महाराष्ट्र
IPS अंजना कृष्णा की काबिलियत और पुरुषार्थ को लोग सोशल मीडिया पर सराह रहे—‘भ्रेल नेता का सामना करते हुए कानून को आगे रखा’ संदेश
5 Sep, 2025 01:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र के सोलापुर एक ऐसा वाकया सामने आया है। जिसने राजनीतिक हलकों में तहलका मचा दिया है। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार को फोन पर एक लेडी आईपीएस ने पहचानने से मना कर दिया था। फिर क्या था पांचवीं बार राज्य के डिप्टी सीएम बने अजित पवार भड़क गए हैं। उन्हें वीडियो कॉल किया और अधिकारी से कहा कि तुम पर कार्रवाई करूंगा, इतनी हिम्मत है तुम्हारी? मेरा चेहरा तो पहचानोगी ना। दरअसल यह वाकया उस वक्त पर हुआ जब सोलापुर में डीएसपी की तौर पर तैनात अंजना कृष्णा अवैध उत्खनन को रोकने के लिए पहुंची थीं। एनसीपी कार्यकर्ता ने अजित पवार को फोन लगा दिया। फिर कार्यकर्ता ने वह फोन अंजना कृष्णा को दिया।
डिप्टी सीएम बनाम आईपीएस
अंजना कृष्णा शिकायत मिलने पर माढा तालुका के कुर्डू गांव में सड़क निर्माण के लिए अवैध मुरुम उत्खनन की शिकायत पर पहुंची थीं। डीएसपी अंजना कृष्णा मौके पर गांव वालों बहस छिड़ गई।इसी दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता बाबा जगताप ने सीधे उप मुख्यमंत्री अजित पवार को फोन लगाया और वह कॉल डीएसपी अंजना कृष्णा को थमा दिया। फोन पर अजित पवार ने खुद को 'डीसीएम अजित पवार' बताते हुए कार्रवाई रोकने का आदेश दिया, लेकिन अधिकारी ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया और कहा कि वह सीधे उनके फोन पर कॉल करें।
अजित पवार को आया गुस्सा
इस पर अजित पवार नाराज हो गए और बोले कि तुम पर कार्रवाई करूंगा, इतनी हिम्मत है तुम्हारी? मेरा चेहरा तो पहचानोगी ना! इसके बाद अजित पवार ने सीधा वीडियो कॉल किया। वीडियो कॉल के दौरान अजित पवार ने अधिकारी को कार्रवाई रोकने और तहसीलदार से बात करने का निर्देश दिया। यह पूरा मामला करीब 3.00 घंटे तक चला और अब दोनों के बीच की बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ग्रामस्थों का कहना था कि उत्खनन ग्राम पंचायत की अनुमति से हो रहा था, लेकिन कोई आधिकारिक दस्तावेज पेश नहीं किया जा सका। ऐसे में महिला आईपीएस अधिकारी ने कार्रवाई शुरू कर दी थी। सोलापुर जिले के एसपी अतुल कुलकर्णी हैं। इस मामले में दोनों तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
कौन हैं अंजना कृष्णा?
महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में तैनात आईपीएस अंजना कृष्णा अभी डीएसपी करमाला हैं। अंजना कृष्णा 2023 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। वह केरल के तिरुवंनतपुरम की रहने वाली हैं। उनके पिता वहां पर एक छोटी सी कपड़े की दुकान चलाते हैं, जब उनकी मां कोर्ट में टाइपिस्ट की नौकरी करती हैं। उन्होंने सेंट मैरीज सेंट्रल स्कूल, पूजाप्पुरा से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और एचएचएमएसपीबी एनएसएस कॉलेज फॉर विमेन, नीरामंकरा से बीएससी गणित में स्नातक किया। यूपीएससी सिविल सेवा 2022 में AIR-355 रैंक हासिल की थी। अंजना अपनी ईमानदारी, दृढ़ संकल्प और कुशाग्र प्रशासनिक कौशल के लिए जानी जाती हैं।
मुंबई में लालबागचा राजा के दर्शन के दौरान अमित शाह का पारिवारिक अंदाज़, पोते को गोद में लेकर मुस्कराते दिखे
30 Aug, 2025 06:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का मुंबई दौरे में एक अलग अंदाज सामने आया है। गृह मंत्री शाह पत्नी सोनल और नातिनों के साथ जय शाह के बेटे को गोदी में लेकर पहुंचे। इस मौके पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी मौजूद रहे। इससे पहले अमित शाह ने अहमदाबाद में जगन्नाथ मंदिर में गौ आरती के दौरान पोते को अपनी गोद में लिया था। शाह ने पहले पाेते को लेकर लालबागचा राजा के दर्शन को पहुंचे। उन्होंने पोते को एक बार फिर से गोद में लिया। इस मौके पर पूरा शाह परिवार मौजूद रहा। लालबागचा राजा पंडाल मुंबई के परेल में है। गणेशोत्सव में दौरान तमाम बड़ी हस्तियां यहां पर पहुंचती हैं।
जय शाह हैं आईसीसी के चेयरमैन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह आईसीसी के चेयरमैन हैं। लालबाग के राजा के दर्शन के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने परिवार के साथ तस्वीर भी खिंचवाई। शाह शुक्रवार को मुंबई के दौरे पर पहुंचे थे। यह तीसरा मौका है जब सार्वजनिक तौर पर शाह ने अपने पोते के साथ दिखे हैं। प्रयागराज महाकुंभ में उन्होंने संतों से अपने परिवार के नन्हें वारिस को उनका आशीर्वाद दिलाया था। इसके बाद जगन्नाथ मंदिर में आरती के बाद पोते हो दुलार दिया था। अमित शाह ने बेटे को गोद में लेकर ही फोटो खिंचवाई तो वहीं जह शाह की पत्नी छोटी बेटी को गाेद में लिए रहीं। शाह इससे पहले जब गांधीनगर के दौरे पर पहुंचे हैं तो उनके साथ दोनों नातिनें कई मौकों पर मौजूद रही हैं।
ऑनलाइन करें लालबागचा राजा के दर्शन
लालबागचा राजा के दर्शन के तीन तरह के टिकट हैं। जनरल टिकट 50 रुपये, वीआईपी दर्शन का टिकट 200 और स्पेशल दर्शन का टिकट 500 रुपये है। जो लोग यहां नहीं पहुंच सकते हैं उनके लिए लाइव दर्शन की व्यवस्था की गई है। परेल में गणेश पंडाल को सबसे पहले 1934 में स्थापित किया गया था। ऐसे में इस आयोजन को 92 साल हो चुके हैं, हालांकि इस सफर में गजानन के रूप बदलते रहे हैं। जब पहली बार 1934 में गणपति लालबागचा राजा के तौर पर भक्तों के बीच आए थे तब वह कमल के फूल पर खड़े थे। 1984 में बप्पा ने महात्मा गांधी के स्वरूप में आकर पूज्य बापू के योगदान और समर्पण की याद दिलाई थी।
साधारण किसान परिवार से आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व तक… मनोज जरांगे की जिद ने क्यों बना दिया उन्हें मराठा समाज का नेता?
