राजनीति
अकाली दल छोड़ बीजेपी में आए अब दिल्ली की नई सरकार में बने मंत्री कौन हैं मनजिंदर सिंह सिरसा
20 Feb, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। दिल्ली में 27 साल बाद फतह हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी गदगद है। रेखा गुप्ता को सीएम बनाने के बाद आज रामलीला ग्राउंड में शपथग्रहण समारोह पूरा हुआ। नई मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ 6 मंत्रियों ने भी शपथ ली। इसमें राजौरी गार्डन में भगवा लहराने वाले मनजिंदर सिंह सिरसा भी हैं। सिरसा पहले अकाली दल के हुआ करते थे। इस बार पार्टी ने उन्हें राजौरी गार्डन से बीजेपी उम्मीदवार बनाया था जहां उन्होंने जीत हासिल कर भाजपाल आलाकमान के फैसले को सही ठहराया। इसी का नतीजा रहा कि अब उन्हें कैबिनेट में सीधी एंट्री मिल गई है। आइए जानते हैं कौन हैं मनजिंदर सिंह सिरसा मनजिंदर सिंह सिरसा रेखा गुप्ता की ही तरह पहली बार विधायक पद के लिए नामित हुए और पहली बार में ही पताका लहरा दिया। हालांकि वे दो बार अकाली दल के टिकट पर विधायक का चुनाव भी जीत चुके हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया था। 2025 दिल्ली चुनाव में उन्होंने आम आदमी पार्टी के नेता धनवति चंदेला को 18190 के अंतर से हाराया था। सिरसा को 64132 वोट मिले थे तो वहीं चंदेला को 45942 वोट मिले थे। सिरसा बीजेपी से पहले उसकी एक वक्त पर गठबंधन की साथी रही अकाली दल का हिस्सा थे। मनजिंदर सिंह सिरसा ने अपनी राजनीतिक यात्रा शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के सदस्य के रूप में शुरू की और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। 2013 में पहली बार चुने जाने पर, उन्होंने निवर्तमान अध्यक्ष अमरजीत सिंह सरना को हराकर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला। सिरसा को 2017 में इस पद के लिए फिर से चुना गया। उन्होंने दिल्ली में सिख समुदाय के नेता के रूप में उनकी प्रतिष्ठा को और मजबूत किया। वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सिरसा अतीत में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और इसके महासचिव के रूप में कार्य कर चुके हैं। सिरसा के राजनीतिक कौशल का प्रदर्शन 2017 के दिल्ली विधानसभा उपचुनाव में किया था, जहां उन्होंने राजौरी गार्डन सीट जीती थी। उन्होंने तब मौजूदा विधायक धनवती चंदेला को 18,190 मतों के भारी अंतर से हराया था। इस बार भी उनकी प्रतिद्वंदी धनवती ही थीं। इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में उनकी जीत ने न केवल एक मजबूत नेता के रूप में उनकी स्थिति को मजबूत किया, बल्कि दिल्ली में भाजपा के बढ़ते समर्थन का भी संकेत दिया। मंजिंदर सिंह सिरसा, जन्म 28 फरवरी 1972 को हुआ था। उन्होंने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद पंजाब-दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए ऑनर्स किया हुआ है। हालांकि माय नेता के अनुसार, उन्होंने दो साल ही यहां अध्यन किया। मनजिंदर सिरसा सबसे अमीर विधायक के रूप में जाना जाता है। मनजिंदर सिरसा मूलत: हरियाणा के सिरसा के रहने वाले हैं। अगर संपत्ति की बात करें तो चुनावी हलफनामे के मुताबिक, इनकी कुल संपत्ति 248.9 करोड़ है।
100 दिनों के भीतर पांच प्रमुख मुद्दों पर विशेष ध्यान देगी रेखा सरकार
20 Feb, 2025 07:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भाजपा ने कहा दिल्लीवालों को बदलाव महसूस होगा
नई दिल्ली । दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में रेखा गुप्ता ने शपथ ले ली है। शपथ लेने के बाद सीएम रेखा गुप्ता ने अपने कार्यकाल के पहले 100 दिनों के भीतर पांच प्रमुख मुद्दों से निपटने की योजना बनाई है। रेखा गुप्ता के एजेंडे में दिल्ली में आयुष्मान भारत चिकित्सा बीमा योजना को लागू करना, यमुना नदी की सफाई, मानसून के मौसम की तैयारी के लिए सड़कों और सीवरों से गाद निकालना, शहर की सड़कों और कोनों से कचरा हटाने के लिए बड़े पैमाने पर स्वच्छता अभियान और सड़क की मरम्मत शामिल है।
