धर्म एवं ज्योतिष
कब है शुक्र प्रदोष व्रत? भगवान शिव को चढ़ाएं ये 4 फूल, मिलेगी मनचाही सफलता
3 Sep, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है. इस खास दिन पूजा करने से भगवान शिव की कृपा से सुख-समृद्धि और जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है. दरअसल, एक महीने में 2 प्रदोष व्रत होते हैं. भगवान शिव समेत उनके पूरे परिवार की आराधना की जाती है. साथ ही, विधि-विधान से पूजा करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है. प्रदोष व्रत पर भगवान को उनके पिर्य पुष्प अर्पित करना बेहद शुभ होता है.
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 5 सितंबर को सुबह 4 बजकर 8 मिनट पर शुरू हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन 6 सितंबर को प्रातः 3 बजकर 12 मिनट पर होने जा रहा है. ऐसे में प्रदोष व्रत शुक्रवार 5 सितंबर को किया जाएगा. शुक्रवार का दिन पड़ने की वजह से इसे शुक्र प्रदोष व्रत भी कहा जाएगा. इस दौरान पूजा के लिए शाम 6:38 से रात 8:55 बजे तक का समय शुभ रहेगा.
कनेर का फूल – भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के लिए प्रदोष के दिन भगवान भोलनाथ को कनेर का फूल चढ़ाना चाहिए. शिव को यह फूल चढ़ाने से वे काफी प्रसन्न होते हैं. यह फूल सफेद और लाल रंग में भी मिलता है. इसे बड़ा ही शुभ माना जाता है
शमी का फूल – भगवान शिव को ऐसे तो बहुत सारे फूल प्रिय हैं, लेकिन प्रदोष के दिन भोलेनाथ को शमी का फूल अति प्रिय है. इस फूल को काफी शुभ माना जाता है. इतना ही नहीं, वेद-पुराणों में भी शमी के पेड़ और फूलों का जिक्र है. प्रदोष पर शमी फूल को अर्पित करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी.
आक का फूल – भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के लिए प्रदोष के दिन भगवान भोलनाथ को आक का फूल चढ़ाना चाहिए. प्रदोष पर भगवान शिव को आक का फूल चढ़ाना काफी शुभ माना जाता है, जो महादेव को काफी पसंद है. इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से इच्छाएं पूरी होती हैं. भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है.
धतूरे का फूल – प्रदोष पर भगवान शिव को धतूरे का फूल विशेष रूप से अर्पित किया जाता है. क्योंकि, यह फूल उन्हें बहुत प्रिय है. साथ ही इसका फल भी शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है. इस फूल को चढ़ाने से व्यक्ति के पाप कट जाते हैं. पुण्य की प्राप्ति होती है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 03 सितम्बर 2025)
3 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- दैनिक व्यवसाय गति में सुधार होगा, योजनाऐं फलीभूत होगीं, रुके कार्य बनेंगे।
वृष राशि :- दैनिक क्षमता में वृद्धि, प्रबलता एवं प्रभुत्व वृद्धि के योग अवश्य बनेंगे, आप ध्यान रखें।
मिथुन राशि :- आर्थिक योजना पूर्ण हो, कार्य क्षमता में वृद्धि के योग बनें, इष्ट मित्र सुख वर्धक होंगे।
कर्क राशि :- कार्य व्यवसाय अनुकूल रहेंगे। चिंताऐं कम होंगी तथा इष्ट मित्र सुध वर्धक होंगे।
सिंह राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होवे, कार्य वृत्ति में सुधार होगा ध्यान रखें।
कन्या राशि :- कुछ समस्या सुलझेगीं-कुछ पैदा होंगी, समय अनुकूल नहीं सोच-विचार कर कार्य करें।
तुला राशि :- कार्य व्यवसाय क्षमता कुछ अनुकूल हो, आशाओं में कुछ सफलता किन्तु तनाव बनेगा।
वृश्चिक राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, कुटुम्ब की समस्या अवश्य सुलझेगी।
धनु राशि :- प्रत्येक कार्य में विलम्ब सम्भव, धन लाभ आशानुकूल, सफलता का हर्ष होगा।
मकर राशि :- आरोप व क्लेश सम्भव, धन का व्यय होगा, किन्तु विशेष सफलता से खुशी होगी।
कुंभ राशि :- सफलता के साधन जुटायें तथा समय सुख से बीतेगा, रुके कार्य बनेंगे। ध्यान दें।
मीन राशि :- किसी तनाव-क्लेश से बचिये, अशांति तथा असमंजस पैदा होगा। कष्ट होगा।
कलावा पहनते वक्त ध्यान रखें ये 6 बातें, नहीं तो जीवन में आने लगेंगी नकारात्मक ताकतें
2 Sep, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हमारे देश में हाथ में कलावा बांधना सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि सुरक्षा और शुभता का प्रतीक भी माना जाता है. लोग पूजा-पाठ, हवन या किसी भी शुभ काम की शुरुआत में इसे कलाई पर जरूर बांधते हैं. माना जाता है कि कलावा हमें नकारात्मक शक्तियों से बचाता है और सुख-समृद्धि को आकर्षित करता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि गलत तरीके से कलावा पहनना या नियमों का पालन न करना आपके जीवन में परेशानी भी ला सकता है. कई बार छोटी-सी लापरवाही से खुशहाल जीवन में रुकावटें आने लगती हैं. इसलिए अगर आप भी कलावा पहनते हैं तो कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
1. बहुत मोटा कलावा कभी ना बांधें
कलावा हमेशा पतला और साधारण होना चाहिए. कई लोग मोटा धागा बांध लेते हैं और सोचते हैं इससे ज्यादा सुरक्षा मिलेगी, लेकिन ऐसा करना ठीक नहीं है. बहुत मोटा कलावा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और व्यक्ति के जीवन में अनचाहे तनाव ला सकता है.
