महाराष्ट्र
मुंबई की राजनीति में हलचल, भाजपा अध्यक्ष अमित साटम का बयान – “कहीं कोई खान न बन जाए मुंबई का मेयर
17 Sep, 2025 05:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में सबसे ज्यादा अहम मुंबई के दंगल को माना जा रहा है। ऐसे में जब सुप्रीम कोर्ट ने लोकल बॉडी चुनावों को कराने के लिए 21 जनवरी, 2026 की डेडलाइन तय कर दी है तब मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम का एक ऐसा बयान सामने आया है। जिस पर राजनीतिक गरमा सकती है। साटम ने चेताया है कि किसी खान को मेयर न बनने दें। अमित साटम में बीजेपी की विजय संकल्प रैली में यह विवास्पद टिप्पणी की। इस रैली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री पीयूष गाेयल भी मौजूद थे। बीजेपी के नवनियुक्त मुंबई अध्यक्ष ने मुस्लिम समुदाय का हवाला देते हुए कहा कि आगामी नगर निगम चुनाव शहर की सुरक्षा के लिए हैं। किसी खान को मुंबई का मेयर नहीं बनना चाहिए, जिससे विवाद खड़ा हो गया है। अमित साटम अंधेरी वेस्ट से विधायक भी हैं।
साटम ने दूसरे देशों का दिया हवाला
साटम को हाल ही में पार्टी ने आशीष शेलार की जगह पर मुंबई बीजेपी की कमान सौंपी है। साटम एक जमाने में बीजेपी के दिग्गज नेता रहे गोपीनाथ मुंडे के पीए यानी निजी सहायक थे। साटम बीएमसी के पार्षद भी रह चुके हैं। साटम ने जब बीजेपी की विजय संकल्प रैली में यह टिप्पणी की तो कार्यक्रम में तमाम बीजेपी के नेता मौजूद थे। साटम ने चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि यह लड़ाई मुंबई को सुरक्षित रखने की है। अंतरराष्ट्रीय देशों में घुसपैठ हो रही है और उनके रंग बदल रहे हैं। कुछ शहरों के मेयरों के उपनाम देखिए। क्या हम मुंबई में भी यही पैटर्न चाहते हैं? साटम की टिप्पणी को लंदन के मेयर सादिक खान की ओर इशारा कर रही है, जिनकी जड़ें पाकिस्तान में हैं।
उद्धव ठाकरे पर साधा निशाना
साटम ने कहा कि यह पैटर्न वर्सोवा-मालवणी शैली हर जगह फैल सकती है। मुंबईकरों के दरवाजे पर एक बांग्लादेशी होगा। कल हर वार्ड में एक हारून खान चुना जा सकता है, और कोई खान मुंबई का मेयर बन सकता है। ऐसा न होने दें। हारून खान उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी के विधायक हैं। वह मुंबई की वर्सोवा सीट से जीते हैं। वह लंबे समय से उद्धव ठाकरे के साथ हैं। मुंबई के वर्सोवा और मालवणी में मुस्लिम आबादी अच्छी-खासी है। साटम के बयान के वोटों के धुव्रीकरण करने से जोड़कर देखा जा रहा है। साटम ने कहा कि यह जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं की है कि महायुति का एक मेयर बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) का कार्यभार संभाले। बीएमसी में मेयर पद लंबे वक्त से उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना के पास रहा है। मुंबई की आखिरी मेयर किशोरी पेडनेकर थीं। अब तक मुंबई को कुल 76 मेयर मिले हैं।
मुंबई शाखा में HDFC बैंक कर्मचारी द्वारा जवान के साथ बदसलूकी, मामला तूल पकड़ता देख जांच के आदेश
17 Sep, 2025 05:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई : HDFC Bank मुंबई की एक कर्मचारी का ऑडियो सामने आया है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर गुस्सा उमड़ रहा है। बताया जा रहा है कि यह ऑडियो एचडीएफसी बैंक की एक कर्मचारी अनुराधा वर्मा है। इसमें वह लोन रिकवरी के लिए सेना के एक जवान को कॉल करती है। इस दौरान सेना के जवान ने ज्यादा ब्याज पर सवाल उठाया तो वह उसके ऊपर भड़क जाती है। उसे भद्दी-भद्दी गालियां देती है और यहां तक कि पूरी सेना और शहीदों के लिए आपत्तिजनक शब्द कहती है। लोगों ने एचडीएफसी बैंक से इस महिला स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है ऑडियो में सुनाई दे रहा है कि महिला कह रही है कि तुम्हें मैसेज का रिप्लाई तो देना चाहिए था न। बताते कि मजबूरी है मैडम, अभी नहीं दे सकता। जवाब नहीं दे रहे। इस पर शख्स पूछता है कि मैंने कई बार पूछा कि मेरा 15 लाख 85 हजार लोन सेंशन किया आपने, 16 लाख के हिसाब से ब्याज कैसे लिया जा रहा है?
सेना के जवान को बताया गवांर
इस पर अनुराधा वर्मा तिलमिला जाती है और भड़कते हुए कहती है बताया तो है, 75 बार तुम्हे। अब तुम गंवार हो तो क्या कर सकते हैं। पढ़े-लिखे होते तो किसी अच्छी कंपनी में नौकरी कर रहे होते। गंवार हो, तभी बॉर्डर पर भेज दिए गए हो। गंवार-जाहिल कहीं के।
शहीदों को लेकर आपत्तिजनक बात
शख्स महिला से ठीक से बात करने को कहता है, लेकिन वह उसकी एक नहीं सुनती और आगे कहती है कि किसी के हक का खाने का नहीं। हजम नहीं होगा। तुम्हारे जैसे लोग ही होते हैं, जिनके बच्चे विकलांग पैदा होते हैं। तुम्हारे जैसे ही होते हैं जो बॉर्डर पर शहीद हो जाते हैं। रखो अभी फोन। आओ पंद्रह दिन में, मैं देखती हूं तुम कहां के तुर्रम खान हो। कौन सी चीज हो। मैं भी डिफेंस फैमिली से बिलॉन्ग करती हूं। गाली देते हुए वह कहती है ... मैं भी 12 साल से सीआरपीएफ में बिजनेस कर रही हूं। महिला की गाली सुनते ही सेना का जवान कहता है, मैं आपको दिखाता हूं, जिस तरह से आप बात कर रही हैं।
'...ज्ञान क्या घंटा दोगे...'