भाजपा सूत्रों ने कहा कि दिल्ली के लोगों ने पार्टी पर काफी भरोसा किया है और 27 साल में राष्ट्रीय राजधानी में पहली भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनाने के लिए 48 सीटों का जनादेश दिया है। एक भाजपा नेता ने नई मुख्यमंत्री और उनकी टीम ने यह सुनिश्चित करने के लिए अपने काम में कटौती की है कि लोग पिछले दशक में आप ने जिस तरह से सरकार चलाई, उसमें अंतर दिखाई दे। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री का यही मंत्र और वादा भी रहा है। नई टीम यह सुनिश्चित करने के लिए मिशन मोड में काम करेगी कि लोगों को बदलाव का अनुभव होना शुरु हो। भाजपा ने अपने चुनावी अभियान के दौरान वादा किया कि लंबित सीएजी रिपोर्ट नई दिल्ली विधानसभा के पहले सत्र में पेश की जाएंगी। सूत्रों ने बताया कि इससे पूर्व आम आदमी पार्टी सरकार और उसके मंत्रियों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
दिल्ली में रेखा सरकार किन चुनौतियों को करना होगा पार
20 Feb, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । दिल्ली में भाजपा की मुख्यमंत्री ने शपथ ले ली है। रेखा गुप्ता के साथ 6 मंत्रियों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली है। 27 साल बाद भाजपा दिल्ली की सत्ता में वापस लौटी है। अब उसे जनता से किए वादों को पूरा करना, पिछली सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखना, शहर के प्रदूषण और बुनियादी ढांचे की समस्याओं को ठीक करना और यमुना की सफाई करनी होगी। भाजपा सरकार को यह सब काम राजधानी के वित्तीय हालात पर नजर रखते हुए करना होगा। नई सीएम की शीर्ष प्राथमिकताओं में दिल्ली की महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये देने का अपना वादा पूरा करना होगा। यह पार्टी के घोषणापत्र की एक प्रमुख प्रतिबद्धता थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक फरवरी को द्वारका में एक रैली को संबोधित करते हुए आश्वासन दिया था कि अगर भाजपा सत्ता में आती है तो पहली कैबिनेट बैठक में राशि ट्रांसफर करने का फैसला लिया जाएगा। आप ने पहले ही आर्थिक मदद को लेकर भुगतान पर शक जताया है। पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने शुक्रवार को कहा कि वह नई सरकार को जवाबदेह ठहराएंगी। भाजपा के लिए दूसरी चुनौती आप सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखना होगा जिसमें 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी का कनेक्शन और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा आदि शामिल हैं। चुनाव प्रचार के दौरान बेशक भाजपा ने मतदाताओं को आश्वासन दिया था कि उन्हें मिलने वाली कोई भी सुविधा बंद नहीं होगी, लेकिन आप नेताओं ने पार्टी की लॉन्ग टर्म प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए हैं। प्रचार के दौरान, पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मतदाताओं को आश्वस्त किया था कि मुफ्त योजनाएं जारी रहेंगी लेकिन इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म कर दिया जाएगा। आयुष्मान भारत लागू करना भाजपा को दिल्ली में अपने फ्लैगशिप कार्यक्रम भी लागू करने हैं। भाजपा ने दिल्ली में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू करने का वादा किया है और यह चुनावी मुद्दा भी था। इस योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है, साथ ही राज्य सरकार 5 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च वहन करती है। आप सरकार ने पहले इसे लागू करने से इनकार कर दिया था। पार्टी ने दावा किया था कि दिल्ली की मौजूदा स्वास्थ्य सेवा प्रणाली बेहतर है।
कैग रिपोर्ट पेश करना
भाजपा ने दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिकों में सुधार का भी वादा किया है और इसके कामकाज में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। राजौरी गार्डन से भाजपा विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि क्लीनिकों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर के तौर पर रीब्रांड किया जाएगा और बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान की जाएगी। भाजपा ने लगातार आप पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि उसने वित्तीय अनियमितताओं को छिपाने के लिए जानबूझकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट को विधानसभा में पेश नहीं की।
दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता के शपथ ग्रहण में नहीं पहुंचीं आतिशी
20 Feb, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । दिल्ली में नई सीएम और कैबिनेट के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में पूर्व सीएम आतिशी नहीं पहुंचीं। इस पर आप की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि अतिशी की सीट मेरे बगल में थी, वो नहीं आई। इतनी छोटी राजनीति नहीं करनी चाहिए। बीजेपी ने यमुना की सफाई शुरू करने और कैग की रिपोर्ट पेश करने को लेकर बड़ा वादा किया था। इस पर स्वाति मालीवाल ने कहा, यह कितने शर्म की बात है कि जो अरविंद केजरीवाल जी भ्रष्टाचार के खिलाफ सीएम बने, इतना बड़ा आंदोलन किया और आंदोलन के साथ ही गद्दारी की। कैग की रिपोर्ट 2016 से ही टेबल नहीं की गई है। इस रिपोर्ट को पेश किया जाए। जो भ्रष्टाचार हुआ है, उजागर हो जो जिम्मेदार हैं। उनपर सख्त से सख्त कार्रवाई हो। यमुना के मुद्दे पर स्वाति ने कहा मैं सरकार से यह अपील करूंगी कि यमुना मैया साफ हो और 10 साल में यह नाला बनकर रह गई है। जल्द से जल्द साफ की जाए। इसको वापस जीवित करना बहुत जरूर है। ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि आम आदमी पार्टी ने ही शपथ ग्रहण से दूरी बनाई। यहां तक अरविंद केजरीवाल भी नहीं पहुंचे। हालांकि केजरीवाल और आतिशी दोनों ने ही रेखा गुप्ता के सीएम बनाए जाने पर उन्हें बधाई दी थी। आतिशी ने एक्स पर लिखा, दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने पर रेखा गुप्ता जी को बधाई। यह खुशी की बात है कि दिल्ली का नेतृत्व एक महिला करेंगी। मुझे उम्मीद है कि दिल्ली वालो को किए गए वादे पूरे होंगे। दिल्ली के विकास के लिए आम आदमी पार्टी का पूरा सहयोग आपको मिलेगा।
दिल्ली बीजेपी के जिस विधायक को मार्शल निकालते थे विधानसभा से बाहर अब वही होंगे स्पीकर
20 Feb, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की 27 साल बाद सत्ता में वापसी हुई है। रेखा गुप्ता को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया गया है, तो वहीं विजेंद्र गुप्ता का नाम विधानसभा स्पीकर के लिए फाइनल हुआ है। ये वही विजेंद्र गुप्ता हैं, जिन्हें आप सरकार के दौरान कई बार विधानसभा से बाहर निकाला गया। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की 27 साल बाद सत्ता में वापसी हुई है। रेखा गुप्ता को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया गया है, तो वहीं विजेंद्र गुप्ता का नाम विधानसभा स्पीकर के लिए तय हो गया है। ये बेहद दिलचस्प है, क्योंकि आम आदमी पार्टी सरकार के दौरान अक्सर ऐसी तस्वीरें आईं जब सरकार का विरोध करने पर विजेंद्र गुप्ता सदन से बाहर निकाला गया। कई बार तो मार्शलों ने कंधों पर उठाकर उन्हें सदन से बाहर किया। विजेंद्र गुप्ता को एक नहीं बल्कि कई बार सदन से बाहर किया गया है। 2015 में आम आदमी पार्टी की लहर में बीजेपी को दिल्ली में महज तीन सीटें ही मिली थीं, जिसके बाद भी बीजेपी ने विपक्ष की भूमिका निभाने में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। विजेंद्र गुप्ता तब विधायक थे और वो मुद्दे उठाते थे। साल 2017 में विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता कथित जमीन घोटाले के दस्तावेज लेकर पहुंचे थे और वो सदन में उसपर बहस की मांग कर रहे थे। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसकी इजाजत नहीं दी। बीजेपी का स्थगन प्रस्ताव भी खारिज कर दिया गया। इसके बाद भी बीजेपी का हंगामा जारी रहा तो स्पीकर ने पहले विजेंद्र गुप्ता का माइक बंद कराया और चुप रहने की चेतावनी दी। जब वो नहीं माने तो उन्हें मार्शल के जरिए बाहर निकाल दिया गया। विजेंद्र गुप्ता आप की लहर में भी खुद की सीट बचाने में कामयाब रहे थे, जिस वक्त दिल्ली में बीजेपी की महज 3 सीटें थीं उनमें गुप्ता की भी एक सीट थी। वे 2015, 2020, 2025 में लगातार रोहिणी से चुनकर आए हैं। 2020 में भी विजेंद्र गुप्ता ने रोहिणी की सीट पर 12 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी। 2015 से लगातार विपक्ष में बैठकर आम आदमी पार्टी के खिलाफ आवाज उठाने वाले विजेंद्र गुप्ता अब स्पीकर की कुर्सी पर विराजेंगे। जिस कुर्सी से उन्हें सदन से बाहर निकालने के आदेश होते थे, अब वो उसी पर काबिज होंगे। अपना नाम फाइनल होने के बाद विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि सबसे पहले वो कैग रिपोर्ट सदन में पेश करूंगा, जिन्हें पिछली आम आदमी पार्टी की सरकार ने लंबित रखा है।
