महाराष्ट्र
गुस्से में नाबालिग ने किया दुर्भाग्यपूर्ण काम, वायरल हुए बॉयफ्रेंड के वीडियो
14 May, 2026 03:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोल्हापुर: महाराष्ट्र के शिरोल तालुका में प्रेम संबंधों के बीच उपजे विवाद के चलते एक नाबालिग लड़की द्वारा अपने साथी के निजी वीडियो सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है।
बदले की भावना में उठाया गया घातक कदम
कोल्हापुर जिले के शिरोल इलाके में एक नाबालिग युवती ने अपने प्रेमी के प्रति नाराजगी व्यक्त करने के लिए इंटरनेट का सहारा लिया और उनके निजी पलों के वीडियो वायरल कर दिए। बताया जा रहा है कि युवक पिछले कुछ समय से युवती से दूरी बना रहा था और उसके बार-बार फोन करने के बावजूद कॉल का जवाब नहीं दे रहा था, जिससे क्षुब्ध होकर लड़की ने गुस्से में आकर यह कठोर निर्णय लिया। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया और मामला तुरंत पुलिस के संज्ञान में आया, जिसके बाद कानूनी कार्यवाही शुरू की गई।
पुलिस द्वारा पोक्सो एक्ट के तहत बड़ी कार्रवाई
मामले की गंभीरता और युवती के नाबालिग होने के कारण शिरोल पुलिस ने त्वरित कदम उठाते हुए आरोपी युवक के विरुद्ध यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम यानी पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उससे घटना की कड़ियों को जोड़ने के लिए पूछताछ की जा रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि कानून के दायरे में नाबालिग से जुड़े ऐसे मामलों में बेहद सख्त प्रावधान हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए बिना किसी देरी के आरोपी को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है।
लॉज संचालक की भूमिका और वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच
पुलिस अब उस लॉज के प्रबंधन की भूमिका की भी बारीकी से जांच कर रही है जहां ये वीडियो कथित तौर पर रिकॉर्ड किए गए थे। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि किस परिस्थिति में और किन उपकरणों के माध्यम से इन निजी वीडियो को बनाया गया और क्या इसमें लॉज संचालक की कोई लापरवाही रही है। संबंधित लॉज के मालिक को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है ताकि घटना से जुड़े तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों को पुख्ता किया जा सके और यह देखा जा सके कि वहां सुरक्षा मानकों का उल्लंघन तो नहीं हुआ था।
सोशल मीडिया पर सामग्री साझा न करने की सख्त चेतावनी
इस संवेदनशील घटना के प्रकाश में आने के बाद प्रशासन ने आम जनता और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए एक जरूरी एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि ऐसे किसी भी आपत्तिजनक या निजी वीडियो को आगे साझा करना या फॉरवर्ड करना अपराध की श्रेणी में आता है और ऐसा करने वालों के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे डिजिटल माध्यमों का उपयोग जिम्मेदारी से करें और किसी की निजता का उल्लंघन करने वाली सामग्री को बढ़ावा न दें।
बारामती में लोगों का जोश, जय पवार के साथ जनता दरबार में मिली उम्मीद
14 May, 2026 02:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बारामती: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उभरते युवा नेता जय पवार द्वारा राष्ट्रवादी भवन में प्रति गुरुवार आयोजित किया जा रहा जनता दरबार इन दिनों स्थानीय राजनीति और जनसंवाद का नया केंद्र बन गया है।
जनसमस्याओं के समाधान का नया मंच
बारामती के राष्ट्रवादी भवन में आयोजित किए जा रहे इस विशेष संवाद कार्यक्रम को नागरिकों का जबरदस्त समर्थन प्राप्त हो रहा है। दूसरे गुरुवार को भी भारी संख्या में लोग अपनी व्यक्तिगत और सामाजिक शिकायतों को लेकर पहुंचे, जिससे परिसर में भारी गहमागहमी बनी रही। जय पवार ने सुबह ठीक ग्यारह बजे से नागरिकों से मिलना शुरू किया और दोपहर तक बिना रुके लोगों की फरियादें सुनीं। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से सीधे रूबरू होकर उनकी समस्याओं को समझा और मौके पर ही संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को फोन कर उचित कार्यवाही करने के कड़े निर्देश जारी किए।
बुनियादी सुविधाओं और सरकारी कामकाज पर जोर
जनता दरबार के दौरान नागरिकों ने मुख्य रूप से पेयजल की किल्लत, खराब सड़कों की स्थिति और बिजली आपूर्ति में आने वाली बाधाओं जैसे ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इसके अतिरिक्त कई लोग सरकारी विभागों में अटके हुए अपने कार्यों और योजनाओं का लाभ न मिल पाने की शिकायत लेकर भी पहुंचे थे। जय पवार ने हर एक आवेदन को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि किसी भी पात्र व्यक्ति को सरकारी लाभ से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। युवाओं के बीच उनकी इस सक्रियता को लेकर काफी सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है।
विरासत और कार्यशैली में समानता की चर्चा
बारामती के आम लोगों के बीच जय पवार की कार्यशैली को लेकर यह चर्चा आम है कि उनमें अपने परिवार की राजनीतिक विरासत की झलक साफ दिखाई देती है। लोगों का मानना है कि जय पवार का व्यवहार बेहद सहज और आत्मीय है, जो उन्हें सीधे आम आदमी से जोड़ता है। कई बुजुर्ग नागरिकों ने उनकी तुलना स्वर्गीय वरिष्ठ नेताओं की कार्यशैली से करते हुए कहा कि समस्याओं को सुनकर तुरंत निर्णय लेने की उनकी क्षमता काफी प्रभावशाली है। इसी सक्रियता के चलते क्षेत्र में यह संदेश जा रहा है कि बारामती को अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए एक सुलभ और ऊर्जावान नेतृत्व मिल गया है।
कार्यकर्ताओं में उत्साह और भविष्य की रणनीति
