महाराष्ट्र
BEST बस हादसे में एक की मौत, अनियंत्रित बस डिवाइडर से टकराने के बाद मची अफरा-तफरी
20 Jul, 2026 02:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के मानखुर्द क्षेत्र में सोमवार सुबह एक अत्यंत हृदयविदारक सड़क हादसा सामने आया है। सायन-पनवेल राजमार्ग पर स्थित विश्वकर्मा अस्पताल के समीप एक बेस्ट (BEST) बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे निर्मित डिवाइडर से जा टकराई। इस भीषण दुर्घटना में डिवाइडर के पास खड़े एक 65 वर्षीय वृद्ध की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बस के चालक और परिचालक गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के तुरंत बाद क्षेत्र में भगदड़ और चीख-पुकार मच गई, जिसके बाद स्थानीय नागरिकों ने तत्परता दिखाते हुए पुलिस तथा एंबुलेंस सेवा को सूचित किया।
नियंत्रण खोने के कारण डिवाइडर से टकराई बेस्ट बस
प्राथमिक जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त बस बेस्ट के रूट संख्या 501 पर अपनी निर्धारित सेवा में संचालित हो रही थी। यात्रा के दौरान अचानक चालक वाहन पर से अपना संतुलन खो बैठा, जिसके परिणामस्वरूप तेज रफ्तार बस सीधे मार्ग के किनारे बने डिवाइडर में जा घुसी। यह टक्कर इतनी प्रचंड थी कि डिवाइडर के समीप खड़े राहगीर को संभलने का अवसर तक नहीं मिला और वे बस की सीधी चपेट में आ गए, जबकि वाहन के अगले हिस्से को भारी नुकसान पहुँचा।
राजावाड़ी अस्पताल में एक को मृत घोषित, दो का इलाज जारी
राजावाड़ी चिकित्सालय से प्राप्त सूचना के मुताबिक दुर्घटना के पश्चात कुल तीन लोगों को आपातकालीन स्थिति में अस्पताल लाया गया था। वहां डॉक्टरों ने परीक्षण के उपरांत एक वृद्ध को मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान 65 वर्षीय भास्कर रावसाहेब पांडे के रूप में की गई है, जो हादसे के वक्त सड़क किनारे खड़े थे। वहीं दुर्घटना में चोटिल हुए बस चालक 51 वर्षीय बनवारी राम प्रसाद शर्मा तथा 41 वर्षीय परिचालक वैभव वाघमारे को चिकित्सालय में भर्ती कर लिया गया है, जहां दोनों की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है।
हादसे के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी और स्थानीय लोगों की मदद
घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही बस डिवाइडर से टकराई, एक जोरदार धमाके जैसी आवाज हुई। आसपास के दुकानदारों और राहगीरों ने तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़ लगाकर घायलों को क्षतिग्रस्त बस से बाहर निकाला। स्थानीय लोगों ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए एंबुलेंस के पहुंचने तक घायलों की प्राथमिक देखभाल की और पुलिस को यातायात सुचारू रखने में सहयोग प्रदान किया।
पुलिस प्रशासन द्वारा मामला दर्ज और अग्रिम जांच प्रारंभ
मानखुर्द थाना पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लेकर क्षतिग्रस्त वाहन को मार्ग से हटाकर यातायात बहाल करा दिया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामला दर्ज कर दुर्घटना के वास्तविक कारणों की विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी गई है। जांच टीम इस बात का पता लगा रही है कि हादसा किसी यांत्रिक खराबी के कारण हुआ अथवा चालक की लापरवाही की वजह से, जिसके लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।
बिजली कटौती से नाराज ग्रामीण, विभाग के बाहर बिस्तर लगाकर किया प्रदर्शन
20 Jul, 2026 12:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिम: महाराष्ट्र के वाशिम जिले की मानोरा तहसील अंतर्गत कारखेडा एवं समीपवर्ती ग्रामीण अंचलों में लगातार हो रही रात्रिकालीन बिजली कटौती को लेकर जनआक्रोश चरम पर पहुँच गया है। बिजली की भारी किल्लत से आजिज आ चुके किसानों और ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए एक बेहद अनोखा रास्ता अख्तियार किया। देर रात जैसे ही गांव की बिजली गुल हुई, सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण अपना बिस्तर, गद्दे और चारपाई उठाकर सीधे महावितरण (बिजली विभाग) के कार्यालय परिसर में जा पहुंचे। वहां उन्होंने दफ्तर के बाहर ही रात बिताकर 'सोओ आंदोलन' शुरू कर दिया और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया।
भीषण उमस और सिंचाई संकट से बेहाल हुए ग्रामीण
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का आरोप है कि बीते कई दिनों से क्षेत्र में रात ढलते ही घंटों बिजली गुल कर दी जाती है। इस भीषण गर्मी और उमस के मौसम में बिजली न रहने के कारण लोगों का अपने घरों में रुकना दुभर हो गया है। इसके अलावा खेती-किसानी पर भी इसका व्यापक बुरा प्रभाव पड़ रहा है। रात्रि में बिजली आपूर्ति न मिलने से किसान अपनी फसलों की समय पर सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं, जिससे फसलें सूखने की कगार पर पहुँच गई हैं।
महावितरण कार्यालय परिसर में बिछाए गद्दे और शुरू किया आंदोलन
बिजली विभाग के उदासीन रवैये से आक्रोशित कारखेडा और आसपास के गांवों के रहवासियों ने महावितरण दफ्तर को ही अपना रैन बसेरा बना लिया। सैकड़ों लोग अपने साथ चादरें और बिस्तर लेकर दफ्तर के प्रांगण में सो गए। ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक गांव में रात्रिकालीन बिजली आपूर्ति का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक वे विभाग के दफ्तर के बाहर ही रात गुजारेंगे और आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र रूप देंगे।
ग्राम पंचायत ने पुलिस प्रशासन को पत्र लिखकर जताई चिंता
विद्युत संकट की गंभीरता को देखते हुए कारखेडा ग्राम पंचायत की ओर से स्थानीय पुलिस प्रशासन को एक औपचारिक पत्र प्रेषित किया गया है। पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया है कि पिछले एक सप्ताह से प्रतिदिन शाम 7 बजते ही पूरे क्षेत्र की बिजली काट दी जाती है। इस मनमानी कटौती के कारण स्कूली बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो रही है, वहीं भीषण गर्मी के चलते वृद्ध, महिलाएं और बच्चे विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
नियमित विद्युत आपूर्ति बहाल करने की पुरजोर मांग
आंदोलनकारियों का कहना है कि वे पूर्व में भी कई बार विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर सुचारू बिजली व्यवस्था की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल खोखले आश्वासन ही प्राप्त हुए। ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और मांग की है कि रात के समय निर्बाध बिजली आपूर्ति तुरंत बहाल की जाए। यदि समस्या का अविलंब निस्तारण नहीं किया गया तो पूरा क्षेत्र एकजुट होकर बड़े पैमाने पर सविनय अवज्ञा आंदोलन करने को बाध्य होगा।