दिल्ली जीत ली........अब बिहार, असम और तमिलनाडू फतह की तैयारी में जुटे पीएम मोदी
20 Feb, 2025 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । दिल्ली विधानसभा चुनाव में करीब तीन दशक बाद जीतने वाली भाजपा ने जश्न मना लिया है और अब फिर से दूसरे राज्यों की चुनावी तैयारी में जुट गई है। खासतौर पर पार्टी के शीर्ष नेता पीएम नरेंद्र मोदी किसी भी तरह से आराम के मूड में नहीं हैं। अब वे बिहार, असम और तमिलनाडु जैसे राज्यों को लेकर रणनीति तैयार कर रहे हैं। बिहार में इसी साल अक्टूबर तक विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके बाद असम और तमिलनाडु में अगले साल चुनाव होने है। इन राज्यों को लेकर पहले से ही भाजपा तैयारी में है और 24 फरवरी को भागलपुर से पीएम नरेंद्र मोदी चुनाव अभियान की शुरुआत करने वाले है। भागलपुर में रैली को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इसके अलावा असम भी वे 24 फरवरी को ही जाएंगे।
असम और तमिलनाडु में चुनाव करीब एक साल दूर है, लेकिन पीएम मोदी अभी से तैयारियों में जुट गए है। इसकारण वे असम जाएंगे और फिर 28 तारीख को तमिलनाडु के रामेश्वरम भी पहुंच रहे हैं। पीएम मोदी यहां पर पंबन पुल का उद्घाटन करने वाले हैं, जो द्वीपीय शहर रामेश्वरम को तमिलनाडु के अन्य हिस्सों से जोड़ेगा। बिहार और असम के भाजपा नेताओं ने पीएम मोदी के दौरे की डिमांड की थी। दिल्ली में खुद पीएम मोदी ने चुनाव प्रचार का नेतृत्व किया था। इतना ही नहीं यमुना की सफाई को लेकर उन्होंने कहा था कि इस काम की निगरानी मैं व्यक्तिगत तौर पर करूंगा। इसके बाद माना जा रहा है कि पीएम मोदी ही आने वाले चुनावों में भी बीजेपी का चेहरा होने वाले है। बिहार में भाजपा का सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के साथ गठबंधन है। भागलपुर में पीएम मोदी के साथ ही मंच पर नीतीश कुमार भी मौजूद रहने वाले है। इसके बाद वहां नीतीश कुमार और पीएम मोदी की कुछ साझा रैलियां भी होंगी। असम में भाजपा बीते 10 सालों से सत्ता में है और उस पर तीसरी बार वापसी का दबाव होगा। भाजपा को भागलपुर सीट पर कमजोर माना जाता है। इसके बाद भागलपुर से पीएम मोदी का रैली करना अहम है। इसके अलावा संकेत है कि भाजपा बिहार में किसी भी इलाके में खुद को कमजोर नहीं दिखाना चाहती।
भागलपुर में ही पीएम मोदी की ओर से किसान सम्मान निधि योजना की नई किस्त जारी की जाएगी। वह भागलपुर में एक नई सेंट्रल यूनिवर्सिटी की स्थापना के एक आयोजन में भी शामिल होने वाले है। यहीं से वह दो दिनों की असम यात्रा पर रवाना हो जाएंगे, जहां कारोबारी समिट का भी आयोजन होना है।
रेखा गुप्ता देश की 19वीं और दिल्ली की चौथी महिला मुख्यमंत्री
20 Feb, 2025 11:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय राजनीति में बढ़ रहा नारीशक्ति का कद
नई दिल्ली । भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती जा रही है, और कई महिलाओं ने मुख्यमंत्री पद तक पहुंचकर इतिहास रच दिया है। हाल ही में, रेखा गुप्ता दिल्ली की चौथी महिला मुख्यमंत्री बनीं, इसके पहले देश में अब तक कुल 18 महिला मुख्यमंत्री हो चुकी हैं।
इस रिपोर्ट में हम बता रहे हैं कौन, कहां से बनी महिला सीएम
देश के सबसे बड़े सूबे उत्तरप्रदेश से भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी (1963-1967) बनी। नंदिनी सत्पथी (ओडिशा) ने जून 1972 से दिसंबर 1976 तक सीएम पद का कार्यभार संभाला।
शशिकला काकोडकर (गोवा,दमन और दीव) की दो बार मुख्यमंत्री बनीं।
वहीं सैयदा अनवरा तैमूर (असम) 1980-1981 तक मुख्यमंत्री रहीं। वी. एन. जानकी (तमिलनाडु) में 23 दिनों के लिए मुख्यमंत्री बनीं। वहीं जे. जयललिता (तमिलनाडु) में पाँच बार राज्य की मुख्यमंत्री बनीं। वहीं मायावती (उत्तर प्रदेश) पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य पाया। मायावती ने यूपी में कई बार पद संभाला। राजिंदर कौर भट्टल (पंजाब) में 1997 से 2002 तक पंजाब की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी।
