धर्म एवं ज्योतिष
पितृपक्ष के दौरान भूलकर भी न करें 1 गलती, वरना छिन सकती है पितरों की कृपा और घर की बरकत!
13 Sep, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में पितृपक्ष का समय बेहद खास माना जाता है. यह 16 दिन पूर्वजों को याद करने, उनके लिए श्राद्ध करने और आशीर्वाद पाने का अवसर होता है. कहा जाता है कि इस दौरान कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है, वरना पितरों की कृपा की जगह नाराज़गी मिल सकती है. उन्हीं नियमों में से एक है लोहे का सामान न खरीदना. ज्योतिष के अनुसार, लोहा शनि ग्रह से जुड़ा होता है और पितृपक्ष में इसे घर लाना अशुभ माना जाता है. माना जाता है कि इस दौरान लोहे की वस्तु खरीदने से घर की सुख-शांति और बरकत पर असर पड़ता है. आइए जानते हैं
पितृपक्ष में क्यों नहीं खरीदा जाता लोहे का सामान?
पितृपक्ष का समय पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए माना जाता है. लोग इस दौरान नई चीजें खरीदने से बचते हैं क्योंकि यह समय भोग-विलास का नहीं बल्कि श्रद्धा और सादगी का होता है. लोहे का संबंध शनि ग्रह से होता है और शनि को न्याय का देवता कहा जाता है. पंडितों का मानना है कि अगर पितृपक्ष में लोहा खरीदा जाए तो यह शनि को अप्रसन्न करता है. इसके कारण जीवन में कठिनाइयां बढ़ सकती हैं और पितरों के आशीर्वाद में रुकावटें आ सकती हैं.
लोहा एक कठोर धातु है, जिसे नकारात्मक ऊर्जा और संघर्ष का प्रतीक माना जाता है. जबकि पितृपक्ष का महत्व शांति, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा है. इसलिए इस समय लोहे का सामान खरीदना सही नहीं माना जाता.
किन लोहे के सामानों से बचना चाहिए?
पितृपक्ष में हर तरह के लोहे के सामान से बचना चाहिए, लेकिन खासतौर पर किचन से जुड़े लोहे के बर्तन और औज़ार बिल्कुल नहीं खरीदने चाहिए. किचन घर का सबसे पवित्र स्थान होता है क्योंकि यहीं से पूरे परिवार का भोजन बनता है. कहा जाता है कि इस दौरान किचन में लोहे का नया सामान लाने से बरकत कम हो सकती है और नेगेटिव एनर्जी बढ़ सकती है.
इसके अलावा घर की सजावट या रोज़मर्रा के काम आने वाले लोहे के सामान जैसे दरवाज़े, ताले या औज़ार भी इस समय खरीदने से बचना चाहिए.
लोहा दान करना क्यों होता है शुभ?
जहां पितृपक्ष में लोहा खरीदना अशुभ माना जाता है, वहीं इसे दान करना बेहद शुभ होता है. इस समय तिल, काले कपड़े और लोहे से बनी वस्तुएं दान करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. दान-पुण्य पितृपक्ष का सबसे अहम हिस्सा है. यह माना जाता है कि दान करने से पितरों की आत्मा को मोक्ष मिलता है और परिवार पर सुख-समृद्धि बनी रहती है.
नवरात्रि पर घर में कर लिया ये चमत्कारी उपाय, तो मां जगत जननी की बरसेगी कृपा और दूर होगी आर्थिक तंगी
13 Sep, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है. साल में चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, जिसमें एक शारदीय नवरात्रि होती है, दूसरा चैत्र नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि होती है. नवरात्रि के दिनों में माता जगत जननी दुर्गा की उपासना की जाती है. इस दौरान भक्त मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा आराधना करते हैं.
कब से शुरू हो रही है नवरात्रि
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू हो रहा है जिसका समापन 1 अक्टूबर को होगा, लेकिन नवरात्रि में अगर आप व्रत रह रहे हैं, तो आपको कुछ नियम का पालन 9 दिनों तक करना होगा. तो चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं..
कि नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा आराधना की जाती है. नवरात्रि के दौरान माता रानी की सच्चे मन से आराधना किया जाता है. मन और शरीर दोनों को शुद्ध रखा जाता है. साथ ही ऐसा करने से घर परिवार में सुख शांति बनी रहती है.
घट स्थापना और संकल्प से शुरू होती है पूजा
नवरात्रि व्रत के शुरुआत में घट स्थापना और संकल्प से पूजा आराधना शुरू की जाती है. नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना किया जाता है और संकल्प लेकर व्रत की शुरुआत होती है. नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन मां दुर्गा की पूजा आराधना की जाती है.
इन चीजों का भूलकर न करें उपयोग
इसके अलावा, नवरात्रि के नौ दिनों तक लहसुन प्याज और मांसाहारी भोजन का परहेज करना चाहिए. नवरात्रि में तंबाकू, शराब और नकारात्मक आदतों से भी दूरी बनानी चाहिए. व्रत के दौरान स्वच्छता और सात्विकता का ध्यान रखना चाहिए.