30 Aug, 2025 05:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई\छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने 30 अगस्त को फिर से आमरण अनशन शुरू कर दिया है। जरांगे एक साधारण किसान परिवार से हैं। उन्होंने होटल और चीनी कारखाने में भी काम किया है। 2023 के बाद से यह उनका सातवां अनशन है। मराठा समुदाय के लोग आरक्षण के लिए इसे अंतिम लड़ाई मान रहे हैं। जरांगे की मांग है कि मराठों को ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण मिले। उनकी इस लड़ाई ने सरकार और राजनीतिक दलों को उनकी मांगों पर ध्यान देने के लिए मजबूर कर दिया है।
सातवीं बार अनशन पर बैठे जरांगे
मनोज जरांगे ने शुक्रवार को जब फिर से आमरण अनशन शुरू किया तो बड़ी संख्या में मराठा समुदाय के लोग उनके प्रति एकजुटता दिखाने के लिए दक्षिण मुंबई स्थित आंदोलन स्थल आजाद मैदान में जमा हुए। वर्ष 2023 के बाद से यह जरांगे का सातवां अनशन है और इसे आरक्षण पाने के लिए समुदाय की अंतिम लड़ाई बताया जा रहा है। जरांगे की मराठा हितों के लिए लड़ाई के कारण पहले भी सरकार और सत्तारूढ़ दलों को उनकी मांगों पर ध्यान देने और टकराव से बचने के लिए अपने प्रतिनिधि भेजने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
कुछ समय तक कांग्रेस कार्यकर्ता रहे जरांगे
हमेशा सफेद कपड़ों और केसरिया पटका पहने नजर आने वाले इस दुबले-पतले कार्यकर्ता की आक्रामक मुद्रा और राजनीतिक दिग्गजों को चुनौती देने की प्रवृत्ति ने पार्टियों को सतर्क कर दिया है। जरांगे के परिचित बताते हैं कि सक्रिय राजनीति छोड़ने और किसानों एवं मराठों के लिए आंदोलन शुरू करने से पहले वह कुछ समय तक कांग्रेस कार्यकर्ता रहे थे। राज्य में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली मराठा समुदाय के सदस्यों की संख्या लगभग 30 प्रतिशत है।
कौन हैं मनोज जरांगे ?
दो साल पहले तक मनोज जरांगे कोई जाना-पहचाना नाम नहीं थे। 29 अगस्त, 2023 को जब उन्होंने जालना जिले के अपने अंतरवाली सरती गांव में मराठों के लिए आरक्षण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, तो उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि, एक सितंबर को हिंसा भड़कने के तीन दिन बाद ही सब कुछ बदल गया। जब स्थानीय अधिकारियों ने जरांगे को जबरन अस्पताल में भर्ती कराने की कोशिश की थी।
शिंदे सरकार के सामने जब आई मुश्किल
इसके बाद की घटनाओं ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। विपक्ष ने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा था और जरांगे के समर्थकों और मराठा आरक्षण समर्थक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के लिए उनका इस्तीफा मांगा था। उस समय गृह विभाग फडणवीस के पास ही था।
जरांगे को मिली नई पहचान
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। क्योंकि उन्होंने अधिकारियों को जरांगे को अस्पताल ले जाने से रोक दिया था। हिंसा में 40 पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हो गए थे और राज्य परिवहन की 15 से अधिक बसों में आग लगा दी गई थी। आंदोलन और उसके बाद की पुलिस कार्रवाई ने जरांगे को एक नई पहचान दिला दी थी और शिवसेना-बीजेपी-एनसीपी सरकार को एक बार फिर शिक्षा व नौकरियों में मराठों के लिए आरक्षण की बात करने को मजबूर होना पड़ा था। यह एक भावनात्मक मुद्दा था, जो अब कानूनी उलझन में फंस गया है।
कहां के रहने वाले हैं मनोज जरांगे?
मटोरी के पत्रकार राजेंद्र काले ने बताया था कि जरांगे मध्य महाराष्ट्र के बीड जिले के एक छोटे से गांव मटोरी के रहने वाले हैं। जरांगे ने अपनी स्कूली शिक्षा वहीं पूरी की थी। शुरुआती कुछ साल गांव में बिताने के बाद वह जालना जिले की अंबाड़ तहसील के शाहगढ़ चले गए, जहां उन्होंने एक होटल में काम किया। उन्होंने बताया था कि बाद में जरांगे को अंबाड़ में एक चीनी कारखाने में नौकरी मिल गई, जहां से वह राजनीति में आए। उन्होंने बताया कि जरांगे की पत्नी और बच्चे शाहगढ़ में रहते हैं। काले ने कहा कि जरांगे ने मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को सरकार से मुआवजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रहे जरांगे
मराठा क्रांति मोर्चा (एमकेएम) के समन्वयक प्रोफेसर चंद्रकांत भरत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के लिए काम करते हुए वह वर्ष 2000 के आसपास युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष बने। हालांकि, कुछ राजनीतिक मुद्दों पर वैचारिक मतभेदों के कारण, उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और मराठा समुदाय के संगठन के लिए काम करना शुरू कर दिया। एमकेएम मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे संगठनों में से एक है।
'शिवबा संगठन' बनाया
भरत ने बताया कि 2011 के आसपास, जरांगे ने 'शिवबा संगठन' नाम से एक संगठन बनाया। जरांगे का आंदोलन केवल मराठा आरक्षण के मुद्दे तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने किसानों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। भरत ने बताया कि 2013 में, जरांगे ने जालना के किसानों के लिए जयकवाड़ी बांध से पानी छोड़ने की मांग को लेकर एक आंदोलन शुरू किया था। एमकेएम पदाधिकारी ने बताया कि जरांगे 2016 में पूरे राज्य में आयोजित मराठा आरक्षण समर्थक मार्च में सक्रिय रूप से शामिल हुए थे और मध्य महाराष्ट्र के मराठवाड़ा से समुदाय के सदस्यों को देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखने के लिए मुंबई ले गए थे।'
जरांगे का आंदोलन लगभग 90 दिन तक चला
भरत ने बताया कि जालना जिले के साष्टी पिंपलगांव में जरांगे का आंदोलन लगभग 90 दिन तक चला था। मनोज जरांगे के एक रिश्तेदार अनिल महाराज जरांगे ने बताया कि कार्यकर्ता ने 2005 के आसपास मटोरी गांव छोड़ दिया था। उनके पिता रावसाहेब और मां प्रभाबाई अब भी मटोरी में रहते हैं। उन्होंने बताया कि जरांगे के बड़े भाई जगन्नाथ और काकासाहेब भी वहीं रहते हैं और खेती करते हैं। रिश्तेदार ने कहा कि मनोज जरांगे ने शाहगढ़ के पास कुछ जमीन खरीदी थी, लेकिन उनके परिवार की आय हमेशा औसत रही।
10 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग कर रहे जरांगे
उन्होंने दूसरे लोगों को भी समुदाय के लिए काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। जरांगे मराठों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि सभी मराठों को ओबीसी के तहत आने वाली कृषि प्रधान जाति कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए ताकि समुदाय के लोगों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण मिल सके।
महाराष्ट्र मर्डर केस: सोशल मीडिया पर ‘शोक संदेश’ डालने वाला पति निकला हत्यारा, पत्नी पर चाकू से किया ताबड़तोड़ हमला
30 Aug, 2025 05:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र के परभणी जिले के सोनापुर टांडा गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई। 35 साल के विजय राठौड़ को अपनी पत्नी की बेरहमी से हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, विजय को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था। उसने हत्या करने से पहले ही व्हाट्सएप स्टेटस पर पत्नी की फोटो के साथ शोक संदेश पोस्ट कर दिया था। इससे पता चलता है कि हत्या की योजना पहले से ही बनाई गई थी। गुरुवार दोपहर करीब 3.30 बजे विजय ने अपनी पत्नी विद्या पर धारदार हथियार से हमला किया। उसने विद्या के सीने, पेट और पीठ पर 10 से 12 वार किए। विद्या को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पति-पत्नी के बीच अक्सर होता था झगड़ा
पुलिस ने बताया कि पति-पत्नी के बीच अक्सर झगड़ा होता था। क्योंकि उस व्यक्ति को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था। चार-पांच दिन पहले ऐसे ही एक झगड़े के बाद विद्या अपने माता-पिता के घर चली गई। गुरुवार को जब वह अपने पिता के खेत पर थी। विजय वहां पहुंचा और उससे भिड़ गया। इसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस हुई। फिर उसने एक धारदार हथियार निकाला और उस पर वार कर दिया।
पुलिस ने दर्ज किया केस
विद्या के पिता दिगंबर जाधव की शिकायत के आधार पर जिंतूर पुलिस ने रात करीब 11 बजे राठौड़, उसकी मां और उसके छोटे भाई के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) (हत्या), 85 (पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता) और 3(5) (साझा इरादा) के तहत केस दर्ज किया। पुलिस ने बताया कि विद्या की सास और देवर पर उसके पिता से पैसे न लाने पर उसे परेशान करने का आरोप है।
पुलिस ने क्या बताया?