वर्धा में रफ्तार का कहर, एक्सप्रेसवे पर टक्कर के बाद जिंदा जले 6 लोग
20 Jul, 2026 12:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वर्धा: महाराष्ट्र के वर्धा जिले में मुंबई-नागपुर समृद्धि एक्सप्रेसवे पर सोमवार तड़के एक हृदयविदारक सड़क दुर्घटना घटित हो गई। विरुल गांव के समीप तड़के लगभग 3 बजे मार्ग पर खड़ी एक कार को पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहनों में अचानक भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में कार में सवार 4 यात्रियों और ट्रक चालक सहित 2 लोगों की मौके पर ही झुलसने से अकाल मौत हो गई।
समृद्धि एक्सप्रेसवे पर भीषण भिड़ंत और बचाव कार्य
घटना की सूचना मिलते ही हाईवे सेफ्टी पेट्रोल, वर्धा जिला पुलिस प्रशासन, फायर ब्रिगेड और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम की संयुक्त टीमें तत्काल मौके पर पहुँचीं। अधिकारियों के अनुसार सड़क पर एक लेन चालू थी, उसी दौरान खड़ी कार में पीछे से आए ट्रक की टक्कर के बाद दोनों गाड़ियाँ आग के गोले में तब्दील हो गईं। राहत और बचाव दल ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और क्षतिग्रस्त वाहनों से शवों को बाहर निकाला।
यातायात में बदलाव और वैकल्पिक मार्ग की एडवाइजरी
हादसे के बाद मुंबई-नागपुर कैरिजवे पर सुरक्षा कारणों से यातायात प्रभावित हो गया, जिससे मार्ग पर वाहनों का लंबा जाम लग गया। पुलिस प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए नागपुर से मुंबई की ओर जाने वाले चालकों के लिए परामर्श जारी किया है। वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे वर्धा तक समृद्धि एक्सप्रेसवे के बजाय नागपुर-अमरावती हाईवे का प्रयोग करें और अमरावती गेट इंटरचेंज से पुनः एक्सप्रेसवे पर आएं।
समृद्धि एक्सप्रेसवे पर बढ़ते हादसों का चिंताजनक आंकड़ा
हाइवे पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार समृद्धि एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। वर्ष 2025 के दौरान इस मार्ग पर कुल 185 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जो कि उससे पूर्व के वर्ष की तुलना में करीब 35 प्रतिशत अधिक हैं। विदर्भ क्षेत्र को देश की आर्थिक राजधानी से जोड़ने वाले इस 701 किलोमीटर लंबे छह-लेन मार्ग पर वाहनों की तेज गति और लापरवाही लगातार जानलेवा साबित हो रही है।
सुरक्षा तंत्र और इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम की तैयारी
मार्ग पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं को रोकने और निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रशासन द्वारा कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से पूरे समृद्धि एक्सप्रेसवे पर आधुनिक इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को लागू करने की प्रक्रिया जारी है। इस तकनीक के पूर्ण रूप से सक्रिय होने के बाद तेज रफ्तार वाहनों और अनधिकृत रूप से खड़े वाहनों पर कड़ाई से अंकुश लगाया जा सकेगा।
शरद पवार ने NCP SP के भविष्य को लेकर किया बड़ा खुलासा, जानिए क्या बोले
18 Jul, 2026 12:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के भविष्य और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाने की चल रही तीव्र अटकलों पर खुद पार्टी प्रमुख शरद पवार ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। राजनीतिक गलियारों में दल के भीतर संभावित बिखराव और गठबंधन बदलने को लेकर लगाए जा रहे कयासों पर विराम लगाते हुए वरिष्ठ राजनेता ने बेहद नपे-तुले शब्दों में कहा कि वर्तमान समय इस तरह के विषयों पर चर्चा या टिप्पणी करने के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं है। इस बयान के साथ ही उन्होंने राज्य की राजनीतिक हलचल को एक नया मोड़ दे दिया है।
सोनम वांगचुक प्रकरण पर केंद्र की नीतियों की आलोचना
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के खिलाफ हुई प्रशासनिक कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शरद पवार ने केंद्र सरकार के रवैये को पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था की बेहतरी के लिए शांतिपूर्ण ढंग से अनशन कर रहे एक प्रतिष्ठित व्यक्ति को बलपूर्वक हटाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने पुरजोर शब्दों में ऐलान किया कि विपक्ष इस दमनकारी कदम के खिलाफ एकजुट है और आगामी संसद सत्र के दौरान इस गंभीर मुद्दे को पूरी मजबूती के साथ सदन के पटल पर उठाया जाएगा।
शिक्षा मंत्री की जवाबदेही और छात्रों के भविष्य का संकट
वरिष्ठ नेता ने राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली परीक्षाओं में आई विसंगतियों का उल्लेख करते हुए सीधे तौर पर विभागीय नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार मंत्री की घोर नाकामी और लचर कार्यप्रणाली के कारण आज देश के लाखों होनहार छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। ऐसे में आंदोलनकारियों द्वारा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करना पूरी तरह से तर्कसंगत और जायज था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को पहले से ही इस बात का अंदेशा था कि सरकार संवाद स्थापित करने के बजाय आंदोलन को कुचलने के लिए गिरफ्तारी का रास्ता चुनेगी और अंततः प्रशासन ने वही किया, लेकिन इससे यह मुहिम थमेगी नहीं।
आंदोलन की निरंतरता और विपक्ष का अटूट समर्थन
शरद पवार ने स्पष्ट किया कि भले ही पुलिस प्रशासन ने तड़के सुबह जबरन कार्रवाई करते हुए सोनम वांगचुक को धरना स्थल से उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया हो, लेकिन जनता की यह लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। विभिन्न विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं ने प्रदर्शन स्थल पर जाकर इस आंदोलन को अपना नैतिक और राजनीतिक समर्थन दिया था। उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि अस्पताल के भीतर से भी विचारों की यह जंग जारी रहेगी और युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए इस जन आंदोलन को आगे भी बेहद आक्रामक और सुनियोजित तरीके से जारी रखा जाएगा।
किसानों की कर्जमाफी पर राज्य सरकार को अंतिम चेतावनी