जरूरतमंदों की करें मदद
इसके अलावा, नवरात्रि के दौरान गरीब जरूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए. माता रानी की कथा का श्रवण करना चाहिए. ऐसा करने से माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा करें और उन्हें लाल रंग के फूल-फल और कपड़े अर्पित करना चाहिए. साथ ही, दुर्गा मंत्रों का जाप करें ऐसा करने से माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 13 सितम्बर 2025)
13 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- किसी के द्वारा धोखा देने की मनोवृत्ति से खिन्न होंगे, धन का व्यय तथा परिश्रम विफल होगा।
वृष राशि :- समय अनुकूल नहीं, लेनदेन के मामले विफल रहें तथा व्यर्थ विवाद से अवश्य ही बचें।
मिथुन राशि :- समय व्यर्थ नष्ट होगा, यात्रा प्रसंग में थकावट व बेचैनी का अनुभव होगा, समय का ध्यान रखें।
कर्क राशि :- प्रयत्नशीलता विफल हो, परिश्रम करने में ही कुछ सफलता अवश्य ही मिलेगी, ध्यान रखें।
सिंह राशि :- परिश्रम से कार्य पूर्ण होंगे, तर्क-वितर्क में विजय होगी, सफलता मिले, धन लाभ होगा।
कन्या राशि :- व्यावसायिक अनुकूलता से लाभ किंतु असंतोष, कार्य व्यवस्था अनुकूल बनी रहेगी।
तुला राशि :- किसी तनाव पूर्ण वातावरण से बचिये, कुछ उद्विघ्नता से परेशानी बनेगी, मित्रों से लाभ होगा।
वृश्चिक राशि :- परिश्रम से कार्य में सुधार होगा, कार्य विफलत्व की चिन्ता बनेगी, समय का ध्यान रखें।
धनु राशि :- स्त्री-वर्ग से उल्लास, इष्ट-मित्र सुखवर्धक होंगे तथा रुके कार्य अवश्य ही बन जायेंगे।
मकर राशि :- स्वाभाव में क्लेश व अशांति, व्यर्थ भ्रमण, विभ्रम, भय तथा उद्घ्निता अवश्य ही बढ़ेगी।
कुंभ राशि :- कार्यगति अनुकूल, चिन्तायें कम होंगी तथा सफलता के साधन अवश्य जुटायें, समय का ध्यान रखें।
मीन राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा तथा इष्ट-मित्रों का समर्थन फलप्रद होगा,
राहु मंत्र के फायदे क्या हैं? क्यों और कैसे करना चाहिए इसका जप, जरूर जान लीजिए, वरना...
12 Sep, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राहु का ज्योतिष शास्त्र में विस्तार से वर्णन मिलता है. पुराणों में राहु को वृत्ताकार बताया गया है. यानी इसका कोई पिंड नहीं है. पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव को भी राहु कहा जाता है. वैदिक ज्योतिष में राहु को मायावी ग्रह भी बताया गया है. इसे समझना बेहद मुश्किल है, इसीलिए इसके बारे में कहा जाता है कि कलियुग में राहु ही एकमात्र ऐसा ग्रह है जो राजा को रंक और रंक को राजा बनाने की क्षमता रखता है. राहु को क्रूर ग्रह माना जाता है. इसलिए यह दोनों ही ग्रह अक्सर बुरे परिणाम देते हैं. राहु के शुभ प्रभाव से व्यक्ति का व्यक्तित्व विकसित होता है. इस ग्रह के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति को आर्थिक नुकसान, मानसिक तनाव और कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं.
अगर राहु कुंडली में सही अवस्था में हो तो ये उम्मीद से कई गुना बेहतर परिणाम भी देता है. ये रातों-रात तकदीर बदलने वाला ग्रह है, इसलिए राहु ग्रह को कमतर आंकने की गलती कभी न करनी चाहिए. इससे प्रभाव से बचने के लिए लोग तमाम उपाय करते हैं. मंत्रों का जाप इनमें से एक है. धार्मिक मान्यता है कि, अगर कुछ मंत्रों का जप किया जाए तो राहु का प्रभाव कम होगा.
राहु का मंत्र और उसका प्रभाव
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:
यह राहु का बीज मंत्र है. इस मंत्र के जाप से व्यक्ति अपने पूर्व जन्मों के कष्टों से राहत पाता है, मानसिक शांति मिलती है, और राहु से उत्पन्न भय व चिंता कम होती है
“ॐ रां राहवे नमः”
यह राहु ग्रह को समर्पित एक शक्तिशाली मंत्र है, जिसे जाप करने से राहु के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. इन दोनों मंत्रों का 108 बार जाप करना चाहिए. इससे राहु का प्रभाव कम होगा.
राहु के मंत्र के जाप के फायदे
दोषों से मुक्ति: राहु का मंत्र जप करने न केवल आपके पूर्व कर्मों के दोष समाप्त होंगे, बल्कि आपको ओस जन्म में कष्ट भुगतना पड़ रहा है, तो उसमें भी आपको राहत मिलेगी. इसके अलावा, कुंडली में राहु दोष, कालसर्प दोष या ग्रहण योग का प्रभाव भी कम होगा.
भय दूर होगा: नियमित राहु का मंत्र जप करने से मानसिक शांति मिलेगी. इसके साथ ही,राहु से उत्पन्न भ्रम, चिंता और भय भी दूर होगा.
परेशानियों से मुक्ति: इस मंत्र का जप करने से रहस्यमयी बाधाओं से मुक्ति, अचानक आई परेशानियां, असफलताएं और कोर्ट-कचहरी जैसे मामलों से मुक्ति मिल सकती है.
एकाग्रता बढ़ेगी: यह मंत्र ध्यान और एकाग्रता में वृद्धि करता है. राहु मानसिक भ्रम का कारक होता है. यह मंत्र उस पर नियंत्रण देता है.
रुके कार्य बनेंगे: राहु बीज मंत्र के प्रभाव से रुके हुए कार्यों में प्रगति होती है. इसके अलावा, यह मंत्र विदेश यात्रा और तकनीकी क्षेत्रों में सफलता, वैज्ञानिक खोज, मीडिया आदि में भी सफलता देता है.
वैभव लक्ष्मी का व्रत कैसे करें. किन बातों का रखे ध्यान, वरना नहीं होगी कृपा, जानें विधि
12 Sep, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
धर्म, वैभव लक्ष्मी व्रत माता लक्ष्मी के वैभव रूप की आराधना का विशेष व्रत है, जिसे मुख्यतः शुक्रवार के दिन रखा जाता है. यह व्रत आर्थिक समृद्धि, मानसिक शांति और पारिवारिक सुख-शांति के लिए किया जाता है. लेकिन इस व्रत को करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, वरना व्रत का पूरा फल नहीं मिलता.
वैभव लक्ष्मी व्रत कैसे करें?
1. व्रत की शुरुआत
व्रत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से शुरू किया जा सकता है.
शुरुआत में 11 या 21 शुक्रवारों तक व्रत रखने का संकल्प लें.
मलमास या खरमास में व्रत की शुरुआत या उद्यापन नहीं करना चाहिए.
