग करें.
5. श्रद्धा और नियम से किया गया श्राद्ध ही पितरों तक पहुंचता है.
पितृ पक्ष में गूंथे आटे का विकल्प
अगर समय की कमी है और रोज आटा गूंथना मुश्किल लगता है तो आप आटा उसी समय गूंथकर ताजा रोटी बना लें. चाहें तो आटे को गीले कपड़े से ढककर कुछ देर के लिए बाहर रख सकते हैं लेकिन इसे फ्रिज में बिल्कुल न रखें.
पितृ पक्ष 2025 में जब आप श्राद्ध और तर्पण करेंगे तो इस बात का खास ध्यान रखें कि भोजन पूरी तरह ताजा और शुद्ध हो. गूंथे हुए आटे को फ्रिज में रखने की आदत को इस समय छोड़ दें क्योंकि यह न केवल धार्मिक दृष्टि से गलत है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है. पितरों को ताजा और सात्विक भोजन अर्पित करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है और यही आपके परिवार के लिए शुभ फलदायक भी होगा.
इस पितृ पक्ष अपने खानपान की आदतों में थोड़ा बदलाव करें और पूरी श्रद्धा से नियमों का पालन करें. इससे न केवल पितर प्रसन्न होंगे बल्कि परिवार में सुख-शांति और समृद्धि भी बनी रहेगी.
पितृपक्ष के पहले दिन पवित्र नदियों के किनारे शुरू हुआ श्राद्ध, देशर भर में पूर्वजों के लिए तर्पण
9 Sep, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) की आज से शुरुआत हो चुकी है, हर वर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से इसकी शुरुआत होती है और अमावस्या तिथि को समापन होता है. शास्त्रों में कहा गया है कि मनुष्य तीन ऋण लेकर जन्म लेता है- देवऋण, ऋषिऋण और पितृऋण. इन ऋणों की निवृत्ति के लिए पितृपक्ष में श्राद्ध व तर्पण का विधान है. इस काल में किया गया जल-तर्पण, अन्न-दान और पिंडदान पितरों तक पहुंचता है. वे तृप्त होकर वंशजों को संतति, समृद्धि और सुख-शांति का आशीर्वाद देते हैं. आज देशभर में पवित्र नदियों के किनारे पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान किया जा रहा है.
अगरतला में पितृपक्ष के पहले पितरोंको तर्पण देते हुए. पितृपक्ष के पहले दिन तमिलनाडु के मरीना बीच पर पिंडदान करते हुए. पितृपक्ष के पहले दिन प्रयागराज के संगम घाट पर पिंडदान करते हुए. काशी के गंगाघाट पर पितृपक्ष के पहले दिन पितरों की पूजा करते हुए. पितृपक्ष के पहले दिन भोपाल में पितरों को तर्पण करते हुए. पितृपक्ष के पहले दिन गया में पितरों को तर्पण करते हुए. पितृपक्ष के पहले दिन मिर्जापुर में एक महिला पितरों का पिंडदान करते हुए. पितृपक्ष के पहले दिन मिर्जापुर में एक महिला पितरों का पिंडदान करते हुए. पितृपक्ष के पहले दिन मिर्जापुर में पीले कपड़े पहनकर सामूहिक पितरों को तर्पण करते हुए. पितृपक्ष के पहले दिन गंगा में स्नान करके पितरों की पूजा करते हुए. पितृपक्ष के पहले दिन पितरों की पूजा करते हुए.