महाराष्ट्र के कृषि संकट और किसानों की कर्जमाफी के संवेदनशील मुद्दे पर बोलते हुए एनसीपी प्रमुख ने महायुति सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कर्जमाफी के क्रियान्वयन के लिए बार-बार नई तारीखें देना किसानों के साथ छलावा है और प्रशासन को अपनी पूर्व घोषित समय-सीमा का कड़ाई से पालन करना चाहिए था। उन्होंने दो टूक लहजे में चेतावनी दी कि किसानों को ऋण मुक्त करना उनकी पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकता है; यदि सरकार इस नई समय-सीमा के भीतर भी राहत पहुंचाने में विफल रहती है, तो पूरे महाराष्ट्र में एक विशाल और उग्र राज्यव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंका जाएगा।
शिक्षक ने दो बच्चों संग उठाया खौफनाक कदम, सुसाइड नोट की जांच जारी
18 Jul, 2026 11:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नांदेड़: महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले से एक रूह कंपा देने वाली और अत्यंत दुखद घटना सामने आई है। मुदखेड़ तहसील के आमदुरा में शुक्रवार की सुबह एक स्कूल शिक्षक ने अपने दो मासूम बच्चों के साथ कथित तौर पर अपनी कार को गोदावरी नदी में गिरा दिया, जिससे तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। प्रथम दृष्टया इस पूरे मामले को आत्महत्या से जोड़कर देखा जा रहा है क्योंकि वारदात से महज एक दिन पहले ही शिक्षक ने सोशल मीडिया पर मानसिक प्रताड़ना का जिक्र करते हुए एक नोट साझा किया था।
पुल की सुरक्षा रेलिंग तोड़ते हुए नदी में समाई तेज रफ्तार कार
घटनाक्रम के अनुसार, मूल रूप से भोकर तहसील के बेंबर गांव के रहने वाले सुनील मोरे हिमायतनगर के पोटा बुद्रुक स्थित जिला परिषद स्कूल में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। शुक्रवार की सुबह वह अपनी 12 वर्षीय बेटी सारी और 8 वर्षीय बेटे सुमित को कार में बैठाकर अमदुरा-पुणेगांव रोड से गुजर रहे थे। इसी दौरान गोदावरी नदी पर बने पुल पर पहुंचते ही उनकी कार अचानक बेकाबू हो गई और पुल की मजबूत साइड रेलिंग को कंक्रीट सहित तोड़ती हुई सीधे उफनती नदी के गहरे पानी में समा गई। इस खौफनाक मंजर को देखकर राहगीरों ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीम ने क्रेन की मदद से कार और तीनों शवों को नदी से बाहर निकाला।
व्हाट्सऐप स्टेटस पर साझा किया था प्रताड़ना का सुसाइड नोट
इस सामूहिक आत्महत्या के पीछे की मुख्य वजह शिक्षक द्वारा वारदात से ठीक एक दिन पहले अपने व्हाट्सऐप स्टेटस पर लगाया गया सुसाइड नोट माना जा रहा है। सुनील मोरे ने अपने इस डिजिटल नोट में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर बेहद गंभीर और संवेदनशील आरोप लगाए थे। उन्होंने लिखा था कि वह हदगांव के समूह शिक्षा अधिकारी और संबंधित केंद्र प्रमुख द्वारा किए जा रहे कथित प्रशासनिक उत्पीड़न और मानसिक तनाव से बुरी तरह तंग आ चुके हैं और अब उनके पास जीवन समाप्त करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। इस नोट के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के भीतर भी हड़कंप मच गया है।
एक ही स्कूल में पढ़ाते थे पति-पत्नी, परिवार में पसरा मातम
पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो मृतक सुनील मोरे जिस जिला परिषद स्कूल में अपनी सेवाएं दे रहे थे, संयोगवश उनकी धर्मपत्नी भी उसी विद्यालय में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। एक ही झटके में पति और दोनों होनहार बच्चों को खो देने के बाद मृतका की पत्नी और अन्य रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे गांव और शिक्षक समुदाय में इस घटना के बाद से गहरा सन्नाटा और मातम पसरा हुआ है। सहकर्मियों का कहना है कि सुनील स्वभाव से बेहद शांत और कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक थे, लेकिन विभागीय दबाव ने उन्हें इतना आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
पुलिस ने मामला दर्ज कर विभागीय अधिकारियों के खिलाफ शुरू की जांच
स्थानीय कोतवाली पुलिस ने इस दर्दनाक हादसे के संबंध में आकस्मिक मृत्यु और सुसाइड नोट के आधार पर मामला पंजीकृत कर लिया है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है जो सुसाइड नोट में नामजद दोनों वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों की भूमिका और उनके द्वारा दिए जा रहे कथित तनाव की गहनता से पड़ताल करेगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मृतक के मोबाइल फोन और डिजिटल साक्ष्यों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है, और इस मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा तथा जल्द ही मामले की पूरी हकीकत सबके सामने लाई जाएगी।
कोविड ने फिर बढ़ाई चिंता, महाराष्ट्र में तीन साल बाद दिखा बड़ा उछाल
18 Jul, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र में एक बार फिर वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के सक्रिय मामलों में आंशिक बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले करीब दस दिनों की अवधि में राज्य के कुछ हिस्सों से संक्रमण के नए मामलों में हल्की सी वृद्धि दर्ज की गई है, जिसने स्वास्थ्य तंत्र को सतर्क कर दिया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि विशेषज्ञों ने इसे किसी भी नई लहर का संकेत मानने से पूरी तरह इनकार किया है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान स्थिति को एक नई लहर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह सामान्य इन्फ्लूएंजा (फ्लू) की तरह वायरस के मौसमी उतार-चढ़ाव का एक हिस्सा मात्र है।
चालू वर्ष और हालिया महीनों के सांख्यिकीय आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे वर्ष के दौरान महाराष्ट्र में संक्रमण के सीमित मामले ही दर्ज किए गए हैं। सबसे संतोषजनक बात यह रही है कि इस बीमारी के कारण राज्य में अब तक एक भी मरीज की जान नहीं गई है। हालांकि, तुलनात्मक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि पूर्ववर्ती महीनों की अपेक्षा जुलाई के महीने में संक्रमण की रफ्तार थोड़ी तेज रही है, और इस अवधि के दौरान ही चालू वर्ष के सबसे अधिक सक्रिय मामले दर्ज किए गए हैं, जिसके चलते प्रशासनिक स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
चिकित्सकों ने दी स्थिति पर महत्वपूर्ण जानकारी
संक्रामक रोगों के विशेषज्ञों और बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों ने जमीनी हकीकत पर रोशनी डालते हुए बताया है कि हाल के हफ्तों में ओपीडी (OPD) में आने वाले मरीजों में कोरोना के लक्षण पाए जा रहे हैं। एक ही प्रमुख चिकित्सा संस्थान में पिछले एक सप्ताह के भीतर कई मरीजों की पुष्टि होना इस बात का संकेत है कि यदि पूरे महानगरीय क्षेत्र का आकलन किया जाए, तो वास्तविक संक्रमितों की संख्या थोड़ी अधिक हो सकती है। हालांकि, डॉक्टरों ने जनता से पैनिक न होने की अपील की है क्योंकि सामने आ रहे सभी मामलों की प्रकृति बेहद सामान्य है।
