राजनीति
राहुल का आवेदन शर्तों के साथ स्वीकृत
19 Feb, 2025 09:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने वकीलों के माध्यम से अदालत में एक आवेदन दायर कर स्वातंत्र्यवीर सावरकर के बारे में अपने विवादास्पद बयान के संबंध में मामले की सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से पेश होने से स्थायी छूट मांगी थी। विशेष न्यायाधीश अमोल शिंदे ने मंगलवार को शर्तों के साथ राहुल गांधी की अर्जी मंजूर कर ली। दरअसल सावरकर के पोते सात्यकी सावरकर ने स्वातंत्र्यवीर सावरकर के बारे में दिए गए विवादास्पद बयान को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। इस मामले में राहुल गांधी को अदालत में पेश होने के लिए 10 जनवरी की तारीख दी गई थी। राहुल गांधी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए। अदालत ने मानहानि के एक मामले में राहुल गांधी को 25,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी थी। इस बीच, राहुल गांधी के वकील एड. मिलिंद दत्तात्रेय पवार ने अदालत में एक आवेदन दायर कर इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित होने से स्थायी छूट मांगी थी। अभियुक्त अपनी पहचान पर विवाद नहीं करेंगे, न ही वे इस बात पर आपत्ति करेंगे कि इस मामले में साक्ष्य हमारे वकीलों की अनुपस्थिति में दर्ज किए गए। साथ ही, सुनवाई के दौरान अभियुक्त के वकील अभियुक्त को समय-समय पर आवश्यक निर्देश भी देंगे। विशेष अदालत ने ऐसी शर्तों पर राहुल गांधी की अर्जी मंजूर कर ली। अब मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगा।
बजट सत्र के पहले दिन सपा ने अनोखे रूप में प्रदर्शन किया
19 Feb, 2025 08:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। बजट सत्र के पहले दिन सपा ने अनोखे रूप में प्रदर्शन किया। इस दौरान सपा विधायक हाथ पैरों में जंजीर पहनकर प्रदर्शन किया। अतुल प्रधान ने बजट सत्र में शामिल होने से पहले कहा, योगी सरकार बताती है कि विश्व में लगातार देश का डंका बज रहा है। हमारे भारतीय लोग, जिन्हें 40 घंटा जंजीरों में जकड़कर रखा गया। अमेरिका से उन्हें बेरहमी से डिपोर्ट किया गया।
वहीं सपा नेता रविदास मेहरोत्रा ने कहा, कि हम राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विरोध करने वाले हैं, क्योंकि वे योगी सरकार की झूठी प्रशंसा करेंगी, यह सरकार परीक्षा लीक कराती थी। उन्होंने आरोप लगाए कि ये सरकार सभी मोर्चों पर विफल है। सड़क से लेकर सदन तक विपक्ष अपना प्रदर्शन करता रहेगा।
बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर विधानसभा में विपक्ष के नेता और माता प्रसाद पांडेय ने कहा, कि उनके (राज्यपाल) अभिभाषण में जो पढ़ा जा रहा था, उसका समाजवादी पार्टी ने विरोध किया क्योंकि उसमें गलत आंकड़े दिए गए थे। मांग थी कि महाकुंभ में हुई भगदड़ में हुई मौतों का सही आंकड़ा दिया जाए। राज्यपाल ने भाषण बीच में ही छोड़ दिया। हमें लगता है कि महाकुंभ में हुई घटनाओं से वह दुखी थीं, इसलिए उन्होंने पूरा भाषण नहीं पढ़ा।
नए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर कांग्रेस नेता ने जाहिर की चिंता
18 Feb, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राहुल गांधी ने नियुक्ति पैनल की संरचना पर सवाल उठाए
नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने ज्ञानेश कुमार को नए मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त करने पर चिंता व्यक्त की, चयन समिति के गठन को लेकर चल रही कानूनी चुनौती के बीच निर्णय की जल्दबाजी पर सवाल उठाया। कांग्रेस नेता तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव न केवल निष्पक्ष होने चाहिए बल्कि निष्पक्ष प्रतीत भी होने चाहिए, उन्होंने इस कदम की आलोचना कर सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार और संविधान की मूल भावना का उल्लंघन बताया। कांग्रेस सांसद तिवारी ने कहा कि इस मामले के लिए चयन समिति के गठन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। मामले को सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। इसके बाद इतनी जल्दी क्या थी कि इस दौरान नियुक्ति कर दी गई? ...लोकतंत्र में चुनाव न केवल निष्पक्ष होने चाहिए बल्कि निष्पक्ष दिखने भी चाहिए...यह सुप्रीम कोर्ट और संविधान की मूल भावना की अवमानना है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने महीने की शुरुआत में लोकसभा में एक भाषण के दौरान मोदी सरकार के प्रभुत्व वाले पैनल की संरचना पर सवाल उठाए थे। चयन समिति की बैठक में भाग लेने के दौरान राहुल गांधी ने नियुक्ति की प्रणाली पर आपत्ति जताकर एक असहमति पत्र प्रस्तुत किया। इसके पहले चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भारत का नया मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया था। कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 19 फरवरी, 2025 से प्रभावी रूप से चुनाव आयुक्त कुमार को भारत के चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त करते हैं।