शारदीय नवरात्रि में 4 राशियों पर रहेगी मां दुर्गा की कृपा, महालक्ष्मी योग से घर आएगी सुख-समृद्धि और लक्ष्मी
9 Sep, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शारदीय नवरात्रि इस बार 22 सितंबर दिन सोमवार से शुरू हो रहे हैं और समापन 2 अक्टूबर को होगा. इस बीच 24 सितंबर को चंद्रमा का तुला राशि में संचार होगा, जहां ग्रहों के सेनापति मंगल पहले से ही विराजमान होंगे. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, तुला राशि में चंद्रमा और मंगल ग्रह की युति से महालक्ष्मी योग का निर्माण होगा, जो 4 राशियों के लिए बेहद शुभ फलदायी होने वाला है. शारदीय नवरात्रि में महालक्ष्मी राजयोग के बनने से इन राशियों की मां दुर्गा और मां लक्ष्मी की कृपा से किस्मत चमकने वाली है. इन राशियों की मां दुर्गा की कृपा से धन, सुख, यश, वैभव आदि की प्राप्ति होगी और हर तरह की परेशानियों से मुक्ति मिलेगी. आइए जानते हैं नवरात्रि में बन रहे महालक्ष्मी योग से इन राशियों को क्या क्या लाभ मिलेगा…
महालक्ष्मी राजयोग का वृषभ राशि पर प्रभाव
वृषभ राशि वालों को नवरात्रि में बन रहे महालक्ष्मी राजयोग से पर्सनल व प्रफेशनल लाइफ में लाभ मिलेगा. मां दुर्गा का साथ आपको हर कदम पर मिलेगा, जिससे आपकी हर चिंता दूर होगी और परिवार की तरफ से आपको कोई शुभ समाचार मिल सकता है, जिसका आप काफी लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. नौकरीपेशा जातक इस अवधि में कोई नया स्किल सीख सकते हैं और यह स्किल करियर में उन्नति लाएगा और आपकी सैलरी में भी वृद्धि होगी. अगर आप खुद का बिजनस शुरू करना चाहते हैं तो माता रानी की कृपा से आपको अच्छा लाभ मिलेगा और जल्द ही बाजार में आपकी प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी. अगर आप मकान व वाहन खरीदना चाहते हैं तो महालक्ष्मी राजयोग के शुभ प्रभाव से आपकी इच्छा पूरी होगी. साथ ही ससुराल और जीवनसाथी के साथ आपके संबंध मजबूत होंगे.
महालक्ष्मी राजयोग का तुला राशि पर प्रभाव
तुला राशि वालों के लिए महालक्ष्मी राजयोग का निर्माण लाभकारी साबित होगा क्योंकि यह राजयोग आपकी राशि के विवाह भाव पर बनने जा रहा है. इस योग के प्रभाव से आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, जिससे जरूरी निर्णय आसानी से ले पाएंगे. मां दुर्गा की कृपा से आपके बिजनेस में अच्छी तरक्की होगी और आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा. कई राजनीतिक नेताओं और सरकारी अधिकारियों के साथ आपके संबंध मजबूत होंगे और सभी चिंताएं एक एक करके दूर हो जाएंगे. शुभ योग के प्रभाव से तुला राशि वालों के सम्मान, यश, धन, सुख में वृद्धि होगी और स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहेगा. मां दुर्गा की कृपा से आप अपने सपनों को हकीकत में बदलने की ओर अग्रसर होंगे और जीवनसाथी के साथ आपके संबंध मजबूत होंगे.
महालक्ष्मी राजयोग का मकर राशि पर प्रभाव
नवरात्रि में महालक्ष्मी राजयोग बनने से मकर राशि वालों के अच्छे दिन शुरू हो सकते हैं क्योंकि यह राजयोग आपकी राशि के कर्म भाव पर बनने जा रहा है. मां दुर्गा की कृपा से नौकरी व कारोबार में अच्छा लाभ होगा और आपके अटके हुए कार्य भी पूरे हो जाएंगे. बिजनस में आप प्रतिस्पर्धियों से आगे रहेंगे और अच्छी जगह आपको निवेश करने का मौका मिलेगा. राजयोग के शुभ प्रभाव से परिवार के सभी सदस्यों में एकता रहेगी और मां दुर्गा के किसी धार्मिक स्थल पर जा सकते हैं. माता पिता की सेहत देखकर मन प्रसन्न रहेगा और जीवनसाथी के साथ मिलकर किसी संपत्ति की खरीदारी भी कर सकते हैं. इस राशि के जो जातक काफी समय से नौकरी की तलाश कर रहे हैं, मां दुर्गा की कृपा से उनको अच्छे अवसर मिलेंगे.