2. हर 21 दिन में कलावा बदलें
कलावा हमेशा सीमित समय तक ही प्रभावी रहता है. कहा जाता है कि इसे हर 21 दिन बाद बदल देना चाहिए, अगर आप इसे लंबे समय तक बांधे रखते हैं तो धीरे-धीरे इसमें नकारात्मक ऊर्जा जमने लगती है, जिससे काम बिगड़ सकते हैं और जीवन में रुकावट आने लगती है.
3. उतारा हुआ कलावा कहां रखें
जब आप कलावा उतारते हैं तो इसे कहीं भी फेंकना अशुभ माना जाता है. उतारा हुआ कलावा पीपल के पेड़ की जड़ में दबा दें. ऐसा करने से सारे दोष खत्म हो जाते हैं और आपके जीवन में संतुलन बना रहता है.
4. लाल-पीला मिक्स कलावा पहनें
लाल और पीला रंग मिलकर बहुत शुभ फल देता है. लाल रंग शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक है, जबकि पीला रंग धन और सौभाग्य से जुड़ा है. इसीलिए अगर आप लाल-पीले मिक्स कलावा पहनते हैं तो यह जीवन में सुरक्षा और समृद्धि दोनों लेकर आता है.
5. हरे धागे का महत्व
अगर आप चाहते हैं कि जीवन में धन की कमी न हो तो कलावे के साथ एक हरा धागा भी बांधें. माना जाता है कि हरा धागा धन को आकर्षित करता है और घर में बरकत लाता है. यह उपाय बहुत सरल है और इसके परिणाम भी जल्दी देखने को मिलते हैं.
6. गलत कलावा पहनने से बचें
अक्सर लोग बिना सोचे-समझे बाजार से कोई भी कलावा खरीदकर पहन लेते हैं, लेकिन यह गलत है. गलत कलावा पहनने से आपका काम बिगड़ सकता है और जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं. हमेशा सही रंग और विधि से ही कलावा पहनें ताकि इसका पूरा लाभ मिले.
नौकरी, शादी... हर परेशानी से मिलेगा छुटकारा, बस परिवर्तिनी एकादशी पर कर लें राशि अनुसार ये उपाय
2 Sep, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिन्दू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व है. सालभर में 24 एकादशी व्रत होते हैं. हर माह में 2 बार एकादशी व्रत होता है. मान्यता है कि एकादशी तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है. वहीं, भादो का यह माह बहुत ही पवित्र माना गया है. ऐसे में भादो मास की एकादशी का खास महत्व होता है. कुछ ही दिनों बाद 03 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी आने वाली है. इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा विशेष फलदायक होती है. इस दिन किया गया राशि अनुसार उपाय से सालभर लक्ष्मी-नारायण की कृपा बनी रहेगी.
राशि के अनुसार जरूर करें यह दान
– मेष राशि के जातकों को परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए लाल रंग का फूल अर्पित करना चाहिए.
– वृषभ राशि के जातकों को परिवर्तिनी एकादशी के दिन सफेद चीजों का दान करना चाहिए. मान्यता है कि इस दिन सफेद चीजों का दान करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
– मिथुन राशि के जातक को इस दिन हरे रंग के वस्त्र भगवान विष्णु को अर्पित करने चाहिए. इससे भगवान प्रसन्न होते हैं.
– कर्क राशि के जातकों को परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए खीर का भोग अर्पित करना चाहिए. मान्यता है कि खीर का भोग अर्पित करने से घर में खुशियां आती हैं.
– सिंह राशि के जातक को परिवर्तिनी एकादशी के दिन पीले रंग का वस्त्र भगवान विष्णु को अर्पित करना चाहिए. इसके साथ ही पीले रंग का वस्त्र भी धारण करना चाहिए. इससे भगवान प्रसन्न होते हैं.
– कन्या राशि के जातक जो कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं. उन्हें परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए सफेद मिठाई के साथ केसर अर्पित करना चाहिए. ऐसा करने से घर में सालभर सुख-शांति बनी रहेगी.
– तुला राशि वाले जातकों को इस दिन सफ़ेद चीजों का दान करना चाहिए. इससे वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है. साथ ही सौभाग्य की प्राप्ति भी होती है.