जिंतूर इंस्पेक्टर गजेंद्र सरोदे ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि दंपती का एक 12 साल का बेटा और एक छोटी बेटी है। शुरुआती जांच से पता चला है कि 13-14 साल की शादी के बावजूद पति अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता था, और इसी वजह से अक्सर तीखी बहस होती थी। पुलिस ने बताया कि विजय पहले मुंबई में ट्रक चालक के रूप में काम करता था, लेकिन करीब सात महीने पहले उसने नौकरी छोड़ दी और जिंतूर तहसील में अपने पैतृक गांव वाधी लौट आया।
मुंबई मेगा ब्लॉक 2025: गणेशोत्सव सीजन में यात्रियों को बड़ा झटका, कई लोकल ट्रेनें रद्द—रेलवे ने दिया अपडेट
30 Aug, 2025 05:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: मुंबईकरों के लिए एक जरूरी खबर है। रविवार को लालबागचा राजा, चिंचपोकळीचा चिंतामणि और मुंबईचा राजा गणेशगल्ली जैसे प्रसिद्ध गणेश मंडलों में दर्शन करने की योजना बना रहे हैं, तो आपको अपनी योजना बदलनी पड़ सकती है। मध्य रेलवे (Central Railway) ने रविवार को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) से विद्याविहार के बीच धीमी लाइन पर ब्लॉक घोषित किया है। इससे श्रद्धालुओं में नाराजगी है। धीमी लाइन पर ब्लॉक के कारण लोकल ट्रेनें चिंचपोकली और करी रोड स्टेशनों पर नहीं रुकेंगी। दरअसल पश्चिम रेलवे ने त्योहार के कारण रात्रि ब्लॉक की घोषणा की है। इस कारण रविवार को दिन में कोई ब्लॉक नहीं होगा।
संडे को पांच दिवसीय गणपति का होगा विसर्जन
कल रविवार को पांच दिवसीय गणेश उत्सव का विसर्जन है। लोग त्योहार के दौरान रविवार को सार्वजनिक गणेशोत्सव में जाना पसंद करते हैं। गणेश भक्तों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ेगी। क्योंकि त्योहार के दौरान बढ़ती भीड़ के बीच लोकल ट्रेनें रद्द रहेंगी। सीएसएमटी से विद्याविहार धीमी अप और डाउन लाइन पर रविवार को सुबह 10.55 बजे से 3.55 बजे के बीच ब्लॉक घोषित किया गया है। हार्बर लाइन पर कुर्ला और वाशी के बीच अप और डाउन रूट पर सुबह 11:10 बजे से सुबह 4:10 बजे तक ब्लॉक लिया जाएगा। चूंकि पश्चिम रेलवे ने शनिवार मध्यरात्रि के बाद दोपहर 12:30 बजे से रविवार सुबह 4 बजे तक ब्लॉक घोषित किया है, इसलिए रविवार को पश्चिम रेलवे पर कोई ब्लॉक नहीं होगा।
मध्य रेलवे
स्टेशन - सीएसएमटी से विद्याविहार
मार्ग - अप और डाउन
समय - सुबह 10:55 बजे से दोपहर 3:55 बजे तक
हार्बर रेलवे
स्टेशन - कुर्ला से वाशी
मार्ग - अप और डाउन
समय - सुबह 11:10 बजे से सुबह 4:10 बजे तक
पश्चिम रेलवे
स्टेशन - मुंबई सेंट्रल
मार्ग - सभी लाइनें
समय - शनिवार मध्यरात्रि 12:30 बजे से रविवार सुबह 4 बजे तक।
बदलापुर-कर्जत रेल सेवा में देरी
शुक्रवार सुबह अंबरनाथ और बदलापुर रेलवे स्टेशनों के बीच एक मालगाड़ी के इंजन में अचानक तकनीकी खराबी आने के कारण बदलापुर और कर्जत के बीच रेल सेवा लगभग एक घंटे की देरी से चली। इस देरी के कारण सुबह काम पर जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। शुक्रवार सुबह 5.52 बजे अंबरनाथ और बदलापुर रेलवे स्टेशनों के बीच एक मालगाड़ी के इंजन में अचानक तकनीकी खराबी आ गई। इसके कारण इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। इसके बाद भिवपुरी से दूसरा इंजन मंगवाया गया और मालगाड़ी को कर्जत की ओर रवाना किया गया।
बड़े धार्मिक विवाद पर मुस्लिम विद्वान की राय—मुफ्ती वजाहत कासमी ने कहा, बातचीत से ही बनें हल्के हालात
30 Aug, 2025 05:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: इस्लामिक विद्वान मुफ्ती वजाहत कासमी ने मथुरा-काशी विवाद पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान आंदोलन से नहीं होता। बल्कि बातचीत से भी हल निकाला जा सकता है। उन्होंने राम मंदिर निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया था। मुफ्ती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बारे में भी बात की और कहा कि यह संगठन देश के विकास के लिए काम कर रहा है।
मथुरा और काशी के मुद्दों को बातचीत से सुलझाएं
मुफ्ती वजाहत कासमी ने एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा कि मथुरा और काशी के मुद्दों को बातचीत से सुलझाना चाहिए। अगर हमारे सभी विद्वान लोग एक साथ बैठकर वार्ता करेंगे, तो भी निश्चित तौर पर हम इस समस्या का समाधान निकाल पाएंगे। हमारे लिए स्थिति सामान्य हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस देश में इससे पहले धर्म से संबंधित कई मुद्दे रहे। हम सभी लोगों ने राम मंदिर के प्रकरण में देखा था कि क्या हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का आदेश दिया, तो हमारे मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी इसका स्वागत किया और हमें इस बात की खुशी है कि अब राम मंदिर बनकर तैयार हो चुका है। हमारे हिंदू भाई वहां पर पूजा अर्चना करते हैं।