महालक्ष्मी राजयोग का कुंभ राशि पर प्रभाव
कुंभ राशि वालों के लिए नवरात्रि में महालक्ष्मी राजयोग का होना सौभाग्यशाली साबित होगा, यह योग आपकी राशि के नवम भाव में बनने जा रहा है. कुंभ राशि वालों पर फिलहाल शनि की साढ़ेसाती चल रही है, ऐसे में इस योग के शुभ प्रभाव से उसमें कमी आएगी. मां दुर्गा की कृपा से कुंभ राशि वालों को भाग्य का पूरा साथ मिलेगा और नवरात्रि के मौके पर परिजनों के साथ किसी धार्मिक यात्रा पर जाने का मौका मिलेगा. नौकरी करने वालों की ऑफिस की सभी चिंताएं दूर होंगे और अधिकारियों व सहकर्मियों के साथ आपके संबंध मजबूत होंगे. पिताजी के साथ आपके संबंध मजबूत होंगे और इस राशि के छात्रों को विदेश में पढ़ाई करने का अवसर मिल सकता है. मां दुर्गा की कृपा से आपके सभी विवाद दूर होंगे और मान सम्मान में वृद्धि होगी.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 09 सितम्बर 2025)
9 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- किसी के द्वारा धोखा देने से मनोवृत्ति खिन्न रहेगी, धन का व्यय तथा व्यर्थ परिश्रम होगा।
वृष राशि :- समय अनुकूल नहीं, लेन-देन के मामले स्थिगित रखें, व्यर्थ अपवाद बन सकता है।
मिथुन राशि :- व्यर्थ समय जायेगा, यात्रा के प्रसंग से थकावट व बेचैनी बनी रहेगी, उत्साहहीनता, कार्य होगा।
कर्क राशि :- प्रयत्नशीलता विफल हो, परिश्रम करने पर भी कुछ सफलता दिखाई न दे।
सिंह राशि :- परिश्रम से कार्य पूर्ण होंगे, तर्क-वितर्क में विजय होगी, सफलता मिले, धन लाभ होगा।
कन्या राशि :- व्यवसायिक कार्य कुशलता से संतोष होगा, अर्थ-व्यवस्था अनुकूल बनेगी।
तुला राशि :- किसी तनावपूर्ण वातावरण से बचिये, मन उद्विघ्नता से परेशानी होगी।
वृश्चिक राशि :- परिस्थिति में सुधार होगा, कार्य फलप्रद होगा किन्तु कार्य अपूर्ण रहेगा।
धनु राशि :- स्त्री-वर्ग से उल्लास, इष्ट-मित्र सुखवर्धक होंगे तथा रुके कार्य अवश्य ही बनेंगे।
मकर राशि :- स्वभाव में क्लेश व अशांति, व्यर्थ विभ्रम होगा तथा रुके कार्य अवश्य ही बन जायेंगे।
कुंभ राशि :- कार्यगति अनुकूल, चिन्तायें कम होंगी, सफलता के साधन अवश्य जुटायें।
मीन राशि :- आशानुकूल सफलता से हर्ष होगा, इष्ट-मित्रों का समर्थन फलप्रद अवश्य होगा।
सांप काटने के बाद शरीर की जलन और गर्मी को दूर करेगा ये घरेलू नुस्खा... मात्र 30 दिन करें ट्राई
8 Sep, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बारिश के मौसम सांप अपने घरों से निकलकर बाहर आ आते हैं, जिससे खतरा तेजी से बढ़ जाता है. गौरतलब है कि भारी बारिश की वजह से सांपों के बिलों में पानी भर जाता है और वे सूखी जगह की तलाश में निकलते हैं. घरों, दुकानों, नए-नए बन रहे मकानों में उनका ठिकाना बना लेते हैं. यही नहीं, खतरा महसूस होने पर अटैक भी कर देते हैं, जिससे सर्पदंश (सांप के काटने) के मामले बढ़ जाते हैं. खासकर ग्रामीण इलाकों में इसके ज्यादा ही केस देखने को मिलते हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल 30-40 लाख लोग सांप के काटे जाने का शिकार होते हैं, जिनमें से 50 हजार से ज्यादा की मौत हो जाती है. चिंता की बात यह है कि सिर्फ 30% लोग ही समय पर अस्पताल पहुंच पाते हैं, इसलिए अवेयरनेस और तुरंत प्रतिक्रिया ही जान बचा सकती है.