बीजेपी को मिला सबसे ज्यादा चंदा, कांग्रेस दूसरे तो आप तीसरे नंबर पर
18 Feb, 2025 05:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। राष्ट्रीय दलों को मिले चंदे को लेकर एक रिपोर्ट जारी हुई है। रिपोर्ट में 2023-24 में बीजेपी को सबसे ज्यादा 4340.47 करोड़ रुपए का चंदा मिला था। कांग्रेस 1225.12 करोड़ रुपए के साथ दूसरे स्थान पर थी। रिपोर्ट में बताया गया कि राजनीतिक दलों को चंदे का बड़ा हिस्सा चुनावी बॉन्ड से मिला। बीजेपी ने अपनी कमाई का 50.96 फीसदी यानी 2211.69 करोड़ रुपए खर्च किया, जबकि कांग्रेस ने 83.69 फीसदी यानी 1025.25 करोड़ रुपए खर्च किए। आम आदमी पार्टी को 22.68 करोड़ का चंदा मिला था, लेकिन उसने इससे ज्यादा 34.09 करोड़ खर्च किए थे।
सभी राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को मिले कुल चंदे का 74.57 फीसदी अकेले बीजेपी को मिला। शेष पांच दलों को कुल 25.43 फीसदी चंदा मिला। बीजेपी को चुनावी बॉन्ड से 1685.63 करोड़ रुपए मिले, जबकि कांग्रेस को 828.36 करोड़ और आप को 10.15 करोड़ रुपए मिले। कुल मिलाकर इन तीनों दलों को 2524.1361 करोड़ रुपए यानी अपने कुल चंदे का 43.36 फीसदी चुनावी बॉन्ड से मिला है।
बता दें सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल मई में चुनावी बॉन्ड को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। रिपोर्ट में भारतीय स्टेट बैंक ने बताया कि 2023-24 में कई राजनीतिक दलों ने 4507.56 करोड़ रुपए के चुनावी बॉन्ड भुनाए। राष्ट्रीय दलों ने इस फंड का 55.99 फीसदी यानी 2524.1361 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।
सीपीआई (एम) को 167.636 करोड़ रुपए का चंदा मिला, जिसमें से उसने 127.283 करोड़ खर्च किए। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को 64.7798 करोड़ मिले और उसने 43.18 करोड़ खर्च किए। नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) को 0.2244 करोड़ मिले और उसने 1.139 करोड़ खर्च किए। कांग्रेस ने सबसे ज्यादा खर्च 619.67 करोड़ रुपए चुनाव प्रचार पर किए। इसके अलावा प्रशासनिक और अन्य खर्चों पर 340.702 करोड़ रुपए खर्च किए।
सीपीआई (एम) ने प्रशासनिक और अन्य कार्यों में 56.29 करोड़ रुपए और पार्टी के कर्मचारियों पर 47.57 करोड़ रुपए खर्च किए। कांग्रेस 58.56 करोड़ रुपए और सीपीआई (एम) 11.32 करोड़ रुपए ने कूपन की बिक्री से कुल 69.88 करोड़ रुपए की आमदनी दर्ज की। बीजेपी, कांग्रेस और सीपीआई (एम) की ऑडिट रिपोर्ट 12 से 66 दिनों की देरी से पेश की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय दलों के सबसे आम खर्च चुनाव प्रचार और प्रशासनिक गतिविधियों पर होते हैं। यह रिपोर्ट राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता पर प्रकाश डालती है और दर्शाती है कि किस प्रकार चुनावी बॉन्ड ने दलों की आय को प्रभावित किया है।
महाराष्ट्र में शिंदे के 20 विधायकों की वाई-सुरक्षा वापस ली, अटकलों का बाजार गर्म
18 Feb, 2025 04:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में दरार पढ़ने की अटकलों के बीच सीएम देवेंद्र फडणवीस के अधीन गृह विभाग ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 20 विधायकों की वाई-सुरक्षा वापस ले ली है। हालांकि बीजेपी और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के कुछ विधायकों की सुरक्षा भी कम की गई है।
मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों ने बताया कि इन विधायकों को वाई-सुरक्षा कवर एक अतिरिक्त भत्ते के रूप में दिया गया था, जबकि वे मंत्री नहीं हैं। इन विधायकों को 2022 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना से अलग होने के बाद प्रदान किया था, जिसके कारण महा विकास अघाड़ी सरकार गिर गई थी। इस फैसले से शिंदे सेना और बीजेपी के बीच चल रहा तनाव और बढ़ने की संभावना है और इस नवीनतम कदम को फडणवीस ने अपनी सत्ता स्थापित करने के लिए एक रणनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है।
विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करने के कुछ महीनों बाद सत्तारूढ़ सहयोगियों के बीच कलह पर कटाक्ष करते हुए, शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया कि महायुति वैलेंटाइन माह मना रही है। नहीं। बीजेपी और शिंदे सेना के बीच गतिरोध, जो रायगढ़ और नासिक के लिए संरक्षक मंत्री पदों को लेकर शुरू हुआ था। एक मुद्दा जो अभी भी अनसुलझा है, अन्य क्षेत्रों में भी फैल गया है।