राबड़ी देवी (बिहार) राज्य की पहली और एकमात्र महिला मुख्यमंत्री।
वहीं बीजेपी की कददावर नेता सुषमा स्वराज (दिल्ली) 1998 में कुछ समय के लिए दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी थी। इसके बाद शीला दीक्षित (दिल्ली) में 1998 से 2013 तक, सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहीं। बीजेपी की फायर ब्रांड नेता उमा भारती (मध्य प्रदेश) – 2003-2004 तक पद संभाला। राजघराने से निकली वसुंधरा राजे (राजस्थान) में दो बार मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य पाया। ममता बनर्जी (पश्चिम बंगाल) में 2011 से अब तक मुख्यमंत्री हैं। वे इंडिया गठबंधन की नेता बनने की भी इच्छा जता चुकी है। आनंदीबेन पटेल (गुजरात) में राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री रही। महबूबा मुफ्ती (जम्मू और कश्मीर) में राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री (2016-2018) रही। आतिशी (दिल्ली, कार्यवाहक मुख्यमंत्री) अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद कुछ समय के लिए मुख्यमंत्री रहीं। अब देश की राजधानी दिल्ली में
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने विरोधियों के मुंह किए बंद, मतभेद की खबरों को सिरे से खारिज किया
20 Feb, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ किसी भी तरह के मतभेद की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि महायुति गठबंधन (बीजेपी-एनसीपी-शिवसेना) में सब कुछ ठीक है और उनके बीच किसी भी तरह का कोई कोल्ड वॉर नहीं है।
इसतरह की खबरें तब चर्चा में आई जब शिंदे ने मुख्यमंत्री रिलीफ फंड के जैसा मेडिकल सेल बना दिया। शिंदे के कदम को लेकर विपक्ष ने सवाल खड़े कर दिए थे। शिंदे ने कहा कि यह नया सेल किसी कॉम्पीटीशन व्यवस्था के रूप में नहीं बल्कि मुख्यमंत्री के वॉर रूम के साथ मिलकर काम करेगा ताकि मरीजों को बेहतर सेवाएं दी जा सके।
उधर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी मतभेद की खबरों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, इस तरह के सेल का गठन कोई गलत बात नहीं है, क्योंकि इसका मकसद जरूरतमंद लोगों की मदद करना है। जब मैं उपमुख्यमंत्री था, तब मैंने भी इसी तरह का सेल बनाया था।
दरअसल शिंदे की यह सफाई विपक्षी दलों के आरोपों के बाद आई है, जिसमें शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने दावा किया था कि राज्य में “समानांतर सरकार चलाई जा रही है”। राउत ने कहा, अगर सरकार इसी तरह चलती रही तब महाराष्ट्र में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ेगी।
अखिलेश का आरोप, कुंभ में पूरा पैसा खर्च कर रही योगी सरकार, किसानों के लिए कुछ नहीं बचेगा
20 Feb, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ । समाजवादी पार्टी (एसपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार के आगामी बजट को लेकर निशाना साधा है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि योगी सरकार सारा पैसा कुंभ मेले पर खर्च कर रही है, इसके बाद प्रदेश के किसानों के लिए कुछ नहीं बचेगा। सपा प्रमुख अखिलेश ने कहा, योगी सरकार को किसानों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। अगर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है, तब कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाना होगा। लेकिन योगी सरकार अपनी प्राथमिकताओं को भूलकर केवल धार्मिक आयोजनों पर पानी की तरह पैसा बहा रही है।
दरअसल अखिलेश ने यह बयान तब दिया है जब यूपी सरकार अगले बजट की तैयारियों में जुटी हुई है। अखिलेश ने कहा, कुंभ का आयोजन महत्वपूर्ण है, लेकिन जब किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा, गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान अटका है और महंगाई बढ़ रही है, तब सारा ध्यान सिर्फ कुंभ पर देना उचित नहीं है।
अखिलेश के इस बयान पर बीजेपी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। योगी सरकार के प्रवक्ताओं ने कहा कि कुंभ भारतीय संस्कृति और आस्था का महापर्व है और इस पर सवाल उठाना उचित नहीं। उन्होंने दावा किया कि सरकार किसानों और इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों पर बराबर ध्यान दे रही है।