महिला कहती है दिखाओ... दिखाओ... दिखाओ... कितनी बड़ी फैमिली से हो। इतनी बड़ी फैमिली से होते तो लोन पर नहीं जीते। 15-16 लाख लोन न लेते। चल ज्ञान मत दे। लोन पर जी रहे हो, मुझे ज्ञान दोगे घंटा...। सेना का जवान कहता है.. लोन पर जी रहे हो? महिला कहती है हां बिल्कुल, 5 हजार रुपये देने में तुम्हारी नानी याद आ गई हैं। सेना का जवान कहता है, अब मैं आपको दिखाता हूं, आपकी रिकॉर्डिंग है मेरे पास। महिला कहती है बोल मत अब आकर दिखा... रख रिकॉर्डिंग, जिधर भेजने का है भेज, जिधर दिखाने का है, दिखा, बिंदास दिखा, जो चाहिए मैं भेज देती हूं। तुम क्या घंटा मुझे देखोगे, तुम जो उखाड़ सकते हो, उखाड़ लो। तू आ, दिखाती हूं।
'तेरे बाप की नौकर नहीं...'
सेना का जवान कहता है कि सर्विस सर्टिफिकेट जो बनाया है, वह मुझे भेजो, तो वह कहती है कि क्यों स्क्रीनशॉट नहीं लिया क्या? क्यों कुछ भेजूं, तेरे बाप की नौकर हूं। पागल दिखती हूं, पांच-छह हजार रुपये के लिए रो रहा है... चल रख फोन।
महाराष्ट्र के गांव में अनोखा जन्म, किसान की भैंस से पैदा हुआ दो सिर वाला बछड़ा; ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना शुरू की
17 Sep, 2025 05:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोल्हापुर: महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के कागल तहसील के बनगे गांव में एक अनोखी और दुर्लभ घटना सामने आई है। यहां किसान सुरेश सुतार के घर पर उनकी भैंस ने एक बछड़े को जन्म दिया। लेकिन जब उन्होंने भेंस को बछड़े को देखा तो हैरान रह गए। दरअसल इस बछड़े के एक नहीं बल्कि दो सिर थे। जैसे ही इसकी जानकारी गांव वालों को लगी तो किसानों के घर पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। हर कोई इस बछड़े को देखना चाहता था और उसके साथ फोटो खिंचवाने लगा। यह घटना पूरे गांव में चर्चा का विषय बन गई है।
गांव वाले मान रहे चमत्कार
ग्रामीण इस बछड़े को देखने के बाद इसे चमत्कार मान रहे हैं। कुछ लोगों ने तो उसकी पूजा करना शुरू कर दिया। तो वहीं कुछ धूप और अगरबत्ती भी साथ ले आए। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई चमत्कार नहीं बल्कि एक दुर्लभ जैविक स्थिति है, जिसे पॉलीसेफली कहा जाता है। इसमें भ्रूण जुड़वा बनने की प्रक्रिया शुरू तो करता है लेकिन पूरी नहीं हो पाती। इसी कारण एक ही शरीर पर दो सिर विकसित हो जाते हैं। इस स्थिति में पैदा हुए बछड़े के दो सिर, दो आंखें, दो कान और अलग-अलग मुंह होते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से ऐसे बछड़ों का जीवन अनिश्चित होता है। कई बार यह जन्म के बाद लंबे समय तक जीवित नहीं रह पाते, जबकि कुछ मामलों में वे कुछ समय तक जी सकते हैं।
डॉक्टर बोले- इसे अधविश्वास ने न जोड़ें
वहीं इस बछड़े को देखने के बाद कई लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ इसे चमत्कार तो कुछ इसे भगवान का रूप मान रहे हैं। हालांकि, डॉक्टरों और पशु विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीणों को इसे अंधविश्वास से जोड़ने के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना चाहिए। यह दुर्लभ मामला न सिर्फ कोल्हापुर जिले में बल्कि पूरे महाराष्ट्र में चर्चा का केंद्र बन गया है। इससे पहले भी देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे मामले सामने आए हैं, लेकिन वे बहुत ही कम देखने को मिलते हैं।
उद्धव ठाकरे का तीखा सवाल: ‘अगर यही मापदंड है तो क्या जय शाह को भी देशद्रोही कहेंगे?’ – भारत-पाक मैच पर PM मोदी से उठाए सवाल
13 Sep, 2025 05:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: एशिया कप में भारत-पाकिस्तान मैच कल यानी रविवार शाम को खेला जाएगा। हालांकि इस मैच से पहले भारत में विपक्षी दलों के नेताओं ने इस मैच का बहिष्कार करने की मांग की है। शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए विदेश में प्रतिनिधिमंडल भेजने से बेहतर होता कि वे भारत-पाकिस्तान मैच का बहिष्कार करते। कल सुबह 11 बजे सभी महिलाएं इकट्ठा होकर एक बड़े डिब्बे में सिंदूर की पुड़िया भरकर भेजेंगी। अभी समय नहीं बीता है। पीएम मोदी को मजबूती से कहना चाहिए कि यह मैच नहीं होगा। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहता हूं कि क्या आप जय शाह को भी देशद्रोही कहेंगे? जैसे आपके कुछ अंधभक्तों ने नीरज चोपड़ा को देशद्रोही कहा था? उद्धव ठाकरे ने यह सवाल पूछा है।
पहलगाम हमले का खून अभी सूखा नहीं-उद्धव
उद्धव ठाकरे ने मुंबई में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पहलगाम हमले में मारे गए लोगों का खून अभी सूखा नहीं है। घाव अभी भरा नहीं है। उस समय हम सभी को लग रहा था कि पाकिस्तान अपनी औकात में नहीं रहेगा। पाकिस्तान को दो-तीन टुकड़ों में बांटने के मकसद से एक युद्ध छेड़ा गया था और इसे ' ऑपरेशन सिंदूर' नाम दिया गया था। रक्षा मंत्री ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। पाकिस्तान हमेशा कुछ दिनों बाद हमला करता है। जब उसके सैनिक बहादुरी दिखाते हैं।
पाकिस्तान से मैच कैसे खेल रहे-उद्धव
उद्धव ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कहते हैं कि उन्होंने इस युद्ध को रोका। भारतीय जैवलिन थ्रो खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने एक पाकिस्तानी खिलाड़ी को भारत आमंत्रित किया था। वह आए या नहीं, यह तो पता नहीं, लेकिन कुछ अंधभक्तों ने नीरज चोपड़ा को देशद्रोही कहा था। उद्धव ठाकरे ने कहा कि जिस पाकिस्तान से हमने युद्ध का ऐलान किया था, उसी के साथ हम मैच खेल रहे हैं।
पीएम मोदी से पूछा सवाल
उद्धव ठाकरे ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद मोदी जी ने दुनिया भर में सभी दलों के सांसदों को भेजकर कहा था कि पाकिस्तान हमारे देश में आतंकवाद फैला रहा है। अब कल के मैच के बारे में मोदी जी का क्या कहना है? मुझे लगता है ये देशभक्ति है और धंधा चल रहा है। क्या रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह युद्ध रुकने का ऐलान करने वाले हैं?