हर बार आंदोलन का सहारा ठीक नहीं
मुफ्ती ने कहा कि मैं एक बार फिर से इस बात को दोहराता हूं कि मथुरा काशी जैसे मुद्दों के समाधान के लिए हमें आंदोलन की जगह वार्ता का सहारा लेना चाहिए। वैसे भी भारत जैसे शांतिप्रिय देश में ऐसे मुद्दों का समाधान के लिए हर बार आंदोलन का सहारा लिया जाए, यह ठीक नहीं है। हमें इससे बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ एक विशाल संगठन है, जिसकी हम अपनी एक निश्चित विचारधारा है। यह संगठन कौम के लिए काम करता है। कौम को इसे आप एक विशेष समुदाय के लोगों से बिल्कुल भी जोड़िए, क्योंकि इसका किसी विशेष समुदाय के लोगों से कोई लेना-देना नहीं है।
हम हिंदुस्तानी, इसे किसी धर्म से जोड़ना गलत
उन्होंने कहा कि हम लोग हिंदुस्तान में रहते हैं, तो ऐसे में हम सभी लोगों को हिंदुस्तानी कहा जाता है। ऐसी स्थिति में इसे किसी धर्म से जोड़ना किसी भी मायने में उचित नहीं है। इसे हमें उन सभी विचारधाराओं का परित्याग करना चाहिए ,जो हमें विभाजित करने की कोशिश करती हैं। हम सभी लोग हिंदुस्तान में रहते हैं। हम हिंदुस्तानी कौम के लोग हैं। इस बात से किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ ने इस देश के विकास की दिशा में कई कदम उठाए हैं। आज पूरी दुनिया में हिंदुस्तानियों को एक नई पहचान मिली है। इसके लिए हमें संघ की तारीफ करनी चाहिए।
लोकल लीडर की जगह आउटसाइडर का पोस्टर! एकनाथ शिंदे के बैनरों ने बढ़ाया राजनीतिक सस्पेंस
30 Aug, 2025 04:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर की सड़कों पर इन दिनों हर जगह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के होर्डिंग्स नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां सीएम उमर अब्दुल्ल और महबूबा मुफ्ती के होर्डिंग मुश्किल से दिखते हैं, वहीं शिंदे के होर्डिंग्स हर जगह नजर आने से हर कोई हैरान है। एयरपोर्ट रोड, एमए रोड, फुटपाथ, फ्लाईओवर और यहां तक कि गुपकार रोड स्थित सीएमओ ऑफिस के बाहर भी शिंदे के बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं। शिंदे के होर्डिंग श्रीनगर में क्यों लगाए गए हैं, इसे लेकर कई तरह की बातें हो रही हैं। लेकिन ये होर्डिंग किसने और क्यों लगाए हैं इसके बार में हम आपको बताने जा रहे हैं।
श्रीनगर में 100 से अधिक होर्डिंग्स लगाए
शिवसेना (शिंदे गुट) के उपाध्यक्ष उमर याक़ूब ने बताया कि इस महीने श्रीनगर में 100 से अधिक होर्डिंग्स लगाए गए हैं। कुछ सामान्य पार्टी प्रचार के लिए हैं, जबकि कुछ 'देश के लिए रक्तदान' कार्यक्रम को प्रमोट करने के लिए। इन पोस्टरों पर बाईं ओर बाल ठाकरे, जबकि दाईं ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृहमंत्री अमित शाह की। बीच में एकनाथ शिंदे की पूरी तस्वीर लगाई गई है। याक़ूब ने बताया कि सांगली जिले के 1,000 पहलवानों ने कश्मीर में सैनिकों के लिए रक्तदान किया। इसके बाद एयरपोर्ट रोड स्थित एक होटल में करीब 700 लोगों की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता खुद शिंदे ने की। याक़ूब ने कहा कि हमने ज्यादा से ज्यादा होर्डिंग्स इसलिए लगाए ताकि लोग जान सकें कि हम कश्मीर में आए हैं।
शिंदे अगले महीने करेंगे कश्मीर का दौरा
बता दें कि कुलगाम निवासी 30 वर्षीय उमर याक़ूब पहले पीडीपी से जुड़े थे, लेकिन 2002 में पार्टी छोड़कर शिवसेना में शामिल हो गए। उन्होंने दावा किया कि शिंदे की बार-बार की यात्राओं से कश्मीर में शिवसेना को लेकर गलतफहमियां दूर हो रही हैं और लोग पार्टी को सकारात्मक रूप में देख रहे हैं। गौरतलब है कि जून 2023 में मुख्यमंत्री रहते हुए शिंदे ने श्रीनगर में 15 राज्यों के शिवसेना प्रभारियों की बैठक बुलाई थी। यह महाराष्ट्र से बाहर पहली ऐसी बैठक थी। नवंबर 2023 में शिंदे ने कुपवाड़ा (एलओसी क्षेत्र) में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण भी किया था। वहीं शिवसेना कश्मीर अध्यक्ष मोहम्मद शफी ने बताया कि शिंदे अगले महीने फिर कश्मीर का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि अदिल शाह के परिवार का मकान लगभग बनकर तैयार है। शिंदे-जी इसे देखना चाहेंगे। आदिल शाह पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए थे।
अमित शाह को मिला भरोसेमंद योद्धा, 101 नक्सलियों को खत्म कर C-60 कमांडो ने महाराष्ट्र-मध्यभारत के जंगलों में रचा इतिहास