हालांकि सांप के काटने के बाद अस्पताल में समय पर इलाज मिल जाए तो मरीज की जान बच जाती है.गौरतलब है कि एंटी-वेनम और दवाइयों से जहर का असर धीरे-धीरे कम हो जाता है. लेकिन कई बार इलाज के बाद भी एंटी-वेनम के कारण मरीज को लंबे समय तक सिर चक्कर आना, भारीपन महसूस होना और कमजोरी जैसी दिक्कतें बनी रहती हैं. यह लक्षण इसलिए दिखाई देते हैं क्योंकि शरीर से जहर का असर पूरी तरह खत्म होने में समय लगता है. वहीं आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में ऐसे कई घरेलू उपाय बताए गए हैं, जो इस कमजोरी और चक्कर की समस्या को कम करने में सहायक हो सकते हैं.
गाय के घी का ऐसे करें इस्तेमाल
स्थानीय महिला पुष्पा देवी ने लोकल 18 को बताया कि अगर हमें सांप ने काट लिया है और इलाज के बाद भी हमारे सिर में चक्कर या दर्द जैसी समस्या हो रही है, तो हमें घरेलू नुस्खे के तौर पर देसी घी सिर पर लगाना चाहिए और सुबह-शाम दो-दो चम्मच घी पीना भी चाहिए. ध्यान रहे कि यह देसी घी शुद्ध हो और गाय का ही हो, क्योंकि गाय का घी काफी ठंडक प्रदान करता है.
इस वजह से गाय के घी में होती है ठंडक
आयुर्वेद के डॉक्टर संतोष श्रीवास्तव बताते हैं कि गाय का घी आयुर्वेद में बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. इसमें मौजूद ब्यूटिरेट एक लघु-श्रृंखला फैटी एसिड है, जो शरीर में सूजन को कम करने और आंतरिक अंगों को ठंडक पहुंचाने का काम करता है. यही कारण है कि गाय का घी प्राकृतिक रूप से शरीर की आंतरिक गर्मी को संतुलित करता है और पित्त दोष को शांत करता है. सांप के विष से शरीर में जो तेज गर्मी और जलन पैदा होती है, उसे गाय का घी काफी हद तक शांत करने में मदद करता है. यह शरीर को डिटॉक्स करने और जहर के असर को कम करने में सहायक माना जाता है. आयुर्वेदिक उपचारों में इसे ज़हर की तीव्रता घटाने और शरीर को संतुलन की स्थिति में लाने के लिए उपयोग करने की परंपरा रही है.
1 महीने तक करें इस्तेमाल
पुष्पा देवी बताती हैं कि पहले जब किसी को सांप काट लेता था तो गांव में अस्पताल की व्यवस्था नहीं थी. ऐसे में उस व्यक्ति को एक कटोरा देसी घी तुरंत पिला दिया जाता था. इससे शरीर में पैदा होने वाली जहर की गर्मी से राहत मिलती थी. इसके साथ ही लगभग एक महीने तक देसी घी को सिर पर लगाया जाता था. इससे सिर में होने वाले चक्कर आदि समस्या से काफी राहत मिलती है, बशर्ते यह देसी घी गाय का हो.