रेखा गुप्ता को ही क्यों चुना गया दिल्ली सीएम
20 Feb, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महिला वोटरों के साथ साधेंगी वैश्य समुदाय को
नई दिल्ली। भाजपा विधायक दल की बैठक में रेखा गुप्ता को सर्वसम्मति से दिल्ली का नया मुख्यमंत्री चुन लिया गया। 50 वर्षीय रेखा गुप्ता, जो पहली बार विधायक बनी हैं, अब दिल्ली की नौवीं मुख्यमंत्री होंगी। वे शालीमार बाग से भाजपा विधायक चुनी गईं हैं और उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) की प्रत्याशी वंदना कुमारी को 29,595 वोटों से हराया था।
रेखा गुप्ता दिल्ली भाजपा की महासचिव और भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं। भाजपा ने उन्हें दिल्ली की चौथी महिला मुख्यमंत्री बनाकर बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। दरअसल रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरह वैश्य समुदाय से आती हैं। दिल्ली में वैश्य समुदाय का व्यापारिक प्रभाव अत्याधिक है और यह भाजपा का कोर वोट बैंक भी माना जाता है। इस वजह से सीएम पद की रेस में विजेंद्र गुप्ता और जितेंद्र महाजन का नाम भी चला था, लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने रेखा गुप्ता को प्राथमिकता प्रदान की है।
इसके साथ ही दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 48 सीटें जीतकर 45.56प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया है। यही नहीं भाजपा ने महिलाओं के लिए कई योजनाएं घोषित की थीं, जिससे उन्हें बड़ा समर्थन मिला। रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने महिला वोटरों को और मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। दिल्ली में अब तक तीन महिला मुख्यमंत्री रह चुकी हैं— इनमें प्रथम शीला दीक्षित, सुषमा स्वराज और आतिशी थीं। भाजपा ने रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाकर महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने का संदेश भी दे दिया है।
भाजपा ने दिया सशक्त नेतृत्व का संदेश
भाजपा ने दिल्ली की सत्ता में वापसी के साथ महिला और व्यापारी समुदाय को साधने के लिए रेखा गुप्ता को चुना है। यह कदम न केवल भाजपा की रणनीतिक जीत है, बल्कि दिल्ली की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत भी है।
रेखा गुप्ता ने उपराज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया
20 Feb, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली, बीजेपी ने दिल्ली की नई मुख्यमंत्री की घोषणा कर दी है। रेखा गुप्ता प्रदेश की अगली सीएम होंगी। ऐलान के बाद उन्होंने उपराज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा भी पेश कर दिया है। रेखा गुप्ता रामलीला मैदान में एक भव्य समारोह में गुरुवार को मुख्यमंत्री के पद और गोपनीयता की शपथ लेंगी। 26 साल बाद दिल्ली में बीजेपी की सरकार बन रही है।
दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसको लेकर लगातार अलग-अलग नामों पर चर्चा हो रही थी। लेकिन बीजेपी विधायक दल की बैठक में रेखा गुप्ता के नाम पर मुहर लगी। दिल्ली बीजेपी कार्यालय में 48 विधायकों ने विधानसभा में सदन की नेता को चुना, जो गुरुवार को मुख्यमंत्री बनेंगी।
दिल्ली की नई सीएम होंगी रेखा गुप्ता, बीजेपी ने किया ऐलान
19 Feb, 2025 09:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिल्ली के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान हो गया है। बीजेपी विधायक दल की बैठक में रेखा गुप्ता के नाम पर मुहर लगी है। रेखा गुप्ता कल दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगी। रेखा गुप्ता दिल्ली की शालीमार बाग सीट से पहली बार विधायक चुनी गई हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के 11 दिन के बाद भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान किया गया है। दिल्ली में कल मुख्यमंत्री पद का शपथ ग्रहण समारोह रामलीला मैदान में होगा। बीजेपी विधायक दल की बैठक से जुड़े बड़े अपडेट जानने के लिए बने रहिए'.