29 Aug, 2025 04:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नागपुर: अबूझमाड़ के घने जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन आसान नहीं है। जब इन जंगलों में सुरक्षा बल ऑपरेशन चलाते हैं तो उन्हें यह अंदाजा नहीं होता कि गोली किधर से आएगी? जिस जमीन पर वह चल रहे हैं, उसके नीचे लैंडमाइन तो नहीं है। गढ़चिरौली पुलिस के C-60 कमांडर वासुदेव मडावी ने ऐसे हालात से लड़कर पिछले 26 साल में 101 नक्सलियों को मार गिराया है। हालांकि अभी भी उन्हें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का खिताब नहीं मिला है। मडावी के बारे में कहा जाता है कि वह मिट्टी सूंघकर हालात का अंदाजा लगा लेते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी सी-60 कमांडो वासुदेव मडावी की उपलब्धि पर गर्व होगा। शाह ने 2026 तक लाल आतंक को खत्म करने का लक्ष्य रखा है।
26 साल में कई ऑपरेशन
48 साल के वासुदेव मडावी अपने 26 साल के करियर में कई ऑपरेशन में शामिल रहे। घने जंगलों में भूखे रहकर मिशन पूरा किया। उनकी बहादुरी और स्ट्रैटजी के कायल पूरा पुलिस विभाग हो गया। डिपार्टमेंट ने 1998 में कॉन्टेबल के तौर पर भर्ती हुए साहसी कॉन्स्टेबल को लगातार प्रमोशन दिया। वह अभी सब-इंस्पेक्टर पद पर तैनात हैं। उन्हें बहादुरी के लिए कई मेडल मिले हैं। गढ़चिरौली के एसपी नीलोत्पल ने बताया कि वासुदेव मडावी ने गढ़चिरौली के जंगलों में माओवादियों के खिलाफ लड़ाई में बड़ा अहम रोल निभाया है। वह ऑपरेशन के दौरान स्ट्रैटजी बनाने और उसे लागू करने में माहिर हैं। जरूरत पड़ने पर अपनी स्ट्रैटजी बदलते हैं, जो गेमचेंजर मूव बन जाता है।
101 पहुंच गया आंकड़ा
एसपी नीलोत्पल ने बताया कि मडावी ने कोपारशी में मुठभेड़ स्थल से चार शव बरामद किए, जिसके बाद उनका आंकड़ा 101 हो गया। मडावी हमेशा आगे बढ़कर नेतृत्व करते हैं। वह ऑपरेशन से पहले मिट्टी से बात करते हैं और बंदूक की लड़ाई शुरू करने से पहले जंगल के मूड को समझते हैं। वासुदेव मडावी कई एंटी नक्सल ऑपरेशन का हिस्सा रहे, जिसमें बोरिया कासनसुर एनकाउंटर शामिल है। इस ऑपरेशन में 40 माओवादी मारे गए थे। वह मर्दिनटोला, गोविंदगांव, कोपारशी-कोटूर और कटरांगट्टा के ऑपरेशन में भी शामिल हैं। उन्होंने पांच माओवादियों को गिरफ्तार भी किया।
बहादुरी को मिले गैलेंट्री मेडल
मडावी को उनकी बहादुरी के लिए दो गैलेंट्री मेडल मिले हैं। 10 नवंबर 1976 को जन्मे मडावी 22 साल की उम्र में गढ़चिरौली पुलिस में शामिल हुए थे। वे जल्द ही स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप में एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गए। 48 साल की उम्र में भी वह आगे बढ़कर ऑपरेशन का नेतृत्व करते हैं। C-60 कमांडो दस्ते का नेतृत्व करने की उनकी क्षमता के कारण उनके साथी भी सम्मान करते हैं।
मुंबई में मराठा आरक्षण आंदोलन ने पकड़ा जोर, मनोज जरांगे पाटिल के भूख हड़ताल पर बैठने से शहर में बढ़ा बवाल
29 Aug, 2025 04:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र में मराठा समाज के आरक्षण मांग रहे सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल शुरू कर दी है। जरांगे पाटिल के मुंबई में दस्तक देने के साथ काफी इलाकों में जाम की स्थिति है। बेस्ट की बसें भी जाम में अटकी हुई हैं। अटल सेतु के कई एंट्री प्वाइंट्स को बंद किया गया है। मनोज जरांगे पाटिल बुधवार को जालना स्थित अपने गांव से सैकड़ों वाहनों के साथ मुंबई के लिए निकले थे। जरांगे ने आजाद मैदान पहुंचते ही तेवर बदल दिए थे। उन्होंने कहा कि चाहे गोलियां भी चलें, हम पीछे नहीं हटेंगे। जरांगे आमरण अनशन पर बैठ गए हैं, हालांकि मुंबई पुलिस ने उन्हें सिर्फ एक दिन रैली की अनुमति दी है। यह समय-सीमा शाम 6 बजे तक हैं।
जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, हम मुंबई नहीं छोड़ेंगे। सरकार चाहे गोलियां भी चलाए, हम पीछे नहीं हटेंगे। अगर हमें जेल में भी डाल दिया जाए, तो भी हम अपना अनशन वहीं जारी रखेंगे। आज मराठों ने मुंबई को जाम कर दिया है। सरकार ने विरोध प्रदर्शन की अनुमति दे दी है। इसलिए हम पुलिस और सरकार का भी सहयोग करेंगे। कहीं भी पत्थर न फेंकें, पुलिस के काम में बाधा न डालें। अगले दो घंटों में गाड़ियां हटाकर मुंबई को खाली कराएं।
मनोज जरांगे पाटिल, आजाद मैदान में
सुबह पौन 10 बजे पहुंचे जरांगे
सुबह लगभग 9.45 बजे, पुलिस सुरक्षा के बीच जरांगे आज़ाद मैदान में दाखिल हुए और भगवा टोपी, स्कार्फ और भगवा झंडे लिए हज़ारों समर्थकों ने उनका स्वागत किया। पीटीआई के अनुसार, कई समर्थक जरांगे की तस्वीरें लेने और इस पल का वीडियो बनाने के लिए आपस में भिड़ गए। एक अधिकारी ने बताया कि मराठा आरक्षण आंदोलनकारियों के सड़कों पर उतर आने के बाद छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) के पास सुबह भारी यातायात जाम लग गया।
क्या बोले मनोज जरांगे पाटिल?