संतान प्राप्ति की कामना और दीर्घायु होने के लिए हर माताएं करती हैं जितिया व्रत
8 Sep, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जितिया व्रत माताओं द्वारा अपने पुत्र की दीर्घायु, आरोग्य और उज्जवल भविष्य की कामना के लिए किया जाता है. यह व्रत निर्जला उपवास करके संतान के उज्जवल भविष्य की प्रार्थना की जाती है. आइये जानते हैं इस व्रत के बारे में…
जानें इस व्रत का महत्व
पूर्णिया के पंडित मनोतपल झा बताते हैं कि जितिया व्रत को जीवितवाहन व्रत भी कहा जाता है. यह व्रत माताएं संतान की लंबी आयु, सुख-शांति और स्वस्थ जीवन की कामना के लिए करती हैं. इस बार माताओं को व्रत के दौरान किसी भी तरह का तनाव नहीं होगा, वे बेफिक्र होकर अपने संतान की आरोग्यता की कामना कर सकती हैं.
जानें व्रत की तिथि और समय
इस बार जितिया व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाएगा, जो 14 सितंबर, रविवार को पड़ेगा. मिथिला पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 14 सितंबर को सुबह 8:50 बजे प्रवेश करती है. विभिन्न जगहों पर समय का कुछ अंतर देखा जा सकता है, लेकिन व्रत 14 सितंबर को ही मनाया जाएगा. इस दिन माताएं निर्जला व्रत रहकर संतान की सुख-शांति के लिए आराधना करेंगी और अगले दिन, यानी 15 सितंबर को सुबह 6:35 बजे व्रत का पारण करेंगी.
जानें इस बार के व्रत की अवधि
यह जितिया व्रत हर साल लगभग 72 घंटे का होता था, जो महिलाओं के लिए तनावपूर्ण होता था. इस बार माताएं केवल 24 घंटे के लिए जितिया व्रत करेंगी.
पितृ पक्ष, भूलकर भी न करें ये एक गलती, वरना जिंदगी भर पड़ेगा पछताना
8 Sep, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भाद्रपद की पूर्णिमा से शुरू होने वाला पितृपक्ष यानी श्राद्ध पक्ष अश्विन अमावस्या तक चलता है. इस दौरान कुल 16 श्राद्ध किए जाते हैं, जिनमें 15 श्राद्ध अश्विन कृष्ण पक्ष के होते हैं और एक भाद्रपद पूर्णिमा का. इस बार श्राद्ध 7 सितंबर से शुरू हैं जो 21 सितंबर तक चलेंगे. आपने सुना होगा कि श्राद्ध के इन 16 दिनों में नए वस्त्र या घर में कोई नई वस्तु लाना अशुभ माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं इसके पीछे क्या कारण है. इस खबर में हम सारी बातें डिटेल से जानेंगे, तो चलिए शुरू करते हैं.
कि पितृपक्ष के दिनों में सभी पितरों के लिए श्रद्धा और भक्ति भाव से पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म किया जाता है. जो लोग पितृ दोष से पीड़ित होते हैं, उनके लिए यह समय विशेष महत्व रखता है. अगर इस दौरान नई वस्तुएं खरीदी जाती हैं, तो पितृ नाराज हो सकते हैं और शुभ फल प्राप्त नहीं होता.
नए कपड़े खरीदने पर क्यों है मनाही
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पितृपक्ष के दिनों में नए वस्त्र खरीदना वर्जित है क्योंकि ये वस्त्र सामान्यतः मांगलिक अवसरों के लिए खरीदे जाते हैं, जैसे शादी, पूजा या उत्सव. जबकि पितृपक्ष का उद्देश्य पितरों की आत्मा की शांति और उनके लिए किए जाने वाले कर्मों पर ध्यान देना है. नए वस्त्र या अन्य सामग्री लाने से यह संतुलन बिगड़ सकता है और जीवन में अशांति, दुख और पितृ दोष की समस्या उत्पन्न हो सकती है.