मरीजों में दिख रहे हैं केवल हल्के लक्षण
राहत की सबसे बड़ी वजह यह है कि वर्तमान में जितने भी लोग इस वायरस की चपेट में आ रहे हैं, उनमें से किसी को भी गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना नहीं करना पड़ रहा है। सभी संक्रमित व्यक्तियों में बेहद माइल्ड यानी हल्के लक्षण देखने को मिल रहे हैं, जो सामान्य सर्दी-जुकाम और बुखार जैसे ही हैं। किसी भी मरीज को अस्पताल में भर्ती करने या विशेष आईसीयू (ICU) देखभाल की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। मरीज सामान्य दवाओं और घरेलू एकांतवास (होम आइसोलेशन) के जरिए ही बहुत जल्द पूरी तरह से स्वस्थ हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से एहतियाती दिशा-निर्देश
भले ही स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय नगर निगमों ने नागरिकों से एहतियात बरतने की अपील की है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी गई है। मौसम में आ रहे बदलावों के मद्देनजर अस्पतालों को भी बुनियादी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और संदिग्ध मरीजों की समय पर टेस्टिंग करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि संक्रमण को किसी भी स्तर पर फैलने से रोका जा सके।
स्कूल बस पर पेड़ गिरने से बच्चे की मौत, मेयर बोले- ठेकेदारों की लापरवाही से हुआ हादसा
17 Jul, 2026 05:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पिछले दिनों पेड़ गिरने के कारण एक 11 वर्षीय मासूम बच्चे की असामयिक और दर्दनाक मौत हो गई थी। इस बेहद संवेदनशील और दुखद हादसे को लेकर हाल ही में प्रशासन की तरफ से एक आधिकारिक जांच रिपोर्ट पेश की गई थी। हालांकि, इस रिपोर्ट के तथ्यों और निष्कर्षों से असंतुष्ट होकर मेयर रितु तावड़े ने एक बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अपनाते हुए इस रिपोर्ट को सबके सामने फाड़ दिया, जिससे नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच का टकराव अब खुलकर सामने आ गया है।
मेयर द्वारा जांच रिपोर्ट सिरे से खारिज
मेयर रितु तावड़े ने प्रशासनिक रिपोर्ट को पूरी तरह से अपूर्ण और पक्षपातपूर्ण करार देते हुए आज शुक्रवार को उसे सिरे से खारिज कर दिया। मेयर ने साफ शब्दों में कहा कि इस रिपोर्ट में घटना के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही को छिपाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को इस पूरे दर्दनाक हादसे की नए सिरे से और गहनता से जांच करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
सदन में रिपोर्ट की कॉपियां फाड़े जाने का हंगामा
इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी बात रखते हुए मेयर तावड़े ने बताया कि बीते कल नगर निगम के सदन में इस मामले को लेकर जोरदार चर्चा हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में मौजूद सभी दलों के पार्षदों ने सर्वसम्मति से प्रशासन द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट को नामंजूर कर दिया था। इसके बाद जनप्रतिनिधियों के भारी आक्रोश के बीच रिपोर्ट की प्रतियों को फाड़कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया गया, जो यह दर्शाता है कि प्रशासनिक लीपापोती को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जांच पैनल में शामिल होंगे जन प्रतिनिधि
सदन की गरिमा और मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए मेयर ने प्रशासन के समक्ष एक बेहद महत्वपूर्ण और ठोस शर्त रखी है। उन्होंने निर्देश दिया है कि इस हादसे की दोबारा जांच के लिए जो नया पैनल गठित किया जाएगा, उसमें नगर निगम के दो सक्रिय पार्षदों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। मेयर का मानना है कि जनप्रतिनिधियों की निगरानी में होने वाली जांच ही पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी हो सकती है ताकि पीड़ितों को सही मायने में न्याय मिल सके।
प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की मांग
इस दुखद घटना ने शहर में मानसून के दौरान पेड़ों की छंटाई और उनके रखरखाव को लेकर नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेयर के इस कड़े रुख के बाद अब प्रशासनिक अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने का भारी दबाव बन गया है। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि मासूम की मौत के जिम्मेदार दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
'3 इडियट्स' और सोनम वांगचुक पर आमिर के बयान से सियासी बहस तेज
17 Jul, 2026 04:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता आमिर खान द्वारा ब्लॉकबस्टर फिल्म '3 इडियट्स' में निभाए गए अपने मशहूर किरदार 'फुंसुख वांगडू' को लेकर एक बड़ा स्पष्टीकरण दिया गया है। आमिर खान ने साफ किया है कि फिल्म में उनका यह किरदार लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के जीवन पर बिल्कुल भी आधारित नहीं था। अभिनेता के इस बयान के बाद अब इस पूरे मामले पर राजनीतिक गलियारों से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं, जिससे इस विषय ने नया तूल पकड़ लिया है।
कांग्रेस ने आमिर खान को दी नसीहत
आमिर खान के इस बयान के सामने आते ही विपक्षी दल कांग्रेस की तरफ से बेहद सख्त और सीधी प्रतिक्रिया सामने आई है। पूर्व राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने अभिनेता को आड़े हाथों लेते हुए नसीहत दी है कि कलाकारों को सामाजिक सरोकारों से पीछे नहीं हटना चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि आमिर खान ने फिल्म में एक बेहद प्रेरणादायक भूमिका निभाई थी जिसे जनता ने खूब पसंद किया, ऐसे में उन्हें खुलकर सोनम वांगचुक का समर्थन करना चाहिए था। उन्होंने आमिर खान की तुलना अन्य बेबाक कलाकारों से करते हुए कहा कि फिल्मी सितारों को बिना किसी डर के सच का साथ देना चाहिए।
फिल्म के मुख्य किरदार पर आमिर की सफाई
अभिनेता आमिर खान ने फिल्म '3 इडियट्स' के निर्माण के समय की परिस्थितियों को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से एक गलत धारणा है कि उनका अभिनय सोनम वांगचुक से प्रेरित था। उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा कि जब वे इस फिल्म की शूटिंग और तैयारी कर रहे थे, तब न तो उन्हें, न ही निर्देशक राजकुमार हिरानी को और न ही फिल्म के लेखक अभिजात जोशी को सोनम वांगचुक के बारे में कोई जानकारी थी। यह पूरी तरह से एक काल्पनिक किरदार था जिसे पटकथा के अनुसार तैयार किया गया था, हालांकि वे वांगचुक के कार्यों का बेहद सम्मान करते हैं।
अनशनकारी वांगचुक की सेहत पर जताई चिंता