मनोज जारंगे पाटिल ने कहा है कि उनके समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करेंगे और चल रहे गणेश उत्सव में बाधा नहीं डालेंगे। वह मांग कर रहे हैं कि सभी मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए, जो ओबीसी श्रेणी में शामिल एक कृषि प्रधान जाति है, जिससे वे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के पात्र बनेंगे। पीटीआई अनुसार जालना पुलिस ने जरांग और उनके समर्थकों पर 40 शर्तें लागू करने के बाद उन्हें मार्च जारी रखने की अनुमति दी। इन शर्तों में उन्हें कानून-व्यवस्था की किसी भी स्थिति से बचने, वाहनों की आवाजाही में बाधा न डालने और आपत्तिजनक नारे लगाने से बचने का निर्देश दिया गया है।
जरांगे को मिली है 12 घंटे की अनुमति
मुंबई पुलिस ने जरांगे को 29 अगस्त (शुक्रवार) को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक आजाद मैदान में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति दी है। अधिकारियों ने बताया कि शाम 6 बजे सभी प्रदर्शनकारियों को मैदान छोड़ना होगा। पुलिस ने यह भी शर्त रखी है कि प्रदर्शनकारियों के केवल पांच वाहन ही आजाद मैदान जा सकते हैं। वहां प्रदर्शनकारियों की संख्या 5,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि जरांगे के आंदोलन से पहले कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आजाद मैदान में 1,500 से अधिक मुंबई पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। रेलवे पुलिस ने बताया कि सीएसएमटी पर भी सुरक्षा बढ़ाई है।
5285 फ्लैट और 77 प्लॉट की लॉटरी में शामिल होने का मौका बढ़ा, हजारों परिवारों को मिलेगी राहत
29 Aug, 2025 04:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: मुंबई में घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए गुड न्यूज है। महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) ने कोंकण बोर्ड की लॉटरी 2025 के लिए आवेदन की तारीख बढ़ा दी है। अब आप 5,285 फ्लैट और 77 प्लॉट के लिए 12 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं। यह मौका ठाणे और वसई में घर खरीदने का है। पहले अंतिम तारीख 28 अगस्त थी। हालांकि लॉटरी का ड्रा 9 अक्टूबर को होगा। दरअसल कोंकण हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट बोर्ड म्हाडा की एक इकाई है। इसने दूसरी बार ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि बढ़ाई है।
5,200 से ज्यादा फ्लैट और 77 प्लॉट उपलब्ध
ठाणे शहर और जिले और वसई (पालघर ज़िला) में अलग-अलग आवासीय योजनाओं के तहत कुल 5,285 फ्लैट और 77 आवासीय प्लॉट बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। आवेदक अब 12 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पहले बढ़ाई गई समय सीमा 28 अगस्त तक थी।
लॉटरी ड्रॉ 9 अक्टूबर को होगा
कोंकण बोर्ड की मुख्य अधिकारी रेवती गायकर ने बताया कि कम्प्यूटरीकृत लॉटरी ड्रॉ 9 अक्टूबर 2025 को डॉ काशीनाथ घनेकर सभागार, ठाणे में आयोजित किया जाएगा।
आवेदन और भुगतान की समय सीमा बदली
संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 12 सितंबर, रात 11:59 बजे तक है। बयाना राशि 13 सितंबर, रात 11:59 बजे तक ऑनलाइन जमा की जा सकती है। वैकल्पिक रूप से आवेदक 15 सितंबर, रात 11:59 बजे तक बैंकों के माध्यम से RTGS/NEFT के माध्यम से भी भुगतान कर सकते हैं।
पात्रता और आवेदक सत्यापन प्रक्रिया
केवल वे आवेदक जो सभी आवश्यक दस्तावेज़ पूरे करके भुगतान करेंगे, लॉटरी के लिए पात्र माने जाएंगे। पात्र आवेदकों की एक मसौदा सूची 22 सितंबर को शाम 6 बजे म्हाडा की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी।
कब निकलेगा रिजल्ट?
आवेदक 24 सितंबर, शाम 6 बजे तक ऑनलाइन दावे और आपत्तियां जमा कर सकेंगे। पात्र आवेदकों की अंतिम सूची 7 अक्टूबर को शाम 6 बजे प्रकाशित की जाएगी, और सफल और प्रतीक्षा सूची वाले आवेदकों के नाम लॉटरी के दिन, 9 अक्टूबर को वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे।
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर जापान से आई अच्छी खबर, भारत के राजदूत ने कहा– डिलीवरी जल्द संभव
28 Aug, 2025 04:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद/नई दिल्ली: देश में पहली बुलेट ट्रेन कब दौड़ेगी? इसका इंतजार लंबे समय से हो रहा है। जापान में भारत के राजदूत सिबी जॉर्ज ने मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियाेजना को बड़ा बयान दिया है। जॉर्ज ने कहा है कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन 2027 में शुरू होगी। गौरतलब हो कि गुजरात के सबसे बड़े शहर अहमदाबाद के साबरमती स्टेशन से लेकर मुंबई के ब्रांदा तक बुलेट ट्रेन के कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। गुजरात में सूरत-बिलिमोरा के पास काम काफी एडवांस स्थिति में पहुंच गया है। यहीं पर ट्रायल रन की उम्मीद की जा रही है।
2027 में ट्रैक पर होगी बुलेट ट्रेन
प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा से पहले जॉर्ज ने सीएनएन-न्यूज 18 से बात की। उन्होंने कहा कि भारत के बुनियादी ढांचे के बदलाव में जापान की महत्वपूर्ण भूमिका है। जॉर्ज ने कहा कि भारत की बहुप्रतीक्षित बुलेट ट्रेन परियोजना पूरी तरह से पटरी पर है। मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर 2027 तक परिचालन शुरू होने की उम्मीद है। जापान में भारत के राजदूत सिबी जॉर्ज ने इसकी पुष्टि की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए जापान यात्रा जाएंगे। जॉर्ज नेकहा कि मैं आपको बस इतना बता सकता हूं कि 2027 तक उस कॉरिडोर पर एक ट्रेन दौड़ेगी। मैं अपनी बात पर कायम हूं। भारत में बुलेट ट्रेन तभी दौड़ेगी जब जापान E5 और E3 शिंकानसेन ट्रेनें उपलब्ध कराएगा। ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि पीएम मोदी की यात्रा के डिलीवरी की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
शिंजो आबे के साथ बुना था सपना