2. पूजन विधि
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें.
पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और उत्तर या पूर्व दिशा में माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर श्रीयंत्र, कलश और चांदी का सिक्का रखें.
माता लक्ष्मी को सिंदूर, रोली, मौली, लाल फूल, फल और खीर का भोग अर्पित करें.
वैभव लक्ष्मी व्रत कथा का पाठ करें और अंत में आरती करें.
किन बातों का रखें ध्यान?
तामसिक भोजन से परहेज़ करें
व्रत के दिन प्याज, लहसुन, मांसाहार और खट्टी चीज़ों का सेवन न करें.
सात्विकता बनाए रखें
फलाहार करें या एक समय सादा सात्विक भोजन लें जिसमें फल, दूध, मखाने आदि शामिल हों.
पूजन में शुद्धता जरूरी है
पूजा स्थल, वस्त्र और मन की शुद्धता का विशेष ध्यान रखें. पूजा के दौरान मन में कोई नकारात्मक विचार न रखें.
व्रत कथा का पाठ अनिवार्य है
बिना कथा के व्रत अधूरा माना जाता है. कथा के बाद ही आरती करें.
दान और सेवा करें
व्रत के दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करें. इससे पुण्य बढ़ता है और व्रत का फल कई गुना हो जाता है.
व्रत के लाभ:
आर्थिक संकटों से मुक्ति
घर में सुख-शांति और समृद्धि
मानसिक संतुलन और आत्मिक शुद्धता
व्यवसाय और नौकरी में सफलता
पितृ कृपा और पारिवारिक कल्याण
वैभव लक्ष्मी व्रत श्रद्धा, नियम और सात्विकता से किया जाए तो यह जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाता है. लेकिन अगर व्रत के नियमों का पालन न किया जाए, तो इसका प्रभाव कम हो सकता है. इसलिए व्रत करते समय हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखें.
2 मुखी रुद्राक्ष के फायदे क्या हैं? किन परेशानियों से दिलाता राहत
12 Sep, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में रुद्राक्ष धारण करना प्राचीन काल से ही महत्वपूर्ण माना गया है. इसके लिए लोग 1, 2 या फि 4 मुखी रुद्राक्ष पहनते हैं. बता दें कि, रुद्राक्ष में कई ऐसे गुण विद्मान होते हैं, जिनके कारण बड़े से बड़ा रोग भी ठीक हो सकता है. यही नहीं, हमारे मन और शरीर पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई थी. इसलिए इसको शरीर पर धारण करने से दिमाग में पॉजिटिविटी आती है. इसके साथ ही, इसे धारण करने वाले व्यक्ति को अनेक तरह की समस्या और भय से मुक्ति मिलती है. अब सवाल है कि आखिर 2 मुखी रुद्राक्ष पहनने के फायदे क्या हैं? क्यों पहनना चाहिए रुद्राक्ष? 2 मुखी रुद्राक्ष किन परेशानियों से राहत दिलाता है? आइए जानते हैं इस बारे में-
क्यों पहनना चाहिए रुद्राक्ष
उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री के मुताबिक, जो व्यक्ति रुद्राक्ष धारण करता है. उस व्यक्ति को भगवान शिव का आशीर्वाद सदैव प्राप्त होता है. ऐसे व्यक्ति को अपने प्रत्येक कार्य में सफलता मिलती है. कभी भी अनहोनी नहीं होती है. हालांकि, रुद्राक्ष के कई रूप हैं इसलिए हर रुद्राक्ष का अपना अलग महत्व होता है.
दो मुखी रुद्राक्ष किसका कारक है
ज्योतिष आचार्यों के मुताबिक, 2 मुखी रुद्राक्ष शिव और शक्ति (अर्धनारीश्वर) का प्रतिनिधित्व करता है और यह रिश्तों में एकता, सद्भाव और संतुलन का कारक है. जिन लोगों की कुंडली में कमज़ोर चंद्रमा होता है. उन लोगों को दो मुखी रुद्राक्ष धारण करने की सलाह दी जाती है. माना जाता है कि जो व्यक्ति दो मुखी रुद्राक्ष धारण करता है. वह मानसिक रूप से बेहद मज़बूत होता है और सही फैसले ले पाता है.
दो मुखी रुद्राक्ष धारण करने के फायदे
मानसिक संतुलन बनाए: 2 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मन को शांत मिलती है. साथ ही यह मानसिक दुर्बलता दूर करता है.
रिश्तों में सुधार लाए: जो इंसान 2 मुखी रुद्राक्ष धारण करता है उसके पिता-पुत्र, पति-पत्नी और सहकर्मियों के बीच रिश्तों में शांति बनी रहती है.
आत्मविश्वास बढ़ेगी: 2 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति में आत्मविश्वास और स्थिरता आती है. साथ ही, कार्य के प्रति निष्ठा भी बढ़ती है.
चंद्र दोष दूर होगा: जो जातक 2 मुखी रुद्राक्ष पहते हैं उनकी कुंडली में कमजोर चंद्रमा की स्थिति ठीक होती है.
सही फैलाना लेना: 2 मुखी रुद्राक्ष रुद्राक्ष पहनने से व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ती है. साथ ही, याददास्त को भी बढ़ावा मिलता है.
चंद्र ग्रहण के बाद भी नहीं खत्म हुई है आफत, इस दिन लगने वाला है सूर्य ग्रहण, जानें कहां कहां दिखाई देगा और समय
12 Sep, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सितंबर 2025 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से बेहद खास माना जा रहा है. इस मास में दो ग्रहण लगने वाले हैं, पहला 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण लग चुका है और दूसरा 21 सितंबर को सूर्य ग्रहण लगने वाला है. साल 2025 का अंतिम ग्रहण सूर्य ग्रहण होगा और यह ग्रहण पितृपक्ष के अंतिम दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या 2025 के दिन लगने वाला है. हालांकि, भारतीय खगोलप्रेमियों के लिए यह थोड़ा निराशाजनक होगा क्योंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. भारत के साथ साथ यह ग्रहण UAE में भी दिखाई नहीं देगा. आइए जानते हैं यह सूर्य ग्रहण कहां कहां दिखाई देगा और कहां दिखाई नहीं देगा.