जावेद मियांदाद का जिक्र
उद्धव ने पूछा कि क्या हमें पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना चाहिए जबकि हमारे सैनिक सीमा पर अपनी जान कुर्बान कर रहे हैं? उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए क्रिकेट मैच को देशभक्ति का मजाक करार दिया। उद्धव ने मुंबई स्थित आवास ‘मातोश्री’ में बाल ठाकरे और पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियांदाद के बीच हुई एक पुरानी मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि मेरे पिता ने जावेद मियांदाद से कहा था कि जब तक पाकिस्तान से भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियां जारी रहेंगी, तब तक कोई क्रिकेट मैच नहीं खेला जाएगा।
महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर: महाराष्ट्र में जिला परिषद अध्यक्ष की 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित, 34 सीटों पर तय हुआ आरक्षण
13 Sep, 2025 05:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों के इसी साल के अंत में होने की संभवना व्यक्त की जा रही है। महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग द्वारा इस दिशा में तैयारियां भी की जा रही है। एक तरफ जहां चुनाव आयोग तैयारियों में व्यस्त है तो वहीं दूसरी ओर सरकार की तरफ से बड़ा अपडेट सामने आया है। सरकार ने राज्य के 34 जिला परिषद के अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण घोषित कर दिया है। सरकार की तरफ से जारी शासनादेश में ठाणे, पालघर, पुणे, सोलापुर सहित राज्य की 34 जिला परिषदों के अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण घोषित किया गया है। इसमें महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया गया है।
17 सीटों पर महिला बनेंगी अध्यक्ष
राज्य सरकार के शासनादेश के अनुसार 34 में से 17 सीटों पर महिला अध्यक्ष बनेंगी। जिला परिषद अध्यक्ष पद के लिए जारी की गई आरक्षण की सूची के अनुसार, ठाणे, पुणे, रायगढ़, सिंधुदुर्ग, नाशिक, जलगांव, छत्रपति संभाजीनगर, बुलढाणा, यवतमाल और नागपुर जिला परिषदों के अध्यक्ष पद सामान्य वर्ग के लिए खुला रखा गया है। वहीं ठाणे, सांगली, कोल्हापुर, लातूर, अमरावती, गोंदिया और गढ़चिरौली जिलों में सामान्य (महिला) आरक्षण लागू किया गया है। इसी तरह अनुसूचित जाति के लिए बीड (महिला), हिंगोली, परभणी, वर्धा और चंद्रपुर (महिला) पद आरक्षित किए गए हैं. सूची के अनुसार, अनुसूचित जनजाति के लिए पालघर, नंदुरबार, अहिल्यानगर के अध्यक्ष पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। इसी तरह अकोला और वाशिम (महिला) जिलों में भी अध्यक्ष पद महिलाओं के लिए आरक्षित होने की वजह से महिला राज देखने को मिलेगा।
जिला परिषदों के अध्यक्ष पद की आरक्षण सूची
ठाणे- सामान्य (महिला)
पालघर-अनुसूचित जनजाति
रायगढ़ - सामान्य
रत्नागिरी - नागरिकों की पिछड़ी श्रेणी (महिला)
सिंधुदुर्ग-सामान
नाशिक - सामान्य
धुले-नागरिकों की पिछड़ी श्रेणी (महिला)
नंदुरबार-अनुसूचित जनजाति
जलगांव-सामान्य
अहिल्यानगर अनुसूचित जनजाति (महिला)
पुणे-सामान्य
सातारा-नागरिकों की पिछड़ी श्रेणी (महिलाएं)
सांगली -सामान्य (महिला)
सोलापुर नागरिकों की पिछड़ी श्रेणी
कोल्हापुर - सामान्य (महिला)
छत्रपति संभाजीनगर-सामान्य
जालना-नागरिकों की पिछड़ी श्रेणी (महिला)
बीड-अनुसूचित जाति (महिला)
हिंगोली - अनुसूचित जातियां
लातूर सामान्य (महिला)
अमरावती - सामान्य (महिला)
अकोला-अनुसूचित जनजाति (महिला)
परभणी-अनुसूचित जाति
वाशिम-अनुसूचित जनजाति (महिला)
बुलढाणा-सामान्य
यवतमाल सामान्य
नागपुर-नागरिकों की पिछड़ी श्रेणी
वर्धा अनुसूचित जाति
भंडारा - नागरिकों की पिछड़ी श्रेणी
गोंदिया - सामान्य (महिला)
चंद्रपुर-अनुसूचित जाति (महिला)
गढ़चिरौली - सामान्य (महिला)
यहां पुरुषों का होगा दबदबा
ओबीसी के लिए रत्नागिरी (महिला), धुले (महिला), सातारा (महिला), सोलापुर, जालना (महिला), नांदेड़, धाराशिव नागपुर नागपुर और भंडारा जिला परिषदों का अध्यक्ष पद आरक्षित रखा गया है। यहां पुरुषों का दबदबा देखने को मिलेगा. इस तरह से विभिन्न श्रेणियों में जारी आरक्षण का स्थानीय निकायों के चुनावों में प्रभाव देखने को मिलेगा।
OBC आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र में मचा हंगामा; युवक की सुसाइड से भड़की नाराज़गी, छगन भुजबल के तेवर से बढ़ी सरकार की टेंशन
13 Sep, 2025 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र में मनोज जरांगे पाटिल की अगुवाई में हुए मराठा आंदोलन को शांत करने के लिए फडणवीस सरकार ने हैदराबाद गैजेट को लेकर एक जीआर (शासनादेश) जारी किया था। छगन भुजबल पहले ही जीआर की भाषा OBC को नामंजूर होने की बात कह चुके हैं। इस सब प्रकरण के बीच महाराष्ट्र के लातूर में ओबीसी समुदाय के युवक और सामाजिक कार्यकर्ता की आत्महत्या ने सरकार की टेंशन बढ़ा दी है। फडणवीस सरकार में मंत्री छगन भुजबल ने कहा है कि आरक्षण बचाने के लिए कुर्बानी देनी पड़ रही है। मराठा आरक्षण के लिए जारी जीआर के बाद ओबीसी समाज इसका विरोध कर रहा है। सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या आरक्षण की आग फिर से तो नहीं भड़केगी?