2014 में प्रधानमंत्री मोदी और तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी की स्थापना की थी। इसके के तहत भारत में बुलेट ट्रेन दौड़ानेका सपना देखा गया था। मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन 508 किमी का सफर तीन घंटे में तय करेगी। यह प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) कहलाता है। मुंबई-अहमदाबाद रूट पर बुलेट ट्रेन की मैक्सिमम स्पीड 350 किमी/घंटा होगी। बुलेट ट्रेन का 7 किलोमीटर हिस्सा समुद्र के अंदर होगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव खुद इस प्रोजेक्ट की समीक्षा कर रहे हैं। वह कई बार निरीक्षण कर चुके हैं। मुंबई-अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन चलाना पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। गुजरात में बुलेट ट्रेन का काम काफी उन्नत अवस्था में है। गुजरात में बुलेट ट्रेन के लिए बनने वाले 21 पुलों में 17 बन चुके हैं। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में 25 नदी पुल हैं, जिनमें से 21 गुजरात में और 4 महाराष्ट्र में हैं।
महाराष्ट्र में श्रम कानून में बदलाव की तैयारी, क्या 8 घंटे काम का अधिकार छिन जाएगा? जानें नए प्रावधान
28 Aug, 2025 03:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई : महाराष्ट्र सरकार प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए एक बड़ा नियम लागू करने जा रही है। सरकार काम के घंटों को बढ़ाने पर विचार कर रही है। श्रम मंत्री आकाश फंडकर के अनुसार अभी महाराष्ट्र में 9 घंटे काम करने का नियम है, जिसे बढ़ाकर 10 घंटे बढ़ाने पर काम चल रहा है। यह प्रस्ताव श्रम विभाग ने मुंबई में हुई कैबिनेट मीटिंग में रखा था। मंत्री ने बताया कि प्रस्ताव पर काम शुरू हो गया है, हालांकि अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। अगर ये बदलाव होता है तो महाराष्ट्र शॉप्स एंड एस्टेब्लिशमेंट्स (रेगुलेशन ऑफ़ एम्प्लॉयमेंट एंड कंडीशंस ऑफ़ सर्विस) एक्ट, 2017 में बदलाव करने होंगे। यह कानून दुकानों, होटलों, मनोरंजन केंद्रों और प्राइवेट बिजनेस में काम करने के घंटे और नौकरी की शर्तों को तय करता है।
कर सकेंगे ज्यादा ओवरटाइम
महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि इस नियम के बदलाव के बाद महाराष्ट्र के नियम अंतर्राष्ट्रीय नियमों के जैसे हो जाएंगे और काम करने की जगह पर ज्यादा सुविधा मिलेगी। सबसे बड़ा बदलाव ओवरटाइम को लेकर है। अभी तीन महीने में 125 घंटे ओवरटाइम करने की अनुमति है, जिसे बढ़ाकर 144 घंटे किया जा सकता है। इसके साथ ही, लगातार काम करने के नियमों में भी बदलाव होंगे।
देर रात तक महिलाएं बाहर कर सकेंगी काम
नए नियम के तहत कर्मचारियों को आराम देने के लिए बीच-बीच में ब्रेक देना जरूरी होगा। ताकि उन पर काम का ज्यादा दबाव न पड़े। एक और बड़ा बदलाव यह होने जा रहा है कि नए श्रम कानूनों के बनने के बाद महिला कर्मचारियों को देर रात तक काम करने की अनुमति मिल सकती है। सरकार ने कहा कि इससे महिलाओं के लिए नौकरी के अवसर बढ़ेंगे।
श्रम कानून में बड़ा बदलाव
श्रम मंत्री ने कहा कि सरकार इस कानून के दायरे को भी बढ़ाने की सोच रही है। अभी नियम है कि जिस बिजनेस में 10 से कम कर्मचारी हैं, वे इस कानून में नहीं आते हैं। लेकिन नए प्रस्ताव के अनुसार इसे बदला जाएगा। फंडकर ने यह बताया कि अभी यह सब बातें शुरुआती दौर में हैं। उन्होंने कहा कि कई प्राइवेट कंपनियों में कर्मचारी पहले से ही तय समय से ज्यादा काम करते हैं, लेकिन उन्हें उसका सही पैसा नहीं मिलता। इसलिए सरकार इस पर विचार कर रही है।
महाराष्ट्र में कथा सुनाने पहुंचीं जया किशोरी, ट्रेडिशनल लुक ने जीता दिल, जानिए क्या पहनना पसंद है उन्हें
28 Aug, 2025 12:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे: प्रसिद्ध कथावाचक जया किशोरी महाराष्ट्र के पुणे के एक अलग अंदाज में नजर आईं। गणपति मंडल के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में पहुंची जया किशोरी ने अपनी पंसद से लेकर शादी के सवाल पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र आकर खुशी मिलती है क्योंकि उनकी मां महाराष्ट्र से हैं। उनका यहां पर ननिहाल है। ऐसे में महाराष्ट्र का खानपान उन्हें पंसद हैं। गणपति के प्राण प्रतिष्ठा में बुलाए जाने पर उन्होंने कहा कि मेरा प्रमोशन हो रहा है। मैं पिछली बार आरती में आई थी लेकिन इस बार प्राण-प्रतिष्ठा में आई हूं। कानों में झुमके और फैंसी दुप्पटा डालकर पहुंची जया किशाेरी श्रीमंत बाबूसाहेब रंगारी गणपति के कार्यक्रम में आर्कषण का केंद्र बनी रहीं। जया किशोरी ने लोगों ने कहा कि अगले 10 दिनों के लिए आधुनिकता का त्याग कर दे और फिर भक्ति में लीन रहें।
अपनी शादी पर बोलीं जया किशोरी
जया किशाेरी से जब यह पूछा गया कि उनकी शादी को लेकर अक्सर सवाल होता है। उन्होंने बप्पा से क्या मांगा? इस पर जया किशोरी ने कहा कि मैंने बप्पा से अपनी शादी के लिए कुछ नहीं मांगा, वो हो जाएगी। मैंने बस इतना ही मांगा है कि सब पर भगवान की कृपा बनी रहे। जया किशोरी मूलरूप से राजस्थान की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी कथा और भजनों से बड़ी पहचान बनाई है। गणपति की स्थापना के मौके पर बेहद खुश दिख रहीं जया किशोरी ने कहा कि 'वोकल फॉर लोकल' का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत के लोगों से ज्यादा कला किसी के पास नहीं है। उन्होंने अपील की कि स्थानीय लोगों को मौका दें। ऐसा करने से एक बार फिर भारत सोने की चिड़िया बनेगा। जया किशाेरी ने कहा कि जब दुनिया के बाकी हिस्सों में औपचारिक शिक्षा शायद शुरू भी नहीं हुई थी, तब भारत में लगभग सात लाख तीस हज़ार गुरुकुल थे।
डीजे पर भी बोलीं जया किशोरी
जया किशोरी ने कहा कि पुनीत बालन की तरफ से गणपति प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को डीजे मुक्त रखने की तारीफ की। उन्होंने कहा कि डीजे मुक्त गणपति का आयोजन अच्छी पहल है। जया किशोरी ने कहा कि डीजे-मुक्त गणपति गणेशोत्सव समारोहों की पवित्रता और आध्यात्मिक सार को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। कथावाचक जया किशोरी ने कहा कि डीजे मुक्त और शोरगुल से मुक्त आयोजन सच्ची भक्ति को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि समुदायों को केवल शोरगुल के बजाय सार्थक उत्सव मनाने के लिए प्रेरित करती हैं। उनके समर्थन ने पुनीत बालन के एक अधिक सामंजस्यपूर्ण और भावपूर्ण उत्सव के दृष्टिकोण को आध्यात्मिक रूप से बल प्रदान किया। गणेशाेत्सव महाराष्ट्र का सबसे पर्व है, लेकिन गणपति के आगमन और विर्सजन जूलूसाें में डीजे के कानफोडू शोर पर कई बार सवाल खड़े हो चुके हैं।
नया कर्मचारी निकला खूनी: 22 दिन की नौकरी के बाद वेटर ने रेस्तरां मालिक की हत्या कर मचाई सनसनी