पिछले महीने दावोस में विश्व आर्थिक मंच शिखर सम्मेलन में रवाना होने से पहले सीएम फडणवीस ने एनसीपी के तटकरे (श्रीवर्धन) को रायगढ़ का संरक्षक मंत्री नामित कर दिया था। हालांकि यह एकनाथ शिंदे को अच्छा नहीं लगा, जो पहले से ही सीएम पद से वंचित होने से नाराज थे। शिंदे इस पद के लिए अपनी पार्टी के किसी नेता को इस पद पर बैठना चाहते थे, क्योंकि शिवसेना का जिले में काफी असर है। हालांकि, शिंदे को शांत करने के लिए तटकरे की नियुक्ति रोक दी गई।
सूत्रों ने बताया कि एकनाथ शिंदे सीएम फडणवीस के साथ मंच साझा करने से भी बचते दिख रहे हैं। पिछले महीने शिंदे, सीएम फडणवीस द्वारा बुलाई गई नासिक मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण की बैठक में शामिल नहीं हुए थे। वे पिंपरी-चिंचवाड़ पुलिस आयुक्त कार्यालय के उद्घाटन समारोह में भी अनुपस्थित रहे। यह सब वजह महाराष्ट्र की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म कर रही हैं।
आज जो गालियां दे रहे हैं वहीं कल लालू यादव को भारत रत्न देंगे
18 Feb, 2025 02:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी ने जनसभा को किया संबोधित
पटना। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव ने कहा है कि जो लोग आज लालू यादव को गालियां दे रहे हैं, वही लोग एक दिन उनको भारत रत्न देंगे तेजस्वी ने यह बात बिहार के सीतामढ़ी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कही। दरअसल, बीते दिनों नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ को लेकर लालू यादव ने रेलवे पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि दुखद घटना घटी है। यह रेलवे की गलती है। रेलवे की लापरवाही से इतने लोगों की मौत हुई है।
इस दौरान उन्होंने कुंभ को लेकर भी कहा था कि कुंभ का कहां कोई मतलब है। फालतू है कुंभ उनके इस बयान को लेकर केंद्र और राज्य में सत्ता पक्ष के नेताओं ने उनकी आलोचना की थी। तेजस्वी ने कहा कि जब कर्पूरी ठाकुर ने आरक्षण को लागू किया था, तो ये लोग उनको भद्दी गालियां देते थे। आज कर्पूरी की ताकत को देखिए जो लोग गाली देते थे, उनको भारत रत्न देना पड़ रहा है। ये है समाजवाद की असली ताक़त।
उन्होंने कहा कि ये ताक़त है कर्पूरी जी की, आज भी कर्पूरी जी प्रासंगिक हैं, जो गाली दिया करते थे, वो भारत रत्न दे रहे हैं। लालू जी को गाली देने वालों से भी हम कहना चाहते हैं कि आज तो तुम लोग लालू जी को गाली दे रहे हो, लेकिन आने वाले समय में उनको भी तुम भारत रत्न देने का काम करोगे।
कांग्रेस नेता उदित राज के बिगड़े बोल- कहा मायावती का गला घोंटने का समय आ गया
18 Feb, 2025 01:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता उदित राज ने उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती को लेकर विवादित टिप्पणी की है। उदित राज ने गीता में भगवान श्री कृष्ण के उपदेश का जिक्र करते हुए कहा कि मायावती का गला घोंटने का समय आ गया है। दिल्ली के पूर्व सांसद ने कहा उन्हें उनके कृष्ण ने ऐसा करने के लिए कहा है। मायावती ने उदित राज का नाम लिए बिना जवाब दिया है और बयान को गंभीरता से नहीं लेने की बात कही। उदित राज के बोल पर भाजपा ने भी आपत्ति जाहिर की है।
उदित राज ने अपने एक्स पर भी अपने बयान को साझा किया है। उन्होंने सोमवार को एक्स पर लिखा, कृष्ण ने कहा था कि न्याय के लिए लड़ो, जरूरत पड़े तो अपने सगे संबंधियों को भी मार दो। बसपा की चीफ सुश्री मायावती जी ने जो सामाजिक आंदोलन का गला घोंटा है, अब उनका गला घोंटने का वक्त आ गया है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यह बयान दिया।
कांग्रेस नेता ने अपने बयान का वह हिस्सा भी खुद साझा किया है, जिसमें वह कहते हैं, श्रीकृष्ण ने कहा कि अपने सगे संबंधियों को कैसे मारे, कृष्ण ने कहा कि कोई सगा संबंधी नहीं है, न्याय के लिए लड़ो, मार दो अपने लोगों को ही मार दो, आज उसी मोड़ पर हमारे कृष्ण ने मुझे कह दिया है कि सबसे पहले जो अपना दुश्मन है उसे मार दो। जो सामाजिक न्याय का दुश्मन है, मैंने अपने प्रेस रिलीज में लिख दिया है, सुश्री मायावती ने जो सामाजिक आंदोलन का गला घोंटा अब उनका गला घोंटने का समय आ गया है।
आकाश आनंद ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम
उदित राज के बयान के बाद बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद की तीखी प्रतिक्रिया आई है। आकाश आनंद ने यूपी पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए उदित राज को गिरफ्तार करने की मांग की है। हमारी परमपूज्य आदरणीय बहन कु. मायावती जी को गला घोंटना की धमकी दे रहा है। मैं यूपी पुलिस से साफ़ कहना चाहता हूँ की 24 घंटे में इन अपराधियों को गिरफ्तार कर क़ानून के तहत कड़ी से कड़ी कार्रवाई करें नहीं तो देश का बहुजन युवा चुप बैठने वाला नहीं है, इनको सबक सिखाना मुझे अच्छे से आता है।
गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं: मायावती
मायावती ने उदित राज के बयान पर कहा कि बाबा साहेब डॉ। भीमराव अम्बेडकर के जीतेजी और उनके देहांत के बाद भी, करोड़ों शोषित-पीड़ित दलितों/बहुजनों के लिए उनके आत्म-सम्मान और स्वाभिमान के मानवतावादी संघर्ष का हर स्तर पर तिरस्कार करने वाली खासकर कांग्रेस पार्टी कभी भी इनकी सोच-नीतियों पर खरी व विश्वसनीय नहीं हो सकती।मायावती ने कहा, कुछ दलबदलू अवसरवादी व स्वार्थी दलित लोग अपने आकाओं को खुश करने के लिए जो अनर्गल बयानबाजी आदि करते रहते हैं उनसे भी बहुजन समाज को सावधान रहने व उन्हें गंभीरता से नहीं लेने की जरूरत है क्योंकि वे सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति मूवमेन्ट से अनभिज्ञ व अपरिचित हैं।
महाराष्ट्र में सियासी कोल्ड वार, फडणवीस ने शिंदे समर्थक दो दर्जन नेताओं के पर कतरे
18 Feb, 2025 12:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । महाराष्ट्र में सियासी कोल्ड वार चल रहा है। नेता बिना किसी बयानबाजी के अपना काम कर रहे हैं। भीतर ही भीतर एक दूसरे में खींचतान मची हुई है। सीएम देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के बीच खटपट बताई जा रही है। खटपट से अधिक तो कोल्ड वार है। दोनों एक-दूसरे से नाराज बताए जा रहे हैं। शिंदे ही सबसे अधिक खलबली मचाए हुए हैं। कभी वह देवेंद्र फडणवीस की बैठक से गायब रहते हैं तो कभी कुछ अलग फैसला कर लेते हैं। मगर अबकी बार हलचल देवेंद्र फडणवीस ने मचाई है।
दरअसल, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास गृह विभाग है। इसी गृह विभाग ने एकनाथ शिंदे गुट को टेंशन दे दी है। देवेंद्र फडणवीस के गृह विभाग ने शिंदे गुट के 20 से ज्यादा शिवसेना विधायकों की सुरक्षा में कटौती कर दी है। ये वो विधायक हैं, जो मंत्री नहीं हैं। इनकी सुरक्षा वाय प्लस श्रेणी से घटाकर सिर्फ एक कांस्टेबल कर दी गई है। इतना ही नहीं, कुछ अन्य शिवसेना नेताओं को दी गई सुरक्षा भी वापस ले ली गई है। शिंदे कैंप के विधायक जब उद्धव गुट छोड़ कर आए थे, तो सभी को वाय कैटेगरी की सुरक्षा दी गई थी।
हालांकि, फडणवीस के इस फैसले को बैलेंस करने की भी कोशिश की गई है। कुछ भाजपा और अजित पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी नेताओं को भी सुरक्षा वापस ले ली गई है। हालांकि, जिन शिंदे वाली शिवसेना नेताओं की सुरक्षा में कटौती की गई है या वापस ली गई है, उनकी संख्या कहीं ज्यादा है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना के विधायकों और सांसदों को अक्टूबर 2022 में वाय-सुरक्षा कवर प्रदान किया गया था। यह फैसला उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर सीएम बनने के कुछ महीने बाद लिया गया था। अब शिंदे के मंत्रियों को छोड़कर अधिकांश शिवसेना विधायकों के लिए सुरक्षा कवर को घटा दिया गया है, जबकि पूर्व सांसदों के लिए इसे वापस ले लिया गया है।
जिन सभी नेताओं की सुरक्षा हटाई गई गई है, अब उनके साथ केवल एक कॉन्स्टेबल रहेगा। यह बात सही है कि फडणवीस के विभाग ने भाजपा और अजित गुट के नेताओं की भी सुरक्षा कम की है। मगर शिंदे कैंप के नेताओं की सबसे अधिक है, जिनकी सुरक्षा कम की गई है। यही वजह है कि शिंदे कैंप के नेता नाराज हैं। एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के बीच यह कोल्ड वार विधान सभाचुनाव के बाद से ही चल रहा है। हालांकि, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे का कहना है कि कोई कोल्ड वार नहीं चल रहा है और नही कोई हॉट वार चल रहा है। सब टिक है। हम सब एक साथ मिल कर काम कर रहे हैं। मगर महाराष्ट्र के सियासी संकेत तो कुछ और ही संकेत कर रहे हैं।
बीजेपी अब दिल्ली की तरह पश्चिम बंगाल में सत्ता पर काबिज होने बना रही रणनीति
18 Feb, 2025 11:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बीजेपी ने दिल्ली चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर राजनीतिक ताकत दिखा दी है। अब पार्टी इसी ताकत का अनुभव पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों में दिखाने की रणनीति बना रही है। दिल्ली और पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति की तुलना करने से कुछ महत्वपूर्ण रणनीतिक पहलुओं का पता चलता है।