किरदार को लेकर उपजे विवाद को खारिज करने के साथ ही आमिर खान ने लद्दाख की मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अभिनेता ने सार्वजनिक रूप से वांगचुक से अपना आमरण अनशन समाप्त करने की भावुक अपील करते हुए कहा कि देश का एक बड़ा वर्ग उनके गिरते स्वास्थ्य को लेकर बेहद चिंतित है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वांगचुक जल्द ही अपना उपवास खत्म करेंगे और अपने जीवन तथा स्वास्थ्य की रक्षा को प्राथमिकता देंगे क्योंकि देश को उनके जैसे दूरदर्शी व्यक्ति की अत्यंत आवश्यकता है।
जंतर-मंतर पर अनशन का बीसवां दिन
दूसरी तरफ राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर अड़े सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन उपवास अब बेहद संवेदनशील चरण में पहुंच चुका है। उनके इस कठिन अनशन का आज 20वां दिन है और मौके पर तैनात डॉक्टरों की टीम ने चेतावनी दी है कि लंबे समय से भूखे रहने के कारण उनका शरीर अब गंभीर स्थिति में पहुंच रहा है। इसके बावजूद वांगचुक ने दृढ़ संकल्प दोहराते हुए कहा है कि वे अपनी आखिरी सांस तक संघर्ष जारी रखेंगे, जबकि दूसरी ओर जंतर-मंतर पर विभिन्न संगठनों का विरोध प्रदर्शन भी लगातार कई दिनों से जारी है।
12 साल की बच्ची की पत्थर से कुचलकर हत्या, वर्धा पुलिस ने मजदूर को दबोचा
17 Jul, 2026 01:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वर्धा: महाराष्ट्र के वर्धा जिले से एक बेहद सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में डर और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। यहां एक 12 वर्षीय मासूम बच्ची की अत्यंत क्रूरता के साथ मौत के घाट उतार दिया गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन तुरंत एक्शन मोड में आया और त्वरित कार्रवाई करते हुए एक संदिग्ध खेत मजदूर को हिरासत में ले लिया है। इस जघन्य हत्याकांड के पीछे की वजहों को लेकर पुलिस की प्रारंभिक जांच में बेहद चौंकाने वाले और चिंताजनक तथ्य सामने आ रहे हैं।
मासूम बच्ची की नृशंस हत्या से क्षेत्र में फैला भारी जनाक्रोश
इस खौफनाक वारदात के सामने आने के बाद से ही स्थानीय निवासियों में गहरा रोष व्याप्त है। जिले के सावंगी थाना क्षेत्र में हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की शुरुआती जांच और साक्ष्यों के आधार पर इस बात की प्रबल आशंका जताई जा रही है कि हत्या जैसी भयानक वारदात को अंजाम देने से पहले मासूम बच्ची को गंभीर यौन शोषण का शिकार भी बनाया गया था। पुलिस इस संदेहास्पद पहलू को ध्यान में रखकर हर कोण से मामले की गहराई से तफ्तीश कर रही है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दी घटना की विस्तृत जानकारी
वर्धा के पुलिस अधीक्षक सौरव कुमार अग्रवाल ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए आधिकारिक तौर पर घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि यह बेहद संवेदनशील मामला सावंगी पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले एक गांव का है। बुधवार की देर शाम मासूम बच्ची का लथपथ शव उसके अपने ही घर के भीतर से बरामद किया गया, जिसके बाद से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
सिर पर भारी पत्थर से वार कर ली गई मासूम की जान
घटनास्थल का मुआयना करने वाले जांच अधिकारियों के मुताबिक, वारदात को बेहद बेरहमी के साथ अंजाम दिया गया था। अपराधी ने मासूम को संभलने का कोई मौका नहीं दिया और उसके सिर पर किसी बेहद भारी पत्थर या ठोस वस्तु से ताबड़तोड़ कई वार किए। सिर पर लगी इस गंभीर और जानलेवा चोट के कारण अत्यधिक खून बह गया, जिससे बच्ची ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है ताकि मौत के सटीक कारणों और शोषण की पुष्टि हो सके।
आरोपी खेत मजदूर गिरफ्तार और कानूनी कार्रवाई तेज
वारदात को अंजाम देकर भागने की फिराक में लगे मुख्य संदिग्ध को पुलिस ने घेराबंदी करके दबोच लिया है, जो पेशे से एक खेत मजदूर है। पकड़े गए आरोपी से पुलिस कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि हत्या के असली कारणों और वारदात में किसी अन्य की संलिप्तता का पता लगाया जा सके। पुलिस अधीक्षक ने भरोसा दिलाया है कि मामले की फॉरेंसिक जांच कराकर जल्द से जल्द अदालत में मजबूत चार्जशीट दाखिल की जाएगी, ताकि पीड़ित परिवार को त्वरित न्याय मिल सके और दोषी को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।
ताज होटल पर BMC का बड़ा नोटिस, आसपास की सड़क और फुटपाथ के उपयोग के लिए मांगे ₹27 करोड़
17 Jul, 2026 12:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी में स्थित ऐतिहासिक ताज महल पैलेस होटल के लिए सुरक्षा के लिहाज से सार्वजनिक संपत्तियों का इस्तेमाल अब एक बड़ी वित्तीय देनदारी में तब्दील हो गया है। साल 2008 में हुए भीषण 26/11 आतंकी हमले के बाद, सुरक्षा कारणों से होटल के चारों ओर की सड़कों और फुटपाथों को बैरिकेडिंग करके आम जनता के लिए आंशिक रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया था। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने अब इस जनोपयोगी भूमि के वाणिज्यिक और निजी उपयोग को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए होटल प्रबंधन के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है।
नगर निगम ने भेजा करोड़ों रुपये का डिमांड नोटिस
बीएमसी प्रशासन ने सार्वजनिक स्थानों के अनन्य उपयोग को लेकर ताज महल पैलेस होटल को लगभग 27.12 करोड़ रुपये का एक भारी-भरकम डिमांड नोटिस जारी किया है। नागरिक निकाय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा के नाम पर लंबे समय से दी जा रही रियायतें अब समाप्त की जा रही हैं। इस कड़े कदम के बाद नगर निगम और कॉर्पोरेट जगत के बीच वित्तीय देनदारियों को लेकर एक नया विवाद खड़ा होने की संभावना जताई जा रही है।
सड़क और फुटपाथ के उपयोग का अलग-अलग आकलन
नगर निगम के 'ए' वार्ड के सहायक आयुक्त द्वारा जारी किए गए विस्तृत आधिकारिक नोटिस में इस भारी-भरकम राशि का पूरा लेखा-जोखा दिया गया है। इसके तहत, होटल द्वारा आसपास की मुख्य सड़क के इस्तेमाल के एवज में 4.97 करोड़ रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, पैदल चलने वालों के लिए बने फुटपाथ को होटल की सुरक्षा घेरे में शामिल करने के बदले सबसे बड़ी रकम यानी 22.15 करोड़ रुपये का दावा किया गया है।
ब्याज और विलंब शुल्क शामिल होने से बढ़ी रकम