28 Aug, 2025 12:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे : महाराष्ट्र की आईटी सिटी पुणे में एक हैरान कर देने वाली घटना हुई। यहां उत्तम नगर इलाके के पीकॉक रेस्टोरेंट एंड बार में काम करने वाले एक वेटर ने अपने मालिक की ही हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि वेटर शराब का लती थी। मालिक ने उसे कई बार शराब पीने के लिए टोका था। मंगलवार देर रात उसने फिर शराब पी तो मालिक ने उसे डांटा। इसी बात पर गुस्से में आकर वेटर ने मालिक को मार डाला। पुलिस ने आरोपी वेटर को गिरफ्तार कर लिया है। उत्तम नगर पुलिस ने बताया कि संतोष सुंदर शेट्टी 44 साल के ते। वह शिवणे के स्नेहा विहार में अपने परिवार के साथ रहते थे। उनका कोंढवे धावड़े में एनडीए रोड पर के बार एंड रेस्टोरेंट था। 22 दिन पहले उमेश दिलीप गिरी (38) नाम का शख्स उनके यहां काम मांगने आया था। उन्होंने उसे वेटर की नौकरी पर रख लिया।
शराब पीकर काम करने पर डांटा था
उत्तम नगर पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर मोहन खंदारे ने बताया कि उमेश रेस्टोरेंट में काम करते समय शराब पी लेता था। उसे संतोष ने डांटा था। मंगलवार को वह चुपचाप शराब पी रहा था। इसी दौरान संतोष शेट्टी ने उसे देख लिया। उसे चेतावनी दी और कहा कि अगर वह शराब के नशे में काम करते हुए मिला तो वह उसे नौकरी से निकाल देगा।
उमेश ने कहा-करो हिसाब
पुलिस ने बताया कि इस बात को लेकर दोनों के बीच बहस हो गई। उमेश ने कहा कि वह उसे नौकरी से क्या निकालेगा, वह खुद नौकरी छोड़ रहा है। उसने संतोष से कहा कि उसका हिसाब करके उसका वेतन दे दें। संतोष शेट्टी ने उसे सैलरी देने से इनकार कर दिया। होटल में काम करने वालों ने बताया कि उमेश ने पहले ही कुछ अडवांस ले रखा था और महज 22 दिन काम किया था इसलिए मालिक ने उससे कहा कि उसकी कोई सैलरी नहीं बनती।
गुस्से में किचन से लाया चाकू
उमेश गुस्से में आ गया और किचन की तरफ भागा। किसी को अंदाजा नहीं था कि वह क्या करने वाला है। वह किचन से चाकू लाया और संतोष शेट्टी पर हमला कर दिया। पुलिस ने बताया कि उस समय संतोष रेस्टोरेंट के कैश काउंटर पर बैठे थे। उमेश ने उनके शरीर पर ताबड़तोड़ कई वार किए। वह खून से लथपथ जमीन पर गिर पड़े। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस कर रही पूछताछ
सूचना पर पहुंची पुलिस ने गिरी के रेस्टोरेंट के स्टाफ क्वार्टर में छापा मारा लेकिन वह वहां नहीं मिला। हालांकि उसे कुछ दूरी पर गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया कि उमेश गिरी का कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इस घटना ने इलाके में सनसनी फैल गई। आरोपी वेटर पुलिस हिरासत में है और उससे पूछताछ जारी है।
इंतजार खत्म: मुंबई-रत्नागिरी के बीच 1 सितंबर से दौड़ेगी रो-रो सेवा, यात्रा होगी आरामदायक और समय की बचत भी
28 Aug, 2025 12:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से रत्नागिरी के बीच रो-रो सेवा 1 सितंबर से शुरू हो जाएगा। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने गणेशोत्सव के आगाज पर यह गुड न्यूज महाराष्ट्र के लोगों को दी है। मुंबई से रत्नागिरी की दूरी पांच घंटे तय की जा सकेगी। नितेश राणे ने एक आधिकारी बयान में कहा है कि यह दक्षिण एशिया की सबसे तेज रो-रो फेरी सेवा होगी। गौरतलब हो कि इस सेवा के शुरू होने का इंतजार महाराष्ट्र के लोग काफी समय से कर रहे थे। गणपति के आगमन के साथ ही फडणवीस सरकार में मंत्री नितेश राणे ने यह बड़ा ऐलान किया है। यह सेवा मुंबई वासियों के लिए बड़ी सौगात साबित होगी।
कोंकण के बड़ी सौगात
महाराष्ट्र सरकार के अधिकारी के अनुसार यह सेवा न केवल मुंबई और कोंकण वासियों के लिए सुविधाजनक होगी, बल्कि पर्यटकों के लिए भी किसी समुद्री रोमांचक यात्रा से कम नहीं होगी। महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के भाऊचा धक्का से रत्नागिरी के जयगढ़ और मुंबई से सिंधुदुर्ग के विजयदुर्ग तक रो-रो सेवाएं शुरू करने का फैसला किया है। इसके लिए जरूरी तैयारियों को पूरा कर लिया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अनुमति के बाद समुद्र के रास्ते से मुंबई से कोंकण के लिए नया ट्रांसपोर्ट उपलब्ध होगा। राज्य सरकार की तरफ से मौसम में बदलाव को देखते हुए मछुआरों से कहा है कि वे समुद्र में न जाएं। 1 सितंबर सेक यह सेवा शुरू होगी। राज्य सरकार के एक अधिकारी के अनुसार केंद्र सरकार से जरूरी एनओसी मिल गई हैं।
क्या बोले नितेश राणे?
महाराष्ट्र के मत्स्य पालन एवं बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने कहा है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने इस सेवा को री झंडी दे दी है। इस सेवा को शुरू करने के लिए 147 लाइसेंस प्राप्त हो चुके हैं। नितेश राणे के अनुसार भविष्य में रो-रो सेवा को श्रीवर्धन और मांडवा में स्टॉप दिया जाएगा, इससे पहले वहां पर जेटी का निर्माण किया जाएगा। राणे ने कहा कि रो रो सेवा से रेल और सड़क मार्ग पर पड़ने वाला बोझ भी कम होगा। काफी यात्री इस सेवा का लाभ उठाते हुए सफर कर पाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि रो-रो सेवा मुंबई से काेंकण के बीच गेमचेंजर बन सकती है। सरकार ने दिघी और काशीद दोनों जगहों पर जेटी निर्माण में तेजी लाई जा रही है। साथ ही अलीबाग जेटी को दिवाली से पहले तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
कितनी होगी रो-रो की रफ्तार?
मुंबई के भाऊचा धक्का से जयगढ़ तक तीन घंटे और भाऊचा धक्का से विजयदुर्ग तक पांच घंटे लगेंगे। यहां जेटी की सुविधा है। जेटी से शहर जाने के लिए बसें भी उपलब्ध कराई गई हैं। राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार रो-रो सेवा की स्पीड 25 नॉट होगी। ऐसे में एम2एम नामक रो-रो नौका दक्षिण एशिया की सबसे तेज सेवा होगी। इसकी इकोनॉमी क्लास में 552, प्रीमियम इकोनॉमी में 44, बिजनेस में 48 और फर्स्ट क्लास में 12 यात्री बैठ पाएंगे। इसके अलावा वाहनों को ढोने की भी क्षमता होगी।
कितना होगा रो-रो का किराया?
मुंबई से कोंकण के लिए चलने वाली रो-रो फेरी सेवा में किराया भी सामने आ गया है। इकोनॉमी क्लास का 2,500 रुपये किराया लिया जाएगा। प्रीमियम इकोनॉमी क्लास का किराया 4,000 रुपये, बिजनेस क्लास का 7,500 रुपये और प्रथम श्रेणी का 9,000 रुपये किराया होगा। चार पहिया वाहनों का किराया 6,000 रुपये, दो पहिया वाहनों का 1,000 रुपये, साइकिल का 600 रुपये और मिनी बसों का 13,000 रुपये किराया होगा। बस की क्षमता के अनुसार किराया बढ़ता जाएगा। मुंबई से सिंधुदुर्ग जिले की कुल दूरी सड़क मार्ग से 442 किलोमीटर है। इस दूसरी को तय करने के में नौ घंटे का समय लगता है, जब मुंबई से रत्नागिरी की दूरी 326 किलोमीटर है। इस दूरी को तय करने में सात घंटे का समय सामान्यतया लगता है।
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