कहा जा रहा है विषुव ग्रहण
सूर्य ग्रहण की सबसे खास बात यह है कि यह सितंबर विषुव से ठीक पहले लगने वाला है, जो 22 सितंबर 2025 को पड़ता है. विषुव वह समय होता है जब सूर्य पृथ्वी के भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर होता है, जिससे दिन और रात की लंबाई लगभग समान होती है. इस समय के कारण, इस ग्रहण को विषुव ग्रहण भी कहा जा रहा है, जो इसे खगोलीय और प्रतीकात्मक रूप से और भी दिलचस्प बनाता है. पितृपक्ष की शुरुआत चंद्र ग्रहण से तो और समापन सूर्य ग्रहण से हो रहा है, जिससे इस बार के पितृपक्ष बेहद खास माना जा रहा है. इस घटना का सांस्कृतिक और ज्योतिषीय महत्व भी है.
21 सितंबर को आंशिक सूर्य ग्रहण होगा
साल 2025 का अंतिम सौर ग्रहण 21 सितंबर को निर्धारित है. यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा केवल सूर्य के एक हिस्से को ढकेगा, जिससे सूर्य का एक अर्धचंद्राकार टुकड़ा दिखाई देगा. भारत के साथ साथ यह सूर्य ग्रहण कई जगहों पर नहीं देगा जाएगा. 21 सितंबर का आंशिक सूर्य ग्रहण केवल दक्षिणी गोलार्ध के कुछ विशेष हिस्सों में ही देखा जा सकेगा. न्यूजीलैंड के ड्यूनिडिन जैसे दक्षिणी शहरों में साल का अंतिम सूर्य ग्रहण लगभग 72 प्रतिशत तक सूर्य को ढक लेगा.
कहां नहीं दिखेगा सूर्य ग्रहण?
भारत, यूएई, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, अफगानिस्तान, कनाडा, पूरा नॉर्थ अमेरिका और पूरा साउथ अमेरिका. इसका मतलब है कि एशिया और अमेरिका के लाखों आकाश प्रेमी इस घटना को पूरी तरह से मिस कर देंगे, जो पहले के चंद्र ग्रहण द्वारा उत्पन्न वैश्विक उत्साह के विपरीत है. यह सूर्य ग्रहण उत्तरी गोलार्ध के अधिकांश हिस्सों में नहीं देखा जा सकेगा. वहीं भारत समेत एशियाई देशों में लोग इसे केवल खगोलीय रिपोर्ट्स या लाइव स्ट्रीमिंग के ज़रिए ही देख पाएंगे
कहां दिखेगा सूर्य ग्रहण?
न्यूजीलैंड, ईस्टर्न ऑस्ट्रेलिया, साउथ पैसिफिक आइसलैंड, अंटार्कटिका . इन जगहों पर सूर्य ग्रहण देखा जाएगा.
सूर्य ग्रहण 2025 समय
21 सितंबर को सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार रात 11 बजे से शुरू होगा और मध्य रात्रि को 3 बजकर 23 मिनट पर इसका समापन होगा. यह ग्रहण बुध ग्रह की राशि कन्या में उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में घटित होने वाला है.
भारत में क्यों नहीं दिखेगा?
साल के अंतिम ग्रहण का असर पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों में पड़ता है. इस बार सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की स्थिति ऐसी रहेगी कि भारत इसकी छाया क्षेत्र में नहीं आएगा. इसलिए यहां के लोग इसे अपनी आंखों से नहीं देख पाएंगे. हालांकि यह विशेष ग्रहण पूर्ण नहीं है, इसका समय, दुर्लभता, और विषुव और पितृ पक्ष से प्रतीकात्मक संबंध इसे 2025 के खगोलीय कैलेंडर में एक उल्लेखनीय घटना बनाते हैं.
धार्मिक मान्यता
हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण को विशेष महत्व दिया गया है. इसे शुभ-अशुभ फल देने वाला माना जाता है. ग्रहण के दौरान स्नान, दान और मंत्र जप की परंपरा है. चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका कोई धार्मिक प्रभाव नहीं माना जाएगा.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी पूरी या आंशिक रूप से ढक लेता है. यह घटना पूरी तरह से खगोलीय है और इसका मानव जीवन पर सीधा असर नहीं होता.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 12 सितम्बर 2025)
12 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- व्यापार में प्रगति होगी, यात्रा सुख, व्यय अधिक होगा, व्यर्थ का विरोध होता रहेगा।
वृष राशि :- कलह, अभिष्ट सिद्ध, धन लाभ, चिन्ता, शारीरिक सुख, मांगलिक कार्य होंगे।
मिथुन राशि :- भय, व्यापार लाभ, सामाजिक कार्य में व्यवधान से परेशानी बढ़ेगी।
कर्क राशि :- विद्या बाधा, व्यापार मध्यम, चिन्ता तथा धार्मिक कार्य में विरोध अवश्य होगा।
सिंह राशि :- स्त्री-संतान सुख, यात्रा बाधा विवाद, आर्थिक सुधार होगा, प्रतिष्ठा अवश्य बढ़ेगी।
कन्या राशि :- भूमि लाभ, प्रवास कष्ट, व्यापार बढ़ेगा, शुभ समाचार प्राप्ति से प्रसन्नता होगी।
तुला राशि :- कारोबार मध्यम, सफलता प्राप्ति, स्त्री कष्ट, धन नाश होवे, खर्च से परेशानी होगी।
वृश्चिक राशि :- थोड़ा लाभ, खेती चिन्ता, उलझन, शिक्षा की स्थित सामान्य, लाभदायक बनेंगी।
धनु राशि :- घरेलु सुख, हानि, उन्नत खेती के योग मध्यम, कुछ अच्छे कार्य होंगे, कार्य पर ध्यान अवश्य दें।
मकर राशि :- हर्ष, भूमि लाभ, यश, कारोबार बढ़ेगा, करोबार में लाभ व्यय बढ़ा चढ़ा अवश्य रहेगा।