बीएमसी द्वारा तैयार की गई इस कुल 27.12 करोड़ रुपये की बकाया राशि में केवल मूल शुल्क ही शामिल नहीं है, बल्कि इसमें लंबी अवधि का संचित शुल्क भी जोड़ा गया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस वित्तीय मांग पत्र में मार्च 2026 तक की अवधि का पूरा ब्याज और नियमानुसार लगने वाला विलंब शुल्क भी जोड़कर अंतिम गणना की गई है। इस वजह से यह राशि इतनी अधिक बढ़ गई है, जिसे चुकाने के लिए होटल को एक निश्चित समय सीमा दी गई है।
सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक हित के बीच कानूनी बहस
यह मामला सुरक्षा की तात्कालिक आवश्यकता और सार्वजनिक संपत्तियों के नागरिक अधिकारों के बीच एक नई कानूनी और प्रशासनिक बहस को जन्म दे रहा है। आतंकवादी हमले के बाद मुंबई पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की सिफारिशों के आधार पर ही यह सुरक्षा घेरा तैयार किया गया था। अब देखना यह होगा कि होटल प्रबंधन इस भारी-भरकम जुर्माने और शुल्क के नोटिस पर क्या कानूनी रुख अपनाता है या फिर नगर निगम के साथ बातचीत के जरिए इसका कोई बीच का रास्ता निकाला जाता है।
जापानी वीडियो, स्लो पॉइजन और सुपारी किलर... केतन अग्रवाल मर्डर केस में सनसनीखेज खुलासे
16 Jul, 2026 03:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे। देश के बहुचर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में जांच एजेंसियों के हाथ बेहद हैरान कर देने वाले तथ्य लगे हैं, जो आरोपी सिया और चेतन के खिलाफ अदालत में सबसे पुख्ता सबूत बन सकते हैं। इस सनसनीखेज मामले में अब कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं कि किस तरह दोनों ने मिलकर केतन को रास्ते से हटाने के लिए महीनों पहले से खतरनाक जाल बुनना शुरू कर दिया था। पुलिस की सघन तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने वारदात को अंजाम देने के लिए स्लो पॉइजन से लेकर कॉन्ट्रैक्ट किलर तक का सहारा लेने की कोशिश की थी, लेकिन अंत में एक सोची-समझी साजिश के तहत इस खौफनाक हत्याकांड को अंजाम दिया गया।
गुपचुप शादी और हत्या की पहली नाकाम साजिश
पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस पूरे हत्याकांड की मुख्य वजह सिया और चेतन की गुपचुप शादी को माना जा रहा है। जांच में सामने आया है कि दोनों ने साल 2025 में राजस्थान के प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर में चुपके से विवाह कर लिया था, जिसके पुख्ता सबूत जुटाने के लिए पुणे ग्रामीण पुलिस की एक विशेष टीम वहां पहुंचकर सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। पुलिस के हाथ दोनों की शादी की कुछ तस्वीरें भी लगी हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। तफ्तीश में यह भी खुलासा हुआ है कि शादी के बाद से ही दोनों ने केतन को रास्ते से हटाने के लिए पहले स्लो पॉइजन (धीमा जहर) देकर उसे मारने या हमेशा के लिए अपाहिज बनाने की कोशिश की थी, लेकिन सही समय पर जहर का इंतजाम न हो पाने के कारण उनका यह पहला प्लान फेल हो गया था।
कॉन्ट्रैक्ट किलर से मुलाकात और सरकारी गवाह का शिकंजा
जहर देने की योजना विफल होने के बाद सिया और चेतन ने केतन की हत्या के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट किलर से संपर्क साधा था। दोनों की एक अपराधी से बातचीत भी तय हो गई थी और उसने इस काम के लिए हामी भर दी थी, लेकिन ऐन वक्त पर वह शख्स कानूनी कार्रवाई के डर से पीछे हट गया। पुलिस ने अब उसी शख्स को इस मामले में अपना सबसे बड़ा सरकारी गवाह बना लिया है, जिसके बयान आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने में अहम साबित होंगे। इसके साथ ही पुलिस ने उस होटल के सीसीटीवी फुटेज भी अपने कब्जे में ले लिए हैं, जहां सिया और चेतन ने इस कथित शूटर के साथ बैठकर मर्डर की डील फाइनल करने के लिए मीटिंग की थी।
लोहागढ़ किले का सुसाइड कनेक्शन और रेकी का सच
केतन अग्रवाल की मौत की जांच के दौरान पुलिस के हाथ एक ऐसा सुराग लगा है जिसने लोहागढ़ फोर्ट में हुए एक पुराने मामले की परतें भी खोल दी हैं। दरअसल, मार्च 2025 में उसी जगह पर एक 21 वर्षीय लॉ की छात्रा की संदेहास्पद मौत हुई थी, जिसे आत्महत्या माना गया था। सिया ने इस खबर को अखबार में पढ़ा था और यहीं से उसके दिमाग में केतन को ठिकाने लगाने का आइडिया आया। वह जानती थी कि केतन को ट्रैकिंग का शौक है, इसलिए उसे वहां बुलाना आसान होगा और वहां कोई सीसीटीवी कैमरा न होने के कारण पकड़े जाने का खतरा भी बेहद कम रहेगा। मर्डर प्लान को पुख्ता करने के लिए चेतन और सिया ने 31 मई को वहां जाकर बाकायदा रेकी की थी, सेल्फी ली थी और वीडियो भी बनाए थे, जिसके बाद इस मर्डर को अंजाम दिया गया। अब पुलिस उस छात्रा की मौत की फाइल भी दोबारा खोल रही है।
पुलिस से बचने के लिए जापानी वीडियो से ली ट्रेनिंग
इस हत्याकांड का सबसे शातिराना पहलू यह सामने आया है कि आरोपियों ने अपराध करने के बाद कानून के शिकंजे से बचने की पूरी तैयारी कर रखी थी। सिया और चेतन ने इंटरनेट पर घंटों लंबे कुछ जापानी वीडियो देखे थे, जिनमें यह सिखाया गया था कि यदि कभी पुलिस गिरफ्तार कर ले या कड़ाई से पूछताछ करे, तो बिना डरे बेहद शांत रहकर किस तरह जवाब देने चाहिए ताकि कोई शक न हो। पुलिस ने दोनों आरोपियों की इंटरनेट सर्च और वेब हिस्ट्री खंगालकर उन दोनों जापानी वीडियो के लिंक बरामद कर लिए हैं, जो कोर्ट में यह साबित करने के लिए सबसे बड़ा डिजिटल सबूत बनेंगे कि यह पूरी घटना अचानक नहीं, बल्कि बेहद ठंडे दिमाग से प्लान की गई हत्या थी।
परिसीमन पर महाविकास अघाड़ी में बदलाव? उद्धव ठाकरे के करीबी के बयान से अटकलें तेज
16 Jul, 2026 02:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नागपुर। आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार द्वारा लाए जाने वाले बहुचर्चित परिसीमन विधेयक को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने इस मामले पर पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि विपक्ष इस विधेयक का पुरजोर विरोध करेगा। हालांकि, उन्होंने यह विकल्प भी खुला रखा कि यदि सरकार विपक्ष द्वारा सुझाए गए महत्वपूर्ण और आवश्यक संशोधनों को इस विधेयक में शामिल करने के लिए तैयार होती है, तो विपक्षी दल इस संवेदनशील मुद्दे पर दोबारा विचार करने के लिए मेज पर बैठ सकते हैं।
विधेयक के प्रावधान और सुप्रिया सुले का रुख
केंद्र सरकार की योजना आगामी 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश करने की है, जिसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और देश में नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव शामिल है। इस प्रस्तावित कानून पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने भी अपनी राय दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का फॉर्मूला लाती है, तो इसका विरोध करने की कोई ठोस वजह नहीं होगी, लेकिन इस पर अंतिम फैसला विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की सामूहिक बैठक में ही लिया जाएगा।