कौन हैं रेखा गुप्ता
रेखा गुप्ता शालीमार बाग सीट से विधायक हैं। उन्होंने आम आदमी पार्टी की नेता वंदना कुमारी को 29,595 वोटों के अंतर से मात दी थी। रेखा गुप्ता मूल रूप से हरियाणा के जिंद की रहने वाली हैं। उनका पैतृक गांव नंदगढ़ जिंद के जुलाना में है। यहां उनका दादा मनिराम और परिवार के बाकी लोग रहा करते थे। हालांकि, उनके पिता जयभगवान की नौकरी दिल्ली में लग गई, जिसके बाद उनका परिवार दिल्ली में शिफ्ट हो गया।
दिल्ली से पढ़ी-लिखी हैं रेखा गुप्ता
रेखा गुप्ता की पढ़ाई-लिखाई दिल्ली से हुई है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद मनीष गुप्ता से 1998 में शादी की। मनीष गुप्ता का स्पेयर पार्ट्स का कारोबार है।
राजनीति में कैसे शुरू हुआ सफर
रेखा गुप्ता बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी रही हैं। उन्होंने संघ से जुड़े रहकर एबीवीपी के माध्यम से छात्र राजनीति में प्रवेश किया। साल 1994-95 में वह दौलत राम कॉलेज की सचिव बनी। वहीं, 1995-96 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ(DUSU) की सचिव बनीं। साल 1996-97 में वह डूसू अध्यक्ष बनीं।
भाजपा में विभिन्न पदों पर निभाई जिम्मेदारी
रेखा गुप्ता ने 2003 से 2004 तक भाजपा में युवा मोर्चा में सचिव पद की जिम्मेदारी निभाई है। वहीं, 2004-06 तक वह युवा मोर्चा की राष्ट्रीय सचिव बनीं। राजनीति में आगे बढ़ते हुए उन्होंने निगम पार्षद का चुनाव लड़ा और 2007 में वह पीतमपुरा वॉर्ड से पार्षद चुनी गईं। साल 2009 तक उन्होंने महिला कल्याण एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। वहीं, साल 2010 में उन्हें भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया।
ममता बनर्जी ने बांग्लादेश के आतंकवादियों और कट्टरपंथियों से संबंध होने के आरोपों को कर दिया खारिज
19 Feb, 2025 12:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बांग्लादेश के आतंकवादियों और कट्टरपंथियों से संबंध होने के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा विधायक इन आरोपों को साबित कर दें, तो वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगी।
राज्य विधानसभा को संबोधित करते हुए ममता ने अपने खिलाफ ‘‘बेबुनियाद टिप्पणियां’’ करने के लिए भाजपा विधायकों की आलोचना की और कहा कि वह इस तरह के दावों की शिकायत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखेंगी।
टीएमसी सुप्रीमो ने कहा, “भाजपा नेता और विधायक बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं कि मेरे कश्मीर में आतंकवादियों और बांग्लादेश के आतंकवादियों व कट्टरपंथियों से संबंध हैं। अगर भाजपा साबित कर दे कि मेरे आतंकवादियों और कट्टरपंथियों से संबंध हैं, तो मैं इस्तीफा दे दूंगी।”
ममता ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर शिकायत करेंगी कि उनकी पार्टी के विधायक सबूत न होने के बावजूद उन पर बांग्लादेशी कट्टरपंथियों से संबंध होने का आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, “आतंकवाद के झूठे आरोप लगने से मर जाना बेहतर है।”
ममता ने कहा, “अभिव्यक्ति की आजादी उन्हें (भाजपा विधायकों को) नफरत फैलाने वाले भाषण देने और लोगों को बांटने की अनुमति नहीं देती है। अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब नफरत फैलाने वाली बातें नहीं है। आप (भाजपा विधायक) राजनीतिक लाभ के लिए धर्म का सहारा लेते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं करते।”
तृणमूल प्रमुख ने कहा कि वह धर्मनिरपेक्षता और सभी समुदायों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास करती हैं। उन्होंने भाजपा पर राजनीतिक लाभ के लिए धर्म का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने बांग्लादेश में जारी तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि पड़ोसी देश में अशांति के बीच उनकी सरकार के प्रयासों से ही पश्चिम बंगाल में शांति एवं सद्भाव सुनिश्चित हुआ है।
मनीष सिसौदिया विधायक कार्यालय से सभी सरकारी संपत्तियां (वस्तुएं) चुरा ले गए :रविंदर सिंह नेगी