दिल्ली में बीजेपी ने केवल सक्षम उम्मीदवार ही नहीं उतारे, बल्कि एक सशक्त चुनावी टीम भी तैयार की। पार्टी ने चुनाव प्रबंधन में वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी तय की और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया। अरविंद केजरीवाल सरकार के खिलाफ जनता की नाराजगी को बीजेपी ने भुनाने का प्रयास किया। पार्टी ने दिल्ली सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर मतदाताओं को अपनी ओर खींचने का प्रयास किया। आम आदमी पार्टी के नेताओं के बढ़ते बयानों को बीजेपी ने उनके खिलाफ भुनाया और जनता के मूड को भांपने में सफल रही।
बीजेपी अब दिल्ली की तरह ही पश्चिम बंगाल में भी ममता सरकार के खिलाफ नाराजगी को मुख्य मुद्दा बना सकती है। टीएमसी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों को जनता तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। पार्टी पश्चिम बंगाल में भी मजबूत संगठनात्मक ढांचा तैयार कर सकती है। क्षेत्रीय नेताओं की भागीदारी बढ़ाकर जमीनी स्तर पर प्रभावशाली उम्मीदवारों को उतारने की योजना बना सकती है। बीजेपी ओडिशा चुनाव की तरह किसी विशेष मुद्दे को उभारकर जनता को आकर्षित करने की रणनीति पर काम कर सकती है।
दिल्ली में मिली सफलता को देखते हुए बीजेपी पश्चिम बंगाल में भी अपनी रणनीति को उसी तर्ज पर लागू करने की योजना बना रही है। पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियां दिल्ली से अलग हैं, इसलिए बीजेपी को वहां की स्थानीय परिस्थितियों और मतदाताओं की प्राथमिकताओं के अनुरूप रणनीति को ढालना होगा। यदि पार्टी एंटी-इनकंबेंसी और भ्रष्टाचार के मुद्दों को जनता तक पहुंचने में सफल होती है, तो आगामी विधानसभा चुनाव में उसे लाभ मिल सकता है।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन भगदड़: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 'साजिश' की बात से इनकार किया
18 Feb, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली, रेलवे स्टेशन पर बीते दिनों मची भगदड़ की घटना के बाद से इसे लेकर हंगामा जारी है। स्टेशन पर भगदड़ मचने के कारण 18 लोगों की मौत हो गई और 15 घायल हो गए थे। विपक्ष इस घटना को लेकर लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है। इस भगदड़ की कारणों को लेकर जांच की जा रही है। वहीं, अब सोमवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ को लेकर बयान दिया है। रेल मंत्री वैष्णव ने भगदड़ के पीछे किसी साजिश की बात से इनकार कर दिया है। आइए जानते हैं कि रेल मंत्री ने इस बारे में और क्या कुछ कहा है।
क्या बोले रेल मंत्री वैष्णव?
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को रेल भवन में मीडियाकर्मियों से कहा- ‘‘इस समय तो कोई साजिश नजर नहीं आती।’’ रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आगे ये भी बताया कि अब तक उपलब्ध सूचना से पता लगा है कि शनिवार को भगदड़ मचने के समय नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बहुत ज्यादा भीड़ नहीं थी। उन्होंने प्लेटफॉर्म बदलने की घोषणा को भगदड़ की वजह होने से इनकार करते हुए कहा- ‘‘जांच समिति इस पर गहराई से पड़ताल कर रही है।’’
कैसे मची भगदड़?
रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक- ‘‘प्लेटफार्म संख्या 12 से शाम 7:15 बजे एक प्रयागराज स्पेशल ट्रेन चलाई गई थी तथा टिकटों की बिक्री में वृद्धि को देखते हुए एक और स्पेशल चलाने की योजना बनाई गई, जो उसी प्लेटफार्म पर 8:50 बजे प्रतीक्षा कर रही थी।" अधिकारी ने जानकारी दी है कि रात करीब साढ़े आठ बजे प्लेटफार्म 12 पर प्रयागराज स्पेशल ट्रेन के लिए घोषणा की गई तो कुछ यात्री भ्रमित हो गए और उन्हें लगा कि यह घोषणा प्रयागराज एक्सप्रेस के लिए की गई है। अधिकारी ने कहा- ‘‘वे प्रयागराज एक्सप्रेस में चढ़ने के लिए प्लेटफॉर्म 14 पर थे, लेकिन ऐसा लगता है कि उद्घोषणा से वे भ्रमित हो गए और उन्होंने प्लेटफॉर्म 12 की ओर जाना शुरू कर दिया। सीढ़ियों पर कई यात्री बैठे थे और उन पर चढ़ते समय एक व्यक्ति जिसके सिर पर भारी सामान था, वह असंतुलित हो गया और दूसरे यात्रियों पर गिर गया जिससे भगदड़ मच गई।’’
रेलवे अधिकारियों ने दिन रात काम किया- रेल मंत्री
रेल मंत्री वैष्णव ने सोमवार को कहा कि ‘‘हमने पिछली असफलताओं और गलतियों से सीखा है और यही कारण है कि यात्रियों की इतनी बड़ी भीड़ को इतनी अच्छी तरह से प्रबंधित किया गया है। पिछले कुंभ मेले में केवल 4,000 ट्रेनें चलाई गई थीं, जबकि इस बार हमने 13,000 ट्रेनों की योजना बनाई थी और अब तक 12,583 ट्रेनें चलाई जा चुकी हैं। दुनिया में किसी देश में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही नहीं होती। रेलवे अधिकारियों ने दिन रात काम किया है। इतनी बड़ी भीड़ को संभालना अत्यंत मुश्किल काम है।’’