– वृश्चिक राशि के जातक नौकरी-व्यापार में तरक्की पाने के लिए इस दिन गुड़ का दान अवश्य करें. इससे नारायण की कृपा हमेशा बनी रहेगी.
– धनु राशि के जातक परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु का आशीर्वाद पाने के लिए पीले वस्त्र और पीले चंदन का दान करें. साथ ही पीले फल का भी दान करें. इससे नौकरी मिलने के चांस बढ़ते हैं.
– मकर राशि के जातक परिवर्तिनी एकादशी के दिन दही और इलायची का भोग अर्पित करें. इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है. शादी के योग खुलते हैं.
– कुंभ राशि के जातक परिवर्तिनी एकादशी के दिन पीपल के पेड़ के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाएं. इससे भगवान प्रसन्न होते हैं.
– मीन राशि के जातकों को परिवर्तिनी एकादशी के दिन गरीबों की सेवा करना चाहिए. साथ ही गरीबों को दान करना चाहिए. और भगवान को मिश्री का भोग लगाना चाहिए.
पितरों को प्रसन्न करने का सरल उपाय, पितृ पक्ष में लगाएं 3 पौधे, दूर होंगे घर के सभी संकट
2 Sep, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर वर्ष की तरह इस बार भी पितृ पक्ष एक अहम अवसर के रूप में सामने आ रहा है. यह समय उन आत्माओं को याद करने और सम्मान देने का है, जिन्होंने हमारे जीवन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. 2025 में पितृ पक्ष 7 सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर तक चलेगा. इस दौरान श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण के माध्यम से लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ पौधे ऐसे भी हैं, जिन्हें लगाकर आप अपने पितरों को और अधिक प्रसन्न कर सकते हैं? इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
धार्मिक परंपराओं में कुछ पौधों को विशेष माना गया है, जो न केवल वातावरण को शुद्ध करते हैं, बल्कि पितरों की कृपा पाने का माध्यम भी बनते हैं. इस लेख में हम बात करेंगे ऐसे तीन पौधों की जिन्हें पितृ पक्ष में लगाने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है, साथ ही नकारात्मक प्रभावों से भी मुक्ति मिलती है.
1. पीपल का पौधा
पीपल का पेड़ भारतीय संस्कृति में अत्यंत पूजनीय माना जाता है. मान्यता है कि इसमें पितरों का वास होता है. पितृ पक्ष के दौरान घर या आस पास पीपल का पौधा लगाना और उसकी नियमित रूप से जल देकर पूजा करना अत्यंत फलदायक होता है. ऐसा करने से पूर्वजों की आत्मा संतुष्ट होती है और वे परिवार को अपना आशीर्वाद देते हैं. इसके अलावा पीपल पर्यावरण को भी शुद्ध करता है और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी लाभकारी होता है.
2. बरगद का पौधा
बरगद को जीवन का प्रतीक माना गया है. इसकी जड़ें जितनी गहरी होती हैं, उतनी ही मजबूती यह परिवार को देता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों का वास होता है. पितृ पक्ष में बरगद का पौधा लगाना शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे पितर तृप्त होते हैं और जीवन में आने वाली रुकावटें धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं. इसके अलावा, यह पौधा घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करता है.
3. तुलसी का पौधा
तुलसी भारतीय संस्कृति में न केवल एक पवित्र पौधा है, बल्कि इसे लक्ष्मी और विष्णु का प्रिय भी माना जाता है. पितृ पक्ष में तुलसी का पौधा घर में लगाने और उसकी पूजा करने से देवी देवताओं की कृपा प्राप्त होती है, साथ ही पितर भी संतुष्ट होते हैं. तुलसी न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि आयुर्वेदिक गुणों के कारण भी उपयोगी है. यह मानसिक शांति, रोगों से बचाव और गृह कलह से मुक्ति दिलाने में मदद करता है.
4 या 5 सिंतबर, कब है भादो का अंतिम प्रदोष?
2 Sep, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है. इस खास दिन पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव की कृपा से सुख-समृद्धि और जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है. दरअसल, एक महीने में 2 बार प्रदोष व्रत किया जाता है. इस दिन सुबह से लेकर शाम तक व्रत किया जाता है और भगवान शिव समेत उनके पूरे परिवार की आराधना की जाती है. साथ ही, विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है. सितंबर का पहला और भादो मास का आख़री प्रदोष व्रत कब आ रहा है और इसका क्या धार्मिक महत्व.
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 5 सितंबर को सुबह 4 बजकर 8 मिनट पर शुरू हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन 6 सितंबर को प्रातः 3 बजकर 12 मिनट पर होने जा रहा है. ऐसे में प्रदोष व्रत शुक्रवार 5 सितंबर को किया जाएगा. शुक्रवार का दिन पड़ने की वजह से इसे शुक्र प्रदोष व्रत भी कहा जाएगा. इस दौरान पूजा के लिए शाम 6:38 से रात 8:55 बजे तक का समय शुभ रहेगा.
शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
शुक्रवार के दिन पड़ने की वजह से इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, शुक्र प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति के जीवन खुशहाली आती है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. इसके साथ ही जीवन के सभी संकटों से छुटकारा मिलता है. वहीं खासतौर पर इस व्रत को विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुख-सौभाग्य में वृद्धि के लिए रखती हैं.
जरूर करें इन नियमों का पालन
प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद सूर्य देव को अर्घ देकर व्रत का संकल्प लें. इसके बाद पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करके भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें. इसके बाद शिव परिवार का पूजन करें और भगवान शिव पर बेल पत्र, फूल, धूप, दीप आदि अर्पित करें. फिर प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें. पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ जरूर करें. इसके बाद ही अपना उपवास खोलें.
जरूर करें इन चीजों का दान
शुक्रवार मां लक्ष्मी और शुक्र देव को समर्पित है. साथ ही शिव जी को भी सफेद रंग की वस्तु प्रिय है, ऐसे में शुक्र प्रदोष व्रत के दिन दूध, दही, सफेद मिठाई, और सफेद वस्त्र दान करने चाहिए, साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, फल, धन और कपड़े दान करें.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 02 सितम्बर 2025)
2 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष, व्यवसायिक समृद्धि के साधन बनाये ही रखेंगे ध्यान रखें।
वृष राशि :- इष्ट मित्र वर्ग से हर्ष उल्लास, कार्य व्यवस्था गति उत्तम बनीं ही रहेगी, समय का ध्यान रखें।
मिथुन राशि :- सफलता के साधन हाथ से निकल जायें, मित्रों से असंतोष होगा, अधिकारी असमर्थ होंगे।
कर्क राशि :- योजना फलीभूत होगी, सफलता के साधन जुटायें, रुके कार्य के बनने से हर्ष अवश्य होगा।
सिंह राशि :- दैनिक कार्यगति अनुकूल, प्रभुत्व वृद्धि, किसी रुके कार्य के बनने से हर्ष अवश्य होगा।
कन्या राशि :- मान-प्रतिष्ठा प्रभुत्व वृद्धि, कार्यकुशलता से बिगड़े कार्य बनेंगे, अधीर न हो।
तुला राशि :- योजना फलीभूत हो तथा मान प्रतिष्ठा बढ़ेगी, रुके कार्य बनें, कार्य व्यवस्था बढ़ेगी।
वृश्चिक राशि :- स्थिति अनुकूल रहीं, विशेष कार्य स्थिगित रखें, हानि होने की विशेष संभावना।
धनु राशि :- कार्य विफल, दूसरों के कार्यो में धन समय की हानि होगी, कार्य व्यवसाय का ध्यान रखें।
मकर राशि :- अधिकारियों के मेल-मिलाप से लाभ अवश्य होगा, समय का लाभ अवश्य लें।
कुंभ राशि :- परिश्रम करने पर भी सफलता न मिले तथा अनेक प्रकार की असुविधा बनेगी।
मीन राशि :- दैनिक कार्यगति अनुकूल, प्रभुत्व वृद्धि, किसी रुके कार्य के बनने का हर्ष होगा।
इस बार परिवर्तिनी एकादशी खास, शुभ संयोग मे करवट बदलेंगे भगवान विष्णु!
1 Sep, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साल भर में 24 एकादशी मनाई जाती हैं, जिनमें से परिवर्तनी एकादशी का अलग ही महत्व है. इस एकादशी में सारे नियमों का पालन करने से मनुष्य की गलतियों का प्रायश्चित होता है. भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन परिवर्तिनी एकादशी मनाई जाती है. इसे पद्मा एकादशी भी कहते हैं. इस दिन भगवान की स्तुति से सभी पापों से मुक्ति मिलती है. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, इस बार यह परिवर्तिनी एकादशी खास होने वाली है, क्योंकि इस दिन कई शुभ सयोंग बन रहे हैं. इसमें आयुष्मान, सौभाग्य और रवि योग है. जानें लाभ…
कब है परिवर्तिनी एकादशी?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार 3 सितंबर को सुबह 04 बजे के लगभग एकादशी तिथि प्रारंभ हो रही है. इसका समापन 4 सितंबर को सुबह 04 बजकर 21 मिनट के लगभग होगा. ऐसे में 3 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत किया जाएगा. इस दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 35 मिनट से लेकर 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगा.
परिवर्तिनी एकादशी का व्रत करने के लाभ
– ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस व्रत को करने से भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं और घर धन-धान्य से संपन्न बनता है.
– पुराणों के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से मुनष्य भवसागर तर जाता है और उसे प्रेत योनि के कष्ट नहीं उठाने पड़ते हैं. हमेशा लक्ष्मी-नारायण की कृपा बनी रहती है.
परिवर्तिनी एकादशी पर न करें ये काम
परिवर्तिनी एकादशी के दिन तुलसी के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए. इस दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करने की भी मनाही है. साथ ही इस दिन पर चावल का सेवन नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति पाप का भागीदार होता है.