सरकार ने पर भेदभाव का आरोप
लातूर के युवक भरत कराड द्वारा मांजरा नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या करने के बाद माहौल और गरमा गया है। पुलिस ने इस हादसे को लेकर एक सुसाइड नोट भी बरामद किया है, जिसमें कराड ने महायुति सरकार पर भेदभाव करने के साथ ओबीसी समाज को धोखा देने का आरोप लगाया है। जिस शख्स ने आत्महत्या की है, वह ऑटो रिक्शा चलाता था और ओबीसी से जुड़े आन्दोलन में भाग लेता था। मंत्री भुजबल का आरोप है कि इस जीआर की वजह से ओबीसी आरक्षण को नुकसान पहुंचेगा, हालांकि महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस कह रहे हैं नए सरकारी आदेश का ओबीसी समुदाय पर कोई असर नहीं पड़ेगा और इससे केवल कुनबी जाति के पात्र मराठों को ही मदद मिलेगी।
आरक्षण छीनने नहीं देंगे: भुजबल
भुजबल ने बाद में बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि हमलोग किसी भी कीमत पर ओबीसी का आरक्षण छीनने नहीं देंगे। भुजबल ने कहा कि सरकार द्वारा जारी समाज के लोगों से आत्महत्या जैसा कदम न उठाने की जीआर से ओबीसी समाज के लोगों में बेचैनी है, ओबीसी नेता छगन भुजबल शुक्रवार को कराड के परिवार से मिलने के लिए लातूर पहुंचे। उनके साथ पूर्व मंत्री व ओबीसी नेता धनंजय मुंडे भी मौजूद थे। भुजबल का कहना है कि राज्य में मराठा समाज का वर्चस्व रहा है। उनके पास सत्ता में ताकत के अलावा चीनी मिलें और सहकारी क्षेत्र में दबदबा है। ऐसे में पूरे समाज को ओबीसी वर्ग में शामिल करने की मांग न्यायसंगत नहीं है। भुजबल का कहना है कि मराठा समुदाय में विद्वान लोगों को इस मुद्दे पर बोलना चाहिए।
भुजबल ने रख दिए आंकड़े
भुजबल का कहना है कि मराठा समुदाय को 25,000 करोड़ रुपये (विभिन्न राज्य सरकार की योजनाओं के तहत) मिलते हैं जबकि ओबीसी समुदाय को 5,000 करोड़ रुपये मिलते हैं। इसमें न्याय कहां है? मराठा समुदाय के लिए लगभग हर दूसरे दिन (सरकारी योजनाओं की) नई घोषणाएं होती हैं। एनसीपी के कोटे से मंत्री ने कहा कि मराठा नेता मनोज जरांगे पाटिल ने आतंक का माहौल बनाया और राज्य सरकार को आदेश जारी करने के लिए धमकाया। उन्होंने कहा कि जब राज्य ने उन्हें (मराठों को) दो लाख कुनबी जाति प्रमाण पत्र दिए थे, तब हम चुप थे।
बीजेपी के भीतर हलचल: मोहित कंबोज ने राजनीति से थोड़ा संन्यास लिया, समर्थकों में उड़ा सवाल — अगले कदम क्या होंगे?
13 Sep, 2025 05:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: बीजेपी में उभरते नेता के तौर पर देखे जाने वाले मोहित कंबोज से सक्रिय राजनीति से हटने का फैसला किया है। कंबोज पिछले साल तक सुर्खियों में आ गए थे, जब उन्होंने मुंबई विधानसभा चुनावों में महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी और पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त संजय पांडेय के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान किया था, हालांकि पांडेय चुनाव में नहीं उतरे थे। यह पूर मामला तब हुआ था जब पांडेय कांग्रेस में शामिल हुए थे। मुंबई शहर बीजेपी में अपने तेवरों से जगह बनाने वाले मोहित कंबोज (41) साल के हैं। मोहित कंबोज को महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस का करीबी माना जाता है। मोहित कंबोज ने जहां पर राजनीति से संन्यास का ऐलान किया है तो इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी पत्नी अक्षा कंबोज सुर्खियों में आ गई है।
क्यों लिया राजनीति से संन्यास?
एफपीजे ने मोहित कंबोज हवाले से उनके सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की बात लिखी है। एफपीजे से बातचीत में मोहित कंबोज ने स्पष्ट किया मैं भाजपा का सदस्य बना रहा, पिछले छह महीनों से जानबूझकर राजनीतिक रूप से सक्रियता नहीं दिखाई। मैं अपने व्यवसाय को ज़्यादा समय देना चाहता हूं। मोहित कंबोज ने बिजनेस पर फोकस करने का कारण दिया है।
मोहित के फैसले से सभी हैरान
मोहित कंबोज के फैसले से बीजेपी के नेता भी हैरान हैं। पिछले दिनों मुंबई में बीजेपी ने अमित साटम को शहर अध्यक्ष नियुक्त किया था। मोहित कंबोज ऐसे वक्त पर राजनीति से दूर हुए हैं जब मुंबई में बीएमसी चुनाव होने हैं। मोहित कंबोज 2002 में वाराणसी से मुंबई पहुंचे थे। कुछ ही समय में इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बन गए, जहाँ उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ी।
बीजेपी में बनाई थी अलग छवि
मोहित कंबोज की सक्रियता को देखते हुए उन्हें 2013 में शहर भाजपा का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया और अगले वर्ष उन्हें गोरेगांव (पूर्व) के डिंडोशी से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी का टिकट दिया गया। 353.53 करोड़ रुपये की घोषित संपत्ति के साथ वे महाराष्ट्र के सबसे धनी उम्मीदवार थे। त्रिकोणीय मुकाबले में वे शिवसेना के सुनील प्रभु से चुनाव हार गए। हार के बावजूद उन्हें भाजपा की युवा शाखा, भारतीय जनता युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया। मोहित कंबोज के सियासी संन्यास के बाद उनकी पत्नी अक्षा कंबोज की कंपनी को मुंबई में बड़े प्रोजेक्ट मिलने की चर्चा भी सोशल मीडिया में चर्चा हो रही है।
हौसला हो तो फासला क्या?