सैम पित्रोदा का बयान, गलवान के शहीदों का अपमान
18 Feb, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कांग्रेस पर हमलावर बीजेपी
नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा के बयान को गलवान के शहीदों का अपमान बताया है। दरअसल कांग्रेस के करीबी राहुल गांधी के अंकल सैम पित्रोदा ने कहा था कि भारत को अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है और यह धारणा छोड़ने की जरूरत है कि चीन दुश्मन है। बीजेपी नेता त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। लेकिन, कुछ शक्तियां भारत के विकास को प्रभावित करने में लगी हुई है। ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष पित्रोदा ने सोमवार को चीन को लेकर जिस प्रकार का बयान दिया है, उससे यह बात साफ हो गई है कि कांग्रेस पार्टी के चीन के साथ हुए करार का इजहार अंकल सैम ने दिनदहाड़े कर दिया है। सांसद त्रिवेदी ने कहा, गंभीर बात ये है कि जिस प्रकार की बात पित्रोदा ने कही है, वे बातें भारत की अस्मिता, कूटनीति और भारत की संप्रभुता पर बहुत गहरा आघात है उन्होंने (पित्रोदा) कहा है कि चीन के साथ किसी प्रकार का विवाद ही नहीं है, यानी भारत ही आक्रामक मुद्रा लिए हुए है? भारत सरकार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विश्व के हर देश के साथ अच्छे और सौहार्दपूर्ण संबंध चाहती है। लेकिन, राष्ट्रीय स्वाभिमान, सुरक्षा और सुदृढ़ता हमारे लिए सर्वोपरि है।
भाजपा नेता ने कहा कि इसके पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी कई बार इस तरह का बयान दे चुके हैं। राहुल गांधी ने एक विदेशी दौरे में कह दिया था कि चीन ने बेरोजगारी को कम करने में अच्छा काम किया है। पित्रोदा के बयान को उन्होंने गलवान के शहीदों का अपमान बताया। राज्यसभा सांसद त्रिवेदी ने पूछा, क्या यह गलवान के शहीदों का अपमान नहीं है? गलवान में हमारे सैनिक शहीद हो गए। लेकिन, इसके बावजूद अगर कांग्रेस ओवरसीज प्रमुख इस तरह की भाषा बोलता है, तब यह निंदनीय है। यह भारतीय सेना के बलिदान का घनघोर अपमान है।
बीजेपी नेता का आरोप, अमेरिकी फंडिग का आम चुनाव के दौरान किस दल को हुआ फायदा
17 Feb, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। क्या अमेरिका भारतीय चुनावों में हस्तक्षेप कर रहा था? यह सवाल अब बहुत गंभीर हो गया है। हाल ही में अरबपति एलन मस्क के नेतृत्व में कार्यदक्षता विभाग ने भारत में चुनावों में मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए आवंटित 2.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 1.82 करोड़ रुपये) सहित कई अन्य व्यय में कटौती की घोषणा कर दी है।
मस्क को हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका के सरकारी कार्यदक्षता विभाग (डीओजीई) का प्रमुख बनाया गया था। विभाग ने निर्णय को ‘शासन में सुधार और फिजूलखर्ची पर रोक लगाने’ के लिए लिया है। इसके बाद मस्क ने पोस्ट में कहा कि अमेरिकी करदाताओं के पैसे को विभिन्न मदों पर खर्च किया जा रहा था, इसमें से भारत में चुनावों में मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए आवंटित 2.1 करोड़ डॉलर सहित कई अनुदान रद्द किए गए हैं।
इस पर भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित मालवीय ने भारत के चुनावों में बाहरी हस्तक्षेप करार देकर सवाल उठाया कि इस फंडिंग का लाभ किसे हुआ होगा। बीजेपी नेता मालवीय ने दावा किया कि यह कार्यक्रम कांग्रेस के नेतृत्व वाली मनमोहन सरकार के दौरान शुरू हुआ था, इससे भारत के हितों के खिलाफ काम करने वाली ताकतों को समर्थन मिला था।
यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद हुआ, जिसमें उन्होंने मस्क से भी मुलाकात की थी और दोनों ने अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी, और ऊर्जा के क्षेत्रों में मौके पर चर्चा की थी। अमेरिकी विभाग ने इसके साथ ही बांग्लादेश, नेपाल, मोजाम्बिक, कंबोडिया, सर्बिया जैसे देशों में भी विभिन्न परियोजनाओं के लिए आवंटित राशि में कटौती की घोषणा की।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़, आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार को ठहराया जिम्मेदार