शमी पत्र पूजा से दूर होंगी परेशानियां, अनंत चतुर्दशी पर अपनाएं सरल और प्रभावशाली उपाय
1 Sep, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हम सभी जिंदगी में कभी-कभी ऐसे मोड़ पर आते हैं जब कोई काम बार-बार बिगड़ रहा होता है, परेशानियां लगातार बढ़ती जाती हैं और मन भारी महसूस करता है. ऐसे समय में पारंपरिक उपाय और छोटे-छोटे धार्मिक कर्म हमारी मानसिक शांति और ऊर्जा को फिर से जाग्रत करने में मदद कर सकते हैं. हिंदू धर्म में शमी पत्र और गणेश-शंकर की पूजा का विशेष महत्व माना गया है. यह सिर्फ एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा पैदा करने और जीवन में संतुलन लाने का माध्यम है. जब सही तरीके से शमी पत्र अर्पित किया जाता है तो जीवन की रुकावटें धीरे-धीरे कम होती हैं और मन को शांति मिलती है. मान्यता है कि इस उपाय से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है, रिश्तों में मिठास बढ़ती है और आत्मविश्वास मजबूत होता है. खासतौर से अनंत चतुर्दशी के दिन यह उपाय करने से इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है क्योंकि यह दिन भगवान विष्णु और गणेश जी दोनों से जुड़ा हुआ है.
शमी पत्र समर्पण का सही तरीका
1. गणेश जी के स्थान पर अर्पण
सबसे पहले, पांच शमी पत्र गणेश जी को अर्पित करें. यह संख्या शुभ मानी जाती है और बाधाओं को दूर करने में सहायक होती है. पूजा के समय ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जप करने से उपाय का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है
2. शिवलिंग पर अर्पण
इसके बाद तीन शमी पत्र शिवलिंग पर अर्पित करें. यह भगवान शंकर की कृपा पाने का प्राचीन और प्रभावशाली तरीका है. शिवलिंग पर शमी पत्र चढ़ाने से मन को शांति मिलती है और कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है. यदि संभव हो तो गंगाजल के साथ शमी पत्र अर्पित करें, इससे परिणाम और अधिक सकारात्मक होते हैं.
3. शंकर जी की चौखट पर अर्पण
मंदिर से बाहर निकलते समय एक शमी पत्र बाएं हाथ से शंकर जी की चौखट पर रखें. यह प्रक्रिया घर और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में सहायक है. मान्यता है कि ऐसा करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है और दरिद्रता दूर रहती है.
शमी पत्र अर्पण के लाभ
1. सकारात्मक ऊर्जा: वातावरण में पॉजिटिव एनर्जी फैलती है.
2. बाधाओं से मुक्ति: कार्यों में आ रही रुकावटें कम होती हैं और आत्मविश्वास बढ़ता है.
3. मानसिक शांति: पूजा करते समय मन शांत रहता है और चिंता घटती है.
4. धार्मिक संतोष: यह परंपरा अपनाने से आध्यात्मिक संतुष्टि मिलती है.
5.आर्थिक लाभ: धन संबंधी परेशानियां कम होती हैं और बरकत आती है.
6. रिश्तों में सुधार: परिवार और रिश्तों में सामंजस्य और प्रेम बढ़ता है.
अर्पण करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
1. शमी पत्र हमेशा ताजे और स्वच्छ होने चाहिए.
2. अर्पण के समय मन पूरी तरह सकारात्मक होना चाहिए.
3. पांच और तीन की संख्या का पालन अवश्य करें.
4. पूजा के दौरान किसी प्रकार की नकारात्मक भावना न रखें.
5. अंत में भगवान का ध्यान करके परिवार की भलाई की प्रार्थना करें.
6. पूजा के बाद प्रसाद अवश्य वितरित करें, यह उपाय को पूर्ण बनाता है.
अनंत चतुर्दशी 2025 पर शमी पत्र अर्पित करना बेहद सरल उपाय है, जो हर किसी के लिए सहज और फलदायी है. इसे श्रद्धा और आस्था के साथ करने से जीवन की अड़चनें धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं और पूरे परिवार में शांति और खुशहाली का वातावरण बनता है.
बप्पा के आगमन ही नहीं, विदाई के लिए भी जरूरी है शुभ मुर्हूत! अनंत चतुर्दशी बेस्ट
1 Sep, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भाद्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि बेहद खास होती है. खास इसलिए क्योंकि इस दिन प्रथम देवता माने जाने वाले भगवान गणेश की पूजा आराधना पूरे देशभर में धूमधाम से की जाती है. यही एकमात्र ऐसा उत्सव है जो हिंदू धर्म में सबसे लंबे दिनों तक मनाया जाता है. गणेश चतुर्थी का उत्सव भाद्र माह की चतुर्थी तिथि से लेकर चतुर्दशी तिथि तक मनाया जाता है. इस दौरान विधि विधान के साथ भगवान गणेश की पूजा आराधना की जाती है.