कि इस दौरान घर में मौजूद पुरानी वस्तुएं और पहले से उपयोग की गई चीजें ही सही मानी जाती हैं. पितृपक्ष में कोई नई खरीदारी करना दोष का कारण बनता है और धार्मिक दृष्टि से इसे टालना चाहिए.
सुंदरकांड की इस चौपाई का कर लें जाप, शनि की साढ़ेसाती का असर हो जाएगा खत्म
8 Sep, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस कलयुग में हनुमान जी महाराज एक ऐसे देवता हैं, जो जागृत रूप में विराजमान हैं. ऐसा आशीर्वाद उन्हें माता जानकी ने दिया है. इसके अलावा सप्ताह के दो दिन हनुमान जी महाराज को समर्पित होते हैं, जिसमें मंगलवार और शनिवार का दिन होता है. इस दिन अगर आप सच्चे मन से हनुमान जी महाराज की आराधना करते हैं, तो जीवन की सभी परेशानियां दूर भी होती हैं. साथ ही अगर आप प्रतिदिन सुंदरकांड की चौपाई का अनुसरण भी करते हैं, तो आपके सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं. ऐसी स्थिति में चलिए इस रिपोर्ट में सुंदरकांड की चौपाई के बारे में विस्तार से समझते हैं और उसका अर्थ भी जानते हैं.
दरअसल धार्मिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि अगर आप सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं तो ऐसा करने से शनि की साढ़ेसाती से मुक्ति मिलती है. शनि दोष से निवारण मिलता है. साथ ही जीवन में चल रही तमाम तरह की परेशानियों से छुटकारा मिलता है .ऐसी स्थिति में रामचरितमानस के सुंदरकांड के प्रत्येक चौपाई का जाप करना चाहिए. प्रत्येक चौपाई में कई रहस्य भी छिपे हैं. ऐसी ही एक चौपाई के बारे में चलिए जानते हैं . राम राम तेहिं सुमिरन कीन्हा, हृदयँ हरष कपि सज्जन चीन्हा. एहि सन हठि करिहउँ पहिचानी, साधु ते होइ न का
रज हानी. सुंदरकांड की इस चौपाई में हनुमान जी महाराज और विभीषण के मिलन का प्रसंग अंकित किया गया है. इसके बारे में विस्तार से शशिकांत दास बताते हैं.
राम राम तेहिं सुमिरन कीन्हा, हृदयँ हरष कपि सज्जन चीन्हा…अर्थात विभीषण ने लंका में मौजूद होकर प्रभु राम के नाम का स्मरण किया. जिसके बाद हनुमान जी महाराज हृदय से हर्षित हुए और उन्होंने विभीषण को पहचान लिया.
एहि सन हठि करिहउँ पहिचानी, साधु ते होइ न कारज हानी…अर्थात तब हनुमान जी महाराज ने कहा आप विभीषण प्रभु राम के भक्त हैं तो इनसे मिलेंगे. सुंदरकांड की चौपाई में हनुमान जी के विभीषण को पहचान और मिलने की इच्छा का वर्णन किया गया है.