इस सबके बाद मोहित कंबोज ने एक्स पर लिखा है कि मंजिलें क्या है, रास्ता क्या है ? हौसला हो तो फासला क्या है। न पूछो कि मेरी मंजिल कहां है, अभी तो सफर का इरादा किया है, न हारुंगा हौसला उम्र भर, ये मैंने खुद से वादा किया है। मोहित कंबोज एस्पेक्ट ग्लोबल के सीईओ हैं। उनकी पत्नी इस कंपनी की चेयरपर्सन हैं, हालांकि उनकी पत्नी क्रिकेट आईएसपीएल टीम टाइगर्स ऑफ कोलकाता की सह-मालिक भी हैं। तो वहीं मोहित कंबोज भारतीय फाउंडेशन के चेयरमैन हैं।
कशिश मेथवानी: सौंदर्य प्रतियोगिताओं की रौनक से उठकर राष्ट्रीय मान-सम्मान की ओर, CDS में रही टॉप रैंक और अब भारतीय सेना अधिकारी
13 Sep, 2025 05:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे: महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली कशिश मेथवानी ने साबित कर दिया है कि अगर जज़्बा हो तो इंसान किसी भी मुकाम को हासिल कर सकता है। 2023 में मिस इंटरनेशनल इंडिया का खिताब जीतने वाली कशिश ने मॉडलिंग और एक्टिंग के आकर्षक प्रस्तावों को ठुकरा कर सेना की वर्दी पहनने का फैसला किया। चेन्नै के ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमीसे कठिन प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अब वह भारतीय सेना की एयर डिफेंस यूनिट में कमीशन प्राप्त कर चुकी हैं। उनके पिता पूर्व वैज्ञानिक रहे हैं और बाद में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस में डिफेंस सिविलियन के रूप में कार्यरत रहे। उनकी मां आर्मी पब्लिक स्कूल में शिक्षिका हैं। परिवार में पहले कोई भी सेना में नहीं रहा, लेकिन माता-पिता ने कशिश के फैसले का पूरा समर्थन किया।
कौन हैं कशिश मेथवानी
कशिश ने बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर्स डिग्री हासिल की है और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु से थीसिस भी की है। उन्हें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी का प्रस्ताव भी मिला था, लेकिन उन्होंने देश सेवा का रास्ता चुना। उनकी यह सोच कॉलेज के दिनों में नेशनल कैडेट कॉर्प्स में शामिल होने के बाद और मज़बूत हुई। एनसीसी ने उन्हें वह जीवन दिखाया, जहां वह वास्तव में खुद को फिट मानती थीं। वह सिर्फ एक कैडेट ही नहीं, बल्कि बहुमुखी प्रतिभा की धनी भी हैं। कशिश भरतनाट्यम डांसर, तबला वादक, क्विज़र और डिबेटर हैं। उन्होंने ‘क्रिटिकल कॉज़’ नामक एनजीओ भी शुरू किया है। ओटीए में उन्होंने बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और हैंडबॉल में अकादमी का प्रतिनिधित्व किया और प्रमुख कार्यक्रमों में कमेंट्री वॉयस और एंकर की भूमिका निभाई।
शैक्षणिक और खेल दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन
कशिश ने OTA में 11 महीने की कठोर ट्रेनिंग के दौरान शैक्षणिक और खेल दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने आर्मी एयर डिफेंस मेडल सहित कई पुरस्कार जीते। मार्च में उन्हें सिख लाइट इन्फेंट्री रेजिमेंट मेडल, ड्रिल एंड डिसिप्लिन बैज और कमांडेंट्स पेन से भी नवाज़ा गया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने बटालियन अंडर ऑफिसर और बाद में एकेडमी अंडर ऑफिसर जैसे नेतृत्वकारी पद संभाले, जो कि अकादमी का सर्वोच्च पद है। कशिश का कहना है कि मेरे लिए यह एक समय में एक कदम आगे बढ़ने के बारे में है। मैं अपनी यूनिट और सेना को अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहती हूं। उन्होंने कहा कि पेजेंट्री उनके लिए केवल एक शौक था, लेकिन एनसीसी के अनुभव और गणतंत्र दिवस परेड में प्रधानमंत्री से ऑल इंडिया बेस्ट कैडेट अवॉर्ड प्राप्त करना उनके जीवन का निर्णायक मोड़ रहा।
अजित पवार ने किया ऐलान: ‘अहमदनगर’ स्टेशन का नाम ‘अहिल्यानगर’, जल्द ही औरंगाबाद स्टेशन का नाम भी बदलेगा
13 Sep, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय से मंजूरी बाद अहमदनगर रेलवे स्टेशन अब अहिल्यानगर रेलवे स्टेशन कर दिया गया है। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलते ही राज्य सरकार ने इस बारे में अधिसूचना जारी करने में देरी नहीं की। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम अहिल्यानगर करने की मांग कई संस्थाएं, संगठन और आम आदमी करते आ रहे थे। इसी पृष्ठभूमि में और पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर की त्रिशताब्दी जयंती वर्ष में रेलवे स्टेशन का नाम बदलने का निर्णय लिया गया। यह बेहद खुशी की बात है।
अजित पवार ने क्या बताया?
महायुति सरकार ने अहमदनगर का नाम बदलकर अहिल्यानगर कर दिया था। रेलवे स्टेशन का नाम बदलने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री अजित पवार लगातार प्रयास कर रहे थे। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पिछले महीने ही रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर रेलवे मंत्रालय और बाद में केंद्रीय गृह मंत्रालय से अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर अहिल्यानगर करने का अनुरोध किया था। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि अहिल्यानगर स्टेशन का नया नाम देने के बाद जल्द ही औरंगाबाद रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर छत्रपति संभाजी नगर रेलवे स्टेशन किया जाएगा, इसके लिए हम प्रयासरत हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की
दरअसल अक्टूबर 2024 में अहमदनगर जिले का नाम अहिल्यानगर करने को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की थी। इसके पहले मार्च 2024 में कैबिनेट ने जिले का नाम बदलने का प्रस्ताव को मंजूर किया था। अहिल्याबाई होलकर के 9वे वंशज व महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति प्रो.राम शिंदे ने केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि अहिल्यानगर की जनता इसकी सालों से मांग कर रही थी । जनता सवाल कर रही थी कि जब अहमदनगर जिले का नाम बदलकर अहिल्यानगर कर दिया गया है तो अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम क्यों नहीं बदला जा रहा है?