इस पहल की सफलता ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में भी नए उत्साह का संचार किया है। पार्टी के पदाधिकारियों का मानना है कि जनता दरबार के माध्यम से संगठन और जनता के बीच की दूरी कम हुई है और सीधा संवाद स्थापित हो रहा है। कार्यकर्ताओं की टोलियां अब गांव-गांव जाकर लोगों को इस साप्ताहिक आयोजन की जानकारी दे रही हैं ताकि अधिक से अधिक लोग अपनी बात रख सकें। आने वाले समय में इस संवाद प्रक्रिया को और अधिक व्यापक बनाने की योजना तैयार की जा रही है जिससे पूरे क्षेत्र के विकास कार्यों को नई गति प्रदान की जा सके।
महाराष्ट्र में वाहन चालकों के लिए चेतावनी: HSRP प्लेट जरूरी
14 May, 2026 02:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र में वाहनों की सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके तहत पुराने वाहनों पर नई नंबर प्लेट लगाने की अंतिम तिथि में बदलाव किया गया है।
वाहन सुरक्षा के लिए समय सीमा में किया गया विस्तार
राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल 2019 से पहले पंजीकृत किए गए सभी पुराने वाहनों पर अब हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट लगवाना अनिवार्य होगा। पूर्व में इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2025 तक का समय दिया गया था, लेकिन वाहन स्वामियों को होने वाली व्यावहारिक समस्याओं और कार्य की वर्तमान गति की समीक्षा करने के बाद सरकार ने राहत देते हुए इस समय सीमा को अब 30 जून 2026 तक बढ़ा दिया है। प्रशासन का मानना है कि इस अतिरिक्त समय से आम जनता को बिना किसी अफरा-तफरी के अपनी नंबर प्लेट बदलने की सुविधा मिल सकेगी।
आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगाने की कवायद
परिवहन विभाग के अनुसार एचएसआरपी प्लेट न केवल वाहनों की पहचान को सुरक्षित बनाती है, बल्कि यह वाहन चोरी और फर्जी नंबर प्लेटों के जरिए होने वाली आपराधिक वारदातों को रोकने में भी एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए राज्य सरकार इस व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने की तैयारी में है ताकि सड़कों पर चलने वाला हर वाहन प्रमाणित और सुरक्षित पहचान के साथ हो। परिवहन मंत्री ने सभी वाहन मालिकों से अपील की है कि वे सुरक्षा के इस आधुनिक तंत्र को अपनाकर सरकार के प्रयासों में अपना सक्रिय सहयोग प्रदान करें।
आधिकारिक पोर्टल के जरिए पंजीकरण की अनिवार्य प्रक्रिया
नई नंबर प्लेट लगवाने के इच्छुक नागरिकों को परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी सुविधानुसार अपॉइंटमेंट बुक करना होगा, जिसके बाद ही संबंधित केंद्रों पर प्लेट लगाने का कार्य पूरा किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 1 जुलाई 2026 से राज्य भर में एक व्यापक जांच अभियान चलाया जाएगा और जिन वाहनों पर निर्धारित समय तक एचएसआरपी नहीं पाई जाएगी, उनके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे उल्लंघनकर्ताओं पर एक हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है, इसलिए समय रहते इस प्रक्रिया को पूरा करना अनिवार्य है।
अनधिकृत एजेंटों से सावधानी बरतने की सलाह
विभाग ने जनता को सचेत करते हुए कहा है कि एचएसआरपी के पंजीकरण के लिए केवल सरकारी और आधिकारिक माध्यमों का ही उपयोग करें और किसी भी बाहरी बिचौलिए या अनाधिकृत एजेंट के झांसे में आने से बचें। धोखाधड़ी से बचने के लिए सीधे पोर्टल पर जाकर शुल्क का भुगतान करना और रसीद प्राप्त करना ही सबसे सुरक्षित तरीका है। परिवहन मंत्री ने दोहराया कि यह कदम पूरी तरह से वाहन मालिकों के हितों और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है, ताकि भविष्य में वाहन संबंधी दस्तावेजों और पहचान में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
नासिक भोंदू बाबा केस में नया मोड़, ईडी ने रूपाली चाकणकर को तलब किया
13 May, 2026 05:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नासिक के विवादित 'गॉडमैन' अशोक खरात से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की नेता और राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकणकर को पूछताछ के लिए तलब किया। केंद्रीय जांच एजेंसी ने चाकणकर को इसी सप्ताह के अंत तक पेश होने के लिए समन जारी किया है, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। गौरतलब है कि स्वयंभू ज्योतिषी अशोक खरात, जिसे 'भोंदू बाबा' के नाम से भी जाना जाता है, के साथ संदिग्ध संबंधों के चलते चाकणकर पहले ही महिला आयोग की चेयरपर्सन और पार्टी के महिला मोर्चे के अध्यक्ष पद से हाथ धो चुकी हैं और अब ईडी की इस कार्रवाई ने उनकी राजनीतिक साख पर भी संकट गहरा दिया है।
एसआईटी की तफ्तीश के बाद केंद्रीय एजेंसी का शिकंजा
अशोक खरात मामले की जांच पहले राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रही थी, जिसमें रूपाली चाकणकर और उनकी बहन प्रतिभा चाकणकर के खरात के साथ घनिष्ठ संबंधों का खुलासा हुआ था। नेवी की नौकरी छोड़कर ज्योतिषी बने खरात ने नासिक में आश्रम बनाकर महिलाओं को डराया और उनका यौन शोषण किया, जिसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी जांच के आदेश दिए थे। जांच के दौरान जब खरात द्वारा अर्जित की गई अकूत बेनामी संपत्ति का ब्योरा सामने आया, तब इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय की एंट्री हुई। अब ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस काली कमाई और वित्तीय अनियमितताओं में राजनीतिक रसूख का कितना इस्तेमाल किया गया था।
यौन उत्पीड़न और बेनामी संपत्ति के गंभीर आरोप