खत्म हो जाते हैं जीवन के संकट
ऐसा करने से भगवान गणेश बेहद प्रसन्न होते हैं और जीवन में बड़े से बड़े संकट समाप्त हो जाते हैं और सुख समृद्धि की वृद्धि होती है. वहीं हिंदू धर्म में विसर्जन का भी खास महत्व होता है. अगर शुभ तिथि और मुहूर्त में विसर्जन किया जाए तभी पूजा का शुभ फल भी प्राप्त होता है. तो आइए देवघर के ज्योतिषाचार्य से जानते हैं कि अनंत चतुर्दशी के अलावा किस तिथि में भगवान गणेश का विसर्जन करना शुभ होता है.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
कि 27 अगस्त को गणेश चतुर्थी है. इस दिन भगवान बप्पा की पूजा आराधना शोडशोपचार विधि से की जाएगी. इससे भगवान गणेश बेहद प्रसन्न होते हैं. जब भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं तो जीवन में मंगल ही मंगल होता है क्योंकि भगवान गणेश को मंगलकर्ता भी कहते हैं.
जिस तरह से विधि विधान के साथ भगवान गणेश की पूजा आराधना की जाती है, उसी तरह विधि विधान और शुभ तिथि में ही भगवान गणेश का विसर्जन भी करना चाहिए. तभी पूरी पूजा का शुभ फल मिलता है.
इस तिथि में करें भगवान गणेश का विसर्जन
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि भगवान गणेश की पूजा चतुर्थी तिथि से लेकर चतुर्दशी तिथि तक यानी पूरे 10 दिनों तक चलती है. विसर्जन अनंत चतुर्दशी को करना चाहिए. लेकिन अगर कोई भक्त उससे पहले विसर्जन करना चाहता है तो उसमें कोई हानि नहीं है. लेकिन विसर्जन शुभ तिथि और शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए.
अनंत चतुर्दशी के अलावा पंचमी तिथि में भी विसर्जन कर सकते हैं. अगर पंचमी में नहीं कर सकते हैं तो अष्टमी तिथि को विसर्जन कर सकते हैं. विसर्जन करने से पहले भगवान गणेश की पूजा कर आरती जरूर करें, तभी भगवान गणेश प्रसन्न होंगे.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 01 सितम्बर 2025)
1 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कार्य कुशलता से संतोष, व्यवसायिक वृत्ति में सुधार तथा योजना फलीभूत अवश्य होगी।
वृष राशि :- इष्ट मित्रों से लाभ, स्त्री वर्ग से मन प्रसन्न रहेगा, मनोवृत्ति संवेदनशील बनीं रहेगी।
मिथुन राशि :- मनोबल उत्साह वर्धक होवे, कार्य कुशलता से संतोष तथा व्यवसाय गति उत्तम होगी।
कर्क राशि :- प्रयत्नशीलता विफल हो, परिश्रम करने पर भी कुछ लाभ न मिले, बनते कार्य बिगड़े।
सिंह राशि :- प्रयत्नशीलता विफल हो, परिश्रम करने पर भी कुछ लाभ होगा, कार्य गति में ध्यान दें।
कन्या राशि :- यात्रा के प्रसंग से बचें, मानसिक बेचैनी, मित्रों के साथ यात्रा से हानि अवश्य होगी।
तुला राशि :- समय अनुकूल नहीं विशेष कार्य स्थगित रखें, लेनदेन के मामले में हानि विवाद होगा।
वृश्चिक राशि :- अर्थ लाभ, कार्य सिद्ध एवं प्रयोजन सफलता के योग बनेंगे, समय स्थित का लाभ लें।
धनु राशि :- समय की अनुकूलता से लाभांवित होंगे, दैनिक कार्यगति में सुधार अवश्य होगा।
मकर राशि :- मनोबल उत्साह वर्धक होगा, इष्ट मित्रों से लाभ स्त्री जाति से मन प्रसन्न रहेगा, कार्य बनेंगे।
कुंभ राशि :- कुटुम्ब की चिन्ताएं होंगी। रुके कार्यों को निपटा लेवें, विशेष कार्य अवश्य बन जायेंगे।
मीन राशि :- प्रत्येक कार्य में बाधा, किसी के द्वारा धोखा हो सकता है, समय सीमा का ध्यान रखें|
पितृपक्ष में इन रूपों में आपके घर आ सकते हैं पितृ! भूलकर भी खाली हाथ न लौटाएं, प्रसन्न हो गए तो चमक जाएगा जीवन
31 Aug, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पितृपक्ष हिंदू धर्म के लिए बेहद खास होता है. इस दौरान पूर्वज की पूजा आराधना के साथ तर्पण, पिंडदान इत्यादि की जाती है. इससे पूर्वज बेहद प्रसन्न होते हैं और माना जाता है कि जब पूर्वज प्रसन्न होते हैं तो घर में सुख समृद्धि की वृद्धि होती है और आने वाली पीढ़ियों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. साल 2025 में भाद्रमाह की पूर्णिमा तिथि से पितृपक्ष की शुरुआत होने जा रही है और अश्विन माह की अमावस्या तिथि के दिन पितृपक्ष समाप्त होने वाला है. माना जाता है कि पितृपक्ष के दौरान अलग-अलग रूपों में पितृ धरती पर वास करके आपके द्वार तक पहुंचते हैं. तो आइये देवघर के ज्योतिषाचार्य से जानते हैं कि पितृपक्ष या श्राद्ध पक्ष के दौरान किन-किन रूपों में पितृ आपके घर आ सकते हैं?