कुंभ राशि :- भय, हानि, स्त्री सुख, कार्य सिद्धी, जमीन-जायजाद के कार्य में सफलता अवश्य ही मिलेगी।
मीन राशि :- विद्या बाधा, विवाद, चोरों से भय, पारिवारिक लोगों से लाभ व सफलता मिलेगी।
पितरों का आशीर्वाद हासिल करने करते हैं श्राद्ध
11 Sep, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन से ही श्राद्ध पक्ष शुरू हो गया है। पितरों का आशीर्वाद हम पर बना रहे इसलिए उनकी आत्मा की शांति के लिए हर साल श्राद्ध करते हैं। उनके आशीर्वाद से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
इतने होते हैं श्राद्ध
निर्णय सिंधु और भविष्य में पुराण में श्राद्ध के 12 प्रकारों का वर्णन मिलता है। ये हैं नित्य, नैमित्तिक, काम्य, वृद्धि, सपिंडन, पार्वण, गोष्ठी, शुद्धयर्थ, कर्मांग, तीर्थ, यात्रार्थ, पुष्ट्यर्थ।
पितरों के प्रसन्न करने के लिए करें यह श्राद्ध
नित्य श्राद्ध: कोई भी व्यक्ति अन्न, जल, दूध, कुश, फूल व फल से हर रोज श्राद्ध करके हर रोज पितरों को प्रसन्न कर सकता है।
नैमित्तिक श्राद्ध: यह श्राद्ध विशेष अवसर पर किया जाता है। जैसे- पिता आदि की मृत्यु तिथि के दिन इसे एकोदिष्ट कहा जाता है।
काम्य श्राद्ध: इस श्राद्ध को किसी कामना विशेष, सिद्धि की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
वृद्धि श्राद्ध: इस श्राद्ध को सौभाग्य प्राप्ति के लिए किया जाता है। इसमें वृद्धि की कामना के लिए किया जाता है।
सपिंडन श्राद्ध: इस श्राद्ध को मृत व्यक्ति के 12वें दिन पितरों से मिलने के लिए किया जाता है। इसे स्त्रियां भी कर सकती हैं।
पार्वण श्राद्ध: पिता, दादा, परदादा और दादी, परदादी के निमित्त किया जाता है। इसे पर्व की तिथि पर ही किया जाता है।
समूह में किया जाता है यह श्राद्ध
गोष्ठी श्राद्ध: इस श्राद्ध को परिवार के सभी लोग मिलकर करते हैं। यह श्राद्ध हमेशा समूह में किया जाता है।
शुद्धयर्थ श्राद्ध: परिवार की शुद्धता के लिए शुद्धयर्थ श्राद्ध किया जाता है।
कर्मांग श्राद्ध: यह श्राद्ध को किसी संस्कार के अवसर पर ही किया जाता है। कर्मांग का अर्थ कर्म के अंग से होता है।
यात्रा के लिए करते हैं यह श्राद्ध
तीर्थ श्राद्ध: यह श्राद्ध हमेशा तीर्थ पर ही किया जाता है।
यात्रार्थ श्राद्ध: यात्रा की सफलता के लिए यात्रार्थ श्राद्ध किया जाता है।
पुष्ट्यर्थ श्राद्ध: आर्थिक उन्नति में बढ़ोतरी, अच्छे स्वास्थ्य के लिए पुष्टि के निमित्त जो श्राद्ध किए जाते हैं वे पुष्ट्यर्थ श्राद्ध कहलाते हैं।
अमावस्या को किया जाता है इनका श्राद्ध
जिन लोगों की मृत्यु के दिन की सही-सही जानकारी न हो, उनका श्राद्ध अमावस्या तिथि को करना चाहिए। सांप काटने से मृत्यु और बीमारी में या अकाल मृत्यु होने पर भी अमावस्या तिथि को श्राद्ध किया जाता है। जिनकी आग से मृत्यु हुई हो या जिनका अंतिम संस्कार न किया जा सका हो, उनका श्राद्ध भी अमावस्या को करते हैं।
स्नान भी बना सकता धनवान
11 Sep, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्रहों की स्थिति का आपके जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। अगर यह अनुकूल होते हैं तो आपके जीवन में सब कुछ अच्छा चलता है। ग्रहों की दशा बदलने पर व्यक्ति को अमीर से गरीब और राजा से रंक बनने में देर नहीं लगती। आज हम आपको बता रहे हैं औषधि स्नान के माध्यम से 9 ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम करने के उपाय…
सूर्य के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए
इलाइची, केसर एपवं गुलहठी, लाल रंग के फूल मिश्रित जल द्वारा स्नान करने से सूर्य के दुष्प्रभाव कम होते हैं।
चंद्र की पीड़ा के निवारण के लिए
सफेद चंदन, सफेद फूल, सीप, शंख और गुलाब जल मिश्रित पानी से नहाने से आपकी राशि पर चंद्र के दुष्प्रभाव कम होते हैं।
ऐसे दूर कर सकते हैं मंगल की पीड़ा
लाल चंदन, लाल फूल, बेल वृक्ष की छाल, जटामांसी, हींग मिश्रित जल से नहाने से मंगल ग्रह के दुष्परिणों को भी कम किया जा सकता है।
बुध की कृपा ऐसे कर सकते हैं प्राप्त
अगर आप चाहते हैं कि आप पर बुध की कृपा दृष्टि बनी रहे तो आपको अपने स्नान के जल में अक्षत, जायफल, गाय का गोबर मिश्रित करके स्नान करना होगा।
गुरु के दुष्प्रभाव ऐसे करें दूर
सफेद सरसों, दमयंती, गूलर और चमेली के फूल मिलाकर स्नान करने से आप पर गुरु के दुष्प्रभावों का असर बहुत कम होता है।
शुक्र को ऐसे कर सकते हैं प्रसन्न
शुक्र को आपके वैवाहिक जीवन का कारक माना गया है। शुक्र को खुश रखने से आपका वैवाहिक जीवन सदैव खुशहाल रहता है। इसके लिए बस आपको अपने स्नान के जल में जायफल, मैनसिल, केसर, इलाइची और मूली के बीज मिलाकर नहाना होगा। ऐसा करने से शुक्र ग्रह के दुष्प्रभाव दूर हो सकते हैं।
शनि ग्रह के प्रकोप से ऐसे बचें