भोंदू बाबा अशोक खरात पर न केवल बलात्कार और धोखाधड़ी के संगीन आरोप हैं, बल्कि उसने अवैध तरीके से भारी संपत्ति भी जमा की है। जांच में यह पाया गया है कि खरात ने नासिक स्थित सहकारी समितियों के माध्यम से तीसरे पक्ष के नाम पर कई बैंक खाते संचालित किए, जिनका पूर्ण नियंत्रण उसने अपने पास ही रखा था। वह महिलाओं को उनके परिवार और पति की मृत्यु का भय दिखाकर उनका शारीरिक शोषण करता था। ईडी ने पूर्व में इसी वित्तीय जांच के सिलसिले में रूपाली चाकणकर की बहन से भी पूछताछ की थी और अब चाकणकर से होने वाली पूछताछ इस पूरे सिंडिकेट और वित्तीय लेन-देन की परतों को खोलने में निर्णायक साबित हो सकती है।
राजनीतिक रसूख पर चोट और भविष्य का संकट
अशोक खरात की गिरफ्तारी और उसके बाद हुए खुलासों ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है, जिसमें सबसे ज्यादा प्रभावित रूपाली चाकणकर हुई हैं। कभी एनसीपी में बड़ा कद रखने वाली चाकणकर अब न केवल अपने पद खो चुकी हैं, बल्कि पार्टी के भीतर भी उनकी हैसियत पहले जैसी नहीं रह गई है। ईडी के समन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जांच की आंच अब सीधे उन प्रभावशाली लोगों तक पहुंच रही है जो कथित तौर पर इस फर्जीवाड़े के साये में रहे। वर्तमान में अशोक खरात न्यायिक हिरासत में है और आने वाले दिनों में चाकणकर से होने वाली पूछताछ राज्य के सियासी समीकरणों के साथ-साथ इस आपराधिक मामले को एक नया मोड़ दे सकती है।
महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं? सुनील तटकरे ने पवार से की चर्चा
13 May, 2026 02:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे अचानक शरद पवार से मिलने उनके आवास 'सिल्वर ओक' पहुंचे। पार्टी में हुए बड़े विभाजन और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद दोनों नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सूची से जुड़े विवादों और पार्टी के भविष्य को लेकर चल रही अटकलों के बीच इस मिलन ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
राजनीतिक मतभेदों के बीच शिष्टाचार भेंट या बड़ी रणनीति
पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और विलय की खबरों के बीच सुनील तटकरे का शरद पवार के द्वार पर पहुंचना कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि तटकरे ने इस मुलाकात को पूरी तरह गैर-राजनीतिक करार देते हुए कहा कि वे केवल पवार साहब का कुशलक्षेम जानने आए थे क्योंकि पिछले कुछ दिनों से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बातचीत के दौरान किसी भी प्रकार का सियासी मुद्दा नहीं उठाया गया, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति का इतिहास गवाह है कि शरद पवार और उनके पुराने करीबियों की ऐसी मुलाकातें कभी भी महज औपचारिक नहीं होतीं।
पद और प्रतिष्ठा को लेकर गहराता संशय
इस मुलाकात की टाइमिंग को लेकर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि हाल ही में ऐसी खबरें आई थीं कि चुनाव आयोग को भेजे गए पार्टी के दस्तावेजों में सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल के संगठनात्मक पदों का जिक्र नहीं था। इस घटनाक्रम ने कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम पैदा कर दिया था कि क्या ये कद्दावर नेता अभी भी अपनी पुरानी भूमिकाओं में बने हुए हैं। तटकरे की ओर से इस मामले पर भले ही चुप्पी साधी गई हो, लेकिन जानकारों का मानना है कि बंद कमरे में हुई इस चर्चा के पीछे संगठन की आंतरिक कलह और भविष्य की रूपरेखा को लेकर मंथन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
एकजुटता दिखाने की कोशिश और भीतरखाने का तनाव
एक तरफ जहां सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल और पवार परिवार के अन्य सदस्य संयुक्त रूप से चुनावी दौरे कर पार्टी में एकता का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शरद पवार से तटकरे की सीधी भेंट कुछ अलग ही संकेत दे रही है। पार्टी के विलय के प्रस्ताव पर तटकरे और पटेल के कथित विरोध की खबरों के बीच इस मुलाकात ने अटकलों के बाजार को और गर्म कर दिया है। फिलहाल पूरी महाराष्ट्र की जनता और राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि इस शिष्टाचार भेंट का आने वाले समय में राज्य के सत्ता समीकरणों पर क्या और कैसा प्रभाव देखने को मिलेगा।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने तलाक रद्द किया, कहा- काम से इनकार कर सकती है पत्नी
13 May, 2026 01:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने वैवाहिक संबंधों और महिलाओं के अधिकारों के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि पत्नी घर के कामकाज करने से इनकार करती है, तो इसे मानसिक क्रूरता की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने जोर देकर कहा कि विवाह दो व्यक्तियों के बीच एक सम्मानजनक और समान भागीदारी का संबंध है, न कि कोई ऐसा कानूनी अनुबंध जिसमें पत्नी से केवल सेवा की अपेक्षा की जाए। उच्च न्यायालय ने इस टिप्पणी के साथ ही 16 साल पुराने उस फैमिली कोर्ट के आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसने कामकाज न करने को क्रूरता मानते हुए पति के पक्ष में तलाक की डिक्री जारी की थी।
वैवाहिक जीवन समानता का आधार न कि सेवा का अनुबंध
अदालत ने अपने फैसले में इस बात को रेखांकित किया कि आधुनिक समाज में पत्नियों के साथ घरेलू सहायकों जैसा व्यवहार करना पूरी तरह अनुचित है। जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने कहा कि शादी के बाद किसी महिला से केवल खाना बनाने और साफ-सफाई की उम्मीद करना उसकी गरिमा के विरुद्ध है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि घर के कामों में हाथ न बंटाना या उसे न करना सामान्य वैवाहिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इन्हें कानून की नजर में इतना गंभीर अपराध नहीं माना जा सकता कि उसके आधार पर किसी पवित्र वैवाहिक रिश्ते को खत्म कर दिया जाए।