कि 8 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत होने वाली है और 21 सितंबर तक पितृपक्ष चलने वाला है. इस दौरान पितृ अलग-अलग रूपों में धरती पर वास करते हैं. अगर जातक तिथि के अनुसार अपने पूर्वज का तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध इत्यादि कर दे तो पितृ प्रसन्न होते हैं और परिजनों को आशीर्वाद देकर सीधे बैकुंठ में वास करते हैं. पितृ अगर प्रसन्न हो गए तो जीवन चमक जाएगा. घर में हमेशा खुशहाली बनी रहेगी. कुछ ऐसे पशु पक्षी हैं जिनका रूप धारण कर पितृ आपके दरवाजे तक पहुंच सकते हैं.
इन रूपों में आ सकते हैं पितृ
कौआ: पितृ कौए के रूप में भी आ सकते हैं. इसलिए पितृपक्ष के दौरान अगर आपके घर के द्वार पर या फिर घर की छत पर कौआ बैठ जाए तो उन्हें अवश्य खाना खिलाए.
गाय: कहते हैं कि पितृपक्ष के दौरान आपके घर के द्वार पर बार-बार कोई ‘गाय’ आकर खड़ा हो जाए तो उन्हें खाली हाथ वापस बिल्कुल भी ना लौटाये. गाय को अन्न अवश्य खिलाये. इससे पितृ बेहद प्रसन्न होंगे.
काला कुत्ता: पितृपक्ष के दौरान घर के आसपास अगर काला कुत्ता दिखे या घर पर काला कुत्ता आ जाए तो उन्हें वापस न लौटाये. काला कुत्ता को रोटी या फिर कुछ अन्न अवश्य खिलाएं. इससे पितृ प्रसन्न होंगे और आपके पितृ दोष भी खत्म हो जाएगी.
साधु या भिखारी: पितृपक्ष के दौरान कोई भूखा साधु या भिखारी आपके द्वार पर खड़ा हो जाए तो निश्चित तौर पर उन्हें भोजन कराएं तभी उन्हें वापस भेजें. इससे पितृ बेहद प्रसन्न होंगे.
जीवन के हर संकट हो जाएंगे छूमंतर, बजरंगबलि का मिलेगा आशिर्वाद, बस कर लें इस दोहे का जाप
31 Aug, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अगर आप अपने जीवन में परेशान हैं और उस परेशानियों का अंत चाहते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. आप प्रतिदिन सुंदरकांड के दोहे का अनुसरण करें कहा जाता है सुंदरकांड में ऐसी शक्ति होती है, जिसका अनुसरण करने से हर मनोकामना पूरी होती है. वैसे तो सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी देवता को समर्पित होता है. ठीक उसी प्रकार शनिवार और मंगलवार बजरंगबली हनुमान को समर्पित है. इस दिन हनुमान मंदिरों में भक्त हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए उनकी पूजा आराधना करते हैं. हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं तथा सुंदरकांड का अनुसरण करते हैं. ऐसी स्थिति में आज हम आपको सुंदरकांड के दोहे के बारे में बताएंगे, जिसका अनुसरण करने से हनुमान जी महाराज की विशेष कृपा प्राप्त होगी .
दरअसल रामचरितमानस के सुंदरकांड में कई ऐसे दोहे बताए गए हैं, जिसका अनुसरण करने से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं. ऐसा ही एक दोहा ‘पुर रखवारे देखि बहु कपि मन कीन्ह बिचार, अति लघु रूप धरौं निसि नगर करौं पइसार’… जिसमें हनुमान जी महाराज के विचारों का वर्णन किया गया है इसके बारे में शशिकांत दास विस्तार से बताते हैं.
पुर रखवारे देखि बहु कपि मन कीन्ह बिचार….अर्थात हनुमान जी महाराज ने लंका के राक्षसों को देखा और उस दौरान हनुमान जी ने अपने मन में विचार किया.
अति लघु रूप धरौं निसि नगर करौं पइसार… उन्होंने सोचा कि अगर हम अपना आकार छोटा कर ले तो रात के समय लंका में प्रवेश कर सकते हैं .
शशिकांत दास बताते हैं कि सुंदरकांड के इस दोहे में हनुमान जी महाराज की बुद्धिमत्ता और उनकी योजना का वर्णन किया गया है. जिसमें वह लंका में प्रवेश करने के लिए अपने आकार को छोटा करने का विचार कर रहे हैं. हनुमान जी महाराज के इस दोहे का जप करने से हनुमान जी की शक्ति के साथ प्रभु राम का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन के सभी संकट दूर होते हैं.