शनि को न्याय के देवता का सम्मान प्राप्त है। यह व्यक्ति को उसके कर्म के अनुरूप परिणाम देते हैं। अत: हमको अपने कर्म तो दुरुस्त रखने ही चाहिए साथ ही कुछ विशेष चीजों को स्नान के जल में मिलाकर नहाने से आप शनि के दुष्प्रभावों से दूर रह सकते हैं। इन चीजों में सरसों, काले तिल, सौंफ, लोबान, सुरमा, काजल आदि शामिल हैं।
राहु की पीड़ा ऐसे कर सकते है दूर
इसके लिए आप स्नान औषधि के रूप में लोबान, कस्तूरी, गजदंत आदि सामग्री से मिश्रित जल से स्नान करके राहु की पीड़ा को दूर कर सकते हैं।
केतु की पीड़ा ऐसे करें दूर
लाल चंदन और छाग मूत्र मिश्रित जल से स्नान करके आप केतु के दुष्प्रभावों को अपने आप खत्म कर देंगे।
पितरों की नाराजगी से होता है नुकसान
11 Sep, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पितरों के आशीर्वाद से जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं रहती है। घर के बड़े-बुजुर्ग सिर्फ मान-सम्मान चाहते हैं, इनको कभी नहीं भूलना चाहिए। जैसे प्यार पर घर के छोटों का अधिकार होता है वैसे ही पूर्वज सम्मान के अधिकारी होते हैं। खुश होकर ये दिल से अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं लेकिन पितृ जब नाराज हो जाते हैं तो बसा हुआ संसार उजड़ जाता है। पितर उस स्थिति में नाराज होते हैं, जब घर के किसी मांगलिक कार्यक्रम में, किसी शुभ कार्य में उन्हें याद नहीं करते, उनकी अनदेखी करते हैं।
मान-प्रतिष्ठा का अभाव
पितरों की नाराजगी से व्यक्ति को मान-प्रतिष्ठा के अभाव का सामना करना पड़ सकता है। परिवार के सदस्यों को पग-पग पर समस्याओं से जूझना पड़ता है।
धन का अभाव
पितृदोष होने के कारण धन का अभाव रहता है। व्यक्ति को किसी भी तरह की मदद नहीं मिल पाती। जमा धन बर्बाद हो जाता है। फिजूल खर्ची को वह रोक नहीं पाता है। साथ ही लाख कोशिश के बाद भी कर्ज कभी नहीं उतार पाता।
घर-परिवार में अशांति
पितरों के नाराज होने से घर-परिवार में किसी न किसी कारण झगड़ा होता है। परिवार के सदस्यों में मनमुटाव बना रहता है। घर में अशांति का वातावरण बना रहता है। घर के सदस्यों की शादी में कई प्रकार की समस्याएं आती हैं।
संतान की ओर से कष्ट
पितृदोष के कारण संतान की ओर से कष्ट मिलता है। उनके यहां संतान होने में परेशानी आती है। संतान का स्वास्थ्य खराब रहने या संतान का बुरी संगति में फंसने से परेशानी झेलना होती है।
कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाना
पितृदोष जब होता है तो जाने-अनजाने ऐसी गलती कर बैठते हैं, जिसके कारण कोर्ट-कचहरी का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन की वजह से कोई समस्या हो सकती है, जिससे लंबे समय तक मामला उलझा रहता है।
गंभीर प्रकार का रोग होना
पितृदोष के कारण कई गंभीर व असाध्य रोग घर के सदस्यों को हो जाते हैं। पितर दोष का प्रभाव घर की स्त्रियों पर भी रहता है। इन्हें ऐसी बीमारियों का सामना करना पड़ता है, जो जल्दी ठीक नहीं होती। ऐसी धार्मिक मान्यताएं हैं।
भोजन करने संबंधी कुछ जरूरी नियम
11 Sep, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन ध्रर्म में आहार ग्रहण करने के दौरान भी कुछ नियमों का पालन करना जरुरी माना गया है। माना गया है कि जिसप्रकार हम आहार करेंगे वैसे ही हमारे विचार भी होंगे।
सर्वप्रथम : भोजन करने से पूर्व हाथ पैरों व मुख को अच्छी तरह से धोना चाहिये। भोजन से पूर्व अन्नदेवता, अन्नपूर्णा माता की स्तुति करके उनका धन्यवाद देते हुए तथा सभी भूखों को भोजन प्राप्त हो, ईश्वर से ऐसी प्रार्थना करके भोजन करना चाहिए।
वहीं भोजन बनाने वाला स्नान करके ही शुद्ध मन से, मंत्र जप करते हुए ही रसोई में भोजन बनाएं और सबसे पहले 3 रोटियां (गाय, कुत्ते और कौवे हेतु) अलग निकालकर फिर अग्निदेव को भोग लगाकर ही घर वालों को खिलाएं।
भोजन के समय
प्रातः और सायं ही भोजन का विधान है, क्योंकि पाचनक्रिया की जठराग्नि सूर्योदय से 2 घंटे बाद तक एवं सूर्यास्त से 2.30 घंटे पहले तक प्रबल रहती है।
जो व्यक्ति सिर्फ एक समय भोजन करता है वह योगी और जो दो समय करता है वह भोगी कहा गया है
एक प्रसिद्ध लोकोक्ति है सुबह का खाना स्वयं खाओ, दोपहर का खाना दूसरों को दो और रात का भोजन दुश्मन को दो
भोजन की दिशा:
भोजन पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुंह करके ही करना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर किया हुआ भोजन प्रेत को प्राप्त होता है। पश्चिम दिशा की ओर किया हुआ भोजन खाने से रोग की वृद्धि होती है।
ऐसे में न करें भोजन:
शैया पर, हाथ पर रखकर, टूटे-फूटे बर्तनों में भोजन नहीं करना चाहिए।