फैमिली कोर्ट के पुराने फैसले पर हाई कोर्ट का प्रहार
उच्च न्यायालय ने मुंबई की फैमिली कोर्ट द्वारा जुलाई 2010 में दिए गए तलाक के आदेश को अन्यायपूर्ण बताते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने न केवल शादी को बरकरार रखा, बल्कि पति को यह निर्देश भी दिया कि वह अपनी पत्नी को समाज में सम्मानजनक जीवन जीने में सहायता प्रदान करे। इसके लिए पति को प्रतिमाह 10,000 रुपये गुजारा भत्ता और रहने के लिए 10,000 रुपये घर के किराए के तौर पर देने का आदेश जारी किया गया है। जजों ने माना कि निचली अदालत ने आरोपों की गंभीरता को परखे बिना ही फैसला सुना दिया था, जिसे किसी भी स्थिति में कायम नहीं रखा जा सकता।
मानसिक क्रूरता की परिभाषा और सामान्य घरेलू विवाद
खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान यह पाया कि पति द्वारा लगाए गए आरोप जैसे कि पत्नी का खाना न बनाना या माता-पिता की बात न मानना, वैवाहिक जीवन में होने वाले बेहद आम विवाद हैं। कोर्ट के अनुसार, मानसिक क्रूरता का अर्थ ऐसे व्यवहार से होता है जो साथी को असहनीय भावनात्मक पीड़ा या अपमान पहुंचाए, और यह दंपति के साथ रहने को असंभव बना दे। चूंकि यह जोड़ा शादी के बाद महज तीन महीने ही साथ रहा था, इसलिए इतनी कम अवधि के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि उनके बीच क्रूरता इस स्तर तक पहुंच गई थी कि तलाक ही एकमात्र रास्ता बचा था।
आखिरी संदेश बना दर्दनाक संकेत, NIFT छात्रा ने की आत्महत्या
12 May, 2026 03:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: आर्थिक राजधानी के वरली इलाके से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) की 24 वर्षीय छात्रा स्वप्नाली घेवारी ने मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर मौत को गले लगा लिया। आरोप है कि पिता के लगातार उत्पीड़न और घर के तनावपूर्ण माहौल के कारण छात्रा ने यह आत्मघाती कदम उठाया। वरली पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
पिता की शराब की लत और पारिवारिक कलह
पुलिस जांच में सामने आया है कि स्वप्नाली के परिवार में लंबे समय से विवाद चल रहा था। उसके पिता सुनील घेवारी की शराब की लत के कारण घर का माहौल अक्सर खराब रहता था। स्वप्नाली अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए पिछले चार महीनों से वरली में अपनी सहेलियों के साथ किराये के फ्लैट में रह रही थी, लेकिन वहाँ भी पिता का हस्तक्षेप कम नहीं हुआ।
आत्महत्या से पहले वीडियो कॉल और मानसिक दबाव
बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन स्वप्नाली की मां उसके पास रहने आई थीं, लेकिन उनके जाने के बाद पिता ने स्वप्नाली को फोन कर मां के बारे में पूछताछ शुरू कर दी और लगातार परेशान करने लगे। शराब के नशे में पिता द्वारा किए जा रहे मानसिक उत्पीड़न से स्वप्नाली इतनी टूट गई कि उसने अपने पिता को वीडियो कॉल किया और उसके बाद फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
मौत के बाद पिता का संवेदनहीन व्यवहार
छात्रा की मौत के बाद भी विवाद थमा नहीं। आरोप है कि बेटी की आत्महत्या की खबर मिलने के बाद पिता सुनील घेवारी अपनी पत्नी के मायके पहुंचे और वहाँ शोक मनाने के बजाय तालियां बजाकर धमकी भरा व्यवहार किया। इस संवेदनहीन कृत्य ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है।
पुलिसिया कार्रवाई और जांच जारी
वरली पुलिस स्टेशन ने पीड़िता की मां और अन्य परिजनों की शिकायत के आधार पर सुनील घेवारी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और उत्पीड़न की धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस छात्रा के मोबाइल रिकॉर्ड और अंतिम वीडियो कॉल की भी जांच कर रही है। परिजनों के विस्तृत बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि इस घटना के पीछे की हर कड़ी को जोड़ा जा सके।
PM मोदी की अपील पर शरद पवार का बयान, कहा- बेचैनी का माहौल बन गया
12 May, 2026 12:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते युद्ध के संकट और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से की गई हालिया अपील ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। पीएम मोदी ने नागरिकों से एक साल तक सोना न खरीदने और ईंधन व खाद्य तेल के उपयोग में यथासंभव कटौती करने का आग्रह किया है। इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने इसे अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया है।
अचानक हुई घोषणा से निवेशकों में बेचैनी
शरद पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के इस संबोधन ने देश के आम नागरिकों, निवेशकों और बड़े औद्योगिक घरानों के बीच अनिश्चितता पैदा कर दी है। पवार के अनुसार, जिस तरह से अचानक यह अपील की गई है, उससे बाजार में डर का माहौल बन सकता है, जिसका सीधा असर देश की आर्थिक सेहत पर पड़ने की संभावना है।
सर्वदलीय बैठक बुलाने का सुझाव
वरिष्ठ नेता शरद पवार ने केंद्र सरकार को मशविरा दिया है कि इतने संवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर कोई भी कदम उठाने से पहले सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना अनिवार्य है। उन्होंने मांग की है कि प्रधानमंत्री को तत्काल अपनी अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए, ताकि इस संकट से निपटने के लिए सामूहिक और प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके।
आर्थिक विशेषज्ञों के साथ समीक्षा की मांग