19 Feb, 2025 11:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पटपड़गंज से नए बीजेपी विधायक रविंदर सिंह नेगी ने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक मनीष सिसौदिया और आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं ने इलाके के विधायक कार्यालय से सभी सरकारी संपत्तियां (वस्तुएं) चुरा ले गए हैं। विधायक नेगी ने दावा किया, उन्होंने एसी, टेलीविजन, कुर्सियां, पंखे, एलईडी और सब कुछ ले लिया है। उन्होंने पोस्ट कर लिखा कि आप से पटपड़गंज के पूर्व विधायक सिसोदिया ने चुनाव से पहले ही अपना असली चेहरा दिखा दिया था। विधानसभा कैंप कार्यालय से जिसमें एसी, टीवी, टेबल, कुर्सी और पंखे जैसे सामान चुराए गए। इनकी भ्रष्टाचार की हदें अब भी पार नहीं हुईं। अब वे अपनी असलियत छुपाने और चोरी करने की राजनीति में माहिर हो चुके हैं। हम लोगों के अधिकारों की रक्षा करने और इसतरह के भ्रष्ट लोगों को बेनकाब करने वाले है। नेगी ने खाली विधायक कार्यालय वाली वीडियो क्लिप भी पोस्ट की है।
हालांकि, पीडब्ल्यूडी जेई वेद प्रकाश ने कहा कि उन्होंने विधायक कार्यालय को कोई सामान नहीं दिया। सिसौदिया के प्रतिनिधि ने कहा कि उन्होंने (आप कार्यकर्ताओं ने) कोई सरकारी सामग्री नहीं ली है। उन्होंने कहा कि आप कार्यकर्ताओं ने वह सामान लिया जो उनका था। उन्होंने कहा कि जिन 2 एसी के गायब होने का आरोप लगाया जा रहा है, वे किराए पर लिए थे। सिसौदिया के सहयोगी ने कहा कि एसी के मालिक ने उन्हें वापस ले लिया है।
परिणाम निराशाजनक नहीं, लेकिन चिंताजनक जरूर : शक्तिसिंह गोहिल
19 Feb, 2025 10:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद | राज्य में हुए निकाय चुनावों के नतीजों को लेकर गुजरात कांग्रेस प्रमुख शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि परिणाम निराशाजनक नहीं, लेकिन चिंताजनक जरूर हैं| शहरी इलाकों में कांग्रेस का संगठन मजबूत करने की जरूरत है| गोहिल ने नगर निगम चुनाव सहित स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह सराहनीय है कि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों ने भाजपा की कई अलोकतांत्रिक साजिशों के बावजूद बहुत अच्छे से चुनाव लड़ा। हम मानते हैं कि गुजरात के शहरी इलाकों में हमारा संगठन कमजोर था| नगर निगम चुनाव 2018 में हुए थे, तब भले ही कांग्रेस पार्टी के 78 विधायक और सहयोगी पार्टी के 3 विधायक थे, लेकिन 2018 में उन्हीं नगर पालिकाओं में कांग्रेस पार्टी की हालत बहुत खराब थी| लेकिन उन्हीं नगर पालिकओं में कांग्रेस की स्थिति पहले से बेहतर हुई है| उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने के लिए हमने कुछ महीने पहले पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को प्रभारी बनाकर कस्बों में संगठन को संगठित किया था और इसके परिणामस्वरूप ये चुनाव कांग्रेस पार्टी ने बहुत बड़े पैमाने पर लड़ा। जूनागढ़ महानगर पालिका में पिछले चुनाव में कांग्रेस का केवल एक नगरसेवक चुना गया था| जबकि इस बार जूनागढ़ में 11 नगरसेवक चुने गए हैं। उस लिहाज से देखें तो नतीजे कांग्रेस के लिए निराशाजनक नहीं हैं| कांग्रेस के लिए निराशाजनक बात यह है कि जाफराबाद, लाठी, राजुला समेत कई जगहों पर नगर पालिकाएं स्थानीय नेताओं के दम पर लड़ी जाती हैं| लेकिन अंबरीश डेर, जवाहर चावड़ा, हर्षद रिबडिया आदि नेताओं के चले जाने से उन नगर पालिकाओं में कांग्रेस की हार हुई है। कुछ जगहों पर कांग्रेस लड़ने की बजाय निर्दलियों के साथ चली गई| आंकलाव में कांग्रेस समर्थित पैनल की जीत हुई है| नतीजे कांग्रेस के लिए निराशाजनक नहीं हैं, लेकिन चिंताजनक जरूर है| कांग्रेस को शहरी क्षेत्र में और मेहनत करने की जरूरत है| यह प्रशंसनीय है कि कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार न तो बिके और न ही डरे और कई साजिशों के बावजूद डटकर लड़े| कुछ जगहों पर भाजपा के दबाव, गुंडागर्दी, सिस्टम के दुरुपयोग और बड़ी रिश्वत के कारण फॉर्म वापस ले लिए गए। हम सभी ने कई जगहों पर भाजपा द्वारा कांग्रेस उम्मीदवारों को खरीदने और डराने-धमकाने के वीडियो देखे हैं| एआईएमआईएम पार्टी के उम्मीदवारों के फॉर्म भाजपा ने दिए थे| आमतौर पर आमने-सामने दिखने वाली भाजपा और आप चुनाव में एक थे| एआईएमआईएम उम्मीदवारों द्वारा के फॉर्म पेश नहीं किए गए, लेकिन भाजपा ने उसे मान्य करवाया| कांग्रेस में जो कमियां रह गई हैं, उसके लिए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बूथ पेज तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी| कांग्रेस कार्यकर्ता कई मोर्चों पर संघर्ष कर चुके हैं| आगामी 2027 की तैयारी के साथ ही अगले साल होनेवाले स्थानीय चुनावों की तैयारी अभी से शुरू कर देंगे|
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