तुलसी विवाह कब है? इसके बाद बजनी शुरू होंगी शहनाइयां
31 Aug, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर साल 24 एकादशियां आती हैं, और हर एकादशी का अपना विशेष महत्व होता है. माना जाता है कि एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं, जीवन के कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है. धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, आषाढ़ मास की एकादशी यानी हरिशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा के लिए चले जाते हैं, जिसके बाद से सभी शुभ और मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं.
इसके बाद, भगवान विष्णु कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की देवउठान एकादशी के दिन अपनी निद्रा से जागते हैं, और इसी दिन तुलसी विवाह के साथ शुभ कार्यों की फिर से शुरुआत होती है. आइए, देवघर के ज्योतिषाचार्य से जानते हैं कि इस साल तुलसी विवाह कब है और नवंबर महीने में शुभ कार्यों की शुरुआत कब से होगी.
तुलसी विवाह की तिथि
इस साल 1 नवंबर 2025 को तुलसी विवाह का पर्व मनाया जाएगा. पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 1 नवंबर को सुबह 6 बजकर 23 मिनट पर हो रही है और इसका समापन अगले दिन 2 नवंबर को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर होगा. चूंकि एकादशी तिथि पूरे दिन भर 1 नवंबर को रहेगी. इसलिए इसी दिन तुलसी विवाह का पर्व मनाया जाना शुभ है. इस दिन भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम देवता और माता तुलसी का विवाह कराया जाता है. जिससे जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि बढ़ती है.
तुलसी विवाह के बाद शुरू होंगे शुभ कार्य
पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने बताया कि तुलसी विवाह के साथ ही शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है. इसके बाद शादी-विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, और जनेऊ जैसे सभी मांगलिक कार्य शुरू किए जा सकते हैं. इस साल 2025 में तुलसी विवाह के बाद 20 नवंबर से शहनाइयां बजनी शुरू हो जाएंगी क्योंकि इसी दिन से विवाह के लिए शुभ लग्न शुरू हो रहे हैं.
इस पहाड़ी में छिपा है गणेशजी का अद्भुत स्वरूप, कुदरत ने खुद रचा ये चमत्कार! 3 किमी दूर से दिखती है आकृति
31 Aug, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिन्दू धर्म में हर काम में सबसे पहले पूजे जाने वाले भगवान गणेश की देश में कई प्रतिमाएं है, लेकिन आज हम आपको भगवान गणेश की सबसे विशाल प्रतिमा के बारे में बताने जा रहे हैं. ये स्वरूप स्वयं प्रकृति ने दिया है. जी हां, प्रदेश के सिरोही जिले के रेवदर उपखण्ड में मगरीवाडा गांव है. यहां एक पहाड़ी पर भगवान गणेश की स्वयं भू गणेश प्रतिमा नजर आती है. अरावली पर्वतमाला का हिस्सा इस गांव में पहाडियों के रूप में फैला हुआ है. इनमें से एक इस पहाड़ी को इसके इस स्वरूप की वजह से मगरीवाले गणेश के रूप में जाना जाता है.
मंडार के रंजीत सिंह ने बताया कि गांव में अधिक पहाड़ियां यानी मगरियां होने की वजह से इस गांव का नाम भी मग़रीवाडा हो गया. गांव में करीब 1200 फीट की पहाड़ी है. जिसे मगरीवाले गणेश मंदिर के रूप में जाना जाता है. इसमें गणेशजी का सिर, सुंड और पेट प्राकृतिक रूप से उभरे हुए प्रतीत होते हैं. वर्ष 2006 में ग्रामीणों ने इस पहाड़ी पर चढ़ाई कर ध्वजा फहराई थी.
3-4 किमी दूर से नजर आते हैं भगवान गणेश
ये पहाडी ऊंची होने से करीब तीन से चार किलोमीटर दूर से गणेशजी का स्वरूप दिखाई देता है. पहाड़ी की चोटी पर केवल पथरीले रास्ते से पैदल ही पहुंचा जा सकता है. इस पहाड़ी पर चढ़कर गांव के रावल ब्राह्मण पुजारी और ग्रामीण हर साल गणेश चतुर्थी पर पूजा-अर्चना कर ध्वजा चढ़ाते हैं. यहां रेवदर, मंडार व आस-पास के गांवों से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. ग्रामीणों का मानना है कि सच्चे मन से यहां की गई मनोकामना पूरी होती है. धीरे-धीरे यह स्थान ग्रामीणों की आस्था का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है.
प्राकृतिक गुफा में विराजमान हैं आपेश्वर महादेव
भक्तों की मान्यता है कि मगरीवाला गणेशजी के दर्शन मात्र से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. मगरीवाला गणेश के पास ही एक प्राकृतिक गुफा भी बनी हुई है. जिसमें आपेश्वर महादेव विराजमान हैं. करीब आठ दशक पहले क्षेत्र के माने हुए संत और तपस्वी मुनिजी महाराज ने यहां 12 सालों तक तपस्या की थी. यहां ब्रह्रालीन मस्तगिरी महाराज ने वर्षों तक तपस्या की थी. संत के सानिध्य में इस स्थान की पहचान मगरीवाला गणेशजी के रूप में हुई.
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