एनसीपी (एसपी) प्रमुख ने जोर देकर कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए सरकार को अधिक संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री को देश के दिग्गज अर्थशास्त्रियों, उद्योग जगत के दिग्गजों और संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ एक आपात बैठक करनी चाहिए। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय दबाव के इस दौर में भविष्य की नीतियों पर गहन मंथन होना देश के हित में है।
जनता का भरोसा जीतना पहली प्राथमिकता
शरद पवार ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि किसी भी गंभीर परिस्थिति या युद्ध जैसी स्थिति में शासन की सबसे पहली प्राथमिकता जनता के बीच विश्वास और स्थिरता बनाए रखना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समावेशी चर्चा के बिना लिए गए फैसलों से स्थिरता को खतरा हो सकता है, इसलिए सरकार को व्यापक परामर्श की प्रक्रिया को अपनाना चाहिए।
PM की अपील पर ध्यान नहीं, कुर्ला में सिलेंडर माफिया ने की अवैध रीफिलिंग
12 May, 2026 12:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: अंतरराष्ट्रीय तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच प्रधानमंत्री की ईंधन बचत की अपील का फायदा उठाकर कालाबाजारी करने वालों ने सिर उठाना शुरू कर दिया है। शहर के कुर्ला इलाके में घरेलू गैस सिलेंडरों की अवैध रिफिलिंग और कालाबाजारी करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। यह गिरोह घरेलू गैस का अवैध भंडारण कर खाली बोतलों में गैस भरने और नागरिकों के साथ धोखाधड़ी करने के काम में लिप्त था।
संकट की आड़ में कालाबाजारी का खेल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन और संसाधनों के सीमित उपयोग की अपील के बाद बाजार में गैस सिलेंडरों की मांग बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी स्थिति का लाभ उठाने के लिए कुछ असामाजिक तत्व अवैध भंडारण में जुट गए हैं। कुर्ला के सुभाष नगर में सक्रिय यह गिरोह न केवल गैस की कालाबाजारी कर रहा था, बल्कि असुरक्षित तरीके से रिफिलिंग कर लोगों की जान और माल को भी जोखिम में डाल रहा था।
सतर्क संस्था ने किया अवैध धंधे का पर्दाफाश
इस पूरे मामले का श्रेय 'लोक कल्याण ग्राहक संरक्षण संस्था' को जाता है। संस्था के पदाधिकारियों को इलाके में चल रही संदिग्ध गतिविधियों की भनक लगी थी। उन्होंने बिना देरी किए शिधा वितरण (Rationing) विभाग के अधिकारियों को इसकी गुप्त सूचना दी। संस्था की सजगता के कारण ही इस संगठित गिरोह की गतिविधियों पर समय रहते लगाम कसी जा सकी।
गैस एजेंसी की मिलीभगत और छापेमारी
अधिकारियों द्वारा की गई छापेमारी में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। शुरुआती जांच के अनुसार, इस अवैध धंधे के तार एक स्थानीय गैस एजेंसी से जुड़े होने की आशंका है। मौके पर बड़ी संख्या में भरे और खाली सिलेंडर बरामद किए गए हैं। अधिकारियों ने अवैध भंडारण स्थल को सील कर दिया है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस खेल में एजेंसी के कौन-कौन से कर्मचारी शामिल थे।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई की चेतावनी
शिधा वितरण विभाग और स्थानीय पुलिस अब गिरोह के सदस्यों की धरपकड़ में जुट गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संकट के समय आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे केवल अधिकृत वेंडरों से ही सिलेंडर लें और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत अधिकारियों को सूचित करें।
सियासी जुबानी जंग में फडणवीस का पलटवार, राहुल गांधी पर कसा तंज
11 May, 2026 01:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हैदराबाद: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से की गई 'किफायत बरतने' की अपील ने देश में एक नया राजनीतिक विवाद छेड़ दिया है। पीएम मोदी ने जनता से सोना, पेट्रोल-डीजल, खाद्य तेल और खाद के उपयोग में बचत करने के साथ-साथ विदेश यात्राओं से बचने का आग्रह किया था। इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
राहुल गांधी का सरकार पर प्रहार: 'यह उपदेश नहीं, नाकामी है'
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की इस अपील को केंद्र सरकार की विफल नीतियों का परिणाम बताया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि जनता से त्याग करने की उम्मीद करना सरकार की कमजोरी दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि 12 साल के शासन के बाद देश ऐसी स्थिति में क्यों खड़ा है जहाँ नागरिकों को अपनी बुनियादी जरूरतों और यात्राओं पर पाबंदी लगानी पड़ रही है। राहुल गांधी के अनुसार, हर जिम्मेदारी जनता पर डालना एक 'कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम' की निशानी है।
देवेंद्र फडणवीस का पलटवार: 'राहुल गांधी रिजेक्टेड माल हैं'
राहुल गांधी के विरोध पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मीडिया से मुखातिब होते हुए फडणवीस ने राहुल गांधी को 'रिजेक्टेड माल' करार दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को देश के हर राज्य की जनता ने बार-बार नकारा है। फडणवीस ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में जनता का समर्थन ही सबसे महत्वपूर्ण होता है और देश की जनता प्रधानमंत्री मोदी के फैसलों के साथ मजबूती से खड़ी है।
प्रधानमंत्री की अपील के पीछे के आर्थिक कारण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी स्पीच में अंतरराष्ट्रीय संकटों के कारण बढ़ते व्यापार घाटे और वैश्विक अनिश्चितता का हवाला दिया था। उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए नागरिकों से व्यक्तिगत स्तर पर उपभोग कम करने और स्वदेशी विकल्पों पर जोर देने को कहा था। हालांकि, विपक्ष का तर्क है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं की कीमतों को प्रबंधित करने में विफल रही है, जिसका बोझ अब आम आदमी पर डाला जा रहा है।