महाराष्ट्र की जनता खुश
जनता की भावना को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मांग केंद्र सरकार से की। और जैसे ही केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय से अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर अहिल्यानगर रेलवे करने की मंजूरी दी वैसे ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने तत्काल अधिसूचना जारी की। सरकार के इस निर्णय का अहिल्यानगर जिले के लोग ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र की जनता और देश की जनता बहुत खुश है। महायुति सरकार के इस निर्णय के लिए सभापति राम शिंदे ने सरकार को धन्यवाद देते हुए आभार प्रकट किया।
अजित पवार ने शाह का धन्यवाद किया
नाम बदलवाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को धन्यवाद दिया। अजित पवार के कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी इस प्रयास का हिस्सा थे। पिछले महीने पवार ने वैष्णव को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि स्टेशन का नाम बदलकर शहर के नए नाम के अनुरूप कर दिया जाए। पवार ने कहा कि ‘लंबे समय से चली आ रही मांग अब पूरी हो गई है। नाम बदलने का विशेष महत्व है क्योंकि हम पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर की 300वीं जयंती वर्ष मना रहे हैं। शहर का नाम अहिल्यानगर रखे जाने के बाद कई संगठन और नागरिक मांग कर रहे थे कि रेलवे स्टेशन का नाम भी बदला जाए। पवार ने यह भी कहा कि औरंगाबाद रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर छत्रपति संभाजी नगर रेलवे स्टेशन करने के प्रयास चल रहे हैं।
फडणवीस बने ‘कड़क कैप्टन’: नगर निगमों की कमान IAS अफसरों को सौंपने का ऐलान, प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव के संकेत
12 Sep, 2025 01:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र में महायुति सरकार की अगुवाई कर रहे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कड़क अंदाज सामने आया है। मुख्यमंत्री ने एक बड़े आदेश में कहा है कि राज्य के नगर निगमों का नेतृत्व केवल आईएएस अधिकारी ही करेंगे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने मीरा-भाईंदर के पूर्व आयुक्त दिलीप ढोले और वसई-विरार के पूर्व आयुक्त अनिल पवार सहित छोटे नगर निगमों में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों की बाढ़ आने के बाद यह फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शहरी विकास विभाग को नियमों में बदलाव करने का निर्देश दिया है ताकि राज्य के 29 नगर निगमों के आयुक्त केवल आईएएस अधिकारी ही नियुक्त किए जाएं।
सिर्फ आईएएस को मिलेगी कमान
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जल्द ही राज्य के नगर निगमों में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है। महाराष्ट्र के ज्यादातर नगर निगम प्रशासकों के हवाले हैं, क्योंकि इलेक्टेड विंग का कार्यकाल पूरा हो चुका है। कुछ साल पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा शासित कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने 14 नगर निगमों को आईएएस-कैडर के अधिकारियों के नेतृत्व में अधिसूचित किया था। इनमें मुंबई, ठाणे, पुणे, नागपुर, कोल्हापुर, कल्याण-डोंबिवली और वसई-विरार शामिल हैं। इस आदेश के बावजूद, राज्य सरकार राज्य कैडर या मुख्य अधिकारी (सीओ) कैडर के अधिकारियों की नियुक्ति करती रही। अब मुख्यमंत्री के आदेश के बाद बाकी नगर निगमों में भी IAS ही कमान संभालेंगे। वे ही कमिश्नर बनेंगे।
भ्रष्टाचार के मामलों ने बढ़ाई मुश्किल
यह सामने आया है कि मीरा भाईंदर नगर निगम (MBMC) जैसे कुछ मामलों में प्रमुख अधिकारी सीओ कैडर के भी नहीं थे। सामान्य प्रशासन विभाग और नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों ने कहा कि स्थानीय राजनेताओं के लिए राज्य कैडर के अधिकारियों को नगर निगम प्रमुख के रूप में किया था। एमबीएमसी में सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के दो निजी सचिवों को आयुक्त नियुक्त किया था। उनमें से एक दिलीप ढोले था। उन्हें अगस्त 2023 में धन शोधन के एक मामले में ईडी की जांच का सामना करना पड़ा। पूर्व वसई-विरार आयुक्त अनिल पवार भी ईडी के शिकंजे में आ गए थे। पवार एक राज्य सेवा अधिकारी हैं जिन्हें आईएएस कैडर में पदोन्नत किया गया था। फडणवीस के निर्देश के बाद आने वाले दिनों में यूडीडी द्वारा बड़ा बदलाव किए जाने की संभावना बढ़ गई है। यह विभाग डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के पास है।
हाईकोर्ट का अहम आदेश: अब टॉप फ्लोर में रहने वालों से नहीं लिया जाएगा मेंटेनेंस चार्ज, सोसायटी नियमों में होगा बदलाव
12 Sep, 2025 01:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने बिल्डिंग के टेरेस के आंतरिक मरम्मत कार्य को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि नियमों के तहत टेरेस सोसायटी की संपत्ति है। लिहाजा टेरेस का रिपेयर वर्क सोसायटी की जिम्मेदारी है। सोसायटी टेरेस रिपेयर की लागत टॉप फ्लोर पर रहने वाले सदस्यों से नहीं ले सकती है। टेरेस से पानी लीकेज के मरम्मत खर्च को मेंटेनेंस बिल में शामिल नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने नवी मुंबई की 12 बिल्डिगों की एक को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी की याचिका को खारिज कर यह फैसला सुनाया है।
सोसायटी ने अथॉरिटी के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी
अदालत ने साफ किया है कि सोसायटी को राहत न देने के संबंध में साल 2015 में सहकारिता विभाग की रिवीजनल अथॉरिटी (मंत्री) ने जो कारण बताए हैं, वे ठोस हैं। वह कानून के प्रावधानों के अनुरूप है। अथॉरिटी के आदेश में कोई खामी नहीं है। इसलिए उसे कायम रखा जाता है। इससे पहले जॉइंट रजिस्ट्रार ने भी सोसायटी को राहत देने से इनकार कर दिया था। सोसायटी ने अथॉरिटी के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
‘टेरेस सोसायटी की संपत्ति’
जस्टिस मिलिंद जाधव ने साफ किया कि मौजूदा मामला सोसायटी और सदस्यों के बीच विवाद का नहीं, बल्कि नियमों के अमल से संबंधित है। सोसायटी बाय लॉ नंबर 160ए के तहत टेरेस के आंतरिक मरम्मत का खर्च टॉप फ्लोर के सदस्यों से नहीं लिया जा सकता है। क्योंकि बिल्डिंग की टेरेस सोसायटी की संपत्ति है। सहकारिता विभाग की रिवीजनल अथॉरिटी ने कहा था कि यदि सोसायटी ने उक्त सदस्यों से मरम्मत खर्च लिया हो तो वह उन्हें वापस करे। जस्टिस जाधव ने अथॉरिटी के इस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि सोसायटी के सदस्य विशेष आम सभा बैठक में बहुमत से सोसायटी बाय लॉ नंबर 160ए के विपरीत मरम्मत निधि एकत्रित करने का निर्णय लेते हैं, तो इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है।
Elphinstone Bridge क्लोजर अलर्ट: आज आधी रात से पुल रहेगा बंद, यातायात के रूट और डाइवर्ज़न में बड़े बदलाव
12 Sep, 2025 01:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) एल्फिंस्टन ब्रिज को तोड़कर उसकी जगह नया एल्फिंस्टन फ्लाईओवर और शिवरी-वर्ली एलिवेटेड कनेक्टर फ्लाईओवर बनाएगा। इस कार्य के चलते 12 सितंबर यानि आज की रात 11:59 बजे से पुल को यातायात के लिए बंद कर दिया जाएगा और वाहन चालकों के लिए वैकल्पिक मार्ग लागू किए जाएंगे।
नया ट्रैफिक अपडेट क्या?