विपक्षी गठबंधन की बैठक और सामूहिक निर्णय पर जोर
संजय राउत ने सुप्रिया सुले के बयान का हवाला देते हुए कहा कि अभी यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि सरकार इसी सत्र में इस विधेयक को पटल पर रखेगी या नहीं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जब भी यह विधेयक संसद में पेश किया जाएगा, विपक्षी गठबंधन के सभी घटक दल एक साथ बैठेंगे। इसके बाद देश के संघीय ढांचे और सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए गहन चर्चा की जाएगी और आगे की रणनीति को लेकर एक सर्वसम्मत तथा सामूहिक निर्णय लिया जाएगा।
पार्टी में टूट के दावों को बताया पूरी तरह बेबुनियाद
राजनीतिक गलियारों में चल रही तमाम तरह की अटकलों और अफवाहों पर विराम लगाते हुए राज्यसभा सांसद संजय राउत ने विरोधियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मीडिया में चल रही उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें विपक्षी दलों में बड़ी टूट होने या सांसदों-विधायकों को तोड़कर बहुमत जुटाने की बातें कही जा रही हैं। राउत ने स्पष्ट लहजे में कहा कि इस प्रकार की भ्रामक खबरों का जमीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं है और यह विपक्ष को कमजोर दिखाने की एक नाकाम कोशिश मात्र है।
राम रक्षा आंदोलन की शुरुआत और अयोध्या का मुद्दा
परिसीमन के अलावा संजय राउत ने पार्टी के आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की भी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वहां की प्रशासनिक व्यवस्था के विरोध में शिवसेना (उबाठा) शनिवार से एक बड़ा प्रदर्शन शुरू करने जा रही है, जिसे 'राम रक्षा आंदोलन' का नाम दिया गया है। इस आंदोलन के जरिए पार्टी जनता के बीच जाकर मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी और सरकार को घेरने का काम करेगी।
मुंबई के प्रतिष्ठित ताज होटल पर BMC की सख्ती, ₹22 करोड़ का नोटिस जारी
16 Jul, 2026 12:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) ने देश के प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक ताज महल पैलेस होटल को करीब 22 करोड़ रुपये का एक बड़ा वित्तीय नोटिस जारी किया है। यह पूरा मामला साल 2008 में हुए 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद होटल की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उसके आस-पास लगाए गए सिक्योरिटी बैरियर और बोलार्ड (सुरक्षा खंभों) के लंबित शुल्क से जुड़ा हुआ है। इस भारी-भरकम राशि के नोटिस के बाद एक बार फिर नगर निगम और देश के इस बड़े होटल समूह के बीच कानूनी और प्रशासनिक खींचतान तेज हो गई है।
हमलों के बाद सुरक्षा कारणों से लगाए गए थे बैरियर
साल 2008 के भीषण आतंकी हमलों के बाद सुरक्षा एजेंसियों की सिफारिश पर ताज महल पैलेस होटल के चारों ओर लोहे और कंक्रीट के मजबूत बोलार्ड व बैरिकेड्स लगाए गए थे। इसका मुख्य उद्देश्य भविष्य में किसी भी संभावित आत्मघाती कार हमले या संदिग्ध वाहनों को होटल परिसर के करीब आने से रोकना और पर्यटकों की सुरक्षा को पुख्ता करना था। हालांकि, बीएमसी के मौजूदा नियमों के मुताबिक, मुंबई की सार्वजनिक सड़कों, चौराहों और फुटपाथों पर किसी भी प्रकार के बैरियर या सुरक्षात्मक निर्माण लगाने के लिए संबंधित संस्थान से जगह का व्यावसायिक या सुरक्षा शुल्क वसूला जाता है।
सालों से पेंडिंग शुल्क और करोड़ों का बकाया
सुरक्षा के लिहाज से ये बोलार्ड पहली बार वर्ष 2008 में ही स्थापित कर दिए गए थे, जिसके बाद से लगातार इस पर लगने वाला शुल्क पेंडिंग चलता आ रहा है। पिछले 18 वर्षों के दौरान संचित होते-होते अब यह कुल बकाया राशि बढ़कर लगभग 22 करोड़ रुपये के विशाल आंकड़े तक पहुंच गई है। म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि होटल प्रबंधन ने पूर्व में इस शुल्क का कुछ हिस्सा जरूर चुकाया है, लेकिन नियमों के तहत एक बहुत बड़ी राशि अभी भी निगम के खाते में आना बाकी है, जिसके चलते यह नोटिस जारी करना पड़ा।
ताज प्रबंधन की फीस माफी की मांग और दलील
इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए ताज होटल के प्रतिनिधियों और प्रबंधन ने निगम से इस पूरी फीस को माफ करने या इसमें बड़ी रियायत देने की जोरदार मांग की है। होटल प्रशासन का तर्क है कि ये बैरियर किसी निजी स्वार्थ या व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और देश की साख से जुड़े इस ऐतिहासिक स्थान को आतंकी खतरों से बचाने के लिए लगाए गए थे। फिलहाल इस संवेदनशील मुद्दे पर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और होटल मैनेजमेंट के उच्च अधिकारियों के बीच बैठकों का दौर जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि अगले सप्ताह तक इस पर कोई अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
राजनीतिक मोर्चे पर पांच साल से अटका है मामला
इस शुल्क माफी के विवाद का इतिहास काफी पुराना है और इस पर साल 2020 से ही नगर निगम की बैठकों में चर्चा चल रही है। वर्ष 2020 में तत्कालीन शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेतृत्व वाली बीएमसी की स्टैंडिंग कमिटी ने होटल को राहत देते हुए करीब 10 करोड़ रुपये की छूट के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी भी दे दी थी। हालांकि, राजनीतिक समीकरण बदलने के बाद साल 2025 में राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एडमिनिस्ट्रेटर ने उस पुराने रियायती प्रस्ताव को वापस ले लिया, जिसके कारण यह पूरा मामला एक बार फिर ठंडे बस्ते से निकलकर नए सिरे से पेंडिंग हो गया है।
परिसीमन बिल पर गरमाई राजनीति, एकनाथ शिंदे ने सुप्रिया सुले को दी नसीहत
15 Jul, 2026 02:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में परिसीमन विधेयक और विपक्षी गठबंधन के रुख को लेकर राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं। शरद पवार गुट द्वारा इस विधेयक का समर्थन किए जाने की अटकलों के बीच राज्य के उप मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने एक बड़ा बयान दिया है। एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि सुप्रिया सुले की पार्टी इस महत्वपूर्ण विधेयक का समर्थन करती है तो यह बेहद सकारात्मक कदम होगा, लेकिन वर्तमान में उनका पूरा विपक्षी गठबंधन इस मुद्दे पर गहरे असमंजस की स्थिति में फंसा हुआ है।
विपक्ष की मजबूरी और महिला आरक्षण का हवाला