मल-मूत्र का वेग होने पर, कलह के माहौल में, अधिक शोर में, पीपल, वटवृक्ष के नीचे भोजन नहीं करना चाहिए।
परोसे हुए भोजन की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए।
ईर्ष्या, भय, क्रोध, लोभ, रोग, दीनभाव, द्वेषभाव के साथ किया हुआ भोजन कभी पचता नहीं है।
खड़े-खड़े, जूते पहनकर सिर ढंककर भोजन नहीं करना चाहिए
ये भोजन न करें:
गरिष्ठ भोजन कभी न करें।
बहुत तीखा या बहुत मीठा भोजन न करें।
किसी के द्वारा छोड़ा हुआ भोजन न करें।
आधा खाया हुआ फल, मिठाइयां आदि पुनः नहीं खाना चाहिए।
खाना छोड़कर उठ जाने पर दुबारा भोजन नहीं करना चाहिए।
जो ढिंढोरा पीटकर खिला रहा हो, वहां कभी न खाएं।
पशु या कुत्ते का छुआ, रजस्वला स्त्री का परोसा, श्राद्ध का निकाला, बासी, मुंह से फूंक मारकर ठंडा किया, बाल गिरा हुआ भोजन न करें।
अनादरयुक्त, अवहेलनापूर्ण परोसा गया भोजन कभी न करें।
*कंजूस का, राजा का, वेश्या के हाथ का, शराब बेचने वाले का दिया भोजन और ब्याज का धंधा करने वाले का भोजन कभी नहीं करना चाहिए।
भोजन करते वक्त क्या करें:
भोजन के समय मौन रहें।
रात्रि में भरपेट न खाएं।
बोलना जरूरी हो तो सिर्फ सकारात्मक बातें ही करें।
भोजन करते वक्त किसी भी प्रकार की समस्या पर चर्चा न करें।
भोजन को बहुत चबा-चबाकर खाएं।
गृहस्थ को 32 ग्रास से ज्यादा न खाना चाहिए।
सबसे पहले मीठा, फिर नमकीन, अंत में कड़वा खाना चाहिए।
सबसे पहले रसदार, बीच में गरिष्ठ, अंत में द्रव्य पदार्थ ग्रहण करें।
थोड़ा खाने वाले को आरोग्य, आयु, बल, सुख, सुंदर संतान और सौंदर्य प्राप्त होता है।
भोजन के पश्चात क्या न करें:
भोजन के तुरंत बाद पानी या चाय नहीं पीना चाहिए। भोजन के पश्चात घुड़सवारी, दौड़ना, बैठना, शौच आदि नहीं करना चाहिए।
भोजन के पश्चात क्या करें:
भोजन के पश्चात दिन में टहलना एवं रात में सौ कदम टहलकर बाईं करवट लेटने अथवा वज्रासन में बैठने से भोजन का पाचन अच्छा होता है। भोजन के एक घंटे पश्चात मीठा दूध एवं फल खाने से भोजन का पाचन अच्छा होता है।
क्या-क्या न खाएं:
रात्रि को दही, सत्तू, तिल एवं गरिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए।
दूध के साथ नमक, दही, खट्टे पदार्थ, कटहल का सेवन नहीं करना चाहिए।
शहद व घी का समान मात्रा में सेवन नहीं करना।
दूध-खीर के साथ खिचड़ी नहीं खाना चाहिए।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 11 सितम्बर 2025)
11 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- इष्ट-मित्र सहायक बनें रहेंगे, सुख के साधन बनेंगे किन्तु गुप्त चिन्ता बनी रहेगी।
वृष राशि :- अतिभावुकता से हानि, दूर की योजना तथा व्यवसायिक यात्रा सतर्कता से करें।
मिथुन राशि :- आर्थिक योजना सफल होगी, मित्र-सहायक होंगे तथा रुके कार्य बन जायेंगे ध्यान दें।
कर्क राशि :- योजनायें फलीभूत होंगी, तनाव से बचें, बनते कार्य में अवरोध होगा।
सिंह राशि :- चिन्तायें कम होंगी, धन का लाभ होगा, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, रुके कार्य बनेंगे।
कन्या राशि :- कार्ययोजना में बाधा से मन-उद्विघ्न रहेगा तथा विभ्रम होने से बचें ध्यान रखें।
तुला राशि :- किसी से धोखा व विवाद होने की संभावना, समय का ध्यान आप अवश्य रखें।
वृश्चिक राशि :- कार्यगति में बाधा होते हुये भी सफलता मिलेगी, धैर्य से कार्य करें, ध्यान रखें।
धनु राशि :- अधिकारी वर्ग से तनाव, मित्र की उपेक्षा से तनाव, अशांति तथा कार्यबाधा होगी।
मकर राशि :- स्त्री-वर्ग से हर्ष, एश्वर्य की प्राप्ति, व्यावसायिक क्षमता अनुकूल बनी रहेगी।
कुंभ राशि :- कार्य-विफलत्व, प्रयत्न करने पर भी सफलता दिखायी न दे, कार्य अवरोध होगा।
मीन राशि :- तनाव कुछ कम होगा, उद्विघ्नता बनी रहेगी, सतर्कता से रुके कार्य बना लें।
चांदी की मछली: धन, भाग्य और खुशहाली का आसान उपाय जो बदल सकता है आपकी आर्थिक किस्मत
10 Sep, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दोस्तों, अक्सर हम सबकी जिंदगी में ऐसे समय आते हैं जब मेहनत के बावजूद पैसा टिकता नहीं या व्यवसाय में ग्राहक तो आते हैं लेकिन खरीददारी नहीं करते. कई बार घर-परिवार में आर्थिक दिक्कतें लगातार बनी रहती हैं और समझ ही नहीं आता कि इसका उपाय क्या किया जाए. ऐसे में कुछ खास ज्योतिषीय और वास्तु उपाय बहुत मददगार साबित होते हैं. इन्हीं में से एक है चांदी की मछली का उपाय. माना जाता है कि यह न सिर्फ धन आकर्षित करती है बल्कि घर में खुशहाली और शुभ समाचार भी लाती है, अगर आपकी जिंदगी में पैसों की दिक्कतें हैं, तरक्की रुक-सी गई है या व्यवसाय में मनचाहा फल नहीं मिल रहा, तो यह उपाय आपके लिए बेहद उपयोगी हो सकता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
चांदी की मछली क्यों मानी जाती है शुभ?