सियासी गलियारों में बढ़ी तल्खी
इस विवाद के बाद भारतीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जहाँ भाजपा नेता इसे राष्ट्रहित में उठाया गया कदम बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसे आर्थिक कुप्रबंधन का प्रमाण मान रहे हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा और गरमाने की उम्मीद है, खासकर उन राज्यों में जहाँ विधानसभा चुनाव करीब हैं, क्योंकि इसका सीधा संबंध आम जनता की जेब और उनकी जीवनशैली से जुड़ा है।
सुरक्षा में चूक पड़ी भारी, बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में पुलिसकर्मी बर्खास्त
11 May, 2026 11:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: एनसीपी (NCP) के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की सनसनीखेज हत्या के मामले में मुंबई पुलिस ने एक बड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाया है। विभाग ने सुरक्षा में तैनात रहे बॉडीगार्ड कॉन्स्टेबल श्याम सोनावणे को कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप में आधिकारिक तौर पर सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई उस दिन की निष्क्रियता के आधार पर की गई है जब हमलावरों ने बांद्रा में सिद्दीकी पर जानलेवा हमला किया था।
सुरक्षा घेरे में चूक और बर्खास्तगी की वजह
12 अक्टूबर 2024 की शाम जब तीन हमलावरों ने बाबा सिद्दीकी को निशाना बनाया, तब कॉन्स्टेबल श्याम सोनावणे उनकी सुरक्षा टीम का हिस्सा थे। जांच में पाया गया कि गोलीबारी के दौरान सोनावणे ने कोई ठोस जवाबी प्रतिक्रिया नहीं दी। हालांकि, बचाव में उन्होंने तर्क दिया था कि पटाखों के शोर के कारण वे स्थिति को तुरंत भांप नहीं पाए, लेकिन विभागीय जांच में उन्हें लापरवाही का दोषी पाया गया। सितंबर 2025 में कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद, अब 2 मई को उन्हें बर्खास्तगी का पत्र सौंप दिया गया है।
मामले में अब तक 27 गिरफ्तारियां और चार्जशीट
बाबा सिद्दीकी हत्याकांड की जांच कर रही मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच ने अब तक 27 आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाया है। इनमें हरियाणा के गुरमेल बलजीत सिंह और उत्तर प्रदेश के धर्मराज कश्यप जैसे कथित शूटर भी शामिल हैं। पुलिस ने हत्या की साजिश रचने, रेकी करने और फंडिंग मुहैया कराने वाले पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। दिसंबर 2025 में इस मामले में 200 पन्नों की एक पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।
बिश्नोई गैंग से संबंध और 'डब्बा कॉलिंग' का खुलासा
क्राइम ब्रांच की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में करीब 30 गवाहों के बयानों के आधार पर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला कि गिरफ्तार आरोपी अमोल गायकवाड़, फरार मास्टरमाइंड शुभम लोणकर के सीधे संपर्क में था। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी पुलिस की पकड़ से बचने के लिए 'डब्बा कॉलिंग' और 'सिग्नल' जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स का उपयोग कर रहे थे। चार्जशीट में बिश्नोई गैंग के साथ आरोपियों के सीधे संबंधों का भी दावा किया गया है।
राजधानी की राजनीति में सुरक्षा पर फिर उठी बहस
पूर्व मंत्री की उनके बेटे ज़ीशान सिद्दीकी के कार्यालय के बाहर हुई इस हत्या ने महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था और वीआईपी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। पुलिस विभाग द्वारा अपने ही कर्मचारी की बर्खास्तगी यह संकेत देती है कि ड्यूटी के दौरान किसी भी प्रकार की कोताही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल, पुलिस अन्य फरार आरोपियों और इस बड़ी साजिश के मुख्य सूत्रधारों की तलाश में जुटी है।
PM मोदी की अपील पर विपक्ष का तंज, प्रियंका बोलीं- शुरुआत असम से करें
11 May, 2026 11:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: मध्य पूर्व के संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से की गई 'बचत' की अपील पर सियासी घमासान थमता नजर नहीं आ रहा है। शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने पीएम के इस बयान पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार को घेरते हुए 'वर्क फ्रॉम होम' (WFH) की सलाह को खुद नेताओं पर लागू करने की चुनौती दी है।
नेताओं की रैलियों और समारोहों पर लगे पाबंदी
प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री के सामने जनता की ओर से कुछ सुझाव रखते हुए कहा कि यदि त्याग की शुरुआत करनी है, तो इसकी पहल सरकार और राजनेताओं से होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि मंत्रियों और नेताओं की लंबी चुनावी रैलियों पर एक साल के लिए पूर्ण पाबंदी लगाई जाए। साथ ही, भव्य शपथ ग्रहण समारोहों को बंद कर उन्हें 'WFH' यानी 'वॉच फ्रॉम होम' के जरिए संचालित किया जाना चाहिए, ताकि सरकारी संसाधनों की बचत हो सके।
असम के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण पर कसा तंज
यूबीटी नेता ने 12 मई को होने वाले असम के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह का जिक्र करते हुए केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि वे उम्मीद करती हैं कि असम के इस भव्य कार्यक्रम से ही 'वॉच फ्रॉम होम' की शुरुआत होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री को 'वॉक द टॉक' (जो कहें वो करके दिखाएं) की नसीहत देते हुए कहा कि जनता को उपदेश देने से पहले नेताओं को खुद उदाहरण पेश करना चाहिए।
नीतियों की विफलता का बोझ जनता पर क्यों?