ट्रैफिक पुलिस ने आदेश जारी करते हुए सलाह दी है कि पूर्व से पश्चिम जाने वाले वाहन दादर पूर्व से पश्चिम और दादर मार्केट की ओर जाने के लिए तिलक ब्रिज का उपयोग करें। परेल से प्रभादेवी और लोअर परेल जाने वाले वाहन सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक करी रोड ब्रिज का उपयोग कर सकेंगे, जबकि परेल और भायखला से वर्ली, कोस्टल रोड व सी-लिंक की ओर जाने वाले वाहन चिंचपोकली ब्रिज का प्रयोग करेंगे।
एल्फिंस्टन ब्रिज ध्वस्तीकरण और पुनर्निर्मा कार्य के चलते 12 सितंबर की रात 11:59 बजे से इस पुल को यातायात के लिए बंद कर दिया जाएगा। वाहन चालकों से अपील है कि वे वाहनों के लिए बनाए गए वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करें।
इसी तरह पश्चिम से पूर्व आने वाले वाहन दादर वेस्ट से दादर ईस्ट की ओर तिलक ब्रिज का उपयोग करेंगे। प्रभादेवी और लोअर परेल से परेल, टाटा व केईएम अस्पताल की ओर जाने वाले वाहन दोपहर 3 बजे से रात 11 बजे तक करी रोड ब्रिज से गुजर सकेंगे। वहीं, वर्ली और सी-लिंक की ओर से आने वाले वाहन चिंचपोकली ब्रिज का उपयोग करेंगे।
महादेव पलव रोड पर वनवे ट्रैफिक कब से कब तक?
महादेव पलव रोड (करी रोड रेलवे ब्रिज) पर सुबह 7 से दोपहर 3 बजे तक और शाम 3 से रात 11 बजे तक एकतरफा यातायात व्यवस्था लागू होगी। रात 11 बजे से सुबह 7 बजे तक दोनों दिशाओं में यातायात सुचारु रहेगा। नागरिकों की सुविधा के लिए एमएमआरडीए ने परेल और प्रभादेवी रेलवे स्टेशनों पर दो एंबुलेंस और व्हीलचेयर की व्यवस्था भी की है, ताकि मरीजों को अस्पताल लेकर जाने में कोई दिक्कत न हो। बता दें कि यह ब्रिज 125 साल पुराना है जिसे खतरनाक घोषित कर दिया गया था।
ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से अपील
अनिल कुंभारे, जॉइंट सीपी, मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि एल्फिंस्टन ब्रिज ध्वस्तीकरण और पुनर्निर्मा कार्य के चलते 12 सितंबर की रात 11:59 बजे से इस पुल को यातायात के लिए बंद कर दिया जाएगा। वाहन चालकों से अपील है कि वे वाहनों के लिए बनाए गए वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करें।
मालेगांव विस्फोट मामले में पीड़ितों ने की बड़ी कानूनी लड़ाई की शुरुआत, बरी के फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका
9 Sep, 2025 06:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: साल 2008 में मालेगांव में हुए बम धमाके के पीड़ितों के छह परिवारों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है। उन्होंने विशेष अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें मामले के सात आरोपियों को बरी कर दिया गया था। इन आरोपियों में बीजेपी की पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित भी शामिल हैं। निसार अहमद सैयद बिलाल और पांच अन्य लोगों ने अपने वकील मतीन शेख के माध्यम से हाई कोर्ट में अपील की है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि विशेष अदालत ने जो फैसला दिया है, उसे रद्द कर दिया जाए। है।
क्या है मामला?
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से लगभग 200 किलोमीटर दूर स्थित नासिक जिले के मालेगांव कस्बे में 29 सितंबर 2008 को एक मस्जिद के पास मोटरसाइकिल पर बंधे विस्फोटक उपकरण में विस्फोट हुआ था। इसमें छह लोगों की मौत हो गई थी और 101 अन्य घायल हो गए थे। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि 31 जुलाई को विशेष एनआईए अदालत की ओर से सात आरोपियों को बरी करने संबंधी आदेश गलत और कानून की दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है, इसलिए रद्द करने योग्य है।
अदालत ने क्या कहा था?
अदालत ने कहा था कि मात्र संदेह वास्तविक सबूत की जगह नहीं ले सकता। साथ ही उसने यह भी कहा था कि किसी भी सबूत के अभाव में आरोपियों को संदेह का लाभ मिलना चाहिए। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के विशेष न्यायाधीश एके लाहोटी ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि कुल मिलाकर सभी साक्ष्य अभियुक्तों को दोषी ठहराने के लिए विश्वसनीय नहीं हैं। दोषसिद्धि के लिए कोई विश्वसनीय और ठोस सबूत नहीं है।
अभियोजन पक्ष का दावा क्या?
अभियोजन पक्ष का दावा था कि विस्फोट दक्षिणपंथी चरमपंथियों की ओर से स्थानीय मुस्लिम समुदाय को आतंकित करने के इरादे से किया गया था। एनआईए ने दावा किया कि आरोपियों का इरादा मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग को आतंकित करना था। एनआईए अदालत ने अपने फैसले में अभियोजन पक्ष के मामले और की गई जांच में कई खामियों को उजागर किया था और कहा था कि आरोपियों को संदेह का लाभ मिलना चाहिए। ठाकुर और पुरोहित के अलावा, आरोपियों में मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी शामिल थे।
वर्सोवा–बांद्रा सी लिंक की लागत में बड़ा उछाल, 6788 करोड़ बढ़ने के बाद क्या बदलेगी टाइमलाइन और रूट
9 Sep, 2025 02:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) की ओर से बनाए जा रहे वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक ( Versova-Bandra Sea Link ) पर बड़ा अपडेट सामने आया है। इसकी लागत में 6788 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। मछुआरों की मांग के अनुसार, कुछ कनेक्टर्स की लंबाई में बदलाव और वृद्धि की गई है। इसलिए लागत में इजाफा हुआ है। वास्तविक निर्माण लागत में 3900 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।
क्यों हो रहा ये निर्माण?
