गणेश जी को इसलिए चढ़ाई जाती है दूर्वा
आजकल सब जगह भगवान गणेश विराजे हुए हैं। गणेशोत्सव के दौरान घर-घर में गणपति की स्थापना की जाती है और भली-भांति पूजा की जाती है। इस दौरान भगवान गणेश को कई चीज़ें अर्पित भी की जाती हैं जिसमें से एक दूर्वा भी है। कहा जाता है कि बिना दूर्वा के भगवान गणेश की पूजा पूरी नहीं होती है। आइए जानते हैं क्यों गणपति को दूर्वा चढ़ाना इतना महत्वपूर्ण है।
दूर्वा चढ़ाते समय बोलें ये मंत्र
ॐ गणाधिपाय नमः ,ॐ उमापुत्राय नमः ,ॐ विघ्ननाशनाय नमः ,ॐ विनायकाय नमः
ॐ ईशपुत्राय नमः ,ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः ,ॐ एकदन्ताय नमः ,ॐ इभवक्त्राय नमः
ॐ मूषकवाहनाय नमः ,ॐ कुमारगुरवे नमः
कथा
कहते हैं कि प्रचीन काल में अनलासुर नामक एक असुर था जिसकी वजह से स्वर्ग और धरती के सभी लोग परेशान थे। वह इतना खतरनाक था कि ऋषि-मुनियों सहित आम लोगों को भी जिंदा निगल जाता था। इस असुर से हताश होकर देवराज इंद्र सहित सभी देवी-देवता और ऋषि-मुनि के साथ महादेव से प्रार्थना करने पहुंचे। सभी ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे इस असुर का वध करें। शिवजी ने सभी देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों की प्रार्थना सुनकर उन्हें बताया कि अनलासुर का अंत केवल गणपति ही कर सकते हैं।
पेट में होने लगी थी जलन
कथा के अनुसार जब गणेश ने अनलासुर को निगला तो उनके पेट में बहुत जलन होने लगी। कई प्रकार के उपाय किए गए, लेकिन गणेशजी के पेट की जलन शांत ही नहीं हो रही थी। तब कश्यप ऋषि को एक युक्ति सूझी। उन्होंने दूर्वा की 21 गठान बनाकर श्रीगणेश को खाने के लिए दी। जब गणेशजी ने दूर्वा खाई तो उनके पेट की जलन शांत हो गई। तभी से भगवान श्रीगणेश जी को दूर्वा अर्पित करने की परंपरा शुरु हुई।

राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (01 मार्च 2026)
खाड़ी संकट पर भारत का संतुलित रुख, कूटनीति से समाधान की वकालत
हार्ट अटैक की आशंका, एम्बुलेंस नहीं मिली — लोडर से अस्पताल ले जाते समय बुजुर्ग की मौत
सीएम का बड़ा अपडेट – जल्द हो सकती है घोषणाएं
दिल्ली में सीएम मोहन यादव की शाह से बैठक, नियुक्तियों को लेकर मंथन
कार्यक्रम में उपेक्षा का आरोप, अधिकारी को पहनाया भाजपा पट्टा
सीनियर सिटीजन कार्ड के बहाने ठगों का जाल, पांच लाख उड़ाए
भक्ति और उल्लास के संग मनाया गया फागोत्सव, श्रद्धालुओं ने उड़ाए पुष्प
त्योहार पर मिलावट रोकने की कवायद, टीमों की ताबड़तोड़ कार्रवाई