प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार की विदेश और आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट के संघर्ष को संभालने में सरकार विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की गलत नीतियों के कारण आज देश आर्थिक दबाव में है और इसका खामियाजा नागरिकों को भुगतने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनके अनुसार, नागरिकों से तेल बचाने या खरीदारी कम करने के लिए कहना अनुचित है, क्योंकि जनता पहले से ही महंगाई और चुनावी केंद्रित शासन की मार झेल रही है।
विदेशी दौरों और पुरस्कारों पर भी उठाए सवाल
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने सरकार की विदेश नीति पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि सरकार केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार बटोरने में व्यस्त रही और वास्तविक संकटों के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई। अब जब परिस्थितियां कठिन हो गई हैं, तो सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय आम आदमी से यात्राएं और खर्च कम करने की अपील कर रही है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तेज होने के आसार हैं।
शिवसेना मंत्री के बयान से नया विवाद, इम्तियाज जलील पर आरोपों की बौछार
9 May, 2026 03:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नासिक। महाराष्ट्र के नासिक में स्थित एक प्रतिष्ठित आईटी कंपनी के कार्यालय में यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के प्रयासों से जुड़े मामले ने अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। इस प्रकरण की मुख्य आरोपी और कंपनी की एचआर अधिकारी निदा खान को पुलिस ने एक लंबे तलाशी अभियान के बाद हिरासत में ले लिया है। इस गिरफ्तारी के तुरंत बाद राज्य सरकार के मंत्री संजय शिरसाट ने विपक्षी राजनीतिक दलों पर तीखे प्रहार करते हुए उन पर आरोपियों को संरक्षण देने और जांच में बाधा उत्पन्न करने के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे प्रदेश का सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है।
आरोपियों को संरक्षण देने का राजनीतिक विवाद
मंत्री संजय शिरसाट ने सार्वजनिक रूप से बयान देते हुए कहा है कि आरोपियों को छिपाने और पुलिस प्रशासन का सहयोग न करने के पीछे कुछ विशिष्ट राजनीतिक नेताओं का हाथ है। उन्होंने सीधे तौर पर स्थानीय नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने स्वीकार किया है कि उन्हें सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराया गया था। मंत्री ने मांग की है कि केवल मुख्य आरोपी ही नहीं, बल्कि उन्हें आश्रय देने वाले और इस पूरी साजिश के पीछे काम करने वाले हर व्यक्ति को सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए ताकि न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास बना रहे।
विशेष जांच दल के गठन की मांग
मामले की गंभीरता और इसके व्यापक प्रभाव को देखते हुए राज्य सरकार के मंत्री ने मुख्यमंत्री से इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी के गठन की अपील की है। उनका तर्क है कि यह घटना केवल एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अन्य जिलों से भी जुड़े हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठन और उनके सहयोगी योजनाबद्ध तरीके से ऐसी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं, जिनकी गहराई से तकनीकी और जमीनी जांच होना अनिवार्य है ताकि इस नेटवर्क के असली संचालकों का पर्दाफाश किया जा सके।
महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में सक्रियता का दावा
मंत्री ने अपनी चिंताओं को विस्तार देते हुए कहा कि इस तरह का अभियान केवल नासिक तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पुणे और संभाजीनगर जैसे बड़े शहरों में भी इसी तरह की गतिविधियां चलने की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने इस स्थिति की तुलना चर्चित फिल्मों में दिखाए गए घटनाक्रमों से करते हुए चेतावनी दी कि जब तक बातें खुलकर सामने नहीं आतीं, तब तक सामान्य जन को इनका आभास नहीं होता। उनके अनुसार महाराष्ट्र के कई हिस्सों में इस तरह का माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे रोकने के लिए पुलिस को अब और अधिक मुस्तैद रहने की आवश्यकता है।
कानून के प्रति निर्भीकता पर जताई चिंता
प्रशासनिक कार्यवाही के बावजूद आरोपियों और उनके समर्थकों में कानून का डर न होने की बात भी इस विवाद के केंद्र में है। मंत्री शिरसाट ने इस बात पर हैरानी जताई कि जेल में बंद होने के बावजूद कुछ लोग राजनीतिक स्वागत और बैनरबाजी में व्यस्त हैं, जो यह दर्शाता है कि उन्हें संवैधानिक प्रक्रिया का कोई भय नहीं है। उन्होंने पुलिस विभाग से आग्रह किया है कि इन तत्वों के विरुद्ध ऐसी कठोर कार्यवाही की जाए जिससे समाज में एक सख्त संदेश जाए और भविष्य में कोई भी कानून को हाथ में लेने या सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का साहस न कर सके।
शुभेंदु अधिकारी के नाम पर गरमाई सियासत, संजय राउत का तीखा बयान
9 May, 2026 11:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए एक बड़े बदलाव के तहत भारतीय जनता पार्टी द्वारा शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपे जाने पर विपक्षी खेमे ने तीखा प्रहार किया है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता और सांसद संजय राउत ने इस निर्णय पर तंज कसते हुए भाजपा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के विरुद्ध स्वयं भाजपा ने लंबे समय तक भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन चलाया था, आज उसी को सर्वोच्च पद पर आसीन कर दिया गया है। राउत ने इस घटनाक्रम को भाजपा की उस कथित परंपरा का हिस्सा बताया जिसमें दूसरे दलों से आने वाले दागी नेताओं को महत्वपूर्ण पदों से नवाजा जाता है।
राजनीतिक शुचिता और भाजपा की नीति पर सवाल
संजय राउत ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ताधारी दल अपनी स्थापित परंपराओं को निभाने में सबसे आगे है। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ वर्ष पूर्व तक इसी मुख्यमंत्री के खिलाफ पूरी भाजपा मशीनरी भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सड़कों पर उतरी थी। शिवसेना नेता के अनुसार यह विडंबना ही है कि जिस नेता के विरुद्ध भाजपा ने महीनों तक सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से मुहिम चलाई थी, आज उसी नेतृत्व को उन्होंने बंगाल की कमान सौंप दी है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को नैतिकता के नजरिए से भाजपा की बड़ी विफलता करार दिया है।