पश्चिमी एक्सप्रेसवे पर दबाव कम करने और दक्षिण मुंबई से उत्तर मुंबई तक तेज पहुंच प्रदान करने के लिए एमएसआरडीसी ने इस समुद्री पुल का निर्माण शुरू किया है। वर्तमान में समुद्र में खंभे लगाने का काम मुख्य रूप से चल रहा है। पुल के वर्तमान मूल डिजाइन के अनुसार, जुहू और वर्सोवा जंक्शन पर यातायात की भीड़भाड़ की संभावना है। इसलिए स्थानीय मछुआरों ने इसमें बदलाव और वृद्धि की मांग की थी।
वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक के रूट में बदलाव
वहीं, हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय की एक टीम की ओर से पुल का भौतिक निरीक्षण किया गया। इसमें इस पुल से जुड़ने वाले सभी जंक्शनों पर यातायात की भीड़भाड़ की संभावना को ध्यान में रखते हुए मार्ग परिवर्तन का सुझाव दिया गया है। साथ ही पुल के जुहू और वर्सोवा कनेक्टर को वेस्टर्न एक्सप्रेसवे से जोड़ने की जरूरत भी सामने आई है। इसके लिए इस पुल से जुड़े अहम बदलाव किए जाएंगे। इसी वजह से लागत में यह बढ़ोतरी हो रही है।
पुल के दो हिस्सों को किया जाएगा ट्रांसफर
इस संबंध में एमएसआरडीसी ने महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (एमसीजेडएमए) को आवेदन दिया था। इसके अनुसार, इस पुल के दो हिस्सों को ट्रांसफर किया जाएगा और एक हिस्से की लंबाई 100 से बढ़ाकर 110 मीटर की जाएगी। जुहू कनेक्टर की लंबाई 3.54 किलोमीटर से बढ़ाकर 4.45 किलोमीटर की जाएगी। इससे पुल में 120 मीटर लंबे दो अतिरिक्त हिस्से जोड़ने पड़ेंगे। साथ ही, समुद्र की ओर पानी के ठहराव को रोकने के लिए जुहू कनेक्टर पर खंभों की जगह केबल-आधारित पुल बनाया जाएगा।
वर्सोवा कनेक्टर की लंबाई कितनी?
वर्सोवा कनेक्टर की लंबाई 2.72 किलोमीटर से बढ़ाकर 4.29 किलोमीटर की जाएगी। इस कनेक्टर पर वेस्टर्न एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाली सड़क पर एक अतिरिक्त केबल-आधारित पुल बनाना होगा। इसके अलावा चारों टोल प्लाजा के डिज़ाइन में भी बदलाव किया जाएगा। लागत में वृद्धि का यही कारण है, जैसा कि एमएसआरडीसी द्वारा एमसीजेडएमए में दायर आवेदन और इस संबंध में हाल ही में हुई सुनवाई में सामने आया है।
एमएसआरडीसी के आवेदन को मंजूरी
एमसीजेडएमए ने पुल में बदलाव के संबंध में एमएसआरडीसी के आवेदन को मंजूरी दे दी है। इसके बाद परियोजना को आगे की मंजूरी के लिए राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण को भेजने की सिफारिश की गई है।
परियोजना का क्या स्टेटस?
इस परियोजना में भारी देरी हुई है और लागत में भी बढ़ोतरी हुई है। मूल रूप से अनुमानित 11,332.82 करोड़ रुपये का बजट अब 18,120.96 करोड़ रुपये है। जो 6,788.14 करोड़ रुपये की वृद्धि है। राज्य के अधिकारियों के अनुसार, 2025 के मध्य तक लगभग 60 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। सरकार ने इस लिंक को दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस खंड को दहिसर और भयंदर से जोड़ने वाले उत्तर की ओर विस्तार कार्य अगले दो से तीन सालों में पूरा किया जाना है।
शिंदे गुट ने किया सनसनीखेज़ दावा, कहा- निकाय चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे के 2 को छोड़ बाकी सब विधायक साथ छोड़ देंगे
9 Sep, 2025 02:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नागपुर : महाराष्ट्र की राजनीति में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव से पहले एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक कृपाल तुमाने ने सनसनीखेज दावा किया है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) के सिर्फ दो विधायकों को छोड़कर बाकी सभी विधायक एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में हैं और जल्द ही उनकी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने दशहरा मेला के अवसर पर बड़े खुलासे और पार्टी प्रवेश समारोह की संभावना का भी जिक्र किया। कृपाल तुमाने ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यूबीटी के लोग संजय राउत के रवैये से तंग आ चुके हैं। यही वजह है कि उनके दो विधायकों को छोड़कर बाकी सभी हमारे संपर्क में हैं। इसके अलावा, मुंबई के 80 प्रतिशत पूर्व नगरसेवक भी शिंदे गुट के साथ जुड़ने को तैयार हैं।
2022 में उद्धव से अलग हुए थे एकनाथ शिंदे
2022 में महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय भूचाल आया था, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ एकनाथ शिंदे ने बगावत का झंडा बुलंद किया। इस बगावत के परिणामस्वरूप शिवसेना में फूट पड़ गई और शिंदे के साथ 39 अन्य विधायकों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन कर लिया था।
फिर बदलाव की आहट
इस घटना ने महाविकास अघाडी (एमवीए) गठबंधन सरकार, जिसमें शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी- शरद गुट) और कांग्रेस शामिल थे, को सत्ता से बाहर कर दिया था। एकनाथ शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे गुट के बीच तनातनी अब भी जारी है। फिलहाल, बीएमसी चुनाव से पहले शिंदे गुट का यह दावा महाराष्ट्र की सियासत में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।
ठाकरे ब्रदर्स आए हैं एक साथ
यह दावा ऐसे समय में भी किया जा रहा है, जब बीएमसी चुनाव से पहले 'ठाकरे ब्रदर्स' एकजुट हो रहे हैं। लगभग 20 साल के बाद राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक साथ आए हैं। इसके कारण महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरण पहले ही बदल चुके हैं। हालांकि, 'ठाकरे ब्रदर्स' पहली परीक्षा में असफल रहे हैं। बता दें कि महाराष्ट्र में बेस्ट एम्प्लॉयीज को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी के चुनावों में दोनों भाइयों उद्धव और राज ठाकरे की पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन खाता भी नहीं खुला।
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