17 Feb, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार (15 फरवरी) रात भगदड़ में कई श्रद्धालुओं की मौत हो गई। आम आदमी पार्टी (आप) ने इस हादसे के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि बीजेपी सरकार की लापरवाही की वजह से यह दर्दनाक घटना हुई। उन्होंने सवाल किया कि आखिर कितनी मौतों के बाद रेल मंत्री जवाबदेह होंगे? संजय सिंह ने रविवार को (16 फरवरी) प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि स्टेशन पर हजारों की भीड़ थी, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं थी। प्लेटफॉर्म नंबर बदलने की वजह से भगदड़ मची, जिससे कई श्रद्धालु कुचले गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या 15 से 18 बताई जा रही है, लेकिन असली आंकड़ा इससे ज्यादा हो सकता है। संजय सिंह ने कहा कि रेलवे प्रशासन की लापरवाही की वजह से यह हादसा हुआ। जब घटना हुई, तब वहां भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि रेल मंत्री ने हादसे को मानने से इंकार कर दिया, जबकि दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) ने पहले मौतों की बात स्वीकारी और फिर अपना ट्वीट एडिट कर दिया। उन्होंने कहा कि “बीजेपी सरकार हर बार हादसे के बाद पहले उसे झूठ बताती है, फिर जब लाशें सामने आ जाती हैं तो लीपापोती करने लगती है। संजय सिंह ने कहा कि महाकुंभ के दौरान उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह का हादसा हुआ था, जब अचानक प्लेटफॉर्म नंबर बदलने से भगदड़ मच गई थी। तब भी कई लोगों की जान गई थी, लेकिन सरकार ने उससे कोई सबक नहीं लिया। उन्होंने कहा कि “रेलवे को पता था कि इतनी भारी संख्या में श्रद्धालु यात्रा करेंगे, फिर भी कोई व्यवस्था नहीं की गई। अचानक प्लेटफॉर्म बदलने की अनाउंसमेंट करने से भगदड़ मचना तय था। संजय सिंह ने सवाल किया कि “क्या आम आदमी का मरना ही उसकी किस्मत बन गया है?” कभी नोटबंदी की लाइन में मरना, कभी कोरोना में ऑक्सीजन न मिलने से मरना, कभी पुल गिरने से मरना, तो कभी ट्रेन हादसे में मरना। “क्या सरकार को इन मौतों से कोई फर्क नहीं पड़ता? उन्होंने कहा कि सरकार हादसे के बाद संवेदना तक नहीं जताती। उल्टा, रिपोर्टर्स के फोन तक तोड़ दिए जाते हैं ताकि वे सच न दिखा सकें। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी गलतियों को स्वीकार करना चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने मांग की कि मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और रेल मंत्री को जिम्मेदार ठहराया जाए।
19 फरवरी की शाम बीजेपी विधायक दल की बैठक
17 Feb, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । दिल्ली में सरकार गठन को लेकर 19 फरवरी की शाम बीजेपी विधायक दल की बैठक होगी। सूत्रों की ओर से यह जानकारी दी गई है। वहीं 20 फरवरी को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक पहले यह बैठक सोमवार को प्रस्तावित थी, लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया था। सूत्रों ने बताया कि सोमवार को पर्यवेक्षकों के नाम की घोषणा की जाएगी और फिर बुधवार को विधायक दल के नेता का चयन किया जाएगा। शपथ ग्रहण समारोह दिल्ली के रामलीला मैदान में बुधवार को हो सकता है, जो भी विधायक दल सदन का नेता चुना जाएगा, वही दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री होगा। हालांकि, यह जिम्मेदारी किसे मिलेगी, इसे लेकर अभी तक कुछ भी स्पष्टता नहीं है। बीजेपी पांच फरवरी को हुए विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करके 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में आई है। बीजेपी ने शानदार जीत के साथ दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के 10 साल के शासन को खत्म कर दिया। बीजेपी ने दिल्ली की 70 विधानसभा सीट में से 48 पर जीत हासिल की। वहीं मुख्यमंत्री पद के लिए कई नवनिर्वाचित विधायकों के नाम चर्चा में हैं। शीर्ष पद के लिए सबसे आगे माने जाने वालों में प्रवेश वर्मा, बीजेपी की दिल्ली इकाई के पूर्व अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता और सतीश उपाध्याय शामिल हैं। प्रवेश वर्मा ने विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल को हराया था। वह जाट बिरादरी से आते हैं। ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। पवन शर्मा, आशीष सूद, रेखा गुप्ता और शिखा राय सहित अन्य को भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी में कई नेताओं का मानना है कि राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ की तरह बीजेपी नेतृत्व नवनिर्वाचित विधायकों में से किसी एक पर दांव लगा सकता है।
बीजेपी आखिरकार मुस्लिमों का विश्वास क्यों नहीं जीत पाती