भ्रष्टाचार के आरोपों और जांच एजेंसियों का जिक्र
विपक्षी प्रवक्ता ने अतीत की घटनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि संबंधित नेता को सार्वजनिक रूप से संदिग्ध लेन-देन के मामलों में घिरा हुआ देखा गया था, जिसके बाद उन पर केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यवाही भी हुई थी। राउत ने तंज भरे लहजे में कहा कि भाजपा में शामिल होते ही जैसे सारे आरोप धुल गए हों और अब उन्हें एक महान व्यक्तित्व के रूप में पेश कर राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया गया है। उनके अनुसार यह भाजपा की उस कार्यशैली को दर्शाता है जहाँ बाहर से आने वाले विवादित चेहरों को भी उच्च सम्मान और पद प्रदान किया जाता है।
तमिलनाडु के बदलते सियासी समीकरणों पर टिप्पणी
बंगाल के घटनाक्रम के साथ-साथ संजय राउत ने दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु की बदलती राजनीति पर भी अपनी राय साझा की। कांग्रेस द्वारा पुराने गठबंधन को छोड़कर नए विकल्पों की तलाश करने और विजय थलापति की पार्टी के प्रति झुकाव दिखाने पर उन्होंने इसे राजनीति की चंचलता बताया। उन्होंने जानकारी दी कि राहुल गांधी ने इस विषय पर मौजूदा सहयोगियों से विस्तार से चर्चा की है ताकि आगामी चुनौतियों का सामना करने के लिए एक मजबूत विकल्प तैयार किया जा सके। राउत को विश्वास है कि गठबंधन के भीतर चल रहे मतभेद आने वाले समय में आपसी संवाद से सुलझा लिए जाएंगे।
विपक्षी गठबंधन की भविष्य की रणनीति
संजय राउत का मानना है कि भाजपा को रोकने के लिए विपक्षी दलों को कई बार कड़े और अप्रत्याशित निर्णय लेने पड़ते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु हो या बंगाल, मुख्य लक्ष्य सत्ता पक्ष की नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना है। उन्होंने भाजपा पर हमला जारी रखते हुए कहा कि जिस तरह की तानाशाही और अवसरवाद की राजनीति वर्तमान में देखी जा रही है, उसका अंत देश की जनता ही करेगी। शिवसेना नेता ने दोहराया कि सिद्धांतों की राजनीति करने के बजाय भाजपा केवल सत्ता प्राप्ति के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार दिखती है।
शुभेंदु अधिकारी की शपथ से पहले सुनेत्रा पवार की टिप्पणी चर्चा में
9 May, 2026 09:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के राजनैतिक इतिहास में एक नए युग का सूत्रपात करते हुए भारतीय जनता पार्टी आज राज्य में अपनी पहली सरकार बनाने जा रही है। इस ऐतिहासिक अवसर पर महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने भाजपा को इस शानदार सफलता के लिए हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने इस विजय का संपूर्ण श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन को देते हुए कहा कि एनडीए का गठबंधन उनके नेतृत्व में निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। बंगाल में भाजपा की इस निर्णायक जीत से न केवल राज्य बल्कि देशभर के गठबंधन सहयोगियों में उत्साह और हर्ष का माहौल व्याप्त है।
ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी
पश्चिम बंगाल की राजधानी में आज सुबह ग्यारह बजे एक भव्य समारोह का आयोजन किया जाएगा, जहाँ शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करेंगे। यह क्षण भारतीय जनता पार्टी के लिए अत्यंत गौरवशाली है क्योंकि राज्य में पहली बार पार्टी के नेतृत्व में सरकार का गठन होने जा रहा है। इस समारोह की गरिमा बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित एनडीए शासित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया गया है, जिससे यह आयोजन राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना हुआ है।
विधायक दल के नेता का सर्वसम्मति से चयन
मुख्यमंत्री पद की शपथ से पूर्व शुक्रवार को हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में नवनिर्वाचित विधायकों ने एक स्वर में शुभेंदु अधिकारी को अपना नेता स्वीकार किया। सर्वसम्मति से हुए इस चयन ने पार्टी के भीतर अटूट एकता का संदेश दिया है और यह स्पष्ट कर दिया है कि नई सरकार विकास के एजेंडे पर पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ने को तैयार है।
चुनावी नतीजों में प्रचंड बहुमत का संदेश
हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम भाजपा के लिए अप्रत्याशित और उत्साहजनक रहे हैं। राज्य की दो सौ चौरानवे सीटों में से भाजपा ने दो सौ सात सीटों पर अपना परचम लहराकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि लंबे समय तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस अस्सी सीटों पर सिमट गई है। कांग्रेस पार्टी को भी मात्र दो सीटों से संतोष करना पड़ा है। यह जनादेश दर्शाता है कि राज्य की जनता ने बदलाव के पक्ष में अपना मत दिया है और भाजपा की नीतियों पर गहरा विश्वास व्यक्त किया है।
एनडीए गठबंधन की बढ़ती ताकत और खुशी
महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने इस जीत को लोकतंत्र के त्योहार के रूप में परिभाषित किया है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर हर्ष व्यक्त किया कि बंगाल में पहली बार एनडीए की सरकार का उदय हो रहा है, जो प्रधानमंत्री मोदी के विजन की एक बड़ी जीत है। गठबंधन के अन्य नेताओं ने भी इस सफलता को विकासोन्मुख राजनीति की जीत बताया है। उनका मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मिले जनसमर्थन के बाद अब बंगाल में सुशासन और प्रगति के एक नए अध्याय की शुरुआत होगी।
राशिफल 21 मई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
लाल आतंक से विकास की ओर बढ़ता दारेली
सीएचसी पलारी के लैब में जांच सुचारू रूप से संचालित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से की भेंट
ग्रामीण विकास में रोजगार सहायकों की महत्वपूर्ण भूमिका, राज्य सरकार इनके हित की चिंता करेगी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
जहाँ राशन और जरूरतों के लिए भी तय करना पड़ता है 40 किलोमीटर का सफर… वहाँ पहुँची उपचार की दस्तक