उप मुख्यमंत्री ने तंजिया लहजे में विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि देश और राज्य के विकास के लिए विपक्ष को परिसीमन विधेयक का समर्थन करना ही पड़ेगा, अन्यथा जनता खुद उनका पुरजोर विरोध करेगी। उन्होंने महिला आरक्षण का उदाहरण देते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को भली-भांति पता है कि यदि उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें आम जनता के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ेगा और उनकी स्थिति भी पश्चिम बंगाल जैसी हो जाएगी। शिंदे ने पूरे आत्मविश्वास के साथ दावा किया कि यह सभी महत्वपूर्ण विधेयक हर हाल में पारित होकर रहेंगे।
उद्धव गुट के सांसदों की बगावत और शिवसेना में विलय
इस महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एकनाथ शिंदे के साथ उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर आए चार सांसद भी मंच पर मौजूद रहे। उद्धव गुट में हुई इस बड़ी बगावत और सांसदों के अपनी पार्टी में शामिल होने पर प्रतिक्रिया देते हुए शिंदे ने कहा कि कुल छह सांसद दो-तिहाई बहुमत के साथ आधिकारिक तौर पर उनके साथ आ चुके हैं। इन सभी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष उपस्थित होकर निर्धारित कानूनी प्रक्रिया को पूरी प्रामाणिकता के साथ संपन्न किया है, जिसके बाद अब संसद में शिवसेना का वास्तविक बहुमत और ताकत काफी बढ़ चुकी है।
जयंत पाटील की मुलाकात और एनडीए का आंतरिक फैसला
शरद पवार के करीबी नेता जयंत पाटील की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हुई मुलाकात पर बोलते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हर मुलाकात को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जब शरद पवार उनसे मिलने आए थे, तब कई लोगों के पेट में दर्द होने लगा था। उन्होंने साफ किया कि वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के एक बेहद विश्वसनीय और मजबूत सहयोगी हैं, और गठबंधन में किसी नए दल को शामिल करने का अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के स्तर पर ही लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री पद की दावेदारी और एजेंडे पर रुख साफ
राज्य के सर्वोच्च पद यानी मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चल रही बयानबाजी पर पूर्णविराम लगाते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि वर्तमान में महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद के लिए कोई भी रिक्ति उपलब्ध नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि हर राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं की यह स्वाभाविक इच्छा होती है कि उनकी पार्टी का नेता मुख्यमंत्री बने, ठीक वैसे ही जैसे उनके कार्यकाल के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं को देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री होने की इच्छा थी। शिंदे ने कहा कि वे इन बातों का बिल्कुल बुरा नहीं मानते क्योंकि आज देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री हैं और वह खुद उप मुख्यमंत्री के रूप में राज्य के विकास के मुख्य एजेंडे पर मिलकर काम कर रहे हैं।
गैंगस्टर से संपर्क के आरोपों पर पुलिस सख्त, 50 लोगों से हुई पूछताछ
15 Jul, 2026 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे। महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने पुणे शहर, पुणे ग्रामीण और पिंपरी-चिंचवड़ के विभिन्न इलाकों में एक बड़ी और व्यापक कार्रवाई को अंजाम दिया है। आतंकवाद निरोधक दस्ते ने पाकिस्तान में मौजूद कुख्यात गैंगस्टर शहजाद भट्टी के साथ कथित तौर पर सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में रहने के संदेह में 51 स्थानीय युवकों को हिरासत में लिया। इस संवेदनशील मामले को लेकर सुरक्षा एजेंसी ने सभी संदिग्धों से घंटों तक बेहद गहन पूछताछ की। हालांकि, प्राथमिक पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी युवकों को फिलहाल छोड़ दिया गया है, लेकिन उनके संचार उपकरणों को जांच के दायरे में रखा गया है।
विदेशी गैंगस्टर के सोशल मीडिया नेटवर्क से जुड़े थे युवा
एटीएस के आला अधिकारियों से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, हिरासत में लिए गए यह सभी युवक सीमा पार बैठे गैंगस्टर शहजाद भट्टी के विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल्स और अकाउंट्स के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। इंटरनेट पर गैंगस्टर के पोस्ट को लाइक करने, उन पर कमेंट करने और अपनी प्रतिक्रियाएं साझा करने जैसी ऑनलाइन गतिविधियों के कारण ही ये सभी युवक सुरक्षा एजेंसी के रडार पर आ गए थे। जांच में यह बात सामने आई है कि इनमें से सबसे अधिक 33 युवक अकेले पुणे शहर के कोथरूड, येरवडा, पर्वती, विश्रांतवाड़ी, फरासखाना और कोंढवा जैसे रिहायशी इलाकों के निवासी हैं, जबकि शेष अन्य युवक पिंपरी-चिंचवड़ तथा पुणे के ग्रामीण अंचलों से ताल्लुक रखते हैं।
डिजिटल उपकरणों की जब्ती और गहन फॉरेंसिक पड़ताल
इस पूरे मामले में आतंकवाद निरोधक दस्ते ने स्थानीय पुलिस बल के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाया और संदिग्ध युवकों के ठिकानों पर अचानक छापेमारी की। इस तलाशी अभियान के दौरान पुलिस ने सभी 51 युवकों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल उपकरणों को अपने कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए लैब भेज दिया है। साइबर और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम इन उपकरणों में मौजूद पर्सनल चैट, कॉन्टैक्ट लिस्ट, कॉलिंग हिस्ट्री और विदेशी हैंडल्स से आए संदेशों की बारीकी से पड़ताल कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं इनके संबंध किसी राष्ट्रविरोधी या आपराधिक नेटवर्क से तो नहीं हैं।
बिना किसी गिरफ्तारी के फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार
सुरक्षा एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे घटनाक्रम में अभी तक किसी भी युवक की आधिकारिक तौर पर गिरफ्तारी दर्ज नहीं की गई है और शुरुआती पूछताछ के बाद सभी को उनके घर जाने की अनुमति दे दी गई है। एटीएस और पुणे पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय की जाएगी। यदि किसी भी उपकरण से कोई आपत्तिजनक या संदिग्ध सामग्री बरामद होती है, तो संबंधित युवक को दोबारा तलब किया जाएगा। यह कार्रवाई दर्शाती है कि सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को गुमराह करने वाले विदेशी तत्वों पर कितनी पैनी नजर रख रही हैं।
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