ज्योतिष के अनुसार मछली का संबंध शनि ग्रह से जोड़ा जाता है. वहीं चांदी की धातु का संबंध चंद्रमा और शुक्र ग्रह से है. चंद्रमा शांति और मानसिक संतुलन का प्रतीक है जबकि शुक्र वैभव और धन का कारक माना जाता है. इस तरह शनि, चंद्रमा और शुक्र का मेल व्यक्ति के जीवन में तरक्की, लग्जरी और धन का मार्ग खोलता है. यही कारण है कि चांदी की मछली बेहद शुभ मानी जाती है.
इसके अलावा धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था, इसलिए मछली को भगवान नारायण का प्रतीक भी माना जाता है. इस कारण इसे घर या दुकान में रखना शुभता और समृद्धि का प्रतीक है.
घर और व्यवसाय में रखने का तरीका
1. चांदी की मछली को घर की ईशान दिशा (नॉर्थ ईस्ट कॉर्नर) में रखना सबसे अच्छा माना जाता है.
2. मछली का मुख हमेशा घर के अंदर की ओर होना चाहिए.
3. व्यवसाय स्थल जैसे दुकान या ऑफिस में भी इसे ईशान दिशा में रखें.
4. जब भी आप सुबह दुकान खोलें या ऑफिस जाएं, तो सबसे पहले चांदी की मछली का दर्शन करें. इससे ग्राहकों की संख्या बढ़ती है और कारोबार तेजी से बढ़ने लगता है.
छोटी चांदी की मछली का कमाल
बड़ी मछली के साथ-साथ छोटी-छोटी चांदी की मछलियां भी खास असर डालती हैं.
1. इन छोटी मछलियों को जोड़े में पर्स में रखने से धन आकर्षित होता है.
2. वास्तु और फेंगशुई दोनों में इसे शुभ माना गया है.
3. इससे न केवल आर्थिक स्थिति सुधरती है बल्कि अच्छी खबरें भी मिलना शुरू हो जाती हैं.
खास ज्योतिषीय उपाय
अगर आपकी कुंडली में चंद्रमा और शनि का मेल है या शनि की दृष्टि चंद्रमा पर है, जिससे मानसिक तनाव, उदासी या आर्थिक रुकावट आती है, तो चांदी की मछली से इसका समाधान किया जा सकता है.
1. इसके लिए छोटी चांदी की मछलियों पर काजल लगाएं और शनिवार के दिन बहते पानी में प्रवाहित कर दें.
2. अगर बहता पानी उपलब्ध न हो, तो मंदिर में दान भी कर सकते हैं.
3. कितनी मछलियां प्रवाहित करनी हैं यह आपकी कुंडली के घर के हिसाब से तय किया जाता है. जैसे, यदि यह योग दूसरे घर में हो तो दो मछलियां, चौथे घर में हो तो चार मछलियां प्रवाहित करनी होंगी.
पितृ पक्ष में अपनाते हैं ये उपाय.. तो संतान की होगी प्राप्ति, घर में आएगी खुशहाली, पितृ दोष से मिलेगा छुटकारा
10 Sep, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साल में 15 दिन ऐसे होते हैं जो पितृ को समर्पित रहते हैं. जिसे पितृ पक्ष क्या श्राद्ध पक्ष भी कहते हैं. इस पक्ष में पितरों की पूजा आराधना की जाती है. इससे पितृ बेहद प्रसन्न होते हैं इसके साथ ही पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है और माना जाता है जब पितृ प्रसन्न हो जाते हैं तो घर में सुख समृद्धि की वृद्धि होती है और कई प्रकार की समस्याओं का समापन हो जाता है. वहीं कुछ ऐसे उपाय भी बताए गए हैं जिनको अपनाकर भी आप पितृ को प्रसन्न कर सकते हैं. तो कि पितृपक्ष में क्या कुछ खास उपाय करना चाहिए जिससे पितृ प्रसन्न हो जाए.
कहा कि 8 सितंबर अश्विन माह की प्रतिपदा तिथि से पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है और 21 सितंबर तक यह पितृपक्ष चलने वाला है. पितृ पक्ष के दौरान अपने मृत पूर्वज की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध इत्यादि अवश्य करनी चाहिए. इससे न कि सिर्फ पितृ प्रसन्न होते हैं बल्कि आपके घर में पितृ की कृपा से हमेशा खुशहाली बनी रहती है और आने वाली पीढ़ियों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इसके साथ ही पितृदोष से छुटकारा मिलेगा. संतान इच्छुक दंपति को संतान सुख की भी प्राप्ति होगी.
इन उपाय से भी पितृ होते हैं प्रसन्न
गाय को खिलाएं चारा: ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि पूरे पितृपक्ष में अगर गाय को चारा खिलाते हैं या गए सेवा करते हैं तो इससे पितृ बेहद प्रसन्न होंगे और आपकी कुंडली में अगर पितृ दोष भी है तो वह समाप्त हो जाएगा.
दूध और काला तिल करें अर्पण: जिस तिथि में आपके पितृ की मृत्यु हुई है उस तिथि में किसी नदी किनारे स्नान कर पितृ के नाम से दूध और काला तिल से तर्पण, पिंडदान इत्यादि करते हैं तो पितृ बेहद प्रसन्न हो जाएंगे और पितृ दोष से भी छुटकारा मिल जाएगा.
दक्षिण दिशा में जलाएं दीपक: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दक्षिण की दिशा पितरों के लिए शुभ होती है. इसलिए पूरे पितृपक्ष में अगर घर के दक्षिण दिशा में पितृ के नाम से हर रोज संध्या के समय तिल के तेल का दीपक जलाते हैं तो पितृ बेहद प्रसन्न हो जाएंगे और घर में सुख समृद्धि की वृद्धि होगी. साथ ही पितृ दोष से भी छुटकारा मिल जाएगा.
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