17 Feb, 2025 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । पीएम मोदी के सबका साथ, सबका विश्वास वाले मूल मंत्र को लेकर बीजेपी चलने की बात करती है। केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों और योजनाओं का लाभ भी मुस्लिम समुदाय को बराबर से मिल रहा है, लेकिन मुस्लिमों के वोट बीजेपी को क्यों नहीं मिलते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि बीजेपी आखिरकार मुस्लिमों का विश्वास क्यों नहीं जीत पाती है? भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मुसलमानों के बीच अपनी छवि सुधारने की लगातार कवायद कर रही है। पार्टी ने मुसलमानों में सबसे ज्यादा आबादी वाले पसमांदा समाज के जरिए सियासी आधार बनाने का लक्ष्य बनाया था। पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले से पसमांदा मुस्लिमों के बीच सियासी पैठ जमाने की कोशिश में है, लेकिन जमीनी स्तर पर सियासी प्रभाव नहीं दिख रहा है। दिल्ली चुनाव में मुस्लिम बहुल मुस्तफाबाद सीट पर बीजेपी जरूर जीतने में सफल रही है, लेकिन मुसलमानों की बदौलत नहीं बल्कि मुस्लिम वोटों के बिखराव के बुनियाद पर उसे जीत मिली। ऐसे में सवाल यह उठता है कि बीजेपी आखिरकार मुस्लिमों का विश्वास क्यों नहीं जीत पा रही है केंद्र शासित प्रदेश में मुसलमानों की आबादी करीब 13 फीसदी है और 10 विधानसभा सीटों पर हार-जीत की भूमिका अदा करते हैं। दिल्ली की 7 सीटों पर मुसलमानों की आबादी 30 फीसदी से 60 फीसदी के बीच है। मटिया महल, ओखला, मुस्तफाबाद, बाबरपुर, सीलमपुर, बल्लीमारान और चांदनी चौक सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की अहम भूमिका रहती है। इन सीटों पर हुए मुकाबले में एक सीट मुस्तफाबाद में बीजेपी प्रत्याशी मोहन सिंह बिष्ट को जीत मिली जबकि अन्य सीटों पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार जीते। इस तरह मुस्लिम वोटों का भरोसा आम आदमी पार्टी के साथ बना रहा, जबकि बीजेपी कुछ खास मुस्लिम वोट हासिल नहीं कर सकी। बीजेपी के तमाम बड़े नेता दावा कर रहे हैं कि दिल्ली चुनाव में इस बार मुस्लिमों का वोट उनकी पार्टी को मिला है, लेकिन कितना वोट मिला है। इसका जवाब कोई नहीं दे रहा। मुस्लिमों के वोटिंग पैटर्न को लेकर मुस्तफाबाद विधानसभा सीट का विश्लेषण किया, जहां पर बीजेपी प्रत्याशी मोहन सिंह बिष्ट विधायक चुने गए। इस सीट के नतीजे को लेकर सीएसडीएस से जुड़े प्रोफेसर हिलाल अहमद कहते हैं कि मुस्लिम वोटों के बदौलत बीजेपी नहीं जीती बल्कि मुस्लिम वोट बंटने के वजह से जीत मिली है। दिल्ली चुनाव में मुस्लिम उम्मीदवारों को देखकर वोट देने के बजाय बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने की रणनीति पर ही वोट करते नजर आए। इसी का नतीजा है कि दिल्ली की मुस्लिम बहुल मुस्तफाबाद सीट छोड़कर बाकी सभी मुस्लिम सीटें आम आदमी पार्टी जीतने में कामयाब रही। हिलाल अहमद के मुताबिक, दिल्ली में महज 6 से 7 फीसदी मुस्लिम वोट ही बीजेपी को मिल सके हैं। मुस्लिमों का इतने वोट तो हमेशा से ही बीजेपी को मिलते रहे हैं, लेकिन पसमांदा मुस्लिमों को लेकर जिस तरह से पार्टी ने सियासी तानाबाना बुना था, वो पूरी तरह से फेल रहा। पसमांदा एक फारसी शब्द है, जो पस और मांदा से मिलकर बना है। पस का अर्थ-पीछे होता है और मांदा का अर्थ-छूट जाना। इस तरह से इसका अर्थ है कि कोई व्यक्ति विकास के मामले में पिछड़ गया हो। ऐसे में मुस्लिमों में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े तबके को पसमांदा कहा जाता है। मुस्लिमों की कुल आबादी में पसमांदा मुस्लिमों की तादाद 80 से 85 फीसदी के बीच मानी जाती है और 15 फीसदी सवर्ण मुस्लिम है, जिनको अशराफ मुस्लिम कहा जाता है। पसमांदा मुस्लिम समाज में ओबीसी, अति-पिछड़ी और वंचित जातियां आदि शामिल होती हैं। इसमें धोबी, अंसारी, कुरैशी, नाई, तेली, बढ़ई, रंगरेज, दर्जी, धुनिया, फकीर, गुर्जर, कुंजड़ा और घाड़े जैसी तमाम जातियां शामिल हैं। बीजेपी की तरफ से इन पसमांदा लाभार्थियों तक पहुंचने और उनके बीच सियासी बनाने का प्रयास चल रहा है। बीजेपी पिछले 2 सालों से पसमांदा मुस्लिमों को जोड़ने के लिए तमाम कार्यक्रम और योजनाओं के साथ चल रही है, लेकिन उसके बाद भी पसमांदा मुस्लिमों का वोट बीजेपी को नहीं मिल पा रहा है। दिल्ली के मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र के मुस्तफाबाद मंडल सीटों का उदाहरण लेते हैं, मुस्तफाबाद मंडल में 60 हजार कुल वोटर्स हैं, जिनमें 202 मतदाता हिंदू है बाकी सभी मुस्लिम वोटर्स हैं। मुस्लिम वोटर्स में पसमांदा मुस्लिम बड़ी संख्या में हैं, जिसमें तकरीबन 23 हजार सैफी (बढ़ई), 20 हजार मलिक (तेली), 12 हजार अंसारी (जुलहा), तीन हजार कुरैशी और 15 सौ शिया मुस्लिम हैं। मुस्तफाबाद मंडल सीट पर कुल 55 बूथ केंद्र हैं, जिसमें 60 हजार वोटों में से 42 हजार वोट पोल हुए थे। आम आदमी पार्टी को सबसे ज्यादा 22,374 वोट मिले तो एआईएमआईएम के ताहिर हुसैन को 11,728 वोट मिले। कांग्रेस के खाते में 2,593 वोट आए जबकि बीजेपी को महज 508 वोट ही मिल सके हैं।
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