इस चौपाई के जाप करने से हनुमान जी महाराज के साथ-साथ प्रभु राम का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा. जीवन में चल रहे तमाम तरह के कष्ट दुख विपदा भी दूर होंगे और हनुमान जी महाराज की विशेष कृपा प्राप्त होगी. इसका जाप करने से शनि की साढ़ेसाती का असर भी कम हो जाता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 08 सितम्बर 2025)
8 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- स्त्री-वर्ग से भोग-एश्वर्य की प्राप्ति किन्तु व्यवसायिक तनाव तथा क्लेश प्राप्त होगा।
वृष राशि :- धन और समय की सुरक्षा करें, योजनायें फलीभूत हों तथा सामाजिक सम्मान अवश्य ही मिलेगा।
मिथुन राशि :- अनुकूल सफलता का हर्ष, बिगड़े कार्य बनेंगे, कार्य कुशलता से संतोष अवश्य ही होगा।
कर्क राशि :- धन लाभ, बिगड़े कार्य बनने के योग, कार्य कुशलता पर ध्यान दें, समय पर कार्य करें।
सिंह राशि :- विशेष कार्य स्थगित रखें, लेनदेन के मामले में सतर्कता रखें तथा कार्य बनेंगे।
कन्या राशि :- धन हानि, मानसिक व्यग्रता से बचें तथा भोग-एश्वर्य की प्राप्ति होगी, कार्य सम्पन्न करें।
तुला राशि :- मन उद्विघ्नता से परेशानी बनेगी, विघटनकारी तत्व परेशान करेंगे, सतर्कता से कार्य अवश्य करें।
वृश्चिक राशि :- प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, विशेष कार्य से हानि हो सकती है, समय का ध्यान अवश्य रखें।
धनु राशि :- विभ्रम, उपद्रव से बचें, विशेष कार्य में हानि हो सकती है, समय का ध्यान अवश्य ही रखें।
मकर राशि :- धन का व्यय, असमर्थता का वातावरण रहेगा तथा इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे।
कुंभ राशि :- कार्ययोजना फलीभूत होंगे, सफलता के साधन जुटायें, मन में प्रसन्नता बनी रहेगी।
मीन राशि :- स्त्री-वर्ग से सुख, हर्ष मिलेगा, बिगड़े कार्य बनेंगे, समय का लाभ अवश्य ही लें।
भारत में दिखेगा चंद्र ग्रहण, ग्रहण से पहले और बाद में जरूर करें ये 5 काम
7 Sep, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भाद्रपद पूर्णिमा यानी पितृपक्ष के पहले दिन चंद्र ग्रहण लगने वाला है और यह अद्भुत घटना 7 सितंबर दिन रविवार को घटित होगी. चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल भी मान्य होगा. परंपरागत रूप से, चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले से ही शुरू हो जाता है. चंद्र ग्रहण को हमारे शास्त्रों में गहन आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व दिया गया है. ज्योतिष में चंद्र ग्रहण को अशुभ ग्रह-योग माना जाता है, जो मन की शांति, गृहस्थ सुख और जलतत्व से जुड़े कार्यों पर असर डालता है. ग्रहण के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए ग्रहण से पहले और ग्रहण के बाद कुछ कार्य अवश्य करना चाहिए.
9 घंटे पहले शुरू होगा सूतक काल
चंद्र ग्रहण केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण और साधना का विशेष समय है. नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए शास्त्रों में स्नान, जप और दान का विशेष महत्व बताया गया है. चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल मान्य होगा. चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है. दरअसल चंद्र ग्रहण की शुरुआत रात 9 बजकर 57 मिनट से होगी और मध्य रात्रि 1 बजकर 27 मिनट को इसका समापन होगा. इस चंद्र ग्रहण की अवधि 3 घंटे 28 मिनट 2 सेकेंड की होगी.
ग्रहण से पहले करने योग्य कार्य
1- तुलसी पत्र या कुशा जल में डालकर रखें और भोजन/पानी को ढककर सुरक्षित करें.
2- घर के मंदिर के पट बंद कर दें और ईश्वर के मंत्र जप और ध्यान प्रारंभ करें, ताकि ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा का असर न हो. ऐसा करने से राहु और केतु की बेचैन ऊर्जा भी संतुलित हो जाती है.
ग्रहण के दौरान और बाद में करने योग्य कार्य
3- ग्रहण के समय धन, भावनात्मक या फिर कोई भी बड़ा निर्णय लेने से बचें.
4- ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें.
5- ग्रहण के बाद दान अवश्य करें – विशेषकर तिल, चावल, गुड़ और कपड़े दान करने का विधान है, जिससे ग्रहण दोष शांत होता है.
ग्रहण के दौरान विशेष ध्यान रखें
ग्रहण काल में भोजन, सोना, यात्रा और शुभ कार्य निषिद्ध माने गए हैं.
गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी रखनी चाहिए – कैंची, सुई या धारदार वस्तुओं का प्रयोग वर